सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

Samadhi लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

दुर्गादास जी की छतरी उज्जैन - Durgadas ji ki Chhatri Ujjain

वीर दुर्गादास जी की छतरी (समाधि) उज्जैन -  Chhatri (Samadhi) of Veer Durgadas ji, Ujjain दुर्गादास की छतरी उज्जैन शहर का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। यह जगह ऐतिहासिक है। यह पर एक समाधि है। यहां पर दुर्गा दास जी का समाधि स्थल है। यह समाधि स्थल बहुत अच्छी तरीके से बनाया गया है और यहां पर छोटा सा गार्डन बना हुआ है, जहां पर आराम से बैठा जा सकता है। दुर्गादास की छतरी उज्जैन में शिप्रा नदी के किनारे पर बनी हुई है, जिससे आपको यहां पर बहुत शांति महसूस होगी। यहां पर ज्यादा भीड़ भाड़ नहीं रहती है। बहुत कम ही लोग यहां पर घूमने के लिए आते हैं और हम लोग भी यहां पर घूमने के लिए गए थे। अपनी उज्जैन की यात्रा में हम लोग इस जगह पर गए थे।  हमारे उज्जैन के सफर में रामघाट घूमने के बाद, हम लोग दुर्गादास की छतरी जाने के लिए अपनी गाड़ी स्टार्ट किए और मोबाइल में गूगल मैप लगाया और मैप की दिशा की ओर चल दिए। मगर गूगल ने हम लोगों को कहीं और ही पहुंचा दिया। गूगल ने हम लोगों को रामघाट के सीधे सीधे चलते हुए यहां पर शमशान पहुंचा दिया, जहां पर मुर्दे जल रहे थे। यहां पर कुछ लोग थे। जिन लोगों से हम लोग ने पूछा, कि हम लो

रानी कमलापति की समाधि छतरपुर - Rani Kamlapati ki samadhi Chhatarpur

रानी कमलापति की समाधि, मऊ सहानिया, छतरपुर -  Tomb of Rani Kamalapati, Mau Sahania, Chhatarpur रानी कमलापति की समाधि छतरपुर का एक प्रसिद्ध स्थल है। यह समाधि बहुत सुंदर है। रानी कमलापति महाराजा छत्रसाल की पत्नी थी। रानी कमलापति की समाधि एक ऐतिहासिक स्थल है। यह समाधि दो मंजिला है। इस समाधि के ऊपर आपको गुंबद देखने के लिए मिलते हैं। यह समाधि धुबेला झील के किनारे स्थित है। आप यहां पर जब भी आते हैं, तो आपको यहां पर अच्छा लगेगा।  रानी कमलापति महाराजा छत्रसाल की प्रथम रानी थी। रानी कमलापति को देव कुँअरि के नाम से जाना जाता था। रानी कमलापति के समाधि शुष्क भित्ति चित्रण पद्धति द्वारा बनाई गई है। इसमें 180 चित्रांकन है। ऊपरी खंड में 7 कुंभ है, जिसमें 48 पंखुड़ियों वाले कमल उसका प्रभाव है।  रानी कमलापति की समाधि धुबेला झील के किनारे स्थित है। हम लोग इस समाधि स्थल पर घूमने के लिए अपनी स्कूटी से गए थे। आप यहां पर अपनी कार और गाड़ी से आराम से पहुंच सकते हैं। यहां आने के लिए पक्की सड़क बनी हुई है। यहां पर हम लोगों ने अपनी गाड़ी बाहर पार्क किए। उसके बाद हम लोग समाधि के अंदर घूमने गए। यहां पर बहुत बड़ा आं

महाराजा छत्रसाल की समाधि छतरपुर - Maharaja Chhatrasal ki samadhi Chhatarpur

महाराजा छत्रसाल की समाधि या महाराजा छत्रसाल का मकबरा मऊ सहानिया छतरपुर -  Cenotaph  of Maharaja Chhatrasal or the tomb of Maharaja Chhatrasal, Mau Sahania, Chhatarpur महाराजा छत्रसाल का मकबरा या समाधि छतरपुर का एक प्रसिद्ध स्थल है। यहां पर आपको एक सुंदर इमारत देखने के लिए मिलती है। यह इमारत ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है और वास्तुकला में भी यह इमारत बहुत सुंदर लगती है। यह मकबरा धुबेला झील के किनारे ही बनी हुई है। यहां पर आप बहुत आसानी से पहुंच सकते हैं। छत्रसाल का मकबरा ऊंची पहाड़ी पर बना हुआ है। इस मकबरे में पहुंचने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है। महाराजा छत्रसाल के मकबरे का डिजाइन कुछ अलग प्रकार का है। इस मकबरे के बीच में एक बड़ा सा गुंबद बना हुआ है। यह बड़ा सा गुंबद छोटे-छोटे 12 गुंबद से घिरा हुआ है। इन 12 गुंबद में आपको खिड़कियां देखने के लिए मिल जाती हैं, जिनसे आप चारों तरफ के दृश्य को भी देख सकते हैं। यह मकबरा दो मंजिला है। आप इस मकबरे के ऊपर वाली मंजिल में भी जा सकते हैं और झील का सुंदर नजारे को देख सकते हैं।  महाराजा छत्रसाल का मकबरा यहां पर ग्रामीण क्षेत्र के पास ही में स