मुरैना दर्शनीय स्थल - Places to visit in Morena | Morena tourist places

मुरैना पर्यटन स्थल - Morena Tourism | Tourist places in Morena |  मुरैना में घूमने की जगह | मुरैना शहर


मुरैना शहर के प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल
Famous Places to Visit in Morena Cit
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बटेश्वर मंदिर मुरैना - Bateshwar temple

बटेश्वर मंदिर मुरैना शहर के प्राचीन धरोहर हैं। यहां पर आपको प्राचीन मंदिर देखने के लिए मिलते है। यह मंदिर हजारों साल पुराने हैं।  यहां पर 200 से भी ज्यादा मंदिर है। मगर बहुत सारे मंदिर नष्ट हो गए हैं। अभी आपको करीब 100 मंदिर ही देखने के लिए मिल जाएंगे। इनमें से अधिकतर मंदिर भगवान शिव  जी को समर्पित है। यह मंदिर पूरी तरह पत्थर से बने हुए हैं और इन मंदिरों में  नक्कशी गई है, जो बहुत ही खूबसूरत है। आपको यहां पर आकर बहुत अच्छा लगेगा। यह मंदिर ग्वालियर से करीब 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और मुरैना से 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह मंदिर मुरैना जिले की पदावली गांव के पास स्थित है। आप यहां पर अपने वाहन से आसानी से आ सकते हैं। बटेश्वर के मंदिर गुर्जर एवं प्रतिहार वास्तुकला में बनाए गए हैं। बटेश्वर के मंदिर को पुरातात्विक विभाग द्वारा दोबारा बनाया गया है, क्योंकि यह मंदिर 13 वी शताब्दी के बाद नष्ट हो गए थे। इन मंदिर के नष्ट होने का कारण तो नहीं पता , मगर मंदिर पूरी तरह से खंडहर में तब्दील हो गए थे। उन्हें दोबारा बनाया गया है और इनके बनाने का श्रेय डॉ मोहम्मद को जाता है, जिन्होंने इन मंदिरों को पुन जीवित किया है। 


गढ़ी पड़ावली मुरैना - Garhi Padawali Morena

गढ़ी पड़ावली एक प्राचीन शिव मंदिर है। यह मंदिर पदावली गांव के पास में ही स्थित है। यहां पर आप शिव भगवान जी का मंदिर देख सकते हैं और मंदिर में शिवलिंग विराजमान है। आप यहां पर पत्थर के नंदी भी देख सकते हैं। मंदिर की दीवारों में आपको विभिन्न तरह की कारीगरी देखने के लिए मिलेगी। मंदिर की दीवार में ब्रह्मा, विष्णु, महेश, सूर्य, गणेश, काली और विष्णु के अवतारों का अंकन किया गया है। इसके अतिरिक्त  भागवत, रामायण, पुराणों से संबंधित प्रतिमाओं को दीवार पर उकेर गया है। इस मंदिर का निर्माण 10 वीं शती ईस्वी में किया गया था। 19 वीं शती में इस मंदिर के गोहद के राजा द्वारा गढ़ी में परिवर्तित कर दिया गया था। यहां पर बैठने की सुविधा उपलब्ध है। पार्किंग की सुविधा उपलब्ध है। टॉयलेट भी उपलब्ध है। आप यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं। यहां पर आ कर आपको अच्छा लगेगा। यहां पर गार्डन बना हुआ है, जहां पर आप बैठ सकते हैं। अगर आप यहां आते हैं, तो अपने साथ खाना और पानी जरूर लाएं । गढ़ी पड़ावली मंदिर मुरैना शहर से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और ग्वालियर से 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आप यहां पर गाड़ी से आराम से पहुंच सकते हैं। 


इकत्तरसो महादेव मंदिर, मितावली, मुरैना - Ekattarso Mahadev Mandir, Mitawali, Morena

मितावली या इकत्तरसो महादेव मंदिर मुरैना शहर का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। यहां पर आपको प्राचीन मंदिर देखने के लिए मिलेगा। यह मंदिर पूरी तरह पत्थरों से बना हुआ है। यह मंदिर मुरैना शहर के मितावली ग्राम के पास स्थित है। यह मंदिर एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। स्थानीय लोगों के द्वारा इस मंदिर को इकत्तरसो महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर शिव भगवान जी को समर्पित है। यहां पर आपको शिवलिंग देखने के लिए मिल जाता है। यह मंदिर वृत्ताकार आकृति में बना हुआ है और यहां पर मंदिर के बीच में एक मंदिर बना हुआ है, जिसमें शिव भगवान जी का शिवलिंग विराजमान है, जो आप देख सकते हैं। यहां पर प्राचीन मूर्तियां भी पाई गई थी, जो ग्वालियर संग्रहालय में संग्रहित कर के रखी गई है। इस मंदिर के डिजाइन के आधार पर ही हमारे संसद भवन को बनाया गया है। इस मंदिर का निर्माण महाराजा देवपाल द्वारा 1323 में कराया गया था। मंदिर से आपको सूर्योदय और सूर्यास्त का मनोरम दृश्य देखने के लिए मिल जाता है। यह मंदिर पहाड़ी के ऊपर स्थित है इसलिए चारों तरफ का दृश्य भी आपको देखने के लिए मिलता है। यहां पर आप अपने फैमिली वालों के साथ में दोस्तों के साथ घूमने के लिए आ सकते हैं। यहां आकर आपको अच्छा लगेगा। 


शनिश्चर मंदिर बारह्वाली मुरैना - Shanishchara temple Barahwali Morena

शनिश्चर मंदिर एक प्राचीन मंदिर है। यह बारहवली गांव में स्थित है। आप यहां पर आकर इस मंदिर को देख सकते हैं। इस मंदिर में शनि देवता की प्राचीन मूर्ति विद्यमान है और कहा जाता है कि इस मूर्ति की स्थापना राजा विक्रमादित्य के द्वारा की गई थी। यह मंदिर एक पहाड़ी पर बना हुआ है। मंदिर में हनुमान जी की भी भव्य प्रतिमा विराजमान है। इस मंदिर को लेकर हनुमानजी और शनि देवता जी की एक कहानी प्रचलित है। आप यहां पर आकर वह कहानी जान सकते हैं। यह मंदिर मुरैना जिले से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां आकर आपको बहुत अच्छा लगेगा। यह मंदिर ग्वालियर से 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आप यहां अपने वाहन से आ सकते हैं। 


नूराबाद पुल मुरैना - Noorabad Bridge Morena

नूराबाद पुल मुरैना शहर का प्राचीन स्मारक है। यह पुल मुरैना शहर के नूराबाद नगर में स्थित है। आप यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं। यह पुल मुरैना ग्वालियर हाईवे रोड के बाजू में ही स्थित है। इस पुल से वाहन नहीं गुजर सकते हैं। आप पुल पर पैदल घूम सकते हैं। इस पुल का निर्माण मुगल सम्राट जहांगीर ने 16वीं शताब्दी में अपनी रानी नूरजहां की  याद में कराया था। यह पुल सांक नदी पर बना हुआ है। यह पुल पुरातत्व विभाग के द्वारा संरक्षित है। यह पुल मुरैना और ग्वालियर को जोड़ता है। यह पुल बहुत खूबसूरती से बनाया गया है। यह पुल मुरैना शहर से 14 किलोमीटर दूर है। पुल के दोनों ओर अष्टकोणीय गुंबददार छतरियां बनी हैं। पुल के दोनों तरफ ऊंचे ऊंचे टावर बने हुए हैं, जो खूबसूरत लगते हैं और आप यहां पर आ कर इस पुल को देख सकते हैं। 


कुंतलपुर बांध या कोतवाल बांध  मुरैना - Kuntalpur Dam or Kotwal Dam Morena

कुंतलपुर बांध या कोतवाल बांध  मुरैना जिले में स्थित एक बांध है। यह बांध आसन नदी पर बना हुआ है। यह बांध मुरैना शहर से करीब 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस बांध तक  आप अपने वाहन से आ सकते हैं। यह बांध बहुत सुंदर है और आप यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं। बरसात के समय इसका दृश्य बहुत अच्छा होता है। 


सूर्य मंदिर कुंतलपुर मुरैना - Sun Temple Kuntalpur Morena

कुंतलपुर मुरैना शहर में स्थित एक धार्मिक स्थल है। कुंतलपुर का संबंध महाभारत से माना जाता है। माना जाता है कि कर्ण का जन्म कुंतलपुर के इस जगह पर हुआ था। करण को उनकी माता कुंती के द्वारा नदी में प्रवाहित यहीं पर किया गया था। यह पर आसन नदी बहती है। आसन नदी पर सूर्य भगवान के चरण चिन्ह भी देखने के लिए मिल जाएंगे। यहां पर एक शिव मंदिर भी है। शिव मंदिर में शिवलिंग विराजमान है और कहा जाता है कि यह शिवलिंग का आकार दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहा है। यह जगह बहुत खूबसूरत है और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है। मंदिर के  बाजू में नदी का नजारा भी आपको आकर्षक लगेगा। आप यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं। 


शहीद स्मारक मुरैना - Shaheed Smarak Morena

शहीद स्मारक मुरैना में घूमने वाली एक प्रमुख जगह है। यहां पर  देश के वीर सिपाही जिन्होंने अपने प्राणों के बलिदान दिए हैं, उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए स्मारक बनाया गया है। आप यहां पर आकर घूम सकते हैं। यहां पर गार्डन बना हुआ है और बैठने की व्यवस्था है। आपको यहां पर आकर अच्छा लगेगा। शहीद स्मारक मुरैना जिले में हाईवे रोड के पास ही में स्थित है। आप यहां पर आसानी से पहुंच सकते हैं। 


ककनमठ मंदिर मुरैना - Kakanamath Temple Morena

ककनमठ मंदिर मुरैना जिले में स्थित एक अद्भुत मंदिर है। यह मंदिर अद्भुत इसलिए है, क्योंकि यह मंदिर बिना किसी भी सपोर्ट के खड़ा हुआ है। इस मंदिर में किसी भी प्रकार के सीमेंट चुने या चिपकाने वाले पदार्थ का इस्तेमाल नहीं किया गया है। सिर्फ इसमें पत्थरों को बैलेंस करके रखा गया है और यह मंदिर अभी तक खड़ा हुआ है। आप यहां पर आकर घूम सकते हैं। कहा जाता है कि यह मंदिर भूतों के द्वारा एक रात में ही बनाया गया था। यह मंदिर बहुत खूबसूरत है और आप इस मंदिर में अंदर जा सकते हैं। घूम सकते हैं। यह मंदिर भगवान शिव जी को समर्पित है। ककनमठ मंदिर मुरैना जिले के सिहोनिया नामक गाँव में है। यह मंदिर 100 फीट ऊंचा है। इस मंदिर की दीवारों पर नक्काशी की गई है और आपको आश्चर्य होगा यह देखकर कि यह मंदिर अभी तक खड़ा हुआ है, बिना किसी सपोर्ट। कहा जाता है कि इस मंदिर को 11वीं शताब्दी में राजा कीर्ति राज ने बनवाया था। उनकी रानी का नाम काकनावती  था। इसलिए इस मंदिर को ककनमठ कहा जाता है। 


मुरैना संग्रहालय - Morena sangrahalay

मुरैना संग्रहालय मुरैना जिला में स्थित एक प्रमुख स्थल है। यहां पर आप आकर मुरैना में स्थित प्राचीन जगह के बारे में जान सकते हैं। आपको यहां पर अच्छे से जानकारी मिल जाएगी।यहां पर पुरानी चीजों का कलेक्शन करके भी रखा गया है। आप वह भी देख सकते हैं और आपको यहां पर हमारे देश के लिए शहीद हुए वीरों के बारे में भी जानकारी मिल जाएगी। यहां पर रामप्रसाद बिस्मिल्लाह जी के बारे में आपको जानकारी मिल जाएगी। मुरैना शहर को जानने के लिए यह एक अच्छी जगह है। 


घिरोना हनुमान मंदिर मुरैना - Ghirona hanuman mandir Morena

घिरोना हनुमान मंदिर मुरैना जिले का एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर नेशनल हाईवे 3 के पास में स्थित है। आप इस मंदिर तक बहुत ही आसानी से पहुंच सकते हैं। इस मंदिर में हनुमान जी की प्रतिमा विराजमान है। हनुमान जी की प्रतिमा के अलावा भी यहां पर अन्य देवी देवताओं की प्रतिमा विराजमान हैं। आप यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं। आपको यहां पर आंकर बहुत अच्छा लगेगा। इस मंदिर में मंगलवार और शनिवार के दिन बहुत ज्यादा भीड़ रहती है। बहुत ज्यादा लोग भगवान हनुमान जी के दर्शन करने के लिए आते हैं। 


अग्रसेन पार्क

नेहरू पार्क

अंबेडकर पार्क

गाँधी कॉलोनी पार्क


कटनी दर्शनीय स्थल

मंडला जिले के पर्यटन स्थल

बालाघाट पर्यटन स्थल

बैतूल पर्यटन स्थल


Gadisar Lake Jaisalmer - गड़ीसर झील जैसलमेर | Gadisar | जैसलमेर का दर्शनीय स्थल

गड़ीसर झील
Gadsisar lake | Gadisar lake history

Gadisar Lake Jaisalmer - गड़ीसर झील जैसलमेर | Gadisar | जैसलमेर का दर्शनीय स्थल
गड़ीसर झील जैसलमेर

Gadisar Lake Jaisalmer - गड़ीसर झील जैसलमेर | Gadisar | जैसलमेर का दर्शनीय स्थल
गड़ीसर झील जैसलमेर

गड़ीसर झील जैसलमेर में स्थित प्रसिद्ध दर्शनीय स्थलों में से एक है। आप यहां पर अपने शाम का समय आकर बहुत अच्छा बिता सकते हैं। हम लोग इस झील में शाम के 4 बजे पहुंचे होंगे। यह झील हमारे होटल के बहुत करीब थी, तो हम लोग पैदल ही इस झील तक आ गए थे। 


गड़ीसर झील जैसलमेर शहर में ही स्थित है। यहां पर आपको बहुत अच्छा लगेगा। यह बहुत बड़ी झील है। गड़ीसर झील के किनारे पर आपको बहुत सारे मंदिर देखने के लिए मिल जाते हैं। यह जो मंदिर है, वह पत्थर के बने हैं। यहां पर हम लोग झील के किनारे एक मंदिर में गए थे, जो शंकर भगवान जी को समर्पित था। यह मंदिर पूरी तरह पत्थर से बना हुआ था और बहुत खूबसूरत लग रहा था। 


गड़ीसर झील के पास बहुत सारी दुकानें लगी रहती हैं। इन दुकानों में आपको तरह-तरह का सामान मिलता है। आप यहां पर आकर खासतौर पर राजस्थानी सामान की शॉपिंग कर सकते हैं। यहां पर आपको राजस्थानी ड्रेस मिल जाती है। राजस्थानी बैग मिल जाएंगे और यहां पर आपको राजस्थानी कड़े भी मिल जाते हैं। यहां पर आप आकर अलग-अलग तरह के सामान ले सकते हैं। हम लोगों ने भी यहां पर सामान लिया था और यहां पर आप जो भी सामान लेते हैं। आप बारगेन जरूर करे। इससे आपको सामान सस्ता मिल जाता है। यहां पर आप राजस्थानी ड्रेस पहन कर फोटो खींचा सकते हैं। आपको इसका चार्ज लिया जाता है और यह चार्ज बहुत कम रहता है। आपकी एक याद आपके पास सुरक्षित फोटो की तौर पर रहती है। 


Gadisar Lake Jaisalmer - गड़ीसर झील जैसलमेर | Gadisar | जैसलमेर का दर्शनीय स्थल
गड़ीसर झील के पास सेल्फी प्वाइंट

यहां पर गड़ीसर झील के ऊपर के साइड पहाड़ी है। वहां पर आपको कबूतर देखने के लिए मिलते हैं। आप कबूतरों को दाना डाल सकते हैं और यहां पर आप बहुत अच्छी फोटो क्लिक कर सकते हैं। हम लोगों ने भी यहां पर कबूतरों के साथ फोटो क्लिक करी थी, जो बहुत मस्त फोटो आई है। यहां पर बहुत सारे लोग फोटोशूट करवाने आते हैं, क्योंकि यह जो जगह है। यह नेचुरल जगह है और बहुत खूबसूरत लगती है। 


गड़ीसर झील में आप बोट राइड का भी मजा ले सकते हैं। यहां पर आप पेडलबोर्ड का मजा ले सकते हैं और भी तरह तरह की बोट यहां पर होती हैं, जिनका आप मजा ले सकते हैं। हम लोगों ने यहां पर वोट राइट नहीं किया था। बोट राइड के अलग-अलग प्राइस रहते हैं। आप यहां पर आकर पता कर सकते हैं।


गड़ीसर झील में आपको बहुत अच्छा लगेगा। यहां पर आपको बदक देखने के लिए मिलती हैं और मछलियां देखने के लिए मिलती है, जो बहुत खूबसूरत लगती हैं। आप मछलियों को यहां पर दाना डाल सकते हैं। यहां पर शाम का समय बिताना बहुत अच्छा लगता है। 


गड़ीसर झील के बीच में आपको कुछ छतरियां बनी हुई है। वह देखने के लिए मिलती हैं। यह छतरियां बहुत खूबसूरत लगती हैं। अगर पानी कम रहता है, तो आप छतरियां के पास जा सकते हैं और इनकी खूबसूरती को देख सकते हैं। इन छतरियां के ऊपर कबूतर आ कर बैठते हैं, जो बहुत ही खूबसूरत लगते हैं।  यहां पर सूर्योदय का और सूर्यास्त का दृश्य बहुत ही मनोरम रहता है और बहुत खूबसूरत लगता है। 


गड़ीसर झील के आसपास खाने पीने के लिए बहुत सारी दुकानें हैं। हम लोगों ने यहां पर चाय पिया था।  हम लोग जैसलमेर ठंड के समय गए थे, तो यहां पर लोगों ने आग जलाई थी। तो हम लोग आपके पास जाकर बैठ गए थे, क्योंकि वहां पर बहुत ज्यादा ठंड लग रही थी। जैसलमेर के जो दर्शनीय स्थल है, वह  पास पास है, तो आप बहुत आसानी से घूम सकते हैं। 


गडीसर झील का इतिहास
Gadisar lake history


गड़ीसर झील को जैसलमेर के पहले शासक राजा रावल जैसल द्वारा बनाया गया था। कई वर्षों के बाद महाराजा गरीसंसार सिंह ने झील का पुनर्निर्माण करवाया। यह एक प्राचीन झील है।  


मोम संग्रहालय नाहरगढ़ किला

नाहरगढ़ का किला जयपुर

जैसलमेर का किला

जयगढ़ किले


Narmada sangam sthal or Narmada sangam ghat mandla - Narmada or Banjar nadi ka sangam

नर्मदा संगम स्थल या नर्मदा संगम घाट मंडला - नर्मदा और बंजर नदी का संगम

 
Narmada sangam sthal or Narmada sangam ghat mandla - Narmada or Banjar nadi ka sangam
नर्मदा संगम घाट



Narmada sangam sthal or Narmada sangam ghat mandla - Narmada or Banjar nadi ka sangam
नर्मदा संगम घाट


नर्मदा संगम स्थल या नर्मदा संगम घाट मंडला जिले का एक प्रमुख दर्शनीय स्थल है। यहां पर नर्मदा नदी और बंजर नदी का संगम हुआ है, इसलिए इसे संगम घाट कहा जाता है। यहां पर बहुत बड़ा घाट बना हुआ है। आप यहां पर आकर इस घाट में घूम सकते हैं। घाट के आस पास बहुत सारे प्राचीन मंदिर बने हुए हैं। आप इन मंदिरों में भी घूम सकते हैं। नर्मदा नदी और बंजर नदी मंडला शहर की एक प्रमुख नदी है। 
 
यहां पर आपको नर्मदा नदी का बहुत ही अद्भुत दृश्य देखने के लिए मिलता है। यहां पर नर्मदा नदी सी आकार की आपको देखने के लिए मिलती है। आप यहां पर बोटिंग का मजा ले सकते हैं। बोटिंग का चार्ज भी नॉर्मल रहता है। आप इस जगह से नाव  के द्वारा नर्मदा नदी के एक किनारे से दूसरे किनारे पर जा सकते हैं। आपको नर्मदा नदी के दूसरे किनारे पर मंडला का किला देखने के लिए मिलता है। यह किला अब खंडहर में तब्दील हो चुका है। मगर अपने समय में यह किला बहुत ही भव्य था। नर्मदा नदी के दूसरे किनारे पर आपको एक भव्य मंदिर देखने के लिए मिलता है। यह मंदिर पुरवा नाम की जगह पर स्थित है। यह मंदिर श्री कृष्ण जी को समर्पित है और आप संगम घाट से इस मंदिर का दृश्य देख सकते हैं। आप इस मंदिर से नाव के द्वारा भी पहुंच सकते हैं। आप इस मंदिर तक  सड़क मार्ग से भी जा सकते हैं। मगर सड़क मार्ग से आपको समय लगेगा। 
 
Narmada sangam sthal or Narmada sangam ghat mandla - Narmada or Banjar nadi ka sangam
बूढ़ी माता का मंदिर

Narmada sangam sthal or Narmada sangam ghat mandla - Narmada or Banjar nadi ka sangam
बूढ़ी माता का मंदिर

 
 संगम घाट में नाव में घूमने के अलावा भी आप यहां पर बहुत सारे लोगों को देखते हैं, जो तरह-तरह की क्रियाकलाप करते हुए देखने के लिए मिलते हैं। यहां पर बहुत सारे लोग अपने मृत्य परिजनों का श्राद्ध करते हुए आपको देखने के लिए मिल जाएंगे। आपको यहां पर  कुछ लोग मछली पकड़ते हुए और उन्हें धूप में सुखते हुए भी देखने के लिए मिल जाते हैं। यहां के अधिकतर लोग मछली पकड़ते हैं और उन्हें बाजार में जाकर बेचते है। यहां पर नर्मदा जी की पूजा करते हुए भी बहुत सारे लोग देखने के लिए मिलते हैं। आप यहां पर आते हैं, तो नर्मदा नदी के घाट से थोड़ा आगे जाते हैं, तो आपको बूढ़ी माता का मंदिर देखने के लिए मिलता है। बूढ़ी माता का मंदिर बहुत ही प्राचीन है और मंदिर में माता जी की भव्य मूर्ति विराजमान है। यह मंदिर भी बहुत खूबसूरती से बनाया गया है। मंदिर के सामने एक व्यूप्वाइंट बना हुआ है, जहां से आप नर्मदा नदी का भव्य दृश्य देख सकते हैं। यहां पर त्यौहार में बहुत ज्यादा भीड़ लगती है और लोग नर्मदा नदी के दर्शन करने के लिए आते हैं। मकर संक्रांति के समय और नर्मदा जयंती के समय यहां पर हजारों की तादाद में लोग आते हैं। यहां पर विशाल मेला भी लगता है। आप यहां से बूढ़ी माता मंदिर से थोड़ा आगे जाएंगे, तो आपको नर्मदा और बंजर नदी का संगम देखने के लिए मिलता है। आप यहां पर पैदल जा सकते हैं। संगम घाट में सभी प्रकार की व्यवस्था उपलब्ध है। यहां पर सुलभ शौचालय भी बनवाया गया है, जिसका आपको प्रयोग करने का चार्ज लिया जाता है। यहां पर आसपास आपको चाय बगैरा के ठेले भी देखने के लिए मिल जाता है। आप इस जगह पर अपनी फैमिली वालों के साथ और दोस्तों के साथ घूमने के लिए आ सकते हैं। यहां पर ज्यादा भीड़ भाड़ नहीं रहती है। आप यहां पर शांति से अपना समय बिता सकते हैं। 
 

मंडला में नर्मदा संगम घाट कहाँ है

Where is Narmada Sangam Ghat in Mandla

 
नर्मदा संगम घाट मंडला शहर के महाराजपुर में स्थित है और आप यहां पर आसानी से पहुंच सकते हैं। नर्मदा संगम घाट में पहुंचना बहुत ही आसान है। आप अपनी गाड़ी से इस घाट तक बहुत आसानी से पहुंच सकते हैं। यह घाट रपटा घाट के बहुत करीब है। यह करीब 1 किलोमीटर दूर होगा और आप यहां पर पैदल भी आ सकते हैं। 





रानी दुर्गावती समाधि स्थल - Rani Durgavati Samadhi | रानी दुर्गावती

रानी दुर्गावती समाधि - Rani Durgavati Samadhi sthal | Rani Durgavati punyatithi | रानी दुर्गावती का बलिदान दिवस


रानी दुर्गावती समाधि स्थल - Rani Durgavati Samadhi | रानी दुर्गावती

रानी दुर्गावती समाधि स्थल


रानी दुर्गावती समाधि स्थल - Rani Durgavati Samadhi | रानी दुर्गावती

रानी दुर्गावती समाधि स्थल



रानी दुर्गावती समाधि स्थल - Rani Durgavati Samadhi | रानी दुर्गावती

26 जनवरी को लगने वाला मेला


रानी दुर्गावती समाधि स्थल - Rani Durgavati Samadhi | रानी दुर्गावती

मेले में मिलने वाला सामान


रानी दुर्गावती एक गोंड रानी थी। रानी दुर्गावती का विवाह गोंड शासक संग्राम सिंह के बड़े पुत्र दलपति शाह के साथ सन 1542 में हुआ था। सन 1545 में रानी दुर्गावती ने पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम उन्होंने वीरनारायण रखा। कुछ ही वर्ष पश्चात सन 1550 में उनके पति दलपति शाह की मृत्यु हो गई। रानी ने शासन को अपने अधीन कर लिया और शासन की बागडोर संभाल ली। अकबर अपने राज्य का विस्तार कर रहा था, इसलिए उसने रानी के राज को हड़पने का सोचा।


रानी दुर्गावती की मृत्यु कैसे हुई - Rani durgavati died


अकबर का मानिकपुर का सूबेदार आसिफ अब्दुल मजीद आसिफ खा ने 50000 सैनिकों के साथ नरई नाले के समीप रानी दुर्गावती पर आक्रमण किया। रानी ने अपनी सेना के साथ उसका डटकर सामना किया और उसे मुंहतोड़ जवाब दिया और उसे पीछे धकेल दिया। दूसरे दिन आसिफ खा ने तोपखाने के साथ आक्रमण किया, जिससे रानी दुर्गावती को चोट आई और उन्होंने अपने आप को असुरक्षित पाया, जिसके कारण उन्होंने अपनी कटार से अपने आप पर आत्माघात करके अपने प्राण को त्याग दिया। 24 जून 1964 को उन्होंने अपने प्राणों को त्याग दिया और अमर हो गई। उनकी वीरता, बलिदान, मातृभूमि से प्यार के कारण ही वह प्रसिद्ध है और 24 जून को हर साल उनको श्रद्धांजलि दी जाती है। 


रानी दुर्गावती समाधि मेला या समाधि मेला
Rani Durgavati Samadhi Mela or Samadhi Mela


रानी दुर्गावती की समाधि जबलपुर जिले में नरई नाला नाम की जगह पर स्थित है। इस जगह में पहुंचना बहुत ही आसान है। आप जब भी बरगी बांध जाते हैं, तो यह जगह आपको देखने के लिए मिलती है। तब आपको रानी दुर्गावती की समाधि देखने के लिए मिल जाएगी, क्योंकि यह मेन रोड में ही स्थित है। रानी दुर्गावती के समाधि के आसपास आपको चाय नाश्ते की दुकान भी देखने के लिए मिल जाती है। रानी दुर्गावती समाधि स्थल मुख्य रोड में ही स्थित है। यहां पर छोटा सा गार्डन बना हुआ है, जहां पर रानी दुर्गावती की समाधि है और यहां पर आपको रानी दुर्गावती की एक विशाल मूर्ति भी देखने के लिए मिलती है। यहां पर आपको हाथी की भी एक मूर्ति देखने के लिए मिलती है। 26 जनवरी के समय इस जगह में मेला लगता है, जिसमें दूर दूर से लोग आते हैं और यह मेला 8 दिनों तक लगता है। इस मेले में आप भी घूमने के लिए जा सकते हैं। यहां पर आसपास के गांव के लोग मेले में आते हैं। यहां पर आप आएंगे, तो रोड के एक तरफ रानी दुर्गावती की समाधि स्थित है और रोड की दूसरी तरफ आपको रानी दुर्गावती के पुत्र वीर नारायण जी की मूर्ति देखने के लिए मिलती है। मूर्ति के पास जाने के लिए एक छोटा सा पुल बना हुआ है और बरसात के समय इस पुल में पानी बहता है, जो बहुत ही खूबसूरत लगता है। बरसात के समय यहां पर चारों तरफ हरियाली रहती है और यहां पर जंगल है जो बहुत खूबसूरत लगता है और आपको भी अच्छा लगेगा। 26 जनवरी के समय रानी दुर्गावती की समाधि में सांस्कृतिक कार्यक्रम होते रहते हैं। यहां पर आप आते हैं, तो आपको यहां पर लोग रानी दुर्गावती की समाधि की पूजा करते हुए देखने के लिए मिल जाते हैं और यहां पर आकर आपको अच्छा अनुभव होगा।  मेले में भी आप घूम सकते हैं। मेले में आपको तरह-तरह के झूले देखने के लिए मिल जाते हैं और यहां पर बहुत सारी दुकानें रहती हैं, जहां पर आप शॉपिंग कर सकते हैं। यहां पर खाने पीने की भी दुकानें लगाई जाती हैं, जहां पर आपको तरह तरह का खाना मिल जाता है। मेले में आपको आटे की मिठाई और गुड़ की जलेबी खाने के लिए मिलेगी और यहां पर आपको बहुत बड़ी तादाद में आपको यह देखने के लिए मिल जाता है, तो आप यहां पर इनका लुफ्त उठा सकते हैं। इस मेले में आप घूमने के लिए आ सकते हैं और आपको यहां पर बहुत अच्छा लगेगा। आप यहां पर अपने दोस्तों और फैमिली मेंबर्स के साथ आ सकते हैं। यहां पर पार्किंग के लिए भी व्यवस्थाएं रहती है। 


दलदली माता मंदिर नैनपुर, मंडला,

वीरांगना दुर्गावती वन्य जीव अभ्यारण

सतधारा मेला सिहोरा जबलपुर

ग्वारीघाट का खूबसूरत घाट