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Bahoriband-Kankali Devi Temple Tigawa (कंकाली देवी मंदिर )

Kankali Devi Temple  कंकाली देवी मंदिर  कंकाली देवी मंदिर बहोरीबंद (Kankali Devi Temple) के पास के एक गांव में स्थित है। इस गांव में कंकाली देवी मंदिर ( Kankali Devi Temple ) के अलावा एक मंदिर और भी स्थित है। यह एक पुरातात्विक स्थल है और यहां पर आपको बहुत ढेर सारे खूबसूरत नक्काशी भरे पत्थर पर उकेरी गई कई कलाकृतियां देखने मिल जाएगी। यह एक बहुत प्राचीन स्थल है और आप इस जगह पर बहुत आसानी से आ सकते हैं। यह बहुत ही प्राचीन मंदिर है।  कंकाली देवी मंदिर  कंकाली देवी मंदिर ( Kankali Devi Temple )  कटनी जिले में स्थित है। यह कटनी जिले के बहोरीबंद तहसील ( Bahoriband Tehsil )  के पास स्थित है। आप इस मंदिर पर अपनी गाड़ी से आसानी से आ सकते हैं। इस मंदिर तक कोई भी टैक्सी या बस वगैरह नहीं चलती है। आपको अपनी गाड़ी से ही आना होगा। इस मंदिर तक आने के लिए आपको अच्छी सड़क मिल जाती है, या बहोरीबंद तहसील ( Bahoriband Tehsil ) से जो कटनी जिले की तहसील है वहां से 3 या 4 किलोमीटर दूर होगा, तो आप यहां पर अपनी गाड़ी से आसानी से आ सकते हैं। तिगवा में स्थापित पत्थर के शिवलिंग  आपको यहां

विश्वनाथ मंदिर खजुराहो - Vishwanath Temple Khajuraho

खजुराहो का विश्वनाथ मंदिर - Vishwanath Mandir Khajuraho विश्वनाथ मंदिर खजुराहो का एक प्रसिद्ध मंदिर है। विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर के गर्भ गृह में शिवलिंग देखने के लिए मिलता है। यह मंदिर पश्चिमी मंदिर समूह में स्थित है। यह मंदिर भी एक ऊंचे चबूतरे पर बना हुआ है। मंदिर की वास्तुकला बहुत ही अद्भुत है। मंदिर के सामने नंदी महाराज का एक मंदिर देखने के लिए मिलता है। विश्वनाथ मंदिर में भी चार उप मंदिर रहे। मगर अब यहां पर हम लोगों को सिर्फ दो मंदिर ही देखने के लिए मिले। इन दोनों मंदिर में भी खूबसूरत नक्काशी देखने के लिए मिल जाती है। विश्वनाथ मंदिर की दीवारों की मूर्तिकला बहुत ही अद्भुत है।    विश्वनाथ मंदिर की वास्तुकला -  Architecture of Vishwanath Temple विश्वनाथ मंदिर पंचायतन शैली में बना हुआ है। अर्थात विश्वनाथ मंदिर में भी चार उप मंदिर थे, जिनमें से आप दो मंदिर अभी देख सकते हैं। यह मंदिर के चबूतरे के कोने में स्थित है। विश्वनाथ मंदिर लक्ष्मण मंदिर के समान ही बना हुआ है। विश्वनाथ मंदिर को आंतरिक रूप से देखने पर इसके 5 भाग आपको देखने के लिए मिलते हैं। अर्थमंडप, महाम

दूल्हादेव शिव मंदिर खजुराहो - Dulhadev shiv Temple Khajuraho

खजुराहो का दूल्हादेव शिव मंदिर - Dulha Dev shiv Mandir Khajuraho   दूल्हा देव मंदिर खजुराहो का एक प्रसिद्ध मंदिर है। दूल्हा देव मंदिर खजुराहो के दक्षिणी मंदिर समूह का एक मंदिर है। दूल्हा देव मंदिर शिव भगवान जी को समर्पित है। दूल्हा देव मंदिर के गर्भ गृह में शिव भगवान जी का शिवलिंग देखने के लिए मिलता है। दूल्हा देव मंदिर को कुंवारा मठ भी कहा जाता है। दूल्हा देव मंदिर खुड़र नदी के किनारे पर  स्थित है। यह मंदिर बहुत ही खूबसूरत है। मंदिर में आपको गार्डन भी देखने के लिए मिलता है। यह मंदिर एक ऊंचे चबूतरे के ऊपर बना हुआ है। मंदिर में जाने के लिए सीढ़ियां है। मंदिर में लोग आज भी शंकर जी की पूजा करते हैं। यहां पर आपको फूल, बेलपत्र चढ़े हुए देखने के लिए मिल जाएंगे।     खजुराहो के दूल्हा देव मंदिर की वास्तुकला -  Architecture of Dulha Dev Temple of Khajuraho खजुराहो का दूल्हा देव मंदिर बहुत ही सुंदर है और खजुराहो के अन्य मंदिरों के समान है। इस मंदिर की बाहरी दीवार में आपको मूर्तिकला देखने के लिए मिलती है। खजुराहो के दूल्हा देव मंदिर में आपको मंडप, अंतराल, गर्भ ग्रह और महा मंडप देखने के लिए

Chausath Yogini Temple, Jabalpur -- चौंसठ योगिनी मंदिर, जबलपुर

चौंसठ योगिनी मंदिर, जबलपुर Chausath Yogini Temple, Jabalpur दोस्तों हम लोगों ने धुंआधार जलप्रपात पूरा घूम लिया उसके बाद हम लोग जा रहे चौंसठ  योगिनी मंदिर दोस्तों अगर आप लोग धुंआधार जलप्रपात घूमने जाते है तो आपको चौंसठ  योगिनी मंदिर भी जरूर घूमना चहिए। चौंसठ योगिनी मंदिर धुंआधार जलप्रपात से लगभग 1 से 1.5 कि.मी. की दूरी पर स्थित है। अगर आप रविवार को जाते है तो आपको बाजार भी देखने मिल जाती है । जी हाॅ रास्ते में छोटा सा साब्जियों का बाजार भरता है । साब्जियों के अलावा भी बहुत सारा सामान मिलता है। हम लोगो ने भी कुछ सामान वहां से खरीदा था। तो दोस्तो बात करते है चौंसठ योगिनी मंदिर की आपको यहां तक पहुॅचने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी होगी। बहुत आसान रास्ता है आपको धुंआधार जलप्रपात से सीधा आना है । मुख्य मार्ग में ही चौंसठ योगिनी मंदिर स्थित है। हम लोगों को मंदिर तक पहुॅचने तक शाम हो गई थी शायद 6 बजा गए थे। यहां मंदिर सूर्यास्त होते ही बंद हो जाता है हम लोग गर्मी में गये थे तो हम लोग मंदिर जा पाये। क्योकि गर्मी में सूर्यास्त देर से होता है।  Main Temple Temple outside vie

वामन मंदिर खजुराहो - Vamana Temple Khajuraho

खजुराहो का वामन मंदिर -  Vamana Mandir khajuraho वामन मंदिर खजुराहो का एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर पूर्वी मंदिर समूह में स्थित है। यह मंदिर ब्रह्मा मंदिर के आगे स्थित है। इस मंदिर में आपको विष्णु भगवान जी के वामन अवतार के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। यह मंदिर भी एक ऊंचे मंडप पर बना हुआ है और बहुत खूबसूरत लगता है। ब्रह्मा मंदिर, जवारी मंदिर  और वामन मंदिर यह तीनों मंदिर आसपास में ही स्थित है और आप जब कभी भी खजुराहो घूमने जाते हैं, तो इन तीनों मंदिर में घूम सकते हैं।  खजुराहो के वामन मंदिर की वास्तुकला -  Architecture of Vamana Temple of Khajuraho खजुराहो का वामन मंदिर बहुत ही सुंदर है। यह मंदिर निरंधार शैली में बना हुआ है। इस मंदिर के अंदरूनी भाग को देखने पर 4 भाग आपको देखने के लिए मिलते हैं। यहां पर आपको मंडप, महा मंडप, अंतराल और गर्भ ग्रह देखने के लिए मिलता है। यहां पर प्रदक्षिणा पथ नहीं बनाया गया है। इस मंदिर के गर्भ गृह में चतुर्भुजी वामन की प्रतिमा स्थापित की हुई है, जिनके बाएं ओर चक्रपुरुष एवं दाये ओर शंख पुष्प का अंकन है। मंदिर के गर्भ गृह के प्रवेश द्वार सप्तशाखाओं से अलंक

देवी जगदंबी मंदिर खजुराहो - Devi Jagadambi Temple Khajuraho

देवी जगदम्बा मंदिर खजुराहो -  Devi Jagadamba Mandir Khajuraho   देवी जगदंबा मंदिर खजुराहो का एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर पश्चिमी मंदिर समूह में स्थित है। यह मंदिर भी खजुराहो के अन्य अन्य मंदिरों के समान खूबसूरत है। यह मंदिर पार्वती माता को समर्पित है। मंदिर के गर्भ गृह में पार्वती माता की पत्थर की प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। लोग आज भी यहां पर फूल चढ़ाते हैं। मगर मूलत: यह एक  विष्णु मंदिर था। यह मंदिर विष्णु जी के लिए बनाया गया था और यहां पर विष्णु जी की प्रतिमा विद्यमान थी। 1880 में छतरपुर के राजा ने मनियागढ़ से पार्वती माता की मूर्ति यहां लाकर स्थापित कर दी। इसलिए यह मंदिर पार्वती मंदिर या देवी जगदंबा मंदिर कहलाता है।     देवी जगदंबा मंदिर खजुराहो की वास्तुकला -  Architecture of Devi Jagdamba Temple Khajuraho देवी जगदंबा मंदिर निरंधार शैली में बना हुआ है। अर्थात इस मंदिर में आपको मंदिर के  चार भाग देखने के लिए मिलते हैं। यहां पर आपको अर्धमंडप, महामंडप, अंतराल और गर्भ ग्रह देखने के लिए मिलता है। मंदिर में परिक्रमा पथ नहीं है, जिसे प्रदक्षिणा पथ भी कहते हैं। वह नहीं है और मंदि

माला देवी मंदिर ग्यारसपुर विदिशा - Mala Devi Temple Gyaraspur Vidisha

मालादेवी मंदिर ग्यारसपुर,  विदिशा मध्य प्रदेश -  Maladevi Mandir Gyaraspur, Vidisha, Madhya Pradesh ग्यारसपुर का माला देवी मंदिर एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर विदिशा जिले के ग्यारसपुर तहसील में स्थित है। यह मंदिर ग्यारसपुर में ऊंची पहाड़ी पर पहाड़ी के आखिरी छोर पर बना हुआ है। माला देवी मंदिर प्राचीन मंदिर है और इस मंदिर की बाहरी दीवारों पर बहुत ही सुंदर मूर्ति कला देखने के लिए मिलती है। यह मंदिर पहाड़ी के किनारे बना हुआ है। इस मंदिर का कुछ हिस्सा पहाड़ी को काटकर बनाया गया है और यह मंदिर बहुत ही सुंदर लगता है। इस मंदिर में बहुत ही सुंदर नक्काशी की गई है। मंदिर के अंदर गर्भ गृह में अब जाने नहीं दिया जाता है। मगर आप बाहर से ही मंदिर को देख सकते हैं। मंदिर का जो गर्भ ग्रह है। उसकी छत पर बहुत ही सुंदर नक्काशी की गई है। यह पूरा मंदिर पत्थरों को काटकर और पत्थरों को एक के ऊपर एक रखकर जोड़कर बनाया गया है। माला देवी टेम्पल ऊंची पहाड़ी पर बना हुआ है। इसलिए आप पहाड़ी से चारों तरफ की दृश्य को देख सकते हैं। दूर-दूर तक फैला हुआ मैदान और खेत, पहाड़ देखने के लिए मिलते हैं।  ग्यारसपुर विदिशा जिल

मतंगेश्वर मंदिर खजुराहो - Matangeshwar Temple Khajuraho

खजुराहो का मतंगेश्वर मंदिर - Matangeshwar Mandir Khajuraho   मतंगेश्वर महादेव मंदिर खजुराहो का एक प्रसिद्ध शिव मंदिर है। मतंगेश्वर मंदिर में बहुत बड़े शिवलिंग स्थापित है। यह शिवलिंग विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग में से एक है। इस मंदिर में सोमवार के दिन बहुत सारे भक्त भगवान शिव के दर्शन करने के लिए आते हैं और बेलपत्र और फूल चढ़ाते हैं। यह मंदिर एक ऊंचे चबूतरे पर बना हुआ है। मंदिर तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है। वर्तमान समय में भी इस मंदिर में पूजा होती है। यहां पर लोग शिवजी को फूल और जल चढ़ाते हैं। यह मंदिर बहुत ही सुंदर है।     हम लोग इस मंदिर में सोमवार के दिन गए थे। सोमवार के दिन इस मंदिर में बहुत सारे भक्त आते हैं। प्रसाद की दुकान मंदिर के बाहर लगती है। आपको प्रसाद लेना है, तो मंदिर के बाहर से ही आ प्रसाद ले सकते हैं। फूल और बेलपत्र की दुकान भी मंदिर के बाहर लगती है। आप मंदिर के गेट से प्रवेश करते हैं, तो आपको एक और मूर्ति देखने के लिए मिलती है। कहा जाता है कि यह भैरव बाबा की मूर्ति है। इस मूर्ति को सिंदूर से पूरी तरह रंग दिया गया है। आप अंदर जाते हैं, तो आपको मतंगेश्वर मंदिर देखने