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Katai Ghat - Katai Ghat Katni | Katai Ghat mandir | Radha Krishna mandir, Katai Ghat, Katni

कटाये घाट - राधा कृष्ण मंदिर कटनी | कटाये घाट मंदिर | Katni mandir | Katni tourism


Katai Ghat  - Katai Ghat Katni | Radha Krishna mandir,  Katai Ghat, Katni


कटनी शहर में कटाये घाट नाम की जगह बहुत प्रसिद्ध है। इस जगह में कटनी नदी बहती है। यहां पर आपको मंदिर भी देखने के लिए मिलता है। यह मंदिर राधा और कृष्ण जी को समर्पित है। कटाये घाट में स्थित राधे कृष्ण जी का मंदिर बहुत पुराना है और यह मंदिर बहुत सुंदर भी है। आपको यहां आकर राधा कृष्ण जी की बहुत ही भव्य प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। यहां पर और भी बहुत सारी प्रतिमा विराजमान है। यहां पर आपको पंचमुखी हनुमान जी की प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। दत्तात्रेय की प्रतिमा देखने के लिए मिलती है और दुर्गा जी की प्रतिमा भी आपको यहां पर देखने के लिए मिलती है। यह जगह प्राकृतिक खूबसूरती से भरी हुई है। मंदिर के बाजू में ही कटनी नदी बहती है, जिसका दृश्य बहुत ही खूबसूरत रहता है। बरसात के समय में इस नदी में बाढ़ आती है, तो आप नदी के आर-पार नहीं जा सकते हैं। मगर गर्मी के समय जब नदी में पानी कम  हो  जाता है, तो आप नदी के आर-पार जा सकते हैं। नदी के उस पार भी आपको मंदिर देखने के लिए मिलता है, जो खूबसूरत लगता है। 


नदी के आर-पार जाने के लिए एक छोटी सी पुलिया बनी हुई है। इस पुलिया के माध्यम से आप नदी के उस पार जा सकते हैं। नदी के किनारे खूबसूरत घाट बना हुआ है। इस घाट को ही शायद कटाये घाट के नाम से जाना जाता है। यहां पर आपको पंप हाउस भी देखने के लिए मिलता है, जिससे कटनी शहर में पीने के लिए पानी भेजा जाता है। यह जगह बहुत खूबसूरत है और बरसात के समय अगर आप यहां पर जाते है, तो यहां पर चारों तरफ आपको हरियाली देखने मिलेगी और नदी में बहुत सारा पानी रहता है, जो बहुत खूबसूरत लगता है। यहां पर बरसात के समय हम लोग  गए थे। आप यहां पर अपनी फैमिली वालों के साथ और दोस्तों के साथ जा सकते हैं। आपको मंदिर में पंडित जी भी मिलेंगे, जो यहीं पर रहते हैं और मंदिर की पूजा करते हैं। राधे कृष्ण जी के मंदिर के थोड़ा आगे आपको राम जी का मंदिर भी देखने के लिए मिलता है। जब हम लोग इस जगह पर घूमने गए थे। तब राम जी का मंदिर कंप्लीट नहीं हुआ था। शायद अब कंप्लीट हो गया। राम मंदिर के सामने ही आपको गणेश जी की बहुत ही भव्य प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। यहां पर आपको चारों तरफ हरियाली देखने के लिए मिलती है और यहां का माहौल बहुत अच्छा लगता है। 


कटाई घाट में स्थित राधे कृष्ण जी का मंदिर कटनी शहर से ज्यादा दूर नहीं है। यह कटनी शहर से करीब 3 या 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित होगा। आप यहां पर अपनी गाड़ी से जा सकते हैं। यह एरिया कटनी शहर के बाहरी क्षेत्र में स्थित है। यहां पर ज्यादा भीड़ नहीं रहती है। कटाये घाट जाने वाले रास्ते में आपको सुरमया पार्क देखने के लिए मिलता है। सुरमया पार्क कटनी शहर का एक प्रसिद्ध पार्क है और यह पार्क खूबसूरत है। आपको यहां पर बोटिंग करने मिल जाती है और यहां पर टॉय ट्रेन है, जिससे आप पूरे पार्क की यात्रा  भी कर सकते हैं। यह पार्क सुबह 11 बजे खुलता है। आप इस पार्क के मजे ले सकते हैं। इस पार्क के थोड़ा आगे ही कटाई घाट स्थित है। यहां पर रास्ते पर एक और गार्डन स्थित है। इस गार्डन में आपको बहुत सारे पेड़ पौधे देखने के लिए मिलते हैं। यहां पर आप मेडिटेशन कर सकते हैं। सुबह के समय यहां पर म्यूजिक बजता रहता है। आप यहां पर घूम सकते हैं और यह जगह बहुत अच्छी है।


माँ शारदा मंदिर मैहर

उज्जैन के मंदिर

पचमढ़ी के मंदिर

झोतेश्वर मंदिर गोटेगांव


माँ शारदा मंदिर मैहर - Maa sharda temple maihar | Maihar sharda mata mandir

शारदा मंदिर मैहर - Sharda mandir maihar |  मैहर 

माँ शारदा मंदिर मैहर - Maa sharda temple maihar | Maihar sharda mata mandir

मैहर शारदा माता मंदिर

मैहर का शारदा माता का मंदिर पूरे मध्यप्रदेश में प्रसिद्ध है। यह 1 शक्तिपीठ है और यहां पर हजारों की संख्या में भक्त शारदा माता के दर्शन करने के लिए आते हैं। शारदा माता का मंदिर सतना जिले के मैहर में स्थित है। मैहर में शारदा माता का मंदिर त्रिकूट पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। इस पहाड़ी तक जाने के लिए सीढ़ियां बनाई गई है। आप चाहे तो कार में भी जा सकते हैं और यहां पर आप रोपवे की मदद से भी जा सकते हैं। 

उदल की कहानी - Udal ki kahani


मैहर का शारदा माता का मंदिर एक चमत्कारिक मंदिर है। कहा जाता है कि यहां पर हर दिन आल्हा और उदल आकर पहली पूजा करते हैं। आल्हा और उदल मां शारदा के परम भक्त थे और मां शारदा ने उन्हें अमर होने का वरदान दिया था। इसलिए सबसे पहले पूजा आकर आल्हा और उदल के द्वारा की जाती है। पंडित जी जब सुबह मंदिर के द्वार खोलते है, तो उन्हें फूल एवं जल चढ़ा हुआ मिलता है। यह चमत्कार शारदा माता के मंदिर में रोज होता है।

मैहर मंदिर कैसे पहुँचें - how to reach maihar temple


आप मैहर के शारदा मंदिर घूमने के लिए आना चाहते हैं, तो यहां आना बहुत ही आसान है। मैहर में रेलवे स्टेशन मौजूद है। रेलवे स्टेशन से मैहर का शारदा मंदिर करीब 5 या 6 किलोमीटर दूर होगा। रेलवे स्टेशन से आपको ऑटो मिल जाता है, जिसमें आपका किराया  ₹20 लगता है और आप मंदिर तक पहुंच जाते हैं। अगर आप सड़क से आते हैं, तो नेशनल हाईवे 30 मैहर से होते हुए गुजरता है। तो आप सड़क माध्यम से भी मैहर पहुंच सकते हैं। 

Sharda mata mandir maihar
मैहर शारदा माता का मंदिर

शारदा माता के मंदिर में पहुंचकर आपको बहुत सारी प्रसाद की दुकान देखने के लिए मिलती है। आपको बहुत सारे लोग प्रसाद खरीदने के लिए बोलते हैं। आप यहां पर आप अपनी इच्छा अनुसार प्रसाद ले सकते है।  कुछ दुकानदार यहां पर 300 - 400 का प्रसाद बना देते हैं और और भी एक्स्ट्रा प्रसाद में जोड़ देते हैं, तो आप ऐसी दुकानों में सावधान रहे। जहां आपकी इच्छा अनुसार प्रसाद दे रहे हैं। आप  वहां से प्रसाद ले और दुकान में ही अपने जूते चप्पल उतार सकते हैं। उसके बाद आप आगे बढ़ सकते हैं। आप जैसे जैसे आगे बढ़ेंगे। आपको बहुत सारी दुकानें देखने के लिए मिलती है। यहां पर आपको मैहर माता की मूर्ति, मैहर माता के पोस्टर,  खूबसूरत कड़े, और भी बहुत सारी चीजें देखने के लिए मिलती है। आप चाहे तो इनकी भी शॉपिंग कर सकते हैं। धीरे धीरे चलते हुए आप शारदा माता मंदिर के गेट तक पहुंच जाते हैं। यहां पर आप जो नारियल लिए रहते हैं। वह जमा करने रहते हैं और आपको टोकन दिया जाता है। फिर आप आगे बढ़ते हैं, तो सीढ़ियां स्टार्ट होती है। आपको सीढ़ियां चढ़ना पड़ता है। अगर आप सीढ़ियां नहीं चढ़ना चाहते हैं, तो यहां पर रोपवे का भी ऑप्शन उपलब्ध है। आप चाहे तो रोपवे भी ले सकते हैं। इसमें आप का चार्ज लिया जाता है। हम लोग सीढ़ियां चढ़कर गए थे। यहां पर करीब 1000 से भी अधिक सीढ़ियां हैं। आप चाहे तो यहां पर कार से भी आ सकते हैं। कार से आने के लिए यहाँ पर रोड है। वैसे सीढ़ियां चढ़ने में बहुत ज्यादा रोमांचक लगता है। सीढ़ियों में जगह जगह पर आपके रुकने के लिए और बैठने के लिए चेयर बनाई गई है और यहां पर आपको पीने के पानी की व्यवस्था भी की गई है। आपको सीढ़ियों चढ़ने में करीब आधा घंटा लग सकता है। आप यहां पर मुख्य गेट पर पहुंचते है, तो यहां पर बहुत भीड़ रहती है। लोग लाइन लगाकर मंदिर के अंदर जाते हैं। मंदिर में सामने आपको दो शेर की प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। यह प्रतिमा मुख्य मंदिर के प्रवेश द्वार के आजू.बाजू स्थित है। कहा जाता है कि यह प्रतिमा बहुत प्राचीन है। यहां पर आपको मंदिर के सामने एक पेड़ देखने के लिए मिलता है। उसके नीचे  शिवलिंग विराजमान है। आप लाइन लगाते हुए अंदर जाते हैं।  आपको यहां पर मां शारदा जी के दर्शन करने मिलते हैं। यहां पर आपके पास जो प्रसाद बचा हुआ है। वहां आप पंडित जी को देते हैं और पंडित जी से प्रसाद लेकर आप आगे बढ़ते हैं। यहां पर मंदिर के पीछे की तरफ आते हैं, तो आपको पीछे की तरफ एक बड़ा सा आंगन देखने के लिए मिलता है। यहां पर आप  कुछ समय के लिए शांति से बैठ सकते हैं। यहां पर आप फोटो भी खिंचा सकते हैं। यहां पर और भी छोटे-छोटे मंदिर हैं, जहां पर आप प्रसाद वगैरह चढ़ा सकते हैं। यहां पर आपको फोटोग्राफर भी मिलता है, जो आपकी फोटो क्लिक करता है और तुरंत ही आपको फोटो निकाल कर दे देता है। मंदिर के पीछे के आंगन में चारों तरफ ग्रिल लगी हुई है और आप ग्रिल से चारों तरफ का दृश्य देख सकते हैं, जो बहुत ही मनोरम रहता है। बरसात के समय अगर आप यहां पर आते हैं तो चारों तरफ हरियाली रहती है और बहुत ही लुभावना लगता है। अगर आप बरसात में आएंगे तो आपको ऐसा लगेगा कि जैसे आप बादलों के बीच में खड़े हैं। यहां पर सभी तरह की व्यवस्था उपलब्ध है। यहां पर बाथरूम वगैरह भी उपलब्ध है। अगर आप अपने साथ खाना वगैरह लाते हैं, तो यहां पर बैठ कर खा सकते हैं। मगर गंदगी यहां पर ना करें। यहां पर डस्टबिन दिए हुए हैं, जो भी कचरा होता है। आप डस्टबिन में डालें। 

मंदिर के पीछे तरफ नीचे जाने के लिए सीढ़ियां दी गई है। आप मंदिर में घूम कर नीचे जा सकते हैं। अगर आप अपने साथ खाना नहीं लाए हैं, तो यहां पर मंदिर ट्रस्ट के द्वारा खाने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, जिसमें आप मंदिर के नीचे आते हैं, तो यहां पर 10 या ₹20 में बहुत अच्छा खाने की व्यवस्था है। अन्नपूर्णा ट्रस्ट के नाम से यह जगह है। आप यहां पर आकर खाना खा सकते हैं। आप मैहर के शारदा माता के मंदिर में अपने परिवार और दोस्तों के साथ जा सकते हैं और मां शारदा जी के दर्शन कर सकते हैं। यह जगह बहुत अच्छी है और यहां कर बहुत अच्छा लगता है। 

मैहर पर्यटन स्थल - Maihar tourist place


मैहर में और भी जगह है। जहां आप घूम सकते हैं। यहां पर बड़ा अखाड़ा, आल्हा ऊदल का अखाड़ा, आल्हा ऊदल तालाब, नीलकंठेश्वर धाम या राधा कृष्ण मंदिर, गोला मठ मंदिर, पन्नी जलप्रपात में आप घूम सकते हैं। 



उज्जैन के मंदिर - Ujjain famous temple | ujjain mandir list

उज्जैन दर्शनीय स्थल - Ujjain ke mandir | Ujjain temple list | Ujjain ka mandir


उज्जैन मध्य प्रदेश में स्थित एक खूबसूरत शहर है। उज्जैन को प्राचीन काल में उज्जैनि या अवंतीका के नाम से जाना जाता था। उज्जैन में प्राचीन काल में राजा विक्रमादित्य का शासन था। उज्जैन शहर को मंदिरों के शहर के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा उज्जैन में करीब 2000 से भी अधिक मंदिर स्थित है। आज के लेख में हम उज्जैन शहर के  मुख्य मंदिरों के बारे में जानकारी देने वाले हैं। 


महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग - Mahakal mandir ujjain

उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर पूरे भारत देश में प्रसिद्ध है। उज्जैन मध्यप्रदेश का एक  प्राचीन नगरी माना जाता है। महाकालेश्वर मंदिर एक धर्मिक स्थल है। महाकालेश्वर हिंदू लोगों के लिए एक पवित्र स्थल है। महाकालेश्वर में स्थित शिवलिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और महाकालेश्वर में स्थित शिवलिंग स्वयंभू है, अर्थात यह धरती से स्वयं उत्पन्न हुआ है। इसकी स्थापना किसी ने भी नहीं की है। महाकालेश्वर मंदिर शिप्रा नदी के पास स्थित है। यहां मंदिर बहुत ही भव्य है। यह मंदिर बहुत बडे क्षेत्र में फैला हुआ है। मंदिर में सभी प्रकार की सुविधा मौजूद है। महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन शहर की मध्य में स्थित है। मंदिर में पहुॅचने के लिए आपको आटो और टैक्सी की सुविधा मिल जाती है। मंदिर में ठहरने के लिए और भोजन की सुविधा भी मंदिर समिति द्वारा मौजूद है, इसके लिए आपको आनलाइन बुकिंग कराना पडता है। आप मंदिर के अंदर अपना मोबाइल फोन नहीं लेकर जा सकते है, आपको अपना मोबाइल फोन मंदिर में स्थित लाॅकर में रखना पडता है। मंदिर के बाहर एक बडा स्क्रीन लगा हुआ है, जिसमें आप महाकालेश्वर शिवलिंग के लाइव दर्शन कर सकते है। महाकालेश्वर मंदिर तीन मंजिला है। मंदिर परिसर में आपको और भी मंदिर देखने मिल जाते है। महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग दर्शन करने के लिए आते है। सावन सोमवार और महाशिवरात्रि को इस मंदिर में बहुत ज्यादा भीड रहती है। 

नागचन्द्रेश्वर मंदिर उज्जैन - Nagchandreshwar temple ujjain


महाकालेश्वर मंदिर की सबसे उपर मंजिल में नाग देवता का मंदिर स्थित है। यहां मंदिर साल में एक बार नागपंचमी के दिन ही खोला जाता है। इस मंदिर में भगवान शिव की बहुत आकर्षक मूर्ति विद्यामान है। इस मंदिर को नागचन्द्रेश्वर मंदिर कहते है। 

भस्म आरती महाकालेश्वर - Bhasmarti ujjain

महाकालेश्वर मंदिर में एक और आकर्षण मौजूद है। यहां पर सुबह के समय भस्म आरती होती है, जिसमें बहुत बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहते हैं। भस्म आरती में भगवान शिव शंकर के शिवलिंग को भस्म से सजाया जाता है और आरती की जाती है और यह भस्म श्मशान भूमि से लाई जाती है।

भारत माता मंदिर उज्जैन - Bharat mata mandir ujjain

भारत माता मंदिर उज्जैन शहर में स्थित एक दर्शनीय जगह है। यह मंदिर है, मगर यहां पर कोई भी देवी देवता की मूर्ति नहीं है। यहां पर भारत माता की मूर्ति स्थापित है, जो बहुत ही आकर्षक है। यहां मंदिर बहुत ही भव्य है। मंदिर के बाहर आपको भारत का एक 3 डी मैप, सभी ज्योतिर्लिंगों और महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल के साथ देखने मिलता हैं। यहां मंदिर महाकालेश्वर मंदिर के बहुत करीब में स्थित है। मंदिर में बगीचा बना हुआ है, जहां पर आप बैठकर अपना समय बिता सकते है। मंदिर के बाहर केंद्र में सुंदर फव्वारा बना हुआ है।

विक्रमादित्य स्मारक उज्जैन - samrat vikramaditya ujjain

विक्रमादित्य स्मारक उज्जैन शहर के मध्य में स्थित है। आपको यहां पर राजा विक्रमादित्य की पीतल की विशाल मूर्ति देखने के लिए मिलती है। यहां राजा विक्रमादित्य की 30 फीट उची प्रतिमा स्थित है। यह प्रतिमा रूद्रा तालाब के बीच में एक टीले पर बने हुई है। यह प्रतिमा उज्जैन नगर निगम और सिंहस्थ समिति द्वारा स्थापित किया गया था। उज्जैन शहर को प्राचीन समय में उज्जैनी नाम से जाना जाता था। राजा विक्रमादित्य उज्जयैनी नगरी में 2200 साल पहले राज्य किया था।  यहां पर आपको  बहुत सारी मूर्तियाँ देखने मिलती हैं। 

बड़ा गणेश मंदिर उज्जैन - Bada ganesh mandir ujjain

बड़ा गणेश मंदिर उज्जैन का एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर महाकालेश्वर मंदिर के बहुत करीब है। आप यहां पर पैदल ही घूमने के लिए आ सकते हैं। आपका जब भी उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर आने का प्लान बनता है, तो आप बड़े गणेश मंदिर भी घूम सकते हैं। बड़े गणेश मंदिर में आपको गणेश जी की एक बहुत बड़ी मूर्ति देखने के लिए मिलती है। इस कारण इस मंदिर को बड़े गणेश जी के मंदिर के जाना जाता  है। यहां पर आपको हनुमान जी की पंचमुखी प्रतिमा भी देखने के लिए मिलती है। यह दुनिया की गणेश जी की एकमात्र प्रतिमा हैए जो आपको यहीं पर देखने मिलेगी और कहीं पर नहीं।

हरसिद्धि मंदिर उज्जैन -  Harsiddhi mandir ujjain

हरसिद्धि माता का मंदिर उज्जैन शहर का एक धार्मिक स्थल है।  यह 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहाँ पर माता सती के मृत शरीर की दाहिने हाथ की कोहनी गिरी थी। हरसिद्धि माता उज्जैन के राजा विक्रमादित्य की कुलदेवी थी। हरसिद्धि माता का मंदिर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थित है। आप यहां पर पैदल भी जा सकते हैं। हरसिद्धि मंदिर रुद्र सागर झील के पास स्थित है। कहा जाता है कि भगवान शिव के कहने पर देवी पार्वती ने दो राक्षसों को मारने के लिए हरसिद्धि का रूप धारण किया था। हरसिद्धि मंदिर एक प्राचीन मंदिर है और मंदिर परिसर में आपको दो बड़े दीपक के स्तंभ देखने के लिए मिलते हैं, जिसमें तेल डालकर दीया जलाया जाता है। यह स्तंभ बहुत ऊंचे हैं और बहुत ही आकर्षक लगते हैं। दोनों दीपक स्तंभों में लगभग 1 हजार 11 दीपक हैं। लोगों का कहना है कि इन दीप स्तंभों की स्थापना उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य ने की थी। राजा विक्रमादित्य हर बारह साल में एक बार माता हरसिद्धि को अपना सिर माँ के चरणों में अर्पित किया करते थे। लेकिन माँ की कृपा से उनका सिर वापस आ जाता था। जब उन्होंने बारहवें समय के लिए अपना सिर अर्पित किया, तो वे वापस नहीं आए और उनका जीवन समाप्त हो गया।

गोपाल मंदिर उज्जैन - Gopal mandir ujjain

श्री द्वारकाधीश गोपाल मंदिर उज्जैन का एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर उज्जैन के मुख्य बाजार में स्थित है। यह मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है। आप जब भी उज्जैन आते हैं, तो इस मंदिर में आकर श्री कृष्ण भगवान जी के दर्शन कर सकते हैं। यह मंदिर खूबसूरत और प्राचीन है। यह मंदिर मराठा वास्तुकला में  बना है। इस मंदिर का निर्माण 19वीं शताब्दी में महाराजा माधव राज सिंधिया और बाईचा बाई सिंदे द्वारा बनाया गया था। मंदिर में जन्माष्टमी और हरिहर मिलन के समय बहुत ज्यादा भीड़ लगती हैं। यहां पर बहुत ज्यादा संख्या में लोग एकत्र होते हैं।  


काल भैरव मंदिर उज्जैन - Kaal bhairav mandir ujjain

श्री काल भैरव मंदिर उज्जैन शहर में स्थित एक अनोखा मंदिर है। इस मंदिर में आप भक्तों के द्वारा भगवान श्री काल भैरव को प्रसाद के रूप में शराब का प्रसाद चढ़ाया जाता है, जो एक अनोखा रिवाज है। यहां पर जो भी भक्त आते हैं। वह सभी भगवान काल भैरव को शराब का प्रसाद चढ़ाते हैं। यहां पर काल भैरव भगवान जी कुछ ही समय में शराब की बोतल खाली कर देते है। यह मंदिर उज्जैन शहर में शिप्रा नदी के तट पर स्थित है।  इस मंदिर में आसानी से पहुंचा जा सकता है। श्री काल भैरव को उज्जैन के संरक्षक या कोतवाल के रूप में जाना जाता है। यहां पर रोजाना सैकड़ों भक्त आते हैं। इस मंदिर के आसपास बहुत सारे लोगो आपको शराब बेचते हुए देखने के लिए मिल जाते हैं। पुराने समय में इस मंदिर का उपयोग केवल तांत्रिक साधनाओं के लिए किया जाता था। लेकिन अब इस मंदिर में भगवान काल भैरव के दर्शन करने के लिए सभी लोग आते हैं।  

चामुंडा माता मंदिर उज्जैन - Chamunda mata ujjain

चामुंडा माता का मंदिर उज्जैन शहर का धार्मिक स्थल है। यह मंदिर उज्जैन शहर के मुख्य मार्केट में स्थित है। आप इस मंदिर में आसानी से पहुंच सकते हैं। यह मंदिर चामुंडा माताजी को समर्पित है। मंदिर में आपको चामुंडा माता की प्रतिमा देखने के लिए मिलती है, जो बहुत ही अद्भुत लगती है। आपको इस मंदिर में आकर बहुत शांति मिलेगी। 

नगर कोट की रानी उज्जैन - Nagar kot ki rani ujjain

नगरकोट की रानी मंदिर उज्जैन में स्थित एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर उज्जैन शहर का एक प्राचीन मंदिर है। आपको मंदिर पर माता की अद्भुत प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। मंदिर के बाहर आपको एक तालाब भी देखने मिलता है। इस मंदिर में नवरात्रि के समय बहुत ज्यादा भीड़ लगती है, बहुत ज्यादा संख्या में लोग नवरात्रि के समय यहां पर आते हैं। यहां पर एक गार्डन भी स्थित है। 

भूखी माता मंदिर उज्जैन - Bhukhi mata mandir ujjain

भूखी माता का मंदिर उज्जैन शहर में स्थित एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर शिप्रा नदी के किनारे स्थित है। इस मंदिर में नवरात्रि के समय बहुत भीड़ लगती है। इस मंदिर में आकर आपको बहुत अच्छा लगता है और शिप्रा नदी का नजारा भी बहुत अद्भुत होता है। यहां पर भूखी माता और धूमा माता विराजमान है। आपको यहां आकर शांति मिलेगी।   

मंगलनाथ मंदिर उज्जैन - Mangalnath mandir ujjain

मंगलनाथ मंदिर उज्जैन शहर का एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर शिप्रा नदी के किनारे स्थित है। यह मंदिर मंगल दोष के निवारण के लिए जाना जाता है। यहां पर बहुत सारे लोग अपने मंगल दोष के निवारण के लिए आते हैं। यह मंदिर कर्क रेखा में स्थित है। यहां पर आपको शिव भगवान जी के दर्शन करने के लिए मिलते है। यह मंदिर बहुत ही प्राचीन है। इस मंदिर में आपको हनुमान जी के दर्शन करने भी मिल जाते हैं। इस मंदिर से शिप्रा नदी का बहुत ही भव्य नजारा देखने के लिए मिलता है। यहां पर आकर आपको बहुत अच्छा लगेगा। यह मंदिर उज्जैन शहर के बहुत करीब है। आप यहां पर आसानी से पहुंच सकते हैं। मत्स्य पुराण के अनुसार इस स्थान को मंगल ग्रह का जन्म स्थान माना जाता है। इस मंदिर में विशेषकर मंगलवार के दिन बहुत सारे लोग दर्शन करने के लिए आते हैं।  

मंचामन गणेश मंदिर उज्जैन - Manchaman ganesh mandir ujjain

मंचामन गणेश मंदिर उज्जैन शहर का एक धार्मिक स्थल है। यह प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है, कि इस मंदिर की स्थापना श्री राम और माता सीता ने वनवास काल के समय की थी। इस मंदिर में आकर आप गणेश जी की भव्य प्रतिमा देख सकते हैं। मंदिर के पास आपको एक बावली भी देखने के लिए मिलती है और पुराने समय के मंदिर के ढांचे भी देखने के लिए मिलते हैं। यहां आकर आपको अच्छा लगेगा।

चिंतामन गणेश मंदिर उज्जैन - chintaman ganesh ujjain


चिंतामन गणेश मंदिर उज्जैन शहर का एक धार्मिक स्थल है। इस मंदिर में गणेश जी को चिंतामन के नाम से जाना जाता है, अर्थात सारी चिंता को हरने वाले माना जाता है। यह मंदिर उज्जैन शहर के बाहर स्थित है। यह मंदिर उज्जैन शहर से करीब 10 किलोमीटर दूरी पर होगा। आप इस मंदिर तक आप अपने वाहन से आ सकते हैं। मंदिर में आपको गणेश जी की भव्य प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। इस मंदिर में लोग भगवान गणेश जी के दर्शन करने आते हैं और जो भी अपना नया काम शुरू करते हैं। उस काम के लिए गणेश जी का आशीर्वाद लेने के लिए आते हैं। चाहे विवाह का काम हो या नया सामान लेना हो। यह भगवान गणेश का ऐतिहासिक मंदिर हैं। मंदिर में सभी प्रकार की व्यवस्थाएं उपलब्ध है। मंदिर के बाहर आपको बहुत सारी प्रसाद की दुकानें देखने के लिए मिलती है, जहां से आप मंदिर के लिए प्रसाद और फूल वगैरा ले सकते हैं। मंदिर में गणेश जी की मूर्ति विद्यमान है और गणेश जी के आजू - बाजू में रिद्धि और सिद्धि माता की मूर्ति विद्यमान है।  मंदिर में एक बबली भी हैए जिसे लक्ष्मण बबली के नाम से जाना जाता है। यह प्राचीन बावड़ी है, आप इसे भी देख सकते हैं। 

चारधाम मंदिर उज्जैन - Chardham mandir ujjain

श्री चारधाम मंदिर उज्जैन शहर का एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर हरसिध्दि मंदिर के समीप है। यहां पर आपको भारत के चार धाम जगन्नाथ पुरी, रामेश्वरम, द्वारका, बद्रीनाथ की प्रतिकृति देखने के लिए मिलती है। भारत में चार धाम बहुत प्रसिद्ध है और इन धामों के दर्शन करने से लोगों को मुक्ति प्राप्त होती है। यहां पर आपको बहुत सारी मूर्तियां देखने के लिए मिलती है। यहां पर धार्मिक चित्रण मूर्तियों के द्वारा किया गया है, जो बहुत ही आकर्षण लगता है।  यहां पर कृष्ण भगवान की लीलाओं को दर्शाया गया है। विष्णु भगवान को नाग सैया में दिखाया गया है। ऋषि-मुनियों को तपस्या करते हुए दिखाया गया है। बालाजी भगवान की मूर्ति स्थापित की गई है। शंकर भगवान जी की मूर्ति स्थापित की गई है। यहां पर कृष्ण भगवान जी को गोवर्धन पर्वत उठाए हुए भी दिखाया गया है। यहां पर वैष्णो माता की गुफा भी बनाई गई है और उसके अंदर वैष्णो माता की स्थापना की गई है। आप यहां पर आकर वैष्णो माता के दर्शन कर सकते हैं। 

प्रशांति धाम उज्जैन - Prashanti Dham Ujjain

प्रशांति धाम उज्जैन शहर का एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर शिप्रा नदी के किनारे स्थित है। यह मंदिर उज्जैन इंदौर हाईवे रोड में स्थित है। आपको इस मंदिर में आकर बहुत शांति मिलेगी, क्योंकि यहां के चारों तरफ का वातावरण हरियाली से भरपूर है और पूरी तरह नेचुरल है। यह मंदिर साईं बाबा को समर्पित है। आप यहां पर आकर साईं बाबा के दर्शन कर लेते हो। यहां पर आप शिप्रा नदी का बहुत ही सुंदर नजारा देख सकते हैं। यहां पर प्रशांति घाट है,  जहां पर बैठकर आप शिप्रा नदी को देख सकते हैं। यहां पर आकर आपको लगेगा कि आप शिर्डी के साईं बाबा के मंदिर आ गए हैं। यहां पर आपके रुकने और खाने की व्यवस्था भी रहती है। 

इस्कॉन मंदिर उज्जैन - ISKCON Mandir Ujjain

इस्कॉन मंदिर उज्जैन का एक धार्मिक मंदिर है। यह मंदिर श्री कृष्ण भगवान जी को समर्पित है। यह मंदिर बहुत ही भव्य है। यह मंदिर सफेद मार्बल से बना हुआ है। इस मंदिर के सामने हरा भरा बगीचा लगा हुआ है। यहां पर आकर आपको बहुत अच्छा लगेगा। यहां पर श्री कृष्ण के भजन चलते रहते हैं, जो बहुत ही शांति देते हैं। यहां पर आपको श्री कृष्ण और राधा जी की प्रतिमाएं देखने के लिए मिलती हैं। यहां पर आपको श्री कृष्ण, बलराम, बलभद्र, सुभद्रा और नरसिंह देव जी की प्रतिमाएं देखने के लिए मिलती हैं। यह इस्कॉन मंदिर उज्जैन के नानाखेड़ा बस स्टैंड के पास स्थित है। यहां पर आप आसानी से आ सकते हैं। कृष्ण के भक्तों के लिए इस्कॉन मंदिर एक महत्वपूर्ण स्थान है। उज्जैन शहर में सुदामा, बलराम, और कृष्ण भगवान जी के साथ ऋषि संदीपनी के आश्रम में शिक्षा प्राप्त की थी। मंदिर में एक गौशाला भी है और श्रद्धालुओं के लिए आवास उपलब्ध है। यहां पर प्रसाद की भी व्यवस्था है। 

नवग्रह शनि मंदिर उज्जैन - Navgrah mandir ujjain

नवग्रह मंदिर उज्जैन में स्थित एक धार्मिक स्थल है। नवग्रह मंदिर उज्जैन शहर में त्रिवेणी संगम के पास स्थित है। यह मंदिर उज्जैन शहर से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह मंदिर उज्जैन इंदौर मार्ग पर स्थित है। मंदिर तक आसानी से पहुंच सकते हैं। इस मंदिर में नौ ग्रहों की पूजा की जाती है। इस मंदिर में प्रत्येक 9 ग्रहों के लिए अलग-अलग मंदिर हैं और प्रत्येक ग्रह पिंडी के रूप में विराजमान है। ये ग्रह हैं सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु। यहां पर शिप्रा नदी का संगम बहुत ही मनमोहक लगता है। यह मंदिर शनि भगवान जी को भी समर्पित है। यहां पर शनि भगवान जी की प्रतिमा भी आपको देखने के लिए मिलती है। यहां पर आपको हनुमान जी की प्रतिमा भी देखने के लिए मिलती है। यह मंदिर  राजा विक्रमादित्य के द्वारा बनवाया गया था। शनिवार को यहाँ बहुत भीड़ होती है, क्योंकि शनिवार को सभी लोग शनि महाराज की पूजा करने आते  हैं। 

त्रिवेणी घाट उज्जैन - Triveni ghat ujjain

त्रिवेणी घाट उज्जैन शहर का एक बहुत सुंदर घाट है। यहां पर तीन नदियों का संगम हुआ है। शिप्रा, गण्डकी  और सरस्वती नदी का संगम हुआ है। सरस्वती नदी यहां पर गुप्त है। यहां पर कुंभ का मेला आयोजित होता हैए जो हर 12 वर्ष में एक बार आयोजित होता है। 2016 यहाँ का आखिरी कुंभमेला था। अब 12 साल बाद लगेगा ।

राम घाट उज्जैन - Ram Ghat Ujjain

राम घाट उज्जैन का एक प्रसिद्ध घाट है। यह शिप्रा नदी पर  स्थित है। यह घाट महाकालेश्वर मंदिर के बहुत करीब है। आप यहां पर पैदल भी भ्रमण कर सकते हैं। शिप्रा नदी मध्य प्रदेश की एक प्रमुख नदी है। शिप्रा नदी धार जिले से निकलती हैए और मध्य प्रदेश के कई जिलों से बहते हुए यह चंबल नदी से मिल जाती है और राजस्थान में प्रवेश करती है। आप राम घाट में नहा कर अपने पाप धो सकते हैं। यहाँ पर आप बोटिंग का भी मजा ले सकते हैं। यहां पर बहुत सारे मंदिर हैं, जहां पर जाकर आप को शांति मिलेगी। 

सिद्धवट उज्जैन - Siddhavat Ujjain

सिद्धवट उज्जैन शहर का एक धार्मिक स्थल है। सिद्धवट शिप्रा नदी के किनारे स्थित है। यहां पर आपको एक कल्पवृक्ष देखने के लिए मिलता है। इस कल्पवृक्ष की बहुत महिमा है। कहा जाता है कि इस कल्पवृक्ष को स्वयं माता पार्वती ने लगाया था और शंकर जी के पुत्र कार्तिकेय ने इस कल्पवृक्ष के नीचे भोजन किया था। इस कल्पवृक्ष के नीचे  राजा विक्रमादित्य ने तपस्या की थी। बेताल को अपने वश में करने के लिए। इस कल्पवृक्ष का वही महत्व है, जो महत्व अक्षय वट का इलाहाबाद में है। इस कल्पवृक्ष के पास बहुत सारी क्रियाकलाप किए जाते हैं। यहां पर पिंडदान किया जाता है। यहां पर तर्पण किया जाता है। संतान प्रापति के लिए पूजा की जाती है। यहां का वातावरण शांत है। आप यहां पर आकर शांति से बैठ सकते हैं। यहां पर आसपास बहुत सारे खाने.पीने के छोटे.छोटे ठेले हैंए जहां पर खाने.पीने का भी लुप्त उठा सकते हैं। 

महर्षि सांदीपनी आश्रम उज्जैन - Maharishi Sandipani Ashram Ujjain

महर्षि सांदीपनी आश्रम उज्जैन शहर का एक धार्मिक स्थल है। महर्षि सांदीपनि आश्रम को अंकपात के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इस जगह पर श्री कृष्ण भगवान ने अपनी लेखनी को धोया था। इस पवित्र स्थल पर महर्षि सांदीपनि द्वारा श्री कृष्ण, बलराम और सुदामा को शिक्षा दी गई थी। यहां पर 64 प्रकार की विद्या श्री कृष्ण जी को दी गई थी। यहां पर आपको देखने के लिए बहुत सारी पेंटिंग मिल जाती है, जिनमें अलग-अलग तरह की क्रियाकलाप करते हुए श्री कृष्ण जी को दिखाया गया है। यहां पर एक कुंडली बना हुआ है, जिसे गोमती कुंड कहते हैं। यहां पर शिवलिंग विराजमान है, जिसकी स्थापना द्वापर युग में की गई थी। यहां पर ऋषि सांदीपनी की चरण पादुका भी स्थित हैं, जिसके दर्शन आप कर सकते हैं। यहां पर आकर आपको शांति मिलेगी। 

यमराज मंदिर उज्जैन - Yamraj mandir ujjain

यमराज मंदिर भारत में एकलौता मंदिर है, जो उज्जैन शहर में स्थित है। इस मंदिर में यमराज की प्रतिमा स्थित है। यमराज को मृत्यु का देवता कहा जाता है। कहा जाता है कि इस मंदिर में दीपक जलाने से आपकी अकाल मृत्यु टाली जा सकती है। यह मंदिर दुर्गादास की छतरी के पास स्थित है। आप इस मंदिर में आसानी से आ सकते हैं।

गढ़कालिका माता मंदिर उज्जैन - Gadkalika mandir ujjain

श्री गढ़कालिका का मंदिर उज्जैन शहर का एक प्रसिद्ध मंदिर है। यहाँ उज्जैन शहर का धार्मिक स्थल है। यह मंदिर काली माता को समर्पित है। यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहां पर माता सती का ऊपरी होंठ गिरा था। यह मंदिर क्षिप्रा नदी के तट पर उज्जैन के पास स्थित है। लोगो के अनुसार गढ़ कालिका देवी महाकवि कालिदास की इष्ट देवी मानी जाती है। महाकवि कालिदास पहले एक मूर्ख व्यक्ति थे। मगर गढ़ कालिका देवी जी के शरण में आने से वह महाकवि बन गए और उन्होंने अभिज्ञान शकुंतलम और मेघदूत की रचना की। इसके अलावा वहां विक्रमादित्य के नवरत्नों में से एक थे। इस मंदिर का इतिहास बहुत लंबा है। यह मंदिर 2000 वर्ष से अधिक पुराना है। यह मंदिर बहुत ही भव्य तरीके से बना हुआ है और आप यहां आकर गढ़कालिका जी के दर्शन कर सकती हैं। आपको यहां आकर सकारात्मक मिलेगी। 

गेबी हनुमान मंदिर उज्जैन - Gebi hanuman mandir ujjain

गेबी हनुमान मंदिर उज्जैन शहर का एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर उज्जैन के मुख्य बाजार में स्थित है। इस  मंदिर में आसानी से आ सकते हैं। यह मंदिर द्वारकाधीश गोपाल कृष्ण मंदिर के पास स्थित है। इस मंदिर में हनुमान जी का बाल रूप विद्यमान है। इस मंदिर में आकर्षण का केंद्र है। यहां पर होने वाली आरती है। आप आरती में शामिल होते हैं, तो आपको यहां पर सकारात्मक ऊर्जा मिलेगी। आपको इस मंदिर में आकर बहुत अच्छा लगेगा। 

84 महादेव मंदिर उज्जैन - 84 Mahadev Mandir Ujjain

उज्जैन में महादेव के 84 मंदिर हैं और यह चौरासी मंदिर उज्जैन शहर के अलग-अलग जगह में मौजूद है। सावन सोमवार में इन 84 मंदिरों की परिक्रमा की जाती है। यह सभी मंदिर प्राचीन है और इन सभी मंदिरों में दर्शन करने से अलग-अलग मन्नते पूरी होती हैं। इन मंदिरों में स्थित शिवलिंग के दर्शन करने से अलग-अलग फल प्राप्त होते हैं। इनमें से कुछ महादेव मंदिर के बारे में जानकारी दी जा रही है। 

अंगारेश्वर महादेव उज्जैन - Angareshwar Mahadev Ujjain

अंगारेश्वर महादेव मंदिर उज्जैन में स्थित एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर शिप्रा नदी के किनारे स्थित है। यह मंदिर शिव भगवान जी को समर्पित है। यह मंदिर मंगलनाथ मंदिर के बहुत करीब है। आप इस मंदिर में भी घूमने के लिए आ सकते हैं। यह मंदिर भी कर्क रेखा में स्थित है। इस मंदिर में भी मंगल दोष के निवारण के लिए पूजा की जाती है। यहां पर आपको गौशाला देखने के लिए मिलती है। आप यहां पर आकर अपना अच्छा समय बिता सकते हैं। शिप्रा नदी का बहुत ही अद्भुत नजारा यहां पर आपको देखने के लिए मिलता है। यह मंदिर बहुत ही सुंदर और प्राचीन है। 

ऋणमूक्तेश्वर महादेव मंदिर  उज्जैन - Rinmukteshwar mahadev mandir ujjain 

ऋण मुक्तेश्वर मंदिर उज्जैन शहर का एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर शिप्रा नदी के किनारे स्थित है। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इस मंदिर पर आकर प्रार्थना करने से और पीली पूजा करने से आपको ऋण से मुक्ति मिलती है, अर्थात कर्ज से मुक्ति मिलती है। आप पर किसी भी तरह का कर्ज रहता है, उससे आप मुक्ति पा सकते हैं। इस मंदिर में राजा हरिश्चंद्र ने तपस्या की थी, जिसके बाद शंकर जी ने उन्हें वरदान दिया था, कि जो भी इस मंदिर में आकर पीली पूजा करवाएगा। उसे अपने कर्ज से मुक्ति मिलेगी। आपको यहां पर एक बरगद का पेड़ देखने के लिए मिलता है। आप इस मंदिर में आकर भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर सकते हैं।

कुंडेश्वर महादेव मंदिर - Kundeshwar mahadev mandir ujjain

कुंडेश्वर महादेव मंदिर सांदीपनी आश्रम के बहुत करीब स्थित है। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है, कि श्री कृष्ण भगवान जी गोमती कुंड से जल लाकर शिव भगवान पर अर्पण किया करते थे और उनके सामने अपनी विद्या का अभ्यास किया करते थे। यहां पर आपको एक शिवलिंग देखने के लिए मिलता है और मंदिर की दीवारों पर पत्थर की प्रतिमाएं बनाई गई है। इसके अलावा मंदिर के बाहर आपको पत्थर का एक प्राचीन नंदी भगवान की प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। यह मंदिर बहुत ही खूबसूरत है। आप यहां पर आकर घूम सकते हैं। इस मंदिर को गुरुकुल विद्या स्थली के रूप में भी जाना जाता है। 

मारकंडेश्वर महादेव मंदिर उज्जैन - Markundeshwar mahadev mandir ujjain

मारकंडेश्वर मंदिर उज्जैन शहर में विष्णु तालाब के पास स्थित है। यहां पर शिव भगवान जी का पत्थर का शिवलिंग विराजमान है। यह शिवलिंग बहुत प्राचीन है और आपको यहां पर आकर सकारात्मक ऊर्जा मिलेगी।

सर्वेश्वर महादेव  मंदिर उज्जैन - sarveshwar mahadev mandir ujjain

सर्वेश्वर महादेव मंदिर उज्जैन शहर में संदीपनी आश्रम के पास स्थित है। इस मंदिर में स्थित शिवलिंग की स्थापना महर्षि संदीपनी ने की थी। यह शिवलिंग एक अनोखा शिवलिंग है। इसकी जलाधारी में शेषनाग के दर्शन होते हैं। आप यहां पर आते हैं, तो आपको पत्थर का एक शिवलिंग देखने के लिए मिलता है और मंदिर के बाहर नंदी भगवान जी की प्रतिमा देखने के लिए मिलती है।



पचमढ़ी के मंदिर - Pachmarhi temple | Pachmarhi yatra


पचमढ़ी मंदिर - Pachmarhi ka mandir 

पचमढ़ी के मंदिर -  Pachmarhi temple | Pachmarhi yatra

महादेव मंदिर चौरागढ़ पचमढ़ी - Mahadev mandir chauragarh pachmarhi | chauragarh mandir

चौरागढ़ पचमढ़ी का एक धार्मिक स्थल है। चौरागढ़ पर एक मंदिर स्थित है, जो शिव भगवान जी को समर्पित है। चौरागढ़ का महादेव मंदिर बहुत प्राचीन मंदिर है। महादेव मंदिर पचमढ़ी में एक ऊंचे पहाड़ी पर स्थित है। महादेव मंदिर में जाने के लिए आपको करीब 2 से 3 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। महादेव मंदिर में पहुंचने का जो रास्ता है, वह पूरा जंगल से घिरा हुआ है। महादेव मंदिर में आपको शंकर भगवान जी की अद्भुत प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। आप इस मंदिर से पचमढ़ी के चारों तरफ का दृश्य देख सकते हैं, जो बहुत ही मनोरम होता है। इस मंदिर में नागद्वार, महाशिवरात्रि और सावन सोमवार के समय बहुत भीड़ रहती है। यहां पर मेला लगता है और लाखों की संख्या में लोग भगवान शंकर जी के दर्शन करने के लिए आते हैं।

काल भैरव गुफा चौरागढ़ - Kaal bhairav gufa chauragarh

काल भैरव गुफा चौरागढ़ जाने वाले रास्ते में ही पड़ती है।  यहां पर आपको एक गुफा देखने के लिए मिलती है। इस गुफा तक जाने का रास्ता बहुत ही दुर्गम है। आप यहां पर शिवरात्रि और नाग पंचमी के समय जा सकते हैं, क्योंकि इस समय यहां पर बहुत भीड़ रहती है। यहां पर बहुत सारे लोग इस समय यात्रा करते हैं, तो आप भी इस समय काल भैरव गुफा घूम सकते हैं।

वैदेही गुफा चौरागढ़ - Vaidehi gufa chauragarh

वैदेही गुफा चौरागढ़ जाने वाले रास्ते में पड़ती है। यह एक छोटी सी गुफा है। कहा जाता है कि प्राचीन समय में सीता जी इस गुफा में स्नान किया करती थी। आप यहां पर रुक कर फोटोग्राफी का मजा ले सकते हैं और यहां से पचमढ़ी की खूबसूरत वादियों का दृश्य देख सकते हैं।

बड़ा महादेव पचमढ़ी  - Bada mahadev pachmarhi

बड़ा महादेव पचमढ़ी का एक धार्मिक स्थल है। बड़ा महादेव एक प्राचीन मंदिर है। यहां पर आपको एक गुफा देखने के लिए मिलती है। इस गुफा में हमेशा पानी रिसता रहता है। गुफा के अंदर शिव भगवान जी का एक शिवलिंग विराजमान है। गुफा के प्रवेश द्वार पर एक पत्थर का शिवलिंग विराजमान है।  गुफा में एक कुंड भी बना हुआ है। यहां पर आकर आपको बहुत शांति मिलती है। यहां पर आपको बहुत सारे बंदर देखने के लिए मिलते हैं।

पचमढ़ी के मंदिर -  Pachmarhi temple | Pachmarhi yatra


गुप्त महादेव पचमढ़ी  - Gupt mahadev pachmarhi

गुप्त महादेव पचमढ़ी में स्थित एक प्राचीन मंदिर है। गुप्त महादेव बड़ा महादेव मंदिर से करीब 1 किलोमीटर दूर होगा। आपको मंदिर तक पैदल चलकर जाना पड़ता है। यहां पर आपको एक सकरी गुफा देखने के लिए मिलती है, जिसके अंदर शिवलिंग विराजमान है। इस गुफा में एक बार में केवल 8 लोग ही अंदर जा सकते हैं। इस गुफा के बाहर आपको हनुमान जी की विशाल प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। यहां पर आकर आपको बहुत अच्छा लगता है।

पचमढ़ी के मंदिर -  Pachmarhi temple | Pachmarhi yatra


जटाशंकर मंदिर पचमढ़ी - Jatashankar mandir pachmarhi

जटाशंकर पचमढ़ी का एक दर्शनीय स्थान है। यह एक धार्मिक स्थल है। यहां पर शिव भगवान जी का शिवलिंग विराजमान है। यह मंदिर खाई में स्थित है। आप को मंदिर जाने के लिए नीचे उतरना पड़ता है। नीचे जाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है।  जटाशंकर की गुफा जाने के रास्ते में आपको बहुत सारे मंदिर देखने के लिए मिलते हैं, जो बहुत ही सुंदर लगते हैं। आपको यहां पर आकर बहुत अच्छा लगता है। जटाशंकर गुफा में  24 घंटे पानी रिसता रहता है। यहां पर एक कुंड बना हुआ है। कुंड के ऊपर एक पत्थर लटका हुआ है, जो देखने में बहुत ही अद्भुत लगता है। आपको यहां पर पत्थर पर बहुत सारी आकृतियां देखने के लिए मिल जाती हैं।  यह जगह बहुत ही मनोरम है और यहां पर आकर बहुत शांति मिलती है।

पचमढ़ी के मंदिर -  Pachmarhi temple | Pachmarhi yatra


नागद्वार मंदिर पचमढ़ी - Nagdwar mandir pachmarhi

नागद्वार पचमढ़ी का एक दर्शनीय स्थान है।  इस जगह में साल में सिर्फ एक ही बार जाया जा सकता है। यह जगह नाग पंचमी के समय 10 दिनों के लिए खोली जाती है। इस समय पचमढ़ी में विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें लाखों की संख्या में लोग भाग लेते हैं। नागद्वार के मंदिरों में जाने का रास्ता बहुत ही दुर्गम है। यह मंदिर जंगल के बीच में है। इन मंदिरों में पहुंचने के लिए आपको ऊंची ऊंची घाटियां, पहाड़ियां,  बहते हुए झरने पार करने पड़ते हैं। इस जगह में आकर आपको बहुत सारी शांति मिलती है। यहां पर बहुत सारे मंदिर है। इन मंदिरों के बारे में आइए जानते हैं।

पचमढ़ी के मंदिर -  Pachmarhi temple | Pachmarhi yatra


श्री नागद्वार स्वामी मंदिर या श्री पद्म शेष मंदिर - shri nagdwar swami mandir or  padamshesh mandir pachmarhi

पद्म शेष मंदिर नागद्वार का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है। इस मंदिर में आने के लिए आपको पैदल चलना पड़ता है। इस मंदिर में जाने का रास्ता जंगल से भरा हुआ है। यहां पर आपको ऊंची ऊंची घाटियां, बहते हुए झरने, पहाड़ियां देखने के लिए मिलती हैं। यह मंदिर नाग देवता को समर्पित है। यहां पर आपको भगवान शंकर जी का शिवलिंग देखने के लिए मिलता है। यहां पर एक  गुफा है। इस गुफा में जाने के लिए नाग पंचमी के समय पर बहुत लंबी लाइन लगती है। नाग पंचमी के समय पर यहां पर लोगों के ठहरने की व्यवस्था भी रहती है और उनके खाने पीने की व्यवस्था भी रहती है। यहां पर नाग पंचमी के समय जो माहौल रहता है। वह पूरा भक्तिमय रहता है और इस माहौल में आपको आकर मन की शांति मिलेगी। यहां पर आपको ऊंची ऊंची पहाड़ियां और पहाड़ियों में उभरी हुई आकृतियां देखने के लिए मिलती हैं, जो बिल्कुल नाग भगवान की तरह रहती हैं। यह जगह आश्चर्य से भरी हुई है और यहां पर आकर बहुत अच्छा लगता है।

पचमढ़ी के मंदिर -  Pachmarhi temple | Pachmarhi yatra


पश्चिम द्वार पचमढ़ी - Paschim dwar nagdwar pachmarhi

पश्चिम द्वार नागद्वार की एक धार्मिक जगह है। यहां पर आपको एक गुफा देखने के लिए मिलती हैं। इस गुफा में शिवलिंग विराजमान है। यहां पर आपको पहाड़ी से गिरता हुआ झरना देखने के लिए मिलता है, जो बहुत सुंदर लगता है, जिसमें बहुत सारे लोग आप को नहाते हुए देखने के लिए मिल जाते हैं। इस झरने का पानी गुफा के अंदर से तेजी से बहता है, जो एक अलग अनुभव रहता है। नाग पंचमी के समय बहुत से यात्री नागद्वार की यात्रा करते हैं, तो जगह-जगह पर आपको भंडारे की व्यवस्था मिलती है। यह जगह बहुत खूबसूरत है और पूरी तरह प्राकृतिक है।

निशानगढ़ पर्वत नागद्वार पचमढ़ी - Nishan gad pachmarhi

निशान गढ़ पर्वत नागद्वार में स्थित एक ऊंचा पर्वत है। इस पर्वत के ऊपर शिव भगवान जी विराजमान है। बहुत सारे लोग इस पर्वत के दर्शन करने के लिए आते हैं और इस पर्वत पर चढ़ाई करते हैं।  यहां से चारों तरफ का व्यू बहुत ही अद्भुत होता है और शिव भगवान जी के दर्शन का एक अलग ही अनुभव होता है।

स्वर्गद्वार पचमढ़ी - Swargadwar pachmarhi

स्वर्गद्वार नागद्वार में स्थित एक ऊंचा पहाड़ है। यहां पर शंकर भगवान जी की एक गुफा स्थित है।  गुफा के अंदर शिवलिंग विराजमान हैं। यहां से आपको पचमढ़ी की खूबसूरत वादियां देखने के लिए मिलती है। यहां पर पहुंचने का रास्ता बहुत कठिन है। स्वर्गद्वार ऊंचे पहाड़ पर स्थित है। यहां पर आकर बहुत अच्छा लगता है। यहां पर भी आपके रुकने की और खाने पीने की व्यवस्था रहती है। यहां पर पहाड़ी के ऊपर एक गुफा बनी हुई है, जिस पर लोग नींबू फेंकते हैं और नींबू उस गुफा के अंदर जाना चाहिए। माना जाता है, कि जिसका भी नीबू गुफा के अंदर जाएगा। उसकी मनोकामना पूरी होगी और यहां पर बहुत सारे लोग आपको नींबू गुफा के अंदर फेंकते हुए देखने के लिए मिल जाएंगे। यहां पर भगवान शिव के भजन चलते रहते हैं। यहां पर आकर एक अलग ही अनुभव होता है।

चित्रशाला पचमढ़ी - Chitrashala pachmarhi

चित्रशाला पचमढ़ी में स्थित एक दर्शनीय जगह है। यहां पर पहाड़ी के ऊपर एक मंदिर स्थित है। मंदिर तक जाने के लिए सीढ़ियां बनी है। यहां पर एक प्रकार से बहुत बड़ा मेला लगता है और आपको बहुत सारे खाने-पीने की दुकानें मिल जाती हैं। यहां पर आकर बहुत अच्छा लगता है। यहां पर आप ऊंचे ऊंचे पहाड़ देख सकते हैं। आप इन पहाड़ों पर भी जा सकते हैं। मगर बरसात के समय आपको इन पहाड़ों पर संभल कर जाना चाहिए, क्योंकि पहाड़ों पर बहुत ज्यादा फिसलन होती है।

नंदीगढ़ पचमढ़ी - Nandigarh pachmarhi

नंदीगढ़ नागद्वार में घूमने की एक बहुत ही खूबसूरत जगह है। यहां पर एक ऊंचा पहाड़ है, जिसका आकार नंदी के समान है।  यहां पर पहाड़ के ऊपर शिव भगवान जी का शिवलिंग स्थापित है।  इस पहाड़ के ऊपर बहुत से लोग चढ़ाई करके जाते हैं।  इस पहाड़ से चारों तरफ का दृश्य बहुत ही अद्भुत होता है और यहां पर आकर बहुत अच्छा लगता है।

इन जगहों के अलावा भी नागद्वार में बहुत सारी जगह है, जहां पर आप घूम सकते हैं। यहां पर आपको पैदल यात्रा करनी पड़ती है। यह यात्रा करीब 18 से 20 किलोमीटर लंबी रहती है और यहां का पूरा रास्ता जंगल का रहता है।  ऊंचे ऊंचे नदी, नाले, पहाड़ी, चट्टाने आपको देखने के लिए मिलती है और इन्हीं रास्तों से होकर आप इन मंदिरों तक पहुंच सकते हैं।

अम्बा माई मंदिर पचमढ़ी - Amba mai mandir pachmarhi

अंबा माई मंदिर पचमढ़ी जाने वाले रास्ते में पड़ता है। यह मंदिर बहुत ही भव्य है। मंदिर के प्रवेश द्वार बहुत ही भव्य है। यहां पर दो शेरों की मूर्ति विराजमान की गई है। आप मंदिर के अंदर जाते हैं, तो मंदिर में आपको अंबा माई की मूर्ति देखने के लिए मिलती है। इसके अलावा यहां पर शिवलिंग स्थापित है। भैरव बाबा की मूर्ति स्थापित है। राधा कृष्ण की मूर्ति स्थापित है और श्री राम और माता सीता की मूर्ति स्थापित है। यहां पर आकर बहुत शांति मिलती है। अंबा माई मंदिर के थोड़ा ही आगे आपको बेगम पैलेस देखने के लिए मिलता है, जो एक प्राचीन महल है।

रजत प्रपात पचमढ़ी
बी फॉल पचमढ़ी
अप्सरा विहार जलप्रपात पचमढ़ी
पचमढ़ी यात्रा

झोतेश्वर मंदिर गोटेगांव | Jhoteshwar temple | jyoteshwar dham

ज्योतिश्वर मंदिर गोटेगांव - Jhoteshwar ka mandir | Jyoteshwar temple narsinghpur

 

झोतेश्वर मंदिर गोटेगांव | Jhoteshwar temple jabalpur| jyoteshwar dham


ज्योतिश्वर मंदिर (jyoteshwar mandir) मध्य प्रदेश में स्थित एक प्रसिद्ध मंदिर है। इस मंदिर को ज्योतिश्वर और झोतेश्वर मंदिर (jhoteshwar mandir) के नाम से जाना जाता है। ज्योतिश्वर मंदिर (jyoteshwar mandir) मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिलें के गोटेगांव तहसील में स्थित है। यह बहुत ही खूबसूरत मंदिर है। ज्योतिश्वर मंदिर (jyoteshwar mandir) मां राजराजेश्वरी को समर्पित है। यह मंदिर बहुत भव्य है। यह मंदिर बहुत बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है। ज्योतिश्वर मंदिर (jyoteshwar mandir) के शिखर पर एक स्वर्ण कलश स्थापित किया गया है। मंदिर के उपर छोटे-छोटे गुंबद बनाए गए हैं, जिससे मंदिर बहुत ही खूबसूरत लगता है। मंदिर की छत पर कमल की नक्काशी की गई है, जिससे मंदिर बहुत ही सुंदर लगता है। मंदिर में मां राजराजेश्वरी की मूर्ति की स्थापना की गई है। मां राजराजेश्वरी मां दुर्गा का रूप है। मां राजराजेश्वरी की मूर्ति के पीछे एक मां दुर्गा की पेंटिग बनी हुई है। आपको यहां पर कुछ फोटोग्राफ भी देखने मिल जाती है। मंदिर के अंदर चारों तरफ की दीवारों पर 101 देवियों की स्थापना की गई है, यह मूर्तियां काले पत्थर की है। ज्योतिश्वर मंदिर (jyoteshwar mandir) में पार्किंग के लिए अच्छी जगह है। ज्योतिश्वर मंदिर (jyoteshwar mandir) तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां बनाई गई है। यह मंदिर ऊंचाई पर बना हुआ है। ज्योतिश्वर मंदिर (jyoteshwar mandir) के आजू बाजू बहुत सारे मंदिर है, जहां पर आप घूम सकते हैं। यहां पर यज्ञशाला बनी हुई है, जो आप देख सकते हैं। इसके अलावा यहां पर परमहंसी आश्रम भी बना हुआ है। यहां पर जलकुंड बना हुआ है, जिससे पानी बहता रहता है। आप यहां गर्मी के समय जाएंगे, तब भी आपको यहां पर पानी बहता हुआ देखने के लिए मिल जाएगा। मंदिर के प्रवेश द्वार में आपको एक दुकान देखने के लिए मिलती है, जहां पर आप चाय नाश्ता कर सकते हैं।  यहां पर आपको प्रसाद की दुकान भी देखने के लिए मिलती है। आप यहां से प्रसाद भी ले सकते हैं।

ज्योतिश्वर मंदिर
(jyoteshwar mandir) के आस पास बहुत सारे मंदिर है। ज्योतिश्वर मंदिर से कुछ दूरी पर हनुमान टेकरी है, जहां पर हनुमान जी के बहुत ही आकर्षक प्रतिमा है। यहां पर आपको बंदर देखने मिल जाते है। हनुमान टेकरी पहाड़ी पर स्थित है। पहाड़ी से नीचे आने का रास्ता है। पहाडी के नीचे विचार शिला स्थित है। यहां पर एक चटटान है, जिसे विचार शिला कहा जाता है। आप इसे देख सकते हैं। यहां पर आपको कुछ गुफाएं भी देखने के लिए मिल जाएंगी, जिन्हें गुरु गुफाएं कहा जाता है। कहा जाता है कि प्राचीन समय में यहां पर संत लोग तपस्या किया करते थे। गुरु गुफा से कुछ दूरी पर आपको एक शिव मंदिर देखने के लिए मिलता है, जिसमें शिव भगवान जी का शिवलिंग स्थापित है। यह शिवलिंग पारदर्शी है। इस मंदिर के पीछे एक तालाब बना हुआ है। इस तालाब के बारे में कहा जाता है, कि यहां पर नर्मदा जी ने स्वयं अवतरित हुई थी। ज्योतिश्वर मंदिर (jyoteshwar mandir) के पास आपको राधे कृष्ण जी का मंदिर देखने के लिए मिलता है, जो बहुत ही खूबसूरत है और मंदिर में राधे कृष्ण जी की मूर्ति बनी हुई है। यहां पर आपको एक शिव मंदिर देखने के लिए मिलता है, जिसमें 12 ज्योतिर्लिंग की स्थापना की गई है। अगर आप ज्योतिश्वर मंदिर (jyoteshwar mandir) में घूमने जाते हैं, तो आप 12 बजे से पहले जाएं, क्योंकि 12 बजे के बाद यहां के सभी मंदिर बंद हो जाते हैं और आपको दर्शन करने नहीं मिलेंगे। इसलिए जब भी आप यहां जाएं, जो 12 बजे के पहले जाये। आप झोतेश्वर मंदिर (jhoteshwar mandir) में आकर अपना बहुत अच्छा समय बिता सकते हैं। यहां पर आप अपनी फैमिली और दोस्तों के साथ आ सकते हैं। यह पिकनिक के लिए एक बहुत अच्छी जगह है। यहां पर आपको आकर आत्मिक शांति मिलेगी। 

झोतेश्वर मंदिर कहां स्थित है

Jhoteshwar mandir kahan sthit hai


झोतेश्वर मंदिर
(jhoteshwar mandir) मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले में स्थित है। यह नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव तहसील में स्थित है। झोतेश्वर मंदिर (jhoteshwar mandir) गोटेगांव रेलवे स्टेशन से करीब 13 किलोमीटर दूर है। मंदिर तक पहुंचने के लिए अच्छी रोड बनी हुई है। मंदिर तक पहुंचने के लिए अच्छी रोड बनी हुई है। जबलपुर से झोतेश्वर की दूरी करीब 70 किलोमीटर दूर है। आप इस मंदिर तक अपनी गाड़ी से आ सकते हैं। 

त्रिपुर सुंदरी मंदिर जबलपुर - Tripur sundari mandir jabalpur | Tripura Sundari Temple Jabalpur

 जबलपुर का त्रिपुर सुंदरी मंदिर

Tripur sundari mata jabalpur

 

त्रिपुर सुंदरी मंदिर जबलपुर - Tripur sundari mandir jabalpur | Tripura Sundari Temple Jabalpur


त्रिपुर सुंदरी मंदिर जबलपुर (tripur sundari mandir jabalpur) का एक धार्मिक स्थल (dharmik sthal) है। त्रिपुर सुंदरी मंदिर जबलपुर (tripur sundari mandir jabalpur) का एक दर्शनीय स्थल (darshaniy sthal) है। यहां पर हजारों की संख्या में लोग माता के दर्शन करने के लिए आते हैं। त्रिपुर सुंदरी मंदिर (tripur sundari mandir) माता राजराजेश्वरी (mata raj rajeshwari) को समर्पित है। त्रिपुर सुंदरी मंदिर (tripur sundari mandir) पहाड़ी पर बना हुआ है। यहां पर मंदिर के बाहर पर्किग की उचित व्यवस्था है। यहां पर आप मंदिर में आकर त्रिपुर सुंदरी के दर्शन कर सकते है। यहां पर मुख्य मंदिर राजराजेश्वरी माता (raj rajeshwari mata) का है। कहा जाता है कि माता की मूर्ति स्वयंभू है। माता के मूर्ति की स्थापना नहीं की गई है। मूर्ति स्वयं जमीन से निकली है। यहां पर आपको राजराजेश्वरी माता (raj rajeshwari mata) की मूर्ति देखने के लिए मिलती हैं, जो काले रंग की हैं। माता का शृंगार किया हुआ है। माता को चांदी का मुकुट भी चढ़ा हुआ है। यहां पर नवरात्रि के समय हजारों लोग आते हैं, और माता को चांदी के मुकुट को अर्पण करते हैं। मंदिर परिसर के प्रवेश द्वार पर ही आपको लिखा मिलता है, कि फोटो खींचना मना है। मगर बहुत सारे लोग फोटो यहां पर खींचते है। मंदिर परिसर में बहुत सारे मंदिर हैं, जहां आप भगवान के दर्शन कर सकते हैं। यहां पर नौ देवियों की स्थापना की गई है। मंदिर परिसर में भैरव बाबा की भी स्थापना की गई है, जिनके आप दर्शन कर सकते हैं। मंदिर में आपको बहुत सारे मनौती वाले नारियल देखने के लिए मिलते हैं, जो पूरे मंदिर में बंधे हुए है। यह नरियल लाल चुन्नी में बंधे हुए रहते हैं। लोगों का मानना है कि जो भी माता से अपनी मनोकामना मानता है, उसकी मनोकामना पूरी होती है, और वह यहां पर नारियल बांधते हैं। यहां पर आपको पुरानी मूर्तियां भी देखने के लिए मिलती हैं, जो यहां पर खुदाई से प्राप्त की गई थी। उन्हें भी यहां पर रखा गया है यहां पर खूबसूरत पेंटिंग भी की गई हैं जिन्हें जिसे आप देख सकते हैं। मंदिर के बाहर प्रसाद की बहुत सारी दुकानें हैं, जहां से आप प्रसाद ले सकते हैं। मंदिर में सभी प्रकार की सुविधाएं मौजूद है।

त्रिपुर सुंदरी मंदिर (
tripur sundari mandir) पर नवरात्रि के समय बहुत ज्यादा भीड़ रहती है। नवरात्रि के समय यहां पर मेला लगता है। यहां पर बहुत सारी दुकानें लगती है। मंदिर को बहुत सुंदर सजाया जाता है। मंदिर में नवरात्रि के समय बहुत लंबी लाइन लगती है और लोग माता के दर्शन के लिए अपनी पारी का इंतजार करते है। यहां पर यज्ञशाला बनी है, जिसके परिक्रमा लोग लगाते है। मंदिर को नवरात्रि के समय फूलों से सजाया जाता है। मंदिर के बाहर, बाजू में कथा के लिए एक मंच बनाया गया है। यहां पर कोई भी कथा करवा सकता है। यहां पर भंडारा भी करवा सकते है। नवरात्रि के समय आपको यहां पर भंडारा खाने के लिए भी मिल सकता है। यहां पर बहुत सारे लोग भंडारा करवाते रहते है। जिन लोगों की भी मनोकामना पूरी होती है, वह यहां पर भंडारा करवाते हैं।

जबलपुर के त्रिपुर सुंदरी मंदिर कैसे जाये

Jabalpur ke tripur sundari mandir kaise jaye


त्रिपुर सुंदरी मंदिर (
tripur sundari mandir) मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले (jabalpur city)  में स्थित है। यह जबलपुर जिले के भेडाघाट के करीब में स्थित है। त्रिपुर सुंदरी मंदिर (tripur sundari mandir) जबलपुर जिले से करीब 21 किलोमीटर दूर है। यह मंदिर जबलपुर भोपाल रोड पर स्थित है। यहां मुख्य सड़क से कुछ दूरी पर स्थित है। आप मंदिर तक अपनी गाड़ी से जा सकते हैं। मंदिर तक जाने के लिए अच्छी सड़क है। 


शारदा मंदिर बरेला जबलपुर - Sharda temple barela jabalpur

Sharda mata mandir jabalpur

शारदा मंदिर बरेला जबलपुर 

शारदा मंदिर बरेला जबलपुर - Sharda temple barela jabalpur

बरेला का शारदा माता का मंदिर पूरे जबलपुर में प्रसिद्ध है। यह मंदिर जबलपुर के अलावा भी आसपास के क्षेत्र में भी प्रसिद्ध है। शारदा मंदिर जबलपुर का एक प्राचीन मंदिर है। बरेला में शारदा माता जी का मंदिर है। शारदा माता का मंदिर एक ऊंचे पहाड़ी पर बना हुआ है और इस पहाड़ी पर आप अपनी गाड़ी से जा सकते हैं। मंदिर तक पक्की सड़क बनी हुई है।  मगर इस सड़क पर कहीं-कहीं पर खड़ी चढ़ाई है और सर्पाकार है। अगर आप यहां आते हैं, तो अपनी गाड़ी संभाल कर चलाइए। यहां पर दोपहिया और चार पहिया वाहन से पहुंचा जा सकता है। मंदिर में आपको शारदा माता की प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। मंदिर में गणेश जी, शंकर जी की, राम जी की प्रतिमाएं भी स्थित हैं, जिनके आप दर्शन कर सकते हैं। मंदिर का परिसर बहुत शांत है। आप शारदा माता के मंदिर से चारों तरफ का दृश्य देख सकते हैं, जो बहुत ही मनोरम होता है। यहां पर पीने के पानी के लिए एक टंकी रखी गई है। मंदिर के परिसर में आप आकर शांति से बैठ सकते हैं। मंदिर में शाम के टाइम आकर सूर्य अस्त देखने में बहुत अच्छा लगता है और यहां का शांत वातावरण भी बहुत अच्छा है।  आप यहां पर शाम को 7 या 7:30 बजे तक आ सकते हैं, उसके बाद मंदिर बंद हो जाता है। 

बरेला के शारदा मंदिर में नवरात्रि में बहुत ज्यादा भीड़ होती है। नवरात्रि के समय यहां पर बहुत सारे लोग आते है। यहां पर बहुत भीड रहती है। नवरात्रि के समय यहां पर गाड़ियां नीचे ही पार्क करना पड़ता है। आपको मंदिर तक पैदल जाना पड़ता है। यह चढ़ाई करीब 1 किलोमीटर की रहती है। यह खड़ी चढ़ाई है, आपको पैदल ही जाना पड़ता है। नीचे सडक के किनारे आपके गाडी खडी करने की व्यवस्था होती है। आप जहां गाडी खडी करते है, वहां पर आपको प्रसाद वगैरह मिल जाते हैं। यहां पर नवरात्रि के समय मेला लगता है। मेले में बहुत सारी दुकानें लगती हैं। यहां पर नवरात्रि के समय जवारे भी बोए जाते हैं। नवरात्रि के समय पर यहां पर बहुत सारे लोग शारदा माता जी के दर्शन करने के लिए आते हैं और बहुत ज्यादा भीड़ रहती है। आम दिनों में यहां पर ज्यादा लोग नहीं आते हैं। मंदिर के पास एक पेड़ लगा हुआ है। जिसमें पर लोग मनौती का धागा बांधते है। माना जाता है कि शारदा मां लोगों की इच्छा पूरी करती है। नवरात्र के समय आपको यहां पर बहुत सारे भिखारी भी देखने के लिए मिलते हैं, जिनमें बच्चे भी होते हैं और जो यहां पर भीख मांगते हुए आपको देखने मिल जाते हैं। बाकी आम दिनों में यहां पर कोई भी भिखारी नहीं रहते हैं।

बरेला का शारदा मंदिर कैसे जाएं

Barela ka sharda mandir kaise jaye


बरेला का शारदा माता का मंदिर मंडला रोड पर स्थित है। जबलपुर से करीब 40 किलोमीटर दूर है। यह बरेला नाम के गांव के पास स्थित है। आप यहां पर अपने दोस्तों और परिवार के लोगों के साथ घूमने के लिए जा सकते हैं।



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बिरला मंदिर जयपुर की यात्रा

बिरला मंदिर जयपुर

बिरला मंदिर जयपुर की यात्रा

बिरला मंदिर का खूबसूरत दृश्य 

बिरला मंदिर जयपुर शहर का एक दर्शनीय स्थल है। जयपुर का बिरला मंदिर सफेद संगमरमर से बना हुआ  है। यह मंदिर बहुत बड़ा है, जो देखने में बहुत ही आकर्षक लगता है। इस मंदिर को देखने के लिए बहुत सारे लोग दूर-दूर से आते हैं और यह पर आपको विदेश से आने वाले लोग भी देखने मिल जाएगें। 

यह मंदिर बहुत ही भव्य है और पूरी तरह से वाइट मार्बल से बना हुआ है और काफी बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है। इस मंदिर में आपको श्री लक्ष्मी नारायण जी की मूर्ति देखने मिलेगी। इस मंदिर में फोटो खींचना मना है। मंदिर के बाहर जाकर आप फोटो खींच सकते हैं। यहां का जो वातावरण है, वह शांत है। वैसे शाम को यह पर बहुत सारे पर्यटक मंदिर की खूबसूरती निहारने आते है। 
बिरला मंदिर जयपुर की यात्रा

गार्डन में स्थित शंकर भगवान जी की मूर्ति 

बिरला मंदिर बहुत ही अच्छा है। यह पर आपको बहुत अच्छा लगेगा। इस मंदिर पर हम लोग ऑटो से आए थे। हम लोग इस मंदिर में शाम को आए थे। शाम को हम लोग 4 बजे करीब अपने होटल से इस मंदिर के लिए निकले थे और करीब आधे घंटे में इस मंदिर में पहुंच गए थे। इस मंदिर में बहुत बड़ा गार्डन है। गार्डन में एक मंदिर बना हुआ है। इस मंदिर में आपको शंकर जी की मूर्ति के दर्शन करने मिलते है। आप शंकर जी की मूर्ति के दर्शन कर सकते है और कुछ समय के लिए इस गार्डन में शंति से बैठ सकते है। शंकर जी की मूर्ति के पास जाने में मनाही है और दूर से ही मंदिर के दर्शन कर सकते हैं।

बिरला मंदिर जयपुर की यात्रा

बिरला मंदिर के सामने के द्वार का दृश्य 

बिरला मंदिर जयपुर की यात्रा

बिरला मंदिर का खूबसूरत दृश्य 

फिर हम लोग बिरला मंदिर की तरफ आगे बढ़ते हैं, तो आपको मंदिर से कुछ दूरी पर अपने जूते चप्पल उतारने पड़ते हैं। उसके बाद आप मंदिर में प्रवेश कर सकते हैं। मंदिर बाहर से जितना खूबसूरत है। उतना ही अंदर से मनोरम है। मंदिर में अंदर आपको भगवान के दर्शन करने मिलते है। मंदिर के अंदर और बाहर आपको खूबसूरत नक्काशी देखने मिलती है। मंदिर में लक्ष्मी और नारायण जी की मूर्ति है और काफी शांति रहती है। शाम को यहां पर बहुत सारे लोग आते हैं। आप मंदिर के बाहर आते है, तो आपको यह पर दो स्टैच्यू देखने मिलता है। यह स्टैच्यू बहुत ही खूबसूरत है। इनके आप पिक्चर क्लिक कर सकते हैं। मंदिर के सामने बहुत बड़ा आंगन है, जहां से आप रोड का व्यू देख सकते है। मंदिर के आंगन में आप अलग अलग पोज देकर फोटोशूट कर सकते है। वैस मंदिर का आंगन एक अच्छा व्यू पांइट है। यहां से आप मेन रोड चैराहा देख सकते है। जहां पर शाम को बहुत ज्यादा ट्रैफिक रहता है।

बिरला मंदिर में शाम के टाइम बहुत ज्यादा भीड़ रहती है, क्योकि शाम का मौसम ठंडा रहता है। शाम के समय यहां पर सूर्यास्त का व्यू भी बहुत शानदार रहता है। मंदिर में आपको हर प्रकार की सुविधा मिल जाती है। यहां पर पानी की व्यवस्था है। बाथरूम की भी व्यवस्था हैं। यह पर बैठकर अच्छा समय बिताया जा सकता हैं। यह फोटोग्राफी करने के लिए बहुत अच्छी जगह है। यहां पर बहुत अच्छी फोटोग्राफ आते हैं और मंदिर के नीचे बिरला म्यूजियम है। इस म्यूजियम में भी आप घूम सकते हैं।

बिरला मंदिर के बाहर आपको बहुत सारी शॉप देखने मिल जाएगी। आप वहां जाकर चार्ट फुलकी खा सकते हैं। मगर यहां पर थोडा महंगा रहता है। यह हमारी बिरला मंदिर जयपुर की यात्रा थी। 

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जैसलमेर का किला (Jaisalmer Fort) की यात्रा

जैसलमेर का किला जैसलमेर जिलें के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। जैसलमेर का किला जैसलमेर जिले में स्थित एक बहुत ही विशाल किला है।  यह किला आपको जैसलमेर शहर के किसी भी हिस्से से देखने मिल जाता है।  यह किला एक पहाड़ी पर स्थित है और यह किला रेलवे स्टेशन से करीब 2 से 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित होगा। आप इस किलें तक पहुॅचने के लिए  ऑटो लेकर आराम से जा सकते हैं। रेल्वे स्टेशन में ही आटों वाले आ जाते है, और आपसे पूछते है, कि आप कहां जाएगें। आप आटो वालों से मोलभाव करके इस किलें तक आ सकते है। 


जैसलमेर का किला (Jaisalmer Fort) की यात्रा

जैसलमेर किले का रानी महल 


इस किलें की स्थापना राव जैसल द्वारा सन ११५६ में की गई थी। यह किला त्रिकूट पहाड़ी पर स्थित है। रेगिस्तान में स्थित होने के कारण इसे सोनार किला या सुनहरा किला भी कहते हैं। इस किला को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर की रूप में शामिल किया गया है। 

जैसलमेर का किलें तक जाने के लिए हम लोग ने भी आटों बुक किया था।  यह किला बहुत बड़ा है और यह दुनिया का पहला लिबिंग फोर्ट है, मतलब आज भी इस किलें में लोग रहते हैं। यह किला बहुत बड़ा है, तो आप इस किलें में जाते है तो आपको एक गाइड जरूर लेकर जाए। आपको किलें के प्रवेश द्वार ही में आपको बहुत सारे गाइड मिल जाते है, जो 100 रू में आपको उपलब्ध हो जाते है। हम लोगों ने गाइड नहीं लिया था, जिससे किलें के बहुत सारी जगह के बारें में हमें जानकारी नहीं मिली। बस हम लोगों ने किलें के अंदर  के कुछ दर्शनीय स्थल ही घूम पायें। इसलिए मैं आपको सलाह देती हूं कि आप जैसलमेर का किलें जाए, तो गाइड लेकर जरूर जाए। गाइड आपको यहां की महत्वपूर्ण जगह के बारे में अच्छे से जानकारी दे पाएगा।

जैसलमेर का किला (Jaisalmer Fort) की यात्रा

जैसलमेर का किला 

जैसलमेर का किला (Jaisalmer Fort) की यात्रा

जैसलमेर का किला 

जैसलमेर का किला (Jaisalmer Fort) की यात्रा

जैसलमेर किले का प्रवेश द्वार 


जैसलमेर का किलें में हम लोगों ने तीन जगह घूमा थे। आप जैसे ही किले में प्रवेश करते हैं। आपको यहां पर पहले बहुत सारी दुकानें देखने मिलती हैं। यह पर आपकों किलें की उची उची दीवारें भी देखने मिलती है। इन दुकानों में आपको ऊंट के चमड़े  की सामान की दुकानें मिलती है, मगर इन सामान के प्राइस बहुत ज्यादा हाई रहते है। इसके अलावा यहां पर आपको राजस्थानी पगड़ी मिल जाएंगी और राजस्थानी ड्रेस मिल जाएंगी। आप इन सब दुकानों को देखते हुए जैसलमेर का किलें में प्रवेश करते है। आपको किले का एक विशाल प्रवेश द्वार देखने मिलेगा और जहां पर छोटे छोटे मंदिर बने हुए हैं। इस किलें में हम लोग पैदल आये थे। मगर आप चाहे तो बाइक से इस किलें के अंदर तक जा सकते है। 

जैसलमेर का किला (Jaisalmer Fort) की यात्रा

जैसलमेर किले का रानी महल 


जैसलमेर का किलें का पहला आकर्षण है रानी महल रानी महल जैसलमेर का किलें के अंदर स्थित है। यह महल बहुत खूबसूरत है। इस महल के चारों तरफ बहुत सारी दुकानें है। कहा जाता है कि राजा रानी रहा करते थे। रानी महल का इतिहास के बारें में हमे जानकारी नहीं है। मगर महल बहुत सुंदर है। आपको यह महल देख कर बहुत अच्छा लगेगा।

इस महल को देखकर आप आगे बढ़ते हैं, तो महल के बाजू से एक संकरा रास्ता गया है। आपको इस रास्तें में आगे बढना है। आप आगे बढ़ते हैं, तो आपको एक खूबसूरत बालकनी देखने मिलती है, जिसकी फोटो खींचने पर 10 रू चार्ज किया जाता है। मगर यह बालकनी बहुत खूबसूरत है। मगर हम पैसे देकर फोटो खींचने में कोई रूचि नहीं थी। आप इस रोड से आगे बढते है, तो आपको यहां पर एक तोप देखने मिलती है, जो पुराने समय की लोहे की एक मजबूत तोप है। यह तोप ऊंचे शिखर पर रखी हुई है और इस जगह से पूरी सिटी का व्यू देखने मिलता है। इस तोप के बारे में हमें कोई जानकारी नहीं है। 

जैसलमेर का किला (Jaisalmer Fort) की यात्रा

जैसलमेर किले की तोप  

जैसलमेर का किला (Jaisalmer Fort) की यात्रा

 जैसलमेर किले से पूरे शहर का दृश्य  


जैसलमेर का किलें में अभी भी इंसान रहते हैं और इस महल में घूमने के लिए आपको तंग गलियों से गुजरना पड़ता है। यहां पर जो सड़कें हैं, वह बहुत ही संकरी हैं और अगर यहां पर आप बीच में फंस जाते है, तो आपको इंतजार करना होता है। हम लोगों के साथ भी ऐसा हीं हुआ था। यह पर हम लोगों के रास्तें में एक गाय कुछ खा रहीं थीं। हम लोग उस जगह से निकल नहीं पाए और हम लोगों को 5 से 10 मिनट का इंतजार करना पडा गया था। 

जैसलमेर का किलें के अंदर ही आपको खाने पीने की वस्तुएं मिल जाती है। इसके अलावा यह पर कपडें भी आपको मिल जाते है। यह पर कपडें और घर को सजाने वालें समान की बहुत सारी दुकानें है। आपको कहीं कहीं पर आपको सुंदर कंगन भी मिलते है। 

जैसलमेर का किला (Jaisalmer Fort) की यात्रा

जैसलमेर किले का जैन मंदिर 


जैसलमेर किले में एक और आकर्षण है जैन मंदिर। जैन मंदिर जैसलमेर किले के अंदर स्थित है। यह बहुत ही खूबसूरत मंदिर है। मंदिर में पत्थर की नक्काशी बहुत ही खूबसूरत है। 

आपको इस किलें में बहुत सारे होटल्स भी मिलेगें। जिनमें जाकर आप इस किलें के शिखर से पूरी सिटी का व्यू देख सकते है और बहुत अच्छा भी रहता है, यहां पर आकर आपको बहुत अच्छा लगेगा।

इस तरह हम लोगों की जैसलमेर किले की यात्रा रही और हम लोगों को यह सफर बहुत यादगार रहेगा।

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