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मार्च, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

हवा महल जयपुर - Hawa Mahal Jaipur

जयपुर का हवामहल या विंड पैलेस जयपुर  -  Hawa Mahal or Wind Palace of Jaipur   हवा महल जयपुर शहर की एक ऐतिहासिक धरोहर है। हवामहल को विंड पैलेस के नाम से भी जाना जाता है। हवा महल जयपुर शहर के बीचों-बीच स्थित है। हवा महल एक खूबसूरत महल है और यह पूरा महल देखने लायक है। जयपुर का हवामहल एक पांच मंजिला इमारत है। हवा महल में आपको जालीदार खिड़कियां देखने के लिए मिलती हैं। हवा महल को बाहर से देखने में यह कृष्ण जी के मुकुट के समान लगता है। हवा महल में बहुत सारी खिड़कियां हैं। इन खिड़कियां को झरोखा भी कहा जाता है। हवा महल के बीचो बीच में फव्वारा भी लगा हुआ है। जब यह फव्वारा चालू होता है। तब बहुत ही खूबसूरत लगता है।     हवा महल को हवा महल नाम क्यों पड़ा - Why Hawa Mahal got the name Hawa Mahal हवा महल को हवा महल इसलिए कहा जाता है, क्योंकि यहां पर बहुत सारी खिड़कियां है और इन खिड़कियों से हवाओं का आदान-प्रदान होता है। इसलिए इस महल को हवा महल कहा जाता है। इस महल को बनाया ही इस तरीके से है, कि इसमें हवा का आना जाना अच्छी तरह हो। प्राचीन समय में महाराजा की पत्नियां हवा महल कि इन खिड़कियों से बाहर

श्री जागेश्वर धाम या बांदकपुर का शिव मंदिर दमोह - Shri Jageshwar Dham or Shiva temple of Bandakpur Damoh

बांदकपुर का मंदिर या बांदकपुर धाम - Bandakpur Temple or Bandakpur Dham श्री जागेश्वर धाम बांदकपुर या बांदकपुर का शिव मंदिर प्रसिद्ध स्थल है। यह मंदिर दमोह के पास में स्थित है। इस मंदिर के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। हम लोग भी इस मंदिर में शिव भगवान जी के दर्शन करने के लिए महाशिवरात्रि के दिन जबलपुर से गए थे। बांदकपुर के शिव मंदिर में आपको शिव जी का मंदिर और पार्वती जी का मंदिर देखने के लिए मिलता है। यह दोनों मंदिर अलग-अलग बने हुए हैं। शिवजी के मंदिर में बहुत ही बड़ा शिवलिंग विराजमान है और पार्वती जी के मंदिर में पार्वती जी की भव्य मूर्ति देखने के लिए मिलती है। यहां पर एक बावली भी बनी हुई है। यह बावली प्राचीन है। बांदकपुर मंदिर परिसर में ही हम लोगों को अन्य देवी देवताओं के छोटे-छोटे मंदिर भी देखने के लिए मिले। यहां पर लक्ष्मी जी, लक्ष्मी नारायण जी, गणेश जी, हनुमान जी के भी मंदिर बने हुए हैं और उनके भी दर्शन हम लोगों ने किए।     बांदकपुर मंदिर का चमत्कार या रहस्य तथ्य - Miracle or secret fact of Bandakpur temple बांदकपुर मंदिर में चमत्कार होते हैं। यह बात सभी भक्तों क

दशाश्वमेध घाट एवं मंदिर इलाहाबाद - Dashashwamedh Ghat and Temple Allahabad

श्री ब्रह्मेश्वर मंदिर या दशाश्वमेध मंदिर इलाहाबाद - Shree Brahmeshwar Temple or Dashashwamedh Temple Allahabad   दशाश्वमेध घाट एवं मंदिर इलाहाबाद शहर का एक धार्मिक स्थल है। यहां पर आपको भगवान शिव का मंदिर देखने के लिए मिलता है। इस मंदिर का धार्मिक महत्व है। यह मंदिर गंगा नदी के किनारे स्थित है। यहां पर घाट भी है। यहां पर लोग आकर स्नान करते हैं। यहां पर आकर बहुत अच्छा लगता है। हम लोग इस घाट में पैदल गए थे। यह घाट गंगा संगम घाट से करीब 3 किलोमीटर दूर होगा।     श्री ब्रह्मेश्वर मंदिर या दशाश्वमेध मंदिर का कहानी एवं महत्व -  Shri Brahmeshwar Temple or Dashashwamedh Temple Story दारागंज क्षेत्र में गंगा नदी के तट पर स्थित इस प्राचीन मंदिर के बारे में मान्यता है, कि यह ब्रह्मेश्वर जी द्वारा अश्वमेध यज्ञ किए गए थे। मंदिर में दो शिवलिंग स्थापित है, जो काले पत्थर के हैं, एक  दशाश्वमेध महादेव का और दूसरा ब्रह्मेश्वर महादेव का है। दोनों शिवलिंग के मध्य त्रिशूल स्थापित हैं। मंदिर में भगवान शिव के वाहक नंदी तथा शेषनाथ आदि की प्रतिमाएं भी है। इस मंदिर के निकट ही चैतन्य महाप्रभु की पीठ भी है।    

बांदकपुर का शिव मंदिर और बांदकपुर का मेला - Bandakpur dham

बांदकपुर का मंदिर और बांदकपुर का मेला - Bandakpur ka Mandir aur Bandakpur ka Mela   बांदकपुर शिवजी का एक प्रसिद्ध मंदिर है। बांदकपुर मंदिर दमोह जिले में स्थित है और बांदकपुर दमोह जिले से करीब 18 किलोमीटर दूर है। यह मंदिर बहुत प्रसिद्ध है और इस मंदिर में चमत्कार होते हैं। इसलिए इस मंदिर में भक्तों की भीड़ महाशिवरात्रि के दिन उमड़ पड़ती है। हम लोग भी इस मंदिर में महाशिवरात्रि के दिन आए थे। हम लोगों को इस मंदिर में बांदकपुर का मेला देखने के लिए मिला। बांदकपुर का मेला भी बहुत प्रसिद्ध है। यहां पर दूर-दूर से लोग आते हैं, जो इस मेले में आकर सामान बेचते हैं।     बांदकपुर का मेला महाशिवरात्रि और सावन सोमवार के समय लगता है। यह मेला बहुत विशाल होता है और इस मेले में असंख्य संख्या में लोग आते हैं। इस मेले में तरह-तरह की दुकान देखने के लिए मिल जाती है। इस मेले में भंडारा भी खाने के लिए मिलता है। हम लोग महाशिवरात्रि के दिन मेले में घूमने के लिए गए थे। मेले में हम लोगों के गाड़ी को एक बड़े से ग्राउंड में खड़ी करवा दी गई थी और उसके बाद हम लोगों को पैदल चलना था। यहां पर बहुत सारी पुलिस भी लगी थी। लोगों क

राज सागर झील दमोह - Raj Sagar Lake Damoh

राज सागर झील दमोह या राज सागर बांध दमोह - Raj Sagar Lake Damoh or Raj Sagar Dam Damoh   राज सागर झील दमोह जिले में स्थित एक प्रसिद्ध जलाशय है। आप यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं। यहां पर एक गार्डन भी बना हुआ है, जहां पर मंदिर बना हुआ है। यहां पर शंकर जी की प्रतिमा विराजमान है। इस गार्डन में बहुत सारे पेड़ पौधे लगे हुए हैं। यहां पर आकर अच्छा लगता है और बांध राज सागर बांध को देखना बहुत ही अच्छा लगता है। इस गार्डन के अंदर कोई भी जा सकता है यहां पर किसी भी तरह का प्रतिबंध नहीं है।     हम लोग राजसागर झील बाइक से गए थे। हम लोग पहले दमोह के जटाशंकर मंदिर गए। उसके बाद हम लोग बाइक से राजसागर लेक गए। यहां पर हम लोग महाशिवरात्रि के दिन गए थे, तो रास्ते में यहां पर प्रसाद बांट रहा था। हम लोगों ने प्रसाद खाया। उसके बाद हम लोग आगे बढ़े। यहां हम लोग जबलपुर बाईपास से आगे बढ़े। उसके बाद मरहरा गांव देखने के लिए मिला। उसके बाद हमें राजसागर झील देखने के लिए मिली। यह झील बहुत बड़ी क्षेत्रफल में फैली हुई है और हम लोग इस झील के पास गए।       राजसागर झील के पास सबसे पहले हम लोगों को झील के गेट देखने

रानी दमयंती का किला एवं संग्रहालय - Rani Damayanti Fort and Museum

रानी दमयंती बाई का किला या रानी दमयंती पुरातात्विक संग्रहालय - Rani Damayanti Bai Fort or Rani Damayanti Archaeological Museum   रानी दमयंती बाई का किला दमोह सिटी की एक प्राचीन जगह है।  यह किला दमोह जिले में कोतवाली थाने के सामने स्थित है। यह किला मुख्य सड़क में स्थित है और हम लोग इस किले  में शिवरात्रि के समय घूमने गए थे। मगर हम लोग इस किले  के अंदर नहीं जा पाए थे। मगर इस किले के बारे में मैं आपको कुछ जानकारी दे देती हूं।     रानी दमयंती बाई का किला को अब संग्रहालय में बदल दिया गया है और आपको इस किले में बहुत सारी पत्थर की मूर्तियां देखने के लिए मिल जाती हैं, जो देखने में बहुत ही अद्भुत लगती है। इस किले में आपको पेंटिंग भी देखने के लिए मिल जाती हैं। यहां पर आपको गणेश जी की पत्थर की प्रतिमा देखने के लिए मिलती है, जो आकर्षक लगती है। इसके अलावा यहां पर आपको बहुत सारे पत्थर के स्टैचू देखने के लिए मिलते हैं। इसके अलावा यहां पर आपको बुद्ध भगवान की पत्थर की प्रतिमा देखने के लिए मिल जाती हैं। यह किला भी बहुत खूबसूरत है। किले के बाहर बहुत ही सुंदर बगीचा बना हुआ है, जो देखने में आकर्षक लगता है।

दीनदयाल उपाध्याय पार्क दमोह और बेलाताल तालाब दमोह / सर्किट हाउस दमोह

दीनदयाल उपाध्याय पार्क दमोह / बेलाताल तालाब दमोह / सर्किट हाउस दमोह Deendayal Upadhyay Park Damoh / Belatal Talab Damoh / Circuit House Damoh   दीनदयाल उपाध्याय पार्क दमोह - Deendayal Upadhyay Park Damoh दीनदयाल उपाध्याय पार्क दमोह में जटाशंकर मंदिर के पास में ही स्थित है। हम लोग जटाशंकर मंदिर शिवरात्रि के समय घूमने गए थे। शिवरात्रि के समय या पार्क भी पूरे समय खुला रहा और हम लोग इस पार्क में भी घूमने के लिए चले गए। इस पार्क में  एंट्री निशुल्क थी और पार्क में हम लोगों को खूबसूरत बगीचा देखने के लिए मिला।  पार्क में तरह-तरह के फूल लगे हुए थे। पार्क में एक झील भी बनी हुई थी। इस झील में हम लोगों को मछलियां देखने के लिए मिली। यह पर बहुत बड़ी बड़ी मछलियां थी, जो बहुत ही सुंदर लग रही थी। इस पार्क में हम लोगों को बहुत ढेर सारे झूले भी देखने के लिए मिले।     दमोह के दीनदयाल उपाध्याय पार्क में बहुत सारे युवक और युवतियां घूम रहे थे। यहां पर बहुत सारे फैमिली वाले भी आकर घूम रहे थे। यहां पर अच्छा लगता है। दीनदयाल उपाध्याय पार्क नगर निगम के द्वारा प्रबंधित किया जाता है। इस पार्क के खुलने और बंद हो

जटा शंकर मंदिर दमोह - Jata shankar Mandir Damoh

प्राचीन जटा शंकर मंदिर दमोह मध्य प्रदेश - Ancient Jata Shankar Temple Damoh Madhya Pradesh   जटा शंकर मंदिर दमोह जिले का एक प्रसिद्ध मंदिर है। जटाशंकर मंदिर शिव भगवान जी को समर्पित है। यह मंदिर दमोह जिले का प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर में आप आते हैं, तो आपको शिव भगवान जी की शिवलिंग के दर्शन करने के लिए मिल जाते हैं। गणेश जी की एक विशाल प्रतिमा के दर्शन करने के लिए मिल जाते हैं। राम जी के दर्शन करने के लिए मिल जाते हैं। यहां पर आपको अंजनी पुत्र हनुमान जी के दर्शन करने पर के लिए भी मिल जाते हैं। यहां पर श्री गुरु गोविंद जी का मंदिर भी बना हुआ है और काल भैरव जी का मंदिर भी बना हुआ है। यहां पर राधे कृष्ण जी का मंदिर भी आपको देखने के लिए मिल जाएगा। यह मंदिर एक लाइन से बने हुए हैं।     हम लोग शिवरात्रि के दिन दमोह के जटाशंकर मंदिर घूमने के लिए आए थे। जटाशंकर मंदिर में बहुत ज्यादा भीड़ लगी हुई थी।  यहां पर मेला भी लगा हुआ था। बहुत सारी दुकानें लगी हुई थी।  हम लोग बाइक से आए थे।     जटाशंकर मंदिर बेला तालाब के सामने स्थित है। यह मुख्य सड़क में स्थित है और मुख्य सड़क में ही आपको मंदिर का एक

ओयला मंदिर मैहर - Oila Temple Maihar

ओयला  मंदिर मैहर - Oila Mandir Maihar / मैहर के मन्दिर   ओयला मंदिर मैहर का एक पुराना मंदिर है। यह मंदिर मैहर में प्रसिद्ध है और जो भी मैहर की चार धाम यात्रा करता है। वह इस मंदिर में जरूर घूमने के लिए आता है। यह मंदिर मुख्य रूप से दुर्गा जी को समर्पित है। इस मंदिर में आपको दुर्गा जी की बहुत ही आकर्षक प्रतिमा देखने के लिए मिल जाएगी। मंदिर में आपको गणेश जी की प्रतिमा देखने के लिए मिल जाती है। यहां पर शिव जी का शिवलिंग भी आपको देखने के लिए मिलता है।     ओयला मंदिर का प्रवेश द्वार बहुत ही आकर्षक है। इस मंदिर के प्रवेश द्वार में ऊपर आपको दुर्गा जी की प्रतिमा देखने के लिए मिल जाती है। बीच में दुर्गा जी की प्रतिमा बनी हुई है और आजू बाजू में गणेश जी की और शंकर जी की प्रतिमा बनी हुई है। मंदिर में आप अंदर प्रवेश करेंगे, तो आपको दुर्गा जी की आकर्षक मूर्ति देखने के लिए मिलती है, जो धातु की बनी हुई है। यहां पर गणेश जी की प्रतिमा आपको देखने के लिए मिल जाती है, जो धातु की बनी हुई है। अंदर एक कुआं भी है, जो आप देख सकते हैं। कुआं को कवर कर दिया गया है, ताकि कोई भी कुएं में गिर ना जाए। आपको यहां प

नोहटा शिव मंदिर दमोह - Nohta Shiv Temple Damoh

नोहटा शिव मंदिर दमोह  - Nohta shiv Mandir Damoh / नोहटा का मंदिर नोहटा शिव मंदिर दमोह जिले का एक धार्मिक स्थल है। यह दमोह जिले में स्थित एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर शिव जी को समर्पित है। मंदिर के अंदर गर्भ गृह में शिव भगवान जी की शिवलिंग विराजमान है। नोहटा शिव मंदिर पूरा पत्थर से बना हुआ है। मंदिर की दीवारों पर खूबसूरत नक्काशी की गई है। यह मंदिर खजुराहो के मंदिर के समान ही लगता है। मंदिर के गर्भ गृह में और भी मूर्तियां रखी गई है, ताकि कोई इसे चोरी ना कर सके, क्योंकि यह मूर्तियां बेशकीमती हैं और मंदिर के गर्भ गृह में ताला लगा है। आप बाहर से ही शिव भगवान जी के दर्शन कर सकते हैं।     नोहटा शिव मंदिर हम लोग बाइक से गए थे। हम लोग तीन लोग थे। हम लोग बाइक से रानी दुर्गावती वन्य जीव अभ्यारण से होते हुए नोहटा पहुंचे। नोहटा दमोह जिले का एक प्रसिद्ध नगर है। नोहटा शिव मंदिर जबलपुर दमोह हाईवे रोड में ही स्थित है। आप यहां पर आएंगे, तो यहां पर ज्यादा घर नहीं बने हुए हैं।     नोहटा शिव मंदिर के चारों तरफ बगीचा बना हुआ है और बाउंड्री बना दी गई है। ताकि कोई भी मंदिर की सीमा पर अतिक्रमण ना करें। हम