दमोह जिले के पर्यटन स्थल - Damoh tourist place | Places to visit near Damoh

दमोह जिले के दर्शनीय स्थल - Tourist places near damoh | Damoh famous places | दमोह जिला


प्राचीन जटा शंकर मंदिर दमोह - Jata shankar mandir damoh 

जटाशंकर मंदिर दमोह शहर का दर्शनीय स्थल है। जटाशंकर मंदिर दमोह-जबलपुर रोड पर स्थित है। यह दमोह में घूमने के लिए सबसे अच्छे धार्मिक स्थलों में से एक है। जटाशंकर मंदिर बहुत प्राचीन है। यहां मंदिर शिव शंकर जी को समार्पित है। यह मंदिर पहाडों से घिरा हुआ है। बरिश में यह का नजारा बहुत अदुभ्त होता है। मंदिर में अन्य देवी देवता की मूर्ति भी विराजमान है। मंदिर में भगवान की गणेश की बहुत उची प्रतिमा स्थित है। मंदिर सुबह से रात के 9 बजे तक खुल रहता है। आप मंदिर में दिन के समय कभी भी आ सकते है। मंदिर के पास अग्रेजों के समय का पुराना सार्किट हाउस बना हुआ है। यहां सार्किट हाउस पहाडी के उपर बना हुआ है। आपको यहां से आसपास बहुत ही मनमोहक दृश्य देखने मिलता है। जटाशंकर का प्रवेश द्वार बहुत ही भव्य है। जटाशंकर मंदिर सावन सोमवार और महाशिवरात्रि में बहुत भीड रहती है। 

रानी दमयंती संग्रहालय - Rani Damayanti Museum or Rani Damayanti Fort

रानी दमयंती संग्रहालय दमोह शहर में स्थित एक प्राचीन स्मारक है। रानी दमयंती दमोह जिले के संस्थापक थी। रानी दमयंती का विवाह राजा नल हुआ था। रानी दमयंती संग्रहालय को  रानी दमयंती के किले के नाम से  भी जाना जाता है। यह किला मुख्य दमोह शहर में स्थित है। यहां पर आकर आपको पत्थर की मूर्तियां का संग्रह देखने मिलता है। महल के बाहर एक बहुत बड़ा गार्डन भी बना हुआ है। 

बड़ी देवी जी मंदिर - Badi Devi Ji Temple Damoh

यह दमोह शहर का बहुत पुराना मंदिर है। इस मंदिर को बड़ी देवी मां के मंदिर के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर करीब 300 साल पुराना है। यहां पर आपको दुर्गा जी की प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। यहां पर गणेश जी की प्रतिमा भी विद्यमान है। लोग अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए यहां पर नारियल को बंधते हैं। आपको यहां पर बहुत सारे नारियल बंधे हुए देखने के लिए मिल जाते हैं। यह दमोह की एक अच्छी जगह है और यहां पर आकर बहुत शांति मिलती है। बड़ी देवी मां का मंदिर दमोह के फुटेरा तालाब के पास है। 

राजनगर झील - Rajnagar lake or Rajnagar dam Damoh

राजनगर झील या राजनगर बांध दमोह जिले का एक दर्शनीय स्थल है। आप यहां पर बरसात के समय आते हैं, तो आपको यहां पर झील का अद्भुत दृश्य देखने के लिए मिलता है। झील का पानी ओवरफ्लो होता है और झरने का रूप लेता है, जो देखने में बहुत ही लुभावना होता है। झील के पास आपको एक मंदिर भी देखने के मिलता है, जो मां दुर्गा को समर्पित है। आप यहां गर्मी के समय भी आ सकते हैं। गर्मी के समय आपको यहां पर एक फव्वारा देखने के लिए मिलता है। राजनगर झील से दमोह जिले में पीने के पानी की सप्लाई की जाती है। यह जगह बहुत खूबसूरत है। यह जगह दमोह बाईपास रोड के करीब स्थित है। आप यहां पर कभी भी घूमने के लिए आ सकते हैं। यहां पर एकांत में समय बिता कर बहुत अच्छा लगता है।

नोहलेश्वर शिव मंदिर - Nohleshwar Shiva Temple Damoh

नोहलेश्वर शिव मंदिर दमोह शहर का एक प्राचीन और धार्मिक स्थल है। नोहलेश्वर मंदिर जबलपुर दमोह हाईवे रोड के पास स्थित है। नोहलेश्वर मंदिर दमोह जिले से करीब 20 किलोमीटर दूर है। यह मंदिर दमोह जिले के नोहटा नाम के गांव में स्थित है। यह मंदिर शिव भगवान जी को समर्पित है। यह मंदिर खजुराहो के मंदिर के समान दिखता है। आप इस मंदिर में घूमने के लिए आ सकते हैं। इस मंदिर की दीवारों में आपको खूबसूरत नक्काशी देखने के लिए मिलती है। इस मंदिर में आपको मंडप और गर्भ ग्रह देखने के लिए मिलता है। गर्भ ग्रह में शिव जी का पत्थर का शिवलिंग विराजमान है। मंदिर के बाहर एक बहुत बड़ा गार्डन भी बना हुआ है। नोहलेश्वर मंदिर का निर्माण 800 या 1000 ईसा पूर्व हुआ था। इस मंदिर का निर्माण चालुक्य वंश के कलचुरि राजा के द्वारा किया गया था। यह मंदिर एक उच्च मंच पर बनाया गया था। 

सिंगौरगढ़ का किला -  Singaurgarh Fort Damoh

सिंगौरगढ़ का किला दमोह जिले के रानी दुर्गावती अभ्यारण के अंदर स्थित है। यहाँ किला ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। आपको इस किले तक पहुंचने के लिए पैदल चलना पड़ता है। यह किला अब खंडहर अवस्था में है। इस किले के बारे में कहा जाता है कि यहां पर रानी दुर्गावती अपने विवाह के पश्चात रहती थी और  किले के नीचे स्थित तालाब पर रानी दुर्गावती स्नान किया करती थी और अपनी कुलदेवी को जल चढ़ाया करती थी। आप यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं। किले के चारों तरफ आपको जंगल का खूबसूरत दृश्य देखने के लिए मिलता है और यहां पर आपको कुछ प्राचीन प्रतिमाएं भी देखने के लिए मिलेगी। 

गिरिदर्शन वाच टावर - Giridarshan Watch Tower Damoh

गिरी दर्शन टावर रानी दुर्गावती अभ्यारण्य के अंदर स्थित है। गिरी दर्शन वॉच टावर जबलपुर दमोह हाईवे रोड पर स्थित है। यह हाईवे रोड से करीब 1 किलोमीटर की दूरी पर होगा। यहां आने के लिए अच्छी सड़क है। गिरी दर्शन वॉच टावर में आप अपनी दोपहिया और चार पहिया वाहन से आ सकते हैं। आपको गिरी दर्शन वॉच टावर से चारों तरफ का दृश्य देखने के लिए मिलता है। यहां पर आपको पहाड़ों का, झील का और जंगल का दृश्य देखने के लिए मिलता है। यह जगह बरसात के समय पूरी तरह स्वर्ग के समान लगती है। यहां से चारों तरफ हरियाली रहती है। आप यहां पर घूमने के लिए और पिकनिक मनाने के लिए आ सकते हैं। यह दमोह शहर की बहुत खूबसूरत जगह है और प्राकृतिक खूबसूरती से भरपूर है।

रानी दुर्गावती वन्यजीव अभयारण्य - Veerangana Durgavati Wildlife Sanctuary Damoh

वीरांगना दुर्गावती वन्यजीव अभयारण्य दमोह जिले का एक मुख्य आकर्षण है। रानी दुर्गावती अभ्यारण्य जबलपुर दमोह हाईवे रोड पर स्थित है। यह अभ्यारण्य दमोह जिले के सिंग्रामपुर के पास स्थित है। इस अभ्यारण्य का नाम रानी दुर्गावती के नाम पर रखा गया है। रानी दुर्गावती एक गौड रानी थी। यह अभ्यारण्य 24 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला है । इस अभ्यारण्य की स्थापना 1996 में हुआ था। यहां पर आपको नीलगाय, सांभर, चीतल, जंगली सूअर, चिंकारा, हिरन, सियार, तेंदुए, जंगली बिल्ली और लोमड़ी पाई जाती है। यहां पर आपको जंगली जानवरों के अलावा पक्षियों की भी बहुत सारी प्रजातियां देखने के लिए मिलती है। यहां पर विशेषकर ठंड के समय आपको विभिन्न प्रजातियों के पक्षी देखने के लिए मिलते हैं। रानी दुर्गावती अभ्यारण्य की सैर करने के लिए दो रास्ते हैं, जिसमें से एक रास्ते को छोटा चक्कर और दूसरे को बड़ा चक्कर कहते हैं। यह दोनों रास्ते कच्चे हैं। रानी दुर्गावती अभ्यारण्य में आपको देखने के लिए बहुत सारी जगह है। यहां पर आप सिंगौरगढ का किला, गिरी दर्शन व्यूप्वाइंट, नजारा व्यूप्वाइंट, दानीतालाब, और निदान जलप्रपात देख सकते हैं। यहां पर विश्राम गृह भी बनाया गया है। यहां पर आपको देखने के लिए नदी, पहाड और जंगल मिलती है ।


जोगन कुंड - Jogan Kund Damoh

जोगन कुंड दमोह शहर का एक लोकप्रिय दर्शनीय स्थल है । यहां पर आपको एक झरना देखने के लिए मिलता है, जो जंगल के बीच में स्थित है। झरने का पानी एक कुंड पर गिरता है। आप इस कुंड में नहाने का मजा भी दे सकते हैं। झरने के पास एक प्राचीन मंदिर है। इस झरने तक पहुंचने के लिए आपको पैदल चलकर आना पड़ता है, क्योंकि इस झरने तक आने के लिए किसी भी प्रकार की सड़क नहीं बनी है। यहां आने के लिए जंगल का रास्ता है। जोगन कुंड झरने में आप जब बरसात के समय आते हैं, तो आपको यहां पर पानी देखने के लिए मिलता है। ठंड के समय भी यहां पानी रहता है। मगर गर्मी के समय में यहां पर पानी नहीं रहता है। आपको अगर झरने का आनंद उठाना है, तो आपको बरसात के समय आना होगा। जोगन कुंड दमोह जिले के जबेरा तहसील में स्थित है। आप यहां पर अपनी गाड़ी से आ सकते हैं। यहां पर साल में एक बार मेले का आयोजन होता है। तब यहां पर हजारों की संख्या में लोग आते हैं। यहां पर आपको एक गुफा भी देखने के लिए मिलती है।

नजारा व्यू पॉइंट - Najara View Point Damoh

नजारा व्यू प्वाइंट दमोह जिले का एक खूबसूरत दर्शनीय स्थल है। यह रानी दुर्गावती अभ्यारण्य में स्थित है। यह व्यूप्वाइंट भैसा घाट में स्थित है। आप यहां पर अपने दो पहिया और चारपहिया वाहन से आ सकते हैं। आपको यहां से पूरी रानी दुर्गावती वन्य जीव अभ्यारण्य का दृश्य देखने के लिए मिलता है। यह व्यू पांइट पहाडी के एक छोर पर बना हुआ है। यह व्यू प्वाइंट करीब 300 फीट उपर स्थित है। यहां से बहुत ही मनोरम दृश्य देखने के लिए मिलता है। यहां से देखने में ऐसा लगता है, कि जैसे आप कश्मीर की वादियों देख रहे हैं।


बांदकपुर भोले नाथ मंदिर  या जागेश्वर धाम - Bandakpur Bhole Nath Temple or Jageshwar Dham Damoh

बांदकपुर का शिव मंदिर दमोह जिले का एक दर्शनीय स्थल है। यह दमोह जिले का एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह दमोह जिले में ही नहीं, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश में प्रसिद्ध है। इस मंदिर को जागेश्वर धाम के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर दमोह जिले के बांदकपुर कस्बे में स्थित है। जागेश्वर धाम भगवान शिव और पार्वती माता को समर्पित है। यह मंदिर बहुत खूबसूरत है। यह मंदिर बहुत प्राचीन है। इस मंदिर में महाशिवरात्रि के समय बहुत बड़ा मेला लगता है। लोगों का कहना है कि महाशिवरात्रि के समय यहां पर दो अलग जगह पर लगे झंडे आपस में मिलते है। बांदकपुर के शिव मंदिर के ऊपर लोगों की आस्था है। लोगों का मानना है, कि यहां पर जो भी लोग आते है,  उनकी इच्छा जरूर पूरी होती है। मंदिर में सभी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध है । यह मंदिर एक ट्रस्ट द्वारा चलाया जाता है। मंदिर परिसर में गणेश जी की मूर्ति, दुर्गा जी  की मूर्ति, श्री राम दरबार, राधे कृष्णा जी की मूर्ति, हनुमानजी की मूर्ति स्थापित है। मंदिर में आप आपने दो पहिया वाहन या चार पहिया वाहनों से आ सकते हैं। बांदकपुर में रेलवे स्टेशन भी बना हुआ है। अगर आप रेल से आना चाहते हैं, तो आ सकते हैं। आपको यहां पर आसानी से ऑटो मिल जाएगी।

कुण्डलपुर - Kundalpur Damoh

कुंडलपुर दमोह जिले का एक जैन तीर्थ स्थल है। यहां पर आपको 63 जैन मंदिर देखने के लिए मिलेंगे, जो पहाड़ी पर बने हुए हैं। यह मंदिर बहुत प्राचीन है। कुंडलपुर में आपको रहने और खाने की व्यवस्था भी मिलती है। कुंडलपुर दमोह जिले से करीब 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आप यहां पर दो पहिया या चार पहिया वाहन से आसानी से पा सकते हैं। पहाड़ी पर बने मंदिरों में जाने के लिए सीढ़ियां बनाई गई है। आपको इन मंदिर तक जाने के लिए पैदल सीढ़ियों से जाना पड़ेगा। कुंडलपुर में 65 मंदिर हैं। यह मंदिर पहाड़ियों पर स्थित है।  आप परिक्रमा करके इन सभी मंदिरों को घूम सकते हैं।  इन मंदिरों में बड़े बाबा का मंदिर सबसे प्रसिद्ध है। इसके अलावा यहां पर आपको एक अन्य मंदिर भी देखने के लिए मिलता हैए जो तालाब के बीच में स्थित हैए जिसे जल मंदिर के नाम से जाना जाता है। 

भदभदा जलप्रपात - Bhadbhada Waterfall damoh

भदभदा जलप्रपात दमोह जिले का एक दर्शनीय स्थल है। यह दमोह जिले के हटा तहसील में स्थित है। यह जलप्रपात सुनार नदी पर बना हुआ है। यहां पर आप नहाने का मजा भी ले सकते हैं। जब जलप्रपात का पानी चट्टानों से नीचे गिरता है, तो धुआ निकलता है, जो बहुत ही मनोरम लगता है। यह जबलपुर के धुआंधार जलप्रपात के समान दिखाई देता है। आप यहाँ  फैमिली के साथ पिकनिक मनाने के लिए आ सकते हैं। आप यहां पर बरसात के समय आ सकते हैं।  बरसात के समय यहां पर पानी की बहुत अधिक मात्रा रहती है।  गर्मी में भी यहां पानी रहता हैए जिसमें आप काफी इंजॉय कर सकते हैं। यह झरना दमोह जिले से करीब 45 किलोमीटर दूर होगा।

शिवमंदिर खर्राघाट - Shiv Mandir Kharraghat Damoh

यह  मंदिर दमोह जिले के खर्रा घाट में स्थित है। यह मंदिर से भगवान शिव जी को समर्पित है। आपको मंदिर में शिवलिंग देखने के लिए मिलता है।  बाहर नंदी भगवान की प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। मंदिर के पास में ही आपको नदी का दृश्य देखने के लिए मिलता है। इस मंदिर में हर साल मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें हजारों की संख्या में लोग इकट्ठे होते हैं। यह मंदिर बहुत पुराना है और बहुत सारे लोगों की इस मंदिर के प्रति आस्था है। 

गौरी शंकर मंदिर हट्टा दमोह - Gauri Shankar Temple Hatta Damoh

गौरी शंकर मंदिर दमोह जिले के हटा में स्थित है। हटा दमोह जिले की तहसील है। हटा दमोह जिले से करीब 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित होगा। गौरी शंकर मंदिर पूरे जिले में प्रसिद्ध है। यहां पर आपको शंकर भगवान जी दूल्हे के वेश में नंदी पर सवार देखने के लिए मिलते हैं और माता पार्वती भी भोले भगवान के साथ देखने के लिए मिलती हैं। यह प्रतिमा देखने में बहुत ही अद्भुत लगती है। इसके अलावा यहां पर और भी प्रतिमाएं हैं। यहां पर पितांबरा पीठ की स्थापना की गई है। उसके साथ साथ गणेश जी का मंदिर, भैरव बाबा का मंदिर भी बनाया गया है। इस मंदिर में महाशिवरात्रि के समय बहुत बड़े मेले का आयोजन होता है और हजारों की संख्या में लोग यहां पर एकत्र होते हैं। यह मंदिर बहुत प्राचीन है और कहा जाता है कि यहां पर स्थापित शिवलिंग स्वयंभू है। आप यहां पर भगवान शिव के दर्शन करने के लिए आ सकते हैं। 

चंडी माता मंदिर हट्टा दमोह -  Chandi Mata Temple Hatta Damoh

यह मंदिर दमोह जिले की हटा में स्थित है। यह मंदिर साउथ इंडियन स्टाइल में बनाया गया है। यह मंदिर मेन रोड में ही स्थित है। यहां पर आप चंडी माता के दर्शन कर सकते हैं। यह मंदिर परिसर बहुत खूबसूरत है। चंडी माता के मंदिर में और भी छोटे-छोटे मंदिर बने हुए हैं। यहां पर शिव भगवान जी का मंदिर और नाग देवता का मंदिर आपको देखने के लिए मिलता है। आपको यहां पर आकर बहुत शांति मिलती है।  यह बहुत अच्छी जगह है।   

बेलाताल - Belatal Damoh

बेलाताल दमोह जिले की एक अच्छी जगह है। आप यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं। यहां पर तालाब के बीच में आपको हनुमान जी का मंदिर देखने के लिए मिलता है। यह मंदिर बहुत सुंदर हैं। बेलाताल जबलपुर दमोह हाईवे रोड पर स्थित है। आप यहां पर कभी भी आकर घूम सकते हैं। यहां पर एक साईं मंदिर भी बना हुआ है। जहां पर आप घूम सकते हैं। यहां पर आकर बहुत अच्छा लगता है। 


पचमढ़ी के मंदिर - Pachmarhi temple | Pachmarhi yatra


पचमढ़ी मंदिर - Pachmarhi ka mandir 

पचमढ़ी के मंदिर -  Pachmarhi temple | Pachmarhi yatra

महादेव मंदिर चौरागढ़ पचमढ़ी - Mahadev mandir chauragarh pachmarhi | chauragarh mandir

चौरागढ़ पचमढ़ी का एक धार्मिक स्थल है। चौरागढ़ पर एक मंदिर स्थित है, जो शिव भगवान जी को समर्पित है। चौरागढ़ का महादेव मंदिर बहुत प्राचीन मंदिर है। महादेव मंदिर पचमढ़ी में एक ऊंचे पहाड़ी पर स्थित है। महादेव मंदिर में जाने के लिए आपको करीब 2 से 3 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। महादेव मंदिर में पहुंचने का जो रास्ता है, वह पूरा जंगल से घिरा हुआ है। महादेव मंदिर में आपको शंकर भगवान जी की अद्भुत प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। आप इस मंदिर से पचमढ़ी के चारों तरफ का दृश्य देख सकते हैं, जो बहुत ही मनोरम होता है। इस मंदिर में नागद्वार, महाशिवरात्रि और सावन सोमवार के समय बहुत भीड़ रहती है। यहां पर मेला लगता है और लाखों की संख्या में लोग भगवान शंकर जी के दर्शन करने के लिए आते हैं।

काल भैरव गुफा चौरागढ़ - Kaal bhairav gufa chauragarh

काल भैरव गुफा चौरागढ़ जाने वाले रास्ते में ही पड़ती है।  यहां पर आपको एक गुफा देखने के लिए मिलती है। इस गुफा तक जाने का रास्ता बहुत ही दुर्गम है। आप यहां पर शिवरात्रि और नाग पंचमी के समय जा सकते हैं, क्योंकि इस समय यहां पर बहुत भीड़ रहती है। यहां पर बहुत सारे लोग इस समय यात्रा करते हैं, तो आप भी इस समय काल भैरव गुफा घूम सकते हैं।

वैदेही गुफा चौरागढ़ - Vaidehi gufa chauragarh

वैदेही गुफा चौरागढ़ जाने वाले रास्ते में पड़ती है। यह एक छोटी सी गुफा है। कहा जाता है कि प्राचीन समय में सीता जी इस गुफा में स्नान किया करती थी। आप यहां पर रुक कर फोटोग्राफी का मजा ले सकते हैं और यहां से पचमढ़ी की खूबसूरत वादियों का दृश्य देख सकते हैं।

बड़ा महादेव पचमढ़ी  - Bada mahadev pachmarhi

बड़ा महादेव पचमढ़ी का एक धार्मिक स्थल है। बड़ा महादेव एक प्राचीन मंदिर है। यहां पर आपको एक गुफा देखने के लिए मिलती है। इस गुफा में हमेशा पानी रिसता रहता है। गुफा के अंदर शिव भगवान जी का एक शिवलिंग विराजमान है। गुफा के प्रवेश द्वार पर एक पत्थर का शिवलिंग विराजमान है।  गुफा में एक कुंड भी बना हुआ है। यहां पर आकर आपको बहुत शांति मिलती है। यहां पर आपको बहुत सारे बंदर देखने के लिए मिलते हैं।

पचमढ़ी के मंदिर -  Pachmarhi temple | Pachmarhi yatra


गुप्त महादेव पचमढ़ी  - Gupt mahadev pachmarhi

गुप्त महादेव पचमढ़ी में स्थित एक प्राचीन मंदिर है। गुप्त महादेव बड़ा महादेव मंदिर से करीब 1 किलोमीटर दूर होगा। आपको मंदिर तक पैदल चलकर जाना पड़ता है। यहां पर आपको एक सकरी गुफा देखने के लिए मिलती है, जिसके अंदर शिवलिंग विराजमान है। इस गुफा में एक बार में केवल 8 लोग ही अंदर जा सकते हैं। इस गुफा के बाहर आपको हनुमान जी की विशाल प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। यहां पर आकर आपको बहुत अच्छा लगता है।

पचमढ़ी के मंदिर -  Pachmarhi temple | Pachmarhi yatra


जटाशंकर मंदिर पचमढ़ी - Jatashankar mandir pachmarhi

जटाशंकर पचमढ़ी का एक दर्शनीय स्थान है। यह एक धार्मिक स्थल है। यहां पर शिव भगवान जी का शिवलिंग विराजमान है। यह मंदिर खाई में स्थित है। आप को मंदिर जाने के लिए नीचे उतरना पड़ता है। नीचे जाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है।  जटाशंकर की गुफा जाने के रास्ते में आपको बहुत सारे मंदिर देखने के लिए मिलते हैं, जो बहुत ही सुंदर लगते हैं। आपको यहां पर आकर बहुत अच्छा लगता है। जटाशंकर गुफा में  24 घंटे पानी रिसता रहता है। यहां पर एक कुंड बना हुआ है। कुंड के ऊपर एक पत्थर लटका हुआ है, जो देखने में बहुत ही अद्भुत लगता है। आपको यहां पर पत्थर पर बहुत सारी आकृतियां देखने के लिए मिल जाती हैं।  यह जगह बहुत ही मनोरम है और यहां पर आकर बहुत शांति मिलती है।

पचमढ़ी के मंदिर -  Pachmarhi temple | Pachmarhi yatra


नागद्वार मंदिर पचमढ़ी - Nagdwar mandir pachmarhi

नागद्वार पचमढ़ी का एक दर्शनीय स्थान है।  इस जगह में साल में सिर्फ एक ही बार जाया जा सकता है। यह जगह नाग पंचमी के समय 10 दिनों के लिए खोली जाती है। इस समय पचमढ़ी में विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें लाखों की संख्या में लोग भाग लेते हैं। नागद्वार के मंदिरों में जाने का रास्ता बहुत ही दुर्गम है। यह मंदिर जंगल के बीच में है। इन मंदिरों में पहुंचने के लिए आपको ऊंची ऊंची घाटियां, पहाड़ियां,  बहते हुए झरने पार करने पड़ते हैं। इस जगह में आकर आपको बहुत सारी शांति मिलती है। यहां पर बहुत सारे मंदिर है। इन मंदिरों के बारे में आइए जानते हैं।

पचमढ़ी के मंदिर -  Pachmarhi temple | Pachmarhi yatra


श्री नागद्वार स्वामी मंदिर या श्री पद्म शेष मंदिर - shri nagdwar swami mandir or  padamshesh mandir pachmarhi

पद्म शेष मंदिर नागद्वार का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है। इस मंदिर में आने के लिए आपको पैदल चलना पड़ता है। इस मंदिर में जाने का रास्ता जंगल से भरा हुआ है। यहां पर आपको ऊंची ऊंची घाटियां, बहते हुए झरने, पहाड़ियां देखने के लिए मिलती हैं। यह मंदिर नाग देवता को समर्पित है। यहां पर आपको भगवान शंकर जी का शिवलिंग देखने के लिए मिलता है। यहां पर एक  गुफा है। इस गुफा में जाने के लिए नाग पंचमी के समय पर बहुत लंबी लाइन लगती है। नाग पंचमी के समय पर यहां पर लोगों के ठहरने की व्यवस्था भी रहती है और उनके खाने पीने की व्यवस्था भी रहती है। यहां पर नाग पंचमी के समय जो माहौल रहता है। वह पूरा भक्तिमय रहता है और इस माहौल में आपको आकर मन की शांति मिलेगी। यहां पर आपको ऊंची ऊंची पहाड़ियां और पहाड़ियों में उभरी हुई आकृतियां देखने के लिए मिलती हैं, जो बिल्कुल नाग भगवान की तरह रहती हैं। यह जगह आश्चर्य से भरी हुई है और यहां पर आकर बहुत अच्छा लगता है।

पचमढ़ी के मंदिर -  Pachmarhi temple | Pachmarhi yatra


पश्चिम द्वार पचमढ़ी - Paschim dwar nagdwar pachmarhi

पश्चिम द्वार नागद्वार की एक धार्मिक जगह है। यहां पर आपको एक गुफा देखने के लिए मिलती हैं। इस गुफा में शिवलिंग विराजमान है। यहां पर आपको पहाड़ी से गिरता हुआ झरना देखने के लिए मिलता है, जो बहुत सुंदर लगता है, जिसमें बहुत सारे लोग आप को नहाते हुए देखने के लिए मिल जाते हैं। इस झरने का पानी गुफा के अंदर से तेजी से बहता है, जो एक अलग अनुभव रहता है। नाग पंचमी के समय बहुत से यात्री नागद्वार की यात्रा करते हैं, तो जगह-जगह पर आपको भंडारे की व्यवस्था मिलती है। यह जगह बहुत खूबसूरत है और पूरी तरह प्राकृतिक है।

निशानगढ़ पर्वत नागद्वार पचमढ़ी - Nishan gad pachmarhi

निशान गढ़ पर्वत नागद्वार में स्थित एक ऊंचा पर्वत है। इस पर्वत के ऊपर शिव भगवान जी विराजमान है। बहुत सारे लोग इस पर्वत के दर्शन करने के लिए आते हैं और इस पर्वत पर चढ़ाई करते हैं।  यहां से चारों तरफ का व्यू बहुत ही अद्भुत होता है और शिव भगवान जी के दर्शन का एक अलग ही अनुभव होता है।

स्वर्गद्वार पचमढ़ी - Swargadwar pachmarhi

स्वर्गद्वार नागद्वार में स्थित एक ऊंचा पहाड़ है। यहां पर शंकर भगवान जी की एक गुफा स्थित है।  गुफा के अंदर शिवलिंग विराजमान हैं। यहां से आपको पचमढ़ी की खूबसूरत वादियां देखने के लिए मिलती है। यहां पर पहुंचने का रास्ता बहुत कठिन है। स्वर्गद्वार ऊंचे पहाड़ पर स्थित है। यहां पर आकर बहुत अच्छा लगता है। यहां पर भी आपके रुकने की और खाने पीने की व्यवस्था रहती है। यहां पर पहाड़ी के ऊपर एक गुफा बनी हुई है, जिस पर लोग नींबू फेंकते हैं और नींबू उस गुफा के अंदर जाना चाहिए। माना जाता है, कि जिसका भी नीबू गुफा के अंदर जाएगा। उसकी मनोकामना पूरी होगी और यहां पर बहुत सारे लोग आपको नींबू गुफा के अंदर फेंकते हुए देखने के लिए मिल जाएंगे। यहां पर भगवान शिव के भजन चलते रहते हैं। यहां पर आकर एक अलग ही अनुभव होता है।

चित्रशाला पचमढ़ी - Chitrashala pachmarhi

चित्रशाला पचमढ़ी में स्थित एक दर्शनीय जगह है। यहां पर पहाड़ी के ऊपर एक मंदिर स्थित है। मंदिर तक जाने के लिए सीढ़ियां बनी है। यहां पर एक प्रकार से बहुत बड़ा मेला लगता है और आपको बहुत सारे खाने-पीने की दुकानें मिल जाती हैं। यहां पर आकर बहुत अच्छा लगता है। यहां पर आप ऊंचे ऊंचे पहाड़ देख सकते हैं। आप इन पहाड़ों पर भी जा सकते हैं। मगर बरसात के समय आपको इन पहाड़ों पर संभल कर जाना चाहिए, क्योंकि पहाड़ों पर बहुत ज्यादा फिसलन होती है।

नंदीगढ़ पचमढ़ी - Nandigarh pachmarhi

नंदीगढ़ नागद्वार में घूमने की एक बहुत ही खूबसूरत जगह है। यहां पर एक ऊंचा पहाड़ है, जिसका आकार नंदी के समान है।  यहां पर पहाड़ के ऊपर शिव भगवान जी का शिवलिंग स्थापित है।  इस पहाड़ के ऊपर बहुत से लोग चढ़ाई करके जाते हैं।  इस पहाड़ से चारों तरफ का दृश्य बहुत ही अद्भुत होता है और यहां पर आकर बहुत अच्छा लगता है।

इन जगहों के अलावा भी नागद्वार में बहुत सारी जगह है, जहां पर आप घूम सकते हैं। यहां पर आपको पैदल यात्रा करनी पड़ती है। यह यात्रा करीब 18 से 20 किलोमीटर लंबी रहती है और यहां का पूरा रास्ता जंगल का रहता है।  ऊंचे ऊंचे नदी, नाले, पहाड़ी, चट्टाने आपको देखने के लिए मिलती है और इन्हीं रास्तों से होकर आप इन मंदिरों तक पहुंच सकते हैं।

अम्बा माई मंदिर पचमढ़ी - Amba mai mandir pachmarhi

अंबा माई मंदिर पचमढ़ी जाने वाले रास्ते में पड़ता है। यह मंदिर बहुत ही भव्य है। मंदिर के प्रवेश द्वार बहुत ही भव्य है। यहां पर दो शेरों की मूर्ति विराजमान की गई है। आप मंदिर के अंदर जाते हैं, तो मंदिर में आपको अंबा माई की मूर्ति देखने के लिए मिलती है। इसके अलावा यहां पर शिवलिंग स्थापित है। भैरव बाबा की मूर्ति स्थापित है। राधा कृष्ण की मूर्ति स्थापित है और श्री राम और माता सीता की मूर्ति स्थापित है। यहां पर आकर बहुत शांति मिलती है। अंबा माई मंदिर के थोड़ा ही आगे आपको बेगम पैलेस देखने के लिए मिलता है, जो एक प्राचीन महल है।

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पचमढ़ी यात्रा - Jabalpur to Pachmarhi Travel | One day trip to pachmarhi
बेगम पैलेस


जबलपुर से पचमढ़ी जाने के दो माध्यम है। एक माध्यम है ट्रेन के द्वारा और दूसरा माध्यम है सड़क के द्वारा। आप ट्रेन के द्वारा पचमढ़ी पहुंच सकते हैं। जबलपुर से पचमढ़ी के लिए बहुत सारी ट्रेनें चलती हैं। जबलपुर से  करीब 2 से 3 घंटे में आप पचमढ़ी पहुॅच सकते हैं। अगर आप 1 दिन की यात्रा का प्लान बनाकर पचमढ़ी घूमने जा रहे है, तो आप जबलपुर से सुबह की ट्रेन ले सकते है। जबलपुर से पचमढ़ी के लिए सुबह के समय बहुत सारी ट्रेनें चलती है। आप ट्रेन के टिकट ऑनलाइन भी बुक कर सकते हैं। मगर आप स्टेशन में सही समय पर पहुंच जाइए। 5:30 बजे जबलपुर स्टेशन से ट्रेन मिल जाती हैं। यह ट्रेन मदन महल स्टेशन में भी आपको मिल जाएगी, तो आप मदन महल स्टेशन से ट्रेन पकड़ सकते हैं। जबलपुर से पचमढ़ी में पड़ने वाले स्टेशन है - भेड़ाघाट, भिटौनी, विक्रमपुर, श्रीधाम, बेलखेड़ा, नरसिंहपुर, करेली, गाडरवारा, बोहनी, सालीचौका, बनखेड़ी । इन रेलवे स्टेशनों में आपकी ट्रेन रुकती है, उसके बाद पिपरिया रेलवे स्टेशन में आपको उतरना पड़ता है। पिपरिया से पचमढ़ी करीब 60 किलोमीटर दूर होगा। पिपरिया से पचमढ़ी आपको रोड के माध्यम से जाना पड़ता है। पिपरिया में आपको बहुत सारे साधन मिल जाते हैं, पचमढ़ी जाने के लिए। पिपरिया रेलवे स्टेशन के बाहर ही बस स्टैंड है, जहां से आप बस ले सकते हैं। अगर आप पचमढ़ी जाने के लिए 1 दिन का प्लान बना रहे हैं, तो आप जिप्सी ले सकते हैं। जिप्सी आप को पिपरिया रेलवे स्टेशन में बुक करना पड़ता है। जिप्सी वाला आपको पचमढ़ी के सभी दर्शनीय जगह घुमा देगा। 

Places to visit in Pachmarhi in one day

पचमढ़ी यात्रा - Jabalpur to Pachmarhi Travel | One day trip to pachmarhi
कैथोलिक चर्च





पचमढ़ी यात्रा - Jabalpur to Pachmarhi Travel | One day trip to pachmarhi
प्रियदर्शनी



जिप्सी वाला आपको सबसे पहले बेगम पैलेस घुमाएगा, जो पचमढ़ी जाने के रास्ते में पड़ता है। बेगम पैलेस के पास आपको अंबा माई मंदिर भी देखने के लिए मिलता है। उसके बाद आप जटाशंकर मंदिर घूम सकता है। जटाशंकर मंदिर मुख्य पचमढ़ी शहर में ही स्थित है। यह मंदिर खाई में स्थित है और यहां पर आपको एक गुफा देखने के लिए मिलती है। गुफा  पर 24 घंटे पानी रिसता रहता है। यहां पर एक कुंड भी बना हुआ है, जिसमें पानी भरा हुआ है। जटाशंकर की गुफा जाते समय आपको अन्य मंदिर भी देखने के लिए मिलते हैं। उसके बाद आप पांडव गुफा जा सकते हैं। पांडव गुफा में आपको पांच गुफाएं देखने के लिए मिलती है, जो पत्थर की बनी रहती है। इन गुफाओं के बारे में कहा जाता है, कि यह गुफाओं पांडवों द्वारा बनवाया गया था। इन गुफाओं में पांडव रहते थे। सभी के लिए अलग-अलग गुफाएं बनी हुई है। सबसे बड़ी गुफा में द्रोपति के रहने के लिए बनाई गई थी। पांडव गुफा के पास एक बड़ा सा गार्डन देखने के लिए मिलता है। उसके बाद आप हांडी खोह घूम सकते हैं। हांडी खोह में आपको एक खाई देखने के लिए मिलती है। यह खाई 300 फीट गहरी है और इस खाई का शेप हांडी के आकार का है। उसके बाद प्रियदर्शनी घूम सकते हैं। प्रियदर्शनी में आपको पचमढ़ी की खूबसूरत वादियां देखने के लिए मिलती हैं । उसके बाद आप बड़ा महादेव जा सकते है। बड़ा महादेव में एक गुफा है। यहां पर शिवलिंग आप देख सकते हैं। गुफा में हमेशा पानी रिसता रहता है। बड़ा महादेव के आगे आपको गुप्त महादेव देखने के लिए मिलता है। गुप्त महादेव में एक सकरी गुफा है। सकरी गुफा के अंदर शिवलिंग विराजमान है। यहां से चौरागढ़ जाने का भी रास्ता आपको देखने मिलता है। मगर आपको चौरागढ़ जाने में 1 दिन लग जाता है और इसके बाद आपके पास समय बचता है, तो आप राजेंद्र गिरी जा सकते हैं। राजेंद्र गिरी एक प्वाइंट है। यहां से आप सनसेट का बहुत ही मनोरम दृश्य देख सकते हैं।  पचमढ़ी में कैथोलिक चर्च है।  वह मुख्य सड़क में स्थित है।  आप वहां पर भी जा सकते हैं।  पचमढ़ी की  मुख्य रोड पर पचमढ़ी झील  है। आप इस झील को पचमढ़ी के अन्य दर्शनीय स्थलों को  देखने जाते समय घूम सकते हैं।  उसके बाद आप वापस घर आने के लिए ट्रेन पकड़ सकते हैं। पिपरिया रेलवे स्टेशन में आपको जबलपुर के लिए बहुत सारी ट्रेनें मिल जाते हैं। शाम को पिपरिया रेलवे स्टेशन से आप जबलपुर आ सकते हैं। 

रजत प्रपात पचमढ़ी - Silver falls pachmarhi | Rajat prapat pachmarhi

सिल्वर फॉल पचमढ़ी - Silver waterfall Pachmarhi | Rajat waterfall Pachmarhi


रजत प्रपात पचमढ़ी - Silver falls pachmarhi | Rajat prapat pachmarhi


रजत जलप्रपात पचमढ़ी का सबसे ऊंचा जलप्रपात है। यह जलप्रपात बहुत सुंदर है। इस जलप्रपात को सिल्वर जलप्रपात या रजत जलप्रपात भी कहते है। रजत जलप्रपात पचमढ़ी में घूमने वाला एक दर्शनीय स्थल है। रजत का मतलब होता है - चांदी। चांदी एक धातु है और इसके गहनें बनाये जाते है। यह धातु चमकदार होती है। रजत जलप्रपात भी दूर से देखने में चांदी के सामान चमकता है। यह जलप्रपात घने जंगलों के बीच में स्थित है।

रजत जलप्रपात में पहुंचने के लिए आपको घने जंगलों के बीच में से पैदल चलना पड़ता है। यह जलप्रपात अप्सरा जलप्रपात के आगे है। इस जलप्रपात में बरसात में ज्यादा पानी रहता है। बरसात के समय रजत जलप्रपात घूमने का सबसे अच्छा समय है। इस समय आपको जंगल में हर जगह छोटे छोटे झरनें देखने मिल जाते है। गर्मी में पानी इस झरनें में रहता है, मगर कम रहता है। 

रजत जलप्रपात की ऊंचाई 130 फीट है। इस जलप्रपात को आप उपरी हिस्सा देख सकते है। इसका निचला हिस्सा आपको दिखाई नहीं देगा। यह झरना हरियाली से घिरा हुआ है। आपको इस झरनें तक पहुॅचने के लिए आपको पैदल चलना पडता है, क्योंकि यह झरना बीच जंगल में स्थित है। रजत जलप्रपात पचमढ़ी से 2 या 3 किलोमीटर दूर होगा। आप इस झरनें तक पैदल ही आना होगा, मगर आप इस झरनें में जिप्सी और बाइक या साइकिल से आ सकते है। जिप्सी पचमढ़ी में असानी से मिल जायेगी। बाइक या साइकिल आपको पचमढ़ी में किराये पर मिल जाती है। इस झरनें के प्रवेश द्वार पर पहुॅचकर आपको पैदल चलना पडता है। यह करीब आपको 1 या 1.5 किलोमीटर दूर आपको पैदल चलना पडेगा। उसके बाद आपको रजत जलप्रपात देखने मिलता है। आपको यहां पर पचमढ़ी की खूबसूरत वदियां देखने मिलती है। 

अप्सरा विहार जलप्रपात पचमढ़ी - Apsara vihar pachmarhi | Apsara falls pachmarhi

अप्सरा जलप्रपात पचमढ़ी - Apsara vihar in pachmarhi


अप्सरा विहार जलप्रपात पचमढ़ी  - Apsara vihar pachmarhi | Apsara falls pachmarhi


अप्सरा विहार जलप्रपात पचमढ़ी का एक सुंदर जलप्रपात है। यह जलप्रपात घने जंगलों के बीच में स्थित है। इस जलप्रपात में एक प्राकृतिक पूल बना हुआ है, जिसमें आप नहाने का मजा ले सकते है। अप्सरा विहार जलप्रपात में पहुंचने के लिए आपको पैदल चलना पड़ता है। पचमढ़ी हरे-भरे जंगलों से घिरा हुआ है और जलप्रपात पर जाने का जो रास्ता है, वह भी हरा भरा है। यह रास्ता जंगल से घिरा हुआ है। यहां पर आपको कुछ रास्ता कच्चा और कुछ रास्ता पक्का मिलेगा। मगर आपको पैदल चलने में मजा आयेगा। 

अप्सरा विहार जलप्रपात पचमढ़ी शहर से करीब 3 किलोमीटर दूर है। आप पचमढ़ी शहर से इस झरनें के प्रवेश द्वार तक जिप्सी से आ सकते है। पचमढ़ी के दर्शनीय स्थलों को घूमने में जिप्सी का प्रयोग किया जाता है। आप चाहे, तो यहां पर बाइक या साइकिल से भी आ सकते हैं। बाइक और साइकिल आपको पचमढ़ी शहर में किराए पर मिल जाती हैं। जिप्सी को प्रवेश द्वार के पास पार्क करके आप झरनें तक पैदल जा सकते है। आपको यहां पर करीब 1 किलोमीटर पैदल चलना पडता है। 

आप अप्सरा विहार जलप्रपात के पास पहुॅचते है, तो आपको छोटे छोटे झरने गिरते हुए दिखते है। फिर यह पानी एक बडे कुण्ड में गिरता है। यहां एक प्राकृतिक कुंड है, जो ज्यादा गहरा नहीं है। आप इसमें नहा सकते हैं और जिंदगी का आनंद ले सकते हैं। यहां पर आप अपनी फैमिली के साथ आ सकते हैं। अप्सरा विहार का नाम एक अनोखा नाम है। इस जलप्रपात में पुराने समय में अग्रेजों अफसरों की पत्नीयां स्नान किया करती थी, जिनकों यहां पर रहने वाले अदिवासी उन्हें देखा करते थे। वे लोग अग्रेजों अफसरों की पत्नीयां को अप्सरा समझाते थे और इस तरह यह जलप्रपात को अप्सरा जलप्रपात कहा जाना लगा। 
  

बी फॉल पचमढ़ी - Bee waterfall pachmarhi | B fall pachmarhi

जमुना जलप्रपात - Bee fall pachmarhi madhya pradesh | Jamuna Falls Pachmarhi



बी फॉल पचमढ़ी - Bee waterfall pachmarhi | B fall pachmarhi


बी फॉल पचमढ़ी (bee fall Pachmarhi) में स्थित एक खूबसूरत जलप्रपात है। आप जब भी पचमढ़ी की सैर करने जाते है, तो इस जलप्रपात में घूमने के लिए आ सकते हैं। यह जलप्रपात घने जंगलों के बीच में स्थित है। इस झरने को जमुना जलप्रपात के नाम से भी जाना जाता है। इस जलप्रपात में आप जिप्सी के द्वारा पहुंच सकते हैं। पचमढ़ी के दर्शनीय स्थलों की सैर करनें का सबसे अच्छा साधन जिप्सी है। आप इस जलप्रपात में साइकिल और बाइक के द्वारा भी पहुंच सकते हैं। यह साइकिल और बाइक भी पचमढ़ी में आपको किराए पर उपलब्ध हो जाते हैं।

बी फॉल (
bee fall) का नाम बी फॉल (bee fall) इसलिए रखा गया है, क्योंकि कहा जाता है कि यह पूरा क्षेत्र जंगल से घिरा हुआ है। इस एरिया में बहुत सारी मधुमक्खियों के छत्ते पाए जाते हैं। यहां पर आपको बोर्ड भी देखने के लिए मिलता है, जिसमें सरकार के द्वारा चेतावनी दी गई है, कि मधुमक्खियों से सावधान रहे और किसी भी तरह की छेड़खानी ना करें। इसके अलावा बी फॉल (bee fall) काफी ऊंचाई से गिरता है, जिससे जलप्रपात की जो आवाज रहती है वह मधुमक्खियों के भुनभुनाने की तरह आती है। इसलिए भी इस जलप्रपात को बी फॉल (bee fall) कहा जाता है।

बी फॉल
(bee fall) में पहुंचने के लिए आपको नीचे की तरह आना पडता है। यहां पर जलप्रपात तक पहुॅचने के लिए सीढियां बनाई गई है। यह करीब 100 या 150 सीढ़ियां होगें, जिसको उतरते हुए आप थक जाते है। मगर नीचे अगर आप थकान मिट जाती है। पहाडों के उपर से गिरता झरना बहुत ही मनोरम लगता है। आप इस झरने में नहाने का मजा ले सकते हैं। झरने के पास ही में आपको कुछ शॉप देखने के लिए मिल जाते हैं, जहां पर आप को नहाने के लिए कपड़े किराया पर मिल जाते हैं। आप अगर अपने साथ एकस्ट्रा कपड़े नहीं लाते है, तो यहां से कपड़े किराए पर लेकर नहा सकते हैं। आपको यहां पर मैंगी की कुछ अन्य शाॅप भी देखने मिलती है। आप यहां पर खाने का मजा भी ले सकते है। यहां पर चेंजिंग रूम भी बना हुआ है। इस झरने के नजदीक आकर आप को लगेगा कि आप प्रकृति की करीब आ गए है। यह जगह बहुत शांत और बहुत अच्छी है। बी फाॅल (bee fall) के जाने वाले रास्ते में आपको एक आर्टिफिशियल झरना देखने मिलता है,  जिससे पानी बहता है। इस झरने में आप बहुत सारी मछलियां देख सकते हैं। आप यहां पर अपने पैर डालकर बैठ सकते हैं और मछलियां आपके पैरों को गुदगुदी करेगी जो एक अच्छा अनुभव रहता है। पचमढ़ी एक बहुत ही मनोरम जगह है और यहां पर जाकर एक अलग अनुभव मिलता है। 


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खंदारी झरना जबलपुर - Khandari waterfall jabalpur | khandari Dam jabalpur

खंदारी जलप्रपात जबलपुर - Khandari Falls Jabalpur | Khandari  jalaprapat

खंदारी झरना जबलपुर - Khandari waterfall jabalpur | khandari Dam jabalpur

खंदारी जलप्रपात (khandari waterfall) छोटा सा मगर बहुत खूबसूरत जलप्रपात है। खंदारी जलप्रपात (khandari waterfall) डुमना नेचर पार्क में स्थित खंदारी झील (khandari lake)  में पानी के ओवरफलो के होने पर बनता है। यह जलप्रपात जबलपुर जिले में स्थित है। आपको खंदारी जलप्रपात (khandari waterfall) बरसात के समय देखने मिल जाएगा। बरसात के समय में ही खंदारी जलाशय (khandari lake) पानी से भर जाता है और डैम का पानी ओवरफ्लो होने लगता है। खंदारी जलाशय (khandari lake) का पानी जहां ओवरफ्लो होता है, उससे थोड़ा आगे एक और जलप्रपात बनता है, जो बहुत खूबसूरत होता है। यह जलप्रपात छोटा रहता है और यहां पर पहाड़ों से पानी गिरता है, जो बहुत ही अच्छा लगता है। यहां पर आप आकर अपना अच्छा समय बिता सकते हैं। यहां पर आप  पिकनिक मना सकते हैं। यह जगह हरियाली से भरी हुई है।

आप खंदारी जलप्रपात
(khandari waterfall) के नजदीक जा सकते हैं और यहां पर इंजॉय कर सकते हैं। बरसात के समय आप यहां पर आते हैं, तो खंदारी नदी की तेज धार को पार करते हुए आपको आना पड़ता है। खंदारी जलप्रपात (khandari waterfall) में पहुंचने के लिए आपको धोबी घाट से होते हुए आना पडता है। यहां रोड पक्की है। उसके बाद आप गाड़ी को रोड के किनारे खडा कर सकते है। यहां पर जाने का कोई भी शुल्क नहीं लिया जाता है। मगर यहां पर ज्यादा भीड़ होने की स्थिति में पार्किंग का चार्ज लिया जाता है, मगर यहां पर भीड़ नहीं रहती है, तो यहां पर ऐसा कोई चार्ज नहीं लिया जाता है। यहां पर आप आकर इंजॉय कर सकते हैं। रोड से झरना करीब 500 मीटर दूर होगा। आपको कच्चे रास्ते में पैदल चलना पड़ता है। आप इस झरने के नीचे नहाने का भी मजा ले सकते हैं। इस झरने की खूबसूरती को देख सकते हैं।

साल 2019 में खंदारी झरना
(khandari waterfall) के पास एक दुर्घटना हो गई थी। यहां पर जो पानी ओवरफ्लो होता है, झरने से थोड़ा आगे एक पूल बनता है, जो गहरा है। पूल में एक आदमी की डूबकर मृत्यु हो गई थी, जिसके कारण इस झरने पर जाने पर रोक लगा दी गई थी। इसलिए अगर आप इस झरने में जाते हैं, तो संभल कर जाएं। किसी भी तरह की असावधानी ना बरतें। अगर आप यहां पर नहाने का आनंद भी लेते हैं, तो सावधानी जरूर बरतें। क्योंकि बरसात में फिसलन बहुत होती है। आप यहां पर अपनी फैमिली और दोस्तों के साथ जाकर अच्छा समय बिता सकते है।
 

टेमर जलप्रपात जबलपुर - Temar fall jabalpur | Temar waterfall jabalpur

 टेमर झरना जबलपुर - Temar jharna jabalpur


टेमर जलप्रपात जबलपुर - Temar fall jabalpur | Temar waterfall jabalpur


टेमर जलप्रपात जबलपुर (Temer waterfalls Jabalpur) शहर का खूबसूरत झरना है। टेमर जलप्रपात जबलपुर (Temer waterfalls Jabalpur) के बरगी क्षेत्र में स्थित है। टेमर झरना जबलपुर (temar jharna jabalpur) से करीब 33 किलोमीटर दूर होगा। इस झरनें तक आप अपनी गाडी से पहुॅच सकते है। टेमर जलप्रपात में जाने का सबसे अच्छा समय बरसात का है, क्योंकि बरसात के समय झरने में बहुत सारा पानी रहता है। गर्मी के समय पर झरनें में पानी नहीं रहता है। 

टेमर जलप्रपात (
Temer waterfalls) पर जाने का रास्ता बहुत आसान है। आप यहां पर जबलपुर नागपुर हाईवे रोड से आ सकते हैं। बरगी के पास से बरगी बांध जाने वाले रास्ते के तरफ जाना होता है। बरगी बांध जाने वाले रास्ते में आपको काली माता की विशाल मूर्ति देखने के लिए मिलती है। इस मूर्ति की उचाई करीब 108 फीट है। यह जबलपुर की सबसे उची मूर्ति है। यह मूर्ति आपको दूर से ही देखने मिल जाता है। काली जी की मूर्ति को देखकर आप थोडा ही आगे जायेगें, तो आपको एक बोर्ड देखने मिलेगा। बोर्ड में टेमर जलप्रपात (Temer waterfalls) की ओर जाने का डायरेक्शन दिखेगा। आप बोर्ड की दिशा की तरफ आगे बढ़ जाये। यहां से आपको कच्चा रास्ता मिलता है। थोड़ी दूर कच्चे रास्ते में आप को चलना पड़ता है और आपको आगे जलप्रपात देखने के लिए मिलता है। टेमर जलप्रपात (Temer waterfalls) बरसात में बहुत खूबसूरत रहता है। मगर जलप्रपात जाने का रास्ता बरसात के समय बहुत ज्यादा खराब रहता है, क्योंकि यह रास्ता मिट्टी वाला है, जो पूरा रास्ता कीचड़ से सन रहता है। आप इस रास्ते में गाडी नहीं ले जा सकते है। टेमर झरना (temar jharna) ज्यादा बडा नही है, मगर खूबसूरत है।

टेमर जलप्रपात
(Temer waterfalls) में 2020 में एक दुर्घटना घट गई थी। यहां पर एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, इसलिए आप यहां पर जाते हैं, तो संभल कर रहें। झरने में किसी भी तरह की लापरवाही ना करें। यहां पर किसी भी तरह की कोई सुरक्षा नहीं है और ना ही यहां पर कोई गार्ड है। आप यहां पर सावधानीपूर्वक रहे और झरने में एंजॉय करें। आप यहां पर अपने दोस्तों और परिवार के लोगों के साथ आकर इंजॉय कर सकते हैं।


बैतूल पर्यटन स्थल - Betul tourist place | Betul famous places

बैतूल दर्शनीय स्थल - Places to visit near Betul | Betul tourist spot | Betul city


Betul jilaबैतूल जिला


बैतूल मध्यप्रदेश राज्य में स्थित एक जिला है। बैतूल जिला सतपुडा की पहाडियों से घिरा हुआ है। बैतूल जिला के मुलताई में ताप्ती नदी का उदगम हुआ है। ताप्ती मध्यप्रदेश की मुख्य नदी है। बैतूल जिले की सीमा छिंदवाड़ा, नागपुर, अमरावती, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, और होशंगाबाद की सीमाओं को छूती है। बैतूल जिला 10 विकास खंडों में बटा हुआ है। यह विकासखंड है - बैतूल, मुलताई, भैंसदेही, शाहपुर, अमला, प्रभातपट्टन, घोड़ाडोंगरी, चिचोली, भीमपुर, आठनेर,बैतूल नर्मदापुरम संभाग के अंर्तगत आता है। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से बैतूल की दूरी करीब 178 किलोमीटर है। बैतूल जिलें में घूमने के लिए बहुत सारी दर्शनीय जगह मौजूद है, जहां पर जाकर आप बहुत अच्छा समय बिता सकते है। 


बैतूल में घूमने की जगहें
Places to visit in Betul


बालाजीपुरम - Balajipuram betul | Betul ka Balajipuram | Balajipuram temple betul


बालाजीपुरम बैतूल जिले में स्थित दर्शनीय स्थल है। यह भारत का पांचवा धाम है। बालाजीपुरम दक्षिण भारतीय शैली में बना हुआ एक खूबसूरत मंदिर है। बालाजीपुरम नागपुर भोपाल हाईवे रोड पर स्थित है। बालाजीपुरम मंदिर का प्रवेश द्वार बहुत ही सुंदर बना हुआ है। बालाजीपुरम मंदिर बहुत ही भव्य है। मंदिर में आपको बहुत सारी मूर्तियां देखने के लिए मिलती है। यहां पर शिव भगवान जी का शिवलिंग बना हुआ है, जिसमें शिव भगवान जी की प्रतिमा को उकेरा गया है। मंदिर में बालाजी भगवान की मूर्ति स्थापित है। मंदिर में राम भगवान और सीता जी की मूर्ति स्थापित है। यहां पर बच्चों के लिए एक पार्क भी स्थित है। यहां पर वैष्णो माता का मंदिर का भी प्रतिरूप ही बना हुआ है। यहां पर हूबहू वैष्णो माता के मंदिर जैसी गुफा बनाई गई है। यहां पर आकर बहुत शांती मिलती है। इस मंदिर में आप आकर वैष्णो माता के दर्शन करने के लिए मिलता है। 

मुक्तागिरी दिगंबर जैन मंदिर - Muktagiri Digambar Jain Temple | Muktagiri Jain Mandir | Muktagiri Betul | Muktagiri

मुक्तागिरी बैतूल जिला का एक दर्शनीय स्थल है। मुक्तागिरी पूरे भारतवर्ष में प्रसिध्द है। यहा पर आपको जैन मंदिर देखने मिलते है। यहां पर 52 जैन मंदिर बने हुए है। यह मंदिर पहाडों के उपर बने हुए है। मुक्तागिरी मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र की सीमा पर पडता है। मुक्तागिरी बैतूल जिले में भैंसदेही तहसील के अंतर्गत आता है। मुक्तागिरी के जैन मंदिर 13 वीं -14 वीं शताब्दी के दौरान बनाया गए थे। मुक्तागिरी के इन जैन मंदिर में जाने के लिए आपको पैदल ही पहाडों पर जाना पडता है। आपको यह कार्य बहुत रोमांचक लगेगा। मुक्तागिरी में जैन मंदिर के अलावा आपको एक जलप्रपात भी देखने मिलता है। यह जलप्रपात आपको बरसात के समय देखने के लिए मिलता है। यहां पर रहने और खाने की भी व्यवस्था उपलब्ध है। यहां पर आप यात्रा के लिए कभी भी आ सकते है। यहां पर यात्रा का निश्चित समय है। 

सपना बांध - Sapna Dam Betul | Sapna bandh betul 

सपना बांध बैतूल जिले में ही घूमने वाली जगह है। सपना बैतूल जिलें में स्थित एक जलाशय है। सपना बांध में आप बरसात के समय घूम सकते हैं। बरसात के समय यहां का दृश्य बहुत रमणीय होता है। यह बांध बैतूल नागपुर हाईवे रोड पर स्थित है। यह जगह प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है। इस बांध के पानी का उपयोग सिंचाई के लिए किया जाता है। आप यहां पर पिकनिक मनाने के लिए आ सकते हैं।

कुकरु - Kukru khamla Betul | Kukru hill station | Kukru khamla hill station

कुकरू महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित एक खूबसूरत दर्शनीय स्थल है। यह बैतूल जिले की भैसदेही तहसील के अंतर्गत आता है।  कुकरू गांव बैतूल जिले की मनोरम जगह है। आप यहां पर घूमने का जा सकते हैं। यहां पर आपको खूबसूरत पहाड़ियों का दृश्य देखने के लिए मिलता है। यहां पर कॉफी का उत्पादन किया जाता है। आप यहां पर कॉफी के बागान भी घूम सकते हैं। कुकरू सूर्यास्त और सूर्योदय के लिए प्रसिद्ध है। यहां पर आप आकर सूर्यास्त का मनोरम दृश्य देख सकते है। यहां पर आप बरसात के समय घूमने के लिए आ सकते हैं। बरसात के समय कुकरू स्वर्ग जैसी लगती है। यहां पर आपको हर जगह पर छोटे-छोटे झरनें देखने के लिए मिल जाते हैं। कुकरू में आपको ठहरने के लिए होटल भी मिल जाते है। आप सरकारी वेवसाईड पर जाकर कुकरू जाने के लिए बुकिंग करा सकते है। इसमें आपको अलग अलग पैकेज मिल जाएगें। 

बुच स्थल विहंगम दृश्य - Buch Point | Buch point betul 

बुच स्थल कुकरू का एक व्यू पांइट है। कुकरू बैतूल जिला का दर्शनीय स्थल है। आप इस जगह से सतपुडा की हरी भरी वदियां देख सकते है। यहां पर आप बरसात के समय आते है, तो आपको बहुत ही रमणीय नजारा देखने मिलता है। यहां की पूरी घाटियां हरियाली की चादर ओढी रहती है। आपको बुच स्थल से सूर्यास्त और सूर्यादय का बहुत अच्छा नजारा देखने मिलता है। आपको यहां पर पवन चक्की भी देखने मिलती है। पवन चक्की से बिजली बनाई जाती है। 

सालबर्डी शिवलिंग गुफाएं - Salbardi shiv gufa | salbardi information | Salbardi Shivlinga Caves


सालबर्डी बैतूल जिले की एक दर्शनीय जगह है। बैतूल जिलें के सालबर्डी को शिवधाम के रूप में जाना जाता है। यहां पर शिव भगवान जी की एक गुफा है, जहां पर आपको ट्रैकिंग करके जाना पड़ता है। गुफा पर शिवलिंग विराजमान है। शिवलिंग पर पहाड से पानी गिरता रहता है और यह पानी कहां से आता है। यहां किसी को नहीं पता है। यहां पर शिवलिंग का आभिषेक स्वयं प्रकृति के द्वारा किया जाता है। यह जगह घने जंगलों के बीच में स्थित है। सालबर्डी महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित है। आप यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं। यहां पर हर साल मेला का आयोजन होता है और यह मेला आठ दिनों तक चलता है। यहां आकर बहुत शांति और सुकून मिलता है।

पांडव कालीन गुफाएं सालबर्डी - Pandav Caves Salbardi | Salbardi betul

पांडव कालीन गुफाएं सालबर्डी में देखने लायक एक प्राचीन जगह है। यहां पर आपको एक गुफा देखने मिलती है। इन गुफाएं के बारे में कहा जाता है, कि यहां पर पांडव अपने वनवास काल के दौरान रुके थे। यहां पर आपको बहुत सारी प्राचीन गुफाएं देखने मिलती है। यह गुफाएं पत्थर से बनी हुई है। यहां पर बरसात के समय बहुत ही अच्छा नजारा रहता है। 

मठारदेव बाबा मंदिर - Mathardev Temple | Mathardev temple sarni | Mathardev mandir

मठारदेव बाबा मंदिर बैतूल जिले की एक दर्शनीय स्थल है। मठारदेव बाबा मंदिर बैतूल जिले के सारणी में स्थित है। यह मंदिर पहाड़ी के शिखर पर स्थित है। यहां पर शिव भगवान जी का मंदिर स्थित है। पहाड़ी के शिखर पर आपको पैदल चलकर जाना पड़ता है। यहां पर सीढियां के द्वारा आप मंदिर तक पहुॅच सकते है। पहाड़ी के शिखर पर पहुॅचकर आपको सारणी का बहुत ही मनोरम दृश्य देखने के लिए मिलता है। यहां पर मकर संक्रांति के समय मेला लगता है, जिसमें भारी संख्या में लोग इकट्ठे होते हैं। मेलें में तरह तरह की दुकानें लगती है। 

सतपुड़ा बांध - Satpura Dam betul | Satpura bandh | Sarni dam

सतपुड़ा बांध बैतूल जिले के सारणी में स्थित है। यह बहुत खूबसूरत बांध है। यह बांध चारों तरफ से पहाड़ियों से घिरा हुआ है। सतपुड़ा बांध तवा नदी पर बना हुआ है। सतपुड़ा बांध में 14 गेट हैं। बरसात के समय डैम पानी से भर जाता है और इसके गेट खोले जाते हैं। बांध के गेट खोलने पर नजारा बहुत ही खूबसूरत होता है। बरसात के समय बांध के चारों तरफ का नजारा बहुत ही रमणीय होता है। पहाडों में हरियाली की चादर बिछी होती है। सतपुड़ा डैम के पानी का उपयोग सतपुड़ा पावर प्लांट में किया जाता है।

ताप्ती नदी का उद्गम स्थल - Origin of tapti river | Tapti nadi ka udgam sthal

ताप्ती नदी का उद्गम बैतूल जिलें के मुलताई में हुआ है। ताप्ती मध्यप्रदेश की एक मुख्य नदी है। भारत में नदियों को मां के रूप में पूजा जाता है। ताप्ती नदी को भी पूजा जाता है। ताप्ती सूर्य भगवान की पु़त्री है और शनि देव एवं यमराज की बहन है। ताप्ती नदी का उद्गम एक कुंड से हुआ है। ताप्ती नदी का उद्गम स्थल पर बहुत सारे मंदिर बने हुए है। कुंड के आस पास बहुत सारे मंदिर बने हुए हैं। कुंड पर भी किया जाता है।  यहां पर आकर आपको बहुत अच्छा लगेगा। यह बैतूल का एक प्रसिध्द स्थल है। हर वर्ष ताप्ती नदी का जन्मोत्सव पर यहां पर मेलें का आयोजन होता है। पूरे मंदिर को सजाया जाता है। मेलें मे बहुत दूर दूर से लोग आते है। 

शिव मंदिर भोपाली - छोटा महादेव भोपाली | Shiv Temple Bhopali - Chhota Mahadev Bhopali | Chhota mahadev Betul

शिव मंदिर भोपाली बैतूल की एक रमणीय जगह है। यह शिव मंदिर सतपुडा की पहाड़ियों पर स्थित है। यहां पर आपको एक गुफा देखने के लिए मिलती है, जिसमें शिवलिंग स्थापित है। यह जगह बरसात में स्वर्ग जैसी हो जाती है। चारों तरफ हरियाली देखने मिलती है। आपको मंदिर तक पहुॅचने के लिए पैदल चलकर जाना पडता है। मंदिर तक पहुॅचने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है। रास्तें में आपको जलप्रपात भी देखने मिलता है। यह शिव मंदिर बैतूल जिलें से करीब 30 किलोमीटर दूर है। सारणी से यह शिव मंदिर करीब 20 किलोमीटर दूर होगा। 

श्री हनुमान मंदिर केरपानी - Sri Hanuman Temple Kerapani Betul

श्री हनुमान मंदिर बैतूल जिलें का एक धर्मिक स्थल है। यह मंदिर पूरे बैतूल जिलें में प्रसिध्द है। यहां मंदिर बैतूल जिलें से करीब 22 किलोमीटर दूर है। यहां मंदिर भैसदेही मुख्य सडक पर ही स्थित है। आप यहां पर अपनी गाडी या बस से असानी से आ सकते है। मंदिर में शनिवार के दिन बहुत लोग आते है। मंदिर में स्थित हनुमान प्रतिमा स्वयं भू है। हनुमान जयंती के अवसर पर यहां हजारों की संख्या में भक्त आत है और हनुमान जी की पूजा-अर्चना करते है। 

पारसडोह बांध - Parasdoh dam betul | Parasdoh bandh betul

पारसडोह बांध बैतूल जिलें में घूमने की एक अच्छी जगह है। यहां एक जलाशय है। इस बांध के पानी का उपयोग पीने के लिए एवं सिचांई के लिए किया जाता है। आप यहां पर पिकनिक मनाने आ सकते है। पारसडोह बांध ताप्ती नदी पर बना हुआ है। इस बांध पर 6 गेट है। बरिश में इस बांध का नजारा बहुत ही अच्छा होता है। बरिश में गेट से पानी छोडा जाता है, जिसका दृश्य बहुत ही सुंदर रहता है। पारसडोह बांध बैतूल की अठनेर तहसील से 14 किलोमीटर दूर है। 

पारसडोह जलप्रपात बैतूल - Parsadoh waterfalls Betul | parasdoh jalaprapat betul

पारसडोह जलप्रपात बैतूल जिलें का दर्शनीय स्थल है। यह जलप्रपात तवा नदी पर बना हुआ है। यहां जलप्रपात बहुत खूबसूरत है। आप यहां पर बरसात के समय घूमने के लिए आ सकते है, क्योंकि बरसात में ही इस झरनें में पानी रहता है। पारसडोह झरनें के पास बहुत सारे मंदिर है, जहां पर आप घूम सकते है। पारसडोह जलप्रपात बैतूल जिलें की अठनेर तहसील में स्थित है। पारसडोह जलप्रपात अठनेर तहसील से करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर है। 

चंडी माता मंदिर चिचोली - Chandi Mata Temple Chicholi Betul | chandi mandir chicholi betul

चंडी माता मंदिर बैतूल जिलें का एक धर्मिक स्थल है। यहां मंदिर बैतूल चिचोली के पास स्थित है। यह मंदिर पूरे बैतूल जिलें में प्रसिध्द मंदिर है। यहां प्राचीन काली मंदिर है। यह मंदिर मुख्य बैतूल शहर से 55 किलोमीटर दूर है। यहां मंदिर नेशनल हाईवे 49 से करीब 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां पर स्थापित काली जी की प्रतिमा अत्यंत सुंदर और मनोहारी है। इस मंदिर में साल भर भीड लगी रहती है। यहां पर आकर बहुत शांती मिलती है। यहां पर मां काली को मुर्गी और बकरी की बली चढाई जाती है। इस मंदिर में मांगी गई दुआ जरूर पूरी होती है। यहां पर लोग अपनी मुराद लेकर आते है। 



बगदरी जलप्रपात जबलपुर - Bagdari waterfall jabalpur | Bagdari jalprapat jabalpur

बगदरी झरना जबलपुर - Bagdari Jharna | Baghdari waterfall jabalpur


बगदरी जलप्रपात जबलपुर - Bagdari waterfall jabalpur | Bagdari jalprapat jabalpur
बगदरी जलप्रपात जबलपुर

बगदरी जलप्रपात जबलपुर (bagdari waterfall jabalpur) का एक बहुत ही सुन्दर जलप्रपात है। यह जलप्रपात पहाडो के बीच से बहता है और बगदरी जलप्रपात (bagdari waterfall) का आसपास का दृश्य लुभावना है। आप बगदरी जलप्रपात (bagdari waterfall) बरसात के समय आ सकते है। बरसात के समय बगदरी जलप्रपात (bagdari waterfall) की सुंदरता देखते ही बनती है। यह झरना पहाड़ों के बीच से बहता हुआ नीचे गिरता है। बगदरी झरना (bagdari waterfall) दो श्रृखंला में नीचे गिरता है, अर्थात यहां पर दो छोटे झरने बनते हैं, जो बहुत खूबसूरत लगते हैं। यह झरना छोटा है, मगर पहाड़ के ऊपर से इस झरने को देखने का अनुभव भी अनोखा होता है। यहां का चारों तरफ का वातावरण हरियाली भर है। 


बगदरी जलप्रपात जबलपुर - Bagdari waterfall jabalpur | Bagdari jalprapat jabalpur
सड़क किनारे लगा बगदरी जलप्रपात का बोर्ड

बगदरी जलप्रपात (bagdari waterfall) में घूमने का सबसे अच्छा समय बरसात का होता है, क्योंकि बरसात के समय बगदरी जलप्रपात (bagdari waterfall) में पानी रहता है। गर्मी के मौसम में पानी की मात्रा कम होती जाती है। मई जून के महीने में यह जलप्रपात पूरी तरह से सूख जाता है। बरसात के समय इस जलप्रपात के चारों तरफ हरियाली रहती है। जबलपुर से बगदरी जलप्रपात (bagdari waterfall) करीब 35 किलोमीटर दूर होगा। आप यहां पर अपनी गाड़ी से आ सकते हैं। यहां आने का रास्ता भी खूबसूरत है। यहां पर हिरन नदी पडती है, उसके बाद एक बहुत ही मनोरम घाटी पडती है। घाटी के उपर से बहुत अच्छा दृश्य देखने मिलता है। घाटी से कुछ ही दूरी पर आपको मैन रोड पर बगदरी जलप्रपात (bagdari waterfall) का बोर्ड देखने मिलता है। आप उस दिशा में अपनी गाडी लेकर जायें। कुछ दूर तक कच्चा रास्ता है। इस रास्ते में दोपहिया और चार पहिया वाहन से आराम से चला जाएगा। आप जलप्रपात के पास पहुॅचकर गाडी खडी सकते है। यहां पर किसी भी तरह का शुल्क नहीं लिया जाता है। आप बगदरी जलप्रपात (bagdari waterfall) में आकर जलप्रपात की खूबसूरती को चटटानें के उपर से ही देख सकते हैं। यहां पर बहुत ऊंची खाई है, जिसमें से आप जलप्रपात को देख सकते हैं। मगर यहां पर आपको भी संभल कर रहने की जरूरत है। आप यहां पर संभल कर फोटोग्राफ कीजिएगा, नहीं तो यहां पर पैर फिसला तो आप खाई में जा सकते हैं।

बगदरी जलप्रपात
(bagdari waterfall) बरसाती जलप्रपात है। यह नदी जाकर हिरण नदी से मिल जाती है और आप इस नदी का दृश्य को बहुत दूर तक देख सकते है। बगदरी जलप्रपात (bagdari waterfall) में आप नदी के करीब भी जा सकते हैं। नदी के करीब जाने के लिए रास्ता नहीं है। मगर आप चट्टानों के माध्यम से नदी के करीब जा सकते हैं। यहां पर बहुत से लोग आपको नदी में पिकनिक मनाते हुए दिखाएंगे। यहां पर कुछ लोग ड्रिंक करते हुए भी दिख जाएंगे। मगर आप यहां जाएं, तो यहां की सुंदरता के मजे लें। इस जगह को गंदा न करें। यहां पर आपको ज्यादातर लड़के ही देखने मिलते है। यहां जगह कपल्स के लिए ठीक है, मगर सुरक्षित नहीं है। इसलिए यहां पर जायें, तो समूह में जाये। 

बगदरी जलप्रपात
(bagdari waterfall) में आप नदी के किनारे रहकर ही जलप्रपात का मजा ले, क्योंकि बरसात के समय कभी भी नदी में पानी बढ़ सकता है और आपकी जान खतरे में पड़ सकती है। बगदरी जलप्रपात (bagdari waterfall) में पहले भी एक्सीडेंट हो चुका है, जिसमें लोगों की जान चली गई थी। इसलिए आप यहां पर नदी के किनारे रहकर इंजॉय करें। यहां पर आप पिकनिक मना सकते हैं। यहां पर बहुत सारे लोग पिकनिक मनाने आते हैं। खाना झरनें के पास ही बनाते है। लोग नदी के करीब जाकर वहां पर बैठ सकते हैं। फोटो खींचवा सकते हैं। बगदरी जलप्रपात (bagdari waterfall) में अपनी फैमिली और दोस्तों के ग्रुप के साथ जाकर बहुत इंजॉय कर सकते हैं। यह जगह बहुत ही सुंदर है और यहां पर आपको बंदर भी देखने मिलते हैं। बगदरी जलप्रपात (bagdari waterfall) में किसी भी तरह की कोई भी सुविधा नहीं है। यहां पर किसी भी प्रकार की सुरक्षा नहीं है और न ही यहां पर कोई शाॅप मौजूद है। इसलिए आप अपनी सुरक्षा का स्वयं ध्यान रखें और खाना और पानी लेकर जायें। 

Bagdari waterfall Location


बगदरी जलप्रपात
(bagdari waterfall) मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले (Jabalpur district) के पास स्थित है। यह जबलपुर जिले (Jabalpur district) से करीब 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। बगदरी जलप्रपात (bagdari waterfall) जबलपुर सागर राजमार्ग पर स्थित है। बगदरी जलप्रपात (bagdari waterfall) में अपनी गाड़ी से जा सकते हैं।


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कामकंदला किला कटनी - Kamakandla fort | Katni ka kila

बिलहरी का कामकंदला किला - विष्णु वराह मंदिर बिलहरी कटनी

Kamakandla kila Katni - Vishnu Varaha Temple Bilhari Katni

कामकंदला किला कटनी - Kamakandla fort | Katni ka kila
कामकंदला किला बिलहरी कटनी

कामकंदला किला (kamakandla fort) कटनी में स्थित एक प्राचीन किला है। कामकंदला किला (kamakandla fort) कटनी जिलें की बिलहरी में स्थित है। बिलहरी कटनी से 15 किलोमीटर दूर होगा। प्राचीन समय में बिलहरी को पुप्पवती नाम से जाना जाता है। बिलहरी में आपको बहुत सारे प्राचीन खंडहर अवशेष देखने मिलते है। कामकंदला किला (kamakandla fort) में आपको एक बावड़ी और प्राचीन शिव मंदिर देखने मिलता है। 

कामकंदला किला
(kamakandla fort) बिलहरी के बीच में ही स्थित है। किलें के आसपास बहुत सारे घर बने हुए है। आप इस किलें तक अपनी गाडी से आ सकते है। आप इस किलें तक लोगों से पूछ कर आ सकते हैं। किले में गेट लगा रहता है। आप गेट खोलकर अंदर जा सकते है। आपको इस किलें के प्रवेश द्वार पर हनुमान जी की एक भव्य प्रतिमा देखने के लिए मिलती है, जो बहुत ही भव्य लगती है। हनुमान जी की प्रतिमा किलें के प्रवेश द्वार के बाये तरफ स्थापित है। किलें के दायें तरफ आपको एक बावड़ी देखने मिलती है। यह प्राचीन बावड़ी है। बावड़ी में पानी भर हुआ है और इसमें मछलियां भी मौजूद है। बावड़ी का पानी काले रंग का है। बावड़ी में सीढियां बनी हुई है। बावड़ी को करीब से देखने के लिए बावड़ी के अंदर एक प्लेटफार्म पत्थर का बना हुआ है, जहां पर आप सीढियों से जा सकते है। वैसे मुझे इस प्लेटफार्म में जाने से बहुत डर लग रहा था, क्योंकि यह प्लेटफार्म बावड़ी के काले पानी के उपर बना हुआ था। हम लोग बावड़ी घूमने के बाद किलें में गए। किलें में आपको तीन इमारत देखने मिलती है, जिनमें से एक शिव जी का मंदिर है, एक खंडहर इमारत है और एक इमारत बंद थी। खंडहर इमारत में देखने के लिए कुछ नहीं था। यहां पर ऊंची ऊंची दीवारें थी और लंबी-लंबी गैलरी थी। इस इमारत में छत भी नहीं थी। यहां छोटा सा बगीचा बना हुआ था। इस बगीचे की बाउंड्री में, जो पत्थर उपयोग किए गए है। इनमें अलग-अलग तरह की नक्काशी देखने के लिए मिल जाएगी। बगीचे में आपको एक पुराने समय का कोल्हू देखने के लिए मिल जाता है, जिससे पुराने समय में तेल निकाला जाता था। इसमें बैल को बांधा जाता था और बैल को वृत्ताकार परिधि में घुमाया जाता था, जिससे तेल निकाला जाता था। यहां पर बगीचे के बाजू में आपको शिव मंदिर देखने के लिए मिलता है। शिव मंदिर के बाहर और अंदर खूबसूरत नक्काशी की गई है। यह मंदिर काफी ऊंचा है। आप इस मंदिर के अंदर जाते हैं, तो मंदिर में आपको शिव भगवान जी का शिवलिंग की योनि देखने के लिए मिलती है। उपर का शिवलिंग यहां पर नहीं है। शिवलिंग शायद यहाँ के लोगों द्वारा यहां से कहीं और ले जाया जा चुका होगा। आप इस शिवलिंग की परिक्रमा कर सकते है। यहां पर आप दीवारों में खूबसूरत नक्काशी देख सकते हैं। ऊपर छत पर भी पेंटिंग की गई है। वह भी देखने लायक है। पेंटिंग अभी अच्छी अवस्था में है। किसी भी तरह से खराब नहीं हुई है। शिव मंदिर में आपको जगहें जगहें पर लोगों के नाम लिख हुए देखने मिलते है। आप से यह निवेदन है कि अगर आप किसी भी ऐतिहासिक स्मारक में जाए, तो इस तरह का नहीं करें। किसी भी तरह का नाम या जगह का नाम ना लिखें,क्योंकि इससे इन इमारतों की शोभा खराब हो जाती है। शिव मंदिर के बाजू में एक इमारत और है। इस इमारत में ताला लगा था। इस इमारत में प्राचीन मूर्तियां रखी गई है। आप लोग शायद जाएं, तो आपको इस इमारत में देखने के लिए मिल जाए। यहां पर एक वॉचमैन रहता है। आप उससे इस किलें के बारें में जाना सकते है। 

कामकंदला किला
(kamakandla fort) के बारे जानने के लिए आप यहां का दौरा कर सकते है। बिलहरी में कामकंदला किलें (kamakandla fort) के अलावा भी बहुत सारे प्राचीन इमारते है, जो अब खंडहर हो गई है। आप कामकंदला किले (kamakandla fort) से बाहर आते हैं, तो आपको एक टूटा फूटा मंदिर देखने के लिए मिलता है, जो प्राचीन काल का है। अब यहां खंडहर अवस्था में है। इसकी देखरेख भी कोई नहीं कर रहा है।

विष्णु वराह मंदिर  बिलहरी कटनी

 

कामकंदला किला कटनी - Kamakandla fort | Katni ka kila
विष्णु वराह मंदिर बिलहरी कटनी
 कामकंदला किलें (kamakandla fort) से करीब 1 या 2 किलोमीटर की दूरी पर एक विष्णु वराह मंदिर (Vishnu Varaha Temple) है, जो अच्छी अवस्था में है। इस मंदिर जाने का रास्ता बस्ती से होकर जाता है। इसलिए आपको यहां पर पहुॅचने में दिक्कत हो सकती है। विष्णु वराह मंदिर (Vishnu Varaha Temple) के आजू-बाजू बहुत सारे घर बने हुए हैं। इस मंदिर में जाने का रास्ता है। वह भी अच्छा नहीं है। पूरे रास्ते में कचरा है। विष्णु वराह मंदिर (Vishnu Varaha Temple) सुंदर है। यह मंदिर प्राचीन काल का है। इस मंदिर में एक मंडप और एक गर्भग्रह बना हुआ है। यह मंदिर एक चबूतर के उपर बना हुआ है। इस मंदिर का गर्भग्रह बहुत ऊंचा है। मंदिर के मंडप पर आपको एक पत्थर की विष्णु भगवान की वराह अवतार की मूर्ति देखने के लिए मिलती है। यह मूर्ति बहुत सुंदर है। मंदिर के चारों तरफ तार की बाउंड्री बनाई गई है। मंदिर के बाहर आपको बहुत सारे पत्थर की कलाकृतियां देखने मिलेगी, जिसमें विभिन्न नक्काशी बनाई गई है। यहां पर ज्यादा लोग नहीं आते हैं, क्योंकि इस मंदिर के बारें में किसी को पता नहीं है। इस मंदिर के थोड़ी दूरी पर एक तालाब स्थित है, जिसे शायद लक्ष्मण तालाब जाता है। इसका निर्माण भी पुराने समय में किया गया था। बिलहरी में प्राचीन निर्माण आपको देखने के लिए मिल जाते हैं। इस जगह की यात्रा आप कर सकते है। आपको यहां पर आकर अच्छा लगेगा।