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गुंजा या रत्ती (Gunja or Ratti tree) के पेड़ के औषधीय गुणों के बारे में जानकारी

गुंजा या रत्ती का पौधा की जानकारी और गुंजा (रत्ती) के फायदे 
Information about Gunja or Ratti plant and benefits of Gunja (Ratti) in hindi


गुंजा या रत्ती के पौधा का वैज्ञानिक नाम - एब्रस प्रिकैटोरियस     
गुंजा या रत्ती के पौधा का अंग्रेजी - रोजरी पी 

गुंजा का पेड़ या रत्ती का पेड़ भारत में पाया जाने वाला एक मुख्य पौधा है। गुंजा का पेड़ को घुंघची, रत्ती, चोटली, चिरमी के नाम से जाना जाता है। यह सभी इसके स्थानीय नाम है। यह पौधा गुंजा और रत्ती के नाम से प्रसिद्ध है। इस पौधे को रत्ती इसलिए कहा जाता है, क्योंकि इस पौधे का बीज का उपयोग प्राचीन समय में तौलने के लिए किया जाता था। इससे सोना और चाँदी को तौला जाता था। इस पौधे में, जितने भी बीज रहते हैं। उनका वजन समान रहता है, चाहे वह बीज कितना भी पुराना रहे या नया रहे। उनका वजन समान रहता है। इसलिए इस पौधे को रत्ती कहा जाता है। जैसे प्राचीन समय में गहने लेते समय, हम एक रत्ती या दो रत्ती गहने लेते थे। उसी तरह इस पौधे के बीज को रत्ती कहा जाने लगा और यह पौधा रत्ती का पौधे के नाम से जाना जाने लगा। 

गुंजा के बीज बहुत सुंदर रहते हैं। इस पौधे के बीज मोती जैसे लगते हैं। इस पौधे के बीज ठोस रहते हैं। इन पौधों की माला बाजारों में मिलती है। आपको ऑनलाइन भी इन पौधों के बीजों की माला देखने के लिए मिल जाती है। गुंजा पौधे के बीज बहुत ही आकर्षक दिखते हैं। गुंजा पौधे में  आपको दो प्रकार के बीज देखने के लिए मिल जाते हैं। गुंजा के बीज सफेद और लाल, काले रंग के देखने के लिए मिलते हैं। 

मेरे पास सफेद गुंजा या श्वेत गुंजा के बीज है। यह मोती के समान है और मेरे पास बहुत कम बीज थे, जिससे हम लोगों ने या श्वेत गुंजा के बीजों से छोटी सी माला बनाई है, जो हम लोग ने कृष्ण कन्हैया को पहनाया है। सफेद गुंजा के फायदे भी बहुत रहते हैं। सफेद गुंजा के मेडिकल बेनिफिट रहते हैं और इससे बहुत सारे रोग दूर होते हैं। सफेद गुंजा की जड़ के फायदे बहुत सारे है। सफेद गुंजा की जड़ का उपयोग बहुत सारे रोगों को दूर करने के लिए किया जाता है। 

सफेद गुंजा का पौधा और लाल गुंजा का पौधा सामान ही रहता है। सफेद और लाल गुंजा के पेड़ के औषधीय गुण भी समान रहते हैं। बस इनके बीजों में अंतर रहता है। लाल गुंजा या रक्त गुंजा के बीज, लाल कलर के रहते हैं। बस बीज के एक तरफ का हिस्सा, किनारे का सिरा काले कलर का रहता है। इस बीज के माला और ब्रेसलेट बनते हैं। गुंजा के पौधे का औषधि के रूप में उपयोग किया जाता है। 

गुंजा का पौधा बरसात के समय लगाया जा सकता है। गुंजा का पौधा गांव देहात में आसानी से देखने के लिए मिल जाता है। यह पौधा बेल के समान रहता है और बरसात में यह अपने आप उग  जाता है। अगर आप इसको शहर में अपने गार्डन में लगाना चाहते हैं, तो आप इस के बीज के द्वारा इसे आसानी से लगा सकते हैं। इसके बीज आसानी से अंकुरित हो जाते हैं। इसके लिए आपको ज्यादा देखरेख की जरूरत नहीं पड़ती है और इसका पौधा बड़ा हो जाता है और जब भी बीज लगते हैं और बीच परिपक्व होते हैं, तो इसका पौधा सूख जाता है और बीज को आप निकाल सकते हैं। 


गुंजा का पेड़ कैसा होता है

गुंजा का पेड़ लता के समान रहता है। इसकी पत्तियां इमली की पत्तियों के समान रहती हैं। गुंजा के पेड़ की जड़, पत्तियां और फलों का प्रयोग औषधि के रूप में किया जाता है। गुंजा के पेड़ के बीजों का प्रयोग वशीकरण और नजर उतारने के लिए भी किया जाता है। गुंजा के बीज जहरीले होते हैं। इसलिए बीजों का प्रयोग करने से पहले बीजों को शुद्ध करना चाहिए। तब इनका उपयोग करना चाहिए। 

गुंजा के, जो फल लगते हैं। वह सेम के फल के समान लगते हैं और इसके बीज मटर के दाने के समान रहते हैं। इसके बीज देखने में बहुत सुंदर लगते हैं। इसके बीच ऐसा लगता है, कि जैसे कोई रत्न या मोती हो। इसके बीजों को पिरो कर माला बनाई जाती है। गुंजा के बीज बहुत ठोस होते हैं। गुंजा के बीज का हमेशा एक जैसा भार रहता है। गुंजा के बीज कितने भी पुराने हैं। मगर इनका भार हमेशा समान रहता है। यह बहुत ही आश्चर्यजनक बात है। मगर यह बात सच है। पुराने जमाने में, जो जोहरी लोग रहते थे। वह इन बीजों का प्रयोग सोना को तोलने के लिए करते थे। एक रत्ती, दो रत्ती, इस तरह से सोना को तोला जाता था। एक रत्ती का लगभग वजन  0.121497 ग्राम होता है। गुंजा के बीज तंत्र मंत्र में भी उपयोग किए जाते हैं। 


गुंजा के बीज के उपयोग - Uses of Gunja Seeds

  1. गुंजा के बीज तंत्र मंत्र में उपयोग किए जाते हैं। गुंजा के बीजों का उपयोग नजर उतारने के लिए किया जाता है। इसके लिए 5 या 7 बीज को लेकर बच्चों के सर के ऊपर से घुमाया जाता है। ऐसा तीन-चार दिन लगातार किया जाता है और गुंजा के बीजों को जला दिया जाता है। 
  2. गुंजा के बीजों से वशीकरण भी किया जाता है। यह सब अंधविश्वास की बातें हैं। मगर प्राचीन समय में लोग इनका उपयोग किया करते थे। 
  3. गुंजा के बीजों से प्राचीन समय में वजन करने के लिए भी उपयोग किया जाता था। 
  4. अभी के समय में गुंजा के बीजों का उपयोग माल और ब्रेसलेट बनाने में किया जाता है, जो बहुत सुंदर लगते हैं। 
  5. गुंजा के बीज को अपने पास रखने से धन में बरकत होती है। इसलिए लोग गुंजा की माला पहनते है। 


गुंजा के औषधीय गुण, उपयोग एवं महत्व - Medicinal properties, uses and importance of Gunja

  1. माइग्रेन में गुंजा का प्रयोग किया जा सकता है। इसके पौधे में सेरोटोनिन नाम का एक तत्व पाया जाता है, जो सिर दर्द को नियंत्रित करता है। 
  2. गुंजा का प्रयोग गठिया रोग में किया जा सकता है। यह गठिया के रोग या जोड़ों में सूजन और दर्द की समस्या को ठीक करता है। गुंजा की पत्तियों के अर्क को उपयोग करने से यह समस्या दूर हो जाती है। 
  3. गुंजा के पौधे का उपयोग बालों को झड़ने से रोकने के लिए किया जा सकता है। गुंजा के बीजों के पाउडर को तिल के तेल में  मिलाकर लगाने से बालों के झड़ने की समस्या दूर होती है। 
  4. गुंजा के गुंजा का प्रयोग मलेरिया  बुखार को भी दूर करता है। 
  5. गुंजा की पौधा मुंह के छालों को भी ठीक करता है। गुंजा के पौधे की पत्तियां को आप चबाते हैं, तो मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं। 


गुंजा के पौधे को कैसे लगाया जा सकता है - How to plant Gunja plant

गुंजा का पौधा एक जंगली पौधा रहता है। यह जंगल और गांव देहात में आसानी से उग जाता है। गुंजा का पौधा के, जो बीज  रहते हैं। आप उन बीजों को जमीन में लगा देते हैं, तो गुंजा का पौधा आराम से उग जाता है। इस पौधे को ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं पड़ती है। यह पौधा बरसात के समय स्वयं जमीन से निकल जाता है। गुंजा का पौधा शहरों में भी बहुत लगाने लगे हैं। 



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