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अर्जुन का पेड़ (Arjuna tree) के बारे में औषधीय गुण की जानकारी

  अर्जुन का पेड़ के फायदे एवं जानकारी Arjun ka ped ke fayde aor jankari अर्जुन का पेड़ का वानस्पतिक या वैज्ञानिक नाम  - टर्मिनेलिया अर्जुन अर्जुन का पेड़ का अंग्रेजी नाम - अर्जुन माइरोबलान  अर्जुन का पेड़ भारत भूमि में पाया जाने वाला एक मुख्य औषधीय पौधा है। यह पौधा पूरे भारत में पाया जाता है। यह एक सदाबहार पेड़ है। यह पेड़ साल भर हरा भरा रहता है। इस पेड़ में एक मोटा तना होता है और घनी शाखाएँ होती है। इस पेड़ की पत्तियां लंबी और पत्तियों का ऊपरी सिरा चिकना रहता है। पतियों का निचला सिरा में शिराएँ साफ दिखती है। अर्जुन को स्थानीय भाषा में और भी बहुत सारे नामों में जाना जाता है। अर्जुन को धनंजय, काहू, कोह आदि नाम से भी जाना जाता है।  अर्जुन का पेड़ जंगलों में नाले और नदियों के किनारे आसानी से देखा जा सकता है। इसके पेड़ को आप घर के आंगन में भी लगा सकते हैं। अर्जुन का वृक्ष 60 से 80 फुट ऊंचा होता है। अर्जुन के पत्ते लंबे होते हैं। इसके पत्ते अमरूद के आकार के समान होते हैं। अर्जुन का तना सफेद रंग का रहता है और चिकना रहता है। अर्जुन के फल देखने में बहुत ही अलग होते हैं। ग्रीष्म ऋतु में अर्जुन क

गुड़हल का फूल (Gudhal ka phool) या अड़हुल के फूल के औषधीय गुणों के बारे में जानकारी

  गुड़हल या अड़हुल के फूल का पौधा  Gudhal ya Arhul ke phool ka paudha गुड़हल के पौधे का अंग्रेजी नाम - शू फ्लावर  गुड़हल के पौधे का वनस्पतिक नाम - हिविस्कस रोजा साइनेंसिस अड़हुल का फूल, एक सुंदर फूल वाला पौधा है।  गुड़हल फूल  का पौधा पूरे भारत देश में पाया जाता है। गुड़हल को अड़हुल के नाम से भी जाना जाता है। गुड़हल के फूल को अड़हुल का फूल भी कहा जाता है। गुड़हल का पौधा बगीचों, बागों, और घरों में देखने के लिए मिल जाता है। गुड़हल का फूल बहुत सुंदर लगता है। गुड़हल के फूल, पत्तियां और जड़ों का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है। गुड़हल के फूल को भगवान श्री गणेश जी को चढ़ाया जाता है। गुड़हल के पौधे की दुनिया भर में 200 से भी ज्यादा किस्म देखने के लिए मिलती है। गुड़हल का पौधा लाल, पीले, नारंगी, काले, सफेद, ऑरेंज कलर में देखने के लिए मिल जाता है।  अड़हुल फूल  बहुत सुंदर होता है। गुड़हल के फूल का आकार मंदिर में बजने वाले घंटे के समान होता है। गुड़हल फूल में पंखुड़ी देखने के लिए मिलती है। गुड़हल के फूल का जननांग फूल के बाहर निकला हुआ रहता है और इसमें पराग लगे रहते हैं, जो बहुत बारीक रहते हैं और

देसी बबूल या देसी कीकर (Desi babul or Desi Kikar) के औषधीय गुण के बारे में जानकारी

  देसी बबूल और विलायती बबूल का  पेड़  Desi Babul aur vilayati Babul Ka  ped बबूल का वैज्ञानिक या वानस्पतिक नाम  - आकाचा निलोतिका  बबूल का अंग्रेजी नाम - ब्लैक बबूल, इंडिया गम अरेबिक  बबूल को स्थानीय भाषा - कीकर  बबूल का पेड़ भारत का एक मुख्य औषधीय पौधा है। बबूल का पेड़ भारत के मरुस्थल भूमि पर पाया जाता है। बबूल का पेड़ कम पानी में भी अच्छी तरह से फूलता और फलता है। इस पौधे को हिंदी में बबूल और कीकर के नाम से जानते हैं। कीकर का पौधा दो प्रकार का रहता है। देसी कीकर और विलायती कीकर। देसी कीकर ज्यादा उपयोगी रहता है। बबूल के पेड़ को कीकर के नाम से भी जाना जाता है। बबूल का पेड़ में कांटे रहते हैं। यह कांटे सफेद रंग के रहते हैं और लंबे रहते हैं। बबूल की डाली में पूरी कांटो से भरी रहती है। इसकी पत्तियां छोटे आकार की रहती हैं और लंबी रहती हैं। एक डंडी में बहुत सारी पत्तियां देखने के लिए मिल जाती है। यह पंक्तियां श्रंखलाबध्द तरीके से लगी रहती है।  बबूल में औषधीय भाग इसका पत्तियां, फली, तना और टहनियां है। बबूल के पेड़ का तना का उपयोग फर्नीचर बनाने में किया जाता है, क्योंकि बबूल की लकड़ी बहुत मजबूत

नीम के पौधे (Neem plant) के औषधीय गुणों के बारे में जानकारी

  नीम या निम्ब का पौधा और नीम के फायदे - Neem or nimb plant and neem benefits नीम का वनस्पतिक या वैज्ञानिक नाम - एजाडिरेकटा इंडिका नीम का अंग्रेजी नाम - मार्गोसा ट्री  नीम का पौधा एक आयुर्वेदिक प्लांट है। नीम के पौधे के बारे में सभी लोगों को जानकारी है। नीम का पौधा कड़वा रहता है। नीम के पौधे में कई रोगों से लड़ने की क्षमता होती है। नीम के पौधे का उपयोग हम बहुत सारे कामों में कर सकते हैं। मगर इस पौधे के औषधीय गुणों के बारे में हमें जानकारी नहीं रहती, जिससे हम इनका उपयोग नहीं कर पाते हैं। नीम का पौधा भारत में सभी जगह देखने के लिए मिल जाता है। नीम लोगों के लिए एक वरदान की तरह है। नीम से बहुत सारे रोगों का उपचार किया जाता है। नीम का पौधा वायु को शुद्ध रखता है। यह जमीन में पानी का संरक्षण भी करता है।  नीम एक मुख्य पौधा है। हम नीम के पौधे के बारे में पहले जानते हैं। नीम का पौधा, भारत के हर घर में या घर के आसपास देखने के लिए मिल ही जाता है। नीम का पौधा सदा हरा भरा रहता है। यह पौधा 15 से 20 फीट ऊंचा होता है। कभी-कभी इस पौधे की हाइट 35 फीट से भी ज्यादा होती है। नीम का पौधा में एक मुख्य तना देखन

पलाश/छेवला/ढाक (Palash/Chhewla/Dhak) के पौधे के औषधीय गुण

  पलाश (छेवला) का पेड़ - Palash (Chhewla) tree पलाश का अंग्रेजी नाम - फ्लेम ऑफ द फॉरेस्ट, जंगल फ्लेम  पलाश का वनस्पतिक नाम - बेतुआ मोनोस्पेर्मा पलाश का पेड़ (palash tree) भारत में पाई जाने वाली एक मुख्य औषधीय पौधा है। पलाश के पेड़ को छेवला, टेशू  (Chewla tree) और ढाक (Dhak tree) के नाम से भी जाना जाता है। पलाश का  झाड़  भारत के जंगलों में आसानी से देखने के लिए मिल जाता है। यह पौधा गांव में आसानी से देखा जा सकता है। मगर शहरों में, इस पौधे को देखना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। पलाश का पौधा (palash tree) बहुत सुंदर रहता है। पलाश का पौधा सबसे सुंदर फरवरी और मार्च के समय लगता है, क्योंकि इस समय इस पौधे में फूल लग जाते हैं। इस पौधे में पत्ते नहीं रहते, सिर्फ फूल ही फूल दिखाई देते हैं, जिससे दूर से देखने में यह पौधा आग की तरह लगता है। पलाश के पौधे में भड़कीले लाल पीले और सफेद रंग के फूल देखने के लिए मिल जाते हैं। पलाश के पेड़ के आयुर्वेदिक लाभ (Palash plant benefits) भी हैं, जो शरीर को फायदे पहुंचाते हैं।  पलाश (Palash) का पेड़ 10 से 15 फीट ऊंचा रहता है। यह पेड़ मध्यम आकार का रहता है। यह झाड़ी न

बेल का पौधे (Bael plant) के औषधीय गुण के बारे में जानकारी

  बेल (बिल्व) का पौधा - Bel (Bilva) plant  बेल का अंग्रेजी नाम - वुड एप्पल  बेल का वानस्पतिक नाम - एग्ले मार्मेलोस कोरेआ एक्स रौक्स  बेल एक मुख्य औषधीय पौधा है। बेल भारत में हर जगह मिलता है। बेल का पौधा धार्मिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। बेलपत्री शिव भगवान जी की प्रिय है और लोग इसे शिव भगवान जी को चढ़ाते हैं। बेल पत्री को महाशिवरात्रि और सावन सोमवार के समय धड़ल्ले से बेचा जाता है और इसे खूब पैसा कमाया जाता है। बेल का फल औषधि रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह शरीर के रोग को ठीक करता है। बेल के औषधीय गुणों के बारे में लोगों को जानकारी नहीं है। मगर बेल के धार्मिक महत्व के बारे में सभी लोगों को पता है और सभी लोग बेल पत्री का उपयोग करते हैं। इस ब्लॉग के माध्यम से हम बेल के पौधे और उसके औषधीय गुणों के बारे में जानकारी देने वाले हैं।  बेल का पौधा 15 से 25 फीट ऊंचा होता है। बेल के पौधे में कांटे लगे होते हैं। बेल का पौधा भारत में सभी जगह पाया जाता है। बेल का पौधा घरों में और जंगलों में आराम से देखने के लिए मिल जाता है। जंगल में, जो बेल का पौधा पाया जाता है। उसके बेल छोटे-छोटे रहते हैं और घरों में

अपामार्ग/लटजीरा/चिरचिटा (Apamarga / Latjira / Chirchita) के औषधि गुण के बारे में जानकारी

अपामार्ग (चिरचिटा) का पौधा  A pamarga (Chirchita) plant अपामार्ग का वानस्पतिक नाम - एकायरेन्थिस् एस्पेरा  अपामार्ग का अंग्रेजी नाम - वाशरमैन्स प्लान्ट , दी प्रिक्ली-चाफ फ्लॉवर अपामार्ग एक मुख्य औषधीय पौधा है। अपामार्ग का पौधा छोटा सा झाड़ी नुमा होता है। अपामार्ग पौधे को लटजीरा, चिचींडा और चिरचिटा पौधे के नाम से भी जाना जाता है। लटजीरा और चिरचिटा इस पौधे के हिंदी नाम है। इसे गांव और शहरों के अधिकतर इलाकों में इसी नाम से जाना जाता है। यह पौधा बरसात के समय स्वयं उग जाता है। यह जंगली झाड़ी के समान उग जाता है। यह पौधा खाली जमीन में कहीं पर भी उग जाता है। यह पौधा आपने अपने घर के आस-पास मैदान में या रास्ते में जरूर देखा होगा। मगर आप इस पौधे के औषधीय गुण के बारे में नहीं जानते होंगे।  चिरचिटा पौधे में पत्तियां हरी और गोल आकार की होती हैं और नुकीली होती है। चिरचिटा का पौधा दो प्रकार का होता है - हरा अपामार्ग का पौधा और लाल अपामार्ग का पौधा। हरा अपामार्ग का पौधा और लाल अपामार्ग का पौधा दोनों ही उपयोगी है। यह पौधा बरसात में स्वयं उग जाता है और धीरे धीरे बढ़ता है। उसके बाद इस में शीत ऋतु में फूल ए