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महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन - Mahakaleshwar Mandir Ujjain

उज्जैन के महाकाल के दर्शन - Mahakal Mandir Ujjain (महाकाल का मंदिर उज्जैन )



उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर विश्व प्रसिद्ध है। उज्जैन में काल के भी काल महाकाल का निवास है।उज्जैन नगरी मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी कहा जाता है। उज्जैन में महाकाल के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। महाकाल जिसके सामने काल, काल मतलब मृत्यु भी अपना सर झुका देती है। महाकाल के दर्शन आप यहां पर कर सकते हैं। उज्जैन नगर में 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक विद्यमान हैं, जिनके दर्शन करके अकाल मृत्यु का संकट खत्म हो जाता है। इसलिए इन्हें महाकाल के नाम से जाना जाता है और इस मंदिर को महाकालेश्वर मंदिर के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर पूरे भारत देश में प्रसिद्ध है और पूरे भारत देश से लोग इस मंदिर में महाकाल के दर्शन करने के लिए आते हैं। उज्जैन सिटी को महाकाल की नगरी के नाम से जाना जाता है। 

हमारा सौभाग्य था, जो हमें उज्जैन के महाकाल के दर्शन करने के लिए मिले। हम लोग उज्जैन रात में पहुंचे थे। रात में हम लोग एक होटल में रुके थे और सुबह नहा धोकर करीब 7:00 बजे महाकालेश्वर मंदिर पहुंच गए थे। हम लोग महाकालेश्वर मंदिर डायरेक्ट पहुंच गए। महाकालेश्वर मंदिर जाने वाले रास्ते के दोनों तरफ बहुत सारी प्रसाद की दुकान लगी थी। खाने पीने की बहुत सारी दुकानें लगी थी। हम लोग डायरेक्ट उज्जैन नगरी के महाकालेश्वर मंदिर पहुंच गए। जब हम लोग महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे थे। तब यहां पर महाकाल भगवान की आरती हो रही थी और हम लोग भी आरती में शामिल हो गए थे, क्योंकि महाकालेश्वर मंदिर के बाहर एक बड़ा सा टीवी लगा था, जिसमें हम लोगों को लाइव आरती देखने के लिए मिल रही थी। हम लोग अपनी गाड़ी लेकर ही खड़े रहे। हम लोगों को बहुत आनंद आया। यहां पर, जो दुकान वाले रहते हैं। वह हम लोगों को बोल रहे थे, कि आप यहां गाड़ी खड़ी कर दीजिए और चप्पल उतार दीजिए और महाकालेश्वर मंदिर चले जाइए। मगर हम लोग ने सोचा कि हम लोग पार्किंग में गाड़ी खड़ी करेंगे। उसके बाद ही हम लोग महाकालेश्वर मंदिर जाएंगे। तो हम लोग मार्केट एरिया से बाहर निकल गए और पार्किंग देखने लगे। 

महाकालेश्वर मंदिर के रूद्र सागर के बाजू में ही पार्किंग बनी हुई है। मगर हम लोग मंदिर में दर्शन करने के लिए आए थे और बहुत ज्यादा भीड़ थी। इसलिए हम लोगों को कुछ यहां पर समझ में ही नहीं आ रहा था, कि कहां जाना है। कहां नहीं जाना है। इसलिए हम लोग एक प्रसाद वाली दुकान के बाजू में ही अपनी गाड़ी खड़ी कर दी है और वहीं पर चप्पल भी उतार दिया और प्रसाद लेकर भगवान महाकाल के दर्शन करने के लिए चल दिए। यहां पर हम लोग का जो प्रसाद था। वह 100 रूपए का आया था और प्रसाद वाले ने हम लोगों को फूल, बेल पत्री और प्रसाद दिया था और हम लोग लाइन लगाकर महाकालेश्वर के दर्शन करने के लिए चल दिए। 

वैसे उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में रोजाना हजारों लोग दर्शन करने के लिए आते हैं। यहां पर भारत के अलग-अलग राज्यों से लोग आते हैं और यहां पर इतनी भीड़ का बहुत अच्छी तरह से मैनेजमेंट किया जाता है। लोगों के मंदिर में जाने के लिए और बाहर आने के लिए अलग अलग रास्ते बनाया गया है। महाकाल मंदिर में प्रवेश करने से पहले, यहां पर हम लोगों का बैग चेक किया गया था, कि बैग में कुछ आपत्तिजनक वस्तु तो नहीं रखी गई है। उसके बाद हम लोग को अंदर प्रवेश करने दिया गया। यहां पर वैक्सीनेशन करने के लिए भी लोग बैठे हुए थे। आप यहां पर उनको अपना आधार कार्ड नंबर बताते थे और वह आपको वैक्सीन लगा देते हैं। मगर हम लोगों ने अपना वैक्सीनेशन नहीं करवाया। हम लोग धीरे-धीरे करके महाकालेश्वर मंदिर में पहुंचे। यहां पर हम लोगों को महाकाल के दर्शन करने के लिए मिले। 

महाकाल का, जो मुख्य गर्भ ग्रह है। वह भूमिगत है और हम लोगों को एक फ्लोर नीचे जाकर महाकाल के दर्शन करने के लिए मिले। महाकाल मंदिर के पहली मंजिल में बहुत बड़ा एक मंच बना हुआ था, जिसमें बैठने की व्यवस्था भी थी। यहां पर ज्यादा भीड़ लगती होगी। तब यहां पर लोग बैठते होंगे। मगर अभी जब हम लोग यहां पर गए थे। तब ज्यादा भीड़ नहीं थी। लोग आराम से दर्शन कर लेते थे। मुख्य गर्भ गृह में भी थोड़ा भीड़ थी, क्योंकि यहां पर महाकाल के दर्शन करने के लिए लोग थोड़ा रुक जाते हैं। मगर हम लोगों को बहुत अच्छे से दर्शन मिल गए थे। हम लोग ऊपर वाले फ्लोर से भी भगवान शिव के दर्शन कर लिए थे और गर्भ ग्रह के सामने से आकर भी शिव भगवान जी के दर्शन कर लिए थे। महाकाल के दर्शन करके हम लोगों को बहुत अच्छा लगा। 

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का, जो गर्भ ग्रह था। वह पूरा चांदी का बना हुआ था और बहुत सुंदर लग रहा था। गर्भ ग्रह की दीवार चांदी की बनी हुई है और इसमें त्रिशूल, कलश, स्वास्तिक जैसी आकृतियां पूरी दीवार में बनी हुई है। गर्भ ग्रह का, जो प्रवेश द्वार है। उसका ऊपरी सिरा चांदी का बना हुआ है और उसमें सूर्य, चंद्रमा के बीच में शिव भगवान जी का शिवलिंग बना हुआ है, और कलश बना हुआ है एवं शुभ और लाभ लिखा हुआ है। महाकालेश्वर मंदिर में विराजमान शिवलिंग दक्षिण मुखी है, अर्थात इनकी मुख दक्षिण की तरफ है। तंत्र साधना में इनकी पूजा की जाती है। गर्भ ग्रह में आले बने हुए हैं, जिसमें गणेश जी, कार्तिकेय जी और पार्वती जी की प्रतिमाएं विराजमान है। गर्भ ग्रह के बाहर नंदी भगवान जी की प्रतिमा विराजमान थे और ज्योतिर्लिंग के ऊपर चांदी का छत्र चढ़ा हुआ था। हम लोगों ने, जो प्रसाद लाए थे। उस प्रसाद में से पंडित जी ने फूल और बेलपत्र रख लिए थे और प्रसाद हम लोगों को दे दिया था। यहां पर बहुत सारे पंडित जी लोग भी बैठे थे, जो यहां पर पूजा पाठ करवाते थे। अगर आपको यहां पर शिव भगवान जी का अन्य पूजा पाठ करवाना है या मंत्र जाप करवाना है, तो आप वह भी यहां पर करवा सकते हैं। उन पूजा के कुछ अलग से चार्ज रहते हैं। वह चार्ज देकर आप पूजा पाठ करवा सकते हैं। 

हम लोग महाकाल के दर्शन करके बाहर आए। बाहर यहां पर महाकाल मंदिर के बाजू से ही ओमकारेश्वर मंदिर बना हुआ है। यह मंदिर 3 मंजिला है और इस मंदिर के सबसे ऊपरी सिरे में नागचंद्रेश्वर मंदिर बना हुआ है। नागचंद्रेश्वर मंदिर नाग पंचमी के दिन ही खोला जाता है। यह साल में एक ही दिन खुलता है। नागचंद्रेश्वर मंदिर बहुत सुंदर है और प्राचीन है। इस के निचले हिस्से में शिव भगवान जी के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। ओमकारेश्वर में विराजमान शिव भगवान जी का प्रतिरूप यहां पर देखने के लिए मिलता है। पहले जब मैं महाकालेश्वर नहीं घूमी थी। तब मैं मुख्य मंदिर इसी मंदिर को समझती थी। मगर यह मुख्य मंदिर नहीं है। 

ओमकारेश्वर मंदिर पर भी शिव भगवान जी के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। यहां पर पंडित जी सिक्के दे रहे थे, जिसमे शिवलिंग की आकृति बनी थी। यहां पर सिक्के लेने के लिए आपको 101 रूपए देने थे और वह आपको सिक्के देते हैं। हम लोगों को वह नहीं चाहिए थे, तो हम लोगों ने नहीं लिया। बाकी यहां पर बहुत सारे भक्त भगवान शिव के दर्शन करने के लिए आए थे और यह मंदिर बहुत ही सुंदर लग रहा था। मंदिर का, जो ऊपर का शिखर था। वह बहुत ही गजब तरीके से बना हुआ था और इसमें बहुत सारे कबूतर और तोते ने बसेरा लिया था। सुबह सुबह के समय यहां पर बहुत ज्यादा चहल-पहल थी और कबूतर और तोते बहुत आवाज कर रहे थे। 

हम लोग ओमकारेश्वर मंदिर से दर्शन करके बाहर आए, तो हम लोगों को यहां पर पंढरीनाथ मंदिर देखने के लिए मिला। पंढरीनाथ मंदिर भी सुंदर था। महाकालेश्वर मंदिर परिसर में बहुत सारे मंदिर है, जहां पर बहुत सारे देवी देवता विराजमान है और आप सभी भगवानों के दर्शन कर सकते हैं, तो ओमकारेश्वर मंदिर में जाने के बाद हम लोग पंढरीनाथ मंदिर गए। यहां पर स्वप्नेश्वर महादेव मंदिर में था। स्वप्नेश्वर महादेव मंदिर में शिवलिंग विराजमान था और हम लोग ने शिवलिंग के दर्शन किए। स्वप्नेश्वर मंदिर में का अपना महत्व है। इस मंदिर में विराजमान शिवलिंग के दर्शन करने से आपको अगर रात में बुरे सपने आते हैं, तो यह दोष आपका दूर होता है। इसलिए लोग यहां पर आकर शिव भगवान जी के दर्शन करते हैं और उनसे प्रार्थना करते हैं। यहां पर मनकामेश्वर महादेव मंदिर भी देखने के लिए मिलता है। इनका भी अपना महत्व है। इनके दर्शन करने से और प्रार्थना करने से मन में जो भी इच्छा रहती है। वह पूरी होती है। इसलिए यहां पर मनकामेश्वर भगवान जी के दर्शन करने चाहिए। हम लोगों ने भी इनके दर्शन किए थे। 

महाकालेश्वर मंदिर परिसर में अति प्राचीन विश्व प्रसिद्ध श्री साक्षी गोपाल मंदिर भी था और इस मंदिर में राधा, कृष्ण, बलराम और रेवती जी की दुर्लभ प्रतिमाएं विराजमान थी और यह मंदिर महाकालेश्वर मंदिर परिसर के बीचो बीच बना था। तो यहां पर भी हम लोगों ने दर्शन किया। इस मंदिर का महत्व यह, है कि भगवान महाकालेश्वर अपने भक्तों के साथ बहुत व्यस्त रहते हैं। तो आपने महाकालेश्वर भगवान के दर्शन किए और उनसे प्रार्थना कि। इन सभी की जानकारी साक्षी गोपाल मंदिर में लगानी पड़ती है। ताकि भगवान महाकालेश्वर को इसकी जानकारी मिल सके। इसलिए आपका यहां पर दर्शन करना जरूरी है। 

साक्षी गोपाल मंदिर के सामने ही प्राचीन लक्ष्मी नरसिंह मंदिर है। हम लोगों ने लक्ष्मी नरसिंह मंदिर के भी दर्शन किए। यहां पर गणेश जी का मंदिर भी है। गणेश जी भगवान शिव के पुत्र हैं। हमने गणेश जी के दर्शन किए। इसके बाद हमने हनुमान जी के दर्शन किए। यहां पर परिसर में नवग्रह मंदिर भी देखने के लिए मिलता है। नवग्रह मंदिर का भी अपना एक महत्व है। लोगों की ग्रह दशा अच्छी बनी रहे। इसलिए सभी ग्रहों के दर्शन करने चाहिए और उनसे आशीर्वाद लेना चाहिए। 

महाकाल मंदिर के बाजू से ही बाहर जाने के लिए रास्ता बना हुआ है। हम लोग सभी मंदिरों के दर्शन करके महाकाल मंदिर से बाहर आए। यहां पर हम लोग को अनादिकल्पेश्वर महादेव मंदिर देखने के लिए मिला। यह मंदिर भी बहुत सुंदर तरीके से बना हुआ था और इस मंदिर को लेकर एक प्रसिद्ध कहानी है, जो आप यहां पर पढ़ सकते हैं। पूरे उज्जैन में 84 महादेव शिवलिंग विराजमान है। उनमें से अनादिकल्पेश्वर शिवलिंग भी एक है। हर एक शिवलिंग के लिए एक कथा प्रसिद्ध है और वह सभी कथाएं आप यहां पर शिवलिंग के दर्शन करने के साथ-साथ पढ़ सकते हैं। 

अनादिकल्पेश्वर महादेव के दर्शन करने के बाद, हम लोग बाहर आए। तो बाहर हम लोग को महाकालेश्वर संग्रहालय देखने के लिए मिला। इस संग्रहालय में मुख्य रूप से शिव भगवान, जो भी पगड़ी पहनते हैं। उन पगड़ियों को सजा कर रखा था। यहां पर आप यह पगड़ी खरीद भी सकते हैं। इन पगड़ी का मूल्य २५००, ५१००, ३१०० था। यह पगड़िया शिव भगवान जी के श्रृंगार के समय में उन्हें पहनाई जाती थी। यह पगड़ी बहुत सुंदर लगती हैं। यहां पर पीछे की तरफ छोटा सा गार्डन भी बनाया हुआ है। यहां पर बहुत सारे काम करने वाले कर्मचारी बैठे रहते हैं, जो मंदिर की देखभाल करते हैं। उसके बाद हम लोग बाहर आ गए।  

यहां पर बाहर आने वाले रास्ते में, हम लोगों को सामान बेचने वाले मिले हैं। यहां पर कंगन, चूड़ी, ब्रेसलेट और अंगूठी एक व्यक्ति बेच रहा था। तो हम लोगों ने कंगन ले लिया। मगर वह कंगन हम लोगों को बहुत महंगे मिले। वही कंगन हम लोगों को बाहर बहुत सस्ते में मिल रहा था। यहां पर कुछ किन्नर लोग भी दान मांग रहे थे। हम लोगों ने उन्हें भी दान किया और यहां पर बहुत सारे भिखारी लोग भी बैठे हुए थे, जो दान मांग रहे थे। हम लोग बाहर आ गए और यहां पर प्रसाद वाले के पास जाकर हम लोग बैठ गए और अपने जूते चप्पल पहने और अन्य मंदिर घूमने के लिए चल दिए। 



उज्जैन महाकाल की आरती - Ujjain Mahakal ki Aarti

उज्जैन महाकाल की आरती बहुत प्रसिद्ध है और जो भी लोग उज्जैन घूमने के लिए जाते हैं। वह महाकाल की आरती में जरूर शामिल होना चाहते हैं। उज्जैन के महाकाल की आरती सुबह और शाम को सामान्य तौर पर होती है। अगर आप साधारण आरती में शामिल होना चाहते हैं, तो आप सुबह और शाम के समय जाकर आरती में शामिल हो सकते हैं। हम लोग जब यहां पर सुबह 7:00 या 7:30 बजे के करीब यहां पर आए थे। तब यहां पर आरती हो रही थी और हम लोगों को यहां पर लाइव महाकाल जी की आरती देखने का मौका मिल गया था। तो आप यहां पर साधारण आरती में शामिल हो सकते हैं। 


उज्जैन महाकाल भस्म आरती - Ujjain Mahakal Mandir Bhasma Aarti

उज्जैन महाकाल की सबसे फेमस, जो आरती है। वह भस्म आरती है। भस्म आरती के लिए आपको पहले से ही बुकिंग करवानी पड़ती है। महाकाल की भस्मा आरती ताजी भस्म की राख से की जाती है। अर्थात चिता की जलती हुई राख से ही आरती की जाती है। इस आरती में शमिल होने के लिए बहुत सारे भक्त आते हैं। यह आरती रात के समय 4 बजे करीब होती है और 2 बजे से ही लोग यहां पर आकर लाइन लगा देते हैं। 

भस्म आरती में शामिल होने के लिए ऑनलाइन बुकिंग करनी पड़ती है, जो आप महाकालेश्वर मंदिर की ऑफिशियल वेबसाइट में जाकर इसकी बुकिंग कर सकते हैं और इस आरती की बुकिंग आपको 15 दिन पहले ही करनी पड़ती है। आपको तुरंत ही इस आरती में शामिल होने के लिए नहीं मिलता है।


महाकाल मंदिर के पास भंडारा - Bhandara near Mahakal temple

महाकाल मंदिर के पास में ही खाने पीने की अच्छी व्यवस्था है और आपको यहां पर निशुल्क (फ्री) खाना मिल जाता है। यहां पर अन्न क्षेत्र है, जहां पर पेट भर के खाना मिल जाता है और सात्विक खाना मिलता है। यहां पर खाना सुबह 11 बजे से शुरू होता है और शाम तक रहता है। मगर हम लोग यहां पर खाना नहीं खा पाए थे। क्योंकि हम लोग बहुत जल्दी आ गए थे और खाना उस समय नहीं मिल रहा था। इसलिए अगर आप यहां कभी जाते हैं और आपको यहां पर खाना खाने का मौका मिले, तो आप जरूर यहां पर खाइएगा। 


उज्जैन की अन्य शहरों से दूरी - Distance of Ujjain from other cities

उज्जैन से भोपाल कितना दूर है (How far is Ujjain to Bhopal)

उज्जैन की भोपाल से दूरी करीब 200 किलोमीटर है। भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी है। भोपाल से उज्जैन जाने के लिए बहुत अच्छी सड़क उपलब्ध है। भोपाल से आप उज्जैन सड़क माध्यम और रेल माध्यम से आ सकते हैं। हमारा पूरा सफर सड़क माध्यम से ही रहा है। इसलिए भोपाल से उज्जैन तक की सड़क बहुत ही अच्छी है और यहां पर करीब 2 या 3 टोल नाका पड़ता है। यहां पर रास्ते में पवन चक्की भी देखने के लिए मिल जाती हैं। आप भोपाल से उज्जैन आते हैं, तो आपको सबसे पहले सीहोर, आष्टा, सोनगिरी, देवास और फिर आपका उज्जैन आता है। 


उज्जैन से ओंकारेश्वर कितने किलोमीटर है (Ujjain Mahakaleshwar Temple To Omkareshwar Distance)

उज्जैन से ओम्कारेश्वर की दूरी करीब 140 किलोमीटर है। उज्जैन से ओम्कारेश्वर कैसे जा सकते हैं। उज्जैन से ओम्कारेश्वर बहुत आसान है। आप या तो सड़क माध्यम से ओम्कारेश्वर जा सकते हैं और या तो ट्रेन के माध्यम से ओम्कारेश्वर जा सकते हैं। हम लोग सड़क के माध्यम से ओम्कारेश्वर गए थे। हम लोग डायरेक्ट उज्जैन से ओम्कारेश्वर नहीं गए थे। हम लोग उज्जैन से पहले इंदौर गए थे और इंदौर से फिर हम लोग ओमकारेश्वर गए थे। उज्जैन से ओम्कारेश्वर के लिए बस सुविधा भी चलती है, तो आप बस के द्वारा भी ओमकारेश्वर घूमने जा सकते हैं। बस का किराया साधारण रहता है। आप उज्जैन से ओम्कारेश्वर ट्रेन से भी जा सकते हैं, जो आपको काफी कम मूल्य में पड़ता है। 

ओमकारेश्वर जाने वाला रास्ता बहुत सुंदर है और सड़क माध्यम से हम लोग ओमकारेश्वर गए थे। इंदौर से ओम्कारेश्वर के रास्ता पूरा जंगल वाला है और यहां पर दो घाटी भी पड़ती हैं। जिसमें आपको गाड़ी बहुत संभाल के चलाने की जरूरत रहती है, नहीं तो आपकी गाड़ी का एक्सीडेंट हो सकता है। बाकी यहां पर बहुत मजा आता है। 


उज्जैन से इंदौर कितना किलोमीटर दूर है (How far is Indore from Ujjain)

उज्जैन से इंदौर की दूरी करीब 50 किलोमीटर है। इंदौर से उज्जैन तक आने के लिए बहुत अच्छी सड़क है और हम लोग यहां पर रात के समय अपनी स्कूटी से आए थे, तो काफी अच्छा सड़क है और आराम से पहुंचा जा सकता है। 


उज्जैन से देवास कितने किलोमीटर है (How far is Dewas from Ujjain)

उज्जैन से देवास की दूरी करीब 40 किलोमीटर है। उज्जैन से देवास के लिए सड़क बहुत अच्छी है और आप सड़क के माध्यम से उज्जैन से देवास पहुंच सकते हैं। 


उज्जैन की नलखेड़ा से दूरी करीब 100 किलोमीटर है और आप सड़क के माध्यम से यहां पर आ सकते हैं। 

उज्जैन की शाजापुर से दूरी करीब 60 किलोमीटर है और यहां पर सड़क के माध्यम से आप  सकते हैं। 

उज्जैन की धार से दूरी करीब 120 किलोमीटर है और यहां पर सड़क के माध्यम से आया जा सकता है। 

उज्जैन की महेश्वर से दूरी करीब 140 किलोमीटर है और आप यहां पर सड़क के माध्यम से आ सकते हैं। 


उज्जैन का कुंभ मेला - Ujjain ka Kumbh Mela

उज्जैन कुंभ का मेला हर 12 वर्ष में एक बार लगता है। यहां पर त्रिवेणी संगम पर कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है। यहां पर शिप्रा नदी और गंडक नदी का संगम होता है। सरस्वती नदी गुप्त रूप से इन नदियों से मिलती है। इसलिए इसे त्रिवेणी संगम कहा जाता है। हर 12 वर्ष में लोग यहां पर स्नान करने के लिए आते हैं, जो बहुत शुभ माना जाता है। यहां पर आपको रामघाट देखने के लिए मिलता है, जो शिप्रा नदी के किनारे है। रामघाट के पास ही में  महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग विराजमान है। महाकाल के मंदिर के पास हमेशा वैसे मेले वाला माहौल रहता है। यहां पर प्रसाद और बहुत सारी सामग्रियां मिलती रहती है। मगर आप उज्जैन कुंभ मेला के समय आएंगे। तब आपको और भी अच्छा लगेगा। 


उज्जैन में धर्मशाला - Dharamshala near Mahakal Mandir Ujjain

उज्जैन के महाकाल मंदिर में हर दिन हजारों की संख्या में भक्त महाकाल के दर्शन करने के लिए आते हैं। यहां पर लोगों के ठहरने के लिए बहुत सारी धर्मशालाएं है। इसके अलावा यहां पर बहुत सारे होटल भी हैं, जहां पर लोग बहुत कम कीमत पर ठहर सकते हैं। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर के आसपास स्थित प्रसिद्ध धर्मशालाओं 

महाकाल धर्मशाला 

श्री महाकालेश्वर भक्त निवास 

यह दोनों धर्मशाला बहुत फेमस है और यह दोनों धर्मशाला में आप ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं। 


उज्जैन महाकाल मंदिर का रहस्य - Mystery of Ujjain Mahakal Temple

उज्जैन के महाकाल मंदिर में विराजमान शिवलिंग दक्षिणमुखी होने के कारण इस शिवलिंग की पूजा तांत्रिक विधि से की जाती है और यहां पर तांत्रिक पूजा का बहुत महत्व है। जो यहां पर भस्म आरती होती है। वह चिता की राख से होती है।  यह एक रहस्यमई बात है, कि भोले भंडारी का यह शिवलिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक मात्र ऐसा शिवलिंग है, जिनकी पूजा तांत्रिक विधि से होती है। 


महाकाल मंदिर के आसपास अन्य प्रसिद्ध मंदिर - Other Famous Temples Around Mahakal Temple

महाकाल मंदिर के आस पास बहुत सारे प्रसिद्ध मंदिर है, जहां पर आप पैदल घूम सकते हैं। महाकाल मंदिर के आसपास फेमस मंदिर - हरसिद्धि माता का मंदिर, सिहासन बत्तीसी, चिंतामन गणेश मंदिर, भारत माता मंदिर, चार धाम मंदिर, साक्षी गोपाल मंदिर, 24 खंबा मंदिर, बड़ा गणेश मंदिर, रामघाट, भूखी माता मंदिर, गुरुद्वारा श्री गुरु नानक साहिब। 


उज्जैन में महाकाल का मंदिर कहां पर है - Where is Mahakaleshwar Temple in Ujjain

उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर बहुत प्रसिद्ध है। उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर रुद्र सागर के पास में स्थित है। आपको उज्जैन में हर जगह पर साइन बोर्ड देखने के लिए मिल जाते हैं, जिसमें मंदिर की ओर जाने के लिए रास्ता आराम से मिल जाता है। आप आराम से मंदिर तक आ सकते हैं। उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन रेलवे स्टेशन से करीब 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आप उज्जैन के रेलवे स्टेशन से महाकालेश्वर मंदिर पैदल या ऑटो से आ सकते हैं। 

महाकालेश्वर मंदिर के बाहर आपको बहुत सारे ऑटो देखने के लिए मिल जाते हैं, जो आपको पूरे उज्जैन के मंदिरों के दर्शन करवा देते हैं। अर्थात वह आपको उज्जैन भ्रमण करवा देते हैं और उनका एक फिक्स प्राइस रहता है, जिसमें वह आपको उज्जैन के मंदिरों के दर्शन करवा देते हैं। उज्जैन में बहुत सारे मंदिर हैं, जिनके आप दर्शन कर सकते हैं और हर मंदिर को लेकर अलग-अलग कहानी प्रसिद्ध है। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर के बाहर ही ऑटो वाले छोटा सा कार्ड लेकर घूमते रहते हैं, जिसमें उज्जैन के जितने भी दर्शनीय स्थल है। उन सभी दर्शनीय स्थलों को वह आपको दिखाते हैं, तो आप ऑटो में बैठकर पूरा उज्जैन घूम सकते हैं। 


उज्जैन महाकाल मंदिर की फोटो - Ujjain Mahakal Mandir image




महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन - Mahakaleshwar Mandir Ujjain
महाकालेश्वर मंदिर 


महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन - Mahakaleshwar Mandir Ujjain
ओमकारेश्वर और नागचंद्रेश्वर मंदिर


महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन - Mahakaleshwar Mandir Ujjain
मंदिर का शिखर 


महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन - Mahakaleshwar Mandir Ujjain
पंढरीनाथ मंदिर





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