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रानी कमलापति की समाधि छतरपुर - Rani Kamlapati ki samadhi Chhatarpur

रानी कमलापति की समाधि, मऊ सहानिया, छतरपुर -  Tomb of Rani Kamalapati, Mau Sahania, Chhatarpur रानी कमलापति की समाधि छतरपुर का एक प्रसिद्ध स्थल है। यह समाधि बहुत सुंदर है। रानी कमलापति महाराजा छत्रसाल की पत्नी थी। रानी कमलापति की समाधि एक ऐतिहासिक स्थल है। यह समाधि दो मंजिला है। इस समाधि के ऊपर आपको गुंबद देखने के लिए मिलते हैं। यह समाधि धुबेला झील के किनारे स्थित है। आप यहां पर जब भी आते हैं, तो आपको यहां पर अच्छा लगेगा।  रानी कमलापति महाराजा छत्रसाल की प्रथम रानी थी। रानी कमलापति को देव कुँअरि के नाम से जाना जाता था। रानी कमलापति के समाधि शुष्क भित्ति चित्रण पद्धति द्वारा बनाई गई है। इसमें 180 चित्रांकन है। ऊपरी खंड में 7 कुंभ है, जिसमें 48 पंखुड़ियों वाले कमल उसका प्रभाव है।  रानी कमलापति की समाधि धुबेला झील के किनारे स्थित है। हम लोग इस समाधि स्थल पर घूमने के लिए अपनी स्कूटी से गए थे। आप यहां पर अपनी कार और गाड़ी से आराम से पहुंच सकते हैं। यहां आने के लिए पक्की सड़क बनी हुई है। यहां पर हम लोगों ने अपनी गाड़ी बाहर पार्क किए। उसके बाद हम लोग समाधि के अंदर घूमने गए। यहां पर बहुत बड़ा आं

धुबेला झील छतरपुर - Dhubela Lake Chhatarpur

धुबेला झील, मऊ सहानिया, छतरपुर -  Dhubela Jheel, Mau sahaniya, Chhatarpur धुबेला झील छतरपुर का एक प्रसिद्ध जगह है। यहां पर आपको एक बहुत बड़ी झील देखने के लिए मिलती है। यह झील बहुत बड़े एरिया में फैली हुई है। यह झील छतरपुर के मऊ सहानिया में स्थित है। यह झील पहाड़ी के किनारे स्थित है। इस झील के किनारे बहुत सारे प्राचीन स्थल देखने के लिए मिल जाते हैं। आप छतरपुर के मऊ सहानिया में बहुत ही आराम से पहुंच सकते हैं। आप यहां पर गाड़ी से या बस से आ सकते हैं। इस जगह पर बहुत सारे प्राचीन स्मारक देखने के लिए मिलते हैं, जिनमे से धुबेला झील भी एक है।  धुबेला झील में घूमने के लिए हम लोग अपनी गाड़ी से आए थे। हम लोग की स्कूटी से इस झील के पास में बने कमलापति समाधि में घूमने के लिए गए थे। इस झील के चारों तरफ पेड़ पौधे लगे हुए हैं। इस झील के एक तरफ ऊंची पहाड़ी देखने के लिए मिलती है। इस पहाड़ी पर गौरैया माता का मंदिर बना हुआ है। इस झील में गौरैया माता के मंदिर के आगे आपको बैठने के लिए एक जगह देखने के लिए मिलती है। यहां पर बैठने के लिए सीमेंटेड चेयर बनाई गई है, जहां से आप झील के सुंदर दृश्य को देख सकते हैं। 

मस्तानी महल छतरपुर - Mastani Mahal Chhatarpur

बाजीराव मस्तानी का महल या मस्तानी का महल, मऊ सहानिया, छतरपुर -  Bajirao Mastani Mahal or Mastani Mahal, Mau Sahania, Chhatarpur मस्तानी का महल छतरपुर का एक प्रसिद्ध महल है। आप लोगों को मस्तानी के बारे में पता ही होगा। मस्तानी के जीवन पर एक फिल्म भी बनी हुई है। आपको बाजीराव और मस्तानी की प्यार भरा कहानी के बारे में पता होगा। वैसे इस फिल्म में बाजीराव और मस्तानी दोनों के जीवनों के बारे में बताया गया है।  मगर हम लोग मस्तानी के महल में घूमने के लिए गए थे। मस्तानी का महल महाराजा छत्रसाल के महल के बाजू में ही स्थित है। यह महल दो मंजिला है और अभी यह महल खंडहर अवस्था में मौजूद है। वैसे यह महल बहुत टिकाऊ है। यहां पर आप महल के ऊपर भी चढ़कर घूम सकते हैं। महल देखने में बहुत सुंदर लगता है और बुंदेलखंडी वास्तुकला में बना हुआ है।  मस्तानी महाराजा छत्रसाल के द्वारा गोद ली हुई संतान थी। मस्तानी महल का निर्माण महाराजा छत्रसाल के द्वारा लगभग 1696 ईसवी में करवाया गया था। इस महल का निर्माण उन्होंने अपने नृत्यांगना मस्तानी के लिए करवाया था। बाजीराव पेशवा बंगश पर विजय के पश्चात यहां आए एवं मस्तानी

महाराजा छत्रसाल संग्रहालय छतरपुर - Maharaja Chhatrasal Museum Chhatarpur

महाराजा छत्रसाल का संग्रहालय  ( धुबेला संग्रहालय )  और किला,  धुबेला,   मऊ सहानिया छतरपुर  -  Maharaja Chhatrasal Fort or Maharaja Chhatrasal Museum (Dhubela Museum) Mau Sahania Chhatarpur महाराजा छत्रसाल का किला एवं महाराजा छत्रसाल का संग्रहालय मध्य प्रदेश का एक प्रसिद्ध स्थल है। महाराजा छत्रसाल संग्रहालय को धुबेला म्यूजियम के भी नाम से जाना जाता है। यह संग्रहालय धुबेला झील के किनारे बना हुआ है। इसलिए इसे धुबेला संग्रहालय कहा जाता है। छतरपुर जिले को छत्रसाल की नगरी के नाम से जाना जाता है। छतरपुर जिले को महाराजा छत्रसाल के द्वारा बसाया गया था। छतरपुर जिले के मऊ सहानिया में महाराजा छत्रसाल का किला एवं संग्रहालय स्थित है। आपको महाराजा छत्रसाल संग्रहालय में जो इमारत देखने के लिए मिलती है। वह महाराजा छत्रसाल ने अपने निवास स्थान के लिए बनाया था और इसे धुबेला महल के नाम से भी जाना जाता है। यह महल धुबेला झील के किनारे स्थित है। इस इमारत का निर्माण 18वीं शताब्दी में किया गया था और महाराजा छत्रसाल के द्वारा यह इमारत बनाई गई थी। यह इमारत बुंदेला वास्तु कला में बनाई गई है। महाराजा

महाराजा छत्रसाल की समाधि छतरपुर - Maharaja Chhatrasal ki samadhi Chhatarpur

महाराजा छत्रसाल की समाधि या महाराजा छत्रसाल का मकबरा मऊ सहानिया छतरपुर -  Cenotaph  of Maharaja Chhatrasal or the tomb of Maharaja Chhatrasal, Mau Sahania, Chhatarpur महाराजा छत्रसाल का मकबरा या समाधि छतरपुर का एक प्रसिद्ध स्थल है। यहां पर आपको एक सुंदर इमारत देखने के लिए मिलती है। यह इमारत ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है और वास्तुकला में भी यह इमारत बहुत सुंदर लगती है। यह मकबरा धुबेला झील के किनारे ही बनी हुई है। यहां पर आप बहुत आसानी से पहुंच सकते हैं। छत्रसाल का मकबरा ऊंची पहाड़ी पर बना हुआ है। इस मकबरे में पहुंचने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है। महाराजा छत्रसाल के मकबरे का डिजाइन कुछ अलग प्रकार का है। इस मकबरे के बीच में एक बड़ा सा गुंबद बना हुआ है। यह बड़ा सा गुंबद छोटे-छोटे 12 गुंबद से घिरा हुआ है। इन 12 गुंबद में आपको खिड़कियां देखने के लिए मिल जाती हैं, जिनसे आप चारों तरफ के दृश्य को भी देख सकते हैं। यह मकबरा दो मंजिला है। आप इस मकबरे के ऊपर वाली मंजिल में भी जा सकते हैं और झील का सुंदर नजारे को देख सकते हैं।  महाराजा छत्रसाल का मकबरा यहां पर ग्रामीण क्षेत्र के पास ही में स्थि

शीतल गढ़ी (किला) छतरपुर - Sheetal Garhi (Fort) Chhatarpur

शीतल गढ़ी एवं महेबा गेट मऊ सहानिया छतरपुर -  Sheetal Garhi and Maheba Gate Mau Sahania Chhatarpur शीतल गढ़ी एवं  महेबा  गेट छतरपुर का एक मुख्य ऐतिहासिक स्थल है।  यहां पर आपको एक पुराना किला देखने के लिए मिलेगा, जिसे शीतल गढ़ी के नाम से जाना जाता है और यहां पर एक गेट भी बना हुआ है, जो इस किले का प्रवेश द्वार है। इस गेट को  महेबा  गेट कहते हैं। यह गेट और किला प्राचीन है और यहां पर यह दोनों खंडहर अवस्था में देखने के लिए मिलते हैं।  वैसे जब हम लोग शीतल गढ़ी एवं  महेबा  गेट पर घूमने के लिए गए थे। तब यहां पर कोई नहीं था। यहां पर बिल्कुल सुनसान था।  हम लोग छतरपुर के मऊ सहानिया में घूमने के लिए अप्रैल के महीने में गए थे। उस टाइम यहां पर सुनसान था। सिर्फ मैं और मेरे साथी बस थे। हम लोग  महेबा  गेट से अंदर गए।  महेबा  गेट से अंदर जाकर, हमें बादल महल भी देखने के लिए मिला, जो ऊंची पहाड़ी पर बना हुआ है।  महेबा गेट के बारे में जानकारी -  Information about Maheba Gate महाराजा छत्रसाल के द्वारा महेबा नगरी की स्थापना सन 1671 ईसवी में की गई थी। महेबा की ओर जाने वाले मार्ग पर बने इस द्वार का निर्माण लग

गौरैया माता मंदिर छतरपुर - Gauraiya Mata Mandir Chhatarpur

गौरैया माता मंदिर मऊ सहानिया छतरपुर -  Gauraiya Mata Temple Mau Sahania Chhatarpur गौरैया माता मंदिर छतरपुर का एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यह मंदिर बहुत सुंदर है। यह मंदिर एक ऊंची पहाड़ी पर बना हुआ है। यह मंदिर छतरपुर के मऊ सहानिया में स्थित है। इस मंदिर में जाने के लिए सीढ़ियां हैं। यह मंदिर बहुत ऊंचाई में स्थित है, तो मंदिर में सीढ़ियों में बीच-बीच में ठहरने के लिए चेयर और शेड भी लगाया गया है, ताकि आप चढ़ते चढ़ते थक जाए, तो इनमें बैठ सके। गौरैया माता मंदिर में गौरैया माता की बहुत ही सुंदर प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। इस मंदिर से आपको चारों तरफ का सुंदर दृश्य भी देखने के लिए मिलेगा। यह जगह उचाई में स्थित है। इसलिए यहां से मऊ सहानिया के बहुत दूर-दूर का दृश्य देखने के लिए मिल जाता है।  हम लोग गौरैया माता मंदिर अप्रैल के महीने में गए थे।  हम लोग इस मंदिर में अपनी स्कूटी से गए थे। इस मंदिर तक जाने के लिए बहुत अच्छी सड़क मिलती है और यह मंदिर धुबेला झील के किनारे बना हुआ है। आप यहां पर धुबेला झील का सुंदर दृश्य देख सकते हैं। धुबेला झील के पास एक सुंदर बैठने के लिए जगह भी बनी हुई है। गौरै

चौसठ योगिनी मंदिर छतरपुर - Chausath Yogini Temple Chhatarpur

कांच भवन यज्ञशाला और 64 योगिनी मंदिर मऊ सहानिया छतरपुर -  Kanch Bhawan Yagyashala and 64 Yogini Temple Mau Sahania Chhatarpur कांच भवन यज्ञशाला और 64 योगिनी मंदिर छतरपुर का एक प्रसिद्ध स्थल है। यह दोनों जगह आजू-बाजू स्थित है।  कांचभवन यज्ञशाला और 64 योगिनी मंदिर छतरपुर के मऊ सहानिया में स्थित है। यह मंदिर जगत सागर तालाब के किनारे में बना हुआ है। इस मंदिर में घूमने के लिए आया जा सकता है। यह मंदिर पत्थरों का बना हुआ है। मंदिर बहुत सुंदर है। मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति देखने के लिए मिलती है और।  कांच भवन यज्ञशाला एवं चौसठ योगिनी मंदिर जगत सागर तालाब के किनारे स्थित है। हम लोग इस मंदिर में घूमने के लिए गए थे। 64 योगिनी मंदिर में जाने का रास्ता बिहारी जू मंदिर के सामने से ही गया है। यह रास्ता कच्चा है। इस रास्ते में आपकी गाड़ी आराम से चली जाएगी। यहां पर दोपहिया वाहन आराम से चला जाता है। हम लोग भी यहां पर अपनी स्कूटी से गए थे। चौसठ योगिनी मंदिर बिहारी जू मंदिर से करीब 500 से 600 मीटर दूर होगा। हम लोग जब यहां पहुंचे, तो हम लोगों को यहां पर दो मंदिर देखने के लिए मिले। यहां पर सुनसान थ

जगत सागर तालाब - Jagat Sagar Talab and Bihari ju Temple Chhatarpur

जगत सागर तालाब  और  बिहारी जू मंदिर मऊ सहानिया छतरपुर -  Jagat Sagar Talab and Bihari Zoo Temple Mau Sahania Chhatarpur जगत सागर तालाब मऊ सहानिया का एक प्रसिद्ध स्थल है। यह एक बहुत बड़ा तालाब है। यह तालाब बहुत बड़े एरिया में फैला हुआ है। इस तालाब के किनारे बहुत सारे प्राचीन मंदिर देखने के लिए मिलते हैं। यह तालाब बरसात में पूरा भर जाता है और जो मंदिर के तालाब के किनारे बने हुए हैं। वह डूब जाते हैं। गर्मी के समय इस तालाब के किनारे खेती करने लगते हैं। बहुत सारे लोग यहां पर तरह-तरह की फसल उगाते हैं। यह तालाब मऊ सहानिया का एक प्राचीन स्थल है और आप जब भी छतरपुर में मऊ सहानिया घूमने के लिए जाते हैं, तो जगत सागर तालाब और इसके आसपास स्थित प्राचीन मंदिरों में भी घूमने के लिए जा सकते हैं।  हम लोग जगत सागर तालाब के किनारे स्थित शनि धाम मंदिर में घूम कर जगत सागर तालाब के दूसरे तरफ स्थित मंदिर में घूमने के लिए गए। जगत सागर तालाब के दूसरे किनारे पर आपको बिहारी जू मंदिर देखने के लिए मिलेगा। जब हम लोग बिहारी जू  मंदिर गए थे। तब यह मंदिर बंद था। इस मंदिर में ताला लगा था। बिहारी जू मंदिर बहुत प्राची

शनि मंदिर मऊ सहानिया छतरपुर - Shani Temple Mau Sahania Chhatarpur

श्री शनि धाम मऊ सहानिया छतरपुर -  Shani Dham Mau Sahania Chhatarpur शनि मंदिर मऊ सहानिया में स्थित छतरपुर का एक प्रसिद्ध मंदिर है। शनिधाम मंदिर छतरपुर में बहुत प्रसिद्ध है। शनि मंदिर जगत सागर तालाब में स्थित है। गर्मी के समय जगत सागर तालाब का पानी नीचे चला जाता है, तो आप शनि मंदिर में आराम से जा सकते हैं। मगर बरसात के समय जगत सागर तालाब का पानी शनि मंदिर तक आ जाता है और मंदिर भी डूब जाता है। तब आप इस मंदिर में नहीं आ सकते हैं। वैसे पानी कम रहता है, तो यहां पर आया जा सकता है। यहां पर आपको शनि भगवान जी की सुंदर प्रतिमा के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। यहां पर 9 देवताओं की भी दर्शन करने के लिए मिलते हैं। यहां पर आपको 9 तरह की जड़ी बूटियों के पौधे भी देखने के लिए मिल जाएंगे। यह जगह बहुत अच्छी है।  हम लोग शनि मंदिर में अपनी गाड़ी से गए थे। शनि मंदिर मऊ  सहानिया  में बहुत प्रसिद्ध है। आप मुख्य हाईवे सड़क से ही गुजरते हैं, तो आपको इस मंदिर का बोर्ड देखने के लिए मिल जाता है। आप बोर्ड से मंदिर की तरफ मुड़ जाइए और मंदिर में पहुंच जाएंगे। इस मंदिर का रास्ता जो है। वह तालाब के बीच से बना हुआ है। यह ब

महाराजा हृदय शाह का महल छतरपुर - Maharaja Hriday Shah ka Mahal Chhatarpur

महाराजा हृदय शाह का महल  मऊ सहानिया  छतरपुर -  Maharaja Hriday Shah's Palace Mau Sahania Chhatarpur महाराजा हृदय शाह का महल छतरपुर में स्थित एक प्रसिद्ध स्मारक है। यह एक प्राचीन इमारत है। यह महल यहां पर खंडहर अवस्था में देखने के लिए मिलता है। यह महल पहाड़ी पर बना हुआ है। इस महल में जाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है। महाराजा हृदय शाह महाराजा छत्रसाल के पुत्र थे और उन्होंने बहुत सारे निर्माण किए हैं। आपको पन्ना जिले में भी महाराजा हृदय शाह के बहुत सारे निर्माण देखने के लिए मिल जाते हैं। राजा हृदय शाह का महल छत्रसाल संग्रहालय के पास में ही बना हुआ है। राजा हृदय शाह महल दूर से यह देखने के लिए मिल जाता है।  हम लोग जगत सागर तालाब घूमने के बाद और जगत सागर तालाब के किनारे जितने भी मंदिर बने हुए हैं। वह मंदिर घूमने के बाद महाराजा छत्रसाल के म्यूजियम में घूमने के लिए आए। मगर हम लोग सुबह बहुत जल्दी ही इस म्यूजियम में घूमने के लिए आ गए थे। इसलिए यह म्यूजियम बंद था। यह म्यूजियम 10 बजे के बाद खुलता है, तो हम लोग म्यूजियम के बाहर खड़े थे, तो हमें दूर से ही राजा हृदय शाह का महल देखने के लिए मिला। ह

खजुराहो के मंदिर में कामुक मूर्तियां क्यों बनाई गई ?

चलिए जानते हैं, खजुराहो के मंदिर में कामुक मूर्तियों के बनाने के कारणों के बारे में खजुराहो के मंदिर अपनी मूर्ति कला के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं। इन मंदिरों में आपको बहुत सारी मूर्तियां देखने के लिए मिलती हैं और यह मूर्तियां आपको उस युग के बारे में बताती हैं। इन मंदिरों में आपको कामुक मूर्तियां भी देखने के लिए मिलती हैं।  खजुराहो के मंदिर में इस तरह की मूर्तियां होना एक आश्चर्य वाली बात है और बहुत सारे लोग इस तरह की मूर्तियों को देखकर अलग-अलग मत देते आए हैं। बहुत सारे विद्वान इन मूर्तियों को देखकर अपने अलग-अलग मत लोगों से साझा किए हैं। वैसे यह मूर्तियां इन मंदिरों में इस तरह से बनाई गई हैं कि लोगों का ध्यान आकर्षित होता ही है।  खजुराहो की कामुक मूर्तियों के बारे में कुछ विद्वानों का मानना है, कि उस समय कुछ विशेष समुदाय के लोग रहते थे, जो योग की तरह भोग को भी मानते थे। अर्थात योग की तरह भोग भी मोक्ष पाने का एक मार्ग मानते थे। वह पूजा अनुष्ठान की तरह भोग भी किया करते थे। इसलिए उन्होंने इन दृश्यों को मंदिरों में बनवाया, क्योंकि वह इन्हें मोक्ष का एक मार्ग मानते थे।  खजुराहो के कामुक मूर्ति