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स्फटिक शिला चित्रकूट मध्य प्रदेश - Sphatik Shila Chitrakoot Madhya Pradesh

स्फटिक शिला चित्रकूट - Sphatik Shila Chitrakoot / स्फटिक शिला / मंदाकिनी नदी


 
स्फटिक शिला चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के किनारे पर स्थित बहुत ही सुंदर स्थल है। यह स्थल बहुत ही पवित्र है और यहां पर आपको एक प्राचीन शिला देखने के लिए मिलती है। इस शिला के बारे में कहा जाता है, कि इस शिला में श्री राम जी और माता सीता जी आराम करते थे और प्रकृति के नजारो का लुफ्त उठाते थे। यह शिलाखंड मंदाकिनी नदी के किनारे स्थित है।  
 
स्फटिक शिला राम दर्शन संग्रहालय के बहुत करीब है। हम लोग जब यहां पर गए थे, तो हमारे ऑटो वाले ने हमें स्फटिक शिला के बहुत करीब उतार था। यहां पर उस टाइम ज्यादा भीड़ नहीं थी। यहां पर चने बेचने वाले और मछलियों का दाना बेचने वाले आपको देखने के लिए मिलते हैं, तो अगर आप चाहें तो मछलियों का दाना और चने ले सकते हैं। बंदरों को खिलाने के लिए। उसके बाद हम लोग स्फटिक शिला के पास गए, तो वहां पर एक पंडित जी बैठे थे, जो हमें इस शिला के बारे में जानकारी दिए।  
 
 

स्फटिक शिला चित्रकूट का महत्व -  Importance of Sphatik Shila Chitrakoot

स्फटिक शिला में श्री राम जी और माता सीता जी विश्राम किया करते थे और प्रकृति के प्रकृति के नजारों का आनंद उठाया करते थे। मान्यता है कि एक दिन माता सीता और श्री राम जी इसी चट्टान के ऊपर बैठकर मंदाकिनी नदी के विहंगम दृश्य को देख रहे थे। तब इंद्र के पुत्र जयंत ने कौवे का रूप धारण करके माता सीता के पैरों पर चोंच मार दी, जिसके कारण माता सीता के पैरों से खून बहने लगा। जब श्री राम जी ने माता सीता के पैरों से खून बहते हुए देखा। तब उन्हें बहुत गुस्सा आया और उन्होंने एक तिनके का बाढ़ बनाकर जयंत को मारा। जयंत अपनी जान बचाने के लिए तीनो लोक में भागा। मगर तीनो लोक में उसकी किसी ने भी मदद नहीं की। तब जयंत ने माता सीता के चरण में गिरकर माफी मांगी। माता सीता ने जयंत को माफ किया और जयंत को प्राण बच गए। उसी समय से कहा जाता है, कि कौवा की एक आंख में कम दिखाई देता है।  
 
पंडित जी ने हमें स्फटिक शिला के बारे में जानकारी दी और उसके बाद हम लोगों को स्फटिक शिला की परिक्रमा करने के लिए कहा। हम लोग ने इस स्फटिक शिला की परिक्रमा करें। स्फटिक शिला बहुत ही चिकना पत्थर है। आपको स्फटिक शिला में माता सीता के चरण चिन्ह भी देखने के लिए मिल जाते हैं। राम जी ने तिनके से धनुष बनाया था। उसका भी चिन्ह आपको देखने के लिए मिल जाता है। यहां पर जयंत कौवे का रूप धारण करके आया था। आप उसका चिन्ह चट्टान में उभरा हुआ देख सकते हैं। यहां पर आसपास का नजारा बहुत ही खूबसूरत है। मंदाकिनी नदी का दृश्य बहुत ही मनोरम है। यहां पर मंदाकिनी नदी गहरी है।  
 
स्फटिक शिला के आसपास बहुत सारे बंदर घूमते रहते हैं। इसलिए अगर आपके पास कुछ खाने पीने का सामान हो, तो आप संभाल कर रखें, नहीं तो वह आपसे सामान छीन सकते हैं। स्फटिक शिला के पास ही में आपको लक्ष्मण जी के चरण भी देखने के लिए मिल जाते हैं।  
 
स्फटिक शिला के ऊपर शेड लगा हुआ है। आप यहां पर आकर बैठना चाहे, तो बैठ सकते हैं। आपको यह अच्छा लगेगा। यहां  राम जी का मंदिर भी है। आप उनके दर्शन कर सकते हैं। यहां पर आपको यज्ञशाला देखने के लिए भी मिलती है, जहां पर हर साल फरवरी महीने में यज्ञ होता है। यहां पर आकर बहुत अच्छा लगता है। यहां का वातावरण बहुत ही शांत है। यहां से आप मंदाकिनी नदी का बहुत ही विहंगम दृश्य देख सकते हैं और आपको इस जगह पर आकर बहुत अच्छा लगेगा। यहां पर बहुत शांति है और सकारात्मक ऊर्जा महसूस होती है। 
 

स्फटिक शिला चित्रकूट की फोटो - Photo of Sphatik Shila Chitrakoot

 

 
स्फटिक शिला चित्रकूट मध्य प्रदेश - Sphatik Shila Chitrakoot Madhya Pradesh
मंदाकिनी नदी के किनारे स्थित स्फटिक शिला
 

स्फटिक शिला चित्रकूट मध्य प्रदेश - Sphatik Shila Chitrakoot Madhya Pradesh
स्फटिक शिला के पास स्थित बंदर

स्फटिक शिला चित्रकूट मध्य प्रदेश - Sphatik Shila Chitrakoot Madhya Pradesh
मंदाकिनी नदी के नजारे

स्फटिक शिला चित्रकूट मध्य प्रदेश - Sphatik Shila Chitrakoot Madhya Pradesh
मंदाकिनी नदी का विहंगम दृश्य

स्फटिक शिला चित्रकूट मध्य प्रदेश - Sphatik Shila Chitrakoot Madhya Pradesh
लक्ष्मण जी के चरण चिन्ह

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