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कामकंदला किला कटनी - Kamakandla fort | Katni ka kila

बिलहरी का कामकंदला किला - विष्णु वराह मंदिर बिलहरी कटनी

Kamakandla kila Katni - Vishnu Varaha Temple Bilhari Katni

कामकंदला किला कटनी - Kamakandla fort | Katni ka kila
कामकंदला किला बिलहरी कटनी

कामकंदला किला (kamakandla fort) कटनी में स्थित एक प्राचीन किला है। कामकंदला किला (kamakandla fort) कटनी जिलें की बिलहरी में स्थित है। बिलहरी कटनी से 15 किलोमीटर दूर होगा। प्राचीन समय में बिलहरी को पुप्पवती नाम से जाना जाता है। बिलहरी में आपको बहुत सारे प्राचीन खंडहर अवशेष देखने मिलते है। कामकंदला किला (kamakandla fort) में आपको एक बावड़ी और प्राचीन शिव मंदिर देखने मिलता है। 

कामकंदला किला
(kamakandla fort) बिलहरी के बीच में ही स्थित है। किलें के आसपास बहुत सारे घर बने हुए है। आप इस किलें तक अपनी गाडी से आ सकते है। आप इस किलें तक लोगों से पूछ कर आ सकते हैं। किले में गेट लगा रहता है। आप गेट खोलकर अंदर जा सकते है। आपको इस किलें के प्रवेश द्वार पर हनुमान जी की एक भव्य प्रतिमा देखने के लिए मिलती है, जो बहुत ही भव्य लगती है। हनुमान जी की प्रतिमा किलें के प्रवेश द्वार के बाये तरफ स्थापित है। किलें के दायें तरफ आपको एक बावड़ी देखने मिलती है। यह प्राचीन बावड़ी है। बावड़ी में पानी भर हुआ है और इसमें मछलियां भी मौजूद है। बावड़ी का पानी काले रंग का है। बावड़ी में सीढियां बनी हुई है। बावड़ी को करीब से देखने के लिए बावड़ी के अंदर एक प्लेटफार्म पत्थर का बना हुआ है, जहां पर आप सीढियों से जा सकते है। वैसे मुझे इस प्लेटफार्म में जाने से बहुत डर लग रहा था, क्योंकि यह प्लेटफार्म बावड़ी के काले पानी के उपर बना हुआ था। हम लोग बावड़ी घूमने के बाद किलें में गए। किलें में आपको तीन इमारत देखने मिलती है, जिनमें से एक शिव जी का मंदिर है, एक खंडहर इमारत है और एक इमारत बंद थी। खंडहर इमारत में देखने के लिए कुछ नहीं था। यहां पर ऊंची ऊंची दीवारें थी और लंबी-लंबी गैलरी थी। इस इमारत में छत भी नहीं थी। यहां छोटा सा बगीचा बना हुआ था। इस बगीचे की बाउंड्री में, जो पत्थर उपयोग किए गए है। इनमें अलग-अलग तरह की नक्काशी देखने के लिए मिल जाएगी। बगीचे में आपको एक पुराने समय का कोल्हू देखने के लिए मिल जाता है, जिससे पुराने समय में तेल निकाला जाता था। इसमें बैल को बांधा जाता था और बैल को वृत्ताकार परिधि में घुमाया जाता था, जिससे तेल निकाला जाता था। यहां पर बगीचे के बाजू में आपको शिव मंदिर देखने के लिए मिलता है। शिव मंदिर के बाहर और अंदर खूबसूरत नक्काशी की गई है। यह मंदिर काफी ऊंचा है। आप इस मंदिर के अंदर जाते हैं, तो मंदिर में आपको शिव भगवान जी का शिवलिंग की योनि देखने के लिए मिलती है। उपर का शिवलिंग यहां पर नहीं है। शिवलिंग शायद यहाँ के लोगों द्वारा यहां से कहीं और ले जाया जा चुका होगा। आप इस शिवलिंग की परिक्रमा कर सकते है। यहां पर आप दीवारों में खूबसूरत नक्काशी देख सकते हैं। ऊपर छत पर भी पेंटिंग की गई है। वह भी देखने लायक है। पेंटिंग अभी अच्छी अवस्था में है। किसी भी तरह से खराब नहीं हुई है। शिव मंदिर में आपको जगहें जगहें पर लोगों के नाम लिख हुए देखने मिलते है। आप से यह निवेदन है कि अगर आप किसी भी ऐतिहासिक स्मारक में जाए, तो इस तरह का नहीं करें। किसी भी तरह का नाम या जगह का नाम ना लिखें,क्योंकि इससे इन इमारतों की शोभा खराब हो जाती है। शिव मंदिर के बाजू में एक इमारत और है। इस इमारत में ताला लगा था। इस इमारत में प्राचीन मूर्तियां रखी गई है। आप लोग शायद जाएं, तो आपको इस इमारत में देखने के लिए मिल जाए। यहां पर एक वॉचमैन रहता है। आप उससे इस किलें के बारें में जाना सकते है। 

कामकंदला किला
(kamakandla fort) के बारे जानने के लिए आप यहां का दौरा कर सकते है। बिलहरी में कामकंदला किलें (kamakandla fort) के अलावा भी बहुत सारे प्राचीन इमारते है, जो अब खंडहर हो गई है। आप कामकंदला किले (kamakandla fort) से बाहर आते हैं, तो आपको एक टूटा फूटा मंदिर देखने के लिए मिलता है, जो प्राचीन काल का है। अब यहां खंडहर अवस्था में है। इसकी देखरेख भी कोई नहीं कर रहा है।

विष्णु वराह मंदिर  बिलहरी कटनी

 

कामकंदला किला कटनी - Kamakandla fort | Katni ka kila
विष्णु वराह मंदिर बिलहरी कटनी
 कामकंदला किलें (kamakandla fort) से करीब 1 या 2 किलोमीटर की दूरी पर एक विष्णु वराह मंदिर (Vishnu Varaha Temple) है, जो अच्छी अवस्था में है। इस मंदिर जाने का रास्ता बस्ती से होकर जाता है। इसलिए आपको यहां पर पहुॅचने में दिक्कत हो सकती है। विष्णु वराह मंदिर (Vishnu Varaha Temple) के आजू-बाजू बहुत सारे घर बने हुए हैं। इस मंदिर में जाने का रास्ता है। वह भी अच्छा नहीं है। पूरे रास्ते में कचरा है। विष्णु वराह मंदिर (Vishnu Varaha Temple) सुंदर है। यह मंदिर प्राचीन काल का है। इस मंदिर में एक मंडप और एक गर्भग्रह बना हुआ है। यह मंदिर एक चबूतर के उपर बना हुआ है। इस मंदिर का गर्भग्रह बहुत ऊंचा है। मंदिर के मंडप पर आपको एक पत्थर की विष्णु भगवान की वराह अवतार की मूर्ति देखने के लिए मिलती है। यह मूर्ति बहुत सुंदर है। मंदिर के चारों तरफ तार की बाउंड्री बनाई गई है। मंदिर के बाहर आपको बहुत सारे पत्थर की कलाकृतियां देखने मिलेगी, जिसमें विभिन्न नक्काशी बनाई गई है। यहां पर ज्यादा लोग नहीं आते हैं, क्योंकि इस मंदिर के बारें में किसी को पता नहीं है। इस मंदिर के थोड़ी दूरी पर एक तालाब स्थित है, जिसे शायद लक्ष्मण तालाब जाता है। इसका निर्माण भी पुराने समय में किया गया था। बिलहरी में प्राचीन निर्माण आपको देखने के लिए मिल जाते हैं। इस जगह की यात्रा आप कर सकते है। आपको यहां पर आकर अच्छा लगेगा।

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