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सोलह खंबा नरसिंहगढ़ - Solah Khamba Narsinghgarh

हाजी अली दरगाह और 16 खंभा नरसिंहगढ़ 
Haji Ali Dargah and Solah Khamba Narsinghgarh



16 खंबा और हाजी वली दरगाह नरसिंहगढ़ की एक प्रमुख जगह है। यह एक प्राचीन पर्यटन स्थल है। यहां पर आपको प्राचीन दरगाह देखने के लिए मिल जाएगी और यहां पर 16 खंभे बने हुए हैं, जो पत्थर के बने हुए हैं और जिनमें बहुत ही सुंदर नक्काशी की गई है। 16 खंबा और हाजी वली दरगाह एक पहाड़ी पर बनी हुई है। इस पहाड़ी तक जाने के लिए सड़क बनी हुई है और सड़क में बड़े-बड़े पत्थर भी बिछे हुए हैं, तो आप दरगाह तक और 16 खंभों तक कार या बाइक से आराम से जा सकते हैं। हम लोग अपने सफर में नरसिंहगढ़ भी घूमने गए थे। हम लोग भोपाल से नरसिंहगढ़ गए थे। भोपाल से नरसिंहगढ़ करीब 100 किलोमीटर है। नरसिंहगढ़ के 16 खंभा जो एक पुरातात्विक साइट है। वहां पर जाने के लिए हम लोग गांव का रास्ता ले लिया था।  

हम लोगों को गूगल मैप में, जो रास्ता बताया। हम लोग उसी रास्ते में चल दिए थे और हम लोगों को गांव वाला रास्ता काफी पास में लगा, कि हम लोग जल्दी पहुंच जाएंगे। इसलिए हम लोग वहां से चल दिए। मगर गांव वाले रास्ते में हम लोगों को सड़क थोड़ी बेकार मिली। मगर हम लोग का, जो घूमने का एक्सपीरियंस था। वह बहुत अच्छा था, क्योंकि इस रास्ते में हम लोग को खेत देखने के लिए मिले और छोटे बड़े तालाब देखने के लिए मिले। यहां पर पानी का, जो लेवल है। भूमिगत जल का लेवल बहुत ही अच्छा है और सुबह 9 या 10 बजे के टाइम था। सुबह-सुबह लोग यहां पर खेतों में आकर काम कर रहे थे। वैसे कुछ लोगों से, जो खेतों में काम कर रहे थे। उन लोगों से हम लोगों ने रास्ता भी पूछा। क्योंकि यहां पर जो खेत की मेड रहती है। गूगल ने हम लोग को वह वाला रास्ता दिखा दिया था। इसलिए हम लोगों ने यहां पर लोगों से रास्ता पूछा। यहां के गांव वाले जो लोग थे। वह भी बहुत अच्छे थे। उन्होंने हम लोग को बहुत अच्छी तरह से रास्ता गाइड किया, कि आप ऐसे जाइए। तो हम लोग यहां पर एक्सपीरियंस बहुत अच्छा रहा है। हम लोग यह सभी चीजें देखते हुए 16 खंबा पहुंच गए। 

हम लोग 16 खंबा पहुंच गए। 16 खंबा पहुंचकर सबसे पहले हम लोगों को हाजी वली दरगाह देखने के लिए मिली। दरगाह के बाहर एक कब्र बनी हुई थी। यह कब्र भी प्राचीन थी। यह दरगाह 16वीं शताब्दी की है और यहां पर जब हम लोग गए थे। तब यहां पर बहुत कम लोग थे। यहां पर तो हम लोगों को दरगाह के अंदर जाने में थोड़ा सा हिचकिचाहट लग रही थी। मगर मेरे साथ, जो मेरे साथी थे। उन्होंने बोला, कि चलो चलते हैं, घूम के आते हैं। कुछ होगा, तो फिर देखा जाएगा। तो हम लोग फिर अंदर गए। यहां पर जो दरगाह बनी हुई है। वह दो मंजिला है। ऊपर वाली मंजिल में दरगाह बनी हुई है। नीचे वाली मंजिल में बहुत बड़ा हॉल है और इसमें पूरे हॉल में बहुत ही सुंदर खंबे लगे हुए हैं और बहुत खूबसूरत लगता है। ऊपर जाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है। 

दरगाह ऊपर वाले मंजिल में है और दरगाह के बीच में आम का पेड़ लगा हुआ है और चारों तरफ से दरगाह दीवारों से कवर है। यहां पर हम लोगों को बहुत तेज गुलाबों की खुशबू आ रही थी। मैंने दरगाह के दर्शन किए। उसके बाद हम लोग नीचे आ गए। यहां पर सिक्योरिटी वगैरा के लिए एक दादा जी बैठे हुए थे। जो इस जगह की देखभाल कर रहे थे और जो भी पर्यटक यहां घूमने के लिए आते। वह उन्हें गाइड कर रहे थे, कि जूते वगैरह नीचे उतारिए। पानी नीचे है, वगैरह, वगैरह। इस तरह की वह जानकारी दे रहे थे। यहां पर छोटा सा गार्डन बना हुआ है। फूल पत्ती लगे हुए हैं। 

हाजी वली दरगाह और 16 खंबे वाली पहाड़ी में चारों तरफ आपको सीताफल के पेड़ की आबादी देखने के लिए मिल जाती है और यहां पर दीवारों में लिखा भी गया है, कि सीताफल ना तोड़े।  हम लोग जिस टाइम यहां पर गए थे। उस टाइम यहां पर बहुत ज्यादा सीताफल निकल रहे थे। मगर हम लोगों ने नहीं तोड़ा, क्योंकि हम लोगों को बहुत ज्यादा सफर करना था। 

हाजी वली दरगाह के बाजू में 16 खंबा स्मारक है। यह स्मारक भी बहुत खूबसूरत है और यह स्मारक 10 वीं शताब्दी में बनी हुई है। यहां पर हाजी वली दरगाह और 16 खंबा के बारे में किसी भी प्रकार की ऐतिहासिक जानकारी हम लोगों को पढ़ने के लिए नहीं मिली। बस इन स्मारकों के नाम लिखे हुए थे और इनकी दिनांक लिखी हुई थी। हम लोग दरगाह घूमने के बाद 16 खंबे गए। 16 खंबे एक ऊंचे मंडप के ऊपर बने हुए थे। यहां पर चारों तरफ बाउंड्री वॉल बना दिया गया है और 16 खंबे काफी सुंदर लग रहे थे और खंभों के ऊपरी सिरों में डिजाइन बने हुए थे, जो बहुत ही आकर्षक लग रहे थे। 

हम लोगों ने इन खंभों की बहुत सारी फोटो क्लिक करें। यहां पर बहुत शांति थी। जिस टाइम हम लोग यहां पर घूमने के लिए गए थे। उस टाइम यहां पर कोई भी नहीं था। यहां पर हम लोगों को दो व्यक्ति और देखने के लिए मिले, जो शायद यहां पर रुके हुए थे और वह पति पत्नी थे और बूढ़े थे।  वह यहां खाना बना रहे थे। हम लोगों ने इस जगह की फोटो ली और कुछ देर यहां पर बैठे। यहां बहुत अच्छा लगा। यह बहुत शांति थी और उसके बाद हम लोग अपने सफर में आगे की तरफ बढ़ गए। अब हम लोग को नरसिंहगढ़ में और कौन-कौन सी फेमस जगह थी। उनके बारे में पता करना था और जाना था। 

नरसिंहगढ़ में बहुत सारी फेमस जगह हैं, जो लोगों को पता नहीं है। मगर वह अपने आप में ही बहुत खूबसूरत हैं, तो हम लोगों ने वहां के लोकल लोगों से पूछा, की यहां पर और कौन-कौन सी जगह जाया जा सकता है, तो हम लोगों को एक व्यक्ति ने बताया, कि आप श्याम सांका जी का मंदिर जाइए, बहुत अच्छा है और कोटरा वाली माता जी का मंदिर जाना चाहिए। वह भी बहुत अच्छा है। यहां पर पार्वती नदी पर बांध भी बन रहा है, जो बहुत सारे लोग देखने के लिए जाते हैं। हमें उस जगह जाने की भी सलाह दी, मगर उन्होंने यह भी बताया, कि वहां जाने के लिए रोड अच्छी नहीं है। इसलिए हम लोग ने पार्वती नदी पर बनने वाले बांध में जाने की योजना को कैंसिल कर दिया। बाकी दो जगह श्याम सांका जी मंदिर और कोटरा वाली माता का मंदिर जाने का योजना बनाई और अपने आगे के सफर की तरफ बढ़ चले। 


16 खंभा नरसिंहगढ़ की फोटो - Photos of 16 Pillar Narsinghgarh


सोलह खंबा नरसिंहगढ़ - Solah Khamba Narsinghgarh


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