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चिंतामन गणेश मंदिर सीहोर - Chintaman Ganesh Temple Sehore

श्री चिंतामन सिद्ध गणेश मंदिर सिद्धपुर सीहोर मध्य प्रदेश  Shree Chintaman Siddha Ganesh Mandir Sidhpur Sehore Madhya Pradesh चिंतामन गणेश मंदिर सीहोर जिले का प्रसिद्ध मंदिर है। यह एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर पूरे मध्य प्रदेश में प्रसिद्ध है। यह मंदिर प्राचीन है। मंदिर में गणेश भगवान जी की प्रतिमा विराजमान है। यह प्रतिमा स्वयंभू है। इस प्रतिमा के दर्शन करने के लिए बहुत दूर दूर से लोग आते हैं। कहा जाता है कि मूर्ति के दर्शन करने से मनोकामना पूरी होती है। यह मंदिर राजा विक्रमादित्य के समय स्थापित किया गया था। मराठा शासन के समय इस मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया। यह मंदिर बहुत ही सुंदर लगता है। हम लोग अपनी यात्रा में इस मंदिर में घूमने के लिए गए थे। यहां पर आकर बहुत अच्छा लगता है। बहुत सारे भक्त यहां पर गणेश जी के दर्शन करने के लिए आते हैं। गणेश चतुर्थी में यहां पर बहुत बड़ा पर्व मनाया जाता है।  हम लोग अपनी यात्रा में, सीहोर जिला के चिंतामन गणेश मंदिर भी घूमने के लिए गए थे। हम लोग इंदौर से भोपाल की यात्रा कर रहे थे और हम लोग सीहोर जिला पहुंचे। सीहोर जिला के हमने कुंवर चैन सिंह की छतरी और ह

कुंवर चैन सिंह की छतरी सीहोर - Kunwar Chain Singh ki Chhatri Sehore

  कुंवर चैन सिंह की छतरी और हनुमान फाटक सीहोर  Kunwar Chain Singh ki Chhatri aur Hanuman Phatak Sehore कुंवर चैन सिंह की छतरी सीहोर जिले का एक ऐतिहासिक स्थल है। कुंवर चैन सिंह नरसिंहगढ़ रियासत के राजकुमार थे। वह नरसिंहगढ़ रियासत में शासन किया करते थे। उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी और शहीद हुए थे। कुंवर चैन सिंह ने अंग्रेजों से 1924 में ससस्त्र लड़ाई लड़ी थी। यह लड़ाई 1857 में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से पहले की लड़ाई है। इस लड़ाई के बारे में ज्यादा लोगों को पता नहीं है। मगर यह लड़ाई अंग्रेजों के खिलाफ लड़ी गई सबसे पहली लड़ाई है। जिसमें कुंवर चैन सिंह और उनके साथी हार गए थे और शहीद हो गए। उनकी याद में यहां पर समाधि बनाई गई है। यहां पर, जो भी लोग आते हैं। वह समाधि के दर्शन करते हैं। यहां पर सुंदर छतरी देखने के लिए मिलती है और मजार देखने के लिए मिलती है। कुंवर चैन सिंह की छतरी गांव के अंदर बनी हैं और हम लोगों को यहां पर आने का मौका मिला और हम लोग यहां पर आकर, कुंवर चैन सिंह की छतरी घूमे। हमारी यात्रा में, हम लोग इंदौर से भोपाल के लिए यात्रा कर रहे थे। इंदौर से भोपाल का रास्ता

बेतवा नदी का उद्गम स्थल - Origin Place of Betwa River

बेतवा नदी की पूरी जानकारी  और बेतवा नदी उद्गम स्थल -  Betwa River Information and B etwa River Origin Point बेतवा नदी मध्य प्रदेश  राज्य की  एक मुख्य नदी है। बेतवा नदी का प्राचीन नाम वेत्रवती है। बेतवा नदी यमुना नदी की सहायक नदी है। बेतवा नदी मध्य प्रदेश की पूजनीय नदी है। बेतवा नदी के किनारे बहुत सारे धार्मिक स्थल और तीर्थ स्थल मौजूद है। बेतवा नदी मध्य प्रदेश के भोपाल, विदिशा, गंजबासौदा, बीना कुरवई, ओरछा जैसे जिलों से बहते हुए उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा में बहती है। बेतवा नदी उत्तर प्रदेश के झांसी, चिरगांव, हमीरपुर क्षेत्र में बहती है और हमीरपुर जिले के पास यमुना नदी से मिल जाती है। बेतवा नदी पर बहुत सारे बांध बने हुए हैं। इन बांधों में प्रमुख बांध है - राजघाट बांध, माताटीला बांध, सुकमा दुकमा बांध। यह बांध बहुत प्रसिद्ध है। यह बांध मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा पर बने हुए हैं। यह बांध बहुत सुंदर हैं और बरसात के समय में यह पर्यटन का मुख्य आकर्षण होते हैं।  बेतवा नदी के किनारे कई सारे धार्मिक और प्राकृतिक स्थल मौजूद हैं। विदिशा जिले में बेतवा नदी के किनारे आपको प्र

सीहोर के पर्यटन स्थल - Sehore tourist places / Famous places in Sehore

सीहोर के दर्शनीय स्थल -  Best places to visit in Sehore /  Sehore Attractions / Sehore Picnic Spot सीहोर में घूमने की जगह - P laces to visit in sehore श्री चिंतामन सिद्ध गणेश मंदिर सीहोर -  Shree Chintaman Siddha Ganesh Mandir Sehore श्री चिंतामन सिद्ध गणेश मंदिर मध्य प्रदेश का एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर पूरे मध्यप्रदेश में प्रसिद्ध है। इस मंदिर की प्रसिद्धि का कारण यह है, कि इस मंदिर में मांगी गई हर इच्छाएं पूरी होती है। यह मंदिर मध्यप्रदेश के सीहोर जिले में स्थित है। यह मंदिर सीहोर जिले से करीब 3 किलोमीटर दूर गोपालपुर गांव में स्थित है। यह मंदिर बहुत प्राचीन है। इस मंदिर की स्थापना विक्रमादित्य के द्वारा की गई थी। मंदिर में आपको गणेश जी की भव्य प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। गणेश जी की यह प्रतिमा पृथ्वी से स्वयं उत्पन्न हुई है। इसे विराजमान नहीं किया गया है। लोग यहां पर आकर गणेश जी के दर्शन करते हैं। यहां पर लोग आकर मंदिर के पीछे की तरफ दीवार पर स्वास्तिक की आकृति बनाते हैं और अपनी इच्छा मांगते हैं।  जब लोगों की इच्छाएं पूरी हो जाती है। तो वह दोबारा आकर स्वास्तिक बनाते हैं। यहां