Pachmarhi Nagdwar Yatra || पचमढ़ी नागद्वार यात्रा

Pachmarhi Nagdwar Yatra || Nagdwar status || Nagpanchami fair in Pachmarhi || Accommodation arrangement in Nag Panchami Mela 

पचमढ़ी नागद्वार यात्रा 


नागद्वार (Nagdwar) एक ऐसी दुनिया जो पूरी तरह से अलग है, नागद्वार (Nagdwar) को आप एक तरह से प्रकृति खूबसूरती का स्वर्ग कहा जा सकता है। नागद्वार पचमढ़ी में स्थित है।  नागद्वार (Nagdwar) जाने के लिए आपको पूरा रास्ता जंगल का मिलता है। यह आपके लिए एक एडवेंचर ट्रिप हो जाता है क्योकि यह जो पूरा रास्ता वह कच्चा और पहाडी रास्ता है जिनसे चलकर आपको पैदल मजा आ जायेगा। आपको नागद्वार (Nagdwar) में पूरा वातावरण प्राकृतिक मिलेगा यह पूरा जंगल का एरिया है, यहां पर किसी भी तरह की सुविधाएं नहीं है। नागद्वार एक ऐसी दुनिया जो शहर की भीड़ भरी लाइफ से आपको एक सुकून भरा समय बिताने का मौका देती है। यह का प्राकृतिक वातावरण आपको आकर्षित करता है। 

नागद्वार (Nagdwar) में जाने के लिए साल में सिर्फ 10 दिन का समय मिलता है, बाकि दिन में इस जगह में जाने मे पाबंदी है। नाग पंचमी के 10 दिन पहले से ही इस जगह जाने के लिए परमिशन मिल जाती है, और लोग दूर-दूर से इस जगह में जाने के लिए आते हैं। 

नागद्वार (Nagdwar) में नाग देवता का बहुत ही रहस्यमय मंदिर है, इस मंदिर में लोगों की इच्छा पूरी होती है । यहां पर नाग देवता के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं और लोग 18 किमी का रास्ता पैदल चलकर इस मंदिर तक पहॅुचते है। 


Pachmarhi Nagdwar Yatra

  Padmshesh Temple

Pachmarhi Nagdwar Yatra

Pachmarhi Natural Beauty

नागद्वार की स्थिाति (Nagdwar status)

नागद्वार (Nagdwar) पचमढ़ी में स्थित है । पचमढ़ी मध्य प्रदेश का एकमात्र हिल स्टेशन है। पचमढ़ी होशंगाबाद जिले में स्थित है। होशंगाबाद मध्य प्रदेश का एक जिला है।  पचमढ़ी को सतपुड़ा की रानी कहा जाता है। नागद्वार (Nagdwar) सतपुडा टाइगर रिजर्व के घने जंगलों के बीच में स्थित है। यह पर चारों तरफ जंगल है। यहां पर किसी भी तरह की सड़क नहीं है, और ना ही किसी तरह की सुविधाएं हैं कि आप नागद्वार (Nagdwar) तक आसानी से पहुंच सके, यहां पर जो रास्ता है, वह भी पथरीला रास्ता है, कहीं-कहीं पर उबड़ खाबड़ है, तो कहीं कहीं पर बड़ी-बड़ी चट्टानें हैं। इन रास्तों से होते हुए आप नागद्वार (Nagdwar) के प्रसिध्द नागदेवता के मंदिर तक पहुंच जाते हैं। नागद्वार (Nagdwar) में पद्मशेष मंदिर बहुत प्रसिध्द है, इस मंदिर में बहुत ज्यादा भीड रहती है। नागद्वार (Nagdwar) के मंदिरों के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं बच्चे बूढ़े और जवान सभी तरह के लोग आपको इस यात्रा में देखने मिल जाते हैं। सभी लोग भोले बाबा का जयकार लगाते हुए नागद्वार की यात्रा करते है। 

नागद्वार (Nagdwar) की पहुॅचने के लिए आपको पहले पचमढ़ी आना होता है और पचमढ़ी पहुंचने के लिए सबसे अच्छा माध्यम रेल मार्ग है। आप रेलमार्ग के द्वारा पिपरिया पहुंचते हैं, फिर पिपरिया से आप बस के द्वारा पचमढ़ी पहुंच सकते हैं। पचमढ़ी पहुंचकर आपको नागद्वार (Nagdwar) में जाने के लिए जिप्सी मिल जाती है। 

Pachmarhi Nagdwar Yatra

Pachmarhi Natural Beauty 

Pachmarhi Nagdwar Yatra

Pachmarhi Natural Beauty 

Pachmarhi Nagdwar Yatra

Nagdwar Yatra

पचमढ़ी में नागपंचमी का मेला (Nagpanchami fair in Pachmarhi)

नागपंचमी के समय पचमढ़ी में विशाल मेले का आयोजन होता है। नाग पंचमी के समय पचमढ़ी में बहुत ज्यादा भीड रहती है क्योकि यहां पर मेला लगता है। पचमढ़ी में नागपंचमी के समय लोगों लाखों की संख्या में एकत्र होते है।   पचमढ़ी की रोड में आपको विभिन्न प्रकार के दुकानें देखने मिल जाती है और पचमढ़ी के मार्केट एरिया में भी बहुत सारी दुकान लगती है, यहां पर विशेषकर हम लोगों ने उनी कपडों का मार्केट देख । पचमढ़ी में नागपंचमी के समय उनी कपडे सस्ते दामों पर मिल जाते है। इसके अलावा आपको यहां पर और भी बहुत सी दुकाने देखने मिल जाती है जैसे कपडे की दुकान, ज्वेलरी की दुकानें, जूते चप्पल की दुकानें, और भी बहुत सी दुकानें मिल जाती है। यहां पर आपको जूते चप्पल भी अच्छे दामों पर मिल जाते है। हम लोगों ने यहां से जूते और चप्पल लिया था वो अभी तक चल रही है, यहां पर हम जूते और चप्पल दोनों ही 50 रू में मिले थे। 

पचमढ़ी में नागपंचमी के मेले के दौरान रहने की व्यवस्था (Accommodation arrangements during Nagpanchami fair in Pachmarhi)

नागपंचमी के मेले के समय पचमढ़ी में लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैंए नागाद्वार (Nagdwar) जाने के लिए। पचमढ़ी में बहुत ज्यादा भीड़ होती है। पचमढ़ी में बहुत सारे होटल है मगर नाग पंचमी के मेले के समय इन होटलों के दाम आसमान को छूते हैं मतलब यह होटल बहुत महंगे रहते हैं। जिन लोगों के पास ज्यादा पैसे नहीं रहते हैं, वह स्कूल या आश्रम में रह लेते हैं बाकी जिनके पास पैसे रहते हैं वो होटल ले सकते हैं। आपको बहुत सारे लोग ऐसे भी देखने मिल जाएंगे जो नाग पंचमी के मेले के दौरान रोड में सोते है। पचमढ़ी के मेले के समय में इन होटलों का प्राइस 1500 से उपर ही रहता है। जो लोग होटल के किराये को नहीं दे सकते है वो आश्रम या धर्मशाला में आश्रय ले लेते है। पचमढ़ी में नाग पंचमी के समय में जो भी आश्रम और धर्मशालाएं हैं वह पूरी तरह से लोगों से भरी हुई रहती हैं। नाग पंचमी के मेले के समय पचमढ़ी के जो सरकारी स्कूल रहते हैं उनमें भी बहुत भीड रहती है। लोग अपने साथ ओढने और बिछाने के लिए चादर और कंबल लेकर आते हैं और स्कूलों में जहां पर भी जगह मिलती है। वह अपने चादर और कंबल  बिछाकर सो जाते हैं। नागपंचमी के समय में बारिश का मौसम रहता है तो बहुत से लोग पन्नी की बरसाती भी लेकर आते हैं। जिनको स्कूल में जगह नहीं मिलती है वो खुले आसमान के नीचे ही सो जाते हैं पन्नी ओढ़ के।

हम लोगों को भी पैसे ज्यादा खर्च नही करना था इसलिए हम लोग पहले आश्रम गए थे। आश्रम पूरी तरह लोगों से भरा हुआ था और हम लोगों को जगह नहीं मिली थी । इसके बाद हम लोग स्कूल गए थे, जगह की तलाश करने तो हमें वहां पर भी जगह नहीं मिली थी। यह पर आपको अगर जगह चहिए तो आपको पहले आना होगा अपने सुना होगा पहले आया और पहले पाये वहीं यह पर लागू होता है। हम लोगों ने बहुत से होटल में भी पूछा मगर सब का प्राइस इस मेले के दौरान बहुत हाई रहता है, बहुत से होटल घूमने के बाद  हम लोगों को एक होटल मिल गया, जो कम प्राइस में था मगर उसमें सुविधाएं नहीं थी। न ही बेड अच्छा था और न ही बाॅशरूम था। बाॅशरूम के लिए हम लोगों को एक फलोर उपर जाना पडता था। इसलिए हम लोगों ने यह रूम बुक कर लिया क्योकि हम लोग को रात बिताना है, सोना बस था। दूसरे दिन हम लोग को यात्रा करने जाना था और उसके बाद अपने घर के लिए रवाना होना था। इस हिसाब से हम लोगों ने वह रूम ले लिए थे और जो भी प्राइस होटल वाले ने बताया था वो पे कर दिए था। 


Pachmarhi Nagdwar Yatra

Nagpanchmi Mela 

Pachmarhi Nagdwar Yatra

Nagdwar Yatra 

Pachmarhi Nagdwar Yatra

Nagdwar Yatra 

पचमढ़ी में नागपंचमी के मेले के दौरान खाने की व्यवस्था (Food arrangements during Nagpanchami fair in Pachmarhi)

नागपंचमी के मेले के समय पचमढ़ी में बहुत सारे श्रध्दालु आते है। नागपंचमी के मेले के दौरान यहां पर बहुत सारे प्राइवेट होटल खुल जाते है जिसमें बहुत कम दामों पर आपको खाना मिलता है। पचमढ़ी में के इन प्राइवेट होटल में आपको दाल चावल सब्जी रोटी खाने मिल जाती है 40 से 50 रू में। नागपंचमी के मेले में पचमढ़ी में भंडारा भी मिलता है। यहां भंडारा पचमढ़ी के मुख्य बाजार से थोडी दूरी पर होता है, यहां भंडारा पचमढ़ी झील के उस पार चर्च से थोडी ही दूरी पर भंडारा आयोजित किया जाता है। यहां पर भंडारा बहुत ही स्वादिष्ट होता है। आपको यहां पर सब्जी पूडी चावल कढी खाने मिल जाती है। इसके अलावा अगर आप सुबह समय से पहूॅच जाते है तो आपको चाय नाश्ता मिल जाता है।

आपको नागद्वार (Nagdwar) की यात्रा बहुत ही रोमांचकारी लगेगी। यहां पर आपको बहुत अच्छा लगेगा। नागाद्वार  (Nagdwar) पर पूरा माहौल प्राकृतिक है। 

Narmada Gau Kumbh, Jabalpur || नर्मदा गौ कुंभ मेला, जबलपुर

Narmada Gau Kumbh, Jabalpur

नर्मदा गौ कुंभ मेला, जबलपुर

नर्मदा गौ कुंभ नर्मदा नदी के किनारे लगा हुआ है। नर्मदा कुंभ में देश के कोने-कोने से साधु-संत सम्मिलित हुए हैं। नर्मदा गौ कुंभ मेले में आपको बहुत सारी अनोखी चीजों के दर्शन करने मिल जाएंगे, नर्मदा गौ कुंभ का मेला कई सालों में आयोजित किया जाता है। इस बार यह कुंभ मेला फरवरी महीने की 23 तारीख से शुरू होकर 3 मार्च तक चला है। नर्मदा गौ कुंभ मेलें में शामिल होने के लिए दूर-दूर से लोग आए हैं।

Narmada Gau Kumbh, Jabalpur
Narmada Gau Kumbh, Jabalpur


नर्मदा गौ कुंभ मेले में अयोजन मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले में ग्वारीघाट के गीताधाम मंदिर के सामने वाले मैदान में किया गया था। इस मेले में बहुत से मंदिर बनाये गये थें जहां पर मूर्तियां की स्थापना की गई थी। यहां पर मां दुर्गा, श्री राम चन्द्र, माता नर्मदा जी का मंदिर बनाये गए थे। 

ग्वारीघाट के नर्मदा कुंभ में आपको साधु संतो के दर्शन करने मिलेंगे, और इस कुंभ के मेले में ग्वारीघाट के नर्मदा नदी के घाटों पर हजारों लोग श्रद्धा की डुबकी लगने देश के कोने से लोग आये हुए थे। नर्मदा गौ कुंभ का आयोजन का मुख्य उद्देश्य नर्मदा नदी को स्वच्छ बनाए रखना और गौ माता की रक्षा करना है।

नर्मदा गौ कुंभ मेले में सभी प्रकार की व्यवस्था की गई थी। नर्मदा गौ कुंभ मेले में देश के कोने कोने से संत और साधु लोग आए हुए थे। कुंभ मेले का आयोजन का मुख्य उद्देश्य नर्मदा नदी की सफाई एवं गौ माता की रक्षा करना है। जिस तरह लोग नर्मदा नदी को दूषित करते जा रहे है, लोगों में जगरूकता फैलाना था कि नर्मदा नदी को स्वच्छ बनाए रखें। जिस तरह लोग नर्मदा नदी में कचरा डाल देते हैं, पुरानी मूर्तियां विसर्जित कर देते हैं और शैंपू और साबुन का यूज करते है, यहां तक कि नर्मदा नदीं में जानवरों के शव को भी बहा दिया जाता है। इन सभी क्रियाकलापों से नर्मदा नदी को दिन-ब-दिन प्रदूषित होती जा रही है। लोगों को इस कुंभ के माध्यम से जागरूक करना है कि नर्मदा नदी को स्वच्छ रखें क्योकि जल ही जीवन है और नर्मदा नदी का उदगम हमारे मध्यप्रदेश में हुआ है। नर्मदा नदी मध्यप्रदेश की भूमि को हरा भरा बनाते हुए बहती है तो इसकी स्वच्छता में हमें अपनी भागदारी दिखनी चहिए।

नर्मदा गौ कुंभ उद्देश्य गाय की रक्षा करना था। हमारे देश में गाय को माता का दर्जा दिया गया है। गाय की रक्षा परम धर्म है, नर्मदा गौ कुंभ में बताया गया है कि गाय इंसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है,  गाय क्यों पालना चाहिए, गाय पालने से क्या क्या फायदे हैं, गाय का दूध पीने से शरीर में क्या फायदे होते है, इन सभी बातों की जानकारी यहां पर उपस्थिति साधु-संतों के द्वारा बताया गया है। 

Narmada Gau Kumbh, Jabalpur
Narmada Gau Kumbh, Jabalpur

Narmada Gau Kumbh, Jabalpur
Narmada Gau Kumbh, Jabalpur
Narmada Gau Kumbh, Jabalpur
Narmada Gau Kumbh, Jabalpur

नर्मदा नदी से सवा करोड़ शिवलिंग इकट्ठा किए गए थे, और उन्हें एक स्थान पर रखा गया था, इसके अलावा यहां पर एक विशाल शिवलिंग का भी निर्माण किया गया था, जो देखने में बहुत ही खूबसूरत था, उस विशाल शिवलिंग के सामने नंदी भगवान की मूर्ति रखी गई थी। नर्मदा गौ कुंभ का दूसरा आकर्षण यहां पर शिव भगवान और माता पार्वती की अर्धनारीश्वर प्रतिमा थी, जो बहुत विशाल थी और देखने में बहुत ही आकर्षक थी। अर्धनारीश्वर प्रतिमा के पास ही में शिव भगवान जी की एक अलग प्रतिमा रखी गई थी,  यह प्रतिमा बहुत विशाल थी, शिव भगवान की प्रतिमा के सिर से गंगा जी को बहाया गया था। इन दोनों प्रतिमा के चारों तरफ फव्वारे लगाये गये थे। इस प्रतिमा को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आए हुए थे। यहां प्रतिमाएं नर्मदा गौ कुंभ मेले का मुख्य आकर्षण थी, इन प्रतिमाएं के साथ सभी लोगों ने फोटोग्राफी किया है।

सहस्त्रधारा जलप्रपात, मंडलाप्रियदर्शिनी प्वांइट पचमढ़ी, होशंगाबादरूपनाथ धाम, कटनी



नर्मदा गौ कुंभ मेले का तीसरा आकर्षण यहां पर लगने वाला मेला था। यहां पर लगने वाले मेले में भिन्न-भिन्न तरह की दुकानें लगी थी। आपको यहां पर बहुत सारे झूले देखने मिल जाते हैं। यहां पर तरह-तरह के झूले लगे हुए थे जो शायद ही अपने जबलपुर में किसी अन्य स्थान पर लगे हुए देखे होंगे। आप यहां पर झूला झूल सकते हैं और आपको झूलों की सवारी करके बहुत आनंद आएगा। यहां पर झूलों का चार्ज भी सामान्य ही था जैसे हर जगह होता है। नर्मदा कुंभ मेले में झूले मुख्यतः दो स्थलों पर लगे हुए थे, आयुर्वेदिक कॉलेज के बाजू में जो मैदान है वहां पर झूले और विभिन्न प्रकार की दुकानें लगाई गई थी । इसके अलावा श्री सिद्ध गणेश मंदिर के सामने जो मैदान है वहां पर भी झूले लगे हुए थे। इस जगह पर मौत के कुआं जिसमें दीवार पर गाडी चलाई जाती है, वहां भी यही लगा था। इस जगह पर भी तरह-तरह के झूले लगे हुए थे। नर्मदा कुंभ मेले में रोड के दोनों तरफ बहुत सारी दुकान लगी हुई थी। जहां आपको सस्ता सस्ता सामान मिल जाता है। नर्मदा गौ कुंभ मेले  पर झूलों के अलावा बहुत सारी दुकानें थी, जहां पर आप सामान खरीद सकते थे।

Narmada Gau Kumbh, Jabalpur
Narmada Gau Kumbh, Jabalpur


नर्मदा गौ कुंभ मेले लंदन के टाॅवर ब्रिज की प्रतिकृति भी बनाई गई थी। लंदन के टाॅवर ब्रिज बहुत बडा और फैमस है। इस टाॅवर ब्रिज के बीच से नदी से जहाज भी निकल सकते है। जब जहाज ब्रिज से बीच से निकलता है तो ब्रिज के बीच के हिस्सा उठ जाता है जिससे जहाज निकल जाते है।

नर्मदा गौ कुंभ मेले में साधु संतों के रुकने के लिए भी स्थान बनाया गया था। यहां पर बहुत सारे साधु एकत्र हुए थे, और यहां पर नागा साधु भी एकत्र हुए थे। इन साधु और नागा साधु के रूकने के लिए उत्तम व्यवस्थाए की गई थी। यहां पर उनके टेंट बनाया गया था और उनके खाने-पीने की अच्छी व्यवस्था थी। शौचालय की भी अच्छी व्यवस्था थी और हर जगह पीने के पानी की अच्छी व्यवस्था थी।

नर्मदा गौ कुंभ मेले सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए भी अलग स्टेज बनाया गया था। जहां पर सांस्कृतिक कार्यक्रम किए गए थे, यहां पर गौंडी नृत्य और विभिन्न प्रकार की नृत्य की प्रस्तुति भी गई थी।

नर्मदा गौ कुंभ मेले पर लोगों को फ्री चाय बांटने का भी इंतजाम किया गया था। यहां पर भंडारे का भी आयोजन भी किया गया था । आम लोग भी भंडारा जाकर ले सकते थे उसके लिए लोगों को लाइन लगाना पड़ता था।

Narmada Gau Kumbh, Jabalpur
Narmada Gau Kumbh, Jabalpur

नर्मदा गौ कुंभ साधु-संतों से प्रवचन सुनने के लिए अच्छी व्यवस्था की गई थी। यहां पर मंच बनाया गया था, जिसमें से साधु-संतों कथा सुनाते थे और यहां पर लोगों के बैठने के लिए कुर्सी की व्यवस्था की गई थी।

नर्मदा गौ कुंभ में अलग अलग यज्ञशाला में बनाई गई थी जिनकी परिक्रमा आम लोग कर सकते हैं। यहां पर नर्मदा जी की अलग यज्ञशाला बनी थी। गाय की रक्षा के लिए अलग यज्ञशाला बनी थी।

नर्मदा गौ कुंभ में लाइट और साउंड शो का भी आयोजन किया गया था। आपको यहां पर अपने मध्य प्रदेश के बारे में जानकारी लेजर शो के माध्यम से दी जा रही थी। लाइट और साउंड शो के माध्यम से बहुत अच्छी जानकारी दी जा रही थी।

नर्मदा गौ कुंभ में दूर से जो भी लोग कुंभ में शामिल होने आए हैं, उनके लिए विशेष रहने की सुविधा की गई थी । यहां पर अलग से टेंट लगाया गया था, जिससे दूर से आने वाले लोग यहां पर रह सके।

नर्मदा गौ कुंभ के अवसर पर पूरी सड़कों को खूबसूरती से सजाया गया था। गोरखपुर और रामपुर के चैरहे पर नर्मदा मैया की भव्य मूर्ति रखी गई थी। गोरखपुर से ग्वारीघाट तक की दीवारों पर खूबसूरत पेटिंग उकरी गई थी। ग्वारीघाट में भी अच्छी सफाई की गई थी। ग्वारीघाट के अवधपुरी काॅलोनी के पास से ही गाडी को रोकी जा रही थी। रेतनाके पास से ही ग्वारीघाट की सडक को बहुत खूबसूरती से सजाया गया था। यहां पर खूबसूरत लाइटे लगाई गई थी।

नर्मदा गौ कुंभ 24 फरवरी को आरंभ किया गया था। नर्मदा गौ कुंभ का शुभ आंरभ शास्त्री ब्रिज के नरसिंह मंदिर से किया गया था। शास्त्री ब्रिज के नरसिंह मंदिर साधु संतों की पेशवाई की गई थी। यहां पर साधु संत का स्वागत बहुत भव्य तरीके से किया गया था और शास्त्री ब्रिज से गीता धाम तक सड़क में जगह-जगह पर मंच लगाया गया था और साधु संतों का स्वागत किया गया था। संतों के स्वागत के लिए बहुत सारे झाकियां निकाली गई थी।

नर्मदा गौ कुंभ मेले में ग्वारीघाट के नर्मदा नदी के घाटों को भी खूबसूरती से सजाया गया था। नर्मदा घाट की अच्छी साफ सफाई की गई थी, इस कुंभ में जो भी लोग आए थे। वह नर्मदा नदी में जरूर डुबकी लगाए थे और उसके बाद संतो के द्वारा की गई कथा को ग्रहण किया था।

आदेगांव का किला, सिवनीमहादेव मंदिर पचमढ़ी, होशंगाबाद


नर्मदा गौ कुंभ मेले में विभिन्न प्रकार के फूड स्टाल लगाए गए थे। जहां से अलग अलग तरह के फास्टफूड और चाय काफी का मजा ले सकते है। यहां पर पीने के पानी की भी अच्छी व्यवस्थाएं की गई थी, जगह-जगह पर पानी की व्यवस्था थी। इसके अलावा यहां पर शौचालय की जगह जगह पर व्यवस्था थी और यहां पर सफाई पर विशेष ध्यान दिया गया था । यहां पर पार्किंग में भी विशेष ध्यान दिया गया था, यहां पर पार्किंग की बहुत अच्छी व्यवस्था थी, दशहरा ग्राउंड में पार्किंग की व्यवस्था की गई थी। यहां ग्राउंड बहुत बड़ा है और इस ग्राउंड में पार्किंग की व्यवस्था की गई थी। नर्मदा गौ कुंभ मेला 3 तारीख को समाप्त हो गया है, मगर यहां का झूले का सेक्शन 8 तारीख तक चलेगा। 

Famous Fair in Madhya Pradesh :- Satdhara Mela / मध्यप्रदेश का प्रसिध्द मेला :-सतधारा का मेला

सतधारा का मेला

Famous Fair in Madhya Pradesh :- Satdhara Mela

सतधारा का मेला प्राचीन समय से हिरन नदी के तट पर लगता आ रहा है। यहां का वातावरण बहुत अच्छा है। यहां पर दूर दूर से लोगों आते मेले को  घूमने के लिए, यहां मेला लकडी से सम्बान्धित समान के लिए प्रसिध्द है। यहां पर नदी का नजारा बहुत शानदार होता है और नदी का पानी कंचन के सामान साफ है। यहां पर आपको बहुत अच्छा लगेगा। यहां पर अनेकों तरह की दुकानें लगती है। 
Famous Fair in Madhya Pradesh :- Satdhara Mela

मेला कब और कहाॅ लगता है

सतधारा का मेला जबलपुर (Satdhara Mela jabalpur)जिले की सिहोरा तहसील से 20 किमी की दूरी पर कुम्ही नाम के गाॅव के पास लगता है। यहां पर हिरन नदी बहती है, नदी के बाजू से ही मेला लगता है। यहां पर नदी के समीप ही शंकर जी का मंदिर है और नदी के समीप में अनोखी प्रातिमा विराजमान है जो देखने में बहुत आकर्षक है। यहां पर हिरन नदी का नजारा बहुत सुंदर लगता है। यहां पर हिरन नदी सात धाराओं में बॅट जाती है। यहां मेला मकर संक्राति के बाद लगता है। हम लोग 20 जनवरी को गए थे तब मेला लगना शुरू हुआ था। बहुत सी दुकान न्यू खुलने की तैयारी हो रही थी। यहां पर आप अपनी गाडी से आसानी से आ सकते है। गूगल मैप में भी सही दिशा निर्देश दिए गए है। आप यहां असानी से आ सकते है। इसके अलावा यहां पर बस भी चलती है मगर उनका टाइम टेबल का आपको ध्यान रखना होगा। 
Famous Fair in Madhya Pradesh :- Satdhara Mela
Satdhara Hiren river view

सतधारा मेले (Satdhara Mela)का महत्व

सतधारा का मेला लकडी से बने समान के लिए पूरे देश में प्रसिध्द है। यहां मेला करीब 300 साल प्राचीन समय से लगता हुआ आ रहा है। हिरन नदी के बाजू में शिव भगवान का मंदिर स्थित है। यहां पर रानी दुर्गावती के कार्यभारी गंगाराम गोसाई ने एक पर्थिव शिवलिंग बनाकर उनकी पूजा करते है। वहां शिवलिंग पत्थर में परिवर्तित हो गया। उस शिवलिंग की स्थापना इस मंदिर में कराई गई है और इस मेले का आरम्भ हो गया है। गंगाराम गोसाई की अग्रेजों से मुठभेड में मृत्यु हो गई थी और उनकी समाधि मंदिर के बाजू में स्थित है।
Famous Fair in Madhya Pradesh :- Satdhara Mela

सतधारा का मेला (Satdhara Mela)धार्मिक क्षेत्र भी है

यहां स्थान सात ऋषियों ने तपस्या और उनके प्रभाव के कारण जाना जाता था। कहा जाता है उनके तप के प्रभाव से नदी का वेग थम गया था। तब हिरन नदी ने ऋषियों से प्रर्थाना की उन्हे आगे जाने का मार्ग दिया जाये मगर ऋषियों ने कहा कि वह अपनी तपस्या बीच में नहीं छोडे सकते है, तब हिरन नदी अपने वेग को सात धाराओं में विभक्त करना पडा और नदी ऋषियों के बीच से होते हुए दूध की सामान धाराओं के सामान आगे प्रवहित हुई। इस कारण इस जगह का नाम सतधारा पडा। यहां पर कुम्ही गांव बसा हुआ है इसलिए इसे कुम्ही सतधारा कहा जाता है। 
Famous Fair in Madhya Pradesh :- Satdhara Mela
Hiren River view

मेरे विचार

यहां पर गाडी स्टैड का चार्ज बहुत ज्यादा लगा है 20 रू एक गाडी का ये मुझे लगा है। आप अपने विचार जरूर बताये। बाकी मेला बहुत अच्छा ये जगह बहुत मस्त है। नदी इस जगह ज्यादा गहरी भी नहीं है। यहां पर कई सारी दुकाने एवं झूले लगे है जहां पर आप मजे कर सकते है। यहां पर शंकर जी का मंदिर बहुत अच्छा है। 

Daldali Mata Mandir and Mela / दलदली माता मंदिर और मेला

यहां होती है हर मन्नत पूरी 

Daldali Mata Mandir and Mela


दलदली माता का मंदिर एक चमत्कारों वाली जगह है। जहां आने से लोगों के रोग दूर हो जाते है और निसंतान दंपति को संतान की प्राप्ति होती है। यहां पर दूर दूर से लोग आते है और यहां पर मध्यप्रदेश के सभी कोने के अलावा अलग अलग राज्य से भी लोग आते है। 

Daldali Mata Mandir and Mela
Daldali Mela

आज का दिन बहुत ठंडा है, दिसम्बर की महीने की 15 तारीख है आप लोगों को पता होगा कि आज का मौसम कैसा था। आज के दिन तो कही कही पर बरसात भी हो रही थी। अभी मौसम में परिवर्तन हुये थे बादल छाये हुए थे और अब से कडके की ठंड पडने वाली थी। 

मै और मेरे दोस्त आज के दिन दलदली माता के दर्शन करने के लिए जाने वाले थे यहां पर बहुत बडा मेला भी लगता है। इस मेले में दूर दूर से लोग आते है। दलदली माता का मंदिर नैनपुर पिण्डरई रोड में पडता है। यहां मेला नैनपुर की जेवनारा गांव में लगता है। आप यहा पर अपने वाहन और रेलगाडी से आ सकते है। हम लोग अपनी स्कूटी से गये थे। अगर आप रेलगाडी से आते है तो यहां पर आपको जेवनारा स्टेशन में उतरना पडेगा उसके बाद आप पैदल ही इस मेले तक आ सकते है। अगर आप अपने गाडी से आते है तो आपको यहां तक पक्की रोड मिल जाएगी। आप धूमा से होते हुए यहां पर आ सकते है। 

Daldali Mata Mandir and Mela
Daldali mata mandir



यहा मेला पूर्णिमा की दूसरे दिन से लगता है, यह मेला 7 दिन के लिए लगता है। यहा पर दूर दूर से लोग दलदली माता के यहा आते है और माता से मन्नत मानते है। यहां पर छोटे से क्षेत्र में पानी भरा हुआ है इस जगह की लोग पूजा करते है और मन्नत मानते है और जब उनकी मन्नत पूरी हो जाती है तो वो अपने बच्चे के साथ माता के दर्शन एवं पूजा करने आते है। इस दलदल के पानी के पास ही एक मंदिर बना हुआ है लोग यहां पर पूजा करते और चढाव चढते है। यहां पर जो लोग रोग से ग्रस्त होते वो लोग दलदल का पानी पीते है और मन्नत मानते है, जब उनकी रोग ठीक हो जाते है तो वो भी दर्शन एवं पूजा करने आते है। यहां पर छोटे से क्षेत्र में पानी भरा हुआ रहता है इस जगह से ही माना जाता है कि दलदली माता का उदगम हुआ है। यहां पर दलदली माता के दर्शन एवं पूजा के अलावा आप यहां पर मेले का आंनद भी ले सकते है। यहां पर विभिन्न प्रकार की दुकाने लगी होती है जहां पर आप सामान खरीद सकते है और यहां पर विभिन्न प्रकार के झूले भी लगे होती है आप झूले का आंनद ले सकते है। यहां पर नाटक एवं नौटकी का खेल भी चलता रहता है। यहां पर आप दलदली माता के दर्शन एवं मेले का आंनद ले सकते है। 

Daldali Mata Mandir and Mela
Daldali mela

यहां पर बहुत बडे क्षेत्र में मेला भरता है। इस बार हम लोगों के साथ यहां पर एडवेंचर हो गया यहां पर पानी बरस गया था और यहां पर खेत के बीच दलदली माता का मंदिर है मेला भी यही भरती है, यहां पर काली मिटटी है, बरसात के कारण यहां पर चलने मे मुश्किल आ रही थी। हम लोग तो यहां पर गिर भी गये थे, क्योंकि यहां पर जूते चिपक रहे थे । 

Daldali Mata Mandir and Mela
Daldali mata mandir


आपके लिए टिप्स :-

1. आप यहां पर अपना सामान संभाल कर रखें।
2. अगर शहर से आते है और अंजान है तो हाईवे रोड का प्रयोग करें।
3. अपनी गाडी को अच्छी तरह लाॅक करें।
4. अपने साथ पानी की बोतल लेकर चलें।
5. मेले को एजाॅय करें।