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माँ शारदा मंदिर मैहर - Maa sharda temple maihar | Maihar sharda mata mandir

शारदा मंदिर मैहर - Sharda mandir maihar |  मैहर 

माँ शारदा मंदिर मैहर - Maa sharda temple maihar | Maihar sharda mata mandir

मैहर शारदा माता मंदिर

मैहर का शारदा माता का मंदिर पूरे मध्यप्रदेश में प्रसिद्ध है। यह 1 शक्तिपीठ है और यहां पर हजारों की संख्या में भक्त शारदा माता के दर्शन करने के लिए आते हैं। शारदा माता का मंदिर सतना जिले के मैहर में स्थित है। मैहर में शारदा माता का मंदिर त्रिकूट पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। इस पहाड़ी तक जाने के लिए सीढ़ियां बनाई गई है। आप चाहे तो कार में भी जा सकते हैं और यहां पर आप रोपवे की मदद से भी जा सकते हैं। 

उदल की कहानी - Udal ki kahani


मैहर का शारदा माता का मंदिर एक चमत्कारिक मंदिर है। कहा जाता है कि यहां पर हर दिन आल्हा और उदल आकर पहली पूजा करते हैं। आल्हा और उदल मां शारदा के परम भक्त थे और मां शारदा ने उन्हें अमर होने का वरदान दिया था। इसलिए सबसे पहले पूजा आकर आल्हा और उदल के द्वारा की जाती है। पंडित जी जब सुबह मंदिर के द्वार खोलते है, तो उन्हें फूल एवं जल चढ़ा हुआ मिलता है। यह चमत्कार शारदा माता के मंदिर में रोज होता है।

मैहर मंदिर कैसे पहुँचें - how to reach maihar temple


आप मैहर के शारदा मंदिर घूमने के लिए आना चाहते हैं, तो यहां आना बहुत ही आसान है। मैहर में रेलवे स्टेशन मौजूद है। रेलवे स्टेशन से मैहर का शारदा मंदिर करीब 5 या 6 किलोमीटर दूर होगा। रेलवे स्टेशन से आपको ऑटो मिल जाता है, जिसमें आपका किराया  ₹20 लगता है और आप मंदिर तक पहुंच जाते हैं। अगर आप सड़क से आते हैं, तो नेशनल हाईवे 30 मैहर से होते हुए गुजरता है। तो आप सड़क माध्यम से भी मैहर पहुंच सकते हैं। 

Sharda mata mandir maihar
मैहर शारदा माता का मंदिर

शारदा माता के मंदिर में पहुंचकर आपको बहुत सारी प्रसाद की दुकान देखने के लिए मिलती है। आपको बहुत सारे लोग प्रसाद खरीदने के लिए बोलते हैं। आप यहां पर आप अपनी इच्छा अनुसार प्रसाद ले सकते है।  कुछ दुकानदार यहां पर 300 - 400 का प्रसाद बना देते हैं और और भी एक्स्ट्रा प्रसाद में जोड़ देते हैं, तो आप ऐसी दुकानों में सावधान रहे। जहां आपकी इच्छा अनुसार प्रसाद दे रहे हैं। आप  वहां से प्रसाद ले और दुकान में ही अपने जूते चप्पल उतार सकते हैं। उसके बाद आप आगे बढ़ सकते हैं। आप जैसे जैसे आगे बढ़ेंगे। आपको बहुत सारी दुकानें देखने के लिए मिलती है। यहां पर आपको मैहर माता की मूर्ति, मैहर माता के पोस्टर,  खूबसूरत कड़े, और भी बहुत सारी चीजें देखने के लिए मिलती है। आप चाहे तो इनकी भी शॉपिंग कर सकते हैं। धीरे धीरे चलते हुए आप शारदा माता मंदिर के गेट तक पहुंच जाते हैं। यहां पर आप जो नारियल लिए रहते हैं। वह जमा करने रहते हैं और आपको टोकन दिया जाता है। फिर आप आगे बढ़ते हैं, तो सीढ़ियां स्टार्ट होती है। आपको सीढ़ियां चढ़ना पड़ता है। अगर आप सीढ़ियां नहीं चढ़ना चाहते हैं, तो यहां पर रोपवे का भी ऑप्शन उपलब्ध है। आप चाहे तो रोपवे भी ले सकते हैं। इसमें आप का चार्ज लिया जाता है। हम लोग सीढ़ियां चढ़कर गए थे। यहां पर करीब 1000 से भी अधिक सीढ़ियां हैं। आप चाहे तो यहां पर कार से भी आ सकते हैं। कार से आने के लिए यहाँ पर रोड है। वैसे सीढ़ियां चढ़ने में बहुत ज्यादा रोमांचक लगता है। सीढ़ियों में जगह जगह पर आपके रुकने के लिए और बैठने के लिए चेयर बनाई गई है और यहां पर आपको पीने के पानी की व्यवस्था भी की गई है। आपको सीढ़ियों चढ़ने में करीब आधा घंटा लग सकता है। आप यहां पर मुख्य गेट पर पहुंचते है, तो यहां पर बहुत भीड़ रहती है। लोग लाइन लगाकर मंदिर के अंदर जाते हैं। मंदिर में सामने आपको दो शेर की प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। यह प्रतिमा मुख्य मंदिर के प्रवेश द्वार के आजू.बाजू स्थित है। कहा जाता है कि यह प्रतिमा बहुत प्राचीन है। यहां पर आपको मंदिर के सामने एक पेड़ देखने के लिए मिलता है। उसके नीचे  शिवलिंग विराजमान है। आप लाइन लगाते हुए अंदर जाते हैं।  आपको यहां पर मां शारदा जी के दर्शन करने मिलते हैं। यहां पर आपके पास जो प्रसाद बचा हुआ है। वहां आप पंडित जी को देते हैं और पंडित जी से प्रसाद लेकर आप आगे बढ़ते हैं। यहां पर मंदिर के पीछे की तरफ आते हैं, तो आपको पीछे की तरफ एक बड़ा सा आंगन देखने के लिए मिलता है। यहां पर आप  कुछ समय के लिए शांति से बैठ सकते हैं। यहां पर आप फोटो भी खिंचा सकते हैं। यहां पर और भी छोटे-छोटे मंदिर हैं, जहां पर आप प्रसाद वगैरह चढ़ा सकते हैं। यहां पर आपको फोटोग्राफर भी मिलता है, जो आपकी फोटो क्लिक करता है और तुरंत ही आपको फोटो निकाल कर दे देता है। मंदिर के पीछे के आंगन में चारों तरफ ग्रिल लगी हुई है और आप ग्रिल से चारों तरफ का दृश्य देख सकते हैं, जो बहुत ही मनोरम रहता है। बरसात के समय अगर आप यहां पर आते हैं तो चारों तरफ हरियाली रहती है और बहुत ही लुभावना लगता है। अगर आप बरसात में आएंगे तो आपको ऐसा लगेगा कि जैसे आप बादलों के बीच में खड़े हैं। यहां पर सभी तरह की व्यवस्था उपलब्ध है। यहां पर बाथरूम वगैरह भी उपलब्ध है। अगर आप अपने साथ खाना वगैरह लाते हैं, तो यहां पर बैठ कर खा सकते हैं। मगर गंदगी यहां पर ना करें। यहां पर डस्टबिन दिए हुए हैं, जो भी कचरा होता है। आप डस्टबिन में डालें। 

मंदिर के पीछे तरफ नीचे जाने के लिए सीढ़ियां दी गई है। आप मंदिर में घूम कर नीचे जा सकते हैं। अगर आप अपने साथ खाना नहीं लाए हैं, तो यहां पर मंदिर ट्रस्ट के द्वारा खाने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, जिसमें आप मंदिर के नीचे आते हैं, तो यहां पर 10 या ₹20 में बहुत अच्छा खाने की व्यवस्था है। अन्नपूर्णा ट्रस्ट के नाम से यह जगह है। आप यहां पर आकर खाना खा सकते हैं। आप मैहर के शारदा माता के मंदिर में अपने परिवार और दोस्तों के साथ जा सकते हैं और मां शारदा जी के दर्शन कर सकते हैं। यह जगह बहुत अच्छी है और यहां कर बहुत अच्छा लगता है। 

मैहर पर्यटन स्थल - Maihar tourist place


मैहर में और भी जगह है। जहां आप घूम सकते हैं। यहां पर बड़ा अखाड़ा, आल्हा ऊदल का अखाड़ा, आल्हा ऊदल तालाब, नीलकंठेश्वर धाम या राधा कृष्ण मंदिर, गोला मठ मंदिर, पन्नी जलप्रपात में आप घूम सकते हैं। 



उज्जैन के मंदिर - Ujjain famous temple | ujjain mandir list

उज्जैन दर्शनीय स्थल - Ujjain ke mandir | Ujjain temple list | Ujjain ka mandir


उज्जैन मध्य प्रदेश में स्थित एक खूबसूरत शहर है। उज्जैन को प्राचीन काल में उज्जैनि या अवंतीका के नाम से जाना जाता था। उज्जैन में प्राचीन काल में राजा विक्रमादित्य का शासन था। उज्जैन शहर को मंदिरों के शहर के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा उज्जैन में करीब 2000 से भी अधिक मंदिर स्थित है। आज के लेख में हम उज्जैन शहर के  मुख्य मंदिरों के बारे में जानकारी देने वाले हैं। 


महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग - Mahakal mandir ujjain

उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर पूरे भारत देश में प्रसिद्ध है। उज्जैन मध्यप्रदेश का एक  प्राचीन नगरी माना जाता है। महाकालेश्वर मंदिर एक धर्मिक स्थल है। महाकालेश्वर हिंदू लोगों के लिए एक पवित्र स्थल है। महाकालेश्वर में स्थित शिवलिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और महाकालेश्वर में स्थित शिवलिंग स्वयंभू है, अर्थात यह धरती से स्वयं उत्पन्न हुआ है। इसकी स्थापना किसी ने भी नहीं की है। महाकालेश्वर मंदिर शिप्रा नदी के पास स्थित है। यहां मंदिर बहुत ही भव्य है। यह मंदिर बहुत बडे क्षेत्र में फैला हुआ है। मंदिर में सभी प्रकार की सुविधा मौजूद है। महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन शहर की मध्य में स्थित है। मंदिर में पहुॅचने के लिए आपको आटो और टैक्सी की सुविधा मिल जाती है। मंदिर में ठहरने के लिए और भोजन की सुविधा भी मंदिर समिति द्वारा मौजूद है, इसके लिए आपको आनलाइन बुकिंग कराना पडता है। आप मंदिर के अंदर अपना मोबाइल फोन नहीं लेकर जा सकते है, आपको अपना मोबाइल फोन मंदिर में स्थित लाॅकर में रखना पडता है। मंदिर के बाहर एक बडा स्क्रीन लगा हुआ है, जिसमें आप महाकालेश्वर शिवलिंग के लाइव दर्शन कर सकते है। महाकालेश्वर मंदिर तीन मंजिला है। मंदिर परिसर में आपको और भी मंदिर देखने मिल जाते है। महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग दर्शन करने के लिए आते है। सावन सोमवार और महाशिवरात्रि को इस मंदिर में बहुत ज्यादा भीड रहती है। 

नागचन्द्रेश्वर मंदिर उज्जैन - Nagchandreshwar temple ujjain


महाकालेश्वर मंदिर की सबसे उपर मंजिल में नाग देवता का मंदिर स्थित है। यहां मंदिर साल में एक बार नागपंचमी के दिन ही खोला जाता है। इस मंदिर में भगवान शिव की बहुत आकर्षक मूर्ति विद्यामान है। इस मंदिर को नागचन्द्रेश्वर मंदिर कहते है। 

भस्म आरती महाकालेश्वर - Bhasmarti ujjain

महाकालेश्वर मंदिर में एक और आकर्षण मौजूद है। यहां पर सुबह के समय भस्म आरती होती है, जिसमें बहुत बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहते हैं। भस्म आरती में भगवान शिव शंकर के शिवलिंग को भस्म से सजाया जाता है और आरती की जाती है और यह भस्म श्मशान भूमि से लाई जाती है।

भारत माता मंदिर उज्जैन - Bharat mata mandir ujjain

भारत माता मंदिर उज्जैन शहर में स्थित एक दर्शनीय जगह है। यह मंदिर है, मगर यहां पर कोई भी देवी देवता की मूर्ति नहीं है। यहां पर भारत माता की मूर्ति स्थापित है, जो बहुत ही आकर्षक है। यहां मंदिर बहुत ही भव्य है। मंदिर के बाहर आपको भारत का एक 3 डी मैप, सभी ज्योतिर्लिंगों और महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल के साथ देखने मिलता हैं। यहां मंदिर महाकालेश्वर मंदिर के बहुत करीब में स्थित है। मंदिर में बगीचा बना हुआ है, जहां पर आप बैठकर अपना समय बिता सकते है। मंदिर के बाहर केंद्र में सुंदर फव्वारा बना हुआ है।

विक्रमादित्य स्मारक उज्जैन - samrat vikramaditya ujjain

विक्रमादित्य स्मारक उज्जैन शहर के मध्य में स्थित है। आपको यहां पर राजा विक्रमादित्य की पीतल की विशाल मूर्ति देखने के लिए मिलती है। यहां राजा विक्रमादित्य की 30 फीट उची प्रतिमा स्थित है। यह प्रतिमा रूद्रा तालाब के बीच में एक टीले पर बने हुई है। यह प्रतिमा उज्जैन नगर निगम और सिंहस्थ समिति द्वारा स्थापित किया गया था। उज्जैन शहर को प्राचीन समय में उज्जैनी नाम से जाना जाता था। राजा विक्रमादित्य उज्जयैनी नगरी में 2200 साल पहले राज्य किया था।  यहां पर आपको  बहुत सारी मूर्तियाँ देखने मिलती हैं। 

बड़ा गणेश मंदिर उज्जैन - Bada ganesh mandir ujjain

बड़ा गणेश मंदिर उज्जैन का एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर महाकालेश्वर मंदिर के बहुत करीब है। आप यहां पर पैदल ही घूमने के लिए आ सकते हैं। आपका जब भी उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर आने का प्लान बनता है, तो आप बड़े गणेश मंदिर भी घूम सकते हैं। बड़े गणेश मंदिर में आपको गणेश जी की एक बहुत बड़ी मूर्ति देखने के लिए मिलती है। इस कारण इस मंदिर को बड़े गणेश जी के मंदिर के जाना जाता  है। यहां पर आपको हनुमान जी की पंचमुखी प्रतिमा भी देखने के लिए मिलती है। यह दुनिया की गणेश जी की एकमात्र प्रतिमा हैए जो आपको यहीं पर देखने मिलेगी और कहीं पर नहीं।

हरसिद्धि मंदिर उज्जैन -  Harsiddhi mandir ujjain

हरसिद्धि माता का मंदिर उज्जैन शहर का एक धार्मिक स्थल है।  यह 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहाँ पर माता सती के मृत शरीर की दाहिने हाथ की कोहनी गिरी थी। हरसिद्धि माता उज्जैन के राजा विक्रमादित्य की कुलदेवी थी। हरसिद्धि माता का मंदिर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थित है। आप यहां पर पैदल भी जा सकते हैं। हरसिद्धि मंदिर रुद्र सागर झील के पास स्थित है। कहा जाता है कि भगवान शिव के कहने पर देवी पार्वती ने दो राक्षसों को मारने के लिए हरसिद्धि का रूप धारण किया था। हरसिद्धि मंदिर एक प्राचीन मंदिर है और मंदिर परिसर में आपको दो बड़े दीपक के स्तंभ देखने के लिए मिलते हैं, जिसमें तेल डालकर दीया जलाया जाता है। यह स्तंभ बहुत ऊंचे हैं और बहुत ही आकर्षक लगते हैं। दोनों दीपक स्तंभों में लगभग 1 हजार 11 दीपक हैं। लोगों का कहना है कि इन दीप स्तंभों की स्थापना उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य ने की थी। राजा विक्रमादित्य हर बारह साल में एक बार माता हरसिद्धि को अपना सिर माँ के चरणों में अर्पित किया करते थे। लेकिन माँ की कृपा से उनका सिर वापस आ जाता था। जब उन्होंने बारहवें समय के लिए अपना सिर अर्पित किया, तो वे वापस नहीं आए और उनका जीवन समाप्त हो गया।

गोपाल मंदिर उज्जैन - Gopal mandir ujjain

श्री द्वारकाधीश गोपाल मंदिर उज्जैन का एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर उज्जैन के मुख्य बाजार में स्थित है। यह मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है। आप जब भी उज्जैन आते हैं, तो इस मंदिर में आकर श्री कृष्ण भगवान जी के दर्शन कर सकते हैं। यह मंदिर खूबसूरत और प्राचीन है। यह मंदिर मराठा वास्तुकला में  बना है। इस मंदिर का निर्माण 19वीं शताब्दी में महाराजा माधव राज सिंधिया और बाईचा बाई सिंदे द्वारा बनाया गया था। मंदिर में जन्माष्टमी और हरिहर मिलन के समय बहुत ज्यादा भीड़ लगती हैं। यहां पर बहुत ज्यादा संख्या में लोग एकत्र होते हैं।  


काल भैरव मंदिर उज्जैन - Kaal bhairav mandir ujjain

श्री काल भैरव मंदिर उज्जैन शहर में स्थित एक अनोखा मंदिर है। इस मंदिर में आप भक्तों के द्वारा भगवान श्री काल भैरव को प्रसाद के रूप में शराब का प्रसाद चढ़ाया जाता है, जो एक अनोखा रिवाज है। यहां पर जो भी भक्त आते हैं। वह सभी भगवान काल भैरव को शराब का प्रसाद चढ़ाते हैं। यहां पर काल भैरव भगवान जी कुछ ही समय में शराब की बोतल खाली कर देते है। यह मंदिर उज्जैन शहर में शिप्रा नदी के तट पर स्थित है।  इस मंदिर में आसानी से पहुंचा जा सकता है। श्री काल भैरव को उज्जैन के संरक्षक या कोतवाल के रूप में जाना जाता है। यहां पर रोजाना सैकड़ों भक्त आते हैं। इस मंदिर के आसपास बहुत सारे लोगो आपको शराब बेचते हुए देखने के लिए मिल जाते हैं। पुराने समय में इस मंदिर का उपयोग केवल तांत्रिक साधनाओं के लिए किया जाता था। लेकिन अब इस मंदिर में भगवान काल भैरव के दर्शन करने के लिए सभी लोग आते हैं।  

चामुंडा माता मंदिर उज्जैन - Chamunda mata ujjain

चामुंडा माता का मंदिर उज्जैन शहर का धार्मिक स्थल है। यह मंदिर उज्जैन शहर के मुख्य मार्केट में स्थित है। आप इस मंदिर में आसानी से पहुंच सकते हैं। यह मंदिर चामुंडा माताजी को समर्पित है। मंदिर में आपको चामुंडा माता की प्रतिमा देखने के लिए मिलती है, जो बहुत ही अद्भुत लगती है। आपको इस मंदिर में आकर बहुत शांति मिलेगी। 

नगर कोट की रानी उज्जैन - Nagar kot ki rani ujjain

नगरकोट की रानी मंदिर उज्जैन में स्थित एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर उज्जैन शहर का एक प्राचीन मंदिर है। आपको मंदिर पर माता की अद्भुत प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। मंदिर के बाहर आपको एक तालाब भी देखने मिलता है। इस मंदिर में नवरात्रि के समय बहुत ज्यादा भीड़ लगती है, बहुत ज्यादा संख्या में लोग नवरात्रि के समय यहां पर आते हैं। यहां पर एक गार्डन भी स्थित है। 

भूखी माता मंदिर उज्जैन - Bhukhi mata mandir ujjain

भूखी माता का मंदिर उज्जैन शहर में स्थित एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर शिप्रा नदी के किनारे स्थित है। इस मंदिर में नवरात्रि के समय बहुत भीड़ लगती है। इस मंदिर में आकर आपको बहुत अच्छा लगता है और शिप्रा नदी का नजारा भी बहुत अद्भुत होता है। यहां पर भूखी माता और धूमा माता विराजमान है। आपको यहां आकर शांति मिलेगी।   

मंगलनाथ मंदिर उज्जैन - Mangalnath mandir ujjain

मंगलनाथ मंदिर उज्जैन शहर का एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर शिप्रा नदी के किनारे स्थित है। यह मंदिर मंगल दोष के निवारण के लिए जाना जाता है। यहां पर बहुत सारे लोग अपने मंगल दोष के निवारण के लिए आते हैं। यह मंदिर कर्क रेखा में स्थित है। यहां पर आपको शिव भगवान जी के दर्शन करने के लिए मिलते है। यह मंदिर बहुत ही प्राचीन है। इस मंदिर में आपको हनुमान जी के दर्शन करने भी मिल जाते हैं। इस मंदिर से शिप्रा नदी का बहुत ही भव्य नजारा देखने के लिए मिलता है। यहां पर आकर आपको बहुत अच्छा लगेगा। यह मंदिर उज्जैन शहर के बहुत करीब है। आप यहां पर आसानी से पहुंच सकते हैं। मत्स्य पुराण के अनुसार इस स्थान को मंगल ग्रह का जन्म स्थान माना जाता है। इस मंदिर में विशेषकर मंगलवार के दिन बहुत सारे लोग दर्शन करने के लिए आते हैं।  

मंचामन गणेश मंदिर उज्जैन - Manchaman ganesh mandir ujjain

मंचामन गणेश मंदिर उज्जैन शहर का एक धार्मिक स्थल है। यह प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है, कि इस मंदिर की स्थापना श्री राम और माता सीता ने वनवास काल के समय की थी। इस मंदिर में आकर आप गणेश जी की भव्य प्रतिमा देख सकते हैं। मंदिर के पास आपको एक बावली भी देखने के लिए मिलती है और पुराने समय के मंदिर के ढांचे भी देखने के लिए मिलते हैं। यहां आकर आपको अच्छा लगेगा।

चिंतामन गणेश मंदिर उज्जैन - chintaman ganesh ujjain


चिंतामन गणेश मंदिर उज्जैन शहर का एक धार्मिक स्थल है। इस मंदिर में गणेश जी को चिंतामन के नाम से जाना जाता है, अर्थात सारी चिंता को हरने वाले माना जाता है। यह मंदिर उज्जैन शहर के बाहर स्थित है। यह मंदिर उज्जैन शहर से करीब 10 किलोमीटर दूरी पर होगा। आप इस मंदिर तक आप अपने वाहन से आ सकते हैं। मंदिर में आपको गणेश जी की भव्य प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। इस मंदिर में लोग भगवान गणेश जी के दर्शन करने आते हैं और जो भी अपना नया काम शुरू करते हैं। उस काम के लिए गणेश जी का आशीर्वाद लेने के लिए आते हैं। चाहे विवाह का काम हो या नया सामान लेना हो। यह भगवान गणेश का ऐतिहासिक मंदिर हैं। मंदिर में सभी प्रकार की व्यवस्थाएं उपलब्ध है। मंदिर के बाहर आपको बहुत सारी प्रसाद की दुकानें देखने के लिए मिलती है, जहां से आप मंदिर के लिए प्रसाद और फूल वगैरा ले सकते हैं। मंदिर में गणेश जी की मूर्ति विद्यमान है और गणेश जी के आजू - बाजू में रिद्धि और सिद्धि माता की मूर्ति विद्यमान है।  मंदिर में एक बबली भी हैए जिसे लक्ष्मण बबली के नाम से जाना जाता है। यह प्राचीन बावड़ी है, आप इसे भी देख सकते हैं। 

चारधाम मंदिर उज्जैन - Chardham mandir ujjain

श्री चारधाम मंदिर उज्जैन शहर का एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर हरसिध्दि मंदिर के समीप है। यहां पर आपको भारत के चार धाम जगन्नाथ पुरी, रामेश्वरम, द्वारका, बद्रीनाथ की प्रतिकृति देखने के लिए मिलती है। भारत में चार धाम बहुत प्रसिद्ध है और इन धामों के दर्शन करने से लोगों को मुक्ति प्राप्त होती है। यहां पर आपको बहुत सारी मूर्तियां देखने के लिए मिलती है। यहां पर धार्मिक चित्रण मूर्तियों के द्वारा किया गया है, जो बहुत ही आकर्षण लगता है।  यहां पर कृष्ण भगवान की लीलाओं को दर्शाया गया है। विष्णु भगवान को नाग सैया में दिखाया गया है। ऋषि-मुनियों को तपस्या करते हुए दिखाया गया है। बालाजी भगवान की मूर्ति स्थापित की गई है। शंकर भगवान जी की मूर्ति स्थापित की गई है। यहां पर कृष्ण भगवान जी को गोवर्धन पर्वत उठाए हुए भी दिखाया गया है। यहां पर वैष्णो माता की गुफा भी बनाई गई है और उसके अंदर वैष्णो माता की स्थापना की गई है। आप यहां पर आकर वैष्णो माता के दर्शन कर सकते हैं। 

प्रशांति धाम उज्जैन - Prashanti Dham Ujjain

प्रशांति धाम उज्जैन शहर का एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर शिप्रा नदी के किनारे स्थित है। यह मंदिर उज्जैन इंदौर हाईवे रोड में स्थित है। आपको इस मंदिर में आकर बहुत शांति मिलेगी, क्योंकि यहां के चारों तरफ का वातावरण हरियाली से भरपूर है और पूरी तरह नेचुरल है। यह मंदिर साईं बाबा को समर्पित है। आप यहां पर आकर साईं बाबा के दर्शन कर लेते हो। यहां पर आप शिप्रा नदी का बहुत ही सुंदर नजारा देख सकते हैं। यहां पर प्रशांति घाट है,  जहां पर बैठकर आप शिप्रा नदी को देख सकते हैं। यहां पर आकर आपको लगेगा कि आप शिर्डी के साईं बाबा के मंदिर आ गए हैं। यहां पर आपके रुकने और खाने की व्यवस्था भी रहती है। 

इस्कॉन मंदिर उज्जैन - ISKCON Mandir Ujjain

इस्कॉन मंदिर उज्जैन का एक धार्मिक मंदिर है। यह मंदिर श्री कृष्ण भगवान जी को समर्पित है। यह मंदिर बहुत ही भव्य है। यह मंदिर सफेद मार्बल से बना हुआ है। इस मंदिर के सामने हरा भरा बगीचा लगा हुआ है। यहां पर आकर आपको बहुत अच्छा लगेगा। यहां पर श्री कृष्ण के भजन चलते रहते हैं, जो बहुत ही शांति देते हैं। यहां पर आपको श्री कृष्ण और राधा जी की प्रतिमाएं देखने के लिए मिलती हैं। यहां पर आपको श्री कृष्ण, बलराम, बलभद्र, सुभद्रा और नरसिंह देव जी की प्रतिमाएं देखने के लिए मिलती हैं। यह इस्कॉन मंदिर उज्जैन के नानाखेड़ा बस स्टैंड के पास स्थित है। यहां पर आप आसानी से आ सकते हैं। कृष्ण के भक्तों के लिए इस्कॉन मंदिर एक महत्वपूर्ण स्थान है। उज्जैन शहर में सुदामा, बलराम, और कृष्ण भगवान जी के साथ ऋषि संदीपनी के आश्रम में शिक्षा प्राप्त की थी। मंदिर में एक गौशाला भी है और श्रद्धालुओं के लिए आवास उपलब्ध है। यहां पर प्रसाद की भी व्यवस्था है। 

नवग्रह शनि मंदिर उज्जैन - Navgrah mandir ujjain

नवग्रह मंदिर उज्जैन में स्थित एक धार्मिक स्थल है। नवग्रह मंदिर उज्जैन शहर में त्रिवेणी संगम के पास स्थित है। यह मंदिर उज्जैन शहर से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह मंदिर उज्जैन इंदौर मार्ग पर स्थित है। मंदिर तक आसानी से पहुंच सकते हैं। इस मंदिर में नौ ग्रहों की पूजा की जाती है। इस मंदिर में प्रत्येक 9 ग्रहों के लिए अलग-अलग मंदिर हैं और प्रत्येक ग्रह पिंडी के रूप में विराजमान है। ये ग्रह हैं सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु। यहां पर शिप्रा नदी का संगम बहुत ही मनमोहक लगता है। यह मंदिर शनि भगवान जी को भी समर्पित है। यहां पर शनि भगवान जी की प्रतिमा भी आपको देखने के लिए मिलती है। यहां पर आपको हनुमान जी की प्रतिमा भी देखने के लिए मिलती है। यह मंदिर  राजा विक्रमादित्य के द्वारा बनवाया गया था। शनिवार को यहाँ बहुत भीड़ होती है, क्योंकि शनिवार को सभी लोग शनि महाराज की पूजा करने आते  हैं। 

त्रिवेणी घाट उज्जैन - Triveni ghat ujjain

त्रिवेणी घाट उज्जैन शहर का एक बहुत सुंदर घाट है। यहां पर तीन नदियों का संगम हुआ है। शिप्रा, गण्डकी  और सरस्वती नदी का संगम हुआ है। सरस्वती नदी यहां पर गुप्त है। यहां पर कुंभ का मेला आयोजित होता हैए जो हर 12 वर्ष में एक बार आयोजित होता है। 2016 यहाँ का आखिरी कुंभमेला था। अब 12 साल बाद लगेगा ।

राम घाट उज्जैन - Ram Ghat Ujjain

राम घाट उज्जैन का एक प्रसिद्ध घाट है। यह शिप्रा नदी पर  स्थित है। यह घाट महाकालेश्वर मंदिर के बहुत करीब है। आप यहां पर पैदल भी भ्रमण कर सकते हैं। शिप्रा नदी मध्य प्रदेश की एक प्रमुख नदी है। शिप्रा नदी धार जिले से निकलती हैए और मध्य प्रदेश के कई जिलों से बहते हुए यह चंबल नदी से मिल जाती है और राजस्थान में प्रवेश करती है। आप राम घाट में नहा कर अपने पाप धो सकते हैं। यहाँ पर आप बोटिंग का भी मजा ले सकते हैं। यहां पर बहुत सारे मंदिर हैं, जहां पर जाकर आप को शांति मिलेगी। 

सिद्धवट उज्जैन - Siddhavat Ujjain

सिद्धवट उज्जैन शहर का एक धार्मिक स्थल है। सिद्धवट शिप्रा नदी के किनारे स्थित है। यहां पर आपको एक कल्पवृक्ष देखने के लिए मिलता है। इस कल्पवृक्ष की बहुत महिमा है। कहा जाता है कि इस कल्पवृक्ष को स्वयं माता पार्वती ने लगाया था और शंकर जी के पुत्र कार्तिकेय ने इस कल्पवृक्ष के नीचे भोजन किया था। इस कल्पवृक्ष के नीचे  राजा विक्रमादित्य ने तपस्या की थी। बेताल को अपने वश में करने के लिए। इस कल्पवृक्ष का वही महत्व है, जो महत्व अक्षय वट का इलाहाबाद में है। इस कल्पवृक्ष के पास बहुत सारी क्रियाकलाप किए जाते हैं। यहां पर पिंडदान किया जाता है। यहां पर तर्पण किया जाता है। संतान प्रापति के लिए पूजा की जाती है। यहां का वातावरण शांत है। आप यहां पर आकर शांति से बैठ सकते हैं। यहां पर आसपास बहुत सारे खाने.पीने के छोटे.छोटे ठेले हैंए जहां पर खाने.पीने का भी लुप्त उठा सकते हैं। 

महर्षि सांदीपनी आश्रम उज्जैन - Maharishi Sandipani Ashram Ujjain

महर्षि सांदीपनी आश्रम उज्जैन शहर का एक धार्मिक स्थल है। महर्षि सांदीपनि आश्रम को अंकपात के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इस जगह पर श्री कृष्ण भगवान ने अपनी लेखनी को धोया था। इस पवित्र स्थल पर महर्षि सांदीपनि द्वारा श्री कृष्ण, बलराम और सुदामा को शिक्षा दी गई थी। यहां पर 64 प्रकार की विद्या श्री कृष्ण जी को दी गई थी। यहां पर आपको देखने के लिए बहुत सारी पेंटिंग मिल जाती है, जिनमें अलग-अलग तरह की क्रियाकलाप करते हुए श्री कृष्ण जी को दिखाया गया है। यहां पर एक कुंडली बना हुआ है, जिसे गोमती कुंड कहते हैं। यहां पर शिवलिंग विराजमान है, जिसकी स्थापना द्वापर युग में की गई थी। यहां पर ऋषि सांदीपनी की चरण पादुका भी स्थित हैं, जिसके दर्शन आप कर सकते हैं। यहां पर आकर आपको शांति मिलेगी। 

यमराज मंदिर उज्जैन - Yamraj mandir ujjain

यमराज मंदिर भारत में एकलौता मंदिर है, जो उज्जैन शहर में स्थित है। इस मंदिर में यमराज की प्रतिमा स्थित है। यमराज को मृत्यु का देवता कहा जाता है। कहा जाता है कि इस मंदिर में दीपक जलाने से आपकी अकाल मृत्यु टाली जा सकती है। यह मंदिर दुर्गादास की छतरी के पास स्थित है। आप इस मंदिर में आसानी से आ सकते हैं।

गढ़कालिका माता मंदिर उज्जैन - Gadkalika mandir ujjain

श्री गढ़कालिका का मंदिर उज्जैन शहर का एक प्रसिद्ध मंदिर है। यहाँ उज्जैन शहर का धार्मिक स्थल है। यह मंदिर काली माता को समर्पित है। यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहां पर माता सती का ऊपरी होंठ गिरा था। यह मंदिर क्षिप्रा नदी के तट पर उज्जैन के पास स्थित है। लोगो के अनुसार गढ़ कालिका देवी महाकवि कालिदास की इष्ट देवी मानी जाती है। महाकवि कालिदास पहले एक मूर्ख व्यक्ति थे। मगर गढ़ कालिका देवी जी के शरण में आने से वह महाकवि बन गए और उन्होंने अभिज्ञान शकुंतलम और मेघदूत की रचना की। इसके अलावा वहां विक्रमादित्य के नवरत्नों में से एक थे। इस मंदिर का इतिहास बहुत लंबा है। यह मंदिर 2000 वर्ष से अधिक पुराना है। यह मंदिर बहुत ही भव्य तरीके से बना हुआ है और आप यहां आकर गढ़कालिका जी के दर्शन कर सकती हैं। आपको यहां आकर सकारात्मक मिलेगी। 

गेबी हनुमान मंदिर उज्जैन - Gebi hanuman mandir ujjain

गेबी हनुमान मंदिर उज्जैन शहर का एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर उज्जैन के मुख्य बाजार में स्थित है। इस  मंदिर में आसानी से आ सकते हैं। यह मंदिर द्वारकाधीश गोपाल कृष्ण मंदिर के पास स्थित है। इस मंदिर में हनुमान जी का बाल रूप विद्यमान है। इस मंदिर में आकर्षण का केंद्र है। यहां पर होने वाली आरती है। आप आरती में शामिल होते हैं, तो आपको यहां पर सकारात्मक ऊर्जा मिलेगी। आपको इस मंदिर में आकर बहुत अच्छा लगेगा। 

84 महादेव मंदिर उज्जैन - 84 Mahadev Mandir Ujjain

उज्जैन में महादेव के 84 मंदिर हैं और यह चौरासी मंदिर उज्जैन शहर के अलग-अलग जगह में मौजूद है। सावन सोमवार में इन 84 मंदिरों की परिक्रमा की जाती है। यह सभी मंदिर प्राचीन है और इन सभी मंदिरों में दर्शन करने से अलग-अलग मन्नते पूरी होती हैं। इन मंदिरों में स्थित शिवलिंग के दर्शन करने से अलग-अलग फल प्राप्त होते हैं। इनमें से कुछ महादेव मंदिर के बारे में जानकारी दी जा रही है। 

अंगारेश्वर महादेव उज्जैन - Angareshwar Mahadev Ujjain

अंगारेश्वर महादेव मंदिर उज्जैन में स्थित एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर शिप्रा नदी के किनारे स्थित है। यह मंदिर शिव भगवान जी को समर्पित है। यह मंदिर मंगलनाथ मंदिर के बहुत करीब है। आप इस मंदिर में भी घूमने के लिए आ सकते हैं। यह मंदिर भी कर्क रेखा में स्थित है। इस मंदिर में भी मंगल दोष के निवारण के लिए पूजा की जाती है। यहां पर आपको गौशाला देखने के लिए मिलती है। आप यहां पर आकर अपना अच्छा समय बिता सकते हैं। शिप्रा नदी का बहुत ही अद्भुत नजारा यहां पर आपको देखने के लिए मिलता है। यह मंदिर बहुत ही सुंदर और प्राचीन है। 

ऋणमूक्तेश्वर महादेव मंदिर  उज्जैन - Rinmukteshwar mahadev mandir ujjain 

ऋण मुक्तेश्वर मंदिर उज्जैन शहर का एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर शिप्रा नदी के किनारे स्थित है। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इस मंदिर पर आकर प्रार्थना करने से और पीली पूजा करने से आपको ऋण से मुक्ति मिलती है, अर्थात कर्ज से मुक्ति मिलती है। आप पर किसी भी तरह का कर्ज रहता है, उससे आप मुक्ति पा सकते हैं। इस मंदिर में राजा हरिश्चंद्र ने तपस्या की थी, जिसके बाद शंकर जी ने उन्हें वरदान दिया था, कि जो भी इस मंदिर में आकर पीली पूजा करवाएगा। उसे अपने कर्ज से मुक्ति मिलेगी। आपको यहां पर एक बरगद का पेड़ देखने के लिए मिलता है। आप इस मंदिर में आकर भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर सकते हैं।

कुंडेश्वर महादेव मंदिर - Kundeshwar mahadev mandir ujjain

कुंडेश्वर महादेव मंदिर सांदीपनी आश्रम के बहुत करीब स्थित है। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है, कि श्री कृष्ण भगवान जी गोमती कुंड से जल लाकर शिव भगवान पर अर्पण किया करते थे और उनके सामने अपनी विद्या का अभ्यास किया करते थे। यहां पर आपको एक शिवलिंग देखने के लिए मिलता है और मंदिर की दीवारों पर पत्थर की प्रतिमाएं बनाई गई है। इसके अलावा मंदिर के बाहर आपको पत्थर का एक प्राचीन नंदी भगवान की प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। यह मंदिर बहुत ही खूबसूरत है। आप यहां पर आकर घूम सकते हैं। इस मंदिर को गुरुकुल विद्या स्थली के रूप में भी जाना जाता है। 

मारकंडेश्वर महादेव मंदिर उज्जैन - Markundeshwar mahadev mandir ujjain

मारकंडेश्वर मंदिर उज्जैन शहर में विष्णु तालाब के पास स्थित है। यहां पर शिव भगवान जी का पत्थर का शिवलिंग विराजमान है। यह शिवलिंग बहुत प्राचीन है और आपको यहां पर आकर सकारात्मक ऊर्जा मिलेगी।

सर्वेश्वर महादेव  मंदिर उज्जैन - sarveshwar mahadev mandir ujjain

सर्वेश्वर महादेव मंदिर उज्जैन शहर में संदीपनी आश्रम के पास स्थित है। इस मंदिर में स्थित शिवलिंग की स्थापना महर्षि संदीपनी ने की थी। यह शिवलिंग एक अनोखा शिवलिंग है। इसकी जलाधारी में शेषनाग के दर्शन होते हैं। आप यहां पर आते हैं, तो आपको पत्थर का एक शिवलिंग देखने के लिए मिलता है और मंदिर के बाहर नंदी भगवान जी की प्रतिमा देखने के लिए मिलती है।



पचमढ़ी झील - Pachmarhi lake | Boating in pachmarhi lake

पचमढ़ी लेक - Pachmarhi jheel | पचमढ़ी झील में नौका विहार

पचमढ़ी झील - Pachmarhi lake | Boating in pachmarhi lake

पचमढ़ी (pachmarhi) एक हिल स्टेशन है। पचमढ़ी (pachmarhi) मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले में स्थित है। पचमढ़ी में बहुत सारी दर्शनीय जगह स्थित है, उनमें से एक जगह है - पचमढ़ी झील (pachmarhi lake)

पचमढ़ी झील
(pachmarhi lake) बहुत सुंदर है और यह पचमढ़ी (pachmarhi) शहर से करीब एक या डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित होगी।  आप इस झील तक पैदल ही जा सकते हैं।  इस झील का नजारा बहुत खूबसूरत रहता है और इस झील में आपको कमल के फूल देखने के लिए मिल सकते हैं।  यह झील बरसात में पानी से पूरी तरह से भर जाती है।  गर्मी के समय यह झील सूख जाती है।  झील के पास ही में एक गार्डन बना हुआ है। गार्डन में एंट्री फ्री है। गार्डन में आकर आप पचमढ़ी झील (pachmarhi lake) का खूबसूरत नजारा देख सकते हैं। गार्डन में तरह-तरह की फूल लगे हुए हैं। इस गार्डन में आकर आप बहुत लम्बा वॉक कर सकते हैं।  

इस गार्डन में आपके घूमने के लिए बहुत बड़ी जगह है, जहां पर आप शांति से घूम सकते हैं। पचमढ़ी झील
(pachmarhi lake) में बरसात के समय  आप नाव की सवारी का  मजा ले सकते हैं।  यहां पर नाव की सवारी का आपको अलग-अलग कीमत देनी पड़ती है। पचमढ़ी गार्डन (pachmarhi garden) के बाहर ही आपको बहुत सारी दुकानें देखने के लिए मिलती हैं, जहां पर खाने-पीने की सामग्री मिलती है।  आप को  गार्डन के बाहर  घुड़सवारी करने के लिए भी मिलती है।  यहां पर बहुत सारे लोग घुड़सवारी का मजा भी लेते हैं। पचमढ़ी झील गर्मी के समय सूख जाती है। गर्मी के समय पचमढ़ी झील (pachmarhi lake) में चोई जम  जाती है। पचमढ़ी झील (pachmarhi lake) का पानी इतना कम हो जाता है, कि आप इस झील के आर पार तक जा सकते हैं। गार्डन में बैठने के लिए पत्थर के कुरसी बने हुए हैं।  आप इन कुरसी में बैठकर इस झील का नजारा देख सकते हैं। झील के बीच से 1 पुल निकलता है।  इस पुल से ही आप पचमढ़ी के अन्य दर्शनीय स्थलों को घूमने के लिए रास्ता निकलता है। पचमढ़ी झील (pachmarhi lake) के थोड़े से दूरी पर ही आपको एक चर्च देखने के लिए मिलता है, जो बहुत पुराना चर्च है और अंग्रेजों के समय बनाया गया था। इसका डिजाइन भी बहुत अद्भुत है।  यह जगह आपको बहुत खूबसूरत लगती है।  इस जगह में आप अपना शाम के समय आकर अच्छा समय बिता सकते हैं। यहां पर आकर आपको बहुत अच्छा लगेगा और एक अलग ही अनुभव मिलेगा। 


पचमढ़ी के मंदिर - Pachmarhi temple | Pachmarhi yatra


पचमढ़ी मंदिर - Pachmarhi ka mandir 

पचमढ़ी के मंदिर -  Pachmarhi temple | Pachmarhi yatra

महादेव मंदिर चौरागढ़ पचमढ़ी - Mahadev mandir chauragarh pachmarhi | chauragarh mandir

चौरागढ़ पचमढ़ी का एक धार्मिक स्थल है। चौरागढ़ पर एक मंदिर स्थित है, जो शिव भगवान जी को समर्पित है। चौरागढ़ का महादेव मंदिर बहुत प्राचीन मंदिर है। महादेव मंदिर पचमढ़ी में एक ऊंचे पहाड़ी पर स्थित है। महादेव मंदिर में जाने के लिए आपको करीब 2 से 3 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। महादेव मंदिर में पहुंचने का जो रास्ता है, वह पूरा जंगल से घिरा हुआ है। महादेव मंदिर में आपको शंकर भगवान जी की अद्भुत प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। आप इस मंदिर से पचमढ़ी के चारों तरफ का दृश्य देख सकते हैं, जो बहुत ही मनोरम होता है। इस मंदिर में नागद्वार, महाशिवरात्रि और सावन सोमवार के समय बहुत भीड़ रहती है। यहां पर मेला लगता है और लाखों की संख्या में लोग भगवान शंकर जी के दर्शन करने के लिए आते हैं।

काल भैरव गुफा चौरागढ़ - Kaal bhairav gufa chauragarh

काल भैरव गुफा चौरागढ़ जाने वाले रास्ते में ही पड़ती है।  यहां पर आपको एक गुफा देखने के लिए मिलती है। इस गुफा तक जाने का रास्ता बहुत ही दुर्गम है। आप यहां पर शिवरात्रि और नाग पंचमी के समय जा सकते हैं, क्योंकि इस समय यहां पर बहुत भीड़ रहती है। यहां पर बहुत सारे लोग इस समय यात्रा करते हैं, तो आप भी इस समय काल भैरव गुफा घूम सकते हैं।

वैदेही गुफा चौरागढ़ - Vaidehi gufa chauragarh

वैदेही गुफा चौरागढ़ जाने वाले रास्ते में पड़ती है। यह एक छोटी सी गुफा है। कहा जाता है कि प्राचीन समय में सीता जी इस गुफा में स्नान किया करती थी। आप यहां पर रुक कर फोटोग्राफी का मजा ले सकते हैं और यहां से पचमढ़ी की खूबसूरत वादियों का दृश्य देख सकते हैं।

बड़ा महादेव पचमढ़ी  - Bada mahadev pachmarhi

बड़ा महादेव पचमढ़ी का एक धार्मिक स्थल है। बड़ा महादेव एक प्राचीन मंदिर है। यहां पर आपको एक गुफा देखने के लिए मिलती है। इस गुफा में हमेशा पानी रिसता रहता है। गुफा के अंदर शिव भगवान जी का एक शिवलिंग विराजमान है। गुफा के प्रवेश द्वार पर एक पत्थर का शिवलिंग विराजमान है।  गुफा में एक कुंड भी बना हुआ है। यहां पर आकर आपको बहुत शांति मिलती है। यहां पर आपको बहुत सारे बंदर देखने के लिए मिलते हैं।

पचमढ़ी के मंदिर -  Pachmarhi temple | Pachmarhi yatra


गुप्त महादेव पचमढ़ी  - Gupt mahadev pachmarhi

गुप्त महादेव पचमढ़ी में स्थित एक प्राचीन मंदिर है। गुप्त महादेव बड़ा महादेव मंदिर से करीब 1 किलोमीटर दूर होगा। आपको मंदिर तक पैदल चलकर जाना पड़ता है। यहां पर आपको एक सकरी गुफा देखने के लिए मिलती है, जिसके अंदर शिवलिंग विराजमान है। इस गुफा में एक बार में केवल 8 लोग ही अंदर जा सकते हैं। इस गुफा के बाहर आपको हनुमान जी की विशाल प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। यहां पर आकर आपको बहुत अच्छा लगता है।

पचमढ़ी के मंदिर -  Pachmarhi temple | Pachmarhi yatra


जटाशंकर मंदिर पचमढ़ी - Jatashankar mandir pachmarhi

जटाशंकर पचमढ़ी का एक दर्शनीय स्थान है। यह एक धार्मिक स्थल है। यहां पर शिव भगवान जी का शिवलिंग विराजमान है। यह मंदिर खाई में स्थित है। आप को मंदिर जाने के लिए नीचे उतरना पड़ता है। नीचे जाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है।  जटाशंकर की गुफा जाने के रास्ते में आपको बहुत सारे मंदिर देखने के लिए मिलते हैं, जो बहुत ही सुंदर लगते हैं। आपको यहां पर आकर बहुत अच्छा लगता है। जटाशंकर गुफा में  24 घंटे पानी रिसता रहता है। यहां पर एक कुंड बना हुआ है। कुंड के ऊपर एक पत्थर लटका हुआ है, जो देखने में बहुत ही अद्भुत लगता है। आपको यहां पर पत्थर पर बहुत सारी आकृतियां देखने के लिए मिल जाती हैं।  यह जगह बहुत ही मनोरम है और यहां पर आकर बहुत शांति मिलती है।

पचमढ़ी के मंदिर -  Pachmarhi temple | Pachmarhi yatra


नागद्वार मंदिर पचमढ़ी - Nagdwar mandir pachmarhi

नागद्वार पचमढ़ी का एक दर्शनीय स्थान है।  इस जगह में साल में सिर्फ एक ही बार जाया जा सकता है। यह जगह नाग पंचमी के समय 10 दिनों के लिए खोली जाती है। इस समय पचमढ़ी में विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें लाखों की संख्या में लोग भाग लेते हैं। नागद्वार के मंदिरों में जाने का रास्ता बहुत ही दुर्गम है। यह मंदिर जंगल के बीच में है। इन मंदिरों में पहुंचने के लिए आपको ऊंची ऊंची घाटियां, पहाड़ियां,  बहते हुए झरने पार करने पड़ते हैं। इस जगह में आकर आपको बहुत सारी शांति मिलती है। यहां पर बहुत सारे मंदिर है। इन मंदिरों के बारे में आइए जानते हैं।

पचमढ़ी के मंदिर -  Pachmarhi temple | Pachmarhi yatra


श्री नागद्वार स्वामी मंदिर या श्री पद्म शेष मंदिर - shri nagdwar swami mandir or  padamshesh mandir pachmarhi

पद्म शेष मंदिर नागद्वार का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है। इस मंदिर में आने के लिए आपको पैदल चलना पड़ता है। इस मंदिर में जाने का रास्ता जंगल से भरा हुआ है। यहां पर आपको ऊंची ऊंची घाटियां, बहते हुए झरने, पहाड़ियां देखने के लिए मिलती हैं। यह मंदिर नाग देवता को समर्पित है। यहां पर आपको भगवान शंकर जी का शिवलिंग देखने के लिए मिलता है। यहां पर एक  गुफा है। इस गुफा में जाने के लिए नाग पंचमी के समय पर बहुत लंबी लाइन लगती है। नाग पंचमी के समय पर यहां पर लोगों के ठहरने की व्यवस्था भी रहती है और उनके खाने पीने की व्यवस्था भी रहती है। यहां पर नाग पंचमी के समय जो माहौल रहता है। वह पूरा भक्तिमय रहता है और इस माहौल में आपको आकर मन की शांति मिलेगी। यहां पर आपको ऊंची ऊंची पहाड़ियां और पहाड़ियों में उभरी हुई आकृतियां देखने के लिए मिलती हैं, जो बिल्कुल नाग भगवान की तरह रहती हैं। यह जगह आश्चर्य से भरी हुई है और यहां पर आकर बहुत अच्छा लगता है।

पचमढ़ी के मंदिर -  Pachmarhi temple | Pachmarhi yatra


पश्चिम द्वार पचमढ़ी - Paschim dwar nagdwar pachmarhi

पश्चिम द्वार नागद्वार की एक धार्मिक जगह है। यहां पर आपको एक गुफा देखने के लिए मिलती हैं। इस गुफा में शिवलिंग विराजमान है। यहां पर आपको पहाड़ी से गिरता हुआ झरना देखने के लिए मिलता है, जो बहुत सुंदर लगता है, जिसमें बहुत सारे लोग आप को नहाते हुए देखने के लिए मिल जाते हैं। इस झरने का पानी गुफा के अंदर से तेजी से बहता है, जो एक अलग अनुभव रहता है। नाग पंचमी के समय बहुत से यात्री नागद्वार की यात्रा करते हैं, तो जगह-जगह पर आपको भंडारे की व्यवस्था मिलती है। यह जगह बहुत खूबसूरत है और पूरी तरह प्राकृतिक है।

निशानगढ़ पर्वत नागद्वार पचमढ़ी - Nishan gad pachmarhi

निशान गढ़ पर्वत नागद्वार में स्थित एक ऊंचा पर्वत है। इस पर्वत के ऊपर शिव भगवान जी विराजमान है। बहुत सारे लोग इस पर्वत के दर्शन करने के लिए आते हैं और इस पर्वत पर चढ़ाई करते हैं।  यहां से चारों तरफ का व्यू बहुत ही अद्भुत होता है और शिव भगवान जी के दर्शन का एक अलग ही अनुभव होता है।

स्वर्गद्वार पचमढ़ी - Swargadwar pachmarhi

स्वर्गद्वार नागद्वार में स्थित एक ऊंचा पहाड़ है। यहां पर शंकर भगवान जी की एक गुफा स्थित है।  गुफा के अंदर शिवलिंग विराजमान हैं। यहां से आपको पचमढ़ी की खूबसूरत वादियां देखने के लिए मिलती है। यहां पर पहुंचने का रास्ता बहुत कठिन है। स्वर्गद्वार ऊंचे पहाड़ पर स्थित है। यहां पर आकर बहुत अच्छा लगता है। यहां पर भी आपके रुकने की और खाने पीने की व्यवस्था रहती है। यहां पर पहाड़ी के ऊपर एक गुफा बनी हुई है, जिस पर लोग नींबू फेंकते हैं और नींबू उस गुफा के अंदर जाना चाहिए। माना जाता है, कि जिसका भी नीबू गुफा के अंदर जाएगा। उसकी मनोकामना पूरी होगी और यहां पर बहुत सारे लोग आपको नींबू गुफा के अंदर फेंकते हुए देखने के लिए मिल जाएंगे। यहां पर भगवान शिव के भजन चलते रहते हैं। यहां पर आकर एक अलग ही अनुभव होता है।

चित्रशाला पचमढ़ी - Chitrashala pachmarhi

चित्रशाला पचमढ़ी में स्थित एक दर्शनीय जगह है। यहां पर पहाड़ी के ऊपर एक मंदिर स्थित है। मंदिर तक जाने के लिए सीढ़ियां बनी है। यहां पर एक प्रकार से बहुत बड़ा मेला लगता है और आपको बहुत सारे खाने-पीने की दुकानें मिल जाती हैं। यहां पर आकर बहुत अच्छा लगता है। यहां पर आप ऊंचे ऊंचे पहाड़ देख सकते हैं। आप इन पहाड़ों पर भी जा सकते हैं। मगर बरसात के समय आपको इन पहाड़ों पर संभल कर जाना चाहिए, क्योंकि पहाड़ों पर बहुत ज्यादा फिसलन होती है।

नंदीगढ़ पचमढ़ी - Nandigarh pachmarhi

नंदीगढ़ नागद्वार में घूमने की एक बहुत ही खूबसूरत जगह है। यहां पर एक ऊंचा पहाड़ है, जिसका आकार नंदी के समान है।  यहां पर पहाड़ के ऊपर शिव भगवान जी का शिवलिंग स्थापित है।  इस पहाड़ के ऊपर बहुत से लोग चढ़ाई करके जाते हैं।  इस पहाड़ से चारों तरफ का दृश्य बहुत ही अद्भुत होता है और यहां पर आकर बहुत अच्छा लगता है।

इन जगहों के अलावा भी नागद्वार में बहुत सारी जगह है, जहां पर आप घूम सकते हैं। यहां पर आपको पैदल यात्रा करनी पड़ती है। यह यात्रा करीब 18 से 20 किलोमीटर लंबी रहती है और यहां का पूरा रास्ता जंगल का रहता है।  ऊंचे ऊंचे नदी, नाले, पहाड़ी, चट्टाने आपको देखने के लिए मिलती है और इन्हीं रास्तों से होकर आप इन मंदिरों तक पहुंच सकते हैं।

अम्बा माई मंदिर पचमढ़ी - Amba mai mandir pachmarhi

अंबा माई मंदिर पचमढ़ी जाने वाले रास्ते में पड़ता है। यह मंदिर बहुत ही भव्य है। मंदिर के प्रवेश द्वार बहुत ही भव्य है। यहां पर दो शेरों की मूर्ति विराजमान की गई है। आप मंदिर के अंदर जाते हैं, तो मंदिर में आपको अंबा माई की मूर्ति देखने के लिए मिलती है। इसके अलावा यहां पर शिवलिंग स्थापित है। भैरव बाबा की मूर्ति स्थापित है। राधा कृष्ण की मूर्ति स्थापित है और श्री राम और माता सीता की मूर्ति स्थापित है। यहां पर आकर बहुत शांति मिलती है। अंबा माई मंदिर के थोड़ा ही आगे आपको बेगम पैलेस देखने के लिए मिलता है, जो एक प्राचीन महल है।

रजत प्रपात पचमढ़ी
बी फॉल पचमढ़ी
अप्सरा विहार जलप्रपात पचमढ़ी
पचमढ़ी यात्रा

पचमढ़ी यात्रा - Jabalpur to Pachmarhi Travel | One day trip to pachmarhi

जबलपुर से पचमढ़ी तक की यात्रा - Pachmarhi darshan | Pachmarhi Travel | Pachmarhi yatra


पचमढ़ी यात्रा - Jabalpur to Pachmarhi Travel | One day trip to pachmarhi
हांडी खोह


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बेगम पैलेस


जबलपुर से पचमढ़ी जाने के दो माध्यम है। एक माध्यम है ट्रेन के द्वारा और दूसरा माध्यम है सड़क के द्वारा। आप ट्रेन के द्वारा पचमढ़ी पहुंच सकते हैं। जबलपुर से पचमढ़ी के लिए बहुत सारी ट्रेनें चलती हैं। जबलपुर से  करीब 2 से 3 घंटे में आप पचमढ़ी पहुॅच सकते हैं। अगर आप 1 दिन की यात्रा का प्लान बनाकर पचमढ़ी घूमने जा रहे है, तो आप जबलपुर से सुबह की ट्रेन ले सकते है। जबलपुर से पचमढ़ी के लिए सुबह के समय बहुत सारी ट्रेनें चलती है। आप ट्रेन के टिकट ऑनलाइन भी बुक कर सकते हैं। मगर आप स्टेशन में सही समय पर पहुंच जाइए। 5:30 बजे जबलपुर स्टेशन से ट्रेन मिल जाती हैं। यह ट्रेन मदन महल स्टेशन में भी आपको मिल जाएगी, तो आप मदन महल स्टेशन से ट्रेन पकड़ सकते हैं। जबलपुर से पचमढ़ी में पड़ने वाले स्टेशन है - भेड़ाघाट, भिटौनी, विक्रमपुर, श्रीधाम, बेलखेड़ा, नरसिंहपुर, करेली, गाडरवारा, बोहनी, सालीचौका, बनखेड़ी । इन रेलवे स्टेशनों में आपकी ट्रेन रुकती है, उसके बाद पिपरिया रेलवे स्टेशन में आपको उतरना पड़ता है। पिपरिया से पचमढ़ी करीब 60 किलोमीटर दूर होगा। पिपरिया से पचमढ़ी आपको रोड के माध्यम से जाना पड़ता है। पिपरिया में आपको बहुत सारे साधन मिल जाते हैं, पचमढ़ी जाने के लिए। पिपरिया रेलवे स्टेशन के बाहर ही बस स्टैंड है, जहां से आप बस ले सकते हैं। अगर आप पचमढ़ी जाने के लिए 1 दिन का प्लान बना रहे हैं, तो आप जिप्सी ले सकते हैं। जिप्सी आप को पिपरिया रेलवे स्टेशन में बुक करना पड़ता है। जिप्सी वाला आपको पचमढ़ी के सभी दर्शनीय जगह घुमा देगा। 

Places to visit in Pachmarhi in one day

पचमढ़ी यात्रा - Jabalpur to Pachmarhi Travel | One day trip to pachmarhi
कैथोलिक चर्च





पचमढ़ी यात्रा - Jabalpur to Pachmarhi Travel | One day trip to pachmarhi
प्रियदर्शनी



जिप्सी वाला आपको सबसे पहले बेगम पैलेस घुमाएगा, जो पचमढ़ी जाने के रास्ते में पड़ता है। बेगम पैलेस के पास आपको अंबा माई मंदिर भी देखने के लिए मिलता है। उसके बाद आप जटाशंकर मंदिर घूम सकता है। जटाशंकर मंदिर मुख्य पचमढ़ी शहर में ही स्थित है। यह मंदिर खाई में स्थित है और यहां पर आपको एक गुफा देखने के लिए मिलती है। गुफा  पर 24 घंटे पानी रिसता रहता है। यहां पर एक कुंड भी बना हुआ है, जिसमें पानी भरा हुआ है। जटाशंकर की गुफा जाते समय आपको अन्य मंदिर भी देखने के लिए मिलते हैं। उसके बाद आप पांडव गुफा जा सकते हैं। पांडव गुफा में आपको पांच गुफाएं देखने के लिए मिलती है, जो पत्थर की बनी रहती है। इन गुफाओं के बारे में कहा जाता है, कि यह गुफाओं पांडवों द्वारा बनवाया गया था। इन गुफाओं में पांडव रहते थे। सभी के लिए अलग-अलग गुफाएं बनी हुई है। सबसे बड़ी गुफा में द्रोपति के रहने के लिए बनाई गई थी। पांडव गुफा के पास एक बड़ा सा गार्डन देखने के लिए मिलता है। उसके बाद आप हांडी खोह घूम सकते हैं। हांडी खोह में आपको एक खाई देखने के लिए मिलती है। यह खाई 300 फीट गहरी है और इस खाई का शेप हांडी के आकार का है। उसके बाद प्रियदर्शनी घूम सकते हैं। प्रियदर्शनी में आपको पचमढ़ी की खूबसूरत वादियां देखने के लिए मिलती हैं । उसके बाद आप बड़ा महादेव जा सकते है। बड़ा महादेव में एक गुफा है। यहां पर शिवलिंग आप देख सकते हैं। गुफा में हमेशा पानी रिसता रहता है। बड़ा महादेव के आगे आपको गुप्त महादेव देखने के लिए मिलता है। गुप्त महादेव में एक सकरी गुफा है। सकरी गुफा के अंदर शिवलिंग विराजमान है। यहां से चौरागढ़ जाने का भी रास्ता आपको देखने मिलता है। मगर आपको चौरागढ़ जाने में 1 दिन लग जाता है और इसके बाद आपके पास समय बचता है, तो आप राजेंद्र गिरी जा सकते हैं। राजेंद्र गिरी एक प्वाइंट है। यहां से आप सनसेट का बहुत ही मनोरम दृश्य देख सकते हैं।  पचमढ़ी में कैथोलिक चर्च है।  वह मुख्य सड़क में स्थित है।  आप वहां पर भी जा सकते हैं।  पचमढ़ी की  मुख्य रोड पर पचमढ़ी झील  है। आप इस झील को पचमढ़ी के अन्य दर्शनीय स्थलों को  देखने जाते समय घूम सकते हैं।  उसके बाद आप वापस घर आने के लिए ट्रेन पकड़ सकते हैं। पिपरिया रेलवे स्टेशन में आपको जबलपुर के लिए बहुत सारी ट्रेनें मिल जाते हैं। शाम को पिपरिया रेलवे स्टेशन से आप जबलपुर आ सकते हैं। 

रजत प्रपात पचमढ़ी - Silver falls pachmarhi | Rajat prapat pachmarhi

सिल्वर फॉल पचमढ़ी - Silver waterfall Pachmarhi | Rajat waterfall Pachmarhi


रजत प्रपात पचमढ़ी - Silver falls pachmarhi | Rajat prapat pachmarhi


रजत जलप्रपात पचमढ़ी का सबसे ऊंचा जलप्रपात है। यह जलप्रपात बहुत सुंदर है। इस जलप्रपात को सिल्वर जलप्रपात या रजत जलप्रपात भी कहते है। रजत जलप्रपात पचमढ़ी में घूमने वाला एक दर्शनीय स्थल है। रजत का मतलब होता है - चांदी। चांदी एक धातु है और इसके गहनें बनाये जाते है। यह धातु चमकदार होती है। रजत जलप्रपात भी दूर से देखने में चांदी के सामान चमकता है। यह जलप्रपात घने जंगलों के बीच में स्थित है।

रजत जलप्रपात में पहुंचने के लिए आपको घने जंगलों के बीच में से पैदल चलना पड़ता है। यह जलप्रपात अप्सरा जलप्रपात के आगे है। इस जलप्रपात में बरसात में ज्यादा पानी रहता है। बरसात के समय रजत जलप्रपात घूमने का सबसे अच्छा समय है। इस समय आपको जंगल में हर जगह छोटे छोटे झरनें देखने मिल जाते है। गर्मी में पानी इस झरनें में रहता है, मगर कम रहता है। 

रजत जलप्रपात की ऊंचाई 130 फीट है। इस जलप्रपात को आप उपरी हिस्सा देख सकते है। इसका निचला हिस्सा आपको दिखाई नहीं देगा। यह झरना हरियाली से घिरा हुआ है। आपको इस झरनें तक पहुॅचने के लिए आपको पैदल चलना पडता है, क्योंकि यह झरना बीच जंगल में स्थित है। रजत जलप्रपात पचमढ़ी से 2 या 3 किलोमीटर दूर होगा। आप इस झरनें तक पैदल ही आना होगा, मगर आप इस झरनें में जिप्सी और बाइक या साइकिल से आ सकते है। जिप्सी पचमढ़ी में असानी से मिल जायेगी। बाइक या साइकिल आपको पचमढ़ी में किराये पर मिल जाती है। इस झरनें के प्रवेश द्वार पर पहुॅचकर आपको पैदल चलना पडता है। यह करीब आपको 1 या 1.5 किलोमीटर दूर आपको पैदल चलना पडेगा। उसके बाद आपको रजत जलप्रपात देखने मिलता है। आपको यहां पर पचमढ़ी की खूबसूरत वदियां देखने मिलती है। 

अप्सरा विहार जलप्रपात पचमढ़ी - Apsara vihar pachmarhi | Apsara falls pachmarhi

अप्सरा जलप्रपात पचमढ़ी - Apsara vihar in pachmarhi


अप्सरा विहार जलप्रपात पचमढ़ी  - Apsara vihar pachmarhi | Apsara falls pachmarhi


अप्सरा विहार जलप्रपात पचमढ़ी का एक सुंदर जलप्रपात है। यह जलप्रपात घने जंगलों के बीच में स्थित है। इस जलप्रपात में एक प्राकृतिक पूल बना हुआ है, जिसमें आप नहाने का मजा ले सकते है। अप्सरा विहार जलप्रपात में पहुंचने के लिए आपको पैदल चलना पड़ता है। पचमढ़ी हरे-भरे जंगलों से घिरा हुआ है और जलप्रपात पर जाने का जो रास्ता है, वह भी हरा भरा है। यह रास्ता जंगल से घिरा हुआ है। यहां पर आपको कुछ रास्ता कच्चा और कुछ रास्ता पक्का मिलेगा। मगर आपको पैदल चलने में मजा आयेगा। 

अप्सरा विहार जलप्रपात पचमढ़ी शहर से करीब 3 किलोमीटर दूर है। आप पचमढ़ी शहर से इस झरनें के प्रवेश द्वार तक जिप्सी से आ सकते है। पचमढ़ी के दर्शनीय स्थलों को घूमने में जिप्सी का प्रयोग किया जाता है। आप चाहे, तो यहां पर बाइक या साइकिल से भी आ सकते हैं। बाइक और साइकिल आपको पचमढ़ी शहर में किराए पर मिल जाती हैं। जिप्सी को प्रवेश द्वार के पास पार्क करके आप झरनें तक पैदल जा सकते है। आपको यहां पर करीब 1 किलोमीटर पैदल चलना पडता है। 

आप अप्सरा विहार जलप्रपात के पास पहुॅचते है, तो आपको छोटे छोटे झरने गिरते हुए दिखते है। फिर यह पानी एक बडे कुण्ड में गिरता है। यहां एक प्राकृतिक कुंड है, जो ज्यादा गहरा नहीं है। आप इसमें नहा सकते हैं और जिंदगी का आनंद ले सकते हैं। यहां पर आप अपनी फैमिली के साथ आ सकते हैं। अप्सरा विहार का नाम एक अनोखा नाम है। इस जलप्रपात में पुराने समय में अग्रेजों अफसरों की पत्नीयां स्नान किया करती थी, जिनकों यहां पर रहने वाले अदिवासी उन्हें देखा करते थे। वे लोग अग्रेजों अफसरों की पत्नीयां को अप्सरा समझाते थे और इस तरह यह जलप्रपात को अप्सरा जलप्रपात कहा जाना लगा। 
  

बी फॉल पचमढ़ी - Bee waterfall pachmarhi | B fall pachmarhi

जमुना जलप्रपात - Bee fall pachmarhi madhya pradesh | Jamuna Falls Pachmarhi



बी फॉल पचमढ़ी - Bee waterfall pachmarhi | B fall pachmarhi


बी फॉल पचमढ़ी (bee fall Pachmarhi) में स्थित एक खूबसूरत जलप्रपात है। आप जब भी पचमढ़ी की सैर करने जाते है, तो इस जलप्रपात में घूमने के लिए आ सकते हैं। यह जलप्रपात घने जंगलों के बीच में स्थित है। इस झरने को जमुना जलप्रपात के नाम से भी जाना जाता है। इस जलप्रपात में आप जिप्सी के द्वारा पहुंच सकते हैं। पचमढ़ी के दर्शनीय स्थलों की सैर करनें का सबसे अच्छा साधन जिप्सी है। आप इस जलप्रपात में साइकिल और बाइक के द्वारा भी पहुंच सकते हैं। यह साइकिल और बाइक भी पचमढ़ी में आपको किराए पर उपलब्ध हो जाते हैं।

बी फॉल (
bee fall) का नाम बी फॉल (bee fall) इसलिए रखा गया है, क्योंकि कहा जाता है कि यह पूरा क्षेत्र जंगल से घिरा हुआ है। इस एरिया में बहुत सारी मधुमक्खियों के छत्ते पाए जाते हैं। यहां पर आपको बोर्ड भी देखने के लिए मिलता है, जिसमें सरकार के द्वारा चेतावनी दी गई है, कि मधुमक्खियों से सावधान रहे और किसी भी तरह की छेड़खानी ना करें। इसके अलावा बी फॉल (bee fall) काफी ऊंचाई से गिरता है, जिससे जलप्रपात की जो आवाज रहती है वह मधुमक्खियों के भुनभुनाने की तरह आती है। इसलिए भी इस जलप्रपात को बी फॉल (bee fall) कहा जाता है।

बी फॉल
(bee fall) में पहुंचने के लिए आपको नीचे की तरह आना पडता है। यहां पर जलप्रपात तक पहुॅचने के लिए सीढियां बनाई गई है। यह करीब 100 या 150 सीढ़ियां होगें, जिसको उतरते हुए आप थक जाते है। मगर नीचे अगर आप थकान मिट जाती है। पहाडों के उपर से गिरता झरना बहुत ही मनोरम लगता है। आप इस झरने में नहाने का मजा ले सकते हैं। झरने के पास ही में आपको कुछ शॉप देखने के लिए मिल जाते हैं, जहां पर आप को नहाने के लिए कपड़े किराया पर मिल जाते हैं। आप अगर अपने साथ एकस्ट्रा कपड़े नहीं लाते है, तो यहां से कपड़े किराए पर लेकर नहा सकते हैं। आपको यहां पर मैंगी की कुछ अन्य शाॅप भी देखने मिलती है। आप यहां पर खाने का मजा भी ले सकते है। यहां पर चेंजिंग रूम भी बना हुआ है। इस झरने के नजदीक आकर आप को लगेगा कि आप प्रकृति की करीब आ गए है। यह जगह बहुत शांत और बहुत अच्छी है। बी फाॅल (bee fall) के जाने वाले रास्ते में आपको एक आर्टिफिशियल झरना देखने मिलता है,  जिससे पानी बहता है। इस झरने में आप बहुत सारी मछलियां देख सकते हैं। आप यहां पर अपने पैर डालकर बैठ सकते हैं और मछलियां आपके पैरों को गुदगुदी करेगी जो एक अच्छा अनुभव रहता है। पचमढ़ी एक बहुत ही मनोरम जगह है और यहां पर जाकर एक अलग अनुभव मिलता है। 


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खंदारी झरना जबलपुर - Khandari waterfall jabalpur | khandari Dam jabalpur

खंदारी जलप्रपात जबलपुर - Khandari Falls Jabalpur | Khandari  jalaprapat

खंदारी झरना जबलपुर - Khandari waterfall jabalpur | khandari Dam jabalpur

खंदारी जलप्रपात (khandari waterfall) छोटा सा मगर बहुत खूबसूरत जलप्रपात है। खंदारी जलप्रपात (khandari waterfall) डुमना नेचर पार्क में स्थित खंदारी झील (khandari lake)  में पानी के ओवरफलो के होने पर बनता है। यह जलप्रपात जबलपुर जिले में स्थित है। आपको खंदारी जलप्रपात (khandari waterfall) बरसात के समय देखने मिल जाएगा। बरसात के समय में ही खंदारी जलाशय (khandari lake) पानी से भर जाता है और डैम का पानी ओवरफ्लो होने लगता है। खंदारी जलाशय (khandari lake) का पानी जहां ओवरफ्लो होता है, उससे थोड़ा आगे एक और जलप्रपात बनता है, जो बहुत खूबसूरत होता है। यह जलप्रपात छोटा रहता है और यहां पर पहाड़ों से पानी गिरता है, जो बहुत ही अच्छा लगता है। यहां पर आप आकर अपना अच्छा समय बिता सकते हैं। यहां पर आप  पिकनिक मना सकते हैं। यह जगह हरियाली से भरी हुई है।

आप खंदारी जलप्रपात
(khandari waterfall) के नजदीक जा सकते हैं और यहां पर इंजॉय कर सकते हैं। बरसात के समय आप यहां पर आते हैं, तो खंदारी नदी की तेज धार को पार करते हुए आपको आना पड़ता है। खंदारी जलप्रपात (khandari waterfall) में पहुंचने के लिए आपको धोबी घाट से होते हुए आना पडता है। यहां रोड पक्की है। उसके बाद आप गाड़ी को रोड के किनारे खडा कर सकते है। यहां पर जाने का कोई भी शुल्क नहीं लिया जाता है। मगर यहां पर ज्यादा भीड़ होने की स्थिति में पार्किंग का चार्ज लिया जाता है, मगर यहां पर भीड़ नहीं रहती है, तो यहां पर ऐसा कोई चार्ज नहीं लिया जाता है। यहां पर आप आकर इंजॉय कर सकते हैं। रोड से झरना करीब 500 मीटर दूर होगा। आपको कच्चे रास्ते में पैदल चलना पड़ता है। आप इस झरने के नीचे नहाने का भी मजा ले सकते हैं। इस झरने की खूबसूरती को देख सकते हैं।

साल 2019 में खंदारी झरना
(khandari waterfall) के पास एक दुर्घटना हो गई थी। यहां पर जो पानी ओवरफ्लो होता है, झरने से थोड़ा आगे एक पूल बनता है, जो गहरा है। पूल में एक आदमी की डूबकर मृत्यु हो गई थी, जिसके कारण इस झरने पर जाने पर रोक लगा दी गई थी। इसलिए अगर आप इस झरने में जाते हैं, तो संभल कर जाएं। किसी भी तरह की असावधानी ना बरतें। अगर आप यहां पर नहाने का आनंद भी लेते हैं, तो सावधानी जरूर बरतें। क्योंकि बरसात में फिसलन बहुत होती है। आप यहां पर अपनी फैमिली और दोस्तों के साथ जाकर अच्छा समय बिता सकते है।
 

टेमर जलप्रपात जबलपुर - Temar fall jabalpur | Temar waterfall jabalpur

 टेमर झरना जबलपुर - Temar jharna jabalpur


टेमर जलप्रपात जबलपुर - Temar fall jabalpur | Temar waterfall jabalpur


टेमर जलप्रपात जबलपुर (Temer waterfalls Jabalpur) शहर का खूबसूरत झरना है। टेमर जलप्रपात जबलपुर (Temer waterfalls Jabalpur) के बरगी क्षेत्र में स्थित है। टेमर झरना जबलपुर (temar jharna jabalpur) से करीब 33 किलोमीटर दूर होगा। इस झरनें तक आप अपनी गाडी से पहुॅच सकते है। टेमर जलप्रपात में जाने का सबसे अच्छा समय बरसात का है, क्योंकि बरसात के समय झरने में बहुत सारा पानी रहता है। गर्मी के समय पर झरनें में पानी नहीं रहता है। 

टेमर जलप्रपात (
Temer waterfalls) पर जाने का रास्ता बहुत आसान है। आप यहां पर जबलपुर नागपुर हाईवे रोड से आ सकते हैं। बरगी के पास से बरगी बांध जाने वाले रास्ते के तरफ जाना होता है। बरगी बांध जाने वाले रास्ते में आपको काली माता की विशाल मूर्ति देखने के लिए मिलती है। इस मूर्ति की उचाई करीब 108 फीट है। यह जबलपुर की सबसे उची मूर्ति है। यह मूर्ति आपको दूर से ही देखने मिल जाता है। काली जी की मूर्ति को देखकर आप थोडा ही आगे जायेगें, तो आपको एक बोर्ड देखने मिलेगा। बोर्ड में टेमर जलप्रपात (Temer waterfalls) की ओर जाने का डायरेक्शन दिखेगा। आप बोर्ड की दिशा की तरफ आगे बढ़ जाये। यहां से आपको कच्चा रास्ता मिलता है। थोड़ी दूर कच्चे रास्ते में आप को चलना पड़ता है और आपको आगे जलप्रपात देखने के लिए मिलता है। टेमर जलप्रपात (Temer waterfalls) बरसात में बहुत खूबसूरत रहता है। मगर जलप्रपात जाने का रास्ता बरसात के समय बहुत ज्यादा खराब रहता है, क्योंकि यह रास्ता मिट्टी वाला है, जो पूरा रास्ता कीचड़ से सन रहता है। आप इस रास्ते में गाडी नहीं ले जा सकते है। टेमर झरना (temar jharna) ज्यादा बडा नही है, मगर खूबसूरत है।

टेमर जलप्रपात
(Temer waterfalls) में 2020 में एक दुर्घटना घट गई थी। यहां पर एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, इसलिए आप यहां पर जाते हैं, तो संभल कर रहें। झरने में किसी भी तरह की लापरवाही ना करें। यहां पर किसी भी तरह की कोई सुरक्षा नहीं है और ना ही यहां पर कोई गार्ड है। आप यहां पर सावधानीपूर्वक रहे और झरने में एंजॉय करें। आप यहां पर अपने दोस्तों और परिवार के लोगों के साथ आकर इंजॉय कर सकते हैं।


बैतूल पर्यटन स्थल - Betul tourist place | Betul famous places

बैतूल दर्शनीय स्थल - Places to visit near Betul | Betul tourist spot | Betul city


Betul jilaबैतूल जिला


बैतूल मध्यप्रदेश राज्य में स्थित एक जिला है। बैतूल जिला सतपुडा की पहाडियों से घिरा हुआ है। बैतूल जिला के मुलताई में ताप्ती नदी का उदगम हुआ है। ताप्ती मध्यप्रदेश की मुख्य नदी है। बैतूल जिले की सीमा छिंदवाड़ा, नागपुर, अमरावती, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, और होशंगाबाद की सीमाओं को छूती है। बैतूल जिला 10 विकास खंडों में बटा हुआ है। यह विकासखंड है - बैतूल, मुलताई, भैंसदेही, शाहपुर, अमला, प्रभातपट्टन, घोड़ाडोंगरी, चिचोली, भीमपुर, आठनेर,बैतूल नर्मदापुरम संभाग के अंर्तगत आता है। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से बैतूल की दूरी करीब 178 किलोमीटर है। बैतूल जिलें में घूमने के लिए बहुत सारी दर्शनीय जगह मौजूद है, जहां पर जाकर आप बहुत अच्छा समय बिता सकते है। 


बैतूल में घूमने की जगहें
Places to visit in Betul


बालाजीपुरम - Balajipuram betul | Betul ka Balajipuram | Balajipuram temple betul


बालाजीपुरम बैतूल जिले में स्थित दर्शनीय स्थल है। यह भारत का पांचवा धाम है। बालाजीपुरम दक्षिण भारतीय शैली में बना हुआ एक खूबसूरत मंदिर है। बालाजीपुरम नागपुर भोपाल हाईवे रोड पर स्थित है। बालाजीपुरम मंदिर का प्रवेश द्वार बहुत ही सुंदर बना हुआ है। बालाजीपुरम मंदिर बहुत ही भव्य है। मंदिर में आपको बहुत सारी मूर्तियां देखने के लिए मिलती है। यहां पर शिव भगवान जी का शिवलिंग बना हुआ है, जिसमें शिव भगवान जी की प्रतिमा को उकेरा गया है। मंदिर में बालाजी भगवान की मूर्ति स्थापित है। मंदिर में राम भगवान और सीता जी की मूर्ति स्थापित है। यहां पर बच्चों के लिए एक पार्क भी स्थित है। यहां पर वैष्णो माता का मंदिर का भी प्रतिरूप ही बना हुआ है। यहां पर हूबहू वैष्णो माता के मंदिर जैसी गुफा बनाई गई है। यहां पर आकर बहुत शांती मिलती है। इस मंदिर में आप आकर वैष्णो माता के दर्शन करने के लिए मिलता है। 

मुक्तागिरी दिगंबर जैन मंदिर - Muktagiri Digambar Jain Temple | Muktagiri Jain Mandir | Muktagiri Betul | Muktagiri

मुक्तागिरी बैतूल जिला का एक दर्शनीय स्थल है। मुक्तागिरी पूरे भारतवर्ष में प्रसिध्द है। यहा पर आपको जैन मंदिर देखने मिलते है। यहां पर 52 जैन मंदिर बने हुए है। यह मंदिर पहाडों के उपर बने हुए है। मुक्तागिरी मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र की सीमा पर पडता है। मुक्तागिरी बैतूल जिले में भैंसदेही तहसील के अंतर्गत आता है। मुक्तागिरी के जैन मंदिर 13 वीं -14 वीं शताब्दी के दौरान बनाया गए थे। मुक्तागिरी के इन जैन मंदिर में जाने के लिए आपको पैदल ही पहाडों पर जाना पडता है। आपको यह कार्य बहुत रोमांचक लगेगा। मुक्तागिरी में जैन मंदिर के अलावा आपको एक जलप्रपात भी देखने मिलता है। यह जलप्रपात आपको बरसात के समय देखने के लिए मिलता है। यहां पर रहने और खाने की भी व्यवस्था उपलब्ध है। यहां पर आप यात्रा के लिए कभी भी आ सकते है। यहां पर यात्रा का निश्चित समय है। 

सपना बांध - Sapna Dam Betul | Sapna bandh betul 

सपना बांध बैतूल जिले में ही घूमने वाली जगह है। सपना बैतूल जिलें में स्थित एक जलाशय है। सपना बांध में आप बरसात के समय घूम सकते हैं। बरसात के समय यहां का दृश्य बहुत रमणीय होता है। यह बांध बैतूल नागपुर हाईवे रोड पर स्थित है। यह जगह प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है। इस बांध के पानी का उपयोग सिंचाई के लिए किया जाता है। आप यहां पर पिकनिक मनाने के लिए आ सकते हैं।

कुकरु - Kukru khamla Betul | Kukru hill station | Kukru khamla hill station

कुकरू महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित एक खूबसूरत दर्शनीय स्थल है। यह बैतूल जिले की भैसदेही तहसील के अंतर्गत आता है।  कुकरू गांव बैतूल जिले की मनोरम जगह है। आप यहां पर घूमने का जा सकते हैं। यहां पर आपको खूबसूरत पहाड़ियों का दृश्य देखने के लिए मिलता है। यहां पर कॉफी का उत्पादन किया जाता है। आप यहां पर कॉफी के बागान भी घूम सकते हैं। कुकरू सूर्यास्त और सूर्योदय के लिए प्रसिद्ध है। यहां पर आप आकर सूर्यास्त का मनोरम दृश्य देख सकते है। यहां पर आप बरसात के समय घूमने के लिए आ सकते हैं। बरसात के समय कुकरू स्वर्ग जैसी लगती है। यहां पर आपको हर जगह पर छोटे-छोटे झरनें देखने के लिए मिल जाते हैं। कुकरू में आपको ठहरने के लिए होटल भी मिल जाते है। आप सरकारी वेवसाईड पर जाकर कुकरू जाने के लिए बुकिंग करा सकते है। इसमें आपको अलग अलग पैकेज मिल जाएगें। 

बुच स्थल विहंगम दृश्य - Buch Point | Buch point betul 

बुच स्थल कुकरू का एक व्यू पांइट है। कुकरू बैतूल जिला का दर्शनीय स्थल है। आप इस जगह से सतपुडा की हरी भरी वदियां देख सकते है। यहां पर आप बरसात के समय आते है, तो आपको बहुत ही रमणीय नजारा देखने मिलता है। यहां की पूरी घाटियां हरियाली की चादर ओढी रहती है। आपको बुच स्थल से सूर्यास्त और सूर्यादय का बहुत अच्छा नजारा देखने मिलता है। आपको यहां पर पवन चक्की भी देखने मिलती है। पवन चक्की से बिजली बनाई जाती है। 

सालबर्डी शिवलिंग गुफाएं - Salbardi shiv gufa | salbardi information | Salbardi Shivlinga Caves


सालबर्डी बैतूल जिले की एक दर्शनीय जगह है। बैतूल जिलें के सालबर्डी को शिवधाम के रूप में जाना जाता है। यहां पर शिव भगवान जी की एक गुफा है, जहां पर आपको ट्रैकिंग करके जाना पड़ता है। गुफा पर शिवलिंग विराजमान है। शिवलिंग पर पहाड से पानी गिरता रहता है और यह पानी कहां से आता है। यहां किसी को नहीं पता है। यहां पर शिवलिंग का आभिषेक स्वयं प्रकृति के द्वारा किया जाता है। यह जगह घने जंगलों के बीच में स्थित है। सालबर्डी महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित है। आप यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं। यहां पर हर साल मेला का आयोजन होता है और यह मेला आठ दिनों तक चलता है। यहां आकर बहुत शांति और सुकून मिलता है।

पांडव कालीन गुफाएं सालबर्डी - Pandav Caves Salbardi | Salbardi betul

पांडव कालीन गुफाएं सालबर्डी में देखने लायक एक प्राचीन जगह है। यहां पर आपको एक गुफा देखने मिलती है। इन गुफाएं के बारे में कहा जाता है, कि यहां पर पांडव अपने वनवास काल के दौरान रुके थे। यहां पर आपको बहुत सारी प्राचीन गुफाएं देखने मिलती है। यह गुफाएं पत्थर से बनी हुई है। यहां पर बरसात के समय बहुत ही अच्छा नजारा रहता है। 

मठारदेव बाबा मंदिर - Mathardev Temple | Mathardev temple sarni | Mathardev mandir

मठारदेव बाबा मंदिर बैतूल जिले की एक दर्शनीय स्थल है। मठारदेव बाबा मंदिर बैतूल जिले के सारणी में स्थित है। यह मंदिर पहाड़ी के शिखर पर स्थित है। यहां पर शिव भगवान जी का मंदिर स्थित है। पहाड़ी के शिखर पर आपको पैदल चलकर जाना पड़ता है। यहां पर सीढियां के द्वारा आप मंदिर तक पहुॅच सकते है। पहाड़ी के शिखर पर पहुॅचकर आपको सारणी का बहुत ही मनोरम दृश्य देखने के लिए मिलता है। यहां पर मकर संक्रांति के समय मेला लगता है, जिसमें भारी संख्या में लोग इकट्ठे होते हैं। मेलें में तरह तरह की दुकानें लगती है। 

सतपुड़ा बांध - Satpura Dam betul | Satpura bandh | Sarni dam

सतपुड़ा बांध बैतूल जिले के सारणी में स्थित है। यह बहुत खूबसूरत बांध है। यह बांध चारों तरफ से पहाड़ियों से घिरा हुआ है। सतपुड़ा बांध तवा नदी पर बना हुआ है। सतपुड़ा बांध में 14 गेट हैं। बरसात के समय डैम पानी से भर जाता है और इसके गेट खोले जाते हैं। बांध के गेट खोलने पर नजारा बहुत ही खूबसूरत होता है। बरसात के समय बांध के चारों तरफ का नजारा बहुत ही रमणीय होता है। पहाडों में हरियाली की चादर बिछी होती है। सतपुड़ा डैम के पानी का उपयोग सतपुड़ा पावर प्लांट में किया जाता है।

ताप्ती नदी का उद्गम स्थल - Origin of tapti river | Tapti nadi ka udgam sthal

ताप्ती नदी का उद्गम बैतूल जिलें के मुलताई में हुआ है। ताप्ती मध्यप्रदेश की एक मुख्य नदी है। भारत में नदियों को मां के रूप में पूजा जाता है। ताप्ती नदी को भी पूजा जाता है। ताप्ती सूर्य भगवान की पु़त्री है और शनि देव एवं यमराज की बहन है। ताप्ती नदी का उद्गम एक कुंड से हुआ है। ताप्ती नदी का उद्गम स्थल पर बहुत सारे मंदिर बने हुए है। कुंड के आस पास बहुत सारे मंदिर बने हुए हैं। कुंड पर भी किया जाता है।  यहां पर आकर आपको बहुत अच्छा लगेगा। यह बैतूल का एक प्रसिध्द स्थल है। हर वर्ष ताप्ती नदी का जन्मोत्सव पर यहां पर मेलें का आयोजन होता है। पूरे मंदिर को सजाया जाता है। मेलें मे बहुत दूर दूर से लोग आते है। 

शिव मंदिर भोपाली - छोटा महादेव भोपाली | Shiv Temple Bhopali - Chhota Mahadev Bhopali | Chhota mahadev Betul

शिव मंदिर भोपाली बैतूल की एक रमणीय जगह है। यह शिव मंदिर सतपुडा की पहाड़ियों पर स्थित है। यहां पर आपको एक गुफा देखने के लिए मिलती है, जिसमें शिवलिंग स्थापित है। यह जगह बरसात में स्वर्ग जैसी हो जाती है। चारों तरफ हरियाली देखने मिलती है। आपको मंदिर तक पहुॅचने के लिए पैदल चलकर जाना पडता है। मंदिर तक पहुॅचने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है। रास्तें में आपको जलप्रपात भी देखने मिलता है। यह शिव मंदिर बैतूल जिलें से करीब 30 किलोमीटर दूर है। सारणी से यह शिव मंदिर करीब 20 किलोमीटर दूर होगा। 

श्री हनुमान मंदिर केरपानी - Sri Hanuman Temple Kerapani Betul

श्री हनुमान मंदिर बैतूल जिलें का एक धर्मिक स्थल है। यह मंदिर पूरे बैतूल जिलें में प्रसिध्द है। यहां मंदिर बैतूल जिलें से करीब 22 किलोमीटर दूर है। यहां मंदिर भैसदेही मुख्य सडक पर ही स्थित है। आप यहां पर अपनी गाडी या बस से असानी से आ सकते है। मंदिर में शनिवार के दिन बहुत लोग आते है। मंदिर में स्थित हनुमान प्रतिमा स्वयं भू है। हनुमान जयंती के अवसर पर यहां हजारों की संख्या में भक्त आत है और हनुमान जी की पूजा-अर्चना करते है। 

पारसडोह बांध - Parasdoh dam betul | Parasdoh bandh betul

पारसडोह बांध बैतूल जिलें में घूमने की एक अच्छी जगह है। यहां एक जलाशय है। इस बांध के पानी का उपयोग पीने के लिए एवं सिचांई के लिए किया जाता है। आप यहां पर पिकनिक मनाने आ सकते है। पारसडोह बांध ताप्ती नदी पर बना हुआ है। इस बांध पर 6 गेट है। बरिश में इस बांध का नजारा बहुत ही अच्छा होता है। बरिश में गेट से पानी छोडा जाता है, जिसका दृश्य बहुत ही सुंदर रहता है। पारसडोह बांध बैतूल की अठनेर तहसील से 14 किलोमीटर दूर है। 

पारसडोह जलप्रपात बैतूल - Parsadoh waterfalls Betul | parasdoh jalaprapat betul

पारसडोह जलप्रपात बैतूल जिलें का दर्शनीय स्थल है। यह जलप्रपात तवा नदी पर बना हुआ है। यहां जलप्रपात बहुत खूबसूरत है। आप यहां पर बरसात के समय घूमने के लिए आ सकते है, क्योंकि बरसात में ही इस झरनें में पानी रहता है। पारसडोह झरनें के पास बहुत सारे मंदिर है, जहां पर आप घूम सकते है। पारसडोह जलप्रपात बैतूल जिलें की अठनेर तहसील में स्थित है। पारसडोह जलप्रपात अठनेर तहसील से करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर है। 

चंडी माता मंदिर चिचोली - Chandi Mata Temple Chicholi Betul | chandi mandir chicholi betul

चंडी माता मंदिर बैतूल जिलें का एक धर्मिक स्थल है। यहां मंदिर बैतूल चिचोली के पास स्थित है। यह मंदिर पूरे बैतूल जिलें में प्रसिध्द मंदिर है। यहां प्राचीन काली मंदिर है। यह मंदिर मुख्य बैतूल शहर से 55 किलोमीटर दूर है। यहां मंदिर नेशनल हाईवे 49 से करीब 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां पर स्थापित काली जी की प्रतिमा अत्यंत सुंदर और मनोहारी है। इस मंदिर में साल भर भीड लगी रहती है। यहां पर आकर बहुत शांती मिलती है। यहां पर मां काली को मुर्गी और बकरी की बली चढाई जाती है। इस मंदिर में मांगी गई दुआ जरूर पूरी होती है। यहां पर लोग अपनी मुराद लेकर आते है।