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देसी बबूल या देसी कीकर (Desi babul or Desi Kikar) के औषधीय गुण के बारे में जानकारी

 देसी बबूल और विलायती बबूल का पेड़ 
Desi Babul aur vilayati Babul Ka ped


बबूल का वैज्ञानिक या वानस्पतिक नाम  - आकाचा निलोतिका 
बबूल का अंग्रेजी नाम - ब्लैक बबूल, इंडिया गम अरेबिक 
बबूल को स्थानीय भाषा - कीकर 

बबूल का पेड़ भारत का एक मुख्य औषधीय पौधा है। बबूल का पेड़ भारत के मरुस्थल भूमि पर पाया जाता है। बबूल का पेड़ कम पानी में भी अच्छी तरह से फूलता और फलता है। इस पौधे को हिंदी में बबूल और कीकर के नाम से जानते हैं। कीकर का पौधा दो प्रकार का रहता है। देसी कीकर और विलायती कीकर। देसी कीकर ज्यादा उपयोगी रहता है। बबूल के पेड़ को कीकर के नाम से भी जाना जाता है। बबूल का पेड़ में कांटे रहते हैं। यह कांटे सफेद रंग के रहते हैं और लंबे रहते हैं। बबूल की डाली में पूरी कांटो से भरी रहती है। इसकी पत्तियां छोटे आकार की रहती हैं और लंबी रहती हैं। एक डंडी में बहुत सारी पत्तियां देखने के लिए मिल जाती है। यह पंक्तियां श्रंखलाबध्द तरीके से लगी रहती है। 

बबूल में औषधीय भाग इसका पत्तियां, फली, तना और टहनियां है। बबूल के पेड़ का तना का उपयोग फर्नीचर बनाने में किया जाता है, क्योंकि बबूल की लकड़ी बहुत मजबूत रहती है। बबूल का पौधा आपको शहरों और गांवों में देखने के लिए मिल जाता है। यह जंगलों में भी आसानी से देखा जा सकता है। यह पौधा स्वयं खाली स्थान पर उग जाता है। इसकी ज्यादा देखभाल करने की जरूरत भी नहीं पड़ती है। यह भारत के लिए वरदान के समान है। मगर भारतीय लोगों को इसकी जानकारी ही नहीं है, हम इस ब्लॉग के माध्यम से आपको बबूल के पौधे के बारे में बताएंगे। 

आपने एक कहावत जरूर सुनी होगी 


बोया पेड़ बबूल का तो आम कहां से होय 


यह कहावत बहुत फेमस है और यह कहावत लोगों को बहुत बड़ी शिक्षा देती है। इस कहावत का मतलब होता है, कि आप अच्छे कर्म करेंगे तो अच्छा मिलेगा और बुरे कर्म करेंगे, तो बुरा मिलेगा।मगर हम बात करें बबूल की, तो बबूल का पौधा बहुत उपयोगी है और बबूल का पेड़ कहीं भी आराम से देखा जा सकता है। बबूल का पेड़ 15 से 20 फीट ऊंचा रहता है। बबूल के पौधे में आपको देसी बबूल और विलायती बबूल देखने के लिए मिलती है। बबूल के पौधे की, जो फलियां निकलती है। उसकी सब्जी बनाई जाती है और उसका और भी बहुत से कामों में उपयोग किया जाता है। बबूल का पौधा दांतो के लिए बहुत ही उपयोगी है। बबूल के पौधे में, जो फूल होते हैं। वह छोटे-छोटे सफेद और पीले कलर के रहते हैं। यह फूल देखने में बहुत सुंदर लगते हैं। बबूल के, जो फल लगते हैं। उनमें लंबी-लंबी फलिया निकलती हैं। बबूल के पेड़ में मार्च-अप्रैल के समय फल्लिया लगती हैं। 


विलायती बबूल - Vilayati babool

विलायती बबूल का पौधा विदेश से लाया गया था। इसलिए इसे विलायती बबूल के नाम से जाना जाता है। मगर इसका पौधा ज्यादा उपयोगी नहीं रहता है, क्योंकि इस पौधे से ना ही अच्छी लकड़ी प्राप्त होती है। इस पौधा में झाड़ियों रहता है, जिससे इसका इतना ज्यादा फायदा नहीं लिया जा सकता है। इसकी फलियां भी चौड़ी और मोटी होती है और देसी बबूल की फलियों और विदेशी बबूल की फलियों में अंतर रहता है। विदेशी बबूल के कांटे भी मोटे और छोटे रहते हैं। विदेशी बबूल का पौधा अपने आप कहीं भी उग जाता है और यह भारतीय लोगों के द्वारा ज्यादा पसंद नहीं किया जा रहा है। विलायती बबूल को विदेश से  भारत में लगा दिया गया था। इसे हरियाली के लिए भारत में लगाया गया था। मगर धीरे-धीरे यह पूरे भारत में फैल गया है। 


बबूल के पौधे का औषधीय महत्व, गुण एवं फायदे - Medicinal importance, properties and benefits of babool plant

बबूल के पौधे का उपयोग बहुत सारी बीमारियों को ठीक करने के लिए किया जाता है। बबूल के पौधे के जड़, तना, पत्ती, छाल और फलियों का प्रयोग किया जाता है। इन सभी भागों में औषधीय गुण रहते हैं। चलिए जानते हैं - बबूल के पौधे के फायदे के बारे में 


बबूल का डाली के फायदे - Babool ki dali ke fayde

बबूल की डालियों का उपयोग मुख्य रूप से दातुन बनाने के लिए किया जाता है। गावों में बबूल की डालियों को तोड़कर इसकी दातुन बनाई जाती है और उससे प्रतिदिन ब्रश किया जाता है, जिससे दांत मजबूत होते हैं और स्वस्थ रहते हैं। 


बबूल की फली या कीकर की फली के फायदे - Babul Ki fali ya Kikar ki fali ke fayde

  1. बबूल की फलियों का प्रयोग आप दस्त के लिए कर सकते हैं। अगर कोई व्यक्ति दस्त से पीड़ित है, तो इसकी फलियों का पाउडर बनाकर सेवन कर सकता है, जिससे दस्त में आराम मिलता है। अगर पेट में दर्द हो रहा हो और मरोड़ पड़ रहे है। तब इसकी फलियों का प्रयोग किया जा सकता है, जिससे आराम मिलता है। 
  2. अगर दांत दर्द की समस्या हो, तब इसकी फलियों का प्रयोग किया जा सकता है। इसकी फलियों की राख बना कर, उस राख का प्रयोग मंजन के रूप में किया जा सकता है और मसूड़ों के दर्द में भी आराम मिलता है। इससे दांत भी साफ हो जाते हैं। 
  3. बबूल की फलियां बहुत पौष्टिक रहती हैं। बबूल की फलियों का प्रयोग आप खाने के रूप में कर सकते हैं। इस की फलियों से आप सब्जी बना सकते हैं। अचार बना सकते हैं और इन फलियों को आप खा सकते हैं। इन फलियों के प्रयोग से आपका शरीर बलवान होता है। 


बबूल या कीकर के पत्ते के फायदे - Babool ya keekar ke patte ke fayde

  1. बबूल की पत्तियों का प्रयोग भी औषधीय कामों में किया जाता है। बबूल की पत्तियों का प्रयोग घाव को भरने के लिए किया जाता है। बबूल की पत्तियों को पीसकर घाव में लगा लिया जाए, तो घाव भर जाता है। 
  2. बबूल की पत्तियों का प्रयोग चोट लगने पर खून के बहने को रोकने के लिए भी किया जाता है। बबूल की पत्तियों के पेस्ट को, जहां खून बह रहा हो। वहां लगा दिया जाए, तो इससे खून बहना बंद हो जाता है और संक्रमण नहीं होता है। 
  3. बबूल की पत्तियों के पेस्ट को बालों में लगाया जा सकता है, जिससे बाल झड़ने की समस्या से निजात मिलती है। 
  4. सीने में जलन की स्थिति में भी बबूल का प्रयोग किया जा सकता है। बबूल के पत्तों को पानी में उबालकर पीने से आराम मिलता है। 


बबूल या कीकर के पेड़ की छाल का प्रयोग - Babool ya kikar ke ped ki chhal ka prayog

  1. बबूल के छाल का प्रयोग दांतों और मसूड़ों को मजबूती दिलाने के लिए किया जा सकता है। मसूड़ों में खून आना और दर्द होना। इन सभी समस्याओं में इसका प्रयोग किया जा सकता है। 
  2. गले में अगर टॉन्सिल की समस्या हो, तो इसके लिए बबूल की छाल को पानी में उबालकर पीना चाहिए, जिससे आराम मिलता है। 
  3. बबूल की छाल को सुखाकर चूर्ण बना लेना चाहिए और मुंह में छाले होने पर, इसे लगाना चाहिए। जिससे आराम मिलता है। 
  4. बबूल की छाल और बबूल की फली की बराबर मात्रा में लेकर उसका चूर्ण बनाकर सुबह-शाम एक चम्मच की मात्रा में सेवन करने से कमर दर्द में आराम मिलता है। 
  5. बबूल की छाल का काढ़ा पेट संबंधी समस्या में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बबूल की छाल का काढ़ा बनाकर पीने से पेट संबंधी समस्या दूर होती है। 
  6. मुंह के छालों में बबूल की छाल का प्रयोग किया जा सकता है। इससे आराम मिलता है। बबूल की छाल का काढ़ा बनाकर पिया जा सकता है। 
  7. मासिक धर्म की समस्या में होने वाले दर्द और अधिक खून जाने की समस्या में बबूल की छाल का काढ़ा पीने से इस समस्या का समाधान मिलता है। 
  8. बबूल की छाल का काढ़ा बनाकर, इसका सुबह-शाम सेवन करने से महिलाओं के सफेद पानी की समस्या में भी आराम मिलता है। 


बबूल या कीकर के गोंद के फायदे - Babool ya keekar ke gond ke fayde

  1. बबूल की गोंद बहुत लाभ वर्धक होती है। बबूल की गोंद का प्रयोग शरीर के बहुत सारे रोगों में किया जाता है। 
  2. वजन घटाने में बबूल की गोंद का प्रयोग किया जाता है। आजकल के जमाने में मोटापा और वजन एक मुख्य समस्या है। आजकल के जमाने में वजन को घटाने के लिए बहुत सारी दवाइयों और डेटिंग का प्रयोग किया जाता है। मगर इन सब का फायदा नहीं होता। आप वजन घटाने के लिए बबूल की गोंद का प्रयोग कर सकते हैं। बबूल की गोंद को पानी के साथ ले सकते हैं। 
  3. बबूल की गोंद का प्रयोग कमर की दर्द में प्रयोग किया जा सकता है। किसी महिला का बच्चा हुआ हुआ। तो डिलीवरी वाली महिला का कमर बहुत कमजोर होती है। यह कमर को बांधने में और दर्द बहुत कारगर है। बबलू की गोंद को देसी घी में भूनकर और मिश्री के साथ मिलाकर लड्डू बना कर खिलाया जाता है। इसका प्रयोग किया जाता है। इससे कमर दर्द में लाभ होता है। 
  4. डायबिटीज की समस्या में आप बबूल की गोंद का प्रयोग कर सकते हैं। इससे डायबिटीज में राहत मिलती है। 


बबूल या कीकर के पेड़ की चित्र


देसी बबूल या देसी कीकर (Desi babul or Desi Kikar) के औषधीय गुण के बारे में जानकारी




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