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पलाश/छेवला/ढाक (Palash/Chhewla/Dhak) के पौधे के औषधीय गुण

 पलाश (छेवला) का पेड़ - Palash (Chhewla) tree




पलाश का अंग्रेजी नाम - फ्लेम ऑफ द फॉरेस्ट, जंगल फ्लेम 
पलाश का वनस्पतिक नाम - बेतुआ मोनोस्पेर्मा


पलाश का पेड़ (palash tree) भारत में पाई जाने वाली एक मुख्य औषधीय पौधा है। पलाश के पेड़ को छेवला, टेशू  (Chewla tree) और ढाक (Dhak tree) के नाम से भी जाना जाता है। पलाश का झाड़ भारत के जंगलों में आसानी से देखने के लिए मिल जाता है। यह पौधा गांव में आसानी से देखा जा सकता है। मगर शहरों में, इस पौधे को देखना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। पलाश का पौधा (palash tree) बहुत सुंदर रहता है। पलाश का पौधा सबसे सुंदर फरवरी और मार्च के समय लगता है, क्योंकि इस समय इस पौधे में फूल लग जाते हैं। इस पौधे में पत्ते नहीं रहते, सिर्फ फूल ही फूल दिखाई देते हैं, जिससे दूर से देखने में यह पौधा आग की तरह लगता है। पलाश के पौधे में भड़कीले लाल पीले और सफेद रंग के फूल देखने के लिए मिल जाते हैं। पलाश के पेड़ के आयुर्वेदिक लाभ (Palash plant benefits) भी हैं, जो शरीर को फायदे पहुंचाते हैं। 

पलाश (Palash) का पेड़ 10 से 15 फीट ऊंचा रहता है। यह पेड़ मध्यम आकार का रहता है। यह झाड़ी नुमा रहता है। पलाश के पौधे (palash tree) के पत्ते गोलाकार के रहते हैं। एक डंडी में तीन पत्ते रहते हैं, जिसमें बीच वाला पत्ता बड़ा रहता है और आजू बाजू के पत्ते छोटे रहते हैं। पत्तों की शिराएं साफ देखने के लिए मिलती है। पत्तों का पीछे वाला भाग वेलवेट के समान होता है। 

पलाश के पेड़ की, जो कलियां निकलती है। वह भूरे रंग की होती है और मखमली होती हैं। पलाश के फूल (Palash ke Phool) का निचला हिस्सा मखमल के समान रहता है। पलाश के फूल (Palash ke Phool) का आकार तोते की चोच के समान रहता है। फूल का निचला हिस्सा काले कलर का रहता है। पलाश का फूल (Palash ka Phool) बहुत सुंदर रहता है। पलाश के फूल (Palash ke Phool) टेसू (Tesu) के नाम से भी जाना जाता है।  इसे टेसू फूल (Tesu flower) कहा जाता है। पलाश के फूल का प्रयोग रंग बनाने के लिए किया जाता है। इस रंग का उपयोग होली में किया जाता है। यह रंग प्राकृतिक रहता है। पलाश के ताजे फूलों से कलर बना सकते हैं।  पलाश के फूल को पानी में भिगोकर कलर बना सकते हैं। 

पलाश का तना खुरदुरा रहता है। पलाश की छाल को निकाला जाता है और इसकी छाल का प्रयोग भी औषधि के रूप में किया जाता है। पलाश की छाल निकालने के समय में कहीं कहीं चोट लग जाती है, जिस से गाद निकलती है। इसका प्रयोग औषधि के रूप में किया जाता है। पलाश के पौधे को ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं पड़ती है। यह प्राकृतिक तरीके से ही बड़ा हो जाता है। पलाश का, जो फल लगते हैं। वह सेम के समान देखते हैं। पलाश के फल सूखने के बाद, इसके जो बीज निकलते हैं। उसका तेल बनाया जाता है और पाउडर बनाया जाता है, जो शरीर के रोगों के लिए उपयोग किया जाता है। 

पलाश के पत्तों का पत्तल बनाया जाता है। वैसे आज के समय में पलाश के पत्तल बहुत कम देखने के लिए मिलते हैं। गांव में भी आजकल प्लास्टिक के दोना और पत्तल का प्रयोग किया जाता है। मगर प्राचीन समय में पलाश के पत्तों का दोना, पत्तल बनाया जाता था और इसी पर खाना खिलाया जाता था। 


पलाश के प्रकार - types of palash 

पलाश का पेड़ (palash tree) दो प्रकार का होता है - सफेद पलाश और लाल पलाश। 

पलाश का सफेद पेड़ में सफेद कलर के फूल लगते हैं और इसकी पत्तियां जब निकलती हैं, तो सफेद कलर में निकलती है और बाद में हरी कलर की हो जाती हैं। पलाश की पत्तियां फरवरी के समय में पूरी तरह झड़ जाती हैं और इसमें पलाश के फूल देखने के लिए मिलते हैं। उसके बाद पत्तियां निकलती हैं। 


पलाश/छेवला/ढाक के पौधे का औषधीय गुण, महत्व और उपयोग - Medicinal properties, importance and uses of Palash/Chewla/Dhak plant


पलाश पौधा का गुण

पलाश का पौधा जीवाणुरोधी होता है, जिससे यह वायु को शुद्ध करता है। पलाश के पौधे की लकड़ियों का प्रयोग हवन में किया जाता है, जिससे घर का वातावरण शुद्ध होता है और जो भी जीवाणु रहते हैं। वह मारे जाते हैं। पलाश के पौधे में यह एक मुख्य गुण है। इसके अलावा भी पलाश में आयुर्वेदिक गुण रहते हैं, जिससे शरीर के रोगों को ठीक किया जा सकता है। 


पलाश/छेवला/ढाक के फायदे - Benefits of Palash/Chewla/Dhak 

  1. पलाश की जड़ का रस निकालकर इसका प्रयोग आंखों में किया जा सकता है, इससे आंखों की बीमारियां दूर होती हैं। पलाश के पेड़ की ताजी जड़ों का रस निकालकर, एक एक बूंद आंखों में डालने से, आंखों के रोग दूर होते हैं। 
  2. पलाश रक्त को शुद्ध करता है। अगर आप पलाश के फूलों का पाउडर का प्रयोग करते हैं या इसके पत्ते के रस का सेवन करते हैं, तो आपका रक्त शुद्ध हो जाएगा और आपको स्किन से संबंधित, जो भी परेशानी होगी। वह आपकी ठीक हो जाएगी, क्योंकि दूषित रक्त से ही बहुत सारी परेशानियां होती हैं। 
  3. नाक से खून बहना अर्थात नकसीर में पलाश का प्रयोग किया जा सकता है। 
  4. पलाश के बीजों के पाउडर से यौन शक्ति प्रबल होती है। आप इसके बीजों का पाउडर घर में भी बना सकते हैं और आपको इसके बीजों का पाउडर बाजार में भी मिल जाता है। 
  5. पलाश की जड़ को घिसकर, कान के नीचे लेप करने से घेंगा ठीक होता है। 
  6. अगर पेट में कीड़े हो गए हैं, तो पलाश के बीज के चूर्ण से दिन में दो बार खाने से पेट के सभी कीड़े मर जाते हैं। 
  7. महिलाओं को सफेद पानी की परेशानी हो या मासिक धर्म के दौरान अधिक रक्त जाता हो, तो पलाश के फूलों का पाउडर या बीजों के पाउडर का प्रयोग किया जा सकता है। पुरुषों में अगर पेशाब के माध्यम से या मल के माध्यम से धातु निकलता है, तो उसमें भी पलाश के फूल और बीज के पाउडर का प्रयोग किया जा सकता है। 
  8. पलाश के बीज के काढ़े से अतिसार या दस्त रोग दूर हो जाता है। 
  9. अगर किसी को पेशाब करने में दिक्कत है या पेशाब नहीं आ रही है, तो इसके लिए पलाश के फूलों को स्टीम करके नाभि के नीचे बांधना चाहिए, जिससे यह समस्या ठीक हो जाती है। क्योंकि इसमें व्यक्ति की मूत्रवाहिका में सूजन आ जाती है, जिससे पेशाब करने में परेशानी होती है। 
  10. पलाश के बीज को नींबू के रस के साथ पीसकर लगाने से दाद और खुजली ठीक होती है। 
  11. पलाश सूजन कम करने में सहायक रहता है। पलाश के फूलों को स्टीम करके, जहां पर भी सूजन हो। वहां पर बांधने से सूजन कम होती है। 
  12. पलाश मधुमेह को दूर करता है। पलाश के फूल, पत्ती, छाल और जड़ के पंचांग का उबालकर, काढ़ा बनाकर और काढ़ा छानकर पीने से लाभ मिलता है और मधुमेह दूर होता है। 
  13. पलाश काम शक्ति को बढ़ाने में मदद करता है। पलाश की जड़ के रस को दिन में 2 बार सेवन करने से काम शक्ति प्रबल होती है। 
  14. पलाश से त्वचा संबंधी रोग ठीक होते हैं। पलाश के तेल से त्वचा में मसाज करने से त्वचा संबंधी रोग ठीक होते हैं। 


पलाश/छेवला/ढाक (Palash/Chhewla/Dhak) के पौधे के औषधीय गुण



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