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मुंगेली जिले के पर्यटन स्थल - Mungeli tourist places

मुंगेली जिले के दर्शनीय स्थल - Places to visit in Mungeli / मुंगेली जिले के आस पास घूमने वाली प्रमुख जगह



मुंगेली छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख जिला है। मुंगेली की मुख्य नदी आगर है। यह नदी मुंगेली शहर के बीचोबीच से बहती है। मुंगेली जिला छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से करीब 100 किलोमीटर दूर है। मुंगेली जिले मे प्राकृतिक संपदा की भरमार है। यहां पर अचानकमार वन्य जीव अभयारण्य स्थित है। मुंगेली जिले में घूमने के लिए बहुत सारी जगह है। चलिए जानते हैं - मुंगेली जिले के दर्शनीय स्थलों के बारे में

मुंगेली जिले में घूमने की जगह - Mungeli jile mein ghumne ki jagah


राजीव गांधी बांध मुंगेली - Rajiv Gandhi Dam Mungeli

राजीव गांधी बांध मुंगेली जिले का एक मुख्य पर्यटन आकर्षण है। गांधी बांध को खुड़िया जलाशय भी कहा जाता है। यह जलाशय खुड़िया गांव के निकट में स्थित है। इसलिए इस खुड़िया जलाशय कहा जाता है। यह बांध अचानकमार वन्य जीव अभयारण्य के बफर जोन के एरिया में स्थित है। यह बांध चारों तरफ से खूबसूरत पहाड़ियों और जंगल से घिरा हुआ है। यहां पर आकर पिकनिक का मजा लिया जा सकता है। यहां पर फैमिली वालों और दोस्तों के साथ घूमने के लिए आया जा सकता है। 
खुड़िया बांध में अगर बरसात के समय आते हैं, तो बहुत मजा आता है। क्योंकि बरसात के समय बांध का पानी ओवरफ्लो होता है और यहां पर सुंदर झरना बनता है। यहां पर बड़ी-बड़ी चट्टानें हैं, जिनके बीच से बांध का पानी बहता है, जो बहुत ही सुंदर लगता है। यहां पर आकर बहुत अच्छा समय बिताया जा सकता है। वैसे इस बांध में घूमने के लिए कभी भी आ जा सकता है। यहां पर रेस्ट हाउस भी बना हुआ है। 
राजीव गांधी बांध या खुड़िया बांध छत्तीसगढ़ जिले का सबसे पुराना बांध है। इस बांध का निर्माण ब्रिटिश गवर्नमेंट के द्वारा किया गया था। इस बांध का कंस्ट्रक्शन 1926 में शुरू किया गया था और यह बांध 1931 में बनकर तैयार हो गया था। इस बांध के पानी का उपयोग मुंगेली जिले में सिंचाई के लिए किया जाता है। इस बांध का मुख्य उद्देश सिंचाई था। इस बांध से नहर निकली है, जिसके द्वारा मुंगेली जिले में सिंचाई की जाती है। यह बांध मुंगेली जिले से करीब 34  किलोमीटर दूर है। यहां पर आकर आप आकर प्राकृतिक वातावरण में इंजॉय कर सकते हैं। 


अचानकमार वन्य जीव अभयारण्य मुंगेली - Achanakmar Wildlife Sanctuary Mungeli

अचानकमार वन्य जीव अभयारण्य मुंगेली जिले का एक मुख्य पर्यटन स्थल है। यह एक टाइगर रिजर्व है। यहां पर जंगली जानवर और जंगल का सुंदर दृश्य देखने के लिए मिलता है। यहां पर नदी, पहाड़, झरने और जंगल देखने के लिए मिलते हैं। यहां पर आकर बहुत अच्छा लगता है। चारों तरफ हरियाली रहती है। बरसात के समय यह जगह बहुत ही आकर्षक लगती है। यहां पर आप सफारी का मजा भी ले सकते हैं। आप जीप से सफारी के लिए जा सकते हैं। 
अचानकमार अभ्यारण की स्थापना 1975 में की गई थी और इसे 2009 में टाइगर रिजर्व घोषित कर दिया गया था। यह अमरकंटक बायोस्फीयर रिजर्व का हिस्सा है। आप यहां पर आकर अपना पूरा एक दिन बिता सकते हैं और आपको यहां पर बहुत मजा आएगा। यहां पर आप ट्रैकिंग का मजा ले सकते हैं। यहां पर आप बहुत सारे विभिन्न प्रकार के पेड़ पौधे देख सकते हैं। यहां पर आदिवासी जनजाति रहती है। उनका रहन-सहन भी आप देख सकते हैं। 
अचानकमार वन्य जीव अभयारण्य में आपको बहुत सारे जंगली जानवर देखने के लिए मिलेंगे। यहां पर आपको बाघ, चीता, चीतल, हाइना, जंगली शेर, जंगली भालू, नीलगाय, चिंकारा, कृष्ण मृग, बंदर, सूअर देखने के लिए मिल जाते हैं। यहां पर अनेक प्रकार की पंछी आपको देखने के लिए मिल जाते हैं। यहां पर बहुत सारे जलीय जीव भी देखने के लिए मिलते हैं। यह जगह बहुत सुंदर है और यहां पर आकर आप अपना बहुत अच्छा समय बिता सकते हैं। 


मां भुवनेश्वरी मंदिर मुंगेली - Maa Bhuvaneshwari Temple Mungeli

मां भुवनेश्वरी मंदिर मुंगेली जिले का एक मुख्य धार्मिक स्थल है। यह मंदिर मां भुवनेश्वरी को समर्पित है। यह मंदिर ऊंची पहाड़ी पर बना हुआ है। इस पहाड़ी तक जाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है। यह मंदिर जंगल में स्थित है। यहां पर आकर बहुत अच्छा लगता है। यहां पर गांव वाला एरिया देखने के लिए मिलता है। यह मंदिर बहुत सुंदर है। गर्भगृह में मां भुवनेश्वरी की दर्शन करने के लिए मिलते हैं। यहां पर और भी देवी देवताओं के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। यहां पर शिव भगवान जी की अर्धनारीश्वर मूर्ति देखने के लिए मिलती है। यह जगह प्राकृतिक परिवेश में स्थित है। इसलिए यहां कर बहुत अच्छा लगता है। मां भुवनेश्वरी का मंदिर मुंगेली जिले में खुड़िया जलाशय से थोड़ी ही दूरी पर स्थित है। आप यहां पर आ कर अच्छा समय बिता सकते हैं। 


मां बम्हन दाई मंदिर मुंगेली - Maa Bamhan Dai Mandir Mungeli

मां बम्हन दाई मंदिर मुंगेली का एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर पंडरिया में स्थित है। यह मंदिर एक ऊंची पहाड़ी पर बना हुआ है और मंदिर बहुत सुंदर है। मंदिर के गर्भगृह में मां बम्हन के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। उनकी प्रतिमा बहुत ही आकर्षक लगती है। मंदिर में जाने के लिए सीढ़ियां हैं। यह मंदिर ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। इसलिए यहां तक जाते-जाते थकान होने लगती है। आप अपने साथ पानी जरूर रखें। यहां पर आप घूमने के लिए आ सकते हैं और यहां से चारों तरफ का सुंदर दृश्य देखने के लिए मिलता है, जो बहुत ही आकर्षक रहता है। यह मंदिर मुंगेली से करीब 41 किलोमीटर दूर है। 


मदकू द्वीप मुंगेली - Madaku Island Mungeli

मदकू द्वीप मुंगेली का प्रमुख पर्यटन स्थल है। यह द्वीप शिवनाथ नदी के बीच में बना हुआ है। इस द्वीप में बहुत सारे प्राचीन मंदिर और प्राचीन मूर्तियां मिली है। इस द्वीप में माण्डूक्य ऋषि की तपोभूमि है। यहां पर माण्डूक्य ऋषि की मूर्ति भी देखने के लिए मिलती है। यह द्वीप शिवनाथ नदी के बीच में बना हुआ है, जिस के कारण शिवनाथ नदी दो धाराओं में बहती है। शिवनाथ नदी का यहां पर बहुत सुंदर स्वरूप देखने के लिए मिलता है। 
मदकू द्वीप में आप घूमने के लिए आ सकते हैं। यहां पर परिवार के साथ पिकनिक मनाने के लिए आया जा सकता है। यहां पर शिव मंदिर देखने के लिए मिलता है। यहां पर प्राचीन शिलालेख भी पाया गया है, जो 10वीं और 11वीं शताब्दी का है। यहां पर बहुत सारी मूर्तियां है। यहां पर बहुत सारी प्राचीन मूर्तियों को खुदाई करके निकाला गया है। इनमें से गणेश जी की नृत्य करती हुई प्रतिमा देखने के लिए मिलती है, जो बहुत ही अद्भुत है। यहां पर आ कर बहुत अच्छा लगता है। मदकू द्वीप मुंगेली से करीब 50 किलोमीटर दूर होगा। इस द्वीप में जाने के लिए पुल बना हुआ है। 


शिव घाट मुंगेली - Shiv Ghat Mungeli

शिव घाट मुंगेली का एक धार्मिक स्थल है। यह जगह मुंगेली में विकासखंड लोरमी में स्थित है। यहां पर आ कर बहुत अच्छा लगता है। यहां पर शिव घाट के किनारे मनियारी नदी बहती है। मनियारी नदी का यहां पर बहुत सुंदर दृश्य देखने के लिए मिलता है। यहां पर लोग आकर मनियारी नदी में स्नान करते हैं। यहां पर शिव मंदिर बना हुआ है, जो बहुत ही सुंदर है। यह मंदिर बहुत प्राचीन है। यह मंदिर करीब 300 साल पुराना है। यहां पर संक्रांति के समय मेला लगता है। इस मेले में आसपास के गांव वाले घूमने के लिए आते हैं। इस मेले में तरह-तरह की दुकानें लगती है। यह जगह बहुत प्रसिद्ध है और यहां पर आकर बहुत अच्छा लगता है। 


खर्राघाट मुंगेली - Kharraghat Mungeli

खर्राघाट मुंगेली जिले का एक सुंदर स्थल है। यह आगर नदी के किनारे बना हुआ एक घाट है। आगर नदी मुंगेली जिले के बीच से बहती है। यहां पर शिव मंदिर भी बना हुआ है। यह मंदिर भी बहुत सुंदर है। यहां पर संतोषी माता का मंदिर और हनुमान जी का मंदिर देखने के लिए मिलता है। यहां पर साल में एक बार महाशिवरात्रि के समय विशाल मेला लगता है, जिसमें आसपास जिले के लोग आते हैं। यह जगह मुख्य मुंगेली जिले में स्थित है। यहां पर आकर आप घूम सकते हैं और आपको यहां पर बहुत अच्छा लगेगा। 


भारत माता मंदिर मुंगेली - Bharat Mata Mandir Mungeli

भारत माता मंदिर मुंगेली शहर का एक सुंदर पर्यटन स्थल है।  यह मंदिर भारत माता को समर्पित है। इस मंदिर में भारत माता की प्रतिमा देखने के लिए मिलती है, जो बहुत सुंदर है। इस मंदिर में कृष्ण भगवान जी की प्रतिमा देखने के लिए मिलती हैं। आप जब भी मुंगेली आते हैं, तो भारत माता मंदिर घूम सकते हैं। 


अमर टापू मोतीमपुरा मुंगेली - Amar Tapu Motimpura Mungeli

अमर टापू मुंगेली जिले का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। अमर टापू में गुरु घासीदास जी का सुंदर मंदिर बना हुआ है। अमर टापू आगर नदी के बीच में एक टापू है। इस टापू में गुरु घासीदास जी का मंदिर बना हुआ है। यह मंदिर बहुत सुंदर है और बहुत बड़ा है। यहां पर आप घूमने के लिए आ सकते हैं। यह मंदिर मुंगेली जिले के मोतीमपुरा में बना हुआ है। यहां पर हर वर्ष दिसंबर के महीने में मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें बहुत दूर-दूर से लोग घूमने के लिए आते हैं। इस मंदिर का, जो प्रवेश द्वार है। वह बहुत ही सुंदर है और मंदिर भी बहुत ही सुंदर है। आगर नदी का दृश्य भी यहां पर शानदार रहता है। आप यहां पर मेले के समय आएंगे, तो आपको यहां पर ज्यादा मजा आएगा। क्योंकि यहां पर बहुत सारी दुकानें लगती हैं और यहां पर बहुत सारे लोग भी आते हैं। 


सेतगंगा मुंगेली - setganga mungeli

सेतगंगा मुंगेली का एक धार्मिक स्थल है। यहां पर एक प्राचीन कुंड देखने के लिए मिलता है। इस कुंड को सेतगंगा के नाम से जाना जाता है, क्योंकि इस कुंड का पानी गंगा मैया के पानी के समान पवित्र, शीतल और शुद्ध है। यहां पर राम भगवान जी का प्राचीन मंदिर देखने के लिए मिलता है। इस मंदिर का निर्माण फणीनागवंशी राजा के द्वारा किया गया था। यह मंदिर 10वीं और 11वीं शताब्दी में बनाया गया है। यहां पर माता सीता, श्री राम जी की मूर्ति विराजमान है। यहां पर हर साल माघ पूर्णिमा में मेले का आयोजन किया जाता है। कुंड का पानी पवित्र है। कुंड में नहाना मना है। यहां पर आकर बहुत अच्छा लगता है और बहुत शांति मिलती है। सेतगंगा मुंगेली से पंडरिया जाने वाले राष्ट्रीय मार्ग पर स्थित है। यहां पर गाड़ी और बाइक से पहुंचा जा सकता है। 




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