Pachmarhi Chauragarh Temple || चौरागढ़ महादेव मंदिर, पचमढ़ी

 Pachmarhi Chauragarh Shiv Temple

चौरागढ़  महादेव पचमढ़ी


चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) का प्रसिद्ध मंदिर शिव मंदिर मध्य प्रदेश का प्रमुख पर्यटन स्थल है और यह पचमढ़ी में स्थित है। चैरागढ़ का मंदिर एक ऊंचे पहाड़ पर स्थित है यह मंदिर भगवान शिव जी को समर्पित है। चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) महादेव पचमढ़ी (Pachmarhi) की एक खूबसूरत जगह है। यह जगह बहुत खूबसूरत है और जंगलों से घिरी हुई है। इस मंदिर तक जाने के लिए आपको बहुत मेहनत करनी पड़ेगी क्योंकि इस मंदिर तक पहॅुचने के लिए आपको पैदल चलना पड़ेगा और यह जगह पूरी तरह से जंगल और पहाड़ों से घिरी हुई है, यहां पर आपको बहुत खूबसूरत प्राकृतिक व्यू देखने मिलता है, यहां पर वादियों का मनोरम दृश्य देखने मिलता है।  चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर 1326 मीटर की ऊंची पहाड़ी पर स्थित है और इस मंदिर तक पहुंचने के लिए आपको 1300 चढ़ने पड़ती है।


पचमढ़ी (Pachmarhi) को सतपुड़ा की रानी कहा जाता है और यहां पर बहुत सारी धार्मिक जगह है, जिनमें से प्राचीन शिव भगवान जी का मंदिर भी एक है,जिसके दर्शन करने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। यहां पर साल भर लोग दर्शन करने के लिए आते हैं, मगर विशेषकर नाग पंचमी और महाशिवरात्रि के समय पचमढ़ी में मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें लाखों की संख्या में लोग आते हैं और भगवान शिव के दर्शन करने के साथ-साथ उन्हें त्रिशूल चढ़ाते हैं।

Pachmarhi Chauragarh Temple
Pachmarhi Chauragarh Temple

चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) के प्राचीन शिव भगवान जी के मंदिर तक जाना आसान बात नहीं है। यह पूरा पहाड़ी रास्ता है और इस रास्ते में आपको किसी भी तरह की सुविधाएं नहीं मिलती हैं। आपको पैदल चलना पड़ता है और यहां तक जाते-जाते आपकी हालत खराब हो जाती है मगर शिव भगवान के भक्त इस रास्ते पर बम बम भोले का जयकार लगाते हुए चलते हैं और भगवान शिव को अर्पण करने के लिए भारी त्रिशूल भी लेकर चलते है। 

Pachmarhi Chauragarh Temple
Pachmarhi Chauragarh Temple

चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) स्थिाति एवं जाने का रास्ता


चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) का महादेव मंदिर पचमढ़ी में स्थित है। पचमढ़ी (Pachmarhi) होशंगाबाद शहर में स्थित है और होशंगाबाद शहर मध्य प्रदेश में स्थित एक शहर है। पचमढ़ी पहुंचने के लिए आपको सबसे अच्छा साधन ट्रेन से है। आप ट्रेन से आसानी से पचमढ़ी (Pachmarhi) पहुंच सकते हैं आप आना चाहें तो अपने वाहन से भी पचमढ़ी आ सकते हैं सड़क मार्ग से भी पचमढ़ी अच्छी तरह से कनेक्टेड है और आप इस पचमढ़ी (Pachmarhi)सड़क मार्ग से भी पहुॅच सकते हैं। आप पचमढ़ी (Pachmarhi) ट्रेन से आते है तो ट्रेन से आपको पहले पिपरिया रेलवे स्टेशन तक आना होता है, वहां से आपको बस एवं जिप्सी की सुविधा मिल जाती है। आप चाहे तो बस से आ सकते हैं या जिप्सी से आ सकते हैं। बस में आपका कम किराया लगता है, 60 रू पचमढ़ी तक का किराया लगता है। जिप्सी में आपको ज्यादा किराया लगता है। आपको जिप्सी में आने के लिए बारगेन करना पड़ता है। आप पिपरिया से पचमढ़ी तक खूबसूरत वादियों का नजारा देखते हुए पहुंच जाते हैं। 

पचमढ़ी में नागपंचमी मेला


पचमढ़ी (Pachmarhi) में आप जब नागपंचमी के मेले में आते हैं तो यहां पर बहुत ज्यादा भीड़ रहती है। आपको पचमढ़ी नगर के बाहरी क्षेत्र में ही उतार दिया जाता है। आपको वहां से पैदल पचमढ़ी (Pachmarhi) नगर तक आना पड़ता है। आपको नाग पंचमी के मेले के समय यहां पर पूरी रोड में बहुत सारी दुकाने मेला दिखाई देगा और पचमढ़ी के बाहरी क्षेत्र इतने सारे वाहन दिखाई देंगे क्योंकि यहां पर लोग नाग पंचमी के टाइम में बहुत दूर-दूर से आते हैं, तो पूरी बस बुक करके आते हैं तो यहां पर आपको बहुत सारे वाहन दिखाई देगी। आप जब पचमढ़ी (Pachmarhi) के बाहरी क्षेत्र पचमढ़ी नगर की तरफ आते है तो आपको बहुत सारी तरह तरह की दुकानें देखने मिलती है। आपको रोड के दोनों तरफ दुकानें दिखाई देगी। 

पचमढ़ी  (Pachmarhi)में जब आप पहुंचते हैं, तो आपको यहां से चैरागढ़ मंदिर तक जाने के लिए जीप या जिप्सी मिल जाती है। मेले के दौरान यहां पर जिप्सी का किराया बहुत सस्ता रहता है। आपको 30 या 40 रू में चौरागढ़ मंदिर (Chauragarh  Shiv Temple) तक आसानी से पहुंचा दिया जाता है। मेले के समय पचमढ़ी में बहुत ज्यादा भीड़ रहती है तो गाड़ी में भी बहुत ज्यादा भीड़ रहती है। गाड़ी वाला एक साथ 10 से 15 लोगों को बैठा लेता है और मंदिर तक छोड़ जाता है।

चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर तक पहुंचने के लिए जो सड़क है वह बहुत खूबसूरत है। यह जो सड़क है इस पर कहीं-कहीं पर ऐसे मोड़ है, जो आपको खतरनाक लगते हैं मगर ड्राइवर जो है वह इन मोड पर गाडी असानी से चला लेता है क्योकि उसे गाड़ी चलाने की आदत रहती है। अगर आप अपने वाहन से इस जगह पर जाते हैं तो गाड़ी आप आराम से चलाइए क्योंकि यहां पर बहुत सारे एक्सीडेंट होते रहते है। आपको यहां पर जरूर 1 या 2 गाड़ी देखने मिल जाएंगी जिनके एक्सीडेंट यहां पर हो चुके हैं। 

Pachmarhi Chauragarh Temple
Pachmarhi Chauragarh Temple

Pachmarhi Chauragarh Temple
Pachmarhi Chauragarh Temple


जिप्सी वाला आपको बड़ा महादेव मंदिर के पास छोड़ देता है। आप चाहे तो बड़ा महादेव मंदिर घूम कर चौरागढ़ मंदिर (Chauragarh  Shiv Temple) के लिए जा सकते हैं। चैरागढ़ मंदिर (Chauragarh  Shiv Temple) के रास्ते में ही आपको गुप्त महादेव मंदिर भी देखने मिल जाएगा । आप गुप्त महादेव मंदिर भी घूम सकते है। 

चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर की पैदल यात्रा 


चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर 3 से 4 किलोमीटर की दूरी पर है। आपको इस मंदिर तक पैदल जाना पड़ता है। यहां पर किसी भी तरह की सुविधाएं नहीं मिलती है और ना ही वाहन चलते हैं। आपको पैदल यात्रा करनी पड़ती है और यह पथरीला रास्ता होता है। आपको यहां पर जूते पहन कर जाना चाहिए क्योंकि चप्पल यहां पर किसी भी काम की नहीं रहती है।आप इस रास्ते से जाते हैं तो आपको यहां पर जंगलों की खूबसूरती देखने मिलता है। यहां पूरा रास्ता जंगल का है चारों तरफ हरे भरे पेड़ों है। यहां पर आपको चारों तरफ हरियाली देखने मिलती है।

आप ऊपर पहूॅचते है तो आपको बहुत मस्त व्यू देखने मिलता है। चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर के रास्ते में एक गुफा देखने मिलेगी जहां पर कहा जाता है कि सीता जी ने अपने वनवास काल के दौरान इस गुफा में ठहरी थी, यह गुफा सीता जी के नाम पर रखी गई है। यहां पर आपको इस गुफा के पास से ही चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर तक जाने के लिए दो रास्ते मिलेंगे एक रास्ता पक्का मिलेगा और एक रास्ता जंगल वाला मिलेगा जो शॉर्टकट है आप वहां से भी चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर तक जा सकते हैं, वैसे मुझे लगता है कि दोनों रास्ते की दूरी समान ही होगी। 

हम लोग पक्के रास्ते से चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर तक गए थे और मैं आपको भी यही रास्ता प्रेफर करूगी, आप पक्के रास्ते से जाएं क्योंकि इस रास्ते में आपको किसी भी तरह की दिक्कत नहीं होगी और आप आराम से जा सकते हैं और जो जंगल वाला रास्ता है जो शॉर्टकट रास्ता है उससे आपको शायद दिक्कत हो सकती है क्योंकि वह रास्ता पूरी तरह से उबड़ खाबड़ हो सकता है। आपको जैसे जैसे उपर चढाते है आपको पहाडियो को खूबसूरत व्यू देखने मिलता है और चारों तरफ हरियाली देखने मिलती है। यहां पर आपको बहुत सारे बंदर भी देखने मिल जाएंगे बंदरों को अब किसी भी तरह का खाना ना डालिए और खाने का सामान हाथ पर लेकर न चलें नहीं तो बंदर आपके हाथ से छीन सकते है।

Pachmarhi Tourist Place


चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर का विवरण 


यह मंदिर बहुत अच्छी तरह से बन गया है और यहां पर आपको आकर बहुत अच्छा लगेगा। यहां पर पानी की व्यवस्था है आप थोड़ा देर आराम करके पानी पीकर भगवान जी के दर्शन करने के लिए जा सकते हैं और यहां पर आप नीचे चप्पल उतार कर फिर भगवान जी के दर्शन करने जा सकते हैं। यहां पर शिव भगवान की जो प्रतिमा है वह बहुत आकर्षक है और आपको बहुत खूबसूरत लगेगी और लोग इतनी दूर दूर से भगवान जी के दर्शन करने के लिए आते हैं और इस प्रतिमा में कहा जाए तो एक प्रकार का जादू है आप इस प्रतिमा को  देखते रह जाएंगे। यहां पर आपको अच्छा लगेगा के प्रतिमा के दर्शन करने के बाद बाहर आते हैं तो आपको गणेश जी का मंदिर देखने मिलेगा आप गणेश जी के दर्शन कर सकते हैं उन्हें प्रसाद चढ़ा सकते हैं। उसके बाद आप मंदिर के सामने तरफ आएंगे तो सामने भी आपको शंकर जी और भी अन्य देवी-देवताओं के दर्शन करने मिल जाएंगे जिनकी प्रतिमा मंदिर के बाहर रखी गई है। आप यहां पर त्रिशूल देख सकते हैं, यहां पर ढेर सारे त्रिशूल रखे गए हैं। इतने सारे और बहुत वजन के यहां पर देखने मिलतेे है। 

हम लोग पहले यहां पर आए थे तो त्रिशूल से पूरी मंदिर की बाउंड्री बनाई गई थी, मगर अभी पूरा कवर कर दिया गया है। आपको यहां से चारों तरफ का खूबसूरत व्यू देखने मिलता है जो एकदम अनोखा रहता है आप शायद इस तरह कभी ना देखे हो और शायद देखे भी हो मगर इसके बारे शब्दों में नहीं बताया जा सकता है। आपको मंदिर के बाहर ही अगरबत्ती जलाने मिलेगी और आप बाहर ही नारियल फोड़ सकते हैं, आप अंदर जाकर सिर्फ भगवान जी के दर्शन कर सकते हैं। शिव भगवान जी के और दर्शन करके आपको बाहर आना पड़ेगा । यहां पर आप खूबसूरत वदियों में फोटोग्राफी भी कर सकते है। आपको यह लगता है कि जो बादल है वह आपके पास ही से उड रहे हो। यहां पर जो बरसात का मौसम रहता उस टाइम भी अच्छा लगता है वैसे गर्मी के मौसम में भी यहां अच्छा लगता है, क्योंकि यहां पर चारों तरफ हरियाली रहती है। यहां के जो पेड़ पौधे रहते हैं वह गर्मी के मौसम में भी हरे भरे रहते हैं। इस जगह पर आकर आपकी थकावट दूर हो जाती है, जो इतनी दूर से आप चल कर आते हैं। वह थकावट आपकी इस जगह पर आकर पूरी तरह से चली जाती है। 

Pachmarhi Chauragarh Temple
Pachmarhi Chauragarh Temple

Pachmarhi Chauragarh Temple
Pachmarhi Chauragarh Temple


अब यहां मंदिर बहुत अच्छा बन गया है। हम इस मंदिर में करीब 10 साल पहले गए थे तब यहां पर कुछ भी नहीं था। यहां पर शिव भगवान की मूर्ति खुले में ही रखी हुई थी और त्रिशूल से मंदिर के चारों तरफ बाॅडरी बनी हुई थी। यहां पर किसी भी तरह की व्यवस्था नहीं थी मगर अब यहां पर हर तरह की व्यवस्था है। 

चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर के रास्ते में लगने वाली दुकानें 


जब आप पचमढ़ी में मेले के दौरान आते है और आप जब इस मंदिर पर पहुंचते हैं, तो मंदिर के रास्ते में आपको बहुत से दुकानें मिलती है। मेले के दौरान यहां पर बहुत सारी दुकानें लगती हैं जहां पर आप खाना खा सकते हैं और नींबू पानी पी सकते हैं और भी बहुत सारी दुकानें लगती हैं। मेले के समय में यहां पर बहुत ज्यादा भीड़ रहती है। मेले के समय में यहां पर आपको भंडारा भी मिलता है। आपको कढ़ी चावल सब्जी पूड़ी यहां खाने मिलता है और भंडारा तो बहुत मस्त रहता है। 

चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर के रास्तें में बहुत दुकाने रहती है आप चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर  के रास्ते मे थक जाते है, आप रास्ते में रेस्ट करके कुछ भी खरीदकर खा सकते है। दुकानों में आपको उबली बेर एवं भुने चने एवं मूगंफली भी मिल जाती है। 

यहां पर आपको बहुत सी ऐसी भी दुकान देखने मिलती है, जहां पर आपको देशी दारू मिलती है, बहुत से लोग यहां से दारू लेते है । इन दुकानों पर आपको 10 या 20 रू गिलास में दारू मिलती है। यहां पर बहुत से लोग दारू पीते हुए देखते हुए मिल जाते है। सस्ती देशी दारू पीकर बहुत से लोग यहां पर घूमते रहते है। 

Pachmarhi Chauragarh Temple
Chauragarh view


चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर में मन्नत पूरी होती है


महादेव मंदिर में आकर श्रद्धालु मन्नत मानते है। यहां पर लोगों की इच्छा पूरी होती है और जिसकी भी इच्छा पूरी होती है वहां महादेव मंदिर में आकर त्रिशूल चढाते है। यहां पर लोग छोटे से लेकर बडे त्रिशूल तक चढाते है। यहां पर लोग 100 से 200 किलो के त्रिशूल लेकर चढाते है। यहां पर आप हजारों की संख्या में त्रिशूल देख सकते है। जो लोगों के द्वारा इतनी दूर से लाए जाते हैं और शिव भगवान जी को अर्पण किए जाते हैं यहां पर लोगों की मन्नत पूरी हो जाती है। 

आपके लिए सलाह


  • आप चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) महादेव मंदिर तक जाने के जूते पहन कर जाएं क्योंकि आप की चप्पल टूट सकती है और हाई हील तो बिल्कुल ना पहने अगर चप्पल पहनते है तो मजबूत चप्पल पहनें। 
  • आप चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) महादेव मंदिर में जाए तो पानी और ग्लूकोस लेकर चलें क्योकि यहां पर आपको बहुत चलना पडता है जिससे आप बहुत थक जाते है। ग्लूकोस से आपको एनर्जी मिलती है तो जरूर लेकर चलें।
  • आप चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) महादेव मंदिर में जाए तो अपने साथ कुछ भुने चने और मूंगफली लेकर जाये जिससे आप जहां पर भी रेस्ट करें तो ये खा सकें। 
  • चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) महादेव मंदिर में आपको बहुत चलना पडता है तो आप बच्चे या बूढे व्याक्ति को परेशानी आ सकती है। 

Satdhara MelaBhutiya GoanKataw Dham


Vijayraghavgarh Fort Katni -- विजयराघव गढ़ किला का इतिहास एवं सम्पूर्ण जानकारी

Vijayraghavgarh Fort Katni 

विजयराघवगढ़ किला 


विजयराघवगढ़ किला (Vijayradhavgarh Fort) कटनी शहर की शान है। यह एक प्राचीन किला है। विजय राघव गढ़ किले में आपको प्राचीन किला देखने मिल जाएगा। विजयराघव गढ़ किले  (Vijayradhavgarh Fort) में आपके देखने के लिए बहुत सारी जगह है, जहां पर आप अपने प्राचीन इतिहास को जान सकते हैं, यहां पर आपको रंग महल, मंदिर, समाधि स्थल, रानी की रसोई, रानी राजा का महल, पुरानी पेटिग, प्राचीन कुआं और भी बहुत सी चीजें आपको यहां देखने मिल जाएंगे।

Vijayraghavgarh Fort Katni
Vijayraghavgarh Fort Katni


विजयराघवगढ़ किले का स्थिाति


विजय राघव गढ़ किला  (Vijayradhavgarh Fortकटनी शहर में स्थित है। कटनी शहर मध्य प्रदेश का एक जिला है। विजयराघवगढ़ कटनी शहर की तहसील एवं नगर पंचायत है। यह किला विजयराघवगढ़ तहसील में स्थित है। यह कटनी शहर से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर होगा, आप यहां पर अपनी गाड़ी से आ सकते हैं। विजय राघव गढ़ किला  (Vijayradhavgarh Fortतक आने के लिए आपको बस भी मिल जाएंगी। यह किला बहुत बड़ा है।

विजयराघवगढ़ किले का जानकारी


विजयराघवगढ़ किले  (Vijayradhavgarh Fortमें आप पहुंचते हैं तो आपको किले के बाहर चारों तरफ घेरे हुए एक गड्ढा दिखाई देगा। इस गड्ढे में पानी भरा हुआ रहता है, पुराने समय में इन गड्ढों में मगरमच्छ एवं जहरीले सांप को रखा जाता था, ताकि कोई भी अगर किले में हमला करता था या किले में घुसने की कोशिश करता था तो उन्हें इन गड्ढों को पार करना उसके लिए मुश्किल था। इससे उन आक्रमणकारी की जान भी जा सकती थी। विजयराघवगढ़ किले  (Vijayradhavgarh Fortके अंदर आप प्रवेश करते हैं, तो आपको बड़ा सा प्रवेश द्वार देखने मिलेगा इस प्रवेश द्वार से आप किले के अंदर प्रवेश करेंगे, तो आपको किले के परिसर में महल देखने मिलेंगे, विजयराघवगढ़ किले  (Vijayradhavgarh Fortका रंगमहल बहुत खूबसूरत है, इसकी बनावट बहुत बढिया है। इस महल में सुंदर सुंदर पेंटिंग है वैसे अब ये पेंटिंग सुंदर नहीं रही है, क्योंकि बहुत से लोगों ने इस पेंटिंग में अपना नाम लिख दिया है और लोग यही करते आ रहे हैं जिससे वह पेंटिंग सुंदर नहीं रही है। मगर इस महल की छत पर भी पेटिंग बनी हुई है। यहां पर आप छत पर पेंटिंग जो देखेंगे उसमें किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ है। यह पेंटिंग बहुत सुंदर है और आप लोगों को वह पेंटिंग अच्छी लगेगी। किले के अंदर आपको बहुत सारे चमगादड़ देखने मिल जाएंगे, जो अंधेरे में रहते हैं, आप इस महल के नीचे आते है तो नीचे भी आप घूम सकते हैं, महल  के नीचे भी घूमने के लिए बना हुआ है। यह महल बहुत खूबसूरत है और यहां पर आपके पिक्चर बहुत अच्छे आती हैं।

Vijayraghavgarh Fort Katni
Vijayraghavgarh Fort Katni

Vijayraghavgarh Fort Katni

Vijayraghavgarh Fort Katni


विजयराघवगढ़ किले  (Vijayradhavgarh Fortके परिसर में आपको घोड़ों को बांधने का स्थान भी देखने मिलेगा, और जब आप मुख्य किले के अंदर जाते हैं तो आपको यहां पर किले के बीच में बहुत बडा आंगन देखने मिलता है, जिसमें आपको समाधि देखने मिलती है, जिसमें सफेद कलर की टाइल्स लगी हुई है, इसके अलावा आपको इस आंगन में मंदिर भी देखने मिल जाता हैं, यहां पर एक कुआं भी स्थित है, जो अब लोहे की राॅड से ढका हुआ है। आप किले के आंगन के बीच से खडे होकर पूरा किला देख सकते है, जो बहुत खूबसूरत है। किले के आंगन के चारों तरफ बरामदे बने हुए हैं, जिनमें खूबसूरत खिड़कियों है, जिनमें  नक्काशी की गई है और जालियां लगी हुई है, जो काफी खूबसूरत है। आप किले में ऊपर चढ़कर भी देख सकते हैं और वैसे यह किला अब काफी जर्जर हालत में है, इसलिए मैं आपको सलाह दूंगी कि आप किले के ऊपर ना चढ़े क्योंकि किले के कई भाग गिर चुके हैं टूटकर और कमजोर हो चुके हैं इसलिए आप किले के ऊपर ना चढ़े हैं यह आपके लिए अच्छा होगा।

इस किले की गवर्नमेंट भी अच्छे से देखभाल नहीं कर रही है तो यह किला काफी जर्जर हालत में जाते जा रहा है। इस किले में किसी भी तरह की कोई फैसिलिटी नहीं है। यहां पर ना ही पीने के लिए पानी है और ना ही शौचालय है। यदि आप यहां पर जाते हैं तो पानी वगैरह लेकर जाए और खाना-पीना लेकर जाए क्योंकि किले के आजू-बाजू आपको किसी भी तरह की दुकानें नहीं मिलेगी। इस किले के थोड़ी ही दूरी पर आपको बाजार जरूर देखने मिलेगा, जो विजयराघवगढ़ तहसील में भरता है। जहां से आप खाना पीना या नाश्ता वगैरह कर सकते हैं। आप इस किले में ज्यादा टाइम बिताना चाहते हैं, तो आप खाने पीने का सामान साथ लेकर जाइए। इस किले किसी भी प्रकार की एंट्री फी नहीं लगती है और सिर्फ आपको अपना नाम, पता एवं मोबाइल नंबर  लिखना पड़ता है।

Vijayraghavgarh Fort Katni
Vijayraghavgarh Fort Katni

Vijayraghavgarh Fort Katni


विजय राघव गढ़ किले  (Vijayradhavgarh Fort) का निर्माण 


विजयराघव गढ़ किले  (Vijayradhavgarh Fort) का निर्माण राजा प्रयाग दास जी ने किया था। राजा प्रयाग दास जी मैहर राजा के भाई थे। इस किले के निर्माण 1826 में हुआ था  और कई वर्षों तक इस किले का निर्माण कार्य चला था। इस किले की  खासियत यह है कि यह बहुत सुरक्षित किला है। आपको किले में बहुत ही खूबसूरत पत्थरों पर नक्काशी देखने मिल जाती है। राजा प्रयाग दास के पुत्र सरयू प्रसाद ने अंग्रेजो के खिलाफ लड़कर देश को आजाद कराने में महत्वपूर्ण योगदान निभाया है। राजा सरयू प्रसाद ने अंग्रेजों के खिलाफ 1857 की क्रांति में शामिल हुए थे, जिससे अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और उनसे यह किला छीन लिया।

विजयराघवगढ़ किले आने की उपयुक्त समय


विजय राघव गढ़ किले  (Vijayradhavgarh Fortमें जाने का सबसे उपयुक्त समय ठंड का या बरसात का होता है। गर्मी में यहां तापमान बहुत ज्यादा होत है और बहुत ज्यादा गर्मी पड़ती है तो आपको यहां आने में परेशानी हो सकती है और किला घूमने में परेशानी हो सकती है।  मगर ठंड के समय आप पूरा किला  घूम सकते हैं।विजय राघव गढ़ किला  (Vijayradhavgarh Fort) सुबह 10 बजे से 6 बजे तक खुला रहता है। आप इस टाइम पर किले में आ सकते हैं। किले से लगभग 100 मीटर की दूरी पर पुलिस स्टेशन स्थित है और पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस स्थित है। आप इस किले में आसानी से आ सकते हैं। किले तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क है। इस किले से आप मैहर से, कटनी से, और सतना से आराम से पहुंच सकते हैं। मैहर वाली जो रोड है किले की वह बहुत ज्यादा खराब है, इस रोड में रात को सफर नहीं किया जा सकता है, क्योंकि रोड बहुत ज्यादा खराब है


विजय राघव गढ़ किला  (Vijayradhavgarh Fort) बहुत खूबसूरत और बहुत बड़ा किला है। आप यह किला पूरा घूम सकते हैं, यहां पर करीब आपका एक से 2 घंटा आराम से लग जाएगा। आप यहां पर अपनी फैमिली और फ्रेंड्स  के साथ आ सकते हैं, यह एक अच्छा पिकनिक स्थल है आप पिकनिक मनाने भी आ सकते हैं, यहां पर आपको बहुत अच्छा लगेगा यहां पर ज्यादा भीड़ भाड़ नहीं रहती है।








Beautiful ghat of Gwarighat in Jabalpur city || जबलपुर शहर के नर्मदा नदी का खूबसूरत घाट

Gwarighat

ग्वारीघाट

ग्वारीघाट (Gwarighat) एक ऐसी खूबसूरत जगह है जहां पर आपको नर्मदा नदी के अनेक  घाट एवं भाक्तिमय वातवरण देखने मिल जाएगा। ग्वारीघाट (Gwarighat) एक बहुत अच्छी जगह है गौरी घाट में घाटों की एक श्रंखला है। ग्वारीघाट (Gwarighat) में आके आपको बहुत शांती एवं सुकून मिलता है। आप यहां पर नर्मदा मैया के दर्शन कर सकते है, उन्हें प्रसाद चढा सकते है। ग्वारीघाट (Gwarighatमें सूर्यास्त का नजारा भी बहुत मस्त होता है। 


Gwarighat
Gwaright View

ग्वारीघाट (Gwarighat) की स्थिाति 


ग्वारीघाट (Gwarighatजबलपुर जिले में स्थित है। जबलपुर जिला मध्य प्रदेश में स्थित है जबलपुर जिले को संस्कारधानी के नाम से भी जाना जाता है। जबलपुर से नर्मदा नदी बहती है। ग्वारीघाट (Gwarighat) नर्मदा नदी पर स्थित है। ग्वारीघाट एक अद्भुत जगह है, जिसके दर्शन करने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। ग्वारीघाट (Gwarighat) पहुंचने के लिए आप मेट्रो बस और ऑटो का प्रयोग कर सकते हैं। आपको ग्वारीघाट (Gwarighat) पहुंचने के लिए जबलपुर जिले के किसी भी हिस्से से बस या ऑटो की सर्विस मिल जाती है। ग्वारीघाट (Gwarighat) पर आप अपने वाहन से भी आ सकते हैं। 

आपको मेट्रो बस या आटो से आते है, तो आटो वाला आपको ग्वारीघाट (Gwarighat)  के चैक पर छोड सकता है जहां से आपको पैदल आना पड सकता है। यह पैदल रास्ता भी बहुत अच्छा रहता है आपको यहां पर बहुत सारी दुकानें मिल जाएगी जहां से आप शॉपिंग कर सकते हैं। अगर आपको मेट्रो बस वाला या ऑटो वाला ग्वारीघाट (Gwarighat) के घाट के पास उतारता है तो आप प्रसाद ले सकते हैं, सिंदूर वगैरह खरीद सकते हैं। आपको घाट के पास ही में बहुत सारी दुकान मिल जाती है। 


Gwarighat
Gwarighat View

ग्वारीघाट के फैमस घाट (Gwarighat ke Ghats)


ग्वारीघाट (Gwarighat) में बहुत सारे घाट हैं। हर घाटों के अलग-अलग नाम है और अलग अलग पहचान है। ग्वारीघाट (Gwarighat) के सारे घाट अच्छी तरह से बने हुए है। ग्वारीघाट के सारे घाट में आपके बैठने की उत्तम व्यवस्था है। ग्वारीघाट (Gwarighat) के सभी घाटों में अब साफ सफाई का बहुत ज्यादा ध्यान दिया दिया जाता है, मगर लोग यहां पर फिर भी गंदगी करते हैं। यहां पर कूड़ेदान की भी व्यवस्था है और घाटों पर  साफ सफाई करने वाले लोग लगे रहते हैं। 

सिद्ध घाट 

ग्वारीघाट (Gwarighat) में सबसे पहला घाट सिद्ध घाट है। आपको सिद्ध घाट पर शंकर जी का मंदिर देखने मिलेगा और वहां पर गोमुख देखने मिलेगा। इस गोमुख से लगातार साल के 12 महीने और 24 घंटे पानी बहता रहता है। यह घाट बहुत खूबसूरत है और बहुत अच्छे से बना हुआ है।  यहां पर गोमुख के पास शंकर जी का मंदिर भी है, जिसमें शंकर जी का शिवलिंग विराजमान है। गोमुख के पास ही शंकर जी की मूर्ति भी विराजमान है जो बहुत खूबसूरत है गोमुख के पास ही अन्य मूर्तियां विराजमान है जैसे काली जी की दुर्गा जी की गणेश जी की और भी मूर्तियां विराजमान है।


Gwarighat
Gwarighat Temple

Gwarighat
Gwarighat Gau mukh
Gwarighat
Gwarighat Gau mukh

उमा घाट

ग्वारीघाट (Gwarighat) पर दूसरा घाट है उमा घाट, आप सिध्द घाट से आगे आते है तो आपको यह घाट देखने मिलेगा। उमा घाट बहुत अच्छा घाट है। उमा घाट में माता नर्मदा जी की आरती शाम को 7 बजे की जाती है। इस घाट में शिव भगवान के 12 ज्योतिर्लिंगों के प्रतिरूप भी स्थापित है, जिनके दर्शन आप कर सकते हैं। उमा घाट पर गार्डन बना हुआ है, जहां पर आप बैठ सकते हैं। गर्मी के टाइम यहां पर बहुत अच्छा लगता है और बहुत शांति मिलती है। 
उमाघाट आप आगे बढ़ेंगे तो आपको यहां पर नर्मदा जी का मंदिर देखने मिल जाएगा । इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि मंदिर में तैर कर नहीं जाया जा सकता है क्योंकि उससे कुछ ना कुछ अशुभ घटना हो सकती है। नर्मदा मंदिर पर आप नाव से जा सकते हैं और माता नर्मदा जी के दर्शन कर सकते हैं। नर्मदा मंदिर के सामने आपको बहुत सारे पंडित जी देखने मिल जाएंगे जो पूजा कराते हैं, यहां पर पंडित जी एक पलंग के उपर बैठ रहते है। सभी पंडितों की अलग अलग पलंग होता है। ये पंडित जी आपकी पूजा और कथा करा देते है। आपका यहां पर मुंडन भी हो जाता है, यहां पर बहुत सी दुकानें है मुंडन की। 

Gwarighat
Gwarighat Shiv Murti

दरोगा घाट

आप उमा घाट से आगे बढते है तो आपको दरोगा घाट देखने मिलता है, दरोगा घाट के बारे में कहा जाता है कि दरोगा घाट में आप समान एक घाट से दूसरे घाट नाव के द्वारा ले जाया जाता था। जिसका किराया यहां पर वसूला जाता था। इस कारण इस घाट को दरोगा घाट कहते है। इस घाट से गाड़ियों को भी नावों के द्वारा एक घाट से दूसरे घाट तक ले जाया जाता है। 

खारी घाट 

ग्वारीघाट (Gwarighat) में खारी घाट भी है यह भी बहुत खूबसूरत और शांत घाट है इस  घाट की विशेषता यह है कि इस घाट में घारी का विसर्जन किया जाता है। यहां पर ज्यादा भीड़ नहीं रहती है। यहां पर भी अच्छा वातावरण रहता है यहां पर भी आप नहा सकते हैं यहां चेंज करने के लिए भी यहां पर आपको चेंजिंग रूम मिल जाता है। इस घाट पर आप दरोगा घाट से पैदल आ सकते हैं, यह घाट दरोगा घाट के पास ही में है।

जलहरी घाट

जलहरी घाट भी ग्वारीघाट (Gwarighat) का एक घाट है। यह घाट ग्वारीघाट (Gwarighat) के मुख्य घाटों से थोड़ी दूरी पर है आप यहां पर पैदल जा सकते हैं। यह घाट ग्वारीघाट (Gwarighat) के अन्य घाटों से करीब 1 किमी या आधा किलोमीटर की दूरी पर होगा । इस   घाट पर आपकी गाड़ी के पार्किंग का किराया लगता है। यह घाट भी काफी अच्छा है यहां पर बहुत सारे मंदिर है जिनके आप दर्शन कर सकते हैं यहां पर कांच का एक प्रसिद्ध मंदिर है जिनके आप दर्शन कर सकते हैं


गौ कुंभ मेला


ग्वारीघाट (Gwarighat) में 24 फरवरी 2020 में गौ कुंभ भी आरंभ होने जा रहा है। इस कुंभ में दूर दूर से लोग आने वाले है और इस कुंभ में संत समागम होने वाला है। गौ कुंभ का आयोजन गीता धाम के सामने वाले मैदान में किया जा रहा है। इस कुंभ के लिए अभी से बहुत सी व्यवस्थाए की गई है। यहां पर साफ सफाई और मेले के आयोजन के लिए अभी से तैयारियाॅ पूरी तरह से पूर्ण हो गई है। इस कुंभ मेले में धर्म आध्यतम, संत समागम, मेला एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है । गीता धाम के सामने यज्ञ स्थली तैयार की गई है, जो बहुत खूबसूरत बहुत भव्य है।


Gwarighat
Birds in Gwarighat

ग्वारीघाट (Gwarighat) के हर घाट में नहाने की व्यवस्था है और हर घाट में आपको कपड़े बदलने के लिए चेंजिंग रूम मिल जाता है, तो आप नहाकर कपड़े बदल सकते हैं।

ग्वारीघाट (Gwarighat) में आपको बहुत सारी दुकानें मिल जाएंगी । जहां पर आप खाना खा सकते हैं और चाय नाश्ता कर सकते हैं। ग्वारीघाट (Gwarighat) पर कक्कड़ भर्ता बहुत फेमस होता है तो आप यहां पर कक्कड़ बनाकर भी खा सकते हैं या फिर होटल से खरीद कर खा भी सकते हैं

ग्वारीघाट (Gwarighat) के सामने आपको गुरुद्वारा देखने मिलेगा जहां पर आप नाव से जा सकते है। यहां पर जाने का नाव से बहुत सस्ता किराया लगता है। गुरुद्वारा बहुत खूबसूरत लगता है। यहां सफेद कलर की बिल्डिग है। आप अगर रविवार को जाते है तो आप यहां लंगर खा सकते है। 

ग्वारीघाट (Gwarighat) में आपको बहुत सारे घाट और मंदिर देखने मिल जाएंगे। ग्वारीघाट (Gwarighat) के घाटों पर आप स्नान भी कर सकते हैं। घाटों पर साबुन और शैम्पू लगाने के लिए मनाही है, यह बहुत अच्छी बात है कि लोगों में जागरूकता फैल रही है कि वह साबुन का यूज ना करें और अपनी नर्मदा नदी को साफ रखने में महत्वपूर्ण योगदान दें। नर्मदा नदी में लोग अपने घरों के भागवन के पोस्टर और भगवान की पुरानी एवं खण्डित मूर्तियां भी छोड़ देते हैं। हम लोगों को इन वस्तुओं को भी नर्मदा नदी में नही डालना चहिए। जिससे नर्मदा नदी साफ रहे।

ग्वारीघाट (Gwarighat) बहुत अच्छी जगह है और हमें इसके सभी घाट को साफ सुथरा रखना चाहिए। हमारी नदियों को साफ सुथरा रखना चाहिए इसके आजू-बाजू हमें गंदगी नहीं करनी चाहिए। हमें कचरा यहां पर नहीं डालना चाहिए क्योंकि  नदिया ही हमारे पीने के पानी का मुख्य स्त्रोत है और हमें नदियों से ही पीने के पानी मिलता है। 


Gwarighat
Gwarighat View


ग्वारीघाट (Gwarighat) में आपको नाव की सवारी करने मिल जाती है। यहां पर बहुत कम रेट पर आप नाव की सवारी कर सकते हैं, मगर नाव की सवारी के लिए आप बरेगन जरूर करें। 

ग्वारीघाट (Gwarighat) में ठंड के मौसम में विदेशी पक्षी आते हैं। इन विदेशी पक्षियों को दाना डालने पर यह आपके पास आ जाते हैं । इनको डालने वाला दाना आपको ग्वारीघाट (Gwarighat) में ही मिल जाता है, यह विदेशी पक्षी बहुत खूबसूरत लगते हैं और दाना डालने पर और आवाज लगाने पर यह एकदम से आपके पास आ जाते हैं जो बहुत ही मनोरम लगता है और इन पक्षियों की आवाज बहुत ही खूबसूरत लगती है। फरवरी के महीने में भी आपको यह विदेशी पक्षी देखने मिल जाते हैं।

ग्वारीघाट (Gwarighat) में बहुत सारे आश्रम है जो बहुत से फेमस संतों के है। ये आश्रम ग्वारीघाट (Gwarighat) के आस पास में स्थित है। यहां पर लोग आकर रहते हैं जिनके कोई नहीं रहता है और अपनी सेवा आश्रम को देते है। इसके अलावा  ग्वारीघाट (Gwarighat) में बहुत सारे भंडारे होते रहते हैं तो आप यहां से प्रसाद ग्रहण कर सकते हैं।

ग्वारीघाट (Gwarighat) एक बहुत अच्छी जगह है। यहां पर आप अपनी फैमिली और फ्रेंड्स के साथ आ सकते हैं और बहुत अच्छा टाइम बिता सकते हैं। 

Kachnar City Jabalpur -- जबलपुर का कचनार सिटी शिव मंदिर

Kachnar City Jabalpur

कचनार सिटी मंदिर


कचनार सिटी मंदिर (Kachnar City Temple) जबलपुर शहर का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। यहां पर शिव भगवान की आपको बहुत ही सुंदर प्रतिमा देखने मिलती है । यह प्रतिमा बहुत ही ऊंची है, इस प्रतिमा के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। कचनार सिटी मंदिर (Kachnar City Temple) में बहुत ही खूबसूरत गार्डन बना हुआ है एवं गार्डन के बीच में इस सुंदर प्रतिमा का निर्माण किया गया है। गार्डन में शिव भगवान की प्रतिमा के आतिरिक्त और भी प्रतिमाए है जो बहुत खूबसूरत है। यहां पर 12 ज्योतिर्लिंगों की स्थापना भी की गई है। शिव भगवान की विशाल प्रतिमा के सामने नंदी भगवान की सफेद पत्थर की प्रतिमा भी स्थित है। 

Kachnar City Jabalpur
Kachnar City Jabalpur

कचनार सिटी शिव मंदिर


कचनार सिटी मंदिर (Kachnar City Temple) बहुत खूबसूरत है। मंदिर में खुले आसमान के नीचे शिव भगवान की बहुत ही खूबसूरत और उची प्रतिमा विराजमान है। शंकर भगवान की यह प्रतिमा 76 फीट उची है। इस मंदिर में शिव भगवान की बैठी हुई मुद्रा में प्रतिमा है। यहां मंदिर साफ सुथरा और अच्छी तरह से प्रबन्धित है। यहां पर आकर आपको बहुत शांती मिलती है। शंकर भगवान की प्रतिमा के अंदर ही आपको एक गुफा देखने मिलेगी। गुफा के अंदर 12 शिवलिंग की स्थापना की गई है। गुफा के अंदर 12 शिवलिंग है वहां 12 ज्योतिर्लिंगों के प्रतिरूप है। आप गुफा में एक दरवाजे से घुसते है और 12 शिवलिंगों के दर्शन करते हुए दूसरे दरवाजे से बाहर आ जाते है। ये 12 ज्योतिर्लिंगों के प्रतिरूप अलग अलग जगहों से लाये गए है। मंदिर परिसर में खूबसूरत गार्डन है, जिसमें शिव भगवान की भव्य प्रतिमा के अतिरिक्त और भी प्रतिमाए बनाई गई है, गार्डन को सजाने के लिए जो बहुत आकर्षक लगती है। ये प्रतिमाए रिषि मुनि की है जो शिव भगवान का भजन कर रही है। आप जब कचनार सिटी मंदिर  (Kachnar City Temple) आते है तो आपको मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वारा में लोहे के गेट उपर शिव भगवान और माता पार्वती की भव्य प्रतिमा देखने मिलती है। आप मंदिर के अंदर जाते हैं तो आपको शिव भगवान की विशाल प्रतिमा देखने मिल जाती है। आप अपने पैर धोकर अंदर जा सकते हैं। चप्पल रखने के लिए आपको यहां पर एक चप्पल स्टैंड मिल जाता है। जहां पर आपसे 2 Rs. लिया जाता है और आप वहां पर चप्पल रख सकते हैं। उसके बाद आप भगवान शिव जी के दर्शन करने जा सकते हैं। शिव भगवान जी की बहुत बड़ी प्रतिमा यहां पर बनी हुई है। यह प्रतिमा 76 फीट ऊंची है। प्रतिमा के सामने ही यज्ञ स्थल बना हुआ है जहां पर यज्ञ किये जाते है। आपको शिव भगवान के दर्शन करके बहुत अच्छा लगेगा है। यहां पर खूबसूरत गार्डन भी बना हुआ है, आपको यहां पर बैठने की जगह भी है, जहां पर आप बैठ सकते है और शांती से अपना समय गुजर सकते है। यहां पर शिव भगवान जी की प्रतिमा के सामने ही नंदी भगवान की प्रतिमा है। नंदी भगवान और शिव भगवान दोनों की प्रतिमा आमने-सामने है। इस मंदिर का निर्माण का श्रेय कचनार बिल्डर श्री अमित तिवारी को जाता है जिन्होंने इस मंदिर को बनवाया है। 

Kachnar City Jabalpur
Kachnar City Jabalpur


कचनार सिटी मंदिर (Kachnar City Temple) साल में सभी दिन खुला रहता है, और यहां पर लोगों का आना जाना लगा रहता है। इस मंदिर के खुलने का समय सुबह से दोपहर तक रहता है। मंदिर शायद 12 या 1 बजे बंद हो जाता है। उसके बाद मंदिर शाम को 5 बजे खुलता है। शिवरात्रि और सावन सोमवार के दिन मंदिर पूरे दिन खुला रहता है। मंदिर के बाहर आपको रेस्टोरेट देखने मिल जाते है जहां पर आप चाय पी सकते है और नाश्ता भी कर सकते है। यहां पर आपको वाहन पर्किग, पीने के पानी की व्यवस्था, बाथरूम की सुविधा मिल जाती है। कचनार सिटी मंदिर (Kachnar City Temple) रात में खूबसूरत लाइट की रोशनी में जगमगा जाता है। रात में भी यहां पर आपको बहुत अच्छा लगेगा। मंदिर को रंगीन लाइटों से सजाया गया है, जो रात को जलती है और मंदिर की खूबसूरती और अधिक बढ जाती है। यहां पर शाम को आरती 7 बजे होती है जिसमें आप शमिल हो सकते है, अगर शाम को आते है। 

Kachnar City Jabalpur
Kachnar City Jabalpur


कचनार सिटी मंदिर (Kachnar City Temple) जबलपुर जिले में विजय नगर में स्थित है। जबलपुर मध्य प्रदेश का एक जिला है, जबलपुर जिले को संस्कारधानी के नाम से भी जाना जाता है। यहां पर आपको बहुत सारे दर्शनीय स्थल देखने मिल जाते हैं जिनमें से कचनार सिटी मंदिर (Kachnar City Temple) भी एक प्रमुख दर्शनीय स्थल है। जबलपुर रेल्वे स्टेशन से कचनार सिटी मंदिर की दूरी 7 से 8 किमी की होगी। आपको इस मंदिर तक पहुंचने के लिए विजय नगर चैक तक जाना होगा। अगर आप आटो से आते है तो चैक से इस मंदिर तक आपको पैदल ही जाना होगा। चैक से मंदिर की दूरी 1 किमी हो सकती है। आप यहां पर मेट्रो बस से भी आ सकते है। मेट्रो बस भी आपको विजय नगर चैक तक छोडगी बाकि का रास्ता आपको पैदल ही जाना होगा। यहां तक जाने के लिए आपको पक्की सड़क मिल जाती है। यहां जाने के लिए मेट्रो बस और ऑटो चलती रहती है। आपको किसी भी आपको जबलपुर के किसी भी क्षेत्र से यहां जाने के लिए मेट्रो बस और ऑटो मिल जाएगी। आप अपने वाहन से भी इस मंदिर तक असानी से आ सकते है। 

शिवरात्रि और सावन सोमवार का मेला


कचनार सिटी मंदिर (Kachnar City Temple) में शिवरात्रि और सावन सोमवार में बहुत ज्यादा भीड़ होती है। यहां पर महाशिवरात्रि में और सावन सोमवार में विशाल मेले का आयोजन होता है और यहां पर भंडारे का भी आयोजन होता है, जिसमें जाकर आप भंडारे को ग्रहण कर सकते हैं। आपको महाशिवरात्रि एवं सावन सोमवार के टाइम में यहां बहुत ज्यादा भीड़ देखने मिलती है। यहां पर आपको विजयनगर चैक और मंदिर तक जो रोड बनी हुई है, उसमें तरह तरह की दुकानें और भंडारे देखने मिल जाती है महाशिवरात्रि एवं सावन में। आपको यहां पर अनेक तरह के सामने मिल जाएगे वो भी सस्ते रेट पर। 
Kachnar City Jabalpur
Kachnar City Jabalpur

कचनार सिटी मंदिर (Kachnar City Temple) बहुत खूबसूरत एवं शांत जगह है। मंदिर में शिव भगवान की एक विशाल प्रतिमा है, जिसके दर्शन करने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। आपको यहां पर आकर बहुत अच्छा लगेगा। आप यहां पर अपनी फैमिली और दोस्तों के साथ आ सकते है और अच्छा समय बिता सकते है। 

चौसठ योगिनी मंदिर, जबलपुर
निदान कुंड जलप्रपात, दमोह
नजारा व्यूप्वाइंट, दमोह
पचमढ़ी यात्रा

Adegaon Fort and Kalbhairav Temple || आदेगांव का प्रसिध्द कालभैरव जी का मंदिर

आदेगांव का किला एवं काल भैरव जी का मंदिर


आदेगांव का किला (Adegaon Fort) एवं काल भैरव जी का मंदिर (Kaal Bhairav ji ka mandir) एक खूबसूरत पर्यटन स्थल है।  किले के अंदर कालभैरव जी का अतिप्रचीन मंदिर है। आदेगांव का किला (Adegaon Fort) 18 वी शताब्दी में बनाया गया था। इस मंदिर में काले भैरव, बटुक भैरव एवं नाग भैरव की सुंदर प्रतिमाए स्थित है। इस जगह में और भी चमत्कारी वस्तुए मौजूद है। यह पर श्यामलता का वृक्ष स्थित है जो विश्व में सिर्फ दो जगह ही पाया गया है। 

Adegaon Fort and Kalbhairav Temple
Adegaon Fort and Kalbhairav Temple


आदेगांव का किला 


यह किला सिवनी जिले की लखनादौन तहसील से 18 किमी की दूरी पर है। आदेगांव नाम की इस जगह में आप पहुॅचते है तो यह किला आपको दूर से नजर आने लगता है। इस किले तक पहॅुचने का रास्ता आदेगांव की बाजार से होते हुए जाता है। मगर आप अगर रविवार दिन इस किलें में जाते है, इस दिन बाजार के एरिया से न जाये। आप बाजार के बजाय गांव के बाहर से ही एक रोड स्कूल की तरफ से होते हुए इस किले तक जाता है, आप वहां से जा सकते है। आपको किले के पास पहुॅचते है, आप को किला एक पहाड की चोटी पर दिखता है जिस तक पहॅुचने के लिए आपको सीढियों से चढकर जाना होगा। इस किले के उपर पहुॅचकर आपको बहुत अच्छा व्यू देखने मिलता है। आपको आदेगांव के आसपास का नजारा देखने मिल जाता है। इस किला का निर्माण अठारहवीं शताब्दी में मराठा शासनकाल में सैनिकों के लिए ऊंचे पहाड़ पर किया गया था। इस किले को गढी के नाम से भी जाना जाता है। इस किले या गढी की निर्माण की नीवं नागपुर के मराठा शासक रघुजी भोंसले के शासनकाल में 18 वी शताब्दी में उनके गुरू नर्मदा भारती (खड़क भारतीय गोंसाई) ने डाली थे। इन्हें भोसले शासन ने 84 गांव की जागीर दी थी। इनके द्वारा ही किले के भीतर भैरव बाबा के मंदिर का निर्माण किया गया था। वर्तमान में इस किले में आपको इसके चारों तरफ जो बुर्ज बनें हुए है वो देखने मिल जाते है बाकी का किला अब ध्वस्त हो गया है। आदेगांव की उची पहाडी पर इस किले का निर्माण ईंट, पत्थर व चूना- मिट्टी से करवाया था। किले की बाहरी दीवार अभी भी मजबूती से खडी है, सदियाॅ बीत गई मगर इन दीवार को अभी तक कोई भी नुकसान नहीं हुआ है। किले की बाहरी दीवार और बुर्जो को छोडकर बाकी सारी निर्माण अब ध्वस्त हो गया है। आपको किले के अंदर यह ध्वस्त निर्माण देखने मिल जाएगा। यह किला अयातकार आकार का है। किले के पीछे एक बडा तालाब है। इस किले का मुख्य दरवाजा का मुख पूर्व की तरफ है। पश्चिम की तरफ भी एक दरवाजा है जहां पर आप किले के बाहर जा सकते है, यहां पर एक शटर लगा हुआ है, यहां से आप तालाब की तरफ जा सकते है। तालाब की तरफ जाने के लिए यहां सीढियाॅ दी गई है। इस किले में पुरातत्व विभाग द्वारा खुदाई का कार्य भी किया गया था। इस खुदाई के दौरान यह पर कक्ष, बरामदे एवं अन्य निर्माण होने का पता चला। बाद में खुदाई बंद कर दिया गया। इस किले का निर्माण मुख्य रूप से हथियारों व सैनिकों के उपयोग के लिए किया गया था। इस किले के पास ही पहाडी के उपर एक स्कूल बना हुआ है शायद यह प्राइमरी स्कूल है। आप किले के बाहरी क्षेत्र में एक मस्जिद भी देख सकते है। यह पर एक पानी की टंकी का निर्माण भी किया गया है। किले के बाहरी हिस्से से आपको तालाब भी देखने मिल जाता है। किले में भीतर दीवार से सटाकर पत्थर की चीप लगी हुई ताकि आप इस चीप में चलकर पूरा किला घूम सकते है। यह किला मुख्य प्रवेश द्वार से आप जैसे अंदर जाते है आपको काल भैरव मंदिर देखने मिल जाता है। आदेगांव किले (Adegaon Fort) और गांव में मराठा शासक के गुरु नर्मदा भारती का शासन था। गुरू नर्मदा भारती से यह किला शिष्य परम्परा के अंर्तगत उनके शिष्य भैरव भारती, धोकल भारती व दौलत भारती को सौंपा गया, बाद में यह किला ब्रिटिश सरकार ने मराठा शासकों से इस किले का आधिपत्य छीनकर किलें में कब्जा कर लिया था। यह एक प्राचीन किला है इसे देखने के लिए दूर दूर से लोग आते है। 

Adegaon Fort and Kalbhairav Temple
Adegaon Fort and Kalbhairav Temple
Adegaon Fort and Kalbhairav Temple
Adegaon Fort and Kalbhairav Temple

श्री काल भैरव का प्राचीन मंदिर


यह किला काल भैरव की गढी के नाम से भी प्रसिध्द है। किले में भगवान काल भैरव का प्राचीन मंदिर है। लोगों के इस मंदिर के प्रति बहुत श्रध्दा भक्ति है। लोग इस मंदिर के दर्शन करने के लिए दूर दूर से आते है। आदेगांव किले के अंदर विराजमान मंदिर  कालभैरव, नागभैरव व बटुकभैरव विराजमान है जिनकी पूजा सदियों से होती आ रही है। लोग इसे दूसरा काशी के नाम से भी जानते हैं। लोगों का कहना है कि बनारस की तरह यहां पर भगवान कालभैरव की खड़े स्वरूप में प्राचीन प्रतिमा स्थापित है। भैरव अष्टमी के दिन इस किले के भैरव बाबा मंदिर में पूरे सिवनी जिले से एवं अन्य जिलों से भी लोग आते है। 
Adegaon Fort and Kalbhairav Temple
Adegaon Fort and Kalbhairav Temple

दुर्लभ श्यामलता वृक्ष की उपस्थिति


आदेगांव का यह किला अपने प्राचीन इतिहास के साथ भैरव बाबा के मंदिर के लिए प्रसिध्द है। इस किला में आपको एक दुर्लभ वृक्ष देखने मिल जाएगा जो दुनिया में और कहीं आपको देखने नहीं मिलेगा। यहां श्यामलता का वृक्ष किले के पिछले हिस्से में तालाब के किनारे लगा हुआ है। यह वृक्ष इस जगह के अलावा एक जगह और मिलता है। इस दुर्लभ वृक्ष की विशेषता यह है कि वृक्ष की पत्तियों में श्रीराधा कृष्ण का नाम लिखा दिखाई देता है। वृक्ष कब और किसने लगाया यह आज भी लोगों को इस बारें में किसी भी प्रकार की जानकारी नहीं है। 


किले की स्थिति एवं पहुॅचने का रास्ता 


आदेगांव का किला (Adegaon Fortसिवनी जिले में स्थित है। आदेगांव का किला सिवनी जिले की लखानदौन तहसील स्थित है। यह किला लखानदौन तहसील से करीब 18 किमी की दूरी पर स्थित है। आदेगांव का किला सिवनी जिला मुख्यालय से करीब 78 किमी की दूरी पर होगा। यह किला जबलपुर जिले से करीब 103 किमी की दूरी पर होगा। नरसिंहपुर किला से यह किला 60 किमी की दूरी पर स्थित होगा। यह किला मंडला से लगभग 114 किमी और छिदवाडा से लगभग 106 किमी की दूरी पर होगा। यहां पर आप सडक मार्ग से असानी से पहूॅच सकते है। यहां तक जाने के लिए अच्छी सडक बनी हुई है। आपको यह तक आने के लिए अपने वाहन का प्रयोग करना चाहिए क्योकि वहां आपके लिए अच्छा हो सकता है। यहां पर आटो या बस भी चलती होगी पर वो समय समय पर चलती होगा अगर आपको बस या आटो से सफर करना है तो आपको समय का विशेष ध्यान रखना होगा। आपको यहां पहॅुचने के लिए पहले लखनादौन पहॅूचना होगा। लखनादौन से आदेगांव नाम की जगह करीब 18 किमी की दूरी पर है । आप यहां तक आने के लिए श्रीनगर कन्याकुमारी हाईवे मिल जाता है आप हाईवे से आराम से इस जगह तक पहॅूच सकते है। हाईवे रोड अच्छी है मगर जब आप आदेगांव वाली रोड में जाते है तो वहां रोड कहीं कही पर थोडी खराब है। आपको इस किले तक आने के लिए नजदीक रेल्वे स्टेशन घंसौर और नरसिंहपुर का पडता है। नरसिंहपुर और घंसौर रेल्वे स्टेशन इस किले से लगभग 55 किमी की दूरी हो सकते है। 

यह किला एवं भैरव बाबा का मंदिर दोनों ही प्राचीन है। यह किला पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित है। किले को देखने दूर-दूर से लोग आदेगांव पहुंचते हैं। यहां पर भैरव अष्टमी बड़े ही धूमधाम से मनाई जाती है। किले के पीछे श्यामलता का अदुभ्त वृक्ष लगा हुआ है जो पूरी दुनिया में अनोखा है। यहां पर मेले का आयोजन भी किया जाता है जहां पर सुबह के समय शोभायात्रा निकली जाती है। जिसमें बडी संख्या में भक्तगण आते है। 

Roopnath Dham, Katni || रूपनाथ धाम कटनी जिले का दर्शनीय स्थल

Roopnath Dham

रूपनाथ धाम 

रूपनाथ धाम (Roopnath Dham) एक ऐसी जगह है जहां पर आपको एक साथ कई तीर्थ स्थल के दर्शन करने मिल जाते है, यहां पर आपको शिव भगवान का एक प्राचीन मंदिर एवं गुफा, शिव पार्वती, सीताराम, और राधा कृष्णा का मंदिर, एक छोटा बांध,  प्राचीन कुंड, समा्रट अशोक का शिलालेख, उची उची विशाल चटटानें, एक बडा तालाब, शिव भगवान की एक अदुभ्त प्रतिमा जो आपको और कही देखनें नहीं मिलेगी। आपको एक साथ एक ही जगह पर इन सभी के दर्शन करने मिल जाते है। यह जगह धार्मिक होने के साथ साथ प्राकृतिक खूबसूरती से भी भरी हुई है। 

Roopnath Dham, Katni
Roopnath Dham, Katni

रूपनाथ धाम का प्राकृतिक सौदर्य

रूपनाथ धाम (Roopnath Dhamमध्यप्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थल में से एक है। यह जगह बहुत सुंदर और शांत है। यह जगह पूरी तरह से प्राकृतिक है। यहां पर आपको तीन कुंड देखने मिलेगें, जिन्हें राम कुंड, सीता कुंड एवं लक्ष्मण कुंड के नाम से जाना जाता है। यहां तीनों कुंड एक दूसरे के उपर बने हुए है। सबसे निचले कुंड को लक्ष्मण कुंड, बीच वाले कुंड को सीता कुण्ड एवं सबसे उपर वाले कुंड को राम कुंड के नाम से जाना जाता है। इन कुण्ड की विशेषता यह कि इन कुण्डों में 12 महीनों स्वचछ पानी भर रहता है। अगर आप बरसात के मौसम में आते है तो आपको यहां पर झरना भी देखने मिल जाएगा। यहां पर बडी बडी चटटानें है जिनके उपर से यहां झरना बहता है। झरनें का पानी कुंड में आता है। इस झरने का नजारा बहुत अच्छा होता है जो लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां पर आपको एक विशाल तालाब भी देखने मिलेगा। जिसमें बहुत से लोगों आपको नहाते हुए दिख जाते है। यहां पर पुराने समय का एक कुॅआ भी बना हुआ है। रूपनाथ धाम मंदिर के उपर जो चटटानें है आप वहां पर भी जा सकते है। वहां पर आपको एक बांध भी देखने मिलेगा। यहां बांध गर्मी में सूख जाता है मगर बरसात में इस बांध का व्यू बहुत ज्यादा मनोरम होता है। यह बांध पानी से लबालब भर जाता है, आपको दूर दूर तक नीला पानी देखने मिलता है बरसात के समय में । यहां पर जो चटटाने है उनका का व्यू भी बहुत खूबसूरत है, यहां पर बडी बडी चटटानें है जिसमें आपको फोटोग्राफी करने में मजा आयेगी। 

Roopnath Dham, Katni
Roopnath Dham, Katni

Roopnath Dham, Katni
Roopnath Dham, Katni

रूपनाथ धाम का धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व

रूपनाथ धाम (Roopnath Dhamधार्मिक एवं ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण जगह है। इस स्थल पर आपको शिव भगवान का प्राचीन मंदिर देखने मिलेगा, जिसमें से एक गुफा निकलती है, इस गुफा के बारें में लोगों का मनना है कि इस गुफा से भगवान शिव जी भस्मासुर से बचने के लिए छुप थे। इस गुफा के बारे में यह भी कहा जाता है कि यहां गुफा रूपधाम से दमोह जिलें में स्थित बंदकपुर तक जाती है। भगवान शिव प्राचीन समय में इस गुफा के माध्यम से बंदकपुर में जाकर निकले थे, बंदकपुर का शिव मंदिर भी बहुत प्रसिध्द है। इस स्थल के बारे में लोग का कहने यह भी है कि इस स्थल पर भगवान भोलेनाथ की बारात ठहरी हुई थी । बारतियों की प्यास बुझाने के लिए यह पर तीन कुंडों का निर्माण किया गया, यह तीन कुंड राम कुंड, सीता कुंड एवं लक्ष्मण कुंड के नाम से जाने जाते है। इन कुण्डों में साल भर साफ पानी उपलब्ध रहता है। इस स्थान पर शिव एवं पार्वती का मंदिर भी स्थित है जो बहुत खूबसूरत है। इस स्थल पर भगवान शिव और माता पार्वती कई दिनों तक ठहरे थे। इसलिए इस जगह को रूपनाथ धाम (Roopnath Dham) कहते है। यह लोगों की आस्था का मुख्य केन्द्र है। रूपनाथ धाम (Roopnath Dhamमें शिव भगवान का पंचलिंगी प्रतिमा भी आपको देखने मिल जाएगी। यह प्रतिमा एक अनोखी प्रतिमा है जो आपको यही पर देखने मिलेगी और कहीं और यह प्रतिमा उपलब्ध नहीं है। यह प्रतिमा एक पत्थर पर बनी हुई है। इस स्थान पर एक तीन मंजिल की इमारत है। इस इमारत में भगवान शिव और पार्वती जी का मंदिर, राधा कृष्ण जी का मंदिर और श्री राम और सीता जी का मंदिर है। इस स्थान पर समा्रट अशोक का शिलालेख पाया गया है, जो पत्थर पर एक अनोखी लिपि से उकेरा गया है। आपको यह शिलालेख हिन्दी उच्चारण में भी  देखने मिलेगा। 

रूपनाथ धाम (Roopnath Dhamपर 14 जनवरी से एक सप्ताह का मेला लगता है। यह मेला लोगों के आकर्षण का केन्द्र है, जिसमें दूर दूर के लोग आते है। यहां पर श्रावण सोमवार को लोग भगवान शिव के दर्शन करने आते है। रूपनाथ धाम जबलपुर एवं कटनी के लोगों के लिए घूमने वाली एक अच्छी जगह है। यह एक अच्छा पिकनिक स्थल है। आप यहां पर अपने दोस्तों और परिवार के साथ आ सकते है। आपको यहां पर बहुत खूबसूरत व्यू देखने मिलेगा। यहां आकर बहुत शांत मिलती है। रूपनाथ धाम प्राकृतिक सुन्दरता से भरपूर एक जगह है। 

Roopnath Dham, Katni
Roopnath Dham, Katni

रूपनाथ धाम की स्थिाति एवं पहुॅचने का मार्ग 

रूपनाथ धाम (Roopnath Dhamकटनी जिलें में स्थित है। कटनी जिला मध्यप्रदेश का एक जिला है। यह स्थान कटनी जिले से लगभग 60 किमी की दूरी पर स्थित होगा। रूपनाथ धाम कटनी जिलें की बहोरीबंद तहसील से 4 या 5 किलोमीटर दूर पर है। रूपनाथ धाम सिहोरा नगर से लगभग 27 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह तीर्थस्थल जबलपुर जिले से लगभग 70 किमी की दूरी पर होगा। आप इस तीर्थस्थल पर अपने वाहन से जा सकते है। आप इस जगह पर अगर जबलपुर से जाते है तो आप कटाव धाम होते हुए जा सकते है या आप चाहे तो सिहोरा रोड से होते हुए जा सकते है। अगर आप कटनी से आते है तो सलीमानाबाद होते हुए आ सकते है। आप इस जगह बस के द्वारा पहुॅच सकते है बस आपको समय का ध्यान रखना होगा। अगर आप अपने वाहन से सिहोरा रोड आते है तो आपको तहसील बहोरीबंद से रूपनाथ धाम तक रोड खराब मिलेगी। मगर आप इस रास्ते से आते है तो आपको खूबसूरत पहाड देखने मिलते है जो मनमोहक व्यू प्रदान करते है। आप यहां पर जबलपुर से कटाव धाम वाली रोड आते है तो आपको कटाव धाम से रूपनाथ धाम (Roopnath Dhamतक पहाड की श्रृंखला देखने मिलती है, आपको पहाड कटाव धाम से रूपनाथ धाम तक जाते है। इन पहाड के बाजू से ही रूपनाथ तक जाने के लिए रोड गई है। रोड से पहाडों का व्यू भी बहुत बढिया होता है। आपको यहां पर शायद नया जानवर देखने मिल जाए हम लोगों को यह पर बडी वाली छिपकली देखने मिल थी।
Roopnath Dham, Katni
Roopnath Dham, Katni

रूपनाथ धाम के आकर्षण 

  • यहां पर तीन कुंड स्थित है जिनके नाम राम कुंड, सीता कुंड और लक्ष्मण कुंड है। 
  • रूपनाथ धाम में आपको सम्राट अशोक का प्राचीन शिलालेख देखने मिल जाएगी। 
  • यहां पर एक विशाल तालाब है। 
  • इस स्थल पर भगवान शिव का प्राचीन मंदिर और गुफा है।
  • रूपनाथ धाम में आपको बरसात के समय एक खूबसूरत झरना देखने मिलेगा, जो बहुत खूबसूरत होता है।
  • इस स्थल पर आपको एक बांध देखने मिलेगा।
  • यहां पर आप उची उची चटटानें भी देख सकते है जिनका व्यू बहुत बढिया होता है। 
  • यहां पर 14 जनवरी को मेले का आयोजन होता है, जहां पर दूर दूर से लोग आते है। 
  • यहां पर आपको शिव भगवान की अनोखी प्रतिमा देखने मिलेगी जो कहीं भी उपलब्ध नहीं है। यहां पर शिव भगवान की पंचलिंगी प्रतिमा है।