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सागर का गढ़पहरा किला और मंदिर - Garhpahra Fort and Temple Sagar

सागर का गढ़पहरा मंदिर और गढ़पहरा का किला सागर मध्य प्रदेश - Gadpehra Fort and Gadpahra Hanuman Temple Sagar


गढ़पहरा का किला सागर जिले का एक ऐतिहासिक किला है। यह किला एक ऊंची पहाड़ी पर बना हुआ है। यहां पर एक प्राचीन मंदिर भी है। यह मंदिर हनुमान जी को समर्पित है। गढ़पहरा को प्राचीन समय में पुराना सागर के नाम से जाना जाता था। प्राचीन समय गढ़पहरा डांगी साम्राज्य की राजधानी थी। यहां पर आपको हनुमान जी का मंदिर देखने के लिए मिलता है। यह मंदिर और किला पहाड़ी के ऊपर बने है। यह पहाड़ी बरसात के समय हरियाली से घिरी रहती है। यहां पर बहुत सारे बंदर भी है। आप अगर यहां पर कुछ भी सामान लेकर जाते हैं, तो संभाल कर रखें। नहीं तो बंदर आपसे सामान छीन सकते हैं। यहां पर किले में भी बहुत सारे बंदर आपको देखने के लिए मिलते हैं। यह किला हनुमान मंदिर के आगे स्थित है। आपको किले तक पैदल जाना पड़ता है। इस किले में एवं हनुमान मंदिर तक जाने के लिए सीढ़ियां है। आप सीढ़ियों से इस किले एवं मंदिर तक जा सकते हैं। 

सागर का गढ़पहरा किला एवं हनुमान मंदिर घूमने के लिए हम लोग सुबह के समय सागर से गढ़पहरा के लिए अपनी गाड़ी से निकले। हम लोग सागर झांसी मार्ग से होते हुए इस किले में पहुंच गए। वैसे हमें दूर से ही गढ़पहरा किला के अवशेष दिख रहे थे। हम लोग जब इस किले के पास पहुंचे। तब पहाड़ी में हम लोगों को इस किले के बुर्ज देखने के लिए मिले। हम लोगों को पहाड़ी में हनुमान जी का मंदिर देखने के लिए मिला। 

सागर जिले का गढ़पहरा मंदिर बहुत प्रसिद्ध है। यह मंदिर बहुत प्राचीन भी है। पहाड़ी के ऊपर हनुमान जी का मंदिर दूर से देखने लगता है। यहां पर पार्किंग के लिए बहुत बड़ा मैदान बना हुआ है और यहां पर बहुत सारे प्रसाद की दुकान देखने के लिए मिलती है। हम लोग गेट के अंदर गाड़ी ले गए और अपनी गाड़ी खड़ी कर दी। हम लोग सुबह के समय गए थे, तो यहां पर प्रसाद की दुकान नहीं खुली थी। मगर एक प्रसाद की दुकान खुल गई थी, तो वहां से हम लोगों ने बंदरों के लिए चने खरीद लिया। मगर हम लोग चने अपने साथ ऊपर लेकर नहीं गए। नहीं तो, बंदर हम लोगों से चने छीन लेते हैं। 

हम लोग जब सीढ़ियों से ऊपर जा रहे थे। तब हम लोगों पर यहां पर बहुत सारे बंदर देखने के लिए मिले। यहां पर कुछ बंदर सो रहे थे। कुछ बंदर अठखेलियां कर रहे थे। कुछ बंदर खाने में जुटे हुए थे। हम लोग को तो बहुत डर लग रहा था। मगर जैसे तैसे करके हम लोग हनुमान जी के मंदिर के पास पहुंच गए। यहां पर गढ़पहरा किला की तरफ जाने के लिए गेट लगा हुआ था। मगर वह बंद था। 

हम लोग सीढ़ियों से ऊपर चढ़कर हनुमान जी के मंदिर पहुंचे। सुबह का समय था। मंदिर का द्वार बंद था। पंडित जी ने हम लोग को कहा कि आप लोग अंदर चले जाइए और भगवान के दर्शन कर लीजिए। हम लोग अंदर गए। भगवान के दर्शन किया। पंडित जी ने हम लोगों को प्रसाद भी दिया। उसके बाद हम लोग बाहर आए और बाहर की फोटो क्लिक किए। यहां पर हमें पहाड़ी में किले के बुर्ज देखने के लिए मिल जाते हैं। पंडित जी से हम लोग ने पूछा कि, हम लोग किले में जा सकते हैं।  पंडित जी ने कहा कि, नहीं आप अभी किले में नहीं जा सकते हैं। जब यहां भीड़ रहती है। तब आप किले में जा सकते हैं। 

हम लोग मंदिर से वापस नीचे आ गए। नीचे हम लोग ने बंदरों के लिए चने खरीदे थे, तो हम लोगों ने चने बंदरों को डाल दिया। यहां पर ढेर सारे बंदर आ गए। हम लोगों ने बंदरों को हाथ से भी चने खिलाए। हम लोगों को हाथ से चने खिलाने में थोड़ा डर लग रहा था। मगर बंदर कुछ नहीं करते हैं। वह आराम से चने ले लेते  हैं। उनको तो खुद डर लगता है। यहां पर नीचे शंकर जी का मंदिर भी है, जो आप देख सकते हैं। हम यह नहीं गए थे। हम लोग ने चाय पिया, पानी पिया। उसके बाद हम लोग अपनी आगे की यात्रा की तरफ बढ़ चले। 


गढ़पहरा किला का शीश महल बहुत प्रसिद्ध है। यह महल अभी भी अच्छी कंडीशन में है और इस महल दो मंजिला है। इस महल में नीचे वाली मंजिल में स्तंभ बने हुए हैं, जो बहुत सुंदर लगते हैं। इन स्तंभों में डिजाइन भी बना है। आप इसकी दूसरी मंजिल में भी जाकर घूम सकते हैं। आप यहां से चारों तरफ का सुंदर व्यू देख सकते हैं। गढ़पहरा किला में सूर्योदय और सूर्यास्त का बहुत ही सुंदर दृश्य देखने के लिए मिलता है। आप सूर्योदय के समय तो यहां पर नहीं आ सकते हैं। मगर आप सूर्यास्त के समय यहां पर रुक कर बहुत अच्छे फोटो क्लिक कर सकते हैं। यहां पर बहुत सारे आपको खंडहर देखने के लिए मिलेंगे। मगर यहां पर ज्यादा अंधेरा होने तक भी रुकना खतरनाक हो सकता है। आप यहां पर रात में रुकने का जोखिम मत ले। दिन में ही यह किला घूमे। 


सागर जिले के गढ़पहरा किला का इतिहास - History of Garhpehra Fort

सागर के गढ़पहरा किला का इतिहास बहुत ही रोचक है। यह किला गोंड साम्राज्य के 52 गढ़ों में से एक था। यहां पर गोंड राजा संग्राम सिंह का शासन हुआ करता था। राजा संग्राम सिंह के बाद यहां पर दांगी राजपूत का शासन हुआ और उन्होंने इस जगह पर कब्जा कर लिया। उन्होंने यहां पर शीश महल का निर्माण करवाया था। दांगी राजपूतों की गढ़पहरा राजधानी थी। यहां पर उन्होंने बहुत सारे निर्माण करवाए थे। 1857 की क्रांति में भी इस किले की  महत्वपूर्ण भूमिका थी। इस किले में राजा मर्दन सिंह का कब्जा था। तब राजा मर्दन सिंह ने अपनी सेना के साथ अंग्रेजों के साथ युद्ध लड़े थे। मगर अंग्रेजों के आधुनिक हथियारों के सामने वो टिक नहीं पाए और उन्हें समर्पण करना पड़ा। 

गढ़पहरा किला के बारे में कहा जाता है कि यह किला भूतिया भी है। इस किले में रात के समय नट और नटिनी की आत्माएं घूमती है। यहां पर बहुत से लोगों ने इन्हें देखने का दावा किया है। यहां पर रात के समय कोई नहीं रहता है। रात के समय यह किला सुनसान रहता है। यहां पर आज भी नट और नटिनी के गीतों की आवाज सुनाई देती है। आसपास रहने वाले लोग आज भी इनके गीत सुनते हैं। गढ़पहरा में राज्य करने वाले राजा ने एक बार नट और नटिनी के करतब देखने के लिए उन्हें अपने दरबार में आमंत्रित किया  और उन्हें एक रस्सी में चलने के लिए कहा। इस रस्सी एक छोर महल से बांधा था और दूसरा पहाड़ी के दूसरे छोर पर बांधा था। नट और नटिनी ने रस्सी में चलने के लिए हामी भर दी। दूसरे दिन नटिनी रस्सी में चलने लगी। नटिनी ने आधा रास्ता भी पार कर लिया था। मगर रानी ने रस्सी को काट दिया, जिससे नटिनी नीचे गिर गई और उसकी मृत्यु हो गई। बेचारा नट इस दुख के कारण उसकी भी मौत हो गई और इन दोनों की आत्माएं अभी तक यहां भटक रही है। इसलिए यहां पर अकेले जाने के लिए मना किया जाता है। जैसे हम लोगों को पंडित जी ने मना किया था। 


गढ़पहरा का मेला - Garhpehra ka mela

गढ़पहरा का किला और हनुमान मंदिर बहुत प्रसिद्ध है। यहां पर आषाढ़ में मेला लगता है। यहां पर आषाढ़ में बहुत बड़ा मेला लगता है और बहुत सारे लोग इस मेले में शामिल होते हैं। यहां पर तरह-तरह की दुकानें लगती है और झूले वगैरह लगते हैं। इस मेले में आसपास के गांव वाले आते हैं। यहां पर गांव वालों के अलावा बहुत दूर-दूर से लोग घूमने के लिए आते हैं। कहा जाता है, कि हनुमान जी का मंदिर बहुत प्राचीन है और हनुमान जी लोगों की इच्छाएं पूरी करते हैं। इसलिए इस मेले में दूर-दूर से लोग हनुमान जी के दर्शन करने के लिए आते हैं। 


गढ़पहरा का किला कहां स्थित है - Where is Garhpehra Fort situated?

गढ़पहरा का किला सागर जिला का एक प्रसिद्ध किला है। यह किला सागर से करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह किला सागर झांसी राजमार्ग में स्थित है। यह किला एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। इस किले तक आप अपनी कार या बाइक से आराम से जा सकते हैं। हाईवे सड़क होने के कारण इस जगह पर जाना बहुत ही आसान है। 


गढ़पहरा का किला और मंदिर की फोटो - Photo of Garhpahra Fort and Temple

सागर का गढ़पहरा किला और मंदिर - Garhpahra Fort and Temple Sagar
गढ़पहरा किला का गेट 

सागर का गढ़पहरा किला और मंदिर - Garhpahra Fort and Temple Sagar
गढ़पहरा किला का बुर्ज 


सागर का गढ़पहरा किला और मंदिर - Garhpahra Fort and Temple Sagar
प्रसिद्ध हनुमान मंदिर 


सागर का गढ़पहरा किला और मंदिर - Garhpahra Fort and Temple Sagar
हनुमान मंदिर से पहाड़ों का दृश्य 


सागर का गढ़पहरा किला और मंदिर - Garhpahra Fort and Temple Sagar
पहाड़ी के ऊपर बना बुर्ज 



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