अमरकंटक पर्यटन - Amarkantak tourist places | MP tourism amarkantak

अमरकंटक के दर्शनीय स्थल - Amarkantak Darshan | amarkantak sightseeing | Amarkantak places to visit 


नर्मदा नदी का उद्गम स्थल - Narmada nadi ka udgam sthal

मां नर्मदा मंदिर अमरकंटक का एक प्रसिद्ध मंदिर है। मां नर्मदा मंदिर में ही नर्मदा नदी का उद्गम हुआ है। नर्मदा नदी भारत की सबसे महत्वपूर्ण नदी में से एक है जो गुजरात, मध्य प्रदेश में बहती है। आपको यहां पर एक कुंड देखने के लिए मिलता है। इस कुंड के आस पास बहुत सारे मंदिर है। यहां पर आपको नर्मदा माता का मंदिर देखने के लिए मिलता है। यहां पर आपको एक प्राचीन हाथी भी देखने के लिए मिलता है, जो पत्थर का बना है। इसके बारे में कहा जाता है कि जो भी पाप करता है। वह इस हाथी के बीच से निकलता है, तो वह फस जाता है और जो पाप रहित रहता है इस हाथी के बीच से निकल जाता है। यहां पर आपको शंकर भगवान जी का मंदिर भी देखने के लिए मिलता है। यह सभी मंदिर प्राचीन है और यहां पर जो भी लोग आते हैं, वह नर्मदा कुंड में जरूरी स्नान करते हैं। यही से नर्मदा नदी का आरंभ हुआ है। आप मंदिर ट्रस्ट भवन में ठहरने की सुविधा पा सकते हैं

कलचुरी कालीन प्राचीन मंदिरों का समूह अमरकंटक - Kalchuri group of ancient temples

कलचुरी कालीन प्राचीन मंदिर अमरकंटक में स्थित एक ऐतिहासिक स्थल हैं। यहां पर आपको बहुत सारे प्राचीन मंदिर देखने के लिए मिल जाते हैं। कलचुरी कालीन प्राचीन मंदिर अमरकंटक में नर्मदा कुंड के पास ही में स्थित है। आप इस जगह में पैदल भी जा सकते है। यहां पर आपको बहुत सारे मंदिर देखने के लिए मिल जाते हैं। आप जब भी अमरकंटक जाते हैं, तो यहां पर आप आ सकते हैं। यह मंदिर कलचुरी राजाओं के द्वारा बनवाए गए थे। यहां मंदिर एएसआई द्वारा संरक्षित किया गया है। इन मंदिरों को 1042 से 1072 के बीच में बनाया गया था। इन मंदिरों को राजा करण देव द्वारा बनाया गया था। कलचुरी कालीन प्राचीन मंदिरों में करण मंदिर और पातालेश्वर मंदिर बहुत प्रसिद्ध है। 

पंचमठा मंदिर अमरकंटक - Panchmatha temple amarkantak

पंचमठा मंदिर अमरकंटक में स्थित एक प्रसिद्ध मंदिर हैं। यह पांच मंदिरों का समूह है। इसलिए इसे पंचवटी मंदिर के नाम से जाना जाता है। पंचमठा मंदिर पत्थर के चबूतरे पर बना है। यह मंदिर 15 वीं और  20 वीं सदी के बीच बनाया गया था। यह मंदिर  गौड शासन के द्वारा बनाया गया था। 

सोनमुडा अमरकंटक - Amarkantak sonmuda

सोनमुडा अमरकंटक में स्थित एक दर्शनीय स्थल है। सोनमुडा में सोन नदी का उद्गम हुआ है। सोनमुडा में सोन और भद्र नाम के दो कुंड है। इन दोनों कुंडों को सम्मिलित रूप से सोनभद्र कहा जाता है। सोनमुड़ा में आपको एक कुंड देखने के लिए मिलता है, जिसमें गोमुख से पानी बहता हुआ आपको देखने के लिए मिलता है। यहां पर एक पंडित जी बैठे रहते हैं, जो आपको सोनमुडा के बारे में जानकारी देते हैं। सोनमुडा में एक व्यूप्वाइंट भी बना हुआ है, जिससे आपको बहुत ही मनोरम दृश्य देखने के लिए मिलता है। सोनमुड़ा अमरकंटक के नर्मदा मंदिर से करीब 1 से डेढ़ किलोमीटर दूर होगा। आप पैदल भी इस जगह पर आ सकते हैं। 

माई की बगिया  - Amarkantak mai ki bagiya

माई की बगिया अमरकंटक में एक घूमने वाली बहुत अच्छी जगह है। माई की बगिया के बारे में कहा जाता है, कि नर्मदा माई यहां पर अपने बचपन के समय अपनी सखियों के साथ खेलने के लिए आया करती थी। यहां पर आपको बहुत सारे औषधीय पौधे देखने के लिए मिलते हैं। यहां पर गुलबकावली नाम का एक पौधा पाया जाता है, जो औषधीय गुणों से भरपूर है। यह पौधा आंखों की रोशनी को बढ़ाने के लिए उपयोग किया जाता है। यहाँ पौधा सिर्फ अमरकंटक में ही पाया जाता है। आप यहां से इस पौधे की औषधि को प्राप्त कर सकते हैं। माई के बगिया में आपको मां नर्मदा जी की मूर्ति देखने के लिए मिलती है और यहां पर आपको कुंड देखने के लिए मिलते हैं। 

श्री यंत्र महामेरू मंदिर अमरकंटक - Shri yantra maha meru mandir

श्री यंत्र महामेरू मंदिर अमरकंटक में स्थित एक दर्शनीय स्थल है। यह मंदिर अमरकंटक का एक बहुत सुंदर मंदिर है। आप यहां पर आकर बहुत अच्छी मूर्तिकला देख सकते हैं। इस मंदिर का प्रवेश द्वार बहुत ही खूबसूरत है। प्रवेश द्वार पर बहुत सारी मूर्तियां हैं, जो अलग.अलग मुद्राओं में खड़ी हुई अवस्था में है। यह बहुत खूबसूरत लगती है। आप मंदिर के अंदर जाएंगे तो आपको वर्गाकार आकार में मंदिर देखने के लिए मिलता है।  यहां पर आप अपनी फैमिली के साथ घूमने के लिए आ सकते हैं और अच्छा समय बिता सकते हैं। 

श्री दुर्गा धारा आश्रम और दुर्गा धारा जलप्रपात अमरकंटक - Shri Durga Dhara Ashram and Durga Dhara Falls Amarkantak

श्री दुर्गा धारा आश्रम अमरकंटक में स्थित एक धार्मिक स्थल है। यहां पर दुर्गा माता का मंदिर स्थित है। आप यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं। यह जगह अमरकंटक से 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। श्री दुर्गा धारा आश्रम के पास ही एक छोटा झरना भी स्थित है। यह झरना खूबसूरत है और बरसात के समय झरने में पानी रहता है। गर्मी के समय झरने में पानी नहीं रहता है। आपको यहां पर दुर्गा जी का मंदिर देखने के लिए मिलेगा। यहां का आसपास का नजारा बहुत ही मनोरम है। 

कपिलधारा - Kapildhara

कपिलधारा जलप्रपात अमरकंटक का एक दर्शनीय स्थल है। यह नर्मदा नदी पर बनने वाला पहला जलप्रपात है। यहां पर नर्मदा नदी पहाड़ों से नीचे गिरती है, जो बहुत ही खूबसूरत लगती है। आप  झरने  के निचले हिस्से में आकर भी देख सकते हैं। झरने के निचले हिस्से में आने के लिए आपको ट्रैकिंग करनी पड़ती है। आप यहां पर नहाने का मजा भी ले सकते हैं। यह जलप्रपात बहुत खूबसूरत लगता है। बरसात के समय इसमें बहुत ज्यादा पानी रहता है। गर्मी के समय इसमें पानी कम रहता है। आपको यहां आकर बहुत अच्छा लगेगा। यहां पर बहुत सारे बंदर भी हैं। आपको यहां पर अपना सामान संभाल कर रखना होता है। 

दूध धारा जलप्रपात - Dudh dhara waterfall

दूध धारा जलप्रपात अमरकंटक में स्थित नर्मदा नदी पर बनने वाला दूसरा जलप्रपात है। दूध धारा जलप्रपात अमरकंटक का दर्शनीय स्थल है और आप जब भी कपिलधारा जलप्रपात घूमने के लिए आते हैं, तो आप दूध धरा जलप्रपात भी आ सकते हैं। दूध धरा जलप्रपात कपिलधारा जलप्रपात से करीब 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित होगा। इस जलप्रपात में पैदल चलकर पहुंच सकते हैं। यहां पर आपको खूबसूरत जलप्रपात देखने के लिए मिलता है। यह जलप्रपात ज्यादा बड़ा नहीं है, मगर आपको अच्छा लगेगा। यहां पर आप नहाने का मजा ले सकते हैं। यहां पर आपको गुफा भी देखने के लिए मिलती है, जिसके बारे में कहा जाता है, कि यहां पर ऋषि तपस्या किया करते थे। यहां पर आपको बहुत ही खूबसूरत जंगल का दृश्य देखने के लिए मिलता है। यहां पर बहुत शांति है। यहां पर आप अपने दोस्तों  और फैमिली के साथ आ सकते हैं। आपको यहां पर आकर बहुत अच्छा लगेगा। 

पुष्कर सरोवर अमरकंटक - Pushkar Sarovar Amarkantak

पुष्कर सरोवर अमरकंटक में स्थित एक सरोवर है, जो बहुत अच्छा जगह है। आप यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं। यह अमरकंटक में नर्मदा नदी पर बना हुआ सरोवर है। यहां पर लोग आकर स्नान करते हैं। 

कल्याण सेवा आश्रम अमरकंटक - Kalyan seva ashram amarkantak

कल्याण सेवा आश्रम अमरकंटक में स्थित एक आश्रम है। यह आश्रम बहुत ही भव्य है। यह आश्रम स्वामी कल्याण दास जी का है। आश्रम में आपको मंदिर देखने मिलता है, जो बहुत सुंदर है। मुख्य हॉल की दीवारों और छत पर हिंदू देवी-देवताओं के चित्रों के साथ चित्रित किया गया है। यहां पर शाम की आरती होती है, जो बहुत ही अच्छी लगती है। आपको आश्रम के अंदर फोटो खींचना मना है। आश्रम में रहने की और खाने की व्यवस्था भी उपलब्ध है।  रहने और खाने के लिए चार्ज लिया जाता है, जो बहुत कम रहता है। यहां पर आपको सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। 

मृत्युंजय आश्रम अमरकंटक - Mrityunjay ashram amarkantak

मृत्युंजय आश्रम अमरकंटक में स्थित एक आश्रम है। यह आश्रम नर्मदा कुंड की ओर जाने वाली मुख्य सड़क पर स्थित है। आपको यहां पर रहने और खाने की व्यवस्था उपलब्ध है, वह भी बहुत कम दामों पर। यह आश्रम बहुत भव्य हैं। परिक्रमा वासियों के लिए यहां रहने की सुविधा निशुल्क है। इस आश्रम का प्रवेश द्वार बहुत ही खूबसूरत है। आप यहां पर आ कर ठहर सकते हैं। 

रामघाट अमरकंटक - Ramghat amarkantak

रामघाट अमरकंटक में स्थित एक सुंदर घाट है। यहां पर आप आकर स्नान कर सकते हैं। यह घाट नर्मदा नदी के किनारे बना है। आप यहां पर आकर शांति से बैठ सकते हैं। आपको यहां पर आकर बहुत अच्छा लगेगा।

कोटितीर्थ अमरकंटक - Kotithirtha amarkantak

कोटि तीर्थ नर्मदा नदी पर बना एक कुंड है। कोटि तीर्थ का मतलब होता है, कि सभी तीर्थों से सर्वश्रेष्ठ। आप यहां पर आकर स्नान कर सकते हैं। यह कुंड नर्मदा कुंड के बाद बना हुआ है। यहां से नर्मदा नदी बहती है। आपको यहां पर आकर अच्छा लगेगा और जो यहां का वातावरण है, वह अध्यात्मिक है। आप यहां आकर अच्छा समय बिता सकते हैं। 

श्री मार्कंडेय आश्रम अमरकंटक - Markandey ashram amarkantak

मार्कंडेय आश्रम अमरकंटक में स्थित एक खूबसूरत आश्रम है। यह आश्रम बहुत ही भव्य है। आप यहां पर आ सकते हैं। यह आश्रम नर्मदा मंदिर के पास ही में स्थित है। आप इस आश्रम में पैदल भी जा सकते हैं। कहा जाता है कि इस आश्रम में ऋषि मार्कंडेय ने तपस्या की थी और यहां पर आप उनके तपस्या स्थल को देख सकते हैं। यहां पर शिव भगवान जी के दर्शन भी आप कर सकते हैं। 

सर्वोदय जैन मंदिर अमरकंटक - Sarvodaya jain temple amarkantak

सर्वोदय जैन मंदिर अमरकंटक में स्थित एक प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल है। यह जैन धर्म का एक प्रसिद्ध मंदिर है, अभी यह मंदिर बन रहा है। यह मंदिर बहुत ही भव्य है। इस मंदिर में आपको पत्थर की कारीगरी देखने के लिए मिलती है। यहां पर बहुत बड़ा गुंबद भी बना हुआ है, जो बहुत खूबसूरत है। यहां पर आपको आकर बहुत अच्छा लगेगा। सर्वोदय जैन मंदिर के सामने ही सर्वोदय जैन धर्मशाला है, जहां पर आपके रुकने और खाने की व्यवस्था है। यहां पर बहुत कम कीमत पर आप रुक सकते हैं। 

भृगु ऋषि तपोस्थली - Bhrigu rishi taposthali

भृगु ऋषि की कुटिया या तपोस्थली अमरकंटक में स्थित एक प्राकृतिक स्थल है। भृगु ऋषि की कुटिया घने जंगलों के बीच स्थित है। अगर आप एडवेंचर के शौकीन हैं, तो आप इस जगह जा सकते हैं। आपको यहां पर एक गुफा देखने के लिए मिलती है और एक शिवलिंगम देखने के लिए मिलता है। कहा जाता है कि यहाँ पर भृगु ऋषि तपस्या किया करते थे। यहां आकर आपको बहुत अच्छा लगेगा। चारों तरफ हरियाली भरा माहौल बहुत अच्छा है। यहां का शांत वातावरण मन को मोह लेता है। यह जगह अमरकंटक से करीब 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। 

धूनी पानी अमरकंटक - Dhuni pani amarakantak

धुनी पानी अमरकंटक में स्थित एक प्राकृतिक जगह है। धुनी पानी एक कुंड है, जिसमें पानी भरा हुआ है। यह एक पवित्र जगह है। यह जगह घने जंगलों के बीच में स्थित है। धुनी पानी भृगु कमंडल की ओर जाने वाले रास्ते की में पड़ती है। आपको यहां जाने के लिए पैदल चलना पड़ता है और यह जगह बहुत अच्छी है। आपको यहां पर आकर अच्छा लगेगा।

माई का मंडप अमरकंटक - Mai ka mandap amarakantak

माई का मंडप अमरकंटक में स्थित एक दर्शनीय जगह है। यह धार्मिक जगह भी है। इस जगह के बारे में कहा जाता है, कि यहां पर मां नर्मदा जी का विवाह होने वाला था। यहां पर आपको आज भी मां नर्मदा जी के विवाह की जो तैयारियां की गई थी। वह सब देखने के लिए मिलती हैं। वह सब चीजें पत्थर की बन गई हैं। आप यहां पर आ कर उन सभी चीजों को देख सकते हैं। यहां पर आपको प्राकृतिक झरना भी देखने के लिए मिलता है, जो बहुत खूबसूरत लगता है। यह जगह अमरकंटक से करीब 20  किलोमीटर दूर होगा। आप यहां पर गाड़ी से आ सकते हैं। यह जगह बहुत खूबसूरत है और घने जंगलों के बीच में स्थित है। 

ज्वालेश्वर मंदिर अमरकंटक - Jwaleshwar temple amarkantak

ज्वालेश्वर मंदिर अमरकंटक में स्थित एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर शंकर भगवान जी को समर्पित है। यहां पर जोहिला नदी का उद्गम भी हुआ है। यह जगह अमरकंटक से करीब 8 किलोमीटर दूर होगी। आप यहां पर आकर बहुत अच्छा समय बिता सकते हैं। यह मंदिर छत्तीसगढ़ - मध्य प्रदेश राज्य की सीमा के पास स्थित है। 

जोहिला नदी का उद्गम - Johila nadi ka udgam amarkantak

जोहिला नदी का उद्गम स्थल ज्वालेश्वर मंदिर में ही हुआ है। ज्वालेश्वर मंदिर अमरकंटक में स्थित एक अच्छी जगह है। यह मंदिर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित है। आप इस मंदिर में गाड़ी से आराम से आ सकते हैं। जोहिला नदी अमरकंटक से निकलने वाली तीसरी सबसे बड़ी नदी है और इस नदी के बारे में प्राचीन कहानी प्रचलित है। आपको यहां पर आकर बहुत अच्छा लगेगा। चारों तरफ का नजारा बहुत ही मनोरम है। आपको यहां पर एक कुआं देखने के लिए मिलता है, जिस में से जोहिला नदी का उद्गम हुआ है। 

श्री अमरेश्वर महादेव मंदिर अमरकंटक - Amareshwar mahadev temple

श्री अमरेश्वर महादेव मंदिर अमरकंटक में स्थित एक धार्मिक स्थल है। यहां पर आपको एक विशाल शिवलिंग देखने के लिए मिलता है। यह शिवलिंग 50 टन से भी अधिक वजनी है और 11 फुट लंबा है। आप सीढ़ियां चढ़कर इस शिवलिंग पर जलाभिषेक और फूल चढ़ा सकते हैं। श्री अमरेश्वर महादेव मंदिर ज्वालेश्वर मंदिर से कुछ दूरी पर स्थित है। आप यहां पर गाड़ी से आ सकते हैं। यहां पर आपको 12 ज्योतिर्लिंग की प्रतिकृति भी देखने के लिए मिलती है। यह मंदिर छत्तीसगढ़ के अंतर्गत आता है। यह मंदिर अमरकंटक-अनूपपुर राजमार्ग  के पास ही में स्थित है। 

अमरकंटक कहां स्थित है - Amarkantak kahan sthit hai

अमरकंटक मध्यप्रदेश के शहडोल जिले की पुष्पराजगढ़ तहसील में स्थित है। अमरकंटक भारत का एक पवित्र स्थल है। लाखों श्रद्धालु अमरकंटक में घूमने के लिए आते हैं। 

अमरकंटक कैसे जाये - Amarkantak kaise jaye

अमरकंटक जाने के लिए आपको दो माध्यम है। अमरकंटक आप सड़क के माध्यम से जा सकते हैं। दूसरा आप रेल के माध्यम से अमरकंटक जा सकते हैं। अगर आप ट्रेन के माध्यम से अमरकंटक जाना चाहते हैं, तो आपको पेंड्रा स्टेशन में आना पड़ेगा। पेंड्रा स्टेशन से अमरकंटक करीब 20 किलोमीटर दूर होगा। आपको पेंड्रा स्टेशन से टैक्सी मिल जाती है, तो आप पेंड्रा स्टेशन से अमरकंटक आ सकते हैं और दूसरा रास्ता है, सड़क माध्यम। सड़क माध्यम के द्वारा आप अमरकंटक आसानी से पहुंच सकते हैं। अमरकंटक का नजदीकी हवाई अड्डा जबलपुर है। जबलपुर में आकर सड़क माध्यम के द्वारा अमरकंटक पहुंच सकते हैं।

अमरकंटक के अन्य प्रसिद्ध स्थल

 गुरु नानक साहब की तपोस्थली - विशाल वटवृक्ष
 रूद्र गंगा की जैव विविधता
 चंडी गुफा
 भृगु कमंडल


सतना पर्यटन स्थल - Satna tourist place | Places to visit in Satna

सतना के दर्शनीय स्थल - Satna me ghumne ki jagah | Places to visit near Satna | Satna tourism  



मैत्री पार्क सतना - Maitri park satna

मैत्री पार्क सतना शहर में बद्री पुरम में स्थित एक अच्छा बगीचा है। यह सतना जिले के बाहरी क्षेत्र में स्थित है। इस पार्क के एक तरफ आपको हवाई अड्डा देखने के लिए मिलता है और दूसरे तरफ आपको तालाब देखने के लिए मिलता है। तालाब में शंकर जी का मंदिर भी बना हुआ है। यह पार्क बहुत ही मनोरम है। यहां पर बच्चों के लिए बहुत सारे झूले भी लगे हुए हैं। इस पार्क में आकर आप अपना अच्छा समय बिता सकते हैं। यहां पर फव्वारा भी लगा हुआ है। इस पार्क में आपको हनुमान जी की बहुत बड़ी प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। इस पार्क में आपको जानवरों की बहुत सारी मूर्तियां देखने के लिए मिलती है, जो बहुत ही आकर्षक लगती हैं। 


जगतदेव तालाब सतना - Jagatdev talab satna 

जगतदेव तालाब सतना में स्थित एक धार्मिक जगह है। यह तालाब शहर के बीचोंबीच स्थित है और यहां पर पहुंचना बहुत ही आसान है। यहां पर आपको एक मंदिर देखने के लिए मिलता है, जो शंकर भगवान जी को समर्पित है। यहां पर शंकर जी का शिवलिंग विराजमान है। जगतदेव तालाब मानव निर्मित तालाब है और यह बहुत ही प्यारा लगता है। आप यहां पर आकर अपना अच्छा समय बिता सकते हैं। यहां पर बहुत शांति रहती है। सावन सोमवार और महाशिवरात्रि के समय यहां पर बहुत अधिक संख्या में लोग आते हैं। भगवान शिव के दर्शन करने के लिए।   


पुष्कर्णी पार्क सतना - Pushkarni park satna

पुष्कर्णी पार्क सतना शहर के मध्य में स्थित एक खूबसूरत पार्क है। इस पार्क में आप आसानी से आ सकते हैं, क्योंकि यह पार्क रेलवे स्टेशन के पास ही में है। आप यहां पर अपना अच्छा समय बिता सकते हैं। यहां पर सुबह के समय एंट्री फ्री रहती है। आप यहां पर मॉर्निंग वॉक के लिए आ सकते हैं। यहां पर आप योगा, कसरत जैसी गतिविधि कर सकते हैं। यहां पर बहुत सारे झूले हैं, जो बच्चों के लिए बहुत अच्छे हैं और बच्चे लोग यहां पर बहुत इंजॉय कर सकते हैं। शाम के समय यहां पर फव्वारा चालू होता है, जो बहुत ही खूबसूरत लगता है। पार्क में तरह-तरह के फूल लगे हुए हैं, जो बहुत खूबसूरत लगते हैं और चारों तरफ आपको यहां पर हरियाली देखने के लिए मिलती है। जिससे आप यहां आकर तरोताजा महसूस करेंगे। 


राम वन मंदिर सतना - Ramvan mandir satna

राम वन मंदिर सतना शहर की धार्मिक जगह है। राम वन मंदिर में आपको हनुमान जी की एक विशाल प्रतिमा देखने के लिए मिलती है, जो खड़ी हुई अवस्था में है। इस प्रतिमा की खास बात यह है, कि इस प्रतिमा की ऊंचाई हर साल बढ़ती है। इसी खासियत के कारण इस प्रतिमा को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। रामवन का नाम सुनते ही आपको लगता होगा, कि यहां पर राम जी की प्रतिमा स्थापित होगी मगर ऐसा नहीं है। यहां पर हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित है। राम वन मंदिर में आपके देखने के लिए बहुत सारी जगह है। यहां पर आप आकर पंचवटी देख सकते हैं, पंचवटी के बारे में कहा जाता है, कि यहां पर राम जी ने स्वयं पांच वृक्ष लगवाए थे। इसलिए इस जगह को पंचवटी कहा जाता है। यहां पर आप आकर आम, आंवला, बेल, बरगद और नीम के पेड़ देख सकते हैं। राम वन में तुलसी संग्रहालय भी स्थित है। तुलसी संग्रहालय में आपको पुस्तकों का संग्रह देखने के लिए मिलता है। आप यहां पर आकर पुस्तकें पढ़ सकते हैं। इसके अलावा आपको यहां पर खूबसूरत मूर्तियां देखने के लिए मिलती हैं। यहां पर शिव भगवान जी की उनके परिवार के साथ मूर्ति है, जो बहुत ही आकर्षक लगती है। इसके अलावा भी बहुत सारी मूर्तियां आपको देखने के लिए आती है। राम वन मंदिर की स्थापना के बारे में बताया जाता है, कि बनारस निवासी व्यापारी बाबू शारदा प्रसाद सतना में व्यापार करने के लिए आए थे। उन्होंने यहां पर गाड़ियों की एजेंसी खोली । इसके बाद उन्होंने 64 एकड़ जमीन खरीदी और हनुमान जी की मूर्ति की स्थापना कराई। हनुमान जी की प्रतिमा करीब 70 साल पुरानी है। राम वन मंदिर में आप अपने फैमिली वालों के साथ और दोस्तों के साथ आकर अपना बहुत अच्छा सा समय बिता सकते हैं। यहां पर बहुत शांति होती है। राम वन मंदिर के पास आपको एक  तालाब देखने मिलता है। तालाब में बोटिंग की सुविधा है। तालाब के किनारे पर शिव भगवान जी का मंदिर भी स्थित है। 


राजा बाबा झरना सतना - Raja Baba waterfall Satna or Raja Baba temple Satna

राजा बाबा मंदिर और राजा बाबा झरना सतना शहर में स्थित एक दर्शनीय जगह है। आपको यहां पर एक प्राचीन मंदिर एवं झरना देखने के लिए मिलता है। यह झरना और मंदिर जंगल के बीच में स्थित है। आपको यहां पर आकर बहुत अच्छा लगेगा। अगर आप बरसात के समय यहां पर आते हैं, तो बरसात के समय यहां पर चारों तरफ हरियाली रहती है। झरने में बहुत पानी रहता है। आप झरने में नहाने का मजा ले सकते हैं। गर्मी में यहां पानी कम हो जाता है। यहां पर आप अपना समय बिताने के लिए आ सकते हैं। यहां पर अगर आप आते है, तो समूह के साथ आए हैं। यहां पर अकेले ना आए, क्योंकि इस जगह में ज्यादा भीड़ नहीं रहती है। यह मंदिर सतना जिले के परस्मानिया पहाड़ी पर स्थित है। आप यहां पर अपनी गाड़ी से पहुंच सकते हैं। 


नीलकंठ बाबा आश्रम मैहर, सतना - Neelkanth Baba Ashram Maihar, Satna

नीलकंठ बाबा आश्रम सतना में स्थित एक धार्मिक स्थान है।  नीलकंठ आश्रम मैहर के पास में स्थित है। यहां पर आपको प्रकृति का बहुत ही मनोरम  नजारा और मंदिर देखने के लिए मिलते हैं। नीलकंठ बाबा आश्रम मैहर से करीब 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित होगा। यहां पर आपको प्राचीन मंदिर राधा कृष्ण मंदिर जी का मंदिर देखने के लिए मिलता है। यहां पर एक गहरी खाई है, जो बहुत ही खूबसूरत लगती है और बरसात के समय में यह हरियाली से भर जाती है। बरसात के समय यहां पर आपको ढेर सारे झरने देखने के लिए मिलते हैं। यह झरने बहुत ही मनोरम रखते हैं। इस जगह को रामपुर पहाड़ी के नाम से जाना जाता है और कहा जाता है कि यहां पर महाराज नीलकंठ जी ने तपस्या की थी। उन्होंने यहां पर राधा कृष्ण मंदिर जी की स्थापना की थी। यहां पर आपको गणेश जी, शंकर जी, एवं अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां भी देखने के लिए मिलती है, जो जीवंत लगती हैं। यहां पर आप अपनी फैमिली के और दोस्तों के साथ घूमने के लिए आ सकते हैं। यह बहुत ही अच्छी जगह है। 


पन्नी झरना मैहर, सतना - Panni waterfall Maihar, Satna

पन्नी झरना सतना जिले में मैहर के पास स्थित है। यह झरना  मैहर से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस झरने पर आप अपने वाहन से जा सकते हैं। आप इस झरने तक पैदल भी जा सकते हैं। यह झरना घने जंगलों के बीच में स्थित है। झरने तक जाने का रास्ता भी जंगल से होकर जाता है। इस झरने के पास एक प्राचीन मंदिर है। यह मंदिर पहाड़ों के बीच में गुफा में बना हुआ है। कहा जाता है कि इन मंदिरों में संत तपस्या किया करते थे। बरसात के समय इन गुफाओं में पानी रिसता है। आप इस झरने में जाते हैं, तो यहां पर आप नहाने का आनंद भी ले सकते हैं। झरना बहुत खूबसूरत है और बहुत अच्छा लगता है। यहां पर आप अपने फैमिली और दोस्तों के साथ आ सकते हैं। आपको यहां पर बहुत ज्यादा पैदल चलना रहता है, तो आप को ट्रैकिंग का भी मजा आता है। आप पन्नी झरने में बरसात के समय जा सकते हैं। 


गोला मठ मंदिर मैहर, सतना - Gola Math Temple Maihar, Satna

गोला मठ मंदिर सतना शहर में स्थित एक ऐतिहासिक स्थान है। गोला मठ मंदिर सतना शहर में मैहर के पास स्थित है। यह मंदिर शंकर भगवान जी को समर्पित है। गर्भ ग्रह में शंकर जी की पत्थर का शिवलिंग विराजमान है। गर्भ ग्रह की मुंह किए हुए नंदी विराजमान है। गर्भ ग्रह के द्वार में पत्थरों में नक्काशी की गई है। निचले भाग में पवित्र नदी गंगा एवं यमुना का आंकित किया गया है। आप जब भी मेहर घूमने आते हैं, तो गोला मठ मंदिर भी आकर घूम सकते हैं। गोला मठ मंदिर की दीवारों पर खूबसूरत नक्काशी की गई है, जो देखने में बहुत ही अद्भुत लगती है। यह मंदिर कलचुरी कालीन है।


बड़ा अखाड़ा मंदिर मैहर, सतना - Bada akhada mandir maihar, satna

बड़ा अखाड़ा मंदिर सतना शहर में मैहर में स्थित है। यहां पर आपको एक बड़ा सा शिवलिंग देखने के लिए मिलता है, जो मंदिर के ऊपर बना हुआ है। मंदिर के नीचे आपको 108 शिवलिंग के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। यहां पर आप ज्योतिर्लिंगों के भी दर्शन कर सकते हैं। यहां पर एक प्राचीन कुआ भी है, जिसमें नीचे जाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है। इस कुआ के बारे में भी कहानियां कही जाती है। यहां पर गुरुकुल भी है, जहां पर ब्राह्मणों को शिक्षा दी जाती हैं। आप यहां पर आकर घूम सकते हैं। यह मैहर में बहुत अच्छी जगह है और यहां पर आकर अच्छा लगता है। यहां पर दोस्तों और परिवार के लोगों के साथ आया जा सकता है। बड़ा अखाड़ा मंदिर के बाजू में ही राम जी का मंदिर भी देखने के लिए मिलता है। इस मंदिर को श्री सर्वदेव रामेश्वरम मंदिर कहते हैं। आप यहां पर भी घूम सकते हैं।


मैहर माता मंदिर सतना - Maihar mata mandir Satna

मैहर का शारदा माता का मंदिर सतना शहर का एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यह मंदिर पूरे भारत में प्रसिद्ध है। शारदा माता के दर्शन करने के लिए पूरे भारतवर्ष से लोग आते हैं। इस मंदिर में नवरात्रि के समय बहुत ज्यादा भीड़ रहती है। यहां पर मेले का आयोजन भी होता है। यहां पर आपको शारदा माता के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। मैहर का शारदा मंदिर एक प्राचीन मंदिर है। शारदा माता का मंदिर एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। इस पहाड़ी को त्रिकूट पहाड़ी के नाम से जाना जाता है।  इस मंदिर तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां बनाई हुई है। यहां पर करीब 1000 सीढ़ियां या इससे अधिक सीढ़ियां भी हो सकती हैं। अगर आप सीढ़ियों से नहीं जाना चाहते हैं, तो आप रोपवे से जा सकते हैं, रोपवे का चार्ज लिया जाता है। मंदिर से आपको चारों तरफ का मनोरम दृश्य देखने के लिए मिलता है, जो बहुत ही खूबसूरत रहता है। बरसात के समय आपको यहां पर चारों तरफ हरियाली देखने मिलती है। शारदा माता मंदिर में आल्हा और उदल की कहानी प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि आल्हा और उदल मां शारदा के बहुत बड़े भक्त थे और सबसे पहली पूजा आल्हा और उदल के द्वारा ही की जाती हैं। आप यहां पर अपने परिवार और दोस्तों के साथ जा सकते हैं। यहां पर खाने पीने के लिए बहुत सारे होटल हैं और ठहरने के लिए भी आपको जगह मिल जाती है। 


मैहर का किला - Maihar Fort

मैहर का किला एक प्राचीन स्मारक है। यह किला सतना शहर में मैहर में स्थित है। यह किला मैहर रेलवे स्टेशन के बहुत करीब है। मैहर का किला एक प्राइवेट प्रॉपर्टी है और इस किले में रहने की सुविधा उपलब्ध है। आप यहां पर आकर अपना रूम बुक करा सकते हैं और इस किले का राजसी सुविधाओं का आनंद ले सकते हैं।


आल्हा का अखाड़ा एवं आल्हा का तालाब - Aalha ka akhada or Aalha ka talab

आल्हा का अखाड़ा एवं आल्हा का तालाब सतना शहर में स्थित एक प्राचीन स्थल है। यह जगह मैहर में स्थित है और शारदा मंदिर से करीब 2 किलोमीटर दूर होगी। यह जगह जंगल में स्थित है। कहा जाता है कि आल्हा जी ने यहां तपस्या की थी, जिससे उन्हें अमर होने का वरदान मिला है। आल्हा मां शारदा के बहुत बड़े भक्त थे और सबसे पहली पूजा आल्हा के द्वारा ही की जाती है। इसलिए यह जगह बहुत फेमस है और यहां पर बहुत सारे लोग घूमने के लिए आते हैं। यहां पर आपको अखाड़ा देखने के लिए मिलता है। उसके अलावा यहां पर एक छोटा सा शिव मंदिर भी है, जिसमें शिवलिंग विराजमान है। आल्हा अखाड़ा से थोड़ी दूरी पर आल्हा तालाब स्थित है। इस तालाब में आपको नहाना मना है। तालाब में कमल के फूल देखे जा सकते हैं, जो बहुत खूबसूरत लगते हैं। यह जगह बहुत शांत है और यहां पर ज्यादा भीड़ भाड़ नहीं रहती है, तो यहां पर आप अच्छा समय बिता सकते हैं।


बड़ी माई मंदिर मैहर, सतना - Badi Mai Temple Maihar, Satna

बड़ी माई मंदिर सतना शहर में मैहर में स्थित एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर बड़ी माई को समर्पित है। यहां पर नवरात्रि के समय बहुत ज्यादा भीड़ रहती है। लोग यहां पर मां शारदा माता के दर्शन करने के बाद यहां पर जरूर दर्शन करने के लिए आते हैं। कहा जाता है कि माता शारदा के दर्शन के बाद बड़ी माई के दर्शन करना भी जरूरी है तभी दर्शन पूरे माने जाते हैं। यहां पर आपको शंकर भगवान जी के शिवलिंग के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। यहां का माहौल शांति भरा रहता है जो बहुत ही अच्छा लगता है। कहा जाता है कि यहां पर लोगों के द्वारा मांगी गई मनोकामना पूरी जरूर होती है। 


आर्ट इचोल सतना - Art ichol satna

आर्ट इचोल सतना शहर में स्थित एक दर्शनीय जगह है। यहां पर आपको कई तरह के कलात्मक वस्तुएं देखने के लिए मिलेगी, जिनका निर्माण स्क्रैप से किया गया है। इस जगह में आप धातु की वस्तुएं, मिट्टी की वस्तुएं, पत्थर की वस्तुएं एवं लकडी की वस्तुएं देख सकते हैं। यहां खुले आसमान के नीचे आपको बहुत सारे कलात्मक वस्तुएं देखने के लिए मिलता है। यह जगह पूरी तरह से इन अद्भुत वस्तुओं से भरी हुई हैं। आर्ट इचोल मैहर से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आप यहां पर अपने वाहन से आसानी से आ सकते हैं। यहां पर आपके एंट्री का चार्ज लिया जाता है। यह जगह अच्छी है। आप यहां पर शांति से समय बिता सकते हैं। 


प्राचीन विष्णु मंदिर देवगुना, सतना - Ancient Vishnu Temple Devguna, Satna

प्राचीन विष्णु मंदिर सतना शहर में स्थित एक ऐतिहासिक स्थल है। यह मंदिर सतना शहर में परस्मानिया पहाड़ी पर स्थित है। यह परस्मानिया पहाड़ी के देवगुना गॉव में स्थित है। यहां पर आपको तीन मंदिर देखने के लिए मिलते हैं, जो एक चबूतरे पर बने हुए हैं। इसमें से एक मंदिर विष्णु भगवान को समर्पित है। एक मंदिर श्री गणेश जी को समर्पित है और एक मंदिर शिव शंकर जी को समर्पित है। यहां पर आपको पत्थर की विष्णु भगवान के प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। यह मंदिर 9 या  10 वीं शताब्दी में बनाया गया था। यह एक अच्छी जगह है और आप घूमने के लिए यहां पर आ सकते हैं। इस मंदिर के पास बैठने के लिए चेयर बने हुए हैं। आप यहां पर बैठकर अच्छा समय बिता सकते हैं। 


श्री कर्दमेश्वर नाथ मंदिर सतना - Sri Kardameshwar Nath Temple Satna

कर्दमेश्वर नाथ मंदिर सतना शहर का एक प्राचीन और प्राकृतिक जगह है। यह मंदिर शिव भगवान जी को समर्पित है। इस मंदिर को चौमुख नाथ शिव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यहां पर आपको गोमुख देखने के लिए मिलता है, जिससे साल भर पानी निकलता है। गोमुख से पहाड़ों का शुद्ध पानी आता है। गोमुख का पानी शुद्ध एवं मीठा है। आप इस पानी को पी सकते हैं। आप इस में नहा भी सकते हैं। यहां पर आपको प्रकृति का खूबसूरत नजारा देखने के लिए मिलता है। यहां पर एक वॉच टावर भी बना हुआ है, जिससे आप यहां के चारो तरफ का नजारा देखने मिलता है। यह मंदिर सतना जिले के नागोद ब्लॉक के पास है।


भरहुत सतना - Bharhut Satna

भरहुत सतना शहर में स्थित एक ऐतिहासिक स्थान है। यह पूरे मध्यप्रदेश में प्रसिद्ध है। यह एक बौद्ध साइट है। यहां पर आपको पत्थरों पर नक्काशी देखने के लिए मिलती है। भरहुत स्तूप सतना जिले से करीब 23 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आप यहां पर अपने वाहन से आ सकते हैं। यहां पर आप प्राचीन बौद्ध स्तूप देख सकते हैं। आपको यहां पर सम्राट अशोक का शिलालेख भी देखने के लिए मिलता है। इस  जगह में आप अपनी गाड़ी से आ सकते हैं। यह जगह खूबसूरत है और एक पहाड़ी पर स्थित है। 


व्हाइट टाइगर सफारी मुकुंदपुर - White Tiger Safari Mukundpur

व्हाइट टाइगर सफारी या जू सतना शहर के पास में स्थित एक दर्शनीय स्थल है। यह जगह सफेद शेरों के लिए प्रसिद्ध है। यहां पर आपको दुनिया भर में प्रसिद्ध सफेद शेर देखने के लिए मिलता है। यहां पर आपको सफेद शेरों के अलावा भी बहुत सारे जंगली जानवर देखने के लिए मिलते हैं। वाइट टाइगर सफारी सतना शहर से करीब 53 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मुकुंदपुर जू पन्ना खजुराहो राजमार्ग पर स्थित है। आप यहां पर अपने वाहन से या किराए की टैक्सी से पहुंच सकते हैं। मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी को सफेद सफेद शेरों की भूमि कहा जाता है, क्योंकि यहां पर दुनिया का पहला सफेद शेर मोहन पाया गया था। सफेद शेर को खोजने का श्रेय  महाराजा मार्तंड सिंह जूदेव को जाता है। मुकुंदपुर जू में आप सफारी का मजा ले सकते हैं। आप यहां पर पैदल सफारी का मजा ले सकते हैं। आप यहां पर साइकिल से सफारी का मजा ले सकते हैं और आप यहां पर बैटरी चलित ऑटो की सफारी का भी मजा ले सकते हैं। इन सब का प्राइस अलग-अलग रहता है। आपको यहां पर बहुत सारे जंगली जानवर देखने के लिए मिलते हैं। यहां पर आप सफेद शेर, चीता, हिरण, भालू, और मगरमच्छ देखने के लिए मिल जाते हैं।


बाणसागर बांध सतना - Bansagar Dam Satna

बाणसागर बांध सतना शहर के पास स्थित एक बहुत ही अच्छी जगह है। बाणसागर बांध सतना शहर से करीब 100 किलोमीटर दूर होगा। आप यहां पर अपने वाहन से आसानी से जा सकते हैं। आप यहां पर बरसात में जाते हैं, तो बरसात में आपको यहां पर बहुत ही मनोरम नजारा देखने के लिए मिलता है, क्योंकि बरसात के समय बांध के ओवरफ्लो होने के कारण बांध के गेट खोले जाते हैं, जिससे बहुत ही खूबसूरत नजारा देखने के लिए मिलता है। 


धारकुंडी आश्रम सतना - Dharkundi ashram satna

धारकुंडी सतना शहर के पास स्थित एक मनोरम स्थल है। धारकुंडी आश्रम मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सीमा पर स्थित है। यह घने जंगल के बीच में स्थित है। यहां पर आप रोड के माध्यम से आसानी से आ सकते हैं। यहां पर आपको एक कुंड देखने के लिए मिलता है, जिसमें पानी पहाड़ों से आता है। इस कुंड में आप नहाने का मजा ले सकते हैं। यहां पर आ कर आपको बहुत अच्छा लगेगा। यहां पर चारों तरफ का दृश्य हरियाली भरा रहता है। बरसात के समय आप यहां पर आते हैं, तो यहां पर चारों तरफ हरियाली रहती है। इस जगह को धारकुंडी के नाम से जाना जाता है, क्योंकि इस आश्रम में बहता हुआ पानी आपको देखने के लिए मिलता है। पानी ठंडा और साफ है। यहां पर आपको एक मंदिर और आश्रम देखने के लिए मिलता है। 


सरभंगा आश्रम सतना - Sarbhanga ashram satna

सरभंगा आश्रम सतना जिले के पास स्थित है। यह एक दर्शनीय स्थल है। सरभंगा आश्रम घने जंगलों के बीच में स्थित है। इस जगह के बारे में कहा जाता है कि वनवास काल के दौरान भगवान राम इस स्थल पर आये थे। इस आश्रम में सरभंग नाम की मुनि रहते थे। उनका अंतिम समय आ गया था और उन्होंने राम जी के दर्शन के लिए अपना शरीर नहीं त्यागा था। राम जी के दर्शन के बाद उन्होंने स्वयं अपने शरीर को त्यागा और ब्रह्म दिन हो गए। इस तरह इस आश्रम को सरभंगा आश्रम के नाम से जाना जाता है। आपको यहां पर आकर बहुत अच्छा लगेगा। यहां पर आपको राम, लक्ष्मण, और  सीता जी के मंदिर देखने मिलेंगे। इसके अलावा यहां पर शिव मंदिर भी है और यहां पर आपको एक कुंड देखने मिलेगा। यह बहुत अच्छी जगह है। आप यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं। 


बृहस्पति कुंड जलप्रपात सतना - Brihaspati Kund Waterfall Satna

बृहस्पति कुंड झरना सतना शहर में स्थित एक दर्शनीय स्थल है। यह झरना बरसात के समय पानी से भरा होता है। यह झरना बहुत खूबसूरत है और चट्टानों से गिरता हुआ पानी देखने में बहुत ही मनोरम लगता है। आप यहां पर बरसात के समय और ठंड के समय घूमने के लिए आ सकते हैं। गर्मी के समय इस झरने में पानी नहीं रहता है। यहां पर झरने का पानी एक कुंड पर गिरता है। आप चाहे तो झरने के नीचे तरफ भी जा सकते हैं। नीचे तरफ जाने के लिए आपको ट्रैकिंग करनी पड़ेगी। यह झरना सतना शहर से करीब 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आप यहां पर अपनी गाड़ी से आसानी से आ सकते हैं। आप इस झरने में नहाने का मजा भी ले सकते हैं। यह झरना बाघिन नदी पर बना हुआ है।


माधवगढ़ का किला सतना - Madhavgarh Fort Satna

माधवगढ़ का किला सतना शहर में रीवा राजमार्ग में स्थित है। यह किला सतना नदी के किनारे पर बना हुआ है। यह किला खंडहर अवस्था में है। इस किले के अंदर जाना मना है। आप अगर इस किले में घूमने के लिए जाते हैं, तो आपको किले के दर्शन बाहर से करने पड़ेंगे। किले के अंदर अब पूरी तरह से पेड़ पोधे उग गए हैं। किले की कुछ दीवारे धराशाई हो गई हैं। किले के अंदर से नदी का दृश्य बहुत ही अच्छा दिखता है। इस किले के बाहर आपको कुछ छतरियां देखने के लिए मिलती हैं। इन छतरियां में शिवलिंग स्थापित है। किले के बाहर का दृश्य भी बहुत अच्छा है। यहां पर बहुत बड़ा मैदान है। यह किला अब खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। सरकार की तरफ से इस किले की तरफ कोई भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यह किला हाईवे रोड से भी बहुत अच्छा दिखाई देता है। 


श्री वेंकटेश्वर मंदिर सतना - Sri Venkateswara Temple Satna

श्री वेंकटेश्वर मंदिर सतना शहर में स्थित एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर मुख्य सतना शहर में स्थित है। यह मंदिर रेलवे स्टेशन के करीब में स्थित है। आप इस मंदिर में घूमने के लिए जा सकते हैं। यहां पर विष्णु भगवान जी की प्रतिमा विराजमान है। यह मंदिर बहुत ही भव्य है। आपको यहां पर आकर बहुत अच्छा लगेगा। 


गैबीनाथ शिव मंदिर बिरसिंहपुर, सतना - Gabinath Shiva Temple Birsinghpur, Satna

गेबी नाथ मंदिर सतना शहर की एक धार्मिक जगह है। यह मंदिर शिव भगवान जी को समर्पित है। यहां पर एक कुंड देखने के लिए मिलता है। इस मंदिर में शिवरात्रि और सावन सोमवार में बहुत भीड़ रहती है। मंदिर बहुत खूबसूरत है। यहां पर शिवलिंग विराजमान है। यह मंदिर सतना शहर से करीब 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आप इस मंदिर पर अपने वाहन से पहुंच सकते हैं। यह मंदिर सतना शहर की बिरसिंहपुर में स्थित है।

 

भगवान परशुराम सरोवर सतना - Bhagwan parshuram sarovar satna

भगवान परशुराम सरोवर सतना शहर में स्थित घूमने के लिए एक अच्छी जगह है। यहां पर आपको परशुराम जी की एक बड़ी सी प्रतिमा देखने के लिए मिलती है और यहां पर एक सरोवर भी बना हुआ है। यह सरोवर सतना सिमरिया रोड पर स्थित है। आप यहां पर आसानी से पहुंच सकते हैं। यह जगह रेलवे स्टेशन से 7 से 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। भगवान परशुराम जी की मूर्ति की स्थापना वर्ष 2017 में ब्राह्मण संगठन विप्र सेना द्वारा कराई गई थी। यहाँ भगवान परशुराम जी की मूर्ति 15 फीट ऊंची है।


चित्रकूट दर्शनीय स्थल - Chitrakoot tourist places | Best places to visit in chitrakoot

चित्रकूट में घूमने की जगहें - Chitrakoot dham tourist place | Chitrakoot famous places


रामघाट चित्रकूट - Ramghat chitrakoot

चित्रकूट के घाट में भई संतन की भीर तुलसीदास चंदन घिसे तिलक देत रघुवीर 

चित्रकूट में स्थित रामघाट सबसे प्रसिद्ध स्थानों में से एक है। रामघाट मंदाकिनी नदी के किनारे में स्थित है।  रामघाट चित्रकूट के प्रमुख घाटों में से एक है। आप रामघाट में मंदाकिनी नदी में स्नान करके अपने आप को बहुत ही तरोताजा महसूस करेंगे। शाम को और सुबह रामघाट में मंदाकिनी नदी की आरती की जाती है, जो बहुत ही भव्य रहती है। इस आरती में आपको जरूर शामिल होना चाहिए। आपको बहुत अच्छा लगेगा आरती में शामिल होकर। इस घाट के बारे में मान्यता है कि राम घाट पर ही तुलसीदास जी को श्री राम जी के दर्शन हुए थे। इस घाट पर आप नाव की सवारी का भी मजा ले सकते हैं। शाम के समय नाव की सवारी का मजा ही अलग होता है। रामघाट के बारे में कहा जाता है, कि रामघाट में श्री राम जी ने स्नान किया था। इसलिए इस घाट को रामघाट कहा जाता है। 

मत्यगजेंद्र नाथ शिव मंदिर - Matyagendra Nath Shiva Temple

मत्यगजेंद्र नाथ शिव मंदिर रामघाट में स्थित प्राचीन मंदिर है। यह मंदिर शिव भगवान जी को समर्पित है। इस मंदिर की स्थापना जब राम भगवान जी वनवास काल के दौरान चित्रकूट आए थेए तब की गई थी। इस मंदिर में सावन सोमवार में और महाशिवरात्रि में बहुत भारी संख्या में लोग शिव भगवान जी के दर्शन करने के लिए आते हैं। 

जानकी कुंड चित्रकूट - Janki kund chitrakoot

जानकी कुंड चित्रकूट में घूमने की एक प्रसिध्द जगह है। जानकी कुंड प्रमोद वन के करीब स्थित है। जानकी कुंड रामघाट से 2 किमी दूर है। यहां पर आपको प्रकृति का बहुत ही खूबसूरत व्यू देखने के लिए मिलता है। जानकी कुंड मंदाकिनी नदी के बाएं किनारे स्थित है। यहां का पानी स्वच्छ एवं पारदर्शी है। यहां पर आप चट्टानों में बैठकर इस जगह का आनंद ले सकते है। सीता माता को जानकी के नाम से भी जाना जाता थाए क्योंकि वह जनक पुत्री थी। इसलिए इस कुंड को भी जानकीकुंड कहा जाता है। सीता माता अपने वनवास काल के दौरान यहां स्नान किया करती थी। नदी के किनारे पर सीता माता जी के चरण कमल चट्टानों पर बने है, जिनके दर्शन आप कर सकते हैं। यहां पर एक हनुमान मंदिर भी स्थित है। जानकी कुंड के पास में राम जानकी रघुवीर मंदिर और संकट मोचन मंदिर है। 


राम दर्शन चित्रकूट - Ram darshan chitrakoot

राम दर्शन चित्रकूट में स्थित एक मंदिर है। यह चित्रकूट में घूमने की एक अच्छी जगह है। यहां पर प्रवेश का शुल्क लिया जाता है। युवा का 10 रू और बच्चों का 5 रू लिया जाता है। यहां पर आपको श्री राम, लक्ष्मण और सीता जी के बारे में जानकारी मिलेगी। यहां पर आप आकर राम भगवान जी के बहुत सारी पेंटिंग देख सकते हैं और उनके जीवन के बारे में जान सकते हैं। यहाँ पर आप विभिन्न देशों की विभिन्न प्रकार के रामायण के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यहां पर आपको प्रवेश द्वार पर ही हनुमान जी की एक बहुत बड़ी मूर्ति देखने के लिए मिलती है, जो लोगों को आकर्षित करती हैं। यहां पर यात्रा का समय सुबह से लेकर शाम के 4रू30 बजे तक रहता है। राम दर्शन रामघाट से करीब 5 किलोमीटर की दूरी पर होगा। आप यहां पर आसानी से आ सकते हैं। राम दर्शन स्फटिक शिला के पास ही में स्थित है। मंदिर के अंदर मोबाइल फोन और कैमरा ले जाने की अनुमति नहीं है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर मुफ्त लॉकर सुविधा उपलब्ध है।

स्फटिक शिला चित्रकूट - Sphatik shila chitrakoot

स्फटिक शिला चित्रकूट में घूमने वाली एक सुंदर जगह है। इस जगह में आपको मंदाकिनी नदी का दर्शनीय व्यू देखने के लिए मिलता है। स्फटिक शिला मंदाकिनी नदी के किनारे स्थित है। यहां पर नदी का दृश्य बहुत अच्छा रहता है। यहां पर आपको बंदर भी देखने के लिए मिलते हैं। आप यहां पर आसानी से आ सकते हैं। इस जगह में आपको एक चट्टान देखने मिलती है, जिसमें सीता माता और राम जी के चरण चिन्ह उभरे हुए हैं। यहां पर पंडित जी बैठे रहते हैं और आप यहां पर आते हैं, तो वह आपको यहां पर बैठने के लिए कहते हैं और आपको कथा सुनाते हैं। कहा जाता है की सीता माता और राम जी यहां पर अपने वनवास काल के दौरान रुके थे। वह अपना खाली समय यहां पर प्रकृति के पास बैठकर बिताया करते थे। यहीं पर उन्होंने मानव रूप में कई लीलाएं की। इस स्थान पर राम जी ने फूलों से बने आभूषणों से मां सीता का श्रृंगार किया था। एक बार इंद्र के पुत्र जयंत ने कौवे का रूप धारण करके सीता माता के पैर में चोंच मार दी, जिससे सीता माता को खून निकलने लगा। यह सब देखकर राम जी क्रोधित हो गए और श्री राम जी ने जयंत को घास का एक तिनका तीर से  मारा, जो उसकी आंख में लगा और उसकी एक आँख घयाल हो गई। उस समय से कहा जाता है कि कौवे को एक आंख में कम दिखाई देता है। आपको यहां का दृश्य बहुत अच्छा लगेगा। नदियां और चट्टानें का मेल बहुत ही अद्भुत है। स्फटिक शिला रामघाट से करीब 5 किलोमीटर दूर होगा। स्फटिक शिला के पास ही में यज्ञ स्थली और हनुमान जी का मंदिर भी हैए उसके दर्शन भी आप कर सकते हैं। 

कामदगिरि चित्रकूट - Kamadgiri chitrakoot

कामदगिरि चित्रकूट का एक मुख्य पर्यटन आकर्षण है। कामदगिरि में देखने के लिए आपको एक पर्वत मिलता है।इस पर्वत को कामदगिरि पर्वत कहते हैं। इस पर्वत की परिक्रमा करनी पड़ती हैए जिससे आपको पुण्य लाभ मिलता है। कामदगिरि पर्वत के आस पास बहुत सारे प्राचीन मंदिर है, जिन्हें आप देख सकते हैं, जिनका संबंध राम, लक्ष्मण और सीता जी से है। कामदगिरि शब्द संस्कृत का है और कामदगिरि का अर्थ होता है। वह पर्वत जो सभी इच्छाओं को पूरा करता है। 

श्री कामता नाथ मंदिर चित्रकूट धाम - Kamtanath mandir chitrakoot dham

कामत नाथ मंदिर चित्रकूट में कामदगिरि पहाड़ में स्थित है। यह मंदिर बहुत ही भव्य है। कामतनाथ भगवान राम का ही एक रूप है और यह पूरे चित्रकूट के इष्टदेव है। मंदिर का प्रवेश द्वार भी बहुत खूबसूरत है। मंदिर में आपको काले रंग की कामत नाथ जी की प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। यह चित्रकूट के मुख्य देवता हैं। जो भी चित्रकूट में आता है। वह पहले इस मंदिर में कामत नाथ जी के दर्शन करता है, उसके बाद परिक्रमा प्रारंभ करता है। यहां पर आपको प्रसाद की दुकान बाहर मिल जाती है, जहां से आप प्रसाद ले सकते हैं और भगवान को प्रसाद अर्पण कर सकते हैं। 

कामदगिरि परिक्रमा - Kamadgiri parikrama chitrakoot

चित्रकूट में कामदगिरि की परिक्रमा करने से पुण्य लाभ अर्जित होता है। यह परिक्रमा मार्ग करीब 5 किलोमीटर लंबा है। परिक्रमा की शुरुआत कामदगिरि मंदिर के दर्शन के बाद होती है। परिक्रमा मार्ग हरे भरे पेड़ों से घिरा हुआ है। यहां पर ढेर सारे मंदिर भी हैं। यह परिक्रमा मार्ग पूरी तरह से पक्का बना हुआ है और इस मार्ग में टीन का शेड भी लगा बना हुआ है। पूरे परिक्रमा मार्ग में आप आसानी से चल सकते हैं। आपको परिक्रमा मार्ग पर पैदल चलना रहता है और नंगे पैर चलना रहता है। आपको परिक्रमा मार्ग में बहुत सारे बंदर भी मिलते हैं, जो आप के सामानों को छीन सकते हैं, तो यहां पर आपको बंदरों से संभल कर रहने की आवश्यकता होती है। परिक्रमा मार्ग में आपको बहुत सारे मंदिर देखने मिलते हैं, जो प्राचीन हैं और राम भगवान जी से संबंधित है। परिक्रमा मार्ग में आपको बहुत सारी दुकानें मिलती हैं और पानी की सुविधा भी मिल जाती है, तो आप आसानी से परिक्रमा पूरी कर सकते हैं। 

सरयू गंगा कुंड - Sarayu Ganga Kund

सरयू गंगा कुंड कामदगिरि परिक्रमा मार्ग पर पड़ता है। यहां पर बैठने की व्यवस्था है। यहां पर एक कुंड बना हुआ है, जिसमें पानी भरा रहता है और यहां पर बैठने की व्यवस्था है। आप यहां बैठकर यहां की शांति का अनुभव कर सकते हैं। 

श्री राम भरत मिलाप चित्रकूट - Shri Ram Bharat Milap Chitrakoot

राम भरत मिलाप मंदिर कामदगिरि परिक्रमा मार्ग पर ही स्थित है। यह एक धार्मिक स्थान होने के साथ-साथ एक ऐतिहासिक स्थान भी है। इस मंदिर में आपको श्री राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के चरणों के चिन्ह चट्टानों पर उभरे हुए देखने के लिए मिलते हैं। कहा जाता है कि जब भरत जी को पता चला कि राम जी अयोध्या छोड़कर वनवास चले गए हैं, तो राम जी को पुनः वापस लाने के लिए भरत जी वन की तरफ गए और राम जी  से भरत जी कामदगिरि पहाड़ पर मिले। राम और भरत के मिलाप से ही जो यहां की चट्टानें थी। वह पिघल गई और उनके चरण चिन्ह चट्टानों पर अंकित हो गए, जो आज भी आप देख सकते हैं। राम भगवान और भरत जी के चरण चिन्ह एक चट्टान पर बने हुए हैं और लक्ष्मण जी और शत्रुघ्न के चरण चिन्ह अलग चट्टान पर बने हुए हैं। इन चट्टानों को संरक्षित रखने के लिए इन्हें अब पक्का बना दिया गया है और चारों तरफ से जाली लगा दी गई है, ताकि लोग इसे देख सके और इन चट्टानों में किसी भी तरह का नुकसान ना पहुंच पाए। आपको यहां पर बहुत सारी पेंटिंग भी देखने के लिए मिलेगीए जो  श्री रामए लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के मिलन का सजीव चित्रण देखना मिलता है।

गणेश बाग चित्रकूट - Ganesh bagh chitrakoot

गणेश बाग चित्रकूट के कर्वी में स्थित एक पर्यटन स्थल है। यह एक ऐतिहासिक स्थल है। यह एक अच्छी जगह है, जो बहुत सारे लोगों को नहीं पता है। गणेश बाग कर्वी देवांगाना मार्ग पर स्थित है। गणेश बाग 19 वी शताब्दी के प्रारंभ में श्रीमंत विनायक राव पेशवा ने अपने मनोरंजन के लिए कराया था। गणेश बाग में आपको एक तालाब देखने के लिए मिलता है। इसके अलावा यहां पर एक 7 मंजिला बावड़ी भी बनी हुई है। इस बावडी में पानी भी भरा हुआ है। यहां पर एक मंदिर बना हुआ है, जिसके दीवारों पर हिन्दू देवी एवं देवता की मूर्तियां बनाई गई है। गणेश बाग मिनी खजुराहो के नाम से जाना जाता है। गणेश बाग शाही परिवार के मनोरंजन के लिए पेशवा द्वारा बनवाया गया था।

सती अनुसुइया मंदिर चित्रकूट - sati ansuya mandir chitrakoot

सती अनसूया मंदिर चित्रकूट का एक पर्यटक स्थल है। यह मंदिर सघन जंगल के बीच में स्थित है और मंदाकिनी नदी के किनारे स्थित है। यहां पर आपको आकर बहुत अच्छा लगेगा, क्योंकि यहां पर आपको प्राकृतिक दृश्य देखने के लिए मिलेगा। ऋषि अत्री सप्तर्षियों में से एक थे। ऋषि अत्री की पत्नी सती अनसूया थी। यह स्थल महर्षि अत्रि एवं माता अनसूया की तपोस्थली रही है। सती अनसूया ने यह पर ही सीता माता को सतीत्व की शिक्षा दी थी। मान्यता है कि माता अनसूया के तपोबल से ही गंगा यहां पर मंदाकिनी नदी के रूप में अवतरित हुई थी। सती अनसूया आश्रम चित्रकूट से करीब 15 किलोमीटर दूर है। और मुख्य मार्ग से यह आश्रम 5 किलोमीटर अंदर है। सती अनसूया आश्रम में आपके देखने के लिए बहुत सारी धार्मिक चीजें हैं। यहां पर आपको बहुत सारे मूर्तियां देखने के लिए मिलती हैं, जो प्राचीन काल के क्रियाकलापों से संबंधित है। यहां पर आपको गीता के श्री कृष्ण जी रथ में सवार हुए अर्जुन को उपदेश देते हुए देखने मिलते हैं। यहां पर मन्दाकिनी नदी  का पानी पारदर्शी है और मछलियां आपको यहां पर देखने के लिए मिलती है। यहां पर आप ऋषि अत्रि की तपोस्थली भी देख सकते हैं। दत्तात्रेय की का आश्रम भी देख सकते हैं। यहां पर परमहंसी आश्रम में आप उसको भी देख सकते हैं। 

भरतकूप मंदिर चित्रकूट - Bharatakoop mandir chitrakoot

भरतकूप चित्रकूट में स्थित एक प्राचीन मंदिर है। आपको यहां पर एक कुआं देखने के लिए मिलता है। इस कुएं को कूप कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि भरत जी अपने साथ सभी पवित्र  तीर्थों से जल लेकर आए थे। श्री राम जी के राज्याभिषेक के लिए मगर राम जी के मना करने के बाद भरत जी ने सभी पवित्र  तीर्थों के जल को इस कूप में डाला दिया।इस स्थल को धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्व है। इस कूप  के जल से स्नान करना पुण्य मिलता है। मान्यता अनुसार इस कूप के जल से स्नान करने से सभी प्रकार के रोग दूर होते हैं। यहां पर आपको श्री राम और भरत जी का पुराना मंदिर देखने के लिए भी मिलता है। 

हनुमान धारा चित्रकूट - Chitrakoot hanuman dhara mandir

हनुमान धारा चित्रकूट का एक पर्यटक स्थल है। यह मंदिर ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। पहाड़ी पर चढ़ने के लिए सीढ़ियां बनाई गई है। पहाड़ी के ऊपर से आपको बहुत ही सुंदर नजारा देखने के लिए मिलता है। हनुमान धारा में हनुमान जी की मूर्ति पहाड़ के बीच में स्थित है और ऊपर से उनके ऊपर झरने का पानी गिरता है, जो देखने में बहुत ही अद्भुत लगता है। कहा जाता है कि प्राचीन समय में जब हनुमान जी ने लंका में आग लगाई थी। तब उस आग की जलन को हनुमान जी को सहन नहीं हो रही है।  उस जलन को मिटने के लिए हनुमान जी राम जी के पास गए। हनुमान जी को राम जी ने सलाह दिया कि आप चित्रकूट के पर्वत में जाइए। हनुमान जी चित्रकूट के पर्वत पर गए और पहाड़ से एक जलधारा फूटी और हनुमान जी को उस जलन से राहत मिली। इस प्रकार यह जगह हनुमान धारा के नाम से प्रसिद्ध है। यहां पर आपको बहुत सारे बंदर भी मिलते हैं, जिन्हें आप चाहे तो खाना दे सकते हैं। चित्रकूटधाम रेलवे स्टेशन से हनुमान धारा की दूरी 10 किलोमीटर होगी। आप रेलवे स्टेशन से अपने निजी वाहन या ऑटो ऑटो से हनुमान धारा आ सकते हैं। 

सीता रसोई चित्रकूट - sita rasoi chitrakoot

सीता रसोई चित्रकूट में स्थित एक प्रसिद्ध जगह है। इसके बारे में कहा जाता है कि सीता जी ने यहां निवास किया था और यहां पर उन्होंने भोजन बनाकर ऋषियों को परोसा था। आप यहां पर आ कर 5 ऋषि की प्रतिमा देख सकते हैं। इसके अलावा आप यहां पर सीता जी के चैका बर्तन देख सकते हैं। सीता रसोई हनुमान धारा के ऊपर स्थित है। यहां पर आकर आपको बहुत अच्छा लगेगा। चारों तरफ नजारा बहुत ही मनोरम है। 

मार्कंडेय आश्रम - Markandeya Ashram

मार्कंडेय आश्रम घने जंगलों के बीच में स्थित भगवान शिव का छोटा सा मंदिर है। यहां पर आप आकर अपना अच्छा समय बिता सकते हैं। यहां पर आपको एक शिवलिंग देखने के लिए मिलता है और यहां पर हनुमान जी की प्रतिमा भी स्थित है। आप यहां आने के लिए मारकुंडी स्टेशन में आ सकते हैं। मारकुंडी स्टेशन से मार्कंडेय आश्रम करीब 1 किलोमीटर दूर होगा आपको यहां पर आकर अच्छा लगेगा। 

शबरी प्रपात चित्रकूट - shabri prapat chitrakoot

शबरी प्रपात चित्रकूट के पास स्थित एक खूबसूरत जलप्रपात है। यह जलप्रपात मध्य प्रदेश और चित्रकूट की सीमा पर स्थित है। आप यहां पर आकर प्राकृतिक नजारे देख सकते हैं और बहुत इंजॉय कर सकते हैं। यह जलप्रपात बरसात के समय पानी से भरा होता है, जो इस जलप्रपात को देखने का उचित समय है। आप यहां पर अपनी फैमिली और दोस्तों के साथ आकर बहुत मजे कर सकते हैं। यह जलप्रपात मंदाकिनी नदी पर बना हुआ है। यहां पर आकर झरने की कलकल आवाज सुनने में अलग ही आनंद आता है। यह जलप्रपात चित्रकूट से करीब 38  किलोमीटर दूर होगा। 

सरभंगा आश्रम चित्रकूट - sarbhanga ashram

सरभंगा आश्रम चित्रकूट के पास स्थित प्राकृतिक जगह है, जहां पर जाकर आपको बहुत अच्छा लगेगा। यह जगह घने जंगलों के बीच में स्थित है। यह जगह प्राकृतिक के साथ-साथ धार्मिक महत्व की हुई है। इस जगह पर सरभंग नाम के एक ऋषि रहा करते थे, जो एक महान तपस्वी थे। उन्हीं के नाम पर इस जगह को सरभंगा आश्रम कहा जाता है। सरभंगा आश्रम का जिक्र आपको रामायण में भी मिलेगा। इस आश्रम में वनवास काल के दौरान श्री राम जी सरभंग मुनि से मिलने के लिए आए थे। राम जी से मिलने के पश्चात सरभंग मुनि ने अपनी चिता स्वयं सजाया था एवं उसमें ब्रह्मलीन हो गए थे। सरभंगा आश्रम चित्रकूट से लगभग 40 किमी दूर है। सरभंगा आश्रम में आपके देखने के लिए बहुत सारी जगह है। आप यहां पर प्राचीन शिवलिंग देख सकते हैं, जो पत्थरों के बने हुए हैं। आपको यहां पर राम जी और सीता जी का मंदिर देखने मिलता है। यहां पर बरसात के समय झरना बहता है। वह भी देख सकते हैं। यहां पर कुंड बना हुआ है, जहां पर आप नहा सकते हैं। यहां पर आप सरभंग मुनि की प्रतिमा देख सकते हैं और जंगल का दृश्य है देखने लायक है। 

गुन्ता बांध चित्रकूट - Gunta Dam Chitrakoot

गुन्ता बांध चित्रकूट में स्थित एक अच्छी जगह है। गुन्ता बांध चित्रकूट के पास स्थित एक खूबसूरत जलाशय है। यह जगह ज्यादा फेमस नहीं है, मगर आप यहां पर आकर सूर्यास्त देख सकते है, जो बहुत ही मनोरम होता है। यह जलाशय मुख्य रूप से सिंचाई के लिए बनाया गया है। और आप यहां पर आ कर इसकी खूबसूरती देख सकते हैं। 

गुप्त गोदावरी चित्रकूट - Gupt godavari chitrakoot dham

गुप्त गोदावरी चित्रकूट की एक बहुत ही मनोरम जगह है। यहां पर आपको दो गुफाएं देखने के लिए मिलती हैए जिसमें कहा जाता है कि पुराने समय में यहां पर राम जी निवास किया करते थे। एक गुफा यहां पर शुष्क और हवादार है। आप यहां पर आराम से जा सकते हैं और इस गुफा में आपको श्री राम जी, माता सीता जी और लक्ष्मण जी की प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। यहां पर आपको एक पत्थर भी देखने के लिए मिलता है, जिसे खटखटा चोर कहा जाता है। यह पत्थर लटका हुआ है और गुफा के अंदर आपको बहुत सारे चमगादड़ देखने के लिए मिलते हैं। दूसरी गुफा में आपको अंदर जाने के लिए घुटनों घुटनों तक पानी भरा मिलता है और आपको उस में चलना पड़ता है। यह मंदाकिनी नदी का उद्गम हुआ है। यह जगह बहुत अच्छी लगेगी। गुप्त गोदावरी चित्रकूट से करीब 16 किलोमीटर दूर होगा। आप यहां पर गाड़ी से आराम से आ सकते हैं। 

श्री सोमनाथ प्राचीन मंदिर - Ancient somnath temple

सोमनाथ मंदिर चित्रकूट के पास स्थित एक बहुत ही प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर में आपको शिव भगवान की हजारों प्रतिमाएं इधर-उधर बिखरी हुई देखने के लिए मिलती है। यहां पर शिव भगवान जी की पत्थर की प्रतिमाएं विराजमान है। सोमनाथ मंदिर एक पहाड़ी पर स्थित हैं और यहां पर आप घूमने आ सकते हैं। यहां पर ज्यादा भीड़ भाड़ नहीं रहती है। आप यहां पर आकर अच्छा समय बिता सकते हैं। सोमनाथ मंदिर का निर्माण गुप्त काल में चंद्र गुप्त मौर्य के राज्य में हुआ था। 



उज्जैन के मंदिर - Ujjain famous temple | ujjain mandir list

उज्जैन दर्शनीय स्थल - Ujjain ke mandir | Ujjain temple list | Ujjain ka mandir


उज्जैन मध्य प्रदेश में स्थित एक खूबसूरत शहर है। उज्जैन को प्राचीन काल में उज्जैनि या अवंतीका के नाम से जाना जाता था। उज्जैन में प्राचीन काल में राजा विक्रमादित्य का शासन था। उज्जैन शहर को मंदिरों के शहर के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा उज्जैन में करीब 2000 से भी अधिक मंदिर स्थित है। आज के लेख में हम उज्जैन शहर के  मुख्य मंदिरों के बारे में जानकारी देने वाले हैं। 


महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग - Mahakal mandir ujjain

उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर पूरे भारत देश में प्रसिद्ध है। उज्जैन मध्यप्रदेश का एक  प्राचीन नगरी माना जाता है। महाकालेश्वर मंदिर एक धर्मिक स्थल है। महाकालेश्वर हिंदू लोगों के लिए एक पवित्र स्थल है। महाकालेश्वर में स्थित शिवलिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और महाकालेश्वर में स्थित शिवलिंग स्वयंभू है, अर्थात यह धरती से स्वयं उत्पन्न हुआ है। इसकी स्थापना किसी ने भी नहीं की है। महाकालेश्वर मंदिर शिप्रा नदी के पास स्थित है। यहां मंदिर बहुत ही भव्य है। यह मंदिर बहुत बडे क्षेत्र में फैला हुआ है। मंदिर में सभी प्रकार की सुविधा मौजूद है। महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन शहर की मध्य में स्थित है। मंदिर में पहुॅचने के लिए आपको आटो और टैक्सी की सुविधा मिल जाती है। मंदिर में ठहरने के लिए और भोजन की सुविधा भी मंदिर समिति द्वारा मौजूद है, इसके लिए आपको आनलाइन बुकिंग कराना पडता है। आप मंदिर के अंदर अपना मोबाइल फोन नहीं लेकर जा सकते है, आपको अपना मोबाइल फोन मंदिर में स्थित लाॅकर में रखना पडता है। मंदिर के बाहर एक बडा स्क्रीन लगा हुआ है, जिसमें आप महाकालेश्वर शिवलिंग के लाइव दर्शन कर सकते है। महाकालेश्वर मंदिर तीन मंजिला है। मंदिर परिसर में आपको और भी मंदिर देखने मिल जाते है। महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग दर्शन करने के लिए आते है। सावन सोमवार और महाशिवरात्रि को इस मंदिर में बहुत ज्यादा भीड रहती है। 

नागचन्द्रेश्वर मंदिर उज्जैन - Nagchandreshwar temple ujjain


महाकालेश्वर मंदिर की सबसे उपर मंजिल में नाग देवता का मंदिर स्थित है। यहां मंदिर साल में एक बार नागपंचमी के दिन ही खोला जाता है। इस मंदिर में भगवान शिव की बहुत आकर्षक मूर्ति विद्यामान है। इस मंदिर को नागचन्द्रेश्वर मंदिर कहते है। 

भस्म आरती महाकालेश्वर - Bhasmarti ujjain

महाकालेश्वर मंदिर में एक और आकर्षण मौजूद है। यहां पर सुबह के समय भस्म आरती होती है, जिसमें बहुत बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहते हैं। भस्म आरती में भगवान शिव शंकर के शिवलिंग को भस्म से सजाया जाता है और आरती की जाती है और यह भस्म श्मशान भूमि से लाई जाती है।

भारत माता मंदिर उज्जैन - Bharat mata mandir ujjain

भारत माता मंदिर उज्जैन शहर में स्थित एक दर्शनीय जगह है। यह मंदिर है, मगर यहां पर कोई भी देवी देवता की मूर्ति नहीं है। यहां पर भारत माता की मूर्ति स्थापित है, जो बहुत ही आकर्षक है। यहां मंदिर बहुत ही भव्य है। मंदिर के बाहर आपको भारत का एक 3 डी मैप, सभी ज्योतिर्लिंगों और महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल के साथ देखने मिलता हैं। यहां मंदिर महाकालेश्वर मंदिर के बहुत करीब में स्थित है। मंदिर में बगीचा बना हुआ है, जहां पर आप बैठकर अपना समय बिता सकते है। मंदिर के बाहर केंद्र में सुंदर फव्वारा बना हुआ है।

विक्रमादित्य स्मारक उज्जैन - samrat vikramaditya ujjain

विक्रमादित्य स्मारक उज्जैन शहर के मध्य में स्थित है। आपको यहां पर राजा विक्रमादित्य की पीतल की विशाल मूर्ति देखने के लिए मिलती है। यहां राजा विक्रमादित्य की 30 फीट उची प्रतिमा स्थित है। यह प्रतिमा रूद्रा तालाब के बीच में एक टीले पर बने हुई है। यह प्रतिमा उज्जैन नगर निगम और सिंहस्थ समिति द्वारा स्थापित किया गया था। उज्जैन शहर को प्राचीन समय में उज्जैनी नाम से जाना जाता था। राजा विक्रमादित्य उज्जयैनी नगरी में 2200 साल पहले राज्य किया था।  यहां पर आपको  बहुत सारी मूर्तियाँ देखने मिलती हैं। 

बड़ा गणेश मंदिर उज्जैन - Bada ganesh mandir ujjain

बड़ा गणेश मंदिर उज्जैन का एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर महाकालेश्वर मंदिर के बहुत करीब है। आप यहां पर पैदल ही घूमने के लिए आ सकते हैं। आपका जब भी उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर आने का प्लान बनता है, तो आप बड़े गणेश मंदिर भी घूम सकते हैं। बड़े गणेश मंदिर में आपको गणेश जी की एक बहुत बड़ी मूर्ति देखने के लिए मिलती है। इस कारण इस मंदिर को बड़े गणेश जी के मंदिर के जाना जाता  है। यहां पर आपको हनुमान जी की पंचमुखी प्रतिमा भी देखने के लिए मिलती है। यह दुनिया की गणेश जी की एकमात्र प्रतिमा हैए जो आपको यहीं पर देखने मिलेगी और कहीं पर नहीं।

हरसिद्धि मंदिर उज्जैन -  Harsiddhi mandir ujjain

हरसिद्धि माता का मंदिर उज्जैन शहर का एक धार्मिक स्थल है।  यह 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहाँ पर माता सती के मृत शरीर की दाहिने हाथ की कोहनी गिरी थी। हरसिद्धि माता उज्जैन के राजा विक्रमादित्य की कुलदेवी थी। हरसिद्धि माता का मंदिर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थित है। आप यहां पर पैदल भी जा सकते हैं। हरसिद्धि मंदिर रुद्र सागर झील के पास स्थित है। कहा जाता है कि भगवान शिव के कहने पर देवी पार्वती ने दो राक्षसों को मारने के लिए हरसिद्धि का रूप धारण किया था। हरसिद्धि मंदिर एक प्राचीन मंदिर है और मंदिर परिसर में आपको दो बड़े दीपक के स्तंभ देखने के लिए मिलते हैं, जिसमें तेल डालकर दीया जलाया जाता है। यह स्तंभ बहुत ऊंचे हैं और बहुत ही आकर्षक लगते हैं। दोनों दीपक स्तंभों में लगभग 1 हजार 11 दीपक हैं। लोगों का कहना है कि इन दीप स्तंभों की स्थापना उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य ने की थी। राजा विक्रमादित्य हर बारह साल में एक बार माता हरसिद्धि को अपना सिर माँ के चरणों में अर्पित किया करते थे। लेकिन माँ की कृपा से उनका सिर वापस आ जाता था। जब उन्होंने बारहवें समय के लिए अपना सिर अर्पित किया, तो वे वापस नहीं आए और उनका जीवन समाप्त हो गया।

गोपाल मंदिर उज्जैन - Gopal mandir ujjain

श्री द्वारकाधीश गोपाल मंदिर उज्जैन का एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर उज्जैन के मुख्य बाजार में स्थित है। यह मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है। आप जब भी उज्जैन आते हैं, तो इस मंदिर में आकर श्री कृष्ण भगवान जी के दर्शन कर सकते हैं। यह मंदिर खूबसूरत और प्राचीन है। यह मंदिर मराठा वास्तुकला में  बना है। इस मंदिर का निर्माण 19वीं शताब्दी में महाराजा माधव राज सिंधिया और बाईचा बाई सिंदे द्वारा बनाया गया था। मंदिर में जन्माष्टमी और हरिहर मिलन के समय बहुत ज्यादा भीड़ लगती हैं। यहां पर बहुत ज्यादा संख्या में लोग एकत्र होते हैं।  


काल भैरव मंदिर उज्जैन - Kaal bhairav mandir ujjain

श्री काल भैरव मंदिर उज्जैन शहर में स्थित एक अनोखा मंदिर है। इस मंदिर में आप भक्तों के द्वारा भगवान श्री काल भैरव को प्रसाद के रूप में शराब का प्रसाद चढ़ाया जाता है, जो एक अनोखा रिवाज है। यहां पर जो भी भक्त आते हैं। वह सभी भगवान काल भैरव को शराब का प्रसाद चढ़ाते हैं। यहां पर काल भैरव भगवान जी कुछ ही समय में शराब की बोतल खाली कर देते है। यह मंदिर उज्जैन शहर में शिप्रा नदी के तट पर स्थित है।  इस मंदिर में आसानी से पहुंचा जा सकता है। श्री काल भैरव को उज्जैन के संरक्षक या कोतवाल के रूप में जाना जाता है। यहां पर रोजाना सैकड़ों भक्त आते हैं। इस मंदिर के आसपास बहुत सारे लोगो आपको शराब बेचते हुए देखने के लिए मिल जाते हैं। पुराने समय में इस मंदिर का उपयोग केवल तांत्रिक साधनाओं के लिए किया जाता था। लेकिन अब इस मंदिर में भगवान काल भैरव के दर्शन करने के लिए सभी लोग आते हैं।  

चामुंडा माता मंदिर उज्जैन - Chamunda mata ujjain

चामुंडा माता का मंदिर उज्जैन शहर का धार्मिक स्थल है। यह मंदिर उज्जैन शहर के मुख्य मार्केट में स्थित है। आप इस मंदिर में आसानी से पहुंच सकते हैं। यह मंदिर चामुंडा माताजी को समर्पित है। मंदिर में आपको चामुंडा माता की प्रतिमा देखने के लिए मिलती है, जो बहुत ही अद्भुत लगती है। आपको इस मंदिर में आकर बहुत शांति मिलेगी। 

नगर कोट की रानी उज्जैन - Nagar kot ki rani ujjain

नगरकोट की रानी मंदिर उज्जैन में स्थित एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर उज्जैन शहर का एक प्राचीन मंदिर है। आपको मंदिर पर माता की अद्भुत प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। मंदिर के बाहर आपको एक तालाब भी देखने मिलता है। इस मंदिर में नवरात्रि के समय बहुत ज्यादा भीड़ लगती है, बहुत ज्यादा संख्या में लोग नवरात्रि के समय यहां पर आते हैं। यहां पर एक गार्डन भी स्थित है। 

भूखी माता मंदिर उज्जैन - Bhukhi mata mandir ujjain

भूखी माता का मंदिर उज्जैन शहर में स्थित एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर शिप्रा नदी के किनारे स्थित है। इस मंदिर में नवरात्रि के समय बहुत भीड़ लगती है। इस मंदिर में आकर आपको बहुत अच्छा लगता है और शिप्रा नदी का नजारा भी बहुत अद्भुत होता है। यहां पर भूखी माता और धूमा माता विराजमान है। आपको यहां आकर शांति मिलेगी।   

मंगलनाथ मंदिर उज्जैन - Mangalnath mandir ujjain

मंगलनाथ मंदिर उज्जैन शहर का एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर शिप्रा नदी के किनारे स्थित है। यह मंदिर मंगल दोष के निवारण के लिए जाना जाता है। यहां पर बहुत सारे लोग अपने मंगल दोष के निवारण के लिए आते हैं। यह मंदिर कर्क रेखा में स्थित है। यहां पर आपको शिव भगवान जी के दर्शन करने के लिए मिलते है। यह मंदिर बहुत ही प्राचीन है। इस मंदिर में आपको हनुमान जी के दर्शन करने भी मिल जाते हैं। इस मंदिर से शिप्रा नदी का बहुत ही भव्य नजारा देखने के लिए मिलता है। यहां पर आकर आपको बहुत अच्छा लगेगा। यह मंदिर उज्जैन शहर के बहुत करीब है। आप यहां पर आसानी से पहुंच सकते हैं। मत्स्य पुराण के अनुसार इस स्थान को मंगल ग्रह का जन्म स्थान माना जाता है। इस मंदिर में विशेषकर मंगलवार के दिन बहुत सारे लोग दर्शन करने के लिए आते हैं।  

मंचामन गणेश मंदिर उज्जैन - Manchaman ganesh mandir ujjain

मंचामन गणेश मंदिर उज्जैन शहर का एक धार्मिक स्थल है। यह प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है, कि इस मंदिर की स्थापना श्री राम और माता सीता ने वनवास काल के समय की थी। इस मंदिर में आकर आप गणेश जी की भव्य प्रतिमा देख सकते हैं। मंदिर के पास आपको एक बावली भी देखने के लिए मिलती है और पुराने समय के मंदिर के ढांचे भी देखने के लिए मिलते हैं। यहां आकर आपको अच्छा लगेगा।

चिंतामन गणेश मंदिर उज्जैन - chintaman ganesh ujjain


चिंतामन गणेश मंदिर उज्जैन शहर का एक धार्मिक स्थल है। इस मंदिर में गणेश जी को चिंतामन के नाम से जाना जाता है, अर्थात सारी चिंता को हरने वाले माना जाता है। यह मंदिर उज्जैन शहर के बाहर स्थित है। यह मंदिर उज्जैन शहर से करीब 10 किलोमीटर दूरी पर होगा। आप इस मंदिर तक आप अपने वाहन से आ सकते हैं। मंदिर में आपको गणेश जी की भव्य प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। इस मंदिर में लोग भगवान गणेश जी के दर्शन करने आते हैं और जो भी अपना नया काम शुरू करते हैं। उस काम के लिए गणेश जी का आशीर्वाद लेने के लिए आते हैं। चाहे विवाह का काम हो या नया सामान लेना हो। यह भगवान गणेश का ऐतिहासिक मंदिर हैं। मंदिर में सभी प्रकार की व्यवस्थाएं उपलब्ध है। मंदिर के बाहर आपको बहुत सारी प्रसाद की दुकानें देखने के लिए मिलती है, जहां से आप मंदिर के लिए प्रसाद और फूल वगैरा ले सकते हैं। मंदिर में गणेश जी की मूर्ति विद्यमान है और गणेश जी के आजू - बाजू में रिद्धि और सिद्धि माता की मूर्ति विद्यमान है।  मंदिर में एक बबली भी हैए जिसे लक्ष्मण बबली के नाम से जाना जाता है। यह प्राचीन बावड़ी है, आप इसे भी देख सकते हैं। 

चारधाम मंदिर उज्जैन - Chardham mandir ujjain

श्री चारधाम मंदिर उज्जैन शहर का एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर हरसिध्दि मंदिर के समीप है। यहां पर आपको भारत के चार धाम जगन्नाथ पुरी, रामेश्वरम, द्वारका, बद्रीनाथ की प्रतिकृति देखने के लिए मिलती है। भारत में चार धाम बहुत प्रसिद्ध है और इन धामों के दर्शन करने से लोगों को मुक्ति प्राप्त होती है। यहां पर आपको बहुत सारी मूर्तियां देखने के लिए मिलती है। यहां पर धार्मिक चित्रण मूर्तियों के द्वारा किया गया है, जो बहुत ही आकर्षण लगता है।  यहां पर कृष्ण भगवान की लीलाओं को दर्शाया गया है। विष्णु भगवान को नाग सैया में दिखाया गया है। ऋषि-मुनियों को तपस्या करते हुए दिखाया गया है। बालाजी भगवान की मूर्ति स्थापित की गई है। शंकर भगवान जी की मूर्ति स्थापित की गई है। यहां पर कृष्ण भगवान जी को गोवर्धन पर्वत उठाए हुए भी दिखाया गया है। यहां पर वैष्णो माता की गुफा भी बनाई गई है और उसके अंदर वैष्णो माता की स्थापना की गई है। आप यहां पर आकर वैष्णो माता के दर्शन कर सकते हैं। 

प्रशांति धाम उज्जैन - Prashanti Dham Ujjain

प्रशांति धाम उज्जैन शहर का एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर शिप्रा नदी के किनारे स्थित है। यह मंदिर उज्जैन इंदौर हाईवे रोड में स्थित है। आपको इस मंदिर में आकर बहुत शांति मिलेगी, क्योंकि यहां के चारों तरफ का वातावरण हरियाली से भरपूर है और पूरी तरह नेचुरल है। यह मंदिर साईं बाबा को समर्पित है। आप यहां पर आकर साईं बाबा के दर्शन कर लेते हो। यहां पर आप शिप्रा नदी का बहुत ही सुंदर नजारा देख सकते हैं। यहां पर प्रशांति घाट है,  जहां पर बैठकर आप शिप्रा नदी को देख सकते हैं। यहां पर आकर आपको लगेगा कि आप शिर्डी के साईं बाबा के मंदिर आ गए हैं। यहां पर आपके रुकने और खाने की व्यवस्था भी रहती है। 

इस्कॉन मंदिर उज्जैन - ISKCON Mandir Ujjain

इस्कॉन मंदिर उज्जैन का एक धार्मिक मंदिर है। यह मंदिर श्री कृष्ण भगवान जी को समर्पित है। यह मंदिर बहुत ही भव्य है। यह मंदिर सफेद मार्बल से बना हुआ है। इस मंदिर के सामने हरा भरा बगीचा लगा हुआ है। यहां पर आकर आपको बहुत अच्छा लगेगा। यहां पर श्री कृष्ण के भजन चलते रहते हैं, जो बहुत ही शांति देते हैं। यहां पर आपको श्री कृष्ण और राधा जी की प्रतिमाएं देखने के लिए मिलती हैं। यहां पर आपको श्री कृष्ण, बलराम, बलभद्र, सुभद्रा और नरसिंह देव जी की प्रतिमाएं देखने के लिए मिलती हैं। यह इस्कॉन मंदिर उज्जैन के नानाखेड़ा बस स्टैंड के पास स्थित है। यहां पर आप आसानी से आ सकते हैं। कृष्ण के भक्तों के लिए इस्कॉन मंदिर एक महत्वपूर्ण स्थान है। उज्जैन शहर में सुदामा, बलराम, और कृष्ण भगवान जी के साथ ऋषि संदीपनी के आश्रम में शिक्षा प्राप्त की थी। मंदिर में एक गौशाला भी है और श्रद्धालुओं के लिए आवास उपलब्ध है। यहां पर प्रसाद की भी व्यवस्था है। 

नवग्रह शनि मंदिर उज्जैन - Navgrah mandir ujjain

नवग्रह मंदिर उज्जैन में स्थित एक धार्मिक स्थल है। नवग्रह मंदिर उज्जैन शहर में त्रिवेणी संगम के पास स्थित है। यह मंदिर उज्जैन शहर से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह मंदिर उज्जैन इंदौर मार्ग पर स्थित है। मंदिर तक आसानी से पहुंच सकते हैं। इस मंदिर में नौ ग्रहों की पूजा की जाती है। इस मंदिर में प्रत्येक 9 ग्रहों के लिए अलग-अलग मंदिर हैं और प्रत्येक ग्रह पिंडी के रूप में विराजमान है। ये ग्रह हैं सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु। यहां पर शिप्रा नदी का संगम बहुत ही मनमोहक लगता है। यह मंदिर शनि भगवान जी को भी समर्पित है। यहां पर शनि भगवान जी की प्रतिमा भी आपको देखने के लिए मिलती है। यहां पर आपको हनुमान जी की प्रतिमा भी देखने के लिए मिलती है। यह मंदिर  राजा विक्रमादित्य के द्वारा बनवाया गया था। शनिवार को यहाँ बहुत भीड़ होती है, क्योंकि शनिवार को सभी लोग शनि महाराज की पूजा करने आते  हैं। 

त्रिवेणी घाट उज्जैन - Triveni ghat ujjain

त्रिवेणी घाट उज्जैन शहर का एक बहुत सुंदर घाट है। यहां पर तीन नदियों का संगम हुआ है। शिप्रा, गण्डकी  और सरस्वती नदी का संगम हुआ है। सरस्वती नदी यहां पर गुप्त है। यहां पर कुंभ का मेला आयोजित होता हैए जो हर 12 वर्ष में एक बार आयोजित होता है। 2016 यहाँ का आखिरी कुंभमेला था। अब 12 साल बाद लगेगा ।

राम घाट उज्जैन - Ram Ghat Ujjain

राम घाट उज्जैन का एक प्रसिद्ध घाट है। यह शिप्रा नदी पर  स्थित है। यह घाट महाकालेश्वर मंदिर के बहुत करीब है। आप यहां पर पैदल भी भ्रमण कर सकते हैं। शिप्रा नदी मध्य प्रदेश की एक प्रमुख नदी है। शिप्रा नदी धार जिले से निकलती हैए और मध्य प्रदेश के कई जिलों से बहते हुए यह चंबल नदी से मिल जाती है और राजस्थान में प्रवेश करती है। आप राम घाट में नहा कर अपने पाप धो सकते हैं। यहाँ पर आप बोटिंग का भी मजा ले सकते हैं। यहां पर बहुत सारे मंदिर हैं, जहां पर जाकर आप को शांति मिलेगी। 

सिद्धवट उज्जैन - Siddhavat Ujjain

सिद्धवट उज्जैन शहर का एक धार्मिक स्थल है। सिद्धवट शिप्रा नदी के किनारे स्थित है। यहां पर आपको एक कल्पवृक्ष देखने के लिए मिलता है। इस कल्पवृक्ष की बहुत महिमा है। कहा जाता है कि इस कल्पवृक्ष को स्वयं माता पार्वती ने लगाया था और शंकर जी के पुत्र कार्तिकेय ने इस कल्पवृक्ष के नीचे भोजन किया था। इस कल्पवृक्ष के नीचे  राजा विक्रमादित्य ने तपस्या की थी। बेताल को अपने वश में करने के लिए। इस कल्पवृक्ष का वही महत्व है, जो महत्व अक्षय वट का इलाहाबाद में है। इस कल्पवृक्ष के पास बहुत सारी क्रियाकलाप किए जाते हैं। यहां पर पिंडदान किया जाता है। यहां पर तर्पण किया जाता है। संतान प्रापति के लिए पूजा की जाती है। यहां का वातावरण शांत है। आप यहां पर आकर शांति से बैठ सकते हैं। यहां पर आसपास बहुत सारे खाने.पीने के छोटे.छोटे ठेले हैंए जहां पर खाने.पीने का भी लुप्त उठा सकते हैं। 

महर्षि सांदीपनी आश्रम उज्जैन - Maharishi Sandipani Ashram Ujjain

महर्षि सांदीपनी आश्रम उज्जैन शहर का एक धार्मिक स्थल है। महर्षि सांदीपनि आश्रम को अंकपात के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इस जगह पर श्री कृष्ण भगवान ने अपनी लेखनी को धोया था। इस पवित्र स्थल पर महर्षि सांदीपनि द्वारा श्री कृष्ण, बलराम और सुदामा को शिक्षा दी गई थी। यहां पर 64 प्रकार की विद्या श्री कृष्ण जी को दी गई थी। यहां पर आपको देखने के लिए बहुत सारी पेंटिंग मिल जाती है, जिनमें अलग-अलग तरह की क्रियाकलाप करते हुए श्री कृष्ण जी को दिखाया गया है। यहां पर एक कुंडली बना हुआ है, जिसे गोमती कुंड कहते हैं। यहां पर शिवलिंग विराजमान है, जिसकी स्थापना द्वापर युग में की गई थी। यहां पर ऋषि सांदीपनी की चरण पादुका भी स्थित हैं, जिसके दर्शन आप कर सकते हैं। यहां पर आकर आपको शांति मिलेगी। 

यमराज मंदिर उज्जैन - Yamraj mandir ujjain

यमराज मंदिर भारत में एकलौता मंदिर है, जो उज्जैन शहर में स्थित है। इस मंदिर में यमराज की प्रतिमा स्थित है। यमराज को मृत्यु का देवता कहा जाता है। कहा जाता है कि इस मंदिर में दीपक जलाने से आपकी अकाल मृत्यु टाली जा सकती है। यह मंदिर दुर्गादास की छतरी के पास स्थित है। आप इस मंदिर में आसानी से आ सकते हैं।

गढ़कालिका माता मंदिर उज्जैन - Gadkalika mandir ujjain

श्री गढ़कालिका का मंदिर उज्जैन शहर का एक प्रसिद्ध मंदिर है। यहाँ उज्जैन शहर का धार्मिक स्थल है। यह मंदिर काली माता को समर्पित है। यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहां पर माता सती का ऊपरी होंठ गिरा था। यह मंदिर क्षिप्रा नदी के तट पर उज्जैन के पास स्थित है। लोगो के अनुसार गढ़ कालिका देवी महाकवि कालिदास की इष्ट देवी मानी जाती है। महाकवि कालिदास पहले एक मूर्ख व्यक्ति थे। मगर गढ़ कालिका देवी जी के शरण में आने से वह महाकवि बन गए और उन्होंने अभिज्ञान शकुंतलम और मेघदूत की रचना की। इसके अलावा वहां विक्रमादित्य के नवरत्नों में से एक थे। इस मंदिर का इतिहास बहुत लंबा है। यह मंदिर 2000 वर्ष से अधिक पुराना है। यह मंदिर बहुत ही भव्य तरीके से बना हुआ है और आप यहां आकर गढ़कालिका जी के दर्शन कर सकती हैं। आपको यहां आकर सकारात्मक मिलेगी। 

गेबी हनुमान मंदिर उज्जैन - Gebi hanuman mandir ujjain

गेबी हनुमान मंदिर उज्जैन शहर का एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर उज्जैन के मुख्य बाजार में स्थित है। इस  मंदिर में आसानी से आ सकते हैं। यह मंदिर द्वारकाधीश गोपाल कृष्ण मंदिर के पास स्थित है। इस मंदिर में हनुमान जी का बाल रूप विद्यमान है। इस मंदिर में आकर्षण का केंद्र है। यहां पर होने वाली आरती है। आप आरती में शामिल होते हैं, तो आपको यहां पर सकारात्मक ऊर्जा मिलेगी। आपको इस मंदिर में आकर बहुत अच्छा लगेगा। 

84 महादेव मंदिर उज्जैन - 84 Mahadev Mandir Ujjain

उज्जैन में महादेव के 84 मंदिर हैं और यह चौरासी मंदिर उज्जैन शहर के अलग-अलग जगह में मौजूद है। सावन सोमवार में इन 84 मंदिरों की परिक्रमा की जाती है। यह सभी मंदिर प्राचीन है और इन सभी मंदिरों में दर्शन करने से अलग-अलग मन्नते पूरी होती हैं। इन मंदिरों में स्थित शिवलिंग के दर्शन करने से अलग-अलग फल प्राप्त होते हैं। इनमें से कुछ महादेव मंदिर के बारे में जानकारी दी जा रही है। 

अंगारेश्वर महादेव उज्जैन - Angareshwar Mahadev Ujjain

अंगारेश्वर महादेव मंदिर उज्जैन में स्थित एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर शिप्रा नदी के किनारे स्थित है। यह मंदिर शिव भगवान जी को समर्पित है। यह मंदिर मंगलनाथ मंदिर के बहुत करीब है। आप इस मंदिर में भी घूमने के लिए आ सकते हैं। यह मंदिर भी कर्क रेखा में स्थित है। इस मंदिर में भी मंगल दोष के निवारण के लिए पूजा की जाती है। यहां पर आपको गौशाला देखने के लिए मिलती है। आप यहां पर आकर अपना अच्छा समय बिता सकते हैं। शिप्रा नदी का बहुत ही अद्भुत नजारा यहां पर आपको देखने के लिए मिलता है। यह मंदिर बहुत ही सुंदर और प्राचीन है। 

ऋणमूक्तेश्वर महादेव मंदिर  उज्जैन - Rinmukteshwar mahadev mandir ujjain 

ऋण मुक्तेश्वर मंदिर उज्जैन शहर का एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर शिप्रा नदी के किनारे स्थित है। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इस मंदिर पर आकर प्रार्थना करने से और पीली पूजा करने से आपको ऋण से मुक्ति मिलती है, अर्थात कर्ज से मुक्ति मिलती है। आप पर किसी भी तरह का कर्ज रहता है, उससे आप मुक्ति पा सकते हैं। इस मंदिर में राजा हरिश्चंद्र ने तपस्या की थी, जिसके बाद शंकर जी ने उन्हें वरदान दिया था, कि जो भी इस मंदिर में आकर पीली पूजा करवाएगा। उसे अपने कर्ज से मुक्ति मिलेगी। आपको यहां पर एक बरगद का पेड़ देखने के लिए मिलता है। आप इस मंदिर में आकर भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर सकते हैं।

कुंडेश्वर महादेव मंदिर - Kundeshwar mahadev mandir ujjain

कुंडेश्वर महादेव मंदिर सांदीपनी आश्रम के बहुत करीब स्थित है। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है, कि श्री कृष्ण भगवान जी गोमती कुंड से जल लाकर शिव भगवान पर अर्पण किया करते थे और उनके सामने अपनी विद्या का अभ्यास किया करते थे। यहां पर आपको एक शिवलिंग देखने के लिए मिलता है और मंदिर की दीवारों पर पत्थर की प्रतिमाएं बनाई गई है। इसके अलावा मंदिर के बाहर आपको पत्थर का एक प्राचीन नंदी भगवान की प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। यह मंदिर बहुत ही खूबसूरत है। आप यहां पर आकर घूम सकते हैं। इस मंदिर को गुरुकुल विद्या स्थली के रूप में भी जाना जाता है। 

मारकंडेश्वर महादेव मंदिर उज्जैन - Markundeshwar mahadev mandir ujjain

मारकंडेश्वर मंदिर उज्जैन शहर में विष्णु तालाब के पास स्थित है। यहां पर शिव भगवान जी का पत्थर का शिवलिंग विराजमान है। यह शिवलिंग बहुत प्राचीन है और आपको यहां पर आकर सकारात्मक ऊर्जा मिलेगी।

सर्वेश्वर महादेव  मंदिर उज्जैन - sarveshwar mahadev mandir ujjain

सर्वेश्वर महादेव मंदिर उज्जैन शहर में संदीपनी आश्रम के पास स्थित है। इस मंदिर में स्थित शिवलिंग की स्थापना महर्षि संदीपनी ने की थी। यह शिवलिंग एक अनोखा शिवलिंग है। इसकी जलाधारी में शेषनाग के दर्शन होते हैं। आप यहां पर आते हैं, तो आपको पत्थर का एक शिवलिंग देखने के लिए मिलता है और मंदिर के बाहर नंदी भगवान जी की प्रतिमा देखने के लिए मिलती है।



पचमढ़ी झील - Pachmarhi lake | Boating in pachmarhi lake

पचमढ़ी लेक - Pachmarhi jheel | पचमढ़ी झील में नौका विहार

पचमढ़ी झील - Pachmarhi lake | Boating in pachmarhi lake

पचमढ़ी (pachmarhi) एक हिल स्टेशन है। पचमढ़ी (pachmarhi) मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले में स्थित है। पचमढ़ी में बहुत सारी दर्शनीय जगह स्थित है, उनमें से एक जगह है - पचमढ़ी झील (pachmarhi lake)

पचमढ़ी झील
(pachmarhi lake) बहुत सुंदर है और यह पचमढ़ी (pachmarhi) शहर से करीब एक या डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित होगी।  आप इस झील तक पैदल ही जा सकते हैं।  इस झील का नजारा बहुत खूबसूरत रहता है और इस झील में आपको कमल के फूल देखने के लिए मिल सकते हैं।  यह झील बरसात में पानी से पूरी तरह से भर जाती है।  गर्मी के समय यह झील सूख जाती है।  झील के पास ही में एक गार्डन बना हुआ है। गार्डन में एंट्री फ्री है। गार्डन में आकर आप पचमढ़ी झील (pachmarhi lake) का खूबसूरत नजारा देख सकते हैं। गार्डन में तरह-तरह की फूल लगे हुए हैं। इस गार्डन में आकर आप बहुत लम्बा वॉक कर सकते हैं।  

इस गार्डन में आपके घूमने के लिए बहुत बड़ी जगह है, जहां पर आप शांति से घूम सकते हैं। पचमढ़ी झील
(pachmarhi lake) में बरसात के समय  आप नाव की सवारी का  मजा ले सकते हैं।  यहां पर नाव की सवारी का आपको अलग-अलग कीमत देनी पड़ती है। पचमढ़ी गार्डन (pachmarhi garden) के बाहर ही आपको बहुत सारी दुकानें देखने के लिए मिलती हैं, जहां पर खाने-पीने की सामग्री मिलती है।  आप को  गार्डन के बाहर  घुड़सवारी करने के लिए भी मिलती है।  यहां पर बहुत सारे लोग घुड़सवारी का मजा भी लेते हैं। पचमढ़ी झील गर्मी के समय सूख जाती है। गर्मी के समय पचमढ़ी झील (pachmarhi lake) में चोई जम  जाती है। पचमढ़ी झील (pachmarhi lake) का पानी इतना कम हो जाता है, कि आप इस झील के आर पार तक जा सकते हैं। गार्डन में बैठने के लिए पत्थर के कुरसी बने हुए हैं।  आप इन कुरसी में बैठकर इस झील का नजारा देख सकते हैं। झील के बीच से 1 पुल निकलता है।  इस पुल से ही आप पचमढ़ी के अन्य दर्शनीय स्थलों को घूमने के लिए रास्ता निकलता है। पचमढ़ी झील (pachmarhi lake) के थोड़े से दूरी पर ही आपको एक चर्च देखने के लिए मिलता है, जो बहुत पुराना चर्च है और अंग्रेजों के समय बनाया गया था। इसका डिजाइन भी बहुत अद्भुत है।  यह जगह आपको बहुत खूबसूरत लगती है।  इस जगह में आप अपना शाम के समय आकर अच्छा समय बिता सकते हैं। यहां पर आकर आपको बहुत अच्छा लगेगा और एक अलग ही अनुभव मिलेगा। 


दमोह जिले के पर्यटन स्थल - Damoh tourist place | Places to visit near Damoh

दमोह जिले के दर्शनीय स्थल - Tourist places near damoh | Damoh famous places | दमोह जिला


प्राचीन जटा शंकर मंदिर दमोह - Jata shankar mandir damoh 

जटाशंकर मंदिर दमोह शहर का दर्शनीय स्थल है। जटाशंकर मंदिर दमोह-जबलपुर रोड पर स्थित है। यह दमोह में घूमने के लिए सबसे अच्छे धार्मिक स्थलों में से एक है। जटाशंकर मंदिर बहुत प्राचीन है। यहां मंदिर शिव शंकर जी को समार्पित है। यह मंदिर पहाडों से घिरा हुआ है। बरिश में यह का नजारा बहुत अदुभ्त होता है। मंदिर में अन्य देवी देवता की मूर्ति भी विराजमान है। मंदिर में भगवान की गणेश की बहुत उची प्रतिमा स्थित है। मंदिर सुबह से रात के 9 बजे तक खुल रहता है। आप मंदिर में दिन के समय कभी भी आ सकते है। मंदिर के पास अग्रेजों के समय का पुराना सार्किट हाउस बना हुआ है। यहां सार्किट हाउस पहाडी के उपर बना हुआ है। आपको यहां से आसपास बहुत ही मनमोहक दृश्य देखने मिलता है। जटाशंकर का प्रवेश द्वार बहुत ही भव्य है। जटाशंकर मंदिर सावन सोमवार और महाशिवरात्रि में बहुत भीड रहती है। 

रानी दमयंती संग्रहालय - Rani Damayanti Museum or Rani Damayanti Fort

रानी दमयंती संग्रहालय दमोह शहर में स्थित एक प्राचीन स्मारक है। रानी दमयंती दमोह जिले के संस्थापक थी। रानी दमयंती का विवाह राजा नल हुआ था। रानी दमयंती संग्रहालय को  रानी दमयंती के किले के नाम से  भी जाना जाता है। यह किला मुख्य दमोह शहर में स्थित है। यहां पर आकर आपको पत्थर की मूर्तियां का संग्रह देखने मिलता है। महल के बाहर एक बहुत बड़ा गार्डन भी बना हुआ है। 

बड़ी देवी जी मंदिर - Badi Devi Ji Temple Damoh

यह दमोह शहर का बहुत पुराना मंदिर है। इस मंदिर को बड़ी देवी मां के मंदिर के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर करीब 300 साल पुराना है। यहां पर आपको दुर्गा जी की प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। यहां पर गणेश जी की प्रतिमा भी विद्यमान है। लोग अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए यहां पर नारियल को बंधते हैं। आपको यहां पर बहुत सारे नारियल बंधे हुए देखने के लिए मिल जाते हैं। यह दमोह की एक अच्छी जगह है और यहां पर आकर बहुत शांति मिलती है। बड़ी देवी मां का मंदिर दमोह के फुटेरा तालाब के पास है। 

राजनगर झील - Rajnagar lake or Rajnagar dam Damoh

राजनगर झील या राजनगर बांध दमोह जिले का एक दर्शनीय स्थल है। आप यहां पर बरसात के समय आते हैं, तो आपको यहां पर झील का अद्भुत दृश्य देखने के लिए मिलता है। झील का पानी ओवरफ्लो होता है और झरने का रूप लेता है, जो देखने में बहुत ही लुभावना होता है। झील के पास आपको एक मंदिर भी देखने के मिलता है, जो मां दुर्गा को समर्पित है। आप यहां गर्मी के समय भी आ सकते हैं। गर्मी के समय आपको यहां पर एक फव्वारा देखने के लिए मिलता है। राजनगर झील से दमोह जिले में पीने के पानी की सप्लाई की जाती है। यह जगह बहुत खूबसूरत है। यह जगह दमोह बाईपास रोड के करीब स्थित है। आप यहां पर कभी भी घूमने के लिए आ सकते हैं। यहां पर एकांत में समय बिता कर बहुत अच्छा लगता है।

नोहलेश्वर शिव मंदिर - Nohleshwar Shiva Temple Damoh

नोहलेश्वर शिव मंदिर दमोह शहर का एक प्राचीन और धार्मिक स्थल है। नोहलेश्वर मंदिर जबलपुर दमोह हाईवे रोड के पास स्थित है। नोहलेश्वर मंदिर दमोह जिले से करीब 20 किलोमीटर दूर है। यह मंदिर दमोह जिले के नोहटा नाम के गांव में स्थित है। यह मंदिर शिव भगवान जी को समर्पित है। यह मंदिर खजुराहो के मंदिर के समान दिखता है। आप इस मंदिर में घूमने के लिए आ सकते हैं। इस मंदिर की दीवारों में आपको खूबसूरत नक्काशी देखने के लिए मिलती है। इस मंदिर में आपको मंडप और गर्भ ग्रह देखने के लिए मिलता है। गर्भ ग्रह में शिव जी का पत्थर का शिवलिंग विराजमान है। मंदिर के बाहर एक बहुत बड़ा गार्डन भी बना हुआ है। नोहलेश्वर मंदिर का निर्माण 800 या 1000 ईसा पूर्व हुआ था। इस मंदिर का निर्माण चालुक्य वंश के कलचुरि राजा के द्वारा किया गया था। यह मंदिर एक उच्च मंच पर बनाया गया था। 

सिंगौरगढ़ का किला -  Singaurgarh Fort Damoh

सिंगौरगढ़ का किला दमोह जिले के रानी दुर्गावती अभ्यारण के अंदर स्थित है। यहाँ किला ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। आपको इस किले तक पहुंचने के लिए पैदल चलना पड़ता है। यह किला अब खंडहर अवस्था में है। इस किले के बारे में कहा जाता है कि यहां पर रानी दुर्गावती अपने विवाह के पश्चात रहती थी और  किले के नीचे स्थित तालाब पर रानी दुर्गावती स्नान किया करती थी और अपनी कुलदेवी को जल चढ़ाया करती थी। आप यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं। किले के चारों तरफ आपको जंगल का खूबसूरत दृश्य देखने के लिए मिलता है और यहां पर आपको कुछ प्राचीन प्रतिमाएं भी देखने के लिए मिलेगी। 

गिरिदर्शन वाच टावर - Giridarshan Watch Tower Damoh

गिरी दर्शन टावर रानी दुर्गावती अभ्यारण्य के अंदर स्थित है। गिरी दर्शन वॉच टावर जबलपुर दमोह हाईवे रोड पर स्थित है। यह हाईवे रोड से करीब 1 किलोमीटर की दूरी पर होगा। यहां आने के लिए अच्छी सड़क है। गिरी दर्शन वॉच टावर में आप अपनी दोपहिया और चार पहिया वाहन से आ सकते हैं। आपको गिरी दर्शन वॉच टावर से चारों तरफ का दृश्य देखने के लिए मिलता है। यहां पर आपको पहाड़ों का, झील का और जंगल का दृश्य देखने के लिए मिलता है। यह जगह बरसात के समय पूरी तरह स्वर्ग के समान लगती है। यहां से चारों तरफ हरियाली रहती है। आप यहां पर घूमने के लिए और पिकनिक मनाने के लिए आ सकते हैं। यह दमोह शहर की बहुत खूबसूरत जगह है और प्राकृतिक खूबसूरती से भरपूर है।

रानी दुर्गावती वन्यजीव अभयारण्य - Veerangana Durgavati Wildlife Sanctuary Damoh

वीरांगना दुर्गावती वन्यजीव अभयारण्य दमोह जिले का एक मुख्य आकर्षण है। रानी दुर्गावती अभ्यारण्य जबलपुर दमोह हाईवे रोड पर स्थित है। यह अभ्यारण्य दमोह जिले के सिंग्रामपुर के पास स्थित है। इस अभ्यारण्य का नाम रानी दुर्गावती के नाम पर रखा गया है। रानी दुर्गावती एक गौड रानी थी। यह अभ्यारण्य 24 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला है । इस अभ्यारण्य की स्थापना 1996 में हुआ था। यहां पर आपको नीलगाय, सांभर, चीतल, जंगली सूअर, चिंकारा, हिरन, सियार, तेंदुए, जंगली बिल्ली और लोमड़ी पाई जाती है। यहां पर आपको जंगली जानवरों के अलावा पक्षियों की भी बहुत सारी प्रजातियां देखने के लिए मिलती है। यहां पर विशेषकर ठंड के समय आपको विभिन्न प्रजातियों के पक्षी देखने के लिए मिलते हैं। रानी दुर्गावती अभ्यारण्य की सैर करने के लिए दो रास्ते हैं, जिसमें से एक रास्ते को छोटा चक्कर और दूसरे को बड़ा चक्कर कहते हैं। यह दोनों रास्ते कच्चे हैं। रानी दुर्गावती अभ्यारण्य में आपको देखने के लिए बहुत सारी जगह है। यहां पर आप सिंगौरगढ का किला, गिरी दर्शन व्यूप्वाइंट, नजारा व्यूप्वाइंट, दानीतालाब, और निदान जलप्रपात देख सकते हैं। यहां पर विश्राम गृह भी बनाया गया है। यहां पर आपको देखने के लिए नदी, पहाड और जंगल मिलती है ।


जोगन कुंड - Jogan Kund Damoh

जोगन कुंड दमोह शहर का एक लोकप्रिय दर्शनीय स्थल है । यहां पर आपको एक झरना देखने के लिए मिलता है, जो जंगल के बीच में स्थित है। झरने का पानी एक कुंड पर गिरता है। आप इस कुंड में नहाने का मजा भी दे सकते हैं। झरने के पास एक प्राचीन मंदिर है। इस झरने तक पहुंचने के लिए आपको पैदल चलकर आना पड़ता है, क्योंकि इस झरने तक आने के लिए किसी भी प्रकार की सड़क नहीं बनी है। यहां आने के लिए जंगल का रास्ता है। जोगन कुंड झरने में आप जब बरसात के समय आते हैं, तो आपको यहां पर पानी देखने के लिए मिलता है। ठंड के समय भी यहां पानी रहता है। मगर गर्मी के समय में यहां पर पानी नहीं रहता है। आपको अगर झरने का आनंद उठाना है, तो आपको बरसात के समय आना होगा। जोगन कुंड दमोह जिले के जबेरा तहसील में स्थित है। आप यहां पर अपनी गाड़ी से आ सकते हैं। यहां पर साल में एक बार मेले का आयोजन होता है। तब यहां पर हजारों की संख्या में लोग आते हैं। यहां पर आपको एक गुफा भी देखने के लिए मिलती है।

नजारा व्यू पॉइंट - Najara View Point Damoh

नजारा व्यू प्वाइंट दमोह जिले का एक खूबसूरत दर्शनीय स्थल है। यह रानी दुर्गावती अभ्यारण्य में स्थित है। यह व्यूप्वाइंट भैसा घाट में स्थित है। आप यहां पर अपने दो पहिया और चारपहिया वाहन से आ सकते हैं। आपको यहां से पूरी रानी दुर्गावती वन्य जीव अभ्यारण्य का दृश्य देखने के लिए मिलता है। यह व्यू पांइट पहाडी के एक छोर पर बना हुआ है। यह व्यू प्वाइंट करीब 300 फीट उपर स्थित है। यहां से बहुत ही मनोरम दृश्य देखने के लिए मिलता है। यहां से देखने में ऐसा लगता है, कि जैसे आप कश्मीर की वादियों देख रहे हैं।


बांदकपुर भोले नाथ मंदिर  या जागेश्वर धाम - Bandakpur Bhole Nath Temple or Jageshwar Dham Damoh

बांदकपुर का शिव मंदिर दमोह जिले का एक दर्शनीय स्थल है। यह दमोह जिले का एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह दमोह जिले में ही नहीं, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश में प्रसिद्ध है। इस मंदिर को जागेश्वर धाम के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर दमोह जिले के बांदकपुर कस्बे में स्थित है। जागेश्वर धाम भगवान शिव और पार्वती माता को समर्पित है। यह मंदिर बहुत खूबसूरत है। यह मंदिर बहुत प्राचीन है। इस मंदिर में महाशिवरात्रि के समय बहुत बड़ा मेला लगता है। लोगों का कहना है कि महाशिवरात्रि के समय यहां पर दो अलग जगह पर लगे झंडे आपस में मिलते है। बांदकपुर के शिव मंदिर के ऊपर लोगों की आस्था है। लोगों का मानना है, कि यहां पर जो भी लोग आते है,  उनकी इच्छा जरूर पूरी होती है। मंदिर में सभी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध है । यह मंदिर एक ट्रस्ट द्वारा चलाया जाता है। मंदिर परिसर में गणेश जी की मूर्ति, दुर्गा जी  की मूर्ति, श्री राम दरबार, राधे कृष्णा जी की मूर्ति, हनुमानजी की मूर्ति स्थापित है। मंदिर में आप आपने दो पहिया वाहन या चार पहिया वाहनों से आ सकते हैं। बांदकपुर में रेलवे स्टेशन भी बना हुआ है। अगर आप रेल से आना चाहते हैं, तो आ सकते हैं। आपको यहां पर आसानी से ऑटो मिल जाएगी।

कुण्डलपुर - Kundalpur Damoh

कुंडलपुर दमोह जिले का एक जैन तीर्थ स्थल है। यहां पर आपको 63 जैन मंदिर देखने के लिए मिलेंगे, जो पहाड़ी पर बने हुए हैं। यह मंदिर बहुत प्राचीन है। कुंडलपुर में आपको रहने और खाने की व्यवस्था भी मिलती है। कुंडलपुर दमोह जिले से करीब 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आप यहां पर दो पहिया या चार पहिया वाहन से आसानी से पा सकते हैं। पहाड़ी पर बने मंदिरों में जाने के लिए सीढ़ियां बनाई गई है। आपको इन मंदिर तक जाने के लिए पैदल सीढ़ियों से जाना पड़ेगा। कुंडलपुर में 65 मंदिर हैं। यह मंदिर पहाड़ियों पर स्थित है।  आप परिक्रमा करके इन सभी मंदिरों को घूम सकते हैं।  इन मंदिरों में बड़े बाबा का मंदिर सबसे प्रसिद्ध है। इसके अलावा यहां पर आपको एक अन्य मंदिर भी देखने के लिए मिलता हैए जो तालाब के बीच में स्थित हैए जिसे जल मंदिर के नाम से जाना जाता है। 

भदभदा जलप्रपात - Bhadbhada Waterfall damoh

भदभदा जलप्रपात दमोह जिले का एक दर्शनीय स्थल है। यह दमोह जिले के हटा तहसील में स्थित है। यह जलप्रपात सुनार नदी पर बना हुआ है। यहां पर आप नहाने का मजा भी ले सकते हैं। जब जलप्रपात का पानी चट्टानों से नीचे गिरता है, तो धुआ निकलता है, जो बहुत ही मनोरम लगता है। यह जबलपुर के धुआंधार जलप्रपात के समान दिखाई देता है। आप यहाँ  फैमिली के साथ पिकनिक मनाने के लिए आ सकते हैं। आप यहां पर बरसात के समय आ सकते हैं।  बरसात के समय यहां पर पानी की बहुत अधिक मात्रा रहती है।  गर्मी में भी यहां पानी रहता हैए जिसमें आप काफी इंजॉय कर सकते हैं। यह झरना दमोह जिले से करीब 45 किलोमीटर दूर होगा।

शिवमंदिर खर्राघाट - Shiv Mandir Kharraghat Damoh

यह  मंदिर दमोह जिले के खर्रा घाट में स्थित है। यह मंदिर से भगवान शिव जी को समर्पित है। आपको मंदिर में शिवलिंग देखने के लिए मिलता है।  बाहर नंदी भगवान की प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। मंदिर के पास में ही आपको नदी का दृश्य देखने के लिए मिलता है। इस मंदिर में हर साल मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें हजारों की संख्या में लोग इकट्ठे होते हैं। यह मंदिर बहुत पुराना है और बहुत सारे लोगों की इस मंदिर के प्रति आस्था है। 

गौरी शंकर मंदिर हट्टा दमोह - Gauri Shankar Temple Hatta Damoh

गौरी शंकर मंदिर दमोह जिले के हटा में स्थित है। हटा दमोह जिले की तहसील है। हटा दमोह जिले से करीब 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित होगा। गौरी शंकर मंदिर पूरे जिले में प्रसिद्ध है। यहां पर आपको शंकर भगवान जी दूल्हे के वेश में नंदी पर सवार देखने के लिए मिलते हैं और माता पार्वती भी भोले भगवान के साथ देखने के लिए मिलती हैं। यह प्रतिमा देखने में बहुत ही अद्भुत लगती है। इसके अलावा यहां पर और भी प्रतिमाएं हैं। यहां पर पितांबरा पीठ की स्थापना की गई है। उसके साथ साथ गणेश जी का मंदिर, भैरव बाबा का मंदिर भी बनाया गया है। इस मंदिर में महाशिवरात्रि के समय बहुत बड़े मेले का आयोजन होता है और हजारों की संख्या में लोग यहां पर एकत्र होते हैं। यह मंदिर बहुत प्राचीन है और कहा जाता है कि यहां पर स्थापित शिवलिंग स्वयंभू है। आप यहां पर भगवान शिव के दर्शन करने के लिए आ सकते हैं। 

चंडी माता मंदिर हट्टा दमोह -  Chandi Mata Temple Hatta Damoh

यह मंदिर दमोह जिले की हटा में स्थित है। यह मंदिर साउथ इंडियन स्टाइल में बनाया गया है। यह मंदिर मेन रोड में ही स्थित है। यहां पर आप चंडी माता के दर्शन कर सकते हैं। यह मंदिर परिसर बहुत खूबसूरत है। चंडी माता के मंदिर में और भी छोटे-छोटे मंदिर बने हुए हैं। यहां पर शिव भगवान जी का मंदिर और नाग देवता का मंदिर आपको देखने के लिए मिलता है। आपको यहां पर आकर बहुत शांति मिलती है।  यह बहुत अच्छी जगह है।   

बेलाताल - Belatal Damoh

बेलाताल दमोह जिले की एक अच्छी जगह है। आप यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं। यहां पर तालाब के बीच में आपको हनुमान जी का मंदिर देखने के लिए मिलता है। यह मंदिर बहुत सुंदर हैं। बेलाताल जबलपुर दमोह हाईवे रोड पर स्थित है। आप यहां पर कभी भी आकर घूम सकते हैं। यहां पर एक साईं मंदिर भी बना हुआ है। जहां पर आप घूम सकते हैं। यहां पर आकर बहुत अच्छा लगता है।