Adegaon Fort and Kalbhairav Temple || आदेगांव का प्रसिध्द कालभैरव जी का मंदिर

आदेगांव का किला एवं काल भैरव जी का मंदिर


आदेगांव का किला (Adegaon Fort) एवं काल भैरव जी का मंदिर (Kaal Bhairav ji ka mandir) एक खूबसूरत पर्यटन स्थल है।  किले के अंदर कालभैरव जी का अतिप्रचीन मंदिर है। आदेगांव का किला (Adegaon Fort) 18 वी शताब्दी में बनाया गया था। इस मंदिर में काले भैरव, बटुक भैरव एवं नाग भैरव की सुंदर प्रतिमाए स्थित है। इस जगह में और भी चमत्कारी वस्तुए मौजूद है। यह पर श्यामलता का वृक्ष स्थित है जो विश्व में सिर्फ दो जगह ही पाया गया है। 

Adegaon Fort and Kalbhairav Temple
Adegaon Fort and Kalbhairav Temple


आदेगांव का किला 


यह किला सिवनी जिले की लखनादौन तहसील से 18 किमी की दूरी पर है। आदेगांव नाम की इस जगह में आप पहुॅचते है तो यह किला आपको दूर से नजर आने लगता है। इस किले तक पहॅुचने का रास्ता आदेगांव की बाजार से होते हुए जाता है। मगर आप अगर रविवार दिन इस किलें में जाते है, इस दिन बाजार के एरिया से न जाये। आप बाजार के बजाय गांव के बाहर से ही एक रोड स्कूल की तरफ से होते हुए इस किले तक जाता है, आप वहां से जा सकते है। आपको किले के पास पहुॅचते है, आप को किला एक पहाड की चोटी पर दिखता है जिस तक पहॅुचने के लिए आपको सीढियों से चढकर जाना होगा। इस किले के उपर पहुॅचकर आपको बहुत अच्छा व्यू देखने मिलता है। आपको आदेगांव के आसपास का नजारा देखने मिल जाता है। इस किला का निर्माण अठारहवीं शताब्दी में मराठा शासनकाल में सैनिकों के लिए ऊंचे पहाड़ पर किया गया था। इस किले को गढी के नाम से भी जाना जाता है। इस किले या गढी की निर्माण की नीवं नागपुर के मराठा शासक रघुजी भोंसले के शासनकाल में 18 वी शताब्दी में उनके गुरू नर्मदा भारती (खड़क भारतीय गोंसाई) ने डाली थे। इन्हें भोसले शासन ने 84 गांव की जागीर दी थी। इनके द्वारा ही किले के भीतर भैरव बाबा के मंदिर का निर्माण किया गया था। वर्तमान में इस किले में आपको इसके चारों तरफ जो बुर्ज बनें हुए है वो देखने मिल जाते है बाकी का किला अब ध्वस्त हो गया है। आदेगांव की उची पहाडी पर इस किले का निर्माण ईंट, पत्थर व चूना- मिट्टी से करवाया था। किले की बाहरी दीवार अभी भी मजबूती से खडी है, सदियाॅ बीत गई मगर इन दीवार को अभी तक कोई भी नुकसान नहीं हुआ है। किले की बाहरी दीवार और बुर्जो को छोडकर बाकी सारी निर्माण अब ध्वस्त हो गया है। आपको किले के अंदर यह ध्वस्त निर्माण देखने मिल जाएगा। यह किला अयातकार आकार का है। किले के पीछे एक बडा तालाब है। इस किले का मुख्य दरवाजा का मुख पूर्व की तरफ है। पश्चिम की तरफ भी एक दरवाजा है जहां पर आप किले के बाहर जा सकते है, यहां पर एक शटर लगा हुआ है, यहां से आप तालाब की तरफ जा सकते है। तालाब की तरफ जाने के लिए यहां सीढियाॅ दी गई है। इस किले में पुरातत्व विभाग द्वारा खुदाई का कार्य भी किया गया था। इस खुदाई के दौरान यह पर कक्ष, बरामदे एवं अन्य निर्माण होने का पता चला। बाद में खुदाई बंद कर दिया गया। इस किले का निर्माण मुख्य रूप से हथियारों व सैनिकों के उपयोग के लिए किया गया था। इस किले के पास ही पहाडी के उपर एक स्कूल बना हुआ है शायद यह प्राइमरी स्कूल है। आप किले के बाहरी क्षेत्र में एक मस्जिद भी देख सकते है। यह पर एक पानी की टंकी का निर्माण भी किया गया है। किले के बाहरी हिस्से से आपको तालाब भी देखने मिल जाता है। किले में भीतर दीवार से सटाकर पत्थर की चीप लगी हुई ताकि आप इस चीप में चलकर पूरा किला घूम सकते है। यह किला मुख्य प्रवेश द्वार से आप जैसे अंदर जाते है आपको काल भैरव मंदिर देखने मिल जाता है। आदेगांव किले (Adegaon Fort) और गांव में मराठा शासक के गुरु नर्मदा भारती का शासन था। गुरू नर्मदा भारती से यह किला शिष्य परम्परा के अंर्तगत उनके शिष्य भैरव भारती, धोकल भारती व दौलत भारती को सौंपा गया, बाद में यह किला ब्रिटिश सरकार ने मराठा शासकों से इस किले का आधिपत्य छीनकर किलें में कब्जा कर लिया था। यह एक प्राचीन किला है इसे देखने के लिए दूर दूर से लोग आते है। 

Adegaon Fort and Kalbhairav Temple
Adegaon Fort and Kalbhairav Temple
Adegaon Fort and Kalbhairav Temple
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श्री काल भैरव का प्राचीन मंदिर


यह किला काल भैरव की गढी के नाम से भी प्रसिध्द है। किले में भगवान काल भैरव का प्राचीन मंदिर है। लोगों के इस मंदिर के प्रति बहुत श्रध्दा भक्ति है। लोग इस मंदिर के दर्शन करने के लिए दूर दूर से आते है। आदेगांव किले के अंदर विराजमान मंदिर  कालभैरव, नागभैरव व बटुकभैरव विराजमान है जिनकी पूजा सदियों से होती आ रही है। लोग इसे दूसरा काशी के नाम से भी जानते हैं। लोगों का कहना है कि बनारस की तरह यहां पर भगवान कालभैरव की खड़े स्वरूप में प्राचीन प्रतिमा स्थापित है। भैरव अष्टमी के दिन इस किले के भैरव बाबा मंदिर में पूरे सिवनी जिले से एवं अन्य जिलों से भी लोग आते है। 
Adegaon Fort and Kalbhairav Temple
Adegaon Fort and Kalbhairav Temple

दुर्लभ श्यामलता वृक्ष की उपस्थिति


आदेगांव का यह किला अपने प्राचीन इतिहास के साथ भैरव बाबा के मंदिर के लिए प्रसिध्द है। इस किला में आपको एक दुर्लभ वृक्ष देखने मिल जाएगा जो दुनिया में और कहीं आपको देखने नहीं मिलेगा। यहां श्यामलता का वृक्ष किले के पिछले हिस्से में तालाब के किनारे लगा हुआ है। यह वृक्ष इस जगह के अलावा एक जगह और मिलता है। इस दुर्लभ वृक्ष की विशेषता यह है कि वृक्ष की पत्तियों में श्रीराधा कृष्ण का नाम लिखा दिखाई देता है। वृक्ष कब और किसने लगाया यह आज भी लोगों को इस बारें में किसी भी प्रकार की जानकारी नहीं है। 


किले की स्थिति एवं पहुॅचने का रास्ता 


आदेगांव का किला (Adegaon Fortसिवनी जिले में स्थित है। आदेगांव का किला सिवनी जिले की लखानदौन तहसील स्थित है। यह किला लखानदौन तहसील से करीब 18 किमी की दूरी पर स्थित है। आदेगांव का किला सिवनी जिला मुख्यालय से करीब 78 किमी की दूरी पर होगा। यह किला जबलपुर जिले से करीब 103 किमी की दूरी पर होगा। नरसिंहपुर किला से यह किला 60 किमी की दूरी पर स्थित होगा। यह किला मंडला से लगभग 114 किमी और छिदवाडा से लगभग 106 किमी की दूरी पर होगा। यहां पर आप सडक मार्ग से असानी से पहूॅच सकते है। यहां तक जाने के लिए अच्छी सडक बनी हुई है। आपको यह तक आने के लिए अपने वाहन का प्रयोग करना चाहिए क्योकि वहां आपके लिए अच्छा हो सकता है। यहां पर आटो या बस भी चलती होगी पर वो समय समय पर चलती होगा अगर आपको बस या आटो से सफर करना है तो आपको समय का विशेष ध्यान रखना होगा। आपको यहां पहॅुचने के लिए पहले लखनादौन पहॅूचना होगा। लखनादौन से आदेगांव नाम की जगह करीब 18 किमी की दूरी पर है । आप यहां तक आने के लिए श्रीनगर कन्याकुमारी हाईवे मिल जाता है आप हाईवे से आराम से इस जगह तक पहॅूच सकते है। हाईवे रोड अच्छी है मगर जब आप आदेगांव वाली रोड में जाते है तो वहां रोड कहीं कही पर थोडी खराब है। आपको इस किले तक आने के लिए नजदीक रेल्वे स्टेशन घंसौर और नरसिंहपुर का पडता है। नरसिंहपुर और घंसौर रेल्वे स्टेशन इस किले से लगभग 55 किमी की दूरी हो सकते है। 

यह किला एवं भैरव बाबा का मंदिर दोनों ही प्राचीन है। यह किला पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित है। किले को देखने दूर-दूर से लोग आदेगांव पहुंचते हैं। यहां पर भैरव अष्टमी बड़े ही धूमधाम से मनाई जाती है। किले के पीछे श्यामलता का अदुभ्त वृक्ष लगा हुआ है जो पूरी दुनिया में अनोखा है। यहां पर मेले का आयोजन भी किया जाता है जहां पर सुबह के समय शोभायात्रा निकली जाती है। जिसमें बडी संख्या में भक्तगण आते है। 

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