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रालामंडल अभयारण्य इंदौर - Ralamandal Sanctuary Indore

रालामंडल वन्यजीव अभयारण्य इंदौर 

 Ralamandal Wildlife Sanctuary Indore



रालामंडल वन्यजीव अभयारण्य इंदौर की एक बहुत ही बढ़िया जगह है। यहां पर, जो भी प्राकृतिक प्रेमी है, उसके लिए यह जगह बिल्कुल परफेक्ट है। रालामंडल वन्यजीव अभ्यारण में जंगल का परिदृश्य देखने के लिए मिलता है। यहां पर हरे भरे पेड़, ऊंची पहाड़ी और प्राचीन इमारत देखने के लिए मिलती है। यहां पर बहुत सारे जंगली जानवर भी हैं। हम लोग भी यहां पर घूमने के लिए गए थे। मगर यहां पर घूमने के लिए आप लोग जाए, तो थोड़ा ज्यादा समय निकाल कर जाएं। यह वन्यजीव अभ्यारण है। यहां पर बहुत सारे जंगली जानवर देखने के लिए मिल जाते हैं। यहां पर ट्रैकिंग के लिए बहुत अच्छा ट्रेक बनाया गया है, जहां से आप ट्रैकिंग करके पहाड़ी के सबसे ऊपरी सिरे पर पहुंचते हैं और वहां पर एक शिकारगाह देखने के लिए मिलती है, जो बहुत ही सुंदर है। यहां से चारों तरफ का दृश्य देखने के लिए मिलता है। रालामंडल अभ्यारण बहुत बड़ी क्षेत्र में फैला हुआ है। हम लोग भी अपने इंदौर के सफर में, रालामंडल अभ्यारण पर घूमने के लिए गए थे। हम लोग ओमकालेश्वर घूमने के लिए जा रहे थे और हम लोग रालामंडल भी घूमने चले गए। 


हमारी यात्रा में हम लोग इंदौर में रुके थे। इंदौर शहर में बहुत सुंदर सुंदर जगह हैं। मगर हम लोगों के पास बहुत कम समय था। इसलिए हम लोग इन जगहों में नहीं जा पाए थे। मगर हम लोगों को रालामंडल घूमने का मौका मिला और हम लोगों ने सोचा, कि चलो रालामंडल अभ्यारण तो घूम के आया ही जाए। हम लोगों का प्लेन इंदौर से ओम्कारेश्वर जाने का था। ओम्कारेश्वर इंदौर से करीब 70 किलोमीटर दूर होगा। हम लोग इंदौर में अन्नपूर्णा मंदिर के पास रुके थे। अन्नपूर्णा मंदिर कि हम लोग दर्शन नहीं कर पाए। बाहर से ही हम लोगों ने इस मंदिर को देखा। उसके बाद हम लोग अपनी ओमकारेश्वर यात्रा में निकले। 


ओमकारेश्वर जाने वाले रास्ते में हम लोगों को बिलावली झील देखने के लिए मिली। बिलावली झील इंदौर शहर की सबसे सुंदर झील है। यह झील बहुत बड़ी झील है। यह झील इंदौर शहर में ओमकारेश्वर जाने वाले मुख्य सड़क पर स्थित है। मगर हम लोगों को ओमकारेश्वर जाना था। इसलिए हम लोग इस झील में नहीं रुके। हम लोगों ने दूर से ही इस झील को देखा और आगे बढ़े। आगे चलकर हमें रालामंडल अभ्यारण जाने के लिए बोर्ड दिखाई दिया, तो हम लोग ने सोचा पहले रालामंडल चलते हैं। उसके बाद ओमकारेश्वर जाया जाएगा और हम लोग रालामंडल की तरफ मुड़ गए। 


हम लोग रालामंडल अभ्यारण जाने के लिए, तेजाजी महाराणा प्रताप ओवरब्रिज या तेजाजी नगर ब्रिज के पास से उल्टे हाथ की तरफ मुड़ गए। थोड़ा दूर आगे जाकर हम लोगों को एक और रालामंडल अभ्यारण का बोर्ड देखने के लिए मिला। हम लोग डायरेक्शन को फॉलो करते हुए, रालामंडल अभ्यारण पहुंच गए। अभ्यारण में जाने के लिए सड़क अच्छी थी। यह मुख्य हाईवे सड़क से करीब 2 या 3 किलोमीटर अंदर होगा। यहां पर गाड़ी और कार से आराम से पहुंचा जा सकता है और सबसे पहले यहां पर पहुंचकर टिकट लेनी पड़ती है। 


हम लोगों ने यहां पहुंचकर टिकट लिया। यहां एक व्यक्ति की टिकट 20 रूपए का था। हम लोग दो व्यक्ति थे, तो हम लोगों के 45 रूपए लगे। बाइक का चार्ज 5 रुपए था। हम लोगों ने ऑनलाइन पेमेंट किया। यहां पर ऑफलाइन भी पेमेंट किया जा सकता है। यहां पर दोनों माध्यम उपलब्ध है, तो आपको, जो भी  अच्छा लगे। आप यहां पर प्रयोग कर सकते हैं। उसके बाद यहां पर अपनी गाड़ी और खुद की इंफॉर्मेशन देनी पड़ती है। यह सारी इनफार्मेशन यहां के, जो कर्मचारी रहते हैं। वह अपने रजिस्टर में एंट्री करते हैं। हम लोगों का एंट्री कार्ड वगैरह यहां पर किसी ने नहीं मांगा था। मगर हमारी गाड़ी का नंबर, मोबाइल नंबर, नाम, यह सभी जानकारी यहां पर रजिस्टर में दर्ज कराई गई थी। इसके अलावा  यहां के जो कर्मचारी रहते हैं। वह आइडेंटी कार्ड भी देख लेते हैं। इसलिए अगर आप यहां जाते हैं, तो अपना पहचान पत्र अपने साथ जरूर रखें। 


यह सभी जानकारी देने के बाद, हम लोग अंदर गए। अंदर यहां पर गाड़ी की पार्किंग के लिए जगह बनाई गई है। पार्किंग के सामने ही एक छोटा सा रेस्टोरेंट बना हुआ है, जहां पर खाने पीने के लिए सामान मिलता है। हम लोगों ने अपनी गाड़ी पार्किंग में खड़ा किया और हम लोग रालामंडल के अंदर प्रवेश किए, तो यहां पर फिर से हम लोगों की टिकट चेक हुई। उसके बाद हम लोग अंदर गए। रालामंडल अभ्यारण में पूरा जाली से कवर कर दिया गया है। 


रालामंडल अभ्यारण के प्रवेश द्वार से शिकारगाह तक पहुंचने का, जो ट्रेक है। वह करीब 2 किलोमीटर का है और 2 किलोमीटर का ट्रैक पहाड़ी से रास्ता है। रालामंडल अभ्यारण में, जहां पर हम लोग की टिकट चेक हुई थी। वहां पर एक जिप्सी खड़े हुई थी और यहां पर पक्की सड़क भी बनी हुई थी। इस पक्की सड़क से जिप्सी के द्वारा रालामंडल के ऊपर शिकारगाह तक जाया जा सकता है और इस जिप्सी का अलग से चार्ज लगता है। इसमें आप सफारी का मजा ले सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति को पैदल नहीं जाना रहता है, तो जिप्सी से जा सकता है या जिसके पास टाइम की कमी रहती है, तो वह सफारी से घूमने का मजा ले सकता है। हम लोगों को इसके बारे में जानकारी नहीं थी। नहीं तो हम लोग सफारी का मजा लेते हैं। मगर कोई बात नहीं है। अगली बार जाएंगे, तो अगली बार जरूर सफारी में घूमेंगे। 


रालामंडल अभ्यारण के गेट में, एंट्री के पास बहुत ही अच्छा डिजाइन बनाया गया है। यह अंडाकार का डिजाइन बना हुआ है और यहां पर अगर चिल्लाते हैं, तो आवाज इको होता है और हम लोग भी यहां पर काफी देर तक चिल्लाए थे और यहां गाना गाए थे। यहां पर बैठने के लिए भी जगह है और बांस के पेड़ लगे हुए हैं। इस जगह को देखने के बाद, हम लोग आगे बढ़े। तो यहां पर गेट लगा हुआ है और जाली लगा हुआ है। गेट को थोड़ा सा बस खोला गया है। यह गेट रात को पूरा तरह से बंद कर दिया जाता होगा। ताकि कोई भी जानवर बाहर ना निकले। हम लोग इस गेट से अंदर गए। हमारे सामने सीधा और कच्चा रास्ता था और आजू-बाजू जंगल था। यहां पर बड़ी बड़ी झाड़ियां और पेड़ पौधे लगे हुए थे। हम लोग रास्ते में चलना स्टार्ट किए। यहां पर कहीं-कहीं पर बैठने के लिए जगह भी बनाई गई है। हम लोग थोड़ी दूरी पैदल गए और इस तरह से हम लोगों को करीब 2 से ढाई किलो मीटर चलना था। हम लोगों की हिम्मत आधे में ही जवाब दे गई और हम लोग यहां पर जंगल के अंदर एक जगह बनाई गई थी। बैठने के लिए वहां पर जाकर बैठ गए। 


वैसे यह जंगल बहुत ही सुंदर था। जंगल में, जो मेन रोड बनी गई है, जो रास्ता शिकारगाह की तरफ गया है। उसी रोड में छोटे-छोटे फूल खिले हुए थे, जो बहुत ही मस्त लग रहे थे। हम लोगों ने वहां पर बहुत सारी फोटो खींची। यहां पर लोग घूमने के लिए आते हैं और यहां पर दारू वगैरह भी लेकर आते हैं। दारू पीने के बाद, बोतल यहीं पर डाल देते हैं। हम लोगों ने वह बोतल भी देखें। मगर ऐसा नहीं करना चाहिए। यह जंगली जानवरों के लिए अच्छा नहीं है। हम लोग थोड़ा देर बैठने के बाद विचार किए, तो हम लोगों को लगा की हम लोग ऊपर तक जाएंगे, तो हम लोगों को पूरा दिन लग जाएगा। इसलिए हम लोग थोड़ी दूर जाकर ही वापस आ गए। 


वैसे आप यहां पर ट्रैकिंग करने के लिए जाते हैं, तो ऊपर तक जा सकते हैं और ऊपर यहां पर शिकारगाह देखने के लिए मिलती है। शिकारगाह बहुत सुंदर है और शिकारगाह का निर्माण यहां के होलकर राजाओं के द्वारा किया गया है। यह शिकारगाह पहाड़ी में सबसे ऊपर बनाई गई है। पहाड़ी से चारों तरफ का सुंदर दृश्य देखने के लिए मिलता है। इस शिकारगाह के अंदर अब संग्रहालय बना दिया गया है, जहां पर तरह-तरह की वस्तुओं का संग्रह देखने के लिए मिलता है। यहां पर मुख्य रूप से होलकर के समय के बहुत सारी वस्तुओं को देखा जा सकता है। यहां पर जानवरों के बारे में भी जानकारी मिल जाती है। हम लोगों को शिकारगाह जाने का मौका नहीं मिला। अगर हम लोग अगली बार इंदौर गए, तो हम लोग यहां पर जरूर ट्रैकिंग करने के लिए जाएंगे और शिकारगाह घूमेंगे। इस तरह हम लोग वापस आ गए और हम लोग अपने ओमकारेश्वर की यात्रा में आगे चल दिए। 


रालामंडल अभयारण्य में प्रवेश के लिए शुल्क (रालामंडल एंट्री फीस) - Fee for entry to Ralamandal Sanctuary (Ralamandal Entry Fee)

रालामंडल अभ्यारण में प्रवेश के लिए शुल्क लिया जाता है। यहां पर भारतीय एक व्यक्ति का 20 रूपए लगता है। विदेशी एक व्यक्ति का 20 रूपए लगता है। डियर सफारी क्षेत्र में घूमने का 50 रूपए लगता है। शिकारगाह घूमने का, शासकीय वाहन से करते हैं, तो 500 रूपए लगता है। शिकारगाह म्यूजियम में प्रवेश का 10 रूपए लगता है। जीवाश्म संग्रहालय में प्रवेश का 5 रूपए लगता है। दो पहिया वाहन की पार्किंग का 5 रूपए लगता है और चार पहिया वाहन पार्किंग का 10 रुपए लगता है। 


रालामंडल अभ्यारण की टाइमिंग - Ralamandal Sanctuary Indore Timing

रालामंडल अभ्यारण में प्रवेश का समय सुबह 7 बजे से शाम के 5 बजे तक है। 


रालामंडल वन्यजीव अभ्यारण का इतिहास और महत्वपूर्ण जानकारी -  History and important information of Ralamandal Wildlife Sanctuary

रालामंडल अभयारण्य वनकक्ष 260 में स्थित है, जिसका क्षेत्रफल 262 है। यह अभयारण्य होलकर महाराज के समय प्रसिद्ध आखेट स्थल था तथा पहाड़ी पर वर्ष 1905 में निर्मित इमारत का उपयोग शिकार कैंप के रूप में किया जाता था। रालामंडल इंदौर शहर से 12 किलोमीटर की दूरी पर इंदौर तिल्लौर मार्ग पर स्थित है। इस अभयारण्य की पहाड़ी की ऊंचाई समुद्र तल से 782 मीटर है। रालामंडल पहाड़ी वर्ष 1954 में आरक्षित वन घोषित की गई तथा वर्ष 1989 में पहाड़ी अभ्यारण घोषित किया गया।  अक्टूबर 1998 में इस अभ्यारण में शाकाहारी वन्य प्राणियों को बाहर से लाकर छोड़ा गया। इस अभ्यारण में 191 विभिन्न वनस्पतिक प्रजातियां यहां की जैव विविधता को रेखांकित करती हैं। लगभग 62 विभिन्न प्रकार के पक्षी भी वर्ष के विभिन्न अवधि में आवागमन करते हैं। अभयारण्य में प्रवेश करते ही 300 मीटर की दूरी पर विश्राम हेतु पगोड़ा का निर्माण किया गया है। पहाड़ी के चढ़ाव के प्रथम पठार पर विश्राम हेतु दो पगोड़ा बनाए गए हैं। पूरे अभ्यारण क्षेत्र को वन्य प्राणी एवं पर्यटक जोन में फेंसिंग से विभाजित किया गया है। अभ्यारण में प्रतिवर्ष लगभग 90000 पर्यटक घूमने के लिए आते हैं। 

रालामंडल अभ्यारण में शिकारगाह तक पैदल चढ़ाई, शिकारगाह से इंदौर शहर का विहंगम दृश्य, जीवाश्म प्रदर्शनी केंद्र एवं प्राकृतिक वातावरण में चीतल, नीलगाय, आदि वन्य प्राणियों का विचरण करते देखना अभ्यारण के प्रमुख आकर्षण के केंद्र हैं। 


रालामंडल अभयारण्य कहां पर स्थित है - Where is Ralamandal Sanctuary

रालामंडल अभयारण्य इंदौर शहर का प्रमुख पर्यटन स्थल है। रालामंडल अभयारण्य देवास बाईपास के पास में स्थित है। यह अभयारण्य हाईवे सड़क से करीब 1 या 2 किलोमीटर अंदर स्थित है। इस अभ्यारण तक पहुंचने के लिए अच्छी सड़क बनी हुई है। यहां पर बाइक और कार से पहुंचा जा सकता है। यहां पर पार्किंग का शुल्क लिया जाता है। यहां पर कार और बाइक का अलग-अलग शुल्क लिया जाता है। 


रालामंडल अभयारण्य इंदौर की फोटो - Photo of Ralamandal Wildlife Sanctuary Indore


रालामंडल अभयारण्य इंदौर - Ralamandal Sanctuary Indore
अभयारण्य के अंदर जाने के लिए गेट 


रालामंडल अभयारण्य इंदौर - Ralamandal Sanctuary Indore
अभयारण्य में बना हुआ इको पॉइंट 


शिकारगाह की तरफ जाने वाला रास्ता 


रालामंडल अभयारण्य इंदौर - Ralamandal Sanctuary Indore
बैठने के लिए जगह



काकडा खो जलप्रपात मांडू

जहाज महल मांडू

लोहानी गुफा मांडू

दरिया खान का मकबरा मांडू


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