सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

खैर का पेड़ (Khair tree) के औषधीय गुणों के बारे में जानकारी

खैर का पेड़ या कत्था के पेड़ की जानकारी और खेर का पेड़ उपयोग 
Khair tree or catechu tree information and Khair tree uses


खैर का पेड़ या कत्थे के पेड़ का वानस्पतिक नाम या वैज्ञानिक नाम - एकेसिया कैटेचु 
खैर का पेड़ या कत्थे के पेड़ का अंग्रेजी नाम - ब्लैक कैटेचु, कच ट्री, 

खैर का पेड़ भारत में पाया जाने वाला एक प्रमुख पेड़ है। खैर का पेड़ को, कत्था का पेड़ या खदिर का पेड़ के नाम से जाना जाता है। खैर के पेड़ में बहुत सारे औषधीय गुण रहते हैं। खैर के पेड़ के तने से कत्था बनता है। कत्था का इस्तेमाल पान में किया जाता है और हमारे देश में पान बहुत ज्यादा प्रसिद्ध है। पान के पत्ते में कत्था लगाया जाता है और इसे चबाया जाता है। इससे मुंह से संबंधित बहुत सारे रोग ठीक हो जाते हैं। 

खैर का पेड़ भारत के जंगलों में आसानी से देखने के लिए मिल जाता है। खैर का पेड़ देखने में बबूल के पेड़ के समान ही रहता है। इसमें छोटे-छोटे कांटे लगे रहते हैं। खैर की पत्तियां बबूल के पेड़ की पत्तियों जैसी रहती हैं। इसकी पत्तियां छोटी-छोटी रहती हैं। खैर के पेड़ का उपयोग बहुत सारे औषधीय कामों में किया जाता है। 

खैर का पेड़ बहुत विशाल रहता है। खैर का पेड़ 9 से 15 मीटर ऊंचा रहता है। इसकी पत्तियां छोटी-छोटी रहती है। इसकी पत्तियां जोड़ो में रहती है। एक जोड़े में करीब 30 पत्तियां देखने के लिए मिलती है। इसकी पत्तियां बबूल की पत्तियों के समान ही रहती हैं। खैर की पत्तियों के पीछे भी छोटे-छोटे कांटे रहते हैं। खैर में सुंदर पीले रंग के छोटे-छोटे फूल खिलते हैं। यह फूल देखने में खूबसूरत लगते हैं। खैर में फल लगते हैं। इसके फल चिकने रहते हैं और इनमें बीज भी पाए जाते हैं। खैर का तना भूरे का होता है। खैर का उपयोग कत्था बनाने के अलावा और भी बहुत सारे कामों में किया जाता है। खैर का उपयोग पूजा के लिए और आयुर्वेदिक औषधि बनाने के लिए किया जाता है। 


कत्था बनाने की विधि या कत्था कैसे बनाया जाता है - Method of making Katha or how to make Katha

कत्था बनाना बहुत ही आसान है। कत्था बहुत बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों में बनाया जाता है, क्योंकि कत्था का बहुत ज्यादा प्रयोग किया जाता है। इसका औषधीय रूप से भी प्रयोग किया जाता है। कत्था का प्रयोग पान में किया जाता है, जिसको सभी लोग बहुत ही रुचि से खाते हैं और आजकल तो बहुत सारे फ्लेवर के अलग-अलग पान मिलते हैं। 

कत्था बनाने के लिए, खैर के पेड़ का एक मोटा तना ले लीजिए। तने की बाहरी छाल को निकाल लीजिए और तने के छोटे-छोटे टुकड़े काट लीजिए। उसके बाद आप इसे पानी में उबाल लो। जब इसका सार निकल जाएगा। तब इसे आप छलनी से छान लीजिए और इसे दो-तीन बार मलमल के कपड़े से छानना है और इसको दोबारा गर्म कीजिए। जब यह गाढ़ा हो जाता है, तो उसे सूखने के लिए रख दीजिए। यह आपका शुद्ध कत्था रहेगा और इसे बनाना बहुत आसान है। गांव में लोग इसे घरों में ही बना लेते हैं। 

आजकल बाजार में आपको कत्था मिल जाता है, तो आप उसे कूटकर उबालकर घर में ही बना सकते हैं। आपको कत्था का पेड़ ढूंढने की जरूरत नहीं पड़ती है। 


खैर की लकड़ी - khair wood

खैर की लकड़ी बहुत मजबूत होती है। खैर की लकड़ी का उपयोग बहुत सारे सामान बनाने के लिए किया जाता है। खैर की लकड़ी का उपयोग दरवाजे की चौखट, दरवाजे, टेबल, कुर्सी बनाने के लिए किया जाता है। खैर की लकड़ी अन्य पेड़ों की तुलना में बहुत अधिक मजबूत रहती है। खैर पेड़ के फायदे के बारे में बहुत सारे लोगों को जानकारी हो गई है, जिससे वन माफिया इन पेड़ों की कटाई बहुत तेजी से कर रहे हैं। जिससे इन पेड़ों की संख्या दिन-ब-दिन घटती जा रही है। खैर के पेड़ को संरक्षण की श्रेणी में रखा गया है, क्योंकि यह पेड़ घटते जा रहे हैं। 

इसलिए हमें खैर वृक्ष का संरक्षण करना चाहिए और हमें ज्यादा से ज्यादा खैर वृक्ष  का रोपण करना चाहिए, जिससे हमें इस महत्वपूर्ण पौधे की कमी ना हो और हम इसका भरपूर उपयोग कर सके। खैर पौधे की लकड़ी और खैर पौधे के सारे भाग बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। 


कत्थे का औषधीय उपयोग - medicinal uses of catech

कत्थे का उपयोग बहुत सारे हैं। कत्था मुंह से लेकर पेट तक की बहुत सारी समस्याओं को ठीक करता है। कत्थे का उपयोग मुंह से संबंधित बहुत सारी समस्याओं में किया जाते हैं। 
  1. दांतो के दर्द में - अगर दांत में दर्द हो रहा हो, तो कत्थे को मंजन में मिलाकर घिसने से दांतों में दर्द नहीं होता है। आप इसका प्रतिदिन प्रयोग कर सकते हैं। 
  2. दांतों में कीड़े लगने की परेशानी - दातों में अगर कीड़े लगते हैं, तो कत्थे को मंजन में मिलाकर किया जा सकता है, जिसमें दांतों में कीड़े नहीं लगते हैं। 
  3. मुंह में छाले होना - कत्थे से मुंह के छाले भी ठीक हो जाते हैं। आप कत्थे को पान के साथ खा सकते हैं या कत्थे का पाउडर अपने छालों में लगा सकते हैं। 
  4. कुष्ठ रोग में कत्थे का प्रयोग - खैर के तने को उबालने से जो सार निकलता है। उस सार को पानी में डालकर नहाने से कुष्ठ रोग जैसे रोग ठीक हो सकते हैं। 
  5. पेट के पाचन के लिए - पेट के पाचन के लिए भी कत्था बहुत उपयोगी है। कत्थे के सेवन से, खाना अच्छी तरह से पच जाता है। 


खैर के पेड़ के औषधीय गुण, महत्व और उपयोग - Medicinal properties, importance and uses of Khair tree

खैर के पेड़ एक उपयोगी औषधीय प्लांट है। खैर वृक्ष जंगलों में आसानी से देखने के लिए मिल जाता है। खैर वृक्ष की छाल, पत्तों, जड़ और इसके बीजों का प्रयोग औषधि के रूप में किया जाता है। खैर की छाल का कसैली होती है। यह रोग रोधी और ज्वरनाशक रहती है। खैर की तासीर ठंडी रहती है। खैर का उपयोग बहुत सारे कार्यों में किया जाता है। खैर वृक्ष का कत्था बनाया जाता है। इसे कत्थे का पेड़ भी कहा जाता है। कत्था ठंडा और पाचक होता है। खैर के पेड़ से गोंद भी निकाली जाती है, जो  औषधि में उपयोग किया जाता है। 


खैर के पेड़ का उपयोग - Khair tree benefits

  1. खैर के पेड़ का उपयोग बहुत सारे कामों में किया जाता है। खैर के पेड़ की लकड़ियों का इस्तेमाल दरवाजे, और खिड़की बनाने में इस्तेमाल होता है। इसकी लकड़ी बहुत मजबूत रहती है। इसलिए इसका इस्तेमाल घर के सामानों को बनाने में किया जाता है। 
  2. खैर का उपयोग चमड़ा उद्योग में भी किया जाता है। 
  3. खैर की पत्तियों में प्रोटीन की मात्रा अधिक रहती है। इसलिए से गाय, और बकरी को खिलाने के लिए दिया जा सकता है और बहुत सारे लोग इसे गाय-बकरी को देते हैं। सूखे क्षेत्रों में यह आराम से हो जाता है। 
  4. खैर का वृक्ष की लकड़ी को जलाने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। 


खैर के पेड़ की औषधीय फायदे - Medicinal benefits of Khair tree

दांतों के रोग के लिए खैर का उपयोग 

दांत में अगर कीड़े लग गए हो, तो इसके लिए खैर की छाल का काढ़ा बनाकर, कुल्ला करने से आराम मिलता है। 

मुंह के छालों में खैर की छाल का प्रयोग

मुंह के छालों में खैर से लाभ मिलता है। आप खैर की छाल का काढ़ा बनाकर कुल्ला करते हैं या छाल का काढ़ा बनाकर, गरारे करने से छाले और सूजन कम होती है। खैर के सार को मुंह में रखकर चूसते हैं, तो इससे फायदा मिलता है। 

खांसी में खैर की लकड़ी से इलाज 

खांसी में खैर की लकड़ी से खांसी को दूर भगाया जा सकता है। खैर की लकड़ी को जलाकर इसका धुआ सुघने से खांसी में राहत मिलती है। 

सफेद पानी में खैर का उपयोग 

सफेद पानी में खैर के पेड़ का उपयोग किया जा सकता है। खैर की छाल का काढ़ा बनाकर योनि धोने से सफेद पानी की समस्या दूर होती है। 

गठिया के इलाज में खैर का उपयोग 

गठिया के इलाज में खेर का उपयोग किया जा सकता है। गठिया के इलाज में खैर की जड़ का उपयोग किया जाता है। खैर की जड़ का चूर्ण का सेवन करने से गठिया में लाभ मिलता है। 

कुष्ठ रोग में खैर का उपयोग 

कुष्ठ रोग में खैर की छाल का काढ़ा बनाकर, इसकी छाल के पानी से नहाने से फायदा मिलता है और इसके छाल को पीसकर आप कुष्ठ रोग में भी लगा सकते हैं, जिससे फायदा मिलता है। 


खैर का पेड़ कैसा होता है और खैर के पेड़ की क्या पहचान है - What is Khair tree like and what is the identity of Khair tree

खैर का पेड़ को पहचानना बहुत आसान है। खैर का पेड़ एक जंगली पौधा है। यह बबूल की प्रजाति का पेड़ है और यह बबूल के पेड़ के समान ही रहता है। मगर इसमें थोड़ा सा अंतर रहता है। खैर के पेड़ में आपको कांटे, जो देखने के लिए मिलते हैं। वह छोटे कांटे रहते हैं और इसके काटे इसकी पत्तियों के पीछे भी रहते हैं। खैर के, जो फल रहते हैं। उनमें भी अंतर रहता है। खैर के फल चिकने और लंबे रहते हैं और फल के अंदर बीज रहते हैं। बीजों की संख्या 6 या 8 रहती है। 

खैर का पौधा 15 से 20 फीट तक लंबा रहता है। खैर का पौधा में पीले रंग के छोटे-छोटे फूल लगते हैं, जो बहुत ही सुंदर लगते हैं। खैर का पौधा मुख्य रूप से जंगल के अंदर या सड़कों के किनारे देखने के लिए मिल जाता है। खैर का पौधा गरम प्रदेशों में अच्छी तरह बड़ा होता है। खैर का पौधा मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा इन सभी जगह पर अच्छी तरह से बड़ा होता है। 


खैर का पौधा कैसे उगाया जा सकता है - How to grow Khair plant

खैर का पौधा एक जंगली पौधा है और इसे उगाना बहुत ही आसान है। अगर आपको इसके बीज मिल जाते हैं, तो आप इसे मिट्टी में लगा दीजिए और खैर का पौधा आराम से उग जाता है। यह पौधा गर्म जलवायु में अच्छी तरह फलता फूलता है। इस पौधा को ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं पड़ती है। खैर का पौधा एक दुर्लभ प्रजाति है। यह प्रजाति विलुप्त होने की कगार पर है। इसलिए अब खैर के पौधे को संरक्षण मिला है और खैर के पेड़ की खेती भी की जाती है। 




अशोक वृक्ष
गुंजा का पौधा
भुई आंवला के पेड़
जामुन के पेड़


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

रामघाट चित्रकूट के पास धर्मशाला - Dharamshala near Ramghat Chitrakoot

चित्रकूट में धर्मशाला - Dharamshala in Chitrakoot /  रामघाट के पास धर्मशाला /  चित्रकूट में ठहरने की जगह रामघाट चित्रकूट में एक प्रसिद्ध जगह है। चित्रकूट में बहुत सारी धर्मशालाएं हैं। मगर चित्रकूट में रामघाट के पास जो धर्मशालाएं हैं। वहां पर समय बिताने में बहुत अच्छा लगता है। उन्हीं में से एक धर्मशाला में हम लोगों ने समय बिताया और हमें अच्छा लगा।  राम घाट के किनारे पर आपको बहुत सारे मंदिर देखने के लिए मिलते हैं। यहां पर बहुत सारी धर्मशालाएं भी है, जहां पर आप रुक सकते हैं। हम लोग भी राम घाट के किनारे पर इन्हीं धर्मशाला में रुके थे। धर्मशाला का किराया बहुत ही कम रहा। हमारा एक कमरे का किराया 250 था। जिसमें बाथरूम अटैच नहीं थी। अगर आप बाथरूम अटैच कमरा लेना चाहते हैं, तो उसका किराया यहां पर 400 था। हम जिस धर्मशाला में रुके थे। वह धर्मशाला मंदाकिनी आरती स्थल के सामने ही थी, जिससे हमें मंदाकिनी नदी का खूबसूरत नजारा भी देखने का आनंद मिल ही रहा था।  रामघाट के दोनों तरफ बहुत सारी धर्मशाला है, जिनमें आप जाकर रुक सकते हैं।  हम लोगों का रामघाट के किनारे पर बनी धर्मशाला में रुकने का

मैहर पर्यटन स्थल - Maihar Tourist place | Places to visit in maihar

मैहर के दर्शनीय स्थल - Maihar tourist place in hindi | Maihar tourist places list |  मैहर शारदा देवी मंदिर मैहर में घूमने की जगह  Maihar me ghumne ki jagah मैहर का शारदा मंदिर - M aihar ka sharda mandir मैहर में सबसे प्रसिद्ध शारदा माता जी का मंदिर है। शारदा माता जी का मंदिर पूरे देश में प्रसिद्ध है। इस मंदिर में दर्शन करने के लिए पूरे देश से भक्तगण आते हैं। मंदिर में विशेष कर नवरात्रि के समय बहुत भीड़ रहती है। यहां पर इस टाइम पर मेला भी भरता है। वैसे मंदिर में आप साल के किसी भी समय घूमने के लिए आ सकते हैं। यहां पर हमेशा ही मेले जैसा ही माहौल रहता है। मंदिर एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। मंदिर में पहुंचने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है। मंदिर पर आप रोपवे की मदद से भी पहुंच सकते हैं। मंदिर में आपको शारदा माता के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। मंदिर के परिसर में और भी देवी देवता विराजमान हैं, जिनके आप दर्शन कर सकते हैं। मंदिर से मैहर के चारों तरफ का दृश्य आपको देखने के लिए मिलता है। खूबसूरत पहाड़ देखने के लिए मिलते हैं। आपको मंदिर आकर बहुत अच्छा लगेगा।  नीलकंठ मंदिर और आश्रम मैहर -  Neelkanth Temple

कटनी दर्शनीय स्थल | Katni tourist place in hindi | Tourist places near Katni

कटनी में घूमने वाली जगह | Katni paryatan sthal | Places to visit near Katni |  कटनी जिले के पर्यटन स्थल |  कटनी जिले के दर्शनीय स्थल कटनी जिले के बारे में जानकारी Information about Katni district कटनी मध्य प्रदेश का एक जिला है। कटनी जिलें को मुडवारा के नाम से भी जाना जाता है। कटनी का संभागीय मुख्यालय जबलपुर है। 28 मई 1998 को कटनी को जिलें के रूप में घोषित किया गया है। कटनी में कटनी नदी बहती है, जो पीने के पानी का मुख्य स्त्रोत है। कटनी जिलें में मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा रेलवे जंक्शन है। कटनी रेल्वे जंक्शन में 6 प्लेटफार्म है। यहां पर हमेशा भीड रहती है। कटनी की 8 तहसील कटनी शहर, कटनी ग्रामीण, रीठी, बड़वारा, बहोरीबंद, विजयराघवगढ, ढीमरखेड़ा, बरही है। कटनी जिले की सीमाएं उमरिया, जबलपुर , दमोह, पन्ना, और सतना जिले की सीमाओं को छूती हैं। कटनी जिले में बहुत सारी ऐतिहासिक और प्राकृतिक जगह है, जहां पर आप जाकर अच्छा समय बिता सकते हैं।  Katni places to visit कटनी में घूमने की जगहें जागृति पार्क - Jagriti Park Katni जागृति पार्क कटनी शहर का एक दर्शनीय स्थल है।