Nagdwar Yatra (Pachmarhi) - नागद्वार की रोमांचक यात्रा

नागद्वार (पचमढ़ी) की यात्रा की सम्पूर्ण जानकारी



आप नागद्वार की पैदल यात्रा करके कालाझाड या भजियागिरी पहुॅचा जाते है। काला झाड़ में आपको बहुत सारी दुकानें देखने मिल जाती है और पानी पीने के लिए भी आपको यहां सुविधा मिल जाती हैं। यहां पर आपको दो रास्ते मिलते हैं। आप दोनों में से कोई भी रास्ता चूस करके आगे बढ़ सकते हैं, दोनों रास्तों से ही आपको नाग देवता के और अन्य देवी-देवताओं के मंदिरों के दर्शन करने मिल जाएंगे। हम लोगों ने काला झाड़ में थोड़ा सा रेस्ट किया  उसके बाद आगे बढ़े यहां पर आपको बहुत ज्यादा चलना पड़ता है, और यहां पर पहाड़ियों का व्यू बहुत ही अच्छा लगता है और जो रास्ता है, वो बहुत खतरानाक है।



Nagdwar Yatra (Pachmarhi) - नागद्वार की रोमांचक यात्रा



Nagdwar Yatra (Pachmarhi) - नागद्वार की रोमांचक यात्रा




नागद्वार के खतरनाक रास्तें

आपको नागद्वार यात्रा में कहीं पर ढलान वाला रास्ता मिलता है तो कहीं पर  चढ़ाई वाला रास्ता मिलता है। कहीं पर आपको उबाड खाबड रोड मिलती है तो कहीं कहीं पर उची चट्टानें मिलती है। आपको यहां पर हरियाली भरे जंगल मिलते हैं, और बरसात में पानी भी गिरता रहता है। आपको नागद्वार यात्रा में ऐसी रोड मिलती है जो बहुत ही पतली होती है और रोड के बाजू से गहरी खाई होती है। अगर आपका एक गलत कदम हुआ तो आप डायरेक्ट नीचे जा सकते हैं और पता नहीं कहां जाएंगे इसका कोई अंदाजा नहीं है, इसलिए आपको यहां पर संभलकर चलने की जरूरत होती है।

आपको कहीं पर कहीं पर लगता है कि आप नीचे की तरफ जाते जा रहे है मतलब पूरा खाई वाला रास्ता रहता है और इस रास्ते में बडे बडे पत्थर अडी ढेडी रोड मिलती है। आपकी हालत बहुत ज्यादा डाउन हो जाती है, चलते चलते। मगर आपको यह पर जो व्यू देखने मिलता वो स्वर्ग से कम नहीं होता है। नागद्वार में आपको चलते रहना चहिए इससे आप रात के सही समय पर लौटे सकते है। अगर आप को यह पर रात हो जाती है तो आप मंदिर में रूक सकते है और यहां पर बहुत सी दुकानें होती है जहां पर आप रूक सकते है। आप नागद्वार जाते है तो जूते का प्रयोग करें और यदि चप्पल का प्रयोग करते है तो मजबूत चप्पल पहनें। क्योकि यह के रास्ते में आपके चप्पल टूटा जाती है।

आपको यहां पर किसी प्रकार की सुविधा नहीं मिलती है। मंदिरों में या मंदिर के आसपास आपको रहने और खाने पीने के लिए सुविधा मिल जाती है। अगर आप यहां पर चलते रहेगें तो आपकी यात्रा एक ही दिन में पूरी हो जाएगी।

नागद्वार में आपको जंगल की खूबसूरत पहाड़ियां, घाटियां, और नदियां देखने मिलेगी। यह पर जगह जगह पर झरने आपको देखने मिल जाते है क्योकि बरसात का सीजन होता है और पानी बरसात रहता है तो पहाडों से झरने बहते रहते है। कहीं कहीं पर विशाल पर्वत श्रृंखला आपको देखने मिलती है। पहाडों का अदुभ्त दृश्य होता है, वह भी बहुत मस्त रहती हैं एक अलग ही अनुभव रहता है, इस जगह का। क्योंकि यहां पर मानवीय क्रियाकलाप बस इन दस दिन के लिए ही होता है। यह पूरी तरह से जंगल है और एक अलग एडवेंचरस हमे यहां मिलता है।

नागद्वार का मेला

हम लोगों ने पैदल चलकर मेले तक पहुंच गए थे। यहां जंगल में छोटा सा मेला भरता है और अगर आप नाग पंचमी के 10 दिन पहले जाते हैं तो आपको यह मेला देखने मिलता है। अगर आप नागपंचमी के दिन जाएंगे तो यह मेला खत्म हो जाता है। कुछ ही दुकानें यहां पर आपको देखने के लिए मिलती हैं और बहुत से लोग अपना दुकानें लेकर जाने लगते हैं । यहां पर आपको भंडारा भी मिल जाता है और पीने के लिए पानी भी मिल जाता है यहां पर रुकने की व्यवस्था भी होती है मगर अभी भी मंदिर बहुत दूर होता है। मेले में आपको एक बरसाती नाला देखने मिलता है, आप इससे आगे जाते है तो आपको भोले बाबा का छोटा सा मंदिर देखने मिलता है और यह से आपको विशाल पहाडा का मनोरम व्यू भी देखने मिलता है। बहुत से लोगों को यह मन्नत माॅग कर आते है और पहाडी में साष्टांग प्रणाम करते हूए चलते है।

Nagdwar Yatra (Pachmarhi) - नागद्वार की रोमांचक यात्रा

पद्मशेष मंदिर


नागद्वार पर आपको बरसात के टाइम में छोटी-छोटी नदियां बहती हैं। यहां पर आपको बहुत सारी जगह झरनों देखने मिल जाती है। आप इन झरनों में नहाने का आंनद भी ले सकते है। आप पद्मशेष मंदिर पहूॅचते है तो यहां पर बहुत ज्यादा भीड होती है आपको यहां पर लाइन लगना पडता है। भगवान के दर्शन करने के लिए। आपको यहां पर भंडारा भी मिलता रहता है और यहां पर आपको पीने का पानी भी मिलता है। आपको दूर से ही मुख्य मंदिर दिखाई देता है। यहां पर गुफा भी स्थित है जहां पर शिव भगवान और नागदेवता की बहुत सी मूर्तिया आपको देखने मिलती है। आप भगवान के दर्शन करके आगे  बढा सकते है। यहां पर आपको बहुत सारी दुकान मिल जाती है और यह पर एक नाला भी बहता रहता है। जिसके आजू बाजू लोग गन्दा कर देते वैसे यहां पर जहां पर बरसाती नाले होते है, वहां पर लोग गंदा कर देते है। आप इस जगह से होते हुए आगे बढते है तो आपको पश्चिमद्वार के दर्शन करने मिलते है। यह पर एक झरना पहाडों के उपर से आता है और उसका पानी नीचे अडरग्राउण्ड हो जाता है। यहां पर उचे उचे पहाड है जिसके नीचे एक गुफा है जहां पर आपको शिव भगवान की मूर्ति स्थापित है।



Nagdwar Yatra (Pachmarhi) - नागद्वार की रोमांचक यात्रा



Nagdwar Yatra (Pachmarhi) - नागद्वार की रोमांचक यात्रा

स्वर्गद्वार

आप यहां पर आगे बढते है, कुछ दूरी चलने पर आपको एक नदी मिलती है। इसके बाद आपको यह पर पहाडों के उपर चढना होता है तो आपको लोहे की सीढियाॅ मिलेगी। इन लोहे की सीढ़ियों से चढ़कर आपको पहाड़ी पर चढ़ना होता है और पहाड़ी से चलते हुए आपको दूर से ही स्वर्ग द्वार देखने मिल जाता है, तो आप स्वर्ग द्वार पहुंचते हैं, तो यहां पर बहुत बड़ी पहाड़ी है। पहाड़ी में एक खूबसूरत संरचना है जिसे लोग स्वर्गद्वार कहते हैं। यहां पर भी एक छोटी सी गुफा है और गुफा में भगवान शिव का शिवलिंग रखा हुआ है। स्वर्गद्वार का जो व्यू होता है वहां लाजबाब होता है। स्वर्गद्वार के उपर छत में चटटान के उपर एक गुफा है जिसमें लोग नीबू को फेकते है, उस गुफा के अंदर नीबू जाना चहिए। इस तरह करने से कहा जाता है कि इच्छाए पूरी होती है। ये बहुत बडी पहाड की श्रृंखला है। इस पहाड़ी से बाजू से ही पहाड़ को काटकर ही रास्ता बनाया गया है, इस रास्ते में लोहे की राॅड लगी है, आपको इस रास्ते से ही आगे बढना होता है।

आपको आगे बढने पर एक और मंदिर देखने मिलते हैं और यह मंदिर भी बहुत ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। यह मंदिर शायद चित्रशाला का होता है। इस यात्रा में हम लोग ने इन मंदिरों के ही दर्शन किए थे। यहां के दर्शन करके आप आगे जाते हैं तो आपको यहां से पर लगातार चलना पड़ता है।

आपको यहां पर आगे जा कर एक झरना देखने मिलता है जो बहुत ही खूबसूरत रहता है और यहां पर बहुत सारे लोग नहाते हुए भी आप को दिख जाते हैं, क्योंकि यहां तक आते-आते लोग बहुत ज्यादा थक जाते हैं और बहुत ज्यादा उन्हें गर्मी लगने लगती है, तो यहां पर बहुत से लोग नहाते हुए भी आप को दिख जाएंगे इसके बाद आपको लगातार पैदल चलना है। आप पैदल चलते चलते कालाझाड पहुंच जाते हैं। कालाझाड में आप रेस्ट करके अपनी आगे का सफर तय करें। अपनी घर या होटल की तरफ बढा सकते है। यहां पर शाम को भी लोग चलते रहते हैं और यहां मेले के समय में आपको शाम को भी जिप्सी मिल जाती है।


Nagdwar Yatra (Pachmarhi) - नागद्वार की रोमांचक यात्रा



Nagdwar Yatra (Pachmarhi) - नागद्वार की रोमांचक यात्रा



नागद्वार यात्रा की कुछ जानकारी

यहां पर बहुत खूबसूरत व्यू देखने मिलता है। चारों तरफ हरियाली और पहाड़ रहते है। यहां पर आपको मंदिर के आसपास पानी की व्यवस्था मिल जाती है।  यह पानी पहाड से आता है। यह पानी बहुत शुध्द होता है। इस पानी का उपयोग भंडारा बनाने में भी होता है। वैसे यहां पानी साफ रहता है।

नागद्वार की पूरी यात्रा में आपको किसी भी तरह के शौचालय नहीं मिलते हैं। आपको जंगल में ही बाथरूम लैट्रिन करना पडता है। जंगल में आपका फोन का नेटवर्क काम नहीं करता है। आप जब कालाझाड पहुॅचकर आगे बढते है तब ही आपका फोन का नेटवर्क काम करता है।

यहां पर बहुत सारी दुकानें लगी रहती है। यहां पर खाने-पीने का सामान मिलता रहता है और यहां पर भंडारा भी मिलता रहता है। मगर मेरे हिसाब से तो आपको खाने पीने का सामान अपने साथ खुद लेकर जाना चाहिए क्योंकि यहां पर जो सामान मिलता है वह बहुत महंगा मिलता है, और पानी भी बहुत महंगा मिलता है। तो खाने पीने का सामान आप खुद लेकर जाइए और यहां पर आपको देशी शराब भी मिलती है। देसी शराब बहुत से लोग शराब पीकर यहां वहां डले रहते हैं। वैसे यह अच्छा नहीं लगता है। आप इस बात का जरूर ध्यान दीजिए। किसी भी धार्मिक जगह पर शराब का सेवन ना करिए और इस जगह की खूबसूरती का आनंद लीजिए।

यहां पर लोग भोले बाबा के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ते हैं। भोले बाबा के दर्शन करते हुए वापस आता है और यहां का जो नजारा रहता वह तो एकदम मस्त रहता है तो आपकी जो भी थकान रहती है। वह पूरी उतर जाती है। यहां पर आप जाएं तो किसी भी तरह का वजन बैग या फिर एकस्टा सामान लेकर ना जाए। जरूरी सामान ही लेकर चलें।

मेरा नागद्वार यात्रा का एक्सपीरियंस बहुत बढिया रहा है। मैने अपनी जिंदगी में पहली बार ऐसी जगह देखी है। यह जगह बहुत मस्त है। मैं यहां पर 2019 में गई थी। मेरा इस जगह 2020 में भी जाने का इरादा है।

नागद्वार यात्रा में आपको पद्मशेष मंदिर, पश्चिमद्वार, स्वर्गद्वार, चित्रशाला, अग्निद्वार, नागिनीपद्मिनी, चिंतामणि, गंगावणेश, श्रवणबोध, हलदीश, गुलेश, दादा धूनीवाले, नंदीगढ़, निशांगध, राजगिरि, देखने मिलती है जो बहुत ज्यादा आकर्षक है।

नागद्वार में आपको प्रकृति स्थल, हरियाली, प्राकृतिक दृश्य, झरने, पर्वत धाराएं और दुर्लभ वन्यजीव हैं।

Nagdwar Yatra -- नागद्वार का रोमांचक सफर

नागद्वार (पचमढ़ी) की यात्रा की सम्पूर्ण जानकारी


नागाद्वार एक धार्मिक जगह है, आपको नागाद्वार में नागदेवता का रहस्यमयी मंदिर देखने मिलता है। नागाद्वार में हर साल नागपंचमी के समय लाखों की संख्या में श्रध्दालु पहूॅचते है। नागाद्वार एक ऐसी जगह जो आपको पूरी तरह रोमांच से भर देती है। नागाद्वार में आपको पैदल चलना रहता है। यह एक एडवेंचर सफर होता है, यहां पर आपको किसी भी तरह की सुविधाएं नहीं मिलती है। नागाद्वार पर लोग दूर-दूर से नागदेवता के के दर्शन करने आते हैं। नागाद्वार पहुंचने के लिए पहले आपको रेल के माध्यम से पिपरिया स्टेशन आना होता है। उसके बाद बस के द्वारा पचमढ़ी पहुंच सकते है।


Nagdwar Yatra -- नागद्वार का रोमांचक सफर


पिपरिया से पचमढ़ी तक का सफर

यह जो पिपरिया से पचमढ़ी का बस का सफर है वह बहुत ही अच्छा होता है, क्योंकि बरसात का टाइम रहता है और पचमढ़ी में चारों तरफ हरियाली रहती है पहाड़ों का बहुत ही खूबसूरत व्यू रहता है और आपको हर जगह छोटी-छोटी झरने देखने मिल जाते हैं, जो पहाड़ो से बहते रहते हैं और लोग उन झरनों में नहाते हुए दिख जाते हैं। खासतौर पर नाग पंचमी में मेले के टाइम में तो ये सफर लाजबाब होता है। 

पचमढ़ी में बहुत से लोग अपने वाहन से भी नाग पंचमी के टाइम में आते हैं और और आप चाहे तो पिपरिया रेलवे स्टेशन से टैक्सी बुक करके या जिप्सी बुक करके भी पचमढ़ी तक आ सकते हैं। आप जिप्सी बुक करके आएंगे तो आप जिप्सी को कहीं पर भी रुका सकते हैं और खूबसूरत व्यू को इंजॉय कर सकते हैं। मगर बस में आप आते हैं तो आप बस को कहीं भी नहीं रोक सकते हैं, बस आपको पिपरिया से डायरेक्ट पचमढ़ी में ही रुकेगी तो आप बस से खूबसूरत व्यू देख सकते हैं पर उसका आंनद लेने के लिए ठहरा नहीं सकते है। 


Nagdwar Yatra -- नागद्वार का रोमांचक सफर


Nagdwar Yatra -- नागद्वार का रोमांचक सफर


देनवा नदी का आकर्षक नजारा

पचमढ़ी का जो देनवा नदी का खूबसूरत व्यू पिपरिया से पचमढ़ी के रास्ते में पड़ता है तो यहां का व्यू बहुत ज्यादा मनोरम है आपको यहां पर कुछ समय रूकना जरूर चाहिए। यहां पर नागपंचमी के मेले के समय आपको यह पर बहुत सारे लोग देखने मिल जाते है क्योकि यहां पर भंडारा भी होता रहता है। यहां पर आप रूककर खूबसूरत व्यू का आंनद ले सकते है। बहुत से लोग इस व्यू को देखने के लिए यहां पर ठहरते है। 

इस तरह आप खूबसूरत व्यू को इंजॉय करते हुए पचमढ़ी पहुंच जाते हैं। नाग पंचमी के मेले के समय पचमढ़ी नगर के बाहर ही गाड़ियों को रोका जाता है। आपको यह पर बहुत सारी बस और गाडियों देखने मिलती है। ऐसा लगता है कि गाडियों का जमघट लगा हो। यह पर नागपंचमी मेले के दौरान बहुत ज्यादा भीड रहती है। पार्किंग स्थल से आपको पैदल ही जाना पड़ता है, पचमढ़ी तक यह दूरी एक से डेढ़ किलोमीटर तक हो सकती है। नागपंचमी के मेले के समय यहां पर बहुत सी दुकाने लगती है। खाने पीने की बहुत सी दुकाने लगती है। 

पचमढ़ी से नागद्वार तक का सफर

पचमढ़ी आकर आप जिप्सी के माध्यम से नागद्वार पहुॅच सकते है। नाग पंचमी के मेले के समय यहां पर ढेर सारी जिप्सी चलती हैं और इन जिप्सों का किराया बहुत ही सस्ता होता है, इस टाइम पर। आपको इस टाइम पर 30 से 40 रू में नागाद्वार तक पहुंचाया जा सकता है और इसके आगे का रास्ता आपको पैदल तय करना होता है। इस समय में जिप्सी में बहुत ज्यादा भीड़ रहती है। पचमढ़ी से नागद्वारी का जो रास्ता है वह बहुत ही खूबसूरत है। इस रास्ते में आपको पचमढ़ी झील देखने मिलती है,उसके बाद आपको चर्च देखने मिलता है, जो बहुत फेमस है और उसके बाद आप खूबसूरत हरे भरे जंगलों का व्यू देख सकते हैं। इन सभी व्यू का मजा लेते हुए आप नागाद्वार में जहां पर आपकी जिप्सी का स्टाॅप है वहां पर पहूॅच जाते है। यहां पर पुलिस कैम्प लगा होता है, जो अच्छी तरह से अपनी डयूटी निभाती है। 


Nagdwar Yatra -- नागद्वार का रोमांचक सफर

नागाद्वार से पैदल यात्रा

आपको इस स्टाप से पैदल यात्रा करनी होती है, नागद्वार के लिए। यहां पर आपको पक्की सड़क मिलती है कुछ दूरी के लिए। यहां पर एक घाट होता है,आपको इस घाट में चलकर जाना पड़ता है और इस घाट के दोनों तरफ आपको कई प्रकार की दुकानें देखने मिल जाती हैं। इस घाट में आपको एक खाई भी देखने मिलती है जिसमें से नदी बहती है। आप इसे पुल भी कह सकते हैं क्योकि यह पुल पहाड़ी रास्ते को जोड़ता है, और कहा जाता है कि खाई में  नाग देवता दिखाई देते हैं, तो बहुत से लोग इस जगह को देखते हैं और यहां पर बहुत सारे कपड़े बंधे हुए रहते हैं। आप चाहे तो मेरा वीडियो भी देख सकते हैं, नागाद्वार का। उसमें आपको और अच्छी इंफॉर्मेशन मिल सकती है। यहां पर ढेर सारी दुकाने रहती हैं। जहां आपको चने मूंगफली मिलते है। मेरे हिसाब से तो आपको चना मूंगफली घर से साथ लाना चहिए क्योंकि यह बहुत महंगा मिलता है और मात्रा भी बहुत कम रहती है और यह बहुत लंबा रास्ता रहता है। आपको एनर्जी की जरूरत पड़ती है। यहां पर आप ग्लूकोस भी लेकर जाएं और अपने साथ पानी जरूर लेकर जाएं। यह घाट 1 से 2 किमी लंबा है और यहां पर पूरी खडी चढाई है। हमारी तो सांस भरने लगी थी यह पर। नागाद्वार जब हम लोग गए थे, तब यहां पर पूरा बादल छाया हुआ था, मगर बहुत अच्छा लग रहा था क्योंकि पूरी तरह से प्राकृतिक माहौल था। बादल बिल्कुल नजदीक में दिख रहे थे या यू कहें कि हम बादल के बीच से होकर चल रहे थे। यहां पर लोग भोले बाबा के जयकारे लगा रहे थे और ढोल भी बजा रहे थे, और ढोल के धुन में नाच भी रहे थे। यहां पर आपको पन्नी की बरसाती खरीदना पडता है क्योंकि यह पहाड़ी क्षेत्र है और यहां पर पानी कभी भी गिरने लगता है। तो आप बरसाती ओढ सकते हैं।

Nagdwar Yatra -- नागद्वार का रोमांचक सफर


इस खडी ढलान वाली घाटी के अंत में आपको शिव भगवान का मंदिर देखने मिलता है और यहां तक आपको पक्का रास्ता मिलता है। यहां पर आपको नागद्वार का नक्शा भी देखने मिलता है। आपको इस नक्शे में यहां पर स्थित जो भी मंदिर है, उनकी जानकारी मिल जाती है और आपको कितनी दूरी चलना है इस नक्शे से पता चल जाता है। पूरी नागद्वार यात्रा का नक्शा आप यहां   देख सकते है। यहां पर शंकर जी का मंदिर है जहां पर शिवलिंग स्थापित है। अब यहां से आपकी रोमाचकारी यात्रा शुरू होती है। आपको यहां से 18 किमी की यात्रा चालू होती है। यहां से नागाद्वार का मुख्य रास्ता शुरू होता है जो पूरी तरह कच्चा रास्ता है और पहाड़ी रास्ता है। आप यहां से 500 मीटर दूर चलेंगे तो आपको पहाड़ से आता हुआ एक झड़ना दिखाई देगा और नीचे एक कुंड बना दिया गया है जिससे पानी कुंड में इकटठा होता है। यहां पर शंकर जी का शिवलिंग भी रखा हुआ है, जो बहुत खूबसूरत लगता है, और जो पहाड़ों से पानी आता है वह भी बहुत खूबसूरत लगता है। यहां का जो रास्ता वहां बहुत पतला है इस रास्ते के एक ओर उची उची पहाड है तो दूसरी तरफ  खाई है। आप आगे बढ़ते हैं तो आपको फिर से एक झरना देखने मिलता है, यहां पर भी पहाड़ों से पानी आता है और नीचे एक कुंड बनाया गया है जिसमें पानी इकटठा होता है। यहां पर आपको बहुत लोग नहाते हुए दिख जाते है। यहां पर आपको थकान बिल्कुल नहीं होती है क्योंकि यह का मौसम ठंडा रहता है। यहां पर बादल आपके आजू-बाजू ही घूमते रहते हैं। जंगल का चारों तरफ का व्यू रहता है वह हरियाली से भरा हुआ रहता है। आपको इस रास्ते में कुछ इस तरह के लोग भी देखने मिल जाते है जो टनों किलो वजन के त्रिशूल उठकर नागदेवता के मंदिर तक जाते है, अपनी मन्नत के पूरी होने पर। यह एक सोचने वाली बात है कि भगवान अपनी भक्तों को कितनी शाक्ति देता है। आप इस उबड खाबड रास्ते से होते हुए काला झाड़ पहुंच जाते हैं। इस जगह को भजिया गिरी भी कहते है। 


Pachmarhi Nagdwar Yatra || पचमढ़ी नागद्वार यात्रा

Pachmarhi Nagdwar Yatra || Nagdwar status || Nagpanchami fair in Pachmarhi || Accommodation arrangement in Nag Panchami Mela 

पचमढ़ी नागद्वार यात्रा 


नागद्वार (Nagdwar) एक ऐसी दुनिया जो पूरी तरह से अलग है, नागद्वार (Nagdwar) को आप एक तरह से प्रकृति खूबसूरती का स्वर्ग कहा जा सकता है। नागद्वार पचमढ़ी में स्थित है।  नागद्वार (Nagdwar) जाने के लिए आपको पूरा रास्ता जंगल का मिलता है। यह आपके लिए एक एडवेंचर ट्रिप हो जाता है क्योकि यह जो पूरा रास्ता वह कच्चा और पहाडी रास्ता है जिनसे चलकर आपको पैदल मजा आ जायेगा। आपको नागद्वार (Nagdwar) में पूरा वातावरण प्राकृतिक मिलेगा यह पूरा जंगल का एरिया है, यहां पर किसी भी तरह की सुविधाएं नहीं है। नागद्वार एक ऐसी दुनिया जो शहर की भीड़ भरी लाइफ से आपको एक सुकून भरा समय बिताने का मौका देती है। यह का प्राकृतिक वातावरण आपको आकर्षित करता है। 

नागद्वार (Nagdwar) में जाने के लिए साल में सिर्फ 10 दिन का समय मिलता है, बाकि दिन में इस जगह में जाने मे पाबंदी है। नाग पंचमी के 10 दिन पहले से ही इस जगह जाने के लिए परमिशन मिल जाती है, और लोग दूर-दूर से इस जगह में जाने के लिए आते हैं। 

नागद्वार (Nagdwar) में नाग देवता का बहुत ही रहस्यमय मंदिर है, इस मंदिर में लोगों की इच्छा पूरी होती है । यहां पर नाग देवता के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं और लोग 18 किमी का रास्ता पैदल चलकर इस मंदिर तक पहॅुचते है। 


Pachmarhi Nagdwar Yatra

  Padmshesh Temple

Pachmarhi Nagdwar Yatra

Pachmarhi Natural Beauty

नागद्वार की स्थिाति (Nagdwar status)

नागद्वार (Nagdwar) पचमढ़ी में स्थित है । पचमढ़ी मध्य प्रदेश का एकमात्र हिल स्टेशन है। पचमढ़ी होशंगाबाद जिले में स्थित है। होशंगाबाद मध्य प्रदेश का एक जिला है।  पचमढ़ी को सतपुड़ा की रानी कहा जाता है। नागद्वार (Nagdwar) सतपुडा टाइगर रिजर्व के घने जंगलों के बीच में स्थित है। यह पर चारों तरफ जंगल है। यहां पर किसी भी तरह की सड़क नहीं है, और ना ही किसी तरह की सुविधाएं हैं कि आप नागद्वार (Nagdwar) तक आसानी से पहुंच सके, यहां पर जो रास्ता है, वह भी पथरीला रास्ता है, कहीं-कहीं पर उबड़ खाबड़ है, तो कहीं कहीं पर बड़ी-बड़ी चट्टानें हैं। इन रास्तों से होते हुए आप नागद्वार (Nagdwar) के प्रसिध्द नागदेवता के मंदिर तक पहुंच जाते हैं। नागद्वार (Nagdwar) में पद्मशेष मंदिर बहुत प्रसिध्द है, इस मंदिर में बहुत ज्यादा भीड रहती है। नागद्वार (Nagdwar) के मंदिरों के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं बच्चे बूढ़े और जवान सभी तरह के लोग आपको इस यात्रा में देखने मिल जाते हैं। सभी लोग भोले बाबा का जयकार लगाते हुए नागद्वार की यात्रा करते है। 

नागद्वार (Nagdwar) की पहुॅचने के लिए आपको पहले पचमढ़ी आना होता है और पचमढ़ी पहुंचने के लिए सबसे अच्छा माध्यम रेल मार्ग है। आप रेलमार्ग के द्वारा पिपरिया पहुंचते हैं, फिर पिपरिया से आप बस के द्वारा पचमढ़ी पहुंच सकते हैं। पचमढ़ी पहुंचकर आपको नागद्वार (Nagdwar) में जाने के लिए जिप्सी मिल जाती है। 

Pachmarhi Nagdwar Yatra

Pachmarhi Natural Beauty 

Pachmarhi Nagdwar Yatra

Pachmarhi Natural Beauty 

Pachmarhi Nagdwar Yatra

Nagdwar Yatra

पचमढ़ी में नागपंचमी का मेला (Nagpanchami fair in Pachmarhi)

नागपंचमी के समय पचमढ़ी में विशाल मेले का आयोजन होता है। नाग पंचमी के समय पचमढ़ी में बहुत ज्यादा भीड रहती है क्योकि यहां पर मेला लगता है। पचमढ़ी में नागपंचमी के समय लोगों लाखों की संख्या में एकत्र होते है।   पचमढ़ी की रोड में आपको विभिन्न प्रकार के दुकानें देखने मिल जाती है और पचमढ़ी के मार्केट एरिया में भी बहुत सारी दुकान लगती है, यहां पर विशेषकर हम लोगों ने उनी कपडों का मार्केट देख । पचमढ़ी में नागपंचमी के समय उनी कपडे सस्ते दामों पर मिल जाते है। इसके अलावा आपको यहां पर और भी बहुत सी दुकाने देखने मिल जाती है जैसे कपडे की दुकान, ज्वेलरी की दुकानें, जूते चप्पल की दुकानें, और भी बहुत सी दुकानें मिल जाती है। यहां पर आपको जूते चप्पल भी अच्छे दामों पर मिल जाते है। हम लोगों ने यहां से जूते और चप्पल लिया था वो अभी तक चल रही है, यहां पर हम जूते और चप्पल दोनों ही 50 रू में मिले थे। 

पचमढ़ी में नागपंचमी के मेले के दौरान रहने की व्यवस्था (Accommodation arrangements during Nagpanchami fair in Pachmarhi)

नागपंचमी के मेले के समय पचमढ़ी में लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैंए नागाद्वार (Nagdwar) जाने के लिए। पचमढ़ी में बहुत ज्यादा भीड़ होती है। पचमढ़ी में बहुत सारे होटल है मगर नाग पंचमी के मेले के समय इन होटलों के दाम आसमान को छूते हैं मतलब यह होटल बहुत महंगे रहते हैं। जिन लोगों के पास ज्यादा पैसे नहीं रहते हैं, वह स्कूल या आश्रम में रह लेते हैं बाकी जिनके पास पैसे रहते हैं वो होटल ले सकते हैं। आपको बहुत सारे लोग ऐसे भी देखने मिल जाएंगे जो नाग पंचमी के मेले के दौरान रोड में सोते है। पचमढ़ी के मेले के समय में इन होटलों का प्राइस 1500 से उपर ही रहता है। जो लोग होटल के किराये को नहीं दे सकते है वो आश्रम या धर्मशाला में आश्रय ले लेते है। पचमढ़ी में नाग पंचमी के समय में जो भी आश्रम और धर्मशालाएं हैं वह पूरी तरह से लोगों से भरी हुई रहती हैं। नाग पंचमी के मेले के समय पचमढ़ी के जो सरकारी स्कूल रहते हैं उनमें भी बहुत भीड रहती है। लोग अपने साथ ओढने और बिछाने के लिए चादर और कंबल लेकर आते हैं और स्कूलों में जहां पर भी जगह मिलती है। वह अपने चादर और कंबल  बिछाकर सो जाते हैं। नागपंचमी के समय में बारिश का मौसम रहता है तो बहुत से लोग पन्नी की बरसाती भी लेकर आते हैं। जिनको स्कूल में जगह नहीं मिलती है वो खुले आसमान के नीचे ही सो जाते हैं पन्नी ओढ़ के।

हम लोगों को भी पैसे ज्यादा खर्च नही करना था इसलिए हम लोग पहले आश्रम गए थे। आश्रम पूरी तरह लोगों से भरा हुआ था और हम लोगों को जगह नहीं मिली थी । इसके बाद हम लोग स्कूल गए थे, जगह की तलाश करने तो हमें वहां पर भी जगह नहीं मिली थी। यह पर आपको अगर जगह चहिए तो आपको पहले आना होगा अपने सुना होगा पहले आया और पहले पाये वहीं यह पर लागू होता है। हम लोगों ने बहुत से होटल में भी पूछा मगर सब का प्राइस इस मेले के दौरान बहुत हाई रहता है, बहुत से होटल घूमने के बाद  हम लोगों को एक होटल मिल गया, जो कम प्राइस में था मगर उसमें सुविधाएं नहीं थी। न ही बेड अच्छा था और न ही बाॅशरूम था। बाॅशरूम के लिए हम लोगों को एक फलोर उपर जाना पडता था। इसलिए हम लोगों ने यह रूम बुक कर लिया क्योकि हम लोग को रात बिताना है, सोना बस था। दूसरे दिन हम लोग को यात्रा करने जाना था और उसके बाद अपने घर के लिए रवाना होना था। इस हिसाब से हम लोगों ने वह रूम ले लिए थे और जो भी प्राइस होटल वाले ने बताया था वो पे कर दिए था। 


Pachmarhi Nagdwar Yatra

Nagpanchmi Mela 

Pachmarhi Nagdwar Yatra

Nagdwar Yatra 

Pachmarhi Nagdwar Yatra

Nagdwar Yatra 

पचमढ़ी में नागपंचमी के मेले के दौरान खाने की व्यवस्था (Food arrangements during Nagpanchami fair in Pachmarhi)

नागपंचमी के मेले के समय पचमढ़ी में बहुत सारे श्रध्दालु आते है। नागपंचमी के मेले के दौरान यहां पर बहुत सारे प्राइवेट होटल खुल जाते है जिसमें बहुत कम दामों पर आपको खाना मिलता है। पचमढ़ी में के इन प्राइवेट होटल में आपको दाल चावल सब्जी रोटी खाने मिल जाती है 40 से 50 रू में। नागपंचमी के मेले में पचमढ़ी में भंडारा भी मिलता है। यहां भंडारा पचमढ़ी के मुख्य बाजार से थोडी दूरी पर होता है, यहां भंडारा पचमढ़ी झील के उस पार चर्च से थोडी ही दूरी पर भंडारा आयोजित किया जाता है। यहां पर भंडारा बहुत ही स्वादिष्ट होता है। आपको यहां पर सब्जी पूडी चावल कढी खाने मिल जाती है। इसके अलावा अगर आप सुबह समय से पहूॅच जाते है तो आपको चाय नाश्ता मिल जाता है।

आपको नागद्वार (Nagdwar) की यात्रा बहुत ही रोमांचकारी लगेगी। यहां पर आपको बहुत अच्छा लगेगा। नागाद्वार  (Nagdwar) पर पूरा माहौल प्राकृतिक है। 

Narmada Gau Kumbh, Jabalpur || नर्मदा गौ कुंभ मेला, जबलपुर

Narmada Gau Kumbh, Jabalpur

नर्मदा गौ कुंभ मेला, जबलपुर

नर्मदा गौ कुंभ नर्मदा नदी के किनारे लगा हुआ है। नर्मदा कुंभ में देश के कोने-कोने से साधु-संत सम्मिलित हुए हैं। नर्मदा गौ कुंभ मेले में आपको बहुत सारी अनोखी चीजों के दर्शन करने मिल जाएंगे, नर्मदा गौ कुंभ का मेला कई सालों में आयोजित किया जाता है। इस बार यह कुंभ मेला फरवरी महीने की 23 तारीख से शुरू होकर 3 मार्च तक चला है। नर्मदा गौ कुंभ मेलें में शामिल होने के लिए दूर-दूर से लोग आए हैं।

Narmada Gau Kumbh, Jabalpur
Narmada Gau Kumbh, Jabalpur


नर्मदा गौ कुंभ मेले में अयोजन मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले में ग्वारीघाट के गीताधाम मंदिर के सामने वाले मैदान में किया गया था। इस मेले में बहुत से मंदिर बनाये गये थें जहां पर मूर्तियां की स्थापना की गई थी। यहां पर मां दुर्गा, श्री राम चन्द्र, माता नर्मदा जी का मंदिर बनाये गए थे। 

ग्वारीघाट के नर्मदा कुंभ में आपको साधु संतो के दर्शन करने मिलेंगे, और इस कुंभ के मेले में ग्वारीघाट के नर्मदा नदी के घाटों पर हजारों लोग श्रद्धा की डुबकी लगने देश के कोने से लोग आये हुए थे। नर्मदा गौ कुंभ का आयोजन का मुख्य उद्देश्य नर्मदा नदी को स्वच्छ बनाए रखना और गौ माता की रक्षा करना है।

नर्मदा गौ कुंभ मेले में सभी प्रकार की व्यवस्था की गई थी। नर्मदा गौ कुंभ मेले में देश के कोने कोने से संत और साधु लोग आए हुए थे। कुंभ मेले का आयोजन का मुख्य उद्देश्य नर्मदा नदी की सफाई एवं गौ माता की रक्षा करना है। जिस तरह लोग नर्मदा नदी को दूषित करते जा रहे है, लोगों में जगरूकता फैलाना था कि नर्मदा नदी को स्वच्छ बनाए रखें। जिस तरह लोग नर्मदा नदी में कचरा डाल देते हैं, पुरानी मूर्तियां विसर्जित कर देते हैं और शैंपू और साबुन का यूज करते है, यहां तक कि नर्मदा नदीं में जानवरों के शव को भी बहा दिया जाता है। इन सभी क्रियाकलापों से नर्मदा नदी को दिन-ब-दिन प्रदूषित होती जा रही है। लोगों को इस कुंभ के माध्यम से जागरूक करना है कि नर्मदा नदी को स्वच्छ रखें क्योकि जल ही जीवन है और नर्मदा नदी का उदगम हमारे मध्यप्रदेश में हुआ है। नर्मदा नदी मध्यप्रदेश की भूमि को हरा भरा बनाते हुए बहती है तो इसकी स्वच्छता में हमें अपनी भागदारी दिखनी चहिए।

नर्मदा गौ कुंभ उद्देश्य गाय की रक्षा करना था। हमारे देश में गाय को माता का दर्जा दिया गया है। गाय की रक्षा परम धर्म है, नर्मदा गौ कुंभ में बताया गया है कि गाय इंसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है,  गाय क्यों पालना चाहिए, गाय पालने से क्या क्या फायदे हैं, गाय का दूध पीने से शरीर में क्या फायदे होते है, इन सभी बातों की जानकारी यहां पर उपस्थिति साधु-संतों के द्वारा बताया गया है। 

Narmada Gau Kumbh, Jabalpur
Narmada Gau Kumbh, Jabalpur

Narmada Gau Kumbh, Jabalpur
Narmada Gau Kumbh, Jabalpur
Narmada Gau Kumbh, Jabalpur
Narmada Gau Kumbh, Jabalpur

नर्मदा नदी से सवा करोड़ शिवलिंग इकट्ठा किए गए थे, और उन्हें एक स्थान पर रखा गया था, इसके अलावा यहां पर एक विशाल शिवलिंग का भी निर्माण किया गया था, जो देखने में बहुत ही खूबसूरत था, उस विशाल शिवलिंग के सामने नंदी भगवान की मूर्ति रखी गई थी। नर्मदा गौ कुंभ का दूसरा आकर्षण यहां पर शिव भगवान और माता पार्वती की अर्धनारीश्वर प्रतिमा थी, जो बहुत विशाल थी और देखने में बहुत ही आकर्षक थी। अर्धनारीश्वर प्रतिमा के पास ही में शिव भगवान जी की एक अलग प्रतिमा रखी गई थी,  यह प्रतिमा बहुत विशाल थी, शिव भगवान की प्रतिमा के सिर से गंगा जी को बहाया गया था। इन दोनों प्रतिमा के चारों तरफ फव्वारे लगाये गये थे। इस प्रतिमा को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आए हुए थे। यहां प्रतिमाएं नर्मदा गौ कुंभ मेले का मुख्य आकर्षण थी, इन प्रतिमाएं के साथ सभी लोगों ने फोटोग्राफी किया है।

सहस्त्रधारा जलप्रपात, मंडलाप्रियदर्शिनी प्वांइट पचमढ़ी, होशंगाबादरूपनाथ धाम, कटनी



नर्मदा गौ कुंभ मेले का तीसरा आकर्षण यहां पर लगने वाला मेला था। यहां पर लगने वाले मेले में भिन्न-भिन्न तरह की दुकानें लगी थी। आपको यहां पर बहुत सारे झूले देखने मिल जाते हैं। यहां पर तरह-तरह के झूले लगे हुए थे जो शायद ही अपने जबलपुर में किसी अन्य स्थान पर लगे हुए देखे होंगे। आप यहां पर झूला झूल सकते हैं और आपको झूलों की सवारी करके बहुत आनंद आएगा। यहां पर झूलों का चार्ज भी सामान्य ही था जैसे हर जगह होता है। नर्मदा कुंभ मेले में झूले मुख्यतः दो स्थलों पर लगे हुए थे, आयुर्वेदिक कॉलेज के बाजू में जो मैदान है वहां पर झूले और विभिन्न प्रकार की दुकानें लगाई गई थी । इसके अलावा श्री सिद्ध गणेश मंदिर के सामने जो मैदान है वहां पर भी झूले लगे हुए थे। इस जगह पर मौत के कुआं जिसमें दीवार पर गाडी चलाई जाती है, वहां भी यही लगा था। इस जगह पर भी तरह-तरह के झूले लगे हुए थे। नर्मदा कुंभ मेले में रोड के दोनों तरफ बहुत सारी दुकान लगी हुई थी। जहां आपको सस्ता सस्ता सामान मिल जाता है। नर्मदा गौ कुंभ मेले  पर झूलों के अलावा बहुत सारी दुकानें थी, जहां पर आप सामान खरीद सकते थे।

Narmada Gau Kumbh, Jabalpur
Narmada Gau Kumbh, Jabalpur


नर्मदा गौ कुंभ मेले लंदन के टाॅवर ब्रिज की प्रतिकृति भी बनाई गई थी। लंदन के टाॅवर ब्रिज बहुत बडा और फैमस है। इस टाॅवर ब्रिज के बीच से नदी से जहाज भी निकल सकते है। जब जहाज ब्रिज से बीच से निकलता है तो ब्रिज के बीच के हिस्सा उठ जाता है जिससे जहाज निकल जाते है।

नर्मदा गौ कुंभ मेले में साधु संतों के रुकने के लिए भी स्थान बनाया गया था। यहां पर बहुत सारे साधु एकत्र हुए थे, और यहां पर नागा साधु भी एकत्र हुए थे। इन साधु और नागा साधु के रूकने के लिए उत्तम व्यवस्थाए की गई थी। यहां पर उनके टेंट बनाया गया था और उनके खाने-पीने की अच्छी व्यवस्था थी। शौचालय की भी अच्छी व्यवस्था थी और हर जगह पीने के पानी की अच्छी व्यवस्था थी।

नर्मदा गौ कुंभ मेले सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए भी अलग स्टेज बनाया गया था। जहां पर सांस्कृतिक कार्यक्रम किए गए थे, यहां पर गौंडी नृत्य और विभिन्न प्रकार की नृत्य की प्रस्तुति भी गई थी।

नर्मदा गौ कुंभ मेले पर लोगों को फ्री चाय बांटने का भी इंतजाम किया गया था। यहां पर भंडारे का भी आयोजन भी किया गया था । आम लोग भी भंडारा जाकर ले सकते थे उसके लिए लोगों को लाइन लगाना पड़ता था।

Narmada Gau Kumbh, Jabalpur
Narmada Gau Kumbh, Jabalpur

नर्मदा गौ कुंभ साधु-संतों से प्रवचन सुनने के लिए अच्छी व्यवस्था की गई थी। यहां पर मंच बनाया गया था, जिसमें से साधु-संतों कथा सुनाते थे और यहां पर लोगों के बैठने के लिए कुर्सी की व्यवस्था की गई थी।

नर्मदा गौ कुंभ में अलग अलग यज्ञशाला में बनाई गई थी जिनकी परिक्रमा आम लोग कर सकते हैं। यहां पर नर्मदा जी की अलग यज्ञशाला बनी थी। गाय की रक्षा के लिए अलग यज्ञशाला बनी थी।

नर्मदा गौ कुंभ में लाइट और साउंड शो का भी आयोजन किया गया था। आपको यहां पर अपने मध्य प्रदेश के बारे में जानकारी लेजर शो के माध्यम से दी जा रही थी। लाइट और साउंड शो के माध्यम से बहुत अच्छी जानकारी दी जा रही थी।

नर्मदा गौ कुंभ में दूर से जो भी लोग कुंभ में शामिल होने आए हैं, उनके लिए विशेष रहने की सुविधा की गई थी । यहां पर अलग से टेंट लगाया गया था, जिससे दूर से आने वाले लोग यहां पर रह सके।

नर्मदा गौ कुंभ के अवसर पर पूरी सड़कों को खूबसूरती से सजाया गया था। गोरखपुर और रामपुर के चैरहे पर नर्मदा मैया की भव्य मूर्ति रखी गई थी। गोरखपुर से ग्वारीघाट तक की दीवारों पर खूबसूरत पेटिंग उकरी गई थी। ग्वारीघाट में भी अच्छी सफाई की गई थी। ग्वारीघाट के अवधपुरी काॅलोनी के पास से ही गाडी को रोकी जा रही थी। रेतनाके पास से ही ग्वारीघाट की सडक को बहुत खूबसूरती से सजाया गया था। यहां पर खूबसूरत लाइटे लगाई गई थी।

नर्मदा गौ कुंभ 24 फरवरी को आरंभ किया गया था। नर्मदा गौ कुंभ का शुभ आंरभ शास्त्री ब्रिज के नरसिंह मंदिर से किया गया था। शास्त्री ब्रिज के नरसिंह मंदिर साधु संतों की पेशवाई की गई थी। यहां पर साधु संत का स्वागत बहुत भव्य तरीके से किया गया था और शास्त्री ब्रिज से गीता धाम तक सड़क में जगह-जगह पर मंच लगाया गया था और साधु संतों का स्वागत किया गया था। संतों के स्वागत के लिए बहुत सारे झाकियां निकाली गई थी।

नर्मदा गौ कुंभ मेले में ग्वारीघाट के नर्मदा नदी के घाटों को भी खूबसूरती से सजाया गया था। नर्मदा घाट की अच्छी साफ सफाई की गई थी, इस कुंभ में जो भी लोग आए थे। वह नर्मदा नदी में जरूर डुबकी लगाए थे और उसके बाद संतो के द्वारा की गई कथा को ग्रहण किया था।

आदेगांव का किला, सिवनीमहादेव मंदिर पचमढ़ी, होशंगाबाद


नर्मदा गौ कुंभ मेले में विभिन्न प्रकार के फूड स्टाल लगाए गए थे। जहां से अलग अलग तरह के फास्टफूड और चाय काफी का मजा ले सकते है। यहां पर पीने के पानी की भी अच्छी व्यवस्थाएं की गई थी, जगह-जगह पर पानी की व्यवस्था थी। इसके अलावा यहां पर शौचालय की जगह जगह पर व्यवस्था थी और यहां पर सफाई पर विशेष ध्यान दिया गया था । यहां पर पार्किंग में भी विशेष ध्यान दिया गया था, यहां पर पार्किंग की बहुत अच्छी व्यवस्था थी, दशहरा ग्राउंड में पार्किंग की व्यवस्था की गई थी। यहां ग्राउंड बहुत बड़ा है और इस ग्राउंड में पार्किंग की व्यवस्था की गई थी। नर्मदा गौ कुंभ मेला 3 तारीख को समाप्त हो गया है, मगर यहां का झूले का सेक्शन 8 तारीख तक चलेगा। 

Math Ghogra waterfall and Cave || Shri Paramhans Ashram Math Ghoghara Dham || Shiv Dham Math Ghoghara

श्री शिवधाम मठघोघरा लखनादौन


मठघोघरा जलप्रपात एवं गुफा (Math Ghogra Waterfall and cave) सिवनी जिलें का एक दर्शनीय स्थत है। यह झरना एवं गुफा प्रकृति की गोद में स्थित है। यहां पर आपको बरसात के सीजन में एक खूबसूरत झरना देखने मिलेगा। मठघोघरा (Math Ghogra Waterfall )  में प्राचीन शिव मंदिर है। यहां पर शिव भगवान की अनोखी प्रतिमा विराजमान है। आपको यह पर चारों तरफ प्रकृति की खूबसूरती देखने मिल जाएगी। यहां जगह आपको बहुत पसंद आयेगी। 

Math Ghogra waterfall and Cave
Math Ghogra Waterfall and Cave

Math Ghogra waterfall and Cave
Math Ghogra Waterfall and Cave


मठघोघरा झरना एवं गुफा (Math Ghogra Waterfall and cave) सिवनी जिले के लखनादौन तहसील में स्थित है। आप यहां पर असानी से पहॅुच सकते है। लखनादौन सिवनी से लगभग 60 किमी की दूरी पर होगा। लखनादौन जबलपुर नागपुर हाईवे रोड पर स्थित है। आप लखनादौन तक बस द्वारा असानी से पहुॅच सकते है। मगर आपको लखनादौन बस स्टैड से आपको आटो बुक करना होगा इस मठघोघरा जलप्रपात (Math Ghogra Waterfall ) तक जाने के लिए। आप यहां पर अपने वाहन से भी आ सकते है। मठघोघरा (Math Ghogra Waterfall ) तक पहुॅचने के लिए आपको पक्की रोड मिल जाती है। आपको इस जगह तक पहुॅचने के लिए पहले लखनादौन पहुॅचना पडता है। आपको इस जगह पर बरसात पर जाना चहिए क्योकि यहां पर बरसात में ही झरना आपको देखने मिलता है। वैसे आप यहां गर्मी में भी जा सकते है क्योकि यहां का वातावरण बहुत अच्छा  और ठंडा रहता है। यहां पर चारों तरफ जंगल का अदुभ्त नाजारा देखने मिलता है। यहां पर आपको ज्यादा भीड नहीं देखने मिलती है। यहां पर आपको बैठने के लिए बहुत अच्छा जगह मिल जाती है। अगर आप बरसात में आते है यहां पर आपको थोडा सावधानी बरतनी पडती है, क्योकि यहां जगह चारों तरफ से जंगल और उॅचे उॅचे पहाडों से घिरी हुई है, तो यहां पर बरसात के समय रोड में फिसलन हो जाती है, इसलिए गाडी संभलकर चलाने की जरूरत होती है। इस जगह तक  पहुॅचने के लिए आपको पक्की सडक मिल जाती है। लखनादौन बस स्टाॅप के पास ही में एक गाली सीधी इस जगह के लिए जाती है। आपको इस गाली में एक बोर्ड देखने मिलेगा जिसमें मठघोघरा (Math Ghogra Waterfall and cave) का नाम लिखा होगा और दूरी लिखी होगी। आप इस रोड से सीधा जाना है, इस रोड के अंत में ही मठघोघरा जलप्रपात एवं गुफा (Math Ghogra Waterfall and cave) देखने मिलेगा। आपको लखनादौन से मठघोघरा (Math Ghogra Waterfall ) के आने वाले रास्ते में बहुत ही खूबसूरत नदी या आप इन्हें बरसाती नाले भी कहे सकते है, देखने मिल जाते है। इसके अलावा आपको खुले मैदान देखने मिलेगी। बरसात के समय नदियों में पानी बहता है और इसमें आपको गांव के बच्चे मस्ती करते हुए दिख जाते है। इसके अलावा बरसात में आपको हरियाली भी दिखने मिल जाती है। इस जगह के आसपास ग्रामीण क्षेत्र है जहां पर आपको बरसात के समय मक्के की खेती देखने मिल जाएगी। आप जब इस जगह पहुॅचते है तो आपको रोड में ही साइन दिख जाता है। आप जब इस रोड से मंदिर की तरफ आते है, यहां पर आपको घाटीनुमा रोड दिखने मिलेगी जो सर्पाकार होती है। आप जब इस मंदिर की तरफ जाते है तो आपको पहाडों का सुरम्य व्यू देखने मिलेगा । बरसात में तो पहाडी में जो हरियाली होती है वहां एकदम मस्त होता है। आप जब इस मंदिर के पास पहुॅचते है तो आपको एक झरना दिखाई देगा जो चटटानों के उपर से बहुत प्यारा लगता है। यह मुख्य झरना नहीं है मुख्य झरना देखने के लिए आपको इस घाटी के ओर नीचे जाना होता है। 

Math Ghogra waterfall and Cave
Math Ghogra Waterfall and Cave


आप मंदिर पहुॅच जाते है तो आपको तीन बहुत बडे बडे त्रिशूल दिखाई देते है जो धरती पर गडे होगें। मंदिर तक आपकी गाडी आराम से चली जाती है। आपको अपनी गाडी यहीं पर पार्क करना होता है। यहां से आगे का रास्ता आपको पैदल तय करना होता है। यहां पर आपको संभल कर चलना होता है क्योकि यहां पर पहाडों से पानी रिसता है वहां पूरी रोड और सीढियों में फैला रहता है। यहां पर बहुत फिसलन होती है। इस जगह को श्री परमहंस मठघोधरा धाम (Shri Paramhans Ashram Math Ghoghara Dham) भी कहा जाता है। आप जैसे ही सीढियों से नीचे जायेगें आपको खूबसूरत व्यू दिखाई देगा। यहां पर एक झरना पहाडों के बीच से बहता है और झरने के नीचे एक गुफा है, वैसे यहां गुफा पहाडों को काटकर बनाई गई। यहां पर आपको बहुत बडी जगह जायेगी। जहां पर शिव भगवान की मूर्ति भी स्थापित है। यहां मूर्ति गुफा के अंदर स्थित है, इसके अलावा यहां पर 12 ज्योर्तिलिंग भी आपको देखने मिलेगें। गुफा में बहुत बडा स्पेस है जहां पर आप पूरा घूमकर देख सकते है। यहां पर एक छोटा सा रूम भी बना था, गुफा के अंदर जहां पर ताला लगा हुआ था। आपको यहां स्थल पर शिव भगवान की प्राचीन एवं पत्थर का एक शिवलिंग देखने मिलेगा जो यहां पर बहुत प्रसिध्द है, इस शिवलिंग की बनावट अनोखी है। इस जगह का मुख्य आकर्षण यहां का झरना है, यह झरना बरसात में देखने मिलेगा। इस झरने के नीचे ही यहां गुफा स्थित है। यहां गुफा बहुत खूबसूरत लगता है। यहां के चारों तरफ का वातावरण बहुत खूबसूरत है। यहां पर पहाडों से पानी आता है, यह पानी पीने के लिए होता है। यह पूरी तरह से शुध्द होता है क्योकि यह पानी पहाडों से रिसता है। आप यह जो झरना बहता है उसका पानी पी नहीं सकते है क्योकि यह पानी उपर का जो भी खेत है और घरों का पानी बह कर आता है। मगर जो यह पहाडों का पानी है वो बहुत शुध्द है ये जो पानी है वो बरसात के साथ साथ गर्मी में भी बहता रहता है। यहां पर आप झरने से आगे जाने का रास्ता है वहां पर छोटा सा गार्डन है। यहां पर पूरा जंगल है चारों तरफ हरियाली है। यहा पर गर्मी में यह झरना सूख जाता है। 

Math Ghogra waterfall and Cave
Shri Paramhans Ashram Math Ghoghara Dham

Math Ghogra waterfall and Cave
Math Ghogra waterfall and Cave


यह जगह बहुत अच्छी है और यहां पर बहुत शांती रहती है। यहां पर आप बरसात में जायेगें तो आपको बहुत अच्छा लगेगा। इसके अलावा गर्मी में भी यहां जाया जा सकता है। यहां पर आप अपनी फैमिली और फैडस के साथ जा सकते है। आप यहां पर जाकर कचडा न करें यहां जगह बहुत साफ एवं अच्छी है। आप यहां पर कचडा न करें। यह जगह बहुत खूबसूरत है जहां पर जाकर आप अपना अच्छा समय बिता सकते है। यह फोटोग्राफी के लिए बहुत बढिया जगह है। 

Pachmarhi Chauragarh Temple || चौरागढ़ महादेव मंदिर, पचमढ़ी

 Pachmarhi Chauragarh Shiv Temple

चौरागढ़  महादेव पचमढ़ी


चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) का प्रसिद्ध मंदिर शिव मंदिर मध्य प्रदेश का प्रमुख पर्यटन स्थल है और यह पचमढ़ी में स्थित है। चैरागढ़ का मंदिर एक ऊंचे पहाड़ पर स्थित है यह मंदिर भगवान शिव जी को समर्पित है। चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) महादेव पचमढ़ी (Pachmarhi) की एक खूबसूरत जगह है। यह जगह बहुत खूबसूरत है और जंगलों से घिरी हुई है। इस मंदिर तक जाने के लिए आपको बहुत मेहनत करनी पड़ेगी क्योंकि इस मंदिर तक पहॅुचने के लिए आपको पैदल चलना पड़ेगा और यह जगह पूरी तरह से जंगल और पहाड़ों से घिरी हुई है, यहां पर आपको बहुत खूबसूरत प्राकृतिक व्यू देखने मिलता है, यहां पर वादियों का मनोरम दृश्य देखने मिलता है।  चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर 1326 मीटर की ऊंची पहाड़ी पर स्थित है और इस मंदिर तक पहुंचने के लिए आपको 1300 चढ़ने पड़ती है।


पचमढ़ी (Pachmarhi) को सतपुड़ा की रानी कहा जाता है और यहां पर बहुत सारी धार्मिक जगह है, जिनमें से प्राचीन शिव भगवान जी का मंदिर भी एक है,जिसके दर्शन करने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। यहां पर साल भर लोग दर्शन करने के लिए आते हैं, मगर विशेषकर नाग पंचमी और महाशिवरात्रि के समय पचमढ़ी में मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें लाखों की संख्या में लोग आते हैं और भगवान शिव के दर्शन करने के साथ-साथ उन्हें त्रिशूल चढ़ाते हैं।

Pachmarhi Chauragarh Temple
Pachmarhi Chauragarh Temple

चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) के प्राचीन शिव भगवान जी के मंदिर तक जाना आसान बात नहीं है। यह पूरा पहाड़ी रास्ता है और इस रास्ते में आपको किसी भी तरह की सुविधाएं नहीं मिलती हैं। आपको पैदल चलना पड़ता है और यहां तक जाते-जाते आपकी हालत खराब हो जाती है मगर शिव भगवान के भक्त इस रास्ते पर बम बम भोले का जयकार लगाते हुए चलते हैं और भगवान शिव को अर्पण करने के लिए भारी त्रिशूल भी लेकर चलते है। 

Pachmarhi Chauragarh Temple
Pachmarhi Chauragarh Temple

चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) स्थिाति एवं जाने का रास्ता


चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) का महादेव मंदिर पचमढ़ी में स्थित है। पचमढ़ी (Pachmarhi) होशंगाबाद शहर में स्थित है और होशंगाबाद शहर मध्य प्रदेश में स्थित एक शहर है। पचमढ़ी पहुंचने के लिए आपको सबसे अच्छा साधन ट्रेन से है। आप ट्रेन से आसानी से पचमढ़ी (Pachmarhi) पहुंच सकते हैं आप आना चाहें तो अपने वाहन से भी पचमढ़ी आ सकते हैं सड़क मार्ग से भी पचमढ़ी अच्छी तरह से कनेक्टेड है और आप इस पचमढ़ी (Pachmarhi)सड़क मार्ग से भी पहुॅच सकते हैं। आप पचमढ़ी (Pachmarhi) ट्रेन से आते है तो ट्रेन से आपको पहले पिपरिया रेलवे स्टेशन तक आना होता है, वहां से आपको बस एवं जिप्सी की सुविधा मिल जाती है। आप चाहे तो बस से आ सकते हैं या जिप्सी से आ सकते हैं। बस में आपका कम किराया लगता है, 60 रू पचमढ़ी तक का किराया लगता है। जिप्सी में आपको ज्यादा किराया लगता है। आपको जिप्सी में आने के लिए बारगेन करना पड़ता है। आप पिपरिया से पचमढ़ी तक खूबसूरत वादियों का नजारा देखते हुए पहुंच जाते हैं। 

पचमढ़ी में नागपंचमी मेला


पचमढ़ी (Pachmarhi) में आप जब नागपंचमी के मेले में आते हैं तो यहां पर बहुत ज्यादा भीड़ रहती है। आपको पचमढ़ी नगर के बाहरी क्षेत्र में ही उतार दिया जाता है। आपको वहां से पैदल पचमढ़ी (Pachmarhi) नगर तक आना पड़ता है। आपको नाग पंचमी के मेले के समय यहां पर पूरी रोड में बहुत सारी दुकाने मेला दिखाई देगा और पचमढ़ी के बाहरी क्षेत्र इतने सारे वाहन दिखाई देंगे क्योंकि यहां पर लोग नाग पंचमी के टाइम में बहुत दूर-दूर से आते हैं, तो पूरी बस बुक करके आते हैं तो यहां पर आपको बहुत सारे वाहन दिखाई देगी। आप जब पचमढ़ी (Pachmarhi) के बाहरी क्षेत्र पचमढ़ी नगर की तरफ आते है तो आपको बहुत सारी तरह तरह की दुकानें देखने मिलती है। आपको रोड के दोनों तरफ दुकानें दिखाई देगी। 

पचमढ़ी  (Pachmarhi)में जब आप पहुंचते हैं, तो आपको यहां से चैरागढ़ मंदिर तक जाने के लिए जीप या जिप्सी मिल जाती है। मेले के दौरान यहां पर जिप्सी का किराया बहुत सस्ता रहता है। आपको 30 या 40 रू में चौरागढ़ मंदिर (Chauragarh  Shiv Temple) तक आसानी से पहुंचा दिया जाता है। मेले के समय पचमढ़ी में बहुत ज्यादा भीड़ रहती है तो गाड़ी में भी बहुत ज्यादा भीड़ रहती है। गाड़ी वाला एक साथ 10 से 15 लोगों को बैठा लेता है और मंदिर तक छोड़ जाता है।

चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर तक पहुंचने के लिए जो सड़क है वह बहुत खूबसूरत है। यह जो सड़क है इस पर कहीं-कहीं पर ऐसे मोड़ है, जो आपको खतरनाक लगते हैं मगर ड्राइवर जो है वह इन मोड पर गाडी असानी से चला लेता है क्योकि उसे गाड़ी चलाने की आदत रहती है। अगर आप अपने वाहन से इस जगह पर जाते हैं तो गाड़ी आप आराम से चलाइए क्योंकि यहां पर बहुत सारे एक्सीडेंट होते रहते है। आपको यहां पर जरूर 1 या 2 गाड़ी देखने मिल जाएंगी जिनके एक्सीडेंट यहां पर हो चुके हैं। 

Pachmarhi Chauragarh Temple
Pachmarhi Chauragarh Temple

Pachmarhi Chauragarh Temple
Pachmarhi Chauragarh Temple


जिप्सी वाला आपको बड़ा महादेव मंदिर के पास छोड़ देता है। आप चाहे तो बड़ा महादेव मंदिर घूम कर चौरागढ़ मंदिर (Chauragarh  Shiv Temple) के लिए जा सकते हैं। चैरागढ़ मंदिर (Chauragarh  Shiv Temple) के रास्ते में ही आपको गुप्त महादेव मंदिर भी देखने मिल जाएगा । आप गुप्त महादेव मंदिर भी घूम सकते है। 

चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर की पैदल यात्रा 


चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर 3 से 4 किलोमीटर की दूरी पर है। आपको इस मंदिर तक पैदल जाना पड़ता है। यहां पर किसी भी तरह की सुविधाएं नहीं मिलती है और ना ही वाहन चलते हैं। आपको पैदल यात्रा करनी पड़ती है और यह पथरीला रास्ता होता है। आपको यहां पर जूते पहन कर जाना चाहिए क्योंकि चप्पल यहां पर किसी भी काम की नहीं रहती है।आप इस रास्ते से जाते हैं तो आपको यहां पर जंगलों की खूबसूरती देखने मिलता है। यहां पूरा रास्ता जंगल का है चारों तरफ हरे भरे पेड़ों है। यहां पर आपको चारों तरफ हरियाली देखने मिलती है।

आप ऊपर पहूॅचते है तो आपको बहुत मस्त व्यू देखने मिलता है। चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर के रास्ते में एक गुफा देखने मिलेगी जहां पर कहा जाता है कि सीता जी ने अपने वनवास काल के दौरान इस गुफा में ठहरी थी, यह गुफा सीता जी के नाम पर रखी गई है। यहां पर आपको इस गुफा के पास से ही चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर तक जाने के लिए दो रास्ते मिलेंगे एक रास्ता पक्का मिलेगा और एक रास्ता जंगल वाला मिलेगा जो शॉर्टकट है आप वहां से भी चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर तक जा सकते हैं, वैसे मुझे लगता है कि दोनों रास्ते की दूरी समान ही होगी। 

हम लोग पक्के रास्ते से चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर तक गए थे और मैं आपको भी यही रास्ता प्रेफर करूगी, आप पक्के रास्ते से जाएं क्योंकि इस रास्ते में आपको किसी भी तरह की दिक्कत नहीं होगी और आप आराम से जा सकते हैं और जो जंगल वाला रास्ता है जो शॉर्टकट रास्ता है उससे आपको शायद दिक्कत हो सकती है क्योंकि वह रास्ता पूरी तरह से उबड़ खाबड़ हो सकता है। आपको जैसे जैसे उपर चढाते है आपको पहाडियो को खूबसूरत व्यू देखने मिलता है और चारों तरफ हरियाली देखने मिलती है। यहां पर आपको बहुत सारे बंदर भी देखने मिल जाएंगे बंदरों को अब किसी भी तरह का खाना ना डालिए और खाने का सामान हाथ पर लेकर न चलें नहीं तो बंदर आपके हाथ से छीन सकते है।

Pachmarhi Tourist Place


चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर का विवरण 


यह मंदिर बहुत अच्छी तरह से बन गया है और यहां पर आपको आकर बहुत अच्छा लगेगा। यहां पर पानी की व्यवस्था है आप थोड़ा देर आराम करके पानी पीकर भगवान जी के दर्शन करने के लिए जा सकते हैं और यहां पर आप नीचे चप्पल उतार कर फिर भगवान जी के दर्शन करने जा सकते हैं। यहां पर शिव भगवान की जो प्रतिमा है वह बहुत आकर्षक है और आपको बहुत खूबसूरत लगेगी और लोग इतनी दूर दूर से भगवान जी के दर्शन करने के लिए आते हैं और इस प्रतिमा में कहा जाए तो एक प्रकार का जादू है आप इस प्रतिमा को  देखते रह जाएंगे। यहां पर आपको अच्छा लगेगा के प्रतिमा के दर्शन करने के बाद बाहर आते हैं तो आपको गणेश जी का मंदिर देखने मिलेगा आप गणेश जी के दर्शन कर सकते हैं उन्हें प्रसाद चढ़ा सकते हैं। उसके बाद आप मंदिर के सामने तरफ आएंगे तो सामने भी आपको शंकर जी और भी अन्य देवी-देवताओं के दर्शन करने मिल जाएंगे जिनकी प्रतिमा मंदिर के बाहर रखी गई है। आप यहां पर त्रिशूल देख सकते हैं, यहां पर ढेर सारे त्रिशूल रखे गए हैं। इतने सारे और बहुत वजन के यहां पर देखने मिलतेे है। 

हम लोग पहले यहां पर आए थे तो त्रिशूल से पूरी मंदिर की बाउंड्री बनाई गई थी, मगर अभी पूरा कवर कर दिया गया है। आपको यहां से चारों तरफ का खूबसूरत व्यू देखने मिलता है जो एकदम अनोखा रहता है आप शायद इस तरह कभी ना देखे हो और शायद देखे भी हो मगर इसके बारे शब्दों में नहीं बताया जा सकता है। आपको मंदिर के बाहर ही अगरबत्ती जलाने मिलेगी और आप बाहर ही नारियल फोड़ सकते हैं, आप अंदर जाकर सिर्फ भगवान जी के दर्शन कर सकते हैं। शिव भगवान जी के और दर्शन करके आपको बाहर आना पड़ेगा । यहां पर आप खूबसूरत वदियों में फोटोग्राफी भी कर सकते है। आपको यह लगता है कि जो बादल है वह आपके पास ही से उड रहे हो। यहां पर जो बरसात का मौसम रहता उस टाइम भी अच्छा लगता है वैसे गर्मी के मौसम में भी यहां अच्छा लगता है, क्योंकि यहां पर चारों तरफ हरियाली रहती है। यहां के जो पेड़ पौधे रहते हैं वह गर्मी के मौसम में भी हरे भरे रहते हैं। इस जगह पर आकर आपकी थकावट दूर हो जाती है, जो इतनी दूर से आप चल कर आते हैं। वह थकावट आपकी इस जगह पर आकर पूरी तरह से चली जाती है। 

Pachmarhi Chauragarh Temple
Pachmarhi Chauragarh Temple

Pachmarhi Chauragarh Temple
Pachmarhi Chauragarh Temple


अब यहां मंदिर बहुत अच्छा बन गया है। हम इस मंदिर में करीब 10 साल पहले गए थे तब यहां पर कुछ भी नहीं था। यहां पर शिव भगवान की मूर्ति खुले में ही रखी हुई थी और त्रिशूल से मंदिर के चारों तरफ बाॅडरी बनी हुई थी। यहां पर किसी भी तरह की व्यवस्था नहीं थी मगर अब यहां पर हर तरह की व्यवस्था है। 

चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर के रास्ते में लगने वाली दुकानें 


जब आप पचमढ़ी में मेले के दौरान आते है और आप जब इस मंदिर पर पहुंचते हैं, तो मंदिर के रास्ते में आपको बहुत से दुकानें मिलती है। मेले के दौरान यहां पर बहुत सारी दुकानें लगती हैं जहां पर आप खाना खा सकते हैं और नींबू पानी पी सकते हैं और भी बहुत सारी दुकानें लगती हैं। मेले के समय में यहां पर बहुत ज्यादा भीड़ रहती है। मेले के समय में यहां पर आपको भंडारा भी मिलता है। आपको कढ़ी चावल सब्जी पूड़ी यहां खाने मिलता है और भंडारा तो बहुत मस्त रहता है। 

चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर के रास्तें में बहुत दुकाने रहती है आप चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर  के रास्ते मे थक जाते है, आप रास्ते में रेस्ट करके कुछ भी खरीदकर खा सकते है। दुकानों में आपको उबली बेर एवं भुने चने एवं मूगंफली भी मिल जाती है। 

यहां पर आपको बहुत सी ऐसी भी दुकान देखने मिलती है, जहां पर आपको देशी दारू मिलती है, बहुत से लोग यहां से दारू लेते है । इन दुकानों पर आपको 10 या 20 रू गिलास में दारू मिलती है। यहां पर बहुत से लोग दारू पीते हुए देखते हुए मिल जाते है। सस्ती देशी दारू पीकर बहुत से लोग यहां पर घूमते रहते है। 

Pachmarhi Chauragarh Temple
Chauragarh view


चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर में मन्नत पूरी होती है


महादेव मंदिर में आकर श्रद्धालु मन्नत मानते है। यहां पर लोगों की इच्छा पूरी होती है और जिसकी भी इच्छा पूरी होती है वहां महादेव मंदिर में आकर त्रिशूल चढाते है। यहां पर लोग छोटे से लेकर बडे त्रिशूल तक चढाते है। यहां पर लोग 100 से 200 किलो के त्रिशूल लेकर चढाते है। यहां पर आप हजारों की संख्या में त्रिशूल देख सकते है। जो लोगों के द्वारा इतनी दूर से लाए जाते हैं और शिव भगवान जी को अर्पण किए जाते हैं यहां पर लोगों की मन्नत पूरी हो जाती है। 

आपके लिए सलाह


  • आप चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) महादेव मंदिर तक जाने के जूते पहन कर जाएं क्योंकि आप की चप्पल टूट सकती है और हाई हील तो बिल्कुल ना पहने अगर चप्पल पहनते है तो मजबूत चप्पल पहनें। 
  • आप चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) महादेव मंदिर में जाए तो पानी और ग्लूकोस लेकर चलें क्योकि यहां पर आपको बहुत चलना पडता है जिससे आप बहुत थक जाते है। ग्लूकोस से आपको एनर्जी मिलती है तो जरूर लेकर चलें।
  • आप चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) महादेव मंदिर में जाए तो अपने साथ कुछ भुने चने और मूंगफली लेकर जाये जिससे आप जहां पर भी रेस्ट करें तो ये खा सकें। 
  • चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) महादेव मंदिर में आपको बहुत चलना पडता है तो आप बच्चे या बूढे व्याक्ति को परेशानी आ सकती है। 

Satdhara MelaBhutiya GoanKataw Dham


Vijayraghavgarh Fort Katni -- विजयराघव गढ़ किला का इतिहास एवं सम्पूर्ण जानकारी

Vijayraghavgarh Fort Katni 

विजयराघवगढ़ किला 


विजयराघवगढ़ किला (Vijayradhavgarh Fort) कटनी शहर की शान है। यह एक प्राचीन किला है। विजय राघव गढ़ किले में आपको प्राचीन किला देखने मिल जाएगा। विजयराघव गढ़ किले  (Vijayradhavgarh Fort) में आपके देखने के लिए बहुत सारी जगह है, जहां पर आप अपने प्राचीन इतिहास को जान सकते हैं, यहां पर आपको रंग महल, मंदिर, समाधि स्थल, रानी की रसोई, रानी राजा का महल, पुरानी पेटिग, प्राचीन कुआं और भी बहुत सी चीजें आपको यहां देखने मिल जाएंगे।

Vijayraghavgarh Fort Katni
Vijayraghavgarh Fort Katni


विजयराघवगढ़ किले का स्थिाति


विजय राघव गढ़ किला  (Vijayradhavgarh Fortकटनी शहर में स्थित है। कटनी शहर मध्य प्रदेश का एक जिला है। विजयराघवगढ़ कटनी शहर की तहसील एवं नगर पंचायत है। यह किला विजयराघवगढ़ तहसील में स्थित है। यह कटनी शहर से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर होगा, आप यहां पर अपनी गाड़ी से आ सकते हैं। विजय राघव गढ़ किला  (Vijayradhavgarh Fortतक आने के लिए आपको बस भी मिल जाएंगी। यह किला बहुत बड़ा है।

विजयराघवगढ़ किले का जानकारी


विजयराघवगढ़ किले  (Vijayradhavgarh Fortमें आप पहुंचते हैं तो आपको किले के बाहर चारों तरफ घेरे हुए एक गड्ढा दिखाई देगा। इस गड्ढे में पानी भरा हुआ रहता है, पुराने समय में इन गड्ढों में मगरमच्छ एवं जहरीले सांप को रखा जाता था, ताकि कोई भी अगर किले में हमला करता था या किले में घुसने की कोशिश करता था तो उन्हें इन गड्ढों को पार करना उसके लिए मुश्किल था। इससे उन आक्रमणकारी की जान भी जा सकती थी। विजयराघवगढ़ किले  (Vijayradhavgarh Fortके अंदर आप प्रवेश करते हैं, तो आपको बड़ा सा प्रवेश द्वार देखने मिलेगा इस प्रवेश द्वार से आप किले के अंदर प्रवेश करेंगे, तो आपको किले के परिसर में महल देखने मिलेंगे, विजयराघवगढ़ किले  (Vijayradhavgarh Fortका रंगमहल बहुत खूबसूरत है, इसकी बनावट बहुत बढिया है। इस महल में सुंदर सुंदर पेंटिंग है वैसे अब ये पेंटिंग सुंदर नहीं रही है, क्योंकि बहुत से लोगों ने इस पेंटिंग में अपना नाम लिख दिया है और लोग यही करते आ रहे हैं जिससे वह पेंटिंग सुंदर नहीं रही है। मगर इस महल की छत पर भी पेटिंग बनी हुई है। यहां पर आप छत पर पेंटिंग जो देखेंगे उसमें किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ है। यह पेंटिंग बहुत सुंदर है और आप लोगों को वह पेंटिंग अच्छी लगेगी। किले के अंदर आपको बहुत सारे चमगादड़ देखने मिल जाएंगे, जो अंधेरे में रहते हैं, आप इस महल के नीचे आते है तो नीचे भी आप घूम सकते हैं, महल  के नीचे भी घूमने के लिए बना हुआ है। यह महल बहुत खूबसूरत है और यहां पर आपके पिक्चर बहुत अच्छे आती हैं।

Vijayraghavgarh Fort Katni
Vijayraghavgarh Fort Katni

Vijayraghavgarh Fort Katni

Vijayraghavgarh Fort Katni


विजयराघवगढ़ किले  (Vijayradhavgarh Fortके परिसर में आपको घोड़ों को बांधने का स्थान भी देखने मिलेगा, और जब आप मुख्य किले के अंदर जाते हैं तो आपको यहां पर किले के बीच में बहुत बडा आंगन देखने मिलता है, जिसमें आपको समाधि देखने मिलती है, जिसमें सफेद कलर की टाइल्स लगी हुई है, इसके अलावा आपको इस आंगन में मंदिर भी देखने मिल जाता हैं, यहां पर एक कुआं भी स्थित है, जो अब लोहे की राॅड से ढका हुआ है। आप किले के आंगन के बीच से खडे होकर पूरा किला देख सकते है, जो बहुत खूबसूरत है। किले के आंगन के चारों तरफ बरामदे बने हुए हैं, जिनमें खूबसूरत खिड़कियों है, जिनमें  नक्काशी की गई है और जालियां लगी हुई है, जो काफी खूबसूरत है। आप किले में ऊपर चढ़कर भी देख सकते हैं और वैसे यह किला अब काफी जर्जर हालत में है, इसलिए मैं आपको सलाह दूंगी कि आप किले के ऊपर ना चढ़े क्योंकि किले के कई भाग गिर चुके हैं टूटकर और कमजोर हो चुके हैं इसलिए आप किले के ऊपर ना चढ़े हैं यह आपके लिए अच्छा होगा।

इस किले की गवर्नमेंट भी अच्छे से देखभाल नहीं कर रही है तो यह किला काफी जर्जर हालत में जाते जा रहा है। इस किले में किसी भी तरह की कोई फैसिलिटी नहीं है। यहां पर ना ही पीने के लिए पानी है और ना ही शौचालय है। यदि आप यहां पर जाते हैं तो पानी वगैरह लेकर जाए और खाना-पीना लेकर जाए क्योंकि किले के आजू-बाजू आपको किसी भी तरह की दुकानें नहीं मिलेगी। इस किले के थोड़ी ही दूरी पर आपको बाजार जरूर देखने मिलेगा, जो विजयराघवगढ़ तहसील में भरता है। जहां से आप खाना पीना या नाश्ता वगैरह कर सकते हैं। आप इस किले में ज्यादा टाइम बिताना चाहते हैं, तो आप खाने पीने का सामान साथ लेकर जाइए। इस किले किसी भी प्रकार की एंट्री फी नहीं लगती है और सिर्फ आपको अपना नाम, पता एवं मोबाइल नंबर  लिखना पड़ता है।

Vijayraghavgarh Fort Katni
Vijayraghavgarh Fort Katni

Vijayraghavgarh Fort Katni


विजय राघव गढ़ किले  (Vijayradhavgarh Fort) का निर्माण 


विजयराघव गढ़ किले  (Vijayradhavgarh Fort) का निर्माण राजा प्रयाग दास जी ने किया था। राजा प्रयाग दास जी मैहर राजा के भाई थे। इस किले के निर्माण 1826 में हुआ था  और कई वर्षों तक इस किले का निर्माण कार्य चला था। इस किले की  खासियत यह है कि यह बहुत सुरक्षित किला है। आपको किले में बहुत ही खूबसूरत पत्थरों पर नक्काशी देखने मिल जाती है। राजा प्रयाग दास के पुत्र सरयू प्रसाद ने अंग्रेजो के खिलाफ लड़कर देश को आजाद कराने में महत्वपूर्ण योगदान निभाया है। राजा सरयू प्रसाद ने अंग्रेजों के खिलाफ 1857 की क्रांति में शामिल हुए थे, जिससे अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और उनसे यह किला छीन लिया।

विजयराघवगढ़ किले आने की उपयुक्त समय


विजय राघव गढ़ किले  (Vijayradhavgarh Fortमें जाने का सबसे उपयुक्त समय ठंड का या बरसात का होता है। गर्मी में यहां तापमान बहुत ज्यादा होत है और बहुत ज्यादा गर्मी पड़ती है तो आपको यहां आने में परेशानी हो सकती है और किला घूमने में परेशानी हो सकती है।  मगर ठंड के समय आप पूरा किला  घूम सकते हैं।विजय राघव गढ़ किला  (Vijayradhavgarh Fort) सुबह 10 बजे से 6 बजे तक खुला रहता है। आप इस टाइम पर किले में आ सकते हैं। किले से लगभग 100 मीटर की दूरी पर पुलिस स्टेशन स्थित है और पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस स्थित है। आप इस किले में आसानी से आ सकते हैं। किले तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क है। इस किले से आप मैहर से, कटनी से, और सतना से आराम से पहुंच सकते हैं। मैहर वाली जो रोड है किले की वह बहुत ज्यादा खराब है, इस रोड में रात को सफर नहीं किया जा सकता है, क्योंकि रोड बहुत ज्यादा खराब है


विजय राघव गढ़ किला  (Vijayradhavgarh Fort) बहुत खूबसूरत और बहुत बड़ा किला है। आप यह किला पूरा घूम सकते हैं, यहां पर करीब आपका एक से 2 घंटा आराम से लग जाएगा। आप यहां पर अपनी फैमिली और फ्रेंड्स  के साथ आ सकते हैं, यह एक अच्छा पिकनिक स्थल है आप पिकनिक मनाने भी आ सकते हैं, यहां पर आपको बहुत अच्छा लगेगा यहां पर ज्यादा भीड़ भाड़ नहीं रहती है।