बिरला मंदिर जयपुर की यात्रा

बिरला मंदिर जयपुर

बिरला मंदिर जयपुर की यात्रा

बिरला मंदिर का खूबसूरत दृश्य 

बिरला मंदिर जयपुर शहर का एक दर्शनीय स्थल है। जयपुर का बिरला मंदिर सफेद संगमरमर से बना हुआ  है। यह मंदिर बहुत बड़ा है, जो देखने में बहुत ही आकर्षक लगता है। इस मंदिर को देखने के लिए बहुत सारे लोग दूर-दूर से आते हैं और यह पर आपको विदेश से आने वाले लोग भी देखने मिल जाएगें। 

यह मंदिर बहुत ही भव्य है और पूरी तरह से वाइट मार्बल से बना हुआ है और काफी बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है। इस मंदिर में आपको श्री लक्ष्मी नारायण जी की मूर्ति देखने मिलेगी। इस मंदिर में फोटो खींचना मना है। मंदिर के बाहर जाकर आप फोटो खींच सकते हैं। यहां का जो वातावरण है, वह शांत है। वैसे शाम को यह पर बहुत सारे पर्यटक मंदिर की खूबसूरती निहारने आते है। 
बिरला मंदिर जयपुर की यात्रा

गार्डन में स्थित शंकर भगवान जी की मूर्ति 

बिरला मंदिर बहुत ही अच्छा है। यह पर आपको बहुत अच्छा लगेगा। इस मंदिर पर हम लोग ऑटो से आए थे। हम लोग इस मंदिर में शाम को आए थे। शाम को हम लोग 4 बजे करीब अपने होटल से इस मंदिर के लिए निकले थे और करीब आधे घंटे में इस मंदिर में पहुंच गए थे। इस मंदिर में बहुत बड़ा गार्डन है। गार्डन में एक मंदिर बना हुआ है। इस मंदिर में आपको शंकर जी की मूर्ति के दर्शन करने मिलते है। आप शंकर जी की मूर्ति के दर्शन कर सकते है और कुछ समय के लिए इस गार्डन में शंति से बैठ सकते है। शंकर जी की मूर्ति के पास जाने में मनाही है और दूर से ही मंदिर के दर्शन कर सकते हैं।

बिरला मंदिर जयपुर की यात्रा

बिरला मंदिर के सामने के द्वार का दृश्य 

बिरला मंदिर जयपुर की यात्रा

बिरला मंदिर का खूबसूरत दृश्य 

फिर हम लोग बिरला मंदिर की तरफ आगे बढ़ते हैं, तो आपको मंदिर से कुछ दूरी पर अपने जूते चप्पल उतारने पड़ते हैं। उसके बाद आप मंदिर में प्रवेश कर सकते हैं। मंदिर बाहर से जितना खूबसूरत है। उतना ही अंदर से मनोरम है। मंदिर में अंदर आपको भगवान के दर्शन करने मिलते है। मंदिर के अंदर और बाहर आपको खूबसूरत नक्काशी देखने मिलती है। मंदिर में लक्ष्मी और नारायण जी की मूर्ति है और काफी शांति रहती है। शाम को यहां पर बहुत सारे लोग आते हैं। आप मंदिर के बाहर आते है, तो आपको यह पर दो स्टैच्यू देखने मिलता है। यह स्टैच्यू बहुत ही खूबसूरत है। इनके आप पिक्चर क्लिक कर सकते हैं। मंदिर के सामने बहुत बड़ा आंगन है, जहां से आप रोड का व्यू देख सकते है। मंदिर के आंगन में आप अलग अलग पोज देकर फोटोशूट कर सकते है। वैस मंदिर का आंगन एक अच्छा व्यू पांइट है। यहां से आप मेन रोड चैराहा देख सकते है। जहां पर शाम को बहुत ज्यादा ट्रैफिक रहता है।

बिरला मंदिर में शाम के टाइम बहुत ज्यादा भीड़ रहती है, क्योकि शाम का मौसम ठंडा रहता है। शाम के समय यहां पर सूर्यास्त का व्यू भी बहुत शानदार रहता है। मंदिर में आपको हर प्रकार की सुविधा मिल जाती है। यहां पर पानी की व्यवस्था है। बाथरूम की भी व्यवस्था हैं। यह पर बैठकर अच्छा समय बिताया जा सकता हैं। यह फोटोग्राफी करने के लिए बहुत अच्छी जगह है। यहां पर बहुत अच्छी फोटोग्राफ आते हैं और मंदिर के नीचे बिरला म्यूजियम है। इस म्यूजियम में भी आप घूम सकते हैं।

बिरला मंदिर के बाहर आपको बहुत सारी शॉप देखने मिल जाएगी। आप वहां जाकर चार्ट फुलकी खा सकते हैं। मगर यहां पर थोडा महंगा रहता है। यह हमारी बिरला मंदिर जयपुर की यात्रा थी। 

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जैसलमेर का किला (Jaisalmer Fort) की यात्रा

जैसलमेर का किला जैसलमेर जिलें के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। जैसलमेर का किला जैसलमेर जिले में स्थित एक बहुत ही विशाल किला है।  यह किला आपको जैसलमेर शहर के किसी भी हिस्से से देखने मिल जाता है।  यह किला एक पहाड़ी पर स्थित है और यह किला रेलवे स्टेशन से करीब 2 से 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित होगा। आप इस किलें तक पहुॅचने के लिए  ऑटो लेकर आराम से जा सकते हैं। रेल्वे स्टेशन में ही आटों वाले आ जाते है, और आपसे पूछते है, कि आप कहां जाएगें। आप आटो वालों से मोलभाव करके इस किलें तक आ सकते है। 


जैसलमेर का किला (Jaisalmer Fort) की यात्रा

जैसलमेर किले का रानी महल 


इस किलें की स्थापना राव जैसल द्वारा सन ११५६ में की गई थी। यह किला त्रिकूट पहाड़ी पर स्थित है। रेगिस्तान में स्थित होने के कारण इसे सोनार किला या सुनहरा किला भी कहते हैं। इस किला को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर की रूप में शामिल किया गया है। 

जैसलमेर का किलें तक जाने के लिए हम लोग ने भी आटों बुक किया था।  यह किला बहुत बड़ा है और यह दुनिया का पहला लिबिंग फोर्ट है, मतलब आज भी इस किलें में लोग रहते हैं। यह किला बहुत बड़ा है, तो आप इस किलें में जाते है तो आपको एक गाइड जरूर लेकर जाए। आपको किलें के प्रवेश द्वार ही में आपको बहुत सारे गाइड मिल जाते है, जो 100 रू में आपको उपलब्ध हो जाते है। हम लोगों ने गाइड नहीं लिया था, जिससे किलें के बहुत सारी जगह के बारें में हमें जानकारी नहीं मिली। बस हम लोगों ने किलें के अंदर  के कुछ दर्शनीय स्थल ही घूम पायें। इसलिए मैं आपको सलाह देती हूं कि आप जैसलमेर का किलें जाए, तो गाइड लेकर जरूर जाए। गाइड आपको यहां की महत्वपूर्ण जगह के बारे में अच्छे से जानकारी दे पाएगा।

जैसलमेर का किला (Jaisalmer Fort) की यात्रा

जैसलमेर का किला 

जैसलमेर का किला (Jaisalmer Fort) की यात्रा

जैसलमेर का किला 

जैसलमेर का किला (Jaisalmer Fort) की यात्रा

जैसलमेर किले का प्रवेश द्वार 


जैसलमेर का किलें में हम लोगों ने तीन जगह घूमा थे। आप जैसे ही किले में प्रवेश करते हैं। आपको यहां पर पहले बहुत सारी दुकानें देखने मिलती हैं। यह पर आपकों किलें की उची उची दीवारें भी देखने मिलती है। इन दुकानों में आपको ऊंट के चमड़े  की सामान की दुकानें मिलती है, मगर इन सामान के प्राइस बहुत ज्यादा हाई रहते है। इसके अलावा यहां पर आपको राजस्थानी पगड़ी मिल जाएंगी और राजस्थानी ड्रेस मिल जाएंगी। आप इन सब दुकानों को देखते हुए जैसलमेर का किलें में प्रवेश करते है। आपको किले का एक विशाल प्रवेश द्वार देखने मिलेगा और जहां पर छोटे छोटे मंदिर बने हुए हैं। इस किलें में हम लोग पैदल आये थे। मगर आप चाहे तो बाइक से इस किलें के अंदर तक जा सकते है। 

जैसलमेर का किला (Jaisalmer Fort) की यात्रा

जैसलमेर किले का रानी महल 


जैसलमेर का किलें का पहला आकर्षण है रानी महल रानी महल जैसलमेर का किलें के अंदर स्थित है। यह महल बहुत खूबसूरत है। इस महल के चारों तरफ बहुत सारी दुकानें है। कहा जाता है कि राजा रानी रहा करते थे। रानी महल का इतिहास के बारें में हमे जानकारी नहीं है। मगर महल बहुत सुंदर है। आपको यह महल देख कर बहुत अच्छा लगेगा।

इस महल को देखकर आप आगे बढ़ते हैं, तो महल के बाजू से एक संकरा रास्ता गया है। आपको इस रास्तें में आगे बढना है। आप आगे बढ़ते हैं, तो आपको एक खूबसूरत बालकनी देखने मिलती है, जिसकी फोटो खींचने पर 10 रू चार्ज किया जाता है। मगर यह बालकनी बहुत खूबसूरत है। मगर हम पैसे देकर फोटो खींचने में कोई रूचि नहीं थी। आप इस रोड से आगे बढते है, तो आपको यहां पर एक तोप देखने मिलती है, जो पुराने समय की लोहे की एक मजबूत तोप है। यह तोप ऊंचे शिखर पर रखी हुई है और इस जगह से पूरी सिटी का व्यू देखने मिलता है। इस तोप के बारे में हमें कोई जानकारी नहीं है। 

जैसलमेर का किला (Jaisalmer Fort) की यात्रा

जैसलमेर किले की तोप  

जैसलमेर का किला (Jaisalmer Fort) की यात्रा

 जैसलमेर किले से पूरे शहर का दृश्य  


जैसलमेर का किलें में अभी भी इंसान रहते हैं और इस महल में घूमने के लिए आपको तंग गलियों से गुजरना पड़ता है। यहां पर जो सड़कें हैं, वह बहुत ही संकरी हैं और अगर यहां पर आप बीच में फंस जाते है, तो आपको इंतजार करना होता है। हम लोगों के साथ भी ऐसा हीं हुआ था। यह पर हम लोगों के रास्तें में एक गाय कुछ खा रहीं थीं। हम लोग उस जगह से निकल नहीं पाए और हम लोगों को 5 से 10 मिनट का इंतजार करना पडा गया था। 

जैसलमेर का किलें के अंदर ही आपको खाने पीने की वस्तुएं मिल जाती है। इसके अलावा यह पर कपडें भी आपको मिल जाते है। यह पर कपडें और घर को सजाने वालें समान की बहुत सारी दुकानें है। आपको कहीं कहीं पर आपको सुंदर कंगन भी मिलते है। 

जैसलमेर का किला (Jaisalmer Fort) की यात्रा

जैसलमेर किले का जैन मंदिर 


जैसलमेर किले में एक और आकर्षण है जैन मंदिर। जैन मंदिर जैसलमेर किले के अंदर स्थित है। यह बहुत ही खूबसूरत मंदिर है। मंदिर में पत्थर की नक्काशी बहुत ही खूबसूरत है। 

आपको इस किलें में बहुत सारे होटल्स भी मिलेगें। जिनमें जाकर आप इस किलें के शिखर से पूरी सिटी का व्यू देख सकते है और बहुत अच्छा भी रहता है, यहां पर आकर आपको बहुत अच्छा लगेगा।

इस तरह हम लोगों की जैसलमेर किले की यात्रा रही और हम लोगों को यह सफर बहुत यादगार रहेगा।

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Savitri temple pushkar || सावित्री मंदिर पुष्कर

Savitri temple pushkar
सावित्री मंदिर पुष्कर


पुष्कर का सावित्री मंदिर (Savitri mata temple pushkar) बहुत ही खूबसूरत जगह है।

Savitri temple pushkar || सावित्री मंदिर पुष्कर

खूबसूरत पहाड़ियों का दृश्य 

पुष्कर शहर का सावित्री मंदिर एक धार्मिक जगह है। यह जो मंदिर है, वह उचीं  पहाड़ी पर स्थित है। इस पहाडी को रत्नागिरी पहाडी कहते है। इसकी ऊँचाई 750 फीट है। आपको यहां पर देसी और विदेशी दोनों प्रकार के लोगों लोग देखने मिल जाएंगे, मतलब यहां पर भारतीय लोग और विदेशी लोग लोग सभी लोग माता के दर्शन करने के लिए आते हैं। 

पुष्कर का सावित्री मंदिर (Savitri mata temple pushkar) भगवान ब्रह्मा की पहली पत्नी को समर्पित है। इस मंदिर में स्थित देवी सावित्री की मूर्ति बहुत ही प्राचीन है। 

Savitri temple pushkar || सावित्री मंदिर पुष्कर

मंदिर परिसर में बैठे कुछ बंदर 

Savitri temple pushkar || सावित्री मंदिर पुष्कर

मंदिर से नीचे का खूबसूरत दृश्य 


हमने पुष्कर के सावित्री मंदिर (Savitri mata temple pushkar) का जाने का प्लान बनाया और हम लोगों तैयार हो गए। उसके बाद हम लोगों ने पुष्कर घूमने के लिए ऑटो बुक किया था। मगर हम लोगों को बहुत लेट हो गया था, तो हम लोग सबसे पहले इस मंदिर के लिए निकले। हम लोगों मंदिर पहुॅचें, तो हम लोगों को मंदिर के आसपास बहुत सारे ऊंट गाडी दिखाई दी, गाडी को ऊंट खींचकर लेकर जाते हैं। आप भी यहां पर ऊंट गाड़ी देखने मिल जाएगी। वैसे आप चाहे तो इस ऊंट गाड़ी में भी घूम सकते हैं। मगर इस ऊंट गाड़ी का जो किराया रहता है। वह थोड़ा कॉस्टली रहता है ऑटो के मुकाबले में, तो आप चाहें तो इस गाड़ी में भी घूम सकते हैं या आटों में घूम सकते है। 

सावित्री मंदिर (Savitri mata temple pushkarके पहाडी के नीचे जब आप पहुंचते हैं, तो आपको यहां पर बहुत सारी  सारी दुकानें देखने मिल जाती हैं। यहां पर कुछ खाने-पीने की दुकानें रहती हैं और कुछ सामानों की दुकानें रहती है। यहां पर भगवान को प्रसाद चढ़ाने वाली कुछ दुकानें रहती है, तो आप यहां से प्रसाद खरीद सकते हैं। यहां पर 30 या 40 रुपए का आपको प्रसाद मिल जाता है। आप यहां से प्रसाद ले सकते हैं उसके बाद हम लोगों ने यहां पर चाय पीती थी। यहां पर एक दुकान में कुल्हड़ वाली चाय मिल रही थी, तो हम लोगों ने कुल्हड़ वाली चाय पिए। उसके बाद हम लोगों ने मंदिर की तरफ बढें। 

सावित्री मंदिर (Savitri mata temple pushkarतक पहुंचने के लिए दो रास्ते मिल जाते हैं। एक तो सीढियों वाला रास्ता रहता है। आपको सीढ़ियां चढ़कर जानी पड़ती है, इसमें आपकी बहुत ज्यादा ताकत लग सकती है और आपका बहुत ज्यादा समय लग सकता है। इसके साथ ही एक रास्ता रोपवे वाला रहता है, जिसमें आप आराम से पहुंच सकते हैं और आपका इसमें ज्यादा समय भी नहीं लगता है।

Savitri temple pushkar || सावित्री मंदिर पुष्कर

सूर्यास्त का बहुत ही मनमोहक दृश्य 

Savitri temple pushkar || सावित्री मंदिर पुष्कर

मंदिर से नीचे के खूबसूरत दृश्य 

Savitri temple pushkar ropeway
सावित्री मंदिर पुष्कर रोपवे


सावित्री मंदिर (Savitri mata temple pushkar) तक पहुंचने के लिए हम लोगों ने रोपवे से जाने का फैसला लिया और हम लोग रोपवे की तरफ चले गए। हम लोगों का रोपवे का टिकट 100 का था। एक व्यक्ति का 100 रू लगा। उसके बाद हम लोगों ने रुपए में बैठे। हम लोग 6 जन लोग थे और 6 लोगों के लिए रोपवे में बैठने के लिए बहुत जगह थी। उसके बाद है हमारी रोपवे धीरे धीरे चलना स्टार्ट हो गई। हम लोगों को वहां के खूबसूरत व्यू देखना स्टार्ट हो गया था। व्यु बहुत ज्यादा खूबसूरत था। रोपवे से देखने पर पर कही रेगिस्तान था। तो कहीं पर पानी बह रहां था, कहीं पर रेत थी, तो कहीं पर लोगों का भींड थी। कही पर उंट गाडी थी, कही पर रेत में चलती बडी गाडी थी। यहां सब दृश्य आपको रोपवे से देखने मिल जाता है। हम लोगों को रोपवे से कुछ बंदर भी   दिखे थे, जो मंदिर की तरफ चढ़ाई कर रहे थे।

इन सभी दृश्यों का लुफ्त उठाते हुए हम लोग मंदिर पहुंच गए। उसके बाद हम लोग रोपवे से उतरे। सावित्री मंदिर (Savitri mata Temple) के बाहर भी कुछ दुकानें हैं और सवित्री मंदिर बहुत ही खूबसूरत था। आपको यहां से चारों तरफ खूबसूरत पहाड़ियां, नदियां, रोड, खेत और पुष्कर शहर का खूबसूरत नजारे देखने मिलता है। यहां से पुष्कर झील भी देखने मिलती है। हम लोगों ने मंदिर में सावित्री माता जी के दर्शन किए। 

सावित्री माता जी (Savitri mata) के इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि एक बार ब्रह्मा जी ने यज्ञ का आयोजन किया। जिसमें सवित्री माता ((Savitri mata)को पहुॅचने में देर हो गई,  इसलिए ब्रह्मा जी ने गायत्री जी के साथ विवाह कर पूजा की विधि पूरी की और तभी सावित्री माता वहां पहुंची। जिससे उन्हें बहुत गुस्सा आया और वह इस पहाड़ी में आकर तपस्या करने लगी। इस तरह इस मंदिर की स्थापना हुई है। आप भी यहां आएंगे तो आपको इस तरह की कहानियां सुनने मिल सकती है।

यहां पर स्थित मंदिर बहुत ही खूबसूरत है और इसके आसपास भी बहुत अच्छा है। उसके बाद हम लोग ने मंदिर के दर्शन करने के बाद मंदिर के पीछे जो खूबसूरत जगह है। वहां गए, वहां हम लोग ने देखा तो वहां पर भी बहुत ही खूबसूरत नजारा था। यहां से आपको सन सेट का नजारा भी लुभावना है, जो बहुत ही मस्त रहता है। यहां पर हम लोग ठंड के समय में गए थे, तो ठंड के समय पर यहां पर हल्का सा बादल भी था और हल्की फुल्की बरिश भी हो रही थी, तो यहां पर कोहरा छाया हुआ था, जो बहुत ही मस्त लग रहा था। यहां पर हमने बहुत ही मस्त फोटो क्लिक किया। 

सावित्री देवी मंदिर (Savitri mata temple) के पास जो दुकाने थी वहां से हम लोगों ने अपने रिश्तेदारों के लिए कुछ गिफ्ट लिए। यहां पर हम लोगो ने कुछ विदेशी लोगों को भी देखा, जो भारतीय मंदिर और संस्कृति की बहुत ज्यादा रिस्पेक्ट करते हैं। 

हमारी पुष्कर के सावित्री देवी मंदिर (Savitri mata temple pushkar) की यात्रा बहुत ही अच्छी रही और यहां पर हम अपने फैमिली और दोस्तों के साथ आए थे। यहां पर हमने बहुत इंजॉय किया। यहां के दृश्य अविस्मरणीय थे। यहां पर हम ठंडी में आये थे। 

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Lamheta Ghat Jabalpur

Lamheta Ghat Jabalpur
लम्हेटाघाट जबलपुर 

लम्हेटाघाट नर्मदा नदी का शांत और खूबसूरत घाट

Lamheta Ghat Jabalpur

लम्हेटाघाट 

लम्हेटाघाट जबलपुर (Lamheta ghat Jabalpur) में स्थित एक खूबसूरत घाट है। लम्हेटाघाट जबलपुर (Lamheta ghat Jabalpurशहर का खूबसूरत पर्यटन स्थल है। यह घाट नर्मदा नदी पर बना हुआ है। यह घाट ज्यादा बड़ा नहीं है, मगर आप यहां पर आकर बहुत सारी जगहों के दर्शन कर सकते है। यह पर आपको नर्मदा नदी के घाट के अलावा ऐतिहासिक जगह भी देखने मिल जाती है। लम्हेटाघाट के आसपास में बहुत सारी ऐतिहासिक जगह है, जहां पर जाकर आपको अपने इतिहास के बारे में जानकारी मिल सकती है। मगर मेरे हिसाब से यहां के कुछ ऐतिहासिक स्थलों की हालात बहुत ही बेकार है। 

लम्हेटाघाट (Lamheta ghatमें आप आकर अपना अच्छा टाइम बिता सकते हैं और यहां पर ज्यादा लोग नहीं रहते हैं, जो लोग यहां पर रहते है। वहां यह के स्थानीय लोग ही रहते है। यहां पर बहुत से लोग इस घाट पर घूमने के लिए आते है। वहां भी आपको देखने मिलेगें, मगर यहा पर पर्यटक की संख्या कम रहती है।  

लम्हेटाघाट जबलपुर (Lamheta ghat Jabalpurमें स्थित है और यह भेड़ाघाट वाली रोड में स्थित है। इस जगह पहुंचने के लिए आपको सगड़ा रोड से आना पड़ता है। आप यहां पर अपनी गाड़ी से आसानी से पहुंच सकते हैं। यहां पर आप मेट्रो बस से भी आ सकते हैं। मेट्रो बस आपको लम्हेटाघाट (Lamheta ghatसे कुछ दूरी पर मेन रोड पर उतार देती है। मेन रोड से आपको करीब 1 किलोमीटर चलना पड़ता है, और आप इस जगह पर पहुंच सकते हैं। आप लम्हेटाघाट (Lamheta ghat) में आटों से भी आ सकते है और यहां पर आप आसानी से पहुंच सकते हैं।

आप यहां पर अपनी गाड़ी से आ सकते हैं। इस जगह पर आने के लिए अच्छे रोड है। आप जब भी भेड़ाघाट  जाते हैं, तो आप इस जगह भी आकर आपका अच्छा समय बिता सकते है। सगड़ा रोड पर आपको एक चैराहा मिलता है, जहां पर बोर्ड भी लगा रहता है और वहां से लम्हेटाघाट (Lamheta ghat) जाने के लिए डायरेक्शन दिया रहता है, तो आप इसको फाॅलो करके लम्हेटाघाट (Lamheta ghatपहुॅच सकते है। आपकी गाडी डायरेक्ट घाट तक पहुॅच जाती है।

Lamheta Ghat Jabalpur

लम्हेटाघाट 

लम्हेटाघाट (Lamheta ghatनर्मदा नदी के किनारे स्थित बहुत सुंदर एवं शांत घाट हैं। यहां पर आधिकतर लोग जो भी आते है। वहां इस पवित्र नदी में स्नान जरूर करते है। यहां पर महिलाओं के लिए चेजिंग रूम बना है, जहां पर महिलाओं नहाकर कपडे चेंज कर सकते है। यहां पर आपको नर्मदा नदी जी का बहुत ही खूबसूरत व्यू देखने मिलेगा। यहां पर आपको बैठने के लिए बहुत अच्छी व्यवस्था है। यहां पर पानी ज्यादा गहरा नहीं है। आप यहां पर जाकर बहुत अच्छा टाइम बिता सकते हैं। यहां पर आपको बहुत सारी जगह देखने मिल जाएगी। 

लम्हेटाघाट (Lamheta ghatपर एक पुराना मंदिर है, जिसे राधे कृष्ण जी का मंदिर (Radhe Krishna ji temple) कहा जाता है। यह मंदिर बहुत पुराना है और इन मंदिर के बारे में सरकार ध्यान नहीं दे रही है और यह मंदिर बर्बाद होते जा रहे है। मंदिर पूरी तरह से नष्ट होने की कगार में आ गया है और नष्ट हो भी रहा है। हम लोग इस मंदिर के अंदर गए थे और यह मंदिर बहुत खराब हालत में था। हम लोग को इस मंदिर में जाने में बहुत डर लग रहा था। हम लोग को लग रहा था, कहीं इस मंदिर की छत गिर ना जाए क्योंकि यहां पर जो मंदिर है, वह बहुत पुराना है। यह पूरा मंदिर पत्थरों का बना हुआ है। अगर आप इस मंदिर का वीडियो देखना चाहे, तो मेरे चैनल में जाकर देख सकते है। इसके अलावा मंदिर में आपको यहां पर बहुत सारे कमरे बने हुए थे। यहां पर एक मंदिर है, जहां पर शिवलिंग रखने की जगह थी। मगर शिवलिंग यहां पर नहीं थे। शिवलिंग गायब हो चुका है। यह बहुत ज्यादा पुराना मंदिर है, अगर आपको यहां पर जाने का मौका मिलें तो आप इस जगह पर जरूर जाना।

Lamheta Ghat Jabalpur

राधे कृष्ण जी का मंदिर  

Lamheta Ghat Jabalpur

राधे कृष्ण जी का मंदिर  

लम्हेटाघाट (Lamheta ghat) में एक हनुमान मंदिर भी है, जो बहुत प्राचीन है और हनुमान मंदिर के सामने ही शिव शंकर जी का मंदिर है। यह मंदिर भी पूरी तरह से पत्थर का बना हुआ है। इस मंदिर में खूबसूरत नक्काशी की गई है। आप इस मंदिर पर आकर इसकी खूबसूरती देख सकते हैं। यह ज्यादा बडा मंदिर नहीं है, मगर यह मंदिर सुंदर है। 

लम्हेटाघाट (Lamheta ghatमें मकर संक्रांति (Makar Sankranti) के उत्सव में या नर्मदा जयंती में बहुत ज्यादा भीड़ लगती है। इस दिन माना जाता है कि नदियों में नहाना शुभ माना जाता है, तो बहुत सारे लोग नर्मदा नदी में स्नान करने के लिए दूर-दूर से आते हैं। जो लोग दूर से आते हैं। वह नर्मदा नदी के किनारे ही रहने लगते हैं। यहां पर मकर संक्रांति में बहुत सारी दुकानें भी लगती हैं। यह पर बहुत भव्य मेले का आयोजन होता है। नर्मदा नदी के किनारे मे बहुत सारे लोग रहने लगते हैं मकर संक्रांति के उस समय। यहां पर बहुत अच्छा माहौल रहता है, बहुत सारे लोग रहते हैं, बहुत सारी दुकानें रहती है, जो बहुत अच्छा लगता है देखने में। यहां पर मकर संक्रांति में बहुत भीड़ होती है, जिससे नर्मदा जी के आजू-बाजू के घाटों में बहुत गंदगी भी होती है। अगर आप किसी भी नदी में जाते हैं, तो गंदगी ना करें। नदी को साफ रखें और अपना फर्ज निभा निभाए।

हम लोगों को इस घाट में जाकर बहुत ही अच्छा लगा था। घाट में और भी बहुत सारी जगह है, जो बहुत प्राचीन है। यहां पर प्राचीन समय की बहुत सारे मंदिर आपको देखने मिल जाते हैं, तो अगर आप इस जगह को एक्सप्लोर करना चाहते हैं, तो आपको यहां पर बहुत सारे नई नई जगह देखने मिल जाएंगी। यहां पर हम लोगों ने लम्हेटा घाट के राधा कृष्ण मंदिर और हनुमान जी के मंदिर ही विजिट किया था। आप यहां पर घुघरा वाटरफॉल (Ghaghra Waterfall) भी जा सकते हैं और परमहंसी आश्रम (Paramhansi Ashram) भी जा सकते हैं।

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Muhas Hanuman Temple || मुहास हनुमान मंदिर

Muhas Hanuman Temple
मुहास हनुमान मंदिर 

हड्डी जोड़ने वाला मुहास का हनुमान मंदिर


Muhas Hanuman Temple || मुहास हनुमान मंदिर

हनुमान मंदिर का मुख्य द्वार  


हनुमान मंदिर मुहास (Muhas Hanuman Temple) बहुत प्रसिद्ध है। इस हनुमान मंदिर को हड्डी जोड़ने वाले मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। लोगों का मानना है कि यहां पर हनुमान जी स्वयं लोगों की हड्डी जोड़ने का इलाज करते हैं। यह मंदिर पूरे भारत देश में प्रसिद्ध है। इस मंदिर के बारे में न्यूज चैनलों में भी आ चुका है। इस मंदिर की प्रसिद्धि पूरे देश में है। यहां पर जो भी लोग आते हैं। वह अपनी समस्या लेकर आते हैं और हनुमान जी उनकी समस्या को ठीक करते हैं।

मुहास हनुमान मंदिर कहा है
Where is Muhas Hanuman Temple


हम लोग भी इस मंदिर में घूमने गए थे। यह मंदिर मध्यप्रदेश के कटनी जिले में स्थित है। यह मंदिर कटनी जिले से लगभग 35 किमी दूर होगा। यह रीठी तहसील की मुहास नाम के गांव में स्थित है। यह एक छोटा सा मंदिर है, ज्यादा बड़ा मंदिर नहीं है। यह मंदिर बहुत ही खूबसूरती से बनाया गया है। यह मंदिर मुहास में मेन रोड में स्थित है। आप यहां पर अपनी गाड़ी से जा सकते हैं। यहां पर बसें भी चलती होंगी, मगर वो टाइम टेबल से चलती होंगी, तो अगर आप बस से यहां आना चाहते हैं। तो टाइम का विशेष ध्यान दें। मगर मेरे हिसाब से आप यहां पर अपनी गाड़ी से आएंगे, तो वह आपके लिए बेस्ट होगा। 

मुहास के हनुमान मंदिर (Muhas Hanuman Temple) के बारे में कहा जाता है, कि जिन लोगों की हड्डियां फैक्चर हो जाती हैं या टूट जाती है। ऐसे लोगों यहां पर आकर अपना इलाज करवाते है, तो यहां आने पर उनकी हड्डियों को दोबारा जोड़ा जा सकता है। वैसे यह सब मेडिकल साइंस के हिसाब से संभव नहीं है। मगर यहां आने वालों श्रध्दाुलों की मानें तो इस बात पर आपको विश्वास किया जा सकता है। यहां पर मंगलवार की दिन लोगों की भीड लगी रहती है। यहां पर मंगलवार के दिन के अलावा भी लोग आपको देखने मिल जाएगें। 

मुहास के हनुमान मंदिर (Muhas Hanuman Temple) में जो भी लोग अपना इलाज कराने आते है। वो यह पर दो या तीन बार आते है। तब जाकर उनका रोग ठीक हो जाता है। मंदिर के बाहर आपको दुकान देखने मिलती है, जहां पर मंदिर में चढाने के लिए प्रसाद मिल जाता है। इन दुकानों में आपको जड़ी बूटियों का तेल भी मिल जाएगा, जो आप के दर्द को कम करता है। तेल में वैसे यह लिखा रहता है और यह पर दुकान वाले लोग भी यही कहकर बेचते है। बाकी इस तेल के बारे में मुझे जानकारी नहीं है, कि वह आपके दर्द वगैरह को कम करता है कि नहीं। यह तेल आपको बहुत कम कीमत में मिल जाता है। 

अगर आप इस हनुमान मंदिर पर आते है, तो आपको यह पर बहुत अच्छा लगेगा। यहां पर बहुत सारे लोग आते हैं और यहां पर भजन कीर्तन होता रहता है। यहां पर मंगलवार और शानिवार को बहुत ज्यादा भीड़ होती है और इस दिन ही इस मंदिर में मिलने वाली दवाई का असर ज्यादा होता है। 

यहां पर जिन लोगों की हड्डियां टूट जाती हैं। वह यहां पर स्ट्रेचर से आते हैं या एंबुलेंस में आते हैं। यहां पर उन्हें कुछ देर मंदिर परिसर में बैठने के लिए कहा जाता है और राम भगवान का जाप करने के लिए कहा जाता है। फिर  उन्हें औषधि दी जाती है और यह औषधि लोगों को खानी पड़ती है। इस औषधि के बारे में कहा जाता है, कि यह औषधि पूरी तरह से प्राकृतिक होती है। यहां पर एक पंडित जी ने हमें बताया कि यह संजीवनी बूटी होती है, जो हनुमान जी ने लाए थे, लक्ष्मण जी के इलाज के लिए। तो उसी औषधि से लोगों का इलाज होता है। यह औषधि प्राकृतिक होती है जिसको खाकर यहां पर जो भी लोग आते हैं। वह ठीक हो जाते हैं।

Muhas Hanuman Temple || मुहास हनुमान मंदिर

हनुमान मंदिर परिसर  


मुहास का हनुमान मंदिर (Muhas Hanuman Temple) ज्यादा बडा नहीं है। मंदिर परिसर में आंगन बहुत बड़ा है। उसमें लोग बैठकर भजन कर सकते हैं और यहां पर हनुमान जी की प्रतिमा बनाई गई है, जो बहुत ही आकर्षक है देखने में। शिव भगवान जी की मूर्ति भी स्थापित की गई है जिनकी पूजा आप कर सकते हैं।

हम लोगों को इस मंदिर में बहुत अच्छा लगा था। यहां पर आकर हमने अपने पैर हाथ धुले और प्रसाद लिया। भगवान हनुमान के दर्शन किए। कुछ देर इस मंदिर में बैठे और फिर अपने घर आ गये। मंदिर के आसपास आपको बहुत सारी दुकानें भी मिलती हैं। जहां पर अगर आप कहीं दूर से आ रहे हो, तो दुकान मे खाने-पीने की व्यवस्था भी मिल जाती है। जहां पर आप चाय नाश्ता कर सकते है। यहां पर आप अपनी परिवार और दोस्तों के साथ आ सकते है। 

हमें इस जगह आ कर बहुत अच्छा लगा।  यहां पर काफी शांत वाला माहौल रहता है। आप भी यहां आ सकते हैं और अपना अच्छा समय बिता सकते हैं। यहां पर आने के लिए अच्छी सड़कें हैं, तो आप अपनी गाड़ी से आसानी से आ सकते हैं। 

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Bahoriband-Kankali Devi Temple Tigawa (कंकाली देवी मंदिर )

Kankali Devi Temple 

कंकाली देवी मंदिर 


कंकाली देवी मंदिर बहोरीबंद (Kankali Devi Temple) के पास के एक गांव में स्थित है। इस गांव में कंकाली देवी मंदिर (Kankali Devi Temple) के अलावा एक मंदिर और भी स्थित है। यह एक पुरातात्विक स्थल है और यहां पर आपको बहुत ढेर सारे खूबसूरत नक्काशी भरे पत्थर पर उकेरी गई कई कलाकृतियां देखने मिल जाएगी। यह एक बहुत प्राचीन स्थल है और आप इस जगह पर बहुत आसानी से आ सकते हैं। यह बहुत ही प्राचीन मंदिर है। 

Bahoriband-Kankali Devi Temple Tigawa (कंकाली देवी मंदिर )

कंकाली देवी मंदिर 

कंकाली देवी मंदिर (Kankali Devi Templeकटनी जिले में स्थित है। यह कटनी जिले के बहोरीबंद तहसील (Bahoriband Tehsilके पास स्थित है। आप इस मंदिर पर अपनी गाड़ी से आसानी से आ सकते हैं। इस मंदिर तक कोई भी टैक्सी या बस वगैरह नहीं चलती है। आपको अपनी गाड़ी से ही आना होगा। इस मंदिर तक आने के लिए आपको अच्छी सड़क मिल जाती है, या बहोरीबंद तहसील (Bahoriband Tehsil) से जो कटनी जिले की तहसील है वहां से 3 या 4 किलोमीटर दूर होगा, तो आप यहां पर अपनी गाड़ी से आसानी से आ सकते हैं।

Bahoriband-Kankali Devi Temple Tigawa (कंकाली देवी मंदिर )

तिगवा में स्थापित पत्थर के शिवलिंग 

आपको यहां पर आकर बहुत ही सुंदर कंकाली देवी का मंदिर (Kankali Devi Temple) देखने को मिलता है, जो करीब 1000 साल पुरानी है। यह मंदिर सपाट छत वाला है। मंदिर के सामने छोटा सा आंगन बना हुआ है, जो जिसके बीच में एक हवन कुंड बना हुआ है। मंदिर के बाजू में ही एक बोर्ड लगा हुआ है, जिसमें मंदिर के बारे में जानकारी दी गई है। इस मंदिर में आपको खूबसूरत पत्थर पर की गई  नक्काशी देखने मिलती है। मंदिर पर खंभे बने हुए हैं, दो खंभे बने हुए हैं। जिस पर आपको खूबसूरत फूलों की आकृतियां देखने मिलती है। जिसको पत्थर पर उकेरकर बनाया गया है। मंदिर की दीवारों पर आपको भगवान विष्णु की खूबसूरत प्रतिमा देखने मिलेगी जिसको पत्थर पर उकेरकर कर बनाया गया है, जो बहुत खूबसूरत लगती है। इसके अलावा यहां पर भगवान पार्श्वनाथ की भी प्रतिमा आपको देखने मिलती है। यह मंदिर बहुत खूबसूरत है और मंदिर की जो छत है। वह सपाट है, मतलब किसी भी तरह का यहां पर गुंबद नहीं बना हुआ है। यह जो पूरा मंदिर है, यह पूरा मंदिर पत्थर से बना हुआ है और मंदिर के अंदर गर्भ गृह में कंकाली माता की प्रतिमा स्थित है। जिनके दर्शन आप कर सकते हैं। यहां पर वैसे तो जब हम लोग गए थे, तो ताला लगा था मगर किसी खास अवसर पर यह मंदिर खोला जाता है, और आप भगवान जी के दर्शन कर सकते है। आप माता जी के दर्शन कर सकते हैं। 

वहां पर कंकाली देवी की मंदिर (Kankali Devi Temple) के अलावा और भी बहुत सारी मूर्तियां है, जो आप देख सकते हैं। यहां पर जितने भी मूर्तियां हैं। वह सारी मूर्तियां पत्थर की बनी हुई है। यहां पर आपको एक वॉचमैन भी है, जो इस मंदिर की देखरेख करता है। यह एक ऐतिहासिक धरोहर है। 

Bahoriband-Kankali Devi Temple Tigawa (कंकाली देवी मंदिर )

 पत्थर की खूबसूरत कलाकृति 

इस जगह पर बहुत कम लोग आते हैं। इस जगह को देखने के लिए क्योंकि इस जगह की जानकारी काफी लोगों को नहीं है। मगर यह जगह खूबसूरत है। 

यहां पर चारों तरफ पत्थर की बहुत सारी अलग-अलग प्रकार की कलाकृतियां मौजूद है, जिन्हें आप देख सकते हैं। इस जगह पर कंकाली देवी जी के मंदिर (Kankali Devi Temple) के अलावा भी एक अन्य मंदिर स्थित है, जो शायद दुर्गा जी को समार्पित है।  यहां पर विशेषकर यहां के गांव वाले आते हैं। कंकाली देवी जी (Kankali Devi jiकी पूजा करने के लिए। 

Bahoriband-Kankali Devi Temple Tigawa (कंकाली देवी मंदिर )

दुर्गा माता का मंदिर 

यहां पर आप भगवान शिव जी के बहुत से शिवलिंग देख सकते हैं, जो पुराने समय के है। ये शिवलिंग पत्थर पर बना हुआ है। हम ने यहां पर तीन या चार शिवलिंग देखें थे। 

यह जो जगह है, वह तिगमा (Tigawa) नाम से प्रसिद्ध है। यहां जगह छोटा से एरिया में ही फैली हुई है और यह जगह चारों तरफ से बाउंड्री वॉल से घिरा हुआ है।  यहां पर आपको किसी भी तरह की एंट्री फी नहीं लगती है अंदर आने के लिए। यहां पर आकर घूम सकते हैं। यहां पर मंदिर भी है। यहां पर दुर्गा जी का जो मंदिर है। वहां पर पूजा होती रहती है और लोग यहां पर आकर भंडारे करते रहते हैं। हम लोग जब इस जगह पर आए थे। तब यहां पर पूजा हो रही थी और भंडारा बनाया जा रहा था। 

हम लोग इस जगह पर घूमने के लिए अपनी स्कूटी से आए थे। हम लोग पहले रूपनाथ मंदिर घूमे थे। उसके बाद हम लोग तिगमा (Tigawa) के कंकाली देवी मंदिर आए थे। यह जगह रूपनाथ धाम करीब 10 या 12 किलोमीटर दूर होगा। आप रूपनाथ धाम से इस जगह में आराम से जा सकते हैं।

यहां पर हम लोगों को काफी अच्छा लगा और यहां पर ज्यादा भीड़ भाड़ नहीं रहती है। यहां पर गांव वाले ही लोग रहते है, तो आप यहां पर अपनी फैमिली के साथ आ सकते हैं और अपने दोस्तों के साथ भी आ सकते हैं। अगर आप  पुरानी चीजें देखने के शौकीन हैं, तो आप यहां पर जरूर आकर देख सकते हैं। यहां पर आपको मंदिर के बाजू में ही एक तालाब है। 

हमें इस जगह आ कर बहुत अच्छा लगा। हम इस जगह दो बार आ चुके हैं और यहां पर काफी अच्छा और शांत माहौल रहता है। आप भी यहां आ सकते हैं और अपना अच्छा समय बिता सकते हैं। यहां पर आने के लिए अच्छी सड़कें हैं, तो आप अपनी गाड़ी से आसानी से आ सकते हैं। 

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Tilwara Ghat - The beautiful ghat of the Narmada River.

तिलवारा घाट - जबलपुर का दर्शनीय स्थल


जबलपुर जिले की नर्मदा नदी पर बहुत सारे घाट बने हुए हैं और सारे ही घाट बहुत खूबसूरत और दर्शनीय है। आज हम उन्हें घाटों में से एक घाट की बात करने वाले हैं। आज हम तिलवारा घाट (Tilwara Ghat) की बात करेगें। 

तिलवारा घाट (Tilwara Ghat) जबलपुर में स्थित नर्मदा नदी पर बना हुआ एक और खूबसूरत घाट है। यह घाट खूबसूरत है और इस घाट में बहुत सारे मंदिर है। जिसको देखकर आपको बहुत अच्छा लगेगा। यह घाट बहुत खूबसूरती से बनाया गया है। यहां पर आपको मंदिर भी देखना मिलते हैं, जो अलग-अलग मंदिर हैं। 

Tilwara Ghat - The beautiful ghat of the Narmada River.

बड़े पुल का खूबसूरत नजारा 


तिलवाराघाट (Tilwara Ghat) में नर्मदा नदी के ऊपर से पुल बना हुआ हैं। यहां पर दो पुल बने हुए है। एक पुल पुराना है जो शायद अग्रेजों के समय में बना हुआ है। एक पुल अभी नया बना हुआ, जो सिवनी होते हुए नागपुर को जोड़ता है। यह हाईवे रोड है। यह रोड अच्छी है, हम इस रोड पर जा चुके है। यहां पर रोज शाम को मां नर्मदा जी की आरती की जाती हैं। नर्मदा जी मे दीप दान करना एवं शाम को घाट किनारे बैठना बहुत अच्छा लगता है।

Shani Devta Temple of Tilwara Ghat
तिलवारा घाट का शनि देवता का मंदिर

तिलवारा घाट का सबसे ज्यादा फेमस है - शनि भगवान जी का मंदिर 

शनि भगवान जी का मंदिर यहां पर बहुत अधिक फेमस है। यहां पर हर शनिवार को लोगों की भीड़ जमा होती है। शनि भगवान जी के दर्शन करने के लिए यहां पर लोग शनि भगवान जी को तेल चढ़ाने आते हैं और उनसे अपने अपने कष्टों को दूर करने के लिए प्रार्थना करते हैं। शनि भगवान जी के मंदिर में आपको शंकर जी की भी विशाल मूर्ति देखने मिलती है। शंकर जी के साथ पार्वती माता की मूर्ति भी स्थापित है। आपको यहां पर आकर बहुत अच्छा लगता है। शनि भगवान के मंदिर के पास आपको दुकान मिल जाती है, जहां पर शनि भगवान को चढाने के लिए फुल एवं तेल मिल जाती है। 

Tilwara Ghat - The beautiful ghat of the Narmada River.

तिलवारा घाट में स्थित से भगवान जी का मंदिर 


Hanuman Temple of Tilwara Ghat
तिलवारा घाट का हनुमान मंदिर


तिलवारा घाट पर हनुमान जी का मंदिर भी है, जो बहुत खूबसूरत है। यहां हनुमान जी की बहुत ही भव्य प्रतिमा है। आपको यहां पर देखने के लिए बहुत ही खूबसूरत मंदिर देखने मिलेगा।

Kali Ji's statue of Tilwara Ghat
तिलवारा घाट की काली जी की प्रतिमा


काली जी की भव्य प्रतिमा तिलवारा घाट में नर्मदा नदी के किनारे स्थित है। यह प्रतिमा बहुत ही खूबसूरत है। यह प्रतिमा नर्मदा नदी के किनारे स्थित है।  यहां पर नर्मदा नदी के किनारे यह मंदिर खुले आसमान के नीचे स्थित है, जो खूबसूरत है। यहां पर काली माता की प्रतिमा भव्य है जो अच्छी लगती है, देखने में आंखों को सुकून मिलता है।


Tilwara Ghat - The beautiful ghat of the Narmada River.

छोटे पुल का खूबसूरत नजारा 


तिलवारा घाट (Tilwara Ghat) में बड़ा पुल और छोटा पुल दोनों ही उपस्थित है। बड़े पुल में भारी वाहन का आना जाना होता है। छोटा पुल अब बंद कर दिया गया है। शायद पहले छोटे पुल से ही आने जाने का काम किया जाता होगा। बड़े पुल के बनने के कारण छोटे पुल का उपयोग बंद कर दिया गया है। छोटा पुल जो है, वह अंग्रेजों के जमाने का बना हुआ है। छोटा पुल बहुत खूबसूरत है और नर्मदा नदी में अभी भी खड़ा हुआ है। आप बड़े पुल को भी देख सकते हैं। यह भी बहुत खूबसूरत लगता है। यहां पर छोटा पुल में बहुत सुंदर पेंटिंग बनाई गई है। जो बहुत खूबसूरत लगती है। 

यहां पर आप चाहे तो बोट की सवारी भी कर सकते हैं। बोट की सवारी करने में आपको यहां पर बहुत मजा आएगा। यहां पर आप नहा भी सकते हैं। घाट के किनारे नहाने के लिए अच्छी व्यवस्था है। आप यहां पर नहाते है, तो ज्यादा गहराई में न जाए। यहां पर आधा घाट पक्का बना हुआ है और आधा घाट कच्चा बना हुआ है। तो आप यहां पर नहा भी सकते हैं। नदी के बीच में थोड़ा गहरा है, तो आप सावधानी बरतें। यहां पर बहुत से छोटे बच्चे और बहुत से युवा नर्मदा नदी पर बनें पुराने पुल के ऊपर से नर्मदा नदी में छलांग लगाते हैं। यह खतरनाक हो सकता है और इस तरह का स्टंट नहीं करना चाहिए। यहां पर आपको बहुत अच्छा लगेगा।

बरसात में यहां पर बाढ जैसे माहौल बन जाता है और पूरा पानी से घाट और  मंदिर वगैरह सब जलमग्न हो जाते हैं।


Tilwara Ghat - The beautiful ghat of the Narmada River.

          तिलवारा घाट में स्थित से भगवान जी का शिवलिंग 

नर्मदा नदी के तिलवारा घाट (Tilwara Ghat) में बहुत ही खूबसूरत मूर्तियां आपको देखने मिल जाते हैं। यहां पर नर्मदा नदी के किनारे अलग-अलग शिवलिंग रखे गए हैं। जहां पर आप शंकर जी के दर्शन और उनकी पूजा कर सकते हैं। 

यहां पर आप पिकनिक मनाने आ सकते हैं। आप यहां पर अपने दोस्त लोगों के साथ आ सकते हैं। यह अच्छी जगह है। आपको यहां पर आकर बहुत अच्छा लगेगा। 

तिलवारा घाट (Tilwara Ghat) जबलपुर में स्थित सबसे अच्छी घूमने वाली जगह में से एक है। तिलवारा घाट (Tilwara Ghat) में आप असानी से आ सकते है। यहां पर आप अपने गाड़ी से आ सकते हैं। आप यहां पर आटो से भी आ सकते है। तिलवारा घाट (Tilwara Ghat) जबलपुर से करीब 20 से 25 किलोमीटर दूर होगा। आप तिलवारा घाट (Tilwara Ghat) पर बरगी हिल्स वाली रोड से जा सकते हैं या आप चाहे तो मेडिकल रोड से भी जा सकते हैं। दोनों रोड से आप तिलवारा घाट (Tilwara Ghat) तक पहुंच सकते हैं और दोनों रोड अच्छी है पक्की रोड है। 

यहां पर घाट के पास दुकानें भी लगी रहती है। आप नर्मदा मैया को प्रसाद वगैरह चढ़ा सकते हैं। मगर मेरे हिसाब से आपको नर्मदा मैया में किसी भी तरह का प्रसाद वगैरह नहीं चढ़ाना चाहिए। आप अगर प्रसाद वगैरह लेते हैं, तो उसे गरीबों में बांट देना चाहिए। क्योंकि आपको पता है कि नर्मदा माई हमारे द्वारा डाले गए प्रसाद के कारण और दीप दान के कारण गंदी होती है, इसलिए आप नर्मदा नदी पर कचडा न डालें। 


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Paat Baba Temple, Jabalpur - पाठ बाबा मंदिर, जबलपुर

Famous Hanuman Temple of Paat Baba Temple Jabalpur.
पाठ बाबा मंदिर - जबलपुर का प्रसिद्ध हनुमान मंदिर


जबलपुर (Jabalpur) एक प्रसिद्ध शहर है। जबलपुर (Jabalpur)  मध्य प्रदेश का एक प्रसिद्ध जिला है। जबलपुर में आपको बहुत सारे दर्शनीय स्थल देखने मिलते है। हम आज एक जबलपुर (Jabalpur) में स्थित एक बहुत खूबसूरत मंदिर की बात करने वाले है। आप इस जगह पर जाकर अपना बहुत अच्छा टाइम बता सकते हैं। आज हम आपको लेकर चल रहे हैं  पाठ बाबा मंदिर (Paat Baba Temple)

Paat Baba Temple, Jabalpur - पाठ बाबा मंदिर, जबलपुर


हनुमान जी का मंदिर 


पाठ बाबा मंदिर (Paat Baba Temple) बहुत खूबसूरत मंदिर है। यहां का वातावरण है बहुत बढ़िया वातावरण है। यहां पर चारों तरफ ऊंचे ऊंचे पहाड़ हैं। यहां पर हनुमान जी का मंदिर है, जो बहुत फेमस है। 

यह मंदिर जिस एरिया में स्थित है। वह पूरा मिलेट्री एरिया लगता है। पाठ बाबा मंदिर (Paat Baba Temple) का वातावरण शांत है। यहां पर आपको बहुत शांति मिलती है, क्योंकि यहां पर किसी भी तरह का शोर-शराबा नहीं रहता है। मंदिर जाने का रास्ता और मंदिर बहुत अच्छी तरह से साफ सुथरा है। 

पाठ बाबा मंदिर (Paat Baba Temple) पहुंचने के लिए आपको घमापुर के आगे आना पड़ता है। घमापुर के आगे सतपुला बाजार पड़ता है। सतपुला बाजार से आपको आगे आना पड़ता है। आपको यहां पर गन कैरिज फैक्ट्री देखने मिलती है। इस  फैक्ट्री से आप आगे बढ़ते हैं, तो आपको मंदिर जाने का रास्ता दिखाई देगा। मंदिर जाने के लिए रास्ते में ही मंदिर का प्रवेश द्वार बनाया गया है। इस प्रवेश द्वार से होते हुए आप मंदिर जा सकते है। यहां पर जो रास्ता है वहां चढाई वाला रास्ता होता है।   

Paat Baba Temple, Jabalpur - पाठ बाबा मंदिर, जबलपुर

मंदिर का प्रवेश द्वार 


आप मंदिर तक पहुंच जाते हैं। यहां पर पार्किंग के लिए बहुत बड़ा स्पेस दिया गया है। अपनी गाड़ी खड़ी कर सकते हैं। उसके बाद आप मंदिर के प्रवेश द्वार पर पहुंचते है। तो मंदिर परिसर के प्रवेश द्वार पर आपको हनुमान जी की एक बहुत ही अद्भुत प्रतिमा देखने मिलती है, जो दीवार पर उकेरी गई है। यह पेंटिंग बहुत अच्छी लगती है। मंदिर परिसर में अंदर जाने के लिए लोहे का गेट है। लोहे के गेट को बंद ही रखा जाता है। लोहे के गेट के के बाजू में जो छोटा गेट है। उसे खोला जाता है भक्तों के अंदर जाने के लिए।

Paat Baba Temple, Jabalpur - पाठ बाबा मंदिर, जबलपुर

मंदिर परिसर का प्रवेश द्वार 

पाठ बाबा मंदिर (Paat Baba Temple) में आपको आकर बहुत अच्छा लगेगा। क्योंकि यहां पर बहुत शांति है। इस मंदिर में भगवान हनुमान जी की बहुत ही आकर्षक प्रतिमा है। इसके अलावा यहां पर यह जो मंदिर है। वह बहुत बड़े क्षेत्र फैला हुआ है।  मंदिर परिसर में हनुमान जी का मंदिर बना हुआ है और हनुमान जी की बहुत ही आकर्षक प्रतिमा है। मंदिर परिसर में इसके अलावा दुर्गा जी का मंदिर भी बना हुआ है और दुर्गा जी की बहुत खूबसूरत विद्मान है। परिसर में शंकर जी का शिवलिंग भी स्थापित है। उनके लिए अलग मंदिर बना हुआ है। 

पाठ बाबा मंदिर (Paat Baba Temple) में बच्चों के खेलने के लिए आपको एक छोटा सा प्ले गांउड देखने मिल जाता है। जिसमें बच्चों के लिए झूले एवं फसलपटटी बनी हुई है। इसके अलावा मंदिर परिसर में बैठने की अच्छी व्यवस्था भी है। यहां पर चेयर बना हुआ है। आप मंदिर में कुछ टाइम बैठ सकते हैं और अपना अच्छा समय बिता सकते हैं। 

Paat Baba Temple, Jabalpur - पाठ बाबा मंदिर, जबलपुर

मंदिर परिसर  


आप पाठ बाबा मंदिर (Paat Baba Temple) में जाते हैं, तो बाहर आपको दुकाने देखने मिलती है। यहां पर ज्यादा दुकान नहीं है। दो ही दुकानें थी जब हम गए थें। जहां पर हनुमान जी को चढ़ाने के लिए प्रसाद और अगरबत्ती मिल जाती है। यहां पर हुनमान जी को अर्पण करने के लिए लडडू भी मिलते है। आप प्रसाद लेकर मंदिर में प्रवेश कर सकते हैं। आप अंदर प्रवेश करते हैं। आप मंदिर में प्रवेश करते है तो उस रास्ते के दोनों तरफ आपको नारंगी रंग के झंडे देखने मिलते है। आपको चप्पल उतार के रखने के लिए स्टैड दिखता है। आप अपनी चप्पल को स्टैंड में रखकर आप पैर धोकर मुख्य हनुमान मंदिर में जा सकते हैं और हनुमान जी के दर्शन कर सकते हैं। यहां पर पूरे मंदिर में टाइल्स लगी हुई है। मंदिर परिसर में बगीचा भी है। जहां पर तरह तरह के पेड लगें हुए है। मंदिर में आपको लाइब्रेरी भी देखने मिलती है। लाइब्रेरी में पुस्तकों का संग्रह है।   आप किताबें पढ़ सकते हैं। इसके लिए शायद मेंबरशिप लेनी पड़ती होगी। अगर आप पुस्तक पढ़ने के शौकीन हैं। आप यहां पर आकर शांत माहौल में पुस्तक पढ़ने का अपना शौक पूरा कर सकते हैं। यहां पर आकर हम लोगों को बहुत अच्छा लगा था। यहां पर शांत माहौल था और बहुत सारे लोग यहां पर शाम को आते हैं। भगवान जी के दर्शन करते हैं। यहां पर सतपुला की बाजार भी भर्ती है, तो आप यहां से बाजार करते हुए अपने घर जा सकते हैं। बाकी यहां पर आपका मन बहुत शांत होता है और बहुत अच्छा लगता है।

यह बहुत आध्यात्मिक जगह है। मंदिर परिसर के चारों ओर जंगल है जिससे यहां पर मोर और बंदर आपको देखने मिलते है। यह पहाड़ी है। मंदिर का प्रबंधन बहुत अच्छा है। सभी चीजों की सुविधा यहां पर मौजूद है। मंदिर में कचरा न फैलाने के लिए नेाटिस बोर्ड लगा हुआ है और यहां पर डिस्टबिन भी रखा हुआ है। आप मंदिर में अपने परिवार और दोस्तों के साथ आ सकते है। 

हम लोग इस मंदिर में गए थे। इस मंदिर में बहुत सारे कुत्ते थे। जो शायद यहां पर रहते होगें। हम लोग को जानवर से बहुत पसंद है। तो हम लोगों ने उन्हें बिस्किट खिलाई। आप भी जानवरों को पसंद करते हैं तो आप उन्हें खाना देकर उनकी मदद कर सकते हैं। हम सब लोगों को जानवरों से प्यार करना ही चाहिए क्योंकि वह बहुत प्यारे होते हैं और वफादार होते हैं।

हम अपना लेख यहीं पर समाप्त करते हैं। आपको लेख पसंद आया होगा तो आप इस लेख को जरूर शेयर और अपने अनुभव हम से बाॅटे।

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