क्‍वेरी Temple की प्रासंगिकता द्वारा क्रमित पोस्‍ट दिखाए जा रहे हैं. तारीख द्वारा क्रमित करें सभी पोस्‍ट दिखाएं
क्‍वेरी Temple की प्रासंगिकता द्वारा क्रमित पोस्‍ट दिखाए जा रहे हैं. तारीख द्वारा क्रमित करें सभी पोस्‍ट दिखाएं

Pachmarhi Chauragarh Temple || चौरागढ़ महादेव मंदिर, पचमढ़ी

 Pachmarhi Chauragarh Shiv Temple

चौरागढ़  महादेव पचमढ़ी


चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) का प्रसिद्ध मंदिर शिव मंदिर मध्य प्रदेश का प्रमुख पर्यटन स्थल है और यह पचमढ़ी में स्थित है। चैरागढ़ का मंदिर एक ऊंचे पहाड़ पर स्थित है यह मंदिर भगवान शिव जी को समर्पित है। चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) महादेव पचमढ़ी (Pachmarhi) की एक खूबसूरत जगह है। यह जगह बहुत खूबसूरत है और जंगलों से घिरी हुई है। इस मंदिर तक जाने के लिए आपको बहुत मेहनत करनी पड़ेगी क्योंकि इस मंदिर तक पहॅुचने के लिए आपको पैदल चलना पड़ेगा और यह जगह पूरी तरह से जंगल और पहाड़ों से घिरी हुई है, यहां पर आपको बहुत खूबसूरत प्राकृतिक व्यू देखने मिलता है, यहां पर वादियों का मनोरम दृश्य देखने मिलता है।  चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर 1326 मीटर की ऊंची पहाड़ी पर स्थित है और इस मंदिर तक पहुंचने के लिए आपको 1300 चढ़ने पड़ती है।


पचमढ़ी (Pachmarhi) को सतपुड़ा की रानी कहा जाता है और यहां पर बहुत सारी धार्मिक जगह है, जिनमें से प्राचीन शिव भगवान जी का मंदिर भी एक है,जिसके दर्शन करने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। यहां पर साल भर लोग दर्शन करने के लिए आते हैं, मगर विशेषकर नाग पंचमी और महाशिवरात्रि के समय पचमढ़ी में मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें लाखों की संख्या में लोग आते हैं और भगवान शिव के दर्शन करने के साथ-साथ उन्हें त्रिशूल चढ़ाते हैं।

Pachmarhi Chauragarh Temple
Pachmarhi Chauragarh Temple

चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) के प्राचीन शिव भगवान जी के मंदिर तक जाना आसान बात नहीं है। यह पूरा पहाड़ी रास्ता है और इस रास्ते में आपको किसी भी तरह की सुविधाएं नहीं मिलती हैं। आपको पैदल चलना पड़ता है और यहां तक जाते-जाते आपकी हालत खराब हो जाती है मगर शिव भगवान के भक्त इस रास्ते पर बम बम भोले का जयकार लगाते हुए चलते हैं और भगवान शिव को अर्पण करने के लिए भारी त्रिशूल भी लेकर चलते है। 

Pachmarhi Chauragarh Temple
Pachmarhi Chauragarh Temple

चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) स्थिाति एवं जाने का रास्ता


चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) का महादेव मंदिर पचमढ़ी में स्थित है। पचमढ़ी (Pachmarhi) होशंगाबाद शहर में स्थित है और होशंगाबाद शहर मध्य प्रदेश में स्थित एक शहर है। पचमढ़ी पहुंचने के लिए आपको सबसे अच्छा साधन ट्रेन से है। आप ट्रेन से आसानी से पचमढ़ी (Pachmarhi) पहुंच सकते हैं आप आना चाहें तो अपने वाहन से भी पचमढ़ी आ सकते हैं सड़क मार्ग से भी पचमढ़ी अच्छी तरह से कनेक्टेड है और आप इस पचमढ़ी (Pachmarhi)सड़क मार्ग से भी पहुॅच सकते हैं। आप पचमढ़ी (Pachmarhi) ट्रेन से आते है तो ट्रेन से आपको पहले पिपरिया रेलवे स्टेशन तक आना होता है, वहां से आपको बस एवं जिप्सी की सुविधा मिल जाती है। आप चाहे तो बस से आ सकते हैं या जिप्सी से आ सकते हैं। बस में आपका कम किराया लगता है, 60 रू पचमढ़ी तक का किराया लगता है। जिप्सी में आपको ज्यादा किराया लगता है। आपको जिप्सी में आने के लिए बारगेन करना पड़ता है। आप पिपरिया से पचमढ़ी तक खूबसूरत वादियों का नजारा देखते हुए पहुंच जाते हैं। 

पचमढ़ी में नागपंचमी मेला


पचमढ़ी (Pachmarhi) में आप जब नागपंचमी के मेले में आते हैं तो यहां पर बहुत ज्यादा भीड़ रहती है। आपको पचमढ़ी नगर के बाहरी क्षेत्र में ही उतार दिया जाता है। आपको वहां से पैदल पचमढ़ी (Pachmarhi) नगर तक आना पड़ता है। आपको नाग पंचमी के मेले के समय यहां पर पूरी रोड में बहुत सारी दुकाने मेला दिखाई देगा और पचमढ़ी के बाहरी क्षेत्र इतने सारे वाहन दिखाई देंगे क्योंकि यहां पर लोग नाग पंचमी के टाइम में बहुत दूर-दूर से आते हैं, तो पूरी बस बुक करके आते हैं तो यहां पर आपको बहुत सारे वाहन दिखाई देगी। आप जब पचमढ़ी (Pachmarhi) के बाहरी क्षेत्र पचमढ़ी नगर की तरफ आते है तो आपको बहुत सारी तरह तरह की दुकानें देखने मिलती है। आपको रोड के दोनों तरफ दुकानें दिखाई देगी। 

पचमढ़ी  (Pachmarhi)में जब आप पहुंचते हैं, तो आपको यहां से चैरागढ़ मंदिर तक जाने के लिए जीप या जिप्सी मिल जाती है। मेले के दौरान यहां पर जिप्सी का किराया बहुत सस्ता रहता है। आपको 30 या 40 रू में चौरागढ़ मंदिर (Chauragarh  Shiv Temple) तक आसानी से पहुंचा दिया जाता है। मेले के समय पचमढ़ी में बहुत ज्यादा भीड़ रहती है तो गाड़ी में भी बहुत ज्यादा भीड़ रहती है। गाड़ी वाला एक साथ 10 से 15 लोगों को बैठा लेता है और मंदिर तक छोड़ जाता है।

चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर तक पहुंचने के लिए जो सड़क है वह बहुत खूबसूरत है। यह जो सड़क है इस पर कहीं-कहीं पर ऐसे मोड़ है, जो आपको खतरनाक लगते हैं मगर ड्राइवर जो है वह इन मोड पर गाडी असानी से चला लेता है क्योकि उसे गाड़ी चलाने की आदत रहती है। अगर आप अपने वाहन से इस जगह पर जाते हैं तो गाड़ी आप आराम से चलाइए क्योंकि यहां पर बहुत सारे एक्सीडेंट होते रहते है। आपको यहां पर जरूर 1 या 2 गाड़ी देखने मिल जाएंगी जिनके एक्सीडेंट यहां पर हो चुके हैं। 

Pachmarhi Chauragarh Temple
Pachmarhi Chauragarh Temple

Pachmarhi Chauragarh Temple
Pachmarhi Chauragarh Temple


जिप्सी वाला आपको बड़ा महादेव मंदिर के पास छोड़ देता है। आप चाहे तो बड़ा महादेव मंदिर घूम कर चौरागढ़ मंदिर (Chauragarh  Shiv Temple) के लिए जा सकते हैं। चैरागढ़ मंदिर (Chauragarh  Shiv Temple) के रास्ते में ही आपको गुप्त महादेव मंदिर भी देखने मिल जाएगा । आप गुप्त महादेव मंदिर भी घूम सकते है। 

चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर की पैदल यात्रा 


चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर 3 से 4 किलोमीटर की दूरी पर है। आपको इस मंदिर तक पैदल जाना पड़ता है। यहां पर किसी भी तरह की सुविधाएं नहीं मिलती है और ना ही वाहन चलते हैं। आपको पैदल यात्रा करनी पड़ती है और यह पथरीला रास्ता होता है। आपको यहां पर जूते पहन कर जाना चाहिए क्योंकि चप्पल यहां पर किसी भी काम की नहीं रहती है।आप इस रास्ते से जाते हैं तो आपको यहां पर जंगलों की खूबसूरती देखने मिलता है। यहां पूरा रास्ता जंगल का है चारों तरफ हरे भरे पेड़ों है। यहां पर आपको चारों तरफ हरियाली देखने मिलती है।

आप ऊपर पहूॅचते है तो आपको बहुत मस्त व्यू देखने मिलता है। चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर के रास्ते में एक गुफा देखने मिलेगी जहां पर कहा जाता है कि सीता जी ने अपने वनवास काल के दौरान इस गुफा में ठहरी थी, यह गुफा सीता जी के नाम पर रखी गई है। यहां पर आपको इस गुफा के पास से ही चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर तक जाने के लिए दो रास्ते मिलेंगे एक रास्ता पक्का मिलेगा और एक रास्ता जंगल वाला मिलेगा जो शॉर्टकट है आप वहां से भी चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर तक जा सकते हैं, वैसे मुझे लगता है कि दोनों रास्ते की दूरी समान ही होगी। 

हम लोग पक्के रास्ते से चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर तक गए थे और मैं आपको भी यही रास्ता प्रेफर करूगी, आप पक्के रास्ते से जाएं क्योंकि इस रास्ते में आपको किसी भी तरह की दिक्कत नहीं होगी और आप आराम से जा सकते हैं और जो जंगल वाला रास्ता है जो शॉर्टकट रास्ता है उससे आपको शायद दिक्कत हो सकती है क्योंकि वह रास्ता पूरी तरह से उबड़ खाबड़ हो सकता है। आपको जैसे जैसे उपर चढाते है आपको पहाडियो को खूबसूरत व्यू देखने मिलता है और चारों तरफ हरियाली देखने मिलती है। यहां पर आपको बहुत सारे बंदर भी देखने मिल जाएंगे बंदरों को अब किसी भी तरह का खाना ना डालिए और खाने का सामान हाथ पर लेकर न चलें नहीं तो बंदर आपके हाथ से छीन सकते है।

Pachmarhi Tourist Place


चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर का विवरण 


यह मंदिर बहुत अच्छी तरह से बन गया है और यहां पर आपको आकर बहुत अच्छा लगेगा। यहां पर पानी की व्यवस्था है आप थोड़ा देर आराम करके पानी पीकर भगवान जी के दर्शन करने के लिए जा सकते हैं और यहां पर आप नीचे चप्पल उतार कर फिर भगवान जी के दर्शन करने जा सकते हैं। यहां पर शिव भगवान की जो प्रतिमा है वह बहुत आकर्षक है और आपको बहुत खूबसूरत लगेगी और लोग इतनी दूर दूर से भगवान जी के दर्शन करने के लिए आते हैं और इस प्रतिमा में कहा जाए तो एक प्रकार का जादू है आप इस प्रतिमा को  देखते रह जाएंगे। यहां पर आपको अच्छा लगेगा के प्रतिमा के दर्शन करने के बाद बाहर आते हैं तो आपको गणेश जी का मंदिर देखने मिलेगा आप गणेश जी के दर्शन कर सकते हैं उन्हें प्रसाद चढ़ा सकते हैं। उसके बाद आप मंदिर के सामने तरफ आएंगे तो सामने भी आपको शंकर जी और भी अन्य देवी-देवताओं के दर्शन करने मिल जाएंगे जिनकी प्रतिमा मंदिर के बाहर रखी गई है। आप यहां पर त्रिशूल देख सकते हैं, यहां पर ढेर सारे त्रिशूल रखे गए हैं। इतने सारे और बहुत वजन के यहां पर देखने मिलतेे है। 

हम लोग पहले यहां पर आए थे तो त्रिशूल से पूरी मंदिर की बाउंड्री बनाई गई थी, मगर अभी पूरा कवर कर दिया गया है। आपको यहां से चारों तरफ का खूबसूरत व्यू देखने मिलता है जो एकदम अनोखा रहता है आप शायद इस तरह कभी ना देखे हो और शायद देखे भी हो मगर इसके बारे शब्दों में नहीं बताया जा सकता है। आपको मंदिर के बाहर ही अगरबत्ती जलाने मिलेगी और आप बाहर ही नारियल फोड़ सकते हैं, आप अंदर जाकर सिर्फ भगवान जी के दर्शन कर सकते हैं। शिव भगवान जी के और दर्शन करके आपको बाहर आना पड़ेगा । यहां पर आप खूबसूरत वदियों में फोटोग्राफी भी कर सकते है। आपको यह लगता है कि जो बादल है वह आपके पास ही से उड रहे हो। यहां पर जो बरसात का मौसम रहता उस टाइम भी अच्छा लगता है वैसे गर्मी के मौसम में भी यहां अच्छा लगता है, क्योंकि यहां पर चारों तरफ हरियाली रहती है। यहां के जो पेड़ पौधे रहते हैं वह गर्मी के मौसम में भी हरे भरे रहते हैं। इस जगह पर आकर आपकी थकावट दूर हो जाती है, जो इतनी दूर से आप चल कर आते हैं। वह थकावट आपकी इस जगह पर आकर पूरी तरह से चली जाती है। 

Pachmarhi Chauragarh Temple
Pachmarhi Chauragarh Temple

Pachmarhi Chauragarh Temple
Pachmarhi Chauragarh Temple


अब यहां मंदिर बहुत अच्छा बन गया है। हम इस मंदिर में करीब 10 साल पहले गए थे तब यहां पर कुछ भी नहीं था। यहां पर शिव भगवान की मूर्ति खुले में ही रखी हुई थी और त्रिशूल से मंदिर के चारों तरफ बाॅडरी बनी हुई थी। यहां पर किसी भी तरह की व्यवस्था नहीं थी मगर अब यहां पर हर तरह की व्यवस्था है। 

चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर के रास्ते में लगने वाली दुकानें 


जब आप पचमढ़ी में मेले के दौरान आते है और आप जब इस मंदिर पर पहुंचते हैं, तो मंदिर के रास्ते में आपको बहुत से दुकानें मिलती है। मेले के दौरान यहां पर बहुत सारी दुकानें लगती हैं जहां पर आप खाना खा सकते हैं और नींबू पानी पी सकते हैं और भी बहुत सारी दुकानें लगती हैं। मेले के समय में यहां पर बहुत ज्यादा भीड़ रहती है। मेले के समय में यहां पर आपको भंडारा भी मिलता है। आपको कढ़ी चावल सब्जी पूड़ी यहां खाने मिलता है और भंडारा तो बहुत मस्त रहता है। 

चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर के रास्तें में बहुत दुकाने रहती है आप चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर  के रास्ते मे थक जाते है, आप रास्ते में रेस्ट करके कुछ भी खरीदकर खा सकते है। दुकानों में आपको उबली बेर एवं भुने चने एवं मूगंफली भी मिल जाती है। 

यहां पर आपको बहुत सी ऐसी भी दुकान देखने मिलती है, जहां पर आपको देशी दारू मिलती है, बहुत से लोग यहां से दारू लेते है । इन दुकानों पर आपको 10 या 20 रू गिलास में दारू मिलती है। यहां पर बहुत से लोग दारू पीते हुए देखते हुए मिल जाते है। सस्ती देशी दारू पीकर बहुत से लोग यहां पर घूमते रहते है। 

Pachmarhi Chauragarh Temple
Chauragarh view


चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) मंदिर में मन्नत पूरी होती है


महादेव मंदिर में आकर श्रद्धालु मन्नत मानते है। यहां पर लोगों की इच्छा पूरी होती है और जिसकी भी इच्छा पूरी होती है वहां महादेव मंदिर में आकर त्रिशूल चढाते है। यहां पर लोग छोटे से लेकर बडे त्रिशूल तक चढाते है। यहां पर लोग 100 से 200 किलो के त्रिशूल लेकर चढाते है। यहां पर आप हजारों की संख्या में त्रिशूल देख सकते है। जो लोगों के द्वारा इतनी दूर से लाए जाते हैं और शिव भगवान जी को अर्पण किए जाते हैं यहां पर लोगों की मन्नत पूरी हो जाती है। 

आपके लिए सलाह


  • आप चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) महादेव मंदिर तक जाने के जूते पहन कर जाएं क्योंकि आप की चप्पल टूट सकती है और हाई हील तो बिल्कुल ना पहने अगर चप्पल पहनते है तो मजबूत चप्पल पहनें। 
  • आप चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) महादेव मंदिर में जाए तो पानी और ग्लूकोस लेकर चलें क्योकि यहां पर आपको बहुत चलना पडता है जिससे आप बहुत थक जाते है। ग्लूकोस से आपको एनर्जी मिलती है तो जरूर लेकर चलें।
  • आप चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) महादेव मंदिर में जाए तो अपने साथ कुछ भुने चने और मूंगफली लेकर जाये जिससे आप जहां पर भी रेस्ट करें तो ये खा सकें। 
  • चौरागढ़ (Chauragarh  Shiv Temple) महादेव मंदिर में आपको बहुत चलना पडता है तो आप बच्चे या बूढे व्याक्ति को परेशानी आ सकती है। 

Satdhara MelaBhutiya GoanKataw Dham


Savitri temple pushkar || सावित्री मंदिर पुष्कर

Savitri temple pushkar
सावित्री मंदिर पुष्कर


पुष्कर का सावित्री मंदिर (Savitri mata temple pushkar) बहुत ही खूबसूरत जगह है।

Savitri temple pushkar || सावित्री मंदिर पुष्कर

खूबसूरत पहाड़ियों का दृश्य 

पुष्कर शहर का सावित्री मंदिर एक धार्मिक जगह है। यह जो मंदिर है, वह उचीं  पहाड़ी पर स्थित है। इस पहाडी को रत्नागिरी पहाडी कहते है। इसकी ऊँचाई 750 फीट है। आपको यहां पर देसी और विदेशी दोनों प्रकार के लोगों लोग देखने मिल जाएंगे, मतलब यहां पर भारतीय लोग और विदेशी लोग लोग सभी लोग माता के दर्शन करने के लिए आते हैं। 

पुष्कर का सावित्री मंदिर (Savitri mata temple pushkar) भगवान ब्रह्मा की पहली पत्नी को समर्पित है। इस मंदिर में स्थित देवी सावित्री की मूर्ति बहुत ही प्राचीन है। 

Savitri temple pushkar || सावित्री मंदिर पुष्कर

मंदिर परिसर में बैठे कुछ बंदर 

Savitri temple pushkar || सावित्री मंदिर पुष्कर

मंदिर से नीचे का खूबसूरत दृश्य 


हमने पुष्कर के सावित्री मंदिर (Savitri mata temple pushkar) का जाने का प्लान बनाया और हम लोगों तैयार हो गए। उसके बाद हम लोगों ने पुष्कर घूमने के लिए ऑटो बुक किया था। मगर हम लोगों को बहुत लेट हो गया था, तो हम लोग सबसे पहले इस मंदिर के लिए निकले। हम लोगों मंदिर पहुॅचें, तो हम लोगों को मंदिर के आसपास बहुत सारे ऊंट गाडी दिखाई दी, गाडी को ऊंट खींचकर लेकर जाते हैं। आप भी यहां पर ऊंट गाड़ी देखने मिल जाएगी। वैसे आप चाहे तो इस ऊंट गाड़ी में भी घूम सकते हैं। मगर इस ऊंट गाड़ी का जो किराया रहता है। वह थोड़ा कॉस्टली रहता है ऑटो के मुकाबले में, तो आप चाहें तो इस गाड़ी में भी घूम सकते हैं या आटों में घूम सकते है। 

सावित्री मंदिर (Savitri mata temple pushkarके पहाडी के नीचे जब आप पहुंचते हैं, तो आपको यहां पर बहुत सारी  सारी दुकानें देखने मिल जाती हैं। यहां पर कुछ खाने-पीने की दुकानें रहती हैं और कुछ सामानों की दुकानें रहती है। यहां पर भगवान को प्रसाद चढ़ाने वाली कुछ दुकानें रहती है, तो आप यहां से प्रसाद खरीद सकते हैं। यहां पर 30 या 40 रुपए का आपको प्रसाद मिल जाता है। आप यहां से प्रसाद ले सकते हैं उसके बाद हम लोगों ने यहां पर चाय पीती थी। यहां पर एक दुकान में कुल्हड़ वाली चाय मिल रही थी, तो हम लोगों ने कुल्हड़ वाली चाय पिए। उसके बाद हम लोगों ने मंदिर की तरफ बढें। 

सावित्री मंदिर (Savitri mata temple pushkarतक पहुंचने के लिए दो रास्ते मिल जाते हैं। एक तो सीढियों वाला रास्ता रहता है। आपको सीढ़ियां चढ़कर जानी पड़ती है, इसमें आपकी बहुत ज्यादा ताकत लग सकती है और आपका बहुत ज्यादा समय लग सकता है। इसके साथ ही एक रास्ता रोपवे वाला रहता है, जिसमें आप आराम से पहुंच सकते हैं और आपका इसमें ज्यादा समय भी नहीं लगता है।

Savitri temple pushkar || सावित्री मंदिर पुष्कर

सूर्यास्त का बहुत ही मनमोहक दृश्य 

Savitri temple pushkar || सावित्री मंदिर पुष्कर

मंदिर से नीचे के खूबसूरत दृश्य 

Savitri temple pushkar ropeway
सावित्री मंदिर पुष्कर रोपवे


सावित्री मंदिर (Savitri mata temple pushkar) तक पहुंचने के लिए हम लोगों ने रोपवे से जाने का फैसला लिया और हम लोग रोपवे की तरफ चले गए। हम लोगों का रोपवे का टिकट 100 का था। एक व्यक्ति का 100 रू लगा। उसके बाद हम लोगों ने रुपए में बैठे। हम लोग 6 जन लोग थे और 6 लोगों के लिए रोपवे में बैठने के लिए बहुत जगह थी। उसके बाद है हमारी रोपवे धीरे धीरे चलना स्टार्ट हो गई। हम लोगों को वहां के खूबसूरत व्यू देखना स्टार्ट हो गया था। व्यु बहुत ज्यादा खूबसूरत था। रोपवे से देखने पर पर कही रेगिस्तान था। तो कहीं पर पानी बह रहां था, कहीं पर रेत थी, तो कहीं पर लोगों का भींड थी। कही पर उंट गाडी थी, कही पर रेत में चलती बडी गाडी थी। यहां सब दृश्य आपको रोपवे से देखने मिल जाता है। हम लोगों को रोपवे से कुछ बंदर भी   दिखे थे, जो मंदिर की तरफ चढ़ाई कर रहे थे।

इन सभी दृश्यों का लुफ्त उठाते हुए हम लोग मंदिर पहुंच गए। उसके बाद हम लोग रोपवे से उतरे। सावित्री मंदिर (Savitri mata Temple) के बाहर भी कुछ दुकानें हैं और सवित्री मंदिर बहुत ही खूबसूरत था। आपको यहां से चारों तरफ खूबसूरत पहाड़ियां, नदियां, रोड, खेत और पुष्कर शहर का खूबसूरत नजारे देखने मिलता है। यहां से पुष्कर झील भी देखने मिलती है। हम लोगों ने मंदिर में सावित्री माता जी के दर्शन किए। 

सावित्री माता जी (Savitri mata) के इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि एक बार ब्रह्मा जी ने यज्ञ का आयोजन किया। जिसमें सवित्री माता ((Savitri mata)को पहुॅचने में देर हो गई,  इसलिए ब्रह्मा जी ने गायत्री जी के साथ विवाह कर पूजा की विधि पूरी की और तभी सावित्री माता वहां पहुंची। जिससे उन्हें बहुत गुस्सा आया और वह इस पहाड़ी में आकर तपस्या करने लगी। इस तरह इस मंदिर की स्थापना हुई है। आप भी यहां आएंगे तो आपको इस तरह की कहानियां सुनने मिल सकती है।

यहां पर स्थित मंदिर बहुत ही खूबसूरत है और इसके आसपास भी बहुत अच्छा है। उसके बाद हम लोग ने मंदिर के दर्शन करने के बाद मंदिर के पीछे जो खूबसूरत जगह है। वहां गए, वहां हम लोग ने देखा तो वहां पर भी बहुत ही खूबसूरत नजारा था। यहां से आपको सन सेट का नजारा भी लुभावना है, जो बहुत ही मस्त रहता है। यहां पर हम लोग ठंड के समय में गए थे, तो ठंड के समय पर यहां पर हल्का सा बादल भी था और हल्की फुल्की बरिश भी हो रही थी, तो यहां पर कोहरा छाया हुआ था, जो बहुत ही मस्त लग रहा था। यहां पर हमने बहुत ही मस्त फोटो क्लिक किया। 

सावित्री देवी मंदिर (Savitri mata temple) के पास जो दुकाने थी वहां से हम लोगों ने अपने रिश्तेदारों के लिए कुछ गिफ्ट लिए। यहां पर हम लोगो ने कुछ विदेशी लोगों को भी देखा, जो भारतीय मंदिर और संस्कृति की बहुत ज्यादा रिस्पेक्ट करते हैं। 

हमारी पुष्कर के सावित्री देवी मंदिर (Savitri mata temple pushkar) की यात्रा बहुत ही अच्छी रही और यहां पर हम अपने फैमिली और दोस्तों के साथ आए थे। यहां पर हमने बहुत इंजॉय किया। यहां के दृश्य अविस्मरणीय थे। यहां पर हम ठंडी में आये थे। 

अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो, तो इस लेख को शेयर जरूर कीजिएगा और अगर आप पुष्कर गए हो तो अपने एक्सपीरियंस हमसे शेयर कीजिए. 

अपना समय देने के लिए धन्यवाद


Paat Baba Temple, Jabalpur - पाठ बाबा मंदिर, जबलपुर

Famous Hanuman Temple of Paat Baba Temple Jabalpur.
पाठ बाबा मंदिर - जबलपुर का प्रसिद्ध हनुमान मंदिर


जबलपुर (Jabalpur) एक प्रसिद्ध शहर है। जबलपुर (Jabalpur)  मध्य प्रदेश का एक प्रसिद्ध जिला है। जबलपुर में आपको बहुत सारे दर्शनीय स्थल देखने मिलते है। हम आज एक जबलपुर (Jabalpur) में स्थित एक बहुत खूबसूरत मंदिर की बात करने वाले है। आप इस जगह पर जाकर अपना बहुत अच्छा टाइम बता सकते हैं। आज हम आपको लेकर चल रहे हैं  पाठ बाबा मंदिर (Paat Baba Temple)

Paat Baba Temple, Jabalpur - पाठ बाबा मंदिर, जबलपुर


हनुमान जी का मंदिर 


पाठ बाबा मंदिर (Paat Baba Temple) बहुत खूबसूरत मंदिर है। यहां का वातावरण है बहुत बढ़िया वातावरण है। यहां पर चारों तरफ ऊंचे ऊंचे पहाड़ हैं। यहां पर हनुमान जी का मंदिर है, जो बहुत फेमस है। 

यह मंदिर जिस एरिया में स्थित है। वह पूरा मिलेट्री एरिया लगता है। पाठ बाबा मंदिर (Paat Baba Temple) का वातावरण शांत है। यहां पर आपको बहुत शांति मिलती है, क्योंकि यहां पर किसी भी तरह का शोर-शराबा नहीं रहता है। मंदिर जाने का रास्ता और मंदिर बहुत अच्छी तरह से साफ सुथरा है। 

पाठ बाबा मंदिर (Paat Baba Temple) पहुंचने के लिए आपको घमापुर के आगे आना पड़ता है। घमापुर के आगे सतपुला बाजार पड़ता है। सतपुला बाजार से आपको आगे आना पड़ता है। आपको यहां पर गन कैरिज फैक्ट्री देखने मिलती है। इस  फैक्ट्री से आप आगे बढ़ते हैं, तो आपको मंदिर जाने का रास्ता दिखाई देगा। मंदिर जाने के लिए रास्ते में ही मंदिर का प्रवेश द्वार बनाया गया है। इस प्रवेश द्वार से होते हुए आप मंदिर जा सकते है। यहां पर जो रास्ता है वहां चढाई वाला रास्ता होता है।   

Paat Baba Temple, Jabalpur - पाठ बाबा मंदिर, जबलपुर

मंदिर का प्रवेश द्वार 


आप मंदिर तक पहुंच जाते हैं। यहां पर पार्किंग के लिए बहुत बड़ा स्पेस दिया गया है। अपनी गाड़ी खड़ी कर सकते हैं। उसके बाद आप मंदिर के प्रवेश द्वार पर पहुंचते है। तो मंदिर परिसर के प्रवेश द्वार पर आपको हनुमान जी की एक बहुत ही अद्भुत प्रतिमा देखने मिलती है, जो दीवार पर उकेरी गई है। यह पेंटिंग बहुत अच्छी लगती है। मंदिर परिसर में अंदर जाने के लिए लोहे का गेट है। लोहे के गेट को बंद ही रखा जाता है। लोहे के गेट के के बाजू में जो छोटा गेट है। उसे खोला जाता है भक्तों के अंदर जाने के लिए।

Paat Baba Temple, Jabalpur - पाठ बाबा मंदिर, जबलपुर

मंदिर परिसर का प्रवेश द्वार 

पाठ बाबा मंदिर (Paat Baba Temple) में आपको आकर बहुत अच्छा लगेगा। क्योंकि यहां पर बहुत शांति है। इस मंदिर में भगवान हनुमान जी की बहुत ही आकर्षक प्रतिमा है। इसके अलावा यहां पर यह जो मंदिर है। वह बहुत बड़े क्षेत्र फैला हुआ है।  मंदिर परिसर में हनुमान जी का मंदिर बना हुआ है और हनुमान जी की बहुत ही आकर्षक प्रतिमा है। मंदिर परिसर में इसके अलावा दुर्गा जी का मंदिर भी बना हुआ है और दुर्गा जी की बहुत खूबसूरत विद्मान है। परिसर में शंकर जी का शिवलिंग भी स्थापित है। उनके लिए अलग मंदिर बना हुआ है। 

पाठ बाबा मंदिर (Paat Baba Temple) में बच्चों के खेलने के लिए आपको एक छोटा सा प्ले गांउड देखने मिल जाता है। जिसमें बच्चों के लिए झूले एवं फसलपटटी बनी हुई है। इसके अलावा मंदिर परिसर में बैठने की अच्छी व्यवस्था भी है। यहां पर चेयर बना हुआ है। आप मंदिर में कुछ टाइम बैठ सकते हैं और अपना अच्छा समय बिता सकते हैं। 

Paat Baba Temple, Jabalpur - पाठ बाबा मंदिर, जबलपुर

मंदिर परिसर  


आप पाठ बाबा मंदिर (Paat Baba Temple) में जाते हैं, तो बाहर आपको दुकाने देखने मिलती है। यहां पर ज्यादा दुकान नहीं है। दो ही दुकानें थी जब हम गए थें। जहां पर हनुमान जी को चढ़ाने के लिए प्रसाद और अगरबत्ती मिल जाती है। यहां पर हुनमान जी को अर्पण करने के लिए लडडू भी मिलते है। आप प्रसाद लेकर मंदिर में प्रवेश कर सकते हैं। आप अंदर प्रवेश करते हैं। आप मंदिर में प्रवेश करते है तो उस रास्ते के दोनों तरफ आपको नारंगी रंग के झंडे देखने मिलते है। आपको चप्पल उतार के रखने के लिए स्टैड दिखता है। आप अपनी चप्पल को स्टैंड में रखकर आप पैर धोकर मुख्य हनुमान मंदिर में जा सकते हैं और हनुमान जी के दर्शन कर सकते हैं। यहां पर पूरे मंदिर में टाइल्स लगी हुई है। मंदिर परिसर में बगीचा भी है। जहां पर तरह तरह के पेड लगें हुए है। मंदिर में आपको लाइब्रेरी भी देखने मिलती है। लाइब्रेरी में पुस्तकों का संग्रह है।   आप किताबें पढ़ सकते हैं। इसके लिए शायद मेंबरशिप लेनी पड़ती होगी। अगर आप पुस्तक पढ़ने के शौकीन हैं। आप यहां पर आकर शांत माहौल में पुस्तक पढ़ने का अपना शौक पूरा कर सकते हैं। यहां पर आकर हम लोगों को बहुत अच्छा लगा था। यहां पर शांत माहौल था और बहुत सारे लोग यहां पर शाम को आते हैं। भगवान जी के दर्शन करते हैं। यहां पर सतपुला की बाजार भी भर्ती है, तो आप यहां से बाजार करते हुए अपने घर जा सकते हैं। बाकी यहां पर आपका मन बहुत शांत होता है और बहुत अच्छा लगता है।

यह बहुत आध्यात्मिक जगह है। मंदिर परिसर के चारों ओर जंगल है जिससे यहां पर मोर और बंदर आपको देखने मिलते है। यह पहाड़ी है। मंदिर का प्रबंधन बहुत अच्छा है। सभी चीजों की सुविधा यहां पर मौजूद है। मंदिर में कचरा न फैलाने के लिए नेाटिस बोर्ड लगा हुआ है और यहां पर डिस्टबिन भी रखा हुआ है। आप मंदिर में अपने परिवार और दोस्तों के साथ आ सकते है। 

हम लोग इस मंदिर में गए थे। इस मंदिर में बहुत सारे कुत्ते थे। जो शायद यहां पर रहते होगें। हम लोग को जानवर से बहुत पसंद है। तो हम लोगों ने उन्हें बिस्किट खिलाई। आप भी जानवरों को पसंद करते हैं तो आप उन्हें खाना देकर उनकी मदद कर सकते हैं। हम सब लोगों को जानवरों से प्यार करना ही चाहिए क्योंकि वह बहुत प्यारे होते हैं और वफादार होते हैं।

हम अपना लेख यहीं पर समाप्त करते हैं। आपको लेख पसंद आया होगा तो आप इस लेख को जरूर शेयर और अपने अनुभव हम से बाॅटे।

अपना समय देने के लिए धन्यवाद।



Bahoriband-Kankali Devi Temple Tigawa (कंकाली देवी मंदिर )

Kankali Devi Temple 

कंकाली देवी मंदिर 


कंकाली देवी मंदिर बहोरीबंद (Kankali Devi Temple) के पास के एक गांव में स्थित है। इस गांव में कंकाली देवी मंदिर (Kankali Devi Temple) के अलावा एक मंदिर और भी स्थित है। यह एक पुरातात्विक स्थल है और यहां पर आपको बहुत ढेर सारे खूबसूरत नक्काशी भरे पत्थर पर उकेरी गई कई कलाकृतियां देखने मिल जाएगी। यह एक बहुत प्राचीन स्थल है और आप इस जगह पर बहुत आसानी से आ सकते हैं। यह बहुत ही प्राचीन मंदिर है। 

Bahoriband-Kankali Devi Temple Tigawa (कंकाली देवी मंदिर )

कंकाली देवी मंदिर 

कंकाली देवी मंदिर (Kankali Devi Templeकटनी जिले में स्थित है। यह कटनी जिले के बहोरीबंद तहसील (Bahoriband Tehsilके पास स्थित है। आप इस मंदिर पर अपनी गाड़ी से आसानी से आ सकते हैं। इस मंदिर तक कोई भी टैक्सी या बस वगैरह नहीं चलती है। आपको अपनी गाड़ी से ही आना होगा। इस मंदिर तक आने के लिए आपको अच्छी सड़क मिल जाती है, या बहोरीबंद तहसील (Bahoriband Tehsil) से जो कटनी जिले की तहसील है वहां से 3 या 4 किलोमीटर दूर होगा, तो आप यहां पर अपनी गाड़ी से आसानी से आ सकते हैं।

Bahoriband-Kankali Devi Temple Tigawa (कंकाली देवी मंदिर )

तिगवा में स्थापित पत्थर के शिवलिंग 

आपको यहां पर आकर बहुत ही सुंदर कंकाली देवी का मंदिर (Kankali Devi Temple) देखने को मिलता है, जो करीब 1000 साल पुरानी है। यह मंदिर सपाट छत वाला है। मंदिर के सामने छोटा सा आंगन बना हुआ है, जो जिसके बीच में एक हवन कुंड बना हुआ है। मंदिर के बाजू में ही एक बोर्ड लगा हुआ है, जिसमें मंदिर के बारे में जानकारी दी गई है। इस मंदिर में आपको खूबसूरत पत्थर पर की गई  नक्काशी देखने मिलती है। मंदिर पर खंभे बने हुए हैं, दो खंभे बने हुए हैं। जिस पर आपको खूबसूरत फूलों की आकृतियां देखने मिलती है। जिसको पत्थर पर उकेरकर बनाया गया है। मंदिर की दीवारों पर आपको भगवान विष्णु की खूबसूरत प्रतिमा देखने मिलेगी जिसको पत्थर पर उकेरकर कर बनाया गया है, जो बहुत खूबसूरत लगती है। इसके अलावा यहां पर भगवान पार्श्वनाथ की भी प्रतिमा आपको देखने मिलती है। यह मंदिर बहुत खूबसूरत है और मंदिर की जो छत है। वह सपाट है, मतलब किसी भी तरह का यहां पर गुंबद नहीं बना हुआ है। यह जो पूरा मंदिर है, यह पूरा मंदिर पत्थर से बना हुआ है और मंदिर के अंदर गर्भ गृह में कंकाली माता की प्रतिमा स्थित है। जिनके दर्शन आप कर सकते हैं। यहां पर वैसे तो जब हम लोग गए थे, तो ताला लगा था मगर किसी खास अवसर पर यह मंदिर खोला जाता है, और आप भगवान जी के दर्शन कर सकते है। आप माता जी के दर्शन कर सकते हैं। 

वहां पर कंकाली देवी की मंदिर (Kankali Devi Temple) के अलावा और भी बहुत सारी मूर्तियां है, जो आप देख सकते हैं। यहां पर जितने भी मूर्तियां हैं। वह सारी मूर्तियां पत्थर की बनी हुई है। यहां पर आपको एक वॉचमैन भी है, जो इस मंदिर की देखरेख करता है। यह एक ऐतिहासिक धरोहर है। 

Bahoriband-Kankali Devi Temple Tigawa (कंकाली देवी मंदिर )

 पत्थर की खूबसूरत कलाकृति 

इस जगह पर बहुत कम लोग आते हैं। इस जगह को देखने के लिए क्योंकि इस जगह की जानकारी काफी लोगों को नहीं है। मगर यह जगह खूबसूरत है। 

यहां पर चारों तरफ पत्थर की बहुत सारी अलग-अलग प्रकार की कलाकृतियां मौजूद है, जिन्हें आप देख सकते हैं। इस जगह पर कंकाली देवी जी के मंदिर (Kankali Devi Temple) के अलावा भी एक अन्य मंदिर स्थित है, जो शायद दुर्गा जी को समार्पित है।  यहां पर विशेषकर यहां के गांव वाले आते हैं। कंकाली देवी जी (Kankali Devi jiकी पूजा करने के लिए। 

Bahoriband-Kankali Devi Temple Tigawa (कंकाली देवी मंदिर )

दुर्गा माता का मंदिर 

यहां पर आप भगवान शिव जी के बहुत से शिवलिंग देख सकते हैं, जो पुराने समय के है। ये शिवलिंग पत्थर पर बना हुआ है। हम ने यहां पर तीन या चार शिवलिंग देखें थे। 

यह जो जगह है, वह तिगमा (Tigawa) नाम से प्रसिद्ध है। यहां जगह छोटा से एरिया में ही फैली हुई है और यह जगह चारों तरफ से बाउंड्री वॉल से घिरा हुआ है।  यहां पर आपको किसी भी तरह की एंट्री फी नहीं लगती है अंदर आने के लिए। यहां पर आकर घूम सकते हैं। यहां पर मंदिर भी है। यहां पर दुर्गा जी का जो मंदिर है। वहां पर पूजा होती रहती है और लोग यहां पर आकर भंडारे करते रहते हैं। हम लोग जब इस जगह पर आए थे। तब यहां पर पूजा हो रही थी और भंडारा बनाया जा रहा था। 

हम लोग इस जगह पर घूमने के लिए अपनी स्कूटी से आए थे। हम लोग पहले रूपनाथ मंदिर घूमे थे। उसके बाद हम लोग तिगमा (Tigawa) के कंकाली देवी मंदिर आए थे। यह जगह रूपनाथ धाम करीब 10 या 12 किलोमीटर दूर होगा। आप रूपनाथ धाम से इस जगह में आराम से जा सकते हैं।

यहां पर हम लोगों को काफी अच्छा लगा और यहां पर ज्यादा भीड़ भाड़ नहीं रहती है। यहां पर गांव वाले ही लोग रहते है, तो आप यहां पर अपनी फैमिली के साथ आ सकते हैं और अपने दोस्तों के साथ भी आ सकते हैं। अगर आप  पुरानी चीजें देखने के शौकीन हैं, तो आप यहां पर जरूर आकर देख सकते हैं। यहां पर आपको मंदिर के बाजू में ही एक तालाब है। 

हमें इस जगह आ कर बहुत अच्छा लगा। हम इस जगह दो बार आ चुके हैं और यहां पर काफी अच्छा और शांत माहौल रहता है। आप भी यहां आ सकते हैं और अपना अच्छा समय बिता सकते हैं। यहां पर आने के लिए अच्छी सड़कें हैं, तो आप अपनी गाड़ी से आसानी से आ सकते हैं। 

अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो, तो आप इस लेख को शेयर जरूर करें और अगर आप इस जगह आए हो तो अपने विचार हमसे साझा जरूर करें। 

आपने अपना समय दिया इसके लिए धन्यवाद


Chausath Yogini Temple, Jabalpur -- चौंसठ योगिनी मंदिर, जबलपुर

चौंसठ योगिनी मंदिर, जबलपुर

Chausath Yogini Temple, Jabalpur

दोस्तों हम लोगों ने धुंआधार जलप्रपात पूरा घूम लिया उसके बाद हम लोग जा रहे चौंसठ  योगिनी मंदिर दोस्तों अगर आप लोग धुंआधार जलप्रपात घूमने जाते है तो आपको चौंसठ  योगिनी मंदिर भी जरूर घूमना चहिए। चौंसठ योगिनी मंदिर धुंआधार जलप्रपात से लगभग 1 से 1.5 कि.मी. की दूरी पर स्थित है। अगर आप रविवार को जाते है तो आपको बाजार भी देखने मिल जाती है । जी हाॅ रास्ते में छोटा सा साब्जियों का बाजार भरता है । साब्जियों के अलावा भी बहुत सारा सामान मिलता है। हम लोगो ने भी कुछ सामान वहां से खरीदा था। तो दोस्तो बात करते है चौंसठ योगिनी मंदिर की आपको यहां तक पहुॅचने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी होगी। बहुत आसान रास्ता है आपको धुंआधार जलप्रपात से सीधा आना है । मुख्य मार्ग में ही चौंसठ योगिनी मंदिर स्थित है। हम लोगों को मंदिर तक पहुॅचने तक शाम हो गई थी शायद 6 बजा गए थे। यहां मंदिर सूर्यास्त होते ही बंद हो जाता है हम लोग गर्मी में गये थे तो हम लोग मंदिर जा पाये। क्योकि गर्मी में सूर्यास्त देर से होता है। 
 Chausath Yogini Temple, Jabalpur
Main Temple

 Chausath Yogini Temple, Jabalpur
Temple outside view
मंदिर में पहुॅचते ही हमें एक प्रसाद की दुकान दिख वहाॅ पर एक दादा प्रसाद बना रहे थे। उन्होनें हम गाडी साइड में लगाने का इशारा किया और हमारे लिये 50 रू. का प्रसाद बांध दिया। हम लोगों ने भी प्रसाद ले लिया और मंदिर की ओर बढ चले। मंदिर की सढियाॅ पत्थर की बनी है। शाम हो गई थी मगर सीढियाॅ चढते चढते मेरी तो हालत खराब हो गई। पता नही मेरे दोस्तो का हाल क्या था। यहां मंदिर एक पहाडी पर बना है। मंदिर की चारों ओर बेल, महुआ, और अनेक प्रकार के पेड पौधे लगे हुए थे । मुझे तो ज्यादा पेडों का नाम नहीं पता है। मगर चढाई में बहुत मेहनत लगती है। हम लोग जैसे तैसे मंदिर तक पहुॅचे । मंदिर के बाहरी एरिया में बैठने की व्यवस्था है। पीने के पानी के लिए वाॅटर कूलर लगा हुआ है जहां आपको ठंडा पानी मिलेगा और नजारा बहुत ही ज्यादा शानदार है मै अपनी इस लेख में वर्णन नहीं कर सकती है। मगर बहुत प्यारा नजारा होता है शाम का अगर आप मेरी सलाह मानें तो शाम के समय मंदिर जाना सूर्यास्त नजारा आपके मन को मोह लेगा। मैने जो वीडियो डाला है उससे समझे लें 50 गुना और अधिक खूबसूरत नजारा आपको शाम को देखने मिलेगा। 
 Chausath Yogini Temple, Jabalpur
Temple inside view

 Chausath Yogini Temple, Jabalpur
Temple inside view



हम लोगों ने मंदिर में प्रवेश किया। पूरा मंदिर पत्थर से बनाया गया है आपके हर जगह हर जगह पत्थर की मूर्ति, पत्थर की दीवार, पत्थर का मंदिर सब पत्थर का है। गर्मी के समय में मंदिर के प्रवेश द्वार से मुख्य मंदिर तक दरी बिछी हुई थी ताकि लोगों के पैर न जलें। हम लोगों ने चप्पल मंदिर के बाहर उतार दी थी। फिर हम लोग (मै और मेरे दोस्त) मुख्य मंदिर में गये। वहाॅ पर दो लोग थे। एक पंडित जी थे एवं एक मंदिर के चैकीदार थे। पंडित जी ने हमारा प्रसाद लिया और मुख्य मंदिर के अंदर गये। मुख्य मंदिर में दुर्गा जी की पत्थर मूर्ति है इसके अलावा शंकर जी की पत्थर की मूर्ति है और अन्य देवी देवता की मूतियाॅ विराजमान है। सभी मूर्तियाॅ पत्थर की है। पंडित जी ने प्रसाद चढाया उसके बाद हम बाहर आ गये और मुख्य मंदिर की फोटो लेने लगे तो पंडित जी मना कर दिया। मुख्य मंदिर की देवी की फोटो लेना मना है। फिर हम लोगो ने वहां की फोटो नहीं लिया मुख्य मंदिर के सामने एक बडा सा घण्टा लगा हुआ है।  शंकर जी की दो प्रतिमा विद्मान है ये प्रतिमा भी पत्थर की है। उसके बाद हम लोगों ने पूरा मंदिर घूमा चौंसठ योगिनी को पूरी मूतियाॅ देखी। यहां पूरा मंदिर गोलाकर आकार में बना हुआ है और चौंसठ देवियों की मूतियाॅ गोलाकार में मंदिर में पत्थर को तराशा कर बनाई गई है। यहां की सभी मूर्तियाॅ खण्डित अवस्था में है। आप मेरा यूटूयूब वीडियों देखेगें तो आपको समझा में आयेगा। वीडियो में मैने आपको एक एक मूर्तियाॅ दिखाया है। गोलाकर मंदिर के बीच में मुख्य मंदिर है। हम लोगों ने पूरा मंदिर घूमा कर बाहर आये फिर हम लोगों ने मंदिर का बाहरी हिस्सा घूमा। मंदिर का बाहरी हिस्सा भी गोलाकार है और जाली लगी ताकि कोई गिरे नहीं।

 Chausath Yogini Temple, Jabalpur
Sunset view 


मगर मै आप लोगो एक बात कहना चाहती हॅू अगर आप लोगो शाम को इस मंदिर में आते है तो आपको बहुत ही शानदार नजारा मिलेगा और यहां पर इतनी शांति है कि यहां से मेरा तो जाना का मन नहीं था। मगर क्या करूॅ जाना तो पडेगा ही। 
मेरी सलाह है कि आप लोग आते है तो शाम को सूर्यास्त के समय मंदिर आये आपको बहुत खुशी होगी और आपको यात्रा का आंनद भी मिलेगा। 
वैसे दोस्तों यहां मेरा अनुभव था। आप अगर यहां पर आते है आप अपना अनुभव मुझे कमेंट बाॅक्स में जरूर बताये और मेरे यूटूयूब चैनल को सपोर्ट करें।

My youtube Video link




धन्यवाद लेख को पढने के लिए 

Muhas Hanuman Temple || मुहास हनुमान मंदिर

Muhas Hanuman Temple
मुहास हनुमान मंदिर 

हड्डी जोड़ने वाला मुहास का हनुमान मंदिर


Muhas Hanuman Temple || मुहास हनुमान मंदिर

हनुमान मंदिर का मुख्य द्वार  


हनुमान मंदिर मुहास (Muhas Hanuman Temple) बहुत प्रसिद्ध है। इस हनुमान मंदिर को हड्डी जोड़ने वाले मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। लोगों का मानना है कि यहां पर हनुमान जी स्वयं लोगों की हड्डी जोड़ने का इलाज करते हैं। यह मंदिर पूरे भारत देश में प्रसिद्ध है। इस मंदिर के बारे में न्यूज चैनलों में भी आ चुका है। इस मंदिर की प्रसिद्धि पूरे देश में है। यहां पर जो भी लोग आते हैं। वह अपनी समस्या लेकर आते हैं और हनुमान जी उनकी समस्या को ठीक करते हैं।

मुहास हनुमान मंदिर कहा है
Where is Muhas Hanuman Temple


हम लोग भी इस मंदिर में घूमने गए थे। यह मंदिर मध्यप्रदेश के कटनी जिले में स्थित है। यह मंदिर कटनी जिले से लगभग 35 किमी दूर होगा। यह रीठी तहसील की मुहास नाम के गांव में स्थित है। यह एक छोटा सा मंदिर है, ज्यादा बड़ा मंदिर नहीं है। यह मंदिर बहुत ही खूबसूरती से बनाया गया है। यह मंदिर मुहास में मेन रोड में स्थित है। आप यहां पर अपनी गाड़ी से जा सकते हैं। यहां पर बसें भी चलती होंगी, मगर वो टाइम टेबल से चलती होंगी, तो अगर आप बस से यहां आना चाहते हैं। तो टाइम का विशेष ध्यान दें। मगर मेरे हिसाब से आप यहां पर अपनी गाड़ी से आएंगे, तो वह आपके लिए बेस्ट होगा। 

मुहास के हनुमान मंदिर (Muhas Hanuman Temple) के बारे में कहा जाता है, कि जिन लोगों की हड्डियां फैक्चर हो जाती हैं या टूट जाती है। ऐसे लोगों यहां पर आकर अपना इलाज करवाते है, तो यहां आने पर उनकी हड्डियों को दोबारा जोड़ा जा सकता है। वैसे यह सब मेडिकल साइंस के हिसाब से संभव नहीं है। मगर यहां आने वालों श्रध्दाुलों की मानें तो इस बात पर आपको विश्वास किया जा सकता है। यहां पर मंगलवार की दिन लोगों की भीड लगी रहती है। यहां पर मंगलवार के दिन के अलावा भी लोग आपको देखने मिल जाएगें। 

मुहास के हनुमान मंदिर (Muhas Hanuman Temple) में जो भी लोग अपना इलाज कराने आते है। वो यह पर दो या तीन बार आते है। तब जाकर उनका रोग ठीक हो जाता है। मंदिर के बाहर आपको दुकान देखने मिलती है, जहां पर मंदिर में चढाने के लिए प्रसाद मिल जाता है। इन दुकानों में आपको जड़ी बूटियों का तेल भी मिल जाएगा, जो आप के दर्द को कम करता है। तेल में वैसे यह लिखा रहता है और यह पर दुकान वाले लोग भी यही कहकर बेचते है। बाकी इस तेल के बारे में मुझे जानकारी नहीं है, कि वह आपके दर्द वगैरह को कम करता है कि नहीं। यह तेल आपको बहुत कम कीमत में मिल जाता है। 

अगर आप इस हनुमान मंदिर पर आते है, तो आपको यह पर बहुत अच्छा लगेगा। यहां पर बहुत सारे लोग आते हैं और यहां पर भजन कीर्तन होता रहता है। यहां पर मंगलवार और शानिवार को बहुत ज्यादा भीड़ होती है और इस दिन ही इस मंदिर में मिलने वाली दवाई का असर ज्यादा होता है। 

यहां पर जिन लोगों की हड्डियां टूट जाती हैं। वह यहां पर स्ट्रेचर से आते हैं या एंबुलेंस में आते हैं। यहां पर उन्हें कुछ देर मंदिर परिसर में बैठने के लिए कहा जाता है और राम भगवान का जाप करने के लिए कहा जाता है। फिर  उन्हें औषधि दी जाती है और यह औषधि लोगों को खानी पड़ती है। इस औषधि के बारे में कहा जाता है, कि यह औषधि पूरी तरह से प्राकृतिक होती है। यहां पर एक पंडित जी ने हमें बताया कि यह संजीवनी बूटी होती है, जो हनुमान जी ने लाए थे, लक्ष्मण जी के इलाज के लिए। तो उसी औषधि से लोगों का इलाज होता है। यह औषधि प्राकृतिक होती है जिसको खाकर यहां पर जो भी लोग आते हैं। वह ठीक हो जाते हैं।

Muhas Hanuman Temple || मुहास हनुमान मंदिर

हनुमान मंदिर परिसर  


मुहास का हनुमान मंदिर (Muhas Hanuman Temple) ज्यादा बडा नहीं है। मंदिर परिसर में आंगन बहुत बड़ा है। उसमें लोग बैठकर भजन कर सकते हैं और यहां पर हनुमान जी की प्रतिमा बनाई गई है, जो बहुत ही आकर्षक है देखने में। शिव भगवान जी की मूर्ति भी स्थापित की गई है जिनकी पूजा आप कर सकते हैं।

हम लोगों को इस मंदिर में बहुत अच्छा लगा था। यहां पर आकर हमने अपने पैर हाथ धुले और प्रसाद लिया। भगवान हनुमान के दर्शन किए। कुछ देर इस मंदिर में बैठे और फिर अपने घर आ गये। मंदिर के आसपास आपको बहुत सारी दुकानें भी मिलती हैं। जहां पर अगर आप कहीं दूर से आ रहे हो, तो दुकान मे खाने-पीने की व्यवस्था भी मिल जाती है। जहां पर आप चाय नाश्ता कर सकते है। यहां पर आप अपनी परिवार और दोस्तों के साथ आ सकते है। 

हमें इस जगह आ कर बहुत अच्छा लगा।  यहां पर काफी शांत वाला माहौल रहता है। आप भी यहां आ सकते हैं और अपना अच्छा समय बिता सकते हैं। यहां पर आने के लिए अच्छी सड़कें हैं, तो आप अपनी गाड़ी से आसानी से आ सकते हैं। 

अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो, तो आप इस लेख को शेयर जरूर करें और अगर आप इस जगह आए हो या आने चाहते हो, तो अपने विचार हमसे साझा जरूर करें। 

आपने अपना समय दिया इसके लिए धन्यवाद


Kachnar City Jabalpur -- जबलपुर का कचनार सिटी शिव मंदिर

Kachnar City Jabalpur

कचनार सिटी मंदिर


कचनार सिटी मंदिर (Kachnar City Temple) जबलपुर शहर का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। यहां पर शिव भगवान की आपको बहुत ही सुंदर प्रतिमा देखने मिलती है । यह प्रतिमा बहुत ही ऊंची है, इस प्रतिमा के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। कचनार सिटी मंदिर (Kachnar City Temple) में बहुत ही खूबसूरत गार्डन बना हुआ है एवं गार्डन के बीच में इस सुंदर प्रतिमा का निर्माण किया गया है। गार्डन में शिव भगवान की प्रतिमा के आतिरिक्त और भी प्रतिमाए है जो बहुत खूबसूरत है। यहां पर 12 ज्योतिर्लिंगों की स्थापना भी की गई है। शिव भगवान की विशाल प्रतिमा के सामने नंदी भगवान की सफेद पत्थर की प्रतिमा भी स्थित है। 

Kachnar City Jabalpur
Kachnar City Jabalpur

कचनार सिटी शिव मंदिर


कचनार सिटी मंदिर (Kachnar City Temple) बहुत खूबसूरत है। मंदिर में खुले आसमान के नीचे शिव भगवान की बहुत ही खूबसूरत और उची प्रतिमा विराजमान है। शंकर भगवान की यह प्रतिमा 76 फीट उची है। इस मंदिर में शिव भगवान की बैठी हुई मुद्रा में प्रतिमा है। यहां मंदिर साफ सुथरा और अच्छी तरह से प्रबन्धित है। यहां पर आकर आपको बहुत शांती मिलती है। शंकर भगवान की प्रतिमा के अंदर ही आपको एक गुफा देखने मिलेगी। गुफा के अंदर 12 शिवलिंग की स्थापना की गई है। गुफा के अंदर 12 शिवलिंग है वहां 12 ज्योतिर्लिंगों के प्रतिरूप है। आप गुफा में एक दरवाजे से घुसते है और 12 शिवलिंगों के दर्शन करते हुए दूसरे दरवाजे से बाहर आ जाते है। ये 12 ज्योतिर्लिंगों के प्रतिरूप अलग अलग जगहों से लाये गए है। मंदिर परिसर में खूबसूरत गार्डन है, जिसमें शिव भगवान की भव्य प्रतिमा के अतिरिक्त और भी प्रतिमाए बनाई गई है, गार्डन को सजाने के लिए जो बहुत आकर्षक लगती है। ये प्रतिमाए रिषि मुनि की है जो शिव भगवान का भजन कर रही है। आप जब कचनार सिटी मंदिर  (Kachnar City Temple) आते है तो आपको मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वारा में लोहे के गेट उपर शिव भगवान और माता पार्वती की भव्य प्रतिमा देखने मिलती है। आप मंदिर के अंदर जाते हैं तो आपको शिव भगवान की विशाल प्रतिमा देखने मिल जाती है। आप अपने पैर धोकर अंदर जा सकते हैं। चप्पल रखने के लिए आपको यहां पर एक चप्पल स्टैंड मिल जाता है। जहां पर आपसे 2 Rs. लिया जाता है और आप वहां पर चप्पल रख सकते हैं। उसके बाद आप भगवान शिव जी के दर्शन करने जा सकते हैं। शिव भगवान जी की बहुत बड़ी प्रतिमा यहां पर बनी हुई है। यह प्रतिमा 76 फीट ऊंची है। प्रतिमा के सामने ही यज्ञ स्थल बना हुआ है जहां पर यज्ञ किये जाते है। आपको शिव भगवान के दर्शन करके बहुत अच्छा लगेगा है। यहां पर खूबसूरत गार्डन भी बना हुआ है, आपको यहां पर बैठने की जगह भी है, जहां पर आप बैठ सकते है और शांती से अपना समय गुजर सकते है। यहां पर शिव भगवान जी की प्रतिमा के सामने ही नंदी भगवान की प्रतिमा है। नंदी भगवान और शिव भगवान दोनों की प्रतिमा आमने-सामने है। इस मंदिर का निर्माण का श्रेय कचनार बिल्डर श्री अमित तिवारी को जाता है जिन्होंने इस मंदिर को बनवाया है। 

Kachnar City Jabalpur
Kachnar City Jabalpur


कचनार सिटी मंदिर (Kachnar City Temple) साल में सभी दिन खुला रहता है, और यहां पर लोगों का आना जाना लगा रहता है। इस मंदिर के खुलने का समय सुबह से दोपहर तक रहता है। मंदिर शायद 12 या 1 बजे बंद हो जाता है। उसके बाद मंदिर शाम को 5 बजे खुलता है। शिवरात्रि और सावन सोमवार के दिन मंदिर पूरे दिन खुला रहता है। मंदिर के बाहर आपको रेस्टोरेट देखने मिल जाते है जहां पर आप चाय पी सकते है और नाश्ता भी कर सकते है। यहां पर आपको वाहन पर्किग, पीने के पानी की व्यवस्था, बाथरूम की सुविधा मिल जाती है। कचनार सिटी मंदिर (Kachnar City Temple) रात में खूबसूरत लाइट की रोशनी में जगमगा जाता है। रात में भी यहां पर आपको बहुत अच्छा लगेगा। मंदिर को रंगीन लाइटों से सजाया गया है, जो रात को जलती है और मंदिर की खूबसूरती और अधिक बढ जाती है। यहां पर शाम को आरती 7 बजे होती है जिसमें आप शमिल हो सकते है, अगर शाम को आते है। 

Kachnar City Jabalpur
Kachnar City Jabalpur


कचनार सिटी मंदिर (Kachnar City Temple) जबलपुर जिले में विजय नगर में स्थित है। जबलपुर मध्य प्रदेश का एक जिला है, जबलपुर जिले को संस्कारधानी के नाम से भी जाना जाता है। यहां पर आपको बहुत सारे दर्शनीय स्थल देखने मिल जाते हैं जिनमें से कचनार सिटी मंदिर (Kachnar City Temple) भी एक प्रमुख दर्शनीय स्थल है। जबलपुर रेल्वे स्टेशन से कचनार सिटी मंदिर की दूरी 7 से 8 किमी की होगी। आपको इस मंदिर तक पहुंचने के लिए विजय नगर चैक तक जाना होगा। अगर आप आटो से आते है तो चैक से इस मंदिर तक आपको पैदल ही जाना होगा। चैक से मंदिर की दूरी 1 किमी हो सकती है। आप यहां पर मेट्रो बस से भी आ सकते है। मेट्रो बस भी आपको विजय नगर चैक तक छोडगी बाकि का रास्ता आपको पैदल ही जाना होगा। यहां तक जाने के लिए आपको पक्की सड़क मिल जाती है। यहां जाने के लिए मेट्रो बस और ऑटो चलती रहती है। आपको किसी भी आपको जबलपुर के किसी भी क्षेत्र से यहां जाने के लिए मेट्रो बस और ऑटो मिल जाएगी। आप अपने वाहन से भी इस मंदिर तक असानी से आ सकते है। 

शिवरात्रि और सावन सोमवार का मेला


कचनार सिटी मंदिर (Kachnar City Temple) में शिवरात्रि और सावन सोमवार में बहुत ज्यादा भीड़ होती है। यहां पर महाशिवरात्रि में और सावन सोमवार में विशाल मेले का आयोजन होता है और यहां पर भंडारे का भी आयोजन होता है, जिसमें जाकर आप भंडारे को ग्रहण कर सकते हैं। आपको महाशिवरात्रि एवं सावन सोमवार के टाइम में यहां बहुत ज्यादा भीड़ देखने मिलती है। यहां पर आपको विजयनगर चैक और मंदिर तक जो रोड बनी हुई है, उसमें तरह तरह की दुकानें और भंडारे देखने मिल जाती है महाशिवरात्रि एवं सावन में। आपको यहां पर अनेक तरह के सामने मिल जाएगे वो भी सस्ते रेट पर। 
Kachnar City Jabalpur
Kachnar City Jabalpur

कचनार सिटी मंदिर (Kachnar City Temple) बहुत खूबसूरत एवं शांत जगह है। मंदिर में शिव भगवान की एक विशाल प्रतिमा है, जिसके दर्शन करने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। आपको यहां पर आकर बहुत अच्छा लगेगा। आप यहां पर अपनी फैमिली और दोस्तों के साथ आ सकते है और अच्छा समय बिता सकते है। 

चौसठ योगिनी मंदिर, जबलपुर
निदान कुंड जलप्रपात, दमोह
नजारा व्यूप्वाइंट, दमोह
पचमढ़ी यात्रा

Adegaon Fort and Kalbhairav Temple || आदेगांव का प्रसिध्द कालभैरव जी का मंदिर

आदेगांव का किला एवं काल भैरव जी का मंदिर


आदेगांव का किला (Adegaon Fort) एवं काल भैरव जी का मंदिर (Kaal Bhairav ji ka mandir) एक खूबसूरत पर्यटन स्थल है।  किले के अंदर कालभैरव जी का अतिप्रचीन मंदिर है। आदेगांव का किला (Adegaon Fort) 18 वी शताब्दी में बनाया गया था। इस मंदिर में काले भैरव, बटुक भैरव एवं नाग भैरव की सुंदर प्रतिमाए स्थित है। इस जगह में और भी चमत्कारी वस्तुए मौजूद है। यह पर श्यामलता का वृक्ष स्थित है जो विश्व में सिर्फ दो जगह ही पाया गया है। 

Adegaon Fort and Kalbhairav Temple
Adegaon Fort and Kalbhairav Temple


आदेगांव का किला 


यह किला सिवनी जिले की लखनादौन तहसील से 18 किमी की दूरी पर है। आदेगांव नाम की इस जगह में आप पहुॅचते है तो यह किला आपको दूर से नजर आने लगता है। इस किले तक पहॅुचने का रास्ता आदेगांव की बाजार से होते हुए जाता है। मगर आप अगर रविवार दिन इस किलें में जाते है, इस दिन बाजार के एरिया से न जाये। आप बाजार के बजाय गांव के बाहर से ही एक रोड स्कूल की तरफ से होते हुए इस किले तक जाता है, आप वहां से जा सकते है। आपको किले के पास पहुॅचते है, आप को किला एक पहाड की चोटी पर दिखता है जिस तक पहॅुचने के लिए आपको सीढियों से चढकर जाना होगा। इस किले के उपर पहुॅचकर आपको बहुत अच्छा व्यू देखने मिलता है। आपको आदेगांव के आसपास का नजारा देखने मिल जाता है। इस किला का निर्माण अठारहवीं शताब्दी में मराठा शासनकाल में सैनिकों के लिए ऊंचे पहाड़ पर किया गया था। इस किले को गढी के नाम से भी जाना जाता है। इस किले या गढी की निर्माण की नीवं नागपुर के मराठा शासक रघुजी भोंसले के शासनकाल में 18 वी शताब्दी में उनके गुरू नर्मदा भारती (खड़क भारतीय गोंसाई) ने डाली थे। इन्हें भोसले शासन ने 84 गांव की जागीर दी थी। इनके द्वारा ही किले के भीतर भैरव बाबा के मंदिर का निर्माण किया गया था। वर्तमान में इस किले में आपको इसके चारों तरफ जो बुर्ज बनें हुए है वो देखने मिल जाते है बाकी का किला अब ध्वस्त हो गया है। आदेगांव की उची पहाडी पर इस किले का निर्माण ईंट, पत्थर व चूना- मिट्टी से करवाया था। किले की बाहरी दीवार अभी भी मजबूती से खडी है, सदियाॅ बीत गई मगर इन दीवार को अभी तक कोई भी नुकसान नहीं हुआ है। किले की बाहरी दीवार और बुर्जो को छोडकर बाकी सारी निर्माण अब ध्वस्त हो गया है। आपको किले के अंदर यह ध्वस्त निर्माण देखने मिल जाएगा। यह किला अयातकार आकार का है। किले के पीछे एक बडा तालाब है। इस किले का मुख्य दरवाजा का मुख पूर्व की तरफ है। पश्चिम की तरफ भी एक दरवाजा है जहां पर आप किले के बाहर जा सकते है, यहां पर एक शटर लगा हुआ है, यहां से आप तालाब की तरफ जा सकते है। तालाब की तरफ जाने के लिए यहां सीढियाॅ दी गई है। इस किले में पुरातत्व विभाग द्वारा खुदाई का कार्य भी किया गया था। इस खुदाई के दौरान यह पर कक्ष, बरामदे एवं अन्य निर्माण होने का पता चला। बाद में खुदाई बंद कर दिया गया। इस किले का निर्माण मुख्य रूप से हथियारों व सैनिकों के उपयोग के लिए किया गया था। इस किले के पास ही पहाडी के उपर एक स्कूल बना हुआ है शायद यह प्राइमरी स्कूल है। आप किले के बाहरी क्षेत्र में एक मस्जिद भी देख सकते है। यह पर एक पानी की टंकी का निर्माण भी किया गया है। किले के बाहरी हिस्से से आपको तालाब भी देखने मिल जाता है। किले में भीतर दीवार से सटाकर पत्थर की चीप लगी हुई ताकि आप इस चीप में चलकर पूरा किला घूम सकते है। यह किला मुख्य प्रवेश द्वार से आप जैसे अंदर जाते है आपको काल भैरव मंदिर देखने मिल जाता है। आदेगांव किले (Adegaon Fort) और गांव में मराठा शासक के गुरु नर्मदा भारती का शासन था। गुरू नर्मदा भारती से यह किला शिष्य परम्परा के अंर्तगत उनके शिष्य भैरव भारती, धोकल भारती व दौलत भारती को सौंपा गया, बाद में यह किला ब्रिटिश सरकार ने मराठा शासकों से इस किले का आधिपत्य छीनकर किलें में कब्जा कर लिया था। यह एक प्राचीन किला है इसे देखने के लिए दूर दूर से लोग आते है। 

Adegaon Fort and Kalbhairav Temple
Adegaon Fort and Kalbhairav Temple
Adegaon Fort and Kalbhairav Temple
Adegaon Fort and Kalbhairav Temple

श्री काल भैरव का प्राचीन मंदिर


यह किला काल भैरव की गढी के नाम से भी प्रसिध्द है। किले में भगवान काल भैरव का प्राचीन मंदिर है। लोगों के इस मंदिर के प्रति बहुत श्रध्दा भक्ति है। लोग इस मंदिर के दर्शन करने के लिए दूर दूर से आते है। आदेगांव किले के अंदर विराजमान मंदिर  कालभैरव, नागभैरव व बटुकभैरव विराजमान है जिनकी पूजा सदियों से होती आ रही है। लोग इसे दूसरा काशी के नाम से भी जानते हैं। लोगों का कहना है कि बनारस की तरह यहां पर भगवान कालभैरव की खड़े स्वरूप में प्राचीन प्रतिमा स्थापित है। भैरव अष्टमी के दिन इस किले के भैरव बाबा मंदिर में पूरे सिवनी जिले से एवं अन्य जिलों से भी लोग आते है। 
Adegaon Fort and Kalbhairav Temple
Adegaon Fort and Kalbhairav Temple

दुर्लभ श्यामलता वृक्ष की उपस्थिति


आदेगांव का यह किला अपने प्राचीन इतिहास के साथ भैरव बाबा के मंदिर के लिए प्रसिध्द है। इस किला में आपको एक दुर्लभ वृक्ष देखने मिल जाएगा जो दुनिया में और कहीं आपको देखने नहीं मिलेगा। यहां श्यामलता का वृक्ष किले के पिछले हिस्से में तालाब के किनारे लगा हुआ है। यह वृक्ष इस जगह के अलावा एक जगह और मिलता है। इस दुर्लभ वृक्ष की विशेषता यह है कि वृक्ष की पत्तियों में श्रीराधा कृष्ण का नाम लिखा दिखाई देता है। वृक्ष कब और किसने लगाया यह आज भी लोगों को इस बारें में किसी भी प्रकार की जानकारी नहीं है। 


किले की स्थिति एवं पहुॅचने का रास्ता 


आदेगांव का किला (Adegaon Fortसिवनी जिले में स्थित है। आदेगांव का किला सिवनी जिले की लखानदौन तहसील स्थित है। यह किला लखानदौन तहसील से करीब 18 किमी की दूरी पर स्थित है। आदेगांव का किला सिवनी जिला मुख्यालय से करीब 78 किमी की दूरी पर होगा। यह किला जबलपुर जिले से करीब 103 किमी की दूरी पर होगा। नरसिंहपुर किला से यह किला 60 किमी की दूरी पर स्थित होगा। यह किला मंडला से लगभग 114 किमी और छिदवाडा से लगभग 106 किमी की दूरी पर होगा। यहां पर आप सडक मार्ग से असानी से पहूॅच सकते है। यहां तक जाने के लिए अच्छी सडक बनी हुई है। आपको यह तक आने के लिए अपने वाहन का प्रयोग करना चाहिए क्योकि वहां आपके लिए अच्छा हो सकता है। यहां पर आटो या बस भी चलती होगी पर वो समय समय पर चलती होगा अगर आपको बस या आटो से सफर करना है तो आपको समय का विशेष ध्यान रखना होगा। आपको यहां पहॅुचने के लिए पहले लखनादौन पहॅूचना होगा। लखनादौन से आदेगांव नाम की जगह करीब 18 किमी की दूरी पर है । आप यहां तक आने के लिए श्रीनगर कन्याकुमारी हाईवे मिल जाता है आप हाईवे से आराम से इस जगह तक पहॅूच सकते है। हाईवे रोड अच्छी है मगर जब आप आदेगांव वाली रोड में जाते है तो वहां रोड कहीं कही पर थोडी खराब है। आपको इस किले तक आने के लिए नजदीक रेल्वे स्टेशन घंसौर और नरसिंहपुर का पडता है। नरसिंहपुर और घंसौर रेल्वे स्टेशन इस किले से लगभग 55 किमी की दूरी हो सकते है। 

यह किला एवं भैरव बाबा का मंदिर दोनों ही प्राचीन है। यह किला पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित है। किले को देखने दूर-दूर से लोग आदेगांव पहुंचते हैं। यहां पर भैरव अष्टमी बड़े ही धूमधाम से मनाई जाती है। किले के पीछे श्यामलता का अदुभ्त वृक्ष लगा हुआ है जो पूरी दुनिया में अनोखा है। यहां पर मेले का आयोजन भी किया जाता है जहां पर सुबह के समय शोभायात्रा निकली जाती है। जिसमें बडी संख्या में भक्तगण आते है।