सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

Religious place लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

स्फटिक शिला चित्रकूट मध्य प्रदेश - Sphatik Shila Chitrakoot Madhya Pradesh

स्फटिक शिला चित्रकूट - Sphatik Shila Chitrakoot / स्फटिक शिला / मंदाकिनी नदी   स्फटिक शिला चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के किनारे पर स्थित बहुत ही सुंदर स्थल है। यह स्थल बहुत ही पवित्र है और यहां पर आपको एक प्राचीन शिला देखने के लिए मिलती है। इस शिला के बारे में कहा जाता है, कि इस शिला में श्री राम जी और माता सीता जी आराम करते थे और प्रकृति के नजारो का लुफ्त उठाते थे। यह शिलाखंड मंदाकिनी नदी के किनारे स्थित है।     स्फटिक शिला राम दर्शन संग्रहालय के बहुत करीब है। हम लोग जब यहां पर गए थे, तो हमारे ऑटो वाले ने हमें स्फटिक शिला के बहुत करीब उतार था। यहां पर उस टाइम ज्यादा भीड़ नहीं थी। यहां पर चने बेचने वाले और मछलियों का दाना बेचने वाले आपको देखने के लिए मिलते हैं, तो अगर आप चाहें तो मछलियों का दाना और चने ले सकते हैं। बंदरों को खिलाने के लिए। उसके बाद हम लोग स्फटिक शिला के पास गए, तो वहां पर एक पंडित जी बैठे थे, जो हमें इस शिला के बारे में जानकारी दिए।       स्फटिक शिला चित्रकूट का महत्व -  Importance of Sphatik Shila Chitrakoot स्फटिक शिला में श्री राम जी और माता सीता जी विश्राम कि

Akshay vat Prayagraj - अक्षय वट प्रयागराज

Akshay vat Allahabad अक्षय वट इलाहाबाद अक्षय वट इलाहाबाद ( प्रयागराज ) में स्थित एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यहां पर आपको एक प्राचीन वटवृक्ष देखने के लिए मिलता है। वट वृक्ष का मतलब होता है बरगद का पेड़ । इस वट वृक्ष को ही अक्षय वट के नाम से जाना जाता है। अक्षय वट का अर्थ होता है, कि कभी नष्ट नहीं होने वाला वटवृक्ष। यह वटवृक्ष आज भी हरा-भरा आपको देखने के लिए मिलेगा। यह वटवृक्ष सतयुग में भी उपस्थित था और सतयुग में इस वटवृक्ष के नीचे श्री राम जी ने विश्राम किया था। द्वापर युग में इस वट वृक्ष के नीचे श्री कृष्ण जी ने विश्राम किया था। यह  वटवृक्ष त्रेता युग में भी था। यह वटवृक्ष कलयुग में भी विद्यमान है और आप इस वटवृक्ष  प्रयागराज में जाकर देख सकते हैं।  अक्षय वट इलाहाबाद शहर में प्रयागराज ( इलाहाबाद   )  किले के अंदर स्थित है।  प्रयागराज ( इलाहाबाद ) किला गंगा नदी और यमुना नदी के संगम के पास ही में स्थित है। अक्षय वट के दर्शन करने के लिए किले के अंदर जाने के लिए रास्ता बना हुआ है। इस रास्ते में विकलांग लोग भी आराम से जा सकते हैं। छोटे से रास्ते से होते हुए आप मंदिर के परिसर में पहुंच

पातालपुरी मंदिर इलाहाबाद (प्रयागराज) - Patalpuri temple allahabad

पातालपुरी मंदिर प्रयागराज -  Patalpuri Temple Prayagraj पातालपुरी मंदिर इलाहाबाद -  Patalpuri Temple Allahabad पातालपुरी मंदिर इलाहाबाद (प्रयागराज) में प्रसिद्ध मंदिर है। पातालपुरी के नाम से ही आपको पता चल रहा होगा। जमीन के अंदर पाताल में मंदिर, जी हा यहां मंदिर जमीन के अंदर है। पातालपुरी का अर्थ होता है जमीन के अंदर और यह मंदिर जमीन के अंदर स्थित है। इसलिए इस मंदिर को पताल पुरी मंदिर कहा जाता है। इस मंदिर में जाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है।  पातालपुरी मंदिर इलाहाबाद किले के अंदर स्थित है। पातालपुरी मंदिर गंगा और यमुना नदी के संगम के पास ही में स्थित है। आप जब भी संगम घूमने के लिए आते हैं, तो इस मंदिर में दर्शन करने के लिए जरूर आ सकते हैं। पातालपुरी मंदिर तक जाने के लिए इलाहाबाद किले से रास्ता बनाया गया है। बाकी का पूरा किला पुलिस के कंट्रोल में है। बाकी पूरे किले को आप देख नहीं सकते हैं। मगर आप इस मंदिर को जरूर देख सकते हैं। किले की बाउंड्री वॉल के बाजू से रास्ता बनाया गया है। पातालपुरी मंदिर तक पहुंचने का। आप मंदिर के परिसर में पहुंचेंगे, तो आपको एक विशाल वृक्ष देखने के लिए मि

गंगा यमुना सरस्वती संगम स्थल - Ganga Yamuna saraswati sangam

गंगा यमुना  संगम -  Ganga Yamuna sangam गंगा यमुना सरस्वती  संगम -  Ganga Yamuna saraswati sangam गंगा, यमुना और सरस्वती नदी का संगम स्थल एक पवित्र धार्मिक स्थल है। यह हिंदुओं के लिए पवित्र स्थल है और यहां पर हर साल माघ मेले के समय हजारों की संख्या में लोग आते हैं और पवित्र गंगा नदी और यमुना नदी के संगम पर स्नान करते हैं। इस साल हम लोग भी गंगा और यमुना नदी के संगम पर स्नान करने के लिए गए थे।  गंगा और यमुना नदी का संगम स्थल इलाहाबाद शहर में स्थित है। इलाहाबाद शहर प्रयागराज के नाम से जाना जाता है। आप संगम स्थल पर ऑटो से पहुंच सकते हैं। यहां पर बहुत सारे ई-रिक्शा और ऑटो चलते रहते हैं, तो आप संगम तक आराम से पहुंच सकते हैं। हम लोग संगम में सुबह ही पहुंच गए थे और प्रयागराज किला के किनारे चलते चलते हम लोग घाट तक पहुंच गए। उसके बाद हमें बहुत सारे नाव वाले दिखे । वह सभी हम लोगों से पूछ रहे थे, कि आप लोग नाव से संगम में चलेंगे कि, नहीं चलेंगे।  प्रयागराज किले के किनारे से संगम की ओर जाते हुए हम लोग किले घाट में किनारे पर लगी हुई बहुत सारी नाव  हम लोगों ने सवारी वाली नाव से संगम तक जाने का प्

त्रिवेणी संगम प्रयागराज - Triveni Sangam Prayagraj

  त्रिवेणी संगम इलाहाबाद  Triveni Sangam Allahabad संगम स्थल इलाहाबाद एक पवित्र स्थल है। इस स्थल पर गंगा नदी, यमुना नदी और सरस्वती नदी का संगम हुआ है। यहां पर गंगा नदी दाएं तरफ से आई है और यमुना नदी बाएं तरफ से आई है, और जो सरस्वती नदी है। वह गुप्त है। आप जब यहां पर माघ मेले के समय आते हैं, तो आपको यहां पर चारों तरफ दूर-दूर तक कैंप देखने के लिए मिलते हैं, जो रेत के मैदानों पर बने हुए हैं। यहां पर आपको संगम पर जाने के लिए नाव की सवारी लेनी पड़ती है। नाव की सवारी लेने का एक अलग ही मजा रहता है। यहां पर यमुना नदी के किनारे बहुत सारी नावे आपको देखने के लिए मिलते हैं। आप इन नाव की सवारी लेकर संगम स्थल तक पहुंच सकते हैं। संगम स्थल पर पहुंच कर आपको एक लंबी  नाव की कतार देखने के लिए मिलती है, जो यमुना नदी और गंगा नदी के मध्य में है। यहां पर आपको एक और अंतर देखने के लिए मिलेगा। वह यह है, कि गंगा नदी का पानी जो है, वह छिछला है। मतलब यहां पर आप नहा सकते हैं और जो यमुना नदी का पानी है। वह गहरा है। मतलब आप यहां डुबकी मारेंगे, तो दोबारा ऊपर नहीं आएंगे। मतलब आप समझ सकते हैं। यहां नाव की कतार लगी है।