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हाथी पार्क इलाहाबाद - Hathi park Allahabad | Elephant park allahabad

हाथी पार्क इलाहाबाद  या  महाकवि  सुमित्रानंदन पार्क इलाहाबाद - Hathi park Allahabad or Mahakavi Sumitranandan Park Allahabad हाथी पार्क को  महाकवि  सुमित्रानंदन पार्क के नाम से भी जाना जाता है और पार्क के बाहर ही आपको  महाकवि  सुमित्रानंदन पंत की मूर्ति देखने के लिए मिलती है, जो पत्थर की बनी हुई है। हाथी पार्क इलाहाबाद में स्थित एक प्रमुख उद्यान है। यहां पर मुख्य आकर्षण है। यहां पर स्थित हाथी की मूर्ति, जिसके अंदर से बच्चों के लिए फिसल पट्टी बनी हुई है। यह बच्चों का मुख्य आकर्षण है और इसलिए शायद इस पार्क को हाथी पार्क के नाम से जाना जाता है।  हाथी पार्क इलाहाबाद में चंद्रशेखर आजाद पार्क के गेट नंबर 3 के सामने ही पड़ता है। आप यहां पर चंद्रशेखर आजाद पार्क से पैदल ही घूमने के लिए जा सकते हैं। जैसे हम लोग गए थे।  पार्क में प्रवेश का आपका ₹10 का टिकट लगता है। ₹10 का टिकट हम लोगों ने भी लिया था और उसके बाद हम लोगों ने पार्क में प्रवेश किया। हाथी पार्क में प्रवेश करते ही हमें सबसे पहले पुस्तकालय देखने के लिए मिला। इस पुस्तकालय में जाकर आप तरह-तरह की पुस्तकें पढ़ सकते हैं। मगर हमने पुस्तके

Bhardwaj park Allahabad - भारद्वाज पार्क इलाहाबाद

  भारद्वाज गार्डन इलाहाबाद (प्रयागराज) -  Bhardwaj Garden Allahabad (Prayagraj) भारद्वाज पार्क इलाहाबाद (प्रयागराज) -  Bhardwaj Park Allahabad (Prayagraj) भारद्वाज गार्डन इलाहाबाद शहर में स्थित एक प्रमुख उद्यान है।  इस गार्डन में आपको ऋषि   भारद्वाज  की बहुत सारी पेंटिंग देखने के लिए मिलती है। यहां पर आपको एक झरना भी देखने के लिए मिलता है, जिसमें शंकर जी, माता पार्वती जी, और भी देवी देवता आपको इस झरने में देखने के लिए मिलते हैं। यह झरना आर्टिफिशियल तरीके से बनाया गया है। मगर बहुत खूबसूरत लगता है। आप यहां पर आकर घूम सकते हैं। आपको बहुत अच्छा लगेगा और मेन बात यह है, कि यह गार्डन महर्षि भारद्वाज आश्रम के बाजू में ही है और मुख्य सड़क में है। तो आप यहां पर बहुत ही आसानी से पहुंच सकते हैं और यहां पर आकर घूम सकते हैं।  हम लोग महर्षि भारद्वाज आश्रम से घूम कर वापस रोड में आए, तो रोड के थोड़ा ही आगे बढ़े, तो हमें भारद्वाज गार्डन देखने के लिए मिला। भारद्वाज गार्डन में एंट्री टिकट ₹10 था। हम लोगों ने ₹10 का टिकट लिया और हम लोग अंदर गए। अंदर हमको एक आर्टिफिशियल झरना देखने के लिए मिला। इस झरने के प

भारद्वाज आश्रम इलाहाबाद - Bharadwaj Ashram Allahabad

भारद्वाज आश्रम इलाहाबाद  Bharadwaj Ashram Allahabad भारद्वाज आश्रम  प्रयागराज शहर की एक धार्मिक स्थल है। यहां पर आपको मंदिर देखने के लिए मिलता है। यहां मुख्य मंदिर  भारद्वाज  मुनि का है। यहां पर और भी मंदिर बने हुए हैं। मंदिर परिसर बहुत बड़ा है। यहां पर आपको श्री भरत कुंड देखने के लिए मिलता है, जहां पर भगवान राम ने यज्ञ किया था। मंदिर परिसर में आपको सीता कुंड और पार्वती कुंड भी देखने के लिए मिलता है। मंदिर परिसर में आपको माता संतोषी का प्राचीन मंदिर भी देखने के लिए मिलता है। यहां पर  भारद्वाज  ऋषि के गुरु का भी मंदिर आपको देखने के लिए भी मिलता है। यहां पर एक प्राचीन  कुआं भी देख सकते हैं।  भारद्वाज  आश्रम के बारे में कहा जाता है, कि यहां पर श्री राम जी ने अपने वनवास काल के दौरान कुछ समय यहां पर बिताया था। जब श्री राम जी ने गंगा नदी पार किया था, तो उसके बाद भरद्वाज ऋषि ने उन्हें आश्रय दिया था और यहां पर वह कुछ समय तक रहे थे। यहां पर आपको श्री राम जी का मंदिर भी देखने के लिए मिलता है।  भारद्वाज ऋषि का परिचय महर्षि भारद्वाज आश्रम वैदिक काल में सबसे प्राचीन और पूज्यतम ऋषियों में से

इलाहाबाद संग्रहालय प्रयागराज - The Allahabad Museum, Prayagraj

Allahabad museum इलाहाबाद संग्रहालय  इलाहाबाद संग्रहालय चंद्रशेखर आजाद पार्क के अंदर स्थित एक  मुख्य जगह है। यहां पर आपको प्राचीन वस्तुओं का संग्रह देखने के लिए मिलता है। यहां पर मुख्य आकर्षण चंद्रशेखर आजाद जी की पिस्टल है, जिसके द्वारा उन्होंने अपने आप को गोली मारी थी और उनका यहां पर आपको फोटो भी देखने के लिए मिलता है। साथ ही साथ आप को उनके बारे में जानकारी भी मिलेगी। अगर आप हिस्ट्री में रुचि रखते हैं, तो आप यहां पर जाकर बहुत सारी चीजें देख सकते हैं, जो बहुत ही ज्ञानवर्धक होती हैं।  इलाहाबाद संग्रहालय के बारे में कुछ जानकारी, जो यहां पर लिखी गई थी। इलाहाबाद संग्रहालय पंडित जवाहरलाल नेहरू अध्यक्ष, इलाहाबाद मुंसिपल बोर्ड और पंडित बृज मोहन व्यास के प्रयास से 1923 से 1939 में एक नए संग्रहालय की स्थापना इलाहाबाद नगर में करने की कोशिश की गई, जो बोर्ड के कार्यकारी अधिकारी पंडित ब्रजमोहन व्यास के निर्देशन के अंतर्गत था और 1931 में एक संग्रहालय खोला गया था। वर्तमान में स्थित संग्रहालय भवन में शिलान्यास 14 दिसंबर 1947 को पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा किया गया था।  इस संग्रहालय में 16 गैलरी है, जि

Amar Shaheed Chandrashekhar Azad Park Allahabad (Prayagraj) or Company Bagh Allahabad (Prayagraj)

शहीद चंद्रशेखर आजाद पार्क इलाहाबाद (प्रयागराज ) - Shaheed Chandrashekhar Azad Park Allahabad (Prayagraj), |  अल्फ्रेड पार्क इलाहाबाद (प्रयागराज ) -  Alfred Park Allahabad (Prayagraj) ,   |  कंपनी बाग इलाहाबाद (प्रयागराज ) -   Company Bagh Allahabad (Prayagraj) अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद पार्क को अल्फ्रेड पार्क और कंपनी बाग के नाम से भी जाना जाता है। शहीद चंद्रशेखर आजाद पार्क प्रयागराज शहर का बहुत ही प्रसिद्ध पार्क है। यह पार्क बहुत बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है। इस पार्क में बहुत सारी जगह है, जहां पर आप घूम सकते हैं और उस जगह को देख सकते हैं।  शहीद चंद्रशेखर आजाद पार्क की विशेषता यह है, कि यहां पर अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद जी की जान गई थी। यहां पर अंग्रेजो के द्वारा उनको घेर लिया गया था और  चंद्रशेखर आजाद   जिंदा अंग्रेजों के हाथ में नहीं आना चाहते थे और उन्होंने अपने आपको यहां पर गोली मार दी थी। इसलिए यह पार्क बहुत फेमस है और यहां पर जो भी आते हैं। वह चंद्रशेखर आजाद जी की मूर्ति को और उस जगह को देखने के लिए जरूर जाते हैं। चंद्रशेखर आजाद पार्क में आपको बहुत सारी जगह मिलती है, जहां पर आ

प्रयागराज किला या इलाहाबाद किला - Prayagraj Fort or Allahabad Fort

प्रयागराज का किला -  Prayagraj ka kila Or इलाहाबाद का किला -  Allahabad ka kila प्रयागराज किला ( इलाहाबाद किला ) उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में स्थित एक प्राचीन किला है। इस किले का निर्माण सम्राट अकबर के द्वारा किया गया था। यह किला बहुत बड़े क्षेत्रफल में फैला हुआ है। मगर इस किले का आप कुछ भाग ही देख सकते हैं। इस किले के अंदर पातालपुरी मंदिर और अक्षय वट है, जो धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। यह दोनों जगह किले के अंदर है। इन दोनों जगह के दर्शन आप कर सकते हैं।  प्रयागराज किला  ( इलाहाबाद किला )  वैसे तो बहुत खूबसूरत है। यह पूरा किला पत्थर से निर्मित किया गया है। प्रयागराज का किला प्रयागराज शहर में गंगा और यमुना नदी के संगम के पास में स्थित है। यह यमुना नदी के किनारे पर बना हुआ है। प्रयागराज का किला अब आर्मी के कंट्रोल में है, इसलिए प्रयागराज किला ( इलाहाबाद किला )  का कुछ भाग ही लोगों के लिए खोला गया है और लोग इन जगहों पर घूम सकते हैं। किले के अंदर आपको पताल पुरी मंदिर और अक्षय वट के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। यह दोनों धार्मिक जगह हैं और यह जगह हमेशा ही खुली रहती हैं।

Akshay vat Prayagraj - अक्षय वट प्रयागराज

Akshay vat Allahabad अक्षय वट इलाहाबाद अक्षय वट इलाहाबाद ( प्रयागराज ) में स्थित एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यहां पर आपको एक प्राचीन वटवृक्ष देखने के लिए मिलता है। वट वृक्ष का मतलब होता है बरगद का पेड़ । इस वट वृक्ष को ही अक्षय वट के नाम से जाना जाता है। अक्षय वट का अर्थ होता है, कि कभी नष्ट नहीं होने वाला वटवृक्ष। यह वटवृक्ष आज भी हरा-भरा आपको देखने के लिए मिलेगा। यह वटवृक्ष सतयुग में भी उपस्थित था और सतयुग में इस वटवृक्ष के नीचे श्री राम जी ने विश्राम किया था। द्वापर युग में इस वट वृक्ष के नीचे श्री कृष्ण जी ने विश्राम किया था। यह  वटवृक्ष त्रेता युग में भी था। यह वटवृक्ष कलयुग में भी विद्यमान है और आप इस वटवृक्ष  प्रयागराज में जाकर देख सकते हैं।  अक्षय वट इलाहाबाद शहर में प्रयागराज ( इलाहाबाद   )  किले के अंदर स्थित है।  प्रयागराज ( इलाहाबाद ) किला गंगा नदी और यमुना नदी के संगम के पास ही में स्थित है। अक्षय वट के दर्शन करने के लिए किले के अंदर जाने के लिए रास्ता बना हुआ है। इस रास्ते में विकलांग लोग भी आराम से जा सकते हैं। छोटे से रास्ते से होते हुए आप मंदिर के परिसर में पहुंच

पातालपुरी मंदिर इलाहाबाद (प्रयागराज) - Patalpuri temple allahabad

पातालपुरी मंदिर प्रयागराज -  Patalpuri Temple Prayagraj पातालपुरी मंदिर इलाहाबाद -  Patalpuri Temple Allahabad पातालपुरी मंदिर इलाहाबाद (प्रयागराज) में प्रसिद्ध मंदिर है। पातालपुरी के नाम से ही आपको पता चल रहा होगा। जमीन के अंदर पाताल में मंदिर, जी हा यहां मंदिर जमीन के अंदर है। पातालपुरी का अर्थ होता है जमीन के अंदर और यह मंदिर जमीन के अंदर स्थित है। इसलिए इस मंदिर को पताल पुरी मंदिर कहा जाता है। इस मंदिर में जाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है।  पातालपुरी मंदिर इलाहाबाद किले के अंदर स्थित है। पातालपुरी मंदिर गंगा और यमुना नदी के संगम के पास ही में स्थित है। आप जब भी संगम घूमने के लिए आते हैं, तो इस मंदिर में दर्शन करने के लिए जरूर आ सकते हैं। पातालपुरी मंदिर तक जाने के लिए इलाहाबाद किले से रास्ता बनाया गया है। बाकी का पूरा किला पुलिस के कंट्रोल में है। बाकी पूरे किले को आप देख नहीं सकते हैं। मगर आप इस मंदिर को जरूर देख सकते हैं। किले की बाउंड्री वॉल के बाजू से रास्ता बनाया गया है। पातालपुरी मंदिर तक पहुंचने का। आप मंदिर के परिसर में पहुंचेंगे, तो आपको एक विशाल वृक्ष देखने के लिए मि