जैसलमेर का किला (Jaisalmer Fort) की यात्रा

जैसलमेर का किला जैसलमेर जिलें के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। जैसलमेर का किला जैसलमेर जिले में स्थित एक बहुत ही विशाल किला है।  यह किला आपको जैसलमेर शहर के किसी भी हिस्से से देखने मिल जाता है।  यह किला एक पहाड़ी पर स्थित है और यह किला रेलवे स्टेशन से करीब 2 से 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित होगा। आप इस किलें तक पहुॅचने के लिए  ऑटो लेकर आराम से जा सकते हैं। रेल्वे स्टेशन में ही आटों वाले आ जाते है, और आपसे पूछते है, कि आप कहां जाएगें। आप आटो वालों से मोलभाव करके इस किलें तक आ सकते है। 


जैसलमेर का किला (Jaisalmer Fort) की यात्रा

जैसलमेर किले का रानी महल 


इस किलें की स्थापना राव जैसल द्वारा सन ११५६ में की गई थी। यह किला त्रिकूट पहाड़ी पर स्थित है। रेगिस्तान में स्थित होने के कारण इसे सोनार किला या सुनहरा किला भी कहते हैं। इस किला को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर की रूप में शामिल किया गया है। 

जैसलमेर का किलें तक जाने के लिए हम लोग ने भी आटों बुक किया था।  यह किला बहुत बड़ा है और यह दुनिया का पहला लिबिंग फोर्ट है, मतलब आज भी इस किलें में लोग रहते हैं। यह किला बहुत बड़ा है, तो आप इस किलें में जाते है तो आपको एक गाइड जरूर लेकर जाए। आपको किलें के प्रवेश द्वार ही में आपको बहुत सारे गाइड मिल जाते है, जो 100 रू में आपको उपलब्ध हो जाते है। हम लोगों ने गाइड नहीं लिया था, जिससे किलें के बहुत सारी जगह के बारें में हमें जानकारी नहीं मिली। बस हम लोगों ने किलें के अंदर  के कुछ दर्शनीय स्थल ही घूम पायें। इसलिए मैं आपको सलाह देती हूं कि आप जैसलमेर का किलें जाए, तो गाइड लेकर जरूर जाए। गाइड आपको यहां की महत्वपूर्ण जगह के बारे में अच्छे से जानकारी दे पाएगा।

जैसलमेर का किला (Jaisalmer Fort) की यात्रा

जैसलमेर का किला 

जैसलमेर का किला (Jaisalmer Fort) की यात्रा

जैसलमेर का किला 

जैसलमेर का किला (Jaisalmer Fort) की यात्रा

जैसलमेर किले का प्रवेश द्वार 


जैसलमेर का किलें में हम लोगों ने तीन जगह घूमा थे। आप जैसे ही किले में प्रवेश करते हैं। आपको यहां पर पहले बहुत सारी दुकानें देखने मिलती हैं। यह पर आपकों किलें की उची उची दीवारें भी देखने मिलती है। इन दुकानों में आपको ऊंट के चमड़े  की सामान की दुकानें मिलती है, मगर इन सामान के प्राइस बहुत ज्यादा हाई रहते है। इसके अलावा यहां पर आपको राजस्थानी पगड़ी मिल जाएंगी और राजस्थानी ड्रेस मिल जाएंगी। आप इन सब दुकानों को देखते हुए जैसलमेर का किलें में प्रवेश करते है। आपको किले का एक विशाल प्रवेश द्वार देखने मिलेगा और जहां पर छोटे छोटे मंदिर बने हुए हैं। इस किलें में हम लोग पैदल आये थे। मगर आप चाहे तो बाइक से इस किलें के अंदर तक जा सकते है। 

जैसलमेर का किला (Jaisalmer Fort) की यात्रा

जैसलमेर किले का रानी महल 


जैसलमेर का किलें का पहला आकर्षण है रानी महल रानी महल जैसलमेर का किलें के अंदर स्थित है। यह महल बहुत खूबसूरत है। इस महल के चारों तरफ बहुत सारी दुकानें है। कहा जाता है कि राजा रानी रहा करते थे। रानी महल का इतिहास के बारें में हमे जानकारी नहीं है। मगर महल बहुत सुंदर है। आपको यह महल देख कर बहुत अच्छा लगेगा।

इस महल को देखकर आप आगे बढ़ते हैं, तो महल के बाजू से एक संकरा रास्ता गया है। आपको इस रास्तें में आगे बढना है। आप आगे बढ़ते हैं, तो आपको एक खूबसूरत बालकनी देखने मिलती है, जिसकी फोटो खींचने पर 10 रू चार्ज किया जाता है। मगर यह बालकनी बहुत खूबसूरत है। मगर हम पैसे देकर फोटो खींचने में कोई रूचि नहीं थी। आप इस रोड से आगे बढते है, तो आपको यहां पर एक तोप देखने मिलती है, जो पुराने समय की लोहे की एक मजबूत तोप है। यह तोप ऊंचे शिखर पर रखी हुई है और इस जगह से पूरी सिटी का व्यू देखने मिलता है। इस तोप के बारे में हमें कोई जानकारी नहीं है। 

जैसलमेर का किला (Jaisalmer Fort) की यात्रा

जैसलमेर किले की तोप  

जैसलमेर का किला (Jaisalmer Fort) की यात्रा

 जैसलमेर किले से पूरे शहर का दृश्य  


जैसलमेर का किलें में अभी भी इंसान रहते हैं और इस महल में घूमने के लिए आपको तंग गलियों से गुजरना पड़ता है। यहां पर जो सड़कें हैं, वह बहुत ही संकरी हैं और अगर यहां पर आप बीच में फंस जाते है, तो आपको इंतजार करना होता है। हम लोगों के साथ भी ऐसा हीं हुआ था। यह पर हम लोगों के रास्तें में एक गाय कुछ खा रहीं थीं। हम लोग उस जगह से निकल नहीं पाए और हम लोगों को 5 से 10 मिनट का इंतजार करना पडा गया था। 

जैसलमेर का किलें के अंदर ही आपको खाने पीने की वस्तुएं मिल जाती है। इसके अलावा यह पर कपडें भी आपको मिल जाते है। यह पर कपडें और घर को सजाने वालें समान की बहुत सारी दुकानें है। आपको कहीं कहीं पर आपको सुंदर कंगन भी मिलते है। 

जैसलमेर का किला (Jaisalmer Fort) की यात्रा

जैसलमेर किले का जैन मंदिर 


जैसलमेर किले में एक और आकर्षण है जैन मंदिर। जैन मंदिर जैसलमेर किले के अंदर स्थित है। यह बहुत ही खूबसूरत मंदिर है। मंदिर में पत्थर की नक्काशी बहुत ही खूबसूरत है। 

आपको इस किलें में बहुत सारे होटल्स भी मिलेगें। जिनमें जाकर आप इस किलें के शिखर से पूरी सिटी का व्यू देख सकते है और बहुत अच्छा भी रहता है, यहां पर आकर आपको बहुत अच्छा लगेगा।

इस तरह हम लोगों की जैसलमेर किले की यात्रा रही और हम लोगों को यह सफर बहुत यादगार रहेगा।

आप लोगों को यह लेख कैसा लगा आप लोग कमेंट करके हमें जरूर बताइएगा और आप इसे शेयर जरूर कीजिएगा।

अपना समय देने के लिए धन्यवाद

निदान फॉल का मनोरम दृश्य - Nidan fall, Jabalpur

निदान जलप्रपात जबलपुरNidan Falls Jabalpur


निदान जलप्रपात जबलपुर (Nidan Falls Jabalpur) का एक खूबसूरत झरना है, जो कटंगी में स्थित है। आप जबलपुर से कटंगी जाते है, तो आपको यह झरना देखने मिलता है। यहां झरना चारों तरफ से खूबसूरत पहाडियों से घिरा हुआ है। 

निदान फॉल का मनोरम दृश्य -  Nidan fall, Jabalpur

निदान जलप्रपात की खूबसूरती 

निदान जलप्रपात कहां स्थित है
Where is the Nidan waterfall


निदान जलप्रपात जबलपुर (Nidan Falls Jabalpur) जिले के कंटगी में स्थित है। जबलपुर से दमोह हाईवे रोड पर निदान जलप्रपात (Nidan Fallsस्थित है। कटंगी जबलपुर (Katangi Jabalpur) से 50 से 55 किमी दूर होगा। आप इस झरने में अपनी गाड़ी से जा सकते हैं। आपको यह पर अपनी गाड़ी से ही जाना पड़ेगा, क्योकि यह झरना जंगल के बीच स्थित है। अगर आप पैदल चलना चाहते है, तो जबलपुर दमोह हाईवे रोड (Jabalpur Damoh Highway Roadपर बसें भी चलती हैं। आप बसों से मेन रोड तक आ सकते हैं और मेन रोड से आपको दो से ढाई किलोमीटर पैदल चलना पड़ेगा। इस झरने तक पहुंचने के लिए। आप चाहे तो इस तरह कभी कर सकते हैं।

यह झरना आपको दमोह जबलपुर हाईवे रोड (Jabalpur Damoh Highway Road) से ही दिखने लगता है। झरने तक पहुॅचने के लिए आपको कटंगी से आगे आना पड़ता है, आपको रोड के बाजू में एक मस्जिद मिलती है। मस्जिद के बाजू से रास्ता गया है झरनें के लिए। आप अपनी गाड़ी से झरनें की तरफ जा सकते हैं। आपको इस रास्तें में एक नदी मिलती है। उस नदी पर झरने का ही पानी आता है। आपको नदी पार करना पडता है, वैसे नदी पर से गाडी चली जाती है। नदी के पास आपको थोडी बदबु आयेगी। नदी में पानी ज्यादा है, तो आप ना जाए और नदी में पानी कम है, तो आप जा सकते हैं। आप झरनें की तरफ आगे बढते है, तो आपको यहां पर खूबसूरत और उचे उचें पहाड देखने मिलेगें। आप अगर ग्रुप में रहेंगे, तो अच्छा रहेगा, क्योंकि यह जो झरना है। यह थोड़ा सुनसान है। वैसे जब झरनें में पानी रहता है, तब यहां पर बहुत ज्यादा भीड़ रहती है। बहुत ज्यादा लोग आते हैं। आप यहां पर सुबह जल्दी आते है, तो यहां पर सुनसान रहता है, जैसे जैसे दिन बढता है भीड बढनें लगती है। 

निदान फॉल का मनोरम दृश्य -  Nidan fall, Jabalpur

निदान जलप्रपात 


निदान जलप्रपात (Nidan Falls) से करीब 1 किलोमीटर दूर आपकी गाडी खड़ी होती है और आपको झरनें तक पैदल चलकर आना होता है। बरसात के समय पर यह जगह जन्नत के समान लगती है, क्योंकि आपको चारों तरफ हरे भरे पेड़, ऊंचे पहाड, कलकल करती नदी और शानदार झरनें देखनें मिलते है, जो एक अविस्मरणीय अनुभव होता है। 

आपको निदान झरने (Nidan Falls) तक पैदल चलना पड़ता है, इसलिए आप जूते पहन कर आए, वो आपके लिए बेहतर होगा। अगर आप बरसात के समय यहां पर आते है, तो यहां पर जो चट्टाने रहती हैं। वह फिसलन भरी हो सकती है। जिनमें चलनें में आपको परेशानी हो सकती है, जिसमें आप फिसल कर गिर सकते हैं। तो आपको यहां पर ध्यान से चलने की आवश्यकता है। यहां पर जो रास्ता है  वह बहुत ही उबड़ खाबड़ है, इसलिए आप यहां पर सावधानी पूर्वक कदम बढायें अगर आप यहां पर आते है, तो बूढ़े और बच्चे को साथ न लायें। यह मेरी सलाह है, क्योंकि वह इस जगह पर नहीं चल सकेंगें। 

इस जगह पर एक नहीं दो झरने है और दोनों अलग-अलग दिशा में है। आप अपनी गाडी पार्क करते है, तो आपको दोनों झरनें देखने मिलते है। दोनों झरनों तक पहुंचने के लिए आपको 1 किलोमीटर ट्रैक करना पड़ता है, मतलब 1 किलोमीटर तक पैदल चलना होता है। आप झरना पहुंचते हैं, तो झरना बहुत खूबसूरत है। ऊंची पहाड़ियां के ऊपर से गिरता हुआ पानी एक कुंड में गिरता है, जो देखने में बहुत अच्छा लगता है। 

हम लोग को इस जगह पर जाकर बहुत अच्छा लगा। हम लोग जिस झरनें मे गए थे। उस झरने का जो कुंड है, वह बहुत गहरा है और यहां पर आप कुंड में नहा नहीं सकते है। यहां पर नहानें की मनाही है। पर्किग वाला आपको यह जरूर बोलेगा और आप भी इस बात का ध्यान दें। झरनें तक पहुॅचने का जो रास्ता है, वह जंगल वाला है। यहां पर जंगली जानवर तो नहीं मगर छोटे-मोटे जहरीले जानवर हो सकते है। आप यहां पर आये तो जूते पहनकर आएंगे।

यहां पर दूसरी तरफ जो झरना है, उस तरफ का कुंड छोटा है और उस तरफ आप नहाने का आनंद भी उठा सकते हैं, तो आप चाहें तो वहां जा सकते हैं।  यह जानकारी आप पार्किंग वालों से ले सकते हैं। वह आपको दोनों झरनें की  जानकारी दे सकते हैं, कि आप कहां नहा सकते हैं और कहां कुंड गहरा है।

आप यहां पर अपना पूरा 1 दिन बिता सकते हैं। आप यहां पर आते हैं, तो अपने साथ कुछ खाने पीने का जरूर लेकर आइएगा, क्योंकि यहां पर किसी भी तरह के खाने पीने की दुकान नहीं है। यहां का पूरा एरिया जंगल का है, तो आप यहां पर खाना जरूर साथ लायें। आप जो भी अपने साथ लाते हैं, तो वहां कचरा भी अपने साथ लेकर जाएं। इसके अलावा यहां पर किसी भी तरह की लेट्रिन बाथरूम की सुविधा नहीं है, तो आपको इस चीज का भी ख्याल रखना पड़ेगा। यह पूरा जंगल एरिया है।

बरसात के समय में जो दमोह जबलपुर हाईवे रोड (Jabalpur Damoh Highway Road) से आपको यह झरना दिखाई देने लगता है। यहां पर आकर इस खूबसूरत वादियों का आनंद ले सकते हैं हम लोग भी यहां पर गए थे। यहां पर आप जब अपनी गाड़ी खड़ी करते हैं, तो उसका 20 रू चार्ज लिया जाता है और गाड़ी खड़ी करने के बाद पैदल पैदल जाना होता है। यहां सुनसान हो तो आप अंदर ना जाए मेरे हिसाब से तो यहां जब भी आते हैं, ग्रुप के साथ आए तो आपको बहुत मजा आएगा।

यह काफी खूबसूरत जगह है। आप यहां पर अपनी फैमिली और अपने दोस्तों के साथ जाकर बहुत अच्छा समय बिता सकते हैं। 

अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो, तो इस लेख को जरूर शेयर करें और अपने विचार हमसे साझा करें। 
आपने अपना समय दिया उसके लिए धन्यवाद


Madan Mahal Fort or Queen Durgavati Fort

मदन महल का किला, जबलपुर 

Madan Mahal Fort or Queen Durgavati Fort


मदन महल का किला (Madan Mahal Fort) या रानी दुर्गावती का किला (Rani Durgavati Fort) जबलपुर में स्थित है। यह जबलपुर जिले के मदन महल क्षेत्र में स्थित है। इस किले को मदन महल का किला (Madan Mahal Fortया रानी दुर्गावती के किले (Rani Durgavati Fort) के नाम से जाना जाता है। यह किला एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। यहां पर पहुंचने के लिए आपको सीढ़ियां मिलती है और इन सीढ़ियों से चलकर आप इस किले तक पहुॅच सकते है।  

रानी दुर्गावती का किला (Rani Durgavati Fort) आप दिन में कभी भी जा सकते हैं। यहां पर सिक्योरिटी गार्ड रहते है, यह पर एक गार्ड मेल और फीमेल रहते है। यहां पर आप सुबह 10 बजे से शाम को 5 बजे तक जा सकते है। वैसे यह किला बहुत ज्यादा बडा नही है, मगर यह किला बहुत प्राचीन है। 

मदन महल किले (Madan Mahal Fort) का निर्माण लगभग 1100 ई. में राजा मदन सिंह द्वारा करवाया गया था। इस किले का इस्तेमाल सेनाएं के वॉच टावर के रूप में किया जाता था। लेकिन यह किला अब खंडहर में बदल गया है, लेकिन यह पर बहुत से पर्यटक किलें को देखने के लिए आते है। मदन महल किला (Madan Mahal Fort) एक बड़ी ग्रेनाईट चट्टान को तराशकर बनाया गया है। यह किला 500 मीटर की उंचाई पर स्थित है। यह किला राजा की मां रानी दुर्गावती से भी जुड़ा हुआ है, जो कि एक बहादुर गोंड रानी के रूप के जानी जाती है। इस किले का नाम भी रानी दुर्गावती जी के नाम पर रखा गया है। आप यह पर घूमने जाते है, तो आपको यह पर मुख्य किला और नष्ट हुए किले के अवशेष देखने मिल जाते है। यह पर आपको मुख्य किला, अस्तबल, एक तालाब आपके अभी देखने मिलता है। 

Madan Mahal Fort or Queen Durgavati Fort


इस किले तक आप अपने वाहन से जा सकते हैं। यह पहुॅचने के लिए अच्छी रोड हैं। यहां पर ऑटो भी बुक कर के जा सकते हैं। रानी दुर्गावती का किला (Rani Durgavati Fortहम लोग गए थे। मै और मेरी मम्मी इस किले में घूमने गए थे। हम लोग यहां पर गर्मी के समय में गए थे, गर्मी के मौसम में सीढियां चढने में बहुत दिक्कत होती है, क्योंकि गर्मी बहुत ज्यादा रहती है। सीढ़ियां चढ़ने में  हालत खराब हो जाती है। इसलिए मेरे हिसाब से यह पर बरसात के मौसम में जाना बेहतर होगा। यहां पर रास्ते में आपको मंदिर भी देखने मिलता है, जो शंकर जी का मंदिर है। यह मंदिर बडी चट्टानों से बना हुआ है। आप इस मंदिर में भी जा सकते है। आप आगे बढते है, तो आपको यह पर एक छोटी सी झील देखने मिलती है, जिसमे बरसात के मौसम में पानी भर जाता है और गर्मी में सूख जाता है। फिर आपको आगे बढते है, तो आपको यह मदन महल किला (Madan Mahal Fort) देखने मिलता है। किले के उपर जाने के लिए सीढियां बनी हुई है। किले के ऊपर से जबलपुर के चारों तरफ का खूबसूरत नजारा देखने मिलता है। किले के उपर आपको दो कमरे देखने मिलते है, जिनमें नक्काशी की गई है। उसके बाद हम लोग नीचे आकर पूरा किला घूमें। किले के सामने तरफ का कुछ हिस्सा नष्ट हो गया है। यहां पर आप घोडों का अस्तबल देख सकते है, जो अच्छी कडीशन में है। यहां पर एक छोटा सा कुंड बना हुआ है, जिसमें बरसात में पानी भर जाता है। कहा जाता है, कि प्राचीन समय में रानी इस कुंड में स्नान किया करती थी। 

इस किले के बारे में यह भी कहा जाता है कि यह पर बहुत सारे गुप्त रास्तें थें, जिन्हें सरकार ने अब बंद कर दिया है। यहां पर एक गुफा निकली है, जो शायद मंडला के रामनगर किले तक जाती है। सरकार के द्वारा इन गुप्त रास्तों को सील कर दिया गया है। किले की चोटी पर पहुंचने पर आपको जबलपुर शहर का खूबसूरत नजारा दिखाई देगा। अगर आप यह पर बरसात में जाते है, तो चारों तरफ आपको हरियाली देखने मिलती है। यह पर आप अपनी फैमिली और दोस्तों के साथ जा सकते है। 

अगर यह लेख आपको अच्छा लगा होगा हो, तो आप इस लेख को अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर कीजिएगा और अपने विचार हमें जरूर साझा करें। 

अपना समय देने के लिए धन्यवाद


Savitri temple pushkar || सावित्री मंदिर पुष्कर

Savitri temple pushkar
सावित्री मंदिर पुष्कर


पुष्कर का सावित्री मंदिर (Savitri mata temple pushkar) बहुत ही खूबसूरत जगह है।

Savitri temple pushkar || सावित्री मंदिर पुष्कर

खूबसूरत पहाड़ियों का दृश्य 

पुष्कर शहर का सावित्री मंदिर एक धार्मिक जगह है। यह जो मंदिर है, वह उचीं  पहाड़ी पर स्थित है। इस पहाडी को रत्नागिरी पहाडी कहते है। इसकी ऊँचाई 750 फीट है। आपको यहां पर देसी और विदेशी दोनों प्रकार के लोगों लोग देखने मिल जाएंगे, मतलब यहां पर भारतीय लोग और विदेशी लोग लोग सभी लोग माता के दर्शन करने के लिए आते हैं। 

पुष्कर का सावित्री मंदिर (Savitri mata temple pushkar) भगवान ब्रह्मा की पहली पत्नी को समर्पित है। इस मंदिर में स्थित देवी सावित्री की मूर्ति बहुत ही प्राचीन है। 

Savitri temple pushkar || सावित्री मंदिर पुष्कर

मंदिर परिसर में बैठे कुछ बंदर 

Savitri temple pushkar || सावित्री मंदिर पुष्कर

मंदिर से नीचे का खूबसूरत दृश्य 


हमने पुष्कर के सावित्री मंदिर (Savitri mata temple pushkar) का जाने का प्लान बनाया और हम लोगों तैयार हो गए। उसके बाद हम लोगों ने पुष्कर घूमने के लिए ऑटो बुक किया था। मगर हम लोगों को बहुत लेट हो गया था, तो हम लोग सबसे पहले इस मंदिर के लिए निकले। हम लोगों मंदिर पहुॅचें, तो हम लोगों को मंदिर के आसपास बहुत सारे ऊंट गाडी दिखाई दी, गाडी को ऊंट खींचकर लेकर जाते हैं। आप भी यहां पर ऊंट गाड़ी देखने मिल जाएगी। वैसे आप चाहे तो इस ऊंट गाड़ी में भी घूम सकते हैं। मगर इस ऊंट गाड़ी का जो किराया रहता है। वह थोड़ा कॉस्टली रहता है ऑटो के मुकाबले में, तो आप चाहें तो इस गाड़ी में भी घूम सकते हैं या आटों में घूम सकते है। 

सावित्री मंदिर (Savitri mata temple pushkarके पहाडी के नीचे जब आप पहुंचते हैं, तो आपको यहां पर बहुत सारी  सारी दुकानें देखने मिल जाती हैं। यहां पर कुछ खाने-पीने की दुकानें रहती हैं और कुछ सामानों की दुकानें रहती है। यहां पर भगवान को प्रसाद चढ़ाने वाली कुछ दुकानें रहती है, तो आप यहां से प्रसाद खरीद सकते हैं। यहां पर 30 या 40 रुपए का आपको प्रसाद मिल जाता है। आप यहां से प्रसाद ले सकते हैं उसके बाद हम लोगों ने यहां पर चाय पीती थी। यहां पर एक दुकान में कुल्हड़ वाली चाय मिल रही थी, तो हम लोगों ने कुल्हड़ वाली चाय पिए। उसके बाद हम लोगों ने मंदिर की तरफ बढें। 

सावित्री मंदिर (Savitri mata temple pushkarतक पहुंचने के लिए दो रास्ते मिल जाते हैं। एक तो सीढियों वाला रास्ता रहता है। आपको सीढ़ियां चढ़कर जानी पड़ती है, इसमें आपकी बहुत ज्यादा ताकत लग सकती है और आपका बहुत ज्यादा समय लग सकता है। इसके साथ ही एक रास्ता रोपवे वाला रहता है, जिसमें आप आराम से पहुंच सकते हैं और आपका इसमें ज्यादा समय भी नहीं लगता है।

Savitri temple pushkar || सावित्री मंदिर पुष्कर

सूर्यास्त का बहुत ही मनमोहक दृश्य 

Savitri temple pushkar || सावित्री मंदिर पुष्कर

मंदिर से नीचे के खूबसूरत दृश्य 

Savitri temple pushkar ropeway
सावित्री मंदिर पुष्कर रोपवे


सावित्री मंदिर (Savitri mata temple pushkar) तक पहुंचने के लिए हम लोगों ने रोपवे से जाने का फैसला लिया और हम लोग रोपवे की तरफ चले गए। हम लोगों का रोपवे का टिकट 100 का था। एक व्यक्ति का 100 रू लगा। उसके बाद हम लोगों ने रुपए में बैठे। हम लोग 6 जन लोग थे और 6 लोगों के लिए रोपवे में बैठने के लिए बहुत जगह थी। उसके बाद है हमारी रोपवे धीरे धीरे चलना स्टार्ट हो गई। हम लोगों को वहां के खूबसूरत व्यू देखना स्टार्ट हो गया था। व्यु बहुत ज्यादा खूबसूरत था। रोपवे से देखने पर पर कही रेगिस्तान था। तो कहीं पर पानी बह रहां था, कहीं पर रेत थी, तो कहीं पर लोगों का भींड थी। कही पर उंट गाडी थी, कही पर रेत में चलती बडी गाडी थी। यहां सब दृश्य आपको रोपवे से देखने मिल जाता है। हम लोगों को रोपवे से कुछ बंदर भी   दिखे थे, जो मंदिर की तरफ चढ़ाई कर रहे थे।

इन सभी दृश्यों का लुफ्त उठाते हुए हम लोग मंदिर पहुंच गए। उसके बाद हम लोग रोपवे से उतरे। सावित्री मंदिर (Savitri mata Temple) के बाहर भी कुछ दुकानें हैं और सवित्री मंदिर बहुत ही खूबसूरत था। आपको यहां से चारों तरफ खूबसूरत पहाड़ियां, नदियां, रोड, खेत और पुष्कर शहर का खूबसूरत नजारे देखने मिलता है। यहां से पुष्कर झील भी देखने मिलती है। हम लोगों ने मंदिर में सावित्री माता जी के दर्शन किए। 

सावित्री माता जी (Savitri mata) के इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि एक बार ब्रह्मा जी ने यज्ञ का आयोजन किया। जिसमें सवित्री माता ((Savitri mata)को पहुॅचने में देर हो गई,  इसलिए ब्रह्मा जी ने गायत्री जी के साथ विवाह कर पूजा की विधि पूरी की और तभी सावित्री माता वहां पहुंची। जिससे उन्हें बहुत गुस्सा आया और वह इस पहाड़ी में आकर तपस्या करने लगी। इस तरह इस मंदिर की स्थापना हुई है। आप भी यहां आएंगे तो आपको इस तरह की कहानियां सुनने मिल सकती है।

यहां पर स्थित मंदिर बहुत ही खूबसूरत है और इसके आसपास भी बहुत अच्छा है। उसके बाद हम लोग ने मंदिर के दर्शन करने के बाद मंदिर के पीछे जो खूबसूरत जगह है। वहां गए, वहां हम लोग ने देखा तो वहां पर भी बहुत ही खूबसूरत नजारा था। यहां से आपको सन सेट का नजारा भी लुभावना है, जो बहुत ही मस्त रहता है। यहां पर हम लोग ठंड के समय में गए थे, तो ठंड के समय पर यहां पर हल्का सा बादल भी था और हल्की फुल्की बरिश भी हो रही थी, तो यहां पर कोहरा छाया हुआ था, जो बहुत ही मस्त लग रहा था। यहां पर हमने बहुत ही मस्त फोटो क्लिक किया। 

सावित्री देवी मंदिर (Savitri mata temple) के पास जो दुकाने थी वहां से हम लोगों ने अपने रिश्तेदारों के लिए कुछ गिफ्ट लिए। यहां पर हम लोगो ने कुछ विदेशी लोगों को भी देखा, जो भारतीय मंदिर और संस्कृति की बहुत ज्यादा रिस्पेक्ट करते हैं। 

हमारी पुष्कर के सावित्री देवी मंदिर (Savitri mata temple pushkar) की यात्रा बहुत ही अच्छी रही और यहां पर हम अपने फैमिली और दोस्तों के साथ आए थे। यहां पर हमने बहुत इंजॉय किया। यहां के दृश्य अविस्मरणीय थे। यहां पर हम ठंडी में आये थे। 

अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो, तो इस लेख को शेयर जरूर कीजिएगा और अगर आप पुष्कर गए हो तो अपने एक्सपीरियंस हमसे शेयर कीजिए. 

अपना समय देने के लिए धन्यवाद


Lamheta Ghat Jabalpur

Lamheta Ghat Jabalpur
लम्हेटाघाट जबलपुर 

लम्हेटाघाट नर्मदा नदी का शांत और खूबसूरत घाट

Lamheta Ghat Jabalpur

लम्हेटाघाट 

लम्हेटाघाट जबलपुर (Lamheta ghat Jabalpur) में स्थित एक खूबसूरत घाट है। लम्हेटाघाट जबलपुर (Lamheta ghat Jabalpurशहर का खूबसूरत पर्यटन स्थल है। यह घाट नर्मदा नदी पर बना हुआ है। यह घाट ज्यादा बड़ा नहीं है, मगर आप यहां पर आकर बहुत सारी जगहों के दर्शन कर सकते है। यह पर आपको नर्मदा नदी के घाट के अलावा ऐतिहासिक जगह भी देखने मिल जाती है। लम्हेटाघाट के आसपास में बहुत सारी ऐतिहासिक जगह है, जहां पर जाकर आपको अपने इतिहास के बारे में जानकारी मिल सकती है। मगर मेरे हिसाब से यहां के कुछ ऐतिहासिक स्थलों की हालात बहुत ही बेकार है। 

लम्हेटाघाट (Lamheta ghatमें आप आकर अपना अच्छा टाइम बिता सकते हैं और यहां पर ज्यादा लोग नहीं रहते हैं, जो लोग यहां पर रहते है। वहां यह के स्थानीय लोग ही रहते है। यहां पर बहुत से लोग इस घाट पर घूमने के लिए आते है। वहां भी आपको देखने मिलेगें, मगर यहा पर पर्यटक की संख्या कम रहती है।  

लम्हेटाघाट जबलपुर (Lamheta ghat Jabalpurमें स्थित है और यह भेड़ाघाट वाली रोड में स्थित है। इस जगह पहुंचने के लिए आपको सगड़ा रोड से आना पड़ता है। आप यहां पर अपनी गाड़ी से आसानी से पहुंच सकते हैं। यहां पर आप मेट्रो बस से भी आ सकते हैं। मेट्रो बस आपको लम्हेटाघाट (Lamheta ghatसे कुछ दूरी पर मेन रोड पर उतार देती है। मेन रोड से आपको करीब 1 किलोमीटर चलना पड़ता है, और आप इस जगह पर पहुंच सकते हैं। आप लम्हेटाघाट (Lamheta ghat) में आटों से भी आ सकते है और यहां पर आप आसानी से पहुंच सकते हैं।

आप यहां पर अपनी गाड़ी से आ सकते हैं। इस जगह पर आने के लिए अच्छे रोड है। आप जब भी भेड़ाघाट  जाते हैं, तो आप इस जगह भी आकर आपका अच्छा समय बिता सकते है। सगड़ा रोड पर आपको एक चैराहा मिलता है, जहां पर बोर्ड भी लगा रहता है और वहां से लम्हेटाघाट (Lamheta ghat) जाने के लिए डायरेक्शन दिया रहता है, तो आप इसको फाॅलो करके लम्हेटाघाट (Lamheta ghatपहुॅच सकते है। आपकी गाडी डायरेक्ट घाट तक पहुॅच जाती है।

Lamheta Ghat Jabalpur

लम्हेटाघाट 

लम्हेटाघाट (Lamheta ghatनर्मदा नदी के किनारे स्थित बहुत सुंदर एवं शांत घाट हैं। यहां पर आधिकतर लोग जो भी आते है। वहां इस पवित्र नदी में स्नान जरूर करते है। यहां पर महिलाओं के लिए चेजिंग रूम बना है, जहां पर महिलाओं नहाकर कपडे चेंज कर सकते है। यहां पर आपको नर्मदा नदी जी का बहुत ही खूबसूरत व्यू देखने मिलेगा। यहां पर आपको बैठने के लिए बहुत अच्छी व्यवस्था है। यहां पर पानी ज्यादा गहरा नहीं है। आप यहां पर जाकर बहुत अच्छा टाइम बिता सकते हैं। यहां पर आपको बहुत सारी जगह देखने मिल जाएगी। 

लम्हेटाघाट (Lamheta ghatपर एक पुराना मंदिर है, जिसे राधे कृष्ण जी का मंदिर (Radhe Krishna ji temple) कहा जाता है। यह मंदिर बहुत पुराना है और इन मंदिर के बारे में सरकार ध्यान नहीं दे रही है और यह मंदिर बर्बाद होते जा रहे है। मंदिर पूरी तरह से नष्ट होने की कगार में आ गया है और नष्ट हो भी रहा है। हम लोग इस मंदिर के अंदर गए थे और यह मंदिर बहुत खराब हालत में था। हम लोग को इस मंदिर में जाने में बहुत डर लग रहा था। हम लोग को लग रहा था, कहीं इस मंदिर की छत गिर ना जाए क्योंकि यहां पर जो मंदिर है, वह बहुत पुराना है। यह पूरा मंदिर पत्थरों का बना हुआ है। अगर आप इस मंदिर का वीडियो देखना चाहे, तो मेरे चैनल में जाकर देख सकते है। इसके अलावा मंदिर में आपको यहां पर बहुत सारे कमरे बने हुए थे। यहां पर एक मंदिर है, जहां पर शिवलिंग रखने की जगह थी। मगर शिवलिंग यहां पर नहीं थे। शिवलिंग गायब हो चुका है। यह बहुत ज्यादा पुराना मंदिर है, अगर आपको यहां पर जाने का मौका मिलें तो आप इस जगह पर जरूर जाना।

Lamheta Ghat Jabalpur

राधे कृष्ण जी का मंदिर  

Lamheta Ghat Jabalpur

राधे कृष्ण जी का मंदिर  

लम्हेटाघाट (Lamheta ghat) में एक हनुमान मंदिर भी है, जो बहुत प्राचीन है और हनुमान मंदिर के सामने ही शिव शंकर जी का मंदिर है। यह मंदिर भी पूरी तरह से पत्थर का बना हुआ है। इस मंदिर में खूबसूरत नक्काशी की गई है। आप इस मंदिर पर आकर इसकी खूबसूरती देख सकते हैं। यह ज्यादा बडा मंदिर नहीं है, मगर यह मंदिर सुंदर है। 

लम्हेटाघाट (Lamheta ghatमें मकर संक्रांति (Makar Sankranti) के उत्सव में या नर्मदा जयंती में बहुत ज्यादा भीड़ लगती है। इस दिन माना जाता है कि नदियों में नहाना शुभ माना जाता है, तो बहुत सारे लोग नर्मदा नदी में स्नान करने के लिए दूर-दूर से आते हैं। जो लोग दूर से आते हैं। वह नर्मदा नदी के किनारे ही रहने लगते हैं। यहां पर मकर संक्रांति में बहुत सारी दुकानें भी लगती हैं। यह पर बहुत भव्य मेले का आयोजन होता है। नर्मदा नदी के किनारे मे बहुत सारे लोग रहने लगते हैं मकर संक्रांति के उस समय। यहां पर बहुत अच्छा माहौल रहता है, बहुत सारे लोग रहते हैं, बहुत सारी दुकानें रहती है, जो बहुत अच्छा लगता है देखने में। यहां पर मकर संक्रांति में बहुत भीड़ होती है, जिससे नर्मदा जी के आजू-बाजू के घाटों में बहुत गंदगी भी होती है। अगर आप किसी भी नदी में जाते हैं, तो गंदगी ना करें। नदी को साफ रखें और अपना फर्ज निभा निभाए।

हम लोगों को इस घाट में जाकर बहुत ही अच्छा लगा था। घाट में और भी बहुत सारी जगह है, जो बहुत प्राचीन है। यहां पर प्राचीन समय की बहुत सारे मंदिर आपको देखने मिल जाते हैं, तो अगर आप इस जगह को एक्सप्लोर करना चाहते हैं, तो आपको यहां पर बहुत सारे नई नई जगह देखने मिल जाएंगी। यहां पर हम लोगों ने लम्हेटा घाट के राधा कृष्ण मंदिर और हनुमान जी के मंदिर ही विजिट किया था। आप यहां पर घुघरा वाटरफॉल (Ghaghra Waterfall) भी जा सकते हैं और परमहंसी आश्रम (Paramhansi Ashram) भी जा सकते हैं।

अगर यह लेख आपको अच्छा लगा होगा हो, तो आप इस लेख को अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर कीजिएगा और अपने विचार हमें जरूर कमेंट करें।

अपना समय देने के लिए धन्यवाद



Muhas Hanuman Temple || मुहास हनुमान मंदिर

Muhas Hanuman Temple
मुहास हनुमान मंदिर 

हड्डी जोड़ने वाला मुहास का हनुमान मंदिर


Muhas Hanuman Temple || मुहास हनुमान मंदिर

हनुमान मंदिर का मुख्य द्वार  


हनुमान मंदिर मुहास (Muhas Hanuman Temple) बहुत प्रसिद्ध है। इस हनुमान मंदिर को हड्डी जोड़ने वाले मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। लोगों का मानना है कि यहां पर हनुमान जी स्वयं लोगों की हड्डी जोड़ने का इलाज करते हैं। यह मंदिर पूरे भारत देश में प्रसिद्ध है। इस मंदिर के बारे में न्यूज चैनलों में भी आ चुका है। इस मंदिर की प्रसिद्धि पूरे देश में है। यहां पर जो भी लोग आते हैं। वह अपनी समस्या लेकर आते हैं और हनुमान जी उनकी समस्या को ठीक करते हैं।

मुहास हनुमान मंदिर कहा है
Where is Muhas Hanuman Temple


हम लोग भी इस मंदिर में घूमने गए थे। यह मंदिर मध्यप्रदेश के कटनी जिले में स्थित है। यह मंदिर कटनी जिले से लगभग 35 किमी दूर होगा। यह रीठी तहसील की मुहास नाम के गांव में स्थित है। यह एक छोटा सा मंदिर है, ज्यादा बड़ा मंदिर नहीं है। यह मंदिर बहुत ही खूबसूरती से बनाया गया है। यह मंदिर मुहास में मेन रोड में स्थित है। आप यहां पर अपनी गाड़ी से जा सकते हैं। यहां पर बसें भी चलती होंगी, मगर वो टाइम टेबल से चलती होंगी, तो अगर आप बस से यहां आना चाहते हैं। तो टाइम का विशेष ध्यान दें। मगर मेरे हिसाब से आप यहां पर अपनी गाड़ी से आएंगे, तो वह आपके लिए बेस्ट होगा। 

मुहास के हनुमान मंदिर (Muhas Hanuman Temple) के बारे में कहा जाता है, कि जिन लोगों की हड्डियां फैक्चर हो जाती हैं या टूट जाती है। ऐसे लोगों यहां पर आकर अपना इलाज करवाते है, तो यहां आने पर उनकी हड्डियों को दोबारा जोड़ा जा सकता है। वैसे यह सब मेडिकल साइंस के हिसाब से संभव नहीं है। मगर यहां आने वालों श्रध्दाुलों की मानें तो इस बात पर आपको विश्वास किया जा सकता है। यहां पर मंगलवार की दिन लोगों की भीड लगी रहती है। यहां पर मंगलवार के दिन के अलावा भी लोग आपको देखने मिल जाएगें। 

मुहास के हनुमान मंदिर (Muhas Hanuman Temple) में जो भी लोग अपना इलाज कराने आते है। वो यह पर दो या तीन बार आते है। तब जाकर उनका रोग ठीक हो जाता है। मंदिर के बाहर आपको दुकान देखने मिलती है, जहां पर मंदिर में चढाने के लिए प्रसाद मिल जाता है। इन दुकानों में आपको जड़ी बूटियों का तेल भी मिल जाएगा, जो आप के दर्द को कम करता है। तेल में वैसे यह लिखा रहता है और यह पर दुकान वाले लोग भी यही कहकर बेचते है। बाकी इस तेल के बारे में मुझे जानकारी नहीं है, कि वह आपके दर्द वगैरह को कम करता है कि नहीं। यह तेल आपको बहुत कम कीमत में मिल जाता है। 

अगर आप इस हनुमान मंदिर पर आते है, तो आपको यह पर बहुत अच्छा लगेगा। यहां पर बहुत सारे लोग आते हैं और यहां पर भजन कीर्तन होता रहता है। यहां पर मंगलवार और शानिवार को बहुत ज्यादा भीड़ होती है और इस दिन ही इस मंदिर में मिलने वाली दवाई का असर ज्यादा होता है। 

यहां पर जिन लोगों की हड्डियां टूट जाती हैं। वह यहां पर स्ट्रेचर से आते हैं या एंबुलेंस में आते हैं। यहां पर उन्हें कुछ देर मंदिर परिसर में बैठने के लिए कहा जाता है और राम भगवान का जाप करने के लिए कहा जाता है। फिर  उन्हें औषधि दी जाती है और यह औषधि लोगों को खानी पड़ती है। इस औषधि के बारे में कहा जाता है, कि यह औषधि पूरी तरह से प्राकृतिक होती है। यहां पर एक पंडित जी ने हमें बताया कि यह संजीवनी बूटी होती है, जो हनुमान जी ने लाए थे, लक्ष्मण जी के इलाज के लिए। तो उसी औषधि से लोगों का इलाज होता है। यह औषधि प्राकृतिक होती है जिसको खाकर यहां पर जो भी लोग आते हैं। वह ठीक हो जाते हैं।

Muhas Hanuman Temple || मुहास हनुमान मंदिर

हनुमान मंदिर परिसर  


मुहास का हनुमान मंदिर (Muhas Hanuman Temple) ज्यादा बडा नहीं है। मंदिर परिसर में आंगन बहुत बड़ा है। उसमें लोग बैठकर भजन कर सकते हैं और यहां पर हनुमान जी की प्रतिमा बनाई गई है, जो बहुत ही आकर्षक है देखने में। शिव भगवान जी की मूर्ति भी स्थापित की गई है जिनकी पूजा आप कर सकते हैं।

हम लोगों को इस मंदिर में बहुत अच्छा लगा था। यहां पर आकर हमने अपने पैर हाथ धुले और प्रसाद लिया। भगवान हनुमान के दर्शन किए। कुछ देर इस मंदिर में बैठे और फिर अपने घर आ गये। मंदिर के आसपास आपको बहुत सारी दुकानें भी मिलती हैं। जहां पर अगर आप कहीं दूर से आ रहे हो, तो दुकान मे खाने-पीने की व्यवस्था भी मिल जाती है। जहां पर आप चाय नाश्ता कर सकते है। यहां पर आप अपनी परिवार और दोस्तों के साथ आ सकते है। 

हमें इस जगह आ कर बहुत अच्छा लगा।  यहां पर काफी शांत वाला माहौल रहता है। आप भी यहां आ सकते हैं और अपना अच्छा समय बिता सकते हैं। यहां पर आने के लिए अच्छी सड़कें हैं, तो आप अपनी गाड़ी से आसानी से आ सकते हैं। 

अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो, तो आप इस लेख को शेयर जरूर करें और अगर आप इस जगह आए हो या आने चाहते हो, तो अपने विचार हमसे साझा जरूर करें। 

आपने अपना समय दिया इसके लिए धन्यवाद