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नीम के पौधे (Neem plant) के औषधीय गुणों के बारे में जानकारी

 नीम या निम्ब का पौधा और नीम के फायदे - Neem or nimb plant and neem benefits



नीम का वनस्पतिक या वैज्ञानिक नाम - एजाडिरेकटा इंडिका
नीम का अंग्रेजी नाम - मार्गोसा ट्री 

नीम का पौधा एक आयुर्वेदिक प्लांट है। नीम के पौधे के बारे में सभी लोगों को जानकारी है। नीम का पौधा कड़वा रहता है। नीम के पौधे में कई रोगों से लड़ने की क्षमता होती है। नीम के पौधे का उपयोग हम बहुत सारे कामों में कर सकते हैं। मगर इस पौधे के औषधीय गुणों के बारे में हमें जानकारी नहीं रहती, जिससे हम इनका उपयोग नहीं कर पाते हैं। नीम का पौधा भारत में सभी जगह देखने के लिए मिल जाता है। नीम लोगों के लिए एक वरदान की तरह है। नीम से बहुत सारे रोगों का उपचार किया जाता है। नीम का पौधा वायु को शुद्ध रखता है। यह जमीन में पानी का संरक्षण भी करता है। 

नीम एक मुख्य पौधा है। हम नीम के पौधे के बारे में पहले जानते हैं। नीम का पौधा, भारत के हर घर में या घर के आसपास देखने के लिए मिल ही जाता है। नीम का पौधा सदा हरा भरा रहता है। यह पौधा 15 से 20 फीट ऊंचा होता है। कभी-कभी इस पौधे की हाइट 35 फीट से भी ज्यादा होती है। नीम का पौधा में एक मुख्य तना देखने के लिए मिलता है। इससे बहुत सारी शाखाएं निकलती है और पौधा घना हो जाता है। नीम के पौधे की पत्तियां का आकार छोटा और भालाकार होता है। एक डंडी में बहुत सारी पत्तियों होती है। नीम के पौधे की पत्तियों का स्वाद कड़वा रहता है। नीम की पत्तियां पतझड़ के मौसम में पूरी तरह से झड़ जाती हैं और फिर इसमें मार्च अप्रैल माह में नई पत्तियां आती हैं। 

नीम का तना कठोर और दरार युक्त होता है। इसकी छाल को आप निकाल सकते हैं। तने का रंग धूसर या काला और भूरा हो सकता है। जब नीम के पेड़ में नई पत्ती आती है। तब ही इसमें नीम के फूल लगते हैं। नीम के फूल सफेद कलर के रहते हैं और इसके फूल गुच्छों में उगते हैं। इसके फूल में बहुत सुगंध रहती है। नीम का फल चिकना और अंडाकार होता है। इसके फल को निंबोली कहते हैं। नीम के फल या निंबोली का स्वाद कड़वा और हल्का सा मीठा रहता है। आप निंबोली को खा सकते हैं। 

निंबोली का रंग प्रारंभ में हरा रहता है। उसके बाद निंबोली का रंग बदलकर पीला हो जाता है। निंबोली का बाहरी आवरण पतला होता है। इसके अंदर गुदा होता है। इसकी गुठली सफेद रंग की होती है। इसके फल का तेल भी निकाला जाता है, जो बहुत ही लाभकारी होता है। 


नीम के औषधीय गुण महत्व और उपयोग - Medicinal properties, importance and uses of Neem

जैसा कि नीम के बारे में आपको पता है, कि नीम में बहुत सारे गुण हैं। जिसके कारण नीम शरीर के बहुत सारे रोगों को मिटाने में प्रयोग किया जाता है। नीम में एंटीबैक्टीरियल गुण रहता है, जो जीवाणुओं को मारती है। इसके अलावा नीम में रक्त शोधन का गुण भी पाया जाता है, जो रक्त को शुद्ध करता है। नीम का औषधीय गुणों के बारे में हम यहां पर जानेंगे 


नीम के पत्तियों के फायदे - Neem ke patte ke fayde

नीम की पत्तियां के बहुत सारे फायदे हैं 

  1. नीम की पत्तियों का उपयोग आप ताजा तोड़कर कर सकते हैं। नीम की पत्तियों को आप सुबह खाली पेट खाते हैं, तो आपका खून शुद्ध होता है और इससे हमारे शरीर में, जो भी गंदगी रहती है। वह निकल जाती है और मधुमेह की बीमारी में लाभ मिलता है। 
  2. नीम की पत्तियों का प्रयोग हम अपने बालों में भी कर सकते हैं। नीम की पत्तियों का पेस्ट बनाकर बालों में लगाने से बालों की रूसी और लिख की समस्या दूर होती है। 
  3. नीम की पत्तियों को उबालकर नहाने से शरीर में फोड़े, फुंसी और खुजली की समस्या दूर होती है। 
  4. नीम की पत्तियों का काढ़ा बनाकर भी पिया जा सकता है, जिससे पेट के विकार दूर होते हैं। 
  5. नीम की पत्तियों का पाउडर बनाकर, नीम की उस पाउडर को फेस पैक के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। इसे आप मुलतानी मिट्टी, चंदन पाउडर के साथ मिलाकर चेहरे में लगा सकते हैं। 
  6. नीम की पत्तियों को पीसकर, आप छोटी-छोटी गोलियां बना सकते हैं और उसे छांव में सुखा लें। इन गोलियां को आप स्टोर करके रख लें। आप नीम की गोली और हल्दी की बनी गोलियों को पानी के साथ ले सकते हैं। इससे आप की त्वचा सुंदर होएगी और पेट से संबंधित विकार भी दूर होंगे। इससे रक्त शुद्ध होता है और बहुत सी बीमारियां दूर होती हैं। 
  7. बिच्छू ततैया जैसे विषैले कीट अगर आप को काट देते हैं, तो नीम की पत्तियां को महीन पीसकर आप काटे जाने वाले स्थान पर लगा सकते हैं। इस से जहर नहीं फैलता और राहत मिलती है। 
  8. अगर आप आग से जल जाते हैं, तो उस स्थान पर नीम की पत्ती को पीसकर लगा लेना चाहिए। नीम की पत्तियों में एंटीसेप्टिक गुण पाए जाते हैं, जो घाव को जल्दी भर देता है और इससे जलन भी शांत हो जाती है। 
  9. अगर पथरी की समस्या हो, तो उस स्थिति में नीम की पत्ती की राख को लेने से पथरी गलने लगती है और मूत्र मार्ग से बाहर आ जाती है। 
  10. नीम की पत्तियां पेट के लिए बहुत ही उपयोगी हैं। नीम की पत्तियों मैं पित्त नाशक गुण पाया जाता है, जिससे नीम की पत्तियों का इस्तेमाल करने से एसिडिटी में लाभ मिलता है। कब्ज, पेट दर्द, और आतो में स्थित कीड़े समाप्त होते हैं। 
  11. नीम के पत्तियों के सेवन से कोलेस्ट्रॉल भी नियंत्रित रहता है। 
  12. नीम कैंसर को ठीक करने में सहायक है। नीम की पत्तियां, फल, तना या छाल के उपयोग से कैंसर कोशिकाओं को कम किया जा सकता है। नीम की पत्तियों में एक विशेष गुण रहता है, जिससे कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करता है। आप नीम की पत्तियों या नीम के किसी भी भाग का उपयोग कर सकते हैं। 
  13. नीम में एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल का गुण होता है। नीम की पत्ती से कुष्ठ रोग ठीक होता है। आप नीम की पत्ती को पीसकर कुष्ठ रोग से प्रभावित क्षेत्र पर लगा सकते हैं, जिससे आराम मिलेगा। 
  14. नीम के उपयोग से कील, मुंहासे और पिगमेंटेशन की समस्या दूर होती है। 


नीम के तेल का उपयोग या फायदे - Neem ke tel ka upyog ya fayde

नीम के तेल का उपयोग कान के दर्द में किया जाता किया जा सकता है। अगर कान में बहुत तेज दर्द हो या कान बहने की समस्या हो, तो नीम का तेल की कुछ बूंदें कान में डाली जा सकती है, जिससे यह समस्या दूर हो सकती है। 


नीम के तने का उपयोग - Neem ke tane ka upyog

नीम के डालियों का उपयोग दातुन के रूप में किया जा सकता है। नीम की डालियों का प्रयोग दातुन बनाने में किया जाता है। नीम की डाली को आप छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ लीजिए और इस दातुन से आप दांत को और मसूड़ों को दातुन करे। यह आपके दांत से संबंधित समस्या को दूर करेगा। नीम की दातून पायरिया की रोकथाम भी करती है। 


नीम के छाल का प्रयोग - Neem ke chhal ka prayog

नीम के छाल का उपयोग बहुत से कामों में किया जाता है। मलेरिया बुखार होने पर नीम की छाल को पानी में उबालकर, इसका काढ़ा बना लेना चाहिए और इस पानी को दिन में दो या तीन बार पीना चाहिए। इससे बुखार ठीक हो जाता है। 


नीम के तेल को घर में कैसे बनाया जा सकता है - How to make neem oil at home

नीम के तेल को घर में बनाने बहुत ही आसान है। नीम के तेल को घर में बनाने के लिए आप नीम की ताजी पत्तियों को तोड़ लीजिए और उसे पानी से धोकर साफ कर लीजिए और उसे सुखा लीजिए। नीम का तेल बनाने के लिए आप नारियल के तेल का प्रयोग कर सकते हैं। नारियल के तेल में नीम की पत्तियों को डाल कर आप धीमी आंच पर गरम कर लीजिए। जब तेल का कलर चेंज हो जाए। तब तेल ठंडा करके आप कांच के बर्तन में भर लीजिए और आप इसका प्रयोग कर सकते हैं। इसके अलावा एक और विधि के द्वारा आप नीम का तेल बना सकते हैं। 

नीम की पत्तियों को पानी अच्छे से धो लीजिए और कांच के जार में डाल दीजिए और उसके बाद नारियल का तेल भी इसमें डाल दीजिए। नीम की पत्तियां नारियल के तेल में डूब जाने चाहिए। उसके बाद इस जार को आप ढक्कन लगाकर अंधेरे कमरे में रख दीजिए। इसमें धूप नहीं पड़नी चाहिए, नहीं तो इसका गुणवत्ता कम हो जाएगी। 2 सप्ताह बाद आप तेल निकाल लीजिए। तेल का कलर भी चेंज हो जाएगा। तेल में से आप नीम की पत्तियां अलग कर दीजिए। यह तेल बनकर तैयार है और आप इसे उपयोग कर सकते हैं। यह तेल औषधि गुणों से भरपूर है। 


नीम के नुकसान - Disadvantages of Neem

नीम के जिस तरह फायदे हैं। उस तरह नीम के नुकसान भी है। नीम का उपयोग कभी-कभी शरीर के लिए बहुत हानिकारक हो जाता है। चलिए जानते हैं, कि नीम के उपयोग से शरीर में किस तरह के नुकसान होते हैं। 

  1. नीम का उपयोग छोटे बच्चों के लिए नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे बच्चों की सेहत में हानि पहुंच सकती है। 
  2. अधिक मात्रा में नीम का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे एलर्जी, उल्टी और चक्कर आने लगता है। 
  3. महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान नीम का प्रयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह गर्भ को नष्ट करने के गुण रहते हैं। इसलिए नीम का प्रयोग गर्भावस्था के दौरान नहीं करना चाहिए। 
  4. नीम का प्रयोग पुरुषों को बहुत कम करना चाहिए, क्योंकि नीम  शुक्राणुओं को नष्ट करती है। 
  5. नीम का प्रयोग रक्तचाप वाले व्यक्तियों को नहीं करना चाहिए। 
  6. नीम मधुमेह के लिए बहुत उपयोगी रहती है। मधुमेह वाले व्यक्तियों के लिए बहुत उपयोगी रहती है। मगर जिन्हें मधुमेह नहीं रहता है, उनके लिए हानिकारक होती है। इसलिए नीम का प्रयोग कम मात्रा में करना चाहिए। 
  7. नीम की पत्तियों का प्रयोग, अगर आप त्वचा में करते हैं, तो आप को जलन और आंखों से आंसू निकल सकता है। इसलिए आपको अगर नीम की पत्तियों से परेशानी होती है, तो आप उसका उपयोग नहीं करें। 

नीम के पौधे (Neem plant) के औषधीय गुणों के बारे में जानकारी


नीम के पौधे (Neem plant) के औषधीय गुणों के बारे में जानकारी



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