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रानी दुर्गावती समाधि स्थल - Rani Durgavati Samadhi | रानी दुर्गावती

रानी दुर्गावती समाधि - Rani Durgavati Samadhi sthal | Rani Durgavati punyatithi | रानी दुर्गावती का बलिदान दिवस रानी दुर्गावती समाधि स्थल रानी दुर्गावती समाधि स्थल 26 जनवरी को लगने वाला मेला मेले में मिलने वाला सामान रानी दुर्गावती एक गोंड रानी थी। रानी दुर्गावती का विवाह गोंड शासक संग्राम सिंह के बड़े पुत्र दलपति शाह के साथ सन 1542 में हुआ था। सन 1545 में रानी दुर्गावती  ने  पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम उन्होंने वीरनारायण रखा। कुछ ही वर्ष पश्चात सन 1550 में उनके पति दलपति शाह की मृत्यु हो गई। रानी ने शासन को अपने अधीन कर लिया और शासन की बागडोर संभाल ली। अकबर अपने राज्य का विस्तार कर रहा था, इसलिए उसने रानी के राज को हड़पने का सोचा। रानी दुर्गावती की मृत्यु कैसे हुई - R ani durgavati died अकबर का मानिकपुर का सूबेदार आसिफ अब्दुल मजीद आसिफ खा ने 50000 सैनिकों के साथ  नरई  नाले के समीप रानी दुर्गावती पर आक्रमण किया। रानी ने अपनी सेना के साथ उसका डटकर सामना किया और उसे मुंहतोड़ जवाब दिया और उसे पीछे धकेल दिया। दूसरे दिन आसिफ खा ने तोपखाने के साथ आक्रमण किया, जिससे रानी दुर्गावती को चोट आई औ

Pachmarhi Nagdwar Yatra || पचमढ़ी नागद्वार यात्रा

Pachmarhi Nagdwar Yatra || Nagdwar status || Nagpanchami fair in Pachmarhi || Accommodation arrangement in Nag Panchami Mela  पचमढ़ी नागद्वार यात्रा  नागद्वार (Nagdwar) एक ऐसी दुनिया जो पूरी तरह से अलग है, नागद्वार   (Nagdwar)  को आप एक तरह से प्रकृति खूबसूरती का स्वर्ग कहा जा सकता है। नागद्वार पचमढ़ी में स्थित है।  नागद्वार   (Nagdwar)  जाने के लिए आपको पूरा रास्ता जंगल का मिलता है। यह आपके लिए एक एडवेंचर ट्रिप हो जाता है क्योकि यह जो पूरा रास्ता वह कच्चा और पहाडी रास्ता है जिनसे चलकर आपको पैदल मजा आ जायेगा। आपको नागद्वार   (Nagdwar)  में पूरा वातावरण प्राकृतिक मिलेगा यह पूरा जंगल का एरिया है, यहां पर किसी भी तरह की सुविधाएं नहीं है। नागद्वार एक ऐसी दुनिया जो शहर की भीड़ भरी लाइफ से आपको एक सुकून भरा समय बिताने का मौका देती है। यह का प्राकृतिक वातावरण आपको आकर्षित करता है।  नागद्वार   (Nagdwar)  में जाने के लिए साल में सिर्फ 10 दिन का समय मिलता है, बाकि दिन में इस जगह में जाने मे पाबंदी है। नाग पंचमी के 10 दिन पहले से ही इस जगह जाने के लिए परमिशन मिल जाती है, और लोग दूर-दूर

Narmada Gau Kumbh, Jabalpur || नर्मदा गौ कुंभ मेला, जबलपुर

Narmada Gau Kumbh, Jabalpur नर्मदा गौ कुंभ मेला, जबलपुर नर्मदा गौ कुंभ नर्मदा नदी के किनारे लगा हुआ है। नर्मदा कुंभ में देश के कोने-कोने से साधु-संत सम्मिलित हुए हैं। नर्मदा गौ कुंभ मेले में आपको बहुत सारी अनोखी चीजों के दर्शन करने मिल जाएंगे, नर्मदा गौ कुंभ का मेला कई सालों में आयोजित किया जाता है। इस बार यह कुंभ मेला फरवरी महीने की 23 तारीख से शुरू होकर 3 मार्च तक चला है। नर्मदा गौ कुंभ मेलें में शामिल होने के लिए दूर-दूर से लोग आए हैं। Narmada Gau Kumbh, Jabalpur नर्मदा गौ कुंभ मेले में अयोजन मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले में ग्वारीघाट के गीताधाम मंदिर के सामने वाले मैदान में किया गया था। इस मेले में बहुत से मंदिर बनाये गये थें जहां पर मूर्तियां की स्थापना की गई थी। यहां पर मां दुर्गा, श्री राम चन्द्र, माता नर्मदा जी का मंदिर बनाये गए थे।  ग्वारीघाट के नर्मदा कुंभ में आपको साधु संतो के दर्शन करने मिलेंगे, और इस कुंभ के मेले में ग्वारीघाट के नर्मदा नदी के घाटों पर हजारों लोग श्रद्धा की डुबकी लगने देश के कोने से लोग आये हुए थे। नर्मदा गौ कुंभ का आयोजन का मुख्य उद्दे

Famous Fair in Madhya Pradesh :- Satdhara Mela / मध्यप्रदेश का प्रसिध्द मेला :-सतधारा का मेला

सतधारा का मेला Famous Fair in Madhya Pradesh :- Satdhara Mela सतधारा का मेला प्राचीन समय से हिरन नदी के तट पर लगता आ रहा है। यहां का वातावरण बहुत अच्छा है। यहां पर दूर दूर से लोगों आते मेले को  घूमने के लिए, यहां मेला लकडी से सम्बान्धित समान के लिए प्रसिध्द है। यहां पर नदी का नजारा बहुत शानदार होता है और नदी का पानी कंचन के सामान साफ है। यहां पर आपको बहुत अच्छा लगेगा। यहां पर अनेकों तरह की दुकानें लगती है।  मेला कब और कहाॅ लगता है सतधारा का मेला जबलपुर (Satdhara Mela jabalpur)जिले की सिहोरा तहसील से 20 किमी की दूरी पर कुम्ही नाम के गाॅव के पास लगता है। यहां पर हिरन नदी बहती है, नदी के बाजू से ही मेला लगता है। यहां पर नदी के समीप ही शंकर जी का मंदिर है और नदी के समीप में अनोखी प्रातिमा विराजमान है जो देखने में बहुत आकर्षक है। यहां पर हिरन नदी का नजारा बहुत सुंदर लगता है। यहां पर हिरन नदी सात धाराओं में बॅट जाती है। यहां मेला मकर संक्राति के बाद लगता है। हम लोग 20 जनवरी को गए थे तब मेला लगना शुरू हुआ था। बहुत सी दुकान न्यू खुलने की तैयारी हो रही थी। यहां पर आप अपनी गाडी स

Daldali Mata Mandir and Mela / दलदली माता मंदिर और मेला

यहां होती है हर मन्नत पूरी  Daldali Mata Mandir and Mela दलदली माता का मंदिर एक चमत्कारों वाली जगह है। जहां आने से लोगों के रोग दूर हो जाते है और निसंतान दंपति को संतान की प्राप्ति होती है। यहां पर दूर दूर से लोग आते है और यहां पर मध्यप्रदेश के सभी कोने के अलावा अलग अलग राज्य से भी लोग आते है।  Daldali Mela आज का दिन बहुत ठंडा है, दिसम्बर की महीने की 15 तारीख है आप लोगों को पता होगा कि आज का मौसम कैसा था। आज के दिन तो कही कही पर बरसात भी हो रही थी। अभी मौसम में परिवर्तन हुये थे बादल छाये हुए थे और अब से कडके की ठंड पडने वाली थी।  मै और मेरे दोस्त आज के दिन दलदली माता के दर्शन करने के लिए जाने वाले थे यहां पर बहुत बडा मेला भी लगता है। इस मेले में दूर दूर से लोग आते है। दलदली माता का मंदिर नैनपुर पिण्डरई रोड में पडता है। यहां मेला नैनपुर की जेवनारा गांव में लगता है। आप यहा पर अपने वाहन और रेलगाडी से आ सकते है। हम लोग अपनी स्कूटी से गये थे। अगर आप रेलगाडी से आते है तो यहां पर आपको जेवनारा स्टेशन में उतरना पडेगा उसके बाद आप पैदल ही इस मेले तक आ सकते है। अगर आप अपने