क्‍वेरी Dam की प्रासंगिकता द्वारा क्रमित पोस्‍ट दिखाए जा रहे हैं. तारीख द्वारा क्रमित करें सभी पोस्‍ट दिखाएं
क्‍वेरी Dam की प्रासंगिकता द्वारा क्रमित पोस्‍ट दिखाए जा रहे हैं. तारीख द्वारा क्रमित करें सभी पोस्‍ट दिखाएं

ग्वालियर पर्यटन स्थल - Gwalior tourist places | Best places to visit in gwalior

ग्वालियर के दर्शनीय स्थल - Gwalior ki famous jagah | Gwalior sightseeing | ग्वालियर के प्रसिद्ध स्थान | Places to visit near gwalior | Gwalior paryatan



ग्वालियर में घूमने वाली जगह

Gwalior mein ghumne wali jagah



ग्वालियर का किला

ग्वालियर का किला पूरे देश में प्रसिद्ध है। ग्वालियर का किला ग्वालियर में स्थित एक प्रमुख दर्शनीय स्थल है। ग्वालियर किले के अंदर ही बहुत सारी जगह है, जो देखने लायक है।  ग्वालियर का किला एक ऊंचे पर्वत पर स्थित है। इस पर्वत से आपको पूरे शहर का नजारा देखने के लिए मिल जाता है। आप यहां पर आ कर किले का भ्रमण कर सकते हैं। ग्वालियर  किला घूमने में आपको 1 दिन पूरा लग सकता है। यह किला  बहुत बड़ा है और बहुत खूबसूरत है। हर एक चीज देखने लायक है, इसलिए आप यहां पर आते हैं, तो अपना समय निकाल कर आये। यह किला रेलवे स्टेशन से करीब 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ग्वालियर का किला तीसरी शताब्दी में बनाया गया था। ग्वालियर का किला लाल बलुआ पत्थर से बना है। यह किला देश के सबसे बड़े किले में से एक है। 


ग्वालियर किले में घूमने वाली जगह - Places to visit in Gwalior Fort


भीम सिंह राणा की छत्री ग्वालियर - Bhim Singh Rana Ki Chhatri Gwalior


राजा भीम सिंह राणा गोहद के जाट राजा थे। जाट राजा भीम से ने सन 1754 में ग्वालियर के किले पर अधिकार कर लिया था। उनकी मृत्यु के पश्चात भी यह छतरी बनाई गई। राजा भीम सिंह राणा की छतरी भूरे बलुआ पत्थर से निर्मित की गई है। यह ऊचे चबूतरे पर बनी हुई है। छतरी  के चारों ओर परिक्रमा करने के लिए परिक्रमा पथ बनाया गया है। यह छतरी तीन मंजिला है। छतरी के ऊपर गुंबद के आकार का शिखर है। आप यहां पर आकर घूम सकते हैं। 


गुजरी महल ग्वालियर - Gujari Mahal Gwalior

गुजरी महल ग्वालियर शहर का एक पुरातात्विक संग्रहालय है। इस संग्रहालय में आपको बहुत सारे प्राचीन वस्तुएं देखने के लिए मिल जाएगी। गुजरी महल प्राचीन काल में रानी मृगनयनी का निवास स्थान था। रानी मृगनयनी राजा मान सिंह की पत्नी थी। वह गुजरी समाज से थी। इसलिए इस महल को गुजरी महल के नाम से जाना जाता है। उन्होंने राजा मानसिंह से शर्त रखी थी, कि उन्हें रहने के लिए अलग महल दिया जाए और पानी की व्यवस्था की जाए। तो राजा ने उनके लिए अलग महल का निर्माण करवाया और पानी की व्यवस्था के लिए नदी से पाइप महल तक लगवाए। आप यहां पर आते हैं, तो यहां पर पानी की व्यवस्था देख सकते हैं। यहां पर आपको तरह तरह के खूबसूरत नक्काशी दार वस्तुएं देखने के लिए मिल जाएगी। वर्ष 1922 में यह महल संग्रहालय में परिवर्तित कर दिया गया है, तो आपको यहां पर तरह-तरह के प्राचीन वस्तुएं देखने के लिए मिल जाएगी। गुजरी महल ग्वालियर किले से थोड़ी दूरी पर स्थित है। आप यहां पर पैदल भी जा सकते हैं और गाड़ी वगैरह लेकर भी जा सकते हैं।


जहांगीर महल और शाहजहां महल ग्वालियर - Jahangir Mahal and Shah Jahan Mahal Gwalior

जहांगीर महल और शाहजहां महल ग्वालियर किले में स्थित एक देखने लायक जगह है। यहां पर आपको दो महल देखने के लिए मिलते हैं। दोनों ही महल अलग-अलग मुगल शासक के शासन में बनाया गए थे। यह महल खूबसूरत है। महल के बीच में आपको बड़ा सा प्रांगण देखने के लिए मिलता है। दोनों महल मुगल स्थापत्य कला के सुंदर नमूना है। 


विक्रम महल ग्वालियर - Vikram Mahal Gwalior

विक्रम महल ग्वालियर महल में देखने लायक महल है। विक्रम महल का निर्माण महाराजा मानसिंह के पुत्र एवं उत्तराधिकारी विक्रमादित्य ने करवाया था। वे भगवान शिव के भक्त भी थे, इसलिए इस स्थान को विक्रम मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। 1516 से 1523 ईसवी में इस महल का निर्माण हुआ है। महल के मध्य में बरादरी है। महल की ऊपरी मंजिल में जाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है। महल की लंबाई लगभग 65 मीटर है। 


कर्ण महल ग्वालियर - Karn Mahal Gwalior

करण महल ग्वालियर किले के अंदर स्थित एक और ऐतिहासिक महल है। यह महल आप ग्वालियर किले के अंदर आकर देख सकते हैं। करण महल का निर्माण तोमर राजवंश के दूसरे शासक कीर्ति सिंह ने करवाया था। इस महल का निर्माण 1480 से 1486 ईसवी के बीच करवाया गया था। कीर्ति सिंह को दूसरा नाम करण सिंह था। इसलिए इस महल को करण महल  के नाम से जाना जाता है। यह महल हिंदू स्थापत्य शैली में निर्मित है।  करण महल दो मंजिला एवं आयताकार है।

 

मानसिंह पैलेस ग्वालियर - Mansingh Palace Gwalior

राजा मानसिंह का महल ग्वालियर किले के परिसर में स्थित सबसे आकर्षक महल है। यह महल ग्वालियर किले का सबसे खूबसूरत महल है। आप जब भी ग्वालियर आते है, तो आपको ग्वालियर के मानसिंह महल को जरूर घूमना चाहिए। राजा मानसिंह महल 4 मंजिला है। मानसिंह का महल 1486 और 1517 के बीच बनवाया था। मान सिंह महल में खूबसूरत पेंटिंग की गई है, जो बहुत आकर्षक है। यहां पर आप खूबसूरत नक्काशी भी देख सकते हैं। यहां पर अलग-अलग कमरे बनाए गए थे। यहां पर संगीत सुनने के लिए राजा और रानी के लिए अलग अलग है। यहां पर जेल भी है। आप गाइड करेंगे तो गाइड आपको और अच्छी जानकारी दे सकता है। यहां पर हर शाम एक विशेष ध्वनि और प्रकाश शो का आयोजन किया जाता है। यहां पर हर शाम को लाइट और साउंड शो का आयोजन भी होता है। लाइट और साउंड शो का अलग चार्ज लिया जाता है। आप इस किले के सामने से ग्वालियर शहर का बहुत ही खूबसूरत दृश्य देख सकते हैं। यहां पर आकर आपको बहुत अच्छा लगेगा। यहां पर संग्रहालय है। जिस पर एंट्री का अलग चार्ज लिया जाता है। संग्रहालय में विभिन्न तरह के मूर्तियां एवं प्राचीन वस्तुओं का संग्रह करके रखा गया है। 


अस्सी खम्भों की बावड़ी ग्वालियर - Asasee khambon ki bawadi gwalior

80 खंभों की बावड़ी ग्वालियर किले के अंदर देखने वाली एक खूबसूरत जगह है, जहां पर आपको एक बावड़ी देखने के लिए मिलता है। इस बावड़ी में भूमिगत जाने का भी रास्ता है। मगर वह अब आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया है। पुराने समय में बावड़ी में भूमिगत तरीके से भी जाया जा सकता था। बावड़ी चारों तरफ से 80 खंबे से घिरी हुई है। इसलिए इस बावड़ी को 80 खंबे की बावड़ी कहा जाता है। इस बावड़ी का निर्माण राजा मानसिंह तोमर ने 16वीं शताब्दी में किया था। पानी के भंडारण के लिए इस बावड़ी का निर्माण किया गया था। बावड़ी में अलग अलग कक्ष बने थे, जिसमें रानियों के स्नान के लिए भी अलग कमरा था और यहां पर कैदखाना भी था। 


गुरुद्वारा श्री दाता बंदी छोड़ साहिब ग्वालियर - Gurudwara shri data bandi chhod sahib gwalior

श्री दाता बंदी छोड़ साहिब गुरुद्वारा ग्वालियर के किले के अंदर स्थित है। यह गुरुद्वारा ग्वालियर में फेमस है और आप जब भी ग्वालियर आते हैं, तो इस गुरुद्वारे में आ सकते हैं। यहां पर आपको फ्री खाना मिलता है। यहां का जो माहौल है। वह बहुत शांति भरा है। आपको यहां पर आकर बहुत अच्छा लगेगा। सिख गुरु हरगोविंद जी ने  52 हिंदू राजाओं को मुगल राजा जहाँगीर की हिरासत से रिहा करने में मदद की थी। यह गुरुद्वारा सिख गुरु हरगोविंद जी की याद में बना है। इसलिए गुरुद्वारे का नाम दाता बंदी छोड़ साहिब रखा गया है। इस गुरुद्वारे में एक बड़ा तालाब, लंगर हॉल, रहने की सुविधा उपलब्ध है। यहां पर फ्री पार्किंग सुविधा उपलब्ध है।


तेली का मंदिर ग्वालियर - Teli ka mandir

तेली का मंदिर ग्वालियर किले के अंदर स्थित एक प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर का निर्माण प्रतिहार राजा मिहिर भोज के शासनकाल में हुआ था। इस मंदिर का निर्माण तेल के व्यापारियों द्वारा दिए गए धन से किया गया था। इसलिए इस मंदिर को तेली का मंदिर कहते हैं। यह मंदिर मुख्य रूप से विष्णु भगवान को समर्पित है। मंदिर के अंदर किसी भी तरह की मूर्ति स्थापित नहीं है। यह मंदिर ग्वालियर किले में स्थित सबसे ऊंचे मंदिर में से एक है। इस मंदिर की ऊंचाई लगभग 30 मीटर है। मंदिर में खूबसूरत नक्काशी की गई हैं। मंदिर में उत्तर भारतीय और दक्षिण भारतीय वास्तुकला का मिश्रण आपको देखने के लिए मिलता है। मंदिर की छत को द्रविड़ शैली में निर्मित किया गया है। मंदिर को विभिन्न तरह की मूर्ति कला से सजाया गया है। इस मंदिर को 9 वीं सदी में बनाया गया है। मंदिर बहुत खूबसूरत है और आपके यहां पर आकर बहुत अच्छा लगेगा। 


सास.बहू मंदिर ग्वालियर - saas bahu mandir gwalior

सास बहू का मंदिर ग्वालियर किले के अंदर स्थित एक ऐतिहासिक मंदिर है। यह मंदिर ग्वालियर किले के पूर्वी हिस्से में स्थित है। इस मंदिर को सास और बहू का मंदिर कहा जाता है। मगर यह मंदिर सहस्त्रबाहु मंदिर के नाम से प्राचीन समय में जाना जाता था। धीरे-धीरे सहस्त्रबाहु को सास और बहू के नाम में बदल दिया गया। आप यहां पर आते हैं, तो इस मंदिर में आपको खूबसूरत कारीगरी देखने के लिए मिलती है। प्रवेश द्वार में आपको ब्रह्मा, विष्णु और महेश एवं सरस्वती की खूबसूरत नक्काशी देखने के लिए मिलते हैं। यहां पर दो मंदिर बने हुए हैं। एक मंदिर को सास  का मंदिर और दूसरे मंदिर को बहू के मंदिर के नाम से जाना जाता है। मगर वास्तविक रूप से इसमें से एक मंदिर विष्णु भगवान जी को समर्पित है और दूसरा मंदिर शिव भगवान जी को समर्पित है। आप यहां पर आकर दोनों मंदिरों की खूबसूरती को देख सकते हैं। इन मंदिरों का निर्माण 11 वीं शताब्दी में कछवाहा वंश के राजा महीपाल ने बनवाया था।


सूरज कुंड ग्वालियर - Suraj Kund Gwalior

सूरज कुंड ग्वालियर किले में के अंदर स्थित एक कुंड है। इस कुंड में जो पानी है। उसको चमत्कारी माना जाता है। कहा जाता है कि इस कुंड के पानी से स्नान करने से सभी प्रकार के रोग दूर होते हैं। कुंड के बीच में एक मंदिर बना हुआ है। मंदिर में शिवलिंग स्थापित है। यहां आ  कर आपको अच्छा लगेगा। 


सिद्धाचल जैन मंदिर गुफाएँ ग्वालियर - Siddhachal Jain Temple Caves Gwalior

सिद्धचल जैन गुफा ग्वालियर में घूमने की एक ऐतिहासिक जगह है। इस जगह में आपको जैन धर्म के तीर्थकारों की पत्थर की मूर्तियां देखने के लिए मिलेगी। यह मूर्तियां बलुआ पत्थर पर बनाई गई है। यह मूर्तियां बहुत खूबसूरत है। इन मूर्तियों में से अधिकांश मूर्तियां नष्ट हो गई हैं, मगर बहुत खूबसूरती से इन्हें तराशा गया है। यह मूर्तियां सातवीं शताब्दी से लेकर 15 शताब्दी तक बनाई गई है। इन मूर्तियों को 16वीं शताब्दी में मुगल राजवंश के सम्राट बाबर के आदेश से इन मूर्तियों को नष्ट कर दिया गया। यह एक शांतिपूर्ण जगह है। आप यहां पर चट्टानों में गुफाएं भी देख सकते हैं। यहां पर चारों तरफ हरियाली आपको देखने के लिए मिलेगी। आप यहां पर अगर बारिश में घूमने आते हैं, तो आपको बहुत शानदार नजारा देखने के लिए मिलेगा। 


गोपाचल रॉक कट जैन मूर्ति ग्वालियर - Gopachal Rock Cut Jain Idol Gwalior

गोपाचल रॉक कट जैन गुफाएं ग्वालियर शहर में घूमने वाली एक प्रमुख जगह है। यहां पर 26 गुफाएं हैं, जिनमें जैन तीर्थकरो की मूर्तियां आपको देखने के लिए मिल जाएगी। यहां पर जैन तीर्थकरो कि छोटी और बड़ी मूर्तियां बनाई गई है। यहां पर उन्हें खड़ी हुई मुद्रा में और बैठी हुई मुद्रा में दर्शाया गया है। आप यहां पर आते हैं, तो आपको यहां पर पहुंचने के लिए थोड़ा सा ट्रैकिंग करना पड़ता है। उसके बाद आप इन गुफाओं में जा सकते हैं। यहां पर गुफा नंबर 1 के पास बावली भी है, जिसे एक पत्थर की बावली के नाम से जाना जाता है। यहां पर सभी तरह की व्यवस्था उपलब्ध है। यह जगह बहुत खूबसूरत है। बहुत शांत है और यहां आकर अच्छा लगता है। 


ग्वालियर जू या गांधी प्राणी उद्यान ग्वालियर - Gwalior Zoo or Gandhi Zoological Park Gwalior

ग्वालियर जू ग्वालियर शहर में घूमने का एक मुख्य पर्यटन स्थल है। ग्वालियर जू को गांधी प्राणी उद्यान के नाम से जाना जाता है। इस उद्यान का प्रबंधन ग्वालियर नगर निगम के द्वारा किया जाता है। यहां पर आपको देशी और विदेशी जानवर देखने के लिए मिलते हैं। ग्वालियर जू में प्रवेश का टिकट लिया जाता है। यहां पर आपको अलग-अलग जानवरों की जानकारी भी मिलती है। यहां पर बहुत सारे झूले भी हैं। यहां पर बच्चे बहुत खुश होंगे। यहां पर टॉय ट्रेन है, जिसमें बच्चे बहुत मस्ती कर सकते हैं। यहां पर आपको मगरमच्छ, शेर, चीता, भालू, बदक, बंदर हिप्पोपोटामस, कोबरा सांप, देखने के लिए मिल जाएंगे। और भी जंगली जानवर आपको यहां पर देखने के लिए मिल जाएंगे।

 

महारानी लक्ष्मीबाई स्मारक ग्वालियर - Maharani Laxmibai Memorial Gwalior

महारानी लक्ष्मीबाई स्मारक ग्वालियर शहर में स्थित एक ऐतिहासिक स्थल है।रानी दुर्गावती एक स्वतंत्रता सेनानी थी। रानी दुर्गावती ने अंग्रेजों का डटकर सामना किया था। यहां पर लड़ते हुए उनकी मृत्यु हो गई थी। रानी दुर्गावती गीत 23 वर्ष की आयु में मृत्यु हो गई थी। यहां पर उनकी याद पर स्मारक बनाया गया है। इस स्मारक में आप आते हैं, तो यहां पर आपको बगीचा देखने के लिए मिलता है, जिसमें घोड़े पर सवार रानी दुर्गावती की मूर्ति है और एक अमर ज्योति देखने के लिए मिलती है। यह ज्योति हमेशा जलती हुई रहती है। यहां आकर आपको बहुत अच्छा लगेगा। यहां रानी दुर्गावती के बारे में आपको जानकारी भी पढ़ने के लिए मिल जाएगी। 


मोहम्मद घौस का मकबरा ग्वालियर - Mohammad Ghaus's Tomb Gwalior

मोहम्मद गौस का मकबरा ग्वालियर में घूमने का एक प्रमुख स्थल है। यहां पर आपको खूबसूरत मकबरा देखने के लिए मिल जाता है। इस मकबरे का मुख्य आकर्षण नक्काशीदार पत्थर की जाली हैं, जो बाहरी दीवार पर लगी हैं। मोहम्मद गौस एक सूफी संत थे। उनका जन्म 1500 ई में हुआ था। यह अकबर के एक सलाहकार थे। इन्होंने तानसेन को भी संगीत की शिक्षा दी थी। यहां पर बहुत बड़ा गार्डन भी है। 


तानसेन का मकबरा ग्वालियर - Tansen's Tomb Gwalior

तानसेन का मकबरा ग्वालियर में घूमने वाला एक प्रमुख जगह है। इस जगह में तानसेन की समाधि है। तानसेन भारत देश के एक संगीतज्ञ हैं। तानसेन अकबर के दरबार के नवरत्नों में से एक है। कहा जाता है कि तानसेन का संगीत सुनकर पशु-पक्षी भी आनंदित हो जाते थे। आप यहां पर आकर तानसेन की कब्र देख सकते हैं। तानसेन की कब्र उनके गुरु मोहम्मद गौस के पास ही में बनी हुई है। तानसेन मोहम्मद गौस के छात्र थे जिन्होंने उन्हें हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत सिखाया था। तानसेन समारोह हर साल नवंबर के महीने में आयोजित किया जाता है, जहां पर देश भर के संगीतकार आते हैं और विभिन्न शास्त्रीय संगीत शो प्रदर्शित करते हैं। 


सूर्य मंदिर ग्वालियर - Sun Temple Gwalior

सूर्य मंदिर को सन टेंपल के नाम से भी जाना जाता है। यह सूर्य मंदिर ग्वालियर में स्थित प्रमुख दर्शनीय स्थलों में से एक है। यह एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर सूर्य देवता जी को समर्पित है। यह मंदिर उड़ीसा के कोर्णाक में बने सूर्य मंदिर के समान है। आप यहां पर आ कर इस मंदिर की खूबसूरती को देख सकते हैं। इस मंदिर में बहुत सारे देवी देवता विराजमान हैं। यहां पर गणेश जी की प्रतिमा को दीवार पर बनाया गया है, जो बहुत ही भव्य लगती है। आप यहां पर घूमने आ सकते हैं। मंदिर का निर्माण वर्ष 1988 में प्रसिद्ध उद्योगपति जीडी बिड़ला द्वारा किया गया था। ग्वालियर का सूर्य मंदिर बलुआ पत्थर और संगमरमर के संगम से बना हुआ है, जो बहुत ही मनमोहक लगता है। आपको यहां पर आकर बहुत शांति मिलेगी। यहां पर बहुत सारे लोकल लोग घूमने के लिए आते हैं। यहां पर आपको मोर भी  देखने के लिए मिल सकते हैं। 


सरोद घर ग्वालियर - Sarod Ghar Gwalior

सरोद घर ग्वालियर शहर में स्थित एक संग्रहालय है। यह संग्रहालय प्रसिद्ध सरोद वादक उस्ताद हाफिज अली खान का पैतृक घर है। उनके पैतृक घर को अब संग्रहालय में परिवर्तित कर दिया गया है। इस संग्रहालय में आपको प्राचीन संगीत वाद्य यंत्र देखने के लिए मिलते हैं, जो प्राचीन समय में प्रसिद्ध भारतीय संगीतकारों के द्वारा उपयोग किए गए थे। यहां पर आपको तस्वीरों का एक बहुत बड़ा संग्रह देखने के लिए मिलता है। इस संग्रहालय का उद्देश्य भारतीय शास्त्रीय संस्कृति और संगीत को बढ़ावा देना है। यह संग्रहालय संगीत प्रेमियों के लिए ग्वालियर में घूमने के लिए एक प्रमुख जगह है। यह संग्रहालय ग्वालियर जंक्शन से 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह संग्रहालय ग्वालियर के जीवाजी गंज में स्थित है। आप यहां पर आकर संगीत के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं। 


अम्मा महाराज की छतरी ग्वालियर - Amma Maharaj's Chhatri Gwalior

अम्मा महाराज की छतरी ग्वालियर शहर में घूमने की अच्छी जगह है। यहां पर आप को बहुत बड़ा गार्डन देखने के लिए मिलता है, जो बहुत बड़े एरिया में फैला हुआ है। गार्डन में बहुत सारे मंदिर भी बने हुए हैं, जहां पर आप घूम सकते हैं। यहां पर आने का प्रवेश शुल्क लिया जाता है। यह छतरियां मुख्य तौर पर सिंधिया परिवार की शाही स्मारक स्थल है। यहां पर स्थित छतरी में आपको भारतीय वास्तुकला देखने के लिए मिल जाएगी। यह छतरियां गुंबद आकार की हैं। यहां पर फव्वारा भी आपको देखने के लिए मिल जाएंगे। बच्चों के लिए यहां पर बहुत बड़ा प्लेग्राउंड है, जिसमें बच्चे खेल सकते हैं। यहां पर पार्किंग की भी अच्छी व्यवस्था है। यह सप्ताह के सभी सात दिनों में खुला रहता है।


जय विलास पैलेस ग्वालियर - Jai Vilas Palace Gwalior

जय विलास पैलेस ग्वालियर शहर में घूमने के लिए एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। यह एक विशाल महल है, जो सफेद संगमरमर से बना हुआ है। इस महल में करीब 400 कमरे हैं, जिसमें से 200 कमरे संग्रहालय में परिवर्तित कर दिए गए हैं और बाकी कमरों में सिंधिया परिवार के लोग रहते हैं। यहां पर आप संग्रहालय में विभिन्न तरह के प्राचीन सामग्रियों का संग्रह देख सकते हैं। यहाँ पर जीवाजीराव महाराजा से संबंधित सभी चीजें देख सकते हैं। यहां पर आपको चांदी की ट्रेन देखने के लिए मिलती है, जो खाना परोसती है। इसके अलावा यहां पर आपको झूमर देखने के लिए मिलते हैं, जो बहुत वजन के हैं और बहुत खूबसूरत है। यहां पर एक प्राचीन घोड़ा गाड़ी भी है, जो चांदी से बनी हुई है। जय विलास पैलेस में प्रवेश का आपसे शुल्क लिया जाता है और फोटो क्लिक करने का वीडियो बनाने का भी अलग से शुल्क लिया जाता है। आप यहां पर आ कर इन सभी चीजों को देख सकते हैं। 


इटालियन गार्डन ग्वालियर - Italian Garden Gwalior

इटालियन गार्डन ग्वालियर में स्थित एक पार्क है। इस पार्क में आपको तरह तरह के फूल देखने के लिए मिल जाते हैं। यहां पर म्यूजिकल फाउंटेन भी हैए जो बहुत अच्छा है। इटालियन गार्डन ग्वालियर जू के पास में है। आप यहां पर आसानी से पहुंच सकते हैं। इस गार्डन को इटालियन गार्डन इसलिए कहा जाता है, क्योंकि यह इटालियन शैली में बना हुआ है और बहुत खूबसूरत है। 


बटरफ्लाई पार्क ग्वालियर - Butterfly Park Gwalior

बटरफ्लाई पार्क ग्वालियर में स्थित एक अच्छे घूमने वाले स्थानों में से एक है। यहां पर आपको हरियाली भरा माहौल देखने के लिए मिलता है। आप यहां दिन के समय घूमने के लिए आ सकते हैं। 


तिघरा बांध ग्वालियर - Tighara Dam Gwalior

तिघरा बांध ग्वालियर में घूमने के लिए एक अच्छी जगह है। यहां पर आपको एक बहुत बड़ा जलाशय देखने के लिए मिलता है। यह जलाशय ग्वालियर से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आप यहां पर गाड़ी से पहुंच सकते हैं। तिघरा बांध में घूमने का सबसे अच्छा समय मानसून का होता है, क्युकि उस समय यहां पर चारों तरफ आपको हरियाली देखने के लिए मिल जाती है। यह जगह फोटोशूट के लिए भी बहुत बढ़िया है। आप यहां पर आकर बांध के नजारों को देख सकते हैं। तिघरा बांध ग्वालियर शहर के पीने के पानी की पूर्ति करता है। 


नलकेश्वर धाम ग्वालियर - Nalakeshwar Dham Gwalior

नलकेश्वर धाम ग्वालियर में स्थित एक धार्मिक स्थल है। यहां पर आपको प्राकृतिक और धार्मिक दोनों ही जगह देखने के लिए मिलती है। यह जगह  ग्वालियर शहर से करीब 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आप यहां पर अपनी गाड़ी से पहुंच सकते हैं। यहां पर आने के लिए कच्ची रोड आपको मिलती है। यहां पर आपको भगवान शिव का मंदिर देखने के लिए मिलता है और यहां पर बारिश के मौसम में आपको खूबसूरत जलप्रपात देखने के लिए मिलता है। यह जगह प्राकृतिक हरियाली से भरी हुई है। 


श्री आनंदपुर सत्संग आश्रम ग्वालियर - Shri Anandpur Satsang Ashram Gwalior

श्री आनंदपुर सत्संग आश्रम एक धार्मिक स्थल है। यह  ग्वालियर में स्थित एक धार्मिक स्थल है। यहां पर आपको आकर आत्मिक शांति मिलेगी। यहां पर आप आकर अध्यात्म से जुड़ सकते हैं। यहां पर आपको आश्रम के पीछे एक तालाब भी देखने के लिए मिलता है, जिसे जानकी ताल के नाम से जाना जाता है। 


श्री कोटेश्वर महादेव मंदिर ग्वालियर - Shri Koteshwar Mahadev Temple Gwalior

श्री  कोटेश्वर महादेव मंदिर ग्वालियर शहर में स्थित एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर शिव भगवान जी को समर्पित है। यह मंदिर बहुत पुराने मंदिरों में से एक है। आप यहां पर आकर शिव भगवान जी के दर्शन कर सकते हैं। मंदिर के बाहर आपको बहुत सारे प्रसाद की दुकान देखने के लिए मिलती है, जहां से आप प्रसाद ले सकते है। यहां पर शिवरात्रि और सावन सोमवार के समय बहुत भीड़ लगती है। 

प्राचीन शिव मंदिर गिरगांव ग्वालियर - Ancient Shiva Temple Girgaon Gwalior

यह ग्वालियर शहर में स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर है। यह मंदिर गिरगांव गांव में स्थित है। आप यहां पर शिव भगवान के दर्शन कर सकते हैं। यह मंदिर पहाड़ी के ऊपर स्थित है। मंदिर तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है। आपको मंदिर से आसपास का खूबसूरत नजारा देखने के लिए मिल जाता है। 


श्री सिद्ध तलवार वाले हनुमान जी महाराज ग्वालियर

यह मंदिर ग्वालियर में स्थित एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर हनुमान जी को समर्पित है। इस मंदिर की विशेषता यह है कि इस मंदिर में हनुमान जी की जो मूर्ति हैए उनके एक हाथ में गदा की जगह तलवार है। इसलिए इस जगह को तलवार वाले हनुमान जी के नाम से जाना जाता है। यहां पर भक्त हनुमान जी के दर्शन करने के लिए आते हैं। 


श्री गुप्तेश्वर मंदिर ग्वालियर - Shri Gupteshwar Temple Gwalior

श्री गुप्तेश्वर मंदिर ग्वालियर शहर में स्थित एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। मंदिर में पहुंचने के लिए सीढ़ियां हैं। इस मंदिर से ग्वालियर शहर का खूबसूरत दृश्य देखने के लिए मिलता है। यह मंदिर ग्वालियर में तिघरा बांध जाने वाली सड़क पर स्थित है। आप यहां पर आसानी से पहुंच सकते हैं। यहां पर आकर आपको बहुत अच्छा लगेगा। 



अचलेश्वर मंदिर ग्वालियर - Achleshwar Temple Gwalior
फूलबाग मैदान ग्वालियर - Phulbagh Maidan Gwalior
शनि देव का मंदिर ग्वालियर - Shani Dev's temple Gwalior
सुदर्शन पार्क ग्वालियर - Sudarshan Park Gwalior




मुरैना दर्शनीय स्थल - Places to visit in Morena | Morena tourist places

मुरैना पर्यटन स्थल - Morena Tourism | Tourist places in Morena |  मुरैना में घूमने की जगह | मुरैना शहर


मुरैना शहर के प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल
Famous Places to Visit in Morena Cit
y



बटेश्वर मंदिर मुरैना - Bateshwar temple

बटेश्वर मंदिर मुरैना शहर के प्राचीन धरोहर हैं। यहां पर आपको प्राचीन मंदिर देखने के लिए मिलते है। यह मंदिर हजारों साल पुराने हैं।  यहां पर 200 से भी ज्यादा मंदिर है। मगर बहुत सारे मंदिर नष्ट हो गए हैं। अभी आपको करीब 100 मंदिर ही देखने के लिए मिल जाएंगे। इनमें से अधिकतर मंदिर भगवान शिव  जी को समर्पित है। यह मंदिर पूरी तरह पत्थर से बने हुए हैं और इन मंदिरों में  नक्कशी गई है, जो बहुत ही खूबसूरत है। आपको यहां पर आकर बहुत अच्छा लगेगा। यह मंदिर ग्वालियर से करीब 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और मुरैना से 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह मंदिर मुरैना जिले की पदावली गांव के पास स्थित है। आप यहां पर अपने वाहन से आसानी से आ सकते हैं। बटेश्वर के मंदिर गुर्जर एवं प्रतिहार वास्तुकला में बनाए गए हैं। बटेश्वर के मंदिर को पुरातात्विक विभाग द्वारा दोबारा बनाया गया है, क्योंकि यह मंदिर 13 वी शताब्दी के बाद नष्ट हो गए थे। इन मंदिर के नष्ट होने का कारण तो नहीं पता , मगर मंदिर पूरी तरह से खंडहर में तब्दील हो गए थे। उन्हें दोबारा बनाया गया है और इनके बनाने का श्रेय डॉ मोहम्मद को जाता है, जिन्होंने इन मंदिरों को पुन जीवित किया है। 


गढ़ी पड़ावली मुरैना - Garhi Padawali Morena

गढ़ी पड़ावली एक प्राचीन शिव मंदिर है। यह मंदिर पदावली गांव के पास में ही स्थित है। यहां पर आप शिव भगवान जी का मंदिर देख सकते हैं और मंदिर में शिवलिंग विराजमान है। आप यहां पर पत्थर के नंदी भी देख सकते हैं। मंदिर की दीवारों में आपको विभिन्न तरह की कारीगरी देखने के लिए मिलेगी। मंदिर की दीवार में ब्रह्मा, विष्णु, महेश, सूर्य, गणेश, काली और विष्णु के अवतारों का अंकन किया गया है। इसके अतिरिक्त  भागवत, रामायण, पुराणों से संबंधित प्रतिमाओं को दीवार पर उकेर गया है। इस मंदिर का निर्माण 10 वीं शती ईस्वी में किया गया था। 19 वीं शती में इस मंदिर के गोहद के राजा द्वारा गढ़ी में परिवर्तित कर दिया गया था। यहां पर बैठने की सुविधा उपलब्ध है। पार्किंग की सुविधा उपलब्ध है। टॉयलेट भी उपलब्ध है। आप यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं। यहां पर आ कर आपको अच्छा लगेगा। यहां पर गार्डन बना हुआ है, जहां पर आप बैठ सकते हैं। अगर आप यहां आते हैं, तो अपने साथ खाना और पानी जरूर लाएं । गढ़ी पड़ावली मंदिर मुरैना शहर से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और ग्वालियर से 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आप यहां पर गाड़ी से आराम से पहुंच सकते हैं। 


इकत्तरसो महादेव मंदिर, मितावली, मुरैना - Ekattarso Mahadev Mandir, Mitawali, Morena

मितावली या इकत्तरसो महादेव मंदिर मुरैना शहर का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। यहां पर आपको प्राचीन मंदिर देखने के लिए मिलेगा। यह मंदिर पूरी तरह पत्थरों से बना हुआ है। यह मंदिर मुरैना शहर के मितावली ग्राम के पास स्थित है। यह मंदिर एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। स्थानीय लोगों के द्वारा इस मंदिर को इकत्तरसो महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर शिव भगवान जी को समर्पित है। यहां पर आपको शिवलिंग देखने के लिए मिल जाता है। यह मंदिर वृत्ताकार आकृति में बना हुआ है और यहां पर मंदिर के बीच में एक मंदिर बना हुआ है, जिसमें शिव भगवान जी का शिवलिंग विराजमान है, जो आप देख सकते हैं। यहां पर प्राचीन मूर्तियां भी पाई गई थी, जो ग्वालियर संग्रहालय में संग्रहित कर के रखी गई है। इस मंदिर के डिजाइन के आधार पर ही हमारे संसद भवन को बनाया गया है। इस मंदिर का निर्माण महाराजा देवपाल द्वारा 1323 में कराया गया था। मंदिर से आपको सूर्योदय और सूर्यास्त का मनोरम दृश्य देखने के लिए मिल जाता है। यह मंदिर पहाड़ी के ऊपर स्थित है इसलिए चारों तरफ का दृश्य भी आपको देखने के लिए मिलता है। यहां पर आप अपने फैमिली वालों के साथ में दोस्तों के साथ घूमने के लिए आ सकते हैं। यहां आकर आपको अच्छा लगेगा। 


शनिश्चर मंदिर बारह्वाली मुरैना - Shanishchara temple Barahwali Morena

शनिश्चर मंदिर एक प्राचीन मंदिर है। यह बारहवली गांव में स्थित है। आप यहां पर आकर इस मंदिर को देख सकते हैं। इस मंदिर में शनि देवता की प्राचीन मूर्ति विद्यमान है और कहा जाता है कि इस मूर्ति की स्थापना राजा विक्रमादित्य के द्वारा की गई थी। यह मंदिर एक पहाड़ी पर बना हुआ है। मंदिर में हनुमान जी की भी भव्य प्रतिमा विराजमान है। इस मंदिर को लेकर हनुमानजी और शनि देवता जी की एक कहानी प्रचलित है। आप यहां पर आकर वह कहानी जान सकते हैं। यह मंदिर मुरैना जिले से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां आकर आपको बहुत अच्छा लगेगा। यह मंदिर ग्वालियर से 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आप यहां अपने वाहन से आ सकते हैं। 


नूराबाद पुल मुरैना - Noorabad Bridge Morena

नूराबाद पुल मुरैना शहर का प्राचीन स्मारक है। यह पुल मुरैना शहर के नूराबाद नगर में स्थित है। आप यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं। यह पुल मुरैना ग्वालियर हाईवे रोड के बाजू में ही स्थित है। इस पुल से वाहन नहीं गुजर सकते हैं। आप पुल पर पैदल घूम सकते हैं। इस पुल का निर्माण मुगल सम्राट जहांगीर ने 16वीं शताब्दी में अपनी रानी नूरजहां की  याद में कराया था। यह पुल सांक नदी पर बना हुआ है। यह पुल पुरातत्व विभाग के द्वारा संरक्षित है। यह पुल मुरैना और ग्वालियर को जोड़ता है। यह पुल बहुत खूबसूरती से बनाया गया है। यह पुल मुरैना शहर से 14 किलोमीटर दूर है। पुल के दोनों ओर अष्टकोणीय गुंबददार छतरियां बनी हैं। पुल के दोनों तरफ ऊंचे ऊंचे टावर बने हुए हैं, जो खूबसूरत लगते हैं और आप यहां पर आ कर इस पुल को देख सकते हैं। 


कुंतलपुर बांध या कोतवाल बांध  मुरैना - Kuntalpur Dam or Kotwal Dam Morena

कुंतलपुर बांध या कोतवाल बांध  मुरैना जिले में स्थित एक बांध है। यह बांध आसन नदी पर बना हुआ है। यह बांध मुरैना शहर से करीब 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस बांध तक  आप अपने वाहन से आ सकते हैं। यह बांध बहुत सुंदर है और आप यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं। बरसात के समय इसका दृश्य बहुत अच्छा होता है। 


सूर्य मंदिर कुंतलपुर मुरैना - Sun Temple Kuntalpur Morena

कुंतलपुर मुरैना शहर में स्थित एक धार्मिक स्थल है। कुंतलपुर का संबंध महाभारत से माना जाता है। माना जाता है कि कर्ण का जन्म कुंतलपुर के इस जगह पर हुआ था। करण को उनकी माता कुंती के द्वारा नदी में प्रवाहित यहीं पर किया गया था। यह पर आसन नदी बहती है। आसन नदी पर सूर्य भगवान के चरण चिन्ह भी देखने के लिए मिल जाएंगे। यहां पर एक शिव मंदिर भी है। शिव मंदिर में शिवलिंग विराजमान है और कहा जाता है कि यह शिवलिंग का आकार दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहा है। यह जगह बहुत खूबसूरत है और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है। मंदिर के  बाजू में नदी का नजारा भी आपको आकर्षक लगेगा। आप यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं। 


शहीद स्मारक मुरैना - Shaheed Smarak Morena

शहीद स्मारक मुरैना में घूमने वाली एक प्रमुख जगह है। यहां पर  देश के वीर सिपाही जिन्होंने अपने प्राणों के बलिदान दिए हैं, उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए स्मारक बनाया गया है। आप यहां पर आकर घूम सकते हैं। यहां पर गार्डन बना हुआ है और बैठने की व्यवस्था है। आपको यहां पर आकर अच्छा लगेगा। शहीद स्मारक मुरैना जिले में हाईवे रोड के पास ही में स्थित है। आप यहां पर आसानी से पहुंच सकते हैं। 


ककनमठ मंदिर मुरैना - Kakanamath Temple Morena

ककनमठ मंदिर मुरैना जिले में स्थित एक अद्भुत मंदिर है। यह मंदिर अद्भुत इसलिए है, क्योंकि यह मंदिर बिना किसी भी सपोर्ट के खड़ा हुआ है। इस मंदिर में किसी भी प्रकार के सीमेंट चुने या चिपकाने वाले पदार्थ का इस्तेमाल नहीं किया गया है। सिर्फ इसमें पत्थरों को बैलेंस करके रखा गया है और यह मंदिर अभी तक खड़ा हुआ है। आप यहां पर आकर घूम सकते हैं। कहा जाता है कि यह मंदिर भूतों के द्वारा एक रात में ही बनाया गया था। यह मंदिर बहुत खूबसूरत है और आप इस मंदिर में अंदर जा सकते हैं। घूम सकते हैं। यह मंदिर भगवान शिव जी को समर्पित है। ककनमठ मंदिर मुरैना जिले के सिहोनिया नामक गाँव में है। यह मंदिर 100 फीट ऊंचा है। इस मंदिर की दीवारों पर नक्काशी की गई है और आपको आश्चर्य होगा यह देखकर कि यह मंदिर अभी तक खड़ा हुआ है, बिना किसी सपोर्ट। कहा जाता है कि इस मंदिर को 11वीं शताब्दी में राजा कीर्ति राज ने बनवाया था। उनकी रानी का नाम काकनावती  था। इसलिए इस मंदिर को ककनमठ कहा जाता है। 


मुरैना संग्रहालय - Morena sangrahalay

मुरैना संग्रहालय मुरैना जिला में स्थित एक प्रमुख स्थल है। यहां पर आप आकर मुरैना में स्थित प्राचीन जगह के बारे में जान सकते हैं। आपको यहां पर अच्छे से जानकारी मिल जाएगी।यहां पर पुरानी चीजों का कलेक्शन करके भी रखा गया है। आप वह भी देख सकते हैं और आपको यहां पर हमारे देश के लिए शहीद हुए वीरों के बारे में भी जानकारी मिल जाएगी। यहां पर रामप्रसाद बिस्मिल्लाह जी के बारे में आपको जानकारी मिल जाएगी। मुरैना शहर को जानने के लिए यह एक अच्छी जगह है। 


घिरोना हनुमान मंदिर मुरैना - Ghirona hanuman mandir Morena

घिरोना हनुमान मंदिर मुरैना जिले का एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर नेशनल हाईवे 3 के पास में स्थित है। आप इस मंदिर तक बहुत ही आसानी से पहुंच सकते हैं। इस मंदिर में हनुमान जी की प्रतिमा विराजमान है। हनुमान जी की प्रतिमा के अलावा भी यहां पर अन्य देवी देवताओं की प्रतिमा विराजमान हैं। आप यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं। आपको यहां पर आंकर बहुत अच्छा लगेगा। इस मंदिर में मंगलवार और शनिवार के दिन बहुत ज्यादा भीड़ रहती है। बहुत ज्यादा लोग भगवान हनुमान जी के दर्शन करने के लिए आते हैं। 


अग्रसेन पार्क

नेहरू पार्क

अंबेडकर पार्क

गाँधी कॉलोनी पार्क


कटनी दर्शनीय स्थल

मंडला जिले के पर्यटन स्थल

बालाघाट पर्यटन स्थल

बैतूल पर्यटन स्थल


जबलपुर पर्यटन स्थल - Jabalpur sightseeing | Tourist places near jabalpur

जबलपुर दर्शनीय स्थल - Jabalpur tourist spot | Best places to visit in jabalpur | Picnic spots near jabalpur | Jabalpur famous places



जबलपुर में घूमने की जगहें - Jabalpur tourist place in hindi

जबलपुर पर्यटन स्थल - Jabalpur sightseeing | Tourist places near jabalpur

बरगी बांध जबलपुर


जबलपुर पर्यटन स्थल - Jabalpur sightseeing | Tourist places near jabalpur

धुआंधार झरना जबलपुर 


जबलपुर पर्यटन स्थल - Jabalpur sightseeing | Tourist places near jabalpur

बगदरी जलप्रपात जबलपुर


जबलपुर पर्यटन स्थल - Jabalpur sightseeing | Tourist places near jabalpur

निदान जलप्रपात जबलपुर


धुआंधार जलप्रपात - Dhuandhar jalprapat

धुआंधार जलप्रपात जबलपुर शहर का एक मुख्य पर्यटन स्थल है। धुआंधार जलप्रपात जबलपुर शहर से करीब 25 किलोमीटर दूर भेड़ाघाट के पास स्थित है। आप इस जलप्रपात तक बस द्वारा, ऑटो द्वारा या अपने स्वयं के वाहन द्वारा पहुंच सकते हैं। यहां पर आपको नर्मदा नदी पर खूबसूरत जलप्रपात देखने के लिए मिलता है। यह जलप्रपात संगमरमर की चट्टानों से बहता है, जो बहुत ही खूबसूरत लगता है। इस जलप्रपात में ऊंचाई से पानी नीचे गिरने के कारण धुआ निकलता है, इसलिए इस जलप्रपात को धुआंधार जलप्रपात कहते हैं। इस जलप्रपात के आस पास बहुत सारी जगह है, जहां पर आप घूम सकते हैं। यहां पर आप संगमरमर की वादियां देख सकते हैं। संगमरमर की वादियों के बीच से ही नर्मदा नदी बहती है। यह जगह बहुत खूबसूरत है। आप यहां पर गाड़ी से पहुंच सकते हैं। गाड़ी से आपको कुछ दूरी तक पैदल चलना रहता है। आपको यहां पर दुकान भी देखने के लिए मिलती है, जहां पर आपको तरह तरह का समान मिल जाता है। यहां पर मुख्य समान आपको पत्थर का मिलता है, जो संगमरमर का होता है। यहां पर आपको संगमरमर के पत्थर के शिवलिंग देखने मिलते हैं और भी बहुत सारे सामान आपको मिल जाते हैं। यहां पर पार्किंग के पास ही में आपको बहुत सारी दुकानें देखने के लिए मिल जाती हैं। यहां पर खाने पीने के लिए भी बहुत सारे होटल हैं। यहां पर आपको वॉशरूम की सुविधा भी मिल जाती है। धुआंधार जलप्रपात के पास वॉशरूम की सुविधा नहीं है। करीब 1 से डेढ़ किलोमीटर चलने के बाद आपको धुआंधार जलप्रपात देखने के लिए मिलता है। आप यहां पर रोपवे का मजा भी ले सकते हैं। रोपवे का किराया 100 रू है। 100 रू  में आप आना और जाना दोनों कर सकते हैं। रोपवे से आपको धुआंधार जलप्रपात का बहुत ही खूबसूरत नजारा देखने के लिए मिलता है।रोपवे से आप धुआंधार का व्यू देख सकते हैं। 


संगमरमर की वादियां जबलपुर - Marble rocks Jabalpur

संगमरमर की वादियां या मार्बल रॉक्स के नाम से मशहूर यह स्थान भेड़ाघाट में स्थित है। भेड़ाघाट जबलपुर से करीब 25 किलोमीटर दूर है। संगमरमर की वादियों में नर्मदा नदी संगमरमर की पहाड़ियों के बीच से बहती है और यहां का दृश्य बहुत ही खूबसूरत रहता है। यह पर संगमरमर की ऊंची ऊंची पहाड़ियां हैं, जिसके बीच से नर्मदा नदी बहती है। आप यहां पर बोटिंग का मजा ले सकते हैं। यहां पर पूर्णिमा के दिन रात के समय बोटिंग करने में बहुत मजा आता है और बहुत अच्छा लगता है। मगर अब यहां पर रात को वोटिंग करने की मनाही है।  आप दिन में ही बोटिंग का मजा ले सकते हैं। यहां पर बंदर कूदनी नाम की फेमस है। इस जगह के बारे में कहा जाता है कि यहां पर बंदर नर्मदा नदी के एक तरफ से दूसरे तरफ छलांग लगाकर पार कर जाते थे। यहां पर संगमरमर की चट्टानें इतनी करीब थी। मगर नदी के बहाव के कारण यह पर दुरी हो गई और अब यहां पर बंदर छलांग लगा नहीं सकते हैं। मगर यह जगह अभी भी फेमस है और नाविक आपको यह जगह जरूर दिखाएंगे। 


चौसठ योगिनी मंदिर जबलपुर - Chausath yogini mandir jabalpur

चौसठ योगिनी मंदिर भेड़ाघाट में स्थित एक प्रसिद्ध और प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर में आपको 64 मूर्तियां देखने के लिए मिलती हैं, जो पत्थर की बनी है और खंडित अवस्था में मौजूद है। यह मंदिर प्राचीन समय में तांत्रिक विद्याओं के लिए प्रसिद्ध था। यह मंदिर गोलाकार संरचना में बना हुआ है। गोलाकार संरचना में ही 64 मूर्तियों की स्थापना की गई है और मंदिर के बीच में आपको शंकर जी का मंदिर देखने के लिए मिलता है। शंकर जी का मंदिर भी पूरी तरह पत्थर से बना हुआ है। मंदिर के अंदर आपको शंकर जी की अद्भुत प्रतिमा देखने के लिए मिलती है, जिसमें शंकर जी और पार्वती जी विद्यमान है। मंदिर के बाहर शंकर जी का शिवलिंग आपको देखने के लिए मिलता है। इस मंदिर में खूबसूरत नक्काशी की गई है और बहुत ही भव्य लगता है। यह मंदिर एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। मंदिर तक पहुंचने के लिए आपको सीढ़ियां चढ़ने पड़ती है। मंदिर के ऊपर से आपको सूर्यस्त का बहुत ही खूबसूरत नजारा देखने के लिए मिलता है। आप यहां पर आकर घूम सकते हैं। 


पचमठा मंदिर जबलपुर - Pachmatha mandir jabalpur

पचमठा मंदिर भेड़ाघाट में स्थित एक प्राचीन मंदिर है। यहां पर आपको पांच छोटे-छोटे मंदिर देखने के लिए मिलते हैं, जिसमें शिव भगवान जी का शिवलिंग विराजमान है। यह मंदिर भी प्राचीन है और इस मंदिर की बनावट बहुत खूबसूरत है। आप जब भी भेड़ाघाट आते हैं, तो इस मंदिर को देख सकते हैं। यह मंदिर मुख्य भेड़ाघाट शहर में ही स्थित है। यह मंदिर चैसठ योगिनी मंदिर के बहुत करीब है और मुख्य सड़क में है, आप इसे आसानी से देख सकते हैं। 


लम्हेटा घाट जबलपुर - Lamheta ghat jabalpur

लम्हेटा घाट जबलपुर में स्थित एक बहुत ही खूबसूरत घाट है। यह घाट नर्मदा नदी के किनारे स्थित है। यह घाट बहुत शांत है। यहां पर ज्यादा भीड़ नहीं रहती है, तो आप यहां पर अपना समय बिताने के लिए आ सकते हैं। इस घाट के आसपास आपको बहुत सारे प्राचीन मंदिर देखने के लिए मिलते हैं। घाट के पास ही में राधे कृष्ण जी का मंदिर है, जो बहुत ही प्राचीन है। इस मंदिर में किसी भी तरह की मूर्ति स्थापित नहीं है। यह मंदिर खंडहर हो चुका है और यहां पर आप आकर इस मंदिर की भव्यता को देख सकते हैं। मगर धीरे-धीरे यह मंदिर ध्वस्त होते जा रहा है। आपको लम्हेटा घाट में आकर बहुत अच्छा लगेगा और शांति मिलती है। आप यहां पर अपना अच्छा समय बिता सकते हैं। यहां पर आप नहाने का मजा भी ले सकते हैं। यहां पर चेंजिंग रूम भी है, जहां पर कपड़े बदलने की व्यवस्था है। यहां पर चाय की दुकानें भी आपको देखने के लिए मिल जाती है, जहां पर आप घाट के किनारे पर बैठकर चाय की चुस्कियां का मजा ले सकते हैं। आप लम्हेटा घाट से भेड़ाघाट की तरफ जाते हैं, तो आपको बहुत सारे प्राचीन मंदिर देखने के लिए मिलते हैं।


श्री परमहंस आश्रम लम्हेटा घाट जबलपुर - Shree Paramahamsa Ashram Lamhetaghat Jabalpur

श्री परमहंसी आश्रम लम्हेटा घाट के पास स्थित है और आप यहां पर आ सकते हैं। इस आश्रम में आपको बहुत सारे मंदिर देखने के लिए मिलते हैं। यहां पर शिव भगवान जी का मंदिर स्थित है। यहां पर राधे कृष्ण जी का मंदिर स्थित है। आश्रम का जो वातावरण है, वह शांत है और आपको शांति मिलेगी। यहां से आपको नर्मदा नदी का बहुत खूबसूरत व्यू देखने मिलेगा और यहां पर आपको प्रसाद भी खाने के लिए मिलता है, जो बहुत टेस्टी रहता है। 


घुघरा जलप्रपात जबलपुर - Ghughra waterfall jabalpur

घुघरा जलप्रपात नर्मदा नदी पर बनने वाला खूबसूरत जलप्रपात है और यह जलप्रपात लम्हेटा घाट के पास ही में स्थित है। आप इस जलप्रपात तक अपनी बाइक या कार से पहुंच सकते हैं। यह जलप्रपात मुख्य सड़क से करीब 1 से 2 किलोमीटर दूर होगा और यह जलप्रपात बहुत खूबसूरत है। यहां पर आप आते हैं, तो यहां पर किसी भी तरह की सुरक्षा की दृष्टि से कोई भी व्यवस्था नहीं है, तो आप यहां पर अपनी सुरक्षा स्वयं करें। आपको जलप्रपात में आकर बहुत अच्छा लगेगा, क्योंकि यहां पर ज्यादा भीड़ नहीं रहती है और आप यहां पर पिकनिक मना सकते हैं। अपने दोस्तों के साथ आ सकते हैं। 


तिलवारा घाट - Tilwara Ghat Jabalpur

तिलवारा घाट जबलपुर जिले में नर्मदा नदी के किनारे स्थित एक घाट है। यह घाट बहुत ही खूबसूरती से बना हुआ है। आप इस घाट में आकर घूम सकते हैं। घाट में आपको बहुत सारे मंदिर देखने के लिए मिल जाते हैं। यहां पर प्राचीन शनि देव जी का मंदिर है, जिसमें शनि भगवान जी की मूर्ति देखने के लिए मिलती है। यहां पर शनिवार के दिन शनि भगवान जी को तेल चढ़ाने वालों की भीड़ आपको देखने के लिए मिल जाती है। शनि भगवान जी के मंदिर के सामने ही दुर्गा जी के विसर्जन के लिए कुंड बना हुआ है। तिलवारा घाट में मकर संक्रांति के दिन और नर्मदा जयंती के दिन मेले का आयोजन होता है। यहां पर हजारों की संख्या में लोग नर्मदा जी में स्नान करने के लिए और मेले का लुफ्त उठाने के लिए तिलवारा घाट में आते हैं। तिलवारा घाट में आपको शंकर जी की बहुत सारे शिवलिंग देखने के लिए मिल जाते हैं। यहां पर हनुमान जी का मंदिर भी है। हनुमान जी की प्रतिमा बहुत ही भव्य लगती है। तिलवारा घाट में आपको पुराना पुल देखने के लिए मिल जाता है। यह पुल अब आवागमन के लिए बंद कर दिया गया है। 


ग्वारीघाट जबलपुर - Gwarighat jabalpur

ग्वारीघाट जबलपुर जिले का एक मुख्य आकर्षण है। यह जबलपुर जिले में घूमने वाला एक मुख्य दर्शनीय स्थल है। ग्वारीघाट नर्मदा नदी के किनारे स्थित मुख्य घाट है। आप यहां पर आसानी से पहुंच सकते हैं। यहां पर ऑटो और मेट्रो बस दोनों आती है। आप यहां पर गाड़ी से भी पहुंच सकते हैं। यहां पर आपको नर्मदा नदी के किनारे बहुत सारे घाटों की श्रंखला देखने के लिए मिलती है। आप यहां पर आकर नर्मदा नदी में स्नान कर सकते हैं। नर्मदा माता के दर्शन कर सकते हैं। नर्मदा माता का मंदिर नर्मदा नदी के बीच में बना हुआ है। आप इस मंदिर में जा सकते हैं। यहां पर बहुत सारे घाट बने हुए हैं, जिनका अलग-अलग नाम है। आप यहां तैराकी का भी मजा ले सकते हैं।  यहां पर बहुत सारे मंदिर हैं, जिनके दर्शन आप कर सकते हैं। यहां पर लोगों के बैठने के लिए गार्डन बना हुआ है। यहां पर 12 ज्योतिर्लिंगों की प्रतिकृति पत्थर के शिवलिंग स्थापित किए गए हैं। शाम के समय ग्वारीघाट में आकर नर्मदा जी की आरती करने का एक अलग ही अनुभव होता है। यहां पर आप शाम के समय आएंगे तो बहुत अच्छा लगता है। ग्वारीघाट में नर्मदा जयंती और मकर संक्रांति के समय बहुत बड़ा मेला लगता है और यहां पर हजारों की संख्या में लोग मां नर्मदा जी के दर्शन करने के लिए आते हैं। ग्वारीघाट में त्योहारों के दिन अलावा भी बहुत सारे लोग नर्मदा जी के दर्शन करने के लिए और दीपदान करने के लिए आते हैं। यहां पर आप आते हैं, तो आपको यहां पर भंडारा खाने का भी मौका मिलता है और यहां पर बहुत अच्छा लगता है। आप दिन में भी यहां आकर समय बिता सकते हैं और शाम के समय भी यहां आ सकते हैं। 


गीता धाम मंदिर ग्वारीघाट जबलपुर - Geeta Dham Temple Gwarighat Jabalpur

गीता धाम मंदिर ग्वारीघाट में स्थित एक धार्मिक स्थल है। यहां पर आपको श्री कृष्ण और राधा जी का मंदिर देखने के लिए मिलता है। यह ग्वारीघाट से करीब 1 से डेढ़ किलोमीटर दूर होगा। आप यहां पर पैदल भी घूमने के लिए आ सकते हैं। यहां पर आश्रम भी है और यहां पर आकर बहुत अच्छा लगता है। 


काली धाम घाट ग्वारीघाट जबलपुर - Kali Dham Ghat Guarighat Jabalpur

कालीघाट धाम ग्वारीघाट का एक मनोरम घाट है। यह घाट ग्वारीघाट से करीब 2 से 3 किलोमीटर दूर होगा। आप इस घाट में अपनी गाड़ी से आ सकते हैं। इस घाट में ज्यादा भीड़ नहीं रहती है। इसलिए आप यहां पर आ कर अपना समय शांति से बिता सकते हैं। यहां पर आप नहाने का मजा भी ले सकते हैं। यहां पर चाय नाश्ते के लिए एक टपरी है, जहां पर आपको चाय और नाश्ता मिल जाता है। अगर आपको भूख लगती है, तो आप यहां से खा सकते हैं। यहां पर आपको खूबसूरत नर्मदा जी का व्यू देखने के लिए मिलता है। आसपास यहां पर खेत है। यहां पर आपको काली जी का भव्य मंदिर भी देखने के लिए मिलता है। आप यहां पर मंदिर में आकर काली जी के दर्शन कर सकते हैं। 


जामतरा ब्रिज जबलपुर - Jamtara bridge jabalpur

जामतरा ब्रिज जबलपुर में घूमने का एक मुख्य स्थल है। जामतरा ब्रिज में आपको नर्मदा नदी का खूबसूरत व्यू देखने के लिए मिलता है। यहां पर आपको सनसेट का भी बहुत खूबसूरत व्यू देखने के लिए मिल जाता है। यहां पर आपको पुराना रेलवे ब्रिज देखने के लिए मिलता है, जिसमें आप घूम सकते हैं और यहां पर फोटो क्लिक कर सकते हैं। आप नर्मदा नदी के पास भी जा सकते हैं और नर्मदा नदी में नहाने का भी मजा ले सकते हैं। यहां पर आप अपने दोस्तों के साथ और परिवार के लोगों के साथ आ सकते हैं। आसपास यहां पर आपको खेत खेत खलियान देखने के लिए मिलते हैं। यहां पर आकर आपको अच्छा लगेगा। 


भदभदा झरना जबलपुर - Bhadbhada waterfall jabalpur

भदभदा जलप्रपात गौर नदी पर बनने वाला एक सुंदर जलप्रपात है। यह जलप्रपात ज्यादा बड़ा नहीं है। मगर खूबसूरत लगता है। यहां पर चारों तरफ का वातावरण देखने लायक है। आप यहां पर आ सकते हैं। मगर यहां आने के लिए सड़क बहुत ही खराब है। यह जलप्रपात सुनसान एरिया में है, तो आप यहां पर आते हैं। तो समूह के साथ आएं। अपने दोस्तों और परिवार के लोगों को साथ लेकर आएं। यहां पर अकेले ना आए। यह जलप्रपात आपको बरसात में ही देखने के लिए मिलेगा। बाकी गर्मी के समय यह जलप्रपात सूख जाता है। आप यहां पर आकर पिकनिक मना सकते हैं और यहां पर बहुत सारे लोग आपको मछली पकड़ते हुए भी देखने के लिए मिलते हैं। इस जलप्रपात में जाने के लिए किसी भी तरह का चार्ज नहीं लिया जाता है। आप यहां पर जाकर मजे कर सकते हैं। 


रानी दुर्गावती समाधि जबलपुर - Rani Durgavati Samadhi Jabalpur

रानी दुर्गावती समाधि स्थल एक प्राचीन स्थल है। कहा जाता है कि यहां पर रानी दुर्गावती ने अपने प्राणों का बलिदान दिया था। आपको यहां पर रानी दुर्गावती की भव्य मूर्ति देखने के लिए मिल जाती है। यहां पर आप आसानी से पहुंच सकते हैं। यहां पर सड़क के एक किनारे पर रानी दुर्गावती जी की मूर्ति की स्थापना  की गई है और गार्डन बनाया गया है और सड़क के दूसरे किनारे पर उनके पुत्र की मूर्ति की स्थापना की गई है। यहां पर बरसात के समय बहुत खूबसूरत लगता है। यहां पर बरसात के समय पानी बहता है और चारों तरफ हरियाली रहती है। आप यहां पर आकर रानी दुर्गावती की समाधि देख सकते हैं। यहां पर 26 जनवरी के समय बहुत बड़े मेले का आयोजन होता है। यह मेला 7 दिन चलता है, जिसमें दूर दूर से लोग मेले का आनंद लेने के लिए आते हैं। उस समय यहां पर रानी दुर्गावती की समाधि पर भी कार्यक्रम किए जाते हैं। रानी दुर्गावती की समाधि बरगी बांध सड़क पर स्थित है। आप जब भी बरगी बांध जाते हैं, तो रानी दुर्गावती की समाधि में रुक सकते हैं और उनके बारे में जानकारी पढ़ सकते हैं। 


बरगी बांध जबलपुर - Bargi Dam Jabalpur

बरगी बांध जबलपुर शहर की एक दर्शनीय स्थल है। बरगी बांध जबलपुर से 25 से 30 किलोमीटर दूर है। आप बरगी बांध में आसानी से पहुंच सकते हैं। बरगी बांध नर्मदा नदी पर बनने वाला पहला बांध है। यह बांध जबलपुर से मंडला जिले तक फैला हुआ है। बरगी बांध देखने के लिए बरसात के समय बहुत बड़ी संख्या में लोग इकट्ठे होते हैं। बरसात के समय बरगी बांध पानी से पूरी तरह से भर जाता है और इसके गेट खोले जाते हैं, जिसे देखने के लिए बहुत दूर दूर से लोग आते हैं। बरगी बांध में 21 गेट हैं। बरगी बांध में आप बोटिंग का और क्रूज की सवारी का मजा ले सकते हैं। यहां पर आपको बहुत सारे मछली पकड़ते हुए लोग देखने के लिए मिलते हैं। यहां पर सूर्यास्त का दृश्य बहुत ही मनोरम होता है। आप यहां पर आ कर इस दृश्य का आनंद ले सकते हैं। यहां पर आप अपने दोस्तों और परिवार के लोगों के साथ पिकनिक मनाने के लिए आ सकते हैं। बरगी बांध के आसपास भी बहुत सारी जगह है, जहां पर आप घूमने के लिए जा सकते हैं। 


संग्राम सागर झील जबलपुर - sangram sagar jabalpur

संग्राम सागर झील जबलपुर जिले के एक प्राचीन झील है। यह झील बाजनामठ मंदिर के पास स्थित है। आप मंदिर से इस झील का दृश्य देख सकते हैं। यह झील बहुत बड़े भू भाग में फैली हुई है। झील के चारों तरफ आपको पहाड़ देखने के लिए मिलते हैं। झील में आपको मछलियां और कमल के फूल देखने के लिए मिल जाएंगे। झील के किनारे गार्डन भी बना हुआ है, जिसमें आकर आप बैठ सकते हैं। यहां पर आप अपने दोस्तों के साथ आकर फोटो शूट कर सकते हैं। बरसात के समय संग्राम सागर झील पानी से पूरी तरह से भर जाती है, जिससे झील का पानी ओवरफ्लो होता है। झील के एक किनारे से पानी ओवरफ्लो होता है, जो झरने की तरह दिखता है। आप यहां पर आ कर इस झरने को देख सकते हैं। झील के एक किनारे पर आपको एक महल का खंडहर देखने के लिए मिलता है, जो कहा जाता है कि गोंड राजा संग्राम सिंह के द्वारा बनाया गया था। आपको यहां पर आकर बहुत अच्छा लगेगा। चारों तरफ पहाड़ और झील बहुत ही मनोरम दृश्य पेश करती हैं। 


पिसनहारी की मढ़िया जबलपुर - Pisanhari ki madiya jabalpur

पिसनहारी की मढ़िया जबलपुर में स्थित एक प्रसिद्ध जैन मंदिर है। यह मंदिर मेडिकल रोड पर स्थित है। यह मंदिर पहाड़ की चोटी पर स्थित है। मंदिर तक पहुंचने के लिए सीढियां बनी हुई है। इस मंदिर से चारों तरफ का दृश्य बहुत ही खूबसूरत नजर आता है। पिसनहारी की मढ़िया में अगर आप ठहरना चाहते हैं, तो आपको यहां पर रूम भी मिल जाते हैं, जो बहुत सस्ते होते हैं। बरसात के समय यहां पर बहुत अच्छा लगता है। मंदिर के चारों तरफ पहाड़ियां आपको देखने के लिए मिलती है। मंदिर के ऊपर से आपको पूरे जबलपुर शहर का दृश्य देखने के लिए मिलता है। मंदिर में सभी प्रकार की व्यवस्थाएं उपलब्ध है। आप मंदिर में जाते हैं, तो आपको नीचे ही चप्पल उतरना पड़ता है और स्टैंड में रखना पड़ता है। मंदिर के ऊपर आपको एक गुफा देखने के लिए मिलती है। गुफा का खुलने का टाइम टेबल रहता है। आपको यहां पर आकर बहुत अच्छा लगेगा। यहां पर कपल्स लोग नहीं आ सकते हैं। यह जगह बहुत सुंदर और शांत है। यह मंदिर सुबह 9 बजे खुलता है और शाम 7ः30 बजे बंद हो जाता है।


रानी दुर्गावती किला जबलपुर - Rani durgavati kila jabalpur

रानी दुर्गावती का किला या मदन महल का किला जबलपुर जिले में स्थित एक प्राचीन स्थल है। आप यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं। यह किला एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। इस किले तक पहुंचने के लिए आपको सीढ़ियां मिलती है। इस किले के आसपास का भाग खंडहर में तब्दील हो चुका है। इस किले को प्राचीन समय में वॉच टावर के रूप में प्रयोग किया जाता था। इस किले से आप जबलपुर का मनोरम दृश्य देख सकते हैं। आप अगर बरसात के समय आते हैं, तो यहां पर चारों तरफ आपको हरियाली देखने के लिए मिलती है और आप सीढ़ियां भी आसानी से चढ़ जाते हैं। मगर आप गर्मी के समय आते हैं, तो आपको सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी होती है और किले के आसपास किसी भी तरह की पानी की व्यवस्था नहीं है। आप यहां आए तो पानी की बोतल साथ लेकर आएं। रानी दुर्गावती किले के बारे में कहा जाता है, कि इस किले से एक सुरंग निकलती थी, जो मंडला के रामनगर के किले तक जाती हैं। अब यह सुरंग बंद कर दी गई है। आप इस किले में आते हैं, तो आपको यहां पर घोड़ों का अस्तबल, एक छोटा सा कुंड और एक वॉच टावर या महल देखने के लिए मिलता है, जो एक पत्थर पर बना हुआ है। 


देवताल तालाब जबलपुर - Devtal Talab Jabalpur

देवताल तालाब जबलपुर में स्थित एक प्राचीन जगह है और इस जगह में आपको एक तालाब देखने के लिए मिलता है। इस  तालाब के आसपास आपको बहुत सारे पुराने मंदिर देखने के लिए मिलते हैं। इन मंदिरों की बनावट पुराने समय की है। आप यहां पर आकर इन मंदिरों को देख सकते हैं और इन मंदिरों में शिवलिंग विराजमान है। इस तालाब में आपको मछलियां देखने के लिए मिलती हैं। यहां पर बहुत सारे लोग मछलियों को दाना डालते हैं और यहां पर मछलियों की तादाद बहुत ज्यादा है। आप यहां पर आकर अपना अच्छा समय बिता सकते हैं।  आप इस तालाब से थोड़ा आगे जाते हैं, तो आपको ओशो का आश्रम भी देखने के लिए मिलता है। आप वहां जा सकते हैं और आगे की साइड एक तालाब और है। आप उसे भी देख सकते हैं। यहां पर चारों तरफ पहाड़ियां हैं, जो बहुत अच्छी लगती है। यहां का माहौल बहुत शांत है, आप यहां पर आकर मेडिटेशन भी कर सकते हैं। देवताल तालाब मेडिकल रोड में ही स्थित है। आप इस तालाब में आसानी से पहुंच सकते हैं।  यह मुख्य सड़क के किनारे ही स्थित है। 


शैल पर्ण उद्यान जबलपुर - shailparn udyan jabalpur

शैल पर्ण उद्यान एक खूबसूरत उद्यान है और यहां पर आपको आकर अच्छा लगेगा, क्योंकि यहां पर चारों तरफ ऊंची ऊंची पहाड़ियां है। उद्यान के बीच में झील है, जो काफी खूबसूरत लगती है। बरसात के समय झील में पानी भर जाता है और जो चारों तरफ का वातावरण है। वह हरियाली से भर जाता है, तो बहुत अच्छा लगता है। आप इस गार्डन में सबसे ऊंचाई पर जा सकते हैं, जहां पर वॉच टावर है और वॉच टावर से आपको जबलपुर का चारों तरफ का नजारा देखने के लिए मिलता है। यह जो गार्डन है, यह कपल्स के लिए बहुत मशहूर है। मगर यहां पर फैमिली भी आती है और काफी इंजॉय करती है, क्योंकि यहां पर बहुत ज्यादा हरियाली है। 


बैलेंसिंग रॉक जबलपुर - Balancing rock jabalpur

बैलेंसिंग रॉक जबलपुर में स्थित एक एक अद्भुत स्थान है। यहां पर एक बड़ी सी चट्टान दूसरी चट्टान के ऊपर टिकी हुई है। मगर वह गिर नहीं रही है। यह एक अजूबा है और इस अजूबे को देखने के लिए यहां पर बहुत सारे लोग आते हैं। इस तरह की चट्टानें आपको बहुत कम जगह देखने के लिए मिलेगी। यहां पर गार्डन बना हुआ है। यहां पर बैठने की व्यवस्था है। आप यहां पर आकर बैठ सकते हैं। रात में यहां पर लाइट जलाई जाती है, जिससे बैलेंसिंग रॉक की खूबसूरती और भी ज्यादा निखर आती है। बैलेंसिंग रॉक मदन महल किले के पास में है। आप यहां पर आकर बैलेंसिंग रॉक देख सकते हैं । 


रानी दुर्गावती संग्रहालय जबलपुर - Rani Durgavati Museum Jabalpur

रानी दुर्गावती संग्रहालय जबलपुर में स्थित एक संग्रहालय हैं। यहां पर बहुत सारी गैलरिया बनी हुई हैं और इन गैलरी  में आपको प्राचीन मूर्तियां देखने के लिए मिलती है। यहां पर आपको पेंटिंग्स देखने के लिए मिलती है। यह पेंटिंग पुराने जमाने की है और यहां पर एक गैलरी में आपको आदिवासी गतिविधियां से संबंधित वस्तुएं देखने के लिए मिलती है। आप बाहर आते हैं, तो बाहर भी आपको पत्थर की मूर्तियां देखने के लिए मिलती है, जो अलग-अलग स्टेज में सजा कर रखी गई है। यहां पर एक बड़ा सा दरवाजा है, जो पत्थर से बना है और उसमें खूबसूरत नक्काशी बनाई गई है। आप इसको देख सकते हैं। रानी दुर्गावती संग्रहालय में प्रवेश के लिए 10 रुपए शुल्क लिया जाता है और यहां पर अगर आप कैमरा यूज करना चाहते हैं, या फोटो क्लिक करना चाहते हैं, तो उसका चार्ज अलग लिया जाता है। रानी दुर्गावती संग्रहालय भंवरताल गार्डन के पास स्थित है और आप यहां पर आसानी से पहुंच सकते हैं, क्योंकि यह मुख्य जबलपुर शहर में स्थित है। 


भंवरताल पार्क जबलपुर - Bhanwartal garden jabalpur

भंवरताल गार्डन जबलपुर शहर में स्थित एक पार्क है और यह पार्क जबलपुर शहर के मध्य में स्थित है। आप इस पार्क में आसानी से पहुंच सकते हैं। यहां पर बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले मिलते हैं, जो बच्चों को बहुत पसंद आएंगे और यहां पर फव्वारा भी है, जो बहुत खूबसूरत लगता है। शाम के समय यह फव्वारा चालू होता है और आपको अच्छा लगेगा। यहां पर स्केटिंग के लिए ग्राउंड बना हुआ है, जहां पर फ्री में स्केटिंग कर सकते हैं। किसी भी तरह का चार्ज नहीं लिया जाता है। मगर इसका समय रहता है। आप शाम के समय यहां पर स्केटिंग कर सकते हैं। भंवरताल गार्डन काफी सुंदर है और आप यहां पर बैठ सकते हैं। यहां पर चारों तरफ हरियाली है। 


टैगोर गार्डन जबलपुर - Tagore Garden Jabalpur

टैगोर गार्डन सदर में स्थित एक खूबसूरत पार्क है और यह पार्क हरियाली से भरा हुआ है। शाम के समय यहां पर आपको पक्षियों की चहचहाहट सुनने के लिए मिलती है। यहां पर आप घूमने के लिए आ सकते हैं। यहां पर बहुत सारे झूले हैं, जो बच्चों को बहुत पसंद आएंगे। यहां पर फव्वारा भी है। शाम के समय फव्वारा यहां पर चालू किया जाता है। सुबह के समय इस पार्क में आना फ्री है। 8 बजे तक आप यहां पर आकर मॉर्निंग वॉक का मजा ले सकते हैं और 8:00 बजे के बाद यहां पर आने का चार्ज लिया जाता है। टैगोर गार्डन में आप अपने फैमिली के साथ आ सकते हैं और टैगोर गार्डन के बाजू में ही आपको चौपाटी देखने के लिए मिलती है। चौपाटी में आप खाने पीने का लुफ्त उठा सकते हैं। 


डुमना नेचर रिजर्व पार्क जबलपुर - Dumna nature reserve park jabalpur

डुमना नेचर रिजर्व पार्क जबलपुर शहर में स्थित एक नेचुरल पार्क है। यहां पर आपको देखने के लिए झील मिलती है, जिसे खंदारी झील कहा जाता है। यहां पर आप जंगली जानवर भी देख सकते हैं। यहां पर आपको हिरण, बंदर, मोर  देखने के लिए मिल जाते हैं। आप यहां पर सुबह के समय आएंगे, तो आपको यह जानवर देखने मिल सकते हैं। बाकी दिन के समय यह जानवर छुप जाते हैं या बहुत कम देखने के लिए मिलते हैं। डुमना नेचर पार्क बहुत बड़े एरिया में फैला हुआ है। आप यहां पर आकर साइकिलिंग करके भी पूरा पार्क घूम सकते हैं। यहां पर आपको बहुत अच्छा लगेगा। बरसात के समय खंदारी जलाशय पूरी तरह पानी से भर जाता है, जो देखने में बहुत खूबसूरत लगता है। खंदारी जलाशय में मगरमच्छ भी है,  अगर आप भाग्यशाली होते हैं, तो आपको मगरमच्छ भी देखने के लिए मिल सकता है और बरसात के समय खंदारी झील में खंदारी वाटरफॉल बनता है। आप वह भी बरसात के समय आकर देख सकते हैं। आप यहां पर अपने फैमिली वालों के साथ या दोस्तों के साथ घूमने के लिए आ सकते हैं। यहां पर एंट्री का चार्ज लिया जाता है। पार्किंग आपकी फ्री रहती है। डुमना नेचर पार्क डुमना एयरपोर्ट जाने वाली सड़क में ही स्थित है। आप यहां पर आसानी से पहुंच सकते हैं। आपको यहां पर आकर बहुत अच्छा लगेगा और शांति मिलेगी। 


परियट बांध जबलपुर - Pariyat Dam Jabalpur

परियट बांध जबलपुर शहर में स्थित एक जलाशय है। यह बांध जबलपुर शहर के बाहरी क्षेत्र में स्थित है। यह बांध जंगल के बीच में स्थित है। इस बांध के चारों तरफ खूबसूरत पहाड़ियां हैं, जो बहुत ही मनोरम दिखती हैं। आप यहां पर आकर पिकनिक मना सकते हैं। यहां पर बहुत सारे लोग आते हैं और खाना पीना बना कर खाते हैं। आप यहां पर आकर खाना पीना बना कर खा सकते हैं। यहां पर पार्किंग के लिए जगह है और यह बांध काफी बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है। इस बांध में मगरमच्छ भी हैं। आप अगर लकी हुए, तो आपको मगरमच्छ देखने के लिए मिल सकते हैं। आप यहां पर अपने फैमिली के साथ आ सकते हैं। अपने दोस्तों के साथ आ सकते हैं। यहां पर आपको कपल्स लोग भी देखने के लिए मिल जाते हैं। मगर कपल्स लोग के लिए यह जगह सुरक्षित नहीं है। 


निदान जलप्रपात जबलपुर - Nidan waterfall jabalpur

निदान जलप्रपात जबलपुर शहर में स्थित एक झरना है। यह झरना बहुत खूबसूरत है। यह झरना जबलपुर से करीब 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आप इस झरने तक गाड़ी से पहुंच सकते हैं यह झरना जबलपुर शहर में कटंगी के पास स्थित है और यह झरना जंगल के बीच में स्थित है। यहां पर पहाड़ी के ऊपर से पानी गिरता है, जो बहुत ही खूबसूरत लगता है। यह झरना जबलपुर दमोह हाईवे रोड से भी आपको देखने के लिए मिल जाता है। आपको इस जगह तक पहुंचने के लिए करीब 1 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है और यह जो रास्ता है। वो पथरीला रास्ता होता है और आपको यहां पर चलने के लिए जूते पहन कर आना चाहिए, ताकि आप इन रास्तों पर आसानी से चल सके। यहां पर आपको दो झरने देखने के लिए मिलते हैं। दोनों ही झरने करीब 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और दोनों ही झरने बहुत खूबसूरत लगते हैं। यहां पर पहुंचकर लगता है, जैसे कि आप स्वर्ग में पहुंच गए हैं। यहां पर चारों तरफ हरियाली और पहाड़ आपको देखने के लिए मिलते हैं। आप यहां पर अपने दोस्तों के साथ अपनी फैमिली के साथ जा सकते हैं। यहां पर आप बरसात के समय जा सकते हैं। गर्मी के समय झरना सूख जाता है। 


बगदरी जलप्रपात जबलपुर - Bagdari waterfall jabalpur

बगदरी जलप्रपात जबलपुर शहर का एक खूबसूरत जलप्रपात है। यह जलप्रपात जबलपुर से करीब 32 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह जलप्रपात बहुत खूबसूरत है और इस जलप्रपात में आप नहाने का मजा ले सकते हैं। यह जलप्रपात शहर के बाहर स्थित है।  आप यहां पर अपनी गाड़ी से पहुंच सकते हैं। यह जलप्रपात जबलपुर से सागर जाने वाली सड़क पर स्थित है। यह जलप्रपात दो या तीन स्तरों पर नीचे गिरता है, जो बहुत खूबसूरत लगता है। आप यहां पर बरसात के समय आकर इस  जलप्रपात की खूबसूरती को देख सकते हैं। यहां पर आपको चट्टाने देखने के लिए मिलती है, जो बहुत ही मनोरम दिखाई देती है। 


कचनार सिटी शिव मंदिर जबलपुर -  Kachnar city mandir jabalpur

कचनार सिटी शिव मंदिर जबलपुर शहर का एक धार्मिक स्थल है। यहां पर आपको शिव भगवान जी की बहुत बड़ी प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। यह प्रतिमा खुले आसमान के नीचे बनी हुई है और बहुत ही भव्य प्रतिमा है। इस प्रतिमा के चारों तरफ बगीचा है और बगीचे में भी खूबसूरत मूर्तियां बनाई गई है। आप यहां पर बैठकर इस प्रतिमा को निहार सकते हैं। यहां पर सावन सोमवार के समय और महाशिवरात्रि के समय बहुत बड़ा मेला लगता है। बहुत बड़ी संख्या में लोग भगवान शिव के दर्शन करने के लिए आते हैं। आप भी यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं। यह जबलपुर शहर की एक अच्छी जगह है। शिव भगवान की प्रतिमा के नीचे गुफा बनाई गई है, जिसमें १२ ज्योतिर्लिंग के प्रतिरूप विराजमान हैं। आप इनके दर्शन कर सकते हैं। यहां पर आकर बहुत अच्छा लगता है और आध्यात्मिक शांति मिलती है। 


श्री दिगंबर जैन मंदिर हनुमानताल जबलपुर - Shree Digambar Jain Temple Hanumanatal Jabalpur

श्री दिगंबर जैन मंदिर जबलपुर शहर में स्थित एक प्राचीन स्थल है। यह जैन धर्म के लोगों के लिए एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर जबलपुर शहर के मध्य में स्थित है। मंदिर में आपको भगवान स्वामी आदिनाथ की मूर्ति देखने के लिए मिलती है। इस मंदिर को बड़ा जैन मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। आप यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं। यहां आकर आपको बहुत अच्छा लगेगा। इस मंदिर के सामने आपको हनुमान ताल झील देखने के लिए मिलती है। यह झील बहुत बड़े एरिया में फैली हुई है। इस झील के आसपास भी बहुत सारे मंदिर हैं। 


रामलला मंदिर जबलपुर - Ramlala mandir jabalpur

रामलला मंदिर ग्वारीघाट में स्थित है। यह मंदिर हनुमान जी को समर्पित है। यहां पर मनोकामना पूर्ति वाले हनुमान जी विराजमान है। यहां पर लोग अपनी मनोकामना एक चिट्ठी में लिखते हैं और हनुमान जी को अर्पित करते हैं। मनोकामना पूरी होती है, तो यहां पर चढ़ावा चढ़ाया जाता है। यहां पर आप आ सकते हैं और यहां पर शनि देवता भी विराजमान हैं। यहां पर श्री राम जी, माता सीता जी की मूर्ति विराजमान है, जो बहुत ही खूबसूरत लगती है। यहां पर आकर बहुत अच्छा लगता है और शांति मिलती है। शनिवार को यहां पर बहुत भीड़ रहती है। 


श्री सिद्धगणेश मंदिर ग्वारीघाट जबलपुर - Shri Siddh Ganesh Temple Gwarighat Jabalpur

श्री सिद्धि गणेश मंदिर ग्वारीघाट में ही स्थित है। यह मंदिर  ग्वारीघाट जाने वाले रास्ते में ही स्थित है। आप यहां पर आकर गणेश जी के दर्शन कर सकते हैं। यहां पर गणेश जी आप जो भी मन्नत मानते हैं, वह जरूर पूरी होती है। यह मन्नत को एक कागज पर लिखा जाता है और  गणेश जी को अर्पित किया जाता है। मन्नत पूरी होने पर आपकी इच्छा अनुसार यहां पर दान दिया जाता है। आप भी यहां पर आकर गणेश जी के दर्शन कर सकते हैं। 


शारदा माता मंदिर बरेला जबलपुर - sharada mata mandir barela jabalpur

बरेला का शारदा माता का मंदिर पहाड़ी पर स्थित है। इस मंदिर में पहुंचने के लिए सड़क है। नवरात्रि के समय आपको इस मंदिर तक पैदल ही पहुंचना पड़ता है। यहां पर शारदा माता की भव्य प्रतिमा स्थित है। यह मंदिर बहुत पुराना है। मंदिर में आपको छोटे-छोटे अन्य मंदिर भी देखने के लिए मिल जाते हैं। यहां पर शंकर जी का मंदिर विराजमान है। काली माता का मंदिर भी यहां पर आपको देखने के लिए मिलता है। इसके अलावा यहां पर आपको चारों तरफ का बहुत ही खूबसूरत नजारा देखने के लिए मिलता है। आप यहां पर अपनी गाड़ी से पहुंच सकते हैं। बरेला का मंदिर जबलपुर से मंडला जाने वाली सड़क में स्थित है। 


शारदा मंदिर जबलपुर - sharada mandir jabalpur

जबलपुर में शारदा माता का मंदिर मदन महल किले के पास में स्थित है। यह मंदिर बहुत ही भव्य है। मंदिर में आपको नौ देवियों की प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। यहां पर और भी छोटे-छोटे मंदिर स्थित है। यहां पर हनुमान जी का मंदिर भी स्थित है। मंदिर से आपको जबलपुर का बहुत ही खूबसूरत दृश्य देखने के लिए मिलता है। मंदिर में आपको नवरात्रि में बहुत भीड़ देखने के लिए मिलती है। आप यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं। यहां पर आकर आपको अच्छा लगेगा। 


काली माता मंदिर जबलपुर - Kali mata mandir jabalpur

 काली माता का मंदिर जबलपुर में सदर में स्थित है। यह मंदिर बहुत प्रसिद्ध है। मंदिर में आपको काली माता की भव्य प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। यहां पर नवरात्रि के समय बहुत भीड़ लगती हैं। इस मंदिर में आप आसानी से पहुंच सकते हैं। यह मंदिर मुख्य शहर में ही स्थित है। मंदिर में और भी देवी देवता विराजमान है, जिनके दर्शन आप यहां पर आकर कर सकते हैं। 


माँ बड़ी खेरमाई मंदिर जबलपुर - Maa Badi Khermai Temple Jabalpur

बड़ी खेरमाई का मंदिर जबलपुर में बहुत प्रसिद्ध है। यह मंदिर  मुख्य जबलपुर शहर में स्थित है। यह मंदिर जबलपुर में हनुमान ताल वार्ड में स्थित है। आप इस मंदिर में घूमने के लिए आ सकते हैं। मंदिर के गर्भ गृह में बड़ी खेरमाई की भव्य प्रतिमा स्थित है। आप मां के दर्शन कर सकते हैं। नवरात्रि के समय यहां पर बहुत भीड़ लगती है। यहां पर लोग लाइन लगाते हैंए माता के दर्शन करने के लिए। नवरात्रि के समय यहां पर मेला भी लगता है। 


नाहन देवी मंदिर जबलपुर - Nahan Devi Temple Jabalpur

नाहन देवी मंदिर जबलपुर दमोह रोड पर स्थित एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर हिरन नदी के बीच में स्थित है और यहां पर बहुत बड़ी चट्टाने हैए जो देवी के रूप में पूजी जाती है। यहां पर नवरात्रि के समय बहुत भीड़ लगती है। यहां पर मकर संक्रांति के समय मेला भरता हैए जो 7 से 8 दिन तक चलता है। आप यहां पर आकर नाहन देवी के दर्शन कर सकते हैं और नदी में स्नान कर सकते हैं। यहां का वातावरण बहुत शांत है और यहां पर आकर आपको अच्छा लगेगा। 


श्री नंदिकेश्वर मंदिर बरगी बांध जबलपुर - Shri Nandikeshwar Temple Bargi Dam Jabalpur

श्री नंदिकेश्वर मंदिर  बरगी बांध के पास एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। यह मंदिर सफेद मार्बल से बना हुआ है और यह मंदिर देखने में बहुत ही भव्य लगता है। मंदिर के अंदर आपको शिवलिंग के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। यहां पर नाग देवता की भी प्रतिमा पत्थर पर बनाई गई है। मंदिर के आसपास आपको और भी मंदिर देखने के लिए मिलते हैं। मंदिर से बरगी बांध का बहुत ही भव्य नजारा देखने के लिए मिलता है। आपको यहां पर आकर बहुत अच्छा लगेगा। मंदिर तक आप पैदल भी पहुंच सकते हैं और यहां पर आने के लिए सड़क भी है। आप मंदिर तक गाड़ी से भी पहुंच सकते हैं। 


श्री काली गढ़ स्टेट बरगी बांध जबलपुर - Shri Kali Garh State Bargi Dam Jabalpur

श्री काली गढ़ स्टेट में आपको काली जी की भव्य प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। यहां पर काली जी की प्रतिमा के नीचे मंदिर स्थित है, जहां पर नौ देवियों की स्थापना की गई है। यहां पर आपको शिव भगवान जी का मंदिर भी देखने के लिए मिलता है। श्री काली गढ़ स्टेट बरगी बांध के पास ही स्थित है। यह मंदिर नागपुर हाईवे रोड से बरगी बांध पहुंचने वाली सड़क पर स्थित है। यह मंदिर मुख्य सड़क पर स्थित है और काली जी की प्रतिमा आपको दूर से ही दिखने लगती है। आप यहां पर बरसात के समय आते हैं, तो बहुत अच्छा लगता है। यहां पर चारों तरफ हरियाली रहती है। नवरात्रि के समय पर काली जी के दर्शन करने के लिए बहुत सारे लोग आते हैं। 


त्रिपुर सुंदरी मंदिर जबलपुर - tripur sundari mandir jabalpur

त्रिपुर सुंदरी मंदिर जबलपुर जिले का एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यहां पर त्रिपुर सुंदरी माता का प्राचीन मंदिर है। मंदिर में अंदर आपको त्रिपुर सुंदरी माता की भव्य मूर्ति देखने के लिए मिलती है। नवरात्रि के समय त्रिपुर सुंदरी माता के मंदिर में भक्तों की भीड़ इकट्ठी होती है। यहां पर आपको भंडारा खाने के लिए मिलता है, जो बहुत ही स्वादिष्ट होता है। यहां पर नवरात्रि के समय बहुत बड़ा मेला लगता है। त्रिपुर सुंदरी मंदिर जबलपुर भेड़ाघाट रोड पर स्थित है और आप यहां पर गाड़ी से पहुंच सकते हैं। यहां पर मेट्रो बस और ऑटो से भी आया जा सकता है। त्रिपुर सुंदरी मंदिर में आपको और भी मंदिर देखने के लिए मिलते हैं। यहां पर नौ देवियों की मूर्तियां आपको देखने के लिए मिलती है। यहां पर शंकर जी का शिवलिंग विराजमान है। भैरव बाबा का मंदिर भी यहां पर है और यहां पर प्राचीन मूर्तियां भी आपको देखने के लिए मिलती है। यहां पर लोग मन्नत मानते हैं और मन्नत पूरी करने के लिए वह नारियल चढ़ाते हैं और जिसकी भी मन्नत पूरी हो जाती है। वह यहां पर चांदी की घंटियां चढ़ाता है। 


बगलामुखी मंदिर जबलपुर - Baglamukhi mandir jabalpur

बगलामुखी मंदिर जबलपुर में त्रिपुर सुंदरी माता मंदिर के पास ही में स्थित है। इस मंदिर में बगलामुखी माता की प्रतिमा विद्यमान है। आप जब भी त्रिपुर सुंदरी मंदिर में दर्शन करने के लिए आते हैं, तो बगलामुखी मंदिर में भी आ सकते हैं। यह मंदिर ऊंचाई में स्थित है। मंदिर में जाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है। मंदिर में शिवलिंग भी स्थित है। आपको यहां पर आकर अच्छा लगेगा। 


बाजनामठ मंदिर जबलपुर - Bajnamath mandir jabalpur

बाजनामठ मंदिर प्राचीन मंदिर है। बाजनामठ मंदिर जबलपुर जिले में स्थित प्रसिद्ध भैरव बाबा का मंदिर है। यह मंदिर मेडिकल रोड में स्थित है। आप इस मंदिर में ऑटो से या मेट्रो बस से पहुंच सकते हैं। मंदिर मुख्य सड़क से एक या डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आपको यहां पर भैरव बाबा के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। यहां पर शनि भगवान जी की मूर्ति भी विराजमान है। यहां पर शनिवार को बहुत भीड़ लगती है और लोग शनि देवता को तेल चढ़ाने के लिए यहां पर आते हैं। यहां पर हनुमान जी की प्रतिमा भी विराजमान है। बाजनामठ मंदिर से आपको संग्राम सागर लेक का बहुत ही खूबसूरत नजारा भी देखने के लिए मिलता है। बाजनामठ मंदिर के बारे में कहा जाता है, कि यह मंदिर तांत्रिक विद्या ओं के लिए प्रसिद्ध है और यहां पर काली माता का मंदिर भी झील के किनारे स्थित है। आप यहां पर आ कर अच्छा समय बिता सकते हैं। 


पायली जबलपुर - Payali jabalpur

पायली जबलपुर शहर का एक पर्यटन स्थल है। यह बरगी बांध का भराव क्षेत्र हैए जो बहुत खूबसूरत लगता है। यहां पर सर्दियों के समय बहुत सारे लोग पिकनिक मनाने के लिए आते हैं। यहां पर एंट्री का चार्ज लिया जाता है। यहां पर सभी तरह की व्यवस्थाएं उपलब्ध है। जब यहां पर भीड़ लगती हैए तब यहां पर दुकानें भी लगती हैंए मगर जब यहां पर भीड़ नहीं रहती हैए तो यहां पर किसी भी तरह की दुकान आपको देखने के लिए नहीं मिलेगी।  यह पूरा गांव का इलाका है। यहां पर आपको खेत खलियानए पेड़ पौधे और जंगल देखने के लिए मिलता है। पायली में नर्मदा जी का भराव क्षेत्र में देखना भी बहुत जबरदस्त रहता है। आप भी यहां पर आकर अपना समय बिता सकते हैं। यहां पर बहुत अच्छा लगता है।


खेरमाई मंदिर जबलपुर

श्री सुप्तेश्वर गणेश मंदिर


निदान कुंड जलप्रपात, दमोह

नजारा व्यूप्वाइंट, दमोह

पचमढ़ी यात्रा

वीरांगना दुर्गावती वन्य जीव अभ्यारण


मंदसौर पर्यटन स्थल - Mandsaur tourist place | Tourist places near Mandsaur | MP tourism Mandsaur

मंदसौर जिले के दर्शनीय स्थल - Places to visit in Mandsaur | Mandsaur visiting places | Mandsaur famous places | Picnic spot near Mandsaur



मंदसौर में घूमने की जगह


पशुपतिनाथ मंदिर मंदसौर - Pashupatinath mandir mandsaur

श्री पशुपतिनाथ मंदिर मंदसौर जिले का एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यह एक मुख्य पर्यटन स्थल है। यह मंदिर शिव भगवान जी को समर्पित है। यह मंदिर बहुत बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है। मंदिर पर स्थित शिवलिंग बहुत प्राचीन है। यह मंदिर अनोखा है, क्योंकि यहां पर आप भगवान शिव जी के 8 मुख देख सकते हैं। इस प्रकार के सिर्फ दो मंदिर है। एक मंदिर नेपाल के काठमांडू शहर में पशुपतिनाथ मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है और दूसरा मंदिर मध्यप्रदेश में मंदसौर जिले में स्थित है। मंदसौर रेलवे स्टेशन से श्री पशुपतिनाथ मंदिर करीब 3 किलोमीटर दूर है। आप यहां पर अपने वाहन से या ऑटो से आ सकते हैं। श्री पशुपतिनाथ मंदिर शिवना नदी के किनारे स्थित है। शिवना नदी का दृश्य बहुत ही मनोरम होता है। आपको इस मंदिर में आकर बहुत शांति मिलेगी। यह मंदिर बहुत प्रसिद्ध है। श्री पशुपतिनाथ मंदिर के पास आपको अच्छी पार्किंग की व्यवस्था मिलती है। यहां पर आप आसानी से आ सकते हैं। यहां पर सावन सोमवार के समय और महाशिवरात्रि के समय बहुत बड़ी संख्या में लोग पशुपतिनाथ जी के दर्शन करने के लिए आते हैं। इस मंदिर में आपको विष्णु भगवान की अलग-अलग अवतारों की पेंटिंग देखने के लिए मिल जाती है, जो बहुत ही खूबसूरत लगती है। मंदिर में आने का सबसे अच्छा समय सुबह का और शाम का है। आपको इस समय आरती में शामिल होने का भी मौका मिल जाता है। 


नालछा माता मंदिर मंदसौर - Nalachha Mata Temple Mandsaur

नालछा माता मंदिर मंदसौर जिले का एक धार्मिक स्थल है। नालछा माता का मंदिर प्राचीन है। यह मंदिर पशुपतिनाथ मंदिर से करीब 2 से 3 किलोमीटर दूर होगा। नालछा माता मंदिर मंदसौर के पास नालछा गाँव में स्थित है। आप इस मंदिर में घूमने के लिए आ सकते हैं। पशुपतिनाथ मंदिर के बाद नालछा माता का मंदिर मंदसौर जिले में प्रसिद्ध है। यहां पर आपको नालछा माता के दर्शन करने के लिए मिलते है,ं जो देवी दुर्गा जी का स्वरुप है। आपको यहां पर दो दीपस्तंभ देखने के लिए मिलेंगे, जिसमें दीपक जलाया जाता है, जो बहुत ही भव्य लगते हैं। आप इस मंदिर में नालछा माता के साथ भैरव बाबा की प्रतिमा एक साथ देख सकते हैं, जो आपको यहीं पर देखने के लिए मिलेगी। यहां पर नवरात्रि के समय बहुत सारे लोग नालछा माता जी के दर्शन करने के लिए आते हैं। यहां पर गार्डन भी है, जहां पर आप बैठ सकते हैं और बच्चों के मनोरंजन के लिए गार्डन में झूले भी लगे हुए हैं। आपको यहां पर आकर अच्छा लगेगा। 


तेलिया तालाब मंदसौर - Teliya Talab Mandsaur

तेलिया तालाब मंदसौर जिले में घूमने के लिए एक अच्छी जगह है। यह मंदसौर जिले में स्थित एक तालाब है। यह तालाब बहुत खूबसूरत लगता है। आपको यहां पर सूर्योदय और सूर्यास्त का बहुत ही खूबसूरत नजारा देखने के लिए मिलेगा। यहां पर एक छोटा सा पार्क भी है, जहां पर अपनी फैमिली और बच्चों के साथ आकर एंजॉय कर सकते हैं। यहां तेलिया तालाब फोटोशूट के लिए अच्छी जगह है। यहां पर आप अपनी अच्छी फोटो क्लिक कर सकते हैं। आप यहां पर अपने दोस्त और फैमिली वालों के साथ आ सकते हैं। यहां पर पक्षियों की आवाज बहुत ही मधुर लगती है। तालाब में मछलियां है। आप यहां पर आकर मछलियों को दाना भी खिला सकते हैं। बरसात के समय तालाब का पानी ओवरफ्लो होता है और यहां पर पानी ओवरफ्लो होकर झरने की तरह बहता है, जो खूबसूरत लगता है। बरसात में आप आकर यह दृश्य देख सकते हैं। 


यशोधर्मन संग्रहालय मंदसौर - Yashodharman Museum Mandsaur

यशोधर्मन पुरातत्व संग्रहालय मंदसौर जिले में घूमने वाली एक अच्छी जगह है। आप यहां पर आकर भारत के प्राचीन इतिहास के बारे में जान सकते हैं। इस संग्रहालय में परमार वंश कालीन, मौर्य वंश कालीन एवं होल्कर वंश की मूर्तियां आपको देखने के लिए मिलती हैं। आपको यहां पर प्राचीन मूर्तियां देखने के लिए मिलती हैं, जो पत्थर पर नक्काशी करके बनाई गई हैं। यहां पर पेंटिंग भी आपको देखने के लिए मिलती है। यशोधर्मन पुरातत्व संग्रहालय सोमवार को बंद रहता है। सरकारी छुट्टी के दिन भी संग्रहालय बंद रहता है। संग्रहालय खुलने का समय 10 बजे से शाम 5 बजे तक है। भारतीय नागरिकों का 10 रू लगता है। आप यहां पर आकर घूम सकते हैं। यशोधर्मन पुरातत्व संग्रहालय मंदसौर रतलाम हाईवे रोड पर स्थित है। आप यहां पर आसानी से पहुंच सकते हैं। 


यशोधर्मन विजय स्तम्भ मंदसौर - Yashodharman Vijay Pillar Mandsaur

यशोधर्मन विजय स्तंभ या सोधनी स्तंभ मंदसौर की एक ऐतिहासिक स्थल है। यहां पर आपको दो स्तंभ देखने के लिए मिलते हैं, जो राजा यशोधर्मन द्वारा बनाए गए थे। हूणों पर विजय के लिए। आपको यहां पर और भी बहुत सारी पत्थर पर उकेरी गई मूर्तियां देखने के लिए मिल जाती है, जो प्राचीन समय की है। यह जगह प्राकृतिक वातावरण से भरी है और आपको यहां पर आकर बहुत अच्छा लगेगा।


कोटेश्वर महादेव मंदिर सीतामऊ, मंदसौर - Koteshwar Mahadev Temple Sitamau, Mandsaur

श्री कोटेश्वर मंदिर सीतामऊ मंदसौर जिले में स्थित एक मंदिर है। यह मंदिर खूबसूरत है और सीतामऊ से करीब 4 से 5 किलोमीटर दूर है। आप इस मंदिर में घूमने के लिए आ सकते हैं यह मंदिर शिव भगवान जी को समर्पित है। यहां पर आपको शिवलिंग के दर्शन करने मिलते हैं। यहां पर नदी बहती है, जिस का दृश्य बहुत खूबसूरत होता है। यहां पर नदी छोटा सा झरना बनाती है, जो खूबसूरत लगता है। यहां पर आप आते हैं, तो नदी और चट्टानों का खूबसूरत दृश्य देख सकते हैं। यहां पर आप स्नान भी कर सकते हैं। 


श्री मोड़ी माता जी का मंदिर सीतामऊ, मंदसौर - Shri modi mata ji temple sitamau, Mandsaur

मोड़ी माता मंदिर सीतामऊ में स्थित एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर स्थानीय लोगों में बहुत प्रसिद्ध है। यह मंदिर मंदसौर जिले में प्रसिद्ध है। आप यहां पर घूमने आ सकते हैं। यहां पर आपको मोड़ी माता के दर्शन करने के लिए मिल जाते हैं। यह मंदिर सीतामऊ से करीब 1 किलोमीटर दूर है। आप यहां आसानी से पहुंच सकते हैं। 


धर्मराजेश्वर मंदिर भानपुरा, मंदसौर - Dharmarajeshwar Temple Bhanpura, Mandsaur

धर्मराजेश्वर मंदिर मंदसौर जिले के पास घूमने का एक मुख्य पर्यटन स्थल है। यहां पर आपको हिंदू और जैन धर्म के गुफा देखने के लिए मिलते हैं। धर्मराजेश्वर एक ऐतिहासिक स्थल है। इस मंदिर को धर्मनाथ अथवा धर्मराजेश्वर मंदिर कहा जाता है। यह पूर्ण मंदिर एक पहाड़ी को काटकर बनाया गया है। इस मंदिर में आपको गर्भ ग्रह, सभा मंडप तथा अर्थ मंडप देखने मिलता है। इस मंदिर का शिखर उत्तर भारतीय शैली का है। मूल रूप से यह मंदिर विष्णु जी को समर्पित था, जिनकी प्रतिमा गर्भ गृह में विधमान है। बाद में यह शिव मंदिर में परिवर्तित किया गया था। धर्मराजेश्वर मंदिर में आपको विष्णु भगवान जी की प्रतिमा के साथ.साथ शिव भगवान जी का शिवलिंग भी देखने के लिए मिलता है। प्रवेश द्वार पर भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी की प्रतिमा आपको देखने के लिए मिलती है। यह मंदिर मंदसौर के भानपुरा के पास स्थित है। आप यहां पर गाड़ी से पहुंच सकते हैं। यह बारिश के मौसम में घूमने के लिए बहुत अच्छी जगह है। धर्मराजेश्वर के मंदिर चौथी और पांचवी शताब्दी में बनाए गए थे। यह मंदिर पत्थर पर बनाए गए हैं और पत्थर पर खूबसूरत नक्काशी भी की गई है। यह मंदिर ए एस आई के द्वारा संरक्षित है। इस जगह पर महाशिवरात्रि के समय और सावन सोमवार के समय बहुत सारे लोग भगवान शिव के दर्शन करने के लिए आते हैं। 


छोटा महादेव मंदिर भानपुरा, मंदसौर - Chota Mahadev Temple Bhanpura, Mandsaur

छोटा महादेव मंदिर मंदसौर में भानपुर तहसील में स्थित है।  यह मंदिर शिव भगवान जी को समर्पित है। यहां पर आप आते हैं, तो आपको शिवलिंग के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। आपको यहां पर पहाड़ों और चट्टानों का बहुत ही अद्भुत दृश्य देखने के लिए मिलता है। बरसात के समय यहां पर झरना बहता है, जो चट्टानों के ऊपर से बहता है। झरने के नीचे एक कुंड बना है, जिसमें आप नहा भी सकते हैं। यहां आ कर आपको बहुत मजा आएगा। यहां पर आपको काल भैरव जी का मंदिर और हनुमान जी का मंदिर भी देखने के लिए मिलता है। बरसात के समय यहां पर चारों तरफ हरियाली रहती है। यहां पर सावन सोमवार और महाशिवरात्रि के समय भारी जनसंख्या में लोग आते हैं। आप भी यहां आकर शिव भगवान जी के दर्शन कर सकते हैं। यह एक अच्छा पिकनिक स्पॉट हैं। यहां पर आपको वाहनों के लिए पार्किंग की सुविधा उपलब्ध है।


होलकर छतरी भानपुरा, मंदसौर - Holkar Chhatri Bhanpura, Mandsaur

होलकर छतरी मंदसौर जिले के भानपुर में स्थित एक मुख्य पर्यटन स्थल है। आपको यहां पर आप महाराजा यशवंतराव होलकर की छतरी देखने के लिए मिलती है, जो होलकर राजा की स्मृति स्थल है। यहां पर आपको संग्रहालय देखने के लिए मिलता है और मंदिर भी देखने के लिए मिलता है। यहां पर आप किला एवं गढ़ देख सकते हैं। महाराजा यशवंत राव होल्कर ने अंग्रेजों को भारत देश से बाहर निकालने के लिए भानपुरा में ही तोपों का कारखाना विकसित किया थाए जिसमें उन्होंने 200 तोपों का निर्माण किया था। अंग्रेजों को भारत से निकालने के लिए उन्होंने एक लाख सैनिकों की टुकड़ी तैयार की थी। महाराजा यशवंत राव होलकर की मृत्यु के पश्चात इस स्थल पर छतरी का निर्माण किया गया। छतरी का निर्माण 1814 में शुरू हुआ और 1841 में पूरा हुआ। छतरी का निर्माण उनकी पत्नी तुलसा बाई ने शुरू किया। आपको होलकर छतरी में महाराजा यशवंतराव की प्रतिमा देखने के लिए मिलती हैए जो संगमरमर के पत्थर की बनी हुई है। तोपों के निर्माण का कारखाना कारखाना  का भग्नावशेष आपको आज भी भानपुर के निकटवर्ती गांव नवाली और इंद्रगढ़ में देखने के लिए मिल जाएगा। 


हिंगलाजगढ़ किला भानपुरा, मंदसौर - Hinglajgarh kila Bhanpura, Mandsaur

हिंगलाज का किला मंदसौर का एक मुख्य पर्यटन स्थल है। हिंगलाजगढ़ किला एक प्राचीन किला है। यह किला घने जंगलों के बीच में स्थित है। यह किला मंदसौर जिले के भानपुर तहसील के नवाली गाँव के पास स्थित है। यह किला अपनी मूर्तिकला और हिंगलाज माता मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। इस किले में विभिन्न विधियों की कलात्मक मूर्तियां उपलब्ध हैए जो आप यहां पर आकर देख सकते हैंए जो बहुत ही भव्य है। यह किला जंगलों के बीच में होने से, आपको यहां आकर बहुत अच्छा लगेगा और शांति मिलेगी। यह किला मंदसौर शहर से 165 किमी और भानपुरा शहर से 26 किमी दूर स्थित है। इस किले में अलग.अलग राजाओं ने राज किया है। यहां पर आपको हिंगलाज माता का मंदिरए राम मंदिर और शिव मंदिर देखने के लिए मिल जाएगाए जो होलकर शासन के दौरान  बनाया गया था। इस किले में आपको खंडहर अवस्था में महल के अवशेष देखने के लिए मिल जाएंगे। आप इस किले में अपनी गाड़ी से पहुंच सकते हैं। हिंगलाज किले में खूबसूरत बावली है। आप उसे भी देख सकते हैंए बरसात के समय अगर आप यहां पर आते हैंए तो बरसात के समय यहां पर चारों तरफ हरियाली रहती है। यहां का दृश्य बहुत ही मनोरम रहता है। 


हिंगलाज माता मंदिर भानपुरा, मंदसौर - Hinglaj Mata Temple Bhanpura, Mandsaur

हिंगलाज माता का मंदिर हिंगलाज किले के अंदर स्थित है। हिंगलाज का किला मंदसौर जिले के भानपुरा तहसील के पास स्थित है। आप इस किले में आसानी से पहुंच सकते हैं। आप अपनी गाड़ी से किले में आ सकते हैं। भारत में हिंगलाज माता का एकमात्र मंदिर पाकिस्तान में स्थित है, जिसे शक्तिपीठ के रूप से जाना जाता है। उसी प्रकार मध्यप्रदेश के मंदसौर में भी हिंगलाज माता का मंदिर स्थित है। यहां पर आप आकर माता के दर्शन कर सकते हैं। यहां पर आपको बहुत सारे बंदर देखने के लिए मिलते हैं और यहां पर नवरात्रि के समय भी लोग दर्शन करने आते हैं। बरसात के समय यहां का मौसम बहुत अच्छा  रहता है और आप घूमने के लिए आ सकते हैं। 


तक्षेश्वर महादेव मंदिर नवाली भानपुरा, मंदसौर - Taksheshvar mahadev mandir navali bhanapura, mandsaur

तक्षेश्वर ताखाजी मन्दिर  मंदसौर जिले का एक मुख्य पर्यटन स्थल है।  यह धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व का स्थान है। यह घने जंगलों के बीच में स्थित है। यह मंदिर नागों के राजा तक्षक को समर्पित है। कहा जाता है कि यहां पर नागों के राजा तक्षक रहते हैं। यहां पर उन्हें तक्षकेश्वर के रूप में पूजा जाता है। आप यहां पर आते हैं, तो आपको यहां पर प्राकृतिक जल प्रपात देखने के लिए मिलता है, जो बहुत ही खूबसूरत लगता है। यह झरना यहां पर कई स्तरों में बहता है और नीचे कुंड है। कुंड पर आप नहाने का मजा भी ले सकते हैं। कुंड पर आपको बहुत सारी मछलियां देखने के लिए मिलती हैं, जो खूबसूरत लगती हैं। यहां के चारों तरफ का दृश्य बहुत ही लुभावना रहता है। आप यहां पर पिकनिक मनाने के लिए आ सकते हैं। आपकी गाड़ी इस स्थान तक आसानी से पहुंच सकती है। यह मन्दिर हिंगलाजगढ़ रोड पर भानपुरा तहसील से 22 किमी की दूरी पर स्थित है। यहां पर वैशाख महीने की पूर्णिमा को मेला का आयोजन भी होता है। आप यहां पर बरसात के समय आ सकते हैं। बरसात के समय यहां पर चारों तरफ हरियाली होती है और यहां पर खूबसूरत झरना आपको बरसात के समय देखने के लिए मिलता है। गर्मी के समय झरने में पानी नहीं रहता है। यहां पर आपको बहुत सारे बंदर भी देखने के लिए मिलते हैं। आप बंदरों को यहां पर खाना खिला सकते हैं। 


कनकेश्वर छोटा महादेव मंदिर भानपुरा, मंदसौर - Kanakeshwar Chota Mahadev Temple Bhanpura, Mandsaur

कनकेश्वर छोटा महादेव मंदिर मंदसौर जिले में भानपुरा तहसील में स्थित है। यह मंदिर घने जंगलों के बीच में स्थित है। यहां पर आप आकर शिवलिंग के दर्शन कर सकते हैं। यहां पर आ कर आपको अच्छा लगेगा, क्योंकि चारों तरफ का वातावरण हरियाली से घिरा रहता है। यहां पर आपको मंदिर के पास में ही एक जलप्रपात देखने के लिए मिलता है, जो बहुत खूबसूरत लगता है। बरसात के समय में इस जलप्रपात में बहुत सारा पानी रहता है और आप इस जलप्रपात में बहुत इंजॉय कर सकते हैं। इस जलप्रपात को कनकेश्वर जलप्रपात के नाम से जाना जाता है। आप यहां पर पिकनिक मनाने के लिए आ सकते हैं। यहां पर आपकी गाड़ी आसानी से पहुंच सकती है। 


चतुर्भुज नाला मंदसौर - Chaturbhuj Nala Mandsaur

चतुर्भुज नाला रॉक पेंटिंग मंदसौर में स्थित एक ऐतिहासिक महत्व की जगह है। आपको यहां पर रॉक पेंटिंग देखने के लिए मिलती है। यह जगह गांधी सागर वन्य जीव अभयारण्य के अंदर स्थित है। आप इस जगह में आसानी से पहुंच सकते हैं। आपको यहां पर नदी देखने के लिए मिलती है और नदी के दोनों तरफ पत्थरों में पेंटिंग देखने के लिए मिलती है। यह पेंटिंग आदिमानव काल की है और उस समय पर आदिमानव जो भी गतिविधियां करते थे। वह आपको इन पेंटिंग के माध्यम से दर्शाया गया है। यहां पर आकर आपको बहुत अच्छा लगेगा। यहां का वातावरण प्राकृतिक है और शांत है। 


चतुर्भुजनाथ मंदिर मंदसौर - Chaturbhujnath Temple Mandsaur

चतुर्भुजनाथ मंदिर मंदसौर जिले में गांधी सागर वन्य जीव अभयारण्य के अंदर स्थित एक धार्मिक स्थल है।  चतुर्भुज नाथ मंदिर एक प्राचीन मंदिर है। यह मंदिर शंकर जी को समर्पित है। आप यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं और आपको यहां पर आकर बहुत शांति मिलेगी। 


गांधी सागर बांध मंदसौर - Gandhi Sagar Dam Mandsaur

गांधी सागर बांध मंदसौर जिले में स्थित एक मुख्य पर्यटन स्थल है। यह बांध मंदसौर जिले में भानपुरा तहसील के पास स्थित है। आप इस बांध में बरसात के समय घूमने के लिए आ सकते हैं। बरसात के समय बांध में पानी भर जाता है, जिससे बांध के गेट खोले जाते हैं और गेट खुलने पर बांध का नजारा बहुत ही मनोरम होता है। आपको यहां पर आकर बहुत अच्छा लगेगा। यह बांध चंबल नदी पर बना हुआ है और चंबल नदी गांधी सागर वन्य जीव अभयारण्य को दो भागों में विभाजित करती है। यह जगह बहुत खूबसूरत है। गांधी सागर बांध के पास ही में गार्डन स्थित है, जिसे आप देख सकते हैं। यहां पर आपको एक मूर्ति देखने के लिए मिलती है, जो अद्भुत लगती है । यहां पर वॉच टावर भी हैए जिससे आप आसपास का नजारा भी देख सकते हैं।  गांधी सागर बांध में 19 गेट हैंए और जब यह गेट खोले जाते हैंए तो दृश्य बहुत ही अद्भुत होता है। 1954 में बांध का निर्माण प्रारंभ हुआ तथा 1960 में बनकर तैयार हो गया । इस बांध को देखने के लिए आसपास के जिले के लोग बरसात के समय आते हैं। आप भी यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं। अपनी फैमिली वालों के साथ और अपने दोस्तों के साथ। 


गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य मंदसौर - Gandhi Sagar Wildlife Sanctuary Mandsaur

गांधी सागर वन्य जीव अभ्यारण मंदसौर जिले में स्थित एक मुख्य पर्यटन स्थल है। यहां पर आकर आपको जंगली जानवर देखने के लिए मिल जाते हैं। यहां पर आप नीलगायए हिरणए चीता देख सकते हैं। अगर आप यहां पर बरसात के समय आते हैंए तो यहां पर आपको चारों तरफ हरियाली देखने के लिए मिलती है। गांधीसागर वन्य जीव अभ्यारण के अंदर और भी दर्शनीय स्थल हैंए जिन्हें आप देख सकते हैं। आप यहां पर आकर गांधी सागर बांध देख सकते हैं। चतुर्भुज नाला रॉक पेंटिंग देख सकते हैं। चतुर्भुज नाथ मंदिर देख सकते हैं। आपको यहां पर आकर बहुत अच्छा लगेगा। यह जगह प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है। 


मंदसौर जिले के अन्य दर्शनीय स्थल
Other places of interest in Mandsaur district


कोलवी बौद्ध पुरातत्व स्थल
नरसिंह मंदिर जल प्रपात
गिरनार अम्यूज़मेंट - वाटर पार्क
नई आबादी पार्क
दशपुर कुंज
श्री कालेश्वर मंदिर
मंदसौर का किला
बंडी जी का बाग
खिड़की माता मंदिर


नीमच पर्यटन स्थल
रतलाम पर्यटन स्थल
रीवा पर्यटन स्थल
विदिशा के दर्शनीय स्थल