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Jaipur Trip - Nahargarh Fort -- जयपुर का नाहरगढ़ किला

Nahargarh Fort Jaipur
नाहरगढ़ किला जयपुर



नाहरगढ़ किला जयपुर (Nahargarh Fort Jaipur) का एक प्रसिद्ध किला है। नाहरगढ़ किला (Nahargarh Fort ) पूरे राजस्थान में फेमस है। इस किले को देखने के लिए बहुत सारे पर्यटक आते हैं। नाहरगढ़ किला  (Nahargarh Fort की खूबसूरती निहारने के लिए फिल्मी हस्तियां भी आती है। नाहरगढ़ किला में बहुत सारी शूटिग भी हो चुकी है। नाहरगढ़ किले (Nahargarh Fort ) से आप पूरे शहर का खूबसूरत व्यू देख सकते हैं। नाहरगढ़ किले (Nahargarh Fort में आपके देखने के लिए बहुत सारी जगह है, जहां से आप इसके इतिहास को जान सकते हैं। नाहरगढ़ किले (Nahargarh Fort से आप खूबसूरत सनसेट का नजारा भी देखने मिलता है। 

Jaipur Trip - Nahargarh Fort -- जयपुर का नाहरगढ़ किला

Nahargarh Fort, Jaipur 


हम लोगों का जयपुर में 2 दिन रुकने का प्लान था। पहले दिन हम लोग जयपुर शहर के सभी किले घूमने वाले थे। सबसे पहले हम लोगों ने गाड़ी बुक किया था। गाडी हम लोगों की करीब 1600 रू. बुक किया गया था। हम लोग 6 लोग थे। हम लोगों की गाड़ी हम लोगों के होटल में आ गई। हम लोग नाहरगढ किले (Nahargarh Fort ) की ओर चल पडे। 

जलमहल जयपुर
Jal Mahal Jaipur


जब आप जयपुर से नाहरगढ़ किले (Nahargarh Fort) की तरफ जाते हैं, तो आपको खूबसूरत जल महल भी देखने मिलता है। आप ठंड के टाइम में यहां पर आते हैं, तो आपको यहां पर बहुत सारे प्रवासी पक्षी भी देखने मिलते हैं। जो यहां ठंड के समय आते हैं और यहां पक्षी  आपको दिन के समय देखने मिल जाएंगे। जो बहुत खूबसूरत लगते हैं। आप यहां दिन के समय आते हैं, तो यहां पर आपको एक भी भीड़ नहीं देखने मिलती है। बहुत कम लोग यहां पर रहते हैं। मगर यहां पर शाम के समय बाजार लगता है। जल महल में एक स्ट्रीट बनी हुई है। इस स्ट्रीट में बाजार लगता है, तो यहां पर बहुत ज्यादा भीड़ होती है। शाम के समय में जल महल काफी अच्छा लगता है। क्योंकि इसमें लाइट जलती रहती है। यह महल जगमगाता रहता है। जल महल में जाने की मनाही है। जल महल को आप बाहर से देख सकते हैं। वहां पर जाने की इजाजत नहीं है। जल महल में बहुत खूबसूरत इमारत बनी हुई है। जो पानी में डूबी हुई है जिसको आप दूर से ही देख सकते हैं।

नाहरगढ़ किला पहुंचने का रास्ता
The way to reach Nahargarh Fort


जयपुर में हम लोग पहले नाहरगढ़ किले (Nahargarh Fort) गए। नाहरगढ़ किले (Nahargarh Fort) के रास्ते में आपको जो सड़क देखने मिलती है। वह पूरी घुमावदार सड़क रहती है और इस सड़क में आपको गाड़ी में चलाने में बहुत मजा आएगा।  आप यहां पर अपनी गाड़ी या स्कूटर लेकर भी जा सकते हैं। जयपुर में गाड़ी या स्कूटर आराम से रेन्ट में मिल जाती है। मगर इन  घुमावदार सडक में आपको गाड़ी संभाल कर चलाना होना होता है। यह पूरा पहाड़ी रास्ता है। इस पहाड़ी रास्ते में आपको बहुत सारे मोर देखने मिलते हैं। यहां पर मोर बहुत सारे हैं और नाहरगढ़ के पहाडी रास्ते में घूमते रहते हैं। मोर हमारा राष्ट्रीय पक्षी होता है और यहां पर पूरा समूह देख सकते है। आपको हर जगह यहां पर मोर देखने मिल जाते हैं और यहां पर मोर स्वतंत्रता से घूमते रहते हैं।

Jaipur Trip - Nahargarh Fort -- जयपुर का नाहरगढ़ किला

Nahargarh Fort, Jaipur 

नाहरगढ़ किले (Nahargarh Fort) के पहाड़ी रास्तें से आपको जयपुर शहर का बहुत खूबसूरत व्यू देखने मिलता है। आप इस पहाडी रास्ते से गुजरते हुए नाहरगढ़ किले (Nahargarh Fortएंट्री गेट पहुॅचते है। एंट्री गेट के पहले आपको पर्किग का बहुत बडा स्पेस देखने मिलता है। हम लोग इस किले में जल्दी आ गये थे। इसलिए हम लोगों को यह पर एंट्री गेट के अंदर जाने मिल गया था, नहीं तो हम लोग को एंट्री गेट से पैदल चलना पडता। आपको एंट्री गेट से करीब 1 किमी चलना होता है। हम एंट्री गेट देखने मिल । एंट्री गेट से आप अंदर जाते हैं। एंट्री गेट में आपका गाडी ले जाने का अलग चार्ज लिया जाता है। शायद 100 रू लिया गया था। उसके बाद हम लोग अंदर गए। अंदर आपको गाडी के लिए पर्किग और एक एंट्री गेट और दिखाया देता है। 

यहां पर आपको अपनी गाड़ी पार्क करना है। अगर आप जल्दी आते है तो यहां पर अपनी गाडी पार्क कर सकते है। हम लोगों ने भी यहां पर अपनी गाड़ी पार्क कि, यहां पर आपको खाने के लिए कुछ सामग्रियां मिल जाती है। जिन्हें आप खरीद सकते हैं। मगर यहां पर ये वस्तुए बहुत महंगा मिलता है, तो आप देख लीजिएगा। हम लोग ने यहां पर एक बीही लिया था। यहां पर एक बीही 50 रू. की थी। बीही बड़ी थी, मगर 50 रू. बहुत ज्यादा होता है। इसके अलावा यहां पर हम लोगों को चावल के पापड़ एवं मसाले वाले चने खाने मिले थे। 

आप नाहरगढ़ किले (Nahargarh Fort) में सुबह आते है, तो आपको भीड कम मिलती है। मगर यहां पर दोपहर का बहुत ज्यादा भीड हो जाती है। आप यहां पर दोपहर में आते है तो आपको गाडी पहले वाले एंट्री गेट से बाहर खडी करना होगा और वहां से पैदल आना होगा। 

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Nahargarh Fort Entry gate 


नाहरगढ़ किले (Nahargarh Fort) पर जो एंट्री गेट देखने मिलता है। वह भी पुराने जमाने का  गेट है। जो बहुत शानदार लगता है। हम लोगों ने एंट्री गेट से टिकट लिया। यहां पर टिकट लेना पड़ता है। यहां से आप टिकट लेते हैं। करीब 50 या 30 रू. का टिकट मिलता है। मुझे अभी याद नहीं है। टिकट लेने के बाद आप अंदर प्रवेश करते हैं। आपको यहां पर बहुत सारी चीजें देखने मिलती है। सबसे पहले यहां पर आपको देखने मिलता है। मोम संग्रहालय, मोम संग्रहालय बहुत खूबसूरत संग्रहालय है। इसके बारे में मैं एक अलग लेख लिखूगी। उसके बाद आप अंदर जाते हैं तो यहां पर आपको बहुत ही खूबसूरत किला देखने मिलता है। यहां पर जो किला है वह नाहरगढ़ किले के नाम से प्रसिद्ध है और यहां पर किले से एक दीवार गुजरती है। यहां दीवार आपको पूरा अरावली पर्वत पर देखने मिल जाती है। यह दीवार नाहरगढ किला (Nahargarh Fort ), जयगढ किला (Jaigarh Fortऔर आमेर किले (Amer Fortका घेर हुई है। किले के सामने एक खूबसूरत बावड़ी है। वह भी आप देख सकते हैं। इसके अलावा यहां पर पानी एकत्र करने के लिए एक बड़ी सी कुआं बना है। उसको भी आप देख सकते हैं। इसके अलावा यहां पर और भी बहुत खूबसूरत व्यू  पॉइंट है। जिनकी खूबसूरती आप निहार सकते हैं। आप जब महल के उपरी सिरे में जाते है तो आपको पूरे जयपुर शहर का यह मनोरम दृश्य मिलता है।

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Inside Nahargarh Fort 


नाहरगढ़ किला (Nahargarh Fort) बहुत ही खूबसूरत किला है। आप यहां पर आकर अपनी यात्रा का भरपूर आंनद ले सकते है। आप यहां पर अपने परिवार और दोस्तों के साथ आकर बहुत एजाॅय कर सकते है। 

अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो, तो आप इस लेख को शेयर जरूर करें। अगर आप जयपुर गए हो या आपको नाहरगढ़ किले का अनुभव हो। तो आप अपने विचार हमसे साझा जरूर करें। 

Vijayraghavgarh Fort Katni -- विजयराघव गढ़ किला का इतिहास एवं सम्पूर्ण जानकारी

Vijayraghavgarh Fort Katni 

विजयराघवगढ़ किला 


विजयराघवगढ़ किला (Vijayradhavgarh Fort) कटनी शहर की शान है। यह एक प्राचीन किला है। विजय राघव गढ़ किले में आपको प्राचीन किला देखने मिल जाएगा। विजयराघव गढ़ किले  (Vijayradhavgarh Fort) में आपके देखने के लिए बहुत सारी जगह है, जहां पर आप अपने प्राचीन इतिहास को जान सकते हैं, यहां पर आपको रंग महल, मंदिर, समाधि स्थल, रानी की रसोई, रानी राजा का महल, पुरानी पेटिग, प्राचीन कुआं और भी बहुत सी चीजें आपको यहां देखने मिल जाएंगे।

Vijayraghavgarh Fort Katni
Vijayraghavgarh Fort Katni


विजयराघवगढ़ किले का स्थिाति


विजय राघव गढ़ किला  (Vijayradhavgarh Fortकटनी शहर में स्थित है। कटनी शहर मध्य प्रदेश का एक जिला है। विजयराघवगढ़ कटनी शहर की तहसील एवं नगर पंचायत है। यह किला विजयराघवगढ़ तहसील में स्थित है। यह कटनी शहर से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर होगा, आप यहां पर अपनी गाड़ी से आ सकते हैं। विजय राघव गढ़ किला  (Vijayradhavgarh Fortतक आने के लिए आपको बस भी मिल जाएंगी। यह किला बहुत बड़ा है।

विजयराघवगढ़ किले का जानकारी


विजयराघवगढ़ किले  (Vijayradhavgarh Fortमें आप पहुंचते हैं तो आपको किले के बाहर चारों तरफ घेरे हुए एक गड्ढा दिखाई देगा। इस गड्ढे में पानी भरा हुआ रहता है, पुराने समय में इन गड्ढों में मगरमच्छ एवं जहरीले सांप को रखा जाता था, ताकि कोई भी अगर किले में हमला करता था या किले में घुसने की कोशिश करता था तो उन्हें इन गड्ढों को पार करना उसके लिए मुश्किल था। इससे उन आक्रमणकारी की जान भी जा सकती थी। विजयराघवगढ़ किले  (Vijayradhavgarh Fortके अंदर आप प्रवेश करते हैं, तो आपको बड़ा सा प्रवेश द्वार देखने मिलेगा इस प्रवेश द्वार से आप किले के अंदर प्रवेश करेंगे, तो आपको किले के परिसर में महल देखने मिलेंगे, विजयराघवगढ़ किले  (Vijayradhavgarh Fortका रंगमहल बहुत खूबसूरत है, इसकी बनावट बहुत बढिया है। इस महल में सुंदर सुंदर पेंटिंग है वैसे अब ये पेंटिंग सुंदर नहीं रही है, क्योंकि बहुत से लोगों ने इस पेंटिंग में अपना नाम लिख दिया है और लोग यही करते आ रहे हैं जिससे वह पेंटिंग सुंदर नहीं रही है। मगर इस महल की छत पर भी पेटिंग बनी हुई है। यहां पर आप छत पर पेंटिंग जो देखेंगे उसमें किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ है। यह पेंटिंग बहुत सुंदर है और आप लोगों को वह पेंटिंग अच्छी लगेगी। किले के अंदर आपको बहुत सारे चमगादड़ देखने मिल जाएंगे, जो अंधेरे में रहते हैं, आप इस महल के नीचे आते है तो नीचे भी आप घूम सकते हैं, महल  के नीचे भी घूमने के लिए बना हुआ है। यह महल बहुत खूबसूरत है और यहां पर आपके पिक्चर बहुत अच्छे आती हैं।

Vijayraghavgarh Fort Katni
Vijayraghavgarh Fort Katni

Vijayraghavgarh Fort Katni

Vijayraghavgarh Fort Katni


विजयराघवगढ़ किले  (Vijayradhavgarh Fortके परिसर में आपको घोड़ों को बांधने का स्थान भी देखने मिलेगा, और जब आप मुख्य किले के अंदर जाते हैं तो आपको यहां पर किले के बीच में बहुत बडा आंगन देखने मिलता है, जिसमें आपको समाधि देखने मिलती है, जिसमें सफेद कलर की टाइल्स लगी हुई है, इसके अलावा आपको इस आंगन में मंदिर भी देखने मिल जाता हैं, यहां पर एक कुआं भी स्थित है, जो अब लोहे की राॅड से ढका हुआ है। आप किले के आंगन के बीच से खडे होकर पूरा किला देख सकते है, जो बहुत खूबसूरत है। किले के आंगन के चारों तरफ बरामदे बने हुए हैं, जिनमें खूबसूरत खिड़कियों है, जिनमें  नक्काशी की गई है और जालियां लगी हुई है, जो काफी खूबसूरत है। आप किले में ऊपर चढ़कर भी देख सकते हैं और वैसे यह किला अब काफी जर्जर हालत में है, इसलिए मैं आपको सलाह दूंगी कि आप किले के ऊपर ना चढ़े क्योंकि किले के कई भाग गिर चुके हैं टूटकर और कमजोर हो चुके हैं इसलिए आप किले के ऊपर ना चढ़े हैं यह आपके लिए अच्छा होगा।

इस किले की गवर्नमेंट भी अच्छे से देखभाल नहीं कर रही है तो यह किला काफी जर्जर हालत में जाते जा रहा है। इस किले में किसी भी तरह की कोई फैसिलिटी नहीं है। यहां पर ना ही पीने के लिए पानी है और ना ही शौचालय है। यदि आप यहां पर जाते हैं तो पानी वगैरह लेकर जाए और खाना-पीना लेकर जाए क्योंकि किले के आजू-बाजू आपको किसी भी तरह की दुकानें नहीं मिलेगी। इस किले के थोड़ी ही दूरी पर आपको बाजार जरूर देखने मिलेगा, जो विजयराघवगढ़ तहसील में भरता है। जहां से आप खाना पीना या नाश्ता वगैरह कर सकते हैं। आप इस किले में ज्यादा टाइम बिताना चाहते हैं, तो आप खाने पीने का सामान साथ लेकर जाइए। इस किले किसी भी प्रकार की एंट्री फी नहीं लगती है और सिर्फ आपको अपना नाम, पता एवं मोबाइल नंबर  लिखना पड़ता है।

Vijayraghavgarh Fort Katni
Vijayraghavgarh Fort Katni

Vijayraghavgarh Fort Katni


विजय राघव गढ़ किले  (Vijayradhavgarh Fort) का निर्माण 


विजयराघव गढ़ किले  (Vijayradhavgarh Fort) का निर्माण राजा प्रयाग दास जी ने किया था। राजा प्रयाग दास जी मैहर राजा के भाई थे। इस किले के निर्माण 1826 में हुआ था  और कई वर्षों तक इस किले का निर्माण कार्य चला था। इस किले की  खासियत यह है कि यह बहुत सुरक्षित किला है। आपको किले में बहुत ही खूबसूरत पत्थरों पर नक्काशी देखने मिल जाती है। राजा प्रयाग दास के पुत्र सरयू प्रसाद ने अंग्रेजो के खिलाफ लड़कर देश को आजाद कराने में महत्वपूर्ण योगदान निभाया है। राजा सरयू प्रसाद ने अंग्रेजों के खिलाफ 1857 की क्रांति में शामिल हुए थे, जिससे अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और उनसे यह किला छीन लिया।

विजयराघवगढ़ किले आने की उपयुक्त समय


विजय राघव गढ़ किले  (Vijayradhavgarh Fortमें जाने का सबसे उपयुक्त समय ठंड का या बरसात का होता है। गर्मी में यहां तापमान बहुत ज्यादा होत है और बहुत ज्यादा गर्मी पड़ती है तो आपको यहां आने में परेशानी हो सकती है और किला घूमने में परेशानी हो सकती है।  मगर ठंड के समय आप पूरा किला  घूम सकते हैं।विजय राघव गढ़ किला  (Vijayradhavgarh Fort) सुबह 10 बजे से 6 बजे तक खुला रहता है। आप इस टाइम पर किले में आ सकते हैं। किले से लगभग 100 मीटर की दूरी पर पुलिस स्टेशन स्थित है और पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस स्थित है। आप इस किले में आसानी से आ सकते हैं। किले तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क है। इस किले से आप मैहर से, कटनी से, और सतना से आराम से पहुंच सकते हैं। मैहर वाली जो रोड है किले की वह बहुत ज्यादा खराब है, इस रोड में रात को सफर नहीं किया जा सकता है, क्योंकि रोड बहुत ज्यादा खराब है


विजय राघव गढ़ किला  (Vijayradhavgarh Fort) बहुत खूबसूरत और बहुत बड़ा किला है। आप यह किला पूरा घूम सकते हैं, यहां पर करीब आपका एक से 2 घंटा आराम से लग जाएगा। आप यहां पर अपनी फैमिली और फ्रेंड्स  के साथ आ सकते हैं, यह एक अच्छा पिकनिक स्थल है आप पिकनिक मनाने भी आ सकते हैं, यहां पर आपको बहुत अच्छा लगेगा यहां पर ज्यादा भीड़ भाड़ नहीं रहती है।








Madan Mahal Fort or Queen Durgavati Fort

मदन महल का किला, जबलपुर 

Madan Mahal Fort or Queen Durgavati Fort


मदन महल का किला (Madan Mahal Fort) या रानी दुर्गावती का किला (Rani Durgavati Fort) जबलपुर में स्थित है। यह जबलपुर जिले के मदन महल क्षेत्र में स्थित है। इस किले को मदन महल का किला (Madan Mahal Fortया रानी दुर्गावती के किले (Rani Durgavati Fort) के नाम से जाना जाता है। यह किला एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। यहां पर पहुंचने के लिए आपको सीढ़ियां मिलती है और इन सीढ़ियों से चलकर आप इस किले तक पहुॅच सकते है।  

रानी दुर्गावती का किला (Rani Durgavati Fort) आप दिन में कभी भी जा सकते हैं। यहां पर सिक्योरिटी गार्ड रहते है, यह पर एक गार्ड मेल और फीमेल रहते है। यहां पर आप सुबह 10 बजे से शाम को 5 बजे तक जा सकते है। वैसे यह किला बहुत ज्यादा बडा नही है, मगर यह किला बहुत प्राचीन है। 

मदन महल किले (Madan Mahal Fort) का निर्माण लगभग 1100 ई. में राजा मदन सिंह द्वारा करवाया गया था। इस किले का इस्तेमाल सेनाएं के वॉच टावर के रूप में किया जाता था। लेकिन यह किला अब खंडहर में बदल गया है, लेकिन यह पर बहुत से पर्यटक किलें को देखने के लिए आते है। मदन महल किला (Madan Mahal Fort) एक बड़ी ग्रेनाईट चट्टान को तराशकर बनाया गया है। यह किला 500 मीटर की उंचाई पर स्थित है। यह किला राजा की मां रानी दुर्गावती से भी जुड़ा हुआ है, जो कि एक बहादुर गोंड रानी के रूप के जानी जाती है। इस किले का नाम भी रानी दुर्गावती जी के नाम पर रखा गया है। आप यह पर घूमने जाते है, तो आपको यह पर मुख्य किला और नष्ट हुए किले के अवशेष देखने मिल जाते है। यह पर आपको मुख्य किला, अस्तबल, एक तालाब आपके अभी देखने मिलता है। 

Madan Mahal Fort or Queen Durgavati Fort


इस किले तक आप अपने वाहन से जा सकते हैं। यह पहुॅचने के लिए अच्छी रोड हैं। यहां पर ऑटो भी बुक कर के जा सकते हैं। रानी दुर्गावती का किला (Rani Durgavati Fortहम लोग गए थे। मै और मेरी मम्मी इस किले में घूमने गए थे। हम लोग यहां पर गर्मी के समय में गए थे, गर्मी के मौसम में सीढियां चढने में बहुत दिक्कत होती है, क्योंकि गर्मी बहुत ज्यादा रहती है। सीढ़ियां चढ़ने में  हालत खराब हो जाती है। इसलिए मेरे हिसाब से यह पर बरसात के मौसम में जाना बेहतर होगा। यहां पर रास्ते में आपको मंदिर भी देखने मिलता है, जो शंकर जी का मंदिर है। यह मंदिर बडी चट्टानों से बना हुआ है। आप इस मंदिर में भी जा सकते है। आप आगे बढते है, तो आपको यह पर एक छोटी सी झील देखने मिलती है, जिसमे बरसात के मौसम में पानी भर जाता है और गर्मी में सूख जाता है। फिर आपको आगे बढते है, तो आपको यह मदन महल किला (Madan Mahal Fort) देखने मिलता है। किले के उपर जाने के लिए सीढियां बनी हुई है। किले के ऊपर से जबलपुर के चारों तरफ का खूबसूरत नजारा देखने मिलता है। किले के उपर आपको दो कमरे देखने मिलते है, जिनमें नक्काशी की गई है। उसके बाद हम लोग नीचे आकर पूरा किला घूमें। किले के सामने तरफ का कुछ हिस्सा नष्ट हो गया है। यहां पर आप घोडों का अस्तबल देख सकते है, जो अच्छी कडीशन में है। यहां पर एक छोटा सा कुंड बना हुआ है, जिसमें बरसात में पानी भर जाता है। कहा जाता है, कि प्राचीन समय में रानी इस कुंड में स्नान किया करती थी। 

इस किले के बारे में यह भी कहा जाता है कि यह पर बहुत सारे गुप्त रास्तें थें, जिन्हें सरकार ने अब बंद कर दिया है। यहां पर एक गुफा निकली है, जो शायद मंडला के रामनगर किले तक जाती है। सरकार के द्वारा इन गुप्त रास्तों को सील कर दिया गया है। किले की चोटी पर पहुंचने पर आपको जबलपुर शहर का खूबसूरत नजारा दिखाई देगा। अगर आप यह पर बरसात में जाते है, तो चारों तरफ आपको हरियाली देखने मिलती है। यह पर आप अपनी फैमिली और दोस्तों के साथ जा सकते है। 

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अपना समय देने के लिए धन्यवाद


Adegaon Fort and Kalbhairav Temple || आदेगांव का प्रसिध्द कालभैरव जी का मंदिर

आदेगांव का किला एवं काल भैरव जी का मंदिर


आदेगांव का किला (Adegaon Fort) एवं काल भैरव जी का मंदिर (Kaal Bhairav ji ka mandir) एक खूबसूरत पर्यटन स्थल है।  किले के अंदर कालभैरव जी का अतिप्रचीन मंदिर है। आदेगांव का किला (Adegaon Fort) 18 वी शताब्दी में बनाया गया था। इस मंदिर में काले भैरव, बटुक भैरव एवं नाग भैरव की सुंदर प्रतिमाए स्थित है। इस जगह में और भी चमत्कारी वस्तुए मौजूद है। यह पर श्यामलता का वृक्ष स्थित है जो विश्व में सिर्फ दो जगह ही पाया गया है। 

Adegaon Fort and Kalbhairav Temple
Adegaon Fort and Kalbhairav Temple


आदेगांव का किला 


यह किला सिवनी जिले की लखनादौन तहसील से 18 किमी की दूरी पर है। आदेगांव नाम की इस जगह में आप पहुॅचते है तो यह किला आपको दूर से नजर आने लगता है। इस किले तक पहॅुचने का रास्ता आदेगांव की बाजार से होते हुए जाता है। मगर आप अगर रविवार दिन इस किलें में जाते है, इस दिन बाजार के एरिया से न जाये। आप बाजार के बजाय गांव के बाहर से ही एक रोड स्कूल की तरफ से होते हुए इस किले तक जाता है, आप वहां से जा सकते है। आपको किले के पास पहुॅचते है, आप को किला एक पहाड की चोटी पर दिखता है जिस तक पहॅुचने के लिए आपको सीढियों से चढकर जाना होगा। इस किले के उपर पहुॅचकर आपको बहुत अच्छा व्यू देखने मिलता है। आपको आदेगांव के आसपास का नजारा देखने मिल जाता है। इस किला का निर्माण अठारहवीं शताब्दी में मराठा शासनकाल में सैनिकों के लिए ऊंचे पहाड़ पर किया गया था। इस किले को गढी के नाम से भी जाना जाता है। इस किले या गढी की निर्माण की नीवं नागपुर के मराठा शासक रघुजी भोंसले के शासनकाल में 18 वी शताब्दी में उनके गुरू नर्मदा भारती (खड़क भारतीय गोंसाई) ने डाली थे। इन्हें भोसले शासन ने 84 गांव की जागीर दी थी। इनके द्वारा ही किले के भीतर भैरव बाबा के मंदिर का निर्माण किया गया था। वर्तमान में इस किले में आपको इसके चारों तरफ जो बुर्ज बनें हुए है वो देखने मिल जाते है बाकी का किला अब ध्वस्त हो गया है। आदेगांव की उची पहाडी पर इस किले का निर्माण ईंट, पत्थर व चूना- मिट्टी से करवाया था। किले की बाहरी दीवार अभी भी मजबूती से खडी है, सदियाॅ बीत गई मगर इन दीवार को अभी तक कोई भी नुकसान नहीं हुआ है। किले की बाहरी दीवार और बुर्जो को छोडकर बाकी सारी निर्माण अब ध्वस्त हो गया है। आपको किले के अंदर यह ध्वस्त निर्माण देखने मिल जाएगा। यह किला अयातकार आकार का है। किले के पीछे एक बडा तालाब है। इस किले का मुख्य दरवाजा का मुख पूर्व की तरफ है। पश्चिम की तरफ भी एक दरवाजा है जहां पर आप किले के बाहर जा सकते है, यहां पर एक शटर लगा हुआ है, यहां से आप तालाब की तरफ जा सकते है। तालाब की तरफ जाने के लिए यहां सीढियाॅ दी गई है। इस किले में पुरातत्व विभाग द्वारा खुदाई का कार्य भी किया गया था। इस खुदाई के दौरान यह पर कक्ष, बरामदे एवं अन्य निर्माण होने का पता चला। बाद में खुदाई बंद कर दिया गया। इस किले का निर्माण मुख्य रूप से हथियारों व सैनिकों के उपयोग के लिए किया गया था। इस किले के पास ही पहाडी के उपर एक स्कूल बना हुआ है शायद यह प्राइमरी स्कूल है। आप किले के बाहरी क्षेत्र में एक मस्जिद भी देख सकते है। यह पर एक पानी की टंकी का निर्माण भी किया गया है। किले के बाहरी हिस्से से आपको तालाब भी देखने मिल जाता है। किले में भीतर दीवार से सटाकर पत्थर की चीप लगी हुई ताकि आप इस चीप में चलकर पूरा किला घूम सकते है। यह किला मुख्य प्रवेश द्वार से आप जैसे अंदर जाते है आपको काल भैरव मंदिर देखने मिल जाता है। आदेगांव किले (Adegaon Fort) और गांव में मराठा शासक के गुरु नर्मदा भारती का शासन था। गुरू नर्मदा भारती से यह किला शिष्य परम्परा के अंर्तगत उनके शिष्य भैरव भारती, धोकल भारती व दौलत भारती को सौंपा गया, बाद में यह किला ब्रिटिश सरकार ने मराठा शासकों से इस किले का आधिपत्य छीनकर किलें में कब्जा कर लिया था। यह एक प्राचीन किला है इसे देखने के लिए दूर दूर से लोग आते है। 

Adegaon Fort and Kalbhairav Temple
Adegaon Fort and Kalbhairav Temple
Adegaon Fort and Kalbhairav Temple
Adegaon Fort and Kalbhairav Temple

श्री काल भैरव का प्राचीन मंदिर


यह किला काल भैरव की गढी के नाम से भी प्रसिध्द है। किले में भगवान काल भैरव का प्राचीन मंदिर है। लोगों के इस मंदिर के प्रति बहुत श्रध्दा भक्ति है। लोग इस मंदिर के दर्शन करने के लिए दूर दूर से आते है। आदेगांव किले के अंदर विराजमान मंदिर  कालभैरव, नागभैरव व बटुकभैरव विराजमान है जिनकी पूजा सदियों से होती आ रही है। लोग इसे दूसरा काशी के नाम से भी जानते हैं। लोगों का कहना है कि बनारस की तरह यहां पर भगवान कालभैरव की खड़े स्वरूप में प्राचीन प्रतिमा स्थापित है। भैरव अष्टमी के दिन इस किले के भैरव बाबा मंदिर में पूरे सिवनी जिले से एवं अन्य जिलों से भी लोग आते है। 
Adegaon Fort and Kalbhairav Temple
Adegaon Fort and Kalbhairav Temple

दुर्लभ श्यामलता वृक्ष की उपस्थिति


आदेगांव का यह किला अपने प्राचीन इतिहास के साथ भैरव बाबा के मंदिर के लिए प्रसिध्द है। इस किला में आपको एक दुर्लभ वृक्ष देखने मिल जाएगा जो दुनिया में और कहीं आपको देखने नहीं मिलेगा। यहां श्यामलता का वृक्ष किले के पिछले हिस्से में तालाब के किनारे लगा हुआ है। यह वृक्ष इस जगह के अलावा एक जगह और मिलता है। इस दुर्लभ वृक्ष की विशेषता यह है कि वृक्ष की पत्तियों में श्रीराधा कृष्ण का नाम लिखा दिखाई देता है। वृक्ष कब और किसने लगाया यह आज भी लोगों को इस बारें में किसी भी प्रकार की जानकारी नहीं है। 


किले की स्थिति एवं पहुॅचने का रास्ता 


आदेगांव का किला (Adegaon Fortसिवनी जिले में स्थित है। आदेगांव का किला सिवनी जिले की लखानदौन तहसील स्थित है। यह किला लखानदौन तहसील से करीब 18 किमी की दूरी पर स्थित है। आदेगांव का किला सिवनी जिला मुख्यालय से करीब 78 किमी की दूरी पर होगा। यह किला जबलपुर जिले से करीब 103 किमी की दूरी पर होगा। नरसिंहपुर किला से यह किला 60 किमी की दूरी पर स्थित होगा। यह किला मंडला से लगभग 114 किमी और छिदवाडा से लगभग 106 किमी की दूरी पर होगा। यहां पर आप सडक मार्ग से असानी से पहूॅच सकते है। यहां तक जाने के लिए अच्छी सडक बनी हुई है। आपको यह तक आने के लिए अपने वाहन का प्रयोग करना चाहिए क्योकि वहां आपके लिए अच्छा हो सकता है। यहां पर आटो या बस भी चलती होगी पर वो समय समय पर चलती होगा अगर आपको बस या आटो से सफर करना है तो आपको समय का विशेष ध्यान रखना होगा। आपको यहां पहॅुचने के लिए पहले लखनादौन पहॅूचना होगा। लखनादौन से आदेगांव नाम की जगह करीब 18 किमी की दूरी पर है । आप यहां तक आने के लिए श्रीनगर कन्याकुमारी हाईवे मिल जाता है आप हाईवे से आराम से इस जगह तक पहॅूच सकते है। हाईवे रोड अच्छी है मगर जब आप आदेगांव वाली रोड में जाते है तो वहां रोड कहीं कही पर थोडी खराब है। आपको इस किले तक आने के लिए नजदीक रेल्वे स्टेशन घंसौर और नरसिंहपुर का पडता है। नरसिंहपुर और घंसौर रेल्वे स्टेशन इस किले से लगभग 55 किमी की दूरी हो सकते है। 

यह किला एवं भैरव बाबा का मंदिर दोनों ही प्राचीन है। यह किला पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित है। किले को देखने दूर-दूर से लोग आदेगांव पहुंचते हैं। यहां पर भैरव अष्टमी बड़े ही धूमधाम से मनाई जाती है। किले के पीछे श्यामलता का अदुभ्त वृक्ष लगा हुआ है जो पूरी दुनिया में अनोखा है। यहां पर मेले का आयोजन भी किया जाता है जहां पर सुबह के समय शोभायात्रा निकली जाती है। जिसमें बडी संख्या में भक्तगण आते है। 

कामकंदला किला कटनी - Kamakandla fort | Katni ka kila

बिलहरी का कामकंदला किला - विष्णु वराह मंदिर बिलहरी कटनी

Kamakandla kila Katni - Vishnu Varaha Temple Bilhari Katni

कामकंदला किला कटनी - Kamakandla fort | Katni ka kila
कामकंदला किला बिलहरी कटनी

कामकंदला किला (kamakandla fort) कटनी में स्थित एक प्राचीन किला है। कामकंदला किला (kamakandla fort) कटनी जिलें की बिलहरी में स्थित है। बिलहरी कटनी से 15 किलोमीटर दूर होगा। प्राचीन समय में बिलहरी को पुप्पवती नाम से जाना जाता है। बिलहरी में आपको बहुत सारे प्राचीन खंडहर अवशेष देखने मिलते है। कामकंदला किला (kamakandla fort) में आपको एक बावड़ी और प्राचीन शिव मंदिर देखने मिलता है। 

कामकंदला किला
(kamakandla fort) बिलहरी के बीच में ही स्थित है। किलें के आसपास बहुत सारे घर बने हुए है। आप इस किलें तक अपनी गाडी से आ सकते है। आप इस किलें तक लोगों से पूछ कर आ सकते हैं। किले में गेट लगा रहता है। आप गेट खोलकर अंदर जा सकते है। आपको इस किलें के प्रवेश द्वार पर हनुमान जी की एक भव्य प्रतिमा देखने के लिए मिलती है, जो बहुत ही भव्य लगती है। हनुमान जी की प्रतिमा किलें के प्रवेश द्वार के बाये तरफ स्थापित है। किलें के दायें तरफ आपको एक बावड़ी देखने मिलती है। यह प्राचीन बावड़ी है। बावड़ी में पानी भर हुआ है और इसमें मछलियां भी मौजूद है। बावड़ी का पानी काले रंग का है। बावड़ी में सीढियां बनी हुई है। बावड़ी को करीब से देखने के लिए बावड़ी के अंदर एक प्लेटफार्म पत्थर का बना हुआ है, जहां पर आप सीढियों से जा सकते है। वैसे मुझे इस प्लेटफार्म में जाने से बहुत डर लग रहा था, क्योंकि यह प्लेटफार्म बावड़ी के काले पानी के उपर बना हुआ था। हम लोग बावड़ी घूमने के बाद किलें में गए। किलें में आपको तीन इमारत देखने मिलती है, जिनमें से एक शिव जी का मंदिर है, एक खंडहर इमारत है और एक इमारत बंद थी। खंडहर इमारत में देखने के लिए कुछ नहीं था। यहां पर ऊंची ऊंची दीवारें थी और लंबी-लंबी गैलरी थी। इस इमारत में छत भी नहीं थी। यहां छोटा सा बगीचा बना हुआ था। इस बगीचे की बाउंड्री में, जो पत्थर उपयोग किए गए है। इनमें अलग-अलग तरह की नक्काशी देखने के लिए मिल जाएगी। बगीचे में आपको एक पुराने समय का कोल्हू देखने के लिए मिल जाता है, जिससे पुराने समय में तेल निकाला जाता था। इसमें बैल को बांधा जाता था और बैल को वृत्ताकार परिधि में घुमाया जाता था, जिससे तेल निकाला जाता था। यहां पर बगीचे के बाजू में आपको शिव मंदिर देखने के लिए मिलता है। शिव मंदिर के बाहर और अंदर खूबसूरत नक्काशी की गई है। यह मंदिर काफी ऊंचा है। आप इस मंदिर के अंदर जाते हैं, तो मंदिर में आपको शिव भगवान जी का शिवलिंग की योनि देखने के लिए मिलती है। उपर का शिवलिंग यहां पर नहीं है। शिवलिंग शायद यहाँ के लोगों द्वारा यहां से कहीं और ले जाया जा चुका होगा। आप इस शिवलिंग की परिक्रमा कर सकते है। यहां पर आप दीवारों में खूबसूरत नक्काशी देख सकते हैं। ऊपर छत पर भी पेंटिंग की गई है। वह भी देखने लायक है। पेंटिंग अभी अच्छी अवस्था में है। किसी भी तरह से खराब नहीं हुई है। शिव मंदिर में आपको जगहें जगहें पर लोगों के नाम लिख हुए देखने मिलते है। आप से यह निवेदन है कि अगर आप किसी भी ऐतिहासिक स्मारक में जाए, तो इस तरह का नहीं करें। किसी भी तरह का नाम या जगह का नाम ना लिखें,क्योंकि इससे इन इमारतों की शोभा खराब हो जाती है। शिव मंदिर के बाजू में एक इमारत और है। इस इमारत में ताला लगा था। इस इमारत में प्राचीन मूर्तियां रखी गई है। आप लोग शायद जाएं, तो आपको इस इमारत में देखने के लिए मिल जाए। यहां पर एक वॉचमैन रहता है। आप उससे इस किलें के बारें में जाना सकते है। 

कामकंदला किला
(kamakandla fort) के बारे जानने के लिए आप यहां का दौरा कर सकते है। बिलहरी में कामकंदला किलें (kamakandla fort) के अलावा भी बहुत सारे प्राचीन इमारते है, जो अब खंडहर हो गई है। आप कामकंदला किले (kamakandla fort) से बाहर आते हैं, तो आपको एक टूटा फूटा मंदिर देखने के लिए मिलता है, जो प्राचीन काल का है। अब यहां खंडहर अवस्था में है। इसकी देखरेख भी कोई नहीं कर रहा है।

विष्णु वराह मंदिर  बिलहरी कटनी

 

कामकंदला किला कटनी - Kamakandla fort | Katni ka kila
विष्णु वराह मंदिर बिलहरी कटनी
 कामकंदला किलें (kamakandla fort) से करीब 1 या 2 किलोमीटर की दूरी पर एक विष्णु वराह मंदिर (Vishnu Varaha Temple) है, जो अच्छी अवस्था में है। इस मंदिर जाने का रास्ता बस्ती से होकर जाता है। इसलिए आपको यहां पर पहुॅचने में दिक्कत हो सकती है। विष्णु वराह मंदिर (Vishnu Varaha Temple) के आजू-बाजू बहुत सारे घर बने हुए हैं। इस मंदिर में जाने का रास्ता है। वह भी अच्छा नहीं है। पूरे रास्ते में कचरा है। विष्णु वराह मंदिर (Vishnu Varaha Temple) सुंदर है। यह मंदिर प्राचीन काल का है। इस मंदिर में एक मंडप और एक गर्भग्रह बना हुआ है। यह मंदिर एक चबूतर के उपर बना हुआ है। इस मंदिर का गर्भग्रह बहुत ऊंचा है। मंदिर के मंडप पर आपको एक पत्थर की विष्णु भगवान की वराह अवतार की मूर्ति देखने के लिए मिलती है। यह मूर्ति बहुत सुंदर है। मंदिर के चारों तरफ तार की बाउंड्री बनाई गई है। मंदिर के बाहर आपको बहुत सारे पत्थर की कलाकृतियां देखने मिलेगी, जिसमें विभिन्न नक्काशी बनाई गई है। यहां पर ज्यादा लोग नहीं आते हैं, क्योंकि इस मंदिर के बारें में किसी को पता नहीं है। इस मंदिर के थोड़ी दूरी पर एक तालाब स्थित है, जिसे शायद लक्ष्मण तालाब जाता है। इसका निर्माण भी पुराने समय में किया गया था। बिलहरी में प्राचीन निर्माण आपको देखने के लिए मिल जाते हैं। इस जगह की यात्रा आप कर सकते है। आपको यहां पर आकर अच्छा लगेगा।

जैसलमेर का किला (Jaisalmer Fort) की यात्रा

जैसलमेर का किला जैसलमेर जिलें के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। जैसलमेर का किला जैसलमेर जिले में स्थित एक बहुत ही विशाल किला है।  यह किला आपको जैसलमेर शहर के किसी भी हिस्से से देखने मिल जाता है।  यह किला एक पहाड़ी पर स्थित है और यह किला रेलवे स्टेशन से करीब 2 से 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित होगा। आप इस किलें तक पहुॅचने के लिए  ऑटो लेकर आराम से जा सकते हैं। रेल्वे स्टेशन में ही आटों वाले आ जाते है, और आपसे पूछते है, कि आप कहां जाएगें। आप आटो वालों से मोलभाव करके इस किलें तक आ सकते है। 


जैसलमेर का किला (Jaisalmer Fort) की यात्रा

जैसलमेर किले का रानी महल 


इस किलें की स्थापना राव जैसल द्वारा सन ११५६ में की गई थी। यह किला त्रिकूट पहाड़ी पर स्थित है। रेगिस्तान में स्थित होने के कारण इसे सोनार किला या सुनहरा किला भी कहते हैं। इस किला को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर की रूप में शामिल किया गया है। 

जैसलमेर का किलें तक जाने के लिए हम लोग ने भी आटों बुक किया था।  यह किला बहुत बड़ा है और यह दुनिया का पहला लिबिंग फोर्ट है, मतलब आज भी इस किलें में लोग रहते हैं। यह किला बहुत बड़ा है, तो आप इस किलें में जाते है तो आपको एक गाइड जरूर लेकर जाए। आपको किलें के प्रवेश द्वार ही में आपको बहुत सारे गाइड मिल जाते है, जो 100 रू में आपको उपलब्ध हो जाते है। हम लोगों ने गाइड नहीं लिया था, जिससे किलें के बहुत सारी जगह के बारें में हमें जानकारी नहीं मिली। बस हम लोगों ने किलें के अंदर  के कुछ दर्शनीय स्थल ही घूम पायें। इसलिए मैं आपको सलाह देती हूं कि आप जैसलमेर का किलें जाए, तो गाइड लेकर जरूर जाए। गाइड आपको यहां की महत्वपूर्ण जगह के बारे में अच्छे से जानकारी दे पाएगा।

जैसलमेर का किला (Jaisalmer Fort) की यात्रा

जैसलमेर का किला 

जैसलमेर का किला (Jaisalmer Fort) की यात्रा

जैसलमेर का किला 

जैसलमेर का किला (Jaisalmer Fort) की यात्रा

जैसलमेर किले का प्रवेश द्वार 


जैसलमेर का किलें में हम लोगों ने तीन जगह घूमा थे। आप जैसे ही किले में प्रवेश करते हैं। आपको यहां पर पहले बहुत सारी दुकानें देखने मिलती हैं। यह पर आपकों किलें की उची उची दीवारें भी देखने मिलती है। इन दुकानों में आपको ऊंट के चमड़े  की सामान की दुकानें मिलती है, मगर इन सामान के प्राइस बहुत ज्यादा हाई रहते है। इसके अलावा यहां पर आपको राजस्थानी पगड़ी मिल जाएंगी और राजस्थानी ड्रेस मिल जाएंगी। आप इन सब दुकानों को देखते हुए जैसलमेर का किलें में प्रवेश करते है। आपको किले का एक विशाल प्रवेश द्वार देखने मिलेगा और जहां पर छोटे छोटे मंदिर बने हुए हैं। इस किलें में हम लोग पैदल आये थे। मगर आप चाहे तो बाइक से इस किलें के अंदर तक जा सकते है। 

जैसलमेर का किला (Jaisalmer Fort) की यात्रा

जैसलमेर किले का रानी महल 


जैसलमेर का किलें का पहला आकर्षण है रानी महल रानी महल जैसलमेर का किलें के अंदर स्थित है। यह महल बहुत खूबसूरत है। इस महल के चारों तरफ बहुत सारी दुकानें है। कहा जाता है कि राजा रानी रहा करते थे। रानी महल का इतिहास के बारें में हमे जानकारी नहीं है। मगर महल बहुत सुंदर है। आपको यह महल देख कर बहुत अच्छा लगेगा।

इस महल को देखकर आप आगे बढ़ते हैं, तो महल के बाजू से एक संकरा रास्ता गया है। आपको इस रास्तें में आगे बढना है। आप आगे बढ़ते हैं, तो आपको एक खूबसूरत बालकनी देखने मिलती है, जिसकी फोटो खींचने पर 10 रू चार्ज किया जाता है। मगर यह बालकनी बहुत खूबसूरत है। मगर हम पैसे देकर फोटो खींचने में कोई रूचि नहीं थी। आप इस रोड से आगे बढते है, तो आपको यहां पर एक तोप देखने मिलती है, जो पुराने समय की लोहे की एक मजबूत तोप है। यह तोप ऊंचे शिखर पर रखी हुई है और इस जगह से पूरी सिटी का व्यू देखने मिलता है। इस तोप के बारे में हमें कोई जानकारी नहीं है। 

जैसलमेर का किला (Jaisalmer Fort) की यात्रा

जैसलमेर किले की तोप  

जैसलमेर का किला (Jaisalmer Fort) की यात्रा

 जैसलमेर किले से पूरे शहर का दृश्य  


जैसलमेर का किलें में अभी भी इंसान रहते हैं और इस महल में घूमने के लिए आपको तंग गलियों से गुजरना पड़ता है। यहां पर जो सड़कें हैं, वह बहुत ही संकरी हैं और अगर यहां पर आप बीच में फंस जाते है, तो आपको इंतजार करना होता है। हम लोगों के साथ भी ऐसा हीं हुआ था। यह पर हम लोगों के रास्तें में एक गाय कुछ खा रहीं थीं। हम लोग उस जगह से निकल नहीं पाए और हम लोगों को 5 से 10 मिनट का इंतजार करना पडा गया था। 

जैसलमेर का किलें के अंदर ही आपको खाने पीने की वस्तुएं मिल जाती है। इसके अलावा यह पर कपडें भी आपको मिल जाते है। यह पर कपडें और घर को सजाने वालें समान की बहुत सारी दुकानें है। आपको कहीं कहीं पर आपको सुंदर कंगन भी मिलते है। 

जैसलमेर का किला (Jaisalmer Fort) की यात्रा

जैसलमेर किले का जैन मंदिर 


जैसलमेर किले में एक और आकर्षण है जैन मंदिर। जैन मंदिर जैसलमेर किले के अंदर स्थित है। यह बहुत ही खूबसूरत मंदिर है। मंदिर में पत्थर की नक्काशी बहुत ही खूबसूरत है। 

आपको इस किलें में बहुत सारे होटल्स भी मिलेगें। जिनमें जाकर आप इस किलें के शिखर से पूरी सिटी का व्यू देख सकते है और बहुत अच्छा भी रहता है, यहां पर आकर आपको बहुत अच्छा लगेगा।

इस तरह हम लोगों की जैसलमेर किले की यात्रा रही और हम लोगों को यह सफर बहुत यादगार रहेगा।

आप लोगों को यह लेख कैसा लगा आप लोग कमेंट करके हमें जरूर बताइएगा और आप इसे शेयर जरूर कीजिएगा।

अपना समय देने के लिए धन्यवाद

Nahargarh Fort - नाहरगढ़ का किला

नाहरगढ़ का किला

नाहरगढ़ किला हम लोगों ने घुमा और हम लोगों को बहुत मजा आया। नाहरगढ़ किले से आपको जयपुर गुलाबी नगरी का बहुत ही खूबसूरत दृश्य नजर आता है। हम लोगों ने नाहरगढ़ किला सुबह ही घूमने चले गए थे, तो हम लोगों को ज्यादा भीड़ नहीं मिले। हम लोग नाहरगढ़ किला कार बुक करके गए थे, तो कार का सफर बहुत अच्छा रहा। रास्ते में हम लोगों को जल महल देखने मिला और उसके बाद हम लोग अरावली की पर्वत श्रेणियों से होते हुए नाहरगढ़ किले में पहुंचे। 

Nahargarh Fort - नाहरगढ़ का किला

नाहरगढ़ किले का  ऊपर का दृश्य 

नाहरगढ़ किले के लिए प्रवेश शुल्क

Entry fee for Nahargarh Fort


हम लोग नाहरगढ पहुॅचकर प्रवेश द्वार से प्रवेश किया, तो यहां पर आपके वाहन का चार्ज लिया जाता है। उसके बाद दूसरे प्रवेश द्वार पर आपसे प्रवेश शुल्क लिया जाता है। तो सबसे पहले हम लोग नाहरगढ़ के मोम संग्रहालय पहुंचे। मैंने अलग ब्लॉक लिखा है। आप उसे पढ़ सकते हैं। मोम संग्रहालय में घूम कर हम लोग आगे बढ़े। हम लोग नाहरगढ़ किले के तरफ चल दिए। मोम संग्रहालय से नाहरगढ किला ज्यादा दूर नहीं है। 

आप जब नाहरगढ किला पहुॅचते है, तो आपको प्रवेश द्वार से प्रवेश करते हैं, तो आपको यहां पर एंट्री टिकट लेनी पड़ती है। यहां एंट्री टिकट लगभग 30 रू का होता है। उसके बाद आप इस किले में प्रवेश करते हैं। वह एंट्री टिकट आपको अपने पास ही रखना पडता है, क्योंकि आप यहां टिकट नाहरगढ़ किले में प्रवेश के समय दिखाना पडता है। नाहरगढ़ किले के एंट्री गेट पर पुलिस वाले बैठे रहते हैं, और आपकी टिकट चेक करते है। आप एंट्री टिकट अपने पास रखिए। आप नाहरगढ़ किले की तरफ आगे बढ़ते हैं, तो आपको बहुत ही खूबसूरत व्यू देखने मिलता है। पहाड़ियों का खूबसूरत व्यू भी देख सकते हैं। इसके अलावा यहां पर आपको बावली देखने मिलती है, जो आपने देखा होगा "रंग दे बसंती "

Nahargarh Fort - नाहरगढ़ का किला

बावली का दृश्य 


नाहरगढ़ किले का दृश्यNahargarh Fort  view


यह बावली आपको यहां पर देखने मिलती है। यह बहुत बड़ी है और जो इसकी डिजाइन है, बहुत खूबसूरत है और इस बबली का प्रयोग प्राचीन काल में राजा किया करते थे। राजा बावली में कार्यक्रम का आयोजन किया करते थे। लोगों के मनोरंजन के लिए यहां पर राजा अपने रानियों के साथ और अपने मेहमानों के साथ बैठकर कार्यक्रम का आंनद लिया करते है। यहां पर बावली में बैठने के लिए अच्छी व्यवस्था है। बावली में जो सीढ़ियां बनाई हुई है। वह घुमावदार सीढ़ियां हैं। बावली के बीच में पानी भरा हुआ है, जो बहुत खूबसूरत लगता है। यह बावली देखने में बहुत ही खूबसूरत लगती है। 

इसके अलावा आपको नाहरगढ़ किले के बाहर एक बड़ा सा पानी को एकत्र करने के लिए एक टैंक या कुंआ बना है। यह टैंक बावली के आगे और नाहरगढ़ किले सामने है। यहां टैंक बहुत विशाल है। पुराने समय में यह टैक खुला हुआ होगा मगर अभी इस टैंक को ढक दिया गया है। इसमें बरसात का पानी इकट्ठा होता है।

इन सभी चीजों के दर्शन करने के बाद हम लोग नाहरगढ किले के प्रवेश द्वार के तरफ बढें। आपको एक बहुत बड़ा गेट देखने मिलता है। आप गेट के अंदर प्रवेश कर सकते हैं आपको यहां पर टिकट दिखाना होता है। गेट के बाहर छोटा सा आगन है, जहां पर आपको दो तोप देखने मिल जाएंगे। गेट पर पुलिस वाले खड़े रहते हैं, जो आपकी टिकट चेक करते हैं और फिर आपको अंदर प्रवेश करने दिया जाता है। आपको एक मेटल डिटेक्टर मशीन से होकर जाना पड़ता है कि आपने कोई हथियार तो नहीं लिया है और उसके बाद आप किलें के अंदर प्रवेश कर सकते हैं।

Nahargarh Fort - नाहरगढ़ का किला

नाहरगढ़ किले के अंदर का दृश्य 

Nahargarh Fort - नाहरगढ़ का किला

महल के अंदर रखी खूबसूरत कलाकृति 


आप महल के अंदर प्रवेश करते हैं, तो आपको एक बड़ा सा आगन या बरामदा देखने मिलता है। महल में आपको बहुत सारे कमरे देखने मिल जाते है, जिनमें बहुत सारी खूबसूरत एवं अदुभ्त वस्तुए देखने मिलती है। यहां पर एक वाइट कलर का खूबसूरत नक्काशी भरा पत्थर का बना हुआ शोपीस रखा था। जो बहुत बड़ा था और बहुत खूबसूरत था। 

Nahargarh Fort - नाहरगढ़ का किला

महल के पीछे बना मंदिर और जयपुर का दृश्य 


हम लोग महल के ऊपर गए ऊपर जाकर। हम लोगों ने पूरा महल घुमा। ऊपर से जो आपको जयपुर का व्यू दिखता है। बहुत ही प्यारा व्यू दिखता है और यहां पर सबसे अच्छा चीज है। वह यही अनुभव रहता है कि पूरा जयपुर ऊपर से देखना बहुत अच्छा अनुभव रहता है। यहां पर हमने पूरा घूमा और महल से नीचे आते हैं, तो नीचे आप खूबसूरत पेंटिंग देख सकते हैं। इसके अलावा यहां के जो दरवाजे हैं पुराने टाइम के वह देख सकते हैं, किस तरह से बनाए गए हैं, कितनी खूबसूरती से उन्हें तराशा गया है। वह आप देख सकते हैं। यहां पर महल बहुत बड़ा है। हम लोगों ने महल का कुछ हिस्सा घूमा। उसके बाद हम लोग बाहर आ गए और यहां पर महल के बाजू में आपको वॉशरूम भी मिल जाती है। वाॅशरूम में जाने का चार्ज लिया जाता है। यहां  पर वॉशरूम है। उसके थोड़ा आगे आपको मंदिर भी देखने मिल जाता है, यह किस देवता का मंदिर था। यह हम नहीं देख पाए थे, क्योंकि यहां पर बहुत सारे बंदर थे और बंदर आपका सामान छीन सकते हैं इसलिए आप अपना सामान अच्छे से रखें।  यहां से भी आपको जयपुर शहर का बहुत ही खूबसूरत व्यू देखने मिलता है और आपको अच्छा लगेगा यहां पर।

यह सब घूमने के बाद हम लोग आगे बढ़े, अपने जयपुर की यात्रा में उसका लेख आपको आगे मिल जाएगा और आपको यह लेख पसंद आया हो तो इसे शेयर जरूर करें अपने दोस्तों के साथ और अगर आपका जयपुर जाने का अनुभव हो तो वह भी हमसे साझा करें ।

धन्यवाद आपने अपना समय दिया उसके लिए


जयगढ़ किले (Jaigarh fort) की यात्रा

जयगढ़ किला


जयगढ़ किले (Jaigarh fort) की यात्रा

जयगढ़ किले से जयपुर सिटी का व्यू  

जयगढ़ का किला जयपुर का एक दर्शनीय स्थल है। वैसे जयपुर शहर में बहुत सारे प्राचीन किलें हैं और इन किलों को देखने के लिए पूरी दुनिया से लोग आते हैं। इन सभी किलो में जयगढ़ का किला बहुत फैमस है। 

जयगढ़ का किला यहां पर रखी तोप के कारण प्रसिद्ध है। इस तोप के बारे में कहा जाता है, कि यह दुनिया की सबसे बड़ी तोप है। जयगढ़ का किला एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। इस किलें तक पहुॅचने के लिए हम लोगों ने गाडी बुक किया था। पहले हम लोग नाहरगढ़ किले घूमे थे। उसके बाद हम लोग ने जयगढ़ के किले गए थे। नाहरगढ़ किला और जयगढ़ का किला दोनों एक ही रोड में हैं। पहले हम लोगों ने  नाहरगढ़ किला घूमा। उसके बाद जयगढ़ किला गए थे। जयगढ़ किला नाहरगढ़ किला से करीब 5 किलोमीटर की दूरी पर होगा।

जयगढ़ का पूरा किला हम लोगों ने अपनी गाडी से घूमा था। आप चाहे तो पैदल भी घूम सकते हैं। आप जयगढ़ किला पहुॅचते है, तो सबसे पहले आपको किलें में प्रवेश के लिए टिकट लेना पडता है। प्रवेश द्वार पर टिकट मिलता है। यहां पर आपको टिकट लेनी पड़ती है। टिकट के लिए बहुत लंबी लाइन लगती है। यहां पर दो टिकट घर है, जहां पर आप को टिकट मिलती है। किले में प्रवेश करने के लिए गाड़ी का अलग चार्ज होता है। इसके बाद आप किलें में गाड़ी लेकर प्रवेश कर सकते हैं। हम लोग गाडी से ही तोप के पास तक गए थे। हमारे गाडी चालाक ने रोड पर गाडी रूक दिया था। उसके बाद हम लोग गाड़ी से उतरकर तोप को देखने के लिए पैदल गए थे। यहां पर आपको तोप देखने जाने वाले रास्तें में एक साइड में एक कुंड देखने मिलता है। हम लोग तोप के पास पहुॅच गए। 

जयगढ़ किले (Jaigarh fort) की यात्रा

जयगढ़ किले में रखी तोप  

जयगढ़ किले (Jaigarh fort) की यात्रा

 जयगढ़ किले में रखी तोप का दृश्य


Jaivana cannon
जयावाण तोप


जयगढ़ किलें में रखी तोप दुनिया की सबसे बडी तोप है। इस तोप को जयावाण तोप के नाम से भी जाना जाता है।  तोप एक शेड के नीचे रखी गई है। इस तोप के बारे में कहा जाता है कि प्राचीन समय में एक ही बार इस तोप को चलाया गया था और जो भी इस तोप को चलाता था। वहां तोप के बाजू में बने कुंड में छलाग लगा देता था, क्योंकि यह तोप इतनी शक्ति शाली थी और इस तोप की आवाज बहुत जोरदार थी। जिससे जो भी इस तोप को चलाता उसकी मृत्यु हो जाती। इसलिए वह इस कुंड में तोप को चलाने के बाद कूद जाया करता थे। इस तोप का निर्माण 1720 में हुआ था। इस तोप से निकला बारूद 35 किलोमीटर की दूरी तय कर सकता था। तोप के बैरल की लंबाई 6.15 मीटर है। इस तोप का वजन 50 टन है। यह जानकारी हम लोग का हमारे ड्राइवर ने दिया था। आप यहां पर गाइड करना चाहते है, तो कर सकते हैं। गाइड आपको पूरी तरह से इस जगह की जानकारी देगा और आपका ड्राइवर सीमित जानकारी दे पायेगा। 

जयगढ़ किले (Jaigarh fort) की यात्रा

जयगढ़ किले का पूरा व्यू  

आप महल की चोटी से पूरा जयपुर शहर का नजारा देख सकते है। तोप के पास ही में व्यू पांइट है, जहां पर खडे होकर व्यू का मजा ले सकते है। यहां से आपको जल महल देखने मिलता है। आप यहां से आगे बढते है, तो आपको ऊंट देखने मिल जाते है। जिस पर आप सवारी कर सकते है। हम लोग जब गए थे, तब यहां पर हमको हाथी देखने नहीं मिले थे। आप यहां पर हाथी की सवारी भी कर सकते है। यहां पर रेस्टोरेंट भी है, जहां पर आप खाना पीना खा सकते हैं। कुछ देर रेस्ट कर सकते हैं। इसके अलावा यहां पर हम लोगों को बहुत ढेर सारे बंदर भी देखने मिले थे, जो आपसे आपका सामान छीन सकते है, तो आप यहां पर अपना सामान संभल कर रखें। 

जयगढ़ किले को अगर आप पैदल घूमते है, तो आपको इस महल के बारे में अच्छे जानकारी मिल जाएगी और यहां की पूरी जगह आप घूम सकते है। अगर आप यहां पर कार से घूमते हैं, तो आप यहां पर आधे घंटे में घूम सकते हैं और आप पैदल घूमेंगे तो आपका करीब एक से डेढ़ घंटा लग सकता है। आप किलें के बाहर आते है, तो आपको यहां पर बहुत सारी छोटे छोटे सामान बेचने वाले देखने मिल जाती है। यहां पर आपको राजस्थानी पगड़ी देखने मिलती हैं, जो यहां पर बहुत फेमस है। आप चाहे तो याद की तरह इन पगड़ी को लेकर जा सकते हैं।

यह ब्लॉग यही तक था, अगर आपको अच्छा लगा हो, तो आप इसे शेयर जरूर कीजिएगा। अपने दोस्तों के साथ, और अगर आपका जयपुर जाने का एक्सपीरियंस हो, तो आप हमें कमेंट करके जरूर बताइए क्या कि आप की जयपुर की यात्रा कैसी रही।