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भूमि आंवला या भुई आंवला (Bhumi Amla or Bhui Amla) के औषधीय गुणों के बारे में जानकारी

भूमि आंवला (भुई आंवला) के पेड़ की जानकारी और भूमि आंवला (भुई आंवला) के फायदे
Information about Bhoomi Amla (Bhui Amla) tree and Benefits of Bhoomi Amla (Bhui Amla) in hindi


भूमि आंवला या भुई आंवला का वानस्पतिक नाम - फाइलेन्थस यूरिनेरिया
भूमि आंवला या भुई आंवला का अंग्रेजी नाम - स्टोनब्रेकर, चेंबर बिटर, लीफ फ्लावर

भूमि आंवला एक दिव्य औषधि पौधा है। भूमि अमला भारत भूमि में पाया जाने वाला एक मुख्य पौधा है। भूमि आंवला को भुई आंवला के नाम से भी जाना जाता है। भूमि आंवला का उपयोग हमारे शरीर के बहुत सारे रोगों को ठीक करने के लिए किया जाता है। भूमि आंवला का नाम बहुत ही अद्भुत है। भूमि आंवला का पेड़ छोटा सा होता है। भूमि आंवला की पत्तियां इमली की पत्तियों या आंवला की पत्ती के समान रहती हैं। भूमि आंवला की पत्तियों के नीचे छोटे छोटे गोल आकार के फल लगते हैं। प्रारंभिक अवस्था में फल हरे कलर के रहते हैं। पकने के बाद, यह फल काले और लाल हो जाते हैं। 

भूमि आंवला का स्वाद कसैला और हल्का सा मीठा रहता है। इसकी पत्तियों और जड़ का प्रयोग कर सकते हैं। यह छोटा झाड़ी नुमा पौधा होता है। भूमि आंवला का पेड़ बरसात में ज्यादातर देखने के लिए मिलता है। इसके अलावा इस गर्मी में भी देखने के लिए मिल जाता है। जहां पर भी पानी रहता है। वहां पर इसके पेड़ आसानी से देखे जा सकते हैं। हमारे घर के बाहर, नाली के पास इसका पेड़ गर्मी में भी देखने के लिए मिलता है। मगर इसके उपयोग के बारे में लोगों को जानकारी नहीं है, जिससे लोग इसे यूज नहीं करते और इसका पेड़ ऐसे ही लगा रहता है। भूमि आंवला का उपयोग बहुत सारे कामों में किया जाता है। 


भूमि आंवला के औषधीय गुण, महत्व एवं उपयोग - Medicinal properties, importance and uses of Bhumi Amla



लीवर से संबंधित परेशानी में भूमि आंवला का प्रयोग 

लीवर में अगर परेशानी हो जाती है या लीवर सही ढंग से काम नहीं करता है, तो भूमि आंवला का प्रयोग किया जा सकता है। जिससे लीवर सही ढंग से काम करने लगता है। लीवर में सूजन आने की परेशानी को भूमि आंवला से दूर किया जा सकता है। भूमि आंवला लीवर से विषैले पदार्थों को निकालने में मदद करता है और लीवर को पोषण देता है। 

चर्म रोग की समस्या में भूमि आंवला का प्रयोग 

चर्म रोग की समस्या बहुत बड़ी समस्या है और इस समस्या में भूमि आंवला का प्रयोग किया जा सकता है। भूमि आंवला में रक्त को शुद्ध करने का गुण रहता है, जिससे हमारा रक्त शुद्ध हो जाता है और हमारी रक्त के शुद्ध होने के कारण हमारी त्वचा में होने वाली बहुत सारी परेशानियां ठीक हो जाती है। भूमि आंवला रक्तशोधक की तरह कार्य करता है, जिसे हमारी त्वचा में निखार आता है। 

पाचन के लिए भूमि आंवला का उपयोग 

भूमि आंवला पाचन से जुड़ी बहुत सारी समस्याओं को ठीक करता है। अगर पेट में गड़बड़ी हो गई हो, तो भूमि आंवला का प्रयोग किया जा सकता है, जिससे पेट की गड़बड़ी ठीक हो जाती है। एसिडिटी की समस्या हो, तो एसिडिटी की समस्या भी भूमि आंवला के प्रयोग से ठीक हो जाती है। 

घाव को सुखाने में भूमि आंवला का उपयोग 

अगर कोई गहरा घाव हो गया है और वह सूख नहीं रहा हो, तो इसमें भूमि आंवला का प्रयोग किया जा सकता है। भूमि आंवला के प्रयोग के द्वारा घाव सूख जाता है। भूमि आंवला के पत्तों का काढ़ा बनाकर घाव को धोने से घाव सूख जाता है या भूमि आंवला की पत्तियों के रस को घाव में लगाने से, घाव सूख जाता है। 

पीलिया के रोग में भूमि आंवला का प्रयोग 

पीलिया के रोग में भूमि आंवला का प्रयोग किया जाता है। भूमि आंवला के पंचांग का प्रयोग पीलिया में किया जाता है। आप भूमि आंवला के पंचांग का काढ़ा बनाकर पीते हैं, तो पीलिया रोग ठीक हो जाता है। 

मुंह के छालों के लिए भूमि आंवला का उपयोग 

मुंह के छालों के लिए भूमि आंवला का उपयोग किया जाता है। मुंह में अगर छाले हो गए हो, तो उसके लिए आप भूमि आंवला की पत्तियों को चबाये और आप इसे निगल भी सकते हैं या इसे अच्छी तरह चबाकर उगल दीजिए। इससे आपके मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं और आपके मसूड़े और आपके दांत भी मजबूत होते हैं। 

खुजली की समस्या में भूमि आंवला का उपयोग 

खुजली की समस्या में भूमि आंवला का उपयोग किया जा सकता है। खुजली की समस्या में आप भूमि आंवला की पत्तियों के रस को लगा सकते हैं या इसे सिलबट्टे में पीसकर लगा सकते हैं। इससे आपको आराम मिलेगा। 

रक्त प्रदर में भूमि आंवला का उपयोग 

रक्त प्रदर में भूमि आंवला बहुत कारगर है। रक्त प्रदर में भूमि आंवला का रस निकालकर इसका सेवन करने से रक्त प्रदर की समस्या से छुटकारा मिलता है। दूब घास और भूमि आंवला का रस निकालकर पीते हैं, तो आपको और अच्छा लाभ मिलता है। 

खांसी में भूमि आंवला का उपयोग 

खांसी की समस्या में भी भूमि आंवला का उपयोग किया जा सकता है। अगर आपकी खांसी ठीक नहीं हो रही है, तो भूमि आंवला और तुलसी की पत्तियों को आप काढ़ा बनाकर पी सकते हैं। इससे आपकी खांसी ठीक हो जाएगी। 

मधुमेह के रोग में भूमि आंवला का प्रयोग 

मधुमेह के रोग में भूमि आंवला का प्रयोग किया जा सकता है। मधुमेह के रोग में इसकी पत्तियों को पीसकर या इसका काढ़ा बनाकर सेवन किया जा सकता है, जिससे मधुमेह में भी फायदा मिलता है। 


भूमि आंवला या भुई आंवला की पहचान - Identification of Bhumi Amla or Bhui Amla

भूमि आंवला की पहचान लोगों में होना जरूरी है। तभी तो वह भूमि आंवला का प्रयोग कर सकते हैं। बहुत सारे ऐसे पौधे रहते हैं, जो भूमि आंवला के समान ही रहते हैं। मगर आप भूमि आंवला या भुई आंवला को बहुत आसानी से पहचान सकते हैं। भूमि आंवला की पत्तियों के नीचे छोटे-छोटे आंवला के समान इसके फल लगे रहते हैं, जिससे आप इसको आसानी से पहचान सकते हैं। 

इसके अलावा शाम होते ही, भूमि आंवला की जो पत्तियां रहती हैं। वह बंद हो जाती हैं, जिससे आप इसे पहचान सकते हैं। भूमि आंवला की जो पत्तियां रहती है। वह आंवला या इमली की पत्तियों के समान रहती है और यह पौधा पानी के आसपास वाली जगह में आपको देखने के लिए मिल जाता है। यह सभी इस के पहचान के मुख्य तथ्य है, जिससे आप इसे आसानी से पहचान सकते हैं और इसका उपयोग कर सकते हैं। 



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