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घंटाई मंदिर खजुराहो - Ghantai Temple Khajuraho

घंटाई मंदिर खजुराहो - G hantai Mandir Khajuraho घंटाई मंदिर खजुराहो का एक प्रसिद्ध मंदिर है। वैसे यहां पर आपको मंदिर देखने के लिए नहीं मिलता है। यहां पर आपको स्तंभ देखने के लिए मिलते हैं। प्राचीन समय में शायद यहां पर मंदिर रहा होगा। मगर अभी यहां पर स्तंभ बस देखने के लिए मिलते हैं। इस मंदिर को घंटाई मंदिर इसलिए कहा जाता है, क्योंकि इन स्तंभों में आपको घंटियों की खूबसूरत नक्काशी देखने के लिए मिलती है। इसलिए इस मंदिर को घंटाई मंदिर कहते हैं।  घंटाई मंदिर खजुराहो के पूर्वी मंदिर समूह का एक मंदिर है। यह मंदिर सुंदर है और इसमें जो नक्काशी की गई है। वह भी बहुत सुंदर है। हम लोग इस मंदिर में अपनी स्कूटी से आए थे। यह मंदिर गांव के भीतर स्थित है और इस मंदिर में जाने के लिए पतली सी सड़क मिलती है। हम लोग खजुराहो के जैन मंदिर घूमने के बाद इस मंदिर में गए थे। इस मंदिर में जाने के लिए आपको रास्ते में ही एक बड़ा सा बोर्ड देखने के लिए मिलता है। आप उस बोर्ड के दिशा निर्देश का पालन करते हुए, इस मंदिर तक पहुंच सकते हैं।  घंटाई मंदिर चारों तरफ से बाउंड्री वॉल से घिरा हुआ है। अंदर आपको स्तंभ देखने के लिए म

भगवान पार्श्वनाथ मंदिर खजुराहो - Parshwanath Temple Khajuraho

खजुराहो जैन मंदिर -  पार्श्वनाथ मंदिर खजुराहो / P arshwanath Mandir Khajuraho भगवान पार्श्वनाथ का मंदिर खजुराहो का प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर खजुराहो के पूर्वी मंदिर समूह में स्थित है। यह मंदिर जैन मंदिर समूह में बना हुआ है। यहां पर आपको और भी मंदिर देखने के लिए मिलते हैं। खजुराहो के इस मंदिर की विशेषता यह है, कि इस मंदिर के गर्भ ग्रह के पीछे एक और लघु मंदिर बना हुआ है, जो आपको खजुराहो के अन्य मंदिर में देखने के लिए नहीं मिलता है। इस मंदिर की दीवार भी मूर्तियों से सुसज्जित है।  यह मंदिर भी बहुत सुंदर है। यह मंदिर 10 वीं शताब्दी में बना हुआ है।  खजुराहो का पार्श्व नाथ मंदिर का निर्माण -  Construction of Parshwanath temple Khajuraho पार्श्व नाथ मंदिर 10 वीं शताब्दी में बना था। इस मंदिर का निर्माण चंदेल राजा धंग के द्वारा करवाया गया था। यह मंदिर बहुत सुंदर है। इसकी मूर्तिकला बहुत ही अद्भुत लगती है।  पार्श्वनाथ मंदिर की मूर्ति कला -  Parshwanath temple sculpture पार्श्वनाथ मंदिर की मूर्ति कला बहुत ही अद्भुत है। इस मंदिर की दीवारों में, जो मूर्ति बनाई गई हैं। उनमें आप मूर्तियों के भाव द

भगवान शांतिनाथ जैन मंदिर खजुराहो - Lord Shantinath Jain Temple Khajuraho

भगवान शांतिनाथ मंदिर खजुराहो - Shantinath temple khajuraho भगवान शांतिनाथ मंदिर खजुराहो का प्रसिद्ध मंदिर है। भगवान शांतिनाथ का मंदिर खजुराहो के पूर्वी मंदिर समूह में स्थित एक मंदिर है। खजुराहो में जैन मंदिर बहुत प्रसिद्ध है। यहां पर आपको शांतिनाथ भगवान का मंदिर देखने के लिए मिलता है। शांतिनाथ भगवान के मंदिर के अलावा भी यहां पर आपको पार्श्व नाथ मंदिर  और आदिनाथ का मंदिर देखने के लिए मिलता है। हम बात शांतिनाथ मंदिर के बारे में करेंगे। हम लोग यहां पर मुख्य प्रवेश द्वार से प्रवेश किए। यहां पर मंदिर बहुत ही सुंदर और साफ सुथरा है। यहां पर आपको मंदिर के अंदर चमड़े का कोई भी सामान ले जाने की अनुमति नहीं है। चप्पल बाहर उतरने के आदेश यहां पर एक बोर्ड पर लिखे हुए हैं। यह मंदिर बहुत ही खूबसूरत है। यह मंदिर  11वीं शताब्दी में बनाया गया था।  शांतिनाथ मंदिर के बाहर आपको चंदेल वंश के राष्ट्रीय चिन्ह की प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। यह प्रतिमा मंदिर के प्रवेश द्वार के दोनों तरफ देखने के लिए मिलती है। यह प्रतिमा सिंह की है। आप मंदिर के अंदर जाते हैं, तो मंदिर में भगवान शांतिनाथ की खड़ी हुई मुद्र

दूल्हादेव शिव मंदिर खजुराहो - Dulhadev shiv Temple Khajuraho

खजुराहो का दूल्हादेव शिव मंदिर - Dulha Dev shiv Mandir Khajuraho   दूल्हा देव मंदिर खजुराहो का एक प्रसिद्ध मंदिर है। दूल्हा देव मंदिर खजुराहो के दक्षिणी मंदिर समूह का एक मंदिर है। दूल्हा देव मंदिर शिव भगवान जी को समर्पित है। दूल्हा देव मंदिर के गर्भ गृह में शिव भगवान जी का शिवलिंग देखने के लिए मिलता है। दूल्हा देव मंदिर को कुंवारा मठ भी कहा जाता है। दूल्हा देव मंदिर खुड़र नदी के किनारे पर  स्थित है। यह मंदिर बहुत ही खूबसूरत है। मंदिर में आपको गार्डन भी देखने के लिए मिलता है। यह मंदिर एक ऊंचे चबूतरे के ऊपर बना हुआ है। मंदिर में जाने के लिए सीढ़ियां है। मंदिर में लोग आज भी शंकर जी की पूजा करते हैं। यहां पर आपको फूल, बेलपत्र चढ़े हुए देखने के लिए मिल जाएंगे।     खजुराहो के दूल्हा देव मंदिर की वास्तुकला -  Architecture of Dulha Dev Temple of Khajuraho खजुराहो का दूल्हा देव मंदिर बहुत ही सुंदर है और खजुराहो के अन्य मंदिरों के समान है। इस मंदिर की बाहरी दीवार में आपको मूर्तिकला देखने के लिए मिलती है। खजुराहो के दूल्हा देव मंदिर में आपको मंडप, अंतराल, गर्भ ग्रह और महा मंडप देखने के लिए

बीजामंडल मंदिर खजुराहो - Bijamandal temple Khajuraho

बीजामंडल उत्खनन मंदिर खजुराहो - Bijamandal excavation temple Khajuraho   बीजामंडल खजुराहो का एक प्रसिद्ध मंदिर हुआ करता था, अर्थात यह मंदिर प्राचीन समय में अच्छे अवस्था में हुआ करता था। अभी आप इस मंदिर जाएंगे, तो अभी आपको इस मंदिर के खंडहर ही देखने के लिए मिलेंगे, क्योंकि यह मंदिर अब पूरी तरह से नष्ट हो गया है। इस मंदिर की दीवारें ही देखने के लिए मिलेंगी।  बीजामंडल मंदिर शिव भगवान जी को समर्पित था और इस मंदिर में अभी भी आपको शिव भगवान जी का शिवलिंग देखने के लिए मिलता है। इस मंदिर की जो दीवारें थी, उनके टुकड़ों को संभाल कर यहां पर रखा गया है। आप उनकी बारीक नक्काशी को यहां देख सकते हैं।     खजुराहो के बीजामंडल मंदिर के दर्शन -  Visit to Bijamandal Temple Khajuraho खजुराहो का बीजामंडल मंदिर मुख्य खजुराहो के बाहरी क्षेत्र में स्थित है। यह मंदिर चतुर्भुज मंदिर से करीब है। आप जब भी चतुर्भुज मंदिर जाते हैं, तो इस मंदिर को देखने के लिए जा सकते हैं। मगर यहां पर देखने के लिए मंदिर नहीं है। उसके खंडहर है और मंदिर की दीवारों के बहुत सारी नक्काशी हैं, जो आपको यहां पर बिखरी हुई देखने के लिए मि

चतुर्भुज मंदिर खजुराहो - Chaturbhuj Temple Khajuraho

चतुर्भुज मंदिर खजुराहो -  Chaturbhuj Mandir Khajuraho   चतुर्भुज मंदिर खजुराहो स्थित एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर दक्षिणी मंदिर समूह में स्थित है। चतुर्भुज मंदिर सेवाग्राम गांव के बाहरी क्षेत्र में स्थित है। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। इस मंदिर की बाहरी दीवार मूर्तियों से सुसज्जित है। यह मंदिर बहुत खूबसूरत लगता है। मंदिर के गर्भ गृह में विष्णु भगवान की आकर्षक प्रतिमा देखने के लिए मिलती है।     खजुराहो के चतुर्भुज मंदिर की वास्तुकला  - Architecture of Chaturbhuj Temple Khajuraho खजुराहो का चतुर्भुज मंदिर बहुत सुंदर है। मंदिर में आपको अंतराल, मंडप, महामंडप, गर्भ ग्रह देखने के लिए मिलता है। इस मंदिर में परिक्रमा पथ नहीं है। यह मंदिर एक ऊंचे मंडप पर बना हुआ है और खूबसूरत लगता है।     खजुराहो के चतुर्भुज मंदिर के दर्शन - Visiting Chaturbhuj Temple of Khajuraho  खजुराहो का चतुर्भुज मंदिर दक्षिणी मंदिर समूह में स्थित है। यह मंदिर पश्चिमी समूह मंदिरों से छोटा है। मगर यह मंदिर खूबसूरत है और इसकी दीवारों की जो नक्काशी है। वह अद्भुत है। यह मंदिर मुख्य खजुराहो से करीब 3 किलोमीटर दूर

चौसठ योगिनी मंदिर खजुराहो - 64 Yogini Temple Khajuraho

चौसठ योगिनी मंदिर खजुराहो मध्य प्रदेश - Chausath Yogini Temple Khajuraho Madhya Pradesh   चौसठ योगिनी मंदिर खजुराहो का एक प्रसिद्ध मंदिर है। अब इस मंदिर में देखने के लिए खंडहर ही रह गए हैं। इस मंदिर में प्राचीन समय में चौसठ योगिनी के मंदिर थे, जो पत्थरों के बने थे और यह मंदिर खजुराहो में बने सभी मंदिरों में सबसे पहले बनाए गए हैं। प्राचीन समय में यहां पर 64 गर्भ ग्रह रहे थे, जिसमें हर एक में मूर्तियां विराजमान रही होंगी। यहां पर अन्य देवी देवताओं के भी मंदिर रहे होंगे। मगर अब यहां पर जितने भी गर्भ ग्रह हैं, उनमें किसी प्रकार की मूर्ति देखने के लिए नहीं मिलती। यहां पर बहुत सारे गर्भ ग्रह टूट गए हैं। यहां पर अब सिर्फ 35 गर्भ में बचे हैं, जो अच्छी हालत में है और देखने लायक है। मगर यह भी धीरे-धीरे टूट रहे हैं। इस मंदिर की सिर्फ एक गर्भ गृह में कुछ झंडे बंधे हुए थे और अंदर पत्थर की मूर्ति विराजमान थी। बाकी यहां पर सभी खंडहर हो गया है।     खजुराहो का 64 योगिनी मंदिर चंदेल वंश के अस्तित्व में आने से पहले बनाया गया है। यह करीब 300 साल पहले बनाया गया है। चंदेलओ के अस्तित्व में आने से पहले खजु

प्रतापेश्वर मंदिर खुजराहो - Pratapeshwar Temple Khajuraho

खुजराहो का प्रतापेश्वर मंदिर -  Pratapeshwar Mandir Khajuraho प्रतापेश्वर मंदिर खुजराहो का एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर पश्चिमी मंदिर समूह में स्थित है। यह मंदिर शिव भगवान जी को समर्पित है। इस मंदिर के गर्भ गृह में शिव भगवान जी का शिवलिंग एवं नंदी भगवान की प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। शिव भगवान जी का शिवलिंग मंदिर में काले रंग का विराजमान है। नंदी भगवान की प्रतिमा पत्थर की है। इस मंदिर में आपको मूर्तिकला देखने के लिए नहीं मिलती है। इस मंदिर में आपको थोड़ी बहुत चंदेल राजवंश की डिजाइन देखने के लिए मिल जाएगी।     खजुराहो के प्रतापेश्वर मंदिर का निर्माण किसने कराया - Who built the Pratapeshwar temple Khajuraho प्रतापेश्वर मंदिर का निर्माण तत्कालीन छतरपुर के राजा प्रताप सिंह के द्वारा करवाया गया था। यह मंदिर सन 1784 से 1854  के दौरान बनाया गया है। इस मंदिर का निर्माण राजा प्रताप सिंह के द्वारा हुआ था। इसलिए इस मंदिर का नाम प्रतापेश्वर  मंदिर पड़ा। यह मंदिर मध्ययुगीन वास्तुकला का अंतिम चरण का उदाहरण है, जिसमें चंदेल काल के कुछ अंश देखे जा सकते हैं।     खजुराहो के प्रतापेश्वर मंदिर की

नंदी मंदिर खजुराहो - Nandi Temple Khajuraho

खजुराहो का नंदी मंदिर -   Nandi Mandir Khajuraho   नंदी मंदिर खजुराहो का एक प्रमुख मंदिर है। यह मंदिर विश्वनाथ मंदिर के सामने स्थित है। नंदी भगवान हिंदू देवता है।  नंदी भगवान भगवान शिव की सवारी हैं। नंदी मंदिर में आपको नंदी भगवान जी की पत्थर की बहुत ही बेहतरीन प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। इस मंदिर में नंदी महाराज विश्वनाथ मंदिर के शिव भगवान की तरफ मुंह करके विराजमान हैं। नंदी भगवान की प्रतिमा के ऊपर नक्काशी भी देखने के लिए मिलती है, जो बहुत ही खूबसूरत लगती है। नंदी भगवान की प्रतिमा पत्थर की बनी है और बहुत बड़ी प्रतिमा है।     नंदी मंदिर या नंदी मंडप पश्चिमी मंदिर समूह का एक मुख्य मंदिर है। नंदी मंडप स्थापित योजना के अंतर्गत विश्वनाथ मंदिर का ही एक भाग है। यह चाकोर मंडप 12 स्तंभों पर आधारित है। इस मंडप की छत वृत्ताकार है। नंदी मंदिर की दीवारों में आपको हाथी की बहुत ही सुंदर नक्काशी देखने के लिए मिलती है। यह नक्काशी पूरे मंदिर की दीवारों पर बनाई गई है। यह मंदिर पिरामिड नुमा है।   हम लोग विश्वनाथ मंदिर में शिव भगवान जी के दर्शन करने के बाद और मूर्तिकला देखने के बाद, नंदी भगवान जी के

विश्वनाथ मंदिर खजुराहो - Vishwanath Temple Khajuraho

खजुराहो का विश्वनाथ मंदिर - Vishwanath Mandir Khajuraho विश्वनाथ मंदिर खजुराहो का एक प्रसिद्ध मंदिर है। विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर के गर्भ गृह में शिवलिंग देखने के लिए मिलता है। यह मंदिर पश्चिमी मंदिर समूह में स्थित है। यह मंदिर भी एक ऊंचे चबूतरे पर बना हुआ है। मंदिर की वास्तुकला बहुत ही अद्भुत है। मंदिर के सामने नंदी महाराज का एक मंदिर देखने के लिए मिलता है। विश्वनाथ मंदिर में भी चार उप मंदिर रहे। मगर अब यहां पर हम लोगों को सिर्फ दो मंदिर ही देखने के लिए मिले। इन दोनों मंदिर में भी खूबसूरत नक्काशी देखने के लिए मिल जाती है। विश्वनाथ मंदिर की दीवारों की मूर्तिकला बहुत ही अद्भुत है।    विश्वनाथ मंदिर की वास्तुकला -  Architecture of Vishwanath Temple विश्वनाथ मंदिर पंचायतन शैली में बना हुआ है। अर्थात विश्वनाथ मंदिर में भी चार उप मंदिर थे, जिनमें से आप दो मंदिर अभी देख सकते हैं। यह मंदिर के चबूतरे के कोने में स्थित है। विश्वनाथ मंदिर लक्ष्मण मंदिर के समान ही बना हुआ है। विश्वनाथ मंदिर को आंतरिक रूप से देखने पर इसके 5 भाग आपको देखने के लिए मिलते हैं। अर्थमंडप, महाम