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Savitri temple pushkar || सावित्री मंदिर पुष्कर

Savitri temple pushkar
सावित्री मंदिर पुष्कर


पुष्कर का सावित्री मंदिर (Savitri mata temple pushkar) बहुत ही खूबसूरत जगह है।

Savitri temple pushkar || सावित्री मंदिर पुष्कर

खूबसूरत पहाड़ियों का दृश्य 

पुष्कर शहर का सावित्री मंदिर एक धार्मिक जगह है। यह जो मंदिर है, वह उचीं  पहाड़ी पर स्थित है। इस पहाडी को रत्नागिरी पहाडी कहते है। इसकी ऊँचाई 750 फीट है। आपको यहां पर देसी और विदेशी दोनों प्रकार के लोगों लोग देखने मिल जाएंगे, मतलब यहां पर भारतीय लोग और विदेशी लोग लोग सभी लोग माता के दर्शन करने के लिए आते हैं। 

पुष्कर का सावित्री मंदिर (Savitri mata temple pushkar) भगवान ब्रह्मा की पहली पत्नी को समर्पित है। इस मंदिर में स्थित देवी सावित्री की मूर्ति बहुत ही प्राचीन है। 

Savitri temple pushkar || सावित्री मंदिर पुष्कर

मंदिर परिसर में बैठे कुछ बंदर 

Savitri temple pushkar || सावित्री मंदिर पुष्कर

मंदिर से नीचे का खूबसूरत दृश्य 


हमने पुष्कर के सावित्री मंदिर (Savitri mata temple pushkar) का जाने का प्लान बनाया और हम लोगों तैयार हो गए। उसके बाद हम लोगों ने पुष्कर घूमने के लिए ऑटो बुक किया था। मगर हम लोगों को बहुत लेट हो गया था, तो हम लोग सबसे पहले इस मंदिर के लिए निकले। हम लोगों मंदिर पहुॅचें, तो हम लोगों को मंदिर के आसपास बहुत सारे ऊंट गाडी दिखाई दी, गाडी को ऊंट खींचकर लेकर जाते हैं। आप भी यहां पर ऊंट गाड़ी देखने मिल जाएगी। वैसे आप चाहे तो इस ऊंट गाड़ी में भी घूम सकते हैं। मगर इस ऊंट गाड़ी का जो किराया रहता है। वह थोड़ा कॉस्टली रहता है ऑटो के मुकाबले में, तो आप चाहें तो इस गाड़ी में भी घूम सकते हैं या आटों में घूम सकते है। 

सावित्री मंदिर (Savitri mata temple pushkarके पहाडी के नीचे जब आप पहुंचते हैं, तो आपको यहां पर बहुत सारी  सारी दुकानें देखने मिल जाती हैं। यहां पर कुछ खाने-पीने की दुकानें रहती हैं और कुछ सामानों की दुकानें रहती है। यहां पर भगवान को प्रसाद चढ़ाने वाली कुछ दुकानें रहती है, तो आप यहां से प्रसाद खरीद सकते हैं। यहां पर 30 या 40 रुपए का आपको प्रसाद मिल जाता है। आप यहां से प्रसाद ले सकते हैं उसके बाद हम लोगों ने यहां पर चाय पीती थी। यहां पर एक दुकान में कुल्हड़ वाली चाय मिल रही थी, तो हम लोगों ने कुल्हड़ वाली चाय पिए। उसके बाद हम लोगों ने मंदिर की तरफ बढें। 

सावित्री मंदिर (Savitri mata temple pushkarतक पहुंचने के लिए दो रास्ते मिल जाते हैं। एक तो सीढियों वाला रास्ता रहता है। आपको सीढ़ियां चढ़कर जानी पड़ती है, इसमें आपकी बहुत ज्यादा ताकत लग सकती है और आपका बहुत ज्यादा समय लग सकता है। इसके साथ ही एक रास्ता रोपवे वाला रहता है, जिसमें आप आराम से पहुंच सकते हैं और आपका इसमें ज्यादा समय भी नहीं लगता है।

Savitri temple pushkar || सावित्री मंदिर पुष्कर

सूर्यास्त का बहुत ही मनमोहक दृश्य 

Savitri temple pushkar || सावित्री मंदिर पुष्कर

मंदिर से नीचे के खूबसूरत दृश्य 

Savitri temple pushkar ropeway
सावित्री मंदिर पुष्कर रोपवे


सावित्री मंदिर (Savitri mata temple pushkar) तक पहुंचने के लिए हम लोगों ने रोपवे से जाने का फैसला लिया और हम लोग रोपवे की तरफ चले गए। हम लोगों का रोपवे का टिकट 100 का था। एक व्यक्ति का 100 रू लगा। उसके बाद हम लोगों ने रुपए में बैठे। हम लोग 6 जन लोग थे और 6 लोगों के लिए रोपवे में बैठने के लिए बहुत जगह थी। उसके बाद है हमारी रोपवे धीरे धीरे चलना स्टार्ट हो गई। हम लोगों को वहां के खूबसूरत व्यू देखना स्टार्ट हो गया था। व्यु बहुत ज्यादा खूबसूरत था। रोपवे से देखने पर पर कही रेगिस्तान था। तो कहीं पर पानी बह रहां था, कहीं पर रेत थी, तो कहीं पर लोगों का भींड थी। कही पर उंट गाडी थी, कही पर रेत में चलती बडी गाडी थी। यहां सब दृश्य आपको रोपवे से देखने मिल जाता है। हम लोगों को रोपवे से कुछ बंदर भी   दिखे थे, जो मंदिर की तरफ चढ़ाई कर रहे थे।

इन सभी दृश्यों का लुफ्त उठाते हुए हम लोग मंदिर पहुंच गए। उसके बाद हम लोग रोपवे से उतरे। सावित्री मंदिर (Savitri mata Temple) के बाहर भी कुछ दुकानें हैं और सवित्री मंदिर बहुत ही खूबसूरत था। आपको यहां से चारों तरफ खूबसूरत पहाड़ियां, नदियां, रोड, खेत और पुष्कर शहर का खूबसूरत नजारे देखने मिलता है। यहां से पुष्कर झील भी देखने मिलती है। हम लोगों ने मंदिर में सावित्री माता जी के दर्शन किए। 

सावित्री माता जी (Savitri mata) के इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि एक बार ब्रह्मा जी ने यज्ञ का आयोजन किया। जिसमें सवित्री माता ((Savitri mata)को पहुॅचने में देर हो गई,  इसलिए ब्रह्मा जी ने गायत्री जी के साथ विवाह कर पूजा की विधि पूरी की और तभी सावित्री माता वहां पहुंची। जिससे उन्हें बहुत गुस्सा आया और वह इस पहाड़ी में आकर तपस्या करने लगी। इस तरह इस मंदिर की स्थापना हुई है। आप भी यहां आएंगे तो आपको इस तरह की कहानियां सुनने मिल सकती है।

यहां पर स्थित मंदिर बहुत ही खूबसूरत है और इसके आसपास भी बहुत अच्छा है। उसके बाद हम लोग ने मंदिर के दर्शन करने के बाद मंदिर के पीछे जो खूबसूरत जगह है। वहां गए, वहां हम लोग ने देखा तो वहां पर भी बहुत ही खूबसूरत नजारा था। यहां से आपको सन सेट का नजारा भी लुभावना है, जो बहुत ही मस्त रहता है। यहां पर हम लोग ठंड के समय में गए थे, तो ठंड के समय पर यहां पर हल्का सा बादल भी था और हल्की फुल्की बरिश भी हो रही थी, तो यहां पर कोहरा छाया हुआ था, जो बहुत ही मस्त लग रहा था। यहां पर हमने बहुत ही मस्त फोटो क्लिक किया। 

सावित्री देवी मंदिर (Savitri mata temple) के पास जो दुकाने थी वहां से हम लोगों ने अपने रिश्तेदारों के लिए कुछ गिफ्ट लिए। यहां पर हम लोगो ने कुछ विदेशी लोगों को भी देखा, जो भारतीय मंदिर और संस्कृति की बहुत ज्यादा रिस्पेक्ट करते हैं। 

हमारी पुष्कर के सावित्री देवी मंदिर (Savitri mata temple pushkar) की यात्रा बहुत ही अच्छी रही और यहां पर हम अपने फैमिली और दोस्तों के साथ आए थे। यहां पर हमने बहुत इंजॉय किया। यहां के दृश्य अविस्मरणीय थे। यहां पर हम ठंडी में आये थे। 

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Lamheta Ghat Jabalpur

Lamheta Ghat Jabalpur
लम्हेटाघाट जबलपुर 

लम्हेटाघाट नर्मदा नदी का शांत और खूबसूरत घाट

Lamheta Ghat Jabalpur

लम्हेटाघाट 

लम्हेटाघाट जबलपुर (Lamheta ghat Jabalpur) में स्थित एक खूबसूरत घाट है। लम्हेटाघाट जबलपुर (Lamheta ghat Jabalpurशहर का खूबसूरत पर्यटन स्थल है। यह घाट नर्मदा नदी पर बना हुआ है। यह घाट ज्यादा बड़ा नहीं है, मगर आप यहां पर आकर बहुत सारी जगहों के दर्शन कर सकते है। यह पर आपको नर्मदा नदी के घाट के अलावा ऐतिहासिक जगह भी देखने मिल जाती है। लम्हेटाघाट के आसपास में बहुत सारी ऐतिहासिक जगह है, जहां पर जाकर आपको अपने इतिहास के बारे में जानकारी मिल सकती है। मगर मेरे हिसाब से यहां के कुछ ऐतिहासिक स्थलों की हालात बहुत ही बेकार है। 

लम्हेटाघाट (Lamheta ghatमें आप आकर अपना अच्छा टाइम बिता सकते हैं और यहां पर ज्यादा लोग नहीं रहते हैं, जो लोग यहां पर रहते है। वहां यह के स्थानीय लोग ही रहते है। यहां पर बहुत से लोग इस घाट पर घूमने के लिए आते है। वहां भी आपको देखने मिलेगें, मगर यहा पर पर्यटक की संख्या कम रहती है।  

लम्हेटाघाट जबलपुर (Lamheta ghat Jabalpurमें स्थित है और यह भेड़ाघाट वाली रोड में स्थित है। इस जगह पहुंचने के लिए आपको सगड़ा रोड से आना पड़ता है। आप यहां पर अपनी गाड़ी से आसानी से पहुंच सकते हैं। यहां पर आप मेट्रो बस से भी आ सकते हैं। मेट्रो बस आपको लम्हेटाघाट (Lamheta ghatसे कुछ दूरी पर मेन रोड पर उतार देती है। मेन रोड से आपको करीब 1 किलोमीटर चलना पड़ता है, और आप इस जगह पर पहुंच सकते हैं। आप लम्हेटाघाट (Lamheta ghat) में आटों से भी आ सकते है और यहां पर आप आसानी से पहुंच सकते हैं।

आप यहां पर अपनी गाड़ी से आ सकते हैं। इस जगह पर आने के लिए अच्छे रोड है। आप जब भी भेड़ाघाट  जाते हैं, तो आप इस जगह भी आकर आपका अच्छा समय बिता सकते है। सगड़ा रोड पर आपको एक चैराहा मिलता है, जहां पर बोर्ड भी लगा रहता है और वहां से लम्हेटाघाट (Lamheta ghat) जाने के लिए डायरेक्शन दिया रहता है, तो आप इसको फाॅलो करके लम्हेटाघाट (Lamheta ghatपहुॅच सकते है। आपकी गाडी डायरेक्ट घाट तक पहुॅच जाती है।

Lamheta Ghat Jabalpur

लम्हेटाघाट 

लम्हेटाघाट (Lamheta ghatनर्मदा नदी के किनारे स्थित बहुत सुंदर एवं शांत घाट हैं। यहां पर आधिकतर लोग जो भी आते है। वहां इस पवित्र नदी में स्नान जरूर करते है। यहां पर महिलाओं के लिए चेजिंग रूम बना है, जहां पर महिलाओं नहाकर कपडे चेंज कर सकते है। यहां पर आपको नर्मदा नदी जी का बहुत ही खूबसूरत व्यू देखने मिलेगा। यहां पर आपको बैठने के लिए बहुत अच्छी व्यवस्था है। यहां पर पानी ज्यादा गहरा नहीं है। आप यहां पर जाकर बहुत अच्छा टाइम बिता सकते हैं। यहां पर आपको बहुत सारी जगह देखने मिल जाएगी। 

लम्हेटाघाट (Lamheta ghatपर एक पुराना मंदिर है, जिसे राधे कृष्ण जी का मंदिर (Radhe Krishna ji temple) कहा जाता है। यह मंदिर बहुत पुराना है और इन मंदिर के बारे में सरकार ध्यान नहीं दे रही है और यह मंदिर बर्बाद होते जा रहे है। मंदिर पूरी तरह से नष्ट होने की कगार में आ गया है और नष्ट हो भी रहा है। हम लोग इस मंदिर के अंदर गए थे और यह मंदिर बहुत खराब हालत में था। हम लोग को इस मंदिर में जाने में बहुत डर लग रहा था। हम लोग को लग रहा था, कहीं इस मंदिर की छत गिर ना जाए क्योंकि यहां पर जो मंदिर है, वह बहुत पुराना है। यह पूरा मंदिर पत्थरों का बना हुआ है। अगर आप इस मंदिर का वीडियो देखना चाहे, तो मेरे चैनल में जाकर देख सकते है। इसके अलावा मंदिर में आपको यहां पर बहुत सारे कमरे बने हुए थे। यहां पर एक मंदिर है, जहां पर शिवलिंग रखने की जगह थी। मगर शिवलिंग यहां पर नहीं थे। शिवलिंग गायब हो चुका है। यह बहुत ज्यादा पुराना मंदिर है, अगर आपको यहां पर जाने का मौका मिलें तो आप इस जगह पर जरूर जाना।

Lamheta Ghat Jabalpur

राधे कृष्ण जी का मंदिर  

Lamheta Ghat Jabalpur

राधे कृष्ण जी का मंदिर  

लम्हेटाघाट (Lamheta ghat) में एक हनुमान मंदिर भी है, जो बहुत प्राचीन है और हनुमान मंदिर के सामने ही शिव शंकर जी का मंदिर है। यह मंदिर भी पूरी तरह से पत्थर का बना हुआ है। इस मंदिर में खूबसूरत नक्काशी की गई है। आप इस मंदिर पर आकर इसकी खूबसूरती देख सकते हैं। यह ज्यादा बडा मंदिर नहीं है, मगर यह मंदिर सुंदर है। 

लम्हेटाघाट (Lamheta ghatमें मकर संक्रांति (Makar Sankranti) के उत्सव में या नर्मदा जयंती में बहुत ज्यादा भीड़ लगती है। इस दिन माना जाता है कि नदियों में नहाना शुभ माना जाता है, तो बहुत सारे लोग नर्मदा नदी में स्नान करने के लिए दूर-दूर से आते हैं। जो लोग दूर से आते हैं। वह नर्मदा नदी के किनारे ही रहने लगते हैं। यहां पर मकर संक्रांति में बहुत सारी दुकानें भी लगती हैं। यह पर बहुत भव्य मेले का आयोजन होता है। नर्मदा नदी के किनारे मे बहुत सारे लोग रहने लगते हैं मकर संक्रांति के उस समय। यहां पर बहुत अच्छा माहौल रहता है, बहुत सारे लोग रहते हैं, बहुत सारी दुकानें रहती है, जो बहुत अच्छा लगता है देखने में। यहां पर मकर संक्रांति में बहुत भीड़ होती है, जिससे नर्मदा जी के आजू-बाजू के घाटों में बहुत गंदगी भी होती है। अगर आप किसी भी नदी में जाते हैं, तो गंदगी ना करें। नदी को साफ रखें और अपना फर्ज निभा निभाए।

हम लोगों को इस घाट में जाकर बहुत ही अच्छा लगा था। घाट में और भी बहुत सारी जगह है, जो बहुत प्राचीन है। यहां पर प्राचीन समय की बहुत सारे मंदिर आपको देखने मिल जाते हैं, तो अगर आप इस जगह को एक्सप्लोर करना चाहते हैं, तो आपको यहां पर बहुत सारे नई नई जगह देखने मिल जाएंगी। यहां पर हम लोगों ने लम्हेटा घाट के राधा कृष्ण मंदिर और हनुमान जी के मंदिर ही विजिट किया था। आप यहां पर घुघरा वाटरफॉल (Ghaghra Waterfall) भी जा सकते हैं और परमहंसी आश्रम (Paramhansi Ashram) भी जा सकते हैं।

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Muhas Hanuman Temple || मुहास हनुमान मंदिर

Muhas Hanuman Temple
मुहास हनुमान मंदिर 

हड्डी जोड़ने वाला मुहास का हनुमान मंदिर


Muhas Hanuman Temple || मुहास हनुमान मंदिर

हनुमान मंदिर का मुख्य द्वार  


हनुमान मंदिर मुहास (Muhas Hanuman Temple) बहुत प्रसिद्ध है। इस हनुमान मंदिर को हड्डी जोड़ने वाले मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। लोगों का मानना है कि यहां पर हनुमान जी स्वयं लोगों की हड्डी जोड़ने का इलाज करते हैं। यह मंदिर पूरे भारत देश में प्रसिद्ध है। इस मंदिर के बारे में न्यूज चैनलों में भी आ चुका है। इस मंदिर की प्रसिद्धि पूरे देश में है। यहां पर जो भी लोग आते हैं। वह अपनी समस्या लेकर आते हैं और हनुमान जी उनकी समस्या को ठीक करते हैं।

मुहास हनुमान मंदिर कहा है
Where is Muhas Hanuman Temple


हम लोग भी इस मंदिर में घूमने गए थे। यह मंदिर मध्यप्रदेश के कटनी जिले में स्थित है। यह मंदिर कटनी जिले से लगभग 35 किमी दूर होगा। यह रीठी तहसील की मुहास नाम के गांव में स्थित है। यह एक छोटा सा मंदिर है, ज्यादा बड़ा मंदिर नहीं है। यह मंदिर बहुत ही खूबसूरती से बनाया गया है। यह मंदिर मुहास में मेन रोड में स्थित है। आप यहां पर अपनी गाड़ी से जा सकते हैं। यहां पर बसें भी चलती होंगी, मगर वो टाइम टेबल से चलती होंगी, तो अगर आप बस से यहां आना चाहते हैं। तो टाइम का विशेष ध्यान दें। मगर मेरे हिसाब से आप यहां पर अपनी गाड़ी से आएंगे, तो वह आपके लिए बेस्ट होगा। 

मुहास के हनुमान मंदिर (Muhas Hanuman Temple) के बारे में कहा जाता है, कि जिन लोगों की हड्डियां फैक्चर हो जाती हैं या टूट जाती है। ऐसे लोगों यहां पर आकर अपना इलाज करवाते है, तो यहां आने पर उनकी हड्डियों को दोबारा जोड़ा जा सकता है। वैसे यह सब मेडिकल साइंस के हिसाब से संभव नहीं है। मगर यहां आने वालों श्रध्दाुलों की मानें तो इस बात पर आपको विश्वास किया जा सकता है। यहां पर मंगलवार की दिन लोगों की भीड लगी रहती है। यहां पर मंगलवार के दिन के अलावा भी लोग आपको देखने मिल जाएगें। 

मुहास के हनुमान मंदिर (Muhas Hanuman Temple) में जो भी लोग अपना इलाज कराने आते है। वो यह पर दो या तीन बार आते है। तब जाकर उनका रोग ठीक हो जाता है। मंदिर के बाहर आपको दुकान देखने मिलती है, जहां पर मंदिर में चढाने के लिए प्रसाद मिल जाता है। इन दुकानों में आपको जड़ी बूटियों का तेल भी मिल जाएगा, जो आप के दर्द को कम करता है। तेल में वैसे यह लिखा रहता है और यह पर दुकान वाले लोग भी यही कहकर बेचते है। बाकी इस तेल के बारे में मुझे जानकारी नहीं है, कि वह आपके दर्द वगैरह को कम करता है कि नहीं। यह तेल आपको बहुत कम कीमत में मिल जाता है। 

अगर आप इस हनुमान मंदिर पर आते है, तो आपको यह पर बहुत अच्छा लगेगा। यहां पर बहुत सारे लोग आते हैं और यहां पर भजन कीर्तन होता रहता है। यहां पर मंगलवार और शानिवार को बहुत ज्यादा भीड़ होती है और इस दिन ही इस मंदिर में मिलने वाली दवाई का असर ज्यादा होता है। 

यहां पर जिन लोगों की हड्डियां टूट जाती हैं। वह यहां पर स्ट्रेचर से आते हैं या एंबुलेंस में आते हैं। यहां पर उन्हें कुछ देर मंदिर परिसर में बैठने के लिए कहा जाता है और राम भगवान का जाप करने के लिए कहा जाता है। फिर  उन्हें औषधि दी जाती है और यह औषधि लोगों को खानी पड़ती है। इस औषधि के बारे में कहा जाता है, कि यह औषधि पूरी तरह से प्राकृतिक होती है। यहां पर एक पंडित जी ने हमें बताया कि यह संजीवनी बूटी होती है, जो हनुमान जी ने लाए थे, लक्ष्मण जी के इलाज के लिए। तो उसी औषधि से लोगों का इलाज होता है। यह औषधि प्राकृतिक होती है जिसको खाकर यहां पर जो भी लोग आते हैं। वह ठीक हो जाते हैं।

Muhas Hanuman Temple || मुहास हनुमान मंदिर

हनुमान मंदिर परिसर  


मुहास का हनुमान मंदिर (Muhas Hanuman Temple) ज्यादा बडा नहीं है। मंदिर परिसर में आंगन बहुत बड़ा है। उसमें लोग बैठकर भजन कर सकते हैं और यहां पर हनुमान जी की प्रतिमा बनाई गई है, जो बहुत ही आकर्षक है देखने में। शिव भगवान जी की मूर्ति भी स्थापित की गई है जिनकी पूजा आप कर सकते हैं।

हम लोगों को इस मंदिर में बहुत अच्छा लगा था। यहां पर आकर हमने अपने पैर हाथ धुले और प्रसाद लिया। भगवान हनुमान के दर्शन किए। कुछ देर इस मंदिर में बैठे और फिर अपने घर आ गये। मंदिर के आसपास आपको बहुत सारी दुकानें भी मिलती हैं। जहां पर अगर आप कहीं दूर से आ रहे हो, तो दुकान मे खाने-पीने की व्यवस्था भी मिल जाती है। जहां पर आप चाय नाश्ता कर सकते है। यहां पर आप अपनी परिवार और दोस्तों के साथ आ सकते है। 

हमें इस जगह आ कर बहुत अच्छा लगा।  यहां पर काफी शांत वाला माहौल रहता है। आप भी यहां आ सकते हैं और अपना अच्छा समय बिता सकते हैं। यहां पर आने के लिए अच्छी सड़कें हैं, तो आप अपनी गाड़ी से आसानी से आ सकते हैं। 

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Bahoriband-Kankali Devi Temple Tigawa (कंकाली देवी मंदिर )

Kankali Devi Temple 

कंकाली देवी मंदिर 


कंकाली देवी मंदिर बहोरीबंद (Kankali Devi Temple) के पास के एक गांव में स्थित है। इस गांव में कंकाली देवी मंदिर (Kankali Devi Temple) के अलावा एक मंदिर और भी स्थित है। यह एक पुरातात्विक स्थल है और यहां पर आपको बहुत ढेर सारे खूबसूरत नक्काशी भरे पत्थर पर उकेरी गई कई कलाकृतियां देखने मिल जाएगी। यह एक बहुत प्राचीन स्थल है और आप इस जगह पर बहुत आसानी से आ सकते हैं। यह बहुत ही प्राचीन मंदिर है। 

Bahoriband-Kankali Devi Temple Tigawa (कंकाली देवी मंदिर )

कंकाली देवी मंदिर 

कंकाली देवी मंदिर (Kankali Devi Templeकटनी जिले में स्थित है। यह कटनी जिले के बहोरीबंद तहसील (Bahoriband Tehsilके पास स्थित है। आप इस मंदिर पर अपनी गाड़ी से आसानी से आ सकते हैं। इस मंदिर तक कोई भी टैक्सी या बस वगैरह नहीं चलती है। आपको अपनी गाड़ी से ही आना होगा। इस मंदिर तक आने के लिए आपको अच्छी सड़क मिल जाती है, या बहोरीबंद तहसील (Bahoriband Tehsil) से जो कटनी जिले की तहसील है वहां से 3 या 4 किलोमीटर दूर होगा, तो आप यहां पर अपनी गाड़ी से आसानी से आ सकते हैं।

Bahoriband-Kankali Devi Temple Tigawa (कंकाली देवी मंदिर )

तिगवा में स्थापित पत्थर के शिवलिंग 

आपको यहां पर आकर बहुत ही सुंदर कंकाली देवी का मंदिर (Kankali Devi Temple) देखने को मिलता है, जो करीब 1000 साल पुरानी है। यह मंदिर सपाट छत वाला है। मंदिर के सामने छोटा सा आंगन बना हुआ है, जो जिसके बीच में एक हवन कुंड बना हुआ है। मंदिर के बाजू में ही एक बोर्ड लगा हुआ है, जिसमें मंदिर के बारे में जानकारी दी गई है। इस मंदिर में आपको खूबसूरत पत्थर पर की गई  नक्काशी देखने मिलती है। मंदिर पर खंभे बने हुए हैं, दो खंभे बने हुए हैं। जिस पर आपको खूबसूरत फूलों की आकृतियां देखने मिलती है। जिसको पत्थर पर उकेरकर बनाया गया है। मंदिर की दीवारों पर आपको भगवान विष्णु की खूबसूरत प्रतिमा देखने मिलेगी जिसको पत्थर पर उकेरकर कर बनाया गया है, जो बहुत खूबसूरत लगती है। इसके अलावा यहां पर भगवान पार्श्वनाथ की भी प्रतिमा आपको देखने मिलती है। यह मंदिर बहुत खूबसूरत है और मंदिर की जो छत है। वह सपाट है, मतलब किसी भी तरह का यहां पर गुंबद नहीं बना हुआ है। यह जो पूरा मंदिर है, यह पूरा मंदिर पत्थर से बना हुआ है और मंदिर के अंदर गर्भ गृह में कंकाली माता की प्रतिमा स्थित है। जिनके दर्शन आप कर सकते हैं। यहां पर वैसे तो जब हम लोग गए थे, तो ताला लगा था मगर किसी खास अवसर पर यह मंदिर खोला जाता है, और आप भगवान जी के दर्शन कर सकते है। आप माता जी के दर्शन कर सकते हैं। 

वहां पर कंकाली देवी की मंदिर (Kankali Devi Temple) के अलावा और भी बहुत सारी मूर्तियां है, जो आप देख सकते हैं। यहां पर जितने भी मूर्तियां हैं। वह सारी मूर्तियां पत्थर की बनी हुई है। यहां पर आपको एक वॉचमैन भी है, जो इस मंदिर की देखरेख करता है। यह एक ऐतिहासिक धरोहर है। 

Bahoriband-Kankali Devi Temple Tigawa (कंकाली देवी मंदिर )

 पत्थर की खूबसूरत कलाकृति 

इस जगह पर बहुत कम लोग आते हैं। इस जगह को देखने के लिए क्योंकि इस जगह की जानकारी काफी लोगों को नहीं है। मगर यह जगह खूबसूरत है। 

यहां पर चारों तरफ पत्थर की बहुत सारी अलग-अलग प्रकार की कलाकृतियां मौजूद है, जिन्हें आप देख सकते हैं। इस जगह पर कंकाली देवी जी के मंदिर (Kankali Devi Temple) के अलावा भी एक अन्य मंदिर स्थित है, जो शायद दुर्गा जी को समार्पित है।  यहां पर विशेषकर यहां के गांव वाले आते हैं। कंकाली देवी जी (Kankali Devi jiकी पूजा करने के लिए। 

Bahoriband-Kankali Devi Temple Tigawa (कंकाली देवी मंदिर )

दुर्गा माता का मंदिर 

यहां पर आप भगवान शिव जी के बहुत से शिवलिंग देख सकते हैं, जो पुराने समय के है। ये शिवलिंग पत्थर पर बना हुआ है। हम ने यहां पर तीन या चार शिवलिंग देखें थे। 

यह जो जगह है, वह तिगमा (Tigawa) नाम से प्रसिद्ध है। यहां जगह छोटा से एरिया में ही फैली हुई है और यह जगह चारों तरफ से बाउंड्री वॉल से घिरा हुआ है।  यहां पर आपको किसी भी तरह की एंट्री फी नहीं लगती है अंदर आने के लिए। यहां पर आकर घूम सकते हैं। यहां पर मंदिर भी है। यहां पर दुर्गा जी का जो मंदिर है। वहां पर पूजा होती रहती है और लोग यहां पर आकर भंडारे करते रहते हैं। हम लोग जब इस जगह पर आए थे। तब यहां पर पूजा हो रही थी और भंडारा बनाया जा रहा था। 

हम लोग इस जगह पर घूमने के लिए अपनी स्कूटी से आए थे। हम लोग पहले रूपनाथ मंदिर घूमे थे। उसके बाद हम लोग तिगमा (Tigawa) के कंकाली देवी मंदिर आए थे। यह जगह रूपनाथ धाम करीब 10 या 12 किलोमीटर दूर होगा। आप रूपनाथ धाम से इस जगह में आराम से जा सकते हैं।

यहां पर हम लोगों को काफी अच्छा लगा और यहां पर ज्यादा भीड़ भाड़ नहीं रहती है। यहां पर गांव वाले ही लोग रहते है, तो आप यहां पर अपनी फैमिली के साथ आ सकते हैं और अपने दोस्तों के साथ भी आ सकते हैं। अगर आप  पुरानी चीजें देखने के शौकीन हैं, तो आप यहां पर जरूर आकर देख सकते हैं। यहां पर आपको मंदिर के बाजू में ही एक तालाब है। 

हमें इस जगह आ कर बहुत अच्छा लगा। हम इस जगह दो बार आ चुके हैं और यहां पर काफी अच्छा और शांत माहौल रहता है। आप भी यहां आ सकते हैं और अपना अच्छा समय बिता सकते हैं। यहां पर आने के लिए अच्छी सड़कें हैं, तो आप अपनी गाड़ी से आसानी से आ सकते हैं। 

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Tilwara Ghat - The beautiful ghat of the Narmada River.

तिलवारा घाट - जबलपुर का दर्शनीय स्थल


जबलपुर जिले की नर्मदा नदी पर बहुत सारे घाट बने हुए हैं और सारे ही घाट बहुत खूबसूरत और दर्शनीय है। आज हम उन्हें घाटों में से एक घाट की बात करने वाले हैं। आज हम तिलवारा घाट (Tilwara Ghat) की बात करेगें। 

तिलवारा घाट (Tilwara Ghat) जबलपुर में स्थित नर्मदा नदी पर बना हुआ एक और खूबसूरत घाट है। यह घाट खूबसूरत है और इस घाट में बहुत सारे मंदिर है। जिसको देखकर आपको बहुत अच्छा लगेगा। यह घाट बहुत खूबसूरती से बनाया गया है। यहां पर आपको मंदिर भी देखना मिलते हैं, जो अलग-अलग मंदिर हैं। 

Tilwara Ghat - The beautiful ghat of the Narmada River.

बड़े पुल का खूबसूरत नजारा 


तिलवाराघाट (Tilwara Ghat) में नर्मदा नदी के ऊपर से पुल बना हुआ हैं। यहां पर दो पुल बने हुए है। एक पुल पुराना है जो शायद अग्रेजों के समय में बना हुआ है। एक पुल अभी नया बना हुआ, जो सिवनी होते हुए नागपुर को जोड़ता है। यह हाईवे रोड है। यह रोड अच्छी है, हम इस रोड पर जा चुके है। यहां पर रोज शाम को मां नर्मदा जी की आरती की जाती हैं। नर्मदा जी मे दीप दान करना एवं शाम को घाट किनारे बैठना बहुत अच्छा लगता है।

Shani Devta Temple of Tilwara Ghat
तिलवारा घाट का शनि देवता का मंदिर

तिलवारा घाट का सबसे ज्यादा फेमस है - शनि भगवान जी का मंदिर 

शनि भगवान जी का मंदिर यहां पर बहुत अधिक फेमस है। यहां पर हर शनिवार को लोगों की भीड़ जमा होती है। शनि भगवान जी के दर्शन करने के लिए यहां पर लोग शनि भगवान जी को तेल चढ़ाने आते हैं और उनसे अपने अपने कष्टों को दूर करने के लिए प्रार्थना करते हैं। शनि भगवान जी के मंदिर में आपको शंकर जी की भी विशाल मूर्ति देखने मिलती है। शंकर जी के साथ पार्वती माता की मूर्ति भी स्थापित है। आपको यहां पर आकर बहुत अच्छा लगता है। शनि भगवान के मंदिर के पास आपको दुकान मिल जाती है, जहां पर शनि भगवान को चढाने के लिए फुल एवं तेल मिल जाती है। 

Tilwara Ghat - The beautiful ghat of the Narmada River.

तिलवारा घाट में स्थित से भगवान जी का मंदिर 


Hanuman Temple of Tilwara Ghat
तिलवारा घाट का हनुमान मंदिर


तिलवारा घाट पर हनुमान जी का मंदिर भी है, जो बहुत खूबसूरत है। यहां हनुमान जी की बहुत ही भव्य प्रतिमा है। आपको यहां पर देखने के लिए बहुत ही खूबसूरत मंदिर देखने मिलेगा।

Kali Ji's statue of Tilwara Ghat
तिलवारा घाट की काली जी की प्रतिमा


काली जी की भव्य प्रतिमा तिलवारा घाट में नर्मदा नदी के किनारे स्थित है। यह प्रतिमा बहुत ही खूबसूरत है। यह प्रतिमा नर्मदा नदी के किनारे स्थित है।  यहां पर नर्मदा नदी के किनारे यह मंदिर खुले आसमान के नीचे स्थित है, जो खूबसूरत है। यहां पर काली माता की प्रतिमा भव्य है जो अच्छी लगती है, देखने में आंखों को सुकून मिलता है।


Tilwara Ghat - The beautiful ghat of the Narmada River.

छोटे पुल का खूबसूरत नजारा 


तिलवारा घाट (Tilwara Ghat) में बड़ा पुल और छोटा पुल दोनों ही उपस्थित है। बड़े पुल में भारी वाहन का आना जाना होता है। छोटा पुल अब बंद कर दिया गया है। शायद पहले छोटे पुल से ही आने जाने का काम किया जाता होगा। बड़े पुल के बनने के कारण छोटे पुल का उपयोग बंद कर दिया गया है। छोटा पुल जो है, वह अंग्रेजों के जमाने का बना हुआ है। छोटा पुल बहुत खूबसूरत है और नर्मदा नदी में अभी भी खड़ा हुआ है। आप बड़े पुल को भी देख सकते हैं। यह भी बहुत खूबसूरत लगता है। यहां पर छोटा पुल में बहुत सुंदर पेंटिंग बनाई गई है। जो बहुत खूबसूरत लगती है। 

यहां पर आप चाहे तो बोट की सवारी भी कर सकते हैं। बोट की सवारी करने में आपको यहां पर बहुत मजा आएगा। यहां पर आप नहा भी सकते हैं। घाट के किनारे नहाने के लिए अच्छी व्यवस्था है। आप यहां पर नहाते है, तो ज्यादा गहराई में न जाए। यहां पर आधा घाट पक्का बना हुआ है और आधा घाट कच्चा बना हुआ है। तो आप यहां पर नहा भी सकते हैं। नदी के बीच में थोड़ा गहरा है, तो आप सावधानी बरतें। यहां पर बहुत से छोटे बच्चे और बहुत से युवा नर्मदा नदी पर बनें पुराने पुल के ऊपर से नर्मदा नदी में छलांग लगाते हैं। यह खतरनाक हो सकता है और इस तरह का स्टंट नहीं करना चाहिए। यहां पर आपको बहुत अच्छा लगेगा।

बरसात में यहां पर बाढ जैसे माहौल बन जाता है और पूरा पानी से घाट और  मंदिर वगैरह सब जलमग्न हो जाते हैं।


Tilwara Ghat - The beautiful ghat of the Narmada River.

          तिलवारा घाट में स्थित से भगवान जी का शिवलिंग 

नर्मदा नदी के तिलवारा घाट (Tilwara Ghat) में बहुत ही खूबसूरत मूर्तियां आपको देखने मिल जाते हैं। यहां पर नर्मदा नदी के किनारे अलग-अलग शिवलिंग रखे गए हैं। जहां पर आप शंकर जी के दर्शन और उनकी पूजा कर सकते हैं। 

यहां पर आप पिकनिक मनाने आ सकते हैं। आप यहां पर अपने दोस्त लोगों के साथ आ सकते हैं। यह अच्छी जगह है। आपको यहां पर आकर बहुत अच्छा लगेगा। 

तिलवारा घाट (Tilwara Ghat) जबलपुर में स्थित सबसे अच्छी घूमने वाली जगह में से एक है। तिलवारा घाट (Tilwara Ghat) में आप असानी से आ सकते है। यहां पर आप अपने गाड़ी से आ सकते हैं। आप यहां पर आटो से भी आ सकते है। तिलवारा घाट (Tilwara Ghat) जबलपुर से करीब 20 से 25 किलोमीटर दूर होगा। आप तिलवारा घाट (Tilwara Ghat) पर बरगी हिल्स वाली रोड से जा सकते हैं या आप चाहे तो मेडिकल रोड से भी जा सकते हैं। दोनों रोड से आप तिलवारा घाट (Tilwara Ghat) तक पहुंच सकते हैं और दोनों रोड अच्छी है पक्की रोड है। 

यहां पर घाट के पास दुकानें भी लगी रहती है। आप नर्मदा मैया को प्रसाद वगैरह चढ़ा सकते हैं। मगर मेरे हिसाब से आपको नर्मदा मैया में किसी भी तरह का प्रसाद वगैरह नहीं चढ़ाना चाहिए। आप अगर प्रसाद वगैरह लेते हैं, तो उसे गरीबों में बांट देना चाहिए। क्योंकि आपको पता है कि नर्मदा माई हमारे द्वारा डाले गए प्रसाद के कारण और दीप दान के कारण गंदी होती है, इसलिए आप नर्मदा नदी पर कचडा न डालें। 


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आपने अपना समय दिया उसके लिए धन्यवाद।


Paat Baba Temple, Jabalpur - पाठ बाबा मंदिर, जबलपुर

Famous Hanuman Temple of Paat Baba Temple Jabalpur.
पाठ बाबा मंदिर - जबलपुर का प्रसिद्ध हनुमान मंदिर


जबलपुर (Jabalpur) एक प्रसिद्ध शहर है। जबलपुर (Jabalpur)  मध्य प्रदेश का एक प्रसिद्ध जिला है। जबलपुर में आपको बहुत सारे दर्शनीय स्थल देखने मिलते है। हम आज एक जबलपुर (Jabalpur) में स्थित एक बहुत खूबसूरत मंदिर की बात करने वाले है। आप इस जगह पर जाकर अपना बहुत अच्छा टाइम बता सकते हैं। आज हम आपको लेकर चल रहे हैं  पाठ बाबा मंदिर (Paat Baba Temple)

Paat Baba Temple, Jabalpur - पाठ बाबा मंदिर, जबलपुर


हनुमान जी का मंदिर 


पाठ बाबा मंदिर (Paat Baba Temple) बहुत खूबसूरत मंदिर है। यहां का वातावरण है बहुत बढ़िया वातावरण है। यहां पर चारों तरफ ऊंचे ऊंचे पहाड़ हैं। यहां पर हनुमान जी का मंदिर है, जो बहुत फेमस है। 

यह मंदिर जिस एरिया में स्थित है। वह पूरा मिलेट्री एरिया लगता है। पाठ बाबा मंदिर (Paat Baba Temple) का वातावरण शांत है। यहां पर आपको बहुत शांति मिलती है, क्योंकि यहां पर किसी भी तरह का शोर-शराबा नहीं रहता है। मंदिर जाने का रास्ता और मंदिर बहुत अच्छी तरह से साफ सुथरा है। 

पाठ बाबा मंदिर (Paat Baba Temple) पहुंचने के लिए आपको घमापुर के आगे आना पड़ता है। घमापुर के आगे सतपुला बाजार पड़ता है। सतपुला बाजार से आपको आगे आना पड़ता है। आपको यहां पर गन कैरिज फैक्ट्री देखने मिलती है। इस  फैक्ट्री से आप आगे बढ़ते हैं, तो आपको मंदिर जाने का रास्ता दिखाई देगा। मंदिर जाने के लिए रास्ते में ही मंदिर का प्रवेश द्वार बनाया गया है। इस प्रवेश द्वार से होते हुए आप मंदिर जा सकते है। यहां पर जो रास्ता है वहां चढाई वाला रास्ता होता है।   

Paat Baba Temple, Jabalpur - पाठ बाबा मंदिर, जबलपुर

मंदिर का प्रवेश द्वार 


आप मंदिर तक पहुंच जाते हैं। यहां पर पार्किंग के लिए बहुत बड़ा स्पेस दिया गया है। अपनी गाड़ी खड़ी कर सकते हैं। उसके बाद आप मंदिर के प्रवेश द्वार पर पहुंचते है। तो मंदिर परिसर के प्रवेश द्वार पर आपको हनुमान जी की एक बहुत ही अद्भुत प्रतिमा देखने मिलती है, जो दीवार पर उकेरी गई है। यह पेंटिंग बहुत अच्छी लगती है। मंदिर परिसर में अंदर जाने के लिए लोहे का गेट है। लोहे के गेट को बंद ही रखा जाता है। लोहे के गेट के के बाजू में जो छोटा गेट है। उसे खोला जाता है भक्तों के अंदर जाने के लिए।

Paat Baba Temple, Jabalpur - पाठ बाबा मंदिर, जबलपुर

मंदिर परिसर का प्रवेश द्वार 

पाठ बाबा मंदिर (Paat Baba Temple) में आपको आकर बहुत अच्छा लगेगा। क्योंकि यहां पर बहुत शांति है। इस मंदिर में भगवान हनुमान जी की बहुत ही आकर्षक प्रतिमा है। इसके अलावा यहां पर यह जो मंदिर है। वह बहुत बड़े क्षेत्र फैला हुआ है।  मंदिर परिसर में हनुमान जी का मंदिर बना हुआ है और हनुमान जी की बहुत ही आकर्षक प्रतिमा है। मंदिर परिसर में इसके अलावा दुर्गा जी का मंदिर भी बना हुआ है और दुर्गा जी की बहुत खूबसूरत विद्मान है। परिसर में शंकर जी का शिवलिंग भी स्थापित है। उनके लिए अलग मंदिर बना हुआ है। 

पाठ बाबा मंदिर (Paat Baba Temple) में बच्चों के खेलने के लिए आपको एक छोटा सा प्ले गांउड देखने मिल जाता है। जिसमें बच्चों के लिए झूले एवं फसलपटटी बनी हुई है। इसके अलावा मंदिर परिसर में बैठने की अच्छी व्यवस्था भी है। यहां पर चेयर बना हुआ है। आप मंदिर में कुछ टाइम बैठ सकते हैं और अपना अच्छा समय बिता सकते हैं। 

Paat Baba Temple, Jabalpur - पाठ बाबा मंदिर, जबलपुर

मंदिर परिसर  


आप पाठ बाबा मंदिर (Paat Baba Temple) में जाते हैं, तो बाहर आपको दुकाने देखने मिलती है। यहां पर ज्यादा दुकान नहीं है। दो ही दुकानें थी जब हम गए थें। जहां पर हनुमान जी को चढ़ाने के लिए प्रसाद और अगरबत्ती मिल जाती है। यहां पर हुनमान जी को अर्पण करने के लिए लडडू भी मिलते है। आप प्रसाद लेकर मंदिर में प्रवेश कर सकते हैं। आप अंदर प्रवेश करते हैं। आप मंदिर में प्रवेश करते है तो उस रास्ते के दोनों तरफ आपको नारंगी रंग के झंडे देखने मिलते है। आपको चप्पल उतार के रखने के लिए स्टैड दिखता है। आप अपनी चप्पल को स्टैंड में रखकर आप पैर धोकर मुख्य हनुमान मंदिर में जा सकते हैं और हनुमान जी के दर्शन कर सकते हैं। यहां पर पूरे मंदिर में टाइल्स लगी हुई है। मंदिर परिसर में बगीचा भी है। जहां पर तरह तरह के पेड लगें हुए है। मंदिर में आपको लाइब्रेरी भी देखने मिलती है। लाइब्रेरी में पुस्तकों का संग्रह है।   आप किताबें पढ़ सकते हैं। इसके लिए शायद मेंबरशिप लेनी पड़ती होगी। अगर आप पुस्तक पढ़ने के शौकीन हैं। आप यहां पर आकर शांत माहौल में पुस्तक पढ़ने का अपना शौक पूरा कर सकते हैं। यहां पर आकर हम लोगों को बहुत अच्छा लगा था। यहां पर शांत माहौल था और बहुत सारे लोग यहां पर शाम को आते हैं। भगवान जी के दर्शन करते हैं। यहां पर सतपुला की बाजार भी भर्ती है, तो आप यहां से बाजार करते हुए अपने घर जा सकते हैं। बाकी यहां पर आपका मन बहुत शांत होता है और बहुत अच्छा लगता है।

यह बहुत आध्यात्मिक जगह है। मंदिर परिसर के चारों ओर जंगल है जिससे यहां पर मोर और बंदर आपको देखने मिलते है। यह पहाड़ी है। मंदिर का प्रबंधन बहुत अच्छा है। सभी चीजों की सुविधा यहां पर मौजूद है। मंदिर में कचरा न फैलाने के लिए नेाटिस बोर्ड लगा हुआ है और यहां पर डिस्टबिन भी रखा हुआ है। आप मंदिर में अपने परिवार और दोस्तों के साथ आ सकते है। 

हम लोग इस मंदिर में गए थे। इस मंदिर में बहुत सारे कुत्ते थे। जो शायद यहां पर रहते होगें। हम लोग को जानवर से बहुत पसंद है। तो हम लोगों ने उन्हें बिस्किट खिलाई। आप भी जानवरों को पसंद करते हैं तो आप उन्हें खाना देकर उनकी मदद कर सकते हैं। हम सब लोगों को जानवरों से प्यार करना ही चाहिए क्योंकि वह बहुत प्यारे होते हैं और वफादार होते हैं।

हम अपना लेख यहीं पर समाप्त करते हैं। आपको लेख पसंद आया होगा तो आप इस लेख को जरूर शेयर और अपने अनुभव हम से बाॅटे।

अपना समय देने के लिए धन्यवाद।



Jaipur Trip :- जबलपुर से जयपुर तक का सफर

Jabalpur to Jaipur Travel

जबलपुर से जयपुर यात्रा 

Jaipur Trip :- जबलपुर से जयपुर तक का सफर

Birla Temple Jaipur 

जबलपुर से जयपुर यात्रा का प्लान हमारा नया साल में बना था। हम लोगों ने ट्रेन से जयपुर जाने का प्लान बनाया था। हम लोगों ने दयोदय एक्सप्रेस ट्रेन में बुकिंग की थी। हम लोग फैमिली और फ्रेंड्स के साथ जा रहे थे। हम लोग जबलपुर रेलवे स्टेशन (Jabalpur Railway Stationसे दयोदया एक्सप्रेस ट्रेन (Dayodaya Express Train) से जयपुर जाने वाले थे। दयोदय एक्सप्रेस ट्रेन हम लोगों की शाम की ट्रेन थी। हम लोग अपने सही समय पर ट्रेन में पहुंच गए और ट्रेन में बैठ गए। उसके बाद ट्रेन भी अपने सही समय पर जबलपुर रेल्वे स्टेशन (Jabalpur Railway Station) से चली दी थी। दयोदया एक्सप्रेस ट्रेन (Dayodaya Express Train) का स्टार्टिंग पॉइंट जबलपुर ही है। यह ट्रेन जबलपुर से ही बनती है, और जबलपुर से यह आपको अजमेर तक लेकर जाती है। अगर आप अजमेर डायरेक्ट जाना चाहते हैं तो आप इस ट्रेन से जा सकते हैं। आप इस ट्रेन से 15 से 20 घंटे में जयपुर पहॅुच जाते है। 

दयोदय एक्सप्रेस ट्रेन आपको सिहोरा रोड रेलवे स्टेशन (Sihora Road Railway Station), कटनी रेलवे स्टेशन (Katni Railway Station), दमोह रेलवे स्टेशन (Damoh Railway Station), मुंगेली रेलवे स्टेशन (Mungeli Railway Station), अशोकनगर रेलवे स्टेशन (Ashoknagar Railway Station), और गुना रेलवे स्टेशन (Guna Railway Station) से डायरेक्ट आपको जयपुर और अजमेर पहॅुच सकती है। आप जयपुर और अजमेर डायरेक्ट ट्रेन से जा सकते हैं। 

जबलपुर से जयपुर के यात्रा (Travels from Jabalpur to Jaipur) हमारी शुरू हो गए थी। जबलपुर रेल्वे स्टेशन (Jabalpur Railway Station) से ट्रेन हमारी चलना स्टार्ट हो गई। शाम का समय था। हम लोग थोड़ी देर बातचीत की, उसके बाद हम लोगों ने खाना खाए। करीब 9 बजे हम लोग ने खाना खाया। उसके बाद हम लोग सो गए, क्योंकि रात हो गई थी। इसलिए हम लोग सो गए। हम लोग पर सुबह उठे। सुबह ट्रेन से हम लोग कोटा जंक्शन (Kota Junction) पहुंच गए थे।  कोटा जंक्शन (Kota Junction) में ट्रेन का डब्बा चेंज होता है। तो वहां पर डब्बा चेंज हुआ। इसके बाद हमारे आगे का सफर चालू हुआ। हम यहां पर राजस्थान की सीमा पर पहुॅच गए है। आपको इस जगह पर ट्रेन के आजू-बाजू बहुत सारे खेत देखने मिलते है। जब हम लोग गए थे तो हम लोगों को बीही की खेती बहुत ज्यादा देखने मिली थी। हम लोगों को और सरसों और चना भाजी भी देखने मिली थी। इस रूट में एक स्टेशन है। जिसका नाम याद नहीं आ रहा है। वह स्टेशन बहुत खूबसूरत था। बहुत साफ-सफाई थी उसमें और काफी अच्छा था। 

आपको कोटा स्टेशन से ही राजस्थानी लोगों का दिखने लगते हैं। उनका पहनावा और उनका जो कल्चरल सिंबल आपको नजर आने लगता है। यहां महिलाओं का जो पहनावे रहता है। वह स्कर्ट रहती है। लॉन्ग स्कर्ट और ब्लाउज रहता है, ऊपर चुन्नी रहती है। महिलाए काफी चूड़ियां पहनी रहती है। टैटू (The tattoo) भी उनके हाथ में आपको देखने मिल जाता है जिसे गोदना (Tattooना कहते हैं। टैटू (The tattoo) नहीं कहते हैं। आपको देखने मिल जाता है।

Jaipur Trip :- जबलपुर से जयपुर तक का सफर

Jaipur Railway Station


आप इन सभी नजारों को देखते हुए जयपुर पहुंच जाते हैं। जयपुर पहुंचकर आप स्टेशन से उतरकर बाहर आते हैं। जयपुर स्टेशन (Jaipur station) के बाहर ही आपको कैब और टैक्सी  मिल जाती है। आप टैक्सी बुक करके अपने होटल जा सकते हैं। हम लोगों ने भी कैब बुक किया और अपने होटल गए। हम लोग का होटल 3 से 4 किलोमीटर दूर होगा।  हम लोग ने होटल ओयों से बुक किया था। हम लोग का होटल उतना अच्छा नहीं था। आप ओयो में जो होटल की फोटो देखते है। वहां कभी कभी सही नही रहती है। ओयो एप में होटल की फोटो तो काफी अच्छी दिखा देते हैं। मगर होटल बहुत बेकार रहता है। हम लोगों की ओयो वालों ने किसी भी तरह की कोई भी मदद नहीं किया था। न ओयो वाले होटल आपका चेंज करता है और ना ही पैसे रिटर्न करते है। 

आप चाहे तो होटल बुक करने से पहले आप होटल पहुंच जाएयें। उसके बाद आप होटल देख लीजिए। उसके बाद आप उसे बुक कर लीजिए। आपके लिए यहां अच्छा रहेगा, क्योंकि उसमें आप रूम देख सकते हैं और बाकी सुविधाए भी चेक कर सकते है। हमारा होटल जो था वह तो बहुत बेकार था। मगर कुछ भी नहीं किया जा सकता था। आप ओयो से होटल बुक करें तो पैसे पहले पे नहीं करें। हम लोगों ने होटल में थोड़ी देर आराम किया। वैसे भी जिस दिन हम लोग पहुंचे थे। उस दिन तो कहीं जाना हमारा संभव नहीं था। तो हम लोगों ने थोड़ा आराम किया।

Birla temple of Jaipur city

जयपुर शहर का बिरला मंदिर


हम लोग शाम को जयपुर शहर के प्रसिद्ध मंदिर बिरला मंदिर (Birla Mandirगए। बिरला मंदिर जयपुर मेन सिटी में स्थित है। आप यहां मंदिर घूम सकते है। बिरला मंदिर (Birla Mandir) बहुत खूबसूरत मंदिर है। यह मंदिर बहुत बडे क्षेत्र में फैला हुआ है। आपको मंदिर में भगवान राम, सीता और लक्ष्मण जी की मूर्ति देखने मिल जाती है। मंदिर में आपको बहुत शांति मिलती है। हम लोग आटों से मंदिर पहुॅचे थे।

Jaipur Trip :- जबलपुर से जयपुर तक का सफर

Birla Temple Jaipur 


बिरला मंदिर (Birla Mandirमें बहुत बड़ा गार्डन है। मंदिर में गार्डन के बीच में बहुत ही खूबसूरत शिव भगवान की मूर्ति देखने मिलती है। जो बहुत प्यारी लगती है। आप मूर्ति के पास नहीं जा सकते हैं। सिर्फ बाहर से दर्शन कर सकते हैं। हम लोग मंदिर के गार्डन से होते हुए मुख्य मंदिर तक पहूॅच गए। आप जूते चप्पल बाहर ही उतरना पडता है।  मंदिर नंगे पैर जाना पड़ता है। मुख्य मंदिर सफेद मारबल से बना हुआ है। हम लोगों ने भगवान के दर्शन किए। उसके बाद हम लोग मंदिर से बाहर आए। मंदिर के बाहर भी आपको बहुत ही खूबसूरत कलात्मक मूर्तियां देखने मिलती हैं। आप यहां पर फोटोग्राफी कर सकते हैं। आपकी फोटो बहुत ही मस्त आती है। आपका यहां पर बहुत अच्छा लगता है। 

Jaipur Trip :- जबलपुर से जयपुर तक का सफर

Birla Temple Jaipur 


हम लोगों को बिरला मंदिर (Birla Mandir) जाकर बहुत मजा आया था। यह मंदिर बहुत अच्छा है।  मंदिर में आपको म्यूजियम (Museumभी देखने मिलता है। म्यूजियम मुख्य मंदिर के नीचे है। आप म्यूजियम देख सकते हैं। यह संग्रहालय की स्थापना बिरला मंदिर जिन्होंने स्थापित किया है, उनके बारे में बहुत सी जानकारी आपको मिल जाती है। मंदिर बहुत खूबसूरत है। बहुत बड़ा मंदिर है। सफेद मार्बल से बना हुआ है। यहां पर बहुत बड़ा गार्डन भी है। आप गार्डन में बैठ सकते हैं। कुछ टाइम अपना समय बिता सकते हैं। बिरला मंदिर (Birla Mandir) जयपुर में जवाहरलाल नेहरू मार्ग (Jawaharlal Nehru Margपर स्थित है। यहां पर आपको श्रीमती इंदिरा गांधी जी (Mrs. Indira Gandhiकी प्रतिमा भी देखने मिलती है। 

Moti Dungri Fort and Shiva Temple

मोती डूंगरी का किला और शिव मंदिर


आपको मंदिर के बाजू में पहाड़ी देखने मिलती है। पहाड़ी में मोती डूंगरी का किला (Moti Dungri Fort) है। जिसमें जाने की मनाही है। यहां पर शिव भगवान जी का प्राचीन मंदिर है। यहां पर जाना मना है। मोती डूंगरी किला (Moti Dungri Fort) एक प्राइवेट प्रॉपर्टी है। मोती डूंगरी किला जयपुर राज दरबार के शाही परिवार की निजी संपत्ति है। महारानी गायत्री देवी (Maharani Gayatri Devi) जब जीवित थीं, तब उन्होंने यहां निवास किया था। यहां पर राज परिवार के पूजा करने के लिए रॉयल फैमिली प्राइवेट शिव मंदिर बनाया हैं। शिवरात्रि के टाइम पर यह मंदिर खोला जाता है तो उस टाइम पर ही विजिट किया जा सकता है। इस शिव मंदिर एकलिंगेश्वर महादेव मंदिर (Ekalingeshwar Mahadev Temple) कहा जाता है।

Jaipur Trip :- जबलपुर से जयपुर तक का सफर

Moti Dungri Fort, Jaipur 


बिरला मंदिर के बाहर आपको बहुत सारी दुकानें मिलती हैं। जहां पर डोसा, चाट, फुलकी, और कोल्ड ड्रिंक का मजा ले सकते है। जहां पर आप यह सब आइटम खा सकते हैं। मंदिर परिसर में आपको वॉशरूम की सुविधा भी मिल जाती है। अगर आप यहां पर जाना चाहे तो जा सकते हैं। वाॅशरूम में कोई भी चार्ज नहीं लिया जाता है।   यह जो एरिया है वहां बहुत भीड़ वाला एरिया है। 

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आपने अपना अमूल्य समय दिया हमें उसके लिए धन्यवाद



Deogaon Sangam Ghat Mandir - देवगांव संगम घाट मंदिर

Deogaon Sangam Ghat Mandir Mandla

देवगांव संगम घाट मंदिर

देवगांव संगम घाट मंदिर (Deogaon Sangam Ghat Mandir) एक ऐसी जगह है। जहां पर आप नर्मदा नदी का किनारा देख सकते हैं। नर्मदा नदी का इस स्थल पर एक अन्य नदी से संगम होता है। आप दोनों नदियों का संगम देख सकते हैं। इस संगम में स्थल पर आपको मंदिर भी देखने मिलता है। यहां का जो नजारा है वह बहुत ही शांत और खूबसूरत है। यह जगह बहुत ही प्यारी है आपको यहां पर आकर बहुत अच्छा लगेगा।

देवगांव संगम घाट मंदिर (Deogaon Sangam Ghat Mandir) नर्मदा नदी और बुढनेर नदी का संगम स्थल है। इस स्थल पर यह दोनों नदियां मिलती हैं। इसलिए इस जगह को संगम स्थल कहा जाता है। इस स्थल का नजारा बहुत ही सुंदर है। 

Deogaon Sangam Ghat Mandir - देवगांव संगम घाट मंदिर

Deogaon Sangam Ghat Mandir  


देवगांव संगम मंदिर कहां स्थित है
Where is Devgaon Sangam Temple located


देवगांव संगम घाट मंदिर (Deogaon Sangam Ghat Mandir) मंडला शहर में स्थित है। यह स्थल देवगांव नाम के गांव में स्थित है। मंडला मध्यप्रदेश का एक जिला है। देवगांव संगम स्थल मंडला शहर से करीब 30 से 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस जगह पर आप अपनी गाड़ी से आसानी से आ सकते हैं। यहां पर आने के लिए आपको अच्छी रोड मिल जाती है। इस स्थल पर आपको आकर बहुत अच्छा लगता है। 

देवगांव संगम घाट मंदिर (Deogaon Sangam Ghat Mandir) रामनगर से करीब 20 किलोमीटर दूर पर होगा। रामनगर मंडला जिले का एक प्रसिद्ध गांव है। हम लोगों को रामनगर से ही अपना सफर शुरू करना था। 

देवगांव संगम घाट मंदिर कैसे पहुंच सकते हैं
How to reach Devgaon Sangam Sthal Temple


आपको अगर देवगांव संगम घाट मंदिर (Deogaon Sangam Ghat Mandir) में पहुंचना है, तो आपको मंडला से डिंडोरी वाली हाईवे रोड पर चलना होता है। आपको यहां पर देवगांव नाम का एक गांव मिलता है। मेन रोड में ही आपको बोर्ड देखने मिलता है। उसमें देवगांव तीर्थ स्थल का नाम लिखा रहता है और आपको डारेक्शन दिया होता है। आपको इस बोर्ड से करीब एक से 2 किलोमीटर गांव की तरफ अंदर जाना पड़ता है। मेन रोड से आप इस तीर्थ स्थल तक पहुंच सकते हैं। आपको इस तीर्थ स्थल में मंदिर देखने मिलते हैं। नर्मदा नदी का बहुत ही खूबसूरत व्यू देखने मिलता है। इसके अलावा आप यहां से बुढनेर नदी को भी देख सकते हैं। हम लोग गलत साइड चले गए थे। तो हम लोगों को यह सब मंदिर देखने नहीं मिला था। मगर आप अगर जाते हैं तो आप सही साइड से जाइएगा। आपको गांव मिलेगा देवगांव उसके बाद आप बोर्ड को देखकर सही डायरेक्शन में जाइएगा। ताकि आप इस जगह का अच्छी तरह से एंजॉय कर सकें।

देवगांव संगम घाट मंदिर  का सफर
Travel to Deogaon Sangam Ghat Mandir


राय भगत की कोठी घूमने के बाद हम लोग अपने अगले डेस्टिनेशन की तरफ निकल गए थे। हम लोग राय भगत की कोठी से निकल कर एक दुकान पर  हम लोगों ने चाय पिया, क्योकि इसकें बाद हम लोग कहीं रूकना नहीं चाहते थे। उसके बाद हम लोग आगे बढ़ गई। 

अगर अपने मेरे सारे ब्लाॅग पढे होगें तो आपको पता होगा कि हम लोग सुबह से निकले हैं और सुबह से हम लोग पहले सहस्त्रधारा गए, उसके बाद रपटा घाट और उसके बाद मोती महल और राय भगत की कोठी इतनी सारी जगह घूमने के बाद हम लोग देवगांव संगम घाट मंदिर (Deogaon Sangam Ghat Mandir) गए। 

अपनी अगली मंजिल के जाने वाले रास्ते में हमको बहुत सारी अच्छी अच्छी वस्तुओं के दर्शन करते हुए। हम अपने सफर में चले जा रहे थे। यहां पर उंचे उंचे पहाड, कहीं कहीं पर नदी, कहीं कही पर खेत देखने मिलते है। अपनी गाडी में सफर का मजा ही कुछ और होता है। आपको इस रोड कई गांव भी देखने मिलते है। हम लोग जिस रास्ते में जा रहे थे, वहां मंडला जिले से डिंडोरी जिले की तरफ जाता है। हम लोग हाईवे रोड पर चल रहे थे। 
इस जगह के पास पहुॅचकर हम लोगों ने गांव वालो से इस जगह में जाने का रास्ता पूछा। गांव वालों ने हम लोगों का रास्ता बताया। मगर हम लोगों गलत रास्तें में चलकर नर्मदा नदी के गलत साइड में पहुॅच गए। हम लोग इस साइड से सिर्फ नर्मदा जी के दर्शन कर सकते थे। दूसरी नदी आई थी उसके दर्शन कर सकते थे। यहां पर हम लोग अपनी गाड़ी खड़ी कर दिया। हम लोग को नीचे उतर के जाना था। 

Deogaon Sangam Ghat Mandir - देवगांव संगम घाट मंदिर

Deogaon Sangam Ghat Mandir  


देवगांव संगम घाट मंदिर (Deogaon Sangam Ghat Mandir पर आप एक गांव के माध्यम से और गांव में जो सड़क है। उसके माध्यम से इस जगह पर पहुंचते हैं। हम लोग गलत साइड आ गए थे। यहां पर एक बडा सा बरगद का पेड था और यहां पर एक छोटा सा शायद मंदिर था या किसी तरह का कार्यालय वगैरह था। हम लोगों ने अपनी गाड़ी वहीं खड़ी करी और हम सीढ़ियां नीचे गए, तो यहां पर आप नर्मदा नदी और बुढनेर नदी का संगम  देख सकते हैं। यहां पर नर्मदा नदी गहरी नहीं है, उथली है। आप आराम से नर्मदा नदी पार कर सकते हैं। मगर नर्मदा नदी का बहाव बहुत तेज है यहां पर। आप गर्मी के मौसम में इस नदी को पार कर सकते हैं। नदियों के आर पार जा सकते हैं। मगर बरसात के मौसम में आप नदियों के आर पार नहीं जा सकते हैं। क्योंकि बरसात के टाइम पर यहां पर बहुत ज्यादा पानी रहता है। इसलिए आप इस बात का ध्यान दीजिए अगर यहां पर ज्यादा बहाव रहे तो नदी को पार करने की कोशिश ना करें।

देवगांव संगम घाट मंदिर (Deogaon Sangam Ghat Mandir पर बहुत बड़ा मैदान था। मैदान में बहुत से लड़के लोग थे। गांव वाले ही होंगे और वह यहां पर मछली पकड़ रहे थे। कुछ लोग बैठे हुए थे। इस जगह पर आप आकर अपनी पिकनिक प्लान कर सकते हैं। यहां पर आकर आप काफी इंजॉय कर सकते हैं।

देवगांव संगम घाट मंदिर (Deogaon Sangam Ghat Mandir जो लोग आते है। नर्मदा नदी में स्नान करते हैं। नर्मदा मैया की पूजा करते हैं। यहां पर कक्कड़ और भरता बनाते हैं। उन्हें कंडे आस-पास के गांव में मिल जाते हैं। यहां पर कक्कड़ भर्ता बनाते हैं। कक्कड़ भर्ता भारत के गांव देहातों का एक मशहूर व्यंजन है। और यह खाने में बहुत अच्छा लगता है यहां पर आपको बहुत सी जगह राख के ढेर देखने मिल जाएंगे। यहां पर अपना अच्छा टाइम बिताते हैं। 

देवगांव संगम स्थल के मंदिर
Temple of Deogaon Sangam Ghat Mandir

देवगांव संगम घाट मंदिर (Deogaon Sangam Ghat Mandir पर बहुत सारे मंदिर हैं। आप यहां पर बहुत सारे मंदिरों के दर्शन कर सकते हैं। यहां पर जमदग्नि ऋषि आश्रम है। यहां जमदग्नि ऋषि का निवास स्थल है। यहां पर नर्मदा जी का मंदिर है। उनके दर्शन कर सकते हो। यह शिव मंदिर होग। नर्मदा तट के पास ही में एक मंदिर बना हुआ है। यहां पर आपको आकर बहुत अच्छा लगता है। एक तो यहां का  प्राकृतिक वातावरण और यहां का धार्मिक माहौल आपको बहुत अच्छा लगेगा।

देवगांव संगम स्थल पर लगने वाला मेला
Fair to be held at Deogaon Sangam Ghat Mandir


देवगांव संगम घाट मंदिर (Deogaon Sangam Ghat Mandir में 14 जनवरी में मकर संक्रांति के समय यहां पर मेले का आयोजन किया जाता है। यहां पर विशाल संख्या में लोग यहां पर आते हैं और स्नान करते है। मकर संक्रांति के बारे में कहा जाता है कि मकर संक्रांति  के दिन नदियों में स्नान करना शुभ माना जाता है। इसलिए लोग बड़ी संख्या में यहां पर आते हैं। नर्मदा जी में स्नान करते हैं। यहां पर इस समय तरह-तरह की दुकानें लगांई जाती है। यहां पर आकर बहुत अच्छा लगता है।

आप देवगांव संगम घाट मंदिर (Deogaon Sangam Ghat Mandirपर अपनी फैमिली और दोस्तों के साथ आ सकते हैं। यहां पर बाथरूम वगैरह की सुविधा उपलब्ध नहीं है। तो इस बात का विशेष ध्यान   रखें। यहां पर आसपास चाय नाश्ते की दुकान में उपलब्ध नहीं है। इस बात का भी विशेष ध्यान दें। 

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