इस्कॉन मंदिर इलाहाबाद - ISKCON Temple Allahabad / Allahabad Tourism

इस्कॉन मंदिर इलाहाबाद (प्रयागराज) - ISKCON mandir Allahabad (prayagraj) / इलाहाबाद यात्रा

 
इस्कॉन मंदिर इलाहाबाद का एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर श्री कृष्ण जी और राधा रानी को समर्पित है। इस्कॉन मंदिर इलाहाबाद शहर में यमुना नदी के किनारे बलुआ घाट के पास में स्थित है। इस मंदिर में आप बहुत ही आसानी से पहुंच सकते हैं। आप इस मंदिर में पैदल भी आ सकते हैं और  ऑटो से भी आ सकते हैं। इस मंदिर में आपको श्री कृष्ण जी की और राधा रानी जी की बहुत ही आकर्षक प्रतिमा के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। मंदिर के बाहर आपको गरुड़ भगवान जी के दर्शन करने मिल जाते हैं। मंदिर में बगीचा भी है, जिसमें सुंदर-सुंदर पुष्प खिले रहते हैं, जिनको देखकर मन खुश हो जाता है। मंदिर में गौशाला भी देखने के लिए मिल जाती है, जहां पर गायों की सेवा की जाती है। मंदिर में आपको एक छोटी सी शॉप भी देखने के लिए मिल जाती है, जहां से आप धार्मिक चीजें खरीद सकते हैं। मंदिर में आकर बहुत ही अच्छा लगता है।  
 
हम लोग इस्कॉन मंदिर में पैदल ही आए थे। हम लोग ओल्ड नैनी ब्रिज से घूमते हुए आए थे। हम लोग को रास्ते में ओम नमः शिवाय मंदिर भी देखने के लिए मिला था ओम नमः शिवाय मंदिर शिव भगवान जी को समर्पित है। यह मंदिर भी यमुना नदी के किनारे स्थित है। आप चाहे तो इस मंदिर में भी घूमने के लिए जा सकते हैं। हम लोग आगे बढ़े तो हम लोगों को बलुआघाट देखने के लिए मिला। बलुआघाट बहुत ही खूबसूरत घाट है। यह घाट यमुना नदी पर बना हुआ है और यह घाट पक्का बना हुआ है। इस घाट में आप नहा सकते है। यह कपड़े बदलने के लिए चेंजिंग रूम बनाए गए हैं। घाट के ऊपर साइट आपको एक प्राचीन संरचना देखने के लिए मिलती है। इस संरचना को बरादरी कहा जाता है। बरादरी देखने में बहुत ही खूबसूरत है और इसकी दीवारों पर आपको खूबसूरत नक्काशी भी देखने के लिए मिल जाती है। अंदर की तरफ दीवारों में भी इसमें नक्काशी की गई है। यहां पर छोटी-छोटी दो छतरियां भी बनी हुई है। वह भी आप देख सकते हैं। हम लोगों ने भी यहां पर फोटो खींचा और उसके बाद हम लोग इस्कॉन मंदिर की तरफ चल दिए।
 
इस्कॉन मंदिर बलुआघाट से करीब 500 से 600 मीटर दूर होगा। फिर हम लोग इस मंदिर की ओर पैदल ही चल दिए। हम लोग इस्कॉन मंदिर पहुंच गए। इस्कॉन मंदिर पहुंचकर सबसे पहले हम लोगों को इस्कॉन मंदिर का प्रवेश द्वार देखने के लिए मिला। प्रवेश द्वार के ऊपर ओम श्री श्री राधा वेणी माधव मंदिर का नाम लिखा हुआ था। हम लोग अंदर गए। मगर हम लोगों का किस्मत खराब थी, कि हम लोगों को श्री कृष्ण जी और राधा रानी जी के दर्शन करने नहीं मिले।  
 
हम लोग करीब 4 बजे इस मंदिर में गए थे। 4 बजे मंदिर बंद रहता है। सुबह और शाम के समय मंदिर खोला जाता है, तो आप अगर इस्कॉन मंदिर में घूमने के लिए आते हैं, तो टाइम का विशेष ध्यान रखें। ताकि आपको श्री कृष्ण और राधा जी के दर्शन हो सके। हम लोगों को मंदिर के बाहर स्थापित गरुड़ जी के दर्शन करने मिल गए थे। इसके अलावा हम लोगों ने यहां पर स्थित गार्डन देखा, जो बहुत ही खूबसूरत था। इस्कॉन मंदिर में हम लोगों को बहुत अच्छा लगा। यहां का वातावरण बहुत अच्छा था। आप यहां पर आएंगे, तो आपका मस्तिष्क को बहुत शांति मिलेगी। 
 

इस्कॉन मंदिर इलाहाबाद की फोटो - Photo of ISKCON temple Allahabad

 

इस्कॉन मंदिर इलाहाबाद - ISKCON Temple Allahabad / Allahabad Tourism
इस्कॉन मंदिर के प्रवेश द्वार पर लिखा नाम

इस्कॉन मंदिर इलाहाबाद - ISKCON Temple Allahabad / Allahabad Tourism
इलाहाबाद का प्रसिद्ध इस्कॉन मंदिर

इस्कॉन मंदिर इलाहाबाद - ISKCON Temple Allahabad / Allahabad Tourism
बलुआ घाट इलाहाबाद

इस्कॉन मंदिर इलाहाबाद - ISKCON Temple Allahabad / Allahabad Tourism
ओम नमः शिवाय मंदिर

इस्कॉन मंदिर इलाहाबाद - ISKCON Temple Allahabad / Allahabad Tourism
बलुआ घाट का सुंदर दृश्य


 
 


श्रीलंका मंदिर कौशांबी - Sri Lanka Temple Kaushambi / Kaushambi tourism

श्रीलंका मंदिर कौशांबी - Sri Lanka Temple Kaushambi / धम्म मित्र बुद्ध विहार कौशांबी - Dhamma Mitra Buddha Vihar Kaushambi

 
श्रीलंका मंदिर कौशांबी में स्थित एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर श्रीलंका देश की मदद से कौशांबी में बनाया गया है। इसलिए इस मंदिर को श्रीलंका मंदिर के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर बहुत ही खूबसूरती से बना हुआ है। हम लोग मंदिर के अंदर नहीं जा पाए थे, इसलिए हम लोगों ने मंदिर को बाहर से ही देखा। बाहर से ही मंदिर की बनावट बहुत ही खूबसूरत है। 
 
हम लोग कौशांबी में जितने भी मंदिर घूमे हैं या जितने भी प्राचीन स्थल घूमे हैं। वह सभी पैदल ही घूमे हैं। हम लोग अशोक स्तंभ स्थल और गोष्ट राम बिहार स्थल में पैदल घूम कर कौशांबी की तरफ आ गए। कौशांबी थाने से श्रीलंका टेंपल करीब 500 से 600 मीटर दूर होगा। हम लोग पैदल ही श्रीलंका टेंपल की तरफ चल दिए। हम लोग टेंपल पहुंच गए। टेंपल बाहर से बंद था। हम लोगों ने टेंपल के भीतर बैठे कर्मचारियों से पूछा कि टेंपल में हम लोग दर्शन कर सकते हैं, तो उन्होंने बोला कि अभी कोविड-19 कारण आप लोग मंदिर के अंदर नहीं आ सकते हैं। मंदिर को बाहर से ही देख सकते हैं। 
 
श्रीलंका मंदिर खूबसूरत था। मंदिर के ऊपर आपको सफेद संगमरमर की बुद्ध प्रतिमा देखने मिलेगी। मंदिर के सामने आपको दीवारों में हाथी का डिजाइन बना हुआ है, जो सुंदर लगता है।  मंदिर के अंदर आपको भगवान बुद्ध की प्राचीन प्रतिमाएं देखने के लिए मिल जाएगी। मगर हम लोग मंदिर के अंदर नहीं गए, तो हम लोगों को नहीं मिली। श्रीलंका मंदिर के बाजू में आपको एक और मंदिर देखने के लिए मिलेगा। 
 

धम्म मित्र बुद्ध विहार

श्रीलंका मंदिर के पास में ही आपको धम बौद्ध विहार स्थल देखने के लिए मिलता है। यहां पर आपको बुद्ध भगवान की आकर्षक प्रतिमा देखने के लिए मिल जाएगी। इसके अलावा यहां पर आपको एक अशोक स्तंभ में भी देखने के लिए मिलता है। इस अशोक स्तंभ की स्थापना सम्यक संघ के द्वारा किया गया है। इस अशोक स्तंभ की स्थापना 18 जुलाई 2010 को रविवार के दिन किया गया है। इसका उद्घाटन इंजीनियर बीएस कुशवाहा के द्वारा किया गया था। आप इस मंदिर को घूम सकते हैं।  यहां पर हम लोग मंदिर के परिसर में थे। मंदिर के अंदर हम लोग ने प्रवेश नहीं किया, क्योंकि यहां पर हमें कोई भी मंदिर का कर्मचारी नहीं मिला। आप यहां जाते हैं, तो मंदिर में अवश्य घूमे। उसके बाद हम लोग वापस कौशांबी के थाने के तरफ आ गए, क्योंकि हमें बस यही से मिलने वाली थी। 
 

श्रीलंका मंदिर कौशांबी की फोटो - Photo of Sri Lanka Temple Kaushambi


श्रीलंका मंदिर कौशांबी - Sri Lanka Temple Kaushambi / Kaushambi tourism
श्रीलंका मंदिर का प्रवेश द्वार


श्रीलंका मंदिर कौशांबी - Sri Lanka Temple Kaushambi / Kaushambi tourism
श्रीलंका मंदिर के सामने स्थित बौद्ध विहार

श्रीलंका मंदिर कौशांबी - Sri Lanka Temple Kaushambi / Kaushambi tourism
श्रीलंका मंदिर कौशांबी

धम्म मित्र बुद्ध विहार कौशांबी की फोटो - Photo of Dhamma Mitra Buddha Vihar Kaushambi



श्रीलंका मंदिर कौशांबी - Sri Lanka Temple Kaushambi / Kaushambi tourism
धम्म मित्र बुद्ध विहार कौशांबी

श्रीलंका मंदिर कौशांबी - Sri Lanka Temple Kaushambi / Kaushambi tourism
धम्म मित्र बुद्ध विहार में बना हुआ अशोक स्तंभ


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जवाहर तारामंडल इलाहाबाद (प्रयागराज) - Jawahar Planetarium Allahabad (Prayagraj)

Jawahar Taramandal Allahabad - जवाहर तारामंडल इलाहाबाद (प्रयागराज) / Taramandal Allahabad


 
प्रयागराज का जवाहर तारामंडल घूमने के लिए एक प्रमुख जगह है। अगर आप विज्ञान प्रेमी है, तो आपको यहां पर जरूर घूमने आना चाहिए, क्योंकि यहां पर विज्ञान से संबंधित बहुत सारी वस्तुएं आपको देखने के लिए मिल जाएगी। यहां पर आपको हमारा सौरमंडल देखने के लिए मिल जाएगा, जो यहां का महत्वपूर्ण आकर्षण है। जवाहर तारामंडल में स्काई शो होता है। इस कार्यक्रम में आप को खगोल अंतरिक्ष विज्ञान से संबंधित जानकारियां मिलेगी और इसमें डिजिटल त्रिआयामी आकाशीय कार्यक्रम भी होता है, जो बहुत मनोरंजक होता है और बच्चों के लिए ज्ञानवर्धक होता है। इस शो में प्रसिद्ध एस्ट्रोनॉट के बारे में जानकारी दी जाती है। आप यहां पर अपने बच्चों के साथ आ सकते हैं। यह शो अलग-अलग समय पर होता है और यह शो 1 घंटे का रहता है। आप इस शो को देखने के लिए टिकट लेकर जा सकते हैं और इसमें बच्चों को मनोरंजन के साथ-साथ ज्ञान भी प्राप्त होता है। 
 
जवाहर तारामंडल में आपको 3D शो देखने के अलावा भी बहुत सारी वस्तुएं देखने लायक है। यहां पर आपको रॉकेट का मॉडल देखने के लिए मिलता है। इसके अलावा आपको यहां पर न्यूक्लियर पावर प्लांट का मॉडल भी देखने के लिए मिलता है। आप यहां पर हमारे सबसे बड़े तारे सूरज के बारे में जान सकते हैं। सूरज के बारे में बहुत सारी जानकारी आपको यहां पर पढ़ने के लिए मिल जाएगी। यहां पर आपको सौर मंडल के बहुत सारे ग्रहों की जानकारी भी मिलेगी। 
 

जवाहर तारामंडल इलाहाबाद का समय - Jawahar Planetarium Allahabad timing

 
जवाहर तारामंडल के खुलने का समय 10 बजे से 5 बजे तक रहता है। जवाहर तारामंडल सोमवार को बंद रहता है और जवाहर तारामंडल में सरकारी छुट्टी के दिन भी अवकाश रहता है।
 
 
जवाहर तारामंडल आनंद भवन के परिसर में ही स्थित है। जवाहर तारामंडल में आप ऑटो या ई रिक्शा लेकर आ सकते हैं। इलाहाबाद शहर में आपको ई रिक्शा बहुत ज्यादा देखने के लिए मिल जाते हैं। आप ई रिक्शा से  इलाहाबाद शहर में सफर कर सकते हैं। जवाहर तारामंडल पर आप चाहे तो पैदल भी पहुंच सकते हैं। जवाहर तारामंडल के आस पास बहुत सारी जगह है, जहां पर आप घूम सकते हैं। इन जगह में शामिल है - आनंद भवन संग्रहालय, स्वराज भवन संग्रहालय, भरद्वाज आश्रम और भरद्वाज पार्क। यह सभी जगह जवाहर तारामंडल के पास ही में है, तो आप इन जगहों को घूम सकते हैं। जवाहर तारामंडल के सामने आपको बहुत ही खूबसूरत बगीचा देखने के लिए मिलता है, जो बहुत ही सुव्यवस्थित तरीके से बनाया गया हैै।
 

जवाहर तारामंडल इलाहाबाद टिकट की कीमत - Jawahar Planetarium Allahabad Ticket Price

 
जवाहर तारामंडल में प्रवेश के लिए ₹60 का शुल्क लिया जाता है।  आप ₹60 देकर यहां पर होने वाला 3डी कार्यक्रम भी देख सकते हैं, जो बहुत अच्छा होता है। 
 

जवाहर तारामंडल इलाहाबाद की फोटो - Photo of Jawahar Planetarium Allahabad


जवाहर तारामंडल इलाहाबाद (प्रयागराज) - Jawahar Planetarium Allahabad (Prayagraj)
जवाहर तारामंडल की एंट्री गेट

जवाहर तारामंडल इलाहाबाद (प्रयागराज) - Jawahar Planetarium Allahabad (Prayagraj)
जवाहर तारामंडल की बिल्डिंग 

जवाहर तारामंडल इलाहाबाद (प्रयागराज) - Jawahar Planetarium Allahabad (Prayagraj)
जवाहर तारामंडल का बोर्ड



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Anand Bhawan Allahabad - आनंद भवन इलाहाबाद

Anand Bhavan Allahabad (Prayagraj) - आनंद भवन इलाहाबाद (प्रयागराज) / Allahabad Tourism


 
आनंद भवन संग्रहालय प्रयागराज में स्थित एक मुख्य पर्यटन स्थल है। आप यहां पर भी घूमने के लिए आ सकते हैं। यहां पर भी आपको नेहरू परिवार से संबंधित बहुत सारी वस्तुएं देखने के लिए मिलेंगी, जो यहां पर संभाल कर रखी गई है। आनंद भवन संग्रहालय मुख्य सड़क में ही स्थित है। यह संग्रहालय प्रयागराज जंक्शन से करीब 5 किलोमीटर दूर होगा। आप यहां पर पैदल भी आ सकते हैं और बैटरी रिक्शा से भी इस संग्रहालय में बहुत आसानी से पहुंच सकते हैं। 
 

आनंद भवन इलाहाबाद टिकट की कीमत - Anand Bhawan Allahabad ticket price

 
आनंद भवन में प्रवेश का शुल्क लिया जाता है। आनंद भवन संग्रहालय में आपको 2 मंजिला इमारत देखने के लिए मिलेगी। यहां पर अगर आप नीचे वाली मंजिल में घूमते हैं, तो आपका ₹20 लगता है और अगर आप ऊपर वाली मंजिल में भी घूमना चाहते हैं, तो आपका कुल ₹70 लगेगा। 
 
 
आनंद भवन संग्रहालय के बाहर आप को बहुत बड़ा बगीचा देखने के लिए मिलेगा। इस बगीचे में तरह तरह के फूल लगे हुए हैं। इस बगीचे में एक तो बड़ी सी शिलाखंड रखा हुआ है शिलाखंड पर एक बोर्ड लगा हुआ है और उसमें लिखा है,
 
आनंद भवन 1926 
यह भवन ईट पत्थर के ढांचे से कहीं अधिक है। इसका हमारे राष्ट्रीय स्वतंत्रता संघर्ष में अंतरंग संबंध रहा है। इसकी चार दीवारों में महान निर्णय लिए गए हैं और इसके अंदर महान घटनाएं घटी है।  
 
आपको नीचे वाले मंजिल में अर्थात भूतल कक्ष में नेहरु जी परिवार से संबंधित बहुत सारी वस्तुएं देखने के लिए मिलेगी। यहां पर आपको उनके बैठक कक्ष देखने के लिए मिल जाएगा। मोतीलाल नेहरू का अध्ययन कक्ष देखने के लिए मिल जाएगा। मोतीलाल नेहरू का प्रसाधन कक्ष देखने के लिए मिल जाएगा।  प्रियदर्शनी इंदिरा का विवाह स्थल देखने के लिए मिल जाएगा। पैंट्री तथा भोजन कक्ष देखने के लिए मिल जाएगा। जवाहरलाल नेहरू के जीवन की प्रदर्शनी तथा पुस्तक विक्रय केंद्र देखने के लिए मिल जाएगा, जहां से आप पुस्तकें खरीद सकते हैं। अपने ज्ञान वर्धन के लिए।
 
प्रथम तल में या  ऊपर वाली मंजिल में आपको परिवारिक धरोहर प्रदर्शनी कक्ष देखने के लिए मिल जाएगा। जवाहरलाल नेहरू का कक्ष देखने के लिए मिल जाएगा। जवाहरलाल नेहरू प्रसाधन कक्ष देखने के लिए मिल जाएगा। कांग्रेस कार्यकारिणी कक्ष देखने के लिए मिल जाएगा। महात्मा गांधी कक्ष देखने के लिए मिल जाएगा। प्रियदर्शनी इंदिरा कक्ष देखने के लिए मिल जाएगा। 
 

आनंद भवन इलाहाबाद टाइमिंग - Anand Bhawan Allahabad Timing

 
संग्रहालय सुबह 10 बजे से शाम के 5 बजे तक खुला रहता है।  संग्रहालय में अवकाश सोमवार को रहता है और सरकारी छुट्टियों के दिन संग्रहालय बंद रहता है। आप आनंद भवन संग्रहालय में आकर अपने इतिहास से संबंधित बहुत सारी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। आपको यहां पर आकर अच्छा लगेगा। 
 

आनंद भवन इलाहाबाद की फोटो - Anand Bhawan Allahabad image


Anand Bhawan Allahabad - आनंद भवन इलाहाबाद
आनंद भवन संग्रहालय प्रयागराज

Anand Bhawan Allahabad - आनंद भवन इलाहाबाद
आनंद भवन संग्रहालय प्रयागराज



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खुसरो बाग प्रयागराज  

पातालपुरी मंदिर प्रयागराज  

गंगा यमुना सरस्वती संगम 

प्रयागराज का किला  

 

 

 



स्वराज भवन इलाहाबाद - Swaraj Bhawan Allahabad

स्वराज भवन इलाहाबाद (प्रयागराज) - Swaraj Bhawan Allahabad (Prayagraj) / Allahabad Tourism


 
स्वराज भवन एक प्राचीन इमारत है। यह इमारत प्रयागराज शहर में स्थित है। स्वराज भवन वर्तमान में एक संग्रहालय है और इस संग्रहालय में आपको नेहरू परिवार की बहुत सारी स्मृतियां देखने के लिए मिल जाएगी। स्वराज भवन प्रयागराज  शहर के बीचो बीच में स्थित है। आप स्वराज भवन में बैटरी रिक्शा से या पैदल भी पहुंच सकते हैं। स्वराज भवन प्रयागराज रेलवे जंक्शन से करीब 5 किलोमीटर दूर होगा। आप यहां पर पैदल पहुंच सकते हैं। 
 
स्वराज भवन के पास ही में आपको आनंद भवन भी देखने के लिए मिलता है। यहां पर तारामंडल भी  है, जहां पर आप जाकर 3डी इफेक्ट शो को देख सकते हैं। स्वराज भवन में आपको नेहरू परिवार की बहुत सारी वस्तु देखने के लिए मिल जाएगी, जो नेहरू परिवार के द्वारा उपयोग की जाती थी। 
 
स्वराज भवन एक बहुत बड़ी इमारत है। इस इमारत में हमारी पहली प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी का जन्म हुआ था। यहां पर आपको श्रीमती इंदिरा गांधी की बहुत सारी पेंटिंग देखने के लिए मिल जाएगी। यहां पर आपको प्राचीन समय में इस्तेमाल की जाने वाली बग्गी भी देखने के लिए मिल जाएगी। स्वराज भवन के सामने एक बहुत बड़ा गार्डन बना हुआ है, जहां पर तरह तरह के फूल लगाए गए हैं और गार्डन को सजाया गया है। स्वराज भवन में आपको गांधीजी का चरखा भी देखने के लिए मिल जाएगा। यहां पर आपको स्वतंत्रता आंदोलन की बहुत सारी तस्वीरें देखने के लिए मिल जाएगी। यहां पर स्वतंत्रता आंदोलन के समय बहुत सारी बैठक हुई है।
 

स्वराज भवन इलाहाबाद समय सारणी - Swaraj Bhavan Allahabad Time Table

 
स्वराज भवन में घूमने के लिए आप ऑटो से या पैदल पहुंच सकते हैं। सुबह 9 बजे से 5 बजे तक यह संग्रहालय खुला रहता है। स्वराज भवन में प्रवेश का शुल्क लिया जाता है। आप यहां पर आकर घूम सकते हैं और सारी चीजें देख सकते हैं। सोमवार के दिन संग्रहालय बंद रहता है और सरकारी छुट्टी के दिन भी संग्रहालय बंद रहता है। आप यहां पर आकर नेहरू परिवार के बारे में बहुत सारी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और हमारे इतिहास में क्या-क्या हुआ है। वह भी जान सकते हैं। यहां आकर आपको बहुत अच्छा लगेगा। 
 

स्वराज भवन इलाहाबाद की फोटो - Photo of Swaraj Bhavan Allahabad

 
 
 
स्वराज भवन इलाहाबाद - Swaraj Bhawan Allahabad
रोड पर लगा स्वराज भवन का बोर्ड

स्वराज भवन इलाहाबाद - Swaraj Bhawan Allahabad
स्वराज भवन का एंट्री गेट

 


54 feet high Hanuman ji temple Jhusi Allahabad - हनुमान मंदिर इलाहाबाद

54 फीट ऊंचे हनुमान जी का मंदिर झूसी इलाहाबाद (प्रयागराज) - 54 feet high Hanuman ji temple Jhusi Allahabad (Prayagraj) / इलाहाबाद यात्रा / Allahabad Tourism

 
54 फीट ऊंचे हनुमान जी का मंदिर इलाहाबाद का एक प्रसिद्ध मंदिर है। आप इलाहाबाद के झूसी एरिया में घूमने के लिए आते हैं, तो आपको यहां पर बहुत सारे मंदिर देखने के लिए मिलते हैं। इन मंदिरों में एक मंदिर और प्रसिद्ध है, जो हनुमान जी का मंदिर है। इस मंदिर में आपको हनुमान जी की 54 फीट ऊंची प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। यहां पर आपको 111 छोटे-छोटे शिवलिंग देखने के लिए मिलते हैं। यहां एक नर्वदेश्वर शिवलिंग स्थित है। नर्वदेश्वर शिवलिंग का मतलब है, कि यह शिवलिंग नर्मदा नदी से लाया गया होगा, क्योंकि नर्मदा नदी एक ऐसी नदी है, जिसके हर पत्थर में शिवलिंग है। इसलिए इसे नर्वदेश्वर शिवलिंग कहते हैं। यहां पर दुर्गा जी की विराट प्रतिमा आपको देखने के लिए मिल जाती है। माता सीता और राम जी की प्रतिमा भी देखने के लिए मिलती है। राधा और कृष्ण की प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। श्री लक्ष्मी नारायण जी की भी प्रतिमा देखने के लिए मिलती है और शंकर जी पार्वती जी की भी प्रतिमा देखने के लिए मिल जाएगी। यहां पर गणेश जी की भी आपको प्रतिमा देखने के लिए मिल जाएगी। यहां पर आपको बंदर के बहुत सारे स्टेचू भी देखने के लिए मिलते हैं। यहां पर शिव भगवान जी को अलग-अलग श्रृंगार से सजाया जाता है और उनकी पूजा की जाती है। 
 
यह हनुमान मंदिर इलाहाबाद शहर में झूसी एरिया में स्थित है। हम लोग इलाहाबाद के झूसी में समुद्र कूप को देखने के लिए गए थे। हम लोगों को इस मंदिर के बारे में भी पता चला और हम लोग फिर इस मंदिर में गए। इस मंदिर में आपको हनुमान जी की बहुत ही विशाल प्रतिमा देखने के लिए मिलती है, जो बहुत ही भव्य लगती है। यह जो मंदिर है, वह कलोनी के बीच में स्थित है। इसलिए यह मंदिर ढूंढने में आपको थोड़ी कठिनाई हो सकती है।
 
समुद्र कूप देखने के बाद हम लोग झूसी एरिया में गंगा नदी के किनारे घूमते हुए आगे बढ़े। यहां पर एक फुलकी वाले का ठेला लगा था। हम लोगों ने यहां से फुल्की खाया और फुलकी वाले से इस मंदिर के पता पूछा। फुलकी वाले ने हम लोगों को बताया कि आप सीधा चल आ जाइए। आपको वहां मंदिर देखने के लिए मिल जाएगा। हम लोग वहां से आगे बढ़कर सीधा आए। यह मंदिर कॉलोनी के बीच में बना हुआ है। इसलिए आपको इस मंदिर तक पहुंचने के लिए लोगों से इसका पता पूछना पड़ेगा। हम लोग जब मंदिर पहुंचे, तो मंदिर में ज्यादा भीड़ नहीं थी और हम लोगों ने हनुमान जी के दर्शन किए और यहां पर आपको शिवलिंग के भी दर्शन करने के लिए मिलते हैं। यहां पर बहुत ढेर सारे शिवलिंग रखे हुए हैं। यहां पर 111 शिवलिंग आपको देखने के लिए मिलेंगे। हर शिवलिंग अलग अलग है और यहां पर कुछ पंडित जी भी थे, जो यहां पर पूजा करने की तैयारी कर रहे थे, क्योंकि हम लोग शाम को यहां गए थे, तो शाम को यहां पर पूजा की तैयारी हो रही थी। आप भी यहां पर जाकर घूम सकते हैं। आपको भी यहां पर आकर बहुत अच्छा लगेगा। 
 
 
54 feet high Hanuman ji temple Jhusi Allahabad - 54 फीट ऊंचे हनुमान जी का मंदिर  झूसी इलाहाबाद
हनुमान जी की विशाल प्रतिमा

54 feet high Hanuman ji temple Jhusi Allahabad - 54 फीट ऊंचे हनुमान जी का मंदिर  झूसी इलाहाबाद
हनुमान जी की विशाल प्रतिमा

 


Khusro Bagh Allahabad (Prayagraj) - खुसरो बाग इलाहाबाद (प्रयागराज) / Allahabad tourism

इलाहाबाद का खुसरो बाग / खुसरो उद्यान / खुसरो बाग प्रयागराज - Khusro Bagh Prayagraj

 
खुसरो बाग या खुसरो उद्यान के नाम से मशहूर यह एक बहुत बड़ा उद्यान है। यह उद्यान इलाहाबाद का एक प्रसिद्ध उद्यान है। खुसरो बाग इलाहाबाद में प्रसिद्ध एक बहुत बड़ा गार्डन है। इस गार्डन में आपको देखने के लिए बहुत सारी चीजें मिलती है। इस बाग में आपके देखने के लिए प्राचीन इमारतें हैं। यहां पर खुसरो  की कब्र आपको देखने के लिए मिलती है। उसके साथ-साथ यहां पर आपको बगीचे देखने के लिए मिलते हैं। यहां पर आपको बिही का बगीचा देखने के लिए मिलता है। आम का बगीचा देखने के लिए मिलता है। यहां पर नर्सरी भी बनाई गई है, जहां पर पौधे तैयार किए जाते हैं। इसके अलावा यहां पर आपको फव्वारा भी देखने के लिए मिलेगा, जो शायद शाम को चालू किया जाता है। हम लोग खुसरो बाग घूमने के लिए सुबह के समय गए थे। हम लोग सुबह 9 बजे के करीब इस बाग में पहुंच गए थे। 
 
हम लोग इलाहाबाद जनवरी के समय घूमने के लिए गए थे। हम लोग माघ मेले में घूमने के लिए गए थे। जनवरी के समय आपको इलाहाबाद में बहुत ज्यादा कोहरा देखने के लिए मिलता है। हम लोग सुबह 9 बजे इस पार्क में गए थे, तो यहां पर बहुत ज्यादा कोहरा था। यहां पर हमारी एंट्री फ्री थी और हमें किसी भी तरह का यहां पर चार्ज देना नहीं पड़ा। हम लोग पार्क के अंदर गए। यह पार्क चारों तरफ बाउंड्री से घिरा हुआ है और बहुत ऊंची ऊंची बाउंड्री आपको इस पार्क के चारों तरफ देखने के लिए मिलेगी। हम लोग जैसे ही पार्क एंटर हुए, तो हम लोगों को सुंदर सुंदर फूल देखने के लिए मिले, जो बहुत ही आकर्षक लग रहे थे। अलग अलग टाइप के फूल यहां पर लगे हुए थे। यहां पर मॉर्निंग वॉक करने वालों के लिए पक्का रास्ता बनाया गया है।  इस रास्ते के दोनों तरफ आपको सुंदर सुंदर फूल देखने के लिए मिलेंगे। यहां पर आपको सबसे पहले बिही का बगीचा देखने के लिए मिलेगा। बिही यहां पर बहुत ज्यादा लगी हुई थी।  यहां पर  इन बगीचों को संभालने के लिए कर्मचारी भी लगे हुए थे, जो इनकी देखभाल कर रहे थे। हम लोग आगे बढ़े तो हम लोगों के यहां पर आंवले के बहुत सारे पेड़ देखने के लिए मिले। हम लोगों को यहां पर आम का बगीचा भी देखने के लिए मिला। यहां पर अलग-अलग प्रकार के आम आपको देखने के लिए मिल जाएंगे। 
 
खुसरो बाग में मॉर्निंग वॉक करने का एक अलग ही अनुभव है, क्योंकि यहां पर सुबह सुबह के समय बहुत शांति रहती है चिड़ियों की आवाज सुनने के लिए मिलती है जो बहुत अच्छी लगती है यहां पर आपको बहुत सारे स्टूडेंट देखने के लिए मिलेंगे जो यहां पर स्टडी करने के लिए आते हैं और बहुत अच्छा लगता है, यहां पर चारों तरफ हरियाली देखने के लिए मिलती है
 
यहां पर सुबह के समय बहुत सारे लोग क्रिकेट भी खेल रहे थे। यहां पर एक छोटा सा ग्राउंड जमीन के अंदर बनाया हुआ था। उसी में बहुत सारे युवा लोग क्रिकेट खेल रहे थे। हम लोग आगे बढ़े, तो हमें यहां पर एक मंदिर देखने के लिए मिला। एक पीपल का पेड़ लगा हुआ था। उसके बाजू में हनुमान जी का मंदिर था। मंदिर के पीछे हम लोगों को एक कुआं देखने के लिए मिला। पार्क में जगह-जगह पर आपको बैठने के लिए पत्थर के बेंच बनाए गए हैं, जहां पर आप बैठकर पार्क की खूबसूरती का आनंद उठा सकते हैं। 
 
खुसरो बाग में हमें नर्सरी भी देखने के लिए मिली। नर्सरी में आम और बिही के  बहुत सारे प्लांटों को तैयार किया जाता है। अलग-अलग नई नई प्रजातियों को तैयार किया जाता है। यहां पर बिही की बहुत सारी प्रजातियां आपको देखने के लिए मिलेगी और आम की भी यहां पर बहुत सारी प्रजातियां देखने के लिए मिल जाएगी। यहां पर एक बोर्ड लगा हुआ है, जिसमें आम की बहुत सारी प्रजातियां आपको पढ़ने के लिए मिल जाएंगी और बिही की भी बहुत सारी प्रजातियां की जानकारी आप पढ़ सकते हैं। आप आगे बढ़ेंगे, तो यहां पर कर्मचारियों के रहने के लिए घर बने हुए हैं। उसके बाद आगे बढ़ने पर हमे यहां पर फव्वारा देखने के लिए मिलता है। फव्वारा यहां पर शायद रात को चालू होता हो, क्योंकि हम लोग जब सुबह गए थे। तब यहां पर फव्वारा चालू नहीं था। थोड़ा और आगे बढ़ने पर हमें यहां पर प्राचीन इमारतें देखने के लिए मिली, जो यहां की खूबसूरती में चार चांद लगा देती है। यह इमारतें दूर से ही देखने में बहुत ही आकर्षक लग रही थी। खुसरो बाग के मध्य में आपको चार खूबसूरत इमारतें देखने के लिए मिलती हैं। यह सारी प्राचीन इमारतें हैं और यह मुगलों की कब्र हैं। इन इमारतों की बनावट बहुत ही आकर्षक है। 
 
 

खुसरो बाग इलाहाबाद का इतिहास - Khusro Bagh Allahabad History

इलाहाबाद को प्राचीन समय में प्रयाग के नाम से जाना जाता था। प्रयाग में कई साम्राज्य एवं राजवंशों द्वारा नियंत्रण किया गया है। 1575 ईस्वी में मुगल सम्राट अकबर ने संगम के पवित्र तट पर एक किला बनवाया और इसे इल्हाबाद नाम दिया, जो बाद में इलाहाबाद बन गया। राजकुमार सलीम ने इलाहाबाद से ही अपने पिता अकबर के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया था। 1605 ईस्वी में अकबर की मृत्यु के पश्चात उसके पुत्र सलीम ने जहांगीर के नाम से सम्राट पद ग्रहण किया। जहांगीर उद्यानों का बहुत बड़ा प्रेमी था। अपने इलाहाबाद प्रवास के दौरान राजकुमार सलीम ने सरकार के लिए खुसरो बाग का निर्माण कराया था। खुसरो बाग में चार केंद्रीय संरक्षित स्मारक है, जिन्हें शाह बेगम का मकबरा, खुसरो का मकबरा, निसार बेगम का मकबरा एवं बीवी तमोलन का मकबरा के नाम से जाना जाता है। 
 

शाह बेगम का मकबरा - Shah Begum's Tomb

जहांगीर के समय में यह कई महत्वपूर्ण इमारतों का निर्माण हुआ, जिसमें उनकी पहली पत्नी मानबाई का मकबरा प्रमुख है। जहांगीर ने अपने पुत्र खुसरो के जन्म के पश्चात मान भाई को शाह बेगम की उपाधि दी थी। इसी कारण इस मकबरे का नाम शाह बेगम का मकबरा है। मानबाई आमेर के राजा भगवंत दास, जो उस समय पंजाब के गवर्नर थे, की पुत्री थी और राजपूत राजा मानसिंह की बहन थी। 1584 ईसवी में उनका विवाह सलीम के साथ हुआ और 1587 इसमें उन्होंने खुसरो को जन्म दिया। सलीम मुगल शासक जहांगीर के बचपन का नाम था। शाह बेगम ने 1603 ईसवी में इलाहाबाद में अफीम की अत्याधिक मात्रा में सेवन करके आत्महत्या कर ली थी। वह पिता और पुत्र के बीच कड़वाहट को लेकर बहुत चिंतित और दुखी थी। उनकी कब्र इसी बाग में निर्मित है, जिसे बाद में खुसरो बाग के नाम से जाना जाने लगा। इस मकबरे का नक्शा जहांगीर के सबसे प्रमुख कलाकार अक्का रजा ने 1606 से 1607 ईसवी के बीच तैयार किया था। यह एक तीन मंजिला इमारत है। इसकी छत पर खड़ी है, जिसके ऊपर एक बड़ी छतरी है। इसके ठीक नीचे शाह बेगम की कब्र है। मकबरे पर अभिलेख जहांगीर के प्रसिद्ध लेखाकार मीर अब्दुल मुस्कीन कलाम द्वारा बेल बूटे जैसा दिखने वाले अरबी अभिलेखों से सजा है। 
 

खुसरो का मकबरा - Khusro's Tomb

खुसरो (१५८७  - १६२२ ) जहांगीर और शाह बेगम का बड़ा बेटा था। खुसरो सुशिक्षित और अपने शिष्ट व्यवहार एवं निर्वाचित व्यक्तित्व के कारण जनता में लोकप्रिय था। 1607 ईस्वी में अकबर बुरी तरह से बीमार पड़े और तब खुसरो के साथियों ने उनके ससुर मिर्जा अजीज कोका और उनके मामा आमेर के राजा मान सिंह के नेतृत्व में खुसरो को गद्दी पर बैठाने का भरपूर प्रयास किया। परंतु अकबर ने अपने अंतिम समय में सलीम को गद्दी पर नियुक्त किया और सलीम को जहांगीर की पदवी से नवाजा। जहांगीर की गद्दी पर बैठने के कुछ महीनों बाद खुसरो ने विद्रोह कर दिया, परंतु वह जहांगीर द्वारा परास्त कर दिया गया। उसे गिरफ्तार कर अंधा कर दिया गया। अपने भाई खुर्रम (जिन्हें बाद में शाहजहां के नाम से जाना गया )की देखरेख में बंदी रहते हुए ही 1622 ईस्वी में उनकी मृत्यु हो गई। उन्हें खुसरो बाग में ही उनकी मां के मकबरे के बगल में दफनाया गया। खुसरो का मकबरा उनकी बहन सुल्तान निसार बेगम ने बनवाया था। मेहराबदार दीवारों वाली यह इमारत अष्टकोण आकार की संरचना पर बने स्तंभों पर टिके विशाल गुंबद से ढकी है, जिसके कोने पर छोटी छतरियां बनी है। इस कक्ष के भीतरी हिस्से पुष्प और सनोबर की डिजाइन से सजे हैं। गुंबद पर व्रत और तारों का शैली में चित्रण किया गया है, जो एतादउल्ला के मकबरे में बनी शैली से काफी समानता रखता है। 
 

निसार बेगम का मकबरा - Tomb of Nisar Begum

निसार बेगम खुसरो की बहन थी। निसार बेगम का मकबरा शाह बेगम के मकबरे के समीप स्थित है। इस मकबरे का निर्माण 1624 से 1625 में उन्हीं के द्वारा खुसरो के मकबरे के निर्माण के समय ही किया गया था। यह मकबरा कभी समाधि के रूप में प्रयोग नहीं किया गया। इस मकबरे की वास्तु संरचना बहुत ही प्रभावशाली है। यह मकबरा एक ऊचे चबूतरे पर बना हुआ है। 
 

बीवी तमोलन का मकबरा  - Biwi Tamolan's Tomb

यहां स्थित चतुर्थ मकबरा बीवी तमोलन का है, जो परिसर के पश्चिमी भाग में स्थित है। इस मकबरे को किसी प्रकार का लेख अंकित नहीं है। यह मान्यता है कि यह मकबरा फतेहपुर सीकरी के इंस्तांबुल बेगम से संबंधित है। खुसरो कि किसी बहन ने अपने लिए यह मकबरा बनवाया था। परंतु उनको वहां पर दफनाया नहीं गया था। 
 
 
शाह बेगम का मकबरा बहुत ही खूबसूरत है और मकबरे के आप ऊपर जा सकते हैं। ऊपर जाने के लिए सीढ़ियां बनाई हुई है। इन सभी मकबरे पर आपको पत्थर पर खूबसूरत कारीगरी देखने मिलती है। आप मकबरे के चारों तरफ घूम सकते हैं। यह मकबरा एक ऊंचे मंडप पर बना हुआ है, मकबरे के बीच में शाह बेगम की कब्र है। वहां पर ताला लगा रहता है। आप कब्र के पास  नहीं जा सकते हैं। बाकी आप ऊपर से पूरा मकबरा घूम सकते हैं। उसके बाद हमे निसार बेगम का मकबरा देखने के लिए मिलता है। इस मकबरे के भी आप ऊपर जा सकते हैं। ऊपर जाने के लिए सीढ़ियां दी गई है। यह मकबरा भी बहुत ही खूबसूरती से  बना हुआ है। शाह बेगम के मकबरे और निसार बेगम के मकबरे के बीच में आपको एक छोटा सा कुंड देखने के लिए मिलता है। यह शायद प्राचीन समय में इस में पानी भरा जाता होगा। सबसे अंतिम में आपको खुसरो का मकबरा देखने के लिए मिलता है। खुसरो का मकबरा एक मंडप पर बना हुआ है और आप मकबरा के चारों तरफ से घूम सकते हैं। मकबरे में ऊपर की तरफ छोटी-छोटी छतरियां बनी हुई है, जो बहुत ही खूबसूरत लगती है। मकबरे के प्रवेश द्वार पर आपको पेंटिंग भी देखने के लिए मिलती है, जो बहुत लाजवाब है। इन मकबरों की जानकारी भी आपको इनके सामने बोर्ड लगा हुआ है, उनमें लिखी हुई मिलती है। यह तीनों मकबरे देखने के बाद हम लोग चौथे मकबरे की तरफ बढ़े, जो बीवी तमोलन का मकबरा था। बीबी तमोलन  का मकबरा गोलाकार है।  इस मकबरे में जाने वाले रास्ते में दोनों तरफ पेड़ लगे हुए थे और मकबरे में जालीदार खिड़कियां लगी हुई थी, जो बहुत खूबसूरत लग रहा था। यहां पर आपको बहुत सारे कपल्स भी देखने के लिए मिलते हैं, जो यहां पर बैठे रहते हैं। 
 

खुसरो बाग इलाहाबाद की फोटो - Khusro Bagh Allahabad Image

Khusro Bagh Allahabad (Prayagraj) - खुसरो बाग इलाहाबाद (प्रयागराज) / Allahabad tourism
खुसरो बाग का प्रवेश द्वार

Khusro Bagh Allahabad (Prayagraj) - खुसरो बाग इलाहाबाद (प्रयागराज) / Allahabad tourism
खुसरो बाग में बने मकबरे

 
Khusro Bagh Allahabad (Prayagraj) - खुसरो बाग इलाहाबाद (प्रयागराज) / Allahabad tourism
खुसरो बाग की सुंदर रास्ता

Khusro Bagh Allahabad (Prayagraj) - खुसरो बाग इलाहाबाद (प्रयागराज) / Allahabad tourism
शाह बेगम का मकबरा

Khusro Bagh Allahabad (Prayagraj) - खुसरो बाग इलाहाबाद (प्रयागराज) / Allahabad tourism
शाह बेगम का मकबरा

Khusro Bagh Allahabad (Prayagraj) - खुसरो बाग इलाहाबाद (प्रयागराज) / Allahabad tourism
खुसरो बाग में बना बिही का बगीचा

Khusro Bagh Allahabad (Prayagraj) - खुसरो बाग इलाहाबाद (प्रयागराज) / Allahabad tourism
खुसरो बाग में मॉर्निंग वॉक का रास्ता

Khusro Bagh Allahabad (Prayagraj) - खुसरो बाग इलाहाबाद (प्रयागराज) / Allahabad tourism
बीबी तमोलन का मकबरा
 
Khusro Bagh Allahabad (Prayagraj) - खुसरो बाग इलाहाबाद (प्रयागराज) / Allahabad tourism
बीबी तमोलन का मकबरा



Khusro Bagh Allahabad (Prayagraj) - खुसरो बाग इलाहाबाद (प्रयागराज) / Allahabad tourism
खुसरो का मकबरा

 
खुसरो बाग घूमने में हम लोगों को बहुत मजा आया। हम लोग सुबह सुबह उठकर आए थे, तो हम लोगों को बहुत ठंडी लग रही थी, क्योंकि यहां पर जनवरी के समय में बहुत ज्यादा ठंडी रहती है और ओस गिर रही थी।  कोहरा चारों तरफ छाया हुआ था। मगर हम लोग की पूरी ठंडी इस बगीचे में घूमने से चली गई। खुसरो बाग सूर्योदय से सूर्यास्त तक खुला रहता है। आप सुबह आ जाइए और शाम को सूरज ढलने तक घूम सकते है। हम लोगों को खुसरो बाग घूमने में करीब 1 से डेढ़ घंटा लगा था। आप भी यहां पर आकर घूम सकते हैं।
 


 

जैन मंदिर कौशांबी - Jain Temple Kaushambi / कौशांबी की यात्रा

 श्री कौशांबी जी दिगम्बर जैन तीर्थ - Shri Kaushambi Ji Digambar Jain Tirtha / Kaushambi Travel


जैन मंदिर कौशांबी में स्थित एक धार्मिक स्थल है। यह जैन धर्म के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल है। यहां पर हम लोगों को भगवान बुद्ध की एक मूर्ति देखने के लिए मिली, जो सफेद संगमरमर की बनी थी। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है, कि इस मंदिर में स्थापित मूर्ति यमुना नदी से प्राप्त हुई थी। इसलिए यह मंदिर प्रसिद्ध है और जो भी पर्यटक यहां पर घूमने आता है। वह इस मंदिर में जरूर घूमता है। 
 
घोषिता राम विहार स्थल घूम कर अब हम लोगों को जैन मंदिर जाना था। घोषिता राम विहार स्थल से जैन मंदिर करीब 1 से डेढ़ किलोमीटर दूर होगा। हम लोग जैन मंदिर की तरफ चलने लगे और रास्ते में हमें घोड़े देखने के लिए मिले, काफी करीब से हम लोगों ने घोड़े को देखा। यहां पर घोड़ों के सामने वाले पैरों में रस्सी बांध देते हैं, ताकि वह कहीं दूर ना चले जाएं और उन्हें मैदानों में छोड़ देते हैं, तो वह घास चढ़ते रहते हैं। हम लोगों ने घोड़ों के साथ फोटो भी खींची और जैन मंदिर की तरफ बढ़ चले। जैन मंदिर में पहुंचकर हम लोगों को बहुत सारे बच्चे देखने के लिए मिले, जो मंदिर में अंदर बाहर खेल रहे थे। हम लोग मंदिर के अंदर गए, तो मंदिर में एक लड़की ने मंदिर का द्वार खोला। हम लोगों को मुख्य मंदिर के तो दर्शन करने नहीं मिले, मगर बाहर से ही हम लोगों ने मंदिर में दर्शन किए। मंदिर के दीवारों पर कुछ प्रवचन लिखे हुए थे। वह हम लोगों ने पढ़े। मंदिर के एक तरफ में छोटे-छोटे मंदिर बने हुए थे। मगर वह बंद थे। हम लोग ने उन मंदिरों को बाहर से देखा। यहां पर हम लोगों को बुद्ध भगवान की एक मूर्ति भी देखने के लिए मिली जो पत्थर से बनी थी। 
 
मंदिर में जो पुजारी पूजा करते हैं। वह सुबह और शाम के समय आते हैं। पूजा करने के लिए, बाकी अगर कोई भी पर्यटक मंदिर घूमने आता है, तो मंदिर के कर्मचारी मंदिर का गेट खोल देते हैं। मंदिर के एक तरफ हम लोगों को प्राचीन मूर्तियां देखने के लिए मिली। यह मूर्तियां भगवान बुद्ध की थी। मंदिर के बाहर परिसर में एक प्राचीन कुआ था। इस कुआँ में जाने का रास्ता मंदिर से नहीं था।  मंदिर के बाहर से इस कुआ में जाने का रास्ता था। मगर हम लोगों ने कुएं को मंदिर परिसर से ही देखा और मंदिर घूम कर, हम लोग बाहर निकल गए। बाहर हम लोगों को बहुत सारे बच्चे देखने के लिए मिले , जो ग्रामीण ही थे और खेल रहे थे। कुछ बच्चे हम लोग के पास आए और पैसे मांगने लगे। हम लोगों ने उन्हें कुछ पैसे दे दिए। उसके बाद यहां पर हम लोगों को और ढेर सारे घोड़े देखने के लिए मिले और हम लोगों ने बहुत सारी फोटो क्लिक करें। 
 
 
जैन मंदिर कौशांबी - Jain Temple Kaushambi / कौशांबी की यात्रा
भगवान बुद्ध की मूर्ति 

जैन मंदिर कौशांबी - Jain Temple Kaushambi / कौशांबी की यात्रा
उत्तर प्रदेश टूरिज्म का बोर्ड

जैन मंदिर कौशांबी - Jain Temple Kaushambi / कौशांबी की यात्रा
मंदिर का प्रवेश द्वार

जैन मंदिर कौशांबी - Jain Temple Kaushambi / कौशांबी की यात्रा
मंदिर का बोर्ड

जैन मंदिर कौशांबी - Jain Temple Kaushambi / कौशांबी की यात्रा
मंदिर के पास मैदान में घास चरता घोडा

 
 
 


घोषिताराम विहार स्थल कौशांबी - Ghositaram Vihar sthal Kaushambi

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घोषिताराम विहार स्थल कौशांबी एक प्राचीन स्थल है। यह एक भारतीय सर्वेक्षण स्थल है। यहां पर आपको प्राचीन अवशेष देखने के लिए मिलते हैं। यह जगह इसलिए प्रसिद्ध है, क्योंकि इस जगह भगवान बुद्ध अपने अनुयायियों के साथ आए थे और उन्होंने ने यहां पर प्रवचन दिया था। यहां पर बुद्ध भगवान काफी समय तक रहे थे। यह चैत्य एवं विहार दोनों था।
 
हम लोग अशोक स्तंभ स्थल घूमने के बाद, घोषिताराम विहार स्थल की तरफ जाने के लिए पैदल चल पड़े। घोषितराम विहार स्थल अशोक स्तंभ स्थल से करीब एक से डेढ़ किलोमीटर दूर होगा। पैदल रास्ता था और इस रास्ते में आपको ज्यादा भीड़ देखने के लिए नहीं मिलेगी। इक्का-दुक्का गाड़ी ही आपको यहां पर देखने के लिए मिल जाएगी। यहां पर हम लोगों को घोड़े देखने के लिए मिले, जो बड़े-बड़े मैदानों पर घास चर रहे थे। हम लोग पैदल पैदल घोषिताराम विहार स्थल पर पहुंचे। बाहर बोर्ड लगा हुआ था और बच्चे खेल रहे थे। हम लोग अंदर गए, तो अंदर हमें इस स्थल के बारे में जानकारी मिली। अंदर एक बोर्ड लगा था , जिसमे इस जगह के बारे में जानकारी थी।
 

घोषिताराम विहार स्थल का इतिहास

घोषिताराम विहार स्थल कौशांबी

 
घोषिता राम बिहार प्राचीन बौद्ध साहित्य में विशिष्ट से उल्लेखित है। इसी कारण इसका नाम घोषिता राम बिहार पड़ा। जब बुद्ध श्रावस्ती में थे। घोषित अपने मित्रों के साथ कौशांबी उन्हें आने का निमंत्रण देने के लिए गया था। बुद्ध और उनके अनुयायियों के लिए उसने इस बिहार का निर्माण कराया था। बुद्ध प्राय बिहार में रहते थे। यहां पर उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण प्रवचन दिए थे। इस बिहार में बौद्ध संघ का पहला विभेद उत्पन्न हुआ था। जब यहां बुद्ध रुके हुए थे, यहां पर बुद्ध को देव दंत के षड्यंत्र के विषय में जानकारी मिली। वैशाली में संघ के भी विमत हो जाने पर घोषिता राम हीनयान के महासाधक संप्रदाय का केंद्र बन गया। 
 
कतिपय महत्वपूर्ण अभिलेख आयाग कमल दल के आकार वाले दीपस्तंभ तथा बिहार के उत्कीर्ण मुहर जो उत्खनन के दौरान प्राप्त हुई थी। निश्चित रूप से घोषिता राम बिहार की पहचान तथा कौशांबी नगर की पहचान को सिद्ध करते हैं। उत्कीर्ण मुहर पर अंकित है। 
 
"कौशांब्या घोषिताराम विहारे भिक्षु संघस्य शिलाकारापिता"
 
यह चैत्य एवं बिहार दोनों था। 
 

Ghositaram Vihar site Kaushambi ki Photo

घोसिताराम विहार स्थल कौशाम्बी की फोटो

 
 
घोषिताराम विहार स्थल कौशांबी - Ghositaram Vihar sthal Kaushambi
घोसिताराम विहार स्थल का बोर्ड

घोषिताराम विहार स्थल कौशांबी - Ghositaram Vihar sthal Kaushambi
घोसिताराम विहार स्थल में बने अवशेष

घोषिताराम विहार स्थल कौशांबी - Ghositaram Vihar sthal Kaushambi
घोसिताराम विहार स्थल में बने अवशेष

घोषिताराम विहार स्थल कौशांबी - Ghositaram Vihar sthal Kaushambi
घोसिताराम विहार स्थल में बने अवशेष

घोषिताराम विहार स्थल कौशांबी - Ghositaram Vihar sthal Kaushambi
घोसिताराम विहार स्थल में बने अवशेष

घोषिताराम विहार स्थल कौशांबी - Ghositaram Vihar sthal Kaushambi
मैदान में घास चरता घोड़ा

 
 
 
घोषिताराम विहार स्थल कौशांबी - Ghositaram Vihar sthal Kaushambi
घोसिताराम विहार स्थल में बने अवशेष

 
 
हम लोग जब यहां पर गए थे, तब यहां पर स्थित अवशेषों की मरम्मत हो रही थी। यहां पर आपको प्राचीन अवशेष देखने के लिए मिल जाएंगे। इन अवशेषों को देखकर लगता है, कि यहां पर किसी समय में किला रहा होगा। यहां पर आपको किले के बहुत सारे अवशेष देखने के लिए मिल जाएंगे। मगर इन अवशेषों में अब मरम्मत हो गई है, तो यह अवशेष नए जैसे लगेंगे। घोषिता राम बिहार स्थल भी चारों तरफ से तार की बाउंड्री से घिरा हुआ है। यहां पर आप आकर घूम सकते हैं। आपको यहां पर अच्छा लगेगा। यहां पर सरकार के द्वारा वॉशरूम की सुविधा दी गई है।  इस जगह को कौशांबी के किले के नाम से जान सकते हैं, क्योंकि यह जगह किले जैसी लग रही थी। यहां पर मरम्मत का काम चल रहा था। यहां पर आपको बहुत सारे अवशेष देखने के लिए मिल जाएंगे।