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चित्रकूट दर्शनीय स्थल - Chitrakoot tourist places | Best places to visit in chitrakoot

चित्रकूट में घूमने की जगहें - Chitrakoot dham tourist place | Chitrakoot famous places


रामघाट चित्रकूट - Ramghat chitrakoot

चित्रकूट के घाट में भई संतन की भीर तुलसीदास चंदन घिसे तिलक देत रघुवीर 

चित्रकूट में स्थित रामघाट सबसे प्रसिद्ध स्थानों में से एक है। रामघाट मंदाकिनी नदी के किनारे में स्थित है।  रामघाट चित्रकूट के प्रमुख घाटों में से एक है। आप रामघाट में मंदाकिनी नदी में स्नान करके अपने आप को बहुत ही तरोताजा महसूस करेंगे। शाम को और सुबह रामघाट में मंदाकिनी नदी की आरती की जाती है, जो बहुत ही भव्य रहती है। इस आरती में आपको जरूर शामिल होना चाहिए। आपको बहुत अच्छा लगेगा आरती में शामिल होकर। इस घाट के बारे में मान्यता है कि राम घाट पर ही तुलसीदास जी को श्री राम जी के दर्शन हुए थे। इस घाट पर आप नाव की सवारी का भी मजा ले सकते हैं। शाम के समय नाव की सवारी का मजा ही अलग होता है। रामघाट के बारे में कहा जाता है, कि रामघाट में श्री राम जी ने स्नान किया था। इसलिए इस घाट को रामघाट कहा जाता है। 

मत्यगजेंद्र नाथ शिव मंदिर - Matyagendra Nath Shiva Temple

मत्यगजेंद्र नाथ शिव मंदिर रामघाट में स्थित प्राचीन मंदिर है। यह मंदिर शिव भगवान जी को समर्पित है। इस मंदिर की स्थापना जब राम भगवान जी वनवास काल के दौरान चित्रकूट आए थेए तब की गई थी। इस मंदिर में सावन सोमवार में और महाशिवरात्रि में बहुत भारी संख्या में लोग शिव भगवान जी के दर्शन करने के लिए आते हैं। 

जानकी कुंड चित्रकूट - Janki kund chitrakoot

जानकी कुंड चित्रकूट में घूमने की एक प्रसिध्द जगह है। जानकी कुंड प्रमोद वन के करीब स्थित है। जानकी कुंड रामघाट से 2 किमी दूर है। यहां पर आपको प्रकृति का बहुत ही खूबसूरत व्यू देखने के लिए मिलता है। जानकी कुंड मंदाकिनी नदी के बाएं किनारे स्थित है। यहां का पानी स्वच्छ एवं पारदर्शी है। यहां पर आप चट्टानों में बैठकर इस जगह का आनंद ले सकते है। सीता माता को जानकी के नाम से भी जाना जाता थाए क्योंकि वह जनक पुत्री थी। इसलिए इस कुंड को भी जानकीकुंड कहा जाता है। सीता माता अपने वनवास काल के दौरान यहां स्नान किया करती थी। नदी के किनारे पर सीता माता जी के चरण कमल चट्टानों पर बने है, जिनके दर्शन आप कर सकते हैं। यहां पर एक हनुमान मंदिर भी स्थित है। जानकी कुंड के पास में राम जानकी रघुवीर मंदिर और संकट मोचन मंदिर है। 


राम दर्शन चित्रकूट - Ram darshan chitrakoot

राम दर्शन चित्रकूट में स्थित एक मंदिर है। यह चित्रकूट में घूमने की एक अच्छी जगह है। यहां पर प्रवेश का शुल्क लिया जाता है। युवा का 10 रू और बच्चों का 5 रू लिया जाता है। यहां पर आपको श्री राम, लक्ष्मण और सीता जी के बारे में जानकारी मिलेगी। यहां पर आप आकर राम भगवान जी के बहुत सारी पेंटिंग देख सकते हैं और उनके जीवन के बारे में जान सकते हैं। यहाँ पर आप विभिन्न देशों की विभिन्न प्रकार के रामायण के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यहां पर आपको प्रवेश द्वार पर ही हनुमान जी की एक बहुत बड़ी मूर्ति देखने के लिए मिलती है, जो लोगों को आकर्षित करती हैं। यहां पर यात्रा का समय सुबह से लेकर शाम के 4रू30 बजे तक रहता है। राम दर्शन रामघाट से करीब 5 किलोमीटर की दूरी पर होगा। आप यहां पर आसानी से आ सकते हैं। राम दर्शन स्फटिक शिला के पास ही में स्थित है। मंदिर के अंदर मोबाइल फोन और कैमरा ले जाने की अनुमति नहीं है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर मुफ्त लॉकर सुविधा उपलब्ध है।

स्फटिक शिला चित्रकूट - Sphatik shila chitrakoot

स्फटिक शिला चित्रकूट में घूमने वाली एक सुंदर जगह है। इस जगह में आपको मंदाकिनी नदी का दर्शनीय व्यू देखने के लिए मिलता है। स्फटिक शिला मंदाकिनी नदी के किनारे स्थित है। यहां पर नदी का दृश्य बहुत अच्छा रहता है। यहां पर आपको बंदर भी देखने के लिए मिलते हैं। आप यहां पर आसानी से आ सकते हैं। इस जगह में आपको एक चट्टान देखने मिलती है, जिसमें सीता माता और राम जी के चरण चिन्ह उभरे हुए हैं। यहां पर पंडित जी बैठे रहते हैं और आप यहां पर आते हैं, तो वह आपको यहां पर बैठने के लिए कहते हैं और आपको कथा सुनाते हैं। कहा जाता है की सीता माता और राम जी यहां पर अपने वनवास काल के दौरान रुके थे। वह अपना खाली समय यहां पर प्रकृति के पास बैठकर बिताया करते थे। यहीं पर उन्होंने मानव रूप में कई लीलाएं की। इस स्थान पर राम जी ने फूलों से बने आभूषणों से मां सीता का श्रृंगार किया था। एक बार इंद्र के पुत्र जयंत ने कौवे का रूप धारण करके सीता माता के पैर में चोंच मार दी, जिससे सीता माता को खून निकलने लगा। यह सब देखकर राम जी क्रोधित हो गए और श्री राम जी ने जयंत को घास का एक तिनका तीर से  मारा, जो उसकी आंख में लगा और उसकी एक आँख घयाल हो गई। उस समय से कहा जाता है कि कौवे को एक आंख में कम दिखाई देता है। आपको यहां का दृश्य बहुत अच्छा लगेगा। नदियां और चट्टानें का मेल बहुत ही अद्भुत है। स्फटिक शिला रामघाट से करीब 5 किलोमीटर दूर होगा। स्फटिक शिला के पास ही में यज्ञ स्थली और हनुमान जी का मंदिर भी हैए उसके दर्शन भी आप कर सकते हैं। 

कामदगिरि चित्रकूट - Kamadgiri chitrakoot

कामदगिरि चित्रकूट का एक मुख्य पर्यटन आकर्षण है। कामदगिरि में देखने के लिए आपको एक पर्वत मिलता है।इस पर्वत को कामदगिरि पर्वत कहते हैं। इस पर्वत की परिक्रमा करनी पड़ती हैए जिससे आपको पुण्य लाभ मिलता है। कामदगिरि पर्वत के आस पास बहुत सारे प्राचीन मंदिर है, जिन्हें आप देख सकते हैं, जिनका संबंध राम, लक्ष्मण और सीता जी से है। कामदगिरि शब्द संस्कृत का है और कामदगिरि का अर्थ होता है। वह पर्वत जो सभी इच्छाओं को पूरा करता है। 

श्री कामता नाथ मंदिर चित्रकूट धाम - Kamtanath mandir chitrakoot dham

कामत नाथ मंदिर चित्रकूट में कामदगिरि पहाड़ में स्थित है। यह मंदिर बहुत ही भव्य है। कामतनाथ भगवान राम का ही एक रूप है और यह पूरे चित्रकूट के इष्टदेव है। मंदिर का प्रवेश द्वार भी बहुत खूबसूरत है। मंदिर में आपको काले रंग की कामत नाथ जी की प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। यह चित्रकूट के मुख्य देवता हैं। जो भी चित्रकूट में आता है। वह पहले इस मंदिर में कामत नाथ जी के दर्शन करता है, उसके बाद परिक्रमा प्रारंभ करता है। यहां पर आपको प्रसाद की दुकान बाहर मिल जाती है, जहां से आप प्रसाद ले सकते हैं और भगवान को प्रसाद अर्पण कर सकते हैं। 

कामदगिरि परिक्रमा - Kamadgiri parikrama chitrakoot

चित्रकूट में कामदगिरि की परिक्रमा करने से पुण्य लाभ अर्जित होता है। यह परिक्रमा मार्ग करीब 5 किलोमीटर लंबा है। परिक्रमा की शुरुआत कामदगिरि मंदिर के दर्शन के बाद होती है। परिक्रमा मार्ग हरे भरे पेड़ों से घिरा हुआ है। यहां पर ढेर सारे मंदिर भी हैं। यह परिक्रमा मार्ग पूरी तरह से पक्का बना हुआ है और इस मार्ग में टीन का शेड भी लगा बना हुआ है। पूरे परिक्रमा मार्ग में आप आसानी से चल सकते हैं। आपको परिक्रमा मार्ग पर पैदल चलना रहता है और नंगे पैर चलना रहता है। आपको परिक्रमा मार्ग में बहुत सारे बंदर भी मिलते हैं, जो आप के सामानों को छीन सकते हैं, तो यहां पर आपको बंदरों से संभल कर रहने की आवश्यकता होती है। परिक्रमा मार्ग में आपको बहुत सारे मंदिर देखने मिलते हैं, जो प्राचीन हैं और राम भगवान जी से संबंधित है। परिक्रमा मार्ग में आपको बहुत सारी दुकानें मिलती हैं और पानी की सुविधा भी मिल जाती है, तो आप आसानी से परिक्रमा पूरी कर सकते हैं। 

सरयू गंगा कुंड - Sarayu Ganga Kund

सरयू गंगा कुंड कामदगिरि परिक्रमा मार्ग पर पड़ता है। यहां पर बैठने की व्यवस्था है। यहां पर एक कुंड बना हुआ है, जिसमें पानी भरा रहता है और यहां पर बैठने की व्यवस्था है। आप यहां बैठकर यहां की शांति का अनुभव कर सकते हैं। 

श्री राम भरत मिलाप चित्रकूट - Shri Ram Bharat Milap Chitrakoot

राम भरत मिलाप मंदिर कामदगिरि परिक्रमा मार्ग पर ही स्थित है। यह एक धार्मिक स्थान होने के साथ-साथ एक ऐतिहासिक स्थान भी है। इस मंदिर में आपको श्री राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के चरणों के चिन्ह चट्टानों पर उभरे हुए देखने के लिए मिलते हैं। कहा जाता है कि जब भरत जी को पता चला कि राम जी अयोध्या छोड़कर वनवास चले गए हैं, तो राम जी को पुनः वापस लाने के लिए भरत जी वन की तरफ गए और राम जी  से भरत जी कामदगिरि पहाड़ पर मिले। राम और भरत के मिलाप से ही जो यहां की चट्टानें थी। वह पिघल गई और उनके चरण चिन्ह चट्टानों पर अंकित हो गए, जो आज भी आप देख सकते हैं। राम भगवान और भरत जी के चरण चिन्ह एक चट्टान पर बने हुए हैं और लक्ष्मण जी और शत्रुघ्न के चरण चिन्ह अलग चट्टान पर बने हुए हैं। इन चट्टानों को संरक्षित रखने के लिए इन्हें अब पक्का बना दिया गया है और चारों तरफ से जाली लगा दी गई है, ताकि लोग इसे देख सके और इन चट्टानों में किसी भी तरह का नुकसान ना पहुंच पाए। आपको यहां पर बहुत सारी पेंटिंग भी देखने के लिए मिलेगीए जो  श्री रामए लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के मिलन का सजीव चित्रण देखना मिलता है।

गणेश बाग चित्रकूट - Ganesh bagh chitrakoot

गणेश बाग चित्रकूट के कर्वी में स्थित एक पर्यटन स्थल है। यह एक ऐतिहासिक स्थल है। यह एक अच्छी जगह है, जो बहुत सारे लोगों को नहीं पता है। गणेश बाग कर्वी देवांगाना मार्ग पर स्थित है। गणेश बाग 19 वी शताब्दी के प्रारंभ में श्रीमंत विनायक राव पेशवा ने अपने मनोरंजन के लिए कराया था। गणेश बाग में आपको एक तालाब देखने के लिए मिलता है। इसके अलावा यहां पर एक 7 मंजिला बावड़ी भी बनी हुई है। इस बावडी में पानी भी भरा हुआ है। यहां पर एक मंदिर बना हुआ है, जिसके दीवारों पर हिन्दू देवी एवं देवता की मूर्तियां बनाई गई है। गणेश बाग मिनी खजुराहो के नाम से जाना जाता है। गणेश बाग शाही परिवार के मनोरंजन के लिए पेशवा द्वारा बनवाया गया था।

सती अनुसुइया मंदिर चित्रकूट - sati ansuya mandir chitrakoot

सती अनसूया मंदिर चित्रकूट का एक पर्यटक स्थल है। यह मंदिर सघन जंगल के बीच में स्थित है और मंदाकिनी नदी के किनारे स्थित है। यहां पर आपको आकर बहुत अच्छा लगेगा, क्योंकि यहां पर आपको प्राकृतिक दृश्य देखने के लिए मिलेगा। ऋषि अत्री सप्तर्षियों में से एक थे। ऋषि अत्री की पत्नी सती अनसूया थी। यह स्थल महर्षि अत्रि एवं माता अनसूया की तपोस्थली रही है। सती अनसूया ने यह पर ही सीता माता को सतीत्व की शिक्षा दी थी। मान्यता है कि माता अनसूया के तपोबल से ही गंगा यहां पर मंदाकिनी नदी के रूप में अवतरित हुई थी। सती अनसूया आश्रम चित्रकूट से करीब 15 किलोमीटर दूर है। और मुख्य मार्ग से यह आश्रम 5 किलोमीटर अंदर है। सती अनसूया आश्रम में आपके देखने के लिए बहुत सारी धार्मिक चीजें हैं। यहां पर आपको बहुत सारे मूर्तियां देखने के लिए मिलती हैं, जो प्राचीन काल के क्रियाकलापों से संबंधित है। यहां पर आपको गीता के श्री कृष्ण जी रथ में सवार हुए अर्जुन को उपदेश देते हुए देखने मिलते हैं। यहां पर मन्दाकिनी नदी  का पानी पारदर्शी है और मछलियां आपको यहां पर देखने के लिए मिलती है। यहां पर आप ऋषि अत्रि की तपोस्थली भी देख सकते हैं। दत्तात्रेय की का आश्रम भी देख सकते हैं। यहां पर परमहंसी आश्रम में आप उसको भी देख सकते हैं। 

भरतकूप मंदिर चित्रकूट - Bharatakoop mandir chitrakoot

भरतकूप चित्रकूट में स्थित एक प्राचीन मंदिर है। आपको यहां पर एक कुआं देखने के लिए मिलता है। इस कुएं को कूप कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि भरत जी अपने साथ सभी पवित्र  तीर्थों से जल लेकर आए थे। श्री राम जी के राज्याभिषेक के लिए मगर राम जी के मना करने के बाद भरत जी ने सभी पवित्र  तीर्थों के जल को इस कूप में डाला दिया।इस स्थल को धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्व है। इस कूप  के जल से स्नान करना पुण्य मिलता है। मान्यता अनुसार इस कूप के जल से स्नान करने से सभी प्रकार के रोग दूर होते हैं। यहां पर आपको श्री राम और भरत जी का पुराना मंदिर देखने के लिए भी मिलता है। 

हनुमान धारा चित्रकूट - Chitrakoot hanuman dhara mandir

हनुमान धारा चित्रकूट का एक पर्यटक स्थल है। यह मंदिर ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। पहाड़ी पर चढ़ने के लिए सीढ़ियां बनाई गई है। पहाड़ी के ऊपर से आपको बहुत ही सुंदर नजारा देखने के लिए मिलता है। हनुमान धारा में हनुमान जी की मूर्ति पहाड़ के बीच में स्थित है और ऊपर से उनके ऊपर झरने का पानी गिरता है, जो देखने में बहुत ही अद्भुत लगता है। कहा जाता है कि प्राचीन समय में जब हनुमान जी ने लंका में आग लगाई थी। तब उस आग की जलन को हनुमान जी को सहन नहीं हो रही है।  उस जलन को मिटने के लिए हनुमान जी राम जी के पास गए। हनुमान जी को राम जी ने सलाह दिया कि आप चित्रकूट के पर्वत में जाइए। हनुमान जी चित्रकूट के पर्वत पर गए और पहाड़ से एक जलधारा फूटी और हनुमान जी को उस जलन से राहत मिली। इस प्रकार यह जगह हनुमान धारा के नाम से प्रसिद्ध है। यहां पर आपको बहुत सारे बंदर भी मिलते हैं, जिन्हें आप चाहे तो खाना दे सकते हैं। चित्रकूटधाम रेलवे स्टेशन से हनुमान धारा की दूरी 10 किलोमीटर होगी। आप रेलवे स्टेशन से अपने निजी वाहन या ऑटो ऑटो से हनुमान धारा आ सकते हैं। 

सीता रसोई चित्रकूट - sita rasoi chitrakoot

सीता रसोई चित्रकूट में स्थित एक प्रसिद्ध जगह है। इसके बारे में कहा जाता है कि सीता जी ने यहां निवास किया था और यहां पर उन्होंने भोजन बनाकर ऋषियों को परोसा था। आप यहां पर आ कर 5 ऋषि की प्रतिमा देख सकते हैं। इसके अलावा आप यहां पर सीता जी के चैका बर्तन देख सकते हैं। सीता रसोई हनुमान धारा के ऊपर स्थित है। यहां पर आकर आपको बहुत अच्छा लगेगा। चारों तरफ नजारा बहुत ही मनोरम है। 

मार्कंडेय आश्रम - Markandeya Ashram

मार्कंडेय आश्रम घने जंगलों के बीच में स्थित भगवान शिव का छोटा सा मंदिर है। यहां पर आप आकर अपना अच्छा समय बिता सकते हैं। यहां पर आपको एक शिवलिंग देखने के लिए मिलता है और यहां पर हनुमान जी की प्रतिमा भी स्थित है। आप यहां आने के लिए मारकुंडी स्टेशन में आ सकते हैं। मारकुंडी स्टेशन से मार्कंडेय आश्रम करीब 1 किलोमीटर दूर होगा आपको यहां पर आकर अच्छा लगेगा। 

शबरी प्रपात चित्रकूट - shabri prapat chitrakoot

शबरी प्रपात चित्रकूट के पास स्थित एक खूबसूरत जलप्रपात है। यह जलप्रपात मध्य प्रदेश और चित्रकूट की सीमा पर स्थित है। आप यहां पर आकर प्राकृतिक नजारे देख सकते हैं और बहुत इंजॉय कर सकते हैं। यह जलप्रपात बरसात के समय पानी से भरा होता है, जो इस जलप्रपात को देखने का उचित समय है। आप यहां पर अपनी फैमिली और दोस्तों के साथ आकर बहुत मजे कर सकते हैं। यह जलप्रपात मंदाकिनी नदी पर बना हुआ है। यहां पर आकर झरने की कलकल आवाज सुनने में अलग ही आनंद आता है। यह जलप्रपात चित्रकूट से करीब 38  किलोमीटर दूर होगा। 

सरभंगा आश्रम चित्रकूट - sarbhanga ashram

सरभंगा आश्रम चित्रकूट के पास स्थित प्राकृतिक जगह है, जहां पर जाकर आपको बहुत अच्छा लगेगा। यह जगह घने जंगलों के बीच में स्थित है। यह जगह प्राकृतिक के साथ-साथ धार्मिक महत्व की हुई है। इस जगह पर सरभंग नाम के एक ऋषि रहा करते थे, जो एक महान तपस्वी थे। उन्हीं के नाम पर इस जगह को सरभंगा आश्रम कहा जाता है। सरभंगा आश्रम का जिक्र आपको रामायण में भी मिलेगा। इस आश्रम में वनवास काल के दौरान श्री राम जी सरभंग मुनि से मिलने के लिए आए थे। राम जी से मिलने के पश्चात सरभंग मुनि ने अपनी चिता स्वयं सजाया था एवं उसमें ब्रह्मलीन हो गए थे। सरभंगा आश्रम चित्रकूट से लगभग 40 किमी दूर है। सरभंगा आश्रम में आपके देखने के लिए बहुत सारी जगह है। आप यहां पर प्राचीन शिवलिंग देख सकते हैं, जो पत्थरों के बने हुए हैं। आपको यहां पर राम जी और सीता जी का मंदिर देखने मिलता है। यहां पर बरसात के समय झरना बहता है। वह भी देख सकते हैं। यहां पर कुंड बना हुआ है, जहां पर आप नहा सकते हैं। यहां पर आप सरभंग मुनि की प्रतिमा देख सकते हैं और जंगल का दृश्य है देखने लायक है। 

गुन्ता बांध चित्रकूट - Gunta Dam Chitrakoot

गुन्ता बांध चित्रकूट में स्थित एक अच्छी जगह है। गुन्ता बांध चित्रकूट के पास स्थित एक खूबसूरत जलाशय है। यह जगह ज्यादा फेमस नहीं है, मगर आप यहां पर आकर सूर्यास्त देख सकते है, जो बहुत ही मनोरम होता है। यह जलाशय मुख्य रूप से सिंचाई के लिए बनाया गया है। और आप यहां पर आ कर इसकी खूबसूरती देख सकते हैं। 

गुप्त गोदावरी चित्रकूट - Gupt godavari chitrakoot dham

गुप्त गोदावरी चित्रकूट की एक बहुत ही मनोरम जगह है। यहां पर आपको दो गुफाएं देखने के लिए मिलती हैए जिसमें कहा जाता है कि पुराने समय में यहां पर राम जी निवास किया करते थे। एक गुफा यहां पर शुष्क और हवादार है। आप यहां पर आराम से जा सकते हैं और इस गुफा में आपको श्री राम जी, माता सीता जी और लक्ष्मण जी की प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। यहां पर आपको एक पत्थर भी देखने के लिए मिलता है, जिसे खटखटा चोर कहा जाता है। यह पत्थर लटका हुआ है और गुफा के अंदर आपको बहुत सारे चमगादड़ देखने के लिए मिलते हैं। दूसरी गुफा में आपको अंदर जाने के लिए घुटनों घुटनों तक पानी भरा मिलता है और आपको उस में चलना पड़ता है। यह मंदाकिनी नदी का उद्गम हुआ है। यह जगह बहुत अच्छी लगेगी। गुप्त गोदावरी चित्रकूट से करीब 16 किलोमीटर दूर होगा। आप यहां पर गाड़ी से आराम से आ सकते हैं। 

श्री सोमनाथ प्राचीन मंदिर - Ancient somnath temple

सोमनाथ मंदिर चित्रकूट के पास स्थित एक बहुत ही प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर में आपको शिव भगवान की हजारों प्रतिमाएं इधर-उधर बिखरी हुई देखने के लिए मिलती है। यहां पर शिव भगवान जी की पत्थर की प्रतिमाएं विराजमान है। सोमनाथ मंदिर एक पहाड़ी पर स्थित हैं और यहां पर आप घूमने आ सकते हैं। यहां पर ज्यादा भीड़ भाड़ नहीं रहती है। आप यहां पर आकर अच्छा समय बिता सकते हैं। सोमनाथ मंदिर का निर्माण गुप्त काल में चंद्र गुप्त मौर्य के राज्य में हुआ था। 



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