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प्राचीन मां पार्वती गुफा मंदिर रायसेन - Ancient Maa Parvati Cave Temple Raisen

मां पार्वती की गुफा या पार्वती गुफा मंदिर रायसेन मध्य प्रदेश -  Maa Parvati ki Gufa or Parvati Gufa Mandir Raisen Madhya Pradesh मां पार्वती का प्राचीन गुफा मंदिर भोजपुर शहर का एक प्रमुख आकर्षण केंद्र है। यह मंदिर बेतवा नदी के किनारे बना हुआ है।  यह मंदिर प्राचीन गुफाओं में बना हुआ है। यहां पर प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ धार्मिक स्थलों का भी दर्शन करने के लिए मिलता है। यहां पर आकर अच्छा लगता है। मां पार्वती गुफा मंदिर भोपाल से करीब 32 किलोमीटर दूर भोजपुर शहर में स्थित है। यहां पर मां पार्वती जी की भव्य मूर्ति देखने के लिए मिलती है। इसके अलावा यहां पर गौरी पुत्र गणेश की भी प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। यह मंदिर प्राचीन है और इस गुफा मंदिर में चमगादड़ भी है। यहां पर आकर आपको पहाड़ियों का सौंदर्य देखने के लिए मिलता है।  हम लोग भोजपुर के भोजेश्वर मंदिर की तरफ जाते समय पर्वती गुफा मंदिर भी घूमने के लिए गए थे। पर्वती गुफा मंदिर भोपाल से भोजेश्वर मंदिर की तरफ जाने वाले रास्ते में पहले पड़ता है। इसलिए हम लोग पहले पार्वती गुफा मंदिर घूमने के लिए गए थे। जब इस रास्ते से हम लोग पार्वती गुफ

कंकाली देवी मंदिर रायसेन - Kankali Devi Temple Raisen

कंकाली माता मंदिर रायसेन जिला, मध्य प्रदेश - Kankali Devi Temple Raisen District, Madhya Pradesh कंकाली देवी मंदिर भोपाल शहर  के पास स्थित  एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यह मंदिर कंकाली देवी को समर्पित है। यह मंदिर अभी पूरी तरह से बना नहीं है। अभी यह मंदिर under-construction में है। मंदिर के आस पास बहुत सारी प्रसाद की दुकान रहती है। यह मंदिर बहुत प्राचीन है। लोग यहां पर दूर-दूर से मां कंकाली जी के दर्शन करने के लिए आते हैं। यह मंदिर भोपाल से करीब 20 किलोमीटर दूर है। यहां पर मां की बहुत ही भव्य प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है, कि मां के दर्शन करने से मन की इच्छाएं पूरी होती है। कंकाली देवी मंदिर के पास हनुमान जी का मंदिर, विश्वकर्मा जी का मंदिर, श्री राधे कृष्ण जी का मंदिर बना हुआ है। आप यहां पर भी घूमने के लिए जा सकते हैं और भगवान के दर्शन कर सकते हैं।  हम लोग भोपाल शहर के रामगढ़ धाम और आजनाल बांध को घूमने के बाद, कंकाली माता के मंदिर घूमने के लिए गए। कंकाली माता का मंदिर रामगढ़ धाम से करीब 5 किलोमीटर दूर होगा। कंकाली माता का मंदिर प्रसिद्ध है और आप जब

सांची का स्तूप रायसेन - Sanchi Stupa Raisen

सांची का बौद्ध स्तूप,  सांची, जिला रायसेन, मध्य प्रदेश -  Buddhist Stupa of Sanchi, Sanchi, District Raisen, Madhya Pradesh सांची का स्तूप एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। सांची का स्तूप एक विश्व धरोहर स्थल है। यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट में सांची स्तूप भी शामिल है। सांची स्तूप को देखने के लिए विदेशों से लोग आते हैं। सांची का स्तूप मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से करीब 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सांची स्तूप में पहुंचना बहुत ही आसान है। सांची का स्तूप रायसेन जिले में है। सांची के स्तूप बहुत प्राचीन है। यहां पर मुख्य तीन स्तूप देखने के लिए मिलते हैं। सांची परिसर में आपको प्राचीन बौद्ध मंदिर, मॉनेस्ट्री, गुप्तकालीन मंदिर और बहुत सारी प्राचीन वस्तुएं देखने के लिए मिलती हैं। यह स्तूप बहुत बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है। यह स्तूप ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। यहां पर आपको मोर भी देखने के लिए मिल जाएगा। सांची स्तूप परिसर में एक छोटा सा बाड़ा बनाया गया है, जिसमें खरगोश बदक एवं कबूतर देखने के लिए मिलते हैं। सांची स्तूप परिसर में आपको कैंटीन भी देखने के लिए मिलती है, जहां से आप कुछ भी खा

बौद्ध स्तूप सतधारा रायसेन - Buddhist Stupa Satdhara Raisen

बौद्ध स्तूप या स्मारक सतधारा,  रायसेन जिला, मध्य प्रदेश -  Buddhist Stupa or Monument Satdhara, Raisen District, Madhya Pradesh सतधारा स्तूप रायसेन जिले का एक प्रसिद्ध स्थल है। यहां पर आपको प्राचीन स्तूप देखने के लिए मिलते हैं। यहां पर प्राकृतिक दृश्य भी देखने के लिए मिलता है। यहां पर हलाली नदी का सुंदर दृश्य देखने के लिए मिलता है। यहां पर आकर बहुत अच्छा लगता है। यहां पर चारों तरफ पेड़ पौधे हैं और हरियाली है। यहां पर आपको बहुत बड़ा स्तूप देखने के लिए मिलता है। सतधारा स्तूप विदिशा भोपाल राजमार्ग में स्थित है। यहां पर आपको जंगल कैंप का भी मजा लेने के लिए मिलेगा। आप यहां पर जंगल के बीच में कैंप लगाकर रह सकते हैं। उसके अलग पैकेजेस रहते हैं। वह आपको ऑनलाइन जाकर चेक करने पड़ेंगे। मगर यहां पर मजा बहुत आता है और यहां पर बंदर भी थे। अगर आपके पास कुछ सामान रहता है, तो संभाल कर रखने की जरूरत रहती है। नहीं तो बंदर आपसे छीन लेगा।  इस जगह को सतधारा इसलिए कहते हैं, क्योंकि यहां पर हलाली नदी सात धाराओं में विभक्त होती है। इसलिए इस जगह सतधारा के नाम से जाना जाता है। हलाली नदी को 7 धारा में विभक्त द