Pandav Caves Pachmarhi - पचमढ़ी के पांडव गुफा की यात्रा

Information about Pandava Cave of Pachmarhi
पचमढ़ी के पांडव गुफा की जानकारी 


पांडव गुफा पचमढ़ी की एक खूबसूरत और धार्मिक जगह है। पांडव गुफा पचमढ़ी शहर का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। पचमढ़ी शहर का नाम पांच पांडव गुफा के नाम पर रखा गया है। यहां पर एक बहुत बड़ी चट्टान है। जिस पर गुफा बनाई गई है। यह पचमढ़ी शहर का एक खूबसूरत जगह है। यहां पर खूबसूरत गार्डन भी है, जिसमें आपको तरह तरह के फूल देखने मिलते हैं।

Pandav Caves Pachmarhi - पचमढ़ी के पांडव गुफा की यात्रा

Pandav Cave Garden 


पचमढ़ी के पांडव गुफा की स्थिति
Status of Pandav Cave of Pachmarhi


पचमढ़ी एक खूबसूरत हिल स्टेशन है। पचमढ़ी सतपुडा की पहाडियों में बसा है। पचमढ़ी को सतपुडा की रानी कहा जाता है। पचमढ़ी होशंगाबाद शहर में स्थित है। होशंगाबाद शहर मध्य प्रदेश का एक जिला है। पचमढ़ी में आप रेलगाडी के माध्यम से पहूॅच सकते है। पचमढ़ी मध्य प्रदेश का एकमात्र हिल स्टेशन है। पांडव गुफा पचमढ़ी में स्थित है। पांडव गुफा पचमढ़ी से करीब 2 या 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित होगी। आप यहां पर पैदल भी जा सकते हैं। बहुत से लोग जिप्सी या ऑटो से यहां आते है। 

यहां पर हम लोग बहुत पहले करीब 10 साल पहले पैदल ही आये थे। उस समय पचमढ़ी में इतनी गाड़ियां वगैरह नहीं चलती थी। उस टाइम पर यहां पर इतने ज्यादा टूरिस्ट लोग नहीं आते थे। अभी तो बहुत ज्यादा भीड़ रहती है। यहां पर उस टाइम पर हम लोग पांडव गुफा तक पैदल आ गए थे और अभी हम लोग गाड़ी से यहां पर घूमने गए थे। हम पाडंव गुफा अभी 2019 गए थें इस समय पचमढ़ी में बहुत बदलाव हो चुका है। यहां पर मै और मेरी मम्मी और हमारे साथ एक अंकल जो हम लोगों के साथ जिप्सी शेयरिंग किया था। हम लोग पांडव गुफा पहुॅचे यहां पर मेरी मम्मी गुफा के उपर नहीं चढी वहां नीचे खडी रही और मै अंकल हम दोनों इस गुफा के उपर चढकर पूरी गुफा  घूमें।  यहां पर मेरा अनुभव अच्छा रहा जो मै आपके साथ शेयर कर रही हूॅ। 

पांडव गुफा का विवरण
Description of Pandav Cave

पांडव गुफा पर एक बड़ी सी चट्टान है, ये गुफाए चटटानों को काटकर बनाई गई है। यह पर अब इन गुफाओं में ताला लगा दिया गया है, इन गुफाओं के जानें पर मनाही है, क्योंकि लोग इन गुफाओं को गंदा करते हैं। गुफा के अंदर ही बाथरूम वगैरह कर देते हैं। इसलिए गवर्नमेंट ने इन गुफाओं में ताला लगाया है। इन गुफाओं को देखने के लिए आपको इन गुफाओं तक पहुॅचना होगा उसके लिए इन चट्टान में सीढ़ियां बनाई गई है। चट्टान को तराश कर सीढ़ियां बनाई गई है। सीढ़ियों में रेलिंग लगाई गई है, ताकि कोई इन चट्टानों से गिरे ना। क्योंकि लोग बडे ही लपरवाह होते है। लोगों की लपरवाही के कारण यह बडी चटटान से गिर सकते है। इसलिए रेलिंग लगी है। इसके अलावा यह चटटान भी बहुत बडी है। आप इन गुफाओं को देखते है तो आपको बहुत    बढिया लगती है। 
पांडव गुफा एक छोटी से गुफा है जो खुली हुई है, जिसमें सरकार ने ताला नहीं लगाया है। मगर लोग उस गुफा में ही बाथरूम कर देते है। हम इन प्राचीन गुफा में इस तरह गंदा नहीं करना चहिए। इन गुफाओं को साफ रखना चहिए।

Pandav Caves Pachmarhi - पचमढ़ी के पांडव गुफा की यात्रा

Pandav Cave 

पांडव गुफा के सामने एक उद्यान स्थित है, जो बहुत खूबसूरत है। इस उद्यान में तरह तरह के फूल लगाए गए हैं। इस उद्यान की अच्छी तरह देखभाल की जाती है। इस उद्यान से होते हुए ही पांडव गुफा तक जाने का रास्ता है। यहां पर आकर आपको बहुत अच्छा लगता है। आप इस उद्यान में बैठकर अपना समय बिता सकते हैं।

इस उद्यान पर आप फोटो भी खिंचा सकते हैं। आपकी फोटो यहां पर बहुत अच्छी आती है। यह एक अच्छी लोकेशन है और यहां पर आप अपने परिवार और दोस्तों के साथ आकर खूब मजे कर सकते हैं।

पांडव गुफा के बारे में कहा जाता है कि इन गुफाओं को बौद्ध भिक्षुओं द्वारा  बनाया गया है। आपको इन गुफाओं की बनावट और रचना से देखकर इस बात की जानकारी मिल सकती है। इन गुफाओं का निर्माण 6 वीं से 10 वीं शताब्दी के मध्य किया गया होगा। पांडव गुफा में आपको स्तंभ देखने मिलेगें जिनमें खूबसूरती से उकेर कर डिजाइन बनाया गया है। 

पांडव गुफा की चोटी में आपको ईट की एक संरचना के अवशेष देखने मिल जाएगे। जो प्राचीन समय में यह पर बौध्द स्तूप होगा। इसके अलावा यहां बुद्ध भगवान की एक मूर्ति मिली थी जो अब भोपाल में है।

पांडव गुफाओं के बारे में कहा जाता है कि इन गुफाओं में प्राचीन समय में पांडव आए हुए थे। निष्कासन काल के दौरान पांडव यहां पर रहने आए थे। पांडव यहां पर काफी समय तक रहे थे। युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल, सहदेव, भीम पाॅच पांडव थे और उनकी पत्नी द्रौपदी थी। इसलिए इन गुफाओं को पांडव गुफा कहा जाने लगा। इन गुफाओं में अलग अलग कक्ष है, जिनमें पांडव रहते थे। यह पर कहा जाता है कि द्रोपदी के लिए अलग कक्ष था। यह कथ बडा और हवादार था। भीम के लिए जो कक्ष था वो गहरा था। 

यह घूमने के लिए एक अच्छी जगह है। आप यहां पर मार्च के पहले आयेगे तो अच्छा होगा। वैसे पचमढ़ी में गर्मी में भी लोग आते है। आप यहां पर गर्मी में आते है तो आपको यह पर जरूर परेशानी हो सकती है, क्योकि यह पर पहाडी पर किसी भी प्रकार की छाया की व्यवस्था नहीं है। गार्डन में आने वाले रास्ते में शेड लगाया गया है। 

पांडव गुफा के गार्डन के बाहर आपको बहुत सारी रोमाचक गतिविधि करने मिल जाती है। यह छोटी बाइक की सवारी करने मिल जाती है, जो बच्चों के लिए होती है। बच्चे यहां पर एंजाय कर सकते है। इसके अलावा यह पर आपको बहुत सारी फास्ट फुड की दुकानें मिल जाएगी। जहां से आप मैंगी या और कुछ फास्ट फुड आर्डर कर सकते है। यहां पर आपको घोडे भी देखने मिल जाएगे। यहां पर घुडसवारी का आंनद भी ले सकते है। 

पांडव गुफा फोटोग्राफी के लिए एक अच्छी जगह है। आप पांडव गुफा के ऊपर से पचमढ़ी का पूरा दृश्य देखा जा सकता है। पांडव गुफा अच्छी तरह से प्रबंधित पर्यटक स्थल है। गार्डन का रखरखाव ठीक से किया जाता है। यह जगह काफी आकर्षण लगती है। यह एक शांतिपूर्ण जगह है। 

हमारा इस जगह का अनुभव बहुत अच्छा रहा है और आप इस जगह आ सकते है। यह पचमढ़ी के बहुत ही पास ही में स्थित है। आप यहां पर असानी से पहुॅच सकते है। आप अगर पैदल आना चाहते है तो इस जगह आ सकते है। अगर आप यहां साइकिल से आने चाहते है, तो आ सकते है। साइकिल से  पचमढ़ी का सफर बहुत बढिया होता है। यह पर गर्मी के मौसम में भी 30 से 35 डिग्री तापमान रहता है। इसलिए लोग यहां पर गर्मी में भी आते है। 

Rajendragiri Sunset Point, Pachmarhi - राजेंद्रगिरी सनसेट पॉइंट, पचमढ़ी

पचमढ़ी का खूबसूरत सनसेट पॉइंट राजेंद्र गिरी

Pachmarhi's Beautiful Sunset Point Rajendra Giri


राजेंद्र गिरी एक बहुत खूबसूरत जगह है। राजेंद्र गिरी से आपको सूर्य अस्त का बहुत ही खूबसूरत व्यू देखने मिलता है। राजेंद्र गिरी से आपको खूबसूरत वादियां देखने मिलती है, जो बहुत मनमोहक रहती हैं। 

आपको राजेंद्र गिरी में बहुत मजा आता है। राजेंद्र गिरी पचमढ़ी में स्थित एक खूबसूरत व्यूप्वाइंट है। पचमढ़ी मध्य प्रदेश का एकमात्र हिल स्टेशन है। पचमढ़ी होशंगाबाद शहर में स्थित है। पचमढ़ी पहुंचने के लिए आपको पिपरिया पहुंचना पड़ता है। पिपरिया से आपको बस या जिप्सी के माध्यम से आप यहां पचमढ़ी तक पहुंच सकते हैं। 

Rajendragiri Sunset Point, Pachmarhi - राजेंद्रगिरी सनसेट पॉइंट, पचमढ़ी

Rajendragiri Sunset View 

Rajendragiri Sunset Point, Pachmarhi - राजेंद्रगिरी सनसेट पॉइंट, पचमढ़ी


Rajendragiri Sunset View 

पचमढ़ी में राजेंद्र गिरी कहां स्थित है

Where is Rajendra Giri located in Pachmarhi.


पचमढ़ी पहुंचने के बाद आप राजेंद्र गिरी तक जिप्सी के द्वारा पहूॅच सकते है। आपको राजेंद्र गिरी जिप्सी बुक करके ही जाना पड़ता है। राजेंद्र गिरी जाने वाली सडक में आपको बहुत सारे व्यू पांइट देखने मिल जाते है। जिप्सी वाला आपको एक लाइन से इन सारे व्यू पांइट में घूमता हुआ राजेंद्र गिरी लेकर जाता है। सबसे पहले जिप्सी वाला आपको पांडव गुफा पहले लेकर जाता है उसके बाद हांडी खो को, उसके बाद प्रियदर्शनी, और उसके बाद बड़ा महादेव मंदिर और गुप्त महादेव मंदिर लेकर जाता है। उसके बाद आपका राजेंद्र गिरी लेकर जाता है। राजेंद्र गिरी सबसे लास्ट में है। ये सभी दर्शनीय स्थल एक ही रूट में आपको मिल जाते है। जिप्सी वाला इन जगह पर घुमाते हुए आराम से राजेंद्र गिरी लेकर जा सकता है। गाडी को पर्किग में खडा कर दिया जाता है, उसके बाद आप यह के चारों तरफ का व्यू देख सकते है। यह पर बहुत सारे लोग अपने शाम का समय बिताने आते है, क्योकि यह पर शाम का नजारा बहुत ही शानदार होता है। 

राजेंद्र गिरी में स्थित पार्क

Park located in Rajendra Giri


राजेंद्र गिरी में एक पार्क स्थित है। इस पार्क में प्रवेश का किसी भी तरह का चार्ज नहीं है। यह पर आप पूरा पार्क देख सकते है। वैसे यह पार्क छोटा सा ही है। आप इस पार्क से पचमढ़ी का खूबसूरत व्यू देख सकते है। यह पर खूबसूरत पहाडियों का व्यू अनोखा होता है। यह पर लोग अपना अच्छा समय बिताते है। इस पार्क के अंदर से सूर्यास्त का व्यू बहुत ही शानदार होता है। यह गार्डन बहुत खूबसूरत है और इस जगह पर सफाई का बहुत ज्यादा ध्यान दिया जाता है। 

राजेंद्र गिरी का नाम देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद के नाम पर रखा गया है। राजेंद्र गिरी में डॉ राजेंद्र प्रसाद जी की एक मूर्ति भी स्थापित की गई है। यह पर एक वट वृक्ष लगा हुआ है। यह पर एक बोर्ड पर लिखा हुआ है कि इस वट वृक्ष को डॉ राजेंद्र प्रसाद द्वारा लगाया गया था। 1953 में डा राजेंद्र प्रसाद ने यह वट वृक्ष लगाया था। जिसे अभी तक संरक्षित करके रखा गया है। 

राजेंद्र गिरी में पार्क के अंदर कुछ लोग टेलिस्कोप लिया होते है। जो आपको 10 रू चार्ज करते है। आप टेलिस्कोप के माध्यम से राजेंद्र गिरी की सुंदर वदियों का आंनद ले सकते है। टेलिस्कोप के द्वारा आपको बहुत ही बढिया व्यू देखने मिलता है। टेलिस्कोप की मदद से आप चैरागढ की पहाडियों और मंदिर भी देख सकते है। वैसे हम लोगों ने टेलिस्कोप का प्रयोग नहीं किया था। आप करना चाहे तो कर सकते है। 

Rajendragiri Sunset Point, Pachmarhi - राजेंद्रगिरी सनसेट पॉइंट, पचमढ़ी


Statue of Dr. Rajendra Prasad  

Rajendragiri Sunset Point, Pachmarhi - राजेंद्रगिरी सनसेट पॉइंट, पचमढ़ी

Inside view of Rajendra Giri Garden 

राजेंद्र गिरी में स्थित फास्ट फूड की शॉप

Fast food shop located in Rajendra Giri.


राजेंद्र गिरी गार्डन के बाहर आपको बहुत सारी खाने-पीने की दुकानें देखने मिल जाती है। आपको यह पर ही लोगों बैठ हुए देखने मिलते है। सबसे ज्यादा यहीं पर भीड रहती है। यह पर आपको हर तरह का फास्ट फुड मिल जाता है। यह का फेवरेट फास्ट फूड मैंगी है। मैंगी यह पर आराम से मिल जाती है और मैंगी में अलग अलग वैरायटी मिल जाती है। यह पर मैंगी 30 या 40 रू की मिलती है एक प्लेट। 10 रू वाली मैंगी 30 या 40 रू मिल जाती है। इसके अलावा यह पर चाय भी मिल जाती है। यह पर बहुत ज्यादा भीड रहती है। यह पर खाने का सामान और चाय वगैरह का रेट बहुत ज्यादा है। हम लोगों ने तो यह पर चाय बस आर्डर किया था। वह शायद हम लोगों को 10 रू की मिल थी। उसके अलावा जो खाने का सामान है, वह भी बहुत ज्यादा महंगा मिलता है। पानी की बोतल की बहुत ज्यादा महंगी है तो आपकी मर्जी आप यहां जाकर कुछ खाना पीना चाहते हैं, तो खा सकते है। मगर हमारी हिम्मत ही नहीं हुई की हम लोग कुछ ना आर्डर कर सकें यहां पर। 

राजेंद्र गिरी में घुड़सवारी

Riding in Rajendra Giri


राजेंद्र गिरी में आपको अगर घुडसवारी करने का शौक है, तो यह पर आपको घोडे भी मिल जाते है। राजेंद्र गिरी गार्डन के बाहर आपको घोडे देखने मिल जाते है, जिनमें आप घुडसवारी कर सकते है। यह पर हम लोगों ने घुडसवारी का पता नहीं किया था। मगर आप चाहे तो कर सकते 100 रू के अंदर ही आपको यहां पर चार्ज किया जा सकता है। 

राजेंद्रगिरि एक सुंदर सूर्यास्त व्यू पांइट है। यह पर आकर आपको बहुत ही शांति मिलती है। यह पर आकर आपको बहुत अच्छा लगता है। यह पर आप अपने दोस्तों और परिवार के साथ आ सकते है। यह पर आपको सूर्यास्त का बहुत ही मनोरम व्यू रहता है। राजेंद्रगिरि से आपको सतपुडा की सुंदर पहाडियों देखने मिलती है। राजेंद्र गिरी में आपको पार्क में बैठने की जगह है, जहां पर आप बैठकर अच्छी तरह बिता सकते है। यहां पर बहुत शांति है। यहां पर बैठने की व्यवस्था है। इसके अलावा यह पर पीने के पानी की व्यवस्था भी है। यहां पर आपको वाशरूम की सुविधा गार्डन में नहीं देखने मिली। 

Rajendragiri Sunset Point, Pachmarhi - राजेंद्रगिरी सनसेट पॉइंट, पचमढ़ी


Beautiful view of Rajendra Giri 

राजेंद्र गिरी तक पहुंचने के लिए माध्यम

Medium to reach Rajendra Giri


आपको यह पर किसी भी तरह की चलने की जरूरत नहीं होती है। पर्किग स्थल से यह जगह बहुत ही पास हीं में है। यह पर पार्किग की लिए भी अच्छी जगह मिल जाती है। यह पर आप चाहे तो जिप्सी के अलावा यह पर साइकिल और बाइक से भी जा सकते है। पचमढ़ी से आपको साइकिल और बाइक किराए से मिल जाती है। जिनका किराया बहुत कम होता है। यह पर साइकिल से आने पर आपको बहुत अच्छा लगता है। आप अपने वाहन से आते है तो आप कहीं भी अपनी गाडी रोककर अच्छा व्यू देख सकते है। यह पर आपके वाहन का कुछ चार्ज लगता है। 

राजेंद्रगिरि में घूमने का मेरा अनुभव बहुत अच्छा रहा था। यह पर आपको बहुत बढिया लगता है। मै यहां पर अपनी मम्मी के साथ गई थी। मम्मी और मैनें यहां पर कुछ समय भी बिताया, जो बहुत अच्छा लगा।

चौरागढ़ मंदिर पचमढ़ी
प्रियदर्शनी पॉइंट पचमढ़ी

Handi Kho Pachmarhi, Madhya Pradesh - हांडी खो, पचमढ़ी

 पचमढ़ी का खूबसूरत व्यू पांइट हांडी खो

Pachmarhi Beautiful View Point Handi Kho


हांडी खो  पचमढ़ी में प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है। यहां पर एक घाटी का अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है। हांडी खो  एक खूबसूरत घाटी जो हरे भरे पेड से भरी हुई है। हांडी खो में करीब 300 फुट गहरी खाई है। यह घाटी आगे जाकर हांडी का शेप बनाती है जो देखने में खूबसूरत लगता है। 

Handi Kho Pachmarhi, Madhya Pradesh -  हांडी खो, पचमढ़ी

Handi Kho view


हांडी खो की स्थिाति


Handi Kho Position


यह खूबसूरत घाटी पचमढ़ी में स्थित है। यहां पर आपको प्राकृतिक खूबसूरती देखने मिल जाती है। यह खूबसूरत घाटी महादेव मंदिर जाने वाली रोड में पडती है। यहां पर पहुॅचने के लिए आपको जिप्सी मिल जाती है। हांडी खो पचमढ़ी नगर से 3 से 4 किमी की दूरी पर स्थित है। यह पर आप जिप्सी के अलावा साइकिल से भी जा सकते है। पचमढ़ी में आपको रेन्ट में साइकिल मिल जाती है जिससे आप हांडी खो असानी से पहूॅच सकते है और पचमढ़ी में साइकिल का सफर बहुत ही मजेदार होता है। पचमढ़ी का मौसम बहुत ही बढिया होता है। यहां पर आप पचमढ़ी के अन्य दर्शनीय जगह पर साइकिल के माध्यम से पहॅुच सकते है। आपको यह पर एक खाई देखने मिलती है, जो 300 फीट गहरी खाई है। यह पर जो खाई है, वह आगे जाने पर हांडी का शेप ले लेती है जो बहुत अच्छा दिखता है। यह पूरी तरह प्राकृतिक है और यहां पर आसानी से आ सकते हैं। आप जिप्सी से आसानी से आ सकते हैं। 

हांडी खो जाने का रास्ता और माध्यम


Handi Kho Track 


पचमढ़ी एक खूबसूरत हिल स्टेशन है। पचमढ़ी होशंगाबाद में स्थित है।  यहां पर गर्मियों में बहुत ज्यादा भीड़ रहती है। पचमढ़ी आने के लिए आपको पहले पिपरिया आना होता है। उसके बाद आप पिपरिया से बस या जिप्सी के  द्वारा आसानी पचमढ़ी पहूॅच सकते है। पचमढ़ी आने तक का किराया 60 रू होता है। पचमढ़ी में उतर कर इस जगह पर जिप्सी के माध्यम से आसानी से जा सकते हैं। यह जाने के किराया 300 से 400 रू लगता है। आप शेयरिंग में जाते है तो 300 से 400 रू लगता है और अगर पर्सनल जिप्सी बुक करते है तो आपका ज्यादा किराया लग सकता है, ये किराया सीजन पर डिपेंड करता है, कि किस सीजन में सबसे ज्यादा भीड़ रहती है। उस सीजन में ज्यादा किराया लगता है।

हम लोगों ने भी जिप्सी बुक किया था। हम दो लोगों थे और हम लोग के साथ एक अंकल जी थे। तो हम लोग शेयरिंग में थे। हमारा 1 व्यक्ति का किराया 400 रू लगा था। 400 रू में जिप्सी वाले ने हम लोगों को पचमढ़ी के 10 से भी ज्यादा दर्शनीय स्थल घुमाया गया था। सबसे पहले हम लोग पांडव गुफा गए थे। उसके बाद हांडी खो, उसके बाद प्रियदर्शनी, उसके बाद बड़ा महादेव मंदिर और गुप्त महादेव मंदिर, उसके बाद राजेंद्र गिरी और राजेंद्र गिरी के बाद हम लोग सूर्य नमस्कार पार्क गए थे। जो मध्य प्रदेश का पहला सूर्य नमस्कार पार्क है। उसके बाद हम लोग जटाशंकर मंदिर गए थे।

Handi Kho Pachmarhi, Madhya Pradesh -  हांडी खो, पचमढ़ी

Handi Kho View 

Handi Kho Pachmarhi, Madhya Pradesh -  हांडी खो, पचमढ़ी

Handi Kho View 

हांडी खो की जानकारी


Handi Kho Information


हम लोग हांडी खो पहुंचे तो यहां पर पर्किग पास में ही थे। हम लोगों को ज्यादा दूर चलना नहीं पड़ था। पर्किग स्थल से 100 मीटर पैदल चलना पड होगा। आपको दूर से ही यह खूबसूरत घाटी दिखने लगता है। यहां पर घाटी बहुत गहरी है। करीब 300 फीट गहरी है। कहा जाता है कि यहां पर हांडी नाम के एक अंग्रेज व्यक्ति थे। जिनकी मृत्यु इस घाटी में गिरकर हो गई थी इसलिए इस घाटी नाम हांडी खो रखा गया। इसके अलावा इस जगह के बारे में एक धार्मिक कथा भी कहीं जाती है कि शंकर भगवान ने एक तक्षक नाम के नाग को मारकर इस घाटी में फेंका था। इसलिए यह घाटी हांडी खो कहलाती है। यह पचमढ़ी शहर की खूबसूरत जगह है। यह पर अपनी फैमिली और दोस्तों के साथ आया जा सकता है। 

यह पर चारों तरफ हरियाली रहती है और जो घाटी है। वह बहुत ही मस्त है। यहां पर आपको बहुत सारी दुकानें भी मिल जाती है। जहां पर आपको खाने पीने के लिए सामान मिल जाता है। मगर यह पर बहुत महंगा रहता है। अगर आप यहां पर आते हैं, तो अपने साथ खाने पीने का सामान और पानी की बोतल जरूर लाएं। क्योकि यह पर मिलने वाला सामान मंहगा होता है। अगर आप लेना चाहे तो ले सकते हैं। परन्तु मेरे हिसाब से तो यह मंहगा बहुत है। 

आप घोड़े की सवारी यहां पर कर सकते हैं, वैसे यह चार्ज ज्यादा नहीं है। आप दो या तीन राउंड घोडे की सवारी कर सकते है।  इस जगह की जो खूबसूरती है वह लाजवाब है इस जगह में दो पहाड़ियां हैं उनके बीच से गहरी खाई है जो करीब 300 फीट गहरी है। 

यहां पर घुड़सवारी का भी चार्ज आपको 80 रू लगा था। आप करना चाहे तो वह भी कर सकते हैं। यह भी एक अच्छा एक्सपीरियंस रहता है। मगर हम लोगों ने घोड़े की सवारी नहीं किया था। यहां पर आप आते हैं तो आपको बहुत संदर घाटी देखने मिलती है। यह घाटी पूरी तरह से प्राकृतिक है। यह घाटी हांडी का शेप ले लेती है, जो देखने में जबरदस्त होता है। 

Handi Kho Pachmarhi, Madhya Pradesh -  हांडी खो, पचमढ़ी

Handi Kho view



आप यहां पर कुछ टाइम बिता कर मजा ले सकते हैं। यहां पर आप अपने फैमिली वालों के साथ आ सकते हैं और अपने दोस्तों के साथ भी आकर यहां पर खूब इंजॉय कर सकते हैं। आप इस जगह के बारे में अपने जिप्सी ड्राइवर से इंफॉर्मेशन ले सकते हैं। आपका जिप्सी ड्राइवर इस जगह के बारे में आपको इंफॉर्मेशन दे सकता है। आपको वैसे गाइड लाने की आवश्यकता नहीं है। अगर आप इस जगह के बारें मे ज्यादा जानकारी जानना चाहते है, तो एक गाइड  ले सकते है, जो आपको पचमढ़ी और अन्य जगह की अच्छी जानकारी दे पायेगा। 

हम लोग पचमढ़ी मई के महीने में गए थे। यहां पर मई के महीने में आपको आइसक्रीम और जूस की दुकानें देखने मिल जाएंगी। यहां पर बहुत साफ सुथरा है। यहां पर बोर्ड भी लगा हुआ है कि आप इस जगह पर किसी भी तरह का कचरा ना फैलाए और यहां पर डस्टबिन रखा हुआ है। जहां पर आप अगर कुछ भी लाते हैं। खाने पीने का सामान तो आपका जो भी कचरा निकलता है आप डस्टबिन में डाल सकते हैं। यह घाटी बहुत खूबसूरत है जैसा कि पहले ही मैंने आपको बता चुकी हूं। आप यहां पर आकर बहुत अच्छा अपना टाइम बिता सकते हैं। शांति से बैठ सकते हैं। यहां पर किसी भी तरह का शोर-शराबा आपको नहीं मिलेगा। यहां पर चिड़िया चहकती रहती है और बहुत शांति है । इस जगह भीड़ बनी रहती है क्योंकि बहुत सारे लोग आते हैं। गर्मी के सीजन यहां पर तो यहां पर भीड़भाड़ रहती है। यहां पर जब हम लोग गए थे।   

यह पर जब हम लोग गए थे। तब यह पर जिओ का नेटवर्क काम नहीं करता था। मगर अब यहां पर जियो का नेटवर्क कुछ जगहों पर मिल जाता है। जिओ नंबर से फोन आप कर सकते हैं और फोन लग जाते हैं। पहले यहां पर बीएसएनएल का नेटवर्क ही काम करता था । यह पर बीएसएनएल की सिम आराम से चल जाती है। मगर अब यहां पर जियो और एयरटेल चल जाते हैं उसके अलावा यहां पर आपको बहुत अच्छी सुविधाएं मिल जाती हैं

आपको यह पर प्रकृति द्वारा बनाई गई विशिष्ट प्रकार की हांडी की संरचना देखने मिलती है। यह शांतिप्रिय जगह है यह पर घुड़सवारी का आंनद लिया जा सकता है। आप इस स्थान पर दिन के किसी भी समय और किसी भी परिवार, दोस्तों, जोड़े, रिश्तेदारों के साथ जा सकते हैं।

चौरागढ़ महादेव मंदिर, पचमढ़ी
प्रियदर्शनी प्वाइंट, पचमढ़ी

बड़ा महादेव मंदिर -- पचमढ़ी की खूबसूरत वादियों में स्थित भोलेनाथ का मंदिर

बड़ा महादेव मंदिर पचमढ़ी 


पचमढ़ी में बहुत सारी खूबसूरत जगह, इन खूबसूरत में जगह में से एक जगह है बड़ा महादेव और गुप्त महादेव। बड़ा महादेव मंदिर और गुप्त महादेव एक धार्मिक जगह है और पूरी तरह से प्राकृतिक रूप से बने हुआ है। यह मंदिर प्राकृतिक वातावरण के बीच में स्थित है। इन दोनों मंदिर में गुफाएॅ है, जिनमें शंकर जी का शिवलिंग स्थापित है। 

बड़ा महादेव मंदिर -- पचमढ़ी की खूबसूरत वादियों में स्थित भोलेनाथ का मंदिर

बड़ा महादेव मंदिर की स्थिति एवं पहुॅचने का रास्ता


बड़ा महादेव एवं गुप्त महादेव मंदिर पचमढ़ी में स्थित है। यह मंदिर पचमढ़ी से 10 से 11 किलोमीटर दूर होगें। बड़ा महादेव एवं गुप्त महादेव मंदिर पहुंचने के लिए आपको पचमढ़ी पहुंचना पड़ेगा। पचमढ़ी मध्य प्रदेश का एक बहुत खूबसूरत हिल स्टेशन है। यह हिल स्टेशन होशंगाबाद जिले में स्थित है। होशंगाबाद मध्य प्रदेश का एक जिला है। पचमढ़ी पहुंचने का सबसे अच्छा माध्यम ट्रेन का है। आप ट्रेन से आसानी से पचमढ़ी पहुंच सकते हैं। आपको ट्रेन के माध्यम से पहले पिपरिया आना होता है फिर उसके बाद पिपरिया से पचमढ़ी तक कर सफर बस के द्वारा किया जाता है। पिपरिया से पचमढ़ी के रास्ते में आपको बहुत ही खूबसूरत नजारा देखने मिलता है। सर्पाकार सडक से आपकी बस जाती है जिसमें चलकर आपको मजा आता है। आपको बस से ही पचमढ़ी के प्रकृति सुंदरता देखने मिलती है। यहां पर आपको ऊंचे ऊंचे पहाड़ और खूबसूरत घाटियां देखने भी मिलती है यहां पर आपको देनवा नदी का मनोरम दृश्य देखने मिलता है। इस तरह खूबसूरत व्यू का देखते हुए आप पचमढ़ी पहुॅच जाते है। 

बड़ा महादेव मंदिर पहुॅचने के लिए जिप्सी बुंकिग


पचमढ़ी पहुॅचकर आपको महादेव मंदिर जाने के लिए गाडी बुक कराना होता है। पचमढ़ी में आपको जिप्सी में सफर करना होता है। अगर आप पर्सनल जिप्सी बुक करते है तो जिप्सी का किराया 1000 रू से उपर ही होता है। अगर आप लोग किसी के साथ जिप्सी शेयर करते है तो आपका किराया 300 या 400 रू हो सकता है। जिप्सी वाला आपको पचमढ़ी के बडा महादेव मंदिर के रूट में जो भी मंदिर या व्यू प्वांइट पडते है वो घूमता हुआ। आपको बडा महादेव मंदिर लेकर जाता है। आप अगर मेले के समय में यहां आते हैं, तो बडा महादेव मंदिर जाने का किराया कम लगता है। मेले के समय 30 या 40 रू में आपको बडा महादेव मंदिर में छोडा दिया जाता है। मगर ऐसे आम दिनों में किराया ज्यादा लगता है। एक व्यक्ति का 300 से 400 रू किराया लगेगा।

बड़ा महादेव मंदिर पहुॅचाने वाला रास्ता


आप 300 या 400 रू किराया देकर इस जगह पर पहुंच जाते हैं। बड़ा महादेव पहुंच जाते हैं। बड़ा महादेव के रास्ते में आपको बहुत सारे व्यूप्वाइंट देखने मिल जाते हैं, जैसे आपको इस रास्ते में पांडव गुफा देखने मिल जाएगी। प्रियदर्शनी पॉइंट देखने मिल जाएगा। हांडी को देखने मिल जाएगा, उसके बाद आप बड़ा महादेव मंदिर पहुॅचते है। बडा महादेव मंदिर पहुॅचने का जो रास्ता है वहां थोडा खतरानाक है। यह पर बहुत सारे ऐक्सीडेन्ट होते रहते है। आपको यहां पहुंचकर जिप्सी से उतरना होता है। उसके बाद आप पैदल यात्रा द्वारा इस मंदिर तक जा सकते हैं। मंदिर जाने वाले रास्ते में आपको बहुत सारे बंदर   देखने मिलते है जो बहुत शैतान होते है। आपके हाथ में उनको कोई भी चीज दिखती है तो वह छीन कर ले जाते है। इसलिए यह पर आपको अपना सामान और पर्स वगैरह संभालकर रखने की जरूरत होती है। मंदिर जाने वाले रास्ते में आपको बहुत दुकानें देखने मिलती है जहां पर प्रसाद मिलता है। शिव भगवान को अर्पण करने के लिए । यह का वातावरण बहुत अच्छा है।


बड़ा महादेव मंदिर -- पचमढ़ी की खूबसूरत वादियों में स्थित भोलेनाथ का मंदिर



बड़ा महादेव मंदिर -- पचमढ़ी की खूबसूरत वादियों में स्थित भोलेनाथ का मंदिर

बड़ा महादेव मंदिर -- पचमढ़ी की खूबसूरत वादियों में स्थित भोलेनाथ का मंदिर

लोगों द्वारा कहीं जाने वाली कथा


इस गुफा के बारे में लोगों का कहना है कि शंकर जी भस्मासुर से बचने के लिए इस गुफा में छुपे थे। भस्मासुर नाम का एक राक्षस था। उस राक्षस का वरदान प्राप्त था कि वह जिस किसी के उपर हाथ रखेगा तो वह भस्म हो जायेगा। भस्मासुर शंकर जी को भस्म करने लगा और शंकर जी को भस्मासुर से बचने के लिए यहां वहां छुपाना पडा। शंकर जी ने इस गुफा में भी शरण लिया था। यह कथा यह पर प्रचलित है।

नर्मदा गौ कुंभ, जबलपुरचौरागढ़ महादेव मंदिर, पचमढ़ी

बड़ा महादेव मंदिर का विवरण


यह मंदिर में एक गुफा है, जो बहुत ही खूबसूरत है और यह पहाड़ी पर बनी  है। यहां गुफा पहाडी पर बनाई गई है। इस गुफा के अंदर आपको एक जलकुंड देखने मिलेगा। इस कुंड में पानी भर रहता है। इस गुफा में साल भर पानी रिसता रहता है और आप यहां जाते हैं तो यह पर गीला ही रहता है। पूरी गुफा गीली रहती है आप अपनी चप्पल उतारकर गुफा में प्रवेश कर सकते हैं। मंदिर के पास ही में आपको दुकानें मिल जाएगी जहां से आप प्रसाद लेकर गुफा में शंकर जी पर अर्पण कर सकते हैं। यहां पर आप गुफा में जाते हैं तो आपको शंकर जी का शिवलिंग देखने मिलता है उसके साथ ही साथ गणेश जी देखने मिलते हैं। गुफा के द्वार में नंदी भगवान की प्रतिम बैठी हुई है जो पत्थर की बनी हुई है। आप गुफा में शंकर जी के दर्शन करके वापस आते हैं तो आपको नंदी भगवान जी देखने मिलते हैं। आप गुफा मंदिर से बाहर आ जाते है तो आपको यह पर मंदिर के बाहर आप आगे बढ़ते हैं, तो आपको एक कुंड देखने मिलेगा। जहां पर पानी भर रहता है। यह पानी पहाड़ों से आता है और इकट्ठा होता है। उसके बाद यह पानी जंगल की ओर बढा जाता है। आप आगे बढ़ते हैं, तो आपको एक छोटी सी गुफा देखने मिलेगी जिसमें और शंकर जी की शिवलिंग के साथ साथ अन्य देवी देवता विराजमान है। यहां पर आप पूजा कर सकते हैं। यहां पर आपको बहुत ढेर सारे बंदर है, जिनसे आपको बच के रहना पड़ेगा, जो आपका सामान छीन कर भाग सकते हैं। खासतौर पर खाने का सामान आपसे छीन सकते हैं। आपको यहां पर पहाडों का खूबसूरत व्यू देखने मिलता है। आप यह पर आगे बढते है तो हनुमान जी का छोटा सा मंदिर देखने मिलता है। 
यहां पर जो पहाड़ी है। उसका व्यू बहुत ज्यादा खूबसूरत है। यहां का एरिया पूरा जंगल का एरिया है। आप अगर गर्मी के टाइम में यहां आते है तो आपको यहां पर ढेर सारे आम के पेड़ देखने मिल जाते हैं, और उसमें आम लगे भी रहते हैं। यहां सभी प्रकार की व्यवस्थाएं हैं। आपके लिए पीने का पानी एवं शौचालय की अच्छी व्यवस्था है। 



बड़ा महादेव मंदिर -- पचमढ़ी की खूबसूरत वादियों में स्थित भोलेनाथ का मंदिर

गुप्त महादेव मंदिर का विवरण


आप यहां से आगे बढते है तो यह पर आपको जो रास्ता मिलेगा। वह पूरा तरह से कच्चा रास्ता है। इसके बाद आप आगे जाएंगे तो आपको गुप्त महादेव गुफा देखने मिल जाएंगे। यह गुफा बड़ा महादेव से एक या डेढ़ किलोमीटर आगे जाते हैं, गुप्त महादेव में भी एक संकरी गुफा है। इस गुफा में एक बार में 8 से 9 ही लोग जा सकते हैं। यहां पर हनुमान जी की बहुत बड़ी प्रतिमा है और यहां पर लोगों को अक्सर लाइन लगाकर गुफा के अंदर जाना पडता है। गुफा के अंदर शिवलिंग स्थपित है। आपको गुप्त महादेव गुफा के बाहर भी बहुत खूबसूरत नजारा देखने मिलता है। यह पर आपको बहुत अच्छा लगता है पूरी तरह से प्राकृतिक माहौल में आके। 
यह जगह बहुत खूबसूरत है और आपको यहां पर बहुत खूबसूरत व्यू देखने मिलता है। इसके आगे आप जाते हैं तो आपको चैरागढ़ मंदिर पहुंच सकते हैं। जिसका ब्लाॅग पोस्ट आपको मेरी वेवसाईट में मिल जाएगा।

ग्वारीघाट, जबलपुर
कचनार सिटी, जबलपुर
आदेगांव का किला एवं काल भैरव जी का मंदिर



Nagdwar Yatra (Pachmarhi) - नागद्वार की रोमांचक यात्रा

नागद्वार (पचमढ़ी) की यात्रा की सम्पूर्ण जानकारी



आप नागद्वार की पैदल यात्रा करके कालाझाड या भजियागिरी पहुॅचा जाते है। काला झाड़ में आपको बहुत सारी दुकानें देखने मिल जाती है और पानी पीने के लिए भी आपको यहां सुविधा मिल जाती हैं। यहां पर आपको दो रास्ते मिलते हैं। आप दोनों में से कोई भी रास्ता चूस करके आगे बढ़ सकते हैं, दोनों रास्तों से ही आपको नाग देवता के और अन्य देवी-देवताओं के मंदिरों के दर्शन करने मिल जाएंगे। हम लोगों ने काला झाड़ में थोड़ा सा रेस्ट किया  उसके बाद आगे बढ़े यहां पर आपको बहुत ज्यादा चलना पड़ता है, और यहां पर पहाड़ियों का व्यू बहुत ही अच्छा लगता है और जो रास्ता है, वो बहुत खतरानाक है।



Nagdwar Yatra (Pachmarhi) - नागद्वार की रोमांचक यात्रा



Nagdwar Yatra (Pachmarhi) - नागद्वार की रोमांचक यात्रा




नागद्वार के खतरनाक रास्तें

आपको नागद्वार यात्रा में कहीं पर ढलान वाला रास्ता मिलता है तो कहीं पर  चढ़ाई वाला रास्ता मिलता है। कहीं पर आपको उबाड खाबड रोड मिलती है तो कहीं कहीं पर उची चट्टानें मिलती है। आपको यहां पर हरियाली भरे जंगल मिलते हैं, और बरसात में पानी भी गिरता रहता है। आपको नागद्वार यात्रा में ऐसी रोड मिलती है जो बहुत ही पतली होती है और रोड के बाजू से गहरी खाई होती है। अगर आपका एक गलत कदम हुआ तो आप डायरेक्ट नीचे जा सकते हैं और पता नहीं कहां जाएंगे इसका कोई अंदाजा नहीं है, इसलिए आपको यहां पर संभलकर चलने की जरूरत होती है।

आपको कहीं पर कहीं पर लगता है कि आप नीचे की तरफ जाते जा रहे है मतलब पूरा खाई वाला रास्ता रहता है और इस रास्ते में बडे बडे पत्थर अडी ढेडी रोड मिलती है। आपकी हालत बहुत ज्यादा डाउन हो जाती है, चलते चलते। मगर आपको यह पर जो व्यू देखने मिलता वो स्वर्ग से कम नहीं होता है। नागद्वार में आपको चलते रहना चहिए इससे आप रात के सही समय पर लौटे सकते है। अगर आप को यह पर रात हो जाती है तो आप मंदिर में रूक सकते है और यहां पर बहुत सी दुकानें होती है जहां पर आप रूक सकते है। आप नागद्वार जाते है तो जूते का प्रयोग करें और यदि चप्पल का प्रयोग करते है तो मजबूत चप्पल पहनें। क्योकि यह के रास्ते में आपके चप्पल टूटा जाती है।

आपको यहां पर किसी प्रकार की सुविधा नहीं मिलती है। मंदिरों में या मंदिर के आसपास आपको रहने और खाने पीने के लिए सुविधा मिल जाती है। अगर आप यहां पर चलते रहेगें तो आपकी यात्रा एक ही दिन में पूरी हो जाएगी।

नागद्वार में आपको जंगल की खूबसूरत पहाड़ियां, घाटियां, और नदियां देखने मिलेगी। यह पर जगह जगह पर झरने आपको देखने मिल जाते है क्योकि बरसात का सीजन होता है और पानी बरसात रहता है तो पहाडों से झरने बहते रहते है। कहीं कहीं पर विशाल पर्वत श्रृंखला आपको देखने मिलती है। पहाडों का अदुभ्त दृश्य होता है, वह भी बहुत मस्त रहती हैं एक अलग ही अनुभव रहता है, इस जगह का। क्योंकि यहां पर मानवीय क्रियाकलाप बस इन दस दिन के लिए ही होता है। यह पूरी तरह से जंगल है और एक अलग एडवेंचरस हमे यहां मिलता है।

नागद्वार का मेला

हम लोगों ने पैदल चलकर मेले तक पहुंच गए थे। यहां जंगल में छोटा सा मेला भरता है और अगर आप नाग पंचमी के 10 दिन पहले जाते हैं तो आपको यह मेला देखने मिलता है। अगर आप नागपंचमी के दिन जाएंगे तो यह मेला खत्म हो जाता है। कुछ ही दुकानें यहां पर आपको देखने के लिए मिलती हैं और बहुत से लोग अपना दुकानें लेकर जाने लगते हैं । यहां पर आपको भंडारा भी मिल जाता है और पीने के लिए पानी भी मिल जाता है यहां पर रुकने की व्यवस्था भी होती है मगर अभी भी मंदिर बहुत दूर होता है। मेले में आपको एक बरसाती नाला देखने मिलता है, आप इससे आगे जाते है तो आपको भोले बाबा का छोटा सा मंदिर देखने मिलता है और यह से आपको विशाल पहाडा का मनोरम व्यू भी देखने मिलता है। बहुत से लोगों को यह मन्नत माॅग कर आते है और पहाडी में साष्टांग प्रणाम करते हूए चलते है।

Nagdwar Yatra (Pachmarhi) - नागद्वार की रोमांचक यात्रा

पद्मशेष मंदिर


नागद्वार पर आपको बरसात के टाइम में छोटी-छोटी नदियां बहती हैं। यहां पर आपको बहुत सारी जगह झरनों देखने मिल जाती है। आप इन झरनों में नहाने का आंनद भी ले सकते है। आप पद्मशेष मंदिर पहूॅचते है तो यहां पर बहुत ज्यादा भीड होती है आपको यहां पर लाइन लगना पडता है। भगवान के दर्शन करने के लिए। आपको यहां पर भंडारा भी मिलता रहता है और यहां पर आपको पीने का पानी भी मिलता है। आपको दूर से ही मुख्य मंदिर दिखाई देता है। यहां पर गुफा भी स्थित है जहां पर शिव भगवान और नागदेवता की बहुत सी मूर्तिया आपको देखने मिलती है। आप भगवान के दर्शन करके आगे  बढा सकते है। यहां पर आपको बहुत सारी दुकान मिल जाती है और यह पर एक नाला भी बहता रहता है। जिसके आजू बाजू लोग गन्दा कर देते वैसे यहां पर जहां पर बरसाती नाले होते है, वहां पर लोग गंदा कर देते है। आप इस जगह से होते हुए आगे बढते है तो आपको पश्चिमद्वार के दर्शन करने मिलते है। यह पर एक झरना पहाडों के उपर से आता है और उसका पानी नीचे अडरग्राउण्ड हो जाता है। यहां पर उचे उचे पहाड है जिसके नीचे एक गुफा है जहां पर आपको शिव भगवान की मूर्ति स्थापित है।



Nagdwar Yatra (Pachmarhi) - नागद्वार की रोमांचक यात्रा



Nagdwar Yatra (Pachmarhi) - नागद्वार की रोमांचक यात्रा

स्वर्गद्वार

आप यहां पर आगे बढते है, कुछ दूरी चलने पर आपको एक नदी मिलती है। इसके बाद आपको यह पर पहाडों के उपर चढना होता है तो आपको लोहे की सीढियाॅ मिलेगी। इन लोहे की सीढ़ियों से चढ़कर आपको पहाड़ी पर चढ़ना होता है और पहाड़ी से चलते हुए आपको दूर से ही स्वर्ग द्वार देखने मिल जाता है, तो आप स्वर्ग द्वार पहुंचते हैं, तो यहां पर बहुत बड़ी पहाड़ी है। पहाड़ी में एक खूबसूरत संरचना है जिसे लोग स्वर्गद्वार कहते हैं। यहां पर भी एक छोटी सी गुफा है और गुफा में भगवान शिव का शिवलिंग रखा हुआ है। स्वर्गद्वार का जो व्यू होता है वहां लाजबाब होता है। स्वर्गद्वार के उपर छत में चटटान के उपर एक गुफा है जिसमें लोग नीबू को फेकते है, उस गुफा के अंदर नीबू जाना चहिए। इस तरह करने से कहा जाता है कि इच्छाए पूरी होती है। ये बहुत बडी पहाड की श्रृंखला है। इस पहाड़ी से बाजू से ही पहाड़ को काटकर ही रास्ता बनाया गया है, इस रास्ते में लोहे की राॅड लगी है, आपको इस रास्ते से ही आगे बढना होता है।

आपको आगे बढने पर एक और मंदिर देखने मिलते हैं और यह मंदिर भी बहुत ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। यह मंदिर शायद चित्रशाला का होता है। इस यात्रा में हम लोग ने इन मंदिरों के ही दर्शन किए थे। यहां के दर्शन करके आप आगे जाते हैं तो आपको यहां से पर लगातार चलना पड़ता है।

आपको यहां पर आगे जा कर एक झरना देखने मिलता है जो बहुत ही खूबसूरत रहता है और यहां पर बहुत सारे लोग नहाते हुए भी आप को दिख जाते हैं, क्योंकि यहां तक आते-आते लोग बहुत ज्यादा थक जाते हैं और बहुत ज्यादा उन्हें गर्मी लगने लगती है, तो यहां पर बहुत से लोग नहाते हुए भी आप को दिख जाएंगे इसके बाद आपको लगातार पैदल चलना है। आप पैदल चलते चलते कालाझाड पहुंच जाते हैं। कालाझाड में आप रेस्ट करके अपनी आगे का सफर तय करें। अपनी घर या होटल की तरफ बढा सकते है। यहां पर शाम को भी लोग चलते रहते हैं और यहां मेले के समय में आपको शाम को भी जिप्सी मिल जाती है।


Nagdwar Yatra (Pachmarhi) - नागद्वार की रोमांचक यात्रा



Nagdwar Yatra (Pachmarhi) - नागद्वार की रोमांचक यात्रा



नागद्वार यात्रा की कुछ जानकारी

यहां पर बहुत खूबसूरत व्यू देखने मिलता है। चारों तरफ हरियाली और पहाड़ रहते है। यहां पर आपको मंदिर के आसपास पानी की व्यवस्था मिल जाती है।  यह पानी पहाड से आता है। यह पानी बहुत शुध्द होता है। इस पानी का उपयोग भंडारा बनाने में भी होता है। वैसे यहां पानी साफ रहता है।

नागद्वार की पूरी यात्रा में आपको किसी भी तरह के शौचालय नहीं मिलते हैं। आपको जंगल में ही बाथरूम लैट्रिन करना पडता है। जंगल में आपका फोन का नेटवर्क काम नहीं करता है। आप जब कालाझाड पहुॅचकर आगे बढते है तब ही आपका फोन का नेटवर्क काम करता है।

यहां पर बहुत सारी दुकानें लगी रहती है। यहां पर खाने-पीने का सामान मिलता रहता है और यहां पर भंडारा भी मिलता रहता है। मगर मेरे हिसाब से तो आपको खाने पीने का सामान अपने साथ खुद लेकर जाना चाहिए क्योंकि यहां पर जो सामान मिलता है वह बहुत महंगा मिलता है, और पानी भी बहुत महंगा मिलता है। तो खाने पीने का सामान आप खुद लेकर जाइए और यहां पर आपको देशी शराब भी मिलती है। देसी शराब बहुत से लोग शराब पीकर यहां वहां डले रहते हैं। वैसे यह अच्छा नहीं लगता है। आप इस बात का जरूर ध्यान दीजिए। किसी भी धार्मिक जगह पर शराब का सेवन ना करिए और इस जगह की खूबसूरती का आनंद लीजिए।

यहां पर लोग भोले बाबा के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ते हैं। भोले बाबा के दर्शन करते हुए वापस आता है और यहां का जो नजारा रहता वह तो एकदम मस्त रहता है तो आपकी जो भी थकान रहती है। वह पूरी उतर जाती है। यहां पर आप जाएं तो किसी भी तरह का वजन बैग या फिर एकस्टा सामान लेकर ना जाए। जरूरी सामान ही लेकर चलें।

मेरा नागद्वार यात्रा का एक्सपीरियंस बहुत बढिया रहा है। मैने अपनी जिंदगी में पहली बार ऐसी जगह देखी है। यह जगह बहुत मस्त है। मैं यहां पर 2019 में गई थी। मेरा इस जगह 2020 में भी जाने का इरादा है।

नागद्वार यात्रा में आपको पद्मशेष मंदिर, पश्चिमद्वार, स्वर्गद्वार, चित्रशाला, अग्निद्वार, नागिनीपद्मिनी, चिंतामणि, गंगावणेश, श्रवणबोध, हलदीश, गुलेश, दादा धूनीवाले, नंदीगढ़, निशांगध, राजगिरि, देखने मिलती है जो बहुत ज्यादा आकर्षक है।

नागद्वार में आपको प्रकृति स्थल, हरियाली, प्राकृतिक दृश्य, झरने, पर्वत धाराएं और दुर्लभ वन्यजीव हैं।

Nagdwar Yatra -- नागद्वार का रोमांचक सफर

नागद्वार (पचमढ़ी) की यात्रा की सम्पूर्ण जानकारी


नागाद्वार एक धार्मिक जगह है, आपको नागाद्वार में नागदेवता का रहस्यमयी मंदिर देखने मिलता है। नागाद्वार में हर साल नागपंचमी के समय लाखों की संख्या में श्रध्दालु पहूॅचते है। नागाद्वार एक ऐसी जगह जो आपको पूरी तरह रोमांच से भर देती है। नागाद्वार में आपको पैदल चलना रहता है। यह एक एडवेंचर सफर होता है, यहां पर आपको किसी भी तरह की सुविधाएं नहीं मिलती है। नागाद्वार पर लोग दूर-दूर से नागदेवता के के दर्शन करने आते हैं। नागाद्वार पहुंचने के लिए पहले आपको रेल के माध्यम से पिपरिया स्टेशन आना होता है। उसके बाद बस के द्वारा पचमढ़ी पहुंच सकते है।


Nagdwar Yatra -- नागद्वार का रोमांचक सफर


पिपरिया से पचमढ़ी तक का सफर

यह जो पिपरिया से पचमढ़ी का बस का सफर है वह बहुत ही अच्छा होता है, क्योंकि बरसात का टाइम रहता है और पचमढ़ी में चारों तरफ हरियाली रहती है पहाड़ों का बहुत ही खूबसूरत व्यू रहता है और आपको हर जगह छोटी-छोटी झरने देखने मिल जाते हैं, जो पहाड़ो से बहते रहते हैं और लोग उन झरनों में नहाते हुए दिख जाते हैं। खासतौर पर नाग पंचमी में मेले के टाइम में तो ये सफर लाजबाब होता है। 

पचमढ़ी में बहुत से लोग अपने वाहन से भी नाग पंचमी के टाइम में आते हैं और और आप चाहे तो पिपरिया रेलवे स्टेशन से टैक्सी बुक करके या जिप्सी बुक करके भी पचमढ़ी तक आ सकते हैं। आप जिप्सी बुक करके आएंगे तो आप जिप्सी को कहीं पर भी रुका सकते हैं और खूबसूरत व्यू को इंजॉय कर सकते हैं। मगर बस में आप आते हैं तो आप बस को कहीं भी नहीं रोक सकते हैं, बस आपको पिपरिया से डायरेक्ट पचमढ़ी में ही रुकेगी तो आप बस से खूबसूरत व्यू देख सकते हैं पर उसका आंनद लेने के लिए ठहरा नहीं सकते है। 


Nagdwar Yatra -- नागद्वार का रोमांचक सफर


Nagdwar Yatra -- नागद्वार का रोमांचक सफर


देनवा नदी का आकर्षक नजारा

पचमढ़ी का जो देनवा नदी का खूबसूरत व्यू पिपरिया से पचमढ़ी के रास्ते में पड़ता है तो यहां का व्यू बहुत ज्यादा मनोरम है आपको यहां पर कुछ समय रूकना जरूर चाहिए। यहां पर नागपंचमी के मेले के समय आपको यह पर बहुत सारे लोग देखने मिल जाते है क्योकि यहां पर भंडारा भी होता रहता है। यहां पर आप रूककर खूबसूरत व्यू का आंनद ले सकते है। बहुत से लोग इस व्यू को देखने के लिए यहां पर ठहरते है। 

इस तरह आप खूबसूरत व्यू को इंजॉय करते हुए पचमढ़ी पहुंच जाते हैं। नाग पंचमी के मेले के समय पचमढ़ी नगर के बाहर ही गाड़ियों को रोका जाता है। आपको यह पर बहुत सारी बस और गाडियों देखने मिलती है। ऐसा लगता है कि गाडियों का जमघट लगा हो। यह पर नागपंचमी मेले के दौरान बहुत ज्यादा भीड रहती है। पार्किंग स्थल से आपको पैदल ही जाना पड़ता है, पचमढ़ी तक यह दूरी एक से डेढ़ किलोमीटर तक हो सकती है। नागपंचमी के मेले के समय यहां पर बहुत सी दुकाने लगती है। खाने पीने की बहुत सी दुकाने लगती है। 

पचमढ़ी से नागद्वार तक का सफर

पचमढ़ी आकर आप जिप्सी के माध्यम से नागद्वार पहुॅच सकते है। नाग पंचमी के मेले के समय यहां पर ढेर सारी जिप्सी चलती हैं और इन जिप्सों का किराया बहुत ही सस्ता होता है, इस टाइम पर। आपको इस टाइम पर 30 से 40 रू में नागाद्वार तक पहुंचाया जा सकता है और इसके आगे का रास्ता आपको पैदल तय करना होता है। इस समय में जिप्सी में बहुत ज्यादा भीड़ रहती है। पचमढ़ी से नागद्वारी का जो रास्ता है वह बहुत ही खूबसूरत है। इस रास्ते में आपको पचमढ़ी झील देखने मिलती है,उसके बाद आपको चर्च देखने मिलता है, जो बहुत फेमस है और उसके बाद आप खूबसूरत हरे भरे जंगलों का व्यू देख सकते हैं। इन सभी व्यू का मजा लेते हुए आप नागाद्वार में जहां पर आपकी जिप्सी का स्टाॅप है वहां पर पहूॅच जाते है। यहां पर पुलिस कैम्प लगा होता है, जो अच्छी तरह से अपनी डयूटी निभाती है। 


Nagdwar Yatra -- नागद्वार का रोमांचक सफर

नागाद्वार से पैदल यात्रा

आपको इस स्टाप से पैदल यात्रा करनी होती है, नागद्वार के लिए। यहां पर आपको पक्की सड़क मिलती है कुछ दूरी के लिए। यहां पर एक घाट होता है,आपको इस घाट में चलकर जाना पड़ता है और इस घाट के दोनों तरफ आपको कई प्रकार की दुकानें देखने मिल जाती हैं। इस घाट में आपको एक खाई भी देखने मिलती है जिसमें से नदी बहती है। आप इसे पुल भी कह सकते हैं क्योकि यह पुल पहाड़ी रास्ते को जोड़ता है, और कहा जाता है कि खाई में  नाग देवता दिखाई देते हैं, तो बहुत से लोग इस जगह को देखते हैं और यहां पर बहुत सारे कपड़े बंधे हुए रहते हैं। आप चाहे तो मेरा वीडियो भी देख सकते हैं, नागाद्वार का। उसमें आपको और अच्छी इंफॉर्मेशन मिल सकती है। यहां पर ढेर सारी दुकाने रहती हैं। जहां आपको चने मूंगफली मिलते है। मेरे हिसाब से तो आपको चना मूंगफली घर से साथ लाना चहिए क्योंकि यह बहुत महंगा मिलता है और मात्रा भी बहुत कम रहती है और यह बहुत लंबा रास्ता रहता है। आपको एनर्जी की जरूरत पड़ती है। यहां पर आप ग्लूकोस भी लेकर जाएं और अपने साथ पानी जरूर लेकर जाएं। यह घाट 1 से 2 किमी लंबा है और यहां पर पूरी खडी चढाई है। हमारी तो सांस भरने लगी थी यह पर। नागाद्वार जब हम लोग गए थे, तब यहां पर पूरा बादल छाया हुआ था, मगर बहुत अच्छा लग रहा था क्योंकि पूरी तरह से प्राकृतिक माहौल था। बादल बिल्कुल नजदीक में दिख रहे थे या यू कहें कि हम बादल के बीच से होकर चल रहे थे। यहां पर लोग भोले बाबा के जयकारे लगा रहे थे और ढोल भी बजा रहे थे, और ढोल के धुन में नाच भी रहे थे। यहां पर आपको पन्नी की बरसाती खरीदना पडता है क्योंकि यह पहाड़ी क्षेत्र है और यहां पर पानी कभी भी गिरने लगता है। तो आप बरसाती ओढ सकते हैं।

Nagdwar Yatra -- नागद्वार का रोमांचक सफर


इस खडी ढलान वाली घाटी के अंत में आपको शिव भगवान का मंदिर देखने मिलता है और यहां तक आपको पक्का रास्ता मिलता है। यहां पर आपको नागद्वार का नक्शा भी देखने मिलता है। आपको इस नक्शे में यहां पर स्थित जो भी मंदिर है, उनकी जानकारी मिल जाती है और आपको कितनी दूरी चलना है इस नक्शे से पता चल जाता है। पूरी नागद्वार यात्रा का नक्शा आप यहां   देख सकते है। यहां पर शंकर जी का मंदिर है जहां पर शिवलिंग स्थापित है। अब यहां से आपकी रोमाचकारी यात्रा शुरू होती है। आपको यहां से 18 किमी की यात्रा चालू होती है। यहां से नागाद्वार का मुख्य रास्ता शुरू होता है जो पूरी तरह कच्चा रास्ता है और पहाड़ी रास्ता है। आप यहां से 500 मीटर दूर चलेंगे तो आपको पहाड़ से आता हुआ एक झड़ना दिखाई देगा और नीचे एक कुंड बना दिया गया है जिससे पानी कुंड में इकटठा होता है। यहां पर शंकर जी का शिवलिंग भी रखा हुआ है, जो बहुत खूबसूरत लगता है, और जो पहाड़ों से पानी आता है वह भी बहुत खूबसूरत लगता है। यहां का जो रास्ता वहां बहुत पतला है इस रास्ते के एक ओर उची उची पहाड है तो दूसरी तरफ  खाई है। आप आगे बढ़ते हैं तो आपको फिर से एक झरना देखने मिलता है, यहां पर भी पहाड़ों से पानी आता है और नीचे एक कुंड बनाया गया है जिसमें पानी इकटठा होता है। यहां पर आपको बहुत लोग नहाते हुए दिख जाते है। यहां पर आपको थकान बिल्कुल नहीं होती है क्योंकि यह का मौसम ठंडा रहता है। यहां पर बादल आपके आजू-बाजू ही घूमते रहते हैं। जंगल का चारों तरफ का व्यू रहता है वह हरियाली से भरा हुआ रहता है। आपको इस रास्ते में कुछ इस तरह के लोग भी देखने मिल जाते है जो टनों किलो वजन के त्रिशूल उठकर नागदेवता के मंदिर तक जाते है, अपनी मन्नत के पूरी होने पर। यह एक सोचने वाली बात है कि भगवान अपनी भक्तों को कितनी शाक्ति देता है। आप इस उबड खाबड रास्ते से होते हुए काला झाड़ पहुंच जाते हैं। इस जगह को भजिया गिरी भी कहते है। 


Pachmarhi Nagdwar Yatra || पचमढ़ी नागद्वार यात्रा

Pachmarhi Nagdwar Yatra || Nagdwar status || Nagpanchami fair in Pachmarhi || Accommodation arrangement in Nag Panchami Mela 

पचमढ़ी नागद्वार यात्रा 


नागद्वार (Nagdwar) एक ऐसी दुनिया जो पूरी तरह से अलग है, नागद्वार (Nagdwar) को आप एक तरह से प्रकृति खूबसूरती का स्वर्ग कहा जा सकता है। नागद्वार पचमढ़ी में स्थित है।  नागद्वार (Nagdwar) जाने के लिए आपको पूरा रास्ता जंगल का मिलता है। यह आपके लिए एक एडवेंचर ट्रिप हो जाता है क्योकि यह जो पूरा रास्ता वह कच्चा और पहाडी रास्ता है जिनसे चलकर आपको पैदल मजा आ जायेगा। आपको नागद्वार (Nagdwar) में पूरा वातावरण प्राकृतिक मिलेगा यह पूरा जंगल का एरिया है, यहां पर किसी भी तरह की सुविधाएं नहीं है। नागद्वार एक ऐसी दुनिया जो शहर की भीड़ भरी लाइफ से आपको एक सुकून भरा समय बिताने का मौका देती है। यह का प्राकृतिक वातावरण आपको आकर्षित करता है। 

नागद्वार (Nagdwar) में जाने के लिए साल में सिर्फ 10 दिन का समय मिलता है, बाकि दिन में इस जगह में जाने मे पाबंदी है। नाग पंचमी के 10 दिन पहले से ही इस जगह जाने के लिए परमिशन मिल जाती है, और लोग दूर-दूर से इस जगह में जाने के लिए आते हैं। 

नागद्वार (Nagdwar) में नाग देवता का बहुत ही रहस्यमय मंदिर है, इस मंदिर में लोगों की इच्छा पूरी होती है । यहां पर नाग देवता के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं और लोग 18 किमी का रास्ता पैदल चलकर इस मंदिर तक पहॅुचते है। 


Pachmarhi Nagdwar Yatra

  Padmshesh Temple

Pachmarhi Nagdwar Yatra

Pachmarhi Natural Beauty

नागद्वार की स्थिाति (Nagdwar status)

नागद्वार (Nagdwar) पचमढ़ी में स्थित है । पचमढ़ी मध्य प्रदेश का एकमात्र हिल स्टेशन है। पचमढ़ी होशंगाबाद जिले में स्थित है। होशंगाबाद मध्य प्रदेश का एक जिला है।  पचमढ़ी को सतपुड़ा की रानी कहा जाता है। नागद्वार (Nagdwar) सतपुडा टाइगर रिजर्व के घने जंगलों के बीच में स्थित है। यह पर चारों तरफ जंगल है। यहां पर किसी भी तरह की सड़क नहीं है, और ना ही किसी तरह की सुविधाएं हैं कि आप नागद्वार (Nagdwar) तक आसानी से पहुंच सके, यहां पर जो रास्ता है, वह भी पथरीला रास्ता है, कहीं-कहीं पर उबड़ खाबड़ है, तो कहीं कहीं पर बड़ी-बड़ी चट्टानें हैं। इन रास्तों से होते हुए आप नागद्वार (Nagdwar) के प्रसिध्द नागदेवता के मंदिर तक पहुंच जाते हैं। नागद्वार (Nagdwar) में पद्मशेष मंदिर बहुत प्रसिध्द है, इस मंदिर में बहुत ज्यादा भीड रहती है। नागद्वार (Nagdwar) के मंदिरों के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं बच्चे बूढ़े और जवान सभी तरह के लोग आपको इस यात्रा में देखने मिल जाते हैं। सभी लोग भोले बाबा का जयकार लगाते हुए नागद्वार की यात्रा करते है। 

नागद्वार (Nagdwar) की पहुॅचने के लिए आपको पहले पचमढ़ी आना होता है और पचमढ़ी पहुंचने के लिए सबसे अच्छा माध्यम रेल मार्ग है। आप रेलमार्ग के द्वारा पिपरिया पहुंचते हैं, फिर पिपरिया से आप बस के द्वारा पचमढ़ी पहुंच सकते हैं। पचमढ़ी पहुंचकर आपको नागद्वार (Nagdwar) में जाने के लिए जिप्सी मिल जाती है। 

Pachmarhi Nagdwar Yatra

Pachmarhi Natural Beauty 

Pachmarhi Nagdwar Yatra

Pachmarhi Natural Beauty 

Pachmarhi Nagdwar Yatra

Nagdwar Yatra

पचमढ़ी में नागपंचमी का मेला (Nagpanchami fair in Pachmarhi)

नागपंचमी के समय पचमढ़ी में विशाल मेले का आयोजन होता है। नाग पंचमी के समय पचमढ़ी में बहुत ज्यादा भीड रहती है क्योकि यहां पर मेला लगता है। पचमढ़ी में नागपंचमी के समय लोगों लाखों की संख्या में एकत्र होते है।   पचमढ़ी की रोड में आपको विभिन्न प्रकार के दुकानें देखने मिल जाती है और पचमढ़ी के मार्केट एरिया में भी बहुत सारी दुकान लगती है, यहां पर विशेषकर हम लोगों ने उनी कपडों का मार्केट देख । पचमढ़ी में नागपंचमी के समय उनी कपडे सस्ते दामों पर मिल जाते है। इसके अलावा आपको यहां पर और भी बहुत सी दुकाने देखने मिल जाती है जैसे कपडे की दुकान, ज्वेलरी की दुकानें, जूते चप्पल की दुकानें, और भी बहुत सी दुकानें मिल जाती है। यहां पर आपको जूते चप्पल भी अच्छे दामों पर मिल जाते है। हम लोगों ने यहां से जूते और चप्पल लिया था वो अभी तक चल रही है, यहां पर हम जूते और चप्पल दोनों ही 50 रू में मिले थे। 

पचमढ़ी में नागपंचमी के मेले के दौरान रहने की व्यवस्था (Accommodation arrangements during Nagpanchami fair in Pachmarhi)

नागपंचमी के मेले के समय पचमढ़ी में लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैंए नागाद्वार (Nagdwar) जाने के लिए। पचमढ़ी में बहुत ज्यादा भीड़ होती है। पचमढ़ी में बहुत सारे होटल है मगर नाग पंचमी के मेले के समय इन होटलों के दाम आसमान को छूते हैं मतलब यह होटल बहुत महंगे रहते हैं। जिन लोगों के पास ज्यादा पैसे नहीं रहते हैं, वह स्कूल या आश्रम में रह लेते हैं बाकी जिनके पास पैसे रहते हैं वो होटल ले सकते हैं। आपको बहुत सारे लोग ऐसे भी देखने मिल जाएंगे जो नाग पंचमी के मेले के दौरान रोड में सोते है। पचमढ़ी के मेले के समय में इन होटलों का प्राइस 1500 से उपर ही रहता है। जो लोग होटल के किराये को नहीं दे सकते है वो आश्रम या धर्मशाला में आश्रय ले लेते है। पचमढ़ी में नाग पंचमी के समय में जो भी आश्रम और धर्मशालाएं हैं वह पूरी तरह से लोगों से भरी हुई रहती हैं। नाग पंचमी के मेले के समय पचमढ़ी के जो सरकारी स्कूल रहते हैं उनमें भी बहुत भीड रहती है। लोग अपने साथ ओढने और बिछाने के लिए चादर और कंबल लेकर आते हैं और स्कूलों में जहां पर भी जगह मिलती है। वह अपने चादर और कंबल  बिछाकर सो जाते हैं। नागपंचमी के समय में बारिश का मौसम रहता है तो बहुत से लोग पन्नी की बरसाती भी लेकर आते हैं। जिनको स्कूल में जगह नहीं मिलती है वो खुले आसमान के नीचे ही सो जाते हैं पन्नी ओढ़ के।

हम लोगों को भी पैसे ज्यादा खर्च नही करना था इसलिए हम लोग पहले आश्रम गए थे। आश्रम पूरी तरह लोगों से भरा हुआ था और हम लोगों को जगह नहीं मिली थी । इसके बाद हम लोग स्कूल गए थे, जगह की तलाश करने तो हमें वहां पर भी जगह नहीं मिली थी। यह पर आपको अगर जगह चहिए तो आपको पहले आना होगा अपने सुना होगा पहले आया और पहले पाये वहीं यह पर लागू होता है। हम लोगों ने बहुत से होटल में भी पूछा मगर सब का प्राइस इस मेले के दौरान बहुत हाई रहता है, बहुत से होटल घूमने के बाद  हम लोगों को एक होटल मिल गया, जो कम प्राइस में था मगर उसमें सुविधाएं नहीं थी। न ही बेड अच्छा था और न ही बाॅशरूम था। बाॅशरूम के लिए हम लोगों को एक फलोर उपर जाना पडता था। इसलिए हम लोगों ने यह रूम बुक कर लिया क्योकि हम लोग को रात बिताना है, सोना बस था। दूसरे दिन हम लोग को यात्रा करने जाना था और उसके बाद अपने घर के लिए रवाना होना था। इस हिसाब से हम लोगों ने वह रूम ले लिए थे और जो भी प्राइस होटल वाले ने बताया था वो पे कर दिए था। 


Pachmarhi Nagdwar Yatra

Nagpanchmi Mela 

Pachmarhi Nagdwar Yatra

Nagdwar Yatra 

Pachmarhi Nagdwar Yatra

Nagdwar Yatra 

पचमढ़ी में नागपंचमी के मेले के दौरान खाने की व्यवस्था (Food arrangements during Nagpanchami fair in Pachmarhi)

नागपंचमी के मेले के समय पचमढ़ी में बहुत सारे श्रध्दालु आते है। नागपंचमी के मेले के दौरान यहां पर बहुत सारे प्राइवेट होटल खुल जाते है जिसमें बहुत कम दामों पर आपको खाना मिलता है। पचमढ़ी में के इन प्राइवेट होटल में आपको दाल चावल सब्जी रोटी खाने मिल जाती है 40 से 50 रू में। नागपंचमी के मेले में पचमढ़ी में भंडारा भी मिलता है। यहां भंडारा पचमढ़ी के मुख्य बाजार से थोडी दूरी पर होता है, यहां भंडारा पचमढ़ी झील के उस पार चर्च से थोडी ही दूरी पर भंडारा आयोजित किया जाता है। यहां पर भंडारा बहुत ही स्वादिष्ट होता है। आपको यहां पर सब्जी पूडी चावल कढी खाने मिल जाती है। इसके अलावा अगर आप सुबह समय से पहूॅच जाते है तो आपको चाय नाश्ता मिल जाता है।

आपको नागद्वार (Nagdwar) की यात्रा बहुत ही रोमांचकारी लगेगी। यहां पर आपको बहुत अच्छा लगेगा। नागाद्वार  (Nagdwar) पर पूरा माहौल प्राकृतिक है। 

Pachmarhi Chauragarh Temple || चौरागढ़ महादेव मंदिर, पचमढ़ी

 Pachmarhi Chauragarh Shiv Temple

चौरागढ़  महादेव पचमढ़ी


चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) का प्रसिद्ध मंदिर शिव मंदिर मध्य प्रदेश का प्रमुख पर्यटन स्थल है और यह पचमढ़ी में स्थित है। चैरागढ़ का मंदिर एक ऊंचे पहाड़ पर स्थित है यह मंदिर भगवान शिव जी को समर्पित है। चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) महादेव पचमढ़ी (Pachmarhi) की एक खूबसूरत जगह है। यह जगह बहुत खूबसूरत है और जंगलों से घिरी हुई है। इस मंदिर तक जाने के लिए आपको बहुत मेहनत करनी पड़ेगी क्योंकि इस मंदिर तक पहॅुचने के लिए आपको पैदल चलना पड़ेगा और यह जगह पूरी तरह से जंगल और पहाड़ों से घिरी हुई है, यहां पर आपको बहुत खूबसूरत प्राकृतिक व्यू देखने मिलता है, यहां पर वादियों का मनोरम दृश्य देखने मिलता है।  चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर 1326 मीटर की ऊंची पहाड़ी पर स्थित है और इस मंदिर तक पहुंचने के लिए आपको 1300 चढ़ने पड़ती है।


पचमढ़ी (Pachmarhi) को सतपुड़ा की रानी कहा जाता है और यहां पर बहुत सारी धार्मिक जगह है, जिनमें से प्राचीन शिव भगवान जी का मंदिर भी एक है,जिसके दर्शन करने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। यहां पर साल भर लोग दर्शन करने के लिए आते हैं, मगर विशेषकर नाग पंचमी और महाशिवरात्रि के समय पचमढ़ी में मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें लाखों की संख्या में लोग आते हैं और भगवान शिव के दर्शन करने के साथ-साथ उन्हें त्रिशूल चढ़ाते हैं।

Pachmarhi Chauragarh Temple
Pachmarhi Chauragarh Temple

चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) के प्राचीन शिव भगवान जी के मंदिर तक जाना आसान बात नहीं है। यह पूरा पहाड़ी रास्ता है और इस रास्ते में आपको किसी भी तरह की सुविधाएं नहीं मिलती हैं। आपको पैदल चलना पड़ता है और यहां तक जाते-जाते आपकी हालत खराब हो जाती है मगर शिव भगवान के भक्त इस रास्ते पर बम बम भोले का जयकार लगाते हुए चलते हैं और भगवान शिव को अर्पण करने के लिए भारी त्रिशूल भी लेकर चलते है। 

Pachmarhi Chauragarh Temple
Pachmarhi Chauragarh Temple

चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) स्थिाति एवं जाने का रास्ता


चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) का महादेव मंदिर पचमढ़ी में स्थित है। पचमढ़ी (Pachmarhi) होशंगाबाद शहर में स्थित है और होशंगाबाद शहर मध्य प्रदेश में स्थित एक शहर है। पचमढ़ी पहुंचने के लिए आपको सबसे अच्छा साधन ट्रेन से है। आप ट्रेन से आसानी से पचमढ़ी (Pachmarhi) पहुंच सकते हैं आप आना चाहें तो अपने वाहन से भी पचमढ़ी आ सकते हैं सड़क मार्ग से भी पचमढ़ी अच्छी तरह से कनेक्टेड है और आप इस पचमढ़ी (Pachmarhi)सड़क मार्ग से भी पहुॅच सकते हैं। आप पचमढ़ी (Pachmarhi) ट्रेन से आते है तो ट्रेन से आपको पहले पिपरिया रेलवे स्टेशन तक आना होता है, वहां से आपको बस एवं जिप्सी की सुविधा मिल जाती है। आप चाहे तो बस से आ सकते हैं या जिप्सी से आ सकते हैं। बस में आपका कम किराया लगता है, 60 रू पचमढ़ी तक का किराया लगता है। जिप्सी में आपको ज्यादा किराया लगता है। आपको जिप्सी में आने के लिए बारगेन करना पड़ता है। आप पिपरिया से पचमढ़ी तक खूबसूरत वादियों का नजारा देखते हुए पहुंच जाते हैं। 

पचमढ़ी में नागपंचमी मेला


पचमढ़ी (Pachmarhi) में आप जब नागपंचमी के मेले में आते हैं तो यहां पर बहुत ज्यादा भीड़ रहती है। आपको पचमढ़ी नगर के बाहरी क्षेत्र में ही उतार दिया जाता है। आपको वहां से पैदल पचमढ़ी (Pachmarhi) नगर तक आना पड़ता है। आपको नाग पंचमी के मेले के समय यहां पर पूरी रोड में बहुत सारी दुकाने मेला दिखाई देगा और पचमढ़ी के बाहरी क्षेत्र इतने सारे वाहन दिखाई देंगे क्योंकि यहां पर लोग नाग पंचमी के टाइम में बहुत दूर-दूर से आते हैं, तो पूरी बस बुक करके आते हैं तो यहां पर आपको बहुत सारे वाहन दिखाई देगी। आप जब पचमढ़ी (Pachmarhi) के बाहरी क्षेत्र पचमढ़ी नगर की तरफ आते है तो आपको बहुत सारी तरह तरह की दुकानें देखने मिलती है। आपको रोड के दोनों तरफ दुकानें दिखाई देगी। 

पचमढ़ी  (Pachmarhi)में जब आप पहुंचते हैं, तो आपको यहां से चैरागढ़ मंदिर तक जाने के लिए जीप या जिप्सी मिल जाती है। मेले के दौरान यहां पर जिप्सी का किराया बहुत सस्ता रहता है। आपको 30 या 40 रू में चौरागढ़ मंदिर (Chauragarh  Shiv Temple) तक आसानी से पहुंचा दिया जाता है। मेले के समय पचमढ़ी में बहुत ज्यादा भीड़ रहती है तो गाड़ी में भी बहुत ज्यादा भीड़ रहती है। गाड़ी वाला एक साथ 10 से 15 लोगों को बैठा लेता है और मंदिर तक छोड़ जाता है।

चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर तक पहुंचने के लिए जो सड़क है वह बहुत खूबसूरत है। यह जो सड़क है इस पर कहीं-कहीं पर ऐसे मोड़ है, जो आपको खतरनाक लगते हैं मगर ड्राइवर जो है वह इन मोड पर गाडी असानी से चला लेता है क्योकि उसे गाड़ी चलाने की आदत रहती है। अगर आप अपने वाहन से इस जगह पर जाते हैं तो गाड़ी आप आराम से चलाइए क्योंकि यहां पर बहुत सारे एक्सीडेंट होते रहते है। आपको यहां पर जरूर 1 या 2 गाड़ी देखने मिल जाएंगी जिनके एक्सीडेंट यहां पर हो चुके हैं। 

Pachmarhi Chauragarh Temple
Pachmarhi Chauragarh Temple

Pachmarhi Chauragarh Temple
Pachmarhi Chauragarh Temple


जिप्सी वाला आपको बड़ा महादेव मंदिर के पास छोड़ देता है। आप चाहे तो बड़ा महादेव मंदिर घूम कर चौरागढ़ मंदिर (Chauragarh  Shiv Temple) के लिए जा सकते हैं। चैरागढ़ मंदिर (Chauragarh  Shiv Temple) के रास्ते में ही आपको गुप्त महादेव मंदिर भी देखने मिल जाएगा । आप गुप्त महादेव मंदिर भी घूम सकते है। 

चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर की पैदल यात्रा 


चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर 3 से 4 किलोमीटर की दूरी पर है। आपको इस मंदिर तक पैदल जाना पड़ता है। यहां पर किसी भी तरह की सुविधाएं नहीं मिलती है और ना ही वाहन चलते हैं। आपको पैदल यात्रा करनी पड़ती है और यह पथरीला रास्ता होता है। आपको यहां पर जूते पहन कर जाना चाहिए क्योंकि चप्पल यहां पर किसी भी काम की नहीं रहती है।आप इस रास्ते से जाते हैं तो आपको यहां पर जंगलों की खूबसूरती देखने मिलता है। यहां पूरा रास्ता जंगल का है चारों तरफ हरे भरे पेड़ों है। यहां पर आपको चारों तरफ हरियाली देखने मिलती है।

आप ऊपर पहूॅचते है तो आपको बहुत मस्त व्यू देखने मिलता है। चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर के रास्ते में एक गुफा देखने मिलेगी जहां पर कहा जाता है कि सीता जी ने अपने वनवास काल के दौरान इस गुफा में ठहरी थी, यह गुफा सीता जी के नाम पर रखी गई है। यहां पर आपको इस गुफा के पास से ही चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर तक जाने के लिए दो रास्ते मिलेंगे एक रास्ता पक्का मिलेगा और एक रास्ता जंगल वाला मिलेगा जो शॉर्टकट है आप वहां से भी चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर तक जा सकते हैं, वैसे मुझे लगता है कि दोनों रास्ते की दूरी समान ही होगी। 

हम लोग पक्के रास्ते से चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर तक गए थे और मैं आपको भी यही रास्ता प्रेफर करूगी, आप पक्के रास्ते से जाएं क्योंकि इस रास्ते में आपको किसी भी तरह की दिक्कत नहीं होगी और आप आराम से जा सकते हैं और जो जंगल वाला रास्ता है जो शॉर्टकट रास्ता है उससे आपको शायद दिक्कत हो सकती है क्योंकि वह रास्ता पूरी तरह से उबड़ खाबड़ हो सकता है। आपको जैसे जैसे उपर चढाते है आपको पहाडियो को खूबसूरत व्यू देखने मिलता है और चारों तरफ हरियाली देखने मिलती है। यहां पर आपको बहुत सारे बंदर भी देखने मिल जाएंगे बंदरों को अब किसी भी तरह का खाना ना डालिए और खाने का सामान हाथ पर लेकर न चलें नहीं तो बंदर आपके हाथ से छीन सकते है।

Pachmarhi Tourist Place


चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर का विवरण 


यह मंदिर बहुत अच्छी तरह से बन गया है और यहां पर आपको आकर बहुत अच्छा लगेगा। यहां पर पानी की व्यवस्था है आप थोड़ा देर आराम करके पानी पीकर भगवान जी के दर्शन करने के लिए जा सकते हैं और यहां पर आप नीचे चप्पल उतार कर फिर भगवान जी के दर्शन करने जा सकते हैं। यहां पर शिव भगवान की जो प्रतिमा है वह बहुत आकर्षक है और आपको बहुत खूबसूरत लगेगी और लोग इतनी दूर दूर से भगवान जी के दर्शन करने के लिए आते हैं और इस प्रतिमा में कहा जाए तो एक प्रकार का जादू है आप इस प्रतिमा को  देखते रह जाएंगे। यहां पर आपको अच्छा लगेगा के प्रतिमा के दर्शन करने के बाद बाहर आते हैं तो आपको गणेश जी का मंदिर देखने मिलेगा आप गणेश जी के दर्शन कर सकते हैं उन्हें प्रसाद चढ़ा सकते हैं। उसके बाद आप मंदिर के सामने तरफ आएंगे तो सामने भी आपको शंकर जी और भी अन्य देवी-देवताओं के दर्शन करने मिल जाएंगे जिनकी प्रतिमा मंदिर के बाहर रखी गई है। आप यहां पर त्रिशूल देख सकते हैं, यहां पर ढेर सारे त्रिशूल रखे गए हैं। इतने सारे और बहुत वजन के यहां पर देखने मिलतेे है। 

हम लोग पहले यहां पर आए थे तो त्रिशूल से पूरी मंदिर की बाउंड्री बनाई गई थी, मगर अभी पूरा कवर कर दिया गया है। आपको यहां से चारों तरफ का खूबसूरत व्यू देखने मिलता है जो एकदम अनोखा रहता है आप शायद इस तरह कभी ना देखे हो और शायद देखे भी हो मगर इसके बारे शब्दों में नहीं बताया जा सकता है। आपको मंदिर के बाहर ही अगरबत्ती जलाने मिलेगी और आप बाहर ही नारियल फोड़ सकते हैं, आप अंदर जाकर सिर्फ भगवान जी के दर्शन कर सकते हैं। शिव भगवान जी के और दर्शन करके आपको बाहर आना पड़ेगा । यहां पर आप खूबसूरत वदियों में फोटोग्राफी भी कर सकते है। आपको यह लगता है कि जो बादल है वह आपके पास ही से उड रहे हो। यहां पर जो बरसात का मौसम रहता उस टाइम भी अच्छा लगता है वैसे गर्मी के मौसम में भी यहां अच्छा लगता है, क्योंकि यहां पर चारों तरफ हरियाली रहती है। यहां के जो पेड़ पौधे रहते हैं वह गर्मी के मौसम में भी हरे भरे रहते हैं। इस जगह पर आकर आपकी थकावट दूर हो जाती है, जो इतनी दूर से आप चल कर आते हैं। वह थकावट आपकी इस जगह पर आकर पूरी तरह से चली जाती है। 

Pachmarhi Chauragarh Temple
Pachmarhi Chauragarh Temple

Pachmarhi Chauragarh Temple
Pachmarhi Chauragarh Temple


अब यहां मंदिर बहुत अच्छा बन गया है। हम इस मंदिर में करीब 10 साल पहले गए थे तब यहां पर कुछ भी नहीं था। यहां पर शिव भगवान की मूर्ति खुले में ही रखी हुई थी और त्रिशूल से मंदिर के चारों तरफ बाॅडरी बनी हुई थी। यहां पर किसी भी तरह की व्यवस्था नहीं थी मगर अब यहां पर हर तरह की व्यवस्था है। 

चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर के रास्ते में लगने वाली दुकानें 


जब आप पचमढ़ी में मेले के दौरान आते है और आप जब इस मंदिर पर पहुंचते हैं, तो मंदिर के रास्ते में आपको बहुत से दुकानें मिलती है। मेले के दौरान यहां पर बहुत सारी दुकानें लगती हैं जहां पर आप खाना खा सकते हैं और नींबू पानी पी सकते हैं और भी बहुत सारी दुकानें लगती हैं। मेले के समय में यहां पर बहुत ज्यादा भीड़ रहती है। मेले के समय में यहां पर आपको भंडारा भी मिलता है। आपको कढ़ी चावल सब्जी पूड़ी यहां खाने मिलता है और भंडारा तो बहुत मस्त रहता है। 

चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर के रास्तें में बहुत दुकाने रहती है आप चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर  के रास्ते मे थक जाते है, आप रास्ते में रेस्ट करके कुछ भी खरीदकर खा सकते है। दुकानों में आपको उबली बेर एवं भुने चने एवं मूगंफली भी मिल जाती है। 

यहां पर आपको बहुत सी ऐसी भी दुकान देखने मिलती है, जहां पर आपको देशी दारू मिलती है, बहुत से लोग यहां से दारू लेते है । इन दुकानों पर आपको 10 या 20 रू गिलास में दारू मिलती है। यहां पर बहुत से लोग दारू पीते हुए देखते हुए मिल जाते है। सस्ती देशी दारू पीकर बहुत से लोग यहां पर घूमते रहते है। 

Pachmarhi Chauragarh Temple
Chauragarh view


चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर में मन्नत पूरी होती है


महादेव मंदिर में आकर श्रद्धालु मन्नत मानते है। यहां पर लोगों की इच्छा पूरी होती है और जिसकी भी इच्छा पूरी होती है वहां महादेव मंदिर में आकर त्रिशूल चढाते है। यहां पर लोग छोटे से लेकर बडे त्रिशूल तक चढाते है। यहां पर लोग 100 से 200 किलो के त्रिशूल लेकर चढाते है। यहां पर आप हजारों की संख्या में त्रिशूल देख सकते है। जो लोगों के द्वारा इतनी दूर से लाए जाते हैं और शिव भगवान जी को अर्पण किए जाते हैं यहां पर लोगों की मन्नत पूरी हो जाती है। 

आपके लिए सलाह


  • आप चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) महादेव मंदिर तक जाने के जूते पहन कर जाएं क्योंकि आप की चप्पल टूट सकती है और हाई हील तो बिल्कुल ना पहने अगर चप्पल पहनते है तो मजबूत चप्पल पहनें। 
  • आप चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) महादेव मंदिर में जाए तो पानी और ग्लूकोस लेकर चलें क्योकि यहां पर आपको बहुत चलना पडता है जिससे आप बहुत थक जाते है। ग्लूकोस से आपको एनर्जी मिलती है तो जरूर लेकर चलें।
  • आप चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) महादेव मंदिर में जाए तो अपने साथ कुछ भुने चने और मूंगफली लेकर जाये जिससे आप जहां पर भी रेस्ट करें तो ये खा सकें। 
  • चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) महादेव मंदिर में आपको बहुत चलना पडता है तो आप बच्चे या बूढे व्याक्ति को परेशानी आ सकती है। 

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