पन्ना पर्यटन स्थल - Panna tourist places | Places to visit in Panna

पन्ना जिले के दर्शनीय स्थल - Panna visiting Places | Panna Tourism | पन्ना के आकर्षण स्थल | Panna sightseeing | पन्ना शहर



पन्ना में घूमने की जगहें
Panna me ghumne ki jagah


पन्ना राष्ट्रीय उद्यान, पन्ना - Panna National Park, Panna

पन्ना नेशनल पार्क मध्य प्रदेश का एक प्रमुख नेशनल पार्क है। पन्ना नेशनल पार्क मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में स्थित है। पन्ना नेशनल पार्क पन्ना और छतरपुर जिले में फैला हुआ है। पन्ना राष्ट्रीय उद्यान में आपको बाघ देखने के लिए मिल जाता है। यहां पर आप और भी अन्य जंगली जानवरों के दर्शन कर सकते हैं। यहां पर आप तेंदुआ, भालू, हिरण, बंदर और विभिन्न प्रकार की चिड़ियों के दर्शन कर सकते हैं। यहां पर आपका एंट्री फीस लिया जाता है। यहां पर एंट्री करने के लिए दो गेट है एक मेधा गेट और दूसरा हिनौता गेट है। यहां पर आपको आकर अच्छा लगेगा। आप यहां पर आते हैं, तो आपको यहां पर गाइड भी लेना पड़ता है और आपको वन विभाग से जीप भी लेनी पड़ती है।

 

पांडव गुफा एवं झरना पन्ना - Pandav cave and waterfall, Panna

पांडव गुफा एवं झरना पन्ना शहर में स्थित एक मुख्य पर्यटन स्थल है। आपको यहां पर एक सुंदर झरना देखने के लिए मिलता है। झरना एक कुंड पर गिरता है। झरने के सामने ही एक गुफा बनी हुई है, जिसके बारे में कहा जाता है, कि प्राचीन काल में यहां पर पांडव ने निवास किया था। यहां पर आपको शिवलिंग भी देखने के लिए मिलता है, जिसके बारे में कहा जाता है कि पांडवों के द्वारा इस शिवलिंग की स्थापना की गई है। यह जगह बहुत खूबसूरत है। पांडव गुफा एवं झरना पन्ना नेशनल पार्क के अंदर स्थित है। आप जब भी पन्ना से खजुराहो की तरफ जाते हैं, तो यह आपको देखने के लिए मिलता है। आप यहां पर आकर बहुत अच्छा समय बिता सकते हैं। आप यहां पर गाइड को लेकर भी आ सकते हैं। गाइड आपको इस जगह के बारे में पूरी जानकारी देगा। पांडव फॉल आपको बरसात में देखने के लिए मिल जाता है और गर्मी में यह फॉल सूख जाता है। यहां पर आपको आकर बहुत अच्छा लगेगा। यह जगह प्राकृतिक खूबसूरती से भरी हुई है। 


किमासन जलप्रपात पन्ना - Kimasan Falls Panna

किमासन झरना पन्ना नेशनल पार्क में ही स्थित है। यह झरना हिनौता गेट की तरफ जाने वाले रोड में ही स्थित है। आप इस झरने को बरसात के समय देख सकते हैं। यह झरना बहुत ऊंचाई से गिरता है। झरने के नीचे कुंड बनता है और आप इस झरने को ऊपर से देख सकते हैं। झरने में पानी करीब 25-30 फीट ऊपर से गिरता है। 


श्री पद्मावती देवी मंदिर पन्ना - Shri Padmavati Devi Temple Panna

श्री पद्मावती मंदिर पन्ना जिले में स्थित एक प्रमुख मंदिर है। आप यहां पर भी घूमने के लिए आ सकते हैं। यह एक धार्मिक स्थल है। इस मंदिर को पद्मावती शक्तिपीठ के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि यहां पर सती माता की दाहिने पैर गिरा था। यहां पर आपको आकर शांति मिलेगी। यह एक अच्छी जगह है। आप यहां अपनी फैमिली के साथ आ सकते हैं। मंदिर के पीछे की तरफ किलकिला नदी बहती है। आप उसका नजारा भी यहां पर आकर देख सकते हैं। श्री पद्मावती मंदिर पन्ना जिले में अजयगढ़ बाईपास रोड में स्थित है। आप यहां पर अपने वाहन से पहुंच सकते हैं। 


किलकिला झरना पन्ना - Kilkila Falls Panna

किलकिला जलप्रपात पन्ना जिले में घूमने लायक जगह है। यहां पर एक सुंदर जलप्रपात आपको देखने के लिए मिलता है। यह जलप्रपात अजयगढ़ बाईपास रोड पर स्थित है। आप यहां पर बरसात के समय आएंगे, तो आपको यह जलप्रपात देखने के लिए मिलेगा। जलप्रपात के पास में एक मंदिर भी है। यह मंदिर शिव भगवान जी को समर्पित है। आप यहां पर आकर अपना अच्छा समय बिता सकते हैं। गर्मी में यह जलप्रपात सूख जाता है। आप यहां पर अपने दोस्तों और परिवार के लोगों के साथ आ सकते हैं। 


प्राणनाथ जी मंदिर, पद्मावती पुरी धाम पन्ना - Prannathji Temple, Padmavati Puri Dham Panna

श्री प्राणनाथ मंदिर पन्ना जिले में स्थित एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। यह मंदिर प्रनामी लोगों के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। प्राणनाथ जी एक संत थे और उन्होंने यहां पर समाधि ली थी। यह मंदिर बहुत बड़ी क्षेत्र में फैला हुआ है। यह मंदिर बहुत खूबसूरती से बनाया गया है। मंदिर में आपको कांच का काम देखने के लिए मिल जाता है। मंदिर में आपको म्यूजियम भी देखने के लिए भी मिलेगा, जिसमें प्राणनाथ जी की बहुत सारी चीजों को संभाल कर रखा गया है। यहां पर आपको बुक्स वगैरह देखने के लिए मिल जाएंगे। मंदिर की छत को बहुत ही खूबसूरत पेंटिंग से सजाया गया है। यहां पर श्री कृष्ण जी की बहुत सारी पेंटिंग आपको देखने के लिए मिल जाएगी। यहां पर शरद पूर्णिमा के दिन बहुत बड़े मेले का आयोजन होता है, जिसमें बहुत सारे लोग आते हैं। 


श्री राम जानकी मंदिर पन्ना - Shri Ram Janaki Temple Panna

श्री राम जानकी मंदिर पन्ना जिले में स्थित मुख्य धार्मिक स्थल है। आप यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं। यहां पर आपको श्री राम जी, माता सीता जी, लक्ष्मण जी और हनुमान जी के दर्शन करने के लिए मिल जाएंगे। यह मंदिर मुख्य पन्ना शहर में ही स्थित है। यहां पर रामनवमी के समय बहुत भीड़ होती है।


श्री जुगल किशोर जी मंदिर पन्ना - Shri Jugal Kishore Ji Temple Panna

श्री जुगल किशोर मंदिर पन्ना शहर में स्थित एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर मुख्य पन्ना शहर में ही स्थित है। इस मंदिर में आपको श्री कृष्ण जी और राधा जी की मूर्ति देखने के लिए मिलेगी। यह मंदिर बहुत ही खूबसूरती से बुंदेला वास्तु कला में बनाया गया है। आपको यहां पर आकर बहुत अच्छा लगेगा। यह मंदिर बहुत बड़ा है। आप यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं। 


श्री बलदेव जी मंदिर पन्ना - Shri Baldev Ji Temple Panna

बलदेव जी का मंदिर पन्ना शहर में स्थित एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर मुख्य पन्ना शहर में स्थित है। यह मंदिर श्री कृष्ण जी के बड़े भाई बलदाऊ जी को समर्पित है। यह मंदिर खूबसूरती से बनाया गया है और बहुत बड़ा है। आप यहां पर आकर घूम सकते हैं। यह मंदिर 1993 में राजा रूद्र प्रताप सिंह के द्वारा बनवाया गया था। आपको यहां पर आकर अच्छा लगेगा। यह मंदिर रोमन वास्तुकला में बना हुआ है और मंदिर में आपको काले रंग की बलदाऊ भगवान की प्रतिमा देखने के लिए मिलेगी। यहां पर आपको एक बड़ा सा हॉल देखने के लिए मिलेगा और बड़े-बड़े मंडप देखने के लिए मिलेंगे। 


छत्रसाल उद्यान पन्ना - Chhatrasal Garden Panna

छत्रसाल पार्क पन्ना जिले में स्थित एक घूमने लायक जगह है। आप जब भी पन्ना जिले में आते हैं, तो आप इस पार्क में भी घूमने के लिए आ सकते हैं। इस पार्क में आपको महाराजा छत्रसाल की मूर्ति देखने के लिए मिलती है, जो काले कलर की है और घोड़े पर सवार है। यह पार्क बहुत बड़े एरिया में फैला हुआ है। पार्क में आपको तरह तरह के फूल देखने के लिए मिलते हैं। पार्क में आपको बदक एवं खरगोश भी देखने के लिए मिल जाते हैं। पार्क में बहुत सारे झूले लगे हुए हैं, जो बच्चों को बहुत पसंद आएंगे। यह बच्चों के लिए बहुत अच्छी जगह है। पार्क में एक ट्रेन भी है, जिसके मजे आप ले सकते हैं। पार्क में जानवरों के स्टैचू भी बने हुए हैं, जो बहुत अच्छे लगते हैं। आप यहां पर आकर अपना बहुत अच्छा समय बिता सकते हैं। 


दहलन चौकी झरना पन्ना - Dhalan Chowki Waterfall Panna

दलहन चौकी झरना पन्ना शहर में स्थित एक अच्छी घूमने लायक जगह है। आप यहां पर बारिश के समय घूमने के लिए जा सकते हैं। यहां झरना घने जंगलों के बीच में स्थित है। आपको यहां पर आकर बहुत अच्छा लगेगा। यहां पर पहाड़ों से पानी बहता है, जो बहुत ही खूबसूरत लगता है। 


जिला पुरातत्व संग्रहालय पन्ना  - District Archaeological Museum Panna

जिला पुरातत्व संग्रहालय पन्ना शहर में घूमने का एक मुख्य स्थल है। यह एक पुराना बिल्डिंग है।  इस बिल्डिंग में आपको पुरानी मूर्तियां देखने के लिए मिल जाएगी। यहां पर आपको पुरानी पेंटिंग भी देखने के लिए मिल जाएगी। आप यहां पर आकर अपना अच्छा समय बिता सकते हैं। यह जगह छत्रसाल पार्क के पास ही में स्थित है। 


भपतपुर बांध पन्ना - Bhapatpur Dam Panna

भपतपुर बांध पन्ना जिले के पास स्थित एक अच्छी जगह है। आप यहां पर घूमने आ सकते हैं। यह एक जलाशय है और यहां से सूर्योदय और सूर्यास्त का बहुत अच्छा व्यू देखने के लिए मिल जाएगा।

 

महाराजा हृदय शाह का छत्री पन्ना - Chhatri of Maharaja Hriday Shah Panna 

महाराजा हृदय शाह का छत्री पन्ना में स्थित एक प्राचीन स्थल है। यह छत्री धर्म सागर झील के पास स्थित है। आप यहां पर घूमने के लिए जा सकते हैं। यहां पर आपको एक प्राचीन इमारत देखने के लिए मिलते हैं। मकबरे के अंदर आपको समाधि भी देखने के लिए मिल जाएगी। यह छतरी बुंदेलखंडी शैली में बना हुआ है। 


रनेह जलप्रपात पन्ना - Raneh Falls Panna

रनेह जलप्रपात पन्ना शहर में स्थित एक मुख्य पर्यटन स्थल है। यह एक सुंदर झरना है। इस जलप्रपात में जाने के लिए आपको टिकट लगती है। यह झरना जंगल के बीच में स्थित है। यह जलप्रपात बहुत खूबसूरत है और आपको यहां पर कैनियन देखने के लिए मिलता है। यहां पर चट्टानों की बहुत ही खूबसूरत श्रंखला देखने के लिए मिलती है। यहां पर ग्रेनाइट चट्टाने है, जिनके बीच से केन नदी बहती है, जो बहुत ही सुंदर लगती है। आप यहां पर करीब 5 किलोमीटर इन चट्टानों की श्रंखला देख सकते हैं। 


केन घड़ियाल सेंचुरी पन्ना - Ken Gharial Sanctuary Panna

केन घड़ियाल सेंचुरी पन्ना शहर में स्थित एक अच्छी जगह है। यहां पर आपको घड़ियाल देखने के लिए मिलते हैं और मगरमच्छ देखने के लिए मिलते हैं। यह सेंचुरी रनेह जलप्रपात के पास ही में स्थित है। केन नदी के पास बहुत सारे व्यूप्वाइंट बने हुए हैं, जहां से आप घड़ियाल और मगरमच्छ को आराम करते हुए देख सकते हैं। आप इन व्यूप्वाइंट से केन नदी का सुंदरता देख सकते हैं। आपको यहां पर गाइड भी मिलता है, जो आपको इस सेंचुरी के बारे में जानकारी देता है। यहां पर आपको अन्य जंगली जानवर भी देखने के लिए मिल जाएंगे। 


बृहस्पति कुंड झरना पन्ना - Brihaspati kund jharna panna

बृहस्पति कुंड झरना पन्ना शहर में स्थित एक सुंदर जलप्रपात है। आप यहां पर घूमने के लिए बरसात के समय आ सकते हैं। यह जलप्रपात बहुत ही सुंदर दिखता है। आप इस झरने के नीचे भी जा सकते हैं और नहाने का मजा भी ले सकते हैं। इस झरने का पानी एक कुंड में गिरता है। आपको यहां पर खूबसूरत घाटी देखने के लिए मिलती है। यह झरना आपको बरसात के समय में देखने के लिए मिलेगा। आप यहां पर अपनी फैमिली और परिवार वालों के साथ घूमने के लिए आ सकते हैं। बृहस्पति कुंड झरने के पास आपको प्राचीन गुफाएं भी देखने के लिए मिलती है। यहां पर शिव भगवान जी का शिवलिंग भी आपको देखने के लिए मिल जाएगा। आप यहां पर आकर घूम सकते हैं।

 

बेनीसागर जलाशय पन्ना - Benisagar Reservoir Panna

बेनीसागर जलाशय एक खूबसूरत जगह है। आप यहां पर भी घूमने के लिए आ सकते हैं। बेनीसागर जलाशय पन्ना शहर के बहुत करीब है और आप यहां पर अपना एक दिन पिकनिक का प्लान बनाकर घूमने के लिए आ सकते हैं। 


अजयगढ़ किला पन्ना - Ajaygarh Fort Panna

अजय गढ़ का किला पन्ना जिले में स्थित एक प्राचीन स्थल है। अजय गढ़ का किला पन्ना जिले के अजय गढ़ कस्बे में स्थित है। यह एक पहाड़ी पर बना हुआ है। पहाड़ी का आकार तिकोना है। अजय गढ़ के किले तक पहुंचने के लिए आपको सीढ़ियों से आना पड़ता है। यह किला जंगल में स्थित है। आपको यहां पर खंडहर ही देखने के लिए मिलेंगे। अजय गढ़ किले के गेट में नक्काशी की गई है, जो बहुत सुंदर है। आपको किले के अंदर रंग महल देखने के लिए मिलता है। रंग महल के पास में ही 2 तालाब है। आप उनको देख सकते हैं। इन  तालाब को गंगा और जमुना के नाम से जाना जाता है। यह महल बुंदेला शासकों के द्वारा बनाया गया था। इस महल को कोई भी जीत नहीं सकता है था। इसलिए इस महल को अजय गढ़ किले के नाम से जाना जाता है। किले में बहुत सारे लोग पिकनिक मनाने आते हैं। आप भी यहां पर आकर अच्छा समय बिता सकते हैं।


पन्ना जिले के पास घूमने वाले अन्य दर्शनीय स्थल

निरपत सागर झील पन्ना
धर्म सागर झील पन्ना
बेनीसागर झील पन्ना
छत्रसाल की गढ़ी पन्ना
रानीपुर झरना पन्ना
लखनपुर सेहा झरना पन्ना
दहलन चौकी झरना पन्ना
राजगढ़ का किला  पन्ना
मनियागढ़ का किला पन्ना
स्वर्गेश्वर मंदिर पन्ना


गुना पर्यटन स्थल

चंदेरी के दर्शनीय स्थल

ओरछा दर्शनीय स्थल

झांसी के दर्शनीय स्थल


घोघरा नर्सरी झरना कटनी - Ghoghra Nursery Falls Katni

 घोघरा नर्सरी जलप्रपात कटनी 

Ghoghra Nursery Waterfall Katni

 
 
घोघरा नर्सरी झरना कटनी - Ghoghra Nursery Falls Katni
घोघरा नर्सरी झरना कटनी

घोघरा नर्सरी जलप्रपात कटनी जिले में स्थित एक सुंदर जलप्रपात है। यह जलप्रपात घुघरा नामक गांव के पास में स्थित है। आप इस जलप्रपात में बहुत आसानी से पहुंच सकते हैं, क्योंकि इस जलप्रपात तक पहुंचने के लिए सड़क बहुत ही मस्त बनी हुई है और सड़क में आपको बहुत खूबसूरत नजारे देखने के लिए मिलते हैं। दूर-दूर तक आपको मैदान देखने के लिए मिलता है और पहाड़ियां देखने के लिए मिलती है। बहुत मस्त लगता है। आप यहां पर अपनी बाइक या कार से आराम से जा सकते हैं। वैसे यहां पर बस भी चलती है, तो आप बस का भी टाइम पता करके इस वाटरफॉल तक आ सकते हैं। यह वाटरफॉल ज्यादा बड़ा नहीं है, मगर अच्छा है और खूबसूरत है और देखने लायक है। यहां पर जो यहां के बच्चे लोग हैं और जो यहां के लोकल लोग हैं। वह यहां पर आप को नहाते हुए देखने के लिए मिल जाते हैं। जलप्रपात के ऊपर एक छोटा सा कुंड बना हुआ है, जहां पर लोग नहाने का मजा लेते हैं और यहां पर शंकर जी का मंदिर भी है, जिसमें लोग जल चढ़ाते हैं। झरने के ऊपर साइड भी मंदिर बने हुए हैं। इस झरने का नाम घोघरा नर्सरी झरना इसलिए पड़ा है, क्योंकि यहां झरने के पास ही में एक नर्सरी है, जो बहुत फेमस है। उस नर्सरी को घोघरा नर्सरी के नाम से जाना जाता है। इसलिए इस झरने को शायद घोघरा नर्सरी झरना कहा जाता है। 
 
कहा जाता है कि यहां पर गुफा भी बनी हुई है, उस गुफा में हम लोग नहीं गए थे। यहां पर आपको और भी मंदिर देखने के लिए मिल जाएंगे। झरने के ऊपर साइड एक मंदिर बना हुआ है, जहां पर आप जा सकते हैं। यहां पर आपको बहुत अच्छा लगेगा। नेचुरल पीस मिलेगी। यह जो झरना है। यह मेन रोड पर है, तो यहां से बस गुजरती है, तो आप यहां पर आ सकते हैं। यह झरना बिलहरी के पास में है, तो आप जब भी बिलहरी आते हैं, तो इस झरने में भी आ सकते हैं। बिलहरी कटनी शहर की एक प्राचीन सिटी है। प्राचीन समय में बिलहरी को पुष्पवती के नाम से जाना जाता था, तो बहुत सारे लोग बिलहरी आते हैं। बिलहरी के पास ही में यह झरना है, तो आप इस झरने में भी घूमने के लिए आ सकते हैं। 
 
घोघरा नर्सरी जलप्रपात का मजा आप बरसात के समय में ले सकते हैं, क्योंकि गर्मी के समय यह झरना सुख जाता है। आपको यहां पर आकर बहुत अच्छा लगेगा। यह बहुत अच्छी जगह है। यहां पर आप अपने दोस्तों के साथ आकर आराम से अपना समय बिता सकते हैं। 
 


वसुधा जलप्रपात कटनी - Vasudha Falls Katni | waterfall near Katni

वसुधा झरना कटनी - Vasudha waterfall Katni

 


वसुधा जलप्रपात कटनी - Vasudha Falls Katni
वसुधारा जलप्रपात के पास के घने जंगल

 
वसुधा जलप्रपात कटनी - Vasudha Falls Katni
जंगल में बहने वाली खूबसूरत नदी
 
 
वसुधा जलप्रपात कटनी जिले के सबसे अच्छे जलप्रपात में से एक है। इस जलप्रपात के बारे में ज्यादा लोगों को जानकारी नहीं है। इसलिए बहुत कम लोग ही इस जलप्रपात तक आते हैं। मगर अब गूगल मैप में यह जलप्रपात आपको देखने के लिए मिल जाएगा, तो शायद अब यहां पर बहुत ज्यादा लोग देखने के लिए मिले। वसुधा जलप्रपात कटनी में स्थित है और कटनी के वसुधा नाम के गांव में स्थित है। जलप्रपात तक पहुंचने के लिए जो सड़क है। वह बहुत ही खराब सड़क है। कहीं-कहीं पर बहुत ज्यादा खराब है और कहीं-कहीं पर बहुत अच्छी सड़क है। इस जलप्रपात में हम लोग वसुधा गांव से आए थे, तो उस गांव से आते समय हम लोगों को एक नदी मिली थी। उस नदी को पार करके इस जलप्रपात तक आना पड़ता है और जंगल को भी पार करना पड़ता है। जंगल में आपको पैदल चलना पड़ता है, क्योंकि वहां पर आपकी गाड़ी नहीं जा सकती। 
 
हम लोग अपनी स्कूटी इस जंगल के थोड़ा आगे तक ले कर गए थे। मगर रास्ते में नदी पड़ती है और पथरीला रास्ता पड़ता है, जिससे हम लोग को अपनी स्कूटी जंगल के बीच में ही खड़ी करनी पड़ी और आगे का रास्ता पैदल चलना पड़ा। मगर हम लोग झरने तक नहीं पहुंच पाए, क्योंकि हम लोगों को अपनी गाड़ी की चिंता थी और हम उस जंगल में अकेले थे। इसलिए अगर आप यहां पर जाते हैं, तो ग्रुप के साथ आएंगे, तो बहुत अच्छा रहेगा, क्योंकि यहां पर पूरा जंगल है। जो लोग यहां पर गांव वाले थे। वह खेतों में काम कर रहे थे और जंगल में हम दो लोग ही थे, जिससे हमें डर लग रहा था और हम लोग झरने तक नहीं गए। अगर आप ग्रुप के साथ आएंगे, तो आप झरने तक जाएंगे और बहुत इंजॉय कर सकते हैं। यहां का जो वातावरण था। वह बहुत अच्छा था।  चारों तरफ हरियाली थी और नदी की बहने की आवाज बहुत अच्छी लग रही थी। चिड़ियों की की आवाज बहुत अच्छी लग रही थी और यहां का बहुत अच्छा माहौल था। आप आएंगे तो आपको बहुत अच्छा लगेगा। 
 
वसुधा गांव के लोग बहुत अच्छे हैं और आपको वह रास्ता बता देते हैं, झरने तक जाने के लिए। आप यहां पर आते हैं, तो यहां पर पूरा 1 दिन का प्लान बनाकर आइएगा, क्योंकि यहां पर आपको पूरा 1 दिन लग जाएगा। यहां पर आप पिकनिक मनाने आ सकते हैं, फैमिली वालों के साथ। मगर ग्रुप में आए, तो वह वेस्ट होगा। आप यहां पर बरसात के समय आए, क्योंकि बरसात के समय झरने में पानी रहता है। गर्मी के समय झरना सूख जाता है। मगर यहां जंगल का जो तापमान रहता है। वह बहुत ही ठंडा रहता है। गर्मी के समय भी यहां पर आपको अच्छा लगेगा। 
 
वसुधा जलप्रपात में झरने का पानी पहाड़ों से एक कुंड में गिरता है। इस कुंड में आप नहाने का मजा भी ले सकते हैं। मगर अगर कुंड ज्यादा गहरा हो, तो आप संभल कर नहाए। यहां पर आप पिकनिक मना सकते हैं और बरसात के समय यहां पर बहुत सारे लोग आते हैं, तो आप बरसात के समय आएंगे, तो वह आपके लिए अच्छा रहेगा। यहां पर आप अपनी फैमिली, दोस्तों के साथ आकर बहुत ज्यादा मजे कर सकते हैं। यह कटनी के पास एक अच्छा दर्शनीय स्थल है और आप यहां पर आ सकते हैं। 
 


कार्तिक पूर्णिमा का मेला - Kartik Purnima Fair

कार्तिक पूर्णिमा का मेला या भेड़ाघाट का मेला
Kartik Purnima fair or Bhedaghat fair


कार्तिक पूर्णिमा का मेला पूरे भारत देश में प्रसिद्ध है। कार्तिक पूर्णिमा को भारत की अलग-अलग जगहों में अलग-अलग तरह से मनाया जाता है। हम जहां रहते हैं। वहां पर कार्तिक पूर्णिमा के दिन लोग पवित्र नदियों के किनारे जाते है और वहां पर लोग जाकर नहाते हैं और भगवान की पूजा करते हैं। कार्तिक पूर्णिमा साल में एक बार पड़ती है। जैसा कि आपको पता है कि हर महीने में एक अमावस्या और पूर्णिमा पड़ती है। हर पूर्णिमा में लोग उपवास रहते हैं और इसमें से 1 दिन उपवास वाली पूर्णिमा पड़ती है और दूसरे दिन स्नान वाली पूर्णिमा पड़ती है। उसी प्रकार लोग कार्तिक पूर्णिमा के दिन नर्मदा नदी में स्नान करते हैं और उपवास भी रहते हैं। कार्तिक पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों के किनारे बहुत बड़ा मेला लगता है, जिसमें बहुत सारे लोग सम्मिलित होते हैं। यहां पर बहुत सारी दुकान होती है और लोग यहां पर आकर बहुत ज्यादा मजा करते हैं।


कार्तिक पूर्णिमा के दिन भेड़ाघाट में बहुत बड़ा मेला लगता है। इस साल 2020 में भेड़ाघाट में मेला 1 दिसंबर को लगा था। मगर 1 दिसंबर को मेला नहीं लगता है। मेला कार्तिक पूर्णिमा  के दिन रहता है। आप यहां पर अगर कैलेंडर की डेट फिक्स कर आएंगे, तो यहां पर आपको मेला देखने नहीं मिलेगा। 2020 में जैसा कि आपको पता है कोविड-19 पूरी दुनिया में फैला हुआ है, तो सार्वजनिक जगहों में जाना मना है। मगर लोग यहां पर अपनी श्रद्धा और भक्ति के अनुसार नर्मदा जी में स्नान करने और उनकी पूजा करने के लिए आए हैं। मगर लोगों की भीड़ इतनी ज्यादा नहीं थी, जितनी हर साल होती है और ना ही इतनी दुकानें लगी थी। आप यहां पर आकर भेड़ाघाट का बहुत खूबसूरत नजारा देख सकते हैं। यहां बहुत अच्छा लगा। यहां पर ज्यादा भीड़ नहीं थी, तो आप अच्छे से घूम सकते थे, अच्छे से बैठ सकते थे। शॉपिंग कर सकते थे। दुकानें भी बहुत ज्यादा नहीं थी। आपको यहां आकर बहुत अच्छा लगेगा। 


कार्तिक पूर्णिमा के दिन यहां पर नर्मदा जी में संगमरमर की वादियों के बीच आप बोट राइडिंग का मजा ले सकते हैं।  भेड़ाघाट में पंचवटी के पास में जो घाट बना है। वहां से आप बोट राइड के लिए टिकिट ले सकते हैं। आपको बहुत मजा आएगा और यहां पर कार्तिक पूर्णिमा के दिन रात में भी बोट राइड का परमिशन रहता हैए तो आप यहां पर रात में भी बोट राइड का आनंद ले सकते हैं। 


धुआंधार जलप्रपात के पास में एक छोटा सा होटल है। होटल से आप चाय, कॉफी या कुछ भी खाने का सामान ऑर्डर कर सकते हैं। भेड़ाघाट में मेले के समय यह पर बहुत भीड़ रहती है। इतनी भीड़ थी, कि पैर रखने तक की जगह नहीं रहती है। मगर इस समय कोविड-19 के समय जब हम लोग यहां पर आए हैं। तब यहां पर ज्यादा भीड़ नहीं थी। आप आराम से आकर धुआंधार जलप्रपात का दृश्य देख सकते थे, फोटो ले सकते थे और आपको बहुत अच्छा लगेगा। यहां पर आकर बहुत सारे लोग आपको देखने के लिए मिलते हैं, जो पैसे के लिए धुआंधार जलप्रपात में बहती हुई नर्मदा नदी की धाराओं में छलांग लगाते हैं,  यह एक जानलेवा काम है। मगर बहुत सारे लोग पैसे के लिए यह काम करते हैं। इस तरह नर्मदा नदी में छलांग लगाना प्रतिबंधित है। मगर लोग पैसे के लिए यह करते हैं। हम लोगों को यहां पर बहुत अच्छा लगा। उसके बाद धुआंधार का दृश्य देखने के बाद हम लोग थोड़ी दूर आगे गए और वहां पर संगमरमर की चट्टानों के ऊपर नर्मदा नदी के किनारे हम लोग कुछ टाइम बैठे रहे। यहां पर बहुत सारे लोग  तुलसी जी और भगवान शिव जी की पूजा कर रहे थे। बहुत सारे लोग नहाने का मजा ले रहे थे और बहुत सारे लोग फोटो खींचने का मजा ले रहे थे। हम लोगों का टाइम बहुत अच्छा बीता और हम लोगों ने यहां के बाजार में भी शॉपिंग करें। यहां पर बहुत सारे लोकल लोग आपको देखने के लिए मिलते हैं, जो आपको  ताजी ककड़ी और उबली हुई बेर बेचते है। तो आप उसका भी यहां पर आकर आनंद ले सकते हैं। कार्तिक पूर्णिमा के मेले में आकर हम लोग को बहुत अच्छा लगा और आप लोग भी यहां पर आ सकते हैं। 


दलदली माता मंदिर नैनपुर, मंडला,

सतधारा मेला सिहोरा जबलपुर

सहस्त्रधारा जलप्रपात मंडला

रूपनाथ धाम कटनी


गुना पर्यटन स्थल - Guna tourist places | Places to visit in Guna

गुना शहर के दर्शनीय स्थल - Guna famous places | Guna places to visit | गुना जिले के प्रसिद्ध स्थान | Major Attractions of Guna District


गुना में घूमने की जगहें



हनुमान टेकरी गुना - Hanuman tekri mandir guna

हनुमान टेकरी गुना शहर में स्थित एक धार्मिक स्थल है। यह एक हिंदू मंदिर है। यह मंदिर हनुमान जी को समर्पित है। यह मंदिर एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। मंदिर तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है। यहां पर 350 सीढ़ियां बनी हुई है। इस मंदिर में आकर बहुत अच्छा लगता है। इस मंदिर में पहुंचकर गुना शहर का मनोरम दृश्य देखने के लिए मिलता है। यह मंदिर बहुत ही खूबसूरती से बना हुआ है। मंदिर सफेद मार्बल से बना हुआ है और हनुमान जी की मूर्ति विराजमान है। यहां पर शिव भगवान जी की मूर्ति विराजमान है। आपको यहां पर आकर बहुत अच्छा लगेगा। आप यहां पर अपना समय आकर बिता सकते हैं। मंदिर में मंगलवार और शनिवार के दिन लोग हनुमान जी के दर्शन करने विशेषकर आते हैं। 


बजरंगगढ़ का किला गुना - Bajrang Garh Fort Guna

बजरंग गढ़ का किला गुना शहर के पास में स्थित एक दर्शनीय स्थल है। यह एक ऐतिहासिक स्थल है। यहां पर एक किला स्थित है। यह किला गुना शहर के बजरंग गढ़ गांव के पास स्थित है। यह किला एक पहाड़ी पर बना हुआ है। किले तक पहुंचने के लिए सड़क है। इस किले के अंदर आपको महल एवं मंदिर देखने के लिए मिल जाते हैं। यह किला 16वीं और 17वीं शताब्दी के बीच में बना है। यह किला यादव राजा जयसिंह के शासनकाल में बनाया गया है। किले के अंदर आप अभी भी मोती महल, रंग महल, राम मंदिर और बजरंग मंदिर देख सकते हैं। यह अभी भी अच्छी हालत में मौजूद है। आप यहां पर फैमिली और दोस्तों के साथ घूमने के लिए आ सकते हैं। यह किला बहुत बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है। 


गोपी कृष्णा सागर डैम गुना - Gopi Krishna Sagar Dam Guna

गोपी कृष्ण सागर बांध गुना शहर में स्थित एक पर्यटन स्थल है। आप यहां पर आकर पिकनिक मना सकते हैं। यह गुना शहर से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां पर आपको खूबसूरत जलाशय देखने के लिए मिलता है। यहां पर चारों तरफ आपको हरियाली देखने के लिए मिलती है। आपके मनोरंजन के लिए यहां पर पार्क भी बना हुआ है, जहां पर आप बैठ सकते हैं और अपना समय बिता सकते हैं। यहां पर कैफे भी बना हुआ है, जहां से आप चाय और नाश्ता ऑर्डर कर सकते हैं। यहां पर बोटिंग की सुविधा भी उपलब्ध है, जहां पर आप तरह-तरह के बोट और क्रूस का मजा ले सकते हैं। गोपी कृष्ण सागर बांध नेशनल हाईवे 46 के करीब है। आप आराम से इस बांध तक पहुंच सकते हैं।

 

बीस भुजी मंदिर गुना - Bees bhuja mandir Guna

बीस भुजी  मंदिर गुना जिले के बजरंगगढ़ के पास है। आप यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं। यह मंदिर एक ऊंची पहाड़ी पर बना हुआ है। यह मंदिर बहुत खूबसूरत लगता है और यहां पर आप बीस भुजी माताजी के दर्शन कर सकते हैं। यहां पर माता जी की 20 भुजाएं वाली प्रतिमा आपको देखने मिलती है। यहां आकर आपको अच्छा लगेगा। 


श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन पुण्योदय अतिशय तीर्थक्षेत्र गुना - Shree Shantinath Digambar Jain Punyodaya Atiyyat Tirthakshetra Guna

श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन अतिशय मंदिर गुना शहर के पास में स्थित एक प्रमुख जैन तीर्थ स्थल है। यह तीर्थ स्थल बजरंगगढ़ में स्थित हैं। आप यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं। इस मंदिर में आपको श्री शांतिनाथ भगवान की 15 फुट की ऊंची प्रतिमा खड़ी हुई अवस्था में देखने के लिए मिलती हैए जो जैन धर्म के सोलवे जैन तीर्थ कार थे। यहां पर आपको मूर्तियां देखने के लिए मिलती हैं, जो प्राचीन समय की हैं। यह मंदिर बहुत बड़ा है और बहुत खूबसूरत है। यहां पर ठहरने की भी व्यवस्था है। 


केदारनाथ मंदिर गुना - Kedarnath Mandir Guna

केदारनाथ धाम मंदिर गुना जिले में स्थित एक प्राकृतिक और धार्मिक स्थल है। यहां पर आपको जलप्रपात देखने के लिए मिलता है, जो बहुत ही खूबसूरत लगता है। यह जगह चारों तरफ से जंगल से घिरी हुई है। यहां पर आपको शिवलिंग भी देखने के लिए मिलता है। शिवलिंग का साल भर जलाभिषेक होता रहता है। पहाड़ों से पानी शिवलिंग के ऊपर रिसता है। यहां पर आप आकर घूम सकते हैं। आप यहां पर झरने  पर नहाने का मजा भी ले सकते हैं। झरने के नीचे कुंड बना हुआ है। अगर आपको तैरते नहीं बनता है, तो आप कुंड के ज्यादा करीब नहीं जाएं, क्योंकि यह कुंड  ज्यादा गहरा है। यहां पर बहुत सारी गुफाएं हैं, जो चट्टानों पर बनी हुई है। आप उन्हें देख सकते हैं। यहां पर जो चारों तरफ का माहौल है। वह पूरा प्राकृतिक है, जो आपको खूबसूरत लगेगा। यहां पर आकर आपको बहुत शांति मिलेगी।यहां पर आकर आपको बहुत अच्छा लगेगा। यहां पर शिवरात्रि के समय मेला भी लगता है। आप यहां पर अपनी फैमिली और दोस्तों के साथ घूमने के लिए आ सकते हैं। केदारनाथ धाम मंदिर गुना जिले से करीब 34 किलोमीटर की दूरी पर है। आप यहां पर अपने वाहन से जा सकते हैं। 


निहाल देवी मंदिर निहालगढ़ गुना - Nihal Devi Mandir Nihalgarh Guna

निहाल देवी मंदिर गुना जिले में स्थित एक धार्मिक स्थल है। यह एक हिंदू मंदिर है। यहां पर आपको माता जी के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। यह मंदिर जंगल में है। आपको यहां चारों तरफ से हरियाली देखने मिलेगी। यहां पर आपको बहुत सारे बंदर भी देखने के लिए मिलते हैं। आप बंदरों को यहां पर दाना डाल सकते हैं। यहां पर आ कर आपको बहुत अच्छा लगेगा। यहां पर बहुत शांति है। यह मंदिर एक पहाड़ी पर बना हुआ है। मंदिर तक जाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है। आप इस मंदिर तक बहुत आसानी से पहुंच सकते हैं। यह मंदिर गुना जिले के निहालगढ़ में स्थित है। मंदिर के बाहर आपको कुछ मूर्तियां देखने के लिए मिल जाती हैं, जो खंडित अवस्था में हैं। यह मूर्तियां भगवान बुद्ध की है। मंदिर के बाहर आपको प्रसाद की दुकान देखने के लिए मिलती हैं, जहां से आप प्रसाद ले सकते हैं। 


संजय सागर जलाशय गुना - Sanjay Sagar Reservoir Guna

संजय सागर जलाशय गुना शहर में स्थित एक घूमने वाली जगह है। आप यहां पर आकर पिकनिक मना सकते हैं। यहां पर आपको खूबसूरत जलाशय देखने के लिए मिलता है। इस जलाशय में आप नहाने का मजा भी ले सकते हैं। यह जलाशय गुना इंदौर मार्ग पर स्थित है। यह जलाशय खूबसूरत है और चारों तरफ हरियाली से घिरा है। 


तुका बाबा मंदिर गुना  - Tuka Baba Mandir Guna

तुका बाबा मंदिर गुना शहर में राघोगढ़ में स्थित है। आप इस मंदिर में घूमने के लिए आ सकते हैं। यह मंदिर घने जंगल के बीच में स्थित है। यह मंदिर बहुत पुराना है। यहां पर आपको बंदर भी देखने के लिए मिल जाते हैं। आप यहां पर आ कर माता रानी के दर्शन कर सकते हैं। कहा जाता है कि यहां पर मांगी गई हर दुआ पूरी होती है, तो आप यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं। 


अष्टभुजी माता का मंदिर गुना - Ashtbhuji mata ka mandir Guna

अष्टभुजी माता का मंदिर गुना शहर में राघोगढ़ में स्थित है। इस मंदिर में आप घूमने के लिए आ सकते हैं। यह मंदिर भी घने जंगल के बीच में स्थित है। मंदिर के चारों तरफ आपको हरियाली देखने के लिए मिलती है। यहां पर मां अष्टभुजी की प्रतिमा आपको देखने के लिए मिल जाएगी। इसके अलावा यहां पर शंकर जी की और हनुमान जी की प्रतिमा भी आपको देखने के लिए मिल जाएगी। यहां आकर आपको बहुत शांति मिलेगी। 


शाहाबाद का किला गुना - Shahabad ka kila Guna 

शाहाबाद का किला गुना जिले से करीब 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह एक खूबसूरत दर्शनीय स्थल है। यह एक प्राचीन किला है। किले के अंदर आपको पुरानी बावड़ी, छतरी, मंदिर एवं मजार भी देखने के लिए मिल जाएगी। यहां पर आपको घोड़ों का अस्तबल भी देखने के लिए मिलेगा। यह किला बहुत बड़े एरिया में फैला हुआ है। यहां आकर आपको बहुत अच्छा लगेगा। आप किले तक ट्रैकिंग कर पहुंच सकते हैं। यह किला पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। यह किला मुगलों के अधीन भी रह चुका है। यह किला घने जंगलों के बीच में स्थित है। आपको यहां पर आकर बहुत अच्छा लगेगा। 


सिंगवासा पार्क गुना (singwasa park Guna)

मकरोड बांध गुना (Makarod bandh Guna )

प्राचीन शिव मंदिर गादेर गुफा  गुना (prachin shiv mandir gader gufa Guna)

खाटूश्याम जी मंदिर गुना (Khatushyam jee mandir Guna)


झांसी के दर्शनीय स्थल

ग्वालियर पर्यटन स्थल

मुरैना दर्शनीय स्थल

जबलपुर पर्यटन स्थल



चंदेरी पर्यटन स्थल - Chanderi tourist places | chanderi places to visit

चंदेरी के दर्शनीय स्थल - Places to visit in Chanderi | Chanderi  tourism चंदेरी शहर | Chanderi Attractions 



चंदेरी में घूमने की जगह


चंदेरी का किला - Chanderi ka kila

चंदेरी का किला चंदेरी शहर में स्थित एक मुख्य आकर्षण है। यह किला चंदेरी शहर में चंद्र गिरी नामक पहाड़ी पर बना हुआ है। इस किले का निर्माण 11 वीं शताब्दी में कीर्तिपाल नाम के प्रतिहार शासक ने करवाया था, जिसके कारण इस किले को कीर्ति दुर्ग के नाम से भी जाना जाता है। वर्तमान में बुंदेला राजा दुर्जन सिंह द्वारा बनवाए गए नवखंडा महल भी आपको यहां पर देखने के लिए मिल जाता है। किले में पहुंचने के लिए आपको यहां पर तीन रास्ते मिलते हैं। पश्चिम की ओर जो प्रवेश द्वार है, उसे हवा महल या हवापौर के नाम से जाना जाता है। दूसरा खूनी दरवाजा है, जिसके बारे में अनोखी कहानी प्रसिद्ध है और तीसरा जोगेश्वरी देवी मंदिर की तरफ से सीढ़ियों द्वारा चढ़ाई चढ़कर किले में पहुंचा जा सकता है। किले तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग भी उपलब्ध है। 

यह किला बलुआ पत्थर से बना हुआ है। यह किला 250 फीट ऊंची चट्टानों पर स्थित उत्तर से दक्षिण की तरफ लगभग 1 मील से ज्यादा क्षेत्र में फैला हुआ है। इस किले के प्रवेश द्वार को खूनी दरवाजा कहते हैं, क्योंकि कहा जाता है कि यहां कैदियों को मौत के घाट उतारा जाता था। इस किले के अंदर आपको खिलजी का मकबरा, जो 14 वी शताब्दी में बनाया गया था। जोहर स्मारक तथा प्रसिद्ध संगीतकार बैजू बावरा की समाधि देखने के लिए मिल जाएगी, जो दर्शनीय स्थल है। किले से आपको चंदेरी शहर का खूबसूरत भी अभी देखने के लिए मिलता है। 


जागेश्वरी माता मंदिर चंदेरी - Jageshwari mata mandir chanderi

जागेश्वरी माता का मंदिर चंदेरी में स्थित एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। जागेश्वरी माता का मंदिर चंदेरी दुर्ग के पास ही में स्थित है। यह मंदिर प्राचीन है और प्राकृतिक है। यहां पर आकर आपको जगदंबा माता जी के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। यहां पर आपको शिवलिंग के भी दर्शन करने के लिए मिलते हैं। यहां पर आपको आकर बहुत अच्छा लगेगा। चारों तरफ का जो माहौल है, वह पूरी तरह से प्राकृतिक है। यहां पर पहाड़ों से जलधारा भी बहती है। वह भी आप देख सकते हैं। यहां पर आपको आकर सुकून मिलेगा। 


चंदेरी संग्रहालय  - Chanderi sangrahalay

चंदेरी संग्रहालय चंदेरी में स्थित एक प्रमुख जगह है। यहां पर आपको प्राचीन वस्तुएं देखने के लिए मिल जाती हैं। यहां पर अलग-अलग गैलरी बनाई गई है, जहां पर जाकर आप प्राचीन इतिहास के बारे में जान सकते हैं। यह संग्रहालय सुबह से शाम तक खुला रहता है। यह संग्रहालय दो मंजिला है और यहां पर प्रवेश का शुल्क बहुत कम है। आप यहां पर अच्छा समय बिता सकते हैं। 


श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र खंदारजी चंदेरी - shree digambar jain atishay kshetra khandar ji Chanderi

श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र खंदारजी चंदेरी में स्थित एक प्रमुख जैन तीर्थ स्थल है। यहां पर आपको श्री आदिनाथ जी की पत्थर पर बनी हुई प्रतिमा देखने के लिए मिलती है, जो 38 फीट ऊंची है। यह बहुत सुंदर है और कलात्मक है। आपको इसको देख कर बहुत अच्छा लगेगा। यह स्थल चंदेरी से करीब 1 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। यह विंध्याचल पहाड़ी पर बनी हुई है। यहां पर आपको आकर बहुत सारी गुफाएं देखने के लिए मिलती है। 


कटी घाटी चंदेरी - Kati ghati chanderi

कटी घाटी चंदेरी शहर का एक मुख्य आकर्षण स्थल है। यहां पर पहाड़ को काटकर रास्ता बनाया गया है। यहां पर आ कर आपको बहुत अच्छा लगेगा। यहां से चंदेरी शहर का खूबसूरत व्यू देखने के लिए मिलता है। कटी घाटी चंदेरी नगर के दक्षिण में पहाड़ को काटकर बनाया गया है। कटी घाटी की ऊंचाई 80 फीट है। इसकी चैड़ाई 29 फीट है और लंबाई 192 फिट है। इस घाटी के बीच में ही पहाड़ को काटकर प्रवेश द्वार बनाया गया है, जिसके दोनों ओर दो बुर्ज बनाए गए हैं। यहां पर आप घाटी के ऊपर भी जा सकते हैं। ऊपर जाने के लिए सीढ़ियां बनाई गई है। कटी घाटी के पास मिल लेख के अनुसार यह घाटी सन 1490 ईसवी में मालवा के सुल्तान गयासुद्दीन के शासनकाल में जिमन खा द्वारा बनाई गई थी। यह भी कहा जाता है कि इस घाटी का निर्माण एक ही रात में चट्टानों को काटकर किया गया है।  यह बात बहुत आश्चर्यजनक है। 


कोशक महल चंदेरी - Koshak mahal chanderi

कोशक महल चंदेरी में घूमने के लिए का एक मुख्य पर्यटन स्थल है। आपको यहां पर एक खूबसूरत महल देखने के लिए मिलता है। यह महल ऐतिहासिक स्थल है। इस महल का निर्माण 15वीं शताब्दी में मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी प्रथम ने जौनपुर विजय के उपलक्ष में करवाया था। यह एक अनूठा स्मारक है और धन के आकार में चार बराबर खंडों में बटा हुआ है। इसके चारों खंडों की नाप एवं आकृति सभी एक समान है। यह महल अफगान शैली में बना हुआ है। इस महल की 3 मंजिले पूर्ण हो गई है, जबकि चैथी मंजिल के कुछ भाग ही शेष हुआ है। यहां पर आकर बहुत अच्छा लगेगा। यहां पर गार्डन भी बना हुआ है, जहां पर आप अपना अच्छा समय बिता सकते हैं। यहां पर प्रवेश का किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता है। आप यहां पर सुबह से शाम तक घूम सकते हैं और यहां पर समय बिता सकते हैं। यहां पर फोटोग्राफ भी बहुत अच्छी आती है।


शहजादी का रोजा चंदेरी - shahzadi ka roza chanderi

शहजादी का रोजा चंदेरी शहर में स्थित एक मुख्य पर्यटन स्थल है। यहां पर आपको एक स्मारक देखने के लिए मिलता है, जो प्राचीन है। यहां पर राजकुमारी मेहरुनिसा की कब्र है। कहा जाता है कि राजकुमारी मेहरुनिसा एक सामान्य व्यक्ति से प्यार करती थी। जब उनके पिताजी को पता चला, तो उन्होंने राजकुमारी के प्रेमी को हत्या करने का षड्यंत्र रचा और हत्यारे भेज दिया। जब राजकुमारी को इन सब बातों का पता चला तो राजकुमारी अपने प्रेमी को बचाने के लिए उनके पास पहुंची। मगर उनके प्रेमी की मृत्यु हो गई थी। यह सब राजकुमारी सहन नहीं कर सकी और उन्होंने भी अपने जीवन को समाप्त कर दिया। यह सब देखकर राजकुमारी मेहरुनिसा के पिताजी को अच्छा नहीं लगा और उन्होंने यहां पर राजकुमारी मेहरुनिसा की कब्र बनाए और उनके कब्र के बाजू में ही उनके प्रेमी को भी दफन किया। आप यहां पर आकर इस मकबरे की खूबसूरती को देख सकते हैं। यहां पर खूबसूरत गार्डन भी बना हुआ है। आपको यहां पर आकर अच्छा लगेगा। 


परमेश्वर तालाब एवं लक्ष्मण मंदिर चंदेरी - Parmeshwar talab aur lakshman mandir chanderi

परमेश्वर तालाब चंदेरी में शहजादी के रोजा के पास ही में स्थित है। आप यहां पर जाकर अपना कुछ समय बिता सकते हैं। परमेश्वर तालाब प्राचीन है। तलाक के बाजू में ही लक्ष्मण मंदिर स्थित है। यह मंदिर भी बहुत प्रसिद्ध है। तालाब में महिला और पुरुष के नहाने के लिए अलग-अलग घाट बने हुए हैं। तालाब में आप मछलियों को खाना खिला सकते हैं। पूजा कर सकते हैं। तालाब के चारों ओर बैठने की अच्छी व्यवस्था है। झील में फव्वारा भी लगा हुआ है, जो रात में बहुत खूबसूरत लगता है। आपको यहां पर आकर बहुत अच्छा लगेगा। परमेश्वर तालाब के किनारे में लक्ष्मण मंदिर बना हुआ है। इसे 18वीं सदी में बुंदेला राजा अनिरुद्ध सिंह ने बनवाया था। यह मंदिर और भी पुराना है। मंदिर में शेषनाग की मूर्ति स्थापित है। 


राजा भरत शाह की छतरी चंदेरी - Raja bharat shah ki chhatri chanderi

परमेश्वर तालाब के एक छोर पर बुंदेला राजा भरत शाह की छतरी है।  इस छतरी का निर्माण राजा देवी सिंह बुंदेला द्वारा 1642 से 1654 के बीच में किया गया था। इस इमारत के पास एक बोर्ड लगा है जिस पर इस छतरी के बारे में जानकारी दी गई है। यह छतरी बलुआ पत्थर से निर्मित है। यह छतरी अष्टकोण है। यह छतरी अब खंडार अवस्था में यहां पर मौजूद है। आप यहां पर आकर इस छतरी की खूबसूरती को देख सकते हैं। 


बत्तीसी बावड़ी चंदेरी - Battisi bawdi chanderi

बत्तीसी बावड़ी चंदेरी में घूमने की एक प्रमुख जगह है। यह चंदेरी शहर के जंगल में स्थित है। इसलिए यहां पर बहुत कम ही यात्री जाते हैं। आप यहां पर जा सकते हैं। आपको यहां पर कुछ दूरी तक पैदल भी चलना पड़ सकता है। बत्तीसी बावली चंदेरी के सबसे बड़े बावड़ी में से एक है। यहां पर आपको खूबसूरत बावड़ी देखने के लिए मिलती है। इस बावड़ी में 32 घाट हैं। इसलिए शायद इसे बत्तीसी बावड़ी के नाम से जाना जाता है। इस बावड़ी का निर्माण 1485 में मालवा के सुल्तान ग्यास शाह ने करवाया था। 


बड़ा मदरसा चंदेरी - Bada madarsa chanderi

बड़ा मदरसा चंदेरी में स्थित एक प्राचीन इमारत है। आप यहां पर भी घूमने के लिए आ सकते हैं। यह जगह सुनसान इलाके में स्थित है। यहां पर आपको एक इमारत देखने के लिए मिलती है। इमारत के अंदर दो कब्र हैं। इस मकबरे को बाद में मदरसे में परिवर्तित कर दिया गया था। इस मकबरे का निर्माण मालवा सल्तनत के महमूद खिलजी के द्वारा 1450 में किया गया था। आपको यहां पर आकर अच्छा लगेगा। 


सिंहपुर महल चंदेरी - Singhpur Mahal Chanderi

सिंहपुर महल चंदेरी में स्थित एक प्रमुख जगह है। यह महल पिछोर रोड पर स्थित है। आप यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं। महल के सामने ही सुंदर तालाब बना हुआ है। आप उसे भी देख सकते हैं। यह महल चंदेरी शहर से करीब 4 किलोमीटर की दूरी पर एक ऊंचे पहाड़ पर स्थित है। यह महल तीन मंजिला है। इस महल का निर्माण देवी सिंह बुंदेला ने 1656 में किया था। इस महल का उपयोग उस समय रेस्ट हाउस के रूप में किया जाता था। इस महल के चारों तरफ जंगल है। आपको यहां पर आकर बहुत शांति महसूस होगी। 


बादल महल दरवाजा चंदेरी - Badal Mahal Darwaza Chanderi

बादल महल दरवाजा चंदेरी शहर में घूमने का एक प्रमुख आकर्षण है। यहां पर आपको एक प्रवेश द्वार देखने के लिए मिलता है, जो बहुत ही खूबसूरती से बनाया गया है। यहां पर बहुत बड़ा पार्क है, जहां पर आप अपना समय बिता सकते हैं। यह जो प्रवेश द्वार है, यह किसी किले का गेट नहीं है या किसी महल का गेट नहीं है। यह सिर्फ गेट की संरचना बनाई गई है। यह प्रवेश द्वार बहुत खूबसूरती से बनाया गया है। प्रवेश द्वार  के दोनों तरफ आपको मीनारें देखने के लिए मिलती हैं। प्रवेश द्वार के ऊपरी भाग में खूबसूरत जाली की आकृति है।  इस प्रवेश द्वार का निर्माण मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी ने 15 वी शताब्दी में करवाया था। यह एक महत्वपूर्ण जीत को चिन्हित करने के लिए बनाया गया था। बादल महल दरवाजे की ऊंचाई 100 फीट की है। आप यहां पर आकर अपना अच्छा समय बिता सकते हैं। 


जामा मस्जिद चंदेरी  - Jama Masjid Chanderi

जामा मस्जिद चंदेरी में स्थित सबसे पुरानी मस्जिद है। यह मस्जिद बादल महल के पास ही में है। जामा मस्जिद चंदेरी शहर की सबसे पुरानी और बड़ी मस्जिद है। इस मस्जिद का निर्माण गयासुद्दीन तुगलक ने करवाया था। मस्जिद में आपको बड़े-बड़े हॉल देखने के लिए मिलते हैं और उस पर गुंबद देखने के लिए मिलते हैं। यह मस्जिद बहुत ही आकर्षक लगती है। 


राजा रानी पैलेस चंदेरी - Raja Rani Palace Chanderi

राजा रानी महल चंदेरी में एक देखने लायक जगह है। यहां पर आपको महल देखने के लिए मिलता है, जिसमें राजा रानी रहते थे। यह महल 15वीं सदी में बनाया गया है। इस महल को बुंदेला राजा दुर्जन सिंह ने 1587 से 1733 ईसवी के बीच बनाया है। इस महल का उपयोग हमाम खाने के रूप में किया जाता था। 


चौबीसी दिगंबर जैन मंदिर चंदेरी - Chaubisi Digambar Jain Mandir Chanderi

चैबीसी दिगंबर जैन मंदिर चंदेरी में घूमने की एक प्रमुख जगह है। यह जैन धर्म का एक धार्मिक स्थल है। यहां पर आपको प्राचीन मूर्तियां देखने के लिए मिलती हैं। चैबीसी जैन मंदिर को बुंदेलखंड का गौरव कहा जाता है। यह मंदिर दो भागों में विभक्त है। प्रथम भाग बड़ा मंदिर है, जो 13वीं शताब्दी में निर्मित किया गया है। इसमें बाहुबली भगवान की कायोत्सर्ग प्रतिमा निर्मित है। द्वितीय भाग में  चौबीसी जैन मंदिर है, जिसमें दिगंबर जैन के 24 तीर्थंकर की प्रतिमा पृथक पृथक 24 शिखर युक्त, पद्मासन, ध्यानासन  मुद्रा में विराजमान है। इस मंदिर की प्रसिद्धि का कारण यह है, कि इस मंदिर में जो मूर्तियां पाई गई हैं। उस तरह की मूर्तियां आपको और कहीं देखने के लिए नहीं मिलेगी। इस मंदिर का निर्माण सन 1893 में कराया गया था। 


पुरानी कचहरी चंदेरी - Purani kachahari chanderi

पुरानी अदालत चंदेरी में घूमने की एक प्रमुख जगह है। यहां पर आपको एक महल देखने के लिए मिलता है। यह महल दो मंजिला है। इस महल का निर्माण बुंदेला राजाओं के द्वारा किया गया है। इस महल को पुरानी कचहरी के नाम से जाना जाता है। लेकिन यह बुंदेला शासकों का महल है। इस महल का निर्माण 17 और 18 वीं शताब्दी में बुंदेला राजा द्वारा किया गया है। पूर्व काल में न्यायालय संचालित रहने के कारण इसे पुरानी कचहरी कहा जाता था। इस इमारत के सामने बोर्ड पर लिखा है कि यह विशाल इमारत न्याय का घर है 


चकला बावड़ी चंदेरी - Chakla bawdi chanderi

चकला बावड़ी चंदेरी में घूमने की एक प्रमुख जगह है। इस बावड़ी का निर्माण 15वीं सदी में मांडू के सुल्तान द्वारा कराया गया था।  उस बावड़ी का उपयोग महिलाओं के स्नान हेतु किया जाता था। बाबरी में दोनों और सीढ़ियां बनी हुई है। इसका निर्माण सन 1684 ईसवी में हुआ था। आप यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं।


मालन खो झरना चंदेरी - Malankho jharna chanderi

मालन खो झरना चंदेरी से करीब 6  किलोमीटर की दूरी पर घने जंगलों में स्थित है। यह खूबसूरत झरना है। यह झरना चंदेरी में स्थित एक प्राकृतिक स्थल है। इस झरने के चारों तरफ घना जंगल स्थित है। आप यहां पर बरसात के समय पिकनिक मनाने के लिए आ सकते हैं। यहां पर सिद्धेश्वर हनुमान जी का मंदिर है। यहां करीब 50 मीटर की ऊंचाई से झरना नीचे गिरता है, जिसमें लोग नहाने का मजा ले सकते हैं। चारों तरफ हरियाली के बीच में यह झरना बहुत खूबसूरत लगता है। यहां पर एक गुफा भी स्थित है। यहां पर शिवलिंग स्थित है, जिसका जल अभिषेक पहाड़ों से गिरते हुए पानी के द्वारा होता है और यह पानी साल भर और 24 घंटे गिरता है। यह एक प्राकृतिक स्थल के साथ-साथ धार्मिक स्थल भी है। आप यहां घूमने के लिए आ सकते हैं। 


झांसी के दर्शनीय स्थल

ग्वालियर पर्यटन स्थल

मुरैना दर्शनीय स्थल

जबलपुर पर्यटन स्थल




ओरछा पर्यटन स्थल - Orchha tourist places | Best places to visit in orchha

ओरछा दर्शनीय स्थल - Orchha sightseeing | Orchha attractions | Places to visit in orchha | ओरछा के आकर्षण स्थल


ओरछा में घूमने की जगहें


ओरछा किला  - Orchha kila

ओरछा किला ओरछा शहर की एक मुख्य आकर्षण स्थल है। इस किले में प्रवेश का शुल्क लिया जाता है। यह किला बहुत बड़ा है। किले के अंदर बहुत सारी जगह हैं, जिन्हें आप देख सकते हैं। किले से आपको बेतवा नदी का बहुत ही खूबसूरत नजारा देखने के लिए मिल जाता है। यह किला बहुत बड़ा है। आप यहां पर गाइड भी कर सकते हैं। गाइड का अलग चार्ज रहता है। यह किला 16वीं शताब्दी में बना था। 


राजा महल ओरछा - Raja Mahal Orchha

राजा महल ओरछा में ओरछा किला में स्थित पहला महल है। यह महल वर्गा आकार में बना हुआ है। महल के बीच में एक छोटा सा कुंड बना हुआ है, जो बारिश में पानी से भर जाता है। चारों तरफ कमरे बने हुए हैं, जो राजा, रानी और उनके पुत्र के थे। इस महल का निर्माण 1931 से 1929 के बीच हुआ है। यह महल भारती चंद के द्वारा बनाया गया है। यहां पर आपको दीवाने ए आम और दीवाने ए खास भी देखने के लिए मिल जाता है। दीवाने ए आम और दीवाने ए खास भारती चंद के भाई मधुकर शाह के द्वारा बनाया गया है। महलों की दीवारों एवं छत पर आपको खूबसूरत रंगों से सजी हुई पेंटिंग देखने के लिए मिलती है। 


जहांगीर महल ओरछा - Jahangir Mahal Orchha

जहांगीर महल ओरछा किले में स्थित एक फेमस महल है। इस महल का निर्माण वीर सिंह जूदेव जी ने किया था। जहांगीर महल का निर्माण 17वीं शताब्दी में किया गया था। इस महल का निर्माण सम्राट जहांगीर के स्वागत के लिए किया गया था। जब वह ओरछा में आए थे। यह महल भी वर्गाकार आकार में बना हुआ है और इस महल में आपको गुंबद, कमरे और बालकनी देखने के लिए मिल जाती हैं। 


राय प्रवीन महल ओरछा - Rai Praveen Mahal Orchha

राय प्रवीण महल ओरछा में ओरछा किले के अंदर स्थित एक महल है। यह महल बहुत खूबसूरत है। इस महल के अंदर आपको खूबसूरत रंगों से सजी पेंटिंग देखने के लिए मिलती हैं। यह पेंटिंग नृत्य करती हुई नृतकी की पेंटिंग आपको देखने के लिए मिलती है। राय प्रवीण महल छोटा सा महल है। यहां पर आपको बगीचा भी देखने के लिए मिल जाता है। इस महल का निर्माण 1572 ईस्वी में इंद्रजीत सिंह ने करवाया था। उन्होंने इस महल का निर्माण अपने दरबार की कवियत्री, गायक व नृतकी राय प्रवीण के लिए करवाया था। यह महल दो मंजिला है।  आपको यहां पर आकर अच्छा लगेगा। 

ओरछा किले में बहुत सारी जगह हैं जैसे पुराने महल, खंडहर, शीश महल, बकासराय कोठी आपको देखने के लिए मिल जाती है। 


चतुर्भुज मंदिर ओरछा - Chaturbhuj mandir orchha

चतुर्भुज मंदिर ओरछा में स्थित एक प्रमुख आकर्षण स्थल है। चतुर्भुज मंदिर ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण स्मारक है। यह एक धार्मिक स्थल है। यह एक हिंदू मंदिर है। यह मंदिर विष्णु भगवान जी को समर्पित है। यह मंदिर महल की तरह दिखता है। यह मंदिर बहुमंजिला है और इसकी वास्तुकला बहुत ही भव्य है। आपको इस मंदिर में आकर बहुत अच्छा लगेगा और शांति मिलेगी। मंदिर को चतुर्भुज के नाम से जाना जाता है चतुर्भुज का मतलब होता है चतुर का मतलब होता है - चार और भुज का मतलब होता है - भुजा मतलब चार भुजाओं वाला। यहां पर आप अपने दोस्तों के साथ और परिवार के साथ आकर मंदिर को देख सकते हैं। इस मंदिर का निर्माण महाराजा मधुकर शाह ने महारानी गणेश कुंवारी के आराध्य देव राजाराम की स्थापना हेतु प्रारंभ करवाया था। इस मंदिर का निर्माण राजा मधुकर शाह ने 1558-1573 के बीच के वर्षों में करवाया था। चतुर्भुज मंदिर ओरछा में ओरछा किला और राम राजा मंदिर के पास ही में स्थित है। आप यहां पर आराम से पहुंच सकते हैं। 


राम राजा मंदिर ओरछा - Ram Raja mandir orchha

श्री राम राजा मंदिर ओरछा में स्थित एक धार्मिक स्थल है। यह एक हिंदू मंदिर है। यह मंदिर राम भगवान जी को समर्पित है। यह मंदिर बहुत ही भव्य मंदिर है। मंदिर में आकर बहुत अच्छा लगता है। आपको बहुत शांति मिलेगी। त्योहारों में मंदिर में बहुत ज्यादा भीड़ रहती है। इस मंदिर का निर्माण 17 वीं शताब्दी में राजा मधुकर शाह ने करवाया था। यह पूरी दुनिया में एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां पर राम भगवान जी को भगवान के रूप में नहीं, राजा के रूप में पूजा जाता है और भगवान राम यहां पर राजा के रूप में शासन भी करते हैं। यहां पर भगवान राम को सलामी देने के लिए यहां के पुलिसकर्मी और यहां के कलेक्टर आते हैं। मंदिर में आ कर बहुत अच्छा लगता है। बहुत शांति मिलती है। आम दिनों में भी यहां पर लोग भगवान जी के दर्शन करने के लिए आते हैं। यहां पर दिन में 4 से 5 बार  आरती होती है। आप अपने दोस्तों और परिवार के साथ यहां पर यात्रा कर सकते हैं। 


लक्ष्मी नारायण मंदिर ओरछा - Lakshmi narayan mandir orchha

लक्ष्मी नारायण मंदिर ओरछा में स्थित एक धार्मिक स्थल है। यह एक हिंदू मंदिर है और धन की देवी लक्ष्मी जी को समर्पित है। आप इस मंदिर में घूमने के लिए आ सकते हैं। यह मंदिर भी महल की तरह दिखता है और मंदिर के अंदर आपको खूबसूरत पेंटिंग देखने के लिए मिल जाती है। इस मंदिर का निर्माण 1622 में वीर सिंह देव द्वारा किया गया था। आप आकर इस मंदिर की भव्यता को देख सकते हैं। इसमें गुंबद बने हुए हैं। सुंदर खिड़कियां बनी हुई है। यह मंदिर 2 मंजिला है। 


शाही छतरी ओरछा  - shahi chhatris orchha

शाही छतरी ओरछा में स्थित एक सबसे खूबसूरत पर्यटन स्थल है। शाही छतरी ओरछा में बेतवा नदी के तट के किनारे स्थित है। यहां पर आपको खूबसूरत छतरियां देखने मिलती हैं। गार्डन देखने के लिए मिलता है और ओरछा नदी का खूबसूरत व्यू देखने के लिए मिलता है। यहां पर 14 छतरियां हैं। यह छतरियां बेतवा नदी के कंचना घाट के पास स्थित है। यहां पर खूबसूरत गार्डन बना हुआ है, जहां पर आप बैठ सकते हैं और खूबसूरत नजारे को इंजॉय कर सकते हैं। यह छतरिया बुंदेला शासकों द्वारा निर्मित की गई थी। यहां पर आप अपने परिवार और दोस्तों के साथ आ सकते हैं। इनका निर्माण 17वीं शताब्दी में हुआ है। बुंदेला राजाओं के मृत पूर्वजों को सम्मान देने के लिए इन छतरी का निर्माण किया गया है। इनकी वास्तुकला बहुत ही अद्भुत है। यह फोटोग्राफी के लिए बहुत अच्छी जगह है। 


ओरछा अभयारण्य ओरछा - Orchha abhayaranya orchha

ओरछा अभयारण्य ओरछा शहर में घूमने की एक अच्छी जगह है। यहां पर आपको अलग-अलग तरह की वनस्पतियां एवं वन्य जीव के दर्शन होते हैं। बेतवा नदी ओरछा अभयारण्य के दोनों तरफ बहती है। आपको यहां पर बहुत सारे दर्शनीय स्थल भी देखने के लिए मिलते हैं। ओरछा अभयारण्य  की स्थापना 1994 में की गई थी। यह लगभग 46 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। आपको यहां पर आकर बहुत सारे जंगली जानवर देखने के लिए मिल जाते हैं - जैसे हिरण, नीलगाय, बंदर, जंगली सूअर, भालू और भी जंगली जानवर आपको देखने के लिए मिलते हैं। यहां पर पक्षियों की बहुत सारी प्रजातियां आपको देखने के लिए मिलती है। आप यहां पर रिवर राफ्टिंग, बोटिंग, कैंपिंग और जंगल ट्रैकिंग का मजा ले सकते हैं। 


पंचमुखी शंकर मंदिर ओरछा - Panchmukhi shankar mandir orchha

पंचमुखी शंकर मंदिर ओरछा में ओरछा किले के पास में स्थित है। यह मंदिर शिव भगवान जी को समर्पित है। यहां पर भगवान शिव  की पंचमुखी प्रतिमा विराजमान है। यह मंदिर भी प्राचीन है। आपको यहां पर आकर अच्छा लगेगा। 


कोठी घाट ओरछा (Kothi ghat orchha )

सावन भादों स्तंभों ओरछा (sawan bhado stambh orchha)

हरदौल वाटिका ओरछा (hardaul vaatika orchha)

पालकी महल ओरछा (palaki mahal  orchha)

वनवासी मंदिर ओरछा (vanavasi mandir orchha)

श्री बेतेश्वर महादेव मंदिर ओरछा (shree beteshvar mahadev mandir orchha)


झांसी के दर्शनीय स्थल

ग्वालियर पर्यटन स्थल

मुरैना दर्शनीय स्थल

जबलपुर पर्यटन स्थल


झांसी पर्यटन स्थल - Places to visit in Jhansi | Jhansi tourist places in hindi

झांसी के दर्शनीय स्थल - Jhansi ki famous jagah | Jhansi sightseeing | Jhansi places to visit| झांसी के प्रसिद्ध स्थान


झांसी में घूमने की जगहें
Jhansi mein ghumne ki jagah



झांसी का किला - Jhansi ka kila

झांसी का किला झांसी शहर का एक मुख्य आकर्षण है। झांसी का किला झांसी रेलवे स्टेशन के बहुत करीब है। आप यहां पर आकर घूम कर अपने इतिहास के बारे में जान सकते हैं। झांसी के किले का निर्माण ओरछा के राजा वीर सिंह जूदेव ने 1613 में करवाया था। झांसी का किला उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में स्थित है। झांसी जिले को प्राचीन काल में बलवंत नगर के नाम से जाना जाता था। झांसी का किला बंगरा नाम की पहाड़ी पर बना है। किले में 10 गेट है - इनमें से कुछ गेट महत्वपूर्ण है। दतिया गेट, उन्नाव गेट, लक्ष्मी गेट, सागर गेट, ओरछा गेट और चांद गेट हैं। यह किला बहुत बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है। इसलिए इस किले में  घूमने में आपको करीब 3 से 4 घंटे लग सकते हैं। किले में प्रवेश करने के लिए आपको टिकट लेना पड़ता है। टिकट ऑनलाइन भी आपको मिल जाता है। किले में पार्किंग की व्यवस्था भी है। 

झांसी के किले के अंदर देखने के लिए बहुत सारी जगह है। 

कड़क बिजली तोप 

कड़क बिजली तोप झांसी किले का एक मुख्य आकर्षण है। कड़क बिजली तोप का नाम इसके कार्य के अनुरूप रखा गया है, क्योंकि जब यह तोप चलाई जाती थी, तोप की आवाज जैसे बादल में बिजली कड़कती है, उस तरह की थी। इसलिए इस तोप को कड़क बिजली तोप कहा जाता है। यह तोप बहुत पुरानी है। यह तोप झाँसी किले के  मुख्य द्वार पर है। 

शिव मंदिर 

झांसी किले के अंदर शिव मंदिर स्थित है। यह भी झांसी किले के अंदर स्थित मुख्य आकर्षण हैं। 

गणेश जी का मंदिर 

झांसी किले के अंदर गणेश जी का मंदिर भी स्थित है। आप यहां पर भी घूम सकते हैं। 

झांसी के किले के एक स्थल से रानी लक्ष्मीबाई जी ने अपने घोड़े के साथ एवं अपने पुत्र के साथ छलांग लगाई थी। आप वह भी देख सकते हैं। किले के भीतर आपको बरादरी, मेमोरियल सिमेट्री, कालकोठरी, फांसी स्तंभ, गुलाम गौस खां , खुदा बख्श व मोतीबाई की कब्र भी देखने मिल जाएगी। किले में भवानी शंकर नाम की भी एक तोप है। आपको इस किले से झांसी शहर का मनोरम दृश्य भी देखने के लिए मिल जाता है। यह किला बहुत सुंदर है और आपको यहां पर आकर बहुत अच्छा लगेगा। 


राजकीय संग्रहालय झाँसी - Sarkari sangrahalaya Jhansi

झांसी राजकीय संग्रहालय झांसी जिले में घूमने की एक प्रमुख जगह है। यहां पर आपको प्राचीन पेंटिंग्स और मूर्तियों का संग्रह देखने के लिए मिल जाता है। यहां पर पेंटिंग्स और मूर्तियों के लिए अलग-अलग गैलरी है। आप यहां पर 1857 की क्रांति की पेंटिंग्स भी देख सकते हैं। इसके अलावा इस संग्रहालय में झांसी के इतिहास को भी दर्शाया गया है। वह भी आप देख सकते हैं। यहां पर आपको प्राचीन आभूषण, बर्तन, झांसी रियासत के नक्शे, राइफल, पिस्तौल, एवं  प्राचीन समय में सैनिकों के द्वारा उपयोग किए जाने वाले हथियार भी देखने के लिए मिल जाते हैं। झांसी संग्रहालय झांसी किले से थोड़ी दूरी पर स्थित है। आप यहां पर पैदल भी आ सकते हैं। यह संग्रहालय सरकार के द्वारा प्रबंधित किया जाता है। इसलिए इस संग्रहालय का प्रवेश शुल्क बहुत ही कम है। आप यहां पर फोटो भी खींच सकते हैं। उसका भी शुल्क लिया जाता है, जो बहुत कम है। यहां संग्रहालय सुबह 10 बजे से 5 बजे तक खुला रहता है। 


रानी लक्ष्मी बाई पार्क झाँसी - Rani Laxmi Bai Park Jhansi

रानी लक्ष्मी बाई पार्क झांसी शहर में घूमने की एक अच्छी जगह है। यह झांसी शहर का सबसे अच्छा पार्क है। यह पार्क बहुत अच्छी तरह से मैनेज किया गया है। इस पार्क में चारों तरफ आपको हरियाली देखने के लिए मिलती है। यहां पर आपको बहुत सारे झूले और फिसलपट्टी मिल जाती है। यह जगह बच्चों के लिए बहुत अच्छी है। यहां पर फव्वारा भी लगा हुआ है। यहां पर जोगिंग के लिए, वॉकिंग के लिए, एक्सरसाइज के लिए अलग-अलग ट्रैक बनाए गए हैं। आप यहां पर योगा भी कर सकते हैं। आपको यहां पर बहुत अच्छा लगेगा। रानी लक्ष्मी बाई पार्क झांसी किले के पास ही में स्थित है। आप यहां पर झांसी किले से पैदल भी पहुंच सकते हैं। 


मैथिलीशरण गुप्त पार्क झांसी - Maithili Sharan gupt park jhansi

मैथिलीशरण गुप्त पार्क झांसी शहर में स्थित एक खूबसूरत पार्क है।  यह पार्क रानी लक्ष्मी बाई पार्क के पास ही में स्थित है। यह पार्क मॉर्निंग वॉक के लिए बहुत अच्छा है। आप यहां पर आकर वाकिंग और रनिंग कर सकते हैं। इस पार्क में भी चारों तरफ आपको हरियाली देखने के लिए मिल जाती है। 


इस्कॉन मंदिर झाँसी - Iskcon mandir Jhansi

इस्कॉन मंदिर झांसी में घूमने का एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर सफेद संगमरमर से बना हुआ है और बहुत खूबसूरत लगता है। यह मंदिर श्री राधा और कृष्ण जी को समर्पित है। मंदिर में आपको प्रतिदिन खिचड़ी का प्रसाद खाने के लिए भी मिलता है। मंदिर के बाहर आपको बहुत सारी प्रसाद की दुकान देखने के लिए मिलती है। आप वहां से प्रसाद ले सकते हैं। मंदिर में गौशाला भी बनी हुई है और यहां पर छोटा सा गार्डन भी है, जहां पर आप बैठ सकते हैं और बच्चे खेल सकते हैं। मंदिर का वातावरण बहुत शांत है और मंदिर में भजन-कीर्तन होते रहते हैं, जिससे मन को बहुत शांति मिलती है। 


रानी महल झांसी - Rani Mahal Jhansi

रानी महल झांसी शहर की एक महत्वपूर्ण जगह है। यह एक प्राचीन महल है। यह महल प्राचीन समय में रानी लक्ष्मीबाई का निवास स्थल रहा है। इस महल का निर्माण रघुनाथ द्वितीय ने करवाया है, जो उस समय झांसी के सूबेदार रहे थे। इस महल के फर्स्ट फ्लोर को म्यूजियम में परिवर्तित कर दिया गया है। म्यूजियम में आपको प्राचीन समय की पुरानी मूर्तियां और पुराने सामान देखने के लिए मिल जाते हैं। यह महल दो मंजिला है। इस महल में 6 हाल है और आंगन है। इस महल में आपको फव्वारा भी देखने के लिए मिल जाता है। महल में एक कुआ भी है। यहां पर आपको दीवारों पर खूबसूरत पेंटिंग देखने के लिए मिल जाती है। इस महल में प्रवेश का आपसे शुल्क लिया जाता है, जो बहुत ही कम रहता है। आप यहां पर अपने दोस्त और परिवार के लोगों के साथ घूमने के लिए आ सकते हैं। 

 

राजकीय उद्यान नारायण बाग झांसी - Narayan Bagh Jhansi

नारायण बाग झांसी शहर में स्थित एक उद्यान है। यह उद्यान हरे भरे पेड़ों से घिरा हुआ है। आप यहां पर सुबह मॉर्निंग वॉक पर भी आ सकते हैं। यहां पर आपको तरह तरह के फूल देखने के लिए मिल जाते हैं। यहां पर वाकिंग के लिए और एक्सरसाइज के लिए अलग-अलग जगह है। यहां पर आपको वॉलीबॉल और बैडमिंटन के लिए अलग-अलग जगह खेलने के लिए मिलती है। आपको यहां पर आकर बहुत अच्छा लगेगा। 


हर्बल गार्डन झांसी - Herbal Garden Jhansi

हर्बल गार्डन झांसी में घूमने की एक जगह है। यह एक गार्डन है। इस गार्डन में बहुत सारे मूर्तियां और अलग-अलग प्रकार की कलाकृतियां आपको देखने के लिए मिलेंगे, जो बेकार सामान या अनुपयोगी सामान से बनाई गई है। यह बहुत अच्छे क्रिएटिविटी है। यहां पर आपको चारों तरफ हरियाली देखने के लिए मिल जाएगी। यहां पर वाकिंग ट्रेक है, जहां पर आप वाकिंग कर सकते हैं। आपको यहां पर आकर अच्छा लगेगा। 


सेंट जूड चर्च झांसी - St. Jude Church Jhansi

सैंट जूड चर्च झांसी में स्थित एक प्रमुख चर्च है। यह चर्च झांसी का एक प्रमुख आकर्षण स्थल है। यह चर्च बहुत बड़ा और खूबसूरत है। आप यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं। आपको यहां पर आकर अच्छा अनुभव मिलेगा। यह चर्च भारत के सबसे बड़े चर्चों में से एक है। यह चर्च झाँसी रेलवे स्टेशन से लगभग 3 या 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।


पहुज बांध झांसी  - Pahuj Dam Jhansi

पहुज बांध झांसी शहर में घूमने का आकर्षण स्थल है। यह एक खूबसूरत जलाशय है। यह जलाशय झांसी शहर से करीब 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आप यहां पर गाड़ी से पहुंच सकते हैं। यहां आने के लिए अच्छी सड़क आपको मिल जाती है। यह बांध पहुज नदी पर बना हुआ है। आप यहां पर आकर बांध की खूबसूरती को देख सकते हैं। आप अगर बरसात के समय आते हैं, तो आपको बांध के गेट खुले हुए देखने के लिए मिलते हैं, जो एक अलग अनुभव होता है। इस बांध में आठ गेट है। 


परिछा बांध झांसी  - Parichha Dam Jhansi

परीछा बांध झांसी शहर में घूमने का एक मुख्य पर्यटन स्थल है। यहां पर एक खूबसूरत झील है। यह बांध ब्रिटिश के समय का बना हुआ है। इस बांध के पास ही में गार्डन बना हुआ है। आप यहां पर पिकनिक मनाने के लिए आ सकते हैं। आप यहां पर अपने दोस्तों और फैमिली वालों के साथ में घूमने के लिए आ सकते हैं। आप यहां पर बहुत अच्छा समय बिता सकते हैं। यह  बांध उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बॉर्डर पर बना हुआ है। यह बांध बेतवा नदी पर बना हुआ है। आप यहां पर बरसात के टाइम पर आते हैं, तो बरसात भी टाइम पर बांध का जो पानी ओवरफ्लो होता है। वह झरने की तरह बहता है, जिसका दृश्य खूबसूरत रहता है। 


सुकमा दुकमा बांध झांसी - Sukma Dukma Dam Jhansi

सुकमा दुकमा बांध झांसी शहर के पास में स्थित एक मुख्य पर्यटन स्थल है। यह झांसी शहर से करीब 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आप यहां गाड़ी से पहुंच सकते हैं। यह बांध  बरसात के समय बहुत ही खूबसूरत लगता है। यह खूबसूरत झरने की तरह लगता है। यह बांध बहुत लंबा बांध है और उसका दृश्य बहुत ही आकर्षक रहता है। आप यहां पर पिकनिक मनाने के लिए आ सकते हैं। यहां पर बहुत सारे लोग पिकनिक मनाते हैं और कुकिंग करते हैं। यह बांध बेतवा नदी पर बना हुआ है। इस बांध को बबीना बांध के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यह बबीना के पास में स्थित है। यह बांध अंग्रेजों के समय का बना हुआ है। आप यहां पर नहाने का मजा भी ले सकते हैं। 


माताटीला बांध झांसी  - Matatila Dam Jhansi

माताटीला बांध झांसी शहर के पास में स्थित एक पर्यटन स्थल है। यह बांध झांसी शहर से करीब 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आप यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं। यह बांध बेतवा नदी पर बना हुआ है। इस बांध के पास ही में गार्डन भी बना हुआ है, जिसे माताटीला पार्क के नाम से जाना जाता है और इस पार्क में आपको फव्वारा भी देखने के लिए मिलता हैं। माताटीला बांध में 24 गेट हैं। यह बांध मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की बॉर्डर पर बना हुआ है। आप यहां पर पिकनिक मनाने के लिए आ सकते हैं। आप यहां पर बारिश के मौसम में आएंगे, तो बांध के गेट खुलते हैं, जिसका दृश्य बहुत अच्छा रहता है। बांध से थोड़ी दूरी पर एक मंदिर है, जिसे माताटीला मंदिर के नाम से जाना जाता है। आप यहां पर भी जाकर माताजी के दर्शन कर सकते हैं। 


गढ़मऊ झील झांसी - Garhmau Lake Jhansi

गढ़मऊ झील झांसी शहर की एक खूबसूरत जगह है। यहां पर आपको एक खूबसूरत झील देखने के लिए मिलती है। यह झील झांसी शहर से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित होगी। यह झील चारों तरफ से खूबसूरत पहाड़ों से घिरी हुई है। आपको यहां पर आकर बहुत अच्छा लगेगा। बरसात के समय यह जगह हरियाली से घिरी होती है। यहां पर सूर्योदय का बहुत खूबसूरत दृश्य आपको देखने के लिए मिल जाएगा। आप यहां पर अपनी फैमिली और दोस्तों के साथ घूमने के लिए आ सकते हैं। 


बरुआ सागर झील झांसी  - Barua Sagar Lake Jhansi

बरुआ सागर झील झांसी शहर से करीब 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक दर्शनीय स्थल है। यह एक खूबसूरत झील है। इस झील में बरसात के समय आपको बहुत खूबसूरत दृश्य देखने के लिए मिलता है। झील का पानी ओवरफ्लो होता है, जिससे यहां पर झरना बहता है, जिसका दृश्य बहुत ही मनोरम होता है। आप यहां पर आ कर अपना समय बिता सकते हैं। 


बरुआ सागर का किला झांसी - Barua Sagar Fort Jhansi

बरुआसागर का किला झांसी के पास में स्थित एक अच्छा पर्यटन स्थल है। आप यहां पर घूमने के लिए जा सकते हैं। यह एक प्राचीन किला है। किले के सामने एक झील है, जिसे बरुआ सागर झील कहते हैं। किले से झील का नजारा बहुत ही खूबसूरत रहता है। यह किला झांसी से करीब 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस किले तक जाने के लिए अच्छी सड़क है। इस किले का निर्माण बुंदेला राजा ओरछा महाराजा उदित सिंह ने 16 वीं शताब्दी में करवाया था। बरुआसागर किले  में एक शिव मंदिर भी स्थित है, जिसमें बहुत सारे लोग पूजा करने के लिए आते हैं। आपको किले में आकर बहुत अच्छा लगेगा। आप यहां पर फैमिली और दोस्तों के साथ घूमने के लिए आ सकते हैं। 


कैलाश पर्वत बरुआसागर झांसी - Kailash Mountains Baruasagar Jhansi

कैलाश पर्वत बरुआ सागर झील के पास ही में स्थित एक पर्वत है। इस पर्वत के बारे में कहा जाता है कि शिव जी ने अपने चरण यहां पर रखे थे। इस पर्वत पर एक मंदिर है, जो शिव जी को समर्पित है।  इस मंदिर तक पहुंचने के लिए आपको सीढ़ियां मिल जाती है। मंदिर में पहुंचकर बहुत ही अच्छा लगता है। 


भारत माता मंदिर झांसी - Bharat Mata Temple Jhansi

भारत माता का मंदिर झांसी में स्थित एक धार्मिक स्थल है। आप यहां पर आकर घूम सकते हैं। इस मंदिर का मुख्य आकर्षण मंदिर के ऊपर बना बड़ा सा शिवलिंग है, जो बहुत ही खूबसूरत लगता है। आप यहां आकर इस के दर्शन कर सकते हैं। 


पंचतंत्र पार्क झांसी - Panchatantra Park Jhansi

पंचतंत्र पार्क झांसी में स्थित एक फेमस जगह है। यह एक खूबसूरत बगीचा है। यहां पर आपको तरह तरह के जंगली जानवर के स्टेचू देखने के लिए मिल जाते हैं, जो बहुत खूबसूरत लगते हैं। यहां पर बच्चे काफी इंजॉय कर सकते हैं। यहां पर बोट राइडिंग भी है। यहां पर तरह-तरह के झूले हैं, जो बच्चों को आकर्षित करेंगे। आप अपने फैमिली वालों के साथ यहां पर आकर अच्छा समय बिता सकते हैं। 


राजा गंगाधर राव की छतरी झांसी - Raja gangadhar rao ki chhatri Jhansi

राजा गंगाधर राव की छतरी झांसी जिले का एक मुख्य आकर्षण स्थल है। राजा गंगाधर राव की छतरी उनकी मृत्यु के पश्चात रानी लक्ष्मीबाई के द्वारा बनवाई गई थी। यह छतरी 1853 में  बनवाई गई थी। यह छतरी झांसी में लक्ष्मी तालाब के पास में स्थित है। यह झांसी किले से करीब 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। छतरी के चारों तरफ दीवार बनाई गई हैए उसके बीच में बगीचा है और  बगीचे के बीच में राजा की समाधि आपको देखने के लिए मिल जाती है। यहां पर आकर आपको अच्छा लगेगा। 


लक्ष्मी मंदिर झांसी - Lakshmi mandir jhansi 

लक्ष्मी मंदिर झांसी शहर का एक पुराना मंदिर है। यह मंदिर झांसी शहर में बहुत फेमस है। यह मंदिर 18वीं शताब्दी में बना था। रानी लक्ष्मीबाई इस मंदिर में पूजा करने के लिए आती थी। मंदिर के बाजू में ही एक झील बनी हुई है, जिसको लक्ष्मी ताल के नाम से जाना जाता है। यहां आकर आपको बहुत अच्छा लगेगा और शांति मिलेगी। 


मेजर ध्यानचंद की प्रतिमा झांसी - Major Dhyanchand's statue Jhansi

मेजर ध्यानचंद को हॉकी का जादूगर कहा जाता था। मेजर ध्यानचंद की प्रतिमा झांसी शहर में स्थित एक मुख्य आकर्षण है। आप यहां पर आ कर इस प्रतिमा के देख सकते हैं। यह प्रतिमा बहुत खूबसूरत लगती है। आप इस प्रतिमा के पास पहुंचकर झांसी शहर का मनोरम व्यू देख सकते हैं। इस प्रतिमा तक पहुंचने के लिए आपको सीढ़ियां चढ़ने पड़ती है। यह प्रतिमा एक पहाड़ी के ऊपर बनी है। इस पहाड़ी को ध्यानचंद हिल के नाम से भी जाना जाता है। आपको यहां पर आकर अच्छा लगेगा। 


कैमासन देवी मंदिर झांसी - Kaimasan devi mandir jhansi 
करगुवां जी जैन मंदिर झांसी - Karguwan ji jain mandir Jhansi
बलिदान पार्क झांसी - Balidan park Jhansi 
पंचकुइयां मंदिर झांसी - Panchakuiyaan mandir Jhansi


ग्वालियर पर्यटन स्थल
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ग्वालियर पर्यटन स्थल - Gwalior tourist places | Best places to visit in gwalior

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ग्वालियर में घूमने वाली जगह

Gwalior mein ghumne wali jagah



ग्वालियर का किला

ग्वालियर का किला पूरे देश में प्रसिद्ध है। ग्वालियर का किला ग्वालियर में स्थित एक प्रमुख दर्शनीय स्थल है। ग्वालियर किले के अंदर ही बहुत सारी जगह है, जो देखने लायक है।  ग्वालियर का किला एक ऊंचे पर्वत पर स्थित है। इस पर्वत से आपको पूरे शहर का नजारा देखने के लिए मिल जाता है। आप यहां पर आ कर किले का भ्रमण कर सकते हैं। ग्वालियर  किला घूमने में आपको 1 दिन पूरा लग सकता है। यह किला  बहुत बड़ा है और बहुत खूबसूरत है। हर एक चीज देखने लायक है, इसलिए आप यहां पर आते हैं, तो अपना समय निकाल कर आये। यह किला रेलवे स्टेशन से करीब 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ग्वालियर का किला तीसरी शताब्दी में बनाया गया था। ग्वालियर का किला लाल बलुआ पत्थर से बना है। यह किला देश के सबसे बड़े किले में से एक है। 


ग्वालियर किले में घूमने वाली जगह - Places to visit in Gwalior Fort


भीम सिंह राणा की छत्री ग्वालियर - Bhim Singh Rana Ki Chhatri Gwalior


राजा भीम सिंह राणा गोहद के जाट राजा थे। जाट राजा भीम से ने सन 1754 में ग्वालियर के किले पर अधिकार कर लिया था। उनकी मृत्यु के पश्चात भी यह छतरी बनाई गई। राजा भीम सिंह राणा की छतरी भूरे बलुआ पत्थर से निर्मित की गई है। यह ऊचे चबूतरे पर बनी हुई है। छतरी  के चारों ओर परिक्रमा करने के लिए परिक्रमा पथ बनाया गया है। यह छतरी तीन मंजिला है। छतरी के ऊपर गुंबद के आकार का शिखर है। आप यहां पर आकर घूम सकते हैं। 


गुजरी महल ग्वालियर - Gujari Mahal Gwalior

गुजरी महल ग्वालियर शहर का एक पुरातात्विक संग्रहालय है। इस संग्रहालय में आपको बहुत सारे प्राचीन वस्तुएं देखने के लिए मिल जाएगी। गुजरी महल प्राचीन काल में रानी मृगनयनी का निवास स्थान था। रानी मृगनयनी राजा मान सिंह की पत्नी थी। वह गुजरी समाज से थी। इसलिए इस महल को गुजरी महल के नाम से जाना जाता है। उन्होंने राजा मानसिंह से शर्त रखी थी, कि उन्हें रहने के लिए अलग महल दिया जाए और पानी की व्यवस्था की जाए। तो राजा ने उनके लिए अलग महल का निर्माण करवाया और पानी की व्यवस्था के लिए नदी से पाइप महल तक लगवाए। आप यहां पर आते हैं, तो यहां पर पानी की व्यवस्था देख सकते हैं। यहां पर आपको तरह तरह के खूबसूरत नक्काशी दार वस्तुएं देखने के लिए मिल जाएगी। वर्ष 1922 में यह महल संग्रहालय में परिवर्तित कर दिया गया है, तो आपको यहां पर तरह-तरह के प्राचीन वस्तुएं देखने के लिए मिल जाएगी। गुजरी महल ग्वालियर किले से थोड़ी दूरी पर स्थित है। आप यहां पर पैदल भी जा सकते हैं और गाड़ी वगैरह लेकर भी जा सकते हैं।


जहांगीर महल और शाहजहां महल ग्वालियर - Jahangir Mahal and Shah Jahan Mahal Gwalior

जहांगीर महल और शाहजहां महल ग्वालियर किले में स्थित एक देखने लायक जगह है। यहां पर आपको दो महल देखने के लिए मिलते हैं। दोनों ही महल अलग-अलग मुगल शासक के शासन में बनाया गए थे। यह महल खूबसूरत है। महल के बीच में आपको बड़ा सा प्रांगण देखने के लिए मिलता है। दोनों महल मुगल स्थापत्य कला के सुंदर नमूना है। 


विक्रम महल ग्वालियर - Vikram Mahal Gwalior

विक्रम महल ग्वालियर महल में देखने लायक महल है। विक्रम महल का निर्माण महाराजा मानसिंह के पुत्र एवं उत्तराधिकारी विक्रमादित्य ने करवाया था। वे भगवान शिव के भक्त भी थे, इसलिए इस स्थान को विक्रम मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। 1516 से 1523 ईसवी में इस महल का निर्माण हुआ है। महल के मध्य में बरादरी है। महल की ऊपरी मंजिल में जाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है। महल की लंबाई लगभग 65 मीटर है। 


कर्ण महल ग्वालियर - Karn Mahal Gwalior

करण महल ग्वालियर किले के अंदर स्थित एक और ऐतिहासिक महल है। यह महल आप ग्वालियर किले के अंदर आकर देख सकते हैं। करण महल का निर्माण तोमर राजवंश के दूसरे शासक कीर्ति सिंह ने करवाया था। इस महल का निर्माण 1480 से 1486 ईसवी के बीच करवाया गया था। कीर्ति सिंह को दूसरा नाम करण सिंह था। इसलिए इस महल को करण महल  के नाम से जाना जाता है। यह महल हिंदू स्थापत्य शैली में निर्मित है।  करण महल दो मंजिला एवं आयताकार है।

 

मानसिंह पैलेस ग्वालियर - Mansingh Palace Gwalior

राजा मानसिंह का महल ग्वालियर किले के परिसर में स्थित सबसे आकर्षक महल है। यह महल ग्वालियर किले का सबसे खूबसूरत महल है। आप जब भी ग्वालियर आते है, तो आपको ग्वालियर के मानसिंह महल को जरूर घूमना चाहिए। राजा मानसिंह महल 4 मंजिला है। मानसिंह का महल 1486 और 1517 के बीच बनवाया था। मान सिंह महल में खूबसूरत पेंटिंग की गई है, जो बहुत आकर्षक है। यहां पर आप खूबसूरत नक्काशी भी देख सकते हैं। यहां पर अलग-अलग कमरे बनाए गए थे। यहां पर संगीत सुनने के लिए राजा और रानी के लिए अलग अलग है। यहां पर जेल भी है। आप गाइड करेंगे तो गाइड आपको और अच्छी जानकारी दे सकता है। यहां पर हर शाम एक विशेष ध्वनि और प्रकाश शो का आयोजन किया जाता है। यहां पर हर शाम को लाइट और साउंड शो का आयोजन भी होता है। लाइट और साउंड शो का अलग चार्ज लिया जाता है। आप इस किले के सामने से ग्वालियर शहर का बहुत ही खूबसूरत दृश्य देख सकते हैं। यहां पर आकर आपको बहुत अच्छा लगेगा। यहां पर संग्रहालय है। जिस पर एंट्री का अलग चार्ज लिया जाता है। संग्रहालय में विभिन्न तरह के मूर्तियां एवं प्राचीन वस्तुओं का संग्रह करके रखा गया है। 


अस्सी खम्भों की बावड़ी ग्वालियर - Asasee khambon ki bawadi gwalior

80 खंभों की बावड़ी ग्वालियर किले के अंदर देखने वाली एक खूबसूरत जगह है, जहां पर आपको एक बावड़ी देखने के लिए मिलता है। इस बावड़ी में भूमिगत जाने का भी रास्ता है। मगर वह अब आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया है। पुराने समय में बावड़ी में भूमिगत तरीके से भी जाया जा सकता था। बावड़ी चारों तरफ से 80 खंबे से घिरी हुई है। इसलिए इस बावड़ी को 80 खंबे की बावड़ी कहा जाता है। इस बावड़ी का निर्माण राजा मानसिंह तोमर ने 16वीं शताब्दी में किया था। पानी के भंडारण के लिए इस बावड़ी का निर्माण किया गया था। बावड़ी में अलग अलग कक्ष बने थे, जिसमें रानियों के स्नान के लिए भी अलग कमरा था और यहां पर कैदखाना भी था। 


गुरुद्वारा श्री दाता बंदी छोड़ साहिब ग्वालियर - Gurudwara shri data bandi chhod sahib gwalior

श्री दाता बंदी छोड़ साहिब गुरुद्वारा ग्वालियर के किले के अंदर स्थित है। यह गुरुद्वारा ग्वालियर में फेमस है और आप जब भी ग्वालियर आते हैं, तो इस गुरुद्वारे में आ सकते हैं। यहां पर आपको फ्री खाना मिलता है। यहां का जो माहौल है। वह बहुत शांति भरा है। आपको यहां पर आकर बहुत अच्छा लगेगा। सिख गुरु हरगोविंद जी ने  52 हिंदू राजाओं को मुगल राजा जहाँगीर की हिरासत से रिहा करने में मदद की थी। यह गुरुद्वारा सिख गुरु हरगोविंद जी की याद में बना है। इसलिए गुरुद्वारे का नाम दाता बंदी छोड़ साहिब रखा गया है। इस गुरुद्वारे में एक बड़ा तालाब, लंगर हॉल, रहने की सुविधा उपलब्ध है। यहां पर फ्री पार्किंग सुविधा उपलब्ध है।


तेली का मंदिर ग्वालियर - Teli ka mandir

तेली का मंदिर ग्वालियर किले के अंदर स्थित एक प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर का निर्माण प्रतिहार राजा मिहिर भोज के शासनकाल में हुआ था। इस मंदिर का निर्माण तेल के व्यापारियों द्वारा दिए गए धन से किया गया था। इसलिए इस मंदिर को तेली का मंदिर कहते हैं। यह मंदिर मुख्य रूप से विष्णु भगवान को समर्पित है। मंदिर के अंदर किसी भी तरह की मूर्ति स्थापित नहीं है। यह मंदिर ग्वालियर किले में स्थित सबसे ऊंचे मंदिर में से एक है। इस मंदिर की ऊंचाई लगभग 30 मीटर है। मंदिर में खूबसूरत नक्काशी की गई हैं। मंदिर में उत्तर भारतीय और दक्षिण भारतीय वास्तुकला का मिश्रण आपको देखने के लिए मिलता है। मंदिर की छत को द्रविड़ शैली में निर्मित किया गया है। मंदिर को विभिन्न तरह की मूर्ति कला से सजाया गया है। इस मंदिर को 9 वीं सदी में बनाया गया है। मंदिर बहुत खूबसूरत है और आपके यहां पर आकर बहुत अच्छा लगेगा। 


सास.बहू मंदिर ग्वालियर - saas bahu mandir gwalior

सास बहू का मंदिर ग्वालियर किले के अंदर स्थित एक ऐतिहासिक मंदिर है। यह मंदिर ग्वालियर किले के पूर्वी हिस्से में स्थित है। इस मंदिर को सास और बहू का मंदिर कहा जाता है। मगर यह मंदिर सहस्त्रबाहु मंदिर के नाम से प्राचीन समय में जाना जाता था। धीरे-धीरे सहस्त्रबाहु को सास और बहू के नाम में बदल दिया गया। आप यहां पर आते हैं, तो इस मंदिर में आपको खूबसूरत कारीगरी देखने के लिए मिलती है। प्रवेश द्वार में आपको ब्रह्मा, विष्णु और महेश एवं सरस्वती की खूबसूरत नक्काशी देखने के लिए मिलते हैं। यहां पर दो मंदिर बने हुए हैं। एक मंदिर को सास  का मंदिर और दूसरे मंदिर को बहू के मंदिर के नाम से जाना जाता है। मगर वास्तविक रूप से इसमें से एक मंदिर विष्णु भगवान जी को समर्पित है और दूसरा मंदिर शिव भगवान जी को समर्पित है। आप यहां पर आकर दोनों मंदिरों की खूबसूरती को देख सकते हैं। इन मंदिरों का निर्माण 11 वीं शताब्दी में कछवाहा वंश के राजा महीपाल ने बनवाया था।


सूरज कुंड ग्वालियर - Suraj Kund Gwalior

सूरज कुंड ग्वालियर किले में के अंदर स्थित एक कुंड है। इस कुंड में जो पानी है। उसको चमत्कारी माना जाता है। कहा जाता है कि इस कुंड के पानी से स्नान करने से सभी प्रकार के रोग दूर होते हैं। कुंड के बीच में एक मंदिर बना हुआ है। मंदिर में शिवलिंग स्थापित है। यहां आ  कर आपको अच्छा लगेगा। 


सिद्धाचल जैन मंदिर गुफाएँ ग्वालियर - Siddhachal Jain Temple Caves Gwalior

सिद्धचल जैन गुफा ग्वालियर में घूमने की एक ऐतिहासिक जगह है। इस जगह में आपको जैन धर्म के तीर्थकारों की पत्थर की मूर्तियां देखने के लिए मिलेगी। यह मूर्तियां बलुआ पत्थर पर बनाई गई है। यह मूर्तियां बहुत खूबसूरत है। इन मूर्तियों में से अधिकांश मूर्तियां नष्ट हो गई हैं, मगर बहुत खूबसूरती से इन्हें तराशा गया है। यह मूर्तियां सातवीं शताब्दी से लेकर 15 शताब्दी तक बनाई गई है। इन मूर्तियों को 16वीं शताब्दी में मुगल राजवंश के सम्राट बाबर के आदेश से इन मूर्तियों को नष्ट कर दिया गया। यह एक शांतिपूर्ण जगह है। आप यहां पर चट्टानों में गुफाएं भी देख सकते हैं। यहां पर चारों तरफ हरियाली आपको देखने के लिए मिलेगी। आप यहां पर अगर बारिश में घूमने आते हैं, तो आपको बहुत शानदार नजारा देखने के लिए मिलेगा। 


गोपाचल रॉक कट जैन मूर्ति ग्वालियर - Gopachal Rock Cut Jain Idol Gwalior

गोपाचल रॉक कट जैन गुफाएं ग्वालियर शहर में घूमने वाली एक प्रमुख जगह है। यहां पर 26 गुफाएं हैं, जिनमें जैन तीर्थकरो की मूर्तियां आपको देखने के लिए मिल जाएगी। यहां पर जैन तीर्थकरो कि छोटी और बड़ी मूर्तियां बनाई गई है। यहां पर उन्हें खड़ी हुई मुद्रा में और बैठी हुई मुद्रा में दर्शाया गया है। आप यहां पर आते हैं, तो आपको यहां पर पहुंचने के लिए थोड़ा सा ट्रैकिंग करना पड़ता है। उसके बाद आप इन गुफाओं में जा सकते हैं। यहां पर गुफा नंबर 1 के पास बावली भी है, जिसे एक पत्थर की बावली के नाम से जाना जाता है। यहां पर सभी तरह की व्यवस्था उपलब्ध है। यह जगह बहुत खूबसूरत है। बहुत शांत है और यहां आकर अच्छा लगता है। 


ग्वालियर जू या गांधी प्राणी उद्यान ग्वालियर - Gwalior Zoo or Gandhi Zoological Park Gwalior

ग्वालियर जू ग्वालियर शहर में घूमने का एक मुख्य पर्यटन स्थल है। ग्वालियर जू को गांधी प्राणी उद्यान के नाम से जाना जाता है। इस उद्यान का प्रबंधन ग्वालियर नगर निगम के द्वारा किया जाता है। यहां पर आपको देशी और विदेशी जानवर देखने के लिए मिलते हैं। ग्वालियर जू में प्रवेश का टिकट लिया जाता है। यहां पर आपको अलग-अलग जानवरों की जानकारी भी मिलती है। यहां पर बहुत सारे झूले भी हैं। यहां पर बच्चे बहुत खुश होंगे। यहां पर टॉय ट्रेन है, जिसमें बच्चे बहुत मस्ती कर सकते हैं। यहां पर आपको मगरमच्छ, शेर, चीता, भालू, बदक, बंदर हिप्पोपोटामस, कोबरा सांप, देखने के लिए मिल जाएंगे। और भी जंगली जानवर आपको यहां पर देखने के लिए मिल जाएंगे।

 

महारानी लक्ष्मीबाई स्मारक ग्वालियर - Maharani Laxmibai Memorial Gwalior

महारानी लक्ष्मीबाई स्मारक ग्वालियर शहर में स्थित एक ऐतिहासिक स्थल है।रानी दुर्गावती एक स्वतंत्रता सेनानी थी। रानी दुर्गावती ने अंग्रेजों का डटकर सामना किया था। यहां पर लड़ते हुए उनकी मृत्यु हो गई थी। रानी दुर्गावती गीत 23 वर्ष की आयु में मृत्यु हो गई थी। यहां पर उनकी याद पर स्मारक बनाया गया है। इस स्मारक में आप आते हैं, तो यहां पर आपको बगीचा देखने के लिए मिलता है, जिसमें घोड़े पर सवार रानी दुर्गावती की मूर्ति है और एक अमर ज्योति देखने के लिए मिलती है। यह ज्योति हमेशा जलती हुई रहती है। यहां आकर आपको बहुत अच्छा लगेगा। यहां रानी दुर्गावती के बारे में आपको जानकारी भी पढ़ने के लिए मिल जाएगी। 


मोहम्मद घौस का मकबरा ग्वालियर - Mohammad Ghaus's Tomb Gwalior

मोहम्मद गौस का मकबरा ग्वालियर में घूमने का एक प्रमुख स्थल है। यहां पर आपको खूबसूरत मकबरा देखने के लिए मिल जाता है। इस मकबरे का मुख्य आकर्षण नक्काशीदार पत्थर की जाली हैं, जो बाहरी दीवार पर लगी हैं। मोहम्मद गौस एक सूफी संत थे। उनका जन्म 1500 ई में हुआ था। यह अकबर के एक सलाहकार थे। इन्होंने तानसेन को भी संगीत की शिक्षा दी थी। यहां पर बहुत बड़ा गार्डन भी है। 


तानसेन का मकबरा ग्वालियर - Tansen's Tomb Gwalior

तानसेन का मकबरा ग्वालियर में घूमने वाला एक प्रमुख जगह है। इस जगह में तानसेन की समाधि है। तानसेन भारत देश के एक संगीतज्ञ हैं। तानसेन अकबर के दरबार के नवरत्नों में से एक है। कहा जाता है कि तानसेन का संगीत सुनकर पशु-पक्षी भी आनंदित हो जाते थे। आप यहां पर आकर तानसेन की कब्र देख सकते हैं। तानसेन की कब्र उनके गुरु मोहम्मद गौस के पास ही में बनी हुई है। तानसेन मोहम्मद गौस के छात्र थे जिन्होंने उन्हें हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत सिखाया था। तानसेन समारोह हर साल नवंबर के महीने में आयोजित किया जाता है, जहां पर देश भर के संगीतकार आते हैं और विभिन्न शास्त्रीय संगीत शो प्रदर्शित करते हैं। 


सूर्य मंदिर ग्वालियर - Sun Temple Gwalior

सूर्य मंदिर को सन टेंपल के नाम से भी जाना जाता है। यह सूर्य मंदिर ग्वालियर में स्थित प्रमुख दर्शनीय स्थलों में से एक है। यह एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर सूर्य देवता जी को समर्पित है। यह मंदिर उड़ीसा के कोर्णाक में बने सूर्य मंदिर के समान है। आप यहां पर आ कर इस मंदिर की खूबसूरती को देख सकते हैं। इस मंदिर में बहुत सारे देवी देवता विराजमान हैं। यहां पर गणेश जी की प्रतिमा को दीवार पर बनाया गया है, जो बहुत ही भव्य लगती है। आप यहां पर घूमने आ सकते हैं। मंदिर का निर्माण वर्ष 1988 में प्रसिद्ध उद्योगपति जीडी बिड़ला द्वारा किया गया था। ग्वालियर का सूर्य मंदिर बलुआ पत्थर और संगमरमर के संगम से बना हुआ है, जो बहुत ही मनमोहक लगता है। आपको यहां पर आकर बहुत शांति मिलेगी। यहां पर बहुत सारे लोकल लोग घूमने के लिए आते हैं। यहां पर आपको मोर भी  देखने के लिए मिल सकते हैं। 


सरोद घर ग्वालियर - Sarod Ghar Gwalior

सरोद घर ग्वालियर शहर में स्थित एक संग्रहालय है। यह संग्रहालय प्रसिद्ध सरोद वादक उस्ताद हाफिज अली खान का पैतृक घर है। उनके पैतृक घर को अब संग्रहालय में परिवर्तित कर दिया गया है। इस संग्रहालय में आपको प्राचीन संगीत वाद्य यंत्र देखने के लिए मिलते हैं, जो प्राचीन समय में प्रसिद्ध भारतीय संगीतकारों के द्वारा उपयोग किए गए थे। यहां पर आपको तस्वीरों का एक बहुत बड़ा संग्रह देखने के लिए मिलता है। इस संग्रहालय का उद्देश्य भारतीय शास्त्रीय संस्कृति और संगीत को बढ़ावा देना है। यह संग्रहालय संगीत प्रेमियों के लिए ग्वालियर में घूमने के लिए एक प्रमुख जगह है। यह संग्रहालय ग्वालियर जंक्शन से 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह संग्रहालय ग्वालियर के जीवाजी गंज में स्थित है। आप यहां पर आकर संगीत के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं। 


अम्मा महाराज की छतरी ग्वालियर - Amma Maharaj's Chhatri Gwalior

अम्मा महाराज की छतरी ग्वालियर शहर में घूमने की अच्छी जगह है। यहां पर आप को बहुत बड़ा गार्डन देखने के लिए मिलता है, जो बहुत बड़े एरिया में फैला हुआ है। गार्डन में बहुत सारे मंदिर भी बने हुए हैं, जहां पर आप घूम सकते हैं। यहां पर आने का प्रवेश शुल्क लिया जाता है। यह छतरियां मुख्य तौर पर सिंधिया परिवार की शाही स्मारक स्थल है। यहां पर स्थित छतरी में आपको भारतीय वास्तुकला देखने के लिए मिल जाएगी। यह छतरियां गुंबद आकार की हैं। यहां पर फव्वारा भी आपको देखने के लिए मिल जाएंगे। बच्चों के लिए यहां पर बहुत बड़ा प्लेग्राउंड है, जिसमें बच्चे खेल सकते हैं। यहां पर पार्किंग की भी अच्छी व्यवस्था है। यह सप्ताह के सभी सात दिनों में खुला रहता है।


जय विलास पैलेस ग्वालियर - Jai Vilas Palace Gwalior

जय विलास पैलेस ग्वालियर शहर में घूमने के लिए एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। यह एक विशाल महल है, जो सफेद संगमरमर से बना हुआ है। इस महल में करीब 400 कमरे हैं, जिसमें से 200 कमरे संग्रहालय में परिवर्तित कर दिए गए हैं और बाकी कमरों में सिंधिया परिवार के लोग रहते हैं। यहां पर आप संग्रहालय में विभिन्न तरह के प्राचीन सामग्रियों का संग्रह देख सकते हैं। यहाँ पर जीवाजीराव महाराजा से संबंधित सभी चीजें देख सकते हैं। यहां पर आपको चांदी की ट्रेन देखने के लिए मिलती है, जो खाना परोसती है। इसके अलावा यहां पर आपको झूमर देखने के लिए मिलते हैं, जो बहुत वजन के हैं और बहुत खूबसूरत है। यहां पर एक प्राचीन घोड़ा गाड़ी भी है, जो चांदी से बनी हुई है। जय विलास पैलेस में प्रवेश का आपसे शुल्क लिया जाता है और फोटो क्लिक करने का वीडियो बनाने का भी अलग से शुल्क लिया जाता है। आप यहां पर आ कर इन सभी चीजों को देख सकते हैं। 


इटालियन गार्डन ग्वालियर - Italian Garden Gwalior

इटालियन गार्डन ग्वालियर में स्थित एक पार्क है। इस पार्क में आपको तरह तरह के फूल देखने के लिए मिल जाते हैं। यहां पर म्यूजिकल फाउंटेन भी हैए जो बहुत अच्छा है। इटालियन गार्डन ग्वालियर जू के पास में है। आप यहां पर आसानी से पहुंच सकते हैं। इस गार्डन को इटालियन गार्डन इसलिए कहा जाता है, क्योंकि यह इटालियन शैली में बना हुआ है और बहुत खूबसूरत है। 


बटरफ्लाई पार्क ग्वालियर - Butterfly Park Gwalior

बटरफ्लाई पार्क ग्वालियर में स्थित एक अच्छे घूमने वाले स्थानों में से एक है। यहां पर आपको हरियाली भरा माहौल देखने के लिए मिलता है। आप यहां दिन के समय घूमने के लिए आ सकते हैं। 


तिघरा बांध ग्वालियर - Tighara Dam Gwalior

तिघरा बांध ग्वालियर में घूमने के लिए एक अच्छी जगह है। यहां पर आपको एक बहुत बड़ा जलाशय देखने के लिए मिलता है। यह जलाशय ग्वालियर से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आप यहां पर गाड़ी से पहुंच सकते हैं। तिघरा बांध में घूमने का सबसे अच्छा समय मानसून का होता है, क्युकि उस समय यहां पर चारों तरफ आपको हरियाली देखने के लिए मिल जाती है। यह जगह फोटोशूट के लिए भी बहुत बढ़िया है। आप यहां पर आकर बांध के नजारों को देख सकते हैं। तिघरा बांध ग्वालियर शहर के पीने के पानी की पूर्ति करता है। 


नलकेश्वर धाम ग्वालियर - Nalakeshwar Dham Gwalior

नलकेश्वर धाम ग्वालियर में स्थित एक धार्मिक स्थल है। यहां पर आपको प्राकृतिक और धार्मिक दोनों ही जगह देखने के लिए मिलती है। यह जगह  ग्वालियर शहर से करीब 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आप यहां पर अपनी गाड़ी से पहुंच सकते हैं। यहां पर आने के लिए कच्ची रोड आपको मिलती है। यहां पर आपको भगवान शिव का मंदिर देखने के लिए मिलता है और यहां पर बारिश के मौसम में आपको खूबसूरत जलप्रपात देखने के लिए मिलता है। यह जगह प्राकृतिक हरियाली से भरी हुई है। 


श्री आनंदपुर सत्संग आश्रम ग्वालियर - Shri Anandpur Satsang Ashram Gwalior

श्री आनंदपुर सत्संग आश्रम एक धार्मिक स्थल है। यह  ग्वालियर में स्थित एक धार्मिक स्थल है। यहां पर आपको आकर आत्मिक शांति मिलेगी। यहां पर आप आकर अध्यात्म से जुड़ सकते हैं। यहां पर आपको आश्रम के पीछे एक तालाब भी देखने के लिए मिलता है, जिसे जानकी ताल के नाम से जाना जाता है। 


श्री कोटेश्वर महादेव मंदिर ग्वालियर - Shri Koteshwar Mahadev Temple Gwalior

श्री  कोटेश्वर महादेव मंदिर ग्वालियर शहर में स्थित एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर शिव भगवान जी को समर्पित है। यह मंदिर बहुत पुराने मंदिरों में से एक है। आप यहां पर आकर शिव भगवान जी के दर्शन कर सकते हैं। मंदिर के बाहर आपको बहुत सारे प्रसाद की दुकान देखने के लिए मिलती है, जहां से आप प्रसाद ले सकते है। यहां पर शिवरात्रि और सावन सोमवार के समय बहुत भीड़ लगती है। 

प्राचीन शिव मंदिर गिरगांव ग्वालियर - Ancient Shiva Temple Girgaon Gwalior

यह ग्वालियर शहर में स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर है। यह मंदिर गिरगांव गांव में स्थित है। आप यहां पर शिव भगवान के दर्शन कर सकते हैं। यह मंदिर पहाड़ी के ऊपर स्थित है। मंदिर तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है। आपको मंदिर से आसपास का खूबसूरत नजारा देखने के लिए मिल जाता है। 


श्री सिद्ध तलवार वाले हनुमान जी महाराज ग्वालियर

यह मंदिर ग्वालियर में स्थित एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर हनुमान जी को समर्पित है। इस मंदिर की विशेषता यह है कि इस मंदिर में हनुमान जी की जो मूर्ति हैए उनके एक हाथ में गदा की जगह तलवार है। इसलिए इस जगह को तलवार वाले हनुमान जी के नाम से जाना जाता है। यहां पर भक्त हनुमान जी के दर्शन करने के लिए आते हैं। 


श्री गुप्तेश्वर मंदिर ग्वालियर - Shri Gupteshwar Temple Gwalior

श्री गुप्तेश्वर मंदिर ग्वालियर शहर में स्थित एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। मंदिर में पहुंचने के लिए सीढ़ियां हैं। इस मंदिर से ग्वालियर शहर का खूबसूरत दृश्य देखने के लिए मिलता है। यह मंदिर ग्वालियर में तिघरा बांध जाने वाली सड़क पर स्थित है। आप यहां पर आसानी से पहुंच सकते हैं। यहां पर आकर आपको बहुत अच्छा लगेगा। 



अचलेश्वर मंदिर ग्वालियर - Achleshwar Temple Gwalior
फूलबाग मैदान ग्वालियर - Phulbagh Maidan Gwalior
शनि देव का मंदिर ग्वालियर - Shani Dev's temple Gwalior
सुदर्शन पार्क ग्वालियर - Sudarshan Park Gwalior