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Samudra Koop Allahabad (Prayagraj) - समुद्र कूप इलाहाबाद (प्रयागराज)

समुद्र कूप इलाहाबाद या उल्टा किला इलाहाबाद

Samudra Koop Allahabad or Ulta Kila Allahabad


समुद्रकूप या उल्टे किला के नाम से प्रसिद्ध यह जगह इलाहाबाद की एक प्राचीन स्थल है। यहां पर आपको एक प्राचीन कुआं देखने के लिए मिलता है, जिसके बारे में कहा जाता है कि इस कुएं का संबंध समुद्रगुप्त से है। इस कुएं के बारे में यह भी कहा जाता है, कि यह कूप समुद्र से जुड़ा हुआ है। हम लोग भी इस कूप  को देखने के लिए गए थे। यहां पर आकर बहुत अच्छा लगता है और यह प्राचीन कूप देखने लायक है। 
 
समुद्रकूप इलाहाबाद की एक प्रसिद्ध जगह है। समुद्र कूप संगम के दूसरी तरफ झूसी  स्थित है और यहां पर पहुंचने के लिए आपको गंगा नदी पर जो पुल बना हुआ है, उसको पार करके जाना पड़ता है। यहां पर हम लोग माघ मेले के समय गए थे, तो यहां पर गंगा नदी पर अस्थाई पुल बने हुए थे, तो हम लोग उन पुल को पार करके समुद्रकूप  देखने के लिए गए। समुद्रकूप तक पहुंचने के लिए आपको खड़ी सीढ़ियां चढ़ने पड़ती है। यह थोड़ी पुरानी सीढ़ियां हैं, जिनको चढ़ते समय डर लगता है। मगर आप आराम से इन सीढ़ियां में चल सकते हैं। यहां पर आपको एक हनुमान मंदिर भी देखने के लिए मिलते हैं और आप हनुमान जी के दर्शन कर सकते हैं। हनुमान जी के दर्शन करके आपको बहुत अच्छा लगेगा। हनुमान मंदिर से समुद्रकूप करीब 500 मीटर दूर होगा। 
 
यहां पर आप गेट के पास पहुंचते हैं, तो गेट के ऊपर आपको आश्रम का नाम और महराज जी का नाम देखने मिलता है। यहां पर श्री रामानंदीय वैष्णव आश्रम , श्री समुद्रकूप तीर्थ,  श्री श्री १०८ महंत बाल कृष्ण दास जी महाराज का नाम देखने के लिए मिलता है। आप गेट के अंदर जाते हैं, तो  एक तरफ आपको बिल्डिंग देखने के लिए मिलती है, जो आश्रम है और दूसरे तरफ आपको गार्डन देखने के लिए मिलता है, जहां पर शायद आश्रम के लिए सब्जियां उगाई जाती है। जब हम लोग गए थे, तब यहां पर बहुत सारी सब्जियां लगी हुई थी। यहां पर आने पर किसी भी तरह की मनाही नहीं है। आप यहां पर आ कर समुद्रकूप के दर्शन कर सकते हैं और यहां पर हनुमान मंदिर भी है। 
 
यहां पर आपको एक सीधा रास्ता दिखता है, जो सीधे समुद्रकूप की तरफ जाता है। आप समुद्रकूप की तरफ जाएंगे, तो आपको एक बोर्ड देखने के लिए मिलेगा, जिसमें समुद्रकूप के बारे में जानकारी लिखी हुई है। समुद्रकूप की तरफ जाने वाले रास्ते में दोनों तरफ पौधे लगे हुए हैं, जो बहुत ही खूबसूरत लगता है। समुद्रकूप के पास आप पहुंचते हैं, तो यहां पर आपको चप्पल नीचे उतारने का निर्देश दिया हुआ है। आपको यहां पर एक प्राचीन कुआं देखने के लिए मिलता है और यहां पर छोटा सा मंदिर बना हुआ है, जिसमें विष्णुपद विराजमान है। आप उनके दर्शन कर सकते हैं। यहां पर शिवलिंग विराजमान है। इसके अलावा और भी देवी देवता यहां पर विराजमान है। आप इनके दर्शन कर सकते हैं। समुद्रकूप के चारों तरफ लोहे की जालियां लगा दी गई है, ताकि किसी भी तरह की दुर्घटना ना हो। यहां पर पानी निकालने के लिए आपको लोहे की छन्नी भी देखने के लिए मिलती है। मगर पानी निकालना यहां पर मना है। जाली लगा दी गई है, ताकि कोई भी पानी ना निकाले। 
 
समुद्रकूप पूरा पत्थर से बना हुआ है। इसके ऊपर की संरचना आप देख सकते हैं, जो बहुत खूबसूरत है। समुद्रकूप बहुत गहरा है और अभी भी इस कुएं में आपको पानी देखने के लिए मिल जाएगा। इस कुएं के अंदर आपको कुछ कबूतर देखने के लिए मिल जाएंगे, जो अपना शायद घर बनाकर इस कुएं में रह रहे है। समुद्रकूप के चारों तरफ गार्डन बना हुआ है। यहां पर आपको बहुत शांति मिलेगी, क्योंकि यहां पर ज्यादा भीड़ नहीं थी। जब हम लोग गए थे और शांत वातावरण था, तो अच्छा लगा। हम लोग समुद्रकूप घूम कर आश्रम की तरफ आए, तो यहां पर हम लोगों को दक्षिण मुखी हनुमान जी के दर्शन करने के लिए मिले। आप हनुमान जी के दर्शन कर सकते हैं। इसके अलावा यहां पर आपको राम जी, सीता जी का मंदिर भी देखने के लिए मिलता है। आप उनके दर्शन भी कर सकते हैं। यहां पर हम लोग शाम के समय गए थे, तो शाम को हम लोगों को यहां पर सूर्यास्त का बहुत ही मनोरम दृश्य देखने के लिए मिला।  यहां पर हम लोगों को संगम का दृश्य भी देखने के लिए मिला। आप यहां पर आकर इन सब दृश्यों का मजा ले सकते हैं। 
 

समुद्र कूप इलाहाबाद की फोटो

Photo of Samudra Koop Allahabad


 
Samudra Koop Allahabad (Prayagraj) - समुद्र कूप इलाहाबाद (प्रयागराज)

Samudra Koop Allahabad (Prayagraj) - समुद्र कूप इलाहाबाद (प्रयागराज)

Samudra Koop Allahabad (Prayagraj) - समुद्र कूप इलाहाबाद (प्रयागराज)

Samudra Koop Allahabad (Prayagraj) - समुद्र कूप इलाहाबाद (प्रयागराज)

Samudra Koop Allahabad (Prayagraj) - समुद्र कूप इलाहाबाद (प्रयागराज)

Samudra Koop Allahabad (Prayagraj) - समुद्र कूप इलाहाबाद (प्रयागराज)

 
 
Samudra Koop Allahabad (Prayagraj) - समुद्र कूप इलाहाबाद (प्रयागराज)

 
 
 

समुद्रकूप का इतिहास - History of Samudra Koop

प्राचीन स्थल झूसी - Jhusi Ancient Site

गंगा के बाएं किनारे पर स्थित झूसी प्राचीन प्रयाग का अंग था। महाकाव्य तथा पुराणों के अनुसार झूसी का प्राचीन नाम प्रतिष्ठान था, जो चंद्रवंशी राजाओं पुरुरवा, अयु , नहुष, ययाति तथा पुरु इत्यादि की राजधानी थी। अनुश्रुतियों के अनुसार संत गोरखनाथ तथा उनके गुरु के श्राप के कारण प्रतिष्ठान नगर उलट-पुलट हो गया था। एक भयंकर आग के द्वारा नष्ट होने के कारण इस नगर का नाम झूसी अर्थात जला हुआ नगर पड़ा। 
 
अनुश्रुतियों के अनुसार झूसी के टीले पर स्थित पक्के कूप का संबंध गुप्त नरेश समुद्रगुप्त से है तथा दूसरे मत के अनुसार यह कूप समुद्र से जुड़ा है।
 
वर्ष 1830 में प्रतिहार नरेश त्रिलोचन पाल का 1027 ईसवी सदी का ताम्रपत्र प्राप्त हुआ था, जिसमें त्रिलोचन पाल द्वारा प्रतिष्ठान के ब्राह्मणों को कुछ ग्राम दान में देने का उल्लेख है।
 
इलाहाबाद विश्वविद्यालय द्वारा समुद्रकूप टीले पर कराए गए उत्खनन के फल स्वरुप ताम्र पाषाण युग से मध्य ऐतिहासिक काल यथा प्राक उत्तरी कृष्ण मार्जित  मृदभांडकाल, उत्तरी कृष्ण मार्जित मृदभांडकाल,  कुषाण, गुप्त काल इत्यादि के पुरातात्विक अवशेष प्रकाश में आए, जिनमें विभिन्न प्रकार के मृदभांड, आहत  मुद्राएं, ढले हुए तांबे के सिक्के, मानव तथा पशु  मूर्तियां, मनके, लोह वस्तुये, मुद्रा तथा मुद्रांक मुख्य हैं। शुगु, कुषाण एवं गुप्त काल की वस्तु संरचनाएं उत्खनन के फल शुरू प्रकाश में आई हैं। 



Akshay vat Prayagraj - अक्षय वट प्रयागराज

Akshay vat Allahabad
अक्षय वट इलाहाबाद


अक्षय वट इलाहाबाद (प्रयागराज) में स्थित एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यहां पर आपको एक प्राचीन वटवृक्ष देखने के लिए मिलता है। वट वृक्ष का मतलब होता है बरगद का पेड़। इस वट वृक्ष को ही अक्षय वट के नाम से जाना जाता है। अक्षय वट का अर्थ होता है, कि कभी नष्ट नहीं होने वाला वटवृक्ष। यह वटवृक्ष आज भी हरा-भरा आपको देखने के लिए मिलेगा। यह वटवृक्ष सतयुग में भी उपस्थित था और सतयुग में इस वटवृक्ष के नीचे श्री राम जी ने विश्राम किया था। द्वापर युग में इस वट वृक्ष के नीचे श्री कृष्ण जी ने विश्राम किया था। यह  वटवृक्ष त्रेता युग में भी था। यह वटवृक्ष कलयुग में भी विद्यमान है और आप इस वटवृक्ष  प्रयागराज में जाकर देख सकते हैं। 


अक्षय वट इलाहाबाद शहर में प्रयागराज (इलाहाबाद ) किले के अंदर स्थित है। प्रयागराज (इलाहाबाद) किला गंगा नदी और यमुना नदी के संगम के पास ही में स्थित है। अक्षय वट के दर्शन करने के लिए किले के अंदर जाने के लिए रास्ता बना हुआ है। इस रास्ते में विकलांग लोग भी आराम से जा सकते हैं। छोटे से रास्ते से होते हुए आप मंदिर के परिसर में पहुंचते हैं। यहां पर आपको विशाल अक्षय वट वृक्ष देखने के लिए मिलता है। इसके साथ ही पताल पुरी मंदिर भी आपको यहां पर देखने के लिए मिलता है। आप पताल पुरी मंदिर के प्रवेश द्वार से मंदिर में प्रवेश करते हैं और पताल पुरी मंदिर के दर्शन करते हुए आप ऊपर आते है। आप अक्षय वट की परिक्रमा कर सकते हैं। अक्षय वट के नीचे आपको बहुत सारे भगवान जी की प्रतिमा देखने के लिए मिलते हैं। यहां पर श्री कृष्ण जी की आकर्षक प्रतिमा आपको देखने के लिए मिल जाएगी और भगवान शंकर जी की भी मूर्ति आपके यहां पर देखने के लिए मिल जाएगी। यहां पर अक्षय वट के बारे में बताया भी गया है, कि अक्षय वट सतयुग में इतने वर्षों इसकी आयु रही है। द्वापर युग में इतने वर्षों इसकी आयु रही है। त्रेता युग में अक्षयवट वृक्ष की आयु इतनी रही है और कलयुग में भी आप इस अक्षयवट को हरा भरा देख सकते हैं। इस अक्षयवट वृक्ष के बाजू में ही एक चबूतरा बना हुआ है। उस चबूतरा में दाना  डाला जाता है, जिसमें बहुत सारे पक्षी आकर उस दाने को चुनते हैं। आपको अच्छा लगेगा यह देखकर मिट्ठू और कबूतर आकर उस दाने को चुनते हैं। यहां पर आपको बहुत सारे पंडित जी भी बैठे हुए देखने के लिए मिलते हैं।

अक्षय वट इलाहाबाद (प्रयागराज) की फोटो

 

Akshay vat Prayagraj - अक्षय वट प्रयागराज
अक्षय माधव की प्रतिमा 



Akshay vat Prayagraj - अक्षय वट प्रयागराज
अक्षय वट वृक्ष 


Akshay vat Prayagraj - अक्षय वट प्रयागराज
अक्षय वट वृक्ष के दर्शन

अब कुछ बातें पातालपुरी मंदिर  एवं अक्षयवट के बारे में इतिहास से जुड़ी हुई जानते हैं। जिसकी जानकारी एक बोर्ड में दी थी। 

शस्त्रागार के उत्तरी दीवार के निकट ही प्राचीन तथा प्रसिद्ध पातालपुरी मंदिर है, जिसमें किले के पूर्वी द्वार से पहुंचा जाता है। और जैसा कि नाम से ही संकेत मिलता है। यह मंदिर भूमि के नीचे है। सन् 644 ईस्वी में चीनी यात्री हेनसांग यहां आया था। तब यह मंदिर एक ऊंचे टीले पर स्थित था और इसमें एक प्रांगण था। जिसमें प्रसिद्ध अक्षय वट यह कभी क्षय न होने वाला एक पेड़ खड़ा था, जहां से मोक्ष की प्राप्ति चाहने वाले हिंदू जो यह  विश्वास करते थे, कि प्रयाग में मरने से स्वर्ग प्राप्त होता है। वह नीचे पथरीले आंगन में कूद जाते थे। इतिहासकारों तथा भूगोलवेत्ता ने इस वृक्ष का उल्लेख किया है। यह भी कहा जाता है कि इसके निकट एक गहरा जल कूप था। जिसमें धार्मिक श्रद्धालु मोक्ष प्राप्ति करने के हेतु कूद जाते थे। यह भी कहा जाता है कि अपने एक पूर्व जन्म में सम्राट अकबर एक साधु था और यहां पर निर्वाण प्राप्ति के समय उसने अपने अगले जन्म में भारत का सम्राट बनने की कामना की थी। सन 1906 में मंदिर में प्रकाश व्यवस्था कर दी गई और बेहतर प्रकाश व्यवस्था हेतु यहां जाने का पुराना तंग मार्ग के बदले एक नया तथा आसान मार्ग बना दिया गया, जो लगभग 25.60  मीटर लंबा तथा लगभग 15 मीटर चैड़ा है। छत जो पत्थर की फर्श से 1.97 मीटर ऊंची है। छत स्तंभों पर टिकी हुई है। अक्षय वट का अवशेष स्वरूप अब जो वृक्ष है। वह एक भूमिगत शहतीर के ऊपर स्थित गहरी सुरंग में है। जिस सुरंग के बारे में यह कहा जाता है, कि यह त्रिवेणी तक जाती है। मंदिर में अनेक मूर्तियां हैं, जो इसकी दीवारों में व्यवस्थित रूप से लगी है, जिनमें अधिकतर मध्यकालीन है, जो अन्य मंदिरों से लाई गई है, जो कभी इस क्षेत्र में थे। 

अक्षय वट को सनातन प्राचीन अक्षय वट और प्रयाग का प्राचीन अक्षयवट के नाम से भी जानते हैं और अक्षय वट की सभी लोग परिक्रमा करते हैं। आपको यहां पर अक्षय माधव की प्रतिमा भी देखने के लिए मिलती है, जो बहुत ही भव्य है। यहां पर हनुमान जी की प्रतिमा भी आपको देखने के लिए मिलती है, जो छोटे से एक आल्हा में रखे हुए हैं। यहां पर पातालपुरी मंदिर के वेंटिलेशन के लिए छोटे-छोटे चेंबर बने हुए हैं। आप वह भी देख सकते हैं।

हमारा पातालपुरी मंदिर और अक्षय वट वृक्ष के दर्शन करने का अनुभव बहुत अच्छा रहा है। अगर आप इलाहाबाद घूमने के लिए आते हैं, तो आप इस मंदिर में भी घूमने के लिए आ सकते हैं। यहां आकर आपको अच्छा लगेगा और शांति मिलेगी। 

यह लेख अगर आपको पसंद आया हो, तो आप इसे अपनी फैमिली और दोस्तों में शेयर कर सकते हैं और अक्षय वट की जानकारी उन तक पहुंचा सकते हैं। 


त्रिवेणी संगम प्रयागराज

गंगा यमुना सरस्वती संगम

पातालपुरी मंदिर प्रयागराज

पुष्कर की सैर


पातालपुरी मंदिर इलाहाबाद (प्रयागराज) - Patalpuri temple allahabad

पातालपुरी मंदिर प्रयागराज - Patalpuri Temple Prayagraj
पातालपुरी मंदिर इलाहाबाद - Patalpuri Temple Allahabad



पातालपुरी मंदिर इलाहाबाद (प्रयागराज) में प्रसिद्ध मंदिर है। पातालपुरी के नाम से ही आपको पता चल रहा होगा। जमीन के अंदर पाताल में मंदिर, जी हा यहां मंदिर जमीन के अंदर है। पातालपुरी का अर्थ होता है जमीन के अंदर और यह मंदिर जमीन के अंदर स्थित है। इसलिए इस मंदिर को पताल पुरी मंदिर कहा जाता है। इस मंदिर में जाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है। 


पातालपुरी मंदिर इलाहाबाद किले के अंदर स्थित है। पातालपुरी मंदिर गंगा और यमुना नदी के संगम के पास ही में स्थित है। आप जब भी संगम घूमने के लिए आते हैं, तो इस मंदिर में दर्शन करने के लिए जरूर आ सकते हैं। पातालपुरी मंदिर तक जाने के लिए इलाहाबाद किले से रास्ता बनाया गया है। बाकी का पूरा किला पुलिस के कंट्रोल में है। बाकी पूरे किले को आप देख नहीं सकते हैं। मगर आप इस मंदिर को जरूर देख सकते हैं। किले की बाउंड्री वॉल के बाजू से रास्ता बनाया गया है। पातालपुरी मंदिर तक पहुंचने का। आप मंदिर के परिसर में पहुंचेंगे, तो आपको एक विशाल वृक्ष देखने के लिए मिलेगा। यह वृक्ष बरगद का है। मगर इस वृक्ष को अक्षय वट वृक्ष के नाम से जाना जाता है। अक्षय वट वृक्ष का मतलब है कि कभी ना मरने वाला वृक्ष। आगे इसके बारे में भी  लेख लिखा है। आप उसे जरूर पढ़िएगा। 


पातालपुरी मंदिर इलाहाबाद की फोटो


पातालपुरी मंदिर इलाहाबाद (प्रयागराज) - Patalpuri temple allahabad
मंदिर में प्रवेश के लिए किले का प्रवेश द्वार



पातालपुरी मंदिर इलाहाबाद (प्रयागराज) - Patalpuri temple allahabad
किले की दीवार पर बना श्री कृष्ण का मनमोहक चित्र


मंदिर परिसर में आपको श्री अक्षयवट पातालपुरी मंदिर का प्रवेश द्वार देखने के लिए मिलेगा। प्रवेश द्वार पर ही मां काली की भव्य प्रतिमा है। वहां पर भी पंडित जी बैठे रहते हैं और आपसे दान करने के लिए कहते हैं। अगर आपको दान देना है, तो आप दान दे सकते हैं और नहीं देना है, तो आप पंडित जी की बातों को अनसुनी कर आगे बढ़ सकते हैं। उसके बाद आपको सीढ़ियों से नीचे आना पड़ता है और एक लंबी से गैलरी दिखती है। इस गैलरी से आपको आगे बढ़ना पड़ता है। आप आगे जाते हैं, तो सबसे पहले आपको दीवार के एक आले में अन्नपूर्णा देवी एवं अन्य देवी देवताओं के दर्शन करने के लिए मिलते हैं और सामने ही आपको श्री राम जी, माता सीता जी और लक्ष्मण जी के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। उसके बाद आप आगे बढ़ते हैं, तो आपको भैरव बाबा के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। वैसे मेरे को अभी सारे देवी देवता याद नहीं है, मगर यहां पर बहुत सारे देवी देवता हैं। करीब 25 से 30 देवी देवता पातालपुरी मंदिर में विराजमान है। यहां पर आपको शनि भगवान जी का भव्य मूर्ति भी देखने के लिए मिलती है। यहां पर आपको सरस्वती माता की वीणा बजाती हुई प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। यहां पर वाल्मीकि ऋषि की प्रतिमा भी विराजमान है।  आप उनकी प्रतिमा के भी दर्शन कर सकते हैं। यहां पर शंकर जी का शिवलिंग विराजमान है। पातालपुरी मंदिर के अंदर आपको नरसिंह भगवान की भी प्रतिमा देखने के लिए मिलती है, जो हिरण्यकश्यप का वध कर रहे हैं। पातालपुरी मंदिर में आपको अक्षय वट वृक्ष की जड़े भी देखने के लिए मिलती हैं, जो बहुत शुभ है। यहां पर नाग देवता की आकर्षक प्रतिमा विराजमान है। यहां पर आपको श्री राम जी लक्ष्मण जी और सीता जी की भव्य प्रतिमा भी देखने के लिए मिलती है। यह जितनी भी प्रतिमाएं हैं। वह बहुत ही खूबसूरत है और देखने में बहुत ही आकर्षक लगती हैं। हर प्रतिमा के पास है पंडित जी बैठे रहते हैं और वह आपसे दान करने के लिए कहते हैं। अगर आप को दान करने की इच्छा है, तो आप कर सकते हैं और नहीं करने की इच्छा है, तो जरूरी नहीं है


पातालपुरी मंदिर इलाहाबाद की फोटो 


पातालपुरी मंदिर इलाहाबाद (प्रयागराज) - Patalpuri temple allahabad
पातालपुरी मंदिर के अंदर जाने वाली गैलरी 



पातालपुरी मंदिर इलाहाबाद (प्रयागराज) - Patalpuri temple allahabad
पातालपुरी मंदिर का प्रवेश द्वार



यहां पर जो मंदिर है। इसमें बड़े-बड़े खंभे बने हुए हैं और यह मंदिर खंभों पर खड़ा हुआ है। यहां पर एक लाइन से आपको देवी देवताओं के दर्शन करते हुए बाहर निकलने का मार्ग बना है। यहां पर एक बड़ा सा बर्तन रखा है, जिसमें तेल भरा हुआ है और उसमें जोत 24 घंटे जलती रहती है, और मुझे लगता है, यह दीपक काफी समय से जल रहा है। यह भी देखने के लिए बहुत आकर्षक था। उसके बाद सीढ़ियां बनी हुई है। आप ऊपर आ सकते हैं। एक पंडित जी सीढ़ियां के पास तिलक लगाते रहते हैं और आप को दान करने के लिए कहते हैं। आप उन्हें भी दान करना चाहे, तो कर सकते हैं और नहीं करना चाहे तो नहीं कर सकते हैं। हमारा पातालपुरी मंदिर का अनुभव बहुत अच्छा था और यहां पर आकर अच्छा लगता है। 


यह लेख अगर आपको अच्छा लगा हो, तो आप इसे अपने दोस्तों और फैमिली वालों के साथ शेयर कर सकते हैं और उन्हें भी पतालपुरी मंदिर की जानकारी प्रदान कर सकते हैं। 


त्रिवेणी संगम इलाहाबाद

गंगा यमुना संगम

माँ शारदा मंदिर मैहर

उज्जैन के मंदिर


गंगा यमुना सरस्वती संगम स्थल - Ganga Yamuna saraswati sangam

गंगा यमुना संगम - Ganga Yamuna sangam
गंगा यमुना सरस्वती संगम - Ganga Yamuna saraswati sangam


गंगा, यमुना और सरस्वती नदी का संगम स्थल एक पवित्र धार्मिक स्थल है। यह हिंदुओं के लिए पवित्र स्थल है और यहां पर हर साल माघ मेले के समय हजारों की संख्या में लोग आते हैं और पवित्र गंगा नदी और यमुना नदी के संगम पर स्नान करते हैं। इस साल हम लोग भी गंगा और यमुना नदी के संगम पर स्नान करने के लिए गए थे। 


गंगा और यमुना नदी का संगम स्थल इलाहाबाद शहर में स्थित है। इलाहाबाद शहर प्रयागराज के नाम से जाना जाता है। आप संगम स्थल पर ऑटो से पहुंच सकते हैं। यहां पर बहुत सारे ई-रिक्शा और ऑटो चलते रहते हैं, तो आप संगम तक आराम से पहुंच सकते हैं। हम लोग संगम में सुबह ही पहुंच गए थे और प्रयागराज किला के किनारे चलते चलते हम लोग घाट तक पहुंच गए। उसके बाद हमें बहुत सारे नाव वाले दिखे । वह सभी हम लोगों से पूछ रहे थे, कि आप लोग नाव से संगम में चलेंगे कि, नहीं चलेंगे। 



गंगा यमुना सरस्वती संगम स्थल - Ganga Yamuna saraswati sangam
प्रयागराज किले के किनारे से संगम की ओर जाते हुए हम लोग


गंगा यमुना सरस्वती संगम स्थल - Ganga Yamuna saraswati sangam
किले घाट में किनारे पर लगी हुई बहुत सारी नाव 


हम लोगों ने सवारी वाली नाव से संगम तक जाने का प्लान बनाया और हम लोग संगम के लिए चल दिया। सवारी वाली नाव में कम पैसे लगते हैं। हम लोगों से नाविक ने ₹60 लिया था। शायद सवारी वाली नाव में ₹60 से भी बहुत कम पैसे लगते होंगे। मगर हम लोगों को इतना नॉलेज नहीं था, क्योंकि हम लोग आज ही के दिन इलाहाबाद पहुंचे थे, इसलिए। सवारी वाली नाव में और भी कम पैसे में संगम तक जा सकते हैं। इसके अलावा अगर आप यहां पर पूरी नाव बुक करना चाहे, तो वह भी कर सकते हैं। वह भी आपको संगम तक ले जाएंगे और स्नान करा कर आपको वापस घाट पर छोड़ देंगे। उसका चार्ज अलग रहेगा और नाविक आपको काफी ज्यादा चार्ज बोलेंगे। मगर आपको वहां पर बारगन करना पड़ेगा। घाट पर बहुत सारी नावे लगी थी। हमारे नाविक ने हमें अपनी नाव में बैठाया। जैसे ही हम लोग नाव पर चढ़े। हम लोगों की नाव हिलने डुलने लगी, जिससे हम लोगों को बहुत डर लगने लगा, कि कहीं हम लोग गिर ना जाए और यमुना नदी का जो घाट है। वह भी बहुत ज्यादा गहरा था। हम लोगों की नाव में धीरे-धीरे लोगों की संख्या बढ़ने लगी और करीब 8 लोग नाव में सवार हो गए। 


नाव बहुत ज्यादा हिलने लगी थी, जिससे बहुत ज्यादा डर लगने लगा था। यहां जो नाव रहती है, लकड़ी की रहती है और हल्की रहती है। इसलिए बहुत ज्यादा हिलती है। हम लोगों को नाविक ने लाइफ जैकेट दिए, जिससे अगर हम लोग अगर पानी में गिर जाए, तो तैरते रहे। हम लोगों ने लाइफ जैकेट पहन लिया। उसके बाद हम लोग धीरे-धीरे यमुना नदी के की ओर संगम की तरफ चलना स्टार्ट हो गए। रास्ते में हमें ढेर सारे पक्षी देखने के लिए मिले। यह विदेशी पक्षी रहते हैं, जो ठंड के समय गंगा जी में आते हैं। इन पक्षियों की तादाद बहुत ज्यादा रहती है। चारों तरफ आपको यही विदेशी पक्षी देखने के लिए मिल जाते हैं। 




गंगा यमुना सरस्वती संगम स्थल - Ganga Yamuna saraswati sangam
सी  ईगल पक्षी संगम में आराम करते हुए 


यहां पर विदेशी पक्षी को आप खाना भी डाल सकते हैं और बहुत सारे श्रद्धालु खाना डालते हैं। यहां पर बहुत सारे नाविक इन पक्षियों का दाना बेचते हुए आपको देखने के लिए मिल जाते हैं। इन पक्षियों को बेसन के सेव बहुत अच्छे लगते हैं और यह जो नाविक रहते हैं। वह ₹10 में आपको एक पैकेट सेव देते हैं, जो आप इन पक्षियों को डाल सकते हैं। उसके बाद हमारी नाव धीरे धीरे चलना स्टार्ट हुई। हम लोगों ने भी एक पैकेट सेव लिए और पक्षियों को डाला। पक्षी एकदम से आ गए और हम लोगों ने कुछ फोटो क्लिक कर लिए। उसके बाद हम लोगों की नाव धीरे-धीरे  आगे बढ़ी और हम लोग संगम में पहुंच गए। संगम में पहुंचकर हम लोगों को नावो का जमघट देखने के लिए मिला। यहां पर इतनी सारी नाव रहती है, कि इनकी गिनती करना बहुत मुश्किल होता है। संगम पर जो बड़ी नावे रहती हैं, उनकी एक  कतार लगी रहती है। 


संगम पर जो बड़ी नाव की कतार रहती है। उसके एक तरफ गंगा नदी है, जो कम गहरी रहती है। घुटनों तक पानी रहता है और नाव के दूसरी तरफ यमुना नदी रहती है, जो बहुत गहरी रहती है। यमुना नदी के साइट कोई भी स्नान नहीं करता है। 


गंगा यमुना सरस्वती संगम स्थल - Ganga Yamuna saraswati sangam
गंगा और यमुना नदी के संगम पर लगा जमघट 


गंगा यमुना सरस्वती संगम स्थल - Ganga Yamuna saraswati sangam
संगम पर नहाते हुए लोग 


गंगा यमुना सरस्वती संगम स्थल - Ganga Yamuna saraswati sangam
गंगा नदी पर मस्ती करते हुए लोग

संगम पर जो बड़ी नाव एक कतार से लगी हुई थी। हमारी छोटी सी नाव  उन नावों  के किनारे जाकर खड़ी हो गई और बड़ी नाव से एक व्यक्ति आया और हम लोगों को कहा अगर आप लोगों को नाव के उस पार जाना है। गंगा नदी में स्नान करने के लिए, तो आप लोगों को ₹10 देने पड़ेंगे। हम लोगों ने पूछा ₹10 किस लिए, तो उसने कहा कि आपको हमारी नाव पार करके जाना पड़ेंगे। हमारी नाव में पैर रखने के ₹10 आपको लगेंगे। यह हम लोगों को बिल्कुल अच्छा नहीं लगा। मगर क्या कर सकते हैं। इतना दूर आए हैं, तो ₹10 दे दिया। यहां पर आपको बड़ी नावों में पंडित जी भी देखने के लिए मिलते हैं, जो संगम पर ही पूजा कराते हैं। अगर आप पूजा करवाना चाहे, तो यहां पर पूजा भी करवा सकते हैं। इसके अलावा आपको यहां पर एक  और अद्भुत चीज देखने के लिए मिल जाएगी। यहां पर आपको चाय और पकोड़े संगम के बीच में ही गरमा गरम खाने के लिए मिलते हैं। यहां पर  नाविक चाय और पकौड़े की सेवा आपको प्रदान करते हैं। बस आपको थोड़ा महंगा जरूर पड़ेगा। मगर आप इसका मजा भी ले सकते हैं। 


आप संगम पर दोनों नदियों के पानी का अंतर भी देख सकते हैं। यहां पर गंगा नदी का पानी मटमैला रहता है और यमुना नदी का पानी हरा कलर का रहता है। यहां पर चारों तरफ आपको बहुत ज्यादा भीड़ देखने के लिए मिलती है। चारों तरफ लोग ही लोग आपको देखने के लिए मिलते हैं। बहुत सारे लोग नहा धोकर कपड़े चेंज करते हुए भी आपको यहां पर देखने के लिए मिलते हैं। जो पुरुष लोग रहते हैं। वह आसानी से कपड़े चेंज कर सकते हैं। मगर जो महिलाएं रहती हैं, उन्हें कपड़े चेंज करने में परेशानी होती है। यहां पर हम लोगों ने गंगा नदी में बहुत मजे किए और बहुत नहाया, क्योंकि गंगा नदी ज्यादा गहरी नहीं थी और आप यहां पर उतर सकते हैं। गंगा नदी का पानी घुटनों तक था।

 

हमारे पास एक छोटी सी बोतल थी, जिसमें हम लोगों ने संगम का जल भरा और अपनी नाव पर आकर बैठ गए। हमारे सभी 8 साथी भी नाव पर बैठ गए और हम लोग घाट की तरफ  चल दिए। इस तरह से हम लोगों के संगम का अनुभव बहुत अच्छा रहा और यहां पर आपको ढेर सारे पर्यटक देखने के लिए मिलते हैं, जो यहां पर बोट राइड का मजा लेते हैं, और वोट राइट का अनुभव भी बहुत अच्छा रहता है। जब आपकी नाव हिलती है, तो बहुत मजा आता है। आते समय भी हमें बहुत सारे विदेशी पक्षी देखने के लिए मिले और हम लोगों को बहुत मजा आया। हम लोगों ने लाइफ जैकेट पहना हुआ था और यहां पर लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य है। आपको हर वोट वाला लाइफ जैकेट देता है। यहां पर पुलिस भी बहुत सारी लगी रहती है, जो लोगों की सुरक्षा के लिए तत्पर रहती है। हम लोगों को गंगा यमुना और सरस्वती के संगम पर जाकर बहुत अच्छा लगा और आप लोग भी यहां जाएंगे, तो आपको बहुत अच्छा लगेगा। 


त्रिवेणी संगम इलाहाबाद

घोघरा नर्सरी झरना कटनी

वसुधा जलप्रपात कटनी

भेड़ाघाट का मेला










त्रिवेणी संगम प्रयागराज - Triveni Sangam Prayagraj

 त्रिवेणी संगम इलाहाबाद 

Triveni Sangam Allahabad



संगम स्थल इलाहाबाद एक पवित्र स्थल है। इस स्थल पर गंगा नदी, यमुना नदी और सरस्वती नदी का संगम हुआ है। यहां पर गंगा नदी दाएं तरफ से आई है और यमुना नदी बाएं तरफ से आई है, और जो सरस्वती नदी है। वह गुप्त है। आप जब यहां पर माघ मेले के समय आते हैं, तो आपको यहां पर चारों तरफ दूर-दूर तक कैंप देखने के लिए मिलते हैं, जो रेत के मैदानों पर बने हुए हैं। यहां पर आपको संगम पर जाने के लिए नाव की सवारी लेनी पड़ती है। नाव की सवारी लेने का एक अलग ही मजा रहता है। यहां पर यमुना नदी के किनारे बहुत सारी नावे आपको देखने के लिए मिलते हैं। आप इन नाव की सवारी लेकर संगम स्थल तक पहुंच सकते हैं। संगम स्थल पर पहुंच कर आपको एक लंबी  नाव की कतार देखने के लिए मिलती है, जो यमुना नदी और गंगा नदी के मध्य में है। यहां पर आपको एक और अंतर देखने के लिए मिलेगा। वह यह है, कि गंगा नदी का पानी जो है, वह छिछला है। मतलब यहां पर आप नहा सकते हैं और जो यमुना नदी का पानी है। वह गहरा है। मतलब आप यहां डुबकी मारेंगे, तो दोबारा ऊपर नहीं आएंगे। मतलब आप समझ सकते हैं। यहां नाव की कतार लगी है। उसके एक तरफ गहराई है। यहां पर आकर लोग संगम में स्नान करते हैं और बहुत अच्छा लोगों का अनुभव रहता है। हम लोगों को भी यहां पर बहुत मजा आया।
 

त्रिवेणी संगम के फोटो 

 
 
 
त्रिवेणी संगम प्रयागराज - Triveni Sangam Prayagraj
संगम नगरी में आपका स्वागत है 

त्रिवेणी संगम प्रयागराज - Triveni Sangam Prayagraj
सुबह के समय गंगा नदी का दृश्य
 

त्रिवेणी संगम प्रयागराज - Triveni Sangam Prayagraj
पीपों का पुल पर जाते समय का दृश्य
 

त्रिवेणी संगम प्रयागराज - Triveni Sangam Prayagraj
शाम के समय त्रिवेणी संगम का दृश्य

 
 
आपको संगम स्थल पर गंगा नदी के पानी का कलर और यमुना नदी के पानी का कलर देखने के लिए मिलता है। यहां पर गंगा नदी का पानी मटमैला रहता है और यमुना नदी का पानी हरे कलर का रहता है और जो सरस्वती नदी है। वह यहां पर भूगर्भ से बहते हुए आती है और गुप्त रूप से इस संगम पर मिलती है। इस स्थल को त्रिवेणी संगम के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यहां पर तीनों नदियों का संगम होता है। यहां पर आप आएंगे तो आपको गंगा और यमुना का संगम देखने के लिए मिलता है। दोनों का अलग-अलग पानी का कलर भी देखने के लिए मिलेगा। यहां पर गंगा नदी का जो रेतीला मैदान रहता है, उसमें कैंप लगाए जाते हैं, जिसमें जो भी यात्री या पर्यटक आता है। वह रह सकता है। यहां पर गंगा नदी के उस पार भी कैंप लगाए जाते हैं और उसमें भी पर्यटक आकर रह सकते हैं। गंगा में बड़े-बड़े पीपा का पुल बनाया जाता है, जिससे लोग गंगा नदी के एक तरफ से दूसरे तरफ आना-जाना करते हैं। यहां पर गंगा नदी के किनारे बहुत सारे प्राचीन मंदिर भी हैं, जिनके दर्शन कर सकते हैं। यहां पर यमुना नदी के किनारे प्रयागराज महल के बाजू में ही बड़े हनुमान जी का मंदिर है, जो बहुत प्रसिद्ध है और इसमें भक्तों  हनुमान जी हनुमान जी के दर्शन कर सकते हैं। यहां पर आकर आपको बहुत अच्छा लगेगा। 
 
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लोढ़ा पहाड़ धाम या सिद्धन धाम - Lodha Pahad Dham or Siddhan Dham Sihora

लोढ़ा पहाड़ धाम या सिद्धन धाम सिहोरा

 Lodha Pahad Dham or Siddhan Dham Sihora

 
 
लोढ़ा पहाड़ धाम या सिद्धन धाम - Lodha Pahad Dham or Siddhan Dham Sihora

 
लोढ़ा पहाड़ धाम या सिद्धन धाम - Lodha Pahad Dham or Siddhan Dham Sihora

 
सिद्धन धाम या लोढ़ा पहाड़ धाम एक धार्मिक स्थल है। यहां पर आकर बहुत शांति मिलती है। लोढ़ा पहाड़ धाम में आप अपनी गाड़ी से पहुंच सकते हैं। इस मंदिर तक जाने के लिए सड़क की व्यवस्था है। आप यहां से जाते हैं, तो अपनी गाड़ी आराम से चलाइएगा, क्योंकि यहां पर सड़क के दोनों तरफ आपको खाई देखने के लिए मिलती है। मंदिर पहुंचकर आपको सीढ़ियां मिलती है। सीढ़ियां चढ़कर आप मंदिर तक जाते हैं। यहां पर आपको शंकर जी के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। इसके अलावा यहां पर गुरु जी भी बैठते हैं। आप उनके भी दर्शन कर सकते हैं। इस जगह के बारे में कहा जाता है कि, इस जगह में पहले ऋषि मुनि लोग रहा करते थे और तपस्या किया करते थे। आपको यहां पर एक पुरानी गुफा भी देखने के लिए मिल जाती है। यह गुफा कहां तक जाती है। इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। मगर आप इस गुफा को देख सकते हैं। इस जगह में आ कर बहुत अच्छा लगा था। हम लोगों ने यहां पर करीब अपना एक से डेढ़ घंटा तक बताया। यहां पर आपको पक्षियों की  आवाज और चारों तरफ हरियाली देखने के लिए मिलेगी। मंदिर के दोनों तरफ आपको गहरी खाई देखने के लिए मिलेगी। 
 
लोढ़ा पहाड़ धाम सबसे ऊंची जगह पर स्थित है। यह मंदिर कटनी जबलपुर हाईवे रोड से भी आपको देखने के लिए मिल जाता है। मंदिर से आपको चारों तरफ का दृश्य देखने के लिए मिलेगा, जो बहुत ही आकर्षक होता है। अगर आप शाम के समय जाते हैं, तो यहां से सूर्यास्त देख सकते हैं, जो बहुत ही मनोरम होता है। यहां पर आकर आप पिकनिक मना सकते हैं। अपने दोस्तों के साथ और अपने परिवार वालों के साथ यहां घूमने के लिए आ सकते हैं। 
 
हम लोग जब इस मंदिर गए थे। तब यह मंदिर खुला नहीं था और हम लोग बाहर से इस मंदिर के दर्शन किए थे। यहां पर बहुत बड़ा मैदान है, जहां पर हम लोगों ने बहुत अच्छी फोटो खींचे थे। यहां पर सूर्यास्त का बहुत ही खूबसूरत नजारा भी देखने के लिए मिल जाता है । यहां पर मकर संक्रांति के समय मेला भरता है और बहुत सारे लोग इस मेले में आते हैं। इस मंदिर को लेकर बहुत सारी मान्यताएं हैं, जिसके बारे में मेरे को जानकारी नहीं है, क्योंकि जब हम लोग गए थे, तब मंदिर बंद था, तो कोई हमें मंदिर के बारे में बता नहीं पाया। मगर यह जगह बहुत खूबसूरत है और आप यहां पर अपने दोस्तों और परिवार वालों के साथ पिकनिक मनाने के लिए आ सकते हैं। यहां पर अगर आप बरसात के समय आते हैं, तो आपको चारों तरफ हरियाली भरा माहौल देखने के लिए मिल जाएगा। मंदिर में सभी तरह की सुविधाएं उपलब्ध है। आप यहां पर आकर घूम सकते हैं।
 

सिद्धन धाम मंदिर या लोढ़ा पहाड़ धाम कहाँ  है

सिद्धन धाम मंदिर या लोढ़ा पहाड़ धाम जबलपुर जिले में सिहोरा के पास में स्थित है। यह सिहोरा से करीब 6 से 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आप मंदिर तक आप ने दो पहिया वाहन या चार पहिया वाहन से पहुंच सकते हैं। मंदिर तक जाने के लिए पक्की सड़क है। 

 

सतधारा मेला सिहोरा जबलपुर

रूपनाथ धाम कटनी 

विजयराघवगढ़ किला कटनी

रपटा घाट मंडला शहर 


घोघरा नर्सरी झरना कटनी - Ghoghra Nursery Falls Katni

 घोघरा नर्सरी जलप्रपात कटनी 

Ghoghra Nursery Waterfall Katni

 
 
घोघरा नर्सरी झरना कटनी - Ghoghra Nursery Falls Katni
घोघरा नर्सरी झरना कटनी

घोघरा नर्सरी जलप्रपात कटनी जिले में स्थित एक सुंदर जलप्रपात है। यह जलप्रपात घुघरा नामक गांव के पास में स्थित है। आप इस जलप्रपात में बहुत आसानी से पहुंच सकते हैं, क्योंकि इस जलप्रपात तक पहुंचने के लिए सड़क बहुत ही मस्त बनी हुई है और सड़क में आपको बहुत खूबसूरत नजारे देखने के लिए मिलते हैं। दूर-दूर तक आपको मैदान देखने के लिए मिलता है और पहाड़ियां देखने के लिए मिलती है। बहुत मस्त लगता है। आप यहां पर अपनी बाइक या कार से आराम से जा सकते हैं। वैसे यहां पर बस भी चलती है, तो आप बस का भी टाइम पता करके इस वाटरफॉल तक आ सकते हैं। यह वाटरफॉल ज्यादा बड़ा नहीं है, मगर अच्छा है और खूबसूरत है और देखने लायक है। यहां पर जो यहां के बच्चे लोग हैं और जो यहां के लोकल लोग हैं। वह यहां पर आप को नहाते हुए देखने के लिए मिल जाते हैं। जलप्रपात के ऊपर एक छोटा सा कुंड बना हुआ है, जहां पर लोग नहाने का मजा लेते हैं और यहां पर शंकर जी का मंदिर भी है, जिसमें लोग जल चढ़ाते हैं। झरने के ऊपर साइड भी मंदिर बने हुए हैं। इस झरने का नाम घोघरा नर्सरी झरना इसलिए पड़ा है, क्योंकि यहां झरने के पास ही में एक नर्सरी है, जो बहुत फेमस है। उस नर्सरी को घोघरा नर्सरी के नाम से जाना जाता है। इसलिए इस झरने को शायद घोघरा नर्सरी झरना कहा जाता है। 
 
कहा जाता है कि यहां पर गुफा भी बनी हुई है, उस गुफा में हम लोग नहीं गए थे। यहां पर आपको और भी मंदिर देखने के लिए मिल जाएंगे। झरने के ऊपर साइड एक मंदिर बना हुआ है, जहां पर आप जा सकते हैं। यहां पर आपको बहुत अच्छा लगेगा। नेचुरल पीस मिलेगी। यह जो झरना है। यह मेन रोड पर है, तो यहां से बस गुजरती है, तो आप यहां पर आ सकते हैं। यह झरना बिलहरी के पास में है, तो आप जब भी बिलहरी आते हैं, तो इस झरने में भी आ सकते हैं। बिलहरी कटनी शहर की एक प्राचीन सिटी है। प्राचीन समय में बिलहरी को पुष्पवती के नाम से जाना जाता था, तो बहुत सारे लोग बिलहरी आते हैं। बिलहरी के पास ही में यह झरना है, तो आप इस झरने में भी घूमने के लिए आ सकते हैं। 
 
घोघरा नर्सरी जलप्रपात का मजा आप बरसात के समय में ले सकते हैं, क्योंकि गर्मी के समय यह झरना सुख जाता है। आपको यहां पर आकर बहुत अच्छा लगेगा। यह बहुत अच्छी जगह है। यहां पर आप अपने दोस्तों के साथ आकर आराम से अपना समय बिता सकते हैं। 
 


वसुधा जलप्रपात कटनी - Vasudha Falls Katni | waterfall near Katni

वसुधा झरना कटनी - Vasudha waterfall Katni

 


वसुधा जलप्रपात कटनी - Vasudha Falls Katni
वसुधारा जलप्रपात के पास के घने जंगल

 
वसुधा जलप्रपात कटनी - Vasudha Falls Katni
जंगल में बहने वाली खूबसूरत नदी
 
 
वसुधा जलप्रपात कटनी जिले के सबसे अच्छे जलप्रपात में से एक है। इस जलप्रपात के बारे में ज्यादा लोगों को जानकारी नहीं है। इसलिए बहुत कम लोग ही इस जलप्रपात तक आते हैं। मगर अब गूगल मैप में यह जलप्रपात आपको देखने के लिए मिल जाएगा, तो शायद अब यहां पर बहुत ज्यादा लोग देखने के लिए मिले। वसुधा जलप्रपात कटनी में स्थित है और कटनी के वसुधा नाम के गांव में स्थित है। जलप्रपात तक पहुंचने के लिए जो सड़क है। वह बहुत ही खराब सड़क है। कहीं-कहीं पर बहुत ज्यादा खराब है और कहीं-कहीं पर बहुत अच्छी सड़क है। इस जलप्रपात में हम लोग वसुधा गांव से आए थे, तो उस गांव से आते समय हम लोगों को एक नदी मिली थी। उस नदी को पार करके इस जलप्रपात तक आना पड़ता है और जंगल को भी पार करना पड़ता है। जंगल में आपको पैदल चलना पड़ता है, क्योंकि वहां पर आपकी गाड़ी नहीं जा सकती। 
 
हम लोग अपनी स्कूटी इस जंगल के थोड़ा आगे तक ले कर गए थे। मगर रास्ते में नदी पड़ती है और पथरीला रास्ता पड़ता है, जिससे हम लोग को अपनी स्कूटी जंगल के बीच में ही खड़ी करनी पड़ी और आगे का रास्ता पैदल चलना पड़ा। मगर हम लोग झरने तक नहीं पहुंच पाए, क्योंकि हम लोगों को अपनी गाड़ी की चिंता थी और हम उस जंगल में अकेले थे। इसलिए अगर आप यहां पर जाते हैं, तो ग्रुप के साथ आएंगे, तो बहुत अच्छा रहेगा, क्योंकि यहां पर पूरा जंगल है। जो लोग यहां पर गांव वाले थे। वह खेतों में काम कर रहे थे और जंगल में हम दो लोग ही थे, जिससे हमें डर लग रहा था और हम लोग झरने तक नहीं गए। अगर आप ग्रुप के साथ आएंगे, तो आप झरने तक जाएंगे और बहुत इंजॉय कर सकते हैं। यहां का जो वातावरण था। वह बहुत अच्छा था।  चारों तरफ हरियाली थी और नदी की बहने की आवाज बहुत अच्छी लग रही थी। चिड़ियों की की आवाज बहुत अच्छी लग रही थी और यहां का बहुत अच्छा माहौल था। आप आएंगे तो आपको बहुत अच्छा लगेगा। 
 
वसुधा गांव के लोग बहुत अच्छे हैं और आपको वह रास्ता बता देते हैं, झरने तक जाने के लिए। आप यहां पर आते हैं, तो यहां पर पूरा 1 दिन का प्लान बनाकर आइएगा, क्योंकि यहां पर आपको पूरा 1 दिन लग जाएगा। यहां पर आप पिकनिक मनाने आ सकते हैं, फैमिली वालों के साथ। मगर ग्रुप में आए, तो वह वेस्ट होगा। आप यहां पर बरसात के समय आए, क्योंकि बरसात के समय झरने में पानी रहता है। गर्मी के समय झरना सूख जाता है। मगर यहां जंगल का जो तापमान रहता है। वह बहुत ही ठंडा रहता है। गर्मी के समय भी यहां पर आपको अच्छा लगेगा। 
 
वसुधा जलप्रपात में झरने का पानी पहाड़ों से एक कुंड में गिरता है। इस कुंड में आप नहाने का मजा भी ले सकते हैं। मगर अगर कुंड ज्यादा गहरा हो, तो आप संभल कर नहाए। यहां पर आप पिकनिक मना सकते हैं और बरसात के समय यहां पर बहुत सारे लोग आते हैं, तो आप बरसात के समय आएंगे, तो वह आपके लिए अच्छा रहेगा। यहां पर आप अपनी फैमिली, दोस्तों के साथ आकर बहुत ज्यादा मजे कर सकते हैं। यह कटनी के पास एक अच्छा दर्शनीय स्थल है और आप यहां पर आ सकते हैं। 
 


कार्तिक पूर्णिमा का मेला - Kartik Purnima Fair

कार्तिक पूर्णिमा का मेला या भेड़ाघाट का मेला
Kartik Purnima fair or Bhedaghat fair


कार्तिक पूर्णिमा का मेला पूरे भारत देश में प्रसिद्ध है। कार्तिक पूर्णिमा को भारत की अलग-अलग जगहों में अलग-अलग तरह से मनाया जाता है। हम जहां रहते हैं। वहां पर कार्तिक पूर्णिमा के दिन लोग पवित्र नदियों के किनारे जाते है और वहां पर लोग जाकर नहाते हैं और भगवान की पूजा करते हैं। कार्तिक पूर्णिमा साल में एक बार पड़ती है। जैसा कि आपको पता है कि हर महीने में एक अमावस्या और पूर्णिमा पड़ती है। हर पूर्णिमा में लोग उपवास रहते हैं और इसमें से 1 दिन उपवास वाली पूर्णिमा पड़ती है और दूसरे दिन स्नान वाली पूर्णिमा पड़ती है। उसी प्रकार लोग कार्तिक पूर्णिमा के दिन नर्मदा नदी में स्नान करते हैं और उपवास भी रहते हैं। कार्तिक पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों के किनारे बहुत बड़ा मेला लगता है, जिसमें बहुत सारे लोग सम्मिलित होते हैं। यहां पर बहुत सारी दुकान होती है और लोग यहां पर आकर बहुत ज्यादा मजा करते हैं।


कार्तिक पूर्णिमा के दिन भेड़ाघाट में बहुत बड़ा मेला लगता है। इस साल 2020 में भेड़ाघाट में मेला 1 दिसंबर को लगा था। मगर 1 दिसंबर को मेला नहीं लगता है। मेला कार्तिक पूर्णिमा  के दिन रहता है। आप यहां पर अगर कैलेंडर की डेट फिक्स कर आएंगे, तो यहां पर आपको मेला देखने नहीं मिलेगा। 2020 में जैसा कि आपको पता है कोविड-19 पूरी दुनिया में फैला हुआ है, तो सार्वजनिक जगहों में जाना मना है। मगर लोग यहां पर अपनी श्रद्धा और भक्ति के अनुसार नर्मदा जी में स्नान करने और उनकी पूजा करने के लिए आए हैं। मगर लोगों की भीड़ इतनी ज्यादा नहीं थी, जितनी हर साल होती है और ना ही इतनी दुकानें लगी थी। आप यहां पर आकर भेड़ाघाट का बहुत खूबसूरत नजारा देख सकते हैं। यहां बहुत अच्छा लगा। यहां पर ज्यादा भीड़ नहीं थी, तो आप अच्छे से घूम सकते थे, अच्छे से बैठ सकते थे। शॉपिंग कर सकते थे। दुकानें भी बहुत ज्यादा नहीं थी। आपको यहां आकर बहुत अच्छा लगेगा। 


कार्तिक पूर्णिमा के दिन यहां पर नर्मदा जी में संगमरमर की वादियों के बीच आप बोट राइडिंग का मजा ले सकते हैं।  भेड़ाघाट में पंचवटी के पास में जो घाट बना है। वहां से आप बोट राइड के लिए टिकिट ले सकते हैं। आपको बहुत मजा आएगा और यहां पर कार्तिक पूर्णिमा के दिन रात में भी बोट राइड का परमिशन रहता हैए तो आप यहां पर रात में भी बोट राइड का आनंद ले सकते हैं। 


धुआंधार जलप्रपात के पास में एक छोटा सा होटल है। होटल से आप चाय, कॉफी या कुछ भी खाने का सामान ऑर्डर कर सकते हैं। भेड़ाघाट में मेले के समय यह पर बहुत भीड़ रहती है। इतनी भीड़ थी, कि पैर रखने तक की जगह नहीं रहती है। मगर इस समय कोविड-19 के समय जब हम लोग यहां पर आए हैं। तब यहां पर ज्यादा भीड़ नहीं थी। आप आराम से आकर धुआंधार जलप्रपात का दृश्य देख सकते थे, फोटो ले सकते थे और आपको बहुत अच्छा लगेगा। यहां पर आकर बहुत सारे लोग आपको देखने के लिए मिलते हैं, जो पैसे के लिए धुआंधार जलप्रपात में बहती हुई नर्मदा नदी की धाराओं में छलांग लगाते हैं,  यह एक जानलेवा काम है। मगर बहुत सारे लोग पैसे के लिए यह काम करते हैं। इस तरह नर्मदा नदी में छलांग लगाना प्रतिबंधित है। मगर लोग पैसे के लिए यह करते हैं। हम लोगों को यहां पर बहुत अच्छा लगा। उसके बाद धुआंधार का दृश्य देखने के बाद हम लोग थोड़ी दूर आगे गए और वहां पर संगमरमर की चट्टानों के ऊपर नर्मदा नदी के किनारे हम लोग कुछ टाइम बैठे रहे। यहां पर बहुत सारे लोग  तुलसी जी और भगवान शिव जी की पूजा कर रहे थे। बहुत सारे लोग नहाने का मजा ले रहे थे और बहुत सारे लोग फोटो खींचने का मजा ले रहे थे। हम लोगों का टाइम बहुत अच्छा बीता और हम लोगों ने यहां के बाजार में भी शॉपिंग करें। यहां पर बहुत सारे लोकल लोग आपको देखने के लिए मिलते हैं, जो आपको  ताजी ककड़ी और उबली हुई बेर बेचते है। तो आप उसका भी यहां पर आकर आनंद ले सकते हैं। कार्तिक पूर्णिमा के मेले में आकर हम लोग को बहुत अच्छा लगा और आप लोग भी यहां पर आ सकते हैं। 


दलदली माता मंदिर नैनपुर, मंडला,

सतधारा मेला सिहोरा जबलपुर

सहस्त्रधारा जलप्रपात मंडला

रूपनाथ धाम कटनी


चंदेरी पर्यटन स्थल - Chanderi tourist places | chanderi places to visit

चंदेरी के दर्शनीय स्थल - Places to visit in Chanderi | Chanderi  tourism चंदेरी शहर | Chanderi Attractions 



चंदेरी में घूमने की जगह


चंदेरी का किला - Chanderi ka kila

चंदेरी का किला चंदेरी शहर में स्थित एक मुख्य आकर्षण है। यह किला चंदेरी शहर में चंद्र गिरी नामक पहाड़ी पर बना हुआ है। इस किले का निर्माण 11 वीं शताब्दी में कीर्तिपाल नाम के प्रतिहार शासक ने करवाया था, जिसके कारण इस किले को कीर्ति दुर्ग के नाम से भी जाना जाता है। वर्तमान में बुंदेला राजा दुर्जन सिंह द्वारा बनवाए गए नवखंडा महल भी आपको यहां पर देखने के लिए मिल जाता है। किले में पहुंचने के लिए आपको यहां पर तीन रास्ते मिलते हैं। पश्चिम की ओर जो प्रवेश द्वार है, उसे हवा महल या हवापौर के नाम से जाना जाता है। दूसरा खूनी दरवाजा है, जिसके बारे में अनोखी कहानी प्रसिद्ध है और तीसरा जोगेश्वरी देवी मंदिर की तरफ से सीढ़ियों द्वारा चढ़ाई चढ़कर किले में पहुंचा जा सकता है। किले तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग भी उपलब्ध है। 

यह किला बलुआ पत्थर से बना हुआ है। यह किला 250 फीट ऊंची चट्टानों पर स्थित उत्तर से दक्षिण की तरफ लगभग 1 मील से ज्यादा क्षेत्र में फैला हुआ है। इस किले के प्रवेश द्वार को खूनी दरवाजा कहते हैं, क्योंकि कहा जाता है कि यहां कैदियों को मौत के घाट उतारा जाता था। इस किले के अंदर आपको खिलजी का मकबरा, जो 14 वी शताब्दी में बनाया गया था। जोहर स्मारक तथा प्रसिद्ध संगीतकार बैजू बावरा की समाधि देखने के लिए मिल जाएगी, जो दर्शनीय स्थल है। किले से आपको चंदेरी शहर का खूबसूरत भी अभी देखने के लिए मिलता है। 


जागेश्वरी माता मंदिर चंदेरी - Jageshwari mata mandir chanderi

जागेश्वरी माता का मंदिर चंदेरी में स्थित एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। जागेश्वरी माता का मंदिर चंदेरी दुर्ग के पास ही में स्थित है। यह मंदिर प्राचीन है और प्राकृतिक है। यहां पर आकर आपको जगदंबा माता जी के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। यहां पर आपको शिवलिंग के भी दर्शन करने के लिए मिलते हैं। यहां पर आपको आकर बहुत अच्छा लगेगा। चारों तरफ का जो माहौल है, वह पूरी तरह से प्राकृतिक है। यहां पर पहाड़ों से जलधारा भी बहती है। वह भी आप देख सकते हैं। यहां पर आपको आकर सुकून मिलेगा। 


चंदेरी संग्रहालय  - Chanderi sangrahalay

चंदेरी संग्रहालय चंदेरी में स्थित एक प्रमुख जगह है। यहां पर आपको प्राचीन वस्तुएं देखने के लिए मिल जाती हैं। यहां पर अलग-अलग गैलरी बनाई गई है, जहां पर जाकर आप प्राचीन इतिहास के बारे में जान सकते हैं। यह संग्रहालय सुबह से शाम तक खुला रहता है। यह संग्रहालय दो मंजिला है और यहां पर प्रवेश का शुल्क बहुत कम है। आप यहां पर अच्छा समय बिता सकते हैं। 


श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र खंदारजी चंदेरी - shree digambar jain atishay kshetra khandar ji Chanderi

श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र खंदारजी चंदेरी में स्थित एक प्रमुख जैन तीर्थ स्थल है। यहां पर आपको श्री आदिनाथ जी की पत्थर पर बनी हुई प्रतिमा देखने के लिए मिलती है, जो 38 फीट ऊंची है। यह बहुत सुंदर है और कलात्मक है। आपको इसको देख कर बहुत अच्छा लगेगा। यह स्थल चंदेरी से करीब 1 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। यह विंध्याचल पहाड़ी पर बनी हुई है। यहां पर आपको आकर बहुत सारी गुफाएं देखने के लिए मिलती है। 


कटी घाटी चंदेरी - Kati ghati chanderi

कटी घाटी चंदेरी शहर का एक मुख्य आकर्षण स्थल है। यहां पर पहाड़ को काटकर रास्ता बनाया गया है। यहां पर आ कर आपको बहुत अच्छा लगेगा। यहां से चंदेरी शहर का खूबसूरत व्यू देखने के लिए मिलता है। कटी घाटी चंदेरी नगर के दक्षिण में पहाड़ को काटकर बनाया गया है। कटी घाटी की ऊंचाई 80 फीट है। इसकी चैड़ाई 29 फीट है और लंबाई 192 फिट है। इस घाटी के बीच में ही पहाड़ को काटकर प्रवेश द्वार बनाया गया है, जिसके दोनों ओर दो बुर्ज बनाए गए हैं। यहां पर आप घाटी के ऊपर भी जा सकते हैं। ऊपर जाने के लिए सीढ़ियां बनाई गई है। कटी घाटी के पास मिल लेख के अनुसार यह घाटी सन 1490 ईसवी में मालवा के सुल्तान गयासुद्दीन के शासनकाल में जिमन खा द्वारा बनाई गई थी। यह भी कहा जाता है कि इस घाटी का निर्माण एक ही रात में चट्टानों को काटकर किया गया है।  यह बात बहुत आश्चर्यजनक है। 


कोशक महल चंदेरी - Koshak mahal chanderi

कोशक महल चंदेरी में घूमने के लिए का एक मुख्य पर्यटन स्थल है। आपको यहां पर एक खूबसूरत महल देखने के लिए मिलता है। यह महल ऐतिहासिक स्थल है। इस महल का निर्माण 15वीं शताब्दी में मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी प्रथम ने जौनपुर विजय के उपलक्ष में करवाया था। यह एक अनूठा स्मारक है और धन के आकार में चार बराबर खंडों में बटा हुआ है। इसके चारों खंडों की नाप एवं आकृति सभी एक समान है। यह महल अफगान शैली में बना हुआ है। इस महल की 3 मंजिले पूर्ण हो गई है, जबकि चैथी मंजिल के कुछ भाग ही शेष हुआ है। यहां पर आकर बहुत अच्छा लगेगा। यहां पर गार्डन भी बना हुआ है, जहां पर आप अपना अच्छा समय बिता सकते हैं। यहां पर प्रवेश का किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता है। आप यहां पर सुबह से शाम तक घूम सकते हैं और यहां पर समय बिता सकते हैं। यहां पर फोटोग्राफ भी बहुत अच्छी आती है।


शहजादी का रोजा चंदेरी - shahzadi ka roza chanderi

शहजादी का रोजा चंदेरी शहर में स्थित एक मुख्य पर्यटन स्थल है। यहां पर आपको एक स्मारक देखने के लिए मिलता है, जो प्राचीन है। यहां पर राजकुमारी मेहरुनिसा की कब्र है। कहा जाता है कि राजकुमारी मेहरुनिसा एक सामान्य व्यक्ति से प्यार करती थी। जब उनके पिताजी को पता चला, तो उन्होंने राजकुमारी के प्रेमी को हत्या करने का षड्यंत्र रचा और हत्यारे भेज दिया। जब राजकुमारी को इन सब बातों का पता चला तो राजकुमारी अपने प्रेमी को बचाने के लिए उनके पास पहुंची। मगर उनके प्रेमी की मृत्यु हो गई थी। यह सब राजकुमारी सहन नहीं कर सकी और उन्होंने भी अपने जीवन को समाप्त कर दिया। यह सब देखकर राजकुमारी मेहरुनिसा के पिताजी को अच्छा नहीं लगा और उन्होंने यहां पर राजकुमारी मेहरुनिसा की कब्र बनाए और उनके कब्र के बाजू में ही उनके प्रेमी को भी दफन किया। आप यहां पर आकर इस मकबरे की खूबसूरती को देख सकते हैं। यहां पर खूबसूरत गार्डन भी बना हुआ है। आपको यहां पर आकर अच्छा लगेगा। 


परमेश्वर तालाब एवं लक्ष्मण मंदिर चंदेरी - Parmeshwar talab aur lakshman mandir chanderi

परमेश्वर तालाब चंदेरी में शहजादी के रोजा के पास ही में स्थित है। आप यहां पर जाकर अपना कुछ समय बिता सकते हैं। परमेश्वर तालाब प्राचीन है। तलाक के बाजू में ही लक्ष्मण मंदिर स्थित है। यह मंदिर भी बहुत प्रसिद्ध है। तालाब में महिला और पुरुष के नहाने के लिए अलग-अलग घाट बने हुए हैं। तालाब में आप मछलियों को खाना खिला सकते हैं। पूजा कर सकते हैं। तालाब के चारों ओर बैठने की अच्छी व्यवस्था है। झील में फव्वारा भी लगा हुआ है, जो रात में बहुत खूबसूरत लगता है। आपको यहां पर आकर बहुत अच्छा लगेगा। परमेश्वर तालाब के किनारे में लक्ष्मण मंदिर बना हुआ है। इसे 18वीं सदी में बुंदेला राजा अनिरुद्ध सिंह ने बनवाया था। यह मंदिर और भी पुराना है। मंदिर में शेषनाग की मूर्ति स्थापित है। 


राजा भरत शाह की छतरी चंदेरी - Raja bharat shah ki chhatri chanderi

परमेश्वर तालाब के एक छोर पर बुंदेला राजा भरत शाह की छतरी है।  इस छतरी का निर्माण राजा देवी सिंह बुंदेला द्वारा 1642 से 1654 के बीच में किया गया था। इस इमारत के पास एक बोर्ड लगा है जिस पर इस छतरी के बारे में जानकारी दी गई है। यह छतरी बलुआ पत्थर से निर्मित है। यह छतरी अष्टकोण है। यह छतरी अब खंडार अवस्था में यहां पर मौजूद है। आप यहां पर आकर इस छतरी की खूबसूरती को देख सकते हैं। 


बत्तीसी बावड़ी चंदेरी - Battisi bawdi chanderi

बत्तीसी बावड़ी चंदेरी में घूमने की एक प्रमुख जगह है। यह चंदेरी शहर के जंगल में स्थित है। इसलिए यहां पर बहुत कम ही यात्री जाते हैं। आप यहां पर जा सकते हैं। आपको यहां पर कुछ दूरी तक पैदल भी चलना पड़ सकता है। बत्तीसी बावली चंदेरी के सबसे बड़े बावड़ी में से एक है। यहां पर आपको खूबसूरत बावड़ी देखने के लिए मिलती है। इस बावड़ी में 32 घाट हैं। इसलिए शायद इसे बत्तीसी बावड़ी के नाम से जाना जाता है। इस बावड़ी का निर्माण 1485 में मालवा के सुल्तान ग्यास शाह ने करवाया था। 


बड़ा मदरसा चंदेरी - Bada madarsa chanderi

बड़ा मदरसा चंदेरी में स्थित एक प्राचीन इमारत है। आप यहां पर भी घूमने के लिए आ सकते हैं। यह जगह सुनसान इलाके में स्थित है। यहां पर आपको एक इमारत देखने के लिए मिलती है। इमारत के अंदर दो कब्र हैं। इस मकबरे को बाद में मदरसे में परिवर्तित कर दिया गया था। इस मकबरे का निर्माण मालवा सल्तनत के महमूद खिलजी के द्वारा 1450 में किया गया था। आपको यहां पर आकर अच्छा लगेगा। 


सिंहपुर महल चंदेरी - Singhpur Mahal Chanderi

सिंहपुर महल चंदेरी में स्थित एक प्रमुख जगह है। यह महल पिछोर रोड पर स्थित है। आप यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं। महल के सामने ही सुंदर तालाब बना हुआ है। आप उसे भी देख सकते हैं। यह महल चंदेरी शहर से करीब 4 किलोमीटर की दूरी पर एक ऊंचे पहाड़ पर स्थित है। यह महल तीन मंजिला है। इस महल का निर्माण देवी सिंह बुंदेला ने 1656 में किया था। इस महल का उपयोग उस समय रेस्ट हाउस के रूप में किया जाता था। इस महल के चारों तरफ जंगल है। आपको यहां पर आकर बहुत शांति महसूस होगी। 


बादल महल दरवाजा चंदेरी - Badal Mahal Darwaza Chanderi

बादल महल दरवाजा चंदेरी शहर में घूमने का एक प्रमुख आकर्षण है। यहां पर आपको एक प्रवेश द्वार देखने के लिए मिलता है, जो बहुत ही खूबसूरती से बनाया गया है। यहां पर बहुत बड़ा पार्क है, जहां पर आप अपना समय बिता सकते हैं। यह जो प्रवेश द्वार है, यह किसी किले का गेट नहीं है या किसी महल का गेट नहीं है। यह सिर्फ गेट की संरचना बनाई गई है। यह प्रवेश द्वार बहुत खूबसूरती से बनाया गया है। प्रवेश द्वार  के दोनों तरफ आपको मीनारें देखने के लिए मिलती हैं। प्रवेश द्वार के ऊपरी भाग में खूबसूरत जाली की आकृति है।  इस प्रवेश द्वार का निर्माण मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी ने 15 वी शताब्दी में करवाया था। यह एक महत्वपूर्ण जीत को चिन्हित करने के लिए बनाया गया था। बादल महल दरवाजे की ऊंचाई 100 फीट की है। आप यहां पर आकर अपना अच्छा समय बिता सकते हैं। 


जामा मस्जिद चंदेरी  - Jama Masjid Chanderi

जामा मस्जिद चंदेरी में स्थित सबसे पुरानी मस्जिद है। यह मस्जिद बादल महल के पास ही में है। जामा मस्जिद चंदेरी शहर की सबसे पुरानी और बड़ी मस्जिद है। इस मस्जिद का निर्माण गयासुद्दीन तुगलक ने करवाया था। मस्जिद में आपको बड़े-बड़े हॉल देखने के लिए मिलते हैं और उस पर गुंबद देखने के लिए मिलते हैं। यह मस्जिद बहुत ही आकर्षक लगती है। 


राजा रानी पैलेस चंदेरी - Raja Rani Palace Chanderi

राजा रानी महल चंदेरी में एक देखने लायक जगह है। यहां पर आपको महल देखने के लिए मिलता है, जिसमें राजा रानी रहते थे। यह महल 15वीं सदी में बनाया गया है। इस महल को बुंदेला राजा दुर्जन सिंह ने 1587 से 1733 ईसवी के बीच बनाया है। इस महल का उपयोग हमाम खाने के रूप में किया जाता था। 


चौबीसी दिगंबर जैन मंदिर चंदेरी - Chaubisi Digambar Jain Mandir Chanderi

चैबीसी दिगंबर जैन मंदिर चंदेरी में घूमने की एक प्रमुख जगह है। यह जैन धर्म का एक धार्मिक स्थल है। यहां पर आपको प्राचीन मूर्तियां देखने के लिए मिलती हैं। चैबीसी जैन मंदिर को बुंदेलखंड का गौरव कहा जाता है। यह मंदिर दो भागों में विभक्त है। प्रथम भाग बड़ा मंदिर है, जो 13वीं शताब्दी में निर्मित किया गया है। इसमें बाहुबली भगवान की कायोत्सर्ग प्रतिमा निर्मित है। द्वितीय भाग में  चौबीसी जैन मंदिर है, जिसमें दिगंबर जैन के 24 तीर्थंकर की प्रतिमा पृथक पृथक 24 शिखर युक्त, पद्मासन, ध्यानासन  मुद्रा में विराजमान है। इस मंदिर की प्रसिद्धि का कारण यह है, कि इस मंदिर में जो मूर्तियां पाई गई हैं। उस तरह की मूर्तियां आपको और कहीं देखने के लिए नहीं मिलेगी। इस मंदिर का निर्माण सन 1893 में कराया गया था। 


पुरानी कचहरी चंदेरी - Purani kachahari chanderi

पुरानी अदालत चंदेरी में घूमने की एक प्रमुख जगह है। यहां पर आपको एक महल देखने के लिए मिलता है। यह महल दो मंजिला है। इस महल का निर्माण बुंदेला राजाओं के द्वारा किया गया है। इस महल को पुरानी कचहरी के नाम से जाना जाता है। लेकिन यह बुंदेला शासकों का महल है। इस महल का निर्माण 17 और 18 वीं शताब्दी में बुंदेला राजा द्वारा किया गया है। पूर्व काल में न्यायालय संचालित रहने के कारण इसे पुरानी कचहरी कहा जाता था। इस इमारत के सामने बोर्ड पर लिखा है कि यह विशाल इमारत न्याय का घर है 


चकला बावड़ी चंदेरी - Chakla bawdi chanderi

चकला बावड़ी चंदेरी में घूमने की एक प्रमुख जगह है। इस बावड़ी का निर्माण 15वीं सदी में मांडू के सुल्तान द्वारा कराया गया था।  उस बावड़ी का उपयोग महिलाओं के स्नान हेतु किया जाता था। बाबरी में दोनों और सीढ़ियां बनी हुई है। इसका निर्माण सन 1684 ईसवी में हुआ था। आप यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं।


मालन खो झरना चंदेरी - Malankho jharna chanderi

मालन खो झरना चंदेरी से करीब 6  किलोमीटर की दूरी पर घने जंगलों में स्थित है। यह खूबसूरत झरना है। यह झरना चंदेरी में स्थित एक प्राकृतिक स्थल है। इस झरने के चारों तरफ घना जंगल स्थित है। आप यहां पर बरसात के समय पिकनिक मनाने के लिए आ सकते हैं। यहां पर सिद्धेश्वर हनुमान जी का मंदिर है। यहां करीब 50 मीटर की ऊंचाई से झरना नीचे गिरता है, जिसमें लोग नहाने का मजा ले सकते हैं। चारों तरफ हरियाली के बीच में यह झरना बहुत खूबसूरत लगता है। यहां पर एक गुफा भी स्थित है। यहां पर शिवलिंग स्थित है, जिसका जल अभिषेक पहाड़ों से गिरते हुए पानी के द्वारा होता है और यह पानी साल भर और 24 घंटे गिरता है। यह एक प्राकृतिक स्थल के साथ-साथ धार्मिक स्थल भी है। आप यहां घूमने के लिए आ सकते हैं। 


झांसी के दर्शनीय स्थल

ग्वालियर पर्यटन स्थल

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जबलपुर पर्यटन स्थल




ओरछा पर्यटन स्थल - Orchha tourist places | Best places to visit in orchha

ओरछा दर्शनीय स्थल - Orchha sightseeing | Orchha attractions | Places to visit in orchha | ओरछा के आकर्षण स्थल


ओरछा में घूमने की जगहें


ओरछा किला  - Orchha kila

ओरछा किला ओरछा शहर की एक मुख्य आकर्षण स्थल है। इस किले में प्रवेश का शुल्क लिया जाता है। यह किला बहुत बड़ा है। किले के अंदर बहुत सारी जगह हैं, जिन्हें आप देख सकते हैं। किले से आपको बेतवा नदी का बहुत ही खूबसूरत नजारा देखने के लिए मिल जाता है। यह किला बहुत बड़ा है। आप यहां पर गाइड भी कर सकते हैं। गाइड का अलग चार्ज रहता है। यह किला 16वीं शताब्दी में बना था। 


राजा महल ओरछा - Raja Mahal Orchha

राजा महल ओरछा में ओरछा किला में स्थित पहला महल है। यह महल वर्गा आकार में बना हुआ है। महल के बीच में एक छोटा सा कुंड बना हुआ है, जो बारिश में पानी से भर जाता है। चारों तरफ कमरे बने हुए हैं, जो राजा, रानी और उनके पुत्र के थे। इस महल का निर्माण 1931 से 1929 के बीच हुआ है। यह महल भारती चंद के द्वारा बनाया गया है। यहां पर आपको दीवाने ए आम और दीवाने ए खास भी देखने के लिए मिल जाता है। दीवाने ए आम और दीवाने ए खास भारती चंद के भाई मधुकर शाह के द्वारा बनाया गया है। महलों की दीवारों एवं छत पर आपको खूबसूरत रंगों से सजी हुई पेंटिंग देखने के लिए मिलती है। 


जहांगीर महल ओरछा - Jahangir Mahal Orchha

जहांगीर महल ओरछा किले में स्थित एक फेमस महल है। इस महल का निर्माण वीर सिंह जूदेव जी ने किया था। जहांगीर महल का निर्माण 17वीं शताब्दी में किया गया था। इस महल का निर्माण सम्राट जहांगीर के स्वागत के लिए किया गया था। जब वह ओरछा में आए थे। यह महल भी वर्गाकार आकार में बना हुआ है और इस महल में आपको गुंबद, कमरे और बालकनी देखने के लिए मिल जाती हैं। 


राय प्रवीन महल ओरछा - Rai Praveen Mahal Orchha

राय प्रवीण महल ओरछा में ओरछा किले के अंदर स्थित एक महल है। यह महल बहुत खूबसूरत है। इस महल के अंदर आपको खूबसूरत रंगों से सजी पेंटिंग देखने के लिए मिलती हैं। यह पेंटिंग नृत्य करती हुई नृतकी की पेंटिंग आपको देखने के लिए मिलती है। राय प्रवीण महल छोटा सा महल है। यहां पर आपको बगीचा भी देखने के लिए मिल जाता है। इस महल का निर्माण 1572 ईस्वी में इंद्रजीत सिंह ने करवाया था। उन्होंने इस महल का निर्माण अपने दरबार की कवियत्री, गायक व नृतकी राय प्रवीण के लिए करवाया था। यह महल दो मंजिला है।  आपको यहां पर आकर अच्छा लगेगा। 

ओरछा किले में बहुत सारी जगह हैं जैसे पुराने महल, खंडहर, शीश महल, बकासराय कोठी आपको देखने के लिए मिल जाती है। 


चतुर्भुज मंदिर ओरछा - Chaturbhuj mandir orchha

चतुर्भुज मंदिर ओरछा में स्थित एक प्रमुख आकर्षण स्थल है। चतुर्भुज मंदिर ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण स्मारक है। यह एक धार्मिक स्थल है। यह एक हिंदू मंदिर है। यह मंदिर विष्णु भगवान जी को समर्पित है। यह मंदिर महल की तरह दिखता है। यह मंदिर बहुमंजिला है और इसकी वास्तुकला बहुत ही भव्य है। आपको इस मंदिर में आकर बहुत अच्छा लगेगा और शांति मिलेगी। मंदिर को चतुर्भुज के नाम से जाना जाता है चतुर्भुज का मतलब होता है चतुर का मतलब होता है - चार और भुज का मतलब होता है - भुजा मतलब चार भुजाओं वाला। यहां पर आप अपने दोस्तों के साथ और परिवार के साथ आकर मंदिर को देख सकते हैं। इस मंदिर का निर्माण महाराजा मधुकर शाह ने महारानी गणेश कुंवारी के आराध्य देव राजाराम की स्थापना हेतु प्रारंभ करवाया था। इस मंदिर का निर्माण राजा मधुकर शाह ने 1558-1573 के बीच के वर्षों में करवाया था। चतुर्भुज मंदिर ओरछा में ओरछा किला और राम राजा मंदिर के पास ही में स्थित है। आप यहां पर आराम से पहुंच सकते हैं। 


राम राजा मंदिर ओरछा - Ram Raja mandir orchha

श्री राम राजा मंदिर ओरछा में स्थित एक धार्मिक स्थल है। यह एक हिंदू मंदिर है। यह मंदिर राम भगवान जी को समर्पित है। यह मंदिर बहुत ही भव्य मंदिर है। मंदिर में आकर बहुत अच्छा लगता है। आपको बहुत शांति मिलेगी। त्योहारों में मंदिर में बहुत ज्यादा भीड़ रहती है। इस मंदिर का निर्माण 17 वीं शताब्दी में राजा मधुकर शाह ने करवाया था। यह पूरी दुनिया में एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां पर राम भगवान जी को भगवान के रूप में नहीं, राजा के रूप में पूजा जाता है और भगवान राम यहां पर राजा के रूप में शासन भी करते हैं। यहां पर भगवान राम को सलामी देने के लिए यहां के पुलिसकर्मी और यहां के कलेक्टर आते हैं। मंदिर में आ कर बहुत अच्छा लगता है। बहुत शांति मिलती है। आम दिनों में भी यहां पर लोग भगवान जी के दर्शन करने के लिए आते हैं। यहां पर दिन में 4 से 5 बार  आरती होती है। आप अपने दोस्तों और परिवार के साथ यहां पर यात्रा कर सकते हैं। 


लक्ष्मी नारायण मंदिर ओरछा - Lakshmi narayan mandir orchha

लक्ष्मी नारायण मंदिर ओरछा में स्थित एक धार्मिक स्थल है। यह एक हिंदू मंदिर है और धन की देवी लक्ष्मी जी को समर्पित है। आप इस मंदिर में घूमने के लिए आ सकते हैं। यह मंदिर भी महल की तरह दिखता है और मंदिर के अंदर आपको खूबसूरत पेंटिंग देखने के लिए मिल जाती है। इस मंदिर का निर्माण 1622 में वीर सिंह देव द्वारा किया गया था। आप आकर इस मंदिर की भव्यता को देख सकते हैं। इसमें गुंबद बने हुए हैं। सुंदर खिड़कियां बनी हुई है। यह मंदिर 2 मंजिला है। 


शाही छतरी ओरछा  - shahi chhatris orchha

शाही छतरी ओरछा में स्थित एक सबसे खूबसूरत पर्यटन स्थल है। शाही छतरी ओरछा में बेतवा नदी के तट के किनारे स्थित है। यहां पर आपको खूबसूरत छतरियां देखने मिलती हैं। गार्डन देखने के लिए मिलता है और ओरछा नदी का खूबसूरत व्यू देखने के लिए मिलता है। यहां पर 14 छतरियां हैं। यह छतरियां बेतवा नदी के कंचना घाट के पास स्थित है। यहां पर खूबसूरत गार्डन बना हुआ है, जहां पर आप बैठ सकते हैं और खूबसूरत नजारे को इंजॉय कर सकते हैं। यह छतरिया बुंदेला शासकों द्वारा निर्मित की गई थी। यहां पर आप अपने परिवार और दोस्तों के साथ आ सकते हैं। इनका निर्माण 17वीं शताब्दी में हुआ है। बुंदेला राजाओं के मृत पूर्वजों को सम्मान देने के लिए इन छतरी का निर्माण किया गया है। इनकी वास्तुकला बहुत ही अद्भुत है। यह फोटोग्राफी के लिए बहुत अच्छी जगह है। 


ओरछा अभयारण्य ओरछा - Orchha abhayaranya orchha

ओरछा अभयारण्य ओरछा शहर में घूमने की एक अच्छी जगह है। यहां पर आपको अलग-अलग तरह की वनस्पतियां एवं वन्य जीव के दर्शन होते हैं। बेतवा नदी ओरछा अभयारण्य के दोनों तरफ बहती है। आपको यहां पर बहुत सारे दर्शनीय स्थल भी देखने के लिए मिलते हैं। ओरछा अभयारण्य  की स्थापना 1994 में की गई थी। यह लगभग 46 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। आपको यहां पर आकर बहुत सारे जंगली जानवर देखने के लिए मिल जाते हैं - जैसे हिरण, नीलगाय, बंदर, जंगली सूअर, भालू और भी जंगली जानवर आपको देखने के लिए मिलते हैं। यहां पर पक्षियों की बहुत सारी प्रजातियां आपको देखने के लिए मिलती है। आप यहां पर रिवर राफ्टिंग, बोटिंग, कैंपिंग और जंगल ट्रैकिंग का मजा ले सकते हैं। 


पंचमुखी शंकर मंदिर ओरछा - Panchmukhi shankar mandir orchha

पंचमुखी शंकर मंदिर ओरछा में ओरछा किले के पास में स्थित है। यह मंदिर शिव भगवान जी को समर्पित है। यहां पर भगवान शिव  की पंचमुखी प्रतिमा विराजमान है। यह मंदिर भी प्राचीन है। आपको यहां पर आकर अच्छा लगेगा। 


कोठी घाट ओरछा (Kothi ghat orchha )

सावन भादों स्तंभों ओरछा (sawan bhado stambh orchha)

हरदौल वाटिका ओरछा (hardaul vaatika orchha)

पालकी महल ओरछा (palaki mahal  orchha)

वनवासी मंदिर ओरछा (vanavasi mandir orchha)

श्री बेतेश्वर महादेव मंदिर ओरछा (shree beteshvar mahadev mandir orchha)


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